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Erotica जवानी जानेमन (Completed)

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SKYESH

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दीपक की रौशनी, पटाखों की आवाज

सूरज की किरणे, खुशियों की बोछार

चन्दन की खुशबु, अपनों का प्यार

मुबारक हो आपको दिवाली का त्योहार !
 
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Game888

Hum hai rahi pyar ke
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दो तीन दिन ऐसे ही निकल गए, चन्द्रमा का यूँ 2-३ दिन के लिए गायब हो जाना कोई नयी बात नहीं थी, पहले भी वो कई बार ऐसा कर चुकी थी, वैसे भी उस दिन की घटना के बाद से मुझे पक्का यक़ीन हो चला था की अब बात बन चुकी है बस अब सामने से आई लव यू बोलना बचा है, 2-३ दिन बीतने के बाद थोड़ी चिंता हुआ, माल अपना है ये यक़ीन तो है लेकिन दुनिया बड़ी मादरचोद है कहीं कोई मेरे माल पर हाथ ना साफ़ करले, ऐसे विचार आने पर मन थोड़ा अशांत हुआ फिर एक दो दिन में ये अशांति चिंता में बदल गयी, अब लगभग एक सप्ताह होने वाला था लेकिन चन्द्रमा का कुछ पता नहीं, ना कोई कॉल ना कोई मैसेज, आखिरकार शनिवार के दिन मैंने हिम्मत करके एक मैसेज कर दिया चन्द्रमा के व्हाट्सप्प पर " हेलो कहा गायब" करके। लेकिन मैसेज डिलीवर नहीं हुआ केवल एक टिक बानी थी व्हाट्सप्प पर, सुबह से शाम हो गयी लेकिन वही सिंगल टिक, पुरे दिन में ना जाने कितनी बार चेक किया लेकिन हर बार सिंगल टिक देख के मन उदास होने लगा।

रात में जब खाना खा के सोने के लिए लेटा और फ़ोन चेक किया तो देखा मैसेज डिलीवर हो गया था, ब्लू टिक नहीं बना था रीड वाला लेकिन डबल टिक मतलब मैसेज डिलीवर हो गया। ये देख के इतनी ख़ुशी हुई की मानो व्हाट्सप्प का आविष्कार मैंने ही किया हो केवल चन्द्रमा का मैसेज करने के लिए और पहला मैसेज उसके मोबाइल पर जाने के ख़ुशी में नाच उठा हू। रात और रात के बाद संडे का आधा दिन ऐसे निकला, ना मैसेज रीड हुआ ना कोई जवाब आया ना कोई खबर। संडे था तो घर पर ही पड़ा रहा, एक दो कॉल आयी लेकिन मैंने नोटिस नहीं किया वैसे भी मैं संडे को कॉल बहुत कम पिक करता हू। शाम के टाइम मैं घर के लिए कुछ सामान लेने मार्किट निकला रास्ते में फ़ोन बजने लगा लेकिन मैंने पिक नहीं किआ लेकिन फिर बार बार बजने लगा तो मैंने झल्ला के फ़ोन उठा लिया और डांटते हुए
मैं : डोंट डिस्टर्ब मी आज ऑफ है
कॉलर : आप कौन बोल रहे हो ?
मैं : (और ज़यादा गुस्से से), बोला ना कल ऑफिस टाइम में कॉल करना, आज ऑफ डे है
कॉलर : मुझे तुमसे बात करनी है अभी
मैं : भाई बोला ना आज ऑफ है मैं घर पर हूँ काम की बात ऑफिस में जा कर ही हो सकती है
कॉलर : ये ऑफिस की बात नहीं है पर्सनल है मुझे अभी करनी है (उसकी आवाज़ में अजीब सा गंवारपन था)
मैं : अच्छा ठीक है बोलो कौनसी बात करनी है पर्सनल वाली
कॉलर : आप नाम बताओ पहले अपना ?
मैं : तुमने किसको मिलाया है तुम्हे नहीं पता क्या ?
कॉलर : आप समीर बोल रहे हो ?
मैं : हाँ मैं समीर ही हूँ , तुम कौन हो ?
कॉलर : मैं दीपक बोल रहा हूँ
मैं : कौन दीपक ?
दीपक : दीपक, फरीदाबाद से
मैं : भाई जो भी हो मैं किसी दीपक को नहीं जानता, (फरीदाबाद के नाम से थोड़ा चौंका, ये सरला दीपक कौन है )
दीपक : चन्द्रमा को तो जानते हो आप ?
मैं : (अब एक दम से बत्ती जली, लगता है ये चन्द्रमा का एक्स bf है उसका नाम भी दीपक ही था ) हाँ जानता हूँ चन्द्रमा को
दीपक : कैसे जानते हो उसको ?
मैं : ये मैं तुमको क्यों बताओ, और तुम हो कौन ये पूछे वाले की मैं किसको जानता हूँ किसको नहीं
दीपक : क्योँकि चन्द्रमा मेरी होने वाली पत्नी है
मैं : (ये सुनके मेरा मूड सड़ गया) कंग्रॅजुलेशन तुम दोनों को, फिर कब है शादी ?
दीपक : शादी वादी तो तब होगी ना जब तुम उसका पीछा छोड़ोगे
मैं : (बहनचोद, ये तो डायरेक्ट मेरे पर जिम्मेदारी दाल रहा है) मैंने कौन सा उसे घर में बंद करके रखा है या रस्सी से बंध रखा है, जिस से उसका मन उससे सँग करेगी शादी,
दीपक : मैं उस से प्यार करता हूँ वो भी मेरे से प्यार करती है पर जब से तुमसे मिली है हर दिन लड़ती है ढंग से बात भी करती और फ़ोन करो तो फ़ोन काट देती है।
मैं : भाई तेरे करम ही ऐसे होंगे जिसके कारण ऐसा कर रही है, इसमें मेरी क्या गलती है, मैंने थोड़ी ना बोला है की तेरे से बात करे या मत करे, ये तुम दोनों के बीच की बात है तुम देखो
दीपक : मैंने सब चेक कर लिया, वो आजकल केवल तुमसे बात करती है और मैसेज करती है और किसी से नहीं करती, तुमने ही उसे अपने चक्कर में फास रखा है
मैं : (ये सुन के गुस्सा आगया) वो क्या पंछी है की मैंने उसे पिंजड़े में बंद कर लिया, उसकी मर्ज़ी है चाहे तेरे पास रहे या और किसी के संग और हमारे बीच ऐसी कोई बात नहीं है, सिंपल दोस्त है बस।
दीपक : झूट, दोस्ती में कोई इतनी बात नहीं करता जितनी वो तुमसे करती है,

फिर एक दम से टोन चेंज करते हुए बोला

दीपक : बहनचोद तूने चन्द्रमा चोद दी है क्या ?

मैं : एक मिनट रुक (फ़ोन में रिकॉर्डिंग स्टार्ट करने के लिए ), हाँ अब बोलक्या बोल रहा था?
दीपक : तू ये बता की तूने चन्द्रमा चोद दी है क्या ?
मैं : क्योँ तुझे क्या लगता है वो ऐसे चैरेक्टर की लड़की है क्या ?
दीपक : अरे उसे तो मैंरोक के रखता हूँ, नहीं तो साली कब का चुद जाती, तुझे पता नहीं हमारे यहाँ का माहौल, मैं उसे स्लीवलेस्स पहने नहीं देता, ना छोटे कपडे, ना लड़को से बात करने देता हूँ, नहीं तो आजकल के लड़के मौका देख के कब चोद दे पता नहीं लगता
मैं : फिर तो तू उसे सांस भी गिन के दिलवाता होगा ?
दीपक : मतलब?
मैं : बहनचोद, तू आदमी है या चूतिया, किसी अनजान आदमी से जिससे आज तक तू मिला नहीं, तेरे को पता नहीं की मेरा उसका क्या रिलेशन है, जिसे तू अभी ५ मिनट पहले अपनी होने वाली पत्नी बता रहा था अब उसकी चुदाई और चूत मारने की बात बता रहा है। शर्म कर ले थोड़ी और रही बात मेरी और चन्द्रमा की तो मुझे नहीं पता की उसने क्या बोला मेरे बारे में लेकिन हम केवल दोस्त है और जो कुछ तू सोच रहा है वो तेरी गन्दी सोंच है केवल,

और रही बात कपड़ो की, तो अगर चन्द्रमा मेरी गर्लफ्रैंड होती तो मैं उसे पूरी आज़ादी देता जो मन चाहे पहने, जो मन चाहे खाये पिए और दोस्तों के साथ घूमे, कपडे से कुछ नहीं होता जिसको करना होगा सात ताले में बंद करके रखोगे ना तब भी कुछ ना कुछ तरीका निकल लेगी और जिसको नहीं करना होगा वो सब सामने हो के भी नहीं करेगी समझा।

दीपक : अच्छा फिर तुम उसको पैसे क्यों देते हो, सब चूत के चक्कर में ही पैसे खरच करते है ?
मैं : मैंने कौन से पैसे दिए उसे ?
दीपक : वो तीन हज़ार जो तुमसे लेके वो मेरे पीछे पीछे पटना आयी थी ?
मैं : उन पैसो का क्या ? वो उसने उधार लिए और चूका दिए ? क्यों उधार केवल उनको ही देते है जिसकी चूत मारनी हो ? फिर तो तू जिनसे उधार लेता होगा उनको बदले में अपनी गांड देता होगा।
दीपक : (भड़कते हुए) कोई पैसे नहीं लौटाए इस रंडी ने

मैं : पहली बात मेरे सामने उसको गाली मत दो, दूसरी बात मैं ये कॉल रिकॉर्ड कर रहा हूँ, इस कॉल को काट के मैं इसकी रिकॉर्डिंग चन्द्रमा का भेजूंगा, तीसरी बात आज के बाद मुझे फिर कभी कॉल मत करना मुझे चूतियों से बात करना पसंद नहीं है, चौथी और लास्ट बात , तुझे शायद पता नहीं है लेकिन मैं बता दू की मैं तेरे जैसा 20-२५ साल का लौंडा नहीं हूँ , ३५ साल का खेला खाया मर्द हूँ , जो तू दो चार चूतिये दोस्तों पर अकड़ रहा होगा इनसे दुगने है मेरे यार दोस्त, रहनेवाला बागपत का हूँ, अर जो अपनी पे आगया तो वही फरीदाबाद में गाड़ मार लूंगा और कोई बचाने वाला भी नहीं मिलेगा । इतना कहकर बिना उसकी सुने मैंने कॉल कट कर दी।

फ़ोन कटा तो पता लगा की पीछे से चन्द्रमा की 2-३ कॉल मिस्ड कॉल में पड़ी थी, लड़ाई के जोश में पता नहीं लगा की कॉल वाइटिंग में है, मैंने जल्दी से कॉल लगाया

मैं : हाँ बोलो
चन्द्रमा : आपके पास किसी का कॉल आया था क्या ?
मैं : क्यों क्या हुआ ?
चन्द्रमा : लम्बी बात है बाद में बताउंगी, बस पता नहीं दीपक को कैसे मेरा आप का पता लग गया है और वो ड्रामे कर रहा है, आपका कल वाला मैसेज देख लिया उसने और बस तब लड़े जा रहा है, अगर उसका कॉल आये तो बोल देना की मेरा आपका कुछ नहीं है जस्ट फ्रेंड है हम
मैं : उसका कॉल आ चुका है, मेरी उस से लड़ाई हो गयी है, और मैंने कुछ पार्ट रिकॉर्ड कर ली है तुमको भेजने के लिए,
चन्द्रमा : प्लीज मुझे भेज दो, अब वो फिर लड़ेगा तो मुझे पता रहेगा क्या बोला है उसने आपको
मैं : हाँ वो भेज दूंगा, लेकिन तुम ये बताओ उसने तुमको मारा पीटा तो नहीं,
चन्द्रमा : ना अब उसकीतनी भी मजाल नहीं, बस धमकी देता रहता है, आप वो रिकॉर्डिंग भेजो
मैं : ठीक है भेज रहा हूँ, अब फिर कब बात होगी ?
चन्द्रमा : आप कोई कॉल मैसेज मत करना, मैं खुद करुँगी , अभी ये पता नहीं क्या क्या ड्रामे करेगा पहले उसे झेल लू।

मैंने उसको रिकॉर्डिंग भेज दी, मैंने जान बुझ के एक दो बात दीपक से ऐसी कही थी जिस से वो झल्ला के चन्द्रमा के लिए बुरा भला कहे, मैं घर आगया, अब मुझे इन्तिज़ार था अगले कदम का, देखते है क्या होता है और कौन उठता है अगला कदम।
Zabardast updates maaza agaya padkar bro
 

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Hum hai rahi pyar ke
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होटल की लॉबी में पहुंच कर मैंने चद्र्मा को रिसेप्शन से चाभी लेकर दी और और उसको रूम में जाने के लिए बोला, मैं चाहता था की जब चन्द्रमा रूम में पहुचे तब अकेली हो ताकि जो हरकत मैं होटल से करके निकला था वो मेरे सामने ना हो, अब मैं कोई एक्टर तो था नही की मेरे सामने अगर वो मुझसे कुछ पूछती तो मैं किसी मंझे हुए अदाकार की तरह एक्टिंग करके सच छुपा जाता,

मैंने बहाना बनाया की मिर्ची वडा खाने से एसिडिटी फील हो रही है और मैं ENO लेने जा रहा हूँ, उसने भी एक एक्स्ट्रा लाने को कहा और रूम की और बढ़ गयी।

मैं पास की ही केमिस्ट की शॉप से कुछ पैकेट्स ENO के और एक पैकेट डुरेक्स कंडोम (१० पीस वाला ) का खरीद लिया और होटल रूम में जा पहुंचा, रूम बंद नहीं था, हल्का सा भीड़ा हुआ था, मेरे हल्का सा धक्का देने से खुल गया, चन्द्रमा बाथरूम में मेरी और पीठ किये कपडे निचोड़ रही थी, मैं अनजान बनते हुए
मैं : अरे अरे ये क्या कर रही ही हो ?
चद्र्मा : अरे वो कपडे पानी में गिर कर गीले हो गए तो उनको ही धो दिया
मैं : (झट से रूम का दरवाज़ा बंद करते हुए ) पागल लड़की तुमको पता नहीं है क्या की होटल में कपडे धोना मना होता है, अभी होटल के किसी स्टाफ ने देख लिया तो बेकार में बवाल काटेंगे।
चन्द्रमा : अरे क्यों भला, हमने पैसे दिए है रूम के जो मन चाहे करे।
मैं : हाँ मन चाहा भी करेंगे लेकिन होटल का ये नियम है, क्यूंकि मोस्ट होटल्स की विंडोज ओपन नहीं होती और ऐरकण्डीशन हमेशा एक चलता है जिसके कारन कपडे नहीं सूखते और रूम में सीलन जैसी रहती है और साथ ही रूम में अजीब सी स्मेल बस जाती है इसीलिए होटल में कपडे धोना मना होता है
चन्द्रमा : उन्हह अब तो धो भी लिए मैंने
मैं : ठीक है लेकिन अब इसे ऐसी जगह रखना जहा थोड़ी गर्मी हो वार्ना नहीं सूखेंगे साड़ी रात भी, और ये कोण से कपडे गीले हुए है ?
चन्द्रमा : कोई खास नहीं अब आप जाओ अंदर बैठो मैं दो मिनट में आती हूँ
मैं : जो हुकुम बेगम साहिबा
चन्द्रमा : झेंपती हुई, अब जाओ भी ना

मैं रूम में अंदर आगया और ENO साइड टेबल पर रख कर कंडोम के पैकेट को अपने बैग में ठूंस दिया और बिस्तर पर आराम से तक लगा के पसर गया, तब तक चन्द्रमा ने अपने कपडे निचोड़ लिए थे और साथ में अपनी दिन की उतारी हुई टीशर्ट भी धो ली थी, मैंने नोटिस किया की जब वो अपने गीले कपडे रूम मे लेकर आयी तब उसने अपनी ब्रा टीशर्ट के अंदर लपेटी हुई तो ताकि मेरी नज़र ना पड़े, अब उस बेचारी को क्या पता था की उसकी ब्रा मैंने जान बूझ कर पानी में गिरायी थी,

चन्द्रमा ने गिलास विंडो के पास चेयर पर अपने कपडे दाल दिए थे और ब्रा को छुपाने के लिए उसने अपनी गीली टीशर्ट से ढक दिया था, मैं ये सब बिस्तर में बैठा बैठा कनखियों से देख रहा था, चन्द्रमा भी कभी कभी आंख बचा कर मेरी और देख लेती की कही मैं उसकी हरकतों को तो नहीं देख रहा है लेकिन मैं ऐसे बना बैठा था की मानो मैं टीवी में खोया हुआ हूँ, थोड़ी देर में चन्द्रमा जब फ्री हो के मेरे सामने आ खड़ी हुई तो मैंने बिना टीवी से नज़रे हटाए आम से लहजे में पूछ लिया "
मैं : तुमने अपने कपडे तो धो दिए है लेकिन देख लेना अगर नहीं सूखे तो कल क्या पहनो गई ? क्या तुम एक्स्ट्रा कपडे लायी हो ? (ये सवाल जान बूझ कर पूछा था ताकि अगर चन्द्रमा के दिमाग में बात क्लियर ना हुई हो तोह अब हो जाए)
चन्द्रमा : हाँ देखती हूँ नाईट के लिए एक टॉप है वो डाल लुंगी और दिन वाली लेगिंग्स
मैं : हूण ठीक है (मन खुश होते हुए )
चन्द्रमा : आपको तो बाथरूम नहीं जाना ?
मैं : मैं हाँ जाऊंगा नहाने
चन्द्रमा : फिर दो मिनट रुक जाओ मैं बस कपडे चेंज कर लू फिर आप नहा लेना
मैं : ओके कर लो

चन्द्रमा जल्दी से बाथरूम घुस गयी और अपने कहे अनुसार २ मिनट में कपडे चेंज कर आयी तब तक मैंने ऐरकण्डीशनर के कण्ट्रोल के कीपैड से रूम टेम्प्रेचर लौ कर दिया था, चन्द्रमा ने एक हलके पिंक कलर का टॉप दाल लिया था और जो ब्लैक लेग्गिंग्स वो ट्रैन में पहन के आयी थी वो पहना हुआ था, उसने कपडे चेंज करने बाद हाथ मुंह धोया था फेस वाश से जो साफ़ और खिला खिला लग रहा था, कुछ पानी उसकी टीशर्ट के गले के पास भी लग गया था पर मेरा धयान आज ना उसके सुन्दर चेहरे पर था और ना टाइट लेगिंग्स में उसके उभरे हुए गजब के चूतड़ पर, मेरा पूरा धयान उसकी छाती की उभरी हुई गोलाईंयों पर था और जो चन्द्रमा चलती हुई मेरे सामने से गुज़री तो मैं मन ही मन वाह कर उठा, उसके चलने से जो टीशर्ट ने उसके उभारों पर रगड़ खाया तो उसकी मखमली चूचियों के कड़क निप्पल्स ने झट से सर उठा कर अपनी हाज़िरी लगा डाली, वाह क्या चूचियां और क्या निप्पल्स थी, ये सीन इस बात की गवाही दे रहा था की मेरा प्लान कामयाब रहा। जी हाँ बाथरूम में पानी इकठ्ठा करने और उसमे चन्द्रमा की ब्रा गिराने का सिर्फ एक ही मक़सद था की आज रात जब चन्द्रमा मेरे साथ एक ही बिस्तर में लेटे तो उसने ब्रा ना पहनी हो, और वही हुआ, चन्द्रमा के पास २ ही ब्रा और पेंटी थी जिसमे से एक गीली हो गयी थी अब अगर वो रात में दूसरी ब्रा पहनती तो फिर दिन में भी वही ब्रा उसको पहननी पड़ती इसीलिए उसने एक ब्रा धो दी और दूसरी ब्रा संभल के लिए रख दी कल के लिए।

मैं भी थोड़ी देर में उठा और नहाने चला गया, मैंने दिन में ही नहाया था तो अभी कोई खास रीज़न नहीं था नहाने का लेकिन मैं चाहता था की मैं भी नाहा के फ्रेश रहूँ ताकि अगर सोते हुए मैं चन्द्रमा को अपनी बाँहों में भरूँ तो उसको मेरे शरीर से अच्छी स्मेल आये।
बाथरूम में चन्द्रमा के कोई कपडे नहीं थे ना कोई ब्रा या पेंटी शायद उसने छुपाने के लिए बैग में डाल दी थी, खैर मैं जल्दी से नाहा धो कर रूम में आया, मैंने अपना एक नाईट लोअर डाल लिया था और अंडरवियर नहीं पहना था, ऊपर बस बनियान। वैसे तो होटल की तरफ से २ धुले धुलाये बाथरोब मिले थे लेकिन ना मैंने उनको अपने लिए उसे किया और न चन्द्र्मा को बाथरोब के बारे में बताया ।

मैं रूम में आया तो देखा चन्द्रमा अब बीएड में कम्बल में घुसी हुई थी शायद उसे ठण्ड लग रही थी। लगती भी क्यों नहीं मैंने रूम का टेम्प्रेचर १७ डिग्री जो किया हुआ था, मैं भी झट से बिस्तर में घुस गया और चन्द्रमा से थोड़ा हैट के लेट कर टीवी देखने लगा, चन्द्रमा रियलिटी शो देख रही थी जो मुझे बिलकुल पसंद नहीं था तो मैंने उसके हाथ से रिमोट ले कर चैनल्स बदलने लगा, थोड़ी देर हम ऐसे टीवी देखते रहे लेकिन बात आगे नहीं बढ़ रही थी शायद दोनों में एक झिझक थी, मैंने खाने का पूछा तो चन्द्रमा ने मना कर दिया,

मैं : अच्छा ये तो बताओ तुमको पसंद क्या क्या है ? अब जब हम यहाँ है तो मैं तुमको तुम्हारी पसंद की चीज़े खिला दूंगा
चन्द्रमा : अरे कुछ खास नहीं मैं सब खा लेती हूँ
मैं : मतलब नॉन वेज भी
चन्द्रमा : हाँ थोड़े दिन पहले तक खा लेती थी अब नहीं खाती
मैं : क्यों ऐसा क्या हुआ ?
चन्द्रमा : वो मम्मी को पसंद नहीं है, पहले मैं और पापा खा लेते थे लेकिन अब मैंने छोड़ दिया
मैं : ओह्ह तो तुम्हारे पापा खाते है नॉन वेज
चन्द्रमा : हाँ पंजाबी है तो सब खाते है वो
मैं : एक सेकंड तुम्हारे पापा पंजाबी है लेकिन तुम्हारी माँ की भाषा तो बिहार के जैसी है
चन्द्रमा : हाँ मेरी मम्मी बिहार की है
मैं : ओह्ह वाओ लेकिन पंजाब और बिहार का मिलन कैसे हुआ, दोनों बिलकुल अलग अलग है, क्या लव मर्रिज है उनकी
चन्द्रमा : ओह्ह छोडो भी, बाद में बताऊंगा फिर कभी (ये उसका बात टालने का तरीका था )
मैं : हम्म ठीक है फिर और कुछ बाते करते है (इतना कह कर मैंने अपने हाथ बढ़ा कर उसके कंधे को पकड़ा और उसे अपनी और खींचा, वो भी बिना किसी झिझक के मेरे और करीब आगयी, अब चन्द्रमा का सर मरे बाज़ू पर रखा था और मेरा हाथ सर के नीचे से निकल कर उसकी अधखुली बाज़ू का सहलाने लगा जैसे मैंने ट्रैन यात्रा के दौरान उसके हाथ को सहला रहा था, उसकी ओर से कोई विरोध ना देखके मैं बेधड़क होकर उसकी बाज़ू को सहलाता रहा और वो बातों में खोयी मुझे यहाँ वहा की कहानियां सुनाती रही, काफी टाइम ऐसे ही चलता रहा फिर चन्द्रमा उबासी लेने लगी और अब मुझे भी हलकी नींद आरही थी क्यूंकि मैं ५ बजे सुबह का उठा था और ट्रैन में भी सोया नहीं था।
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काकी के जाते ही मामी ने रहत की सांस ली, बहुत खतरनाक बुढ़िया है ये, इस से बच कर रहना, ये बुढ़िया इस गांव का पूरा इतिहास जानती है, अगर इस गांव में पत्ता भी हिलता है तो इस बुढ़िया को पता चल जाता है, तुम्हारे आने का भी भनक इस बुढ़िया को लग गयी होगी तभी आयी है यहाँ, वर्ण ये सुधीर के यहाँ से इतनी जल्दी नहीं आती , छत्ती नहला के आती ये वहा से।

मैं : लेकिन ये है कौन ?
मामी : हमारी ही रिश्तेदार है, इसके पति सरकारी नौकरी में थे, एक ही बेटा था, शहर में रख कर खूब पढ़ाया लिखाया, लेकिन बहार रहने के कारण परिवार से कभी आत्ताच नहीं हुआ, काकी अपने पति से लड़ती थी की बेटे को घर में रख कर पढ़ाओ लेकिन काका नहीं माने और उसका नतीजा ये हुआ की एक दिन वो विदेश चला गया बिना बताये, अब वही सपरिवार रहता है, बस एक बार आया था काका के मरने के बाद उसके बाद फिर नहीं आया वापिस। अब काकी काका के पेंशन पर जी रही है। जब अकेली थी तभी लोगो के मरने जीने में जाने लगी, गांव की आधी महिलाये जो गरीब है उनके बच्चों की डिलीवरी काकी के हाथो ही हुई है, आज भी गांव में कोई भी काम होता है उसमे काकी की उपस्तिथि ज़रूर होती है, आज वो सवेरे से यही होती लेकिन सुधीर के यहाँ कल बच्चा हुआ है तो काकी वही वयस्थ थी इसलिए अब आयी है।

जैसे जैसे मामी मुझे काकी के बारे में बता रही थी वैसे वैसे मेरा दिमाग चल रहा था, मुझे माँ की शादी के बारे में काकी से अच्छा कौन बता सकता था, मामा और मामी शायद बताते हुए झिझकते लेकिन ये बुढ़िया तो मुंहफट मालूम होती है, मुझे सही जानकारी इसी बुढ़िया से मिल सकती थी। मामी के मना करने के बावजूद मैंने ठान लिया था की जैसे ही मौका लगेगा मैं इस बुढ़िया से ज़रूर मिलूंगी।

अगले दो दिन परिवार में ही व्यस्त रही, तेरहवी हो चुकी थी तो मामा भी अपनी दूकान पर हो आये और मेरे और बच्चों के लिए खाने पिने की बहुत सी मिठयां और चॉकलेट लाये, मामा मुझे बिलकुल बच्चो के जैसे ट्रीट कर रहे थे और मुझे भी अच्छा लग लग रहा था अपने पिता सामान मामा के साथ समय बिता कर। यहाँ आकर मैं सब भूल भाल गयी थी, यहाँ ना पापा थे, न वो नशेड़ी रमेश था और नहीं वो गुंडा दीपक जीवन शायद ही इतना अच्छा रहा हो मेरे लिए, मैं खूब खुश थी, एक दो रिश्तेदार से भी मिली, लेकिन मामा ने ज़्यदा इधर उधर जाने नहीं दिया।

इतवार का दिन था मामा आज जल्दी चले गए थे दूकान पर क्यंकि संडे को दूकान पर भीड़ ज़्यदा रहती थी, बाकि दिन लड़के संभल लेते थे लेकिन संडे के कारण मामा को जाना पड़ा, वैसे भी दिवाली आने वाली थी तो दूकान पर भीड बहुत रहने वाली थी।
उस दिन सब देर से सो कर उठे, नास्ता करके मैं तैयार हुई की तभी मामा के यहाँ काम करने वाली लड़की राधा आगयी। राधा मेरे से 3-४ साल छोटी रही होगी लेकिन शरीर से अभी से जवान दिखने लगी थी, उसका शरीर मुझसे भी अधिक भरा हुआ था लेकिन बात बिलकुल बच्चों वाली करती थी। राधा मामी के काम हाथ बताती थी, उसकी माँ दिन में आकर बर्तन मांज जाती थी। आज कुछ ज़्यदा काम था नहीं क्यूंकि मामा ने बोला था की शाम में वो लिट्टी चोखा ले कर आएंगे। वो मेरे लिए ही लाने वाले थे क्यूंकि मैंने आज तक लिट्टी चोखा खाया नहीं था,

राधा थोड़ी ही देर में काम से फ्री हो गयी और बच्चे टीवी देखने लगे, मामी भी मोबाइल पर वीडियो कॉल पर अपनी घरवालों से बात करने में बिजी थी। मैंने राधा को पकड़ा " राधा मुझे गांव आये इतने दिन हो गए लेकिन तुमने अब तक मुझे गांव नहीं दिखाया ?"
राधा : का बात करती है मालकिन, आप बोलिये अभी दिखा दूंगी
मैं : तो चलो आज दिखा दो मुझे अपना गांव
राधा : ठीक है, अभी चलिए
मैं मामी के रूम के पास खड़ी होकर बोली " मामी मैं राधा के साथ घूमने जा रही हूँ, थोड़ी देर में आती हूँ घूम के" मामी शायद काल में ज़्यदा भी बिजी थी उन्होंने बस गर्दन हाँ में हिला दी तो मैं झट से राधा का हाथ पकड़ के घर से निकल पड़ी
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दीपक की बहन काजल अब मुझसे खुलने लगी थी, एक दिन उसने मुझे अपने बॉयफ्रैंड रंजीत से भी मिलवा दिया था, देखने में कुछ खास नहीं था, बस आजकल के लड़को के जैसे टैटू और टिक टोक टाइप वाला लड़का था, माँ बाप दोनों कमाते थे तो पैसे भी थे, बस बाइक ले कर यहाँ वह घूमता रहता था और इंस्टाग्राम पर रील डालता रहता था, उसके अच्छे खासे फोल्लोवेर्स भी थे सोशल मीडिया पर और शायद इनमे से कोई बात काजल को पसंद आगयी थी जो पहले दोस्ती हुई उन दोनों में और अब दोनों प्रेमी प्रेमिका थे , मुझे अंदाज़ा लगा गया था की रंजीत बस काजल के साथ खेल रहा है लेकिन मैं उसकी पर्सनल लाइफ में ज़ायदा टांग नहीं अड़ाना चाहती थी, लेकिन फिर भी मैंने उसको हल्का सा काजल के सामने समझा दिया था की अभी दोनों बच्चे हो और कोई ऐसी वैसी हरकत ना करे नहीं तो फिर मैं दीपक को सब बता दूंगी फिर आगे का अंजाम तुम दोनों को भुगतना पड़ेगा। मैं जानती की ये अभी तो हाँ बोल रहे है लेकिन मौका मिलते ही ये दोनों सेक्स करके ही मानेंगे, खैर अब ये उनकी ज़िन्दगी थी और आगे उनकी मर्ज़ी।

दीपक का धयान आजकल मुझ पर काम था लेकिन फिर आपका कॉल आगया, मुझे अच्छा लगा की पहली बार अपने खुद से फ़ोन किया था, इस से पहले जब भी बात हुई थी तो कॉल मैंने ही की थी, आपने अपने दोस्त का इशू बताया तो मैंने दीपक को बोल दिया, वो खुश हो गया क्यूंकि उसको ऐसे ही क्लाइंट्स चाहिए होते थे, उसने आपके दोस्त से रिकॉर्ड ठीक करने के नाम पर अच्छे खासे रूपये लिए थे, जिस दिन काम हो गया उस दिन वो बहुत खुश था मुझे एक अच्छे रेस्टुरेंट में ले कर गया लंच के लिए लेकिन जैसे ही हमने आर्डर किया उसका फ़ोन बार बार बजने लगा, पहले तो उसने साइलेंट किया लेकिन जब फ़ोन बार बार बज रहा तो वो फ़ोन लेकर रेस्टुरेंट के बहार चला गया और वह किसी से बात करने लगा, मैं समझ गयी की फ़ोन ज़रूर विभा का होगा नहीं तो मेरे सामने ही बात करता, थोड़ी देर में वो वापस आया इतने में हमारा आर्डर आगया, उसने जल्दी जल्दी एक दो निवाला खा कर उठ गया ये बोल कर की कोई बहुत ज़रूरी काम है और उसे अभी जाना होगा, मैंने कुछ नहीं बोलै और आराम से अपना खाना ख़तम करके घूमती फिरती घर आगयी।

रात में दीपक का कोई कॉल नहीं आया तो मैंने काजल को कॉल किया, काजल से बात हो गयी, मैंने उससे दीपक का पूछा तो उसने बताया की भाई ऊपर अपने रूम में है, मैंने काजल से पूछा की आखिर चल क्या रहा है और फिर उसे दिन वाली घटना बताई, काजल ने मद्धिम आवाज़ में बताया की विभा और भाई को घूमते हुए विभा के किसी जानकार ने देख लिया था और विभा के घर बता दिया है, उसके घरवालों ने विभा को बहुत बुरा भला कहा है और उसको वापस बिहार बुला लिया है इसलिए वो भाई से झगड़ा कर रही है की अब उस को वापस गांव जाना पड़ेगा और वह उसके घर वाले उसकी शादी कर देंगे , वो भाई को बोल रही थी की अगर भाई शादी के लिए रेडी है तो वो यही रह जाएगी और माँ बाप से लड़ लेगी भाई के लिए लेकिन भाई बहाने बना रहा है क्यूंकि भाई तो आपसे शादी करना चाहता है ,

मैंने काजल को समझाया की अपने भाई को समझाए की विभा खूब सुन्दर है और अच्छी है मेरा पीछा छोड़े और उस से शादी कर ले, खैर उस बेचारी की इतनी कहा हिम्मत होती की कुछ कहती बस है कर रह गयी, मैंने काजल को समझा दिया था की वो मुझे कोई भी नयी बात पता चले तो फट से बताये, उस बेचारी को लग रहा था की शायद मैं ये सब उसके भाई को पाने के लिए कर रही हूँ, उस पगली को क्या पता था की मैं ये सब उस के भाई से पीछा छूटने के लिए कर रही थी ,

अगले दिन काजल का फिर फ़ोन आया ये बताने के लिए की उसका भाई ने किसी तरह विभा को समझा दिया और अब विभा और भाई दोनों पटना साथ साथ जा रहे है, भाई विभा को पटना छोड़ कर वापिस आजायेगा और विभा वहा से अपने गांव चली जाएगी, उनकी टिकट अगले दिन की थी।

अगले दिन स्टोर से छुट्टी के बाद मैं सीधा काजल के पास चली गयी, उसका भाई चला गया था तो अकेली थी और अभी उसकी मम्मी भी जॉब पर से वापस नहीं आयी थी, मैंने अपने साथ गोलगप्पे ले कर आयी थी वो खुश हो गयी और हम दोने ने साथ मिल कर खाया, थोड़ी देर बाद मैं दीपक के कमरे में आगयी और दीपक का लैपटॉप ढूंढ निकला, ये उसको ऑफिस से मिला हुआ था, मैंने ऑफिस में बहुत बार यूज़ किया था और मैं आज आयी इसी लैपटॉप के लिए थी, मैंने जल्दी जल्दी लैपटॉप ऑन किया और ऑन करते ही मेरा काम बन गया, सामने ही कई सारी क्रोम की टैब्स खुली हुई थी और उसने होटल इन पटना सर्च किया हुआ था, उसी में से दो होटल्स की डिटेल्स अलग टैब में खुली हुई थी, एक थोड़ा महगा होटल था और दूसरा सस्ता ओयो था, मैंने जल्दी से उन दोनों टैब्स की फोटो खींची और लैपटॉप बंद कर दिया, थोड़ी देर बाद मैं काजल के घर से निकल गयी, मैंने रस्ते में ही प्लान बना लिया की ये भगवान का दिया हुआ मौका है, दीपक विभा को लेकर पटना गया है, और होटल बुक किया है इसका मतलब वो पटना पहुंच कर विभा को लेकर होटल में रुकेगा और और अगर मैं किसी तरह उन दोनों को रंगे हाथ पकड़ लू तो मुझे दीपक से ब्रेक उप करने का बहाना मिल जायेगा और फिर मैं उसके चुंगुल से आज़ाद ,

काजल के अनुसार वो लोग शाम में निकले थे मैंने ट्रैन टाइमिंग चेक की तो मुझे अंदाज़ा हो गया की वो दोनों लेट नाईट की ट्रैन से निकलेंगे, मैं जल्दी से घर आयी और फटाफट अपने लिए एक बैग पैक किया और मम्मी को काम का बहाना बना कर घर से निकल गयी, स्टेशन आते आते रात के ११ बज गए, पटना की लास्ट ट्रैन १० बजे की थी जो जा चुकी थी, अगली ट्रैन सुबह ६ बजे थी जो मुझे रात में पटना पहुँचाती, यानी मैं दीपक से लगभग ८ घंटे लेट थी, लेकिन अब मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था सिवाय वेट करने के, मैंने सुबह की ट्रैन की टिकट ले ले थी और वही वेटिंग रूम में रात काटने लगी, लेकिन जब अकेली बोर होने लगी तो मैंने काजल को कॉल कर दिया और उसका बता दिया की मैं उसके भाई के पास जा रही हूँ पटना लेकिन वो ये बात अपने भाई को ना बताये, उसने मुझे मना किया पटना जाने के लिए लेकिन मैंने तो पक्का इरादा कर लिया था,

जल्दीबाजी में मैं घर से तो आगयी थी लेकिन ये नहीं सोचा था की आने जाने में अच्छे खासे पैसे लगते है, फिर पटना में पता नहीं कहा कहा जाने पड़े, मैंने अपने मोबाइल मे चेक किया तो मेरे अकाउंट में केवल पांच हज़ार थे, मुझे लगा की कहीं कम ना पड़ जाये, अब ये बात दिमाग में आते ही थोड़ी घबराहट होने लगी और जब कुछ समझ में नहीं आया तो मैंने आपको फ़ोन कर दिया, अपने फ़ोन उठा लिया तब अजीब सा लगा आपसे पैसे मांगते हुए लेकिन मेरे पास और कोई चारा नहीं था,

अपने भी बिना सोचे समझे मुझे पैसे डाल दिए, मुझे बड़ी ख़ुशी हुई की कोई तो है जो भले बुरे टाइम में मेरे काम आया , ६ बजे मैं पटना की ट्रैन में बैठ कर दीपक को पकड़ने निकल गई, मैंने इस से पहले केवल मामा के यहाँ गयी थी और वो भी रिजर्वेशन में यहाँ बिना रिजर्वेशन के जा रही थी बड़ी दिक्कत हुई लेकिन कुछ घंटो का सफर गुजरने के बाद एक भैय्या मिल गए, वो हमारे हरयाणे के ही थे और किसी काम से पटना जा रहे थे उनका नाम नीरज है, नीरज भैय्या लम्बे तगड़े जिम जाने वाले गुज्जर है मेरी भाषा से पहचान गए की मैं भी हरयाणा की हूँ तो उन्होंने मुझे अपनी बर्थ पर बैठा लिया, रास्ते में काजल का कई बार कॉल आया, वो बार बार मुझे जाने से रोक रही थी लेकिन मैं कहाँ मांनने वाली थी, नीरज भैय्या को भी कुछ शक सा होने लगा तो मैंने उनको बस इतना बताया की मेरा मंगेतर किसी लड़की के चक्कर में पटना आया हुआ है उसी को लेने जा रही हूँ, नीरज भैय्या को मुझ पर तरस आया और सारे रस्ते उन्होंने मेरा बड़ा धयान रखा, रात में लगभग ९ बजे हम पटना पहुंच गए, भैय्या भी मेरे साथ ही स्टेशन से बाहर आये, मैंने उनको बाई किया तो उन्होंने मना कर दिया और बोलै की रात का टाइम है और वो मुझे होटल तक पंहुचा कर ही जायेंगे, मुझे भी हिम्मत मिली, मैंने नीरज भैय्या को ओयो का नाम और एड्रेस बताया, इतने में एक रिक्शा वाला आगया और उसने अड्रेस सुन लिया, उसने बताया की ये होटल यहाँ से केवल १० मिनट की दुरी पर है, पैदल भी जा सकते है और अगर चाहे तो वो रिक्शे से पंहुचा देगा, हमने रिक्शा किया और होटल पहुंच गया, छोटा सा तीन मंज़िला बिल्डिंग में होटल था, मैंने और भैय्या काउंटर पर पहुंचे, भैय्या ने मुझे इशारे से चुप रहने के लिए कहा और काउंटर के पीछे बैठे लड़के से पूछा दीपक कौन से रूम में है ?

होटल बॉय : कौन दीपक?
नीरज भैय्या : अरे वो जो दिल्ली से आया है अपनी वाइफ के साथ, मैं उसका दोस्त हूँ, उस से मिलने आया हूँ, अगर ठीक लगा तो रात में आपके होटल में ही हम दोनों भी रुक जायेंगे,
ऐसे बोलते बोलते भैय्या ने उसको हलके आँख मार के इशारा किया और वो लड़का मुस्कुराने लगा,
होटल बॉय : सर दीपक जी कमरा नो ३०२ में रुके है तीसरा फ्लोर पर आप जा कर मिल लीजिये,

मैं आगे आगे और दीपक भैय्या पीछे पीछे होटल की सीढिया चढ़ने लगे, अभी हम दूसरे फ्लोर तक भी नहीं पहुंचे थे की अचानक दीपक लगभग भागता हुआ हमारी ओर आया, मुझे देखते ही चिल्लाने लगा, तू यहाँ क्या कर रही है और ये कौन ?
नीरज भैय्या : ओये, मैं कौन हूँ ये बाद में तु ये बता तू यहाँ क्या ड्रामे कर रहा है, ये लड़की बेचारी तेरे चक्कर में रेल के ढ़ाके खा कर यहाँ तक आयी यही और तू चिल्ला रहा है,
दीपक : अरे तू चुप रह भाई, ये हमारे आपस की बात है
नीरज भैय्या : तो ठीक है फेर ये मेरी बहन है अब बता क्या आपस की बात है,
दीपक : भाई तो जो भी है तू बीच में मत बोल मुझे बात करने दे इस से,
मैंने भी नीरज भैय्या को इशारा किया की वो मुझे बात करने दे, क्यंकि नीरज भैय्या की दबंग आवाज़ सुन कर दीपक थोड़ा शांत हो गया था,

मैं: हाँ बोलो क्या कहना था
दीपक : तू यहाँ क्या करने आयी है ?
मैं : मेरी छोड़, तू बता तू किसके चक्कर में यहाँ भगा भगा आया है,
दीपक : मैं तो किसी के चक्कर में नहीं आया
नीरज भैय्या : तो तू फेर यहाँ अंडे देना आया है क्या ? ये बता कमरे में तूने कौन सी लौंडिया लेता राखी है?
इतना बोल कर मैं और भैय्या सीढिया चढ़ कर दीपक के रूम में आगये

दीपक का रूम खली था, बिस्तर की चादर मसली हुई थी और साफ़ पता चल रहा था की दीपक के अलावा भी कोई और वह था लेकिन अब वहा कोई नहीं थी, लग रहा था की हम कुछ मिनट या घंटे से चूक गए, अगर कुछ घंटे पहले हम यहाँ होते तो शायद हम दीपक को रंगे हाथो पकड़ सकते थे, हमारे पास कोई पक्का सबूत तो था नहीं इसलिए हमे थोड़ा शांत होना पड़ा, होटल के रिकॉर्ड में था की विभा आयी थी दीपक के साथ और दीपक का कहना था की वो बस यहाँ फ्रेश होने आयी थी और फिर वो अपने गांव चली गयी, होटल वाला भी पचड़े में नहीं पड़ना चाहता था इसलिए उसने भी ज़ादा कुछ नहीं बताया, नीरज भैय्या लेट हो रहे थे तो वो भी दीपक को समझा कर निकल गए और अपना फ़ोन नंबर दे गए की अगर कोई दिक्कत हो तो वो आजायेंगे मेरी हेल्प करने।

मैं भी ट्रैन के सफर से थक गयी थी और दीपक से लड़ने के बाद तो और ताकत नहीं थी शरीर में सो मैं अपना बैग लेकर होटल से निकल गयी और पास ही बने हुए दूसरे ओयो रूम में कमरा ले कर चली गयी, मुझे साड़ी रात समझ नहीं आया की आखिर विभा इतनी जल्दी क्यों चली गयी, रात का टाइम गांव निकलने का कोई लॉजिक नहीं था, फिर धयान दिया तो महसूस हुआ की दीपक ने भी मुझे पाने साथ रुकने के लिए नहीं बोला, मैं किसी कीमत पर उसके साथ उसी कमरे में नहीं रूकती लेकिन फिर भी दीपक ने एक बार भी झूठे मुँह भी नहीं बोला, सोचते सोचते नींद आगयी, सुबह ८ बजे आँख खुली तो फ़ोन पर काजल की कॉल आरही थी, काजल का नाम देखते ही मेरा दिमाग जाग गया, ये इसी हरामजादी का खेल था, इस कुतिया ने ही अपने भाई को बताया होगा और और इसके भाई ने मेरे आने से पहले विभा को या तो दूसरे रूम शिफ्ट कर दिया या कुछ देर के लिए होटल से हटा दिया ,

मुझे काजल के साथ साथ खुद पर भी गुस्सा आरहा था, अगर ये बात मुझे रात में समझ आजाती तो मैंने आधी रात में दीपक के रूम पर जा खड़ी होती और तब पक्का विभा मुझे उसी के कमरे मिलती, फिर भी मैं जल्दी जल्दी तैयार हो कर दीपक के होटल की ओर भागी, दीपक ने दरवाज़ खोला लेकिन वो अकेला ही मिला, मैंने उसको बोला की मैं दिल्ली जा रही हूँ और आजके बाद मुझसे कांटेक्ट ना करे, दीपक मुझे कमरे के अंदर ले कर गया और समझने लगा लेकिन मैंने उसकी एक बात नहीं सुनी, अभी हम बात कर ही रहे थे की इतने में होटल का एक स्टाफ आया और दीपक को बुला कर ले गया, मैं उसके रूम में बैठी रही, दीपक के बाहर जाते ही मैंने उसके कमरे की तलाशी लेने लगी लेकिन मुझे कुछ खास नहीं मिला, तभी मुझे डस्टबिन दिखाई दे गया मैंने झाँक कर देखा तो डस्टबिन में कुछ बिस्किट्स के खली पैकेट्स थे और इन्ही पैकेट्स के नीचे मुझे २ इस्तेमाल किये हुए कंडोम्स दिखयी दे गया, मेरा शक यकीन में बदल गया, कुछ देर में ही दीपक आगया और मैंने वापिस से उस से लड़ाई स्टार्ट कर दी।

जब बात काफी बढ़ गयी तब मैंने उसे कंडोम्स दिखाए, पहले तो चुप हो गया फिर बोलने लगा की हो सकता है उस से पहले वाले कस्टमर ने यूज़ किया हो, ये कैसे पता की उसी ने यूज़ किये है, मैं गुस्से से उसके रूम से निकल आयी और फिर वापिस अपने होटल से बैग उठा कर मैं स्टेशन आगयी, अगली ट्रैन पकड़ कर मैं दिल्ली पहुंच गयी ,

मेरा ये छपा कामयाब नहीं हो पाया था लेकिन फिर भी नाराज़गी और लड़ाई के बहाने मैंने दीपक से दूरी बना ली थी, इसी बीच पहली बार आपसे मॉल में मुलाक़ात हुई, जब पहली बार कॉल पर आपसे बात हुई थी तभी मुझे आपकी ऐज मालूम थी फिर भी जब पहली ही मुलाक़ात में अपने अपनी आगे मुझे बताई तो मुझे अच्छा लगा की आप मेरा फ़ायदा उठाने की कोशिश नहीं कर रहे, सबसे अच्छी बात जिसने मुझे आप की ओर आकर्षित किया की आप बात करते टाइम आँखे नीची करके बात कर रहे थे मुझसे और आप ने एक बार भी मेरे अंगो की ओर घूर कर या गन्दी नज़र से नहीं देखा , मुझे आपकी इस बात पर दीनू की बात याद आगयी थी, मम्मी ने भी यही बताया था की दीनू ने कभी उनको गन्दी नज़रो से नहीं देखा था, और बस पता नहीं क्यों मेरे दिमाग में भी ये बात बैठ गयी थी की अच्छे मर्द औरतो को सम्मान की नज़रो से देखते है और बात करते समय उनका धयान बातों पर होता है ना की औरतो के शरीर पर।

आपसे मिलने के बाद मेरे बहुत मन किया की फिर से मिलु आपसे लेकिन फिर lockdown लग गया और बाहर निकलना बंद सा हो गया, लेकिन अच्छी बात ये थी आप से रेगुलर बात होने लगी और मेरा अच्छा टाइम गुजरने लगा, दीपक कभी कभार कॉल करता था लेकिन मैं ज़ायदा बात नहीं करती थी, मैंने काजल से भी बात करना बंद कर दिया था क्यूंकि मैंने जानती थी की उसी के कारण मेरा प्लान फेल हुआ था,

lockdown के कारण मैं घर में पड़ी पड़ी बोर हो गयी थी, मुझे लगा की आप मुझसे फिर मिलने के लिए कहेंगे लेकिन जब आपने कुछ नहीं कहा तो मैं आपसे मिलने सरोजनी नगर के बहाने से आयी, जब हम दिल्ली हाट में घूम रहे थे तब पता नहीं कब और क्यों मैंने आपका हाथ पकड़ लिया और पहली बार मेरे जीवन में एक प्यार वाली फीलिंगस आयी, दीपक ने ना जाने कितनी बार मेरा हाथ पकड़ा था और सैकड़ो बार मैंने उसके बाइक पर पीछे से पकड़ कर बैठी थी लेकिन उस दिन जब ये बिना किसी ज़ोर ज़बरदस्ती के हुआ तो एक अनोखी फीलिंग्स से दिल झूम उठा, मन कर रहा था की ऐसे ही हाथ थामे थामे जिंदगी गुज़र जाये, जब हम वहा से निकल कर स्टेशन तक आये तब बैग हम दोनों के बीच में था और सालो बाद ऐसा हुआ था की मैं बाइक के पीछे बैठी हो और बाइक चलने वाले को पकड़ कर ना बैठी हो, अगर बैग्स ना होते तब मैं ज़रूर पीछे से हग करके बैठती केवल ये देखने के लिए की आखिर कैसी फीलिंग्स आती है क्यूंकि दीपक के साथ बैठ कर मुझे कभी कुछ खास फील नहीं हुआ था ,

खैर उस दिन के बाद मैंने आपसे थोड़ी शरारती बातें करने लगी थी, पता नहीं क्यूंकि आपसे ऐसी बातें करके अच्छा लगने लगा था, आपको पिक्स भेजने का मन करता और जब आप उन फोटोज को देख कर तारीफ करते तो मन ख़ुशी से झूम जाता, ये सारी फीलिंग्स मेरे लिए नयी थी और मुझे बहुत मज़ा आरहा था , लेकिन आप शायद थोड़ा झिझक रहे थे और मुझे आपकी ये झिझक भी अच्छी लगने लगी थी, लेकिन मेरी ये ख़ुशी ज़ायदा दिन नहीं चली,

मेरे पास जॉब नहीं थी उन दिनों तो मैंने एक संडे आपसे मिलने का प्लान बनाया, उस दिन मैंने सोचा था की कुछ ऐसा करुँगी की आपकी थोड़ी ये झिझक ख़तम हो और हम थोड़ा खुल कर मिले और बात करे, उस दिन मैं घर से जैसे ही निकली मुस्कान मुझे स्टेशन पर मिल गयी और जबरदस्ती मेरे साथ चल पड़ी, मैंने आपको बता दिया था की आपसे मिलने आरही हूँ इसलिए उसको साथ लाना पड़ा, मैं उसको ले तो आयी लेकिन मुझे नहीं पता था की मुस्कान ने अपनी करंट लोकेशन दीपक को भेज रखी है, उसी ने के कहने पर मुस्कान मेरे पीछे पीछे आयी थी, मेरे बात ना करने से दीपक को शक हो गया था की मैं किसी दूसरे लड़के से बात कर रही हूँ, वो मुझे व्हाट्सप्प पर देर रात तक ऑनलाइन देखता था इसलिए उसे यक़ीन हो गया था, उस दिन मैंने उस से झूट बोला लेकिन उसने फिर वही धमकिया देना स्टार्ट कर दिया तो मेरे पास वापिस आने के अलावा कोई चारा नहीं था, और जब मुझे पता चल गया की मुस्कान भी दीपक से मिली हुई है तब मेरा मन और टूट गया और मैं बाहर से ही फरीदाबाद लौट गयी,

स्टेशन पर ही दीपक मिल गया, संडे था उसकी भी छुट्टी थी शायद, फिर वही पुरानी बकवास, जान से मार दूंगा, तेज़ाब फेंक दूंगा आदि , लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया, मैं मेट्रो स्टेशन पर कोई ड्रामा नहीं करना चाहती थी, मैं वहा से रिक्शा करके घर आगयी ,

दो तीन दिन बाद मैं कुछ सामान लेने घर से बाहर निकली तभी पीछे से दीपक आगया और मेरा मोबाइल छीन लिया और उसमे से आपका नंबर निकल कर अपने मोबाइल में डायल कर लिया, मैंने उस से अपना मोबाइल वापस छिना और घर वापिस आगयी, मैं कॉल किया तो आपका फ़ोन बिजी जा रहा था, मैं समझ गयी की दीपक ने आपको कॉल कर दिया है, जब आपने मुझे उसकी रिकॉर्डिंग भेजी तो मुझे अच्छा लगा उसकी बेइज़्ज़ती सुन कर, आपने अच्छी इज़्ज़त उतारी थी,

लेकिन मैं आपसे बात करने से कतरा रही थी, मुझे पता था की आप मुझसे दीपक के बारे में पूछोगे और मैं आपको बिना पूरी डिटेल में जाये जाए समझा नहीं पाऊँगी , इसलिए आपसे बात करते हुए झिझक सी रही थी और फिर पता नहीं क्यों आपसे मिलकर जो फीलिंग्स आती थी लगता था की कही आप मुझे चैरेक्टर लेस्स लड़की ना समझ लो, इसी उधेरबुन में आपने मुझे जब जॉब का बताया तो मैं ख़ुशी से उछल गयी, आसान काम था और और ऊपर से अच्छी सैलरी भी, मैंने झट से ज्वाइन कर लिया, मैं खुश थी की अब मेरा जीवन जल्दी ही अच्छा हो जायेगा, लेकिन इन सब में मैं एक बात भूल गयी थी और वो था मेरा कमीना बाप,

जॉब लगे थोड़े दिन ही हुए थे की मेरे कमीने बाप ने फिर एक रात मेरे कमरे आकर वही हरकत करने की कोशिश की लेकिन उस दिन मैं जाग ही रही थी, जैसे ही मेरे बाप ने मेरे शरीर को छुआ मैंने शोर मचा दिया, शोर सुन कर मम्मी आगयी और फिर मैंने रोते रोते सारी बात मम्मी को बता दी, मम्मी ने उसी टाइम पापा को घर से निकाल दिया, लेकिन उस रात के मैंने फैसला कर लिया की अब मैं ये घर छोड़ दूंगी, क्यंकि मुझे पता था की पापा फिर कुछ दिन में वापस घर आएंगे और फिर नशे में ऐसी हरकत करेंगे, दो बार दादी ने बचा लिया था और तीसरी बार मैं जाग रही थी इसलिए बच गयी, लेकिन हर दिन बचना संभव नहीं था, मैं पुलिस में भी कंप्लेंट नहीं करना चाहती थी क्यूंकि इसमें बहुत बदनामी होती इसीलिए मैंने मम्मी को सब बता दिया था और मम्मी ने भी ना चाहते हुए हाँ कर दी थी,

मैं जॉब के साथ साथ अपने लिए कोई रूम ढूंढने लगी, इसी बीच एक दिन राबिया का कॉल आया, कोरोना के कारण हॉस्पिटल में बेड नहीं मिल पा रहा था डिलीवरी के लिए उसकी डिलीवरी डेट नज़दीक थी, मैंने एक दो लोगो से पता किया लेकिन कुछ नहीं हो पाया, संयोग से मम्मी की मदिर में एक सहेली बनी थी उन्होंने बताया की उनके पास एक नर्स है जो घर में ही आसानी से डिलीवरी करा देगी, खर्चा भी बच जायेगा और परेशानी भी, मैंने ये बात साजिद को बताई, वो अब अच्छा कमाने लग गया था, पहले तो उसने मना किया लेकिन कोई और विकल्प ना देख कर मान गया, मम्मी और नर्स ने मिलकर राबिया की डिलीवरी कराई, सब सकुशल हो गया, भगवान ने उनको एक प्यारा सा बेटा दिया था, दो दिन बाद वो नर्स अपने घर चली गयी तब राबिया अकेली हो गयी, साजिद ने मुझे कॉल कर के रिक्वेस्ट की कुछ दिन उसके घर रुकने की जब तक की राबिया थोड़ा बहुत चलने फिरने ना लगे,

मम्मी को भी साजिद और राबिया की आदत पंसद आयी थी तो मैं एक सप्ताह के लिए राबिया के घर रहने चली आयी, मैंने हर रोज़ सुबह में उसको खाना खिला कर और अपना खाना पैक कर ऑफिस चली जाती थी, दिन में मोहल्ले की एक दो महिला आकर उसकी मदद कर देती थी और रात में मैं उसी पास सोती और उसकी सहायता करती, एक एक सप्ताह करते करते लगभग मैं एक महीना उसके घर रह गयी, अब मेरा भी दिल लगने लगा था, पुरे घर में राबिया और अयान के अलवा और कोई नहीं था, फिर मैंने एक रात साजिद से बात की, मैंने उसको बोला दादी के जाने के बाद मेरा मन नहीं लगता अपने घर में अगर उसको दिक्कत ना हो तो मैं कुछ टाइम उसके घर रह लुंगी और जो उसके किराये में से कुछ किराया मैं चूका दिया करुँगी, ये सुन कर दोनों मिया बीवी पागल हो गए, साजिद जो खुद राबिया के अकेले रहने के कारण चिंतित रहता था वो झट मान गया लेकिन इस शर्त पर की वो कोई किराया नहीं लेगा, बस उसके लिए यही बहुत था की उसकी बीवी और बेटा अकेले नहीं थे।

उस दिन के बाद से मै पर्मनेंट्ली राबिया के घर में शिफ्ट हो गयी, वैसे भी शाजिद दो साल में आएगा, जब वो आता तब तक मैं अपना कोई और इंतिज़ाम कर लुंगी , राबिया के साथ शिफ्ट करने से अब पापा वाला डर ख़तम हो गया था लेकिन दीपक का पन्गा अभी तक था, वो रोज़ किसी ना किसी बहाने से मेरे ऑफिस के बाहर अधमाकता और फिर वही ज़िद दुहराता रहता की तुझे मैंने और किसी का होने नहीं दूंगा।

मैं रोज़ दीपक के साथ ऑफिस से सीधा अपने घर आती हूँ और वहा मम्मी के पास कुछ समय गुज़ार कर वापिस राबिया के घर चली जाती हूँ।
यही आजकल मेरा रूटीन है, राबिया के घर में होने के कारण मैं आपसे भी ज़ायदा बात नहीं कर पाती क्यूंकि मुझे घर आकर अयान का भी धयान करना होता है और रस्ते में दीपक के कारण भी बात नहीं कर पाती आपसे ,

आपने जब अब ये घूमने चलने के लिए कहा तो मैं इसीलिए झट से तैयार हो गयी क्यूंकि मैं खुद आपके साथ समय गुज़ारना चाहती थी लेकिन मेरे जीवन में इतने बखेरे है की मैं उन्ही में उलझी रह गयी, और अब जो ये मौका मिला तो आज मैं आपके साथ इस खूबसूरत होटल में अपनी ज़िन्दगी के सबसे अच्छे पल बिता रही हूँ , इतना कह कर चन्द्रमा खामोश हो गयी।
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blinkit

I don't step aside. I step up.
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दीपक की रौशनी, पटाखों की आवाज

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मुबारक हो आपको दिवाली का त्योहार !
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ज़िंदगी कुछ पा लेने से पूर्ण नहीं होती
ऐसे ही ................

कुछ खो देने से ज़िंदगी अधूरी नहीं रह जाती.......... विकल्प हमेशा यहीं कहीं आस्पस्स होता है............
वक़्त सबकुछ बदल देता है

जैसा कि आपने आखिर में इशारा भी किया है

ये मुस्कान समीर की ज़िंदगी की मुस्कान भी हो सकती है
Bilkul Sahi likha aapne kamdev ji, puri kahani maine samir ke point of view si likhi hai, bas last ke do sanchipt ghatnaye samir ke point of view se nahi hai yahi dikhane ke liye ki zindangi me bahut kuch aisa hai jo hum samne hote hue bhi nahi dekh pate.

Muskaan ki call wala part isi uddeshya se likha hai ki jivan kisi ke jaane se samapt nahi hota. bahut baar kisi ghantna ki sampti aur kisi naye anubhav ke liye darwaze khol deti hai.
 

Paraoh11

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अगर happy ending होती तो ये कहानी romance श्रेणी में आती ना कि erotica में!
 
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