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Incest पहाडी मौसम

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sunoanuj

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रात काफी हो चुकी थी चारों तरफ अंधेरा अंधेरा छाया हुआ था इसलिए घर से बाहर निकलने में रानी को डर लग रहा था वैसे तो वह इतनी रात को कभी भी पेशाब करने के लिए घर से बाहर नहीं निकलती थी क्योंकि वह सोने से पहले ही पेशाब करके सोई थी ताकि रात को उसे परेशानी ना हो अगर कभी बहुत ज्यादा दिक्कत हो जाती थी तो घर के आंगन में ही जहां पर बर्तन साफ किया जाता है वहीं बैठ जाती थी लेकिन वहां बैठने की उसकी आदत नहीं थी इसलिए पेशाब की तीव्रता को देखते हुए उसे घर से बाहर ही जाना था और सही समय पर सूरज भी अपने कमरे से बाहर आ गया था,, अपनी बहन रानी को इतनी रात को घर के आंगन में खड़ी देखा तो वह थोड़ा हैरान हुआ लेकिन जल्दी से पता चल गया कि उसकी बहन को बड़े जोरों से पेशाब लगी है और वह घर के बाहर जाना चाहती है लेकिन अंधेरे की वजह से डर रही है।

पेशाब लगने की बात से सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी और वह अपनी बहन के साथ घर के बाहर जाने के लिए तैयार हो गया था,,,, वैसे तो अगर ज्यादा दिक्कत होती तो रानी घर के आंगन में ही बैठ जाती लेकिन इस समय पर उसका भाई भी जाग गया था और उसके साथ चलने के लिए तैयार हो गया था इसलिए ना चाहते हुए भी उसे हां कहना पड़ा था और वैसे भी उसके दिल में भी अब कुछ कुछ होने लगा था,,,, रानी से पहले भी अपने भाई की आंखों के सामने पेशाब कर चुकी थी और वह भी जंगल जाते समय लेकिन वह जानबूझकर अपने भाई की आंखों के सामने बैठकर पेशाब नहीं कर रही थी वह तो बड़े से पत्थर के पीछे बिना बताए पेशाब कर रही थी उसका भाई उसे ढूंढता ढूंढता वहां पहुंच गया था,,,, और आज तो उसका भाई खुद उसके साथ चल रहा है उसे पेशाब करवाने के लिए इस बात से ही उसका दिल जोरो सेधड़क रहा था।

इस बात को रानी नहीं जानती थी कि उसका भाई उसे पहले भी पेशाब करते हुए देख चुका था और वह भी घर के बगल में ही जहां पर गाय भैंस बांधी जाती है तभी से तो वह रानी के जवानी का दीवाना हो चुका था,,,,, और वैसे भी दोनों के बीच बहुत कुछ जारी था जिसे बस आगे बढ़ाने की देरी थी जाने अनजाने में उत्तेजना बस रानी अपने भाई के लंड को पकड़ चुकी थी उसकी गरमाहट को अपनी हथेली में महसूस करके अपनी बुर से मदन रस टपका चुकी थी,,, इसलिए अपने भाई की उपस्थिति में उसके बदन में भी अजीब सी लहर उठने लगी थी। आखिरकार वह भी तो पूरी तरह से जवान हो चुकी थी उसके बदन में भी उसके खूबसूरत अंगों पर उभार आना शुरू हो गया था,,, अपने भाई की हरकतों की वजह से उसे भी औरत और मर्द के बीच के रिश्ते के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी,,,,।

अपने भाई के द्वारा किए गए स्तन मर्दन की मीठी चुभन अभी तक उसे अपने बदन में महसूस होती थी जिसे उसके अंदर आनंद की फुहार उठने लगती थी कोई और समय होता तो शायद वह अपने भाई के साथ इतनी रात को घर से बाहर हो भी पेशाब करने के लिए कभी ना जाती लेकिन न जाने की उसके मन के कोने में भी इस बात का एहसास होने लगा कि उसका भाई जो भी उसके साथ करता है उसमें आनंद ही आनंद है इसीलिए वह अपने भाई के साथ बाहर जाने के लिए तैयार हो चुकी थी,,, थोड़ी देर में सूरज धीरे से दरवाजा खुला होता घर के बाहर आ गया और उसके पीछे से पीछे उसकी बहन भी घर से बाहर निकल आई बाहर वास्तव में चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था,,,। इतना अंधेरा था कि दो-तीन मीटर की दूरी पर देखने पर कुछ भी दिखाई नहीं देता था,,, आधी रात से ज्यादा समय होने की वजह से चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था सिर्फ रहकर कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी,,,,।

घर से बाहर निकालने के बाद सूरज चारों तरफ नजर घुमा कर देख रहा था कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और यही काम रानी भी कर रही थी उसे तो इस बात का डर था की कही भूत प्रेत दिखाई ना दे,,, इसलिए उसके मन में डर बसा हुआ था,,,, पेशाब की तीव्रता के कारण विवाह कुछ देर तक इसी तरह से खड़ी होकर चारों तरफ नजर घुमा कर देती रही तो उसका भाई सूरज बोला।

क्या हुआ क्या देख रही हो यही बैठकर कर लो,,,,( हाथ के इशारे से पास में ही बैठने के लिए बोला जो की ठीक उसके घर के दरवाजे के सामने ही था इसलिए रानी बोली,,)

पागल हो गए हो क्या दरवाजे के सामने ही,,,।

तो क्या हो गया इतनी रात को कौन देखने वाला है,,,।

अरे भले कोई देखने वाला नहीं है लेकिन फिर भी अच्छा थोड़ी ना लगता है ऐसे तो फिर मुझे घर में अपने ही कमरे में बैठ जाना चाहिए था।


यह भी सही है इतनी रात को घर से बाहर निकलने से तो अच्छा ही है,,,।

क्या भैया तुम भी,,,,।

चल अच्छा जल्दी कर जहां बैठना ही बैठ जा कहीं ऐसा ना हो कि तो जगह ढूंढती रह जाएे और तेरी सलवार गीली हो जाए,,,।
(अपने भाई की इस तरह की बातें सुनकर वह शर्म से पानी पानी होने लगी,,,, वैसे अगर उसका भाई है बात कभी और कहां होता जब दोनों के बीच इस तरह का आकर्षण ना था तब उसे थोड़ा अपने भाई की बात से ऐतराज होता लेकिन उसकी हरकत को देखकर रानी को हैरानी नहीं हुई थी लेकिन फिर भी शर्म से उसके गाल लाल हो गए थे। अपने भाई की बात पर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

क्या भैया मुझे इस तरह की बात करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती,,,,।

अब कैसी शर्म तुझे पता है ना तालाब में हम दोनों एकदम नंगे होकर नहाए थे और तु तालाब मै मछली समझ कर मेरे लंड को पकड़ ली थी,,, और घर में भी मैं तुझे अपना लंड पकड़ा चुका हूं इसलिए अब शर्म करने की कोई जरूरत नहीं है,,,।
(अपने भाई की बेशर्मी भरी बातें सुनकर रानी समझ गई थी कि अपने भाई से बहस करना उचित नहीं है इसलिए वह कुछ बोली नहीं लेकिन अपने भाई के लिए इस तरह की बातें उसे अच्छी लग रही थी और उसे उत्तेजित कर रही थी क्योंकि इससे पहले वह लंड जैसे शब्दों को बहुत कम ही सुनी थी और वह भी गांव में जब कभी झगड़ा हो जाता था तब एक दूसरे को गाली देते समय लेकिन उसका भाई खुलकर उसके सामने ईस शब्द का प्रयोग कर रहा था इसलिए इस शब्द को सुनकर उसके बदन में हलचल सी मचने लगती थी,,, अपने भाई से बिना कुछ बोले वह घर के बगल वाली जगह पर जाने लगी जहां पर गाय भैंस बांधी जाती थी,,,, सूरज भी जानता था कि उसकी बहन वहीं पर पेशाब करती थी,,,, कुछ देर सूरज उसे घर के बगल वाले हिस्से में जाते हुए देखा रहा लेकिन फिर धीरे से उसके पीछे चल दिया और रानी भी यह देखना चाहती थी कि उसका भाई उसके पीछे आता है कि नहीं इसलिए पीछे नजर घूमर उसकी तरफ देख रही थी और उसके देखने के बाद ही सूरज मुस्कुराता हुआ उसके पीछे चल दिया था।

रानी के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका भाई उसके साथ ही है और उसकी हरकत को वह जरुर देखेगा उसे पेशाब करते हुए जरुर देखेगा इसलिए उसे शर्म महसूस हो रही थी दो बार तो अनजाने में उसका भाई देख चुका था लेकिन इस बार तो सब कुछ उसकी आंखों के सामने ही होना था इसलिए उसके दिल की धड़कन बढ़ रही थी और बदन में अजीब सी कसमसाहट हो रही थी,,,, देखते देखते रानी अपने निश्चित जगह पर पहुंच चुकी थी चारों तरफ अंधेरा गहराया हुआ था इसलिए उसके मन में भी यही हो रहा था कि उसके भाई को वह ठीक तरह से नहीं दिखाई देगी। वह नजर घुमा कर देखी तो उसका भाई उसे तीन चार कदम की ही दूरी पर खड़ा था इसलिए वह बोली।

भैया तू तो इतने पास खड़ा है मुझे शर्म आती है थोड़ा दूर जाकर खड़े हो जा और हां मेरी तरफ देखना नहीं,,,।

अरे मैं बिल्कुल भी नहीं देखूंगा लेकिन अगर मैं डर जाऊंगा तो तू डर जाएगी देखा तो सही कितना अंधेरा है कहीं भूत चुड़ैल आ गए तो तो क्या करेगी,,,,(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन रानी भूत प्रेत से ज्यादा घबराती थी इसलिए उसकी बात सुनते ही,,, वह घबराते हुए बोली,,,)

अच्छा,,, ठीक है भैया तू दूर मत जा लेकिन मेरी तरफ मत देखना मुझे बहुत शर्म आती है,,,।

ठीक है नहीं देखुंगा तु जल्दी कर,,, मुतने में बहुत समय लगा रही है,,,।
(एक बार फिर से सूरज ने अपनी बहन पर शब्दों के बाण चलाया था,,, और यह बाण रानी को अपनी दोनों टांगों के बीच लगता हुआ महसूस हो रहा था क्योंकि अपने भाई की बात सुनकर उसके बदन में खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच सुरसुराहट बढ़ने लगी थी,,,, इस बार वह अपने भाई से कुछ बोल नहीं पाई,,,, और अपने भाई से थोड़ी दूरी बनाकर अपने सलवार की डोरी को खोलने लगी यह देखकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगे क्योंकि,,, उसकी आंखों के सामने उसकी बहन उसकी जानकारी में ही अपने सलवार की डोरी खोलकर कुछ ही देर में अपनी नंगी गांड दिखाने वाली थी।

यह पल और भी ज्यादा अद्भुत और उत्तेजनात्मक होता है जब सामने वाले को पता हो और उसके सामने ही कपड़े उतारा जाए,,,, रानी का दिल तो जोरो से धड़क रहा था,,, एक अजीब सा एहसास उसके बदन को अपनी आगोश में ले रहा था वह जानती थी कि वह अपने भाई की आंखों के सामने क्या करने जा रही है लेकिन वह अपने आप को रोक भी नहीं सकती थी ना ही इनकार कर सकती थी क्योंकि वह मजबूर थी पेशाब की तीव्रता उसे मजबूर कर रही थी अपने भाई की आंखों के सामने ही पेशाब करने के लिए,,,, लेकिन जहां एक तरफ उसे थोड़ा अजीब लग रहा था अपने भाई के सामने पेशाब करने में वहीं दूसरी तरफ उसकी उत्सुकता भी इस बात से और ज्यादा बढ़ती जा रही थी कि अपने भाई की आंखों के सामने पेशाब करने में कैसा महसूस होता है।

वैसे तो वह अनजाने में अपने भाई के सामने पेशाब कर चुकी थी लेकिन वह समय कुछ और था वह अपने भाई को ठीक तरह से जानती नहीं थी उसके अंदर क्या चल रहा है इस बारे में उसे नहीं मालूम था,,, लेकिन वह धीरे-धीरे अपने भाई को समझने की वह समझ गई थी कि उसका भाई भी दूसरे गंदे लड़को की तरह हो चुका है जो किसी न किसी बहाने औरत के अंगों को देखने और उन्हें झांकने की कोशिश में लगे रहते थे लेकिन इससे वह परेशान नहीं थी बल्कि न जाने क्यों खुश थी। इसलिए वह भी इस अद्भुत अनुभव से गुजरना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि जब उसकी बुर से पेशाब की धार के साथ सिटी की आवाज निकलती है तब उसके भाई पर उसका कैसा प्रभाव पड़ता है। यही सब सो कर उसके मन की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।

सलवार की डोरी उसके दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों में आ चुकी थी लेकिन फिर भी उसे खींचकर ढीली करने में वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,,, वास्तव में एक भाई के सामने एक बहन का यही हाल होता है जब उसकी आंखों के सामने अपनी सलवार की डोरी खोलकर पेशाब करने पर मजबूर हो जाती,,, और यही कार्य तब और भी ज्यादा मादकता और मदहोशी का रूप धारण कर लेता जब दोनों के बीच में सारे आकर्षण के साथ-साथ शारीरिक संबंध स्थापित हो गया हो तब यह उत्तेजना और आकर्षक और भी ज्यादा मदहोशी में बदल जाता,,,, लेकिन इससे अद्भुत अनुभव के लिए अभी दोनों एक कदम पीछे थे,,,, मंजिल अभी भी दूर और दोनों को नजर भी आ रही थी लेकिन यह सफर कितना लंबा चलता है यह दोनों को अंदाजा नहीं था।

कुछ समय बीतने के बाद जब सूरज ने देखा कि उसकी बहन सलवार की डोरी पर सिर्फ हाथ रखकर खड़ी है उसे खोल नहीं रही है तो वह बोला,,,,।

क्या कर रही है रानी कितना देर लगेगी सलवार खोलने में,,,,।
(उसकी बात सुनकर हैरान होते हुए रानी बोली,,,)


क्या भैया तुम मुझे देख रहे हो क्या,,,?

अरे देख नहीं रहा हूं लेकिन फिर भी इतना समय लग रहा है तो पता तो चल ही जाएगा ना,,,, जल्दी करो पूरी रात यही बीताओगी क्या,,,,!

(अपने भाई किस तरह की बातें सुनकर रानी के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,, लेकिन करना तो था ही,,, इसलिए अपने मन को मजबूत करके,,, रानी अपनी सलवार की डोरी को खींचकर ढीली कर दी,,,, रानी के हाथों की हलचल पीछे खड़ा सूरज अच्छी तरह से देख रहा था और उसकी सरकार से उसकी आंखों में मदहोशी छाने लगी थी क्योंकि वह जानता था कि थोड़ी ही देर में,, उसकी बहन अपनी सलवार उतार कर उसे अपनी नंगी गांड दिखाएगी,,, सूरज की भी हालत खराब हो रही थी उसका भी दिल जोरो से धड़क रहा था और देखते ही देखते रानी अपनी सलवार को जो उसकी कमर से अभी भी कई हुई थी अपनी उंगली का सहारा लेकर उसे ढीली कर दी और अपनी हथेली में पकड़े हुए ही,,, उसे नीचे की तरफ सरकाने लगी,,,, रानी जो एक तरफ शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी वहीं दूसरी तरफ,, उसके मन में भी अपने भाई को अपनी नंगी गांड दिखाने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी,,,, क्योंकि इस तरह के नजारे को देखने के बाद ही उसका भाई उसे आनंद देता था।

सलवार को दोनों हाथों में पकड़ कर धीरे-धीरे अपनी सलवार को नीचे की तरफ सरकाने लगी और जैसे-जैसे उसकी सलवार नीचे जा रही थी वैसे-वैसे उसके नितंबों का उभार भी उजागर होता जा रहा था,,, और सूरज की हालत खराब होती जा रही थी देखते-देखते रानी अपनी सलवार को अपने घुटनों से खींच दी थी उसकी नंगी गांड एकदम से दिखने लगी थी अंधेरी रात में भी उसकी गोरी गोरी गांड चमक रही थी जिसे देखकर सूरज के मुंह में और उसके लंड में पानी आ रहा था,,, इतने से ही सूरज का लंड अपनी औकात में आ चुका था,,, सूरज भी जानता था कि उसकी बहन भी उसकी हरकतों का आनंद लेती है इसीलिए उसे पक्का विश्वास था कि अगर वह अपनी बहन के साथ कुछ ऐसा वैसा करेगा तो उसकी बहन उसका बिल्कुल भी विरोध नहीं करेगी बल्कि उसकी हरकतों का मजा लेगी यह विश्वास उसके मन में आते ही उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी,,,‌

सलवार को घुटनों तक खींचकर रानी अपने भाई की तरफ देखे बिना ही बोली।


तुम मेरी तरफ देखा तो नहीं रहे हो ना भैया,,,।

नहीं बिल्कुल भी नहीं वैसे भी मैं तेरी गांड को पहले भी देख चुका हूं इसलिए अभी नहीं देख रहा हूं,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए एकदम बेशर्मी भरे लहजे में बोल रहा था ताकि उसके शब्दों का असर रानी पर पड़े और वाकई में सूरज के अश्लील शब्दों का प्रयोग रानी पर हथौड़े की तरह चल रहा था उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी और वह कुछ बोल नहीं पाई और धीरे से उसी तरह से बैठ गई,,, उसके और उसके भाई के बीच केवल तीन-चार कदमों की ही दूरी थी या यूं कह लों की उसका भाई ठीक उसके पीछे ही खड़ा था,,,, पेशाब की तीव्रता के कारण बैठते ही रानी के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार एकदम से फूट पड़ी और पेशाब की धार के साथ उसमें से एक अद्भुत सीटी की आवाज निकालने लगी जो कि तुरंत ही सूरज के कानों में मदहोशी का रस घोलने लगी उस ध्वनि को सुनकर सूरज की हालत खराब होने लगी वह उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान होने लगा,,, भले ही वह अपनी बहन से बोल रहा था कि वह उसकी तरफ नहीं देख रहा है लेकिन उसकी नजर एकदम बराबर उसकी गोलाकार नितंबों पर ही टिकी हुई थी जो की रात के अंधेरे में भी एकदम साफ दिखाई दे रही थी।

रानी भलभला कर पेशाब कर रही थी,,, वाकई में उसे बड़ी जोरों के पेशाब लगी थी,,,,, जहां एक तरफ पेशाब की ध्वनि और उसमें से निकल रही सिटी की आवाज को सुनकर सूरज अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था हमारी दूसरी तरफ रानी को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी बुर से एक ध्वनी निकल रही है जो उसके भाई को भी साफ सुनाई दे रही होगी और यही सोच कर वह शर्म से पानी पानी हो रही थी,,, रानी बहुत कोशिश की कि उसकी बुर से पेशाब की तीव्रता आराम से बाहर की तरफ निकले और सीटी की आवाज दब जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था क्योंकि यह सब उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं था वह इसीलिए उत्तेजना से कसमसा रही थी,,, वह अपने मन में यह सोचकर परेशान हो रही थी कि उसका भाई बुरे से निकलने वाली सिटी की आवाज सुनकर क्या सोच रहा होगा,,,,।

सूरज तो अपनी बहन की नंगी गांड देखकर पागल हुआ जा रहा था उसकी आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था वह मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रहा था बंद तो कर रहा था कि इसी समय चुप करो अपनी बहन की नंगी गांड पर चुंबनों की बौछार कर दें,,, लेकिन किसी तरह से अपने आप को रोक कर रखा था लेकिन अपनी बहन को पेशाब करता हुआ देखकर उसे भी बड़े चोरों की पेशाब लग गई थी लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा था,,,, वह तुरंत अपने पजामे में से अपने मोटे-तगडे लंड को बाहर निकाल दिया जो कि अपनी औकात में आकर खड़ा था,,,, उसे हाथ में पड़े हुए ही वह अपनी बहन से बोला।

वाह रानी तेरी गांड कितनी गोरी है और बेहद आकर्षक मेरा तो मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है इस पर से अपनी नजर हटाने को,,,(अपने भाई कि ईस तरह की बातें सुनकर रानी एकदम से शकपका गई,,,, उसकी हालत खराब हो रही है उसे समझ में आ गया था कि उसका भाई उसकी गांड की तरफ ही देख रहा है फिर भी वह थोड़ी हिम्मत जुटा कर नाराजगी जताते हुए बोली,,,,)



यह क्या कर रहे हो भैया मैं तुम्हें बोली थी ना कि यहां मत देखना,,,,(अपने भाई की तरफ देखे बिना ही वह बोली,,,)


अरे पगली इतना खूबसूरत नजारा बना कोई देखे बिना रह सकता है क्या मैं क्या मेरी जगह कोई और होता तो वह भी यही देखा सच में तेरी गांड बहुत खूबसूरत है,,,,,


भैया,,,(एकदम शरमाते हुए वह बोली अभी की वह बेठी हुई थी,,,, अपने भाई के मुंह से अपनी खूबसूरत गांड की तारीफ सुनकर वह मन ही मन शर्माने लगी थी,,,, हालांकि अभी भी उसके गुलाबी छेद में से पेशाब की धार रह रहकर बाहर निकल रही थी,,, इस मौके को सूरज अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए वह बोला,,,।)

तुझे पेशाब करता हुआ देखकर मुझे भी बड़ी जोरों की पेशाब लग गई है,,,,,(सूरज अपने लंड को हिलता हुआ बोला,,,,, लेकिन पेशाब लगने वाली बात सुनकर रानी की दोनों टांगों के बीच के उस पतली दरार में हलचल सी मचने लगी थी,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और उसका भाई क्या करने वाला है यह भी उसे नहीं मालूम था देखते ही देखते सूरज अपने लंड को हिलता हुआ ठीक अपनी बहन के बगल में जाकर खड़ा हो गया रानी अपने भाई को अपने बगल में खड़ा देखा कर एकदम से परेशान हो गई,,, लेकिन अभी तक वह अपने भाई की तरफ देखी नहीं थी,,, उसे नहीं मालूम था कि उसका भाई अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे हिला रहा है,,,,, अपने भाई की हरकत को देखते हुए वह एकदम से शर्म से पानी पानी होते हुए दबे स्वर में बोली,,,)

यह क्या भैया थोड़ा दूर जाकर करो ना मेरे पास ही क्यों खड़े हो,,,।

क्योंकि तुझे देख कर ही मुझे पेशाब लगी है,,,,, देख तो सही इसकी हालत क्या हो गई है,,,,(सूरज इस तरह से उत्तेजित होते हुए अपने लंड को हिलाते हुए बोला और उसकी बातें सुनकर रानी एक नजर अपने भाई की तरफ डाली तो वह देखते ही रह गई उसे नहीं मालूम था कि उसका भाई अपने लंड को बाहर निकाल कर अपने हाथ में लेकर हिला रहा है इस नजारे को देख कर रानी की हालत एकदम से खराब होने लगी है उसके बदन में उत्तेजनात्मक कंपन होने लगा वह एक टक अपने भाई के लंड को देखती ही रह गई,,, कुछ पल के लिए रानी को कुछ समझ में नहीं आया कि यह सब क्या हो रहा है लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी आंखों के सामने उसका भाई अपना लंड हिला रहा है तो इस बात का अहसास होते ही वह शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,, रानी की हालत को देखकर सूरज समझ गया था कि उसके मन में भी कुछ कुछ हो रहा है इसलिए वह उसे उकसाते हुए बोला,,,)


क्या हुआ शर्मा गई,,,, शर्माने से काम नहीं चलेगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए पेशाब करने लगा,,, उसके पेशाब की धार किया आवाज उसके कानों में एकदम साफ तरह से गूंज रही थी जिसे सुनकर वह एकदम से गनगना गई थी,,,, सांसों की गति एकदम भारी हो चली थी उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह समझ गई थी कि उसका भाई पूरी तरह से आज मनमानी करने पर उतारू हो चुका है लेकिन इस पर भी रानी को डर नहीं लग रहा था बल्कि उसका मन उत्साहित हुआ जा रहा था उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी। क्या करे क्या ना करें, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वैसे भी उसकी हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि उसे अपने घुटनों में कंपन महसूस हो रही थी उससे ठीक से बैठा नहीं जा रहा था‌ इस समय उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी वैसे तो उसके मन में अपने भाई की हरकत को देखने की बहुत ही इच्छा हो रही थी लेकिन वह शर्म के मारे अपनी नजर को ऊपर उठा नहीं पा रही थी लेकिन तभी जैसे उसकी इस इच्छा की पूर्ति के लिए सूरज बोला,,,,।)


देखने के लिए मैं यह कर रहा हूं और तू है कि शर्म से नजर नीचे झुकाई है एक बार देख तो सही,, मुझे मालूम है कि तू इस नजारे को पहले कभी नहीं देखी होगी,,, अगर अच्छी भी होगी तो इतनी नजदीक से नहीं देखी होगी देख तो सही तेरी बुर से इतनी तेज धार नहीं निकलती जितना मेरे लंड से धार निकल रही है,,,(सूरज पूरी तरह से बेशर्म हो चुका था और वैसे भी वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर मजा लेना है तो बेशर्म बनना पड़ेगा इसलिए इस तरह की बातें कर रहा था अपने मुंह से अपनी बहन के सामने लंड बुर जैसे शब्दों का प्रयोग करके वह उसकी भावनाओं को उकसाना चाहता था उसे उत्तेजित करना चाहता था और उसकी अवधारणा सही साबित हो रही थी अपने भाई के मुंह से लंड बुर जैसे शब्दों को सुनकर रानी की हालत एकदम खराब होने लगी उसके बाद में उत्तेजना पूरी तरह से अपना असर दिखने लगा वह इस बार अपने आप को अपने भाई की हरकत देखने से रोक नहीं पाई और तुरंत ही नजर उठा कर अपने भाई की तरफ देखने लगी,,,,।

और ऐसा लग रहा था कि जैसे सूरज ईसी पल का इंतजार कर रहा था जैसे ही उसकी बहन उसकी तरफ देखी वह अपने खड़े लंड को हाथ में पकड़कर ऊपर नीचे करके हिलाते हुए पेशाब करने लगा,,,, यह नजारा वास्तव में रानी के लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था,,, इस तरह के नजारे को उसने पहले कभी नहीं देखी थी,,,, इसलिए तो वह इस दृश्य को देखकर मदहोश हुइ जा रही थी,,, और होती भी कैसे नहीं इस तरह के नजारे को देख कर तो विवाहित औरत तीन चार बच्चों की मां अपना आपा खोदे मदहोश होकर उसके बदन से लिपट जाए,,, और यहां तो अभी-अभी जवानी की दहलीज पर कदम रखने वाली रानी थी इस तरह के नजर इस तरह की बातों को लेकर तो उसके मन में पहले से ही उत्सुकता बनी रहती थी इसलिए वह पूरी तरह से भाव विभोर हो चुकी थी।,, सूरज अपनी बहन की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह बोला,,,,,)


देखने से ज्यादा पकड़ने में मजा आएगा एक बार पकड़ कर देख,,,,।
(अपने भाई की बात सुनकर उसके बदन में झनझनाहट बढ़ने लगी क्योंकि वह अभी यही चाहती थी क्योंकि इससे पहले भी अपने भाई के लैंड को पकड़ चुकी थी और वाकई में उसे पकड़ने में जिस तरह की उसे देना का एहसास उसे होता था वह बेहद आनंद आया था इसलिए वह अपने भाई की बात सुनकर अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी और अपना हाथ अपने भाई के लंड की तरफ आगे बढ़ाकर उसे अपनी हथेली में दबोच ली ऐसा करने पर उसकी बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,, यह पाल रानी के लिए भी बेहद अद्भुत था उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, उसकी पेशाब की धार एकदम से टूट चुकी थी रह-रह कर उसकी गुलाबी छेद में से पेशाब की बूंदे बाहर टपक जा रही थी,,,, लेकिन उसके भाई के लंड से अभी भी पेशाब की धार निकल रही थी हालांकि अब वह इतनी तेज नहीं थी फिर भी यह बेहद अद्भुत नजारा था,,,, इस बार फिर से सूरज अपनी बेशर्मी दिखाते हुए बोला,,,)

कैसा लग रहा है रानी,,,,,।

(अपने भाई के मुंह से अपना नाम सुनकर इस बार उसे ऐसा नहीं लगा कि वह उसका नाम लेकर बुला रहा है बल्कि उसे ऐसा लग रहा था कि जब मरद उत्तेजित अवस्था में हो जाते हैं तो शायद इसी तरह से अपने साथी को बुलाते हैं इसलिए उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन उसके चेहरे के हाव-भाव सब कुछ बता रहे थे कि इस समय उसे कैसा लग रहा था और सूरज को अपने लंड पर अपनी बहन की हथेलियों का कसाव भी बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था जिससे साफ साबित हो रहा था कि उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,, इस अद्भुत आनंद के साथ ही सूरज की पेशाब कर चुका था लेकिन अब वह इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहता था आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था इस समय उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी और पूरा गांव गहरी नींद में सो रहा था।

अपनी बहन की भावनाओं का लाभ उठाते हुए वह उसके कंधे को पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठने लगा वह अच्छी तरह से जानता था कि कमर के नीचे वह भी नंगी है और उसका भी पजामा घुटनों तक है इसलिए वह तुरंत अपनी बहन को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों पर अपने होठ रखकर एक बार फिर से उसके होठों का रसपान करने लगा,, ऐसा हुआ पहले भी कर चुका था लेकिन इस बार की क्रिया में बहुत ज्यादा बदलाव था क्योंकि कमर के नीचे से दोनों नंगे थे दोनों का खूबसूरत कोमल अंगूर सूरज का मर्दाना कड़क अंग एकदम से उजागर थे और रानी को अपनी बाहों में लेते हैं उसका मर्दाना अंग उसके कोमल पर रगड़ खाने लगा जिसका एहसास रानी को पूरी तरह से कम कर दिया था वह मदहोश हुए जा रही थी और कसमसा रही थी लेकिन इस कसमसाहट में अपने आप ही उसकी बुर सूरज के लंड की तरफ दबाव देने लगी थी जिसे सूरज अत्यधिक उत्तेजना और अपनी बहन के मन की बात को अच्छी तरह से समझने लगा था,,,,।

वह इस रगड़ को और ज्यादा बनाते हुए अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर रख दिया और उसे अपनी दोनों हथेलियां में कसकर दबाते हुए उसे अपनी तरफ खींचने लगा ऐसा करने से उसके लंड का सुपाड़ा रानी के गुलाबी छेद के अग्रभाग पर और भी ज्यादा रगड़ और ठोकर मारने लगा,,,, सूरज के तरफ से यह हरकत रानी के लिए बेहद असहनीय होते जा रही थी वह कभी सोची नहीं थी कि उसका भाई इस तरह की हरकत करके उसे पूरी तरह से मस्ती कर देगा उससे यह मस्ती बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,, वह जानती थी कि समय वह दोनों कौन सी जगह पर है आधी रात से ज्यादा का समय हो चुका था और ऐसे में वह दोनों घर के बगल में ही जहां गाय भैंस बांधी जाती है उस जगह पर मदहोशी की सारी सीमाएं को पार कर रहे थे,,,, रानी को इस बात का अच्छी तरह से भान था कितनी रात को कोई देखेगा नहीं लेकिन एक बात की शंका उसके मन में थी कि अगर उसकी मां को पेशाब लग गई और वह भी बाहर ईसी जगह पर आ गई तो और दोनों को ईस हालत में देखेगी तो गजब हो जाएगा,,,,,, यही सोचकर वह धीरे से बोली,,,।

कोई आ जाएगा,,,।
(रानी का इतना कहना था कि उसके कहने के मतलब को सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि वह भी पूरी तरह से तैयारी आगे बढ़ने के लिए इसलिए अंदर ही अंदर खुश होते हुए वह कुछ बोला नहीं,,,, तुरंत उसे अपनी गोद में उठा ले उसके हरकत को देखकर रानी एकदम से घबराते हुए बोली,,,)

अरे अरे यह क्या कर रहे हो नीचे उतरो में गिर जाऊंगी,,,,।

मैं तुम्हें गिरने दूंगा तब ना,,,,,(और ऐसा कहते हुए वहां रानी को गोद में उठाए हुए घर की तरफ आगे बढ़ने लगा उसकी सलवार घुटनों तक थी वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी थी और वह खुद कमर के नीचे नंगा था उसका पजामा घुटनों में अटका हुआ था लेकिन वह जानता था कि अब जो कुछ भी करना है उसके लिए कपड़े उतारना ही होगा फिर पहनने की जरूरत ही क्या है और वैसे भी इतनी रात को कोई देखने वाला तो था नहीं इसलिए वह पूरी तरह से मस्ती में उसे गोद में उठाए हुए घर की तरफ आगे बढ़ने लगा देखते देखते वह दरवाजे तक पहुंच चुका था और दरवाजा धीरे से खोलकर धीरे से उसे बंद भी कर दिया लेकिन इस दौरान उसने अपनी बहन को नीचे नहीं उतरा यही देखकर रानी एकदम गदगद हुए जा रही थी और देखते-देखते वह अपनी बहन के कमरे तक पहुंच गया,,,,, धीरे से कमरे के दरवाजे को धक्का देकर वह भी अपनी बहन को गोद में लिए हुए ही कमरे में प्रवेश कर गया उसकी बहन मारे शर्म से पानी पानी हो रही थी उसे इस बात का एहसास हो गया था कि अब क्या होने वाला है इसलिए उसकी बोलती बंद हो चुकी थी लेकिन अंदर ही अंदर उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कमरे में पहुंचकर सूरज धीरे से उसे अपनी खोज से नीचे उतरा और दरवाजा बंद करके उस पर कड़ी लगा दिया,,,)
बहुत ही जबरदत अपडेट, रानी को भी लपेटे में ले लिया है राजू !!
 

lovlesh2002

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हिलाते रहो ....अपडेट है आह अपडेट बड़ा मजेदार
आह अपडेट बड़ा मजेदार
 
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Ajju Landwalia

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रात काफी हो चुकी थी चारों तरफ अंधेरा अंधेरा छाया हुआ था इसलिए घर से बाहर निकलने में रानी को डर लग रहा था वैसे तो वह इतनी रात को कभी भी पेशाब करने के लिए घर से बाहर नहीं निकलती थी क्योंकि वह सोने से पहले ही पेशाब करके सोई थी ताकि रात को उसे परेशानी ना हो अगर कभी बहुत ज्यादा दिक्कत हो जाती थी तो घर के आंगन में ही जहां पर बर्तन साफ किया जाता है वहीं बैठ जाती थी लेकिन वहां बैठने की उसकी आदत नहीं थी इसलिए पेशाब की तीव्रता को देखते हुए उसे घर से बाहर ही जाना था और सही समय पर सूरज भी अपने कमरे से बाहर आ गया था,, अपनी बहन रानी को इतनी रात को घर के आंगन में खड़ी देखा तो वह थोड़ा हैरान हुआ लेकिन जल्दी से पता चल गया कि उसकी बहन को बड़े जोरों से पेशाब लगी है और वह घर के बाहर जाना चाहती है लेकिन अंधेरे की वजह से डर रही है।

पेशाब लगने की बात से सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी और वह अपनी बहन के साथ घर के बाहर जाने के लिए तैयार हो गया था,,,, वैसे तो अगर ज्यादा दिक्कत होती तो रानी घर के आंगन में ही बैठ जाती लेकिन इस समय पर उसका भाई भी जाग गया था और उसके साथ चलने के लिए तैयार हो गया था इसलिए ना चाहते हुए भी उसे हां कहना पड़ा था और वैसे भी उसके दिल में भी अब कुछ कुछ होने लगा था,,,, रानी से पहले भी अपने भाई की आंखों के सामने पेशाब कर चुकी थी और वह भी जंगल जाते समय लेकिन वह जानबूझकर अपने भाई की आंखों के सामने बैठकर पेशाब नहीं कर रही थी वह तो बड़े से पत्थर के पीछे बिना बताए पेशाब कर रही थी उसका भाई उसे ढूंढता ढूंढता वहां पहुंच गया था,,,, और आज तो उसका भाई खुद उसके साथ चल रहा है उसे पेशाब करवाने के लिए इस बात से ही उसका दिल जोरो सेधड़क रहा था।

इस बात को रानी नहीं जानती थी कि उसका भाई उसे पहले भी पेशाब करते हुए देख चुका था और वह भी घर के बगल में ही जहां पर गाय भैंस बांधी जाती है तभी से तो वह रानी के जवानी का दीवाना हो चुका था,,,,, और वैसे भी दोनों के बीच बहुत कुछ जारी था जिसे बस आगे बढ़ाने की देरी थी जाने अनजाने में उत्तेजना बस रानी अपने भाई के लंड को पकड़ चुकी थी उसकी गरमाहट को अपनी हथेली में महसूस करके अपनी बुर से मदन रस टपका चुकी थी,,, इसलिए अपने भाई की उपस्थिति में उसके बदन में भी अजीब सी लहर उठने लगी थी। आखिरकार वह भी तो पूरी तरह से जवान हो चुकी थी उसके बदन में भी उसके खूबसूरत अंगों पर उभार आना शुरू हो गया था,,, अपने भाई की हरकतों की वजह से उसे भी औरत और मर्द के बीच के रिश्ते के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी,,,,।

अपने भाई के द्वारा किए गए स्तन मर्दन की मीठी चुभन अभी तक उसे अपने बदन में महसूस होती थी जिसे उसके अंदर आनंद की फुहार उठने लगती थी कोई और समय होता तो शायद वह अपने भाई के साथ इतनी रात को घर से बाहर हो भी पेशाब करने के लिए कभी ना जाती लेकिन न जाने की उसके मन के कोने में भी इस बात का एहसास होने लगा कि उसका भाई जो भी उसके साथ करता है उसमें आनंद ही आनंद है इसीलिए वह अपने भाई के साथ बाहर जाने के लिए तैयार हो चुकी थी,,, थोड़ी देर में सूरज धीरे से दरवाजा खुला होता घर के बाहर आ गया और उसके पीछे से पीछे उसकी बहन भी घर से बाहर निकल आई बाहर वास्तव में चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था,,,। इतना अंधेरा था कि दो-तीन मीटर की दूरी पर देखने पर कुछ भी दिखाई नहीं देता था,,, आधी रात से ज्यादा समय होने की वजह से चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था सिर्फ रहकर कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी,,,,।

घर से बाहर निकालने के बाद सूरज चारों तरफ नजर घुमा कर देख रहा था कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और यही काम रानी भी कर रही थी उसे तो इस बात का डर था की कही भूत प्रेत दिखाई ना दे,,, इसलिए उसके मन में डर बसा हुआ था,,,, पेशाब की तीव्रता के कारण विवाह कुछ देर तक इसी तरह से खड़ी होकर चारों तरफ नजर घुमा कर देती रही तो उसका भाई सूरज बोला।

क्या हुआ क्या देख रही हो यही बैठकर कर लो,,,,( हाथ के इशारे से पास में ही बैठने के लिए बोला जो की ठीक उसके घर के दरवाजे के सामने ही था इसलिए रानी बोली,,)

पागल हो गए हो क्या दरवाजे के सामने ही,,,।

तो क्या हो गया इतनी रात को कौन देखने वाला है,,,।

अरे भले कोई देखने वाला नहीं है लेकिन फिर भी अच्छा थोड़ी ना लगता है ऐसे तो फिर मुझे घर में अपने ही कमरे में बैठ जाना चाहिए था।


यह भी सही है इतनी रात को घर से बाहर निकलने से तो अच्छा ही है,,,।

क्या भैया तुम भी,,,,।

चल अच्छा जल्दी कर जहां बैठना ही बैठ जा कहीं ऐसा ना हो कि तो जगह ढूंढती रह जाएे और तेरी सलवार गीली हो जाए,,,।
(अपने भाई की इस तरह की बातें सुनकर वह शर्म से पानी पानी होने लगी,,,, वैसे अगर उसका भाई है बात कभी और कहां होता जब दोनों के बीच इस तरह का आकर्षण ना था तब उसे थोड़ा अपने भाई की बात से ऐतराज होता लेकिन उसकी हरकत को देखकर रानी को हैरानी नहीं हुई थी लेकिन फिर भी शर्म से उसके गाल लाल हो गए थे। अपने भाई की बात पर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

क्या भैया मुझे इस तरह की बात करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती,,,,।

अब कैसी शर्म तुझे पता है ना तालाब में हम दोनों एकदम नंगे होकर नहाए थे और तु तालाब मै मछली समझ कर मेरे लंड को पकड़ ली थी,,, और घर में भी मैं तुझे अपना लंड पकड़ा चुका हूं इसलिए अब शर्म करने की कोई जरूरत नहीं है,,,।
(अपने भाई की बेशर्मी भरी बातें सुनकर रानी समझ गई थी कि अपने भाई से बहस करना उचित नहीं है इसलिए वह कुछ बोली नहीं लेकिन अपने भाई के लिए इस तरह की बातें उसे अच्छी लग रही थी और उसे उत्तेजित कर रही थी क्योंकि इससे पहले वह लंड जैसे शब्दों को बहुत कम ही सुनी थी और वह भी गांव में जब कभी झगड़ा हो जाता था तब एक दूसरे को गाली देते समय लेकिन उसका भाई खुलकर उसके सामने ईस शब्द का प्रयोग कर रहा था इसलिए इस शब्द को सुनकर उसके बदन में हलचल सी मचने लगती थी,,, अपने भाई से बिना कुछ बोले वह घर के बगल वाली जगह पर जाने लगी जहां पर गाय भैंस बांधी जाती थी,,,, सूरज भी जानता था कि उसकी बहन वहीं पर पेशाब करती थी,,,, कुछ देर सूरज उसे घर के बगल वाले हिस्से में जाते हुए देखा रहा लेकिन फिर धीरे से उसके पीछे चल दिया और रानी भी यह देखना चाहती थी कि उसका भाई उसके पीछे आता है कि नहीं इसलिए पीछे नजर घूमर उसकी तरफ देख रही थी और उसके देखने के बाद ही सूरज मुस्कुराता हुआ उसके पीछे चल दिया था।

रानी के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका भाई उसके साथ ही है और उसकी हरकत को वह जरुर देखेगा उसे पेशाब करते हुए जरुर देखेगा इसलिए उसे शर्म महसूस हो रही थी दो बार तो अनजाने में उसका भाई देख चुका था लेकिन इस बार तो सब कुछ उसकी आंखों के सामने ही होना था इसलिए उसके दिल की धड़कन बढ़ रही थी और बदन में अजीब सी कसमसाहट हो रही थी,,,, देखते देखते रानी अपने निश्चित जगह पर पहुंच चुकी थी चारों तरफ अंधेरा गहराया हुआ था इसलिए उसके मन में भी यही हो रहा था कि उसके भाई को वह ठीक तरह से नहीं दिखाई देगी। वह नजर घुमा कर देखी तो उसका भाई उसे तीन चार कदम की ही दूरी पर खड़ा था इसलिए वह बोली।

भैया तू तो इतने पास खड़ा है मुझे शर्म आती है थोड़ा दूर जाकर खड़े हो जा और हां मेरी तरफ देखना नहीं,,,।

अरे मैं बिल्कुल भी नहीं देखूंगा लेकिन अगर मैं डर जाऊंगा तो तू डर जाएगी देखा तो सही कितना अंधेरा है कहीं भूत चुड़ैल आ गए तो तो क्या करेगी,,,,(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बहन रानी भूत प्रेत से ज्यादा घबराती थी इसलिए उसकी बात सुनते ही,,, वह घबराते हुए बोली,,,)

अच्छा,,, ठीक है भैया तू दूर मत जा लेकिन मेरी तरफ मत देखना मुझे बहुत शर्म आती है,,,।

ठीक है नहीं देखुंगा तु जल्दी कर,,, मुतने में बहुत समय लगा रही है,,,।
(एक बार फिर से सूरज ने अपनी बहन पर शब्दों के बाण चलाया था,,, और यह बाण रानी को अपनी दोनों टांगों के बीच लगता हुआ महसूस हो रहा था क्योंकि अपने भाई की बात सुनकर उसके बदन में खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच सुरसुराहट बढ़ने लगी थी,,,, इस बार वह अपने भाई से कुछ बोल नहीं पाई,,,, और अपने भाई से थोड़ी दूरी बनाकर अपने सलवार की डोरी को खोलने लगी यह देखकर सूरज के तन बदन में आग लगने लगे क्योंकि,,, उसकी आंखों के सामने उसकी बहन उसकी जानकारी में ही अपने सलवार की डोरी खोलकर कुछ ही देर में अपनी नंगी गांड दिखाने वाली थी।

यह पल और भी ज्यादा अद्भुत और उत्तेजनात्मक होता है जब सामने वाले को पता हो और उसके सामने ही कपड़े उतारा जाए,,,, रानी का दिल तो जोरो से धड़क रहा था,,, एक अजीब सा एहसास उसके बदन को अपनी आगोश में ले रहा था वह जानती थी कि वह अपने भाई की आंखों के सामने क्या करने जा रही है लेकिन वह अपने आप को रोक भी नहीं सकती थी ना ही इनकार कर सकती थी क्योंकि वह मजबूर थी पेशाब की तीव्रता उसे मजबूर कर रही थी अपने भाई की आंखों के सामने ही पेशाब करने के लिए,,,, लेकिन जहां एक तरफ उसे थोड़ा अजीब लग रहा था अपने भाई के सामने पेशाब करने में वहीं दूसरी तरफ उसकी उत्सुकता भी इस बात से और ज्यादा बढ़ती जा रही थी कि अपने भाई की आंखों के सामने पेशाब करने में कैसा महसूस होता है।

वैसे तो वह अनजाने में अपने भाई के सामने पेशाब कर चुकी थी लेकिन वह समय कुछ और था वह अपने भाई को ठीक तरह से जानती नहीं थी उसके अंदर क्या चल रहा है इस बारे में उसे नहीं मालूम था,,, लेकिन वह धीरे-धीरे अपने भाई को समझने की वह समझ गई थी कि उसका भाई भी दूसरे गंदे लड़को की तरह हो चुका है जो किसी न किसी बहाने औरत के अंगों को देखने और उन्हें झांकने की कोशिश में लगे रहते थे लेकिन इससे वह परेशान नहीं थी बल्कि न जाने क्यों खुश थी। इसलिए वह भी इस अद्भुत अनुभव से गुजरना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि जब उसकी बुर से पेशाब की धार के साथ सिटी की आवाज निकलती है तब उसके भाई पर उसका कैसा प्रभाव पड़ता है। यही सब सो कर उसके मन की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।

सलवार की डोरी उसके दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों में आ चुकी थी लेकिन फिर भी उसे खींचकर ढीली करने में वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी,,, वास्तव में एक भाई के सामने एक बहन का यही हाल होता है जब उसकी आंखों के सामने अपनी सलवार की डोरी खोलकर पेशाब करने पर मजबूर हो जाती,,, और यही कार्य तब और भी ज्यादा मादकता और मदहोशी का रूप धारण कर लेता जब दोनों के बीच में सारे आकर्षण के साथ-साथ शारीरिक संबंध स्थापित हो गया हो तब यह उत्तेजना और आकर्षक और भी ज्यादा मदहोशी में बदल जाता,,,, लेकिन इससे अद्भुत अनुभव के लिए अभी दोनों एक कदम पीछे थे,,,, मंजिल अभी भी दूर और दोनों को नजर भी आ रही थी लेकिन यह सफर कितना लंबा चलता है यह दोनों को अंदाजा नहीं था।

कुछ समय बीतने के बाद जब सूरज ने देखा कि उसकी बहन सलवार की डोरी पर सिर्फ हाथ रखकर खड़ी है उसे खोल नहीं रही है तो वह बोला,,,,।

क्या कर रही है रानी कितना देर लगेगी सलवार खोलने में,,,,।
(उसकी बात सुनकर हैरान होते हुए रानी बोली,,,)


क्या भैया तुम मुझे देख रहे हो क्या,,,?

अरे देख नहीं रहा हूं लेकिन फिर भी इतना समय लग रहा है तो पता तो चल ही जाएगा ना,,,, जल्दी करो पूरी रात यही बीताओगी क्या,,,,!

(अपने भाई किस तरह की बातें सुनकर रानी के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,, लेकिन करना तो था ही,,, इसलिए अपने मन को मजबूत करके,,, रानी अपनी सलवार की डोरी को खींचकर ढीली कर दी,,,, रानी के हाथों की हलचल पीछे खड़ा सूरज अच्छी तरह से देख रहा था और उसकी सरकार से उसकी आंखों में मदहोशी छाने लगी थी क्योंकि वह जानता था कि थोड़ी ही देर में,, उसकी बहन अपनी सलवार उतार कर उसे अपनी नंगी गांड दिखाएगी,,, सूरज की भी हालत खराब हो रही थी उसका भी दिल जोरो से धड़क रहा था और देखते ही देखते रानी अपनी सलवार को जो उसकी कमर से अभी भी कई हुई थी अपनी उंगली का सहारा लेकर उसे ढीली कर दी और अपनी हथेली में पकड़े हुए ही,,, उसे नीचे की तरफ सरकाने लगी,,,, रानी जो एक तरफ शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी वहीं दूसरी तरफ,, उसके मन में भी अपने भाई को अपनी नंगी गांड दिखाने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी,,,, क्योंकि इस तरह के नजारे को देखने के बाद ही उसका भाई उसे आनंद देता था।

सलवार को दोनों हाथों में पकड़ कर धीरे-धीरे अपनी सलवार को नीचे की तरफ सरकाने लगी और जैसे-जैसे उसकी सलवार नीचे जा रही थी वैसे-वैसे उसके नितंबों का उभार भी उजागर होता जा रहा था,,, और सूरज की हालत खराब होती जा रही थी देखते-देखते रानी अपनी सलवार को अपने घुटनों से खींच दी थी उसकी नंगी गांड एकदम से दिखने लगी थी अंधेरी रात में भी उसकी गोरी गोरी गांड चमक रही थी जिसे देखकर सूरज के मुंह में और उसके लंड में पानी आ रहा था,,, इतने से ही सूरज का लंड अपनी औकात में आ चुका था,,, सूरज भी जानता था कि उसकी बहन भी उसकी हरकतों का आनंद लेती है इसीलिए उसे पक्का विश्वास था कि अगर वह अपनी बहन के साथ कुछ ऐसा वैसा करेगा तो उसकी बहन उसका बिल्कुल भी विरोध नहीं करेगी बल्कि उसकी हरकतों का मजा लेगी यह विश्वास उसके मन में आते ही उसकी हिम्मत बढ़ने लगी थी,,,‌

सलवार को घुटनों तक खींचकर रानी अपने भाई की तरफ देखे बिना ही बोली।


तुम मेरी तरफ देखा तो नहीं रहे हो ना भैया,,,।

नहीं बिल्कुल भी नहीं वैसे भी मैं तेरी गांड को पहले भी देख चुका हूं इसलिए अभी नहीं देख रहा हूं,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए एकदम बेशर्मी भरे लहजे में बोल रहा था ताकि उसके शब्दों का असर रानी पर पड़े और वाकई में सूरज के अश्लील शब्दों का प्रयोग रानी पर हथौड़े की तरह चल रहा था उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी और वह कुछ बोल नहीं पाई और धीरे से उसी तरह से बैठ गई,,, उसके और उसके भाई के बीच केवल तीन-चार कदमों की ही दूरी थी या यूं कह लों की उसका भाई ठीक उसके पीछे ही खड़ा था,,,, पेशाब की तीव्रता के कारण बैठते ही रानी के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार एकदम से फूट पड़ी और पेशाब की धार के साथ उसमें से एक अद्भुत सीटी की आवाज निकालने लगी जो कि तुरंत ही सूरज के कानों में मदहोशी का रस घोलने लगी उस ध्वनि को सुनकर सूरज की हालत खराब होने लगी वह उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान होने लगा,,, भले ही वह अपनी बहन से बोल रहा था कि वह उसकी तरफ नहीं देख रहा है लेकिन उसकी नजर एकदम बराबर उसकी गोलाकार नितंबों पर ही टिकी हुई थी जो की रात के अंधेरे में भी एकदम साफ दिखाई दे रही थी।

रानी भलभला कर पेशाब कर रही थी,,, वाकई में उसे बड़ी जोरों के पेशाब लगी थी,,,,, जहां एक तरफ पेशाब की ध्वनि और उसमें से निकल रही सिटी की आवाज को सुनकर सूरज अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था हमारी दूसरी तरफ रानी को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी बुर से एक ध्वनी निकल रही है जो उसके भाई को भी साफ सुनाई दे रही होगी और यही सोच कर वह शर्म से पानी पानी हो रही थी,,, रानी बहुत कोशिश की कि उसकी बुर से पेशाब की तीव्रता आराम से बाहर की तरफ निकले और सीटी की आवाज दब जाए लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था क्योंकि यह सब उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं था वह इसीलिए उत्तेजना से कसमसा रही थी,,, वह अपने मन में यह सोचकर परेशान हो रही थी कि उसका भाई बुरे से निकलने वाली सिटी की आवाज सुनकर क्या सोच रहा होगा,,,,।

सूरज तो अपनी बहन की नंगी गांड देखकर पागल हुआ जा रहा था उसकी आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था वह मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रहा था बंद तो कर रहा था कि इसी समय चुप करो अपनी बहन की नंगी गांड पर चुंबनों की बौछार कर दें,,, लेकिन किसी तरह से अपने आप को रोक कर रखा था लेकिन अपनी बहन को पेशाब करता हुआ देखकर उसे भी बड़े चोरों की पेशाब लग गई थी लेकिन उसके मन में कुछ और चल रहा था,,,, वह तुरंत अपने पजामे में से अपने मोटे-तगडे लंड को बाहर निकाल दिया जो कि अपनी औकात में आकर खड़ा था,,,, उसे हाथ में पड़े हुए ही वह अपनी बहन से बोला।

वाह रानी तेरी गांड कितनी गोरी है और बेहद आकर्षक मेरा तो मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है इस पर से अपनी नजर हटाने को,,,(अपने भाई कि ईस तरह की बातें सुनकर रानी एकदम से शकपका गई,,,, उसकी हालत खराब हो रही है उसे समझ में आ गया था कि उसका भाई उसकी गांड की तरफ ही देख रहा है फिर भी वह थोड़ी हिम्मत जुटा कर नाराजगी जताते हुए बोली,,,,)



यह क्या कर रहे हो भैया मैं तुम्हें बोली थी ना कि यहां मत देखना,,,,(अपने भाई की तरफ देखे बिना ही वह बोली,,,)


अरे पगली इतना खूबसूरत नजारा बना कोई देखे बिना रह सकता है क्या मैं क्या मेरी जगह कोई और होता तो वह भी यही देखा सच में तेरी गांड बहुत खूबसूरत है,,,,,


भैया,,,(एकदम शरमाते हुए वह बोली अभी की वह बेठी हुई थी,,,, अपने भाई के मुंह से अपनी खूबसूरत गांड की तारीफ सुनकर वह मन ही मन शर्माने लगी थी,,,, हालांकि अभी भी उसके गुलाबी छेद में से पेशाब की धार रह रहकर बाहर निकल रही थी,,, इस मौके को सूरज अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए वह बोला,,,।)

तुझे पेशाब करता हुआ देखकर मुझे भी बड़ी जोरों की पेशाब लग गई है,,,,,(सूरज अपने लंड को हिलता हुआ बोला,,,,, लेकिन पेशाब लगने वाली बात सुनकर रानी की दोनों टांगों के बीच के उस पतली दरार में हलचल सी मचने लगी थी,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और उसका भाई क्या करने वाला है यह भी उसे नहीं मालूम था देखते ही देखते सूरज अपने लंड को हिलता हुआ ठीक अपनी बहन के बगल में जाकर खड़ा हो गया रानी अपने भाई को अपने बगल में खड़ा देखा कर एकदम से परेशान हो गई,,, लेकिन अभी तक वह अपने भाई की तरफ देखी नहीं थी,,, उसे नहीं मालूम था कि उसका भाई अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे हिला रहा है,,,,, अपने भाई की हरकत को देखते हुए वह एकदम से शर्म से पानी पानी होते हुए दबे स्वर में बोली,,,)

यह क्या भैया थोड़ा दूर जाकर करो ना मेरे पास ही क्यों खड़े हो,,,।

क्योंकि तुझे देख कर ही मुझे पेशाब लगी है,,,,, देख तो सही इसकी हालत क्या हो गई है,,,,(सूरज इस तरह से उत्तेजित होते हुए अपने लंड को हिलाते हुए बोला और उसकी बातें सुनकर रानी एक नजर अपने भाई की तरफ डाली तो वह देखते ही रह गई उसे नहीं मालूम था कि उसका भाई अपने लंड को बाहर निकाल कर अपने हाथ में लेकर हिला रहा है इस नजारे को देख कर रानी की हालत एकदम से खराब होने लगी है उसके बदन में उत्तेजनात्मक कंपन होने लगा वह एक टक अपने भाई के लंड को देखती ही रह गई,,, कुछ पल के लिए रानी को कुछ समझ में नहीं आया कि यह सब क्या हो रहा है लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी आंखों के सामने उसका भाई अपना लंड हिला रहा है तो इस बात का अहसास होते ही वह शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,, रानी की हालत को देखकर सूरज समझ गया था कि उसके मन में भी कुछ कुछ हो रहा है इसलिए वह उसे उकसाते हुए बोला,,,)


क्या हुआ शर्मा गई,,,, शर्माने से काम नहीं चलेगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए पेशाब करने लगा,,, उसके पेशाब की धार किया आवाज उसके कानों में एकदम साफ तरह से गूंज रही थी जिसे सुनकर वह एकदम से गनगना गई थी,,,, सांसों की गति एकदम भारी हो चली थी उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह समझ गई थी कि उसका भाई पूरी तरह से आज मनमानी करने पर उतारू हो चुका है लेकिन इस पर भी रानी को डर नहीं लग रहा था बल्कि उसका मन उत्साहित हुआ जा रहा था उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी। क्या करे क्या ना करें, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वैसे भी उसकी हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि उसे अपने घुटनों में कंपन महसूस हो रही थी उससे ठीक से बैठा नहीं जा रहा था‌ इस समय उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी वैसे तो उसके मन में अपने भाई की हरकत को देखने की बहुत ही इच्छा हो रही थी लेकिन वह शर्म के मारे अपनी नजर को ऊपर उठा नहीं पा रही थी लेकिन तभी जैसे उसकी इस इच्छा की पूर्ति के लिए सूरज बोला,,,,।)


देखने के लिए मैं यह कर रहा हूं और तू है कि शर्म से नजर नीचे झुकाई है एक बार देख तो सही,, मुझे मालूम है कि तू इस नजारे को पहले कभी नहीं देखी होगी,,, अगर अच्छी भी होगी तो इतनी नजदीक से नहीं देखी होगी देख तो सही तेरी बुर से इतनी तेज धार नहीं निकलती जितना मेरे लंड से धार निकल रही है,,,(सूरज पूरी तरह से बेशर्म हो चुका था और वैसे भी वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर मजा लेना है तो बेशर्म बनना पड़ेगा इसलिए इस तरह की बातें कर रहा था अपने मुंह से अपनी बहन के सामने लंड बुर जैसे शब्दों का प्रयोग करके वह उसकी भावनाओं को उकसाना चाहता था उसे उत्तेजित करना चाहता था और उसकी अवधारणा सही साबित हो रही थी अपने भाई के मुंह से लंड बुर जैसे शब्दों को सुनकर रानी की हालत एकदम खराब होने लगी उसके बाद में उत्तेजना पूरी तरह से अपना असर दिखने लगा वह इस बार अपने आप को अपने भाई की हरकत देखने से रोक नहीं पाई और तुरंत ही नजर उठा कर अपने भाई की तरफ देखने लगी,,,,।

और ऐसा लग रहा था कि जैसे सूरज ईसी पल का इंतजार कर रहा था जैसे ही उसकी बहन उसकी तरफ देखी वह अपने खड़े लंड को हाथ में पकड़कर ऊपर नीचे करके हिलाते हुए पेशाब करने लगा,,,, यह नजारा वास्तव में रानी के लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था,,, इस तरह के नजारे को उसने पहले कभी नहीं देखी थी,,,, इसलिए तो वह इस दृश्य को देखकर मदहोश हुइ जा रही थी,,, और होती भी कैसे नहीं इस तरह के नजारे को देख कर तो विवाहित औरत तीन चार बच्चों की मां अपना आपा खोदे मदहोश होकर उसके बदन से लिपट जाए,,, और यहां तो अभी-अभी जवानी की दहलीज पर कदम रखने वाली रानी थी इस तरह के नजर इस तरह की बातों को लेकर तो उसके मन में पहले से ही उत्सुकता बनी रहती थी इसलिए वह पूरी तरह से भाव विभोर हो चुकी थी।,, सूरज अपनी बहन की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह बोला,,,,,)


देखने से ज्यादा पकड़ने में मजा आएगा एक बार पकड़ कर देख,,,,।
(अपने भाई की बात सुनकर उसके बदन में झनझनाहट बढ़ने लगी क्योंकि वह अभी यही चाहती थी क्योंकि इससे पहले भी अपने भाई के लैंड को पकड़ चुकी थी और वाकई में उसे पकड़ने में जिस तरह की उसे देना का एहसास उसे होता था वह बेहद आनंद आया था इसलिए वह अपने भाई की बात सुनकर अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी और अपना हाथ अपने भाई के लंड की तरफ आगे बढ़ाकर उसे अपनी हथेली में दबोच ली ऐसा करने पर उसकी बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,, यह पाल रानी के लिए भी बेहद अद्भुत था उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, उसकी पेशाब की धार एकदम से टूट चुकी थी रह-रह कर उसकी गुलाबी छेद में से पेशाब की बूंदे बाहर टपक जा रही थी,,,, लेकिन उसके भाई के लंड से अभी भी पेशाब की धार निकल रही थी हालांकि अब वह इतनी तेज नहीं थी फिर भी यह बेहद अद्भुत नजारा था,,,, इस बार फिर से सूरज अपनी बेशर्मी दिखाते हुए बोला,,,)

कैसा लग रहा है रानी,,,,,।

(अपने भाई के मुंह से अपना नाम सुनकर इस बार उसे ऐसा नहीं लगा कि वह उसका नाम लेकर बुला रहा है बल्कि उसे ऐसा लग रहा था कि जब मरद उत्तेजित अवस्था में हो जाते हैं तो शायद इसी तरह से अपने साथी को बुलाते हैं इसलिए उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन उसके चेहरे के हाव-भाव सब कुछ बता रहे थे कि इस समय उसे कैसा लग रहा था और सूरज को अपने लंड पर अपनी बहन की हथेलियों का कसाव भी बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था जिससे साफ साबित हो रहा था कि उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,, इस अद्भुत आनंद के साथ ही सूरज की पेशाब कर चुका था लेकिन अब वह इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहता था आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था इस समय उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी और पूरा गांव गहरी नींद में सो रहा था।

अपनी बहन की भावनाओं का लाभ उठाते हुए वह उसके कंधे को पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठने लगा वह अच्छी तरह से जानता था कि कमर के नीचे वह भी नंगी है और उसका भी पजामा घुटनों तक है इसलिए वह तुरंत अपनी बहन को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों पर अपने होठ रखकर एक बार फिर से उसके होठों का रसपान करने लगा,, ऐसा हुआ पहले भी कर चुका था लेकिन इस बार की क्रिया में बहुत ज्यादा बदलाव था क्योंकि कमर के नीचे से दोनों नंगे थे दोनों का खूबसूरत कोमल अंगूर सूरज का मर्दाना कड़क अंग एकदम से उजागर थे और रानी को अपनी बाहों में लेते हैं उसका मर्दाना अंग उसके कोमल पर रगड़ खाने लगा जिसका एहसास रानी को पूरी तरह से कम कर दिया था वह मदहोश हुए जा रही थी और कसमसा रही थी लेकिन इस कसमसाहट में अपने आप ही उसकी बुर सूरज के लंड की तरफ दबाव देने लगी थी जिसे सूरज अत्यधिक उत्तेजना और अपनी बहन के मन की बात को अच्छी तरह से समझने लगा था,,,,।

वह इस रगड़ को और ज्यादा बनाते हुए अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर रख दिया और उसे अपनी दोनों हथेलियां में कसकर दबाते हुए उसे अपनी तरफ खींचने लगा ऐसा करने से उसके लंड का सुपाड़ा रानी के गुलाबी छेद के अग्रभाग पर और भी ज्यादा रगड़ और ठोकर मारने लगा,,,, सूरज के तरफ से यह हरकत रानी के लिए बेहद असहनीय होते जा रही थी वह कभी सोची नहीं थी कि उसका भाई इस तरह की हरकत करके उसे पूरी तरह से मस्ती कर देगा उससे यह मस्ती बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,, वह जानती थी कि समय वह दोनों कौन सी जगह पर है आधी रात से ज्यादा का समय हो चुका था और ऐसे में वह दोनों घर के बगल में ही जहां गाय भैंस बांधी जाती है उस जगह पर मदहोशी की सारी सीमाएं को पार कर रहे थे,,,, रानी को इस बात का अच्छी तरह से भान था कितनी रात को कोई देखेगा नहीं लेकिन एक बात की शंका उसके मन में थी कि अगर उसकी मां को पेशाब लग गई और वह भी बाहर ईसी जगह पर आ गई तो और दोनों को ईस हालत में देखेगी तो गजब हो जाएगा,,,,,, यही सोचकर वह धीरे से बोली,,,।

कोई आ जाएगा,,,।
(रानी का इतना कहना था कि उसके कहने के मतलब को सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि वह भी पूरी तरह से तैयारी आगे बढ़ने के लिए इसलिए अंदर ही अंदर खुश होते हुए वह कुछ बोला नहीं,,,, तुरंत उसे अपनी गोद में उठा ले उसके हरकत को देखकर रानी एकदम से घबराते हुए बोली,,,)

अरे अरे यह क्या कर रहे हो नीचे उतरो में गिर जाऊंगी,,,,।

मैं तुम्हें गिरने दूंगा तब ना,,,,,(और ऐसा कहते हुए वहां रानी को गोद में उठाए हुए घर की तरफ आगे बढ़ने लगा उसकी सलवार घुटनों तक थी वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी थी और वह खुद कमर के नीचे नंगा था उसका पजामा घुटनों में अटका हुआ था लेकिन वह जानता था कि अब जो कुछ भी करना है उसके लिए कपड़े उतारना ही होगा फिर पहनने की जरूरत ही क्या है और वैसे भी इतनी रात को कोई देखने वाला तो था नहीं इसलिए वह पूरी तरह से मस्ती में उसे गोद में उठाए हुए घर की तरफ आगे बढ़ने लगा देखते देखते वह दरवाजे तक पहुंच चुका था और दरवाजा धीरे से खोलकर धीरे से उसे बंद भी कर दिया लेकिन इस दौरान उसने अपनी बहन को नीचे नहीं उतरा यही देखकर रानी एकदम गदगद हुए जा रही थी और देखते-देखते वह अपनी बहन के कमरे तक पहुंच गया,,,,, धीरे से कमरे के दरवाजे को धक्का देकर वह भी अपनी बहन को गोद में लिए हुए ही कमरे में प्रवेश कर गया उसकी बहन मारे शर्म से पानी पानी हो रही थी उसे इस बात का एहसास हो गया था कि अब क्या होने वाला है इसलिए उसकी बोलती बंद हो चुकी थी लेकिन अंदर ही अंदर उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कमरे में पहुंचकर सूरज धीरे से उसे अपनी खोज से नीचे उतरा और दरवाजा बंद करके उस पर कड़ी लगा दिया,,,)

Gazab ki update he rohnny4545 Bro,

Kamukta aur uttejna se bharpur

Keep rocking Bro
 
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Arjunsingh287

No nude av pic
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भाई यंहा तक तो कहानी पड़ ली आगे पड़ने की हिम्मत नहीं हो रही sorry yaar.
कहानी का प्लोट अच्छा है. लेकिन कहानी बहुत ही पकोयु है कुछ ज्यादा ही लम्बा खींच रहे हो पात्र की सोचने सोचने मे.
एक ही बात को बार बार रिपीट कर रहे हो.
Once again sorry.... 🥺🥺
 
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