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Incest बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम

Rekha ben

Bete ki diwani
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आइए दोस्तों अब थोडा present मे चलते है देखते है यहा क्या हो रहा है ।

सुधिया और कल्लू पर आया दूखों का तूफान शांत तो नही हुआ था लेकिन अपना गाॅव छोडकर सुधिया सुरक्षित महसूस कर रही थी और करती भी क्यूँ ना जहा उसके पति और बेटे की हत्या हुई हो वो गाॅव उसके और उसके एकमात्र सहारे अर्थात उसके बेटे कल्लू के लिए सुरक्षित कैसे हो सकता था भला । दोनो माॅ बेटे अपना गाॅव पीछे छोडकर एक जाने पहचाने गाॅव चले आये थे जो सुधियाँ का मायका था, दिल मे बदले की आग थी किसी भी तरह लाला और उसके आदमियों से हरिया से बदला लेना था, बस इंतजार था शक्ति एकत्रित करने का अपनी ताकत बढने का इंतजार था दोनो माॅ बेटे को ।

सुधिया और कल्लू घर पहुचते है , घर काफी समय से बंद पडा था दोनो माॅ बेटे घर की साफ सफाई मे जूट जाते है तभी पड़ोस मे रहनेवाली मीना भाभी की नजर उन दोनो पर पडती है और वो सुधिया से मिलने चली आती है

(सुधिया का मायका मीना की ससुराल थी, थे तो दोनो पडोसी लेकिन दोनो पक्की सहेलियां थी और रिश्ता था ननद भाभी का )

मीना- का ही ननद रानी, कब आई हो ?
(यह आवाज सुनते ही सुधिया की ऑखे भर आती है और वो फौरन मीना से लिपटकर रोने लगती है )

मीना - का हुआ बन्नो, क्यू रो रही हो ........और इ का ....इ तोरी मांग काहे सूनी है , बेचन बाबू कहा है ...?

मीना सुधिया की हालत देखकर अधीर होने लगी और सुधियाँ के जवाब का इंतजार करने लगी , अपनी माॅ को रोता देख कल्लू भी रोने लगा , इस तरह दोनो माॅ बेटों को रोता देख मीना के मन मे जो सवाल थे कही हद तक उन सवालो को जवाब उसे मिल चुका था

सुधिया- (रोते हुए ) भाभी ........सब बर्बाद हो गया भाभी ,
मै कही की नही रही सब बर्बाद हो गया , कल्लू के
बापू और मल्लू को मार दिया भाभी , उन
जालिमों ने मार दिया( इतना कहकर सुधिया मीना
से लिपटकर रोने लगी )

मीना- (रोते हुए) बात क्या हुई है बताओ सुधिया किसने
मारा बेचन बाबू को

( सुधिया ने सारी आप बीती मीना को बताई कि कैसे हरिया ने उसके पति और बेटे की हत्या की आसपास के मुहल्ले की सारी औरतों की भीड इकठ्ठा हो चुकी थी लोग सांत्वना और दिलासा दिए जा रहे थे , इसी तरह कुछ दिन बीत गए मीना रोज सुधियाँ के घर आती दुख के समय वह उसे अकेला नही छोड़ना चाहती थी )

एक शाम .....

सुधिया- अरे भाभी आओ बैठो , मै चाय बनाती हू

मीना- ना बन्नो चाय रहने दे, मुझे जरूरी बात करनी है
तोसे..

सुधिया- हा भाभी बोलिए ना का बात है

मीना- गाॅव वाले कहते है ...तोरे परिवार को बूरी नजर लग गई अच्छा भला हसता खेलता परिवार था और सब बर्बाद हो गया , और तू लाला से बदला लेना चाहती है कैसे लेगी बदला , मैने सूना है लाला बहुत ताकतवर है ।

सुधिया- हा भाभी बात तो सही है लेकिन मै अपने बेटे और पति के साथ हुए अपराध के लिए लाला को और उसके कुत्तो को सजा देना चाहती हू और ये काम और कोई नही मेरा बेटा कल्लू करेगा

मीना- कल्लू करेगा ! तू उसकी जान भी खतरे मे डालना चाहती है , शरीर देख अपने बेटे का कितना कमजोर हो गया है वो लाला का आदमियों से लडेगा! मेरी एक सलाह मानेगी

सुधिया- कैसी सलाह भाभी

मीना- देख बन्नो मुझसे ये तेरा दुख देखा नही जाता और विधवा होने का दर्द क्या होता है ये मुझसे अच्छा कौन जान सकता है , मै तेरी और कल्लू बेटे की खूशी चाहती हू इसलिए मना मत करना

सुधिया- हा भाभी बात क्या है बताइए

मीना- देख बन्नो मुझे लगता है तेरे हँसते खेलते परिवार को किसी की बूरी नजर लग गई है और इसलिए मै चाहती हू तू मेरे साथ कल जंगल चलेगी

सुधिया- जंगल क्यू भाभी ?

मीना- जंगल मे एक बंगाली बाबा आए है दो साल से वही पर रहते है और उनके पास हर समस्या का निवारण है और मुझे यकीन है उनसे मिलने के बाद तेरे परिवार मे भी खुशियाँ आएंगी।

सुधिया- ठीक है भाभी , आप कहती है जो जरूर चलूंगी

मीना- कल दोपहर को तू और कल्लू बेटा तैयार रहना मै आऊंगी बुलाने

सुधिया- ठीक हे दीदी।
Beta badhiya kahani hay Or bahut kamuk hay
Padhke bahut maja aya
Update jald dete rahiyo
 
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धीरे धीरे रात होने लगी थी सुधियाँ रसोई मे खाना बना रही थी और कल्लू बाहर राजू ( मीना का बेटा) के साथ चौपाल पर बैठा था

राजू- कल्लू भाई, अब घर चला जाए बडी जोरो की भूख लगी है

कल्लू- हा भईया , अम्मा इंतजार करती होगी

दोनो अपने अपने घर को चले जाते है
कल्लू- अम्मा खाना खिला दे बहुत भूख लगी है

सुधिया- कहा गया था बेटवा, मै तो तेरी ही राह देख रही थी चल जल्दी से हाथ मुंह धो ले मै खाना लगाती हू

कल्लू- अम्मा वो मै राजू भैया के साथ चौपाल पर बैठा था , खाना लगा हाथ धोकर आता हू

( फिर दोनो माॅ बेटे साथ बैठकर खाना खाने लगते है और सुधिया बर्तन समेट कर ऑगन मे चली जाती है )

कल्लू बरामदे मे खटिया बिछाकर सोने की तैयारी करता है और उसकी माॅ लालटेन जलाकर रूम मे सो जाती है ,

भोर मे चार बजे....

मीना- बन्नो, अरी ओ बन्नो चल जल्दी खेत की तरफ जाना है (मीना सुधिया को शौच के लिए जगाने आई थी )

मीना की आवाज सुनकर सुधिया की नींद खुलती है और वह लालटेन लेकर बाहर को आती है बरामदे मे जैसे ही वो कल्लू के खटिया के पास से गुजरती है उसकी ऑखे फटी की फटी रह जाती है और पैर वही जम जाते है

वह देखती है कि उसका बेटा कल्लू गहरी नींद मे सो रहा है और उसकी लुंगी हट चुकी है और उसका घोड़े जैसा मोटा लंड मुरझाया पडा बाहर झांक रहा है, यह देखकर सुधिया हतप्रभ रह गई

सुधिया-मन मे (कल्लू ने कच्छा काहे नहीं पहना .... अरे कैसे पहनेंगा इतनी गर्मी है..इसका लंड तो इसके बापू से दोगुना है ...छी ये मै क्या सोच रही हू ...बेटा है वो मेरा)
और सुधिया कल्लू के लुंगी को सही करने लगती है

तभी फिर मीना की पुकार सुनाई देती है

मीना- अरी बन्नो जल्दी चल ...सूरज निकल आएगा
और मुझे बहुत तेज लगी है

सुधिया - आई भाभी ( लालटेन वही बरामदे मे छोडकर बाहर चली जाती है )

दोनो ननद भाभी खेतों की ओर शौच के लिए चल देते है
आगे चलते चलते आम के बगीचे मे दोनो की नजर पडती है दोनो देखती है कि एक साॅड एक बूढ़ी गाय पर चढने की कोशिश कर रहा है यह देखकर दोनो विधवाओं की चुत मे चीटियां रेंगने लगती है ...तभी मीना एक बडा सा ईट का टुकडा उठाती है और उस सांड को मार कर भगाने लगती है

सुधिया- रहने दिजिए ना भाभी, क्यू मार रही है उसे हमे पाप लगेगा , करने दिजिए ना भाभी

मीना- अरी बन्नो पाप हमे क्यू लगेगा ? मै तो पाप होने से रोक रही हू

सुधिया - क्या मतलब भाभी

मीना- ये दीनू काका की गाय है और यह सांड इसी गाय का बेटा है और यह अपनी माॅ पर ही चढ रहा है

( यह सुनकर सुधिया को झटका लगता है और उसे कल्लू के मुरझाए लंड की तस्वीर दिखने लगती है और उसकी बूर फुलकर कुप्पा हो जाती है ......कुछ देर बाद वह अपना सिर ग्लानि के भाव से झटक देती है )

सुधिया - मन मे ( छी ये मै क्या सोच रही हू वह मेरा बेटा है एकलौता सहारा है मेरा )

मीना- अरी बन्नो कहा खो गई

सुधिया - कही नही भाभी, चलिए जल्दी

फिर दोनो औरते खेत मे थोडी थोडी दूरी पर अपनी अपनी साडी अपने कमर तक उठाकर शौक करने के लिए बैठ जाती है

मीना- बन्नो, तुझे बेचन बाबू की याद नही आती

सुधिया - आती है भाभी उनके बिना जीवन काटने को दौड़ता है ,,आपको भी ती भईया की याद आती होगी

मीना- आती तो है पर वक्त के साथ धुंधला हो गया सबकुछ और राजू की परवरिश मे मै अपने सुख चैन को भूल गई और राजू मेरा बहुत ख्याल रखता है

सुधिया - भाभी क्या आपको किसी मर्द की जरूरत महसूस नही हुई

मीना - होती है मेरी बन्नो लेकिन मै अपने आप को रोकती हू अपने पति की जगहसाई नही होने दे सकती .....और वैसे एक मर्द है जो मुझे घूरता रहता है बन्नो लेकिन मै असमंजस मे हू

सुधिया - कौन है भाभी वो इसी गाॅव का है

मीना - है तो इसी गाॅव का ...और सही वक्त पर मै तुझे बताऊंगी अभी तो मै भी नही पकड पाती हू उसकी नजरों को उसके मन की भावना को

दोनो घोड़ीया शौच कर चुकी थी

सुधिया- चलिए भाभी घर ।
 

Killerpanditji(pandit)

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धीरे धीरे रात होने लगी थी सुधियाँ रसोई मे खाना बना रही थी और कल्लू बाहर राजू ( मीना का बेटा) के साथ चौपाल पर बैठा था

राजू- कल्लू भाई, अब घर चला जाए बडी जोरो की भूख लगी है

कल्लू- हा भईया , अम्मा इंतजार करती होगी

दोनो अपने अपने घर को चले जाते है
कल्लू- अम्मा खाना खिला दे बहुत भूख लगी है

सुधिया- कहा गया था बेटवा, मै तो तेरी ही राह देख रही थी चल जल्दी से हाथ मुंह धो ले मै खाना लगाती हू

कल्लू- अम्मा वो मै राजू भैया के साथ चौपाल पर बैठा था , खाना लगा हाथ धोकर आता हू

( फिर दोनो माॅ बेटे साथ बैठकर खाना खाने लगते है और सुधिया बर्तन समेट कर ऑगन मे चली जाती है )

कल्लू बरामदे मे खटिया बिछाकर सोने की तैयारी करता है और उसकी माॅ लालटेन जलाकर रूम मे सो जाती है ,

भोर मे चार बजे....

मीना- बन्नो, अरी ओ बन्नो चल जल्दी खेत की तरफ जाना है (मीना सुधिया को शौच के लिए जगाने आई थी )

मीना की आवाज सुनकर सुधिया की नींद खुलती है और वह लालटेन लेकर बाहर को आती है बरामदे मे जैसे ही वो कल्लू के खटिया के पास से गुजरती है उसकी ऑखे फटी की फटी रह जाती है और पैर वही जम जाते है

वह देखती है कि उसका बेटा कल्लू गहरी नींद मे सो रहा है और उसकी लुंगी हट चुकी है और उसका घोड़े जैसा मोटा लंड मुरझाया पडा बाहर झांक रहा है, यह देखकर सुधिया हतप्रभ रह गई

सुधिया-मन मे (कल्लू ने कच्छा काहे नहीं पहना .... अरे कैसे पहनेंगा इतनी गर्मी है..इसका लंड तो इसके बापू से दोगुना है ...छी ये मै क्या सोच रही हू ...बेटा है वो मेरा)
और सुधिया कल्लू के लुंगी को सही करने लगती है

तभी फिर मीना की पुकार सुनाई देती है

मीना- अरी बन्नो जल्दी चल ...सूरज निकल आएगा
और मुझे बहुत तेज लगी है

सुधिया - आई भाभी ( लालटेन वही बरामदे मे छोडकर बाहर चली जाती है )

दोनो ननद भाभी खेतों की ओर शौच के लिए चल देते है
आगे चलते चलते आम के बगीचे मे दोनो की नजर पडती है दोनो देखती है कि एक साॅड एक बूढ़ी गाय पर चढने की कोशिश कर रहा है यह देखकर दोनो विधवाओं की चुत मे चीटियां रेंगने लगती है ...तभी मीना एक बडा सा ईट का टुकडा उठाती है और उस सांड को मार कर भगाने लगती है

सुधिया- रहने दिजिए ना भाभी, क्यू मार रही है उसे हमे पाप लगेगा , करने दिजिए ना भाभी

मीना- अरी बन्नो पाप हमे क्यू लगेगा ? मै तो पाप होने से रोक रही हू

सुधिया - क्या मतलब भाभी

मीना- ये दीनू काका की गाय है और यह सांड इसी गाय का बेटा है और यह अपनी माॅ पर ही चढ रहा है

( यह सुनकर सुधिया को झटका लगता है और उसे कल्लू के मुरझाए लंड की तस्वीर दिखने लगती है और उसकी बूर फुलकर कुप्पा हो जाती है ......कुछ देर बाद वह अपना सिर ग्लानि के भाव से झटक देती है )

सुधिया - मन मे ( छी ये मै क्या सोच रही हू वह मेरा बेटा है एकलौता सहारा है मेरा )

मीना- अरी बन्नो कहा खो गई

सुधिया - कही नही भाभी, चलिए जल्दी

फिर दोनो औरते खेत मे थोडी थोडी दूरी पर अपनी अपनी साडी अपने कमर तक उठाकर शौक करने के लिए बैठ जाती है

मीना- बन्नो, तुझे बेचन बाबू की याद नही आती

सुधिया - आती है भाभी उनके बिना जीवन काटने को दौड़ता है ,,आपको भी ती भईया की याद आती होगी

मीना- आती तो है पर वक्त के साथ धुंधला हो गया सबकुछ और राजू की परवरिश मे मै अपने सुख चैन को भूल गई और राजू मेरा बहुत ख्याल रखता है

सुधिया - भाभी क्या आपको किसी मर्द की जरूरत महसूस नही हुई

मीना - होती है मेरी बन्नो लेकिन मै अपने आप को रोकती हू अपने पति की जगहसाई नही होने दे सकती .....और वैसे एक मर्द है जो मुझे घूरता रहता है बन्नो लेकिन मै असमंजस मे हू

सुधिया - कौन है भाभी वो इसी गाॅव का है

मीना - है तो इसी गाॅव का ...और सही वक्त पर मै तुझे बताऊंगी अभी तो मै भी नही पकड पाती हू उसकी नजरों को उसके मन की भावना को

दोनो घोड़ीया शौच कर चुकी थी

सुधिया- चलिए भाभी घर ।
Jabardast update
 
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Jassybabra

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Nice update
 
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