धीरे धीरे रात होने लगी थी सुधियाँ रसोई मे खाना बना रही थी और कल्लू बाहर राजू ( मीना का बेटा) के साथ चौपाल पर बैठा था
राजू- कल्लू भाई, अब घर चला जाए बडी जोरो की भूख लगी है
कल्लू- हा भईया , अम्मा इंतजार करती होगी
दोनो अपने अपने घर को चले जाते है
कल्लू- अम्मा खाना खिला दे बहुत भूख लगी है
सुधिया- कहा गया था बेटवा, मै तो तेरी ही राह देख रही थी चल जल्दी से हाथ मुंह धो ले मै खाना लगाती हू
कल्लू- अम्मा वो मै राजू भैया के साथ चौपाल पर बैठा था , खाना लगा हाथ धोकर आता हू
( फिर दोनो माॅ बेटे साथ बैठकर खाना खाने लगते है और सुधिया बर्तन समेट कर ऑगन मे चली जाती है )
कल्लू बरामदे मे खटिया बिछाकर सोने की तैयारी करता है और उसकी माॅ लालटेन जलाकर रूम मे सो जाती है ,
भोर मे चार बजे....
मीना- बन्नो, अरी ओ बन्नो चल जल्दी खेत की तरफ जाना है (मीना सुधिया को शौच के लिए जगाने आई थी )
मीना की आवाज सुनकर सुधिया की नींद खुलती है और वह लालटेन लेकर बाहर को आती है बरामदे मे जैसे ही वो कल्लू के खटिया के पास से गुजरती है उसकी ऑखे फटी की फटी रह जाती है और पैर वही जम जाते है
वह देखती है कि उसका बेटा कल्लू गहरी नींद मे सो रहा है और उसकी लुंगी हट चुकी है और उसका घोड़े जैसा मोटा लंड मुरझाया पडा बाहर झांक रहा है, यह देखकर सुधिया हतप्रभ रह गई
सुधिया-मन मे (कल्लू ने कच्छा काहे नहीं पहना .... अरे कैसे पहनेंगा इतनी गर्मी है..इसका लंड तो इसके बापू से दोगुना है ...छी ये मै क्या सोच रही हू ...बेटा है वो मेरा)
और सुधिया कल्लू के लुंगी को सही करने लगती है
तभी फिर मीना की पुकार सुनाई देती है
मीना- अरी बन्नो जल्दी चल ...सूरज निकल आएगा
और मुझे बहुत तेज लगी है
सुधिया - आई भाभी ( लालटेन वही बरामदे मे छोडकर बाहर चली जाती है )
दोनो ननद भाभी खेतों की ओर शौच के लिए चल देते है
आगे चलते चलते आम के बगीचे मे दोनो की नजर पडती है दोनो देखती है कि एक साॅड एक बूढ़ी गाय पर चढने की कोशिश कर रहा है यह देखकर दोनो विधवाओं की चुत मे चीटियां रेंगने लगती है ...तभी मीना एक बडा सा ईट का टुकडा उठाती है और उस सांड को मार कर भगाने लगती है
सुधिया- रहने दिजिए ना भाभी, क्यू मार रही है उसे हमे पाप लगेगा , करने दिजिए ना भाभी
मीना- अरी बन्नो पाप हमे क्यू लगेगा ? मै तो पाप होने से रोक रही हू
सुधिया - क्या मतलब भाभी
मीना- ये दीनू काका की गाय है और यह सांड इसी गाय का बेटा है और यह अपनी माॅ पर ही चढ रहा है
( यह सुनकर सुधिया को झटका लगता है और उसे कल्लू के मुरझाए लंड की तस्वीर दिखने लगती है और उसकी बूर फुलकर कुप्पा हो जाती है ......कुछ देर बाद वह अपना सिर ग्लानि के भाव से झटक देती है )
सुधिया - मन मे ( छी ये मै क्या सोच रही हू वह मेरा बेटा है एकलौता सहारा है मेरा )
मीना- अरी बन्नो कहा खो गई
सुधिया - कही नही भाभी, चलिए जल्दी
फिर दोनो औरते खेत मे थोडी थोडी दूरी पर अपनी अपनी साडी अपने कमर तक उठाकर शौक करने के लिए बैठ जाती है
मीना- बन्नो, तुझे बेचन बाबू की याद नही आती
सुधिया - आती है भाभी उनके बिना जीवन काटने को दौड़ता है ,,आपको भी ती भईया की याद आती होगी
मीना- आती तो है पर वक्त के साथ धुंधला हो गया सबकुछ और राजू की परवरिश मे मै अपने सुख चैन को भूल गई और राजू मेरा बहुत ख्याल रखता है
सुधिया - भाभी क्या आपको किसी मर्द की जरूरत महसूस नही हुई
मीना - होती है मेरी बन्नो लेकिन मै अपने आप को रोकती हू अपने पति की जगहसाई नही होने दे सकती .....और वैसे एक मर्द है जो मुझे घूरता रहता है बन्नो लेकिन मै असमंजस मे हू
सुधिया - कौन है भाभी वो इसी गाॅव का है
मीना - है तो इसी गाॅव का ...और सही वक्त पर मै तुझे बताऊंगी अभी तो मै भी नही पकड पाती हू उसकी नजरों को उसके मन की भावना को
दोनो घोड़ीया शौच कर चुकी थी
सुधिया- चलिए भाभी घर ।