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गोवा के उस गरम समंदर के पानी में गोलू के साथ मज़ेदार मस्ती करने और उसके तपे हुए जवान जिस्म का तीखा अहसास पाने के बाद, जब हम वापस रिसॉर्ट के कमरे में लौटे, तो शाम ढल चुकी थी। रात का खाना खाने के बाद पूरे कमरे में एक मखमली सन्नाटा छा गया था। सोने की तैयारी करने के लिए मैंने अपने ट्रैवल बैग को खोला और उसमें से एक बहुत ही पतला और हल्का सा नाइट-गाउन निकाल कर पहन लिया। वह गाउन इतना बारीक था कि उसे पहनते ही मेरे भरे-पूरे, भारी और सुडौल बदन का एक-एक हिस्सा और मेरी गोरी त्वचा साफ़ झलक रही थी।
जब बेड पर लेटने का वक्त आया, तो कमरे की मद्धम पीली लाइट में माहौल और भी ज़्यादा कामुक हो गया था। हमारे उस बड़े से किंग-साइज बेड पर हम तीनों एक साथ लेटे।
कुछ ही पलों में, मैं अपने जीवन के दो सबसे खास मर्दों के बीच एक बेहद उत्तेजक सैंडविच बन चुकी थी। मेरी पीठ की तरफ मेरे पति राजीव लेटे हुए थे, जिन्होंने मुझे पीछे से बहुत कसकर अपनी बाहों के घेरे में जकड़ रखा था। और ठीक मेरे सामने, आगे की तरफ से मेरा जवान बेटा गोलू मेरे सीने से पूरी तरह लिपटा हुआ था। उसका चौड़ा, बिना शर्ट का गरम बदन मेरे गाउन के पतले कपड़े के पार से मेरे स्तनों के भारी और कड़े उभारों को दबा रहा था। दो जवान मर्दों के बीच इस तरह दबे होने का जो अहसास था, वह मेरे पूरे शरीर की नसों में कामुकता का एक बहुत ही मीठा सा ज़हर घोल रहा था।
"यार राजीव, आज तो बीच पर सच में बहुत मज़ा आया। वहाँ का पानी कितना साफ़ था ना?" मैंने अपनी धड़कनों को संभालते हुए बिल्कुल सामान्य आवाज़ में कहा।
पीछे से राजीव ने मेरी गर्दन पर एक गरम चुंबन अंकित करते हुए कहा, "हाँ रिधिमा, और तुम उस बिकनी में इतनी कयामत लग रही थी कि मेरी तो आँखें ही नहीं हट रही थीं।"
आगे से गोलू ने भी अपनी मतवाली आँखें खोलीं और मेरे सीने में थोड़ा और धंसते हुए लाड़ से बोला, "पापा बिल्कुल सही कह रहे हैं। मम्मी तो आज पूरे बीच पर सबसे सुंदर दिख रही थीं। क्यों पापा?"
"बिल्कुल सही कहा बेटा, तेरी मम्मी का कोई जवाब नहीं," राजीव ने हँसते हुए कहा, "वैसे गोलू, कल सुबह हमें वो पुराना किला देखने भी जाना है, तो जल्दी सो जाना।"
"हाँ पापा, मैं तो बस सोने ही वाला हूँ," गोलू ने मेरी आँखों में देखते हुए शरारत से मुस्कुराकर कहा।
ऊपर से तो हम तीनों के बीच यह बेहद सामान्य और प्यारी बातचीत हो रही थी, लेकिन नीचे बेडशीट के उस गुप्त अंधेरे में एक बेहद ख़तरनाक और कामुक खेल शुरू हो चुका था।
बातों-बातों में ही, राजीव का एक हाथ मेरी पतली कमर पर रेंगते हुए नीचे की तरफ गया। उन्होंने बहुत ही आहिस्ते से मेरे उस पतले गाउन को नीचे से पकड़ा और उसे ऊपर सरकाते हुए मेरी कमर तक ला दिया। अब मेरा निचला हिस्सा गाउन के बिना पूरी तरह से नंगा हो चुका था, और मैं सिर्फ अपनी कसी हुई पैंटी के भरोसे थी। मेरे दिल की धड़कनें अचानक बहुत तेज़ हो गईं। राजीव का हाथ वहाँ रुका नहीं; बहुत ही शातिर और अनुभवी उँगलियों से उन्होंने मेरी पैंटी के किनारे बंधी उस नाज़ुक सी डोरी को टटोला, और एक ही झटके में उस गांठ को खोलकर पैंटी को मेरे पैरों से खींचकर पूरी तरह बदन से अलग कर दिया।
मेरी साँसें जैसे हलक में आकर थम सी गईं। अब मैं उस बेड पर, अपने जवान बेटे और पति के बीच, नीचे से पूरी तरह नंगी हो चुकी थी।
राजीव ऊपर से गोलू के साथ बिल्कुल सामान्य लहजे में हँसकर बात कर रहे थे, "हाँ गोलू, सुबह टाइम से उठ जाना, वरना धूप तेज़ हो जाएगी..." लेकिन नीचे, बेडशीट के भीतर, उनका पूरा खड़ा हुआ, सख्त और तपा हुआ लंड मेरी जाँघों के बीच सरकते हुए सीधे मेरी चूत पर आकर कस गया। वे बहुत ही धीमे-धीमे, एक मखमली दबाव के साथ अपनी उस कड़क मर्दानगी को मेरी चूत पर रगड़ रहे थे।
उफ़... उस तीखे स्पर्श के बदन से टकराते ही मेरी जान निकलने लगी थी। चूत के भीतर कामुक रस का ऐसा भयंकर सैलाब उमड़ा कि उसकी गाढ़ी, चिपचिपी नमी मेरी जाँघों से रिसने लगी। राजीव का वह सख्त लोहा जब-जब मेरी योनि के द्वार को छूता, मेरा पूरा बदन अंदर तक सिहर उठता। मेरा मन कर रहा था कि मैं ज़ोर से चीख पड़ूँ या अपने पति के उस धक्के के आगे खुद को पूरी तरह सौंप दूँ। लेकिन मैं पूरी तरह बेबस थी, मुँह से एक शब्द भी नहीं निकाल सकती थी। मेरे ठीक सामने मेरा जवान बेटा मेरे सीने से लिपटा हुआ था; अगर मैं ज़रा भी हिली या मेरे मुँह से कोई कामुक आह निकली, तो गोलू सब कुछ सुन लेता।
लाज, खौफ और चरम सुख की उस भयंकर कसक के बीच, मैं बस अपनी आँखें मींचे, उस दोहरे मर्दाने दबाव में घुटने टेके, उस कातिलाना रात की मदहोशी में धीरे-धीरे पिघलती जा रही थी।
बेडशीट के उस गुप्त अंधेरे में मेरी चूत पर अपने लोहे जैसे सख्त अंग को रगड़ते-रगड़ते राजीव का सबर अब पूरी तरह टूट चुका था। वे मेरे गले की गोरी त्वचा पर अपने भीगे और गरम होठों से चूमने लगे, और उनकी साँसें और भी ज़्यादा तेज़ हो गईं। तभी, उन्होंने पीछे से एक बहुत ही गहरा और पक्का धक्का मारा और अपने उस कड़क लंड को सीधे मेरी गीली चूत के भीतर उतारने लगे। वह अंग इतना मोटा और सख्त था कि जब वह मेरी योनि की गहराई को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया, तो पल भर के लिए मेरी तो जैसे जान ही निकल गई।
राजीव ने मुझे पीछे से और भी कसकर अपनी मजबूत बाहों में भींच लिया। उस अचानक आए तीखे सुख और दर्द के मिले-जुले अहसास से मैं खुद को रोक नहीं पाई, और मेरे मुँह से एक बहुत ही हल्की, मादक सी सिसकारी निकल गई, "अह्ह्ह..."
कमरे के उस सन्नाटे में मेरी वह दबी हुई आह जैसे ही गूँजी, मेरे सीने से लिपटा हुआ गोलू तुरंत चौंक गया। उसका सिर ठीक मेरे स्तनों के ऊपर टिका हुआ था, और मैं बड़े लाड़ से उसके बालों को अपनी उँगलियों से सहला रही थी। गोलू ने वहीं से अपना चेहरा थोड़ा उठाया, मेरे स्तनों के उभरे हुए हिस्सों को बहुत ही नाज़ुक तरीके से चूमा और मेरी आँखों में देखते हुए पूछा, "क्या हुआ मम्मी? आप ऐसे क्यों कराह रही हो?"
मेरा दिल डर के मारे ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा कि कहीं इसे सब कुछ समझ न आ जाए। मैंने अपनी साँसों को संभाला और झूठ बोलते हुए कहा, "कुछ... कुछ नहीं बेटा, वो बस बिस्तर पर शायद किसी चींटी ने काट लिया।"
गोलू ने तुरंत चिंता जताते हुए बहुत ही भोलेपन से पूछा, "कहाँ मम्मी? कहाँ काटा चींटी ने? मुझे दिखाओ।"
अपने बेटे के मुँह से यह मासूम सवाल सुनकर पीछे लेटे राजीव को जैसे एक मज़ेदार मज़ाक मिल गया। उन्होंने मेरी चूत के भीतर अपनी मर्दानगी को थोड़ा और हिलाया और एक हल्का सा धक्का मारते हुए मुझे अंदर तक तड़पा दिया। उनके हाथ मेरी जाँघों के बीच अंदर डले हुए थे और वे मेरी चिकनी जाँघों को धीरे-धीरे सहला रहे थे। वे मुस्कुराए और मुझसे चुटकी लेते हुए बोले, "हाँ-हाँ भाग्यवान, बोलो ना... कहाँ काटा चींटी ने? अपने बेटे को बताओ तो सही!"
पति की इस नटखट हरकत और गोलू के सामने इस तरह फँस जाने की वजह से मुझे अंदर ही अंदर बहुत गुस्सा भी आ रहा था और शर्म भी। मैंने जानबूझकर बनावटी गुस्से से राजीव की तरफ चेहरा घुमाकर कहा, "आप को बहुत हँसी आ रही है ना? आप बस एक बार घर चलो, फिर बताती हूँ आपको! सारा मज़ाक भूल जाओगे!"
राजीव भला कहाँ डरने वाले थे। उन्होंने अपनी पकड़ को और भी ज़्यादा मजबूत किया। वे मेरी चूत के भीतर अपने लंड को आख़िरी कोने तक ले गए और मेरी गर्दन को चूमते हुए बोले, "गोलू, देखा... ये औरतें कैसे खामख्वाह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाती हैं।"
आगे से गोलू ने बड़े लाड़ से अपना सिर मेरे स्तनों पर और कस दिया और अपने पापा से कहा, "पापा, मम्मी को तंग मत करो आप। आप उन्हें अच्छे से प्यार करो, उनका यह गुस्सा तुरंत खत्म हो जाएगा।"
राजीव ने खेल को जारी रखा और हँसते हुए बोले, "हाँ बेटा, तुम बिल्कुल ठीक कहते हो। लेकिन शायद आज तुम्हारी मम्मी को मेरा यह प्यार पसंद नहीं आ रहा है बेटा।"
गोलू ने तुरंत मुस्कुराते हुए मेरी आँखों में देखा और बहुत ही हक से, दीवाने लहजे में बोला, "कोई बात नहीं पापा... अगर आपका प्यार मम्मी को पसंद नहीं आ रहा, तो मैं करूँगा प्यार... फिर देखना मम्मी कितनी खुश हो जाएँगी!"
जैसे ही गोलू के मुँह से मैंने यह बेहद कामुक, नटखट और जवां बात सुनी, तो मेरे पूरे शरीर में जैसे बिजली का एक भयंकर करंट दौड़ गया। उस एक संवाद ने मेरी चूत के भीतर ऐसी तबाही मचाई कि मेरी योनि की मांसपेशियों ने अपने आप, बिना मेरे नियंत्रण के, राजीव के उस सख्त लंड को अंदर बहुत ही कसकर अपनी जकड़ में ले लिया। मेरा पूरा भरा-पूरा बदन दो मर्दों की उस गुप्त जंग के बीच पूरी तरह पानी-पानी होकर सुन्न हो चुका था।पीछे से राजीव लगातार अपनी कमर हिलाते हुए अपने सख्त लंड से मेरी चूत की गहराइयों को नाप रहे थे और मेरी गर्दन पर उनके गरम होंठ जमे हुए थे। नीचे उनकी उँगलियाँ मेरी जाँघों को सहला रही थीं। लेकिन तभी, बेडशीट के उस गुप्त अंधेरे में एक और बहुत ही ख़तरनाक हलचल शुरू हो गई।
गोलू, जिसका सिर मेरे स्तनों के भारी उभारों पर टिका हुआ था, उसने बहुत ही आहिस्ते से अपना एक हाथ बेडशीट के भीतर सरका दिया।
मेरी साँसें एक पल के लिए पूरी तरह अटक गईं जब मुझे महसूस हुआ कि गोलू की जवान और गरम हथैली सीधे मेरी जाँघों के ऊपरी हिस्से पर आकर टिक गई है। जहाँ राजीव का हाथ पहले से ही मेरी जाँघों को सहला रहा था, ठीक उसी के पास अब मेरे जवान बेटे की मजबूत उँगलियाँ भी रेंगने लगी थीं। मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि मुझे डर लग रहा था कि मेरे स्तनों पर सिर रखे गोलू को मेरी धड़कन साफ़ सुनाई दे रही होगी।
"हाँ गोलू बेटा, तू सही कह रहा है... अपनी मम्मी को तू ही प्यार कर, तभी इसका गुस्सा ठंडा होगा," राजीव ने पीछे से एक और गहरा धक्का मारते हुए हाँफती हुई आवाज़ में कहा। उनका लंड मेरी चूत के भीतर पूरी तरह धंसा हुआ था।
"हाँ पापा, मैं तो मम्मी को हमेशा बहुत प्यार करता हूँ," गोलू ने ऊपर से बिल्कुल मासूमियत से जवाब दिया।
लेकिन ऊपर की उस बातचीत के पीछे, नीचे पानी की तरह बहते कामुक रस के बीच दोनों मर्दों के हाथ मेरी नंगी जाँघों पर आपस में टकरा रहे थे! राजीव को लग रहा था कि वे अकेले ही मेरे बदन के साथ खेल रहे हैं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका अपना ही बेटा उनके ठीक सामने, उनके हाथों के ठीक बगल में अपनी माँ की चिकनी जाँघों के मखमली अहसास को अपनी उँगलियों में समेट रहा था।
तभी गोलू की उँगलियाँ और आगे बढ़ीं और वे सीधे मेरी चूत के उस मुहाने के बिल्कुल करीब पहुँच गईं, जहाँ राजीव का सख्त लंड लगातार अंदर-बाहर हो रहा था। गोलू की उँगलियों पर मेरी योनि से बहता हुआ वह गाढ़ा, चिपचिपा कामुक रस साफ़ लग गया। उसने अपनी उँगलियों के उस गीले स्पर्श से मेरी चूत के ऊपरी हिस्से को बहुत ही नाज़ुक तरीके से सहलाना शुरू कर दिया।
उफ़... एक तरफ पति का वह कड़क लोहा अंदर तक तबाही मचा रहा था, और दूसरी तरफ मेरे अपने ही जवान बेटे की उँगलियाँ बाहर से उस कयामत को महसूस करते हुए मुझे सहला रही थीं। दो मर्दों के उस दोहरे, तीखे स्पर्श ने मेरी चूत के भीतर कामुकता का एक ऐसा भयंकर बवंडर उठा दिया कि मेरे पैर पूरी तरह सीधे होकर कड़े हो गए। मेरे मुँह से चीख निकलने ही वाली थी, लेकिन मैंने बेडशीट को अपने दाँतों से दबा लिया।
मैं उन दोनों के बीच पूरी तरह बेबस और सुन्न हो चुकी थी। राजीव अपनी ही धुन में मुझे पीछे से ठोक रहे थे, और उनके ठीक सामने, उन्हीं की छत्रछाया में मेरा राजा बेटा अपनी इस खूबसूरत माँ के बदन की सबसे गुप्त गहराई को चखते हुए जवानी की पूरी कयामत ढा रहा था।
बेडशीट के भीतर हम दोनों मर्दों के बीच पूरी तरह जकड़े हुए थे। राजीव अपनी ही धुन में पीछे से बहुत धीमे-धीमे, मखमली धक्के मार रहे थे। उनका सख्त लंड मेरी चूत के भीतर गहराई में धीरे-धीरे सरक रहा था, जिससे मेरे पूरे बदन में एक मीठी सी तड़प उठ रही थी। इस रसीले खेल के बीच, वे गोलू के साथ लगातार नटखट बातें भी कर रहे थे।
"क्यों गोलू बेटा... तुम कह रहे थे ना कि तुम मम्मी को प्यार करोगे," राजीव ने मेरी गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए मज़ाक के लहजे में पूछा, "तो तुम्हें क्या लगता है... मम्मी को कौन सबसे अच्छे से प्यार दे सकता है? तुम्हारे पापा या तुम?"
"पापा, मैं तो मम्मी को आपसे भी ज़्यादा अच्छे से प्यार दे सकता हूँ। आप देखना, मेरे प्यार से मम्मी हमेशा खुश रहेंगी," गोलू ने ऊपर से बिल्कुल मासूमियत से जवाब दिया, लेकिन उसकी आँखों में एक जवां मर्द की चमक थी।
ऊपर यह प्यारी और नटखट बातचीत चल रही थी और नीचे गोलू की उँगलियाँ लगातार मेरी जाँघों को सहला रही थीं। तभी, गोलू ने बहुत ही चतुराई से अपना दूसरा हाथ ऊपर उठाया और मेरे गाउन के आगे वाले हिस्से पर रख दिया। राजीव पीछे से अपनी ही मस्ती में डूबे हुए थे, और इसी का फायदा उठाकर गोलू ने अपनी काँपती हुई उँगलियों से मेरे गाउन के आगे के बटनों को एक-एक करके खोलना शुरू कर दिया।
जैसे ही उसका हाथ मेरे स्तनों के उभरे हुए हिस्सों को छूते हुए बटनों पर चला, मैं अंदर तक घबरा गई। मैंने अपनी आँखें बड़ी करके उसे रोकने के लिए अपने हाथ से उसका हाथ पकड़ना चाहा। मैं उसे ज़ोर से डांट भी नहीं सकती थी, क्योंकि पीछे राजीव लेटे हुए थे।
मैंने इशारे से उसे मना करना चाहा, लेकिन गोलू कहाँ मानने वाला था। उसने सीधे-सीधे बिना कोई गंदी बात बोले, बहुत ही लाड़ और प्यार भरी बातों से मुझे बीच पर किया हुआ मेरा वह वादा याद दिला दिया।
उसने बहुत ही नाज़ुक आवाज़ में मेरे होठों के पास फुसफुसाकर कहा, "मम्मी... बीच पर आपने ही कहा था ना कि मैं आपको आज रात को अच्छे से प्यार कर सकता हूँ? अब तो यहाँ सिर्फ पापा ही हैं ना... मुझे भी अपना प्यार देने दो ना मम्मी, प्लीज मुझे मत रोको। आप आज इस गाउन में सच में काफी कमाल की लग रही हो मम्मी... क्या इस दुनिया में सिर्फ पापा का ही हक़ है आपको इतना सारा प्यार देने का? मेरा कोई हक़ नहीं है क्या?"
उसकी यह इतनी भोली, प्यारी और अपनी माँ पर हक़ जताने वाली रसीला बात सुनकर मेरा माँ का दिल और एक औरत का वजूद पूरी तरह सुन्न हो गया। उसकी आँखों में छिपी वह जवां दीवानगी देखकर मैं उसे रोक ही नहीं पा रही थी, क्योंकि उसका वह जवान और चौड़ा होता जिस्म मुझे पूरी तरह अपने काबू में कर चुका था।
गाउन के बटन खुलते ही मेरे दोनों बड़े, भारी और सुडौल स्तन पूरी तरह से बाहर छलक आए, और गोलू का चेहरा सीधे मेरे उन नंगे उभारों की तरफ बढ़ने लगा। पीछे से पति का वह कड़क लोहा अंदर तक धीमे-धीमे धक्के मार रहा था, और आगे से मेरा अपना बेटा मेरे वादे को पूरा करवाने के लिए मेरे स्तनों के मखमली अहसास में डूबने जा रहा था। गोलू ने बहुत ही लाड़ और दीवानगी से अपना चेहरा आगे बढ़ाया और अपने गरम होंठ सीधे मेरे एक स्तन के कड़े हो चुके निप्पल पर टिका दिए।
ऊपर से तो हम तीनों के बीच बेहद मासूमियत और प्यार भरी बातें चल रही थीं, जहाँ दोनों बाप-बेटे अपने-अपने अंदाज़ में बिना एक-दूसरे पर ज़ाहिर किए मुझे खुश करने में लगे थे। गोलू को लग रहा था कि उसके पापा बस पीछे से मम्मी को प्यार से गले लगाकर सो रहे हैं, और उसके पापा राजीव को लग रहा था कि गोलू आगे से अपनी मम्मी से लिपटकर लाड़ लड़ा रहा है। लेकिन इस मासूम कडलिंग के पीछे की हकीकत असीम कामुकता से भरी हुई थी।
"रिधिमा, तुम सच में बहुत थकी हुई लग रही हो," राजीव ने मेरी गर्दन पर आहिस्ते से चूमते हुए बहुत ही शांत आवाज़ में कहा, "मेरा तो मन करता है कि मैं तुम्हें ऐसे ही अपनी बाहों में छुपाकर हमेशा के लिए रख लूँ।"
आगे से गोलू ने मेरे स्तनों से अपना सिर थोड़ा सा उठाया, मेरी आँखों में देखा और अपने पापा की बात का जवाब देते हुए बोला, "पापा, आप अकेले मम्मी को नहीं छुपा सकते। मम्मी पर आधा हक़ मेरा भी है। मैं भी मम्मी को आगे से ऐसे ही कसकर पकड़कर रखूँगा ताकि मम्मी को बहुत अच्छा लगे। क्यों मम्मी, आपको मेरा ऐसे लिपटना अच्छा लग रहा है ना?"
"हाँ मेरे बच्चे... बहुत अच्छा लग रहा है," मैंने अपनी आँखों से बहते सुख के आंसू और भारी साँसों को छुपाते हुए बहुत ही लाड़ से कहा।
"देखा पापा, मम्मी कितनी खुश हो गई हैं," गोलू ने मुस्कुराते हुए कहा।
गोलू ने तो अपनी शॉर्ट्स पहले ही उतार दी थी। वह कंबल अंदर अपने उस ७-इंच के लंबे और भयानक रूप से मोटे, सख्त लंड को मेरी दोनों जाँघों के बीच बहुत ही लाड़ से रगड़ रहा था। मेरी दोनों टाँगों के बीच उसके उस नंगे, मांसल और कड़क लोहे का जो भारी अहसास हो रहा था, वह मेरे पूरे शरीर की नसों को झकझोर रहा था। वह मोटा अंग जब-जब मेरी जाँघों की अंदरूनी त्वचा से रगड़ खाता, मेरा पूरा वजूद पानी-पानी होने लगता।
गोलू नीचे से अपनी जवानी का यह दबाव बना रहा था और ऊपर से मेरे स्तनों को चूस रहा था। लेकिन वह अभी जवानी की दहलीज़ पर कदम ही रख रहा था, इसलिए उसे मेरे इन बेहद नरम और भारी स्तनों को सहलाना और प्यार देना अभी अच्छे से नहीं आता था। इसी अनाड़ीपन और उतावलेपन की वजह से चूसते-चूसते उसने गलती से मेरे निप्पल पर थोड़ा तेज़ दाँत काट लिया!
"अह्ह्ह... उफ़्फ़...!"
दाँत लगते ही दर्द और तीखी उत्तेजना के मारे मेरे मुँह से एक बहुत ही तेज़ सिसकारी निकल गई, और मैंने गोलू के बालों को अपनी उँगलियों में कस लिया।
पीछे से धक्का मार रहे राजीव को लगा कि यह सिसकारी उनके लंड के गहरे धक्के की वजह से निकली है। ठीक उसी पल राजीव का पूरा बदन चरम सुख की वजह से कांपने लगा। उन्होंने अपनी रफ्तार तेज़ की और गोलू के सामने अपनी बात छुपाने के लिए दोहरे मतलब वाले शब्दों में हाँफते हुए सीधे मेरे कान के पास कहा, "ओह रिधिमा... सच में... गोवा की इस गर्मी का पारा अब बर्दाश्त से बाहर हो रहा है... मैं... मैं इस उमस में अब और नहीं रुक पा रहा हूँ... आई लव यू रिधिमा... मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ मेरी जान... उफ़...!"
राजीव ने पीछे से दो बहुत ही गहरे और आख़िरी धक्के मारे और एक तेज़ कँपकँपी के साथ उनका पूरा गाढ़ा, गरम पानी मेरी चूत की गहराइयों में भर गया। उस गरम अहसास से मेरा पूरा वजूद सिहर उठा। राजीव ने हाँफते हुए अपना सिर मेरी पीठ पर टिका दिया और बेहद सुकून की साँस ली। गोलू उनके इस गुप्त स्खलन से पूरी तरह अनजान था, उसे लगा पापा बस गर्मी और थकान की बातें कर रहे हैं।
राजीव के शांत होते ही, आगे से गोलू ने मेरी आँखों में देखा। उसकी आँखों में भी अब जवानी का वह चरम नशा साफ़ दिखाई दे रहा था। उसका वह मोटा, सख्त लोहा मेरी चिकनी जाँघों के बीच लगातार अपनी जगह बना रहा था। उसने बहुत प्यार से मेरे गाल को चूमा और बेहद मासूमियत से फुसफुसाया, "मम्मी... पापा को तो बहुत गर्मी लग रही है... लेकिन मुझे तो आपसे बहुत प्यार मिल रहा है। मेरा प्यार भी ले लो ना मम्मी... प्लीज..."
मैंने बिना कुछ बोले, बस अपनी आँखें मूँद लीं। गोलू ने मेरे गले को चूमते हुए दो-तीन बार अपने उस नंगे, मोटे अंग को मेरी जाँघों के बीच बहुत ही लाड़ से भींचा, और एक गहरी, शांत मर्दाना साँस के साथ उसका पूरा गाढ़ा, गरम पानी छलककर सीधे मेरे पेट और मेरी नंगी जाँघों की त्वचा पर गिर गया। वह गरम, चिपचिपा अहसास जब मेरी बॉडी पर फैला, तो मेरे अंदर कामुकता का आख़िरी बांध भी टूट गया और मेरी चूत ने भी अपना पूरा रस छोड़ दिया।
अपने पति राजीव और जवान बेटे गोलू, दोनों का वह गाढ़ा और गरम पानी अपने बदन पर पाकर मैं जैसे इस दुनिया से दूर किसी और ही जादुई दुनिया में खो गई थी। दो-दो जवान और मजबूत मर्दों के बीच इस तरह लिपटी हुई, मुझे अपने भीतर किसी महारानी जैसा अहसास हो रहा था, जहाँ दोनों मर्द अपनी पूरी ताकत से मुझे खुश करने के बाद अब थककर शांत हो चुके थे।
मेरे पति राजीव ने मुझे पीछे से बहुत ही सुरक्षा और हक के साथ अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था, और आगे से मैंने अपने राजा बेटे गोलू को अपने दोनों खुले और नंगे स्तनों के बीच कसकर अपने सीने से लगाया हुआ था। दोनों मर्दों की जवानी की आग को इस तरह कडलिंग के बहाने शांत करने के बाद, मेरे वजूद को भी एक अनोखा, मखमली सुकून मिल चुका था। मैं उन दोनों के बीच उसी तरह सैंडविच बनी, अपने पेट पर लगे गोलू के उस गरम पानी के अहसास के साथ, धीरे-धीरे गहरी नींद के आगोश में खो गई।