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Incest मामा का गांव ( बड़ा प्यारा )

rkv66

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भाग ८

सूरज की जिंदगी का सबसे बेहतरीन वक्त गुजर चुका था,,,। आज के दिन के बाद से उसकी जिंदगी की नई शुरुआत हो रही थी इस दिन ने सूरज को एकदम से बदल कर रख दिया था,,, उसके सोचने समझने का तरीका एकदम से बदल गया था,,,। जिंदगी में पहली बार एक औरत की चुदाई की थी जो रिश्ते में उसकी मामी लगती थी औरत के जिस्मानी शब्दों को वह भली-भांति समझ गया था,,,
सूरज काफी खुश नजर आ रहा था वह अपने खेतों से होता हुवा अपने मस्ती में घर की ओर निकल पड़ा।


( मंगल के पुराने दिन जब शादी के ४ साल तक विलास उसे जम के चोदता था लेकिन वक्त के साथ साथ धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी पहले हफ्ते में एक बार फिर महीने में एक बार और फिर साल में एक बार अब पिछले ५ सालो से उसकी बूर प्यासी थी लेकिन कल से जो हो रहा था उससे उसके दिल में फिर से नई उमंग भर आइ थी लेकिन अपने संस्कारो के चलते वह रुक गई और सब कुछ भूल कर नए तारीखे से जीने की ठान लिया लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था )

दोपहर का समय था घर में काम करके से मंगल का बदन पसीने से तरबतर हो गया था इसी लिए उसने नहाने का सोचा और बाथरूम जाने के लिए ठंडा पानी लिया ओर नहाने के लिए चली गई।

इधर गौरी को कल से बैचेनी सी हो रही थी पहली बार चुदाई देख कर उसके शरीर में बदलाव होने लगा था। गौरी ने कुछ दिन कम्मो के घर नहीं जाने का सोचा और अपने सुधियां मामी के घर की ओर निकल पड़ी।

तेज कदमों से चलती हुई मंगल जल्दी से कच्ची ईटो से
बने बाथरूम में प्रवेश कर गई
बाथरूम में घुसते ही वह अपने बदन से लाल रंग की साड़ी को उतारने लगी,,,, मंगल का गोरा बदन लाल रंग की साड़ी में खिल रहा था,,, बला की खूबसूरत मंगल धीरे-धीरे करके अपने बदन पर से अपनी साड़ी को दूर कर रही थी,,,, अगले ही पल उसने अपने बदन पर से अपनी साड़ी को उतारकर जमीन पर गिरा दीया उसके बदन पर अब केवल पीले रंग का ब्लाउज और पेटीकोट था और इन वस्त्रों में खूबसूरत मंगल कामदेवी लग रही थी वह कुछ पल के लिए अपनी नजर को अपने पैरों से होते हुए अपनी ब्लाउज के बीच से झांक रही चूचियों के बीच की गहरी दरार को देखने लगी,,, ना जाने क्या सोचकर उसके होठों पर मुस्कुराहट फैल गई और वहां अपने दोनों हाथों को ऊपर लाकर, अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों से अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी,,,, यह नजारा बेहद कामुक और मादक था। हालांकि इस बेहद कामोत्तेजक नजारे को देखने वाला इस समय कोई भी नहीं था परंतु एक औरत के द्वारा अपने हाथों से अपने कपड़े उतारने की कल्पना ही मर्दों की उत्तेजना में बढ़ोतरी कर देती है। और जब बात मंगल की हो तो मंगल तो स्वर्ग से उतरी हुई किसी अप्सरा की तरह ही बेहद खूबसूरत थी, उसके बदन की बनावट उसका भरा हुआ बदन और जगह जगह पर बदन पर बने कामुक कटाव मर्दों को पूरी तरह से चुदवासा बना देते थे,,,,
धीरे-धीरे करके मंगल ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दीया ब्लाउज के बटन खोलते हैं लाल रंग की ब्रा नजर आने लगी और साथ ही मंगल की जवानी के दोनों कटोरे जो कि मधुर रस से भरे हुए थे। और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि किसी भी समय वह छलक जाएंगे क्योंकि मंगल कि दोनों चूचियां कुछ ज्यादा ही बड़ी और गोल थी,,, और वह दोनों जवानी की केंद्रीय बिंदु मंगल की लाल रंग की ब्रा में समा नहीं पा रहे थे।,,, अगले ही पल मंगल अपने बदन पर से ब्लाउज भी उतार फेंकी,, बाथरूम में मंगल धीरे-धीरे अपने ही हाथों से अपने आप को वस्त्र विहीन करती जा रही थी इस समय ऊसके बदन पर मात्र पेटीकोट और लाल रंग की ब्रा ही थी।
मंगल बाथरूम में मात्र ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी लेकिन उसका रूप लावण्य किसी काम देवी की तरह ही लग रहा था जब वस्त्रों में मंगल इतनी कामुक लगती हो तो संपूर्ण नग्ना अवस्था में तो कहर ढाती होगी,,,, मंगल अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ लाकर पेटीकोट की डोरी को अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर खोलने लगी,,,, और देखते ही देखते उसकी पेटीकोट उसके कदमों में जा गिरी,, इस समय का यह दृश्य ऐसा लग रहा था मानो सावन अपनी बाहें फैलाए प्रकृति को अपने अंदर समेट रहा हो,,, मंगल के गोरे गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा और गुलाबी रंग की कच्छी उसके कामुक बदन को और भी ज्यादा मादक बना रहे थे। 40 वर्ष की आयु में भी मंगल का बदन और खूबसूरती अल्हड़ जवानी की महक बिखेर रही थी। वैसे तो अधिकतर औरतें वस्त्र पहनकर ही स्नान करती हैं लेकिन जब इस तरह का एकांत बाथरूम में मिलता हो तो वह भी अपने सारे कपड़े, उतार कर नंगी होकर नहाने का लुत्फ उठाती है।

मंगल आदत अनुसार अपनी ब्रा के ऊपर खोलने के लिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा के हुक को खोलने लगी इस तरह की हरकत की वजह से उसकी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां सीना ताने और ज्यादा ऊभरकर सामने आ गई । और जैसे ही ब्रा का हुक खुला मंगल की दोनों की योजना आजाद परिंदे की तरह हवा में पंख फड़फड़ाने लगे,
अगर कोई अपनी आंखों से मंगल की नंगी चूचियां देख ले तो उसे यकीन ही ना हो कि यह एक ४० वर्षीय औरत की चूचीया है।,, क्योंकि अक्सर और ज्यादातर इस उमर में आकर औरतों की चुचियों का आकार भले ही बड़ा हो वह झूल जाती हैं,,, लेकिन मंगल के पक्ष में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था इस उम्र में भी उसकी चूचियां जवा ताजा और खरबूजे की तरह गोल गोल और बड़ी बड़ी थी और और देखने और आश्चर्य करने वाली बात यह थी कि,,, बड़ी-बड़ी और गोल होने के बावजूद भी उसमे लटकन बिल्कुल भी नहीं थी कहीं से भी ऐसा नहीं लगता था कि झूल गई हो,,, चॉकलेटी रंगी की निप्पल किसी कैडबरी की चॉकलेट की तरह लग रही थी जिस में से दूध की कुछ बुंदे टपक रही थी। जिसे किसी का भी मन मुंह में लेकर चूसने को हो जाए। ( मंगल ४० साल की होने के बाद भी उसकी चूचियों से दूध आता था )

मंगल अपनी ब्रा को भी अपनी बाहों से निकाल कर नीचे जमीन पर फेंक दी थी एक औरत होने के बावजूद भी मंगल अपनी चुचियों को स्पर्स करने का लालच रोक नहीं पाई और उत्सुकता बस वह अपने दोनों हाथों से अपने दोनों खरबूजे को पकड़कर हल्के से दबाने लगी
मंगल ने खुद ही दोनों चुचीयों को अपनी हथेली में भर कर हल्के से दबाई जोकी ऊसकी बड़ी बड़ी चूचियां उसकी हथेली में सिर्फ आधी ही आ रही थी
और दबाते दबाते कुछ सोचने लगी वह अपने पति के बारे में ही सोच रही थी जो कि उसकी जवानी को,
महसूस करने का सुख उसे दे नहीं पाया था और ना ही मंगल को,,, अद्भुत सुख का एहसास करा पाया था,,,, मंगल को इस बात का दुख अब तक अखर रहा था कि ना तो वह कुछ कर पाया और ना ही उसे कुछ करने दिया यही बात सोचते हुए वह अपने दोनों खरबूजो पर हथेली का स्पर्श कराकर हटा ली और अपना मन भटकने ना देकर तुरंत अपनी कच्छी को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ सरकाते हुए अपनी दुधिया चिकनी लंबी लंबी टांगों से होते हुए नीचे की तरफ लाई है और अगले ही पल अपनी पेंटी को भी उतार फेंका,,,, अब मंगल बाथरूम में संपूर्ण नग्नवस्था में थी,,, इस समय मंगल स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही थी,,, इस पल का नजारा किसी के भी लंड से पानी फेंक देने के लिए काफी था। गोरा गोरा बदन कामुकता से भरा हुआ, लंबे काले काले घने बाल जो कि उसकी कमर के नीचे भराव दार उन्नत नितंबों को स्पर्श करते थे, गोल चेहरा भरा हुआ किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं था जवानी से भरे हुए बदन पर मंगल की तनी हुई दोनों चूचियां कुदरत के द्वारा दी हुई संपूर्ण जवानी को पुरस्कृत करते हुए दूध की थैली की तरह लग रही थी। जिसमे से दूध रिस रहा था।
पेट पर चर्बी का नामोनिशान नहीं था हालांकि मंगल किसी भी प्रकार का योग व्यायाम नहीं करती थी लेकिन जिस तरह से सारा दिन हुआ इधर उधर दौड़ती फिरती हुई काम करती और कभी कभार खेतो में भी काम किया करती थी,,, इस कारण से उसका बदन इस उम्र में भी पूरी तरह से कसा हुआ था। मोटी मोटी चिकनी जांघें केले के तने के समान नजर आती थी,, जिसे हाथों से सहैलाना और चूमना हर मर्द की ख्वाहिश थी।,,,
जिस तरह की खूबसूरती से भरी हुई मंगल थी उसी तरह से बेहद खूबसूरत उसकी बेशकीमती बुर थी। जिसका आकार केवल एक हल्की सी दरार के रूप में नजर आ रही थी। हल्की सी उपसी हुई,,, या युं कहलो की गरम रोटी की तरह फुली हुई थी जिस पर हल्के हल्के सुनहरी रंग की झांटों का झुरमुट बेहद हसीन लग रहा था।,,,,। यह औरत के बदन का वह बेशकीमती हिस्सा था,,, जिसे पाने के लिए दुनिया का हर मर्द कुछ भी कर जाने को तैयार रहता है। और यह तो मंगल की बुर थी, जिसके बारे में सोच कर सूरज का लंड बार बार खड़ा हो जाता है।
मंगल का कसा हुआ बदन और उसकी पतली दरार रुपी बुर को देखकर यह अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था कि वह एक बेटी की मां है।

नितंबों पर अभी भी जवानी के दिनों वाला ही कसाव बरकरार था। गांड के दोनों फांखों के बीच की गहरी लकीर,,,,, ऊफ्फ्फ्फ,,,,,,,, किसी के भी लंड का पानी निकालने में पूरी तरह से सक्षम थी। इतना समझ लो कि मंगल पूरी तरह से खूबसूरती से भरी हुई कयामत थी ।
बाल्डी में से पानी का लोटा ले के खड़ी होकर नहाना शुरू कर दी । वह आहिस्ते आहिस्ते साबुन को अपने पूरे बदन पर रगड़ रगड़ कर नहाने लग गई,,,,, वह साबुन लगाए जा रही थी और उसके बदन पर लोटे से पानी का गिरता जा रहा था। थोड़ी देर में वह नहा चुकी थी और अपने नंगे बदन पर से पानी की बूंदों को साफ करके अपने बदन पर टॉवल लपेट लीया।
अपने नंगे बदन पर टावल लपेटने के बाद वह बाथरुम से निकल कर सीधे अपने कमरे में चली गई।

कमरे में जाते ही उसने अलमारी खोली जिसमें उसकी साड़ियां भरी हुई थी। उसमें से उसने अपने मनपसंद की साड़ी निकाल कर के उसके मैचिंग का ब्लाउज पेटीकोट और उसी रंग की ब्रा पेंटी भी निकाल ली।
उसके बाद वह आईने के सामने खड़ी होकर के अपने बदन पर लपेटे हुए टॉवल को भी निकालकर बिस्तर पर फेंक दी और एक बार फिर से उसकी नंगे पन की खूबसूरती से पूरा कमरा जगमगा उठा। सबसे पहले उसने लाल रंग की कच्छी पहनी फिर पेटीकोट को कमर तक चढ़ाकर गाट बांध दिया। नीचे से साड़ी लपेट कर ब्रा पहनने लगी....

तभी सूरज घर के अंदर आ जाता है। उसे चुदाई के बाद जोरो की भूख लगी थी।
सूरज जोर से आवाज करता हुआ अपनी मामी को यहां वहां ढुंढता हुआ सीधे कमरे में घुसने से पहले ही इतनी जोर से अपनी मामी को आवाज लगाया कि मंगल एकदम से चौक गई और उसके हाथ से ब्रा छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई,,, और सूरज अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर एकदम हक्का-बक्का रह गया,,,।

दरवाजे पर ही सूरज के पैर ठिठक गए थे,,, सूरज की तेज आवाज सुनते ही मंगल के हाथों से उसका ब्रा जोंकी वह पहनने ही वाली थी वह छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई थी,,, दोनों की आपस में नजरें टकराई,, कुछ पल के लिए सब कुछ थम सा गया एकदम स्थिर हो गया ऐसा लग रहा था मानो समय रुक गया हो,, दोनों मामी भांजा एक दूसरे को देखें,, लेकिन इस अफरातफरी में क्या करना है दोनों को समझ में नहीं आ रहा था,,, सूरज की जवान प्यासी नजरें उसकी मामी की मदमस्त भरी हुई जवानी के केंद्र बिंदु रुपी दोनों खरबूजे पर टिक गई,,,,, सूरज की तो सांसे अटक गई थी उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह अपने होशो हवास खो बैठा था करता भी क्या बिचारा आंखों के सामने जब इस तरह का बेहतरीन कामुक नजारा हो तो दुनिया का कोई भी मर्द अपने होशो हवास खो दें,,
सूरज की सांसे तेज चलने लगी थी पलभर में ही उसके तन बदन में उत्तेजना की वो लहर दौड़ने लगी की,,, अगर उसकी डोर खींचकर अगर काबू में ना लिया जाए तो बेकाबू हो जाती है,,,
मंगल को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें नीचे जमीन पर गिरा हुआ ब्रा उठाकर अपना तन ढकने तक की सुध उसमें बिल्कुल नहीं थी,,,, वह भी एक तक अपने भांजे को देखे जा रही थी,,, सूरज अपनी मामी की दोनों गोलाइयों को देखकर मदहोश हुआ जा रहा था,,,बेहद करीब से अब थोड़ी देर पहले उसने सुधियां मामी की चुचियों को देखा था उन्हें छू कर स्पर्श करके उन्हें मसल कर हर तरीके से उनका मजा लिया था लेकिन आज अपनी मामी की चुचियों को बड़े ध्यान से और बड़े करीब से देख रहा था,,, पर उसे इस बात का ज्ञान हो रहा था कि सुधियां मामी की चुचियों में और ऊसकी मंगल मामी की चुचियों में जमीन आसमान का फर्क था,,,,भले ही सुधियां मामी के चुचियों का आकार को ज्यादा बड़ा था लेकिन उसमे लचक थी,, लेकिन मंगल मामी की चुचियों का आकार एकदम कड़क था,,,खूबसूरत औरत के पास जिस तरह की चूची होना चाहिए उसी तरह की चूची मंगल के पास थी,,, उनमें बिल्कुल भी लचक नहीं थी दोनों की दोनों एकदम तनी हुई थी,,, और उन दोनों के बीच में चॉकलेटी रंग की निप्पल किसमिस के दाने की तरह लग रही थी जोकि अगर उनसे खेला जाए तो उत्तेजना में आकर अपना रूप छुआरा बना लेती है,,,
सूरज की इच्छा हो रही थी कि वह अपनी मामी की दोनों चूचियों को पकड़ कर उनके आकार को अपनी हथेली में महसूस करें उसकी गर्माहट से अपने तन बदन को गर्म कर ले,, लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसमें अभी नहीं थी वह केवल एक टक देखें ही जा रहा था,,,, तभी मंगल को इस बात का अहसास हुआ कि कुछ गलत हो रहा है,,इसलिए झट से नीचे झुकी और अपना ब्रा उठाकर उसे अपने दोनों चूचियों पर बिना पहने ही डाल दी,,, और अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेरते हुए बोली,,,।

मंगल - क्या हूवा इतनी दोपहर को चिलाने को और कमरे में देख के नही आ सकता क्या,,,,

सूरज - अब मुझे क्या मालूम था कि तुम कपड़े बदल रही हो...


मंगल - इतनी धोपहर के घर पर क्या काम हे
सूरज - आज खेत में ज्यादा काम नही हे इस लिए मामा बोले घर चला जा ओर फिर मेने सोचा घर जा के थोड़ा आराम कर लू और मुझे जोरो की भूख लगी है।

मंगल - अच्छा रुक मैं खाना देती हूं,,,
इतना कहकर वह दीवार की तरफ मुंह करके अपन ब्रा को पहनने लगी अपनी बड़ी बड़ी चूचीयो को अपने बेश कीमती खजाने को अपनी ब्रा में छुपा लीया,
उसके बाद ब्लाउज पहनने लगे सूरज से रहा नहीं जा रहा था वह अपनी नजर को चोरी से अपनी मामी की तरफ घुमाते हुए देखने लगा तो उसकी नंगी चिकनी एकदम गोरी पीठ अपनी मांसलता लिए नजर आने लगी,,,, देख कर मन में हो रहा था कि वह पीछे से जाकर अपनी मामी को अपनी बाहों में भर ले लेकिन वह ऐसा सोच सकता था करने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,, अपने भांजे की आंखों के सामने ही दीवाल की तरफ मुंह करके मंगल अपना ब्लाउज पहन ली और आखरी बटन बंद करते हुए बोली,,,।

मंगल - खाना रसोई घर में ही जा के खाले मुझे काम हे थोड़ा...
सूरज - अब मैं जाऊं,,,,

मंगल - तो तुझे रोका किसने है,,, जल्दी जा,,,(इतना कहकर नीचे गिरी हुई कंघी उठाने के लिए नीचे झुकी तो उसकी नजर सूरज के धोती पर पड़ी जो कि आगे की तरफ से उठा हुआ था,,, और मन में ही उसके मुंह से निकल गया यह क्या है,,,, लेकिन वह अपने मन में आए शब्दों को होठों पर नहीं लाई और दूसरी तरफ मुंह करके अपने बालों को सवारने लगी,,,, और सूरज भी कमरे से बाहर रसोई में चला गया,,,

कमरे से बाहर आने पर उसे इस बात का एहसास होगा कि उसके धोती में तंबू बना हुआ है,,, वह मन में अपने आप से बातें करते हुए बोला कि अच्छा हुआ कि इस पर मामी की नजर नहीं पड़ी वरना क्या सोचती,,,
सूरज कुछ देर पहले के हादसे के बारे में सोचता हुआ खाना खाने लगता हे उसके दिलो-दिमाग पर हलचल मची हुई थी,,, बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मामी के कसे हुए चुचियों के दो जोड़े नजर आने लगते थे,,, सूरज के लिए उसकी मामी की दोनों चूचियां फड़फड़ाते हुए कबूतर थे,,, जीन्हे अब अपने हाथ में लेकर दुलार ने खेलने और दबाने का मन कर रहा था,, सुधिया मामी की चुचियों के साथ वह जी भरकर खेल चुका था और उसकी चूचियों से खेल कर ऊसे जो आनंद प्राप्त हुआ था अब वही आनंद वह अपनी मंगल मामी की चुचियों के साथ लेना चाहता था वह देखना चाहता था कि सुधिया मामी की चुचियों में और उसकी मामी की चूचीयो में से किस की चूची ज्यादा आनंद देती है,,, अब वह आतुर था अपनी मामी के खूबसूरत जवान जिस्म से खेलने को,,,
लेकिन उसके मन में डर भी था,, वह इतनी जल्दी आगे बढ़ने से डर रहा था क्योंकि क्या पता सब कुछ अनजाने में हो रहा हो और उसे यह लग रहा हो कि उसकी मामी यह सबकुछ जानबूझकर कर रही है,,, यही बात सूरज के पल्ले नहीं पड़ रही थी कि यह जो कुछ भी कुछ दिनों से हो रहा है वह अनजाने में हो रहा है या जानबूझकर लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।
वह अपने मन में यही मानकर तसल्ली कर ले रहा था कि मंजिल मिले ना मिले सफर का आनंद उसे पूरा मिल तो रहा है,,।
सूरज खाना खाने के बाद अपने कमरे में आराम करने चला गया।

दूसरी तरफ मंगल को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह खटिया पर बैठी हुई थी धीरे-धीरे अपने बालों में कंघी कर रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्यों हो जाता है,,, सूरज तो खाना मांगने के लिए आया था और उसके हाथ से ही ब्रा छुट कर नीचे गिर गया था,,, मंगल मन में यही सोच रही थी कि उसकी खुद की ही गलती है,,, लेकिन फिर अपने मन में यह सोच रही थी कि सूरज का फर्ज बनता है कि जब उसकी आंखों के सामने इस तरह का दृश्य दिखा था तब उसे अपनी नजरों को फेंक देना चाहिए था लेकिन वह ऐसा ना करके बस टकटकी बांधकर उसे ही देख रहा था,,,लेकिन फिर उसके मन में यही ख्याल आता था कि सूरज जवान हो रहा है और इस उम्र में लड़के अक्सर बहक जाते हैं,,, सूरज के साथ भी यही हुआ होगा,,,अनजाने में ही सही लेकिन उसके सामने एक औरत का जवान जिस्म नंगा नजर आ जा रहा है और वह भी किसी गैर औरत का नहीं बल्कि उसकी खुद की मां समान मामी का,, ऐसे में भला एक बेटा सूरज क्या कर सकता है देखने के सिवा,,,
सब कुछ सोचने के बाद वह इसी नतीजे पर उतरी की इसमें उसके सूरज की गलती बिल्कुल भी नहीं थी,,ना तो उस दिन जब उसने मुझे मुतते हुवे देखा था और ना ही आज दोनों में उसकी ही गलती थी,, ब्रा कैसे नीचे गिर गईं यह उसे भी पता नहीं चला था अपने बेटे के सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी यह अनजाने में हुआ था आज भी उसका बेटा सूरज उसकी मदमस्त चुचियों के दर्शन कर गया था इसमें भी उसे अपनी ही गलती नजर आ रही थी,,, बस उसे एक चीज हैरान कर रही थी और वह थी बार-बार उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके सूरज के धोती के आगे वाला भाग का ऊंचा उठ जाना,,,,, और यह बात सोच कर उसके तन बदन में भी हलचल सी मच जा रही थी,,, इसी तरह की हलचल को कल बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और ना चाहते हुए भी अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली डालकर अपनी गर्मी शांत कर ली थी,,, आज भी उसे वही हरकत दौहराने की इच्छा हो रही थी लेकिन वह बड़ी मुश्किल से अपने मन पर काबू कर गई,,,।
ओर अपने आप को कामों में व्यस्त करने लगी।
Wow, fantastic
 

rkv66

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भाग ९

रात को सभी ने खाना खाया और सब सोने के लिए कमरे में चले गए। सूरज को आज थकान के कारण जलादि नींद अयि ये थकान सुधीया मामी के चुदाई के कारण आइ थी।
सुबह सूरज और विलास दोनो हर रोज की तरह खेतो पे निकल गए। खेतो से गुजरते हुवे सूरज ने सुधियां मामी की खेतो में देखा सुधिया मामी कही नजर अति हे क्या पर सुधियां मामी उसे नजर नहीं आती।
विलास और सूरज खेत पहुंच कर काम करने लगे

सुधियां कल की बात को सपना समझ कर सुबह अपनी मस्ती में उबड़ खाबड़ रास्तों से खेतों की तरफ चली जा रही थी,,,, ( सुधियां का पति खेती में कुछ भी मदत नही करता था सारा खेतो का काम सुधियां अकेली ही देखती थी उसका बेटा पप्पू भी दोस्तो के साथ दिन भर आवारा गस्ति करते घुमाता था अपनी मां की बिलकुल भी मदत नही करता था )

इसलिए सुधियां ज्यादातर वक्त खेतों में हीं गुजरता था,,,,

कुछ देर बाद सुधियां खेतों में पहुंच चुकी थी जहां पर गेहूं गन्ने मकई की फसल लहरा रही थी।
सुधियां खेत के किनारे खड़ी होकर मुआयना कर रही थी चारों तरफ गेहूं मकई गन्ने दिख रहे थे।
सुधियां अपने खेतो में काम करने लगी।

दिन चढ़ चुका था गर्मी का मौसम था। ऐसे तेज धूप में हवाएं भी गर्म चल रही थी,,,,। धीरे धीरे सुधियां के माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी प्यास से उसका गला सूखने लगा,,,, उसे प्यास लगी थी इधर उधर नजर दौड़ाई तो कुछ ही दूरी उसके खेतो पर ट्यूबवेल मैसे पानी निकल रहा था जो कि खेतों में जा रहा था,,,। ट्यूबवेल के पाइप में से निकल रहे हैं पानी को देख कर सुधिया की प्यास और ज्यादा भड़कने लगी,,, वह अपनी जगह से उठी और ट्यूबेल की तरफ जाने लगी,, तेज धूप होने के कारण सुधियां,,, पल्लू को हल्के से दोनों हाथों से ऊपर की तरफ उठा कर जाने लगी,,, दोनों हाथ को ऊपर की तरह हल्कै से उठाकर जाने की वजह से सुधिया की चाल और ज्यादा मादक हो चुकी थी,,, हालांकि समय सुधिया पर किसी की नजर नहीं पड़ी थी लेकिन इस समय किसी की भी नजर उस पर पड़ जाती तो उसे स्वर्ग से उतरी हुई अ्प्सरा देखने को मिल जाती,,, बेहद ही कामोत्तेजना से भरपुर नजारा था। इस तरह से चलने की वजह से सुधिया की मद मस्त गोलाई लिए हुए नितंब कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आ रही थी,,, कुछ ही देर में सुधिया ट्यूबवेल के पास पहुंच गई और दोनों हाथ आगे की तरफ करके पानी पीने लगी,,, शीतल जल को ग्रहण करने से उसकी तष्णा शांत हो गई,,,

सुधियां कुछ देर वहीं रुक कर अपने चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मार कर अपने आप को तरोताजा करने का प्रयास करने लगी,,,,। पानी पीने के बाद..
सुधियां पास में ही पेड़ की छांव में बैठ गई

थोड़ी देर बाद सुधियां को बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह अपने आप पर बहुत ज्यादा संयम रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके लिए इस समय मोचना बेहद आवश्यक हो चुका था। क्योंकि ज्यादा देर तक वह अपनी पेशाब को रोक नहीं पा रही थी पेट में दर्द सा महसूस होने लगा था। सुधिया पेड़ के नीचे से उठी और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करते हुए अपने पेशाब को रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन कोई भी इंसान ज्यादा देर तक पेशाब को रोक नहीं सकता था इसलिए सुधियां को भी मुतना बेहद जरूरी था। उसे डर था कि खेतो से गुजरात हुवा कोई आदमी उस ना देख ले। इसलिए वह बड़े पेड़ के पास भी जंगली झाड़ियों के नीचे से होकर धीरे-धीरे पेशाब करने के लिए अंदर जाने लगी और एक जगह पर पहुंच कर वह इधर उधर नजरे दौरा कर देखने की कोशिश करने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उस को झाड़ियों में से दूसरा कोई नजर नहीं आ रहा था सुगंधा जहां पर खड़ी थी वहां पर कुछ ज्यादा ही झाड़ियां थी और वहां पर किसी की नजर पड़ने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी


इधर दोपहर को सूरज को बहोत जोरो की प्यास लगती थी सूरज खेतो में बने हेड पंप के पास पहुंचकर कर पानी पीने लगा जी भर के पानी पीने के बाद पानी से हाथ मुंह धो कर अपने आप को ठंडा करने की कोशिश करने लगा जब सूरज वहा से प्यास बुझा के खेतो में जाने लगा तभी उसकी आंखों के सामने से एक खरगोश का बच्चा भागता हुआ नजर आया और सूरज उसके पीछे पीछे जाने लगा सूरज उसे पकड़ना चाहता था उसके साथ खेलना चाहता था इसलिए जहां जहां खरगोश जा रहा था सूरज उसके पीछे पीछे चला जा रहा था।


सूरज खरगोश के पीछे पीछे भागता चला जा रहा था और तभी खरगोश उसकी आंखों के सामने एक घनी जंगली झाड़ियों के अंदर चला गया सूरज उस खरगोश को पकड़ लेना चाहता था इसलिए दबे पांव वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा उसके सामने घनी झाड़ियां थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था उसे मालूम था कि इसी झाड़ियों के अंदर खरगोश दुबक कर बैठा हुआ है इसलिए वह घनी झाड़ियों के करीब पहुंचकर धीरे धीरे पत्तों को हटाने लगा लेकिन उसे खरगोश नजर नहीं आ रहा था वह अपनी चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा लेकिन वहां खरगोश का नामोनिशान नहीं था वह निराश होने लगा वह समझ गया कि खरगोश भाग गया है और अब उसके हाथ में नहीं आने वाला लेकिन फिर भी अपने मन में चल रही इस उथल-पुथल को अंतिम रूप देते हुए वह अपने मन की तसल्ली के लिए अपना एक कदम आगे बढ़ाकर घनी झाड़ियों को अपने दोनों हाथों से हटाकर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन फिर भी परिणाम शून्य ही आया वह उदास हो गया वह अपने दोनों हाथों को झाड़ियों पर से हटाने ही वाला था कि उसकी नजर थोड़ी दूर की घनी झाड़ियों के करीब गई और वहां का खरगोश नजर आया सूरज को देख कर झाड़ियों के पास बिल था उसमे जा के छुप गया। सूरज धीरे से रेंगता हुवा घनी झाड़ियों के पास जा के खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार करने लगा।

इधर सुधिया
का पेशाब की तीव्रता उसके पेट में ऐठन दे रही थी सुधिया धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी यह नजारा बेहद ही कामुकता से भरा हुआ था लेकिन इस नजारे को देखने वाला वहां कोई नहीं था धीरे-धीरे सुधिया पूरी तरह से अपनी कमर तक अपनी साड़ी को उठा दी थी उसकी नंगी चिकनी मोटी मोटी जांगे पीली धूप में स्वर्ण की तरह चमक रही थी बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ यह नजारा देखने वाला वहां कोई नहीं था और वैसे भी सुधियां यही चाहती थी कि कोई उसे इस अवस्था में ना देख ले सुधिया साड़ी को अपनी कमर तक उठा कर एक हाथ से अपनी लाल रंग की कच्छी को नीचे की तरफ सरकाने लगी धीरे धीरे सुधिया अपनी पैंटी को अपनी मोटी चिकनी जांघों तक नीचे कर दी और आंखे बंद कर के तुरंत नीचे बैठ गई मुतने के लिए। सुधिया की बुर फैल कर खूब मोटी धार निकाल कर मुतना शुरू कर दिया मूत की धार सीधे झाड़ियों के ऊपर से दूसरी तरफ गिरने लगी जहापारी सूरज नीचे लेटा हुवा खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार कर रहा था।
जैसे ही सूरज के ऊपर सुधियां की मूत की धार गिरी सूरज चौक गया की ये बिन बादल बरसात केसे होने लगी।
इस लिए सूरज रेंगता हुवा थोडासा आगे गया और झाड़ीयो को हटा के देखने लगा और सामने का नजारा नजारा देखकर एकदम सन्न रह गया।
सूरज को एक बार फिर से अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मामी
सुधिया को बहुत जोरों से पेशाब लगी कर रही थी। जिससे सूरज का मुंह खुल गया और बूर से निकलती हुवी पेशाब की धार सीधे सूरज के मुंह में चली गई।
जैसे ही सूरज के मुंह में पेशाब की धार गिरी सूरज का गला फिर से सूखने लगा थोड़ी देर पहले हैंडपंप पर के पानी से अपनी प्यास बुझाई थी लेकिन सुधिया की बूर की मूत की धार ने उसकी प्यास बढ़ा दी थी। ओर सूरज बूर से निकलती हुवी मूत की धार को पीने लगा।
सूरज को अपनी किस्मत पर नाज होने लगा क्योंकि कुछ दिनों से उसकी किस्मत उसके पक्ष में चल रही था

इस समय सूरज की आंखों के सामने उसकी सुधिया मामी की गुलाबी बूर थी जो तेजी से पानी छोड़ रही थी। जिसे सुधिया आंखे बंद किए हल्के से उठाए हुए थी और सुधियां को इस तरह देख कर पलभर में ही उसका लंड धोती के अंदर तन कर लोहे के रोड की तरह हो गया था।

अब सूरज खरगोश के बिल को कब का भूल चुका था अब उसके सामने एक नया बिल था जो लगातार मूत की धार उसके मुंह में छोड़ रहा था और धोती में उसका फन फनता हुवा साप उस बिल में घुसाने को बेताब था।

सूरज लेटे हुवे अपने हाथों से लंड को मसलने लगा था सुधियां की गुलाबी बूर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी जिसकी वजह से उसमें से एक सीटी सी बजने लगी थी और इस समय सुधियां की बुर से निकल रही सीटी की आवाज सूरज के लिए किसी बांसुरी के मधुर धुन से कम नहीं थी सूरज उस मादकता से भरे नजारे और बुर से आ रही मूत की धार को पी रहा था।
सूरज को ऐसा लग रहा था की मानो की सुधियां मामी के बूर से निकलता हुवे मूत की धार कभी बंद ना हो और ऐसे ही चलती रहे।
सूरज उस मधुर धुन में खोने लगा

सुधिया आंखे बंद किए पूरी तरह से निश्चिंत थी कि उसे इस समय पेशाब करते हुए कोई नहीं देख रहा है लेकिन इस बात से अनजान थी कि उसका ही भांजा झाड़ियों के नीचे लेटा हुवा उसके बूर से निकलती पेशाब को पी रहा है।
थोड़ी देर में आंखे बंद किए सुधियां ने पेशाब कर ली लेकिन उठते हुवे अपनी गुलाबी पुर की गुलाबी पतियों में से पेशाब की बूंद को गिराते हुए हल्के हल्के अपने नितंबों को झटकने लगी।
लेकिन सुधियां की यह हरकत बेहद ही कामुकता से भरी हुई थी सूरज खुद अपनी मामी की इस हरकत को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया था कल की चुदाई के बाद का लंड बार बार खड़ा होने लगा था।
सूरज को अब रहा नहीं गया

जैसे ही सुधिया पेशाब कर के जैसे ही खड़ी होने वाली थी
तभी सूरज ने आगे बढ़ते
अपना मूह आगे कर दिया, और सुधिया की बूर से लगा कर उसकी चूत को अपने मूह मे भर लिया,
जिससे सुधियां के शरीर में कम्पन या जाता है वह डर जाति हे की नीचे क्या चीज है वह देखने के लिए नीचे झुकी नीचे का नजारा देख कर सुधिया दंग रह जाती हे की कोई लड़का अपना मुंह बूर से लगाए हुवे चूस रहा था।
सुधियां डरते हुवे कोन हो तुम...?
सूरज अपना मुंह बूर से थोड़ा पीछे हटाके के बोलता ही में हु मामी सूरज आपका भांजा और इतना कहके फिरसे
सुधिया की बूर को अपने मुंह में भर के जोर जोर से चूसने लगा।


सुधिया- बेटा तू ये क्या कर रहा है यह गंदी जगह ही इसे मत चाट मुझे छोड़ से में तेरी मामी हू कोई हमे देख लेगा

उसकी बातो कोई भी का असर अब सूरज पर नही हो रहा था सूरज अपनी ही मस्ती में जोर जोर से बूर का चाटने लगा


सूरज- सूरज लंबी लंबी जीभ निकाल कर सुधिया की बुर को खूब कस कर दबोचते हुए चाटने लगता है, सुधिया की चूत एक दम मस्त हो जाती है

सुधियां को भी अब मजा आने लगा था पाहिली बार उसकी बूर कोई चूस रहा था।

सूरज सुधिया की चूत को खूब ज़ोर से अपने मूह मे दबा कर चूसने लगता है,

अब सुधिया अपनी जाँघो को और फैला देती हे और उसकी चूत को सूरज के मुंह में दबाने लगती है।

सूरज पागलो की तरह उसकी चूत को चूसने लगता है और सुधिया उसके सर को पकड़ कर खूब ज़ोर से अपनी चूत से
दबा लेती है,

सूरज किसी पागल कुत्ते की तरह सुधिया की पूरी बूर खोल खोल कर उसका रस चाटने और चूसने लगता है और

सुधिया अपनी चूत खूब कस कस कर सूरज के मूह पर दबा दबा कर रगड़ने लगती है,


सुधिया- आह सीईईईई कितना ज़ोर से चाट रहा है बेटे, ज़रा आराम से चाट आह आहह आह आ सीईईईईईईईई ओह सूरज...


सुधिया के पैर अब थरथराने लगे और सुधिया नीचे जमीन पर गिर गई
अब सुधियां अपने पैरों को हवा में जितना हो सके फैलाते हुए अपनी कसी कसी मांसल जाँघों को खुलकर अपने सूरज के लिए खोल दिया, जिससे उनकी बूर उभरकर सूरज के मुंह के सामने आ गयी और दोनों फांकें खुलकर फैल गयी, हल्के धूप कि रोशनी में सूरज अपनी मामी की फैली हुई बूर को देखकर और भी पागल हो गया और उसने अपनी लंबी सी जीभ निकाली, फिर जीभ को बूर के नीचे अंतिम छोर पे गांड की छेद के पास लगाया और सर्रर्रर्रर्रर से पूरी बूर को चाटता हुआ नीचे से एकदम ऊपर तक आया, सूरज के ऐसा करने से सुधिया फिरसे बौखला गयी और मदहोशी में अपनी आंखें बंद करके अपने होंठों को दांतों से काटते हुए बड़ी जोर से सिसकी और आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई.......... अम्मामामामामा......सूरजबेटा.... ऐसे बोलते हुए
पूरे बदन को धनुष की तरह ऊपर को मोड़ती चली गयी, उसकी विशाल चूचियाँ तनकर ऊपर को उठ चुकी थी और निप्पल तो इतने सख्त हो गए थे कि वो खुद ही उन्हें हल्का हल्का मसल रही थी।

बूर की पेशाब और काम रस की गंध से सूरज पागल हो चुका था, उसने इसी तरह कई बार पूरी की पूरी बूर को नीचे से लेकर ऊपर की तरफ विपरीत दिशा में लप्प लप्प करके चाटा, जब सूरज बूर के ऊपरी हिस्से पर पहुचता तो बूर के ऊपर बालों में अपनी जीभ फिराता और फिर जीभ को फैलाके गांड की छेद के पास रखता और फिर सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर से लपलपाते हुए पुरी बूर पर जीभ फिराते हुए ऊपर की ओर आता और कभी तो वो ऊपर आकर बूर के ऊपर घने बालों पर जीभ फिराता कभी जहां से दरार शुरू होती है वहां पर जीभ को नुकीली बना कर दरार में डुबोता और भगनासे को जी भरकर छेड़ता, फिर बूर के दाने के किनारे किनारे जीभ को गोल गोल घूमता।

सुधिया की पूरी बूर सूरज के थूक से गीली हो चुकी थी, उसकी बूर से निकलता काम रस सूरज बराबर अपनी जीभ से चाट ले रहा था, पूरी झाड़ियों में हल्की हल्की चप्प चप्प की आवाज के साथ दोनों मामी भांजे की सिसकियां गूंजने लगी।

सूरज ने फिर एक बार अपनी जीभ को नीचे गांड के छेद के पास लगाया और इस बार उसने जीभ को नुकीला बनाते हुए जीभ को अपनी मामी की बूर की दरार में नीचे की तरफ डुबोया और दरार में ही डुबोये डुबोये नुकीली जीभ को नीचे से खींचते हुए ऊपर तक लाया, पहले तो एक बार जीभ मामी की बूर के छेद में घुसने को हुई पर फिर फिसलकर ऊपर चल पड़ी और बूर के दाने से जा टकराई, फिर सूरज ने वहां ठहरकर बूर के दाने को लप्प लप्प करके कई बार चाटा।

सुधिया के बदन की एक एक नस आनंद की तरंगों से गनगना उठी, बड़ी ही तेज तेज उसके मुँह से अब सिसकियां निकल रही थी मानो अब लाज, संकोच और डर (की कोई सुन लेगा) जैसे हवा हो चुका था, अपने पैरों को मोड़कर उसने सूरज की पीठ पर रख लिया था,

गनगना कर कभी वो अपने सूरज को पैरों से जकड़ लेती कभी ढीला छोड़ देती। बेतहासा कभी अपना सर दाएं बाएं पटकने लगती, कभी अपने हांथों से चूचीयों को कस कस के मीजती, सुधिया मस्ती में नीचे की तरफ नही देख रही थी, उसकी आंखें अत्यंत नशे में बंद थी, कभी थोड़ी खुलती भी तो वो हल्का सा आसमान को देखती।

उनकी सांसे बहुत तेज ऊपर नीचे हो रही थी, लगातार उसके सूरज उसकी बूर को एक अभ्यस्त खिलाड़ी की भांति चाटे जा रहे थे, जीवन में पहली किसी मर्द की जीभ उसकी बूर पर लगी थी और वो भी खुद उसके भांजे की, आज पहली बार वो सूरज से अपनी बूर चटवा रही थी, इतना परम सुख उसे कभी नही मिला..
सूरज की मर्दाना जीभ की छुअन से सुधीया नशे में कहीं खो गयी थी।

झाड़ियों में से बूर चाटने की चप्प चप्प आवाज सिसकियों के साथ गूंज रही थी। एकएक सूरज को कुछ कमी महसूस हुई वो और ज्यादा गहराई से अपनी मामी बूर को खाना चाहता था, उसने मामी के बूर से मुँह हटाया तो उसके होंठों और मामी की बूर की फाँकों के बीच लिसलिसे कामरस और थूक के मिश्रण से दो तीन तार बन गए, सूरज ने बड़ी मादकता से उसे चाट लिया और उठने लगा।

उसने दहाड़ते हुए अपनी दो उंगलियों से अपनी मामी की बूर की फांकों को अच्छे से चीरा, एक तो जांघे फैलने से बूर पहले ही खुली हुई थी ऊपर से सूरज ने उंगलियों से फांकों को और चीर दिया जिससे बूर का लाल लाल छेद और बूर का दाना धूप की रोशनी में चमक उठा, सूरज लपकते हुए बूर पर बेकाबू होकर टूट पड़ा और जीभ से बूर के लाल लाल कमसिन कसे हुए छोटे से छेद को बेताहाशा चाटने लगा।

सुधियां का बदन अचानक ही बहुत तेजी से थरथराया और सुधिया ने
आ...हा.. आहा... ओ हो... ऊ महा....
कहते हुए बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज को सिसकते हुए दबाया।

सूरज लप्प लप्प जीभ से अपनी मामी की बूर के छेद को चाटे जा रहा था, सुधिया फिर से तड़प तड़प कर अपना सर दाएं बाएं पटकती, पूरा बदन ऐंठती, गनगना जाती, अपनी मुठ्ठियों को कस कस के भीचती, तो कभी अपने स्तन भींच लेती, अपने पैरों को उसने फिर से अपने सूरज की पीठ पर लपेट दिया और जब जब उसका बदन थरथराता वो अपने पैरों से अपने बाबू को जकड़ लेती।

सूरज ने थोड़ी देर अपनी मामी की बूर के छेद को चाटा फिर अपनी जीभ को नुकीला किया और बूर के नरम नरम से लाल लाल छेद के मुहाने पर गोल गोल घुमाने लगा, सुधिया अब जोर जोर से काफी तेज तेज छटपटाने और सिसकने लगी, उसे क्या पता था कि उसके सूरज बूर के इतने प्यासे हैं, वो बूर के इतने अच्छे खिलाड़ी हैं, वो बूर चाटने में इतने माहिर है, ऐसा सुख तो उसके पति ने कभी सपने में भी नही दिया, उसे पता लग चुका था कि उसके सूरज अपनी मामी की बूर के कितने भूखे हैं।

झाड़ियों में काफी तेज तेज सिसकारी गूंजने लगी।
सूरज ने एक बार फिर से पूरी बूर को नीचे से ऊपर की ओर अपनी जीभ से लपलपा के चाटा, सूरज का अब इरादा था अपनी जीभ अपनी मामी के बूर की छेद में डालने का पर इतने भर से ही सुधियां अब काफी त्राहि त्राहि करने लगी, उसके मुँह से अब थोड़ी ज्यादा जोर से
आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई..........अम्मामामामामा..................सूरज................हाहाहाहाहायययययय..............आआआआआआहहहहहह......
सिसकते हुए निकलने लगा।


उसकी बुर के अंदर बाहर करते हुए अपनी जीभ को उसकी बुर के बीचो बीच रखकर चाटते हुए उसे मजा देने लगा सूरज की हरकत की वजह से सुधियां के मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फिर से फूटने लगी,,, सुधिया की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,, उसका संपूर्ण वजुद कांपने लगा और देखते ही देखते,,, सुधियां जोर से सिसकारी लेते हुए झड़ने लगी,,,,, उसकी गुलाबी बुर के छेद से,, मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी,,,, लेकिन सूरज ने उस मदनरस की एक भी बूंद को जाया नहीं देना चाहता था,,, इसलिए अपनी जीभ लगाकर लपालप उसे पीना शुरू कर दिया,,,सिसकारी लेती हुई सुधिया सूरज की हरकत देखकर एकदम से सिहर उठी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक मर्द औरत की बुर से निकला हुआ उसका नमकीन पानी इस कदर चाट चाट कर अपनी गले के नीचे उतार लेता है,,,,, सुधिया झाड़ चुकी थी सुधिया हेरान भी थी कि,,, बिना बुर में लंड डाले उसकी बुर इतना पानी छोड़ रही थी,,,।
लेकिन उसे इस तरह से पानी छोड़ते हुए बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,, सुधियां कुछ देर तक उसी तरह से जमीन के ढेर हुइ।

अब सुधियां काफी गरम हो गई उसकी बूर अब लंड मांग रही थी।
सुधिया ने सिसकते हुए सूरज से कहा- बेटा, अपना लंड मोटा सा लंड, एक बार अपनी मामी की पनियायी बूर में गूसा दो, बस एक बार हल्का गूसा दो


मामी ने इस अदा से निवेदन किया कि सूरज अपनी मामी की अदा पर कायल ही हो गया।

सूरज - आआआआआहहहहहह......मामी, तूम अपने आप ही लंड खोलकर बूर में गूसा दो मेरी रानी, डुब लो जितना तेरा मन करे, ये तो तेरी ही अमानत है मामी।

इतना कहकर सूरज अपने दोनों हाँथ मामी की कमर के अगल बगल टिकाकर मामी के ऊपर झुक सा गया और अपनी मामी की आँखों में देखने लगा दोनों मुस्कुरा दिए और कई बार एक दूसरे के होंठों को चूमा।

सुधियां ने अपने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा जो अभी भी उसकी टांगो में फसा हुआ था और दूसरे हाँथ से उसने अपने भांजे के लोहे के समान हो चुके सख्त लंड को धोती के ऊपर से पकड़ लिया, ९ इंच लंबे और ४ इंच मोटे विशाल लंड को पकड़कर सुधिया गनगना गयी, वासना की मस्ती उसके नसों में दौड़ गयी, कितना बड़ा लन्ड था सूरज का, उसके भांजे का, उसपर वो उभरी हुई नसें, सुधियां की मस्ती में आआआआहहहह निकल गयी।
( कल चुदाई के दौरान सुधियां ने सूरज के लंड को बूर में महसूस किया था मगर हात से छुआ नहीं था )

सुधियां - ओह बेटा कितना सख्त हो रखा है तुमारा लंड, कितना मोटा है ये.......हाय........ कितना लंबा है.......ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़


सूरज- हाँ मेरी मामी ये सिर्फ और सिर्फ अब आपका है।


सुधिया ने कुछ देर पूरे लन्ड को आँहें भरते हुए सहलाया फिर दूसरे हाँथ से कच्छी को छोड़कर हाँथ को पीछे कमर पर ले गयी और धोती को कमर पर से ढीला किया, सूरज ने अपनी मामी की आंखों में देखते हुए अपनी धोती को खोलने में मदद की, धोती काफी हद तक ढीली हो गयी थी सूरज ने एक हाँथ से धोती खोलकर बगल रख दी, नीचे से वो पूरा नंगा हो गया ऊपर बनियान पहनी हुई थी, अपनी मामी के ऊपर वो दुबारा झुक गया और उसकी आँखों में देखते हुए उसे चूम लिया,
सुधिया सिसकते हुए अपने भांजे के निचले नग्न शरीर पर हाँथ फेरने लगी, उसने जाँघों को छूते हुए सूरज के लन्ड के ऊपर के घने बालों में हाँथ फेरा और फिर लंड को पकड़कर कराहते हुए सहलाने लगी,
सुधियालंड को मुट्ठी में पकड़कर पूरा पूरा सहलाने लगी, सिसकते हुए सहलाते सहलाते वो नीचे के दोनों बड़े बड़े आंड को भी हथेली में भरकर बड़े प्यार से दुलारने लगी और सहलाने लगी,
अपनी मामी की नरम मुलायम हांथों की छुअन से सूरज की नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने सिसकते हुए अपने एक हाँथ से अपनी कच्छी को दुबारा साइड किया और दूसरे हाँथ से लंड को सहलाते हुए बड़े प्यार से उसकी आगे की चमड़ी को पीछे की तरफ खींचकर खोला, दो बार में उसने लन्ड की चमड़ी को उतारा, खुद ही तेजी से ऐसा करते हुए जोश में सिसक पड़ी, क्योंकि एक मामी मां के लिए अपने ही बेटे समान भांजे की लंड की चमड़ी खोलना बहुत ही वासना भरा होता है


पहली बार में तो उसने चमड़ी को सिसकते हुए खाली फूले हुए सुपाड़े तक ही उतारा और चिकने सुपाड़े पर बड़े प्यार से उंगलिया फेरते हुए कराहने लगी मानो उसे नशा चढ़ गया हो, दोनों मामी भांजा एक दूसरे की आंखों में नशे में देख रहे थे, सूरज मामी की कमर के दोनों तरफ अपना हाथ टिकाए उसके ऊपर झुका हुआ था और सुधियां अपने दोनों पैर फैलाये साड़ी को कमर तक उठाये एक हाथ से अपनी कच्ची को साइड खींचें हुए, दूसरे हाँथ से अपने सूरज का लंड सहलाते हुए उसकी आगे की चमड़ी को पीछे को खींचकर उतार रही थी।


सुधिया के मुलायम हाँथ अपने चिकने संवेदनशील सुपाड़े पर लगते ही सूरज आँहें भरने लगा, अपने भांजे को मस्त होते देख सुधियां और प्यार से उनके सुपाड़े को सहलाने और दबाने लगी, अपने अंगूठे से सुधियांने अपने भांजे के लंड के पेशाब के छेद को बाद प्यार से रगड़ा और सहलाया, उसकी भी मस्ती में बार बार आंखें बंद हो जा रही थी, बार बार सिरह जा रही थी वो, बदन उसका गनगना जा रहा था मस्ती में, फिर उसने अपने भांजे के लंड की चमड़ी को खींचकर पूरा पीछे कर दिया और अच्छे से अपने भांजे के पूरे लंड को अपने मुलायम हांथों से सहलाने लगी।


फिर काफी देर सहलाने के बाद सुधिया ने एक हाँथ से अपनी कच्छी को साइड किया और अपने भांजे के लंड को अपनी बूर की रसीली फांकों के बीच रख दिया, जैसे ही सुधियां ने बूर पे लंड रखा दोनों मामी भांजा मस्ती में जोर से सीत्कार उठे-


सुधिया-आआआआआआआआआआहहहहहहहहहह...........ईईईईईईईशशशशशशशशश..........हाहाहाहाहाहाहाहाहायययययय........बेटा....…...आआआआआआहहहहह


सूरज - आआआआआआहहहहह.......मेरी मामी.....कितनी नरम है तेरी बूबूबूबूररररर..........ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़........मजा आ गया।


आज जीवन में पहली बार सूरज के लंड को, इतना असीम आनंद मिलेगा कभी सपने में भी नही सोचा था, सुधिया कराहते हुए अपने भांजे के लंड का सुपाड़ा अपनी दहकती बूर की फांक में रगड़ती जा रही थी, दोनों के नितम्ब हल्का हल्का मस्ती में थिरकने लगे, सूरज हल्का हल्का लंड को बूर की फांक में खुद रगड़ने लगा, पूरे बदन में चिंगारियां सी दौड़ने लगी, बूर से निकलता लिसलिसा रस लंड के आगे के चिकने भाग को अच्छे से भिगोने लगा, सुधिया ने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा हुआ था पर अब उसने उसको छोड़कर वो हाँथ अपने भांजे के हल्के हल्के धक्का लगाते चूतड़ पर रख कर कराहते हुए सहलाने लगी, बीच बीच में हाँथ से उनके चूतड़ को अपनी बूर की तरफ मचलते हुए दबा देती, दहाड़ते लंड का मोटा सा सुपाड़ा मखमली बूर की फाँकों में ऊपर से नीचे तक रगड़ खाने लगा, सूरज को इतना मजा आया कि वह धीरे धीरे अपनी मामी के ऊपर लेटता चला गया, सुधिया अपने दोनों हांथों को वहां से हटा कर बड़े प्यार से अपने भांजे को अपनी बाहों में भरकर मस्ती में दुलारने लगी, अत्यंत नशे में दोनों की आंखें बंद थी।


सूरज अपनी मामी के बाहों में समाए, उसपर लेटे हुए अपनी आंखें बंद किये अपने लंड को बूर की फाँकों में रगड़ते हुए नरम नरम फांकों का आनंद लेने लगा। सुधिया हल्का हल्का मस्ती में आंखें बंद किये आआआहहहह ह......आआआहहहहह करने लगी।


सुधियां ने बड़ी मुश्किल से अपनी नशीली आंखें खोली उसका का सारा ध्यान सिर्फ अपने भांजे के मोटे दहकते लन्ड पर था जो कि लगातार धीरे धीरे उसकी सनसनाती बूर की रसीली फांकों में नीचे से ऊपर तक बार बार लगातार रगड़ रहा था, वो मुलायम चिकना सुपाड़ा बार बार जब सुधियां की बूर के फांकों के बीच दाने से टकराता तो सुधियां का बदन जोर से झनझना जाता, पूरे बदन में सनसनाहट होने लगती।


सुधिया ने कराहते हुए अपने दोनों पैर मोड़कर अच्छे से फैला रखे थे, सूरज एक लय में अपने मोटे लंड को अपनी मामी की बूर की फांकों में रगड़ रहा था, सुधिया भी मादक सिसकारियां लेते हुए धीरे धीरे अपनी गांड को अपने भांजे के लंड से ताल से ताल मिला के उठाने लगी और अपनी बूर को नीचे से उठा उठा के लंड से रगड़ने लगी।


सुधियां की कच्छी का किनारा बार बार सूरज के लंड से रगड़ रहा था तो

सूरज ने धीरे से मामी के कान में बोला - मेरी प्यारी मामी


नीलम - हाँ मेरे प्यारे बेटे


सूरज - अपनी कच्छी पूरा उतार न, तब अच्छे से मजा आएगा।


सुधिया - हाँ बेटा तुम उठो जरा।


सूरज मामी के ऊपर से उठ जाता है उसका लंड भयंकर जोश में झटके लिए जा रहा, ९ इंच लंबा लंड पूरा खुला हुआ था, लोहे के समान सख्त और खड़ा था, सुधिया ने कराहते हुए अपनी छोटी सी कच्छी निकाल फेंकी और जल्दी से अपनी साड़ी भी खोल कर झाड़ियों में बगल में रख दी, अब सुधिया के बदन पर सिर्फ ब्लॉउज रह गया था नीचे से वो बिल्कुल नंगी हो गयी थी।


अपनी मामी को इस तरह अपने भांजे के सामने आज पूरी नंगी होते देख सूरज वासना में कराह उठा,
सूरज अपनी मामी का पुर्णतया नग्न निचला हिस्सा देखकर बौरा गया, सुधियां ने कच्छी और साड़ी उतारकर फिर से अपनी दोनों जांघें अच्छे से फैला कर अपनी बूर को अपने भांजे के सामने परोस दिया, सूरज एक पल तो मामी की मादक सुंदरता को देखता रह गया, फिर एकएक कराहते हुए उसने अपनी शादीशुदा मामी के पैरों को एड़ी और तलवों से चाटना शुरू किया, सुधियां तेजी से सिसक उठी,
दोनों पैरों की एड़ी, तलवों को अच्छे से चूमता चाटता वह आगे बढ़ा, घुटनों को चूमता हुआ वह जांघ तक पहुँचा, दोनों जाँघों को उसने काफी देर तक अच्छे से खाली चूमा ही नही बल्कि जीभ निकाल के किसी मलाई की तरह अच्छे से चाटा, सुधिया वासना से गनगना गयी, सूरज अपनी मामी की अंदरूनी जांघों को अच्छे से चूम और चाट रहा था, सुधिया रह रह कर झनझना जा रही थी।


सूरज जांघों को चाटते हुए वह महकती बूर की तरफ बढ़ा, बूर फिरसे लगातार लिसलिसा काम रस बहा रही थी,
सूरज ने एक बार फिर बूर को मुँह में भर लिया और एक जोरदार रसीला चुम्बन अपनी मामी की बूर पर लिया, सुधिया जोर से सिसकारते हुए चिंहुककर उछल सी पड़ी, बदन उसका पूरी तरह गनगना गया, कराहते हुए सुधियां ने खुद ही एक हाँथ से अपनी महकती पनियायी बूर को चीर दिया और सूरज मस्ती में आंखें बंद किये अपनी मामी की बूर को लपा लप्प चाटने लगा, सुधियां हाय हाय करने लगी, सुधिया कभी अपनी बूर की फांकों को फैलाती तो कभी अपने भांजे के गाल को सहलाती, कभी जोश में झनझनाते हुए अपने भांजे की पीठ पर कस के नाखून गड़ा देती, सुधिया के ऐसा करने से सूरज को और भी जोश चढ़ जा रहा था और वो और तेज तेज बूर को चाटे जा रहा था।


सुधियां जब अपनी उंगली से बूर की फांक को फैलाती तो सूरज तेज तेज बूर की लाल लाल फांक में जीभ घुमा घुमा के चाटता, कभी फूले हुए बूर के दाने को जीभ से छेड़ता कभी मुँह में भरकर चूसता, फिर कभी मामी की बूर के छेद में जीभ डालता और जीभ को अंदर डाल के हल्का हल्का गोल गोल घुमाता।


सुधिया वासना में पगला सी गयी, जोर जोर से सिसकने लगी, कराहने लगी, अपने भांजे के सर को कस कस के अपनी रसभरी बूर पर दबाने लगी, अपनी गांड को उछाल उछाल के अपनी बूर चटवाने लगी,


ओओओओहहहह..............बेटा...............हाय मेरी बूर...............कितना अच्छा लग रहा है बेटा................हाय तुमारी जीभ................ऊऊफ्फफ................ चाटो ऐसे ही बेटा...................मेरी बरसों की प्यास बुझा दो....................आआआआआआहहहहह................मेरे बेटे..........मेरे राजा.............मेरी बूर की प्यास सिर्फ तुमसे बुझेगी....................... तुमसे.....................ऐसे ही बूर को खोल खोल के चाटो मेरे बेटे........................अपनी मामी की बूर को चाट चाट के मुझे मस्त कर दो...................ऊऊऊऊईईईईईई अम्मा..................... कितना मजा आ रहा है..............ऊऊऊऊऊफ़्फ़फ़फ़


काफी देर तक यही सब चलता रहा और जब सुधियां से नही रहा गया तो उसने अपने भांजे को अपने ऊपर खींच लिया, सूरज अपनी मामी के ऊपर चढ़ गया, लन्ड एक बार फिर जाँघों के आस पास टकराता हुआ बूर पर आके लगा, लंड पहले से ही खुला हुआ था सुधिया ने कराहते हुए लंड को पकड़ लिया और मस्ती में आंखें बंद कर अपनी बूर की फांकों को दुबारा फैला कर उसपे रगड़ने लगी।


सुधियां ने जोर से सिसकते हुए अपने भांजे को अपनी बाहों में भर लिया और सूरज अपने लंड को अपनी मामी की बूर की फांक में तेज तेज रगड़ने लगा, जब झटके से लंड बूर की छेद पर भिड़ जाता और अंदर घुसने की कोशिश करता तो सुधियां दर्द से चिहुँक जाती पर जल्द ही लन्ड उछलकर ऊपर आ जाता और बूर के दाने से टकराता तब भी सुधिया जोर से सिस्कार उठती।


सुधिया ने अपने भांजे से सिसकते हुए बड़ी मादक अंदाज़ में कहा- बेटा...अच्छा लग रहा है अपनी मामी की बूर का स्वाद।


सूरज - आहा मामी मत पूछ कितना मजा आ रहा है, कितनी नरम और रसीली बूर है मामी की......हाय


सुधियां अपने भांजे के मुँह से ये सुनकर शरमा ही गयी।

सुधियां - बेटा

सूरज - हाँ मेरी मामी

सुधियां - अब घुसा न लंड अपना मेरी बूर में, रहा नही जाता अब, घुसा न अपना लंड मेरी बूर के रसीले छेद में।


सूरज अपनी मामी के मुँह से इतना कामुक आग्रह सुनकर वासना से पगला गया और उसने अपनी मामी के दोनों पैरों को उठाकर फैलाकर अच्छे से अपनी कमर पर लपेट लिया, सुधियां भी अच्छे से पैर फैलाकर लेट गयी और सूरज ने अपने लंड का मोटा सुपाड़ा अपनी शादीशुदा मामी की रस बहाती महकती प्यासी बूर की छेद पर लगाया, सुधियां की बूर बिल्कुल संकरी नही थी क्योंकि कल ही सूरज ने उसकी बुर को अपने लंड से खोला था
उसके भांजे का लंड उसके पति के लंड से डेढ़ गुना बड़ा और मोटा था। सुधियां की बूर रस छोड़ छोड़ के बहुत रसीली हो चुकी थी, चिकनाहट भरपूर थी, सूरज ने अपने विशाल लंड का दबाव अपनी मामी की बूर की छेद में लगाना शुरू किया और अपने दोनों हाँथ नीचे ले जाकर अपनी मामी की गांड को पकड़कर ऊपर को उठा लिया जिससे सुधिया की बूर और ऊपर को उठ गई।
सुधियां से बर्दाश्त नही हो रहा था तो उसने कराहते हुए बोला , डालो न अपना मोटा लंड अपनी मामी की बुर में,अब मत तड़पाओ बेटा।


सूरज ने दहाड़ते हुए एक दो बार लंड को बूर के छेद पर फिरसे रगड़ा और एक हल्का सा धक्का मारा तो लंड फिसलकर ऊपर को चला गया, सुधिया तेजी से वासना में चिहुँक उठी, हाहाहाहाहाहाहाहाहायययय .......अम्मा.......ऊऊऊऊऊईईईईईईईईईई,


बूर रस बहा बहा कर बहुत चिकनी हो गयी थी और उसका छेद सूरज के लंड के सुपाड़े के हिसाब से छोटा था, जैसे ही लंड फिसलकर ऊपर गया और तने हुए बूर के दाने से टकराया सुधियां तड़प कर मचल गयी आआआआआहहहह.......उई अम्मा,
सूरज ने जल्दी से बगल में रखा घास का ढेर उठाया और सुधियां की चौड़ी गांड के नीचे लगाने लगा, सुधियां ने भी झट गांड को उठाकर घास के ढेर लगाने में मदद की,
घास का ढेर लगने से अब सुधिया की बूर खुलकर ऊपर को उठ गई थी, क्या रिस रही थी सुधियां की बूर, तड़प तड़प के लंड मांग रही थी बस,
सुधियां फिर बोली- बेटा अब डाल दो न, अब चला जायेगा, नही फिसलेगा, डाल से बेटा, चोद दो मुझे अब।


सूरज ने जल्दी से लंड को दुबारा दहकती बूर के खुल चुके छेद पर लगाया और एक तेज धक्का दहाड़ते हुए माrar, मोटा सा लंड कमसिन सी बूर के छेद को चीरता हुआ लगभग आधा मखमली बूर में समा गया, सुधिया की जोर से चीख निकल गयी,


हाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाययययययय............बेटा..........आआआआहहहहहह............धीरे से बेटा.............. मेरी बूर.............ओओओओओहहहहह बेटा............कितना मोटा है तुमारा......... दर्द हो रहा है बेटा...........ऊऊऊईईईईईईई.......अम्मा...............बस करो बेटा...........रुको जरा...............आआआआहहहहहह......कितना अंदर तक चला गया है एक ही बार में............आआआआहहहहहह


सूरज की भी इतनी नरम कमसिन बूर पा के मस्ती में आह निकल गयी,


सूरज ने झट उसके मुँह पर हाथ रख दिया, सुधिया का पूरा बदन ही ऐंठ गया,

सूरज ने झट से सुधियां के मुँह को दबा लिया उसकी आवाज अंदर ही गूंजकर रह गयी, एक हांथ से सूरज ने सुधिया का ब्लॉउज खोल डाला और ब्रा का बटन पीछे से खोलने लगा तो उससे खुल नही रहा था, सुधिया ने दर्द से कराहते हुए ब्रा खोलकार अपने भांजे की मदद की और ब्लॉउज और ब्रा को निकालकर बगल रख दिया,
सूरज अपनी मामी की इस वफाई पर कायल हो गया एक तो उसको कल चुदाने के बाद भी काफी दर्द भी हो रहा था फिर भी वो अपने भांजे को अपना प्यार दे रही थी, ब्लॉउज और ब्रा खोलकर उसने खुद ही उतार दिया, इतना प्यार सिर्फ मां समान मामी ही अपने बेटे समान भांजे को दे सकती है, सूरज ने बड़े प्यार से अपनी मामी को चूम लिया।


ब्रा उतरते ही सुधियां की बड़ी बड़ी मादक तनी हुई विशाल चूचीयाँ उछलकर बाहर आ गयी, उन्हें देखकर सूरज और पागल हो गया, निप्पल तो कब से फूलकर खड़े थे सुधिया की चूची के, दोनों चूचीयों को देखकर सूरज उनपर टूट पड़ा और मुँह में भर भरकर पीने लगा, दोनों हांथों से कस कस के दबाने लगा, कभी धीरे धीरे सहलाता कभी तेज तेज सहलाता, लगातार दोनों चूचीयों को पिये भी जा रहा था, निप्पल को बड़े प्यार से चूसे जा रहा था, लगतार अपने भांजे द्वारा चूची सहलाने, मीजने और चूमने, दबाने से सुधिया का दर्द कम होने लगा और वो हल्का हल्का फिर सिसकने लगी, आह....सी......आह.... सी......ओह बेटा....ऐसे ही.....और चूसो......दबाओ इन्हें जोर से.........हाँ मेरे बेटे......पियो मेरी चूची को.........आह, बोलते हुए सुधिया सिसकने लगी, उसका दर्द अब मस्ती में बदलने लगा, अपनी मामी की मखमली रिसती बूर में अपना आधा लंड घुसाए सूरज बदहवासी में उसे चूमे चाटे जा रहा था।

सूरज ने सुधियां के मुँह पर से हाँथ हटा लिया पर अभी भी वो दर्द से हल्का सा कराह दे रही थी, सूरज ने उसे बाहों में भर लिया और सुधियां भी अपने भांजे से मस्ती में कराहते हुए लिपट गयी,
सूरज मामी को बेताहाशा चूमने लगा, सुधियां की दर्द भरी कराहटें अब पूरी तरह मीठी सिसकियों में बदल रही थी, सूरज अपनी मामी के होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा,
सुधिया ने भी मस्ती में अपने भांजे के चेहरे को बड़े प्यार से अपने हांथों में लिया और आंखें बंद कर उनका साथ देने लगी,
सूरज ने हल्का सा अपनी गांड को गोल गोल घुमाया तो लन्ड बूर की रस भरी दीवारों से घिसने लगा, सुधियां को बहुत अच्छा लगा और वो अपने भांजे का मोटा सा मूसल जैसा लंड अपनी बूर में अच्छे से महसूस करने लगी, कितना अच्छा लग रहा था अब, सुधियां की तो नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने खुद ही अब नशे में अपना हाँथ अपने भांजे की गांड पर ले जाकर उसे हल्का सा आगे की तरफ दबा कर और लंड डालने का इशारा किया, सूरज अपनी मामी के इस आमंत्रण पर गदगद हो गया और उसे चूमते हुए एक जोरदार धक्का गच्च से मारा, इस बार बिरजू का ९ इंच लंबा और ४ इंच मोटा लंड पूरा का पूरा सुधिया की रस बहाती बूर में अत्यंत गहराई तक समा गया, सुधियां की दर्द के मारे फिर से चीख निकल गयी पर इस बार उसने खुद ही अपना मुँह अपने भांजे के कंधों में लगाते हुए दर्द के मारे उनके कंधों पर दांत गड़ा दिए और उसके नाखून भी सूरज की पीठ पर गड़ गए, सूरज वासना में कराह उठा, एक बेटे का लंड मामी की बूर की अत्यंत गहराई में उतर चुका था, पूरी बूर किसी इलास्टिक की तरह फैलकर लंड को जकड़े हुए थी।


सूरज का लंड अपनी मामी की दहकती बूर के छेद की मखमली दीवारों को चीरकर उसे खोलता हुआ इतनी गहराई तक समा चुका था कि सुधियां बहुत देर तक अपनी उखड़ती सांसों को संभालती रही, अपने भांजे के कंधों में मुँह गड़ाए काफी देर सिसकती रही और बीच बीच में गनगना कर कस के अपने भांजे से लिपट जाती और उनकी पीठ को दबोच कर दर्द से कराह जाती, सूरज अपनी मामी को बड़े प्यार से बार बार चूमने लगा, उसके पूरे बदन को वो बड़े प्यार से सहलाने लगा, कमर, जाँघे, पैर, बगलें, कंधे, गाल, गर्दन, और मस्त मस्त दोनों सख्त चूचीयाँ वो बार बार लगातार सहलाये जा रहा था साथ ही साथ लगातार उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसे जा रहा था।


सुधिया को अपने भांजे का लंड अपनी बूर में इतनी गहराई तक महसूस हुआ कि वो दर्द के मारे एक पल के लिए दूसरी दुनियाँ में ही चली गयी, अभी तक जो लंड सुधिया की बूर में जाता था वो बस इसका आधा ही जाता था जो उसके शराबी पति का था और सुधिया को लगता था कि बूर में बस इतनी ही जगह है पर आज उसे पता चल गया कि उसके भांजे के लंड ने उसकी मखमली बूर की अनछुई रसभरी गहराई को भेदकर, वहां तक अपना अधिकार स्थापित कर दिया है, उसकी बूर की अत्यंत गहराई में छुपे रसीले अनछुए रस को आज उसके भांजे का लंड वहाँ तक पहुंचकर बड़े अधिकार से उसपर विजय पताका फहरा कर बड़े प्यार से उसे अपना इनाम समझ कर पी रहा है
और सुधिया की मखमली बूर की रसभरी अंदरूनी दीवारें इस छोर से लेकर उस छोर तक पूरे ९ इंच लंबे ४ इंच मोटे लंड से पूरी तरह कसकर लिपटी हुई उस मेहमान का बड़े ही दुलार से चूम चूम के बूर के अंदर आने का जमकर स्वागत कर रही थी, पहले जो लंड आता था उसके पति था पर आज जो लंड बूर में आया है उससे भांजे का कुवारा लंबा मोटा लंड है,
सुधियां की बूर की मखमली रसभरी अंदरूनी दीवारें उसके अंदर पूरी तरह घुसे हुए भांजे के लंड से लिपटी उसे चूम चूम के उसका स्वागत कर रही थीं मानो कह रही हों कि अब तक कहाँ थे आप, कब से तरस गयीं थी हम आपको छूने और चूमने के लिए।


सुधियां को ये सब महसूस कर दर्द के साथ साथ एक तरह से असीम आनंद भी होने लगा, सूरज अपनी मामी को उसकी बूर में अपना पूरा लंड ठूसे लगातार चूमे और सहलाये जा रहा था, वह सुधिया के होंठों को अपने होंठों में भरकर पीने लगा, सुधिया को अब फिर मजा आने लगा, दर्द सिसकियों में बदलना शुरू हो गया, लिपट गयी वो खुद ही अपने भांजे से अच्छी तरह और ताबड़तोड़ चूमने लगी सूरज को,
सूरज समझ गया कि अब उसकी मामी तैयार है बूर चुदवाने के लिए, सुधियां की बूर से लगातार रस बह रहा था।

काफी देर तक लंड बूर में पड़े रहने से बूर उसको अच्छे से लीलकर अभ्यस्त हो गयी थी।
सूरज ने अपनी मामी के पैरों को अपने कमर पर अच्छे से लपेटते हुए धीरे से लंड को थोड़ा बाहर खींचा और गच्च से दुबारा बूर की गहराई में उतार दिया, सुधिया मीठे मीठे दर्द से सिरह उठी, सूरज बार बार ऐसा ही करने लगा वह थोड़ा सा लंड को निकलता और दुबारा बूर में पेल देता, सुधियां को ये सब बहुत अच्छा लग रहा था,
सूरज अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर लंड को बूर की गहराई में अच्छे से रगड़ता तो सुधिया मस्ती में कराह जाती, जोर जोर से उसकी सीत्कार निकलने लगी।


सूरज अब पूरी तरह सुधिया से लिपटते हुए धीरे धीरे लंड को बूर से बाहर निकाल निकाल के गच्च गच्च धक्के मारने लगा, उसने अपनी मामी के होंठ अपने होंठों में भर लिए और चूसते हुए थोड़े तेज तेज अपनी मामी को चोदने लगा।


सुधिया का दर्द धीरे धीरे जाता गया और चुदाई के मीठे मीठे सुख ने उसकी जगह ले ली। सुधिया को ऐसा लग रहा था कि आज उसकी बूर की बरसों की भूख मिट रही है, इतना आनंद आजतक उसे कभी नही आया था, मोटे से लंड की रगड़ बूर की गहराई तक हो रही थी, सूरज का लंड अपनी ही मामी की बच्चेदानी के मुँह पर जाकर ठोकर मारने लगा जिससे सुधियां का बदन बार बार वासना में थरथरा जा रहा था, एक असीम गहरे सुख में सुधीया का बदन गनगना जा रहा था।


सुधियां - आआआआआआहहहहह.......हाय बेटा.....चोदो मुझे........चोदो अपनी मामी को.........कितना मजा आ रहा है, कितना प्यारा है तुमारा लंड........कितना मोटा और लम्बा है मेरे भांजे का लंड......... हाय बेटा.....ऐसे ही चोदते रहो अपनी मामी को.......हाय

सूरज अब अपनी मामी की रसभरी बूर में हचक हचक के थोड़ा और तेज तेज अपना मोटा लन्ड पेलने लगा, बूर बिल्कुल पनिया गयी थी, बहुत रसीली हो चुकी थी, लंड अब बहुत आसानी से बूर के अंदर बाहर होने लगा था, सूरज ने अब और अच्छी पोजीशन बनाई और अपनी मामी की चूचीयों को मसलते हुए उन्हें पीते हुए, निप्पल को मुँह में भर भरकर चूसते चाटते हुए कस कस के बूर में पूरा पूरा लंड हचक हचक कर पेलने लगा,
बीच में सूरज रुकता और अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर अपने मोटे लंड को अपने मामी की बूर की गहराई में किसी फिरकी की तरह घूमने की कोशिश करता जिससे लंड बूर की गहराई में अच्छे से उथल पुथल मचाता और रगड़ खाता, इससे सुधिया मस्ती में हाय हाय करती हुई सीत्कार उठती।


दोनों की मादक सिसकारियां थोड़ी तेज तेज गूंजने लगी, सुधिया लाख कोशिश करती की तेज सिसकी न निलके पर क्या करे मजा ही इतना असीम आ रहा था कि न चाहते हुए भी तेज सिसकियां निकल ही जा रही थी, बूर इतनी रसीली हो चुकी थी की बूर चोदने की फच्च फच्च आवाज़ आने लगी, एक लय में हो रही इस चुदाई की आवाज से दोनों मामी भांजा और मस्त होने लगे,
सुधियां तो अब मस्ती में नीचे से अपनी चौड़ी गांड उठा उठा के चुदाई में अपने भांजे का साथ देने लगी,
९ इंच लंबे लंड का रसीली प्यासी बूर में लगातार आवागमन सुधिया को मस्ती के सागर में न जाने कहाँ बहा ले गया।


सूरज अब सुधिया को पूरी ताकत से हुमच हुमच कर जोर जोर चोदने लगा, नीचे से घास का ढेर उनकी चुदाई से बिखरने लगा,
झाड़ियों में दोनों मामी भांजे की सिसकिया गूंजने लगी, साथ में चुदाई की फच्च फच्च आवाज भी आने लगी थी, माहौल बहुत गर्म हो चुका था, किसी को अब होश नही था, सुधिया का पूरा बदन उसके सूरज के जोरदार धक्कों से हिल रहा था,
सूरज अपनी मामी पर चढ़ा हुआ उसे घचा घच्च लंबे लंबे धक्के लगाते हुए चोदे जा रहा था। बूर बिल्कुल खुल गयी थी अब, लंड एक बार पूरा बाहर आता और दहाड़ता हुआ बूर की गहराई में उतर जाता, हर बार तेज तेज धक्कों के साथ नीचे से अपनी गांड को उछाल उछाल के चुदाई में ताल से ताल मिलाते हुए सुधिया सीत्कार उठती थी।

आह...........बेटा............हाय ऐसे ही चोदो मुझे............ऐसे ही चोदो अपनी मामी को....
...........अपनी मामी को...............ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़................. ऊऊऊऊईईईईईई..............अम्मा............चोद डालो बूर मेरी बेटा..............अच्छे से चोदो अपने लंड से मेरी बूर को बेटा...................आआआआआहहहहहहहह......... सिर्फ तुमरे मोटे लंड से बेटा.........सिर्फ तुमारा लंड से............हाय......... चोदो मेरे बेटे और तेज तेज चोदो अपनी मामी को..........हाय दैय्या........कितना मजा आ रहा है।


सूरज भी मस्ती में करीब 20-25 मिनट तक लगातार सुधिया की बूर में हचक हचक के लन्ड पेल पेल के चोदता रहा, सुधिया और सूरज के तन बदन में एक जोरदार सनसनाहट होने लगी, सुधिया की बूर की गहराई में मानो चींटियां सी रेंगने लगी, लगातार अपने भांजे के जोरदार धक्कों से उसकी बूर में सनसनी सी होने लगी और एकाएक उसका बदन ऐंठता चला गया, गनगना कर वो चीखती हुई अपने नितम्ब को उठा कर अपने भांजे से लिपटकर झड़ने लगी,

आआआआआहहहहह...........बेटामैं गयी.......... तुम्हारी मामी झड़ रही है बेटा.............ओओओओहहहह ह........हाय....... मैं गयी बेटा........और तेज तेज चोदो बेटा.........कस कस के पेलो मेरी बूर........ऊऊऊऊईईईईई.......बेटा.........हाय मेरी बूर...…..….कितना अच्छा है मेरे बेटे लंड.........आआआआआहहहहह


सूरज का लंड तड़बतोड़ सुधियां की बूर चोदे जा रहा था, सुधिया सीत्कारते हुए जोर जोर हाय हाय करते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ने लगी, सूरज को अपनी मामी की बूर के अंदर हो रही हलचल साफ महसूस होने लगी, कैसे सुधिया की बूर की अंदरूनी दीवारें बार बार सिकुड़ और फैल रही थी, काफी देर तक सुधिया बदहवास सी सीत्कारते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ती रही।


सूरज तेज तेज धक्के लगते हुए सुधीया की बूर चोदे जा रहा था, वह बड़े प्यार से चोदते हुए अपनी मामी को दुलारने लगा,
इतना मजा आजतक जीवन में सुधियां को कभी नही आया था, चरमसुख के असीम आनंद में वो खो गई, अब भी उसके भांजे का लंड तेज तेज उसकी बूर को चोदे जा रहा था, कभी कभी वो बीच बीच में तेजी से सिस्कार उठती, बूर झड़ने के बाद बहुत ही चिकनी हो गयी थी, सूरज का लंड अपनी मामी के रस से पूरा सन गया था, सुधिया का बदन अब ढीला पड़ गया वो बस आंखें बंद किये हल्का हल्का सिसकते हुए चरमसुख के आनंद में डूबी हुई थी कि तभी सूरज भी जोर से सिसकारते हुए एक तेज जबरदस्त धक्का अपनी मामी की बूर में मारते हुए झड़ने लगा, धक्का इतना तेज था कि सुधिया जोर से चिहुँक पड़ी आह........ बेटा......... हाय

एक तेज मोटे गाढ़े वीर्य की पिचकारी उसके लंड से निकलकर सुधिया की बूर की गहराई में जाकर लगी तो सुधियां उस गरम गरम लावे को अपनी बूर की गहराई में महसूस कर गनगना गयी और तेजी से मचलकर सिसकारने लगी बड़े प्यार से उसने अपने भांजे को अपनी बाहों में कस लिया और उनके बालों को सहलाने लगी, प्यार से दुलारने लगी, सूरज का मोटा लंड तेज तेज झटके खाता हुआ वीर्य की मोटी मोटी धार छोड़ते हुए अपनी मामी की बूर को भरने लगा, अपनी मामी के बूर में उसका गाढ़ा गरम वीर्य भरने लगा,
गरम गरम सूरज का वीर्य सुधियां की बूर से निकलकर गांड की दरार में बहने लगा और नीचे घास के ढेर को भिगोने लगा, सूरज काफी देर तक हाँफते हुए अपनी मामी की बूर में झाड़ता रहा,
आज उसे एक गदरायी कमसिन मखमली बूर मिली थी और भी उसकी मामी की, सूरज सच में अपनी मामी की बूर चोद कर निहाल हो चुका था, सूरज और सुधिया ने असीम चरमसुख का आनंद लेते हुए एक दूसरे को कस के बाहों में भर लिया और बड़े प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे, और अपनी सांसों को काबू करते हुए एक दूसरे को बाहों में लिए लेटे रहे।


सूरज का लंड थोड़ा शिथिल हो गया था पर सुधिया की बूर के अंदर ही घुसा हुआ था, सुधिया अपने भांजे के शिथिल हो चुके लंड को महसूस कर मुस्कुरा उठी, उसको अपने भांजे के लंड पर बहुत प्यार आ रहा था, जैसे कोई छोटा बच्चा खा पीकर सो गया हो ठीक वैसे ही उसके भांजे का लंड उसकी बूर में पड़ा हुआ था।

दोनो की चुदाई में इतना समय गुजर चुका था की,
आसमान में शाम का अंधेरा छाने लग गया,
सुधियां अपने भांजे के चेहरे को अपने हांथों में थाम लेती है और बड़े प्यार उसके ओठ चूमते हुए बोलती है
ओ मेरे बेटे मेरे बलमा, मजा आया, अपनी मामी को चोदके।

सूरज - हां मेरी मामी, मेरी सजनी बहुत मजा आया, पर मन नही भरा अभी।

सुधियां - हाय मेरे राजा, मेरा बेटा जिस मामी से उसका भांजा का मन एक ही बार में भर जाए तो उस मामी का हुस्न किस काम का, हम्म।

सूरज - सच, तुम तो कयामत हो मामी, कयामत, तुमें मजा आया।

सुधियां - बहुत बेटे....बहुत..मुझे तो बहुत मजा आया अपने भांजे का मोटा लंड अपनी बूर को खिलाकर,
देखो न बेटा अभी भी मेरी बूर कैसे चुपके चुपके हौले हौले तुम्हारे लंड को चूम रही है,

जैसे छोटी बच्ची मुँह में लॉलीपॉप लिए सो जाती है वैसे ही देखो न मेरी बुरिया भी कैसे तेरा लंड मुँह में लिए लिए सो सी रही है।
सच बेटा मुझे बहुत मजा आया, ऐसा सुख मुझे आजतक नही मिला था, बेटा एक बात बोलूं

सूरज - बोल न मेरी रानी

सुधियां धीरे से कान में - बेटा आज मुझे पहली बार चरमसुख प्राप्त हुआ है

सूरज मामी को आश्चर्य से देखते हुए- क्या, सच में।

सुधिया - हाँ, बेटा

सूरज - मामाजी अभी तक तुमें चरमसुख नही दे पाये?

सुधिया - चरमसुख लुल्ली से नही मिलता बाबू, औरत को चरमसुख तो मिलता है.....

सूरज - बोल न, रुक क्यों गयी मेरी जान।

सुधिया - चरमसुख तो मिलता है भांजे मोटे से लंड से, और तेरा तो लंड भी नही है

सूरज आश्चर्य से- फिर, अगर ये लंड नही है तो क्या है मेरी मामी, बता न।

सुधियां - बेटा समझ जाओ न।

सूरज - नही समझ आ रहा, तूम ही बता दो।

सुधिया ने थोड़ा रुककर फिर अपने बेटे के कान में सिसकते हुए बोला- तुम्हारा तो लौड़ा है लौड़ा, क्योंकि जिस तरह आपने अपनी मामी की कमसिन बूर को चोदा है वो एक लौड़ा ही कर सकता है, ये किसी लुल्ली के बस के नही

सूरज अपनी मामी के मुँह से ये शब्द सुनकर अचंभित रह गया और जोश में उसने एक धक्का खींच के बूर में मारा तो सुधिया जोर से चिंहुँक पड़ी आआआआआआआहहहहहहहह!

सूरज - तुमें मेरा लंड इतना पसंद आया।

सुधियां - लंड नही बेटा लौड़ा......आह.... लौड़ा, बहुत मजेदार है मेरे भांजे का लौड़ा। मैं तो तेरी दिवानी हो गयी मेरे भांजे, तुम्हारी मामी तेरी दीवानी हो गयी और भांजे का लंड क्यों मामी को पसंद नही आएगा भला, कितना रोमांचक होता है भांजे का लंड......आआआआआहहहह

सूरज मामी के कान में- लंड नही लौड़ा, मेरी मामी लौड़ा, अब खुद ही भूल गई।

सुधिया - हाँ मेरे प्यारे सैयां, लौड़ा, तुम्हारा लौड़ा, डालोगे न हमेशा अपना लौड़ा मेरी बुर में बेटा, बोलो न, मुझे तरसाओगे तो नही इस मस्त लौड़े के लिए कभी।

सूरज - न मेरी मामी, मैं तो खुद तुम्हारी मखमली बूर के बिना नही रह सकता अब। कितनी रसभरी है मेरी मामी की बूर....आह


शाम के समय मौसम थोड़ा ठंडा होने की वजह से सुधियां को फिरसे पेशाब लगी, उसके भांजे का लंड उसकी बूर में समाया हुआ था ही,
वह बोली- बेटा, देखो शाम हो गई ही सब हमारा इंतजार कर रहे होगे अगर हम नही मिले तो हमे ढूंढते हुवे यहा पर भी आ सकते ही हमे चलाना चाहिए

सूरज- हाँ मेरी जान, हमे चलाना चाहिए वैसे भी विलास मामा दोपहर से मुझे ढूंढ कर परेशान हो गए होगे।

ओर सूरज ने अपना फौलाद हो चुका लंड सुधिया की बूर में से बाहर निकाला तो सुधिया आह करके सिसक उठी।
सुधिया - बेटा मुझे पेशाब आ रहा है

सूरज - तो पिला दो न, इसमें पूछना क्या मेरी जान

सुधिया चौंकते हुए- क्या, फिरसे तुम पेशाब पियोगे?

सूरज - हाँ, पिला दे तेरा मूत मामी

सुधिया - मेरा मूत पियोगे, अपनी मामी का

सूरज - हाँ, प्यास बहुत लगी है

सुधियां- बहुत प्यास लगी है मेरे बेटे को, ठीक ही बेटे अभी पिलाती हू।

सूरज- ठीक है हुज़ूर


सूरज शाम की हलकी सी रोशनी में देखने लगा, दोनों मामी भांजा पूरे नंगे थे,
सूरज सुधियां को देखता रह गया, सुधिया भी अपने भांजे को वासना की नज़रों से निहारती रही, एक बार शाम की हलकी रोशनी में दोनों ने जब एक दूसरे को पूर्ण नग्न देखा तो रहा नही गया और दोनों एक दूसरे की बाहों में कस कर लिपट गए और एक दूसरे के बदन को मस्ती में सहलाने लगे, कुछ देर बाद

सुधिया - बेटा जोर से पिशाब आ रहा है।

सूरज ये सुनते ही फट घास पर लेट गया और सुधिया शाम की हलकी रोशनी में कराहते है अपने बेटे के सीने पर से अपनी बूर उसके मुँह के सामने करके बैठ गयी,

हलकी की रोशनी में अपनी मामी की महकती बूर जिसको अभी कुछ देर पहले ही सूरज ने घच्च घच्च चोद चुका था, देखकर फिर मदहोश हो गया, उस बूर की छेद से अभी भी उसका वीर्य हल्का हल्का निकल रहा था, जो गवाही दे रहा था कि एक मामी अपने ही भांजे से अच्छे से चुदी है।

बूर देखते ही सूरज ने अपने दोनों हांथों को सुधियां के नितम्ब पर रखा और आगे को ठेलकर उसकी रसभरी बूर को मुँह में भर लिया,
सुधियां जोर से सिसक उठी और खुद भी उसने मचलते हुए अपने भांजे का सर पकड़कर अपनी बूर उनके मुँह में रगड़ने लगी, सूरज लप्प लप्प अपनी मामी की बूर को चाटने लगा तो एक दम से सुधियां को झुरझुरी महसूस हुई और उसका पेशाब निकल गया, आआआआआआआआहहहह...........दैय्या, बेटा........आआआआहहहहह, सुधियां की बूर की फैली हुई दोनों फांकों के बीच से गरम गरम महकता हुआ पेशाब सुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर की आवाज के साथ सूरज के पूरे मुँह को भिगोने लगा, पेशाब छोड़ती बूर को सूरज जीभ निकाल के पहले तो चाटने लगा, फिर बूर को मुँह में भरकर अपनी मामी का मूत पीने लगा, क्या महक थी मामी के पेशाब की और मूतते हुए सुधिया क्या लग रही थी,
दोनों मामी भांजे की आंखें मस्ती में बंद थी, सूरज लपा लप सुधिया का पेशाब कभी चाटता कभी पीता, सूरज का पूरा चेहरा, उसकी गर्दन और सीना सब सुधियां के पेशाब से भीग चुका था, सुधियां अपने पेशाब से अपने भांजे को भिगोते हुए उनको बड़ी मादकता से देखती भी जा रही थी, काफी हद तक सूरज सुधियां का पेशाब पी चुका था,
एकाएक सुधियां ने अपनी उंगली से कराहते हुए अपनी बूर की फाँकों को चीरा और पेशाब की धार छोड़ती फैली हुई बूर को एकदम से अपने भांजे के मुँह में भर दिया और बोली- लो बेटा अपनी मामी का पेशाब, अब खत्म होने वाला है जल्दी पूरा पी लो..

सूरज ने लप्प से अपनी मामी की बूर को मुँह में भरा और सारा मूत पी गया, पेशाब बन्द होने के बाद सुधिया ने अपनी बूर अपने बेटे के मुँह से बाहर खींची और एक पल के लिए उनके सारे भीगे हिस्से को कामुकता से देखने लगी और बोली- कैसा लगा मेरे बेटे

सूरज - मेरे पास शब्द नही हे मामी , ऐसा मजा आजतक नही आया था।

सुधियां उठकर अपने बेटे के ऊपर लेट गयी और बोली- अब मैं अपने प्यारे बेटे को ऐसे ऐसे मजे दूंगी की तुमरी जिंदगी बदल जाएगी

सूरज का लंड सुधिया की बूर पर फिरसे दस्तक देने लगा, सूरज अपने दोनों हाँथों से सुधियां की गांड को भी सहलाने लगा, सुधियां सिसकते हुए अपने भांजे के चेहरे और गर्दन पर लगे पेशाब को मस्ती में चाटने लगी तो सूरज भी मस्ती में कराहने लगा- आह मेरी जान मामी

सुधिया मस्ती में अपने भांजे को चूमती चाटती हुई नीचे की तरफ बढ़ने लगी, सूरज उसके बालों को सिसकते हुए सहलाने लगा, सुधियां अपने भांजे के दुबारा तन चुके लन्ड तक आयी और हलकी की रोशनी में अपने सूरज का खड़ा लन्ड निहारने लगी,
उसने उसको हाँथ से पकड़ा और चमड़ी को धीरे से उतारा तो उसकी आंखें अपने भांजे के मोटे सुपाड़े और उस पर पेशाब के छेद को देखकर मस्ती में भर गई, उसने अपने भांजे की तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोली- कितना प्यारा है बेटा ये, बहुत प्यारा है मेरे मर्द का लंड और ऐसा कहते हुए सुधियां अपने भांजे का लंड हौले हौले चूमने लगी, पहली बार लंड पर अपनी मामी के गरम होंठ महसूस कर सूरज जन्नत में खो गया, कितने गरम चुम्बन दे रही थी सुधियां उसके लंड पर, धीरे धीरे चूमने के बाद सुधियां जीभ निकाल कर अपने भांजे के लंड चाटने लगी, सूरज मस्ती में उसका सर पकड़े अपने लंड को हौले हौले मामी के मुँह में खुद भी ठेलने लगा, अपनी मामी को अपना लंड चुसवाने में कितना मजा आ रहा था।

सुधिया आंखें बंद किये अपने भांजे का लंड बड़ी लगन से चूसे जा रही थी और अपने मन में सिसकते हुए सोचे जा रही थी कि लंड अगर दमदार हो तो चूसने का मजा ही कुछ और है, कभी वो सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसती, कभी उसपर जीभ फिराने लगती, कभी तो पूरे लंड को जड़ तक मुँह में भरने की कोशिश करती पर न हो पाता, कभी दोनों आंड को मुँह में भरकर पीती, लंड पर लगे उसकी बूर का रस और वीर्य का मिश्रण उसने कब का चाट चाट के साफ कर दिया था,
कभी जीभ नुकीली बना के अपने भांजे के लंड के छेद पर गोल गोल फिराती जिससे सूरज झनझना के मचल जाता, सूरज खुद भी मामी का सर पकड़ कर अपना लन्ड उसके मुँह में अंदर बाहर कर रहा था और जोर जोर से कराहते जा रहा था- ओह.... मामी.....कितने प्यारे हैं तेरे होंठ, कितने नरम है......मेरी प्यारी मामी इतना मजा तो मुझे आजतक नही आया......ओह मेरी रानी.......मजा आ गया

सुधिया - आह.....बेटा क्या लंड है तुम्हारा.......मेरा तो जीवन सवर गया इसे पाकर....... मैं तो दीवानी हो गयी अब इसकी............इसके बिना अब मैं रह नही सकती।


जैसे ही सुधिया ने ये शब्द बोला सूरज ने अपना लंड मुंह से निकल कर सुधियां की मखमली रिसती बूर में अंदर तक एक ही बार में घुसेड़ दिया।

सुधिया जोर से कराह उठी और मस्ती में अपने भांजे से लिपट गयी।

सूरज - हाय....क्या नशा है तेरी बातों में मामी....सच

कुछ देर तक सूरज मामी की बूर में लन्ड पेले पड़ा रहा और सुधिया अपने भांजे की पीठ सहलाती रही।

सुधियां सिसकते हुए बोली- बेटा मजा आ रहा हे और

सुधियां ने एक चपत अपने भांजे की पीठ पर मारा तो सूरज ने जवाब में लन्ड बूर में से आधा निकाल के एक धक्का जोर से मारा, सुधियां गनगना गयी।

सुधीया - हाय बेटा.....धीरे से......ऊऊऊऊईईईईईई धीरे से बेटा


सूरज धीरे धीरे लंड बूर में अंदर बाहर करने लगा

सुधिया सिसकने लगी और बोली- थोड़ी भी देर के लिए लंड को बूर में घुसे हुए रोककर आराम नही करने देते ये मेरे राम.....बाबू

सूरज- क्या करूँ मेरी मामी, तेरी बूर है ही इतनी मक्ख़न की डालने के बाद रुका ही नही जाता।

सुधियां सिसकते हुए- बेटा

सूरज - हाँ मेरी रानी

सुधियां - अपने मामा के सामने अपनी मामी को चोदोगे?

सूरज - मामा के सामने.....मतलब

सूरज बराबर बूर को हौले हौले चोद रहा था और दोनों सिसकते भी जा रहे थे

सुधिया - तेरे मामा ने मुझे बाहोत तड़पाया हे सताया हे में परेशान हो गई हू उससे में बदला लेना ही मुझे तुम इसमें मेरी मदत करोगे
मेरा मतलब वो पास में हो या बगल में सोता हो और तुम अपनी मामी को चोदना........हाय कितना मजा आएगा.....कितना रोमांच होगा।

सूरज को ये सोचकर अत्यधिक रोमांच सा हुआ कि कैसा लगेगा एक ही बिस्तर पर या फिर सामने मेरा मामा होगा और मैं अपनी मामी को उसके पति के मौजूदगी में चोदुंगा।

रोमांच में आकर उसने अपने धक्के थोड़ा तेज ही कर दिया, सुधिया के दोनों पैर उठाकर अपनी कमर पर लपेट दिए और थोड़ा तेज तेज अपनी मामी की बूर में लंड पेलने लगा, सुधियां की तो मस्ती में आंखें बंद हो गयी, क्या मस्त लौड़ा था उसके भांजे का, कैसे बूर के अंदर बाहर हो रहा था। मस्ती में वो अपने भांजे की पीठ सहलाने लगी और उन्हें दुलारने लगी।

सूरज - हां मेरी जान, मजा तो बहुत आएगा पर ये होगा कैसे,

सुधियां - हाँ बेटा......आह..... उई....बेटा जरा धीरे धीरे हौले हौले चोदो....बात तो तुम सही कह रहे हो, तुम अगर घर आकर मुझे अपने पति के मोजुदगी में चोदोगे रोमांच से बदन कितना गनगना जाएगा,

सूरज - तेरी बूर के बिना मैं भी नही रह सकता मेरी जान,


सूरज जोश में आकर हुमच हुमच कर सुधियां की रसीली बूर चोदने लगा, दोनों इस कल्पना से कामुक हो जा रहे थे और घचा घच्च चुदाई भी कर रहे थे, सुधियां कभी कभी तेजी से सिसक देती तो कभी कभी वासना में अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदने लगती।

सूरज - हां मेरी मामी ये भी सही कहा तूने, तू ही किसी बहाने तुम मुझे घर बुला फिर तेरे पति के मोजुदगी तुझे चोदूंगा।

सुधिया - मेरे पति के सामने

सुधियां ने आंख नाचते हुए कहा

सूरज- हां तेरे पति के सामने ही तो मेरे मामा के सामने

सुधिया - पगलू मेरे पति तो सिर्फ और सर्फ तुम हो, वो तो बस नाम के हैं अब से

सूरज - अच्छा जी

सुधियां - हम्म

सूरज - मैं तो भांजा हू तेरा

सुधियां- पति भी हो और भांजा तो हो ही....

सूरज - हाँ ठीक मामी

सूरज तेज तेज जोश में धक्के मारने लगा, सुधियां मस्ती में गांड उठा उठा के चुदवाने लगी, तेज तेज सिसकियों की आवाज गूंजने लगी, दोनों पूर्ण रूप से नंगे थे। तेज तेज धक्कों से सुधियां का पूरा बदन हिल रहा था, जोर जोर से सिसकते हुए वो अपने भांजे को सहलाये और दुलारे जा रही थी और वासना में सराबोर होकर कामुक बातें बोले जा रही थी
हाँ बेटा ऐसे ही चोदो..........ऐसे
ही हुमच हुमच के तेज धक्के मारो.......मेरी बुर में............आह बेटा.............ऊऊऊऊईईईईईई........... थोड़ा किनारे से बूर की दीवारों से रगड़ते हुए अपना लंड अपनी इस मामी की बूर में पेलो.......रगड़ता हुआ बच्चेदानी तक जाता है तो जन्नत का मजा आ जाता है बेटे जी...........मेरे बेटे जी..........आह..... मेरे पति जी.........चोदो अपनी पत्नी को..........तरस मत खाओ...........बूर तो होती ही है जमके चोदने के लिए..............एक बार और चोद चोद के फाड़ दो मेरी बूर...........आआआआआहहहहहहह

सुधियां ऐसे ही बड़बड़ाये जा रही थी और सूरज तेज तेज धक्के मारे जा रहा था, एकाएक सूरज ने सुधियां की चूची को मुँह में भरा और पीने लगा, मस्ती में सुधियां और मचल गयी, पूरा बदन उसका वासना में एक बार फिर ऐंठने सा लगा, एकाएक बाहर कुछ लोगों की हल्की हल्की आवाजें आने लगी।

सुधियां तो पूरी मस्ती में थी पर सूरज के कान खड़े हो गए, अभी तक तो वो यही सोच रहे थे कि शाम हो रही है तो कौन नही आएगा,
तभी विलास मामा जोर जोर से सूरज को आवाज़ देने लगे
सूरज ने मन में कोसते हुए उठने की कोशिश की तो सुधियां ने उनकी कमर को थाम लिया और पूछा- बेटा क्या हुआ चोदो न, रुक क्यों गए।

सूरज - लागत हे मामा पास में ही हे हमे चलाना चाहिए बहोत देर हो गई हे।

सुधियां - पर मेरी बुरिया वो रोने लगेगी।
वहीं जिसके मुँह से आप निवाला छीन रहे हो, देखो न कैसे मजे से खा रही है।

सूरज आश्चर्य से- कौन?....किसके मुँह से निवाला छीन रहा हूँ, मैं समझा नही।

सुधियां - अरे मेरे बुध्धू राम........ये

ऐसा कहते हुए सुधिया ने बड़ी अदा से अपने भांजे का हाँथ पकड़ा और अपनी बूर पर ले गयी जो सूरज का पूरा लंड लीले हुए थी, और दोनों नीचे देखने लगे, लंड पूरा बूर में घुसा हुआ था।

सुधियां - किसी के मुँह से निवाला नही छीनते बेटा, देखो कैसे बेसुध होकर मस्ती में तुम्हारा मोटा लंड खा रही है मेरी ये बुरिया, अब आप निकाल लोगे तो ये रोने लगेगी और फिर चुप कराए चुप भी नही होगी,
अभी आधी मजधार में न छोड़ो इसे, न रुलाओ बेटा इसको, इसके हक़ का खा लेने दो इसे पूरा। अब निवाला मुँह में ले रखा है तो खा लेने दो पूरा अपनी इस मामी की बुरिया को।

इतना सुनते ही सूरज ने सर उठा के सुधिया की आंखों में देखा तो सुधिया खिलखिला के हंस भी दी और वासना भारी आंखों से विनती भी करने लगी की बेटा अभी चोदो रुको मत चाहे आग ही लग जाये पूरी दुनिया को।

सूरज ने बड़े प्यार से मामी के गाल को चूम लिया और बोला- बहुत प्यारी प्यारी बातें आती है मेरी मामी को, तेरी इन बातों का ही दीवाना हूँ मैं।

सुधिया सिसकते हुए- मामी नही पत्नी, आज से पत्नी हूँ न आपकी मैं।

सूरज - हां मेरी पत्नी, अब तो चाहे कुछ भी हो अपनी पत्नी को चोद के ही छोडूंगा।

और फिर सूरज ने सुधियां के ऊपर अच्छे से चढ़ते हुए अपने दोनों हांथों से उसके विशाल साइज की चौड़ी गांड को अपने हांथों से उठा लिया और अपना मोटा दहाड़ता लंड तेज तेज धक्कों के साथ पूरा पूरा बूर में डाल डाल कर कराहते हुए रसीली बूर चोदने लगा,
सुधिया की दुबारा सिसकिया निकलने लगी, कुछ ही देर में पूरी झाड़ियों में मादक सिसकियों से गूंज उठा, पूरी घास तेज धक्कों से बिखर गई, करीब 10 मिनट की लगातार मामी भांजे की धुँवाधार चुदाई से दोनों के बदन थरथराने लगे और दोनो ही एक बार फिर तेज तेज हाँफते हुए कस के एक दूसरे से लिपट गए और सीत्कारते हुए एक साथ झड़ने लगे, कुछ देर तक झड़ने के बाद दोनों शांत होकर एक दूसरे को चूमने सहलाने लगे फिर सूरज ने एक जोरदार चुम्बन सिधिया के होंठों पर लिया और बोला

अब जलादि से साड़ी पहनो मामी हमे जाना चाहिए नही तो मामा चिला चिला कर आसपास के लोगो को इकट्ठा कर देंगे और फिर कही हम पकड़े न जाए
सुधियां जलादि कच्छी ब्रा पहन कर के साड़ी पहन लेती
ओर सूरज भी धोती पहन कर तयार हो जाता है।
ओर दोनो चुपके से से झाड़ियों से निकल कर गेहूं के खेतो से होते हुवे बाहर निकलने लगाते है
तभी विलास की नजर उन दोनो पे पड़ती है
ओर दोनो भी विलास मामा को सामने देख कर डर जाते हे।

विलास - दोपहर से तू कहा था तू शाम हो गई फिर भी तेरा आता पता नही हे।ओर में तुझे कबसे आवाज दे रहा हु और सुधिया भाभी के साथ क्या कर रहा हे।

सूरज - डरते हुवे वो में वो मामी के खेत का बांध टूट गया था और सारा पानी पास के खेत में जा रहा था इस लिए में दोपहर से मामी की बांध लगाने में मदत कर रह था।

विलास - अच्छा हुवा की तुमने भाभीजी की मदत की,
पर बेटा आज बिजली जलादि चली जाने की वजह से खेतो की सिंचाई नहीं हो पाई अब हमे रात को खेत आ के पानी देना होगा क्योंकि कल दिन में बिजली नही हे।
भाभीजी आपके खेत की सिंचाई हुवी की नही

सुधिया - नही भाई साहब अब रात में ही देना पड़ेगा पर में अकेली ये सब कैसे करूंगी,

विलास - फिकर मत कीजिए में रात में अपना खेत संभाल लूंगा और सूरज आपकी मदत करेगा,

सुधीया - ठीक हे भाई साहब

विलास ठीक ही अब जल्दी घर चलते ही बहोत देर हो गई हे फिर हमे वापस खेतो में आना हे।

तो तीनों मिलके घर जी और निकल पड़ते हे।
विलास आगे आगे चल रहा था और सूरज और सुधियां पीछे पीछे
तभी सूरज ने मामी को कस के बाहों में भर लिया और बोला देख न मामी ये फिर से खड़ा हो गया हे अपने धोती में बने तंबू को दिखते हुवे

सुधियां - अब नही बेटा... आज रात खेत में जमके चोदना।
सूरज ये बात सुन के ज़ूम उठा की अपनी प्यारी मामी को आज रात भर खेत में चोदेगा।
थोड़ी देर में सभी अपने घर पहुंच जाते थे।
अब सूरज को रात का इंतजार था।
OMG, what an update. One of the best of this story as well as forum. Keep it up, bro.
 

nickname123

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भाग ९

रात को सभी ने खाना खाया और सब सोने के लिए कमरे में चले गए। सूरज को आज थकान के कारण जलादि नींद अयि ये थकान सुधीया मामी के चुदाई के कारण आइ थी।
सुबह सूरज और विलास दोनो हर रोज की तरह खेतो पे निकल गए। खेतो से गुजरते हुवे सूरज ने सुधियां मामी की खेतो में देखा सुधिया मामी कही नजर अति हे क्या पर सुधियां मामी उसे नजर नहीं आती।
विलास और सूरज खेत पहुंच कर काम करने लगे

सुधियां कल की बात को सपना समझ कर सुबह अपनी मस्ती में उबड़ खाबड़ रास्तों से खेतों की तरफ चली जा रही थी,,,, ( सुधियां का पति खेती में कुछ भी मदत नही करता था सारा खेतो का काम सुधियां अकेली ही देखती थी उसका बेटा पप्पू भी दोस्तो के साथ दिन भर आवारा गस्ति करते घुमाता था अपनी मां की बिलकुल भी मदत नही करता था )

इसलिए सुधियां ज्यादातर वक्त खेतों में हीं गुजरता था,,,,

कुछ देर बाद सुधियां खेतों में पहुंच चुकी थी जहां पर गेहूं गन्ने मकई की फसल लहरा रही थी।
सुधियां खेत के किनारे खड़ी होकर मुआयना कर रही थी चारों तरफ गेहूं मकई गन्ने दिख रहे थे।
सुधियां अपने खेतो में काम करने लगी।

दिन चढ़ चुका था गर्मी का मौसम था। ऐसे तेज धूप में हवाएं भी गर्म चल रही थी,,,,। धीरे धीरे सुधियां के माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी प्यास से उसका गला सूखने लगा,,,, उसे प्यास लगी थी इधर उधर नजर दौड़ाई तो कुछ ही दूरी उसके खेतो पर ट्यूबवेल मैसे पानी निकल रहा था जो कि खेतों में जा रहा था,,,। ट्यूबवेल के पाइप में से निकल रहे हैं पानी को देख कर सुधिया की प्यास और ज्यादा भड़कने लगी,,, वह अपनी जगह से उठी और ट्यूबेल की तरफ जाने लगी,, तेज धूप होने के कारण सुधियां,,, पल्लू को हल्के से दोनों हाथों से ऊपर की तरफ उठा कर जाने लगी,,, दोनों हाथ को ऊपर की तरह हल्कै से उठाकर जाने की वजह से सुधिया की चाल और ज्यादा मादक हो चुकी थी,,, हालांकि समय सुधिया पर किसी की नजर नहीं पड़ी थी लेकिन इस समय किसी की भी नजर उस पर पड़ जाती तो उसे स्वर्ग से उतरी हुई अ्प्सरा देखने को मिल जाती,,, बेहद ही कामोत्तेजना से भरपुर नजारा था। इस तरह से चलने की वजह से सुधिया की मद मस्त गोलाई लिए हुए नितंब कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आ रही थी,,, कुछ ही देर में सुधिया ट्यूबवेल के पास पहुंच गई और दोनों हाथ आगे की तरफ करके पानी पीने लगी,,, शीतल जल को ग्रहण करने से उसकी तष्णा शांत हो गई,,,

सुधियां कुछ देर वहीं रुक कर अपने चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मार कर अपने आप को तरोताजा करने का प्रयास करने लगी,,,,। पानी पीने के बाद..
सुधियां पास में ही पेड़ की छांव में बैठ गई

थोड़ी देर बाद सुधियां को बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह अपने आप पर बहुत ज्यादा संयम रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके लिए इस समय मोचना बेहद आवश्यक हो चुका था। क्योंकि ज्यादा देर तक वह अपनी पेशाब को रोक नहीं पा रही थी पेट में दर्द सा महसूस होने लगा था। सुधिया पेड़ के नीचे से उठी और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करते हुए अपने पेशाब को रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन कोई भी इंसान ज्यादा देर तक पेशाब को रोक नहीं सकता था इसलिए सुधियां को भी मुतना बेहद जरूरी था। उसे डर था कि खेतो से गुजरात हुवा कोई आदमी उस ना देख ले। इसलिए वह बड़े पेड़ के पास भी जंगली झाड़ियों के नीचे से होकर धीरे-धीरे पेशाब करने के लिए अंदर जाने लगी और एक जगह पर पहुंच कर वह इधर उधर नजरे दौरा कर देखने की कोशिश करने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उस को झाड़ियों में से दूसरा कोई नजर नहीं आ रहा था सुगंधा जहां पर खड़ी थी वहां पर कुछ ज्यादा ही झाड़ियां थी और वहां पर किसी की नजर पड़ने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी


इधर दोपहर को सूरज को बहोत जोरो की प्यास लगती थी सूरज खेतो में बने हेड पंप के पास पहुंचकर कर पानी पीने लगा जी भर के पानी पीने के बाद पानी से हाथ मुंह धो कर अपने आप को ठंडा करने की कोशिश करने लगा जब सूरज वहा से प्यास बुझा के खेतो में जाने लगा तभी उसकी आंखों के सामने से एक खरगोश का बच्चा भागता हुआ नजर आया और सूरज उसके पीछे पीछे जाने लगा सूरज उसे पकड़ना चाहता था उसके साथ खेलना चाहता था इसलिए जहां जहां खरगोश जा रहा था सूरज उसके पीछे पीछे चला जा रहा था।


सूरज खरगोश के पीछे पीछे भागता चला जा रहा था और तभी खरगोश उसकी आंखों के सामने एक घनी जंगली झाड़ियों के अंदर चला गया सूरज उस खरगोश को पकड़ लेना चाहता था इसलिए दबे पांव वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा उसके सामने घनी झाड़ियां थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था उसे मालूम था कि इसी झाड़ियों के अंदर खरगोश दुबक कर बैठा हुआ है इसलिए वह घनी झाड़ियों के करीब पहुंचकर धीरे धीरे पत्तों को हटाने लगा लेकिन उसे खरगोश नजर नहीं आ रहा था वह अपनी चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा लेकिन वहां खरगोश का नामोनिशान नहीं था वह निराश होने लगा वह समझ गया कि खरगोश भाग गया है और अब उसके हाथ में नहीं आने वाला लेकिन फिर भी अपने मन में चल रही इस उथल-पुथल को अंतिम रूप देते हुए वह अपने मन की तसल्ली के लिए अपना एक कदम आगे बढ़ाकर घनी झाड़ियों को अपने दोनों हाथों से हटाकर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन फिर भी परिणाम शून्य ही आया वह उदास हो गया वह अपने दोनों हाथों को झाड़ियों पर से हटाने ही वाला था कि उसकी नजर थोड़ी दूर की घनी झाड़ियों के करीब गई और वहां का खरगोश नजर आया सूरज को देख कर झाड़ियों के पास बिल था उसमे जा के छुप गया। सूरज धीरे से रेंगता हुवा घनी झाड़ियों के पास जा के खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार करने लगा।

इधर सुधिया
का पेशाब की तीव्रता उसके पेट में ऐठन दे रही थी सुधिया धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी यह नजारा बेहद ही कामुकता से भरा हुआ था लेकिन इस नजारे को देखने वाला वहां कोई नहीं था धीरे-धीरे सुधिया पूरी तरह से अपनी कमर तक अपनी साड़ी को उठा दी थी उसकी नंगी चिकनी मोटी मोटी जांगे पीली धूप में स्वर्ण की तरह चमक रही थी बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ यह नजारा देखने वाला वहां कोई नहीं था और वैसे भी सुधियां यही चाहती थी कि कोई उसे इस अवस्था में ना देख ले सुधिया साड़ी को अपनी कमर तक उठा कर एक हाथ से अपनी लाल रंग की कच्छी को नीचे की तरफ सरकाने लगी धीरे धीरे सुधिया अपनी पैंटी को अपनी मोटी चिकनी जांघों तक नीचे कर दी और आंखे बंद कर के तुरंत नीचे बैठ गई मुतने के लिए। सुधिया की बुर फैल कर खूब मोटी धार निकाल कर मुतना शुरू कर दिया मूत की धार सीधे झाड़ियों के ऊपर से दूसरी तरफ गिरने लगी जहापारी सूरज नीचे लेटा हुवा खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार कर रहा था।
जैसे ही सूरज के ऊपर सुधियां की मूत की धार गिरी सूरज चौक गया की ये बिन बादल बरसात केसे होने लगी।
इस लिए सूरज रेंगता हुवा थोडासा आगे गया और झाड़ीयो को हटा के देखने लगा और सामने का नजारा नजारा देखकर एकदम सन्न रह गया।
सूरज को एक बार फिर से अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मामी
सुधिया को बहुत जोरों से पेशाब लगी कर रही थी। जिससे सूरज का मुंह खुल गया और बूर से निकलती हुवी पेशाब की धार सीधे सूरज के मुंह में चली गई।
जैसे ही सूरज के मुंह में पेशाब की धार गिरी सूरज का गला फिर से सूखने लगा थोड़ी देर पहले हैंडपंप पर के पानी से अपनी प्यास बुझाई थी लेकिन सुधिया की बूर की मूत की धार ने उसकी प्यास बढ़ा दी थी। ओर सूरज बूर से निकलती हुवी मूत की धार को पीने लगा।
सूरज को अपनी किस्मत पर नाज होने लगा क्योंकि कुछ दिनों से उसकी किस्मत उसके पक्ष में चल रही था

इस समय सूरज की आंखों के सामने उसकी सुधिया मामी की गुलाबी बूर थी जो तेजी से पानी छोड़ रही थी। जिसे सुधिया आंखे बंद किए हल्के से उठाए हुए थी और सुधियां को इस तरह देख कर पलभर में ही उसका लंड धोती के अंदर तन कर लोहे के रोड की तरह हो गया था।

अब सूरज खरगोश के बिल को कब का भूल चुका था अब उसके सामने एक नया बिल था जो लगातार मूत की धार उसके मुंह में छोड़ रहा था और धोती में उसका फन फनता हुवा साप उस बिल में घुसाने को बेताब था।

सूरज लेटे हुवे अपने हाथों से लंड को मसलने लगा था सुधियां की गुलाबी बूर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी जिसकी वजह से उसमें से एक सीटी सी बजने लगी थी और इस समय सुधियां की बुर से निकल रही सीटी की आवाज सूरज के लिए किसी बांसुरी के मधुर धुन से कम नहीं थी सूरज उस मादकता से भरे नजारे और बुर से आ रही मूत की धार को पी रहा था।
सूरज को ऐसा लग रहा था की मानो की सुधियां मामी के बूर से निकलता हुवे मूत की धार कभी बंद ना हो और ऐसे ही चलती रहे।
सूरज उस मधुर धुन में खोने लगा

सुधिया आंखे बंद किए पूरी तरह से निश्चिंत थी कि उसे इस समय पेशाब करते हुए कोई नहीं देख रहा है लेकिन इस बात से अनजान थी कि उसका ही भांजा झाड़ियों के नीचे लेटा हुवा उसके बूर से निकलती पेशाब को पी रहा है।
थोड़ी देर में आंखे बंद किए सुधियां ने पेशाब कर ली लेकिन उठते हुवे अपनी गुलाबी पुर की गुलाबी पतियों में से पेशाब की बूंद को गिराते हुए हल्के हल्के अपने नितंबों को झटकने लगी।
लेकिन सुधियां की यह हरकत बेहद ही कामुकता से भरी हुई थी सूरज खुद अपनी मामी की इस हरकत को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया था कल की चुदाई के बाद का लंड बार बार खड़ा होने लगा था।
सूरज को अब रहा नहीं गया

जैसे ही सुधिया पेशाब कर के जैसे ही खड़ी होने वाली थी
तभी सूरज ने आगे बढ़ते
अपना मूह आगे कर दिया, और सुधिया की बूर से लगा कर उसकी चूत को अपने मूह मे भर लिया,
जिससे सुधियां के शरीर में कम्पन या जाता है वह डर जाति हे की नीचे क्या चीज है वह देखने के लिए नीचे झुकी नीचे का नजारा देख कर सुधिया दंग रह जाती हे की कोई लड़का अपना मुंह बूर से लगाए हुवे चूस रहा था।
सुधियां डरते हुवे कोन हो तुम...?
सूरज अपना मुंह बूर से थोड़ा पीछे हटाके के बोलता ही में हु मामी सूरज आपका भांजा और इतना कहके फिरसे
सुधिया की बूर को अपने मुंह में भर के जोर जोर से चूसने लगा।


सुधिया- बेटा तू ये क्या कर रहा है यह गंदी जगह ही इसे मत चाट मुझे छोड़ से में तेरी मामी हू कोई हमे देख लेगा

उसकी बातो कोई भी का असर अब सूरज पर नही हो रहा था सूरज अपनी ही मस्ती में जोर जोर से बूर का चाटने लगा


सूरज- सूरज लंबी लंबी जीभ निकाल कर सुधिया की बुर को खूब कस कर दबोचते हुए चाटने लगता है, सुधिया की चूत एक दम मस्त हो जाती है

सुधियां को भी अब मजा आने लगा था पाहिली बार उसकी बूर कोई चूस रहा था।

सूरज सुधिया की चूत को खूब ज़ोर से अपने मूह मे दबा कर चूसने लगता है,

अब सुधिया अपनी जाँघो को और फैला देती हे और उसकी चूत को सूरज के मुंह में दबाने लगती है।

सूरज पागलो की तरह उसकी चूत को चूसने लगता है और सुधिया उसके सर को पकड़ कर खूब ज़ोर से अपनी चूत से
दबा लेती है,

सूरज किसी पागल कुत्ते की तरह सुधिया की पूरी बूर खोल खोल कर उसका रस चाटने और चूसने लगता है और

सुधिया अपनी चूत खूब कस कस कर सूरज के मूह पर दबा दबा कर रगड़ने लगती है,


सुधिया- आह सीईईईई कितना ज़ोर से चाट रहा है बेटे, ज़रा आराम से चाट आह आहह आह आ सीईईईईईईईई ओह सूरज...


सुधिया के पैर अब थरथराने लगे और सुधिया नीचे जमीन पर गिर गई
अब सुधियां अपने पैरों को हवा में जितना हो सके फैलाते हुए अपनी कसी कसी मांसल जाँघों को खुलकर अपने सूरज के लिए खोल दिया, जिससे उनकी बूर उभरकर सूरज के मुंह के सामने आ गयी और दोनों फांकें खुलकर फैल गयी, हल्के धूप कि रोशनी में सूरज अपनी मामी की फैली हुई बूर को देखकर और भी पागल हो गया और उसने अपनी लंबी सी जीभ निकाली, फिर जीभ को बूर के नीचे अंतिम छोर पे गांड की छेद के पास लगाया और सर्रर्रर्रर्रर से पूरी बूर को चाटता हुआ नीचे से एकदम ऊपर तक आया, सूरज के ऐसा करने से सुधिया फिरसे बौखला गयी और मदहोशी में अपनी आंखें बंद करके अपने होंठों को दांतों से काटते हुए बड़ी जोर से सिसकी और आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई.......... अम्मामामामामा......सूरजबेटा.... ऐसे बोलते हुए
पूरे बदन को धनुष की तरह ऊपर को मोड़ती चली गयी, उसकी विशाल चूचियाँ तनकर ऊपर को उठ चुकी थी और निप्पल तो इतने सख्त हो गए थे कि वो खुद ही उन्हें हल्का हल्का मसल रही थी।

बूर की पेशाब और काम रस की गंध से सूरज पागल हो चुका था, उसने इसी तरह कई बार पूरी की पूरी बूर को नीचे से लेकर ऊपर की तरफ विपरीत दिशा में लप्प लप्प करके चाटा, जब सूरज बूर के ऊपरी हिस्से पर पहुचता तो बूर के ऊपर बालों में अपनी जीभ फिराता और फिर जीभ को फैलाके गांड की छेद के पास रखता और फिर सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर से लपलपाते हुए पुरी बूर पर जीभ फिराते हुए ऊपर की ओर आता और कभी तो वो ऊपर आकर बूर के ऊपर घने बालों पर जीभ फिराता कभी जहां से दरार शुरू होती है वहां पर जीभ को नुकीली बना कर दरार में डुबोता और भगनासे को जी भरकर छेड़ता, फिर बूर के दाने के किनारे किनारे जीभ को गोल गोल घूमता।

सुधिया की पूरी बूर सूरज के थूक से गीली हो चुकी थी, उसकी बूर से निकलता काम रस सूरज बराबर अपनी जीभ से चाट ले रहा था, पूरी झाड़ियों में हल्की हल्की चप्प चप्प की आवाज के साथ दोनों मामी भांजे की सिसकियां गूंजने लगी।

सूरज ने फिर एक बार अपनी जीभ को नीचे गांड के छेद के पास लगाया और इस बार उसने जीभ को नुकीला बनाते हुए जीभ को अपनी मामी की बूर की दरार में नीचे की तरफ डुबोया और दरार में ही डुबोये डुबोये नुकीली जीभ को नीचे से खींचते हुए ऊपर तक लाया, पहले तो एक बार जीभ मामी की बूर के छेद में घुसने को हुई पर फिर फिसलकर ऊपर चल पड़ी और बूर के दाने से जा टकराई, फिर सूरज ने वहां ठहरकर बूर के दाने को लप्प लप्प करके कई बार चाटा।

सुधिया के बदन की एक एक नस आनंद की तरंगों से गनगना उठी, बड़ी ही तेज तेज उसके मुँह से अब सिसकियां निकल रही थी मानो अब लाज, संकोच और डर (की कोई सुन लेगा) जैसे हवा हो चुका था, अपने पैरों को मोड़कर उसने सूरज की पीठ पर रख लिया था,

गनगना कर कभी वो अपने सूरज को पैरों से जकड़ लेती कभी ढीला छोड़ देती। बेतहासा कभी अपना सर दाएं बाएं पटकने लगती, कभी अपने हांथों से चूचीयों को कस कस के मीजती, सुधिया मस्ती में नीचे की तरफ नही देख रही थी, उसकी आंखें अत्यंत नशे में बंद थी, कभी थोड़ी खुलती भी तो वो हल्का सा आसमान को देखती।

उनकी सांसे बहुत तेज ऊपर नीचे हो रही थी, लगातार उसके सूरज उसकी बूर को एक अभ्यस्त खिलाड़ी की भांति चाटे जा रहे थे, जीवन में पहली किसी मर्द की जीभ उसकी बूर पर लगी थी और वो भी खुद उसके भांजे की, आज पहली बार वो सूरज से अपनी बूर चटवा रही थी, इतना परम सुख उसे कभी नही मिला..
सूरज की मर्दाना जीभ की छुअन से सुधीया नशे में कहीं खो गयी थी।

झाड़ियों में से बूर चाटने की चप्प चप्प आवाज सिसकियों के साथ गूंज रही थी। एकएक सूरज को कुछ कमी महसूस हुई वो और ज्यादा गहराई से अपनी मामी बूर को खाना चाहता था, उसने मामी के बूर से मुँह हटाया तो उसके होंठों और मामी की बूर की फाँकों के बीच लिसलिसे कामरस और थूक के मिश्रण से दो तीन तार बन गए, सूरज ने बड़ी मादकता से उसे चाट लिया और उठने लगा।

उसने दहाड़ते हुए अपनी दो उंगलियों से अपनी मामी की बूर की फांकों को अच्छे से चीरा, एक तो जांघे फैलने से बूर पहले ही खुली हुई थी ऊपर से सूरज ने उंगलियों से फांकों को और चीर दिया जिससे बूर का लाल लाल छेद और बूर का दाना धूप की रोशनी में चमक उठा, सूरज लपकते हुए बूर पर बेकाबू होकर टूट पड़ा और जीभ से बूर के लाल लाल कमसिन कसे हुए छोटे से छेद को बेताहाशा चाटने लगा।

सुधियां का बदन अचानक ही बहुत तेजी से थरथराया और सुधिया ने
आ...हा.. आहा... ओ हो... ऊ महा....
कहते हुए बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज को सिसकते हुए दबाया।

सूरज लप्प लप्प जीभ से अपनी मामी की बूर के छेद को चाटे जा रहा था, सुधिया फिर से तड़प तड़प कर अपना सर दाएं बाएं पटकती, पूरा बदन ऐंठती, गनगना जाती, अपनी मुठ्ठियों को कस कस के भीचती, तो कभी अपने स्तन भींच लेती, अपने पैरों को उसने फिर से अपने सूरज की पीठ पर लपेट दिया और जब जब उसका बदन थरथराता वो अपने पैरों से अपने बाबू को जकड़ लेती।

सूरज ने थोड़ी देर अपनी मामी की बूर के छेद को चाटा फिर अपनी जीभ को नुकीला किया और बूर के नरम नरम से लाल लाल छेद के मुहाने पर गोल गोल घुमाने लगा, सुधिया अब जोर जोर से काफी तेज तेज छटपटाने और सिसकने लगी, उसे क्या पता था कि उसके सूरज बूर के इतने प्यासे हैं, वो बूर के इतने अच्छे खिलाड़ी हैं, वो बूर चाटने में इतने माहिर है, ऐसा सुख तो उसके पति ने कभी सपने में भी नही दिया, उसे पता लग चुका था कि उसके सूरज अपनी मामी की बूर के कितने भूखे हैं।

झाड़ियों में काफी तेज तेज सिसकारी गूंजने लगी।
सूरज ने एक बार फिर से पूरी बूर को नीचे से ऊपर की ओर अपनी जीभ से लपलपा के चाटा, सूरज का अब इरादा था अपनी जीभ अपनी मामी के बूर की छेद में डालने का पर इतने भर से ही सुधियां अब काफी त्राहि त्राहि करने लगी, उसके मुँह से अब थोड़ी ज्यादा जोर से
आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई..........अम्मामामामामा..................सूरज................हाहाहाहाहायययययय..............आआआआआआहहहहहह......
सिसकते हुए निकलने लगा।


उसकी बुर के अंदर बाहर करते हुए अपनी जीभ को उसकी बुर के बीचो बीच रखकर चाटते हुए उसे मजा देने लगा सूरज की हरकत की वजह से सुधियां के मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फिर से फूटने लगी,,, सुधिया की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,, उसका संपूर्ण वजुद कांपने लगा और देखते ही देखते,,, सुधियां जोर से सिसकारी लेते हुए झड़ने लगी,,,,, उसकी गुलाबी बुर के छेद से,, मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी,,,, लेकिन सूरज ने उस मदनरस की एक भी बूंद को जाया नहीं देना चाहता था,,, इसलिए अपनी जीभ लगाकर लपालप उसे पीना शुरू कर दिया,,,सिसकारी लेती हुई सुधिया सूरज की हरकत देखकर एकदम से सिहर उठी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक मर्द औरत की बुर से निकला हुआ उसका नमकीन पानी इस कदर चाट चाट कर अपनी गले के नीचे उतार लेता है,,,,, सुधिया झाड़ चुकी थी सुधिया हेरान भी थी कि,,, बिना बुर में लंड डाले उसकी बुर इतना पानी छोड़ रही थी,,,।
लेकिन उसे इस तरह से पानी छोड़ते हुए बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,, सुधियां कुछ देर तक उसी तरह से जमीन के ढेर हुइ।

अब सुधियां काफी गरम हो गई उसकी बूर अब लंड मांग रही थी।
सुधिया ने सिसकते हुए सूरज से कहा- बेटा, अपना लंड मोटा सा लंड, एक बार अपनी मामी की पनियायी बूर में गूसा दो, बस एक बार हल्का गूसा दो


मामी ने इस अदा से निवेदन किया कि सूरज अपनी मामी की अदा पर कायल ही हो गया।

सूरज - आआआआआहहहहहह......मामी, तूम अपने आप ही लंड खोलकर बूर में गूसा दो मेरी रानी, डुब लो जितना तेरा मन करे, ये तो तेरी ही अमानत है मामी।

इतना कहकर सूरज अपने दोनों हाँथ मामी की कमर के अगल बगल टिकाकर मामी के ऊपर झुक सा गया और अपनी मामी की आँखों में देखने लगा दोनों मुस्कुरा दिए और कई बार एक दूसरे के होंठों को चूमा।

सुधियां ने अपने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा जो अभी भी उसकी टांगो में फसा हुआ था और दूसरे हाँथ से उसने अपने भांजे के लोहे के समान हो चुके सख्त लंड को धोती के ऊपर से पकड़ लिया, ९ इंच लंबे और ४ इंच मोटे विशाल लंड को पकड़कर सुधिया गनगना गयी, वासना की मस्ती उसके नसों में दौड़ गयी, कितना बड़ा लन्ड था सूरज का, उसके भांजे का, उसपर वो उभरी हुई नसें, सुधियां की मस्ती में आआआआहहहह निकल गयी।
( कल चुदाई के दौरान सुधियां ने सूरज के लंड को बूर में महसूस किया था मगर हात से छुआ नहीं था )

सुधियां - ओह बेटा कितना सख्त हो रखा है तुमारा लंड, कितना मोटा है ये.......हाय........ कितना लंबा है.......ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़


सूरज- हाँ मेरी मामी ये सिर्फ और सिर्फ अब आपका है।


सुधिया ने कुछ देर पूरे लन्ड को आँहें भरते हुए सहलाया फिर दूसरे हाँथ से कच्छी को छोड़कर हाँथ को पीछे कमर पर ले गयी और धोती को कमर पर से ढीला किया, सूरज ने अपनी मामी की आंखों में देखते हुए अपनी धोती को खोलने में मदद की, धोती काफी हद तक ढीली हो गयी थी सूरज ने एक हाँथ से धोती खोलकर बगल रख दी, नीचे से वो पूरा नंगा हो गया ऊपर बनियान पहनी हुई थी, अपनी मामी के ऊपर वो दुबारा झुक गया और उसकी आँखों में देखते हुए उसे चूम लिया,
सुधिया सिसकते हुए अपने भांजे के निचले नग्न शरीर पर हाँथ फेरने लगी, उसने जाँघों को छूते हुए सूरज के लन्ड के ऊपर के घने बालों में हाँथ फेरा और फिर लंड को पकड़कर कराहते हुए सहलाने लगी,
सुधियालंड को मुट्ठी में पकड़कर पूरा पूरा सहलाने लगी, सिसकते हुए सहलाते सहलाते वो नीचे के दोनों बड़े बड़े आंड को भी हथेली में भरकर बड़े प्यार से दुलारने लगी और सहलाने लगी,
अपनी मामी की नरम मुलायम हांथों की छुअन से सूरज की नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने सिसकते हुए अपने एक हाँथ से अपनी कच्छी को दुबारा साइड किया और दूसरे हाँथ से लंड को सहलाते हुए बड़े प्यार से उसकी आगे की चमड़ी को पीछे की तरफ खींचकर खोला, दो बार में उसने लन्ड की चमड़ी को उतारा, खुद ही तेजी से ऐसा करते हुए जोश में सिसक पड़ी, क्योंकि एक मामी मां के लिए अपने ही बेटे समान भांजे की लंड की चमड़ी खोलना बहुत ही वासना भरा होता है


पहली बार में तो उसने चमड़ी को सिसकते हुए खाली फूले हुए सुपाड़े तक ही उतारा और चिकने सुपाड़े पर बड़े प्यार से उंगलिया फेरते हुए कराहने लगी मानो उसे नशा चढ़ गया हो, दोनों मामी भांजा एक दूसरे की आंखों में नशे में देख रहे थे, सूरज मामी की कमर के दोनों तरफ अपना हाथ टिकाए उसके ऊपर झुका हुआ था और सुधियां अपने दोनों पैर फैलाये साड़ी को कमर तक उठाये एक हाथ से अपनी कच्ची को साइड खींचें हुए, दूसरे हाँथ से अपने सूरज का लंड सहलाते हुए उसकी आगे की चमड़ी को पीछे को खींचकर उतार रही थी।


सुधिया के मुलायम हाँथ अपने चिकने संवेदनशील सुपाड़े पर लगते ही सूरज आँहें भरने लगा, अपने भांजे को मस्त होते देख सुधियां और प्यार से उनके सुपाड़े को सहलाने और दबाने लगी, अपने अंगूठे से सुधियांने अपने भांजे के लंड के पेशाब के छेद को बाद प्यार से रगड़ा और सहलाया, उसकी भी मस्ती में बार बार आंखें बंद हो जा रही थी, बार बार सिरह जा रही थी वो, बदन उसका गनगना जा रहा था मस्ती में, फिर उसने अपने भांजे के लंड की चमड़ी को खींचकर पूरा पीछे कर दिया और अच्छे से अपने भांजे के पूरे लंड को अपने मुलायम हांथों से सहलाने लगी।


फिर काफी देर सहलाने के बाद सुधिया ने एक हाँथ से अपनी कच्छी को साइड किया और अपने भांजे के लंड को अपनी बूर की रसीली फांकों के बीच रख दिया, जैसे ही सुधियां ने बूर पे लंड रखा दोनों मामी भांजा मस्ती में जोर से सीत्कार उठे-


सुधिया-आआआआआआआआआआहहहहहहहहहह...........ईईईईईईईशशशशशशशशश..........हाहाहाहाहाहाहाहाहायययययय........बेटा....…...आआआआआआहहहहह


सूरज - आआआआआआहहहहह.......मेरी मामी.....कितनी नरम है तेरी बूबूबूबूररररर..........ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़........मजा आ गया।


आज जीवन में पहली बार सूरज के लंड को, इतना असीम आनंद मिलेगा कभी सपने में भी नही सोचा था, सुधिया कराहते हुए अपने भांजे के लंड का सुपाड़ा अपनी दहकती बूर की फांक में रगड़ती जा रही थी, दोनों के नितम्ब हल्का हल्का मस्ती में थिरकने लगे, सूरज हल्का हल्का लंड को बूर की फांक में खुद रगड़ने लगा, पूरे बदन में चिंगारियां सी दौड़ने लगी, बूर से निकलता लिसलिसा रस लंड के आगे के चिकने भाग को अच्छे से भिगोने लगा, सुधिया ने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा हुआ था पर अब उसने उसको छोड़कर वो हाँथ अपने भांजे के हल्के हल्के धक्का लगाते चूतड़ पर रख कर कराहते हुए सहलाने लगी, बीच बीच में हाँथ से उनके चूतड़ को अपनी बूर की तरफ मचलते हुए दबा देती, दहाड़ते लंड का मोटा सा सुपाड़ा मखमली बूर की फाँकों में ऊपर से नीचे तक रगड़ खाने लगा, सूरज को इतना मजा आया कि वह धीरे धीरे अपनी मामी के ऊपर लेटता चला गया, सुधिया अपने दोनों हांथों को वहां से हटा कर बड़े प्यार से अपने भांजे को अपनी बाहों में भरकर मस्ती में दुलारने लगी, अत्यंत नशे में दोनों की आंखें बंद थी।


सूरज अपनी मामी के बाहों में समाए, उसपर लेटे हुए अपनी आंखें बंद किये अपने लंड को बूर की फाँकों में रगड़ते हुए नरम नरम फांकों का आनंद लेने लगा। सुधिया हल्का हल्का मस्ती में आंखें बंद किये आआआहहहह ह......आआआहहहहह करने लगी।


सुधियां ने बड़ी मुश्किल से अपनी नशीली आंखें खोली उसका का सारा ध्यान सिर्फ अपने भांजे के मोटे दहकते लन्ड पर था जो कि लगातार धीरे धीरे उसकी सनसनाती बूर की रसीली फांकों में नीचे से ऊपर तक बार बार लगातार रगड़ रहा था, वो मुलायम चिकना सुपाड़ा बार बार जब सुधियां की बूर के फांकों के बीच दाने से टकराता तो सुधियां का बदन जोर से झनझना जाता, पूरे बदन में सनसनाहट होने लगती।


सुधिया ने कराहते हुए अपने दोनों पैर मोड़कर अच्छे से फैला रखे थे, सूरज एक लय में अपने मोटे लंड को अपनी मामी की बूर की फांकों में रगड़ रहा था, सुधिया भी मादक सिसकारियां लेते हुए धीरे धीरे अपनी गांड को अपने भांजे के लंड से ताल से ताल मिला के उठाने लगी और अपनी बूर को नीचे से उठा उठा के लंड से रगड़ने लगी।


सुधियां की कच्छी का किनारा बार बार सूरज के लंड से रगड़ रहा था तो

सूरज ने धीरे से मामी के कान में बोला - मेरी प्यारी मामी


नीलम - हाँ मेरे प्यारे बेटे


सूरज - अपनी कच्छी पूरा उतार न, तब अच्छे से मजा आएगा।


सुधिया - हाँ बेटा तुम उठो जरा।


सूरज मामी के ऊपर से उठ जाता है उसका लंड भयंकर जोश में झटके लिए जा रहा, ९ इंच लंबा लंड पूरा खुला हुआ था, लोहे के समान सख्त और खड़ा था, सुधिया ने कराहते हुए अपनी छोटी सी कच्छी निकाल फेंकी और जल्दी से अपनी साड़ी भी खोल कर झाड़ियों में बगल में रख दी, अब सुधिया के बदन पर सिर्फ ब्लॉउज रह गया था नीचे से वो बिल्कुल नंगी हो गयी थी।


अपनी मामी को इस तरह अपने भांजे के सामने आज पूरी नंगी होते देख सूरज वासना में कराह उठा,
सूरज अपनी मामी का पुर्णतया नग्न निचला हिस्सा देखकर बौरा गया, सुधियां ने कच्छी और साड़ी उतारकर फिर से अपनी दोनों जांघें अच्छे से फैला कर अपनी बूर को अपने भांजे के सामने परोस दिया, सूरज एक पल तो मामी की मादक सुंदरता को देखता रह गया, फिर एकएक कराहते हुए उसने अपनी शादीशुदा मामी के पैरों को एड़ी और तलवों से चाटना शुरू किया, सुधियां तेजी से सिसक उठी,
दोनों पैरों की एड़ी, तलवों को अच्छे से चूमता चाटता वह आगे बढ़ा, घुटनों को चूमता हुआ वह जांघ तक पहुँचा, दोनों जाँघों को उसने काफी देर तक अच्छे से खाली चूमा ही नही बल्कि जीभ निकाल के किसी मलाई की तरह अच्छे से चाटा, सुधिया वासना से गनगना गयी, सूरज अपनी मामी की अंदरूनी जांघों को अच्छे से चूम और चाट रहा था, सुधिया रह रह कर झनझना जा रही थी।


सूरज जांघों को चाटते हुए वह महकती बूर की तरफ बढ़ा, बूर फिरसे लगातार लिसलिसा काम रस बहा रही थी,
सूरज ने एक बार फिर बूर को मुँह में भर लिया और एक जोरदार रसीला चुम्बन अपनी मामी की बूर पर लिया, सुधिया जोर से सिसकारते हुए चिंहुककर उछल सी पड़ी, बदन उसका पूरी तरह गनगना गया, कराहते हुए सुधियां ने खुद ही एक हाँथ से अपनी महकती पनियायी बूर को चीर दिया और सूरज मस्ती में आंखें बंद किये अपनी मामी की बूर को लपा लप्प चाटने लगा, सुधियां हाय हाय करने लगी, सुधिया कभी अपनी बूर की फांकों को फैलाती तो कभी अपने भांजे के गाल को सहलाती, कभी जोश में झनझनाते हुए अपने भांजे की पीठ पर कस के नाखून गड़ा देती, सुधिया के ऐसा करने से सूरज को और भी जोश चढ़ जा रहा था और वो और तेज तेज बूर को चाटे जा रहा था।


सुधियां जब अपनी उंगली से बूर की फांक को फैलाती तो सूरज तेज तेज बूर की लाल लाल फांक में जीभ घुमा घुमा के चाटता, कभी फूले हुए बूर के दाने को जीभ से छेड़ता कभी मुँह में भरकर चूसता, फिर कभी मामी की बूर के छेद में जीभ डालता और जीभ को अंदर डाल के हल्का हल्का गोल गोल घुमाता।


सुधिया वासना में पगला सी गयी, जोर जोर से सिसकने लगी, कराहने लगी, अपने भांजे के सर को कस कस के अपनी रसभरी बूर पर दबाने लगी, अपनी गांड को उछाल उछाल के अपनी बूर चटवाने लगी,


ओओओओहहहह..............बेटा...............हाय मेरी बूर...............कितना अच्छा लग रहा है बेटा................हाय तुमारी जीभ................ऊऊफ्फफ................ चाटो ऐसे ही बेटा...................मेरी बरसों की प्यास बुझा दो....................आआआआआआहहहहह................मेरे बेटे..........मेरे राजा.............मेरी बूर की प्यास सिर्फ तुमसे बुझेगी....................... तुमसे.....................ऐसे ही बूर को खोल खोल के चाटो मेरे बेटे........................अपनी मामी की बूर को चाट चाट के मुझे मस्त कर दो...................ऊऊऊऊईईईईईई अम्मा..................... कितना मजा आ रहा है..............ऊऊऊऊऊफ़्फ़फ़फ़


काफी देर तक यही सब चलता रहा और जब सुधियां से नही रहा गया तो उसने अपने भांजे को अपने ऊपर खींच लिया, सूरज अपनी मामी के ऊपर चढ़ गया, लन्ड एक बार फिर जाँघों के आस पास टकराता हुआ बूर पर आके लगा, लंड पहले से ही खुला हुआ था सुधिया ने कराहते हुए लंड को पकड़ लिया और मस्ती में आंखें बंद कर अपनी बूर की फांकों को दुबारा फैला कर उसपे रगड़ने लगी।


सुधियां ने जोर से सिसकते हुए अपने भांजे को अपनी बाहों में भर लिया और सूरज अपने लंड को अपनी मामी की बूर की फांक में तेज तेज रगड़ने लगा, जब झटके से लंड बूर की छेद पर भिड़ जाता और अंदर घुसने की कोशिश करता तो सुधियां दर्द से चिहुँक जाती पर जल्द ही लन्ड उछलकर ऊपर आ जाता और बूर के दाने से टकराता तब भी सुधिया जोर से सिस्कार उठती।


सुधिया ने अपने भांजे से सिसकते हुए बड़ी मादक अंदाज़ में कहा- बेटा...अच्छा लग रहा है अपनी मामी की बूर का स्वाद।


सूरज - आहा मामी मत पूछ कितना मजा आ रहा है, कितनी नरम और रसीली बूर है मामी की......हाय


सुधियां अपने भांजे के मुँह से ये सुनकर शरमा ही गयी।

सुधियां - बेटा

सूरज - हाँ मेरी मामी

सुधियां - अब घुसा न लंड अपना मेरी बूर में, रहा नही जाता अब, घुसा न अपना लंड मेरी बूर के रसीले छेद में।


सूरज अपनी मामी के मुँह से इतना कामुक आग्रह सुनकर वासना से पगला गया और उसने अपनी मामी के दोनों पैरों को उठाकर फैलाकर अच्छे से अपनी कमर पर लपेट लिया, सुधियां भी अच्छे से पैर फैलाकर लेट गयी और सूरज ने अपने लंड का मोटा सुपाड़ा अपनी शादीशुदा मामी की रस बहाती महकती प्यासी बूर की छेद पर लगाया, सुधियां की बूर बिल्कुल संकरी नही थी क्योंकि कल ही सूरज ने उसकी बुर को अपने लंड से खोला था
उसके भांजे का लंड उसके पति के लंड से डेढ़ गुना बड़ा और मोटा था। सुधियां की बूर रस छोड़ छोड़ के बहुत रसीली हो चुकी थी, चिकनाहट भरपूर थी, सूरज ने अपने विशाल लंड का दबाव अपनी मामी की बूर की छेद में लगाना शुरू किया और अपने दोनों हाँथ नीचे ले जाकर अपनी मामी की गांड को पकड़कर ऊपर को उठा लिया जिससे सुधिया की बूर और ऊपर को उठ गई।
सुधियां से बर्दाश्त नही हो रहा था तो उसने कराहते हुए बोला , डालो न अपना मोटा लंड अपनी मामी की बुर में,अब मत तड़पाओ बेटा।


सूरज ने दहाड़ते हुए एक दो बार लंड को बूर के छेद पर फिरसे रगड़ा और एक हल्का सा धक्का मारा तो लंड फिसलकर ऊपर को चला गया, सुधिया तेजी से वासना में चिहुँक उठी, हाहाहाहाहाहाहाहाहायययय .......अम्मा.......ऊऊऊऊऊईईईईईईईईईई,


बूर रस बहा बहा कर बहुत चिकनी हो गयी थी और उसका छेद सूरज के लंड के सुपाड़े के हिसाब से छोटा था, जैसे ही लंड फिसलकर ऊपर गया और तने हुए बूर के दाने से टकराया सुधियां तड़प कर मचल गयी आआआआआहहहह.......उई अम्मा,
सूरज ने जल्दी से बगल में रखा घास का ढेर उठाया और सुधियां की चौड़ी गांड के नीचे लगाने लगा, सुधियां ने भी झट गांड को उठाकर घास के ढेर लगाने में मदद की,
घास का ढेर लगने से अब सुधिया की बूर खुलकर ऊपर को उठ गई थी, क्या रिस रही थी सुधियां की बूर, तड़प तड़प के लंड मांग रही थी बस,
सुधियां फिर बोली- बेटा अब डाल दो न, अब चला जायेगा, नही फिसलेगा, डाल से बेटा, चोद दो मुझे अब।


सूरज ने जल्दी से लंड को दुबारा दहकती बूर के खुल चुके छेद पर लगाया और एक तेज धक्का दहाड़ते हुए माrar, मोटा सा लंड कमसिन सी बूर के छेद को चीरता हुआ लगभग आधा मखमली बूर में समा गया, सुधिया की जोर से चीख निकल गयी,


हाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाययययययय............बेटा..........आआआआहहहहहह............धीरे से बेटा.............. मेरी बूर.............ओओओओओहहहहह बेटा............कितना मोटा है तुमारा......... दर्द हो रहा है बेटा...........ऊऊऊईईईईईईई.......अम्मा...............बस करो बेटा...........रुको जरा...............आआआआहहहहहह......कितना अंदर तक चला गया है एक ही बार में............आआआआहहहहहह


सूरज की भी इतनी नरम कमसिन बूर पा के मस्ती में आह निकल गयी,


सूरज ने झट उसके मुँह पर हाथ रख दिया, सुधिया का पूरा बदन ही ऐंठ गया,

सूरज ने झट से सुधियां के मुँह को दबा लिया उसकी आवाज अंदर ही गूंजकर रह गयी, एक हांथ से सूरज ने सुधिया का ब्लॉउज खोल डाला और ब्रा का बटन पीछे से खोलने लगा तो उससे खुल नही रहा था, सुधिया ने दर्द से कराहते हुए ब्रा खोलकार अपने भांजे की मदद की और ब्लॉउज और ब्रा को निकालकर बगल रख दिया,
सूरज अपनी मामी की इस वफाई पर कायल हो गया एक तो उसको कल चुदाने के बाद भी काफी दर्द भी हो रहा था फिर भी वो अपने भांजे को अपना प्यार दे रही थी, ब्लॉउज और ब्रा खोलकर उसने खुद ही उतार दिया, इतना प्यार सिर्फ मां समान मामी ही अपने बेटे समान भांजे को दे सकती है, सूरज ने बड़े प्यार से अपनी मामी को चूम लिया।


ब्रा उतरते ही सुधियां की बड़ी बड़ी मादक तनी हुई विशाल चूचीयाँ उछलकर बाहर आ गयी, उन्हें देखकर सूरज और पागल हो गया, निप्पल तो कब से फूलकर खड़े थे सुधिया की चूची के, दोनों चूचीयों को देखकर सूरज उनपर टूट पड़ा और मुँह में भर भरकर पीने लगा, दोनों हांथों से कस कस के दबाने लगा, कभी धीरे धीरे सहलाता कभी तेज तेज सहलाता, लगातार दोनों चूचीयों को पिये भी जा रहा था, निप्पल को बड़े प्यार से चूसे जा रहा था, लगतार अपने भांजे द्वारा चूची सहलाने, मीजने और चूमने, दबाने से सुधिया का दर्द कम होने लगा और वो हल्का हल्का फिर सिसकने लगी, आह....सी......आह.... सी......ओह बेटा....ऐसे ही.....और चूसो......दबाओ इन्हें जोर से.........हाँ मेरे बेटे......पियो मेरी चूची को.........आह, बोलते हुए सुधिया सिसकने लगी, उसका दर्द अब मस्ती में बदलने लगा, अपनी मामी की मखमली रिसती बूर में अपना आधा लंड घुसाए सूरज बदहवासी में उसे चूमे चाटे जा रहा था।

सूरज ने सुधियां के मुँह पर से हाँथ हटा लिया पर अभी भी वो दर्द से हल्का सा कराह दे रही थी, सूरज ने उसे बाहों में भर लिया और सुधियां भी अपने भांजे से मस्ती में कराहते हुए लिपट गयी,
सूरज मामी को बेताहाशा चूमने लगा, सुधियां की दर्द भरी कराहटें अब पूरी तरह मीठी सिसकियों में बदल रही थी, सूरज अपनी मामी के होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा,
सुधिया ने भी मस्ती में अपने भांजे के चेहरे को बड़े प्यार से अपने हांथों में लिया और आंखें बंद कर उनका साथ देने लगी,
सूरज ने हल्का सा अपनी गांड को गोल गोल घुमाया तो लन्ड बूर की रस भरी दीवारों से घिसने लगा, सुधियां को बहुत अच्छा लगा और वो अपने भांजे का मोटा सा मूसल जैसा लंड अपनी बूर में अच्छे से महसूस करने लगी, कितना अच्छा लग रहा था अब, सुधियां की तो नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने खुद ही अब नशे में अपना हाँथ अपने भांजे की गांड पर ले जाकर उसे हल्का सा आगे की तरफ दबा कर और लंड डालने का इशारा किया, सूरज अपनी मामी के इस आमंत्रण पर गदगद हो गया और उसे चूमते हुए एक जोरदार धक्का गच्च से मारा, इस बार बिरजू का ९ इंच लंबा और ४ इंच मोटा लंड पूरा का पूरा सुधिया की रस बहाती बूर में अत्यंत गहराई तक समा गया, सुधियां की दर्द के मारे फिर से चीख निकल गयी पर इस बार उसने खुद ही अपना मुँह अपने भांजे के कंधों में लगाते हुए दर्द के मारे उनके कंधों पर दांत गड़ा दिए और उसके नाखून भी सूरज की पीठ पर गड़ गए, सूरज वासना में कराह उठा, एक बेटे का लंड मामी की बूर की अत्यंत गहराई में उतर चुका था, पूरी बूर किसी इलास्टिक की तरह फैलकर लंड को जकड़े हुए थी।


सूरज का लंड अपनी मामी की दहकती बूर के छेद की मखमली दीवारों को चीरकर उसे खोलता हुआ इतनी गहराई तक समा चुका था कि सुधियां बहुत देर तक अपनी उखड़ती सांसों को संभालती रही, अपने भांजे के कंधों में मुँह गड़ाए काफी देर सिसकती रही और बीच बीच में गनगना कर कस के अपने भांजे से लिपट जाती और उनकी पीठ को दबोच कर दर्द से कराह जाती, सूरज अपनी मामी को बड़े प्यार से बार बार चूमने लगा, उसके पूरे बदन को वो बड़े प्यार से सहलाने लगा, कमर, जाँघे, पैर, बगलें, कंधे, गाल, गर्दन, और मस्त मस्त दोनों सख्त चूचीयाँ वो बार बार लगातार सहलाये जा रहा था साथ ही साथ लगातार उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसे जा रहा था।


सुधिया को अपने भांजे का लंड अपनी बूर में इतनी गहराई तक महसूस हुआ कि वो दर्द के मारे एक पल के लिए दूसरी दुनियाँ में ही चली गयी, अभी तक जो लंड सुधिया की बूर में जाता था वो बस इसका आधा ही जाता था जो उसके शराबी पति का था और सुधिया को लगता था कि बूर में बस इतनी ही जगह है पर आज उसे पता चल गया कि उसके भांजे के लंड ने उसकी मखमली बूर की अनछुई रसभरी गहराई को भेदकर, वहां तक अपना अधिकार स्थापित कर दिया है, उसकी बूर की अत्यंत गहराई में छुपे रसीले अनछुए रस को आज उसके भांजे का लंड वहाँ तक पहुंचकर बड़े अधिकार से उसपर विजय पताका फहरा कर बड़े प्यार से उसे अपना इनाम समझ कर पी रहा है
और सुधिया की मखमली बूर की रसभरी अंदरूनी दीवारें इस छोर से लेकर उस छोर तक पूरे ९ इंच लंबे ४ इंच मोटे लंड से पूरी तरह कसकर लिपटी हुई उस मेहमान का बड़े ही दुलार से चूम चूम के बूर के अंदर आने का जमकर स्वागत कर रही थी, पहले जो लंड आता था उसके पति था पर आज जो लंड बूर में आया है उससे भांजे का कुवारा लंबा मोटा लंड है,
सुधियां की बूर की मखमली रसभरी अंदरूनी दीवारें उसके अंदर पूरी तरह घुसे हुए भांजे के लंड से लिपटी उसे चूम चूम के उसका स्वागत कर रही थीं मानो कह रही हों कि अब तक कहाँ थे आप, कब से तरस गयीं थी हम आपको छूने और चूमने के लिए।


सुधियां को ये सब महसूस कर दर्द के साथ साथ एक तरह से असीम आनंद भी होने लगा, सूरज अपनी मामी को उसकी बूर में अपना पूरा लंड ठूसे लगातार चूमे और सहलाये जा रहा था, वह सुधिया के होंठों को अपने होंठों में भरकर पीने लगा, सुधिया को अब फिर मजा आने लगा, दर्द सिसकियों में बदलना शुरू हो गया, लिपट गयी वो खुद ही अपने भांजे से अच्छी तरह और ताबड़तोड़ चूमने लगी सूरज को,
सूरज समझ गया कि अब उसकी मामी तैयार है बूर चुदवाने के लिए, सुधियां की बूर से लगातार रस बह रहा था।

काफी देर तक लंड बूर में पड़े रहने से बूर उसको अच्छे से लीलकर अभ्यस्त हो गयी थी।
सूरज ने अपनी मामी के पैरों को अपने कमर पर अच्छे से लपेटते हुए धीरे से लंड को थोड़ा बाहर खींचा और गच्च से दुबारा बूर की गहराई में उतार दिया, सुधिया मीठे मीठे दर्द से सिरह उठी, सूरज बार बार ऐसा ही करने लगा वह थोड़ा सा लंड को निकलता और दुबारा बूर में पेल देता, सुधियां को ये सब बहुत अच्छा लग रहा था,
सूरज अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर लंड को बूर की गहराई में अच्छे से रगड़ता तो सुधिया मस्ती में कराह जाती, जोर जोर से उसकी सीत्कार निकलने लगी।


सूरज अब पूरी तरह सुधिया से लिपटते हुए धीरे धीरे लंड को बूर से बाहर निकाल निकाल के गच्च गच्च धक्के मारने लगा, उसने अपनी मामी के होंठ अपने होंठों में भर लिए और चूसते हुए थोड़े तेज तेज अपनी मामी को चोदने लगा।


सुधिया का दर्द धीरे धीरे जाता गया और चुदाई के मीठे मीठे सुख ने उसकी जगह ले ली। सुधिया को ऐसा लग रहा था कि आज उसकी बूर की बरसों की भूख मिट रही है, इतना आनंद आजतक उसे कभी नही आया था, मोटे से लंड की रगड़ बूर की गहराई तक हो रही थी, सूरज का लंड अपनी ही मामी की बच्चेदानी के मुँह पर जाकर ठोकर मारने लगा जिससे सुधियां का बदन बार बार वासना में थरथरा जा रहा था, एक असीम गहरे सुख में सुधीया का बदन गनगना जा रहा था।


सुधियां - आआआआआआहहहहह.......हाय बेटा.....चोदो मुझे........चोदो अपनी मामी को.........कितना मजा आ रहा है, कितना प्यारा है तुमारा लंड........कितना मोटा और लम्बा है मेरे भांजे का लंड......... हाय बेटा.....ऐसे ही चोदते रहो अपनी मामी को.......हाय

सूरज अब अपनी मामी की रसभरी बूर में हचक हचक के थोड़ा और तेज तेज अपना मोटा लन्ड पेलने लगा, बूर बिल्कुल पनिया गयी थी, बहुत रसीली हो चुकी थी, लंड अब बहुत आसानी से बूर के अंदर बाहर होने लगा था, सूरज ने अब और अच्छी पोजीशन बनाई और अपनी मामी की चूचीयों को मसलते हुए उन्हें पीते हुए, निप्पल को मुँह में भर भरकर चूसते चाटते हुए कस कस के बूर में पूरा पूरा लंड हचक हचक कर पेलने लगा,
बीच में सूरज रुकता और अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर अपने मोटे लंड को अपने मामी की बूर की गहराई में किसी फिरकी की तरह घूमने की कोशिश करता जिससे लंड बूर की गहराई में अच्छे से उथल पुथल मचाता और रगड़ खाता, इससे सुधिया मस्ती में हाय हाय करती हुई सीत्कार उठती।


दोनों की मादक सिसकारियां थोड़ी तेज तेज गूंजने लगी, सुधिया लाख कोशिश करती की तेज सिसकी न निलके पर क्या करे मजा ही इतना असीम आ रहा था कि न चाहते हुए भी तेज सिसकियां निकल ही जा रही थी, बूर इतनी रसीली हो चुकी थी की बूर चोदने की फच्च फच्च आवाज़ आने लगी, एक लय में हो रही इस चुदाई की आवाज से दोनों मामी भांजा और मस्त होने लगे,
सुधियां तो अब मस्ती में नीचे से अपनी चौड़ी गांड उठा उठा के चुदाई में अपने भांजे का साथ देने लगी,
९ इंच लंबे लंड का रसीली प्यासी बूर में लगातार आवागमन सुधिया को मस्ती के सागर में न जाने कहाँ बहा ले गया।


सूरज अब सुधिया को पूरी ताकत से हुमच हुमच कर जोर जोर चोदने लगा, नीचे से घास का ढेर उनकी चुदाई से बिखरने लगा,
झाड़ियों में दोनों मामी भांजे की सिसकिया गूंजने लगी, साथ में चुदाई की फच्च फच्च आवाज भी आने लगी थी, माहौल बहुत गर्म हो चुका था, किसी को अब होश नही था, सुधिया का पूरा बदन उसके सूरज के जोरदार धक्कों से हिल रहा था,
सूरज अपनी मामी पर चढ़ा हुआ उसे घचा घच्च लंबे लंबे धक्के लगाते हुए चोदे जा रहा था। बूर बिल्कुल खुल गयी थी अब, लंड एक बार पूरा बाहर आता और दहाड़ता हुआ बूर की गहराई में उतर जाता, हर बार तेज तेज धक्कों के साथ नीचे से अपनी गांड को उछाल उछाल के चुदाई में ताल से ताल मिलाते हुए सुधिया सीत्कार उठती थी।

आह...........बेटा............हाय ऐसे ही चोदो मुझे............ऐसे ही चोदो अपनी मामी को....
...........अपनी मामी को...............ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़................. ऊऊऊऊईईईईईई..............अम्मा............चोद डालो बूर मेरी बेटा..............अच्छे से चोदो अपने लंड से मेरी बूर को बेटा...................आआआआआहहहहहहहह......... सिर्फ तुमरे मोटे लंड से बेटा.........सिर्फ तुमारा लंड से............हाय......... चोदो मेरे बेटे और तेज तेज चोदो अपनी मामी को..........हाय दैय्या........कितना मजा आ रहा है।


सूरज भी मस्ती में करीब 20-25 मिनट तक लगातार सुधिया की बूर में हचक हचक के लन्ड पेल पेल के चोदता रहा, सुधिया और सूरज के तन बदन में एक जोरदार सनसनाहट होने लगी, सुधिया की बूर की गहराई में मानो चींटियां सी रेंगने लगी, लगातार अपने भांजे के जोरदार धक्कों से उसकी बूर में सनसनी सी होने लगी और एकाएक उसका बदन ऐंठता चला गया, गनगना कर वो चीखती हुई अपने नितम्ब को उठा कर अपने भांजे से लिपटकर झड़ने लगी,

आआआआआहहहहह...........बेटामैं गयी.......... तुम्हारी मामी झड़ रही है बेटा.............ओओओओहहहह ह........हाय....... मैं गयी बेटा........और तेज तेज चोदो बेटा.........कस कस के पेलो मेरी बूर........ऊऊऊऊईईईईई.......बेटा.........हाय मेरी बूर...…..….कितना अच्छा है मेरे बेटे लंड.........आआआआआहहहहह


सूरज का लंड तड़बतोड़ सुधियां की बूर चोदे जा रहा था, सुधिया सीत्कारते हुए जोर जोर हाय हाय करते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ने लगी, सूरज को अपनी मामी की बूर के अंदर हो रही हलचल साफ महसूस होने लगी, कैसे सुधिया की बूर की अंदरूनी दीवारें बार बार सिकुड़ और फैल रही थी, काफी देर तक सुधिया बदहवास सी सीत्कारते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ती रही।


सूरज तेज तेज धक्के लगते हुए सुधीया की बूर चोदे जा रहा था, वह बड़े प्यार से चोदते हुए अपनी मामी को दुलारने लगा,
इतना मजा आजतक जीवन में सुधियां को कभी नही आया था, चरमसुख के असीम आनंद में वो खो गई, अब भी उसके भांजे का लंड तेज तेज उसकी बूर को चोदे जा रहा था, कभी कभी वो बीच बीच में तेजी से सिस्कार उठती, बूर झड़ने के बाद बहुत ही चिकनी हो गयी थी, सूरज का लंड अपनी मामी के रस से पूरा सन गया था, सुधिया का बदन अब ढीला पड़ गया वो बस आंखें बंद किये हल्का हल्का सिसकते हुए चरमसुख के आनंद में डूबी हुई थी कि तभी सूरज भी जोर से सिसकारते हुए एक तेज जबरदस्त धक्का अपनी मामी की बूर में मारते हुए झड़ने लगा, धक्का इतना तेज था कि सुधिया जोर से चिहुँक पड़ी आह........ बेटा......... हाय

एक तेज मोटे गाढ़े वीर्य की पिचकारी उसके लंड से निकलकर सुधिया की बूर की गहराई में जाकर लगी तो सुधियां उस गरम गरम लावे को अपनी बूर की गहराई में महसूस कर गनगना गयी और तेजी से मचलकर सिसकारने लगी बड़े प्यार से उसने अपने भांजे को अपनी बाहों में कस लिया और उनके बालों को सहलाने लगी, प्यार से दुलारने लगी, सूरज का मोटा लंड तेज तेज झटके खाता हुआ वीर्य की मोटी मोटी धार छोड़ते हुए अपनी मामी की बूर को भरने लगा, अपनी मामी के बूर में उसका गाढ़ा गरम वीर्य भरने लगा,
गरम गरम सूरज का वीर्य सुधियां की बूर से निकलकर गांड की दरार में बहने लगा और नीचे घास के ढेर को भिगोने लगा, सूरज काफी देर तक हाँफते हुए अपनी मामी की बूर में झाड़ता रहा,
आज उसे एक गदरायी कमसिन मखमली बूर मिली थी और भी उसकी मामी की, सूरज सच में अपनी मामी की बूर चोद कर निहाल हो चुका था, सूरज और सुधिया ने असीम चरमसुख का आनंद लेते हुए एक दूसरे को कस के बाहों में भर लिया और बड़े प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे, और अपनी सांसों को काबू करते हुए एक दूसरे को बाहों में लिए लेटे रहे।


सूरज का लंड थोड़ा शिथिल हो गया था पर सुधिया की बूर के अंदर ही घुसा हुआ था, सुधिया अपने भांजे के शिथिल हो चुके लंड को महसूस कर मुस्कुरा उठी, उसको अपने भांजे के लंड पर बहुत प्यार आ रहा था, जैसे कोई छोटा बच्चा खा पीकर सो गया हो ठीक वैसे ही उसके भांजे का लंड उसकी बूर में पड़ा हुआ था।

दोनो की चुदाई में इतना समय गुजर चुका था की,
आसमान में शाम का अंधेरा छाने लग गया,
सुधियां अपने भांजे के चेहरे को अपने हांथों में थाम लेती है और बड़े प्यार उसके ओठ चूमते हुए बोलती है
ओ मेरे बेटे मेरे बलमा, मजा आया, अपनी मामी को चोदके।

सूरज - हां मेरी मामी, मेरी सजनी बहुत मजा आया, पर मन नही भरा अभी।

सुधियां - हाय मेरे राजा, मेरा बेटा जिस मामी से उसका भांजा का मन एक ही बार में भर जाए तो उस मामी का हुस्न किस काम का, हम्म।

सूरज - सच, तुम तो कयामत हो मामी, कयामत, तुमें मजा आया।

सुधियां - बहुत बेटे....बहुत..मुझे तो बहुत मजा आया अपने भांजे का मोटा लंड अपनी बूर को खिलाकर,
देखो न बेटा अभी भी मेरी बूर कैसे चुपके चुपके हौले हौले तुम्हारे लंड को चूम रही है,

जैसे छोटी बच्ची मुँह में लॉलीपॉप लिए सो जाती है वैसे ही देखो न मेरी बुरिया भी कैसे तेरा लंड मुँह में लिए लिए सो सी रही है।
सच बेटा मुझे बहुत मजा आया, ऐसा सुख मुझे आजतक नही मिला था, बेटा एक बात बोलूं

सूरज - बोल न मेरी रानी

सुधियां धीरे से कान में - बेटा आज मुझे पहली बार चरमसुख प्राप्त हुआ है

सूरज मामी को आश्चर्य से देखते हुए- क्या, सच में।

सुधिया - हाँ, बेटा

सूरज - मामाजी अभी तक तुमें चरमसुख नही दे पाये?

सुधिया - चरमसुख लुल्ली से नही मिलता बाबू, औरत को चरमसुख तो मिलता है.....

सूरज - बोल न, रुक क्यों गयी मेरी जान।

सुधिया - चरमसुख तो मिलता है भांजे मोटे से लंड से, और तेरा तो लंड भी नही है

सूरज आश्चर्य से- फिर, अगर ये लंड नही है तो क्या है मेरी मामी, बता न।

सुधियां - बेटा समझ जाओ न।

सूरज - नही समझ आ रहा, तूम ही बता दो।

सुधिया ने थोड़ा रुककर फिर अपने बेटे के कान में सिसकते हुए बोला- तुम्हारा तो लौड़ा है लौड़ा, क्योंकि जिस तरह आपने अपनी मामी की कमसिन बूर को चोदा है वो एक लौड़ा ही कर सकता है, ये किसी लुल्ली के बस के नही

सूरज अपनी मामी के मुँह से ये शब्द सुनकर अचंभित रह गया और जोश में उसने एक धक्का खींच के बूर में मारा तो सुधिया जोर से चिंहुँक पड़ी आआआआआआआहहहहहहहह!

सूरज - तुमें मेरा लंड इतना पसंद आया।

सुधियां - लंड नही बेटा लौड़ा......आह.... लौड़ा, बहुत मजेदार है मेरे भांजे का लौड़ा। मैं तो तेरी दिवानी हो गयी मेरे भांजे, तुम्हारी मामी तेरी दीवानी हो गयी और भांजे का लंड क्यों मामी को पसंद नही आएगा भला, कितना रोमांचक होता है भांजे का लंड......आआआआआहहहह

सूरज मामी के कान में- लंड नही लौड़ा, मेरी मामी लौड़ा, अब खुद ही भूल गई।

सुधिया - हाँ मेरे प्यारे सैयां, लौड़ा, तुम्हारा लौड़ा, डालोगे न हमेशा अपना लौड़ा मेरी बुर में बेटा, बोलो न, मुझे तरसाओगे तो नही इस मस्त लौड़े के लिए कभी।

सूरज - न मेरी मामी, मैं तो खुद तुम्हारी मखमली बूर के बिना नही रह सकता अब। कितनी रसभरी है मेरी मामी की बूर....आह


शाम के समय मौसम थोड़ा ठंडा होने की वजह से सुधियां को फिरसे पेशाब लगी, उसके भांजे का लंड उसकी बूर में समाया हुआ था ही,
वह बोली- बेटा, देखो शाम हो गई ही सब हमारा इंतजार कर रहे होगे अगर हम नही मिले तो हमे ढूंढते हुवे यहा पर भी आ सकते ही हमे चलाना चाहिए

सूरज- हाँ मेरी जान, हमे चलाना चाहिए वैसे भी विलास मामा दोपहर से मुझे ढूंढ कर परेशान हो गए होगे।

ओर सूरज ने अपना फौलाद हो चुका लंड सुधिया की बूर में से बाहर निकाला तो सुधिया आह करके सिसक उठी।
सुधिया - बेटा मुझे पेशाब आ रहा है

सूरज - तो पिला दो न, इसमें पूछना क्या मेरी जान

सुधिया चौंकते हुए- क्या, फिरसे तुम पेशाब पियोगे?

सूरज - हाँ, पिला दे तेरा मूत मामी

सुधिया - मेरा मूत पियोगे, अपनी मामी का

सूरज - हाँ, प्यास बहुत लगी है

सुधियां- बहुत प्यास लगी है मेरे बेटे को, ठीक ही बेटे अभी पिलाती हू।

सूरज- ठीक है हुज़ूर


सूरज शाम की हलकी सी रोशनी में देखने लगा, दोनों मामी भांजा पूरे नंगे थे,
सूरज सुधियां को देखता रह गया, सुधिया भी अपने भांजे को वासना की नज़रों से निहारती रही, एक बार शाम की हलकी रोशनी में दोनों ने जब एक दूसरे को पूर्ण नग्न देखा तो रहा नही गया और दोनों एक दूसरे की बाहों में कस कर लिपट गए और एक दूसरे के बदन को मस्ती में सहलाने लगे, कुछ देर बाद

सुधिया - बेटा जोर से पिशाब आ रहा है।

सूरज ये सुनते ही फट घास पर लेट गया और सुधिया शाम की हलकी रोशनी में कराहते है अपने बेटे के सीने पर से अपनी बूर उसके मुँह के सामने करके बैठ गयी,

हलकी की रोशनी में अपनी मामी की महकती बूर जिसको अभी कुछ देर पहले ही सूरज ने घच्च घच्च चोद चुका था, देखकर फिर मदहोश हो गया, उस बूर की छेद से अभी भी उसका वीर्य हल्का हल्का निकल रहा था, जो गवाही दे रहा था कि एक मामी अपने ही भांजे से अच्छे से चुदी है।

बूर देखते ही सूरज ने अपने दोनों हांथों को सुधियां के नितम्ब पर रखा और आगे को ठेलकर उसकी रसभरी बूर को मुँह में भर लिया,
सुधियां जोर से सिसक उठी और खुद भी उसने मचलते हुए अपने भांजे का सर पकड़कर अपनी बूर उनके मुँह में रगड़ने लगी, सूरज लप्प लप्प अपनी मामी की बूर को चाटने लगा तो एक दम से सुधियां को झुरझुरी महसूस हुई और उसका पेशाब निकल गया, आआआआआआआआहहहह...........दैय्या, बेटा........आआआआहहहहह, सुधियां की बूर की फैली हुई दोनों फांकों के बीच से गरम गरम महकता हुआ पेशाब सुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर की आवाज के साथ सूरज के पूरे मुँह को भिगोने लगा, पेशाब छोड़ती बूर को सूरज जीभ निकाल के पहले तो चाटने लगा, फिर बूर को मुँह में भरकर अपनी मामी का मूत पीने लगा, क्या महक थी मामी के पेशाब की और मूतते हुए सुधिया क्या लग रही थी,
दोनों मामी भांजे की आंखें मस्ती में बंद थी, सूरज लपा लप सुधिया का पेशाब कभी चाटता कभी पीता, सूरज का पूरा चेहरा, उसकी गर्दन और सीना सब सुधियां के पेशाब से भीग चुका था, सुधियां अपने पेशाब से अपने भांजे को भिगोते हुए उनको बड़ी मादकता से देखती भी जा रही थी, काफी हद तक सूरज सुधियां का पेशाब पी चुका था,
एकाएक सुधियां ने अपनी उंगली से कराहते हुए अपनी बूर की फाँकों को चीरा और पेशाब की धार छोड़ती फैली हुई बूर को एकदम से अपने भांजे के मुँह में भर दिया और बोली- लो बेटा अपनी मामी का पेशाब, अब खत्म होने वाला है जल्दी पूरा पी लो..

सूरज ने लप्प से अपनी मामी की बूर को मुँह में भरा और सारा मूत पी गया, पेशाब बन्द होने के बाद सुधिया ने अपनी बूर अपने बेटे के मुँह से बाहर खींची और एक पल के लिए उनके सारे भीगे हिस्से को कामुकता से देखने लगी और बोली- कैसा लगा मेरे बेटे

सूरज - मेरे पास शब्द नही हे मामी , ऐसा मजा आजतक नही आया था।

सुधियां उठकर अपने बेटे के ऊपर लेट गयी और बोली- अब मैं अपने प्यारे बेटे को ऐसे ऐसे मजे दूंगी की तुमरी जिंदगी बदल जाएगी

सूरज का लंड सुधिया की बूर पर फिरसे दस्तक देने लगा, सूरज अपने दोनों हाँथों से सुधियां की गांड को भी सहलाने लगा, सुधियां सिसकते हुए अपने भांजे के चेहरे और गर्दन पर लगे पेशाब को मस्ती में चाटने लगी तो सूरज भी मस्ती में कराहने लगा- आह मेरी जान मामी

सुधिया मस्ती में अपने भांजे को चूमती चाटती हुई नीचे की तरफ बढ़ने लगी, सूरज उसके बालों को सिसकते हुए सहलाने लगा, सुधियां अपने भांजे के दुबारा तन चुके लन्ड तक आयी और हलकी की रोशनी में अपने सूरज का खड़ा लन्ड निहारने लगी,
उसने उसको हाँथ से पकड़ा और चमड़ी को धीरे से उतारा तो उसकी आंखें अपने भांजे के मोटे सुपाड़े और उस पर पेशाब के छेद को देखकर मस्ती में भर गई, उसने अपने भांजे की तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोली- कितना प्यारा है बेटा ये, बहुत प्यारा है मेरे मर्द का लंड और ऐसा कहते हुए सुधियां अपने भांजे का लंड हौले हौले चूमने लगी, पहली बार लंड पर अपनी मामी के गरम होंठ महसूस कर सूरज जन्नत में खो गया, कितने गरम चुम्बन दे रही थी सुधियां उसके लंड पर, धीरे धीरे चूमने के बाद सुधियां जीभ निकाल कर अपने भांजे के लंड चाटने लगी, सूरज मस्ती में उसका सर पकड़े अपने लंड को हौले हौले मामी के मुँह में खुद भी ठेलने लगा, अपनी मामी को अपना लंड चुसवाने में कितना मजा आ रहा था।

सुधिया आंखें बंद किये अपने भांजे का लंड बड़ी लगन से चूसे जा रही थी और अपने मन में सिसकते हुए सोचे जा रही थी कि लंड अगर दमदार हो तो चूसने का मजा ही कुछ और है, कभी वो सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसती, कभी उसपर जीभ फिराने लगती, कभी तो पूरे लंड को जड़ तक मुँह में भरने की कोशिश करती पर न हो पाता, कभी दोनों आंड को मुँह में भरकर पीती, लंड पर लगे उसकी बूर का रस और वीर्य का मिश्रण उसने कब का चाट चाट के साफ कर दिया था,
कभी जीभ नुकीली बना के अपने भांजे के लंड के छेद पर गोल गोल फिराती जिससे सूरज झनझना के मचल जाता, सूरज खुद भी मामी का सर पकड़ कर अपना लन्ड उसके मुँह में अंदर बाहर कर रहा था और जोर जोर से कराहते जा रहा था- ओह.... मामी.....कितने प्यारे हैं तेरे होंठ, कितने नरम है......मेरी प्यारी मामी इतना मजा तो मुझे आजतक नही आया......ओह मेरी रानी.......मजा आ गया

सुधिया - आह.....बेटा क्या लंड है तुम्हारा.......मेरा तो जीवन सवर गया इसे पाकर....... मैं तो दीवानी हो गयी अब इसकी............इसके बिना अब मैं रह नही सकती।


जैसे ही सुधिया ने ये शब्द बोला सूरज ने अपना लंड मुंह से निकल कर सुधियां की मखमली रिसती बूर में अंदर तक एक ही बार में घुसेड़ दिया।

सुधिया जोर से कराह उठी और मस्ती में अपने भांजे से लिपट गयी।

सूरज - हाय....क्या नशा है तेरी बातों में मामी....सच

कुछ देर तक सूरज मामी की बूर में लन्ड पेले पड़ा रहा और सुधिया अपने भांजे की पीठ सहलाती रही।

सुधियां सिसकते हुए बोली- बेटा मजा आ रहा हे और

सुधियां ने एक चपत अपने भांजे की पीठ पर मारा तो सूरज ने जवाब में लन्ड बूर में से आधा निकाल के एक धक्का जोर से मारा, सुधियां गनगना गयी।

सुधीया - हाय बेटा.....धीरे से......ऊऊऊऊईईईईईई धीरे से बेटा


सूरज धीरे धीरे लंड बूर में अंदर बाहर करने लगा

सुधिया सिसकने लगी और बोली- थोड़ी भी देर के लिए लंड को बूर में घुसे हुए रोककर आराम नही करने देते ये मेरे राम.....बाबू

सूरज- क्या करूँ मेरी मामी, तेरी बूर है ही इतनी मक्ख़न की डालने के बाद रुका ही नही जाता।

सुधियां सिसकते हुए- बेटा

सूरज - हाँ मेरी रानी

सुधियां - अपने मामा के सामने अपनी मामी को चोदोगे?

सूरज - मामा के सामने.....मतलब

सूरज बराबर बूर को हौले हौले चोद रहा था और दोनों सिसकते भी जा रहे थे

सुधिया - तेरे मामा ने मुझे बाहोत तड़पाया हे सताया हे में परेशान हो गई हू उससे में बदला लेना ही मुझे तुम इसमें मेरी मदत करोगे
मेरा मतलब वो पास में हो या बगल में सोता हो और तुम अपनी मामी को चोदना........हाय कितना मजा आएगा.....कितना रोमांच होगा।

सूरज को ये सोचकर अत्यधिक रोमांच सा हुआ कि कैसा लगेगा एक ही बिस्तर पर या फिर सामने मेरा मामा होगा और मैं अपनी मामी को उसके पति के मौजूदगी में चोदुंगा।

रोमांच में आकर उसने अपने धक्के थोड़ा तेज ही कर दिया, सुधिया के दोनों पैर उठाकर अपनी कमर पर लपेट दिए और थोड़ा तेज तेज अपनी मामी की बूर में लंड पेलने लगा, सुधियां की तो मस्ती में आंखें बंद हो गयी, क्या मस्त लौड़ा था उसके भांजे का, कैसे बूर के अंदर बाहर हो रहा था। मस्ती में वो अपने भांजे की पीठ सहलाने लगी और उन्हें दुलारने लगी।

सूरज - हां मेरी जान, मजा तो बहुत आएगा पर ये होगा कैसे,

सुधियां - हाँ बेटा......आह..... उई....बेटा जरा धीरे धीरे हौले हौले चोदो....बात तो तुम सही कह रहे हो, तुम अगर घर आकर मुझे अपने पति के मोजुदगी में चोदोगे रोमांच से बदन कितना गनगना जाएगा,

सूरज - तेरी बूर के बिना मैं भी नही रह सकता मेरी जान,


सूरज जोश में आकर हुमच हुमच कर सुधियां की रसीली बूर चोदने लगा, दोनों इस कल्पना से कामुक हो जा रहे थे और घचा घच्च चुदाई भी कर रहे थे, सुधियां कभी कभी तेजी से सिसक देती तो कभी कभी वासना में अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदने लगती।

सूरज - हां मेरी मामी ये भी सही कहा तूने, तू ही किसी बहाने तुम मुझे घर बुला फिर तेरे पति के मोजुदगी तुझे चोदूंगा।

सुधिया - मेरे पति के सामने

सुधियां ने आंख नाचते हुए कहा

सूरज- हां तेरे पति के सामने ही तो मेरे मामा के सामने

सुधिया - पगलू मेरे पति तो सिर्फ और सर्फ तुम हो, वो तो बस नाम के हैं अब से

सूरज - अच्छा जी

सुधियां - हम्म

सूरज - मैं तो भांजा हू तेरा

सुधियां- पति भी हो और भांजा तो हो ही....

सूरज - हाँ ठीक मामी

सूरज तेज तेज जोश में धक्के मारने लगा, सुधियां मस्ती में गांड उठा उठा के चुदवाने लगी, तेज तेज सिसकियों की आवाज गूंजने लगी, दोनों पूर्ण रूप से नंगे थे। तेज तेज धक्कों से सुधियां का पूरा बदन हिल रहा था, जोर जोर से सिसकते हुए वो अपने भांजे को सहलाये और दुलारे जा रही थी और वासना में सराबोर होकर कामुक बातें बोले जा रही थी
हाँ बेटा ऐसे ही चोदो..........ऐसे
ही हुमच हुमच के तेज धक्के मारो.......मेरी बुर में............आह बेटा.............ऊऊऊऊईईईईईई........... थोड़ा किनारे से बूर की दीवारों से रगड़ते हुए अपना लंड अपनी इस मामी की बूर में पेलो.......रगड़ता हुआ बच्चेदानी तक जाता है तो जन्नत का मजा आ जाता है बेटे जी...........मेरे बेटे जी..........आह..... मेरे पति जी.........चोदो अपनी पत्नी को..........तरस मत खाओ...........बूर तो होती ही है जमके चोदने के लिए..............एक बार और चोद चोद के फाड़ दो मेरी बूर...........आआआआआहहहहहहह

सुधियां ऐसे ही बड़बड़ाये जा रही थी और सूरज तेज तेज धक्के मारे जा रहा था, एकाएक सूरज ने सुधियां की चूची को मुँह में भरा और पीने लगा, मस्ती में सुधियां और मचल गयी, पूरा बदन उसका वासना में एक बार फिर ऐंठने सा लगा, एकाएक बाहर कुछ लोगों की हल्की हल्की आवाजें आने लगी।

सुधियां तो पूरी मस्ती में थी पर सूरज के कान खड़े हो गए, अभी तक तो वो यही सोच रहे थे कि शाम हो रही है तो कौन नही आएगा,
तभी विलास मामा जोर जोर से सूरज को आवाज़ देने लगे
सूरज ने मन में कोसते हुए उठने की कोशिश की तो सुधियां ने उनकी कमर को थाम लिया और पूछा- बेटा क्या हुआ चोदो न, रुक क्यों गए।

सूरज - लागत हे मामा पास में ही हे हमे चलाना चाहिए बहोत देर हो गई हे।

सुधियां - पर मेरी बुरिया वो रोने लगेगी।
वहीं जिसके मुँह से आप निवाला छीन रहे हो, देखो न कैसे मजे से खा रही है।

सूरज आश्चर्य से- कौन?....किसके मुँह से निवाला छीन रहा हूँ, मैं समझा नही।

सुधियां - अरे मेरे बुध्धू राम........ये

ऐसा कहते हुए सुधिया ने बड़ी अदा से अपने भांजे का हाँथ पकड़ा और अपनी बूर पर ले गयी जो सूरज का पूरा लंड लीले हुए थी, और दोनों नीचे देखने लगे, लंड पूरा बूर में घुसा हुआ था।

सुधियां - किसी के मुँह से निवाला नही छीनते बेटा, देखो कैसे बेसुध होकर मस्ती में तुम्हारा मोटा लंड खा रही है मेरी ये बुरिया, अब आप निकाल लोगे तो ये रोने लगेगी और फिर चुप कराए चुप भी नही होगी,
अभी आधी मजधार में न छोड़ो इसे, न रुलाओ बेटा इसको, इसके हक़ का खा लेने दो इसे पूरा। अब निवाला मुँह में ले रखा है तो खा लेने दो पूरा अपनी इस मामी की बुरिया को।

इतना सुनते ही सूरज ने सर उठा के सुधिया की आंखों में देखा तो सुधिया खिलखिला के हंस भी दी और वासना भारी आंखों से विनती भी करने लगी की बेटा अभी चोदो रुको मत चाहे आग ही लग जाये पूरी दुनिया को।

सूरज ने बड़े प्यार से मामी के गाल को चूम लिया और बोला- बहुत प्यारी प्यारी बातें आती है मेरी मामी को, तेरी इन बातों का ही दीवाना हूँ मैं।

सुधिया सिसकते हुए- मामी नही पत्नी, आज से पत्नी हूँ न आपकी मैं।

सूरज - हां मेरी पत्नी, अब तो चाहे कुछ भी हो अपनी पत्नी को चोद के ही छोडूंगा।

और फिर सूरज ने सुधियां के ऊपर अच्छे से चढ़ते हुए अपने दोनों हांथों से उसके विशाल साइज की चौड़ी गांड को अपने हांथों से उठा लिया और अपना मोटा दहाड़ता लंड तेज तेज धक्कों के साथ पूरा पूरा बूर में डाल डाल कर कराहते हुए रसीली बूर चोदने लगा,
सुधिया की दुबारा सिसकिया निकलने लगी, कुछ ही देर में पूरी झाड़ियों में मादक सिसकियों से गूंज उठा, पूरी घास तेज धक्कों से बिखर गई, करीब 10 मिनट की लगातार मामी भांजे की धुँवाधार चुदाई से दोनों के बदन थरथराने लगे और दोनो ही एक बार फिर तेज तेज हाँफते हुए कस के एक दूसरे से लिपट गए और सीत्कारते हुए एक साथ झड़ने लगे, कुछ देर तक झड़ने के बाद दोनों शांत होकर एक दूसरे को चूमने सहलाने लगे फिर सूरज ने एक जोरदार चुम्बन सिधिया के होंठों पर लिया और बोला

अब जलादि से साड़ी पहनो मामी हमे जाना चाहिए नही तो मामा चिला चिला कर आसपास के लोगो को इकट्ठा कर देंगे और फिर कही हम पकड़े न जाए
सुधियां जलादि कच्छी ब्रा पहन कर के साड़ी पहन लेती
ओर सूरज भी धोती पहन कर तयार हो जाता है।
ओर दोनो चुपके से से झाड़ियों से निकल कर गेहूं के खेतो से होते हुवे बाहर निकलने लगाते है
तभी विलास की नजर उन दोनो पे पड़ती है
ओर दोनो भी विलास मामा को सामने देख कर डर जाते हे।

विलास - दोपहर से तू कहा था तू शाम हो गई फिर भी तेरा आता पता नही हे।ओर में तुझे कबसे आवाज दे रहा हु और सुधिया भाभी के साथ क्या कर रहा हे।

सूरज - डरते हुवे वो में वो मामी के खेत का बांध टूट गया था और सारा पानी पास के खेत में जा रहा था इस लिए में दोपहर से मामी की बांध लगाने में मदत कर रह था।

विलास - अच्छा हुवा की तुमने भाभीजी की मदत की,
पर बेटा आज बिजली जलादि चली जाने की वजह से खेतो की सिंचाई नहीं हो पाई अब हमे रात को खेत आ के पानी देना होगा क्योंकि कल दिन में बिजली नही हे।
भाभीजी आपके खेत की सिंचाई हुवी की नही

सुधिया - नही भाई साहब अब रात में ही देना पड़ेगा पर में अकेली ये सब कैसे करूंगी,

विलास - फिकर मत कीजिए में रात में अपना खेत संभाल लूंगा और सूरज आपकी मदत करेगा,

सुधीया - ठीक हे भाई साहब

विलास ठीक ही अब जल्दी घर चलते ही बहोत देर हो गई हे फिर हमे वापस खेतो में आना हे।

तो तीनों मिलके घर जी और निकल पड़ते हे।
विलास आगे आगे चल रहा था और सूरज और सुधियां पीछे पीछे
तभी सूरज ने मामी को कस के बाहों में भर लिया और बोला देख न मामी ये फिर से खड़ा हो गया हे अपने धोती में बने तंबू को दिखते हुवे

सुधियां - अब नही बेटा... आज रात खेत में जमके चोदना।
सूरज ये बात सुन के ज़ूम उठा की अपनी प्यारी मामी को आज रात भर खेत में चोदेगा।
थोड़ी देर में सभी अपने घर पहुंच जाते थे।
अब सूरज को रात का इंतजार था।
super hot update
 

Ek number

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भाग ९

रात को सभी ने खाना खाया और सब सोने के लिए कमरे में चले गए। सूरज को आज थकान के कारण जलादि नींद अयि ये थकान सुधीया मामी के चुदाई के कारण आइ थी।
सुबह सूरज और विलास दोनो हर रोज की तरह खेतो पे निकल गए। खेतो से गुजरते हुवे सूरज ने सुधियां मामी की खेतो में देखा सुधिया मामी कही नजर अति हे क्या पर सुधियां मामी उसे नजर नहीं आती।
विलास और सूरज खेत पहुंच कर काम करने लगे

सुधियां कल की बात को सपना समझ कर सुबह अपनी मस्ती में उबड़ खाबड़ रास्तों से खेतों की तरफ चली जा रही थी,,,, ( सुधियां का पति खेती में कुछ भी मदत नही करता था सारा खेतो का काम सुधियां अकेली ही देखती थी उसका बेटा पप्पू भी दोस्तो के साथ दिन भर आवारा गस्ति करते घुमाता था अपनी मां की बिलकुल भी मदत नही करता था )

इसलिए सुधियां ज्यादातर वक्त खेतों में हीं गुजरता था,,,,

कुछ देर बाद सुधियां खेतों में पहुंच चुकी थी जहां पर गेहूं गन्ने मकई की फसल लहरा रही थी।
सुधियां खेत के किनारे खड़ी होकर मुआयना कर रही थी चारों तरफ गेहूं मकई गन्ने दिख रहे थे।
सुधियां अपने खेतो में काम करने लगी।

दिन चढ़ चुका था गर्मी का मौसम था। ऐसे तेज धूप में हवाएं भी गर्म चल रही थी,,,,। धीरे धीरे सुधियां के माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी प्यास से उसका गला सूखने लगा,,,, उसे प्यास लगी थी इधर उधर नजर दौड़ाई तो कुछ ही दूरी उसके खेतो पर ट्यूबवेल मैसे पानी निकल रहा था जो कि खेतों में जा रहा था,,,। ट्यूबवेल के पाइप में से निकल रहे हैं पानी को देख कर सुधिया की प्यास और ज्यादा भड़कने लगी,,, वह अपनी जगह से उठी और ट्यूबेल की तरफ जाने लगी,, तेज धूप होने के कारण सुधियां,,, पल्लू को हल्के से दोनों हाथों से ऊपर की तरफ उठा कर जाने लगी,,, दोनों हाथ को ऊपर की तरह हल्कै से उठाकर जाने की वजह से सुधिया की चाल और ज्यादा मादक हो चुकी थी,,, हालांकि समय सुधिया पर किसी की नजर नहीं पड़ी थी लेकिन इस समय किसी की भी नजर उस पर पड़ जाती तो उसे स्वर्ग से उतरी हुई अ्प्सरा देखने को मिल जाती,,, बेहद ही कामोत्तेजना से भरपुर नजारा था। इस तरह से चलने की वजह से सुधिया की मद मस्त गोलाई लिए हुए नितंब कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आ रही थी,,, कुछ ही देर में सुधिया ट्यूबवेल के पास पहुंच गई और दोनों हाथ आगे की तरफ करके पानी पीने लगी,,, शीतल जल को ग्रहण करने से उसकी तष्णा शांत हो गई,,,

सुधियां कुछ देर वहीं रुक कर अपने चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मार कर अपने आप को तरोताजा करने का प्रयास करने लगी,,,,। पानी पीने के बाद..
सुधियां पास में ही पेड़ की छांव में बैठ गई

थोड़ी देर बाद सुधियां को बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह अपने आप पर बहुत ज्यादा संयम रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके लिए इस समय मोचना बेहद आवश्यक हो चुका था। क्योंकि ज्यादा देर तक वह अपनी पेशाब को रोक नहीं पा रही थी पेट में दर्द सा महसूस होने लगा था। सुधिया पेड़ के नीचे से उठी और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करते हुए अपने पेशाब को रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन कोई भी इंसान ज्यादा देर तक पेशाब को रोक नहीं सकता था इसलिए सुधियां को भी मुतना बेहद जरूरी था। उसे डर था कि खेतो से गुजरात हुवा कोई आदमी उस ना देख ले। इसलिए वह बड़े पेड़ के पास भी जंगली झाड़ियों के नीचे से होकर धीरे-धीरे पेशाब करने के लिए अंदर जाने लगी और एक जगह पर पहुंच कर वह इधर उधर नजरे दौरा कर देखने की कोशिश करने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उस को झाड़ियों में से दूसरा कोई नजर नहीं आ रहा था सुगंधा जहां पर खड़ी थी वहां पर कुछ ज्यादा ही झाड़ियां थी और वहां पर किसी की नजर पड़ने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी


इधर दोपहर को सूरज को बहोत जोरो की प्यास लगती थी सूरज खेतो में बने हेड पंप के पास पहुंचकर कर पानी पीने लगा जी भर के पानी पीने के बाद पानी से हाथ मुंह धो कर अपने आप को ठंडा करने की कोशिश करने लगा जब सूरज वहा से प्यास बुझा के खेतो में जाने लगा तभी उसकी आंखों के सामने से एक खरगोश का बच्चा भागता हुआ नजर आया और सूरज उसके पीछे पीछे जाने लगा सूरज उसे पकड़ना चाहता था उसके साथ खेलना चाहता था इसलिए जहां जहां खरगोश जा रहा था सूरज उसके पीछे पीछे चला जा रहा था।


सूरज खरगोश के पीछे पीछे भागता चला जा रहा था और तभी खरगोश उसकी आंखों के सामने एक घनी जंगली झाड़ियों के अंदर चला गया सूरज उस खरगोश को पकड़ लेना चाहता था इसलिए दबे पांव वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा उसके सामने घनी झाड़ियां थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था उसे मालूम था कि इसी झाड़ियों के अंदर खरगोश दुबक कर बैठा हुआ है इसलिए वह घनी झाड़ियों के करीब पहुंचकर धीरे धीरे पत्तों को हटाने लगा लेकिन उसे खरगोश नजर नहीं आ रहा था वह अपनी चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा लेकिन वहां खरगोश का नामोनिशान नहीं था वह निराश होने लगा वह समझ गया कि खरगोश भाग गया है और अब उसके हाथ में नहीं आने वाला लेकिन फिर भी अपने मन में चल रही इस उथल-पुथल को अंतिम रूप देते हुए वह अपने मन की तसल्ली के लिए अपना एक कदम आगे बढ़ाकर घनी झाड़ियों को अपने दोनों हाथों से हटाकर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन फिर भी परिणाम शून्य ही आया वह उदास हो गया वह अपने दोनों हाथों को झाड़ियों पर से हटाने ही वाला था कि उसकी नजर थोड़ी दूर की घनी झाड़ियों के करीब गई और वहां का खरगोश नजर आया सूरज को देख कर झाड़ियों के पास बिल था उसमे जा के छुप गया। सूरज धीरे से रेंगता हुवा घनी झाड़ियों के पास जा के खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार करने लगा।

इधर सुधिया
का पेशाब की तीव्रता उसके पेट में ऐठन दे रही थी सुधिया धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी यह नजारा बेहद ही कामुकता से भरा हुआ था लेकिन इस नजारे को देखने वाला वहां कोई नहीं था धीरे-धीरे सुधिया पूरी तरह से अपनी कमर तक अपनी साड़ी को उठा दी थी उसकी नंगी चिकनी मोटी मोटी जांगे पीली धूप में स्वर्ण की तरह चमक रही थी बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ यह नजारा देखने वाला वहां कोई नहीं था और वैसे भी सुधियां यही चाहती थी कि कोई उसे इस अवस्था में ना देख ले सुधिया साड़ी को अपनी कमर तक उठा कर एक हाथ से अपनी लाल रंग की कच्छी को नीचे की तरफ सरकाने लगी धीरे धीरे सुधिया अपनी पैंटी को अपनी मोटी चिकनी जांघों तक नीचे कर दी और आंखे बंद कर के तुरंत नीचे बैठ गई मुतने के लिए। सुधिया की बुर फैल कर खूब मोटी धार निकाल कर मुतना शुरू कर दिया मूत की धार सीधे झाड़ियों के ऊपर से दूसरी तरफ गिरने लगी जहापारी सूरज नीचे लेटा हुवा खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार कर रहा था।
जैसे ही सूरज के ऊपर सुधियां की मूत की धार गिरी सूरज चौक गया की ये बिन बादल बरसात केसे होने लगी।
इस लिए सूरज रेंगता हुवा थोडासा आगे गया और झाड़ीयो को हटा के देखने लगा और सामने का नजारा नजारा देखकर एकदम सन्न रह गया।
सूरज को एक बार फिर से अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मामी
सुधिया को बहुत जोरों से पेशाब लगी कर रही थी। जिससे सूरज का मुंह खुल गया और बूर से निकलती हुवी पेशाब की धार सीधे सूरज के मुंह में चली गई।
जैसे ही सूरज के मुंह में पेशाब की धार गिरी सूरज का गला फिर से सूखने लगा थोड़ी देर पहले हैंडपंप पर के पानी से अपनी प्यास बुझाई थी लेकिन सुधिया की बूर की मूत की धार ने उसकी प्यास बढ़ा दी थी। ओर सूरज बूर से निकलती हुवी मूत की धार को पीने लगा।
सूरज को अपनी किस्मत पर नाज होने लगा क्योंकि कुछ दिनों से उसकी किस्मत उसके पक्ष में चल रही था

इस समय सूरज की आंखों के सामने उसकी सुधिया मामी की गुलाबी बूर थी जो तेजी से पानी छोड़ रही थी। जिसे सुधिया आंखे बंद किए हल्के से उठाए हुए थी और सुधियां को इस तरह देख कर पलभर में ही उसका लंड धोती के अंदर तन कर लोहे के रोड की तरह हो गया था।

अब सूरज खरगोश के बिल को कब का भूल चुका था अब उसके सामने एक नया बिल था जो लगातार मूत की धार उसके मुंह में छोड़ रहा था और धोती में उसका फन फनता हुवा साप उस बिल में घुसाने को बेताब था।

सूरज लेटे हुवे अपने हाथों से लंड को मसलने लगा था सुधियां की गुलाबी बूर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी जिसकी वजह से उसमें से एक सीटी सी बजने लगी थी और इस समय सुधियां की बुर से निकल रही सीटी की आवाज सूरज के लिए किसी बांसुरी के मधुर धुन से कम नहीं थी सूरज उस मादकता से भरे नजारे और बुर से आ रही मूत की धार को पी रहा था।
सूरज को ऐसा लग रहा था की मानो की सुधियां मामी के बूर से निकलता हुवे मूत की धार कभी बंद ना हो और ऐसे ही चलती रहे।
सूरज उस मधुर धुन में खोने लगा

सुधिया आंखे बंद किए पूरी तरह से निश्चिंत थी कि उसे इस समय पेशाब करते हुए कोई नहीं देख रहा है लेकिन इस बात से अनजान थी कि उसका ही भांजा झाड़ियों के नीचे लेटा हुवा उसके बूर से निकलती पेशाब को पी रहा है।
थोड़ी देर में आंखे बंद किए सुधियां ने पेशाब कर ली लेकिन उठते हुवे अपनी गुलाबी पुर की गुलाबी पतियों में से पेशाब की बूंद को गिराते हुए हल्के हल्के अपने नितंबों को झटकने लगी।
लेकिन सुधियां की यह हरकत बेहद ही कामुकता से भरी हुई थी सूरज खुद अपनी मामी की इस हरकत को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया था कल की चुदाई के बाद का लंड बार बार खड़ा होने लगा था।
सूरज को अब रहा नहीं गया

जैसे ही सुधिया पेशाब कर के जैसे ही खड़ी होने वाली थी
तभी सूरज ने आगे बढ़ते
अपना मूह आगे कर दिया, और सुधिया की बूर से लगा कर उसकी चूत को अपने मूह मे भर लिया,
जिससे सुधियां के शरीर में कम्पन या जाता है वह डर जाति हे की नीचे क्या चीज है वह देखने के लिए नीचे झुकी नीचे का नजारा देख कर सुधिया दंग रह जाती हे की कोई लड़का अपना मुंह बूर से लगाए हुवे चूस रहा था।
सुधियां डरते हुवे कोन हो तुम...?
सूरज अपना मुंह बूर से थोड़ा पीछे हटाके के बोलता ही में हु मामी सूरज आपका भांजा और इतना कहके फिरसे
सुधिया की बूर को अपने मुंह में भर के जोर जोर से चूसने लगा।


सुधिया- बेटा तू ये क्या कर रहा है यह गंदी जगह ही इसे मत चाट मुझे छोड़ से में तेरी मामी हू कोई हमे देख लेगा

उसकी बातो कोई भी का असर अब सूरज पर नही हो रहा था सूरज अपनी ही मस्ती में जोर जोर से बूर का चाटने लगा


सूरज- सूरज लंबी लंबी जीभ निकाल कर सुधिया की बुर को खूब कस कर दबोचते हुए चाटने लगता है, सुधिया की चूत एक दम मस्त हो जाती है

सुधियां को भी अब मजा आने लगा था पाहिली बार उसकी बूर कोई चूस रहा था।

सूरज सुधिया की चूत को खूब ज़ोर से अपने मूह मे दबा कर चूसने लगता है,

अब सुधिया अपनी जाँघो को और फैला देती हे और उसकी चूत को सूरज के मुंह में दबाने लगती है।

सूरज पागलो की तरह उसकी चूत को चूसने लगता है और सुधिया उसके सर को पकड़ कर खूब ज़ोर से अपनी चूत से
दबा लेती है,

सूरज किसी पागल कुत्ते की तरह सुधिया की पूरी बूर खोल खोल कर उसका रस चाटने और चूसने लगता है और

सुधिया अपनी चूत खूब कस कस कर सूरज के मूह पर दबा दबा कर रगड़ने लगती है,


सुधिया- आह सीईईईई कितना ज़ोर से चाट रहा है बेटे, ज़रा आराम से चाट आह आहह आह आ सीईईईईईईईई ओह सूरज...


सुधिया के पैर अब थरथराने लगे और सुधिया नीचे जमीन पर गिर गई
अब सुधियां अपने पैरों को हवा में जितना हो सके फैलाते हुए अपनी कसी कसी मांसल जाँघों को खुलकर अपने सूरज के लिए खोल दिया, जिससे उनकी बूर उभरकर सूरज के मुंह के सामने आ गयी और दोनों फांकें खुलकर फैल गयी, हल्के धूप कि रोशनी में सूरज अपनी मामी की फैली हुई बूर को देखकर और भी पागल हो गया और उसने अपनी लंबी सी जीभ निकाली, फिर जीभ को बूर के नीचे अंतिम छोर पे गांड की छेद के पास लगाया और सर्रर्रर्रर्रर से पूरी बूर को चाटता हुआ नीचे से एकदम ऊपर तक आया, सूरज के ऐसा करने से सुधिया फिरसे बौखला गयी और मदहोशी में अपनी आंखें बंद करके अपने होंठों को दांतों से काटते हुए बड़ी जोर से सिसकी और आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई.......... अम्मामामामामा......सूरजबेटा.... ऐसे बोलते हुए
पूरे बदन को धनुष की तरह ऊपर को मोड़ती चली गयी, उसकी विशाल चूचियाँ तनकर ऊपर को उठ चुकी थी और निप्पल तो इतने सख्त हो गए थे कि वो खुद ही उन्हें हल्का हल्का मसल रही थी।

बूर की पेशाब और काम रस की गंध से सूरज पागल हो चुका था, उसने इसी तरह कई बार पूरी की पूरी बूर को नीचे से लेकर ऊपर की तरफ विपरीत दिशा में लप्प लप्प करके चाटा, जब सूरज बूर के ऊपरी हिस्से पर पहुचता तो बूर के ऊपर बालों में अपनी जीभ फिराता और फिर जीभ को फैलाके गांड की छेद के पास रखता और फिर सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर से लपलपाते हुए पुरी बूर पर जीभ फिराते हुए ऊपर की ओर आता और कभी तो वो ऊपर आकर बूर के ऊपर घने बालों पर जीभ फिराता कभी जहां से दरार शुरू होती है वहां पर जीभ को नुकीली बना कर दरार में डुबोता और भगनासे को जी भरकर छेड़ता, फिर बूर के दाने के किनारे किनारे जीभ को गोल गोल घूमता।

सुधिया की पूरी बूर सूरज के थूक से गीली हो चुकी थी, उसकी बूर से निकलता काम रस सूरज बराबर अपनी जीभ से चाट ले रहा था, पूरी झाड़ियों में हल्की हल्की चप्प चप्प की आवाज के साथ दोनों मामी भांजे की सिसकियां गूंजने लगी।

सूरज ने फिर एक बार अपनी जीभ को नीचे गांड के छेद के पास लगाया और इस बार उसने जीभ को नुकीला बनाते हुए जीभ को अपनी मामी की बूर की दरार में नीचे की तरफ डुबोया और दरार में ही डुबोये डुबोये नुकीली जीभ को नीचे से खींचते हुए ऊपर तक लाया, पहले तो एक बार जीभ मामी की बूर के छेद में घुसने को हुई पर फिर फिसलकर ऊपर चल पड़ी और बूर के दाने से जा टकराई, फिर सूरज ने वहां ठहरकर बूर के दाने को लप्प लप्प करके कई बार चाटा।

सुधिया के बदन की एक एक नस आनंद की तरंगों से गनगना उठी, बड़ी ही तेज तेज उसके मुँह से अब सिसकियां निकल रही थी मानो अब लाज, संकोच और डर (की कोई सुन लेगा) जैसे हवा हो चुका था, अपने पैरों को मोड़कर उसने सूरज की पीठ पर रख लिया था,

गनगना कर कभी वो अपने सूरज को पैरों से जकड़ लेती कभी ढीला छोड़ देती। बेतहासा कभी अपना सर दाएं बाएं पटकने लगती, कभी अपने हांथों से चूचीयों को कस कस के मीजती, सुधिया मस्ती में नीचे की तरफ नही देख रही थी, उसकी आंखें अत्यंत नशे में बंद थी, कभी थोड़ी खुलती भी तो वो हल्का सा आसमान को देखती।

उनकी सांसे बहुत तेज ऊपर नीचे हो रही थी, लगातार उसके सूरज उसकी बूर को एक अभ्यस्त खिलाड़ी की भांति चाटे जा रहे थे, जीवन में पहली किसी मर्द की जीभ उसकी बूर पर लगी थी और वो भी खुद उसके भांजे की, आज पहली बार वो सूरज से अपनी बूर चटवा रही थी, इतना परम सुख उसे कभी नही मिला..
सूरज की मर्दाना जीभ की छुअन से सुधीया नशे में कहीं खो गयी थी।

झाड़ियों में से बूर चाटने की चप्प चप्प आवाज सिसकियों के साथ गूंज रही थी। एकएक सूरज को कुछ कमी महसूस हुई वो और ज्यादा गहराई से अपनी मामी बूर को खाना चाहता था, उसने मामी के बूर से मुँह हटाया तो उसके होंठों और मामी की बूर की फाँकों के बीच लिसलिसे कामरस और थूक के मिश्रण से दो तीन तार बन गए, सूरज ने बड़ी मादकता से उसे चाट लिया और उठने लगा।

उसने दहाड़ते हुए अपनी दो उंगलियों से अपनी मामी की बूर की फांकों को अच्छे से चीरा, एक तो जांघे फैलने से बूर पहले ही खुली हुई थी ऊपर से सूरज ने उंगलियों से फांकों को और चीर दिया जिससे बूर का लाल लाल छेद और बूर का दाना धूप की रोशनी में चमक उठा, सूरज लपकते हुए बूर पर बेकाबू होकर टूट पड़ा और जीभ से बूर के लाल लाल कमसिन कसे हुए छोटे से छेद को बेताहाशा चाटने लगा।

सुधियां का बदन अचानक ही बहुत तेजी से थरथराया और सुधिया ने
आ...हा.. आहा... ओ हो... ऊ महा....
कहते हुए बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज को सिसकते हुए दबाया।

सूरज लप्प लप्प जीभ से अपनी मामी की बूर के छेद को चाटे जा रहा था, सुधिया फिर से तड़प तड़प कर अपना सर दाएं बाएं पटकती, पूरा बदन ऐंठती, गनगना जाती, अपनी मुठ्ठियों को कस कस के भीचती, तो कभी अपने स्तन भींच लेती, अपने पैरों को उसने फिर से अपने सूरज की पीठ पर लपेट दिया और जब जब उसका बदन थरथराता वो अपने पैरों से अपने बाबू को जकड़ लेती।

सूरज ने थोड़ी देर अपनी मामी की बूर के छेद को चाटा फिर अपनी जीभ को नुकीला किया और बूर के नरम नरम से लाल लाल छेद के मुहाने पर गोल गोल घुमाने लगा, सुधिया अब जोर जोर से काफी तेज तेज छटपटाने और सिसकने लगी, उसे क्या पता था कि उसके सूरज बूर के इतने प्यासे हैं, वो बूर के इतने अच्छे खिलाड़ी हैं, वो बूर चाटने में इतने माहिर है, ऐसा सुख तो उसके पति ने कभी सपने में भी नही दिया, उसे पता लग चुका था कि उसके सूरज अपनी मामी की बूर के कितने भूखे हैं।

झाड़ियों में काफी तेज तेज सिसकारी गूंजने लगी।
सूरज ने एक बार फिर से पूरी बूर को नीचे से ऊपर की ओर अपनी जीभ से लपलपा के चाटा, सूरज का अब इरादा था अपनी जीभ अपनी मामी के बूर की छेद में डालने का पर इतने भर से ही सुधियां अब काफी त्राहि त्राहि करने लगी, उसके मुँह से अब थोड़ी ज्यादा जोर से
आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई..........अम्मामामामामा..................सूरज................हाहाहाहाहायययययय..............आआआआआआहहहहहह......
सिसकते हुए निकलने लगा।


उसकी बुर के अंदर बाहर करते हुए अपनी जीभ को उसकी बुर के बीचो बीच रखकर चाटते हुए उसे मजा देने लगा सूरज की हरकत की वजह से सुधियां के मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फिर से फूटने लगी,,, सुधिया की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,, उसका संपूर्ण वजुद कांपने लगा और देखते ही देखते,,, सुधियां जोर से सिसकारी लेते हुए झड़ने लगी,,,,, उसकी गुलाबी बुर के छेद से,, मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी,,,, लेकिन सूरज ने उस मदनरस की एक भी बूंद को जाया नहीं देना चाहता था,,, इसलिए अपनी जीभ लगाकर लपालप उसे पीना शुरू कर दिया,,,सिसकारी लेती हुई सुधिया सूरज की हरकत देखकर एकदम से सिहर उठी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक मर्द औरत की बुर से निकला हुआ उसका नमकीन पानी इस कदर चाट चाट कर अपनी गले के नीचे उतार लेता है,,,,, सुधिया झाड़ चुकी थी सुधिया हेरान भी थी कि,,, बिना बुर में लंड डाले उसकी बुर इतना पानी छोड़ रही थी,,,।
लेकिन उसे इस तरह से पानी छोड़ते हुए बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,, सुधियां कुछ देर तक उसी तरह से जमीन के ढेर हुइ।

अब सुधियां काफी गरम हो गई उसकी बूर अब लंड मांग रही थी।
सुधिया ने सिसकते हुए सूरज से कहा- बेटा, अपना लंड मोटा सा लंड, एक बार अपनी मामी की पनियायी बूर में गूसा दो, बस एक बार हल्का गूसा दो


मामी ने इस अदा से निवेदन किया कि सूरज अपनी मामी की अदा पर कायल ही हो गया।

सूरज - आआआआआहहहहहह......मामी, तूम अपने आप ही लंड खोलकर बूर में गूसा दो मेरी रानी, डुब लो जितना तेरा मन करे, ये तो तेरी ही अमानत है मामी।

इतना कहकर सूरज अपने दोनों हाँथ मामी की कमर के अगल बगल टिकाकर मामी के ऊपर झुक सा गया और अपनी मामी की आँखों में देखने लगा दोनों मुस्कुरा दिए और कई बार एक दूसरे के होंठों को चूमा।

सुधियां ने अपने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा जो अभी भी उसकी टांगो में फसा हुआ था और दूसरे हाँथ से उसने अपने भांजे के लोहे के समान हो चुके सख्त लंड को धोती के ऊपर से पकड़ लिया, ९ इंच लंबे और ४ इंच मोटे विशाल लंड को पकड़कर सुधिया गनगना गयी, वासना की मस्ती उसके नसों में दौड़ गयी, कितना बड़ा लन्ड था सूरज का, उसके भांजे का, उसपर वो उभरी हुई नसें, सुधियां की मस्ती में आआआआहहहह निकल गयी।
( कल चुदाई के दौरान सुधियां ने सूरज के लंड को बूर में महसूस किया था मगर हात से छुआ नहीं था )

सुधियां - ओह बेटा कितना सख्त हो रखा है तुमारा लंड, कितना मोटा है ये.......हाय........ कितना लंबा है.......ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़


सूरज- हाँ मेरी मामी ये सिर्फ और सिर्फ अब आपका है।


सुधिया ने कुछ देर पूरे लन्ड को आँहें भरते हुए सहलाया फिर दूसरे हाँथ से कच्छी को छोड़कर हाँथ को पीछे कमर पर ले गयी और धोती को कमर पर से ढीला किया, सूरज ने अपनी मामी की आंखों में देखते हुए अपनी धोती को खोलने में मदद की, धोती काफी हद तक ढीली हो गयी थी सूरज ने एक हाँथ से धोती खोलकर बगल रख दी, नीचे से वो पूरा नंगा हो गया ऊपर बनियान पहनी हुई थी, अपनी मामी के ऊपर वो दुबारा झुक गया और उसकी आँखों में देखते हुए उसे चूम लिया,
सुधिया सिसकते हुए अपने भांजे के निचले नग्न शरीर पर हाँथ फेरने लगी, उसने जाँघों को छूते हुए सूरज के लन्ड के ऊपर के घने बालों में हाँथ फेरा और फिर लंड को पकड़कर कराहते हुए सहलाने लगी,
सुधियालंड को मुट्ठी में पकड़कर पूरा पूरा सहलाने लगी, सिसकते हुए सहलाते सहलाते वो नीचे के दोनों बड़े बड़े आंड को भी हथेली में भरकर बड़े प्यार से दुलारने लगी और सहलाने लगी,
अपनी मामी की नरम मुलायम हांथों की छुअन से सूरज की नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने सिसकते हुए अपने एक हाँथ से अपनी कच्छी को दुबारा साइड किया और दूसरे हाँथ से लंड को सहलाते हुए बड़े प्यार से उसकी आगे की चमड़ी को पीछे की तरफ खींचकर खोला, दो बार में उसने लन्ड की चमड़ी को उतारा, खुद ही तेजी से ऐसा करते हुए जोश में सिसक पड़ी, क्योंकि एक मामी मां के लिए अपने ही बेटे समान भांजे की लंड की चमड़ी खोलना बहुत ही वासना भरा होता है


पहली बार में तो उसने चमड़ी को सिसकते हुए खाली फूले हुए सुपाड़े तक ही उतारा और चिकने सुपाड़े पर बड़े प्यार से उंगलिया फेरते हुए कराहने लगी मानो उसे नशा चढ़ गया हो, दोनों मामी भांजा एक दूसरे की आंखों में नशे में देख रहे थे, सूरज मामी की कमर के दोनों तरफ अपना हाथ टिकाए उसके ऊपर झुका हुआ था और सुधियां अपने दोनों पैर फैलाये साड़ी को कमर तक उठाये एक हाथ से अपनी कच्ची को साइड खींचें हुए, दूसरे हाँथ से अपने सूरज का लंड सहलाते हुए उसकी आगे की चमड़ी को पीछे को खींचकर उतार रही थी।


सुधिया के मुलायम हाँथ अपने चिकने संवेदनशील सुपाड़े पर लगते ही सूरज आँहें भरने लगा, अपने भांजे को मस्त होते देख सुधियां और प्यार से उनके सुपाड़े को सहलाने और दबाने लगी, अपने अंगूठे से सुधियांने अपने भांजे के लंड के पेशाब के छेद को बाद प्यार से रगड़ा और सहलाया, उसकी भी मस्ती में बार बार आंखें बंद हो जा रही थी, बार बार सिरह जा रही थी वो, बदन उसका गनगना जा रहा था मस्ती में, फिर उसने अपने भांजे के लंड की चमड़ी को खींचकर पूरा पीछे कर दिया और अच्छे से अपने भांजे के पूरे लंड को अपने मुलायम हांथों से सहलाने लगी।


फिर काफी देर सहलाने के बाद सुधिया ने एक हाँथ से अपनी कच्छी को साइड किया और अपने भांजे के लंड को अपनी बूर की रसीली फांकों के बीच रख दिया, जैसे ही सुधियां ने बूर पे लंड रखा दोनों मामी भांजा मस्ती में जोर से सीत्कार उठे-


सुधिया-आआआआआआआआआआहहहहहहहहहह...........ईईईईईईईशशशशशशशशश..........हाहाहाहाहाहाहाहाहायययययय........बेटा....…...आआआआआआहहहहह


सूरज - आआआआआआहहहहह.......मेरी मामी.....कितनी नरम है तेरी बूबूबूबूररररर..........ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़........मजा आ गया।


आज जीवन में पहली बार सूरज के लंड को, इतना असीम आनंद मिलेगा कभी सपने में भी नही सोचा था, सुधिया कराहते हुए अपने भांजे के लंड का सुपाड़ा अपनी दहकती बूर की फांक में रगड़ती जा रही थी, दोनों के नितम्ब हल्का हल्का मस्ती में थिरकने लगे, सूरज हल्का हल्का लंड को बूर की फांक में खुद रगड़ने लगा, पूरे बदन में चिंगारियां सी दौड़ने लगी, बूर से निकलता लिसलिसा रस लंड के आगे के चिकने भाग को अच्छे से भिगोने लगा, सुधिया ने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा हुआ था पर अब उसने उसको छोड़कर वो हाँथ अपने भांजे के हल्के हल्के धक्का लगाते चूतड़ पर रख कर कराहते हुए सहलाने लगी, बीच बीच में हाँथ से उनके चूतड़ को अपनी बूर की तरफ मचलते हुए दबा देती, दहाड़ते लंड का मोटा सा सुपाड़ा मखमली बूर की फाँकों में ऊपर से नीचे तक रगड़ खाने लगा, सूरज को इतना मजा आया कि वह धीरे धीरे अपनी मामी के ऊपर लेटता चला गया, सुधिया अपने दोनों हांथों को वहां से हटा कर बड़े प्यार से अपने भांजे को अपनी बाहों में भरकर मस्ती में दुलारने लगी, अत्यंत नशे में दोनों की आंखें बंद थी।


सूरज अपनी मामी के बाहों में समाए, उसपर लेटे हुए अपनी आंखें बंद किये अपने लंड को बूर की फाँकों में रगड़ते हुए नरम नरम फांकों का आनंद लेने लगा। सुधिया हल्का हल्का मस्ती में आंखें बंद किये आआआहहहह ह......आआआहहहहह करने लगी।


सुधियां ने बड़ी मुश्किल से अपनी नशीली आंखें खोली उसका का सारा ध्यान सिर्फ अपने भांजे के मोटे दहकते लन्ड पर था जो कि लगातार धीरे धीरे उसकी सनसनाती बूर की रसीली फांकों में नीचे से ऊपर तक बार बार लगातार रगड़ रहा था, वो मुलायम चिकना सुपाड़ा बार बार जब सुधियां की बूर के फांकों के बीच दाने से टकराता तो सुधियां का बदन जोर से झनझना जाता, पूरे बदन में सनसनाहट होने लगती।


सुधिया ने कराहते हुए अपने दोनों पैर मोड़कर अच्छे से फैला रखे थे, सूरज एक लय में अपने मोटे लंड को अपनी मामी की बूर की फांकों में रगड़ रहा था, सुधिया भी मादक सिसकारियां लेते हुए धीरे धीरे अपनी गांड को अपने भांजे के लंड से ताल से ताल मिला के उठाने लगी और अपनी बूर को नीचे से उठा उठा के लंड से रगड़ने लगी।


सुधियां की कच्छी का किनारा बार बार सूरज के लंड से रगड़ रहा था तो

सूरज ने धीरे से मामी के कान में बोला - मेरी प्यारी मामी


नीलम - हाँ मेरे प्यारे बेटे


सूरज - अपनी कच्छी पूरा उतार न, तब अच्छे से मजा आएगा।


सुधिया - हाँ बेटा तुम उठो जरा।


सूरज मामी के ऊपर से उठ जाता है उसका लंड भयंकर जोश में झटके लिए जा रहा, ९ इंच लंबा लंड पूरा खुला हुआ था, लोहे के समान सख्त और खड़ा था, सुधिया ने कराहते हुए अपनी छोटी सी कच्छी निकाल फेंकी और जल्दी से अपनी साड़ी भी खोल कर झाड़ियों में बगल में रख दी, अब सुधिया के बदन पर सिर्फ ब्लॉउज रह गया था नीचे से वो बिल्कुल नंगी हो गयी थी।


अपनी मामी को इस तरह अपने भांजे के सामने आज पूरी नंगी होते देख सूरज वासना में कराह उठा,
सूरज अपनी मामी का पुर्णतया नग्न निचला हिस्सा देखकर बौरा गया, सुधियां ने कच्छी और साड़ी उतारकर फिर से अपनी दोनों जांघें अच्छे से फैला कर अपनी बूर को अपने भांजे के सामने परोस दिया, सूरज एक पल तो मामी की मादक सुंदरता को देखता रह गया, फिर एकएक कराहते हुए उसने अपनी शादीशुदा मामी के पैरों को एड़ी और तलवों से चाटना शुरू किया, सुधियां तेजी से सिसक उठी,
दोनों पैरों की एड़ी, तलवों को अच्छे से चूमता चाटता वह आगे बढ़ा, घुटनों को चूमता हुआ वह जांघ तक पहुँचा, दोनों जाँघों को उसने काफी देर तक अच्छे से खाली चूमा ही नही बल्कि जीभ निकाल के किसी मलाई की तरह अच्छे से चाटा, सुधिया वासना से गनगना गयी, सूरज अपनी मामी की अंदरूनी जांघों को अच्छे से चूम और चाट रहा था, सुधिया रह रह कर झनझना जा रही थी।


सूरज जांघों को चाटते हुए वह महकती बूर की तरफ बढ़ा, बूर फिरसे लगातार लिसलिसा काम रस बहा रही थी,
सूरज ने एक बार फिर बूर को मुँह में भर लिया और एक जोरदार रसीला चुम्बन अपनी मामी की बूर पर लिया, सुधिया जोर से सिसकारते हुए चिंहुककर उछल सी पड़ी, बदन उसका पूरी तरह गनगना गया, कराहते हुए सुधियां ने खुद ही एक हाँथ से अपनी महकती पनियायी बूर को चीर दिया और सूरज मस्ती में आंखें बंद किये अपनी मामी की बूर को लपा लप्प चाटने लगा, सुधियां हाय हाय करने लगी, सुधिया कभी अपनी बूर की फांकों को फैलाती तो कभी अपने भांजे के गाल को सहलाती, कभी जोश में झनझनाते हुए अपने भांजे की पीठ पर कस के नाखून गड़ा देती, सुधिया के ऐसा करने से सूरज को और भी जोश चढ़ जा रहा था और वो और तेज तेज बूर को चाटे जा रहा था।


सुधियां जब अपनी उंगली से बूर की फांक को फैलाती तो सूरज तेज तेज बूर की लाल लाल फांक में जीभ घुमा घुमा के चाटता, कभी फूले हुए बूर के दाने को जीभ से छेड़ता कभी मुँह में भरकर चूसता, फिर कभी मामी की बूर के छेद में जीभ डालता और जीभ को अंदर डाल के हल्का हल्का गोल गोल घुमाता।


सुधिया वासना में पगला सी गयी, जोर जोर से सिसकने लगी, कराहने लगी, अपने भांजे के सर को कस कस के अपनी रसभरी बूर पर दबाने लगी, अपनी गांड को उछाल उछाल के अपनी बूर चटवाने लगी,


ओओओओहहहह..............बेटा...............हाय मेरी बूर...............कितना अच्छा लग रहा है बेटा................हाय तुमारी जीभ................ऊऊफ्फफ................ चाटो ऐसे ही बेटा...................मेरी बरसों की प्यास बुझा दो....................आआआआआआहहहहह................मेरे बेटे..........मेरे राजा.............मेरी बूर की प्यास सिर्फ तुमसे बुझेगी....................... तुमसे.....................ऐसे ही बूर को खोल खोल के चाटो मेरे बेटे........................अपनी मामी की बूर को चाट चाट के मुझे मस्त कर दो...................ऊऊऊऊईईईईईई अम्मा..................... कितना मजा आ रहा है..............ऊऊऊऊऊफ़्फ़फ़फ़


काफी देर तक यही सब चलता रहा और जब सुधियां से नही रहा गया तो उसने अपने भांजे को अपने ऊपर खींच लिया, सूरज अपनी मामी के ऊपर चढ़ गया, लन्ड एक बार फिर जाँघों के आस पास टकराता हुआ बूर पर आके लगा, लंड पहले से ही खुला हुआ था सुधिया ने कराहते हुए लंड को पकड़ लिया और मस्ती में आंखें बंद कर अपनी बूर की फांकों को दुबारा फैला कर उसपे रगड़ने लगी।


सुधियां ने जोर से सिसकते हुए अपने भांजे को अपनी बाहों में भर लिया और सूरज अपने लंड को अपनी मामी की बूर की फांक में तेज तेज रगड़ने लगा, जब झटके से लंड बूर की छेद पर भिड़ जाता और अंदर घुसने की कोशिश करता तो सुधियां दर्द से चिहुँक जाती पर जल्द ही लन्ड उछलकर ऊपर आ जाता और बूर के दाने से टकराता तब भी सुधिया जोर से सिस्कार उठती।


सुधिया ने अपने भांजे से सिसकते हुए बड़ी मादक अंदाज़ में कहा- बेटा...अच्छा लग रहा है अपनी मामी की बूर का स्वाद।


सूरज - आहा मामी मत पूछ कितना मजा आ रहा है, कितनी नरम और रसीली बूर है मामी की......हाय


सुधियां अपने भांजे के मुँह से ये सुनकर शरमा ही गयी।

सुधियां - बेटा

सूरज - हाँ मेरी मामी

सुधियां - अब घुसा न लंड अपना मेरी बूर में, रहा नही जाता अब, घुसा न अपना लंड मेरी बूर के रसीले छेद में।


सूरज अपनी मामी के मुँह से इतना कामुक आग्रह सुनकर वासना से पगला गया और उसने अपनी मामी के दोनों पैरों को उठाकर फैलाकर अच्छे से अपनी कमर पर लपेट लिया, सुधियां भी अच्छे से पैर फैलाकर लेट गयी और सूरज ने अपने लंड का मोटा सुपाड़ा अपनी शादीशुदा मामी की रस बहाती महकती प्यासी बूर की छेद पर लगाया, सुधियां की बूर बिल्कुल संकरी नही थी क्योंकि कल ही सूरज ने उसकी बुर को अपने लंड से खोला था
उसके भांजे का लंड उसके पति के लंड से डेढ़ गुना बड़ा और मोटा था। सुधियां की बूर रस छोड़ छोड़ के बहुत रसीली हो चुकी थी, चिकनाहट भरपूर थी, सूरज ने अपने विशाल लंड का दबाव अपनी मामी की बूर की छेद में लगाना शुरू किया और अपने दोनों हाँथ नीचे ले जाकर अपनी मामी की गांड को पकड़कर ऊपर को उठा लिया जिससे सुधिया की बूर और ऊपर को उठ गई।
सुधियां से बर्दाश्त नही हो रहा था तो उसने कराहते हुए बोला , डालो न अपना मोटा लंड अपनी मामी की बुर में,अब मत तड़पाओ बेटा।


सूरज ने दहाड़ते हुए एक दो बार लंड को बूर के छेद पर फिरसे रगड़ा और एक हल्का सा धक्का मारा तो लंड फिसलकर ऊपर को चला गया, सुधिया तेजी से वासना में चिहुँक उठी, हाहाहाहाहाहाहाहाहायययय .......अम्मा.......ऊऊऊऊऊईईईईईईईईईई,


बूर रस बहा बहा कर बहुत चिकनी हो गयी थी और उसका छेद सूरज के लंड के सुपाड़े के हिसाब से छोटा था, जैसे ही लंड फिसलकर ऊपर गया और तने हुए बूर के दाने से टकराया सुधियां तड़प कर मचल गयी आआआआआहहहह.......उई अम्मा,
सूरज ने जल्दी से बगल में रखा घास का ढेर उठाया और सुधियां की चौड़ी गांड के नीचे लगाने लगा, सुधियां ने भी झट गांड को उठाकर घास के ढेर लगाने में मदद की,
घास का ढेर लगने से अब सुधिया की बूर खुलकर ऊपर को उठ गई थी, क्या रिस रही थी सुधियां की बूर, तड़प तड़प के लंड मांग रही थी बस,
सुधियां फिर बोली- बेटा अब डाल दो न, अब चला जायेगा, नही फिसलेगा, डाल से बेटा, चोद दो मुझे अब।


सूरज ने जल्दी से लंड को दुबारा दहकती बूर के खुल चुके छेद पर लगाया और एक तेज धक्का दहाड़ते हुए माrar, मोटा सा लंड कमसिन सी बूर के छेद को चीरता हुआ लगभग आधा मखमली बूर में समा गया, सुधिया की जोर से चीख निकल गयी,


हाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाययययययय............बेटा..........आआआआहहहहहह............धीरे से बेटा.............. मेरी बूर.............ओओओओओहहहहह बेटा............कितना मोटा है तुमारा......... दर्द हो रहा है बेटा...........ऊऊऊईईईईईईई.......अम्मा...............बस करो बेटा...........रुको जरा...............आआआआहहहहहह......कितना अंदर तक चला गया है एक ही बार में............आआआआहहहहहह


सूरज की भी इतनी नरम कमसिन बूर पा के मस्ती में आह निकल गयी,


सूरज ने झट उसके मुँह पर हाथ रख दिया, सुधिया का पूरा बदन ही ऐंठ गया,

सूरज ने झट से सुधियां के मुँह को दबा लिया उसकी आवाज अंदर ही गूंजकर रह गयी, एक हांथ से सूरज ने सुधिया का ब्लॉउज खोल डाला और ब्रा का बटन पीछे से खोलने लगा तो उससे खुल नही रहा था, सुधिया ने दर्द से कराहते हुए ब्रा खोलकार अपने भांजे की मदद की और ब्लॉउज और ब्रा को निकालकर बगल रख दिया,
सूरज अपनी मामी की इस वफाई पर कायल हो गया एक तो उसको कल चुदाने के बाद भी काफी दर्द भी हो रहा था फिर भी वो अपने भांजे को अपना प्यार दे रही थी, ब्लॉउज और ब्रा खोलकर उसने खुद ही उतार दिया, इतना प्यार सिर्फ मां समान मामी ही अपने बेटे समान भांजे को दे सकती है, सूरज ने बड़े प्यार से अपनी मामी को चूम लिया।


ब्रा उतरते ही सुधियां की बड़ी बड़ी मादक तनी हुई विशाल चूचीयाँ उछलकर बाहर आ गयी, उन्हें देखकर सूरज और पागल हो गया, निप्पल तो कब से फूलकर खड़े थे सुधिया की चूची के, दोनों चूचीयों को देखकर सूरज उनपर टूट पड़ा और मुँह में भर भरकर पीने लगा, दोनों हांथों से कस कस के दबाने लगा, कभी धीरे धीरे सहलाता कभी तेज तेज सहलाता, लगातार दोनों चूचीयों को पिये भी जा रहा था, निप्पल को बड़े प्यार से चूसे जा रहा था, लगतार अपने भांजे द्वारा चूची सहलाने, मीजने और चूमने, दबाने से सुधिया का दर्द कम होने लगा और वो हल्का हल्का फिर सिसकने लगी, आह....सी......आह.... सी......ओह बेटा....ऐसे ही.....और चूसो......दबाओ इन्हें जोर से.........हाँ मेरे बेटे......पियो मेरी चूची को.........आह, बोलते हुए सुधिया सिसकने लगी, उसका दर्द अब मस्ती में बदलने लगा, अपनी मामी की मखमली रिसती बूर में अपना आधा लंड घुसाए सूरज बदहवासी में उसे चूमे चाटे जा रहा था।

सूरज ने सुधियां के मुँह पर से हाँथ हटा लिया पर अभी भी वो दर्द से हल्का सा कराह दे रही थी, सूरज ने उसे बाहों में भर लिया और सुधियां भी अपने भांजे से मस्ती में कराहते हुए लिपट गयी,
सूरज मामी को बेताहाशा चूमने लगा, सुधियां की दर्द भरी कराहटें अब पूरी तरह मीठी सिसकियों में बदल रही थी, सूरज अपनी मामी के होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा,
सुधिया ने भी मस्ती में अपने भांजे के चेहरे को बड़े प्यार से अपने हांथों में लिया और आंखें बंद कर उनका साथ देने लगी,
सूरज ने हल्का सा अपनी गांड को गोल गोल घुमाया तो लन्ड बूर की रस भरी दीवारों से घिसने लगा, सुधियां को बहुत अच्छा लगा और वो अपने भांजे का मोटा सा मूसल जैसा लंड अपनी बूर में अच्छे से महसूस करने लगी, कितना अच्छा लग रहा था अब, सुधियां की तो नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने खुद ही अब नशे में अपना हाँथ अपने भांजे की गांड पर ले जाकर उसे हल्का सा आगे की तरफ दबा कर और लंड डालने का इशारा किया, सूरज अपनी मामी के इस आमंत्रण पर गदगद हो गया और उसे चूमते हुए एक जोरदार धक्का गच्च से मारा, इस बार बिरजू का ९ इंच लंबा और ४ इंच मोटा लंड पूरा का पूरा सुधिया की रस बहाती बूर में अत्यंत गहराई तक समा गया, सुधियां की दर्द के मारे फिर से चीख निकल गयी पर इस बार उसने खुद ही अपना मुँह अपने भांजे के कंधों में लगाते हुए दर्द के मारे उनके कंधों पर दांत गड़ा दिए और उसके नाखून भी सूरज की पीठ पर गड़ गए, सूरज वासना में कराह उठा, एक बेटे का लंड मामी की बूर की अत्यंत गहराई में उतर चुका था, पूरी बूर किसी इलास्टिक की तरह फैलकर लंड को जकड़े हुए थी।


सूरज का लंड अपनी मामी की दहकती बूर के छेद की मखमली दीवारों को चीरकर उसे खोलता हुआ इतनी गहराई तक समा चुका था कि सुधियां बहुत देर तक अपनी उखड़ती सांसों को संभालती रही, अपने भांजे के कंधों में मुँह गड़ाए काफी देर सिसकती रही और बीच बीच में गनगना कर कस के अपने भांजे से लिपट जाती और उनकी पीठ को दबोच कर दर्द से कराह जाती, सूरज अपनी मामी को बड़े प्यार से बार बार चूमने लगा, उसके पूरे बदन को वो बड़े प्यार से सहलाने लगा, कमर, जाँघे, पैर, बगलें, कंधे, गाल, गर्दन, और मस्त मस्त दोनों सख्त चूचीयाँ वो बार बार लगातार सहलाये जा रहा था साथ ही साथ लगातार उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसे जा रहा था।


सुधिया को अपने भांजे का लंड अपनी बूर में इतनी गहराई तक महसूस हुआ कि वो दर्द के मारे एक पल के लिए दूसरी दुनियाँ में ही चली गयी, अभी तक जो लंड सुधिया की बूर में जाता था वो बस इसका आधा ही जाता था जो उसके शराबी पति का था और सुधिया को लगता था कि बूर में बस इतनी ही जगह है पर आज उसे पता चल गया कि उसके भांजे के लंड ने उसकी मखमली बूर की अनछुई रसभरी गहराई को भेदकर, वहां तक अपना अधिकार स्थापित कर दिया है, उसकी बूर की अत्यंत गहराई में छुपे रसीले अनछुए रस को आज उसके भांजे का लंड वहाँ तक पहुंचकर बड़े अधिकार से उसपर विजय पताका फहरा कर बड़े प्यार से उसे अपना इनाम समझ कर पी रहा है
और सुधिया की मखमली बूर की रसभरी अंदरूनी दीवारें इस छोर से लेकर उस छोर तक पूरे ९ इंच लंबे ४ इंच मोटे लंड से पूरी तरह कसकर लिपटी हुई उस मेहमान का बड़े ही दुलार से चूम चूम के बूर के अंदर आने का जमकर स्वागत कर रही थी, पहले जो लंड आता था उसके पति था पर आज जो लंड बूर में आया है उससे भांजे का कुवारा लंबा मोटा लंड है,
सुधियां की बूर की मखमली रसभरी अंदरूनी दीवारें उसके अंदर पूरी तरह घुसे हुए भांजे के लंड से लिपटी उसे चूम चूम के उसका स्वागत कर रही थीं मानो कह रही हों कि अब तक कहाँ थे आप, कब से तरस गयीं थी हम आपको छूने और चूमने के लिए।


सुधियां को ये सब महसूस कर दर्द के साथ साथ एक तरह से असीम आनंद भी होने लगा, सूरज अपनी मामी को उसकी बूर में अपना पूरा लंड ठूसे लगातार चूमे और सहलाये जा रहा था, वह सुधिया के होंठों को अपने होंठों में भरकर पीने लगा, सुधिया को अब फिर मजा आने लगा, दर्द सिसकियों में बदलना शुरू हो गया, लिपट गयी वो खुद ही अपने भांजे से अच्छी तरह और ताबड़तोड़ चूमने लगी सूरज को,
सूरज समझ गया कि अब उसकी मामी तैयार है बूर चुदवाने के लिए, सुधियां की बूर से लगातार रस बह रहा था।

काफी देर तक लंड बूर में पड़े रहने से बूर उसको अच्छे से लीलकर अभ्यस्त हो गयी थी।
सूरज ने अपनी मामी के पैरों को अपने कमर पर अच्छे से लपेटते हुए धीरे से लंड को थोड़ा बाहर खींचा और गच्च से दुबारा बूर की गहराई में उतार दिया, सुधिया मीठे मीठे दर्द से सिरह उठी, सूरज बार बार ऐसा ही करने लगा वह थोड़ा सा लंड को निकलता और दुबारा बूर में पेल देता, सुधियां को ये सब बहुत अच्छा लग रहा था,
सूरज अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर लंड को बूर की गहराई में अच्छे से रगड़ता तो सुधिया मस्ती में कराह जाती, जोर जोर से उसकी सीत्कार निकलने लगी।


सूरज अब पूरी तरह सुधिया से लिपटते हुए धीरे धीरे लंड को बूर से बाहर निकाल निकाल के गच्च गच्च धक्के मारने लगा, उसने अपनी मामी के होंठ अपने होंठों में भर लिए और चूसते हुए थोड़े तेज तेज अपनी मामी को चोदने लगा।


सुधिया का दर्द धीरे धीरे जाता गया और चुदाई के मीठे मीठे सुख ने उसकी जगह ले ली। सुधिया को ऐसा लग रहा था कि आज उसकी बूर की बरसों की भूख मिट रही है, इतना आनंद आजतक उसे कभी नही आया था, मोटे से लंड की रगड़ बूर की गहराई तक हो रही थी, सूरज का लंड अपनी ही मामी की बच्चेदानी के मुँह पर जाकर ठोकर मारने लगा जिससे सुधियां का बदन बार बार वासना में थरथरा जा रहा था, एक असीम गहरे सुख में सुधीया का बदन गनगना जा रहा था।


सुधियां - आआआआआआहहहहह.......हाय बेटा.....चोदो मुझे........चोदो अपनी मामी को.........कितना मजा आ रहा है, कितना प्यारा है तुमारा लंड........कितना मोटा और लम्बा है मेरे भांजे का लंड......... हाय बेटा.....ऐसे ही चोदते रहो अपनी मामी को.......हाय

सूरज अब अपनी मामी की रसभरी बूर में हचक हचक के थोड़ा और तेज तेज अपना मोटा लन्ड पेलने लगा, बूर बिल्कुल पनिया गयी थी, बहुत रसीली हो चुकी थी, लंड अब बहुत आसानी से बूर के अंदर बाहर होने लगा था, सूरज ने अब और अच्छी पोजीशन बनाई और अपनी मामी की चूचीयों को मसलते हुए उन्हें पीते हुए, निप्पल को मुँह में भर भरकर चूसते चाटते हुए कस कस के बूर में पूरा पूरा लंड हचक हचक कर पेलने लगा,
बीच में सूरज रुकता और अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर अपने मोटे लंड को अपने मामी की बूर की गहराई में किसी फिरकी की तरह घूमने की कोशिश करता जिससे लंड बूर की गहराई में अच्छे से उथल पुथल मचाता और रगड़ खाता, इससे सुधिया मस्ती में हाय हाय करती हुई सीत्कार उठती।


दोनों की मादक सिसकारियां थोड़ी तेज तेज गूंजने लगी, सुधिया लाख कोशिश करती की तेज सिसकी न निलके पर क्या करे मजा ही इतना असीम आ रहा था कि न चाहते हुए भी तेज सिसकियां निकल ही जा रही थी, बूर इतनी रसीली हो चुकी थी की बूर चोदने की फच्च फच्च आवाज़ आने लगी, एक लय में हो रही इस चुदाई की आवाज से दोनों मामी भांजा और मस्त होने लगे,
सुधियां तो अब मस्ती में नीचे से अपनी चौड़ी गांड उठा उठा के चुदाई में अपने भांजे का साथ देने लगी,
९ इंच लंबे लंड का रसीली प्यासी बूर में लगातार आवागमन सुधिया को मस्ती के सागर में न जाने कहाँ बहा ले गया।


सूरज अब सुधिया को पूरी ताकत से हुमच हुमच कर जोर जोर चोदने लगा, नीचे से घास का ढेर उनकी चुदाई से बिखरने लगा,
झाड़ियों में दोनों मामी भांजे की सिसकिया गूंजने लगी, साथ में चुदाई की फच्च फच्च आवाज भी आने लगी थी, माहौल बहुत गर्म हो चुका था, किसी को अब होश नही था, सुधिया का पूरा बदन उसके सूरज के जोरदार धक्कों से हिल रहा था,
सूरज अपनी मामी पर चढ़ा हुआ उसे घचा घच्च लंबे लंबे धक्के लगाते हुए चोदे जा रहा था। बूर बिल्कुल खुल गयी थी अब, लंड एक बार पूरा बाहर आता और दहाड़ता हुआ बूर की गहराई में उतर जाता, हर बार तेज तेज धक्कों के साथ नीचे से अपनी गांड को उछाल उछाल के चुदाई में ताल से ताल मिलाते हुए सुधिया सीत्कार उठती थी।

आह...........बेटा............हाय ऐसे ही चोदो मुझे............ऐसे ही चोदो अपनी मामी को....
...........अपनी मामी को...............ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़................. ऊऊऊऊईईईईईई..............अम्मा............चोद डालो बूर मेरी बेटा..............अच्छे से चोदो अपने लंड से मेरी बूर को बेटा...................आआआआआहहहहहहहह......... सिर्फ तुमरे मोटे लंड से बेटा.........सिर्फ तुमारा लंड से............हाय......... चोदो मेरे बेटे और तेज तेज चोदो अपनी मामी को..........हाय दैय्या........कितना मजा आ रहा है।


सूरज भी मस्ती में करीब 20-25 मिनट तक लगातार सुधिया की बूर में हचक हचक के लन्ड पेल पेल के चोदता रहा, सुधिया और सूरज के तन बदन में एक जोरदार सनसनाहट होने लगी, सुधिया की बूर की गहराई में मानो चींटियां सी रेंगने लगी, लगातार अपने भांजे के जोरदार धक्कों से उसकी बूर में सनसनी सी होने लगी और एकाएक उसका बदन ऐंठता चला गया, गनगना कर वो चीखती हुई अपने नितम्ब को उठा कर अपने भांजे से लिपटकर झड़ने लगी,

आआआआआहहहहह...........बेटामैं गयी.......... तुम्हारी मामी झड़ रही है बेटा.............ओओओओहहहह ह........हाय....... मैं गयी बेटा........और तेज तेज चोदो बेटा.........कस कस के पेलो मेरी बूर........ऊऊऊऊईईईईई.......बेटा.........हाय मेरी बूर...…..….कितना अच्छा है मेरे बेटे लंड.........आआआआआहहहहह


सूरज का लंड तड़बतोड़ सुधियां की बूर चोदे जा रहा था, सुधिया सीत्कारते हुए जोर जोर हाय हाय करते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ने लगी, सूरज को अपनी मामी की बूर के अंदर हो रही हलचल साफ महसूस होने लगी, कैसे सुधिया की बूर की अंदरूनी दीवारें बार बार सिकुड़ और फैल रही थी, काफी देर तक सुधिया बदहवास सी सीत्कारते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ती रही।


सूरज तेज तेज धक्के लगते हुए सुधीया की बूर चोदे जा रहा था, वह बड़े प्यार से चोदते हुए अपनी मामी को दुलारने लगा,
इतना मजा आजतक जीवन में सुधियां को कभी नही आया था, चरमसुख के असीम आनंद में वो खो गई, अब भी उसके भांजे का लंड तेज तेज उसकी बूर को चोदे जा रहा था, कभी कभी वो बीच बीच में तेजी से सिस्कार उठती, बूर झड़ने के बाद बहुत ही चिकनी हो गयी थी, सूरज का लंड अपनी मामी के रस से पूरा सन गया था, सुधिया का बदन अब ढीला पड़ गया वो बस आंखें बंद किये हल्का हल्का सिसकते हुए चरमसुख के आनंद में डूबी हुई थी कि तभी सूरज भी जोर से सिसकारते हुए एक तेज जबरदस्त धक्का अपनी मामी की बूर में मारते हुए झड़ने लगा, धक्का इतना तेज था कि सुधिया जोर से चिहुँक पड़ी आह........ बेटा......... हाय

एक तेज मोटे गाढ़े वीर्य की पिचकारी उसके लंड से निकलकर सुधिया की बूर की गहराई में जाकर लगी तो सुधियां उस गरम गरम लावे को अपनी बूर की गहराई में महसूस कर गनगना गयी और तेजी से मचलकर सिसकारने लगी बड़े प्यार से उसने अपने भांजे को अपनी बाहों में कस लिया और उनके बालों को सहलाने लगी, प्यार से दुलारने लगी, सूरज का मोटा लंड तेज तेज झटके खाता हुआ वीर्य की मोटी मोटी धार छोड़ते हुए अपनी मामी की बूर को भरने लगा, अपनी मामी के बूर में उसका गाढ़ा गरम वीर्य भरने लगा,
गरम गरम सूरज का वीर्य सुधियां की बूर से निकलकर गांड की दरार में बहने लगा और नीचे घास के ढेर को भिगोने लगा, सूरज काफी देर तक हाँफते हुए अपनी मामी की बूर में झाड़ता रहा,
आज उसे एक गदरायी कमसिन मखमली बूर मिली थी और भी उसकी मामी की, सूरज सच में अपनी मामी की बूर चोद कर निहाल हो चुका था, सूरज और सुधिया ने असीम चरमसुख का आनंद लेते हुए एक दूसरे को कस के बाहों में भर लिया और बड़े प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे, और अपनी सांसों को काबू करते हुए एक दूसरे को बाहों में लिए लेटे रहे।


सूरज का लंड थोड़ा शिथिल हो गया था पर सुधिया की बूर के अंदर ही घुसा हुआ था, सुधिया अपने भांजे के शिथिल हो चुके लंड को महसूस कर मुस्कुरा उठी, उसको अपने भांजे के लंड पर बहुत प्यार आ रहा था, जैसे कोई छोटा बच्चा खा पीकर सो गया हो ठीक वैसे ही उसके भांजे का लंड उसकी बूर में पड़ा हुआ था।

दोनो की चुदाई में इतना समय गुजर चुका था की,
आसमान में शाम का अंधेरा छाने लग गया,
सुधियां अपने भांजे के चेहरे को अपने हांथों में थाम लेती है और बड़े प्यार उसके ओठ चूमते हुए बोलती है
ओ मेरे बेटे मेरे बलमा, मजा आया, अपनी मामी को चोदके।

सूरज - हां मेरी मामी, मेरी सजनी बहुत मजा आया, पर मन नही भरा अभी।

सुधियां - हाय मेरे राजा, मेरा बेटा जिस मामी से उसका भांजा का मन एक ही बार में भर जाए तो उस मामी का हुस्न किस काम का, हम्म।

सूरज - सच, तुम तो कयामत हो मामी, कयामत, तुमें मजा आया।

सुधियां - बहुत बेटे....बहुत..मुझे तो बहुत मजा आया अपने भांजे का मोटा लंड अपनी बूर को खिलाकर,
देखो न बेटा अभी भी मेरी बूर कैसे चुपके चुपके हौले हौले तुम्हारे लंड को चूम रही है,

जैसे छोटी बच्ची मुँह में लॉलीपॉप लिए सो जाती है वैसे ही देखो न मेरी बुरिया भी कैसे तेरा लंड मुँह में लिए लिए सो सी रही है।
सच बेटा मुझे बहुत मजा आया, ऐसा सुख मुझे आजतक नही मिला था, बेटा एक बात बोलूं

सूरज - बोल न मेरी रानी

सुधियां धीरे से कान में - बेटा आज मुझे पहली बार चरमसुख प्राप्त हुआ है

सूरज मामी को आश्चर्य से देखते हुए- क्या, सच में।

सुधिया - हाँ, बेटा

सूरज - मामाजी अभी तक तुमें चरमसुख नही दे पाये?

सुधिया - चरमसुख लुल्ली से नही मिलता बाबू, औरत को चरमसुख तो मिलता है.....

सूरज - बोल न, रुक क्यों गयी मेरी जान।

सुधिया - चरमसुख तो मिलता है भांजे मोटे से लंड से, और तेरा तो लंड भी नही है

सूरज आश्चर्य से- फिर, अगर ये लंड नही है तो क्या है मेरी मामी, बता न।

सुधियां - बेटा समझ जाओ न।

सूरज - नही समझ आ रहा, तूम ही बता दो।

सुधिया ने थोड़ा रुककर फिर अपने बेटे के कान में सिसकते हुए बोला- तुम्हारा तो लौड़ा है लौड़ा, क्योंकि जिस तरह आपने अपनी मामी की कमसिन बूर को चोदा है वो एक लौड़ा ही कर सकता है, ये किसी लुल्ली के बस के नही

सूरज अपनी मामी के मुँह से ये शब्द सुनकर अचंभित रह गया और जोश में उसने एक धक्का खींच के बूर में मारा तो सुधिया जोर से चिंहुँक पड़ी आआआआआआआहहहहहहहह!

सूरज - तुमें मेरा लंड इतना पसंद आया।

सुधियां - लंड नही बेटा लौड़ा......आह.... लौड़ा, बहुत मजेदार है मेरे भांजे का लौड़ा। मैं तो तेरी दिवानी हो गयी मेरे भांजे, तुम्हारी मामी तेरी दीवानी हो गयी और भांजे का लंड क्यों मामी को पसंद नही आएगा भला, कितना रोमांचक होता है भांजे का लंड......आआआआआहहहह

सूरज मामी के कान में- लंड नही लौड़ा, मेरी मामी लौड़ा, अब खुद ही भूल गई।

सुधिया - हाँ मेरे प्यारे सैयां, लौड़ा, तुम्हारा लौड़ा, डालोगे न हमेशा अपना लौड़ा मेरी बुर में बेटा, बोलो न, मुझे तरसाओगे तो नही इस मस्त लौड़े के लिए कभी।

सूरज - न मेरी मामी, मैं तो खुद तुम्हारी मखमली बूर के बिना नही रह सकता अब। कितनी रसभरी है मेरी मामी की बूर....आह


शाम के समय मौसम थोड़ा ठंडा होने की वजह से सुधियां को फिरसे पेशाब लगी, उसके भांजे का लंड उसकी बूर में समाया हुआ था ही,
वह बोली- बेटा, देखो शाम हो गई ही सब हमारा इंतजार कर रहे होगे अगर हम नही मिले तो हमे ढूंढते हुवे यहा पर भी आ सकते ही हमे चलाना चाहिए

सूरज- हाँ मेरी जान, हमे चलाना चाहिए वैसे भी विलास मामा दोपहर से मुझे ढूंढ कर परेशान हो गए होगे।

ओर सूरज ने अपना फौलाद हो चुका लंड सुधिया की बूर में से बाहर निकाला तो सुधिया आह करके सिसक उठी।
सुधिया - बेटा मुझे पेशाब आ रहा है

सूरज - तो पिला दो न, इसमें पूछना क्या मेरी जान

सुधिया चौंकते हुए- क्या, फिरसे तुम पेशाब पियोगे?

सूरज - हाँ, पिला दे तेरा मूत मामी

सुधिया - मेरा मूत पियोगे, अपनी मामी का

सूरज - हाँ, प्यास बहुत लगी है

सुधियां- बहुत प्यास लगी है मेरे बेटे को, ठीक ही बेटे अभी पिलाती हू।

सूरज- ठीक है हुज़ूर


सूरज शाम की हलकी सी रोशनी में देखने लगा, दोनों मामी भांजा पूरे नंगे थे,
सूरज सुधियां को देखता रह गया, सुधिया भी अपने भांजे को वासना की नज़रों से निहारती रही, एक बार शाम की हलकी रोशनी में दोनों ने जब एक दूसरे को पूर्ण नग्न देखा तो रहा नही गया और दोनों एक दूसरे की बाहों में कस कर लिपट गए और एक दूसरे के बदन को मस्ती में सहलाने लगे, कुछ देर बाद

सुधिया - बेटा जोर से पिशाब आ रहा है।

सूरज ये सुनते ही फट घास पर लेट गया और सुधिया शाम की हलकी रोशनी में कराहते है अपने बेटे के सीने पर से अपनी बूर उसके मुँह के सामने करके बैठ गयी,

हलकी की रोशनी में अपनी मामी की महकती बूर जिसको अभी कुछ देर पहले ही सूरज ने घच्च घच्च चोद चुका था, देखकर फिर मदहोश हो गया, उस बूर की छेद से अभी भी उसका वीर्य हल्का हल्का निकल रहा था, जो गवाही दे रहा था कि एक मामी अपने ही भांजे से अच्छे से चुदी है।

बूर देखते ही सूरज ने अपने दोनों हांथों को सुधियां के नितम्ब पर रखा और आगे को ठेलकर उसकी रसभरी बूर को मुँह में भर लिया,
सुधियां जोर से सिसक उठी और खुद भी उसने मचलते हुए अपने भांजे का सर पकड़कर अपनी बूर उनके मुँह में रगड़ने लगी, सूरज लप्प लप्प अपनी मामी की बूर को चाटने लगा तो एक दम से सुधियां को झुरझुरी महसूस हुई और उसका पेशाब निकल गया, आआआआआआआआहहहह...........दैय्या, बेटा........आआआआहहहहह, सुधियां की बूर की फैली हुई दोनों फांकों के बीच से गरम गरम महकता हुआ पेशाब सुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर की आवाज के साथ सूरज के पूरे मुँह को भिगोने लगा, पेशाब छोड़ती बूर को सूरज जीभ निकाल के पहले तो चाटने लगा, फिर बूर को मुँह में भरकर अपनी मामी का मूत पीने लगा, क्या महक थी मामी के पेशाब की और मूतते हुए सुधिया क्या लग रही थी,
दोनों मामी भांजे की आंखें मस्ती में बंद थी, सूरज लपा लप सुधिया का पेशाब कभी चाटता कभी पीता, सूरज का पूरा चेहरा, उसकी गर्दन और सीना सब सुधियां के पेशाब से भीग चुका था, सुधियां अपने पेशाब से अपने भांजे को भिगोते हुए उनको बड़ी मादकता से देखती भी जा रही थी, काफी हद तक सूरज सुधियां का पेशाब पी चुका था,
एकाएक सुधियां ने अपनी उंगली से कराहते हुए अपनी बूर की फाँकों को चीरा और पेशाब की धार छोड़ती फैली हुई बूर को एकदम से अपने भांजे के मुँह में भर दिया और बोली- लो बेटा अपनी मामी का पेशाब, अब खत्म होने वाला है जल्दी पूरा पी लो..

सूरज ने लप्प से अपनी मामी की बूर को मुँह में भरा और सारा मूत पी गया, पेशाब बन्द होने के बाद सुधिया ने अपनी बूर अपने बेटे के मुँह से बाहर खींची और एक पल के लिए उनके सारे भीगे हिस्से को कामुकता से देखने लगी और बोली- कैसा लगा मेरे बेटे

सूरज - मेरे पास शब्द नही हे मामी , ऐसा मजा आजतक नही आया था।

सुधियां उठकर अपने बेटे के ऊपर लेट गयी और बोली- अब मैं अपने प्यारे बेटे को ऐसे ऐसे मजे दूंगी की तुमरी जिंदगी बदल जाएगी

सूरज का लंड सुधिया की बूर पर फिरसे दस्तक देने लगा, सूरज अपने दोनों हाँथों से सुधियां की गांड को भी सहलाने लगा, सुधियां सिसकते हुए अपने भांजे के चेहरे और गर्दन पर लगे पेशाब को मस्ती में चाटने लगी तो सूरज भी मस्ती में कराहने लगा- आह मेरी जान मामी

सुधिया मस्ती में अपने भांजे को चूमती चाटती हुई नीचे की तरफ बढ़ने लगी, सूरज उसके बालों को सिसकते हुए सहलाने लगा, सुधियां अपने भांजे के दुबारा तन चुके लन्ड तक आयी और हलकी की रोशनी में अपने सूरज का खड़ा लन्ड निहारने लगी,
उसने उसको हाँथ से पकड़ा और चमड़ी को धीरे से उतारा तो उसकी आंखें अपने भांजे के मोटे सुपाड़े और उस पर पेशाब के छेद को देखकर मस्ती में भर गई, उसने अपने भांजे की तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोली- कितना प्यारा है बेटा ये, बहुत प्यारा है मेरे मर्द का लंड और ऐसा कहते हुए सुधियां अपने भांजे का लंड हौले हौले चूमने लगी, पहली बार लंड पर अपनी मामी के गरम होंठ महसूस कर सूरज जन्नत में खो गया, कितने गरम चुम्बन दे रही थी सुधियां उसके लंड पर, धीरे धीरे चूमने के बाद सुधियां जीभ निकाल कर अपने भांजे के लंड चाटने लगी, सूरज मस्ती में उसका सर पकड़े अपने लंड को हौले हौले मामी के मुँह में खुद भी ठेलने लगा, अपनी मामी को अपना लंड चुसवाने में कितना मजा आ रहा था।

सुधिया आंखें बंद किये अपने भांजे का लंड बड़ी लगन से चूसे जा रही थी और अपने मन में सिसकते हुए सोचे जा रही थी कि लंड अगर दमदार हो तो चूसने का मजा ही कुछ और है, कभी वो सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसती, कभी उसपर जीभ फिराने लगती, कभी तो पूरे लंड को जड़ तक मुँह में भरने की कोशिश करती पर न हो पाता, कभी दोनों आंड को मुँह में भरकर पीती, लंड पर लगे उसकी बूर का रस और वीर्य का मिश्रण उसने कब का चाट चाट के साफ कर दिया था,
कभी जीभ नुकीली बना के अपने भांजे के लंड के छेद पर गोल गोल फिराती जिससे सूरज झनझना के मचल जाता, सूरज खुद भी मामी का सर पकड़ कर अपना लन्ड उसके मुँह में अंदर बाहर कर रहा था और जोर जोर से कराहते जा रहा था- ओह.... मामी.....कितने प्यारे हैं तेरे होंठ, कितने नरम है......मेरी प्यारी मामी इतना मजा तो मुझे आजतक नही आया......ओह मेरी रानी.......मजा आ गया

सुधिया - आह.....बेटा क्या लंड है तुम्हारा.......मेरा तो जीवन सवर गया इसे पाकर....... मैं तो दीवानी हो गयी अब इसकी............इसके बिना अब मैं रह नही सकती।


जैसे ही सुधिया ने ये शब्द बोला सूरज ने अपना लंड मुंह से निकल कर सुधियां की मखमली रिसती बूर में अंदर तक एक ही बार में घुसेड़ दिया।

सुधिया जोर से कराह उठी और मस्ती में अपने भांजे से लिपट गयी।

सूरज - हाय....क्या नशा है तेरी बातों में मामी....सच

कुछ देर तक सूरज मामी की बूर में लन्ड पेले पड़ा रहा और सुधिया अपने भांजे की पीठ सहलाती रही।

सुधियां सिसकते हुए बोली- बेटा मजा आ रहा हे और

सुधियां ने एक चपत अपने भांजे की पीठ पर मारा तो सूरज ने जवाब में लन्ड बूर में से आधा निकाल के एक धक्का जोर से मारा, सुधियां गनगना गयी।

सुधीया - हाय बेटा.....धीरे से......ऊऊऊऊईईईईईई धीरे से बेटा


सूरज धीरे धीरे लंड बूर में अंदर बाहर करने लगा

सुधिया सिसकने लगी और बोली- थोड़ी भी देर के लिए लंड को बूर में घुसे हुए रोककर आराम नही करने देते ये मेरे राम.....बाबू

सूरज- क्या करूँ मेरी मामी, तेरी बूर है ही इतनी मक्ख़न की डालने के बाद रुका ही नही जाता।

सुधियां सिसकते हुए- बेटा

सूरज - हाँ मेरी रानी

सुधियां - अपने मामा के सामने अपनी मामी को चोदोगे?

सूरज - मामा के सामने.....मतलब

सूरज बराबर बूर को हौले हौले चोद रहा था और दोनों सिसकते भी जा रहे थे

सुधिया - तेरे मामा ने मुझे बाहोत तड़पाया हे सताया हे में परेशान हो गई हू उससे में बदला लेना ही मुझे तुम इसमें मेरी मदत करोगे
मेरा मतलब वो पास में हो या बगल में सोता हो और तुम अपनी मामी को चोदना........हाय कितना मजा आएगा.....कितना रोमांच होगा।

सूरज को ये सोचकर अत्यधिक रोमांच सा हुआ कि कैसा लगेगा एक ही बिस्तर पर या फिर सामने मेरा मामा होगा और मैं अपनी मामी को उसके पति के मौजूदगी में चोदुंगा।

रोमांच में आकर उसने अपने धक्के थोड़ा तेज ही कर दिया, सुधिया के दोनों पैर उठाकर अपनी कमर पर लपेट दिए और थोड़ा तेज तेज अपनी मामी की बूर में लंड पेलने लगा, सुधियां की तो मस्ती में आंखें बंद हो गयी, क्या मस्त लौड़ा था उसके भांजे का, कैसे बूर के अंदर बाहर हो रहा था। मस्ती में वो अपने भांजे की पीठ सहलाने लगी और उन्हें दुलारने लगी।

सूरज - हां मेरी जान, मजा तो बहुत आएगा पर ये होगा कैसे,

सुधियां - हाँ बेटा......आह..... उई....बेटा जरा धीरे धीरे हौले हौले चोदो....बात तो तुम सही कह रहे हो, तुम अगर घर आकर मुझे अपने पति के मोजुदगी में चोदोगे रोमांच से बदन कितना गनगना जाएगा,

सूरज - तेरी बूर के बिना मैं भी नही रह सकता मेरी जान,


सूरज जोश में आकर हुमच हुमच कर सुधियां की रसीली बूर चोदने लगा, दोनों इस कल्पना से कामुक हो जा रहे थे और घचा घच्च चुदाई भी कर रहे थे, सुधियां कभी कभी तेजी से सिसक देती तो कभी कभी वासना में अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदने लगती।

सूरज - हां मेरी मामी ये भी सही कहा तूने, तू ही किसी बहाने तुम मुझे घर बुला फिर तेरे पति के मोजुदगी तुझे चोदूंगा।

सुधिया - मेरे पति के सामने

सुधियां ने आंख नाचते हुए कहा

सूरज- हां तेरे पति के सामने ही तो मेरे मामा के सामने

सुधिया - पगलू मेरे पति तो सिर्फ और सर्फ तुम हो, वो तो बस नाम के हैं अब से

सूरज - अच्छा जी

सुधियां - हम्म

सूरज - मैं तो भांजा हू तेरा

सुधियां- पति भी हो और भांजा तो हो ही....

सूरज - हाँ ठीक मामी

सूरज तेज तेज जोश में धक्के मारने लगा, सुधियां मस्ती में गांड उठा उठा के चुदवाने लगी, तेज तेज सिसकियों की आवाज गूंजने लगी, दोनों पूर्ण रूप से नंगे थे। तेज तेज धक्कों से सुधियां का पूरा बदन हिल रहा था, जोर जोर से सिसकते हुए वो अपने भांजे को सहलाये और दुलारे जा रही थी और वासना में सराबोर होकर कामुक बातें बोले जा रही थी
हाँ बेटा ऐसे ही चोदो..........ऐसे
ही हुमच हुमच के तेज धक्के मारो.......मेरी बुर में............आह बेटा.............ऊऊऊऊईईईईईई........... थोड़ा किनारे से बूर की दीवारों से रगड़ते हुए अपना लंड अपनी इस मामी की बूर में पेलो.......रगड़ता हुआ बच्चेदानी तक जाता है तो जन्नत का मजा आ जाता है बेटे जी...........मेरे बेटे जी..........आह..... मेरे पति जी.........चोदो अपनी पत्नी को..........तरस मत खाओ...........बूर तो होती ही है जमके चोदने के लिए..............एक बार और चोद चोद के फाड़ दो मेरी बूर...........आआआआआहहहहहहह

सुधियां ऐसे ही बड़बड़ाये जा रही थी और सूरज तेज तेज धक्के मारे जा रहा था, एकाएक सूरज ने सुधियां की चूची को मुँह में भरा और पीने लगा, मस्ती में सुधियां और मचल गयी, पूरा बदन उसका वासना में एक बार फिर ऐंठने सा लगा, एकाएक बाहर कुछ लोगों की हल्की हल्की आवाजें आने लगी।

सुधियां तो पूरी मस्ती में थी पर सूरज के कान खड़े हो गए, अभी तक तो वो यही सोच रहे थे कि शाम हो रही है तो कौन नही आएगा,
तभी विलास मामा जोर जोर से सूरज को आवाज़ देने लगे
सूरज ने मन में कोसते हुए उठने की कोशिश की तो सुधियां ने उनकी कमर को थाम लिया और पूछा- बेटा क्या हुआ चोदो न, रुक क्यों गए।

सूरज - लागत हे मामा पास में ही हे हमे चलाना चाहिए बहोत देर हो गई हे।

सुधियां - पर मेरी बुरिया वो रोने लगेगी।
वहीं जिसके मुँह से आप निवाला छीन रहे हो, देखो न कैसे मजे से खा रही है।

सूरज आश्चर्य से- कौन?....किसके मुँह से निवाला छीन रहा हूँ, मैं समझा नही।

सुधियां - अरे मेरे बुध्धू राम........ये

ऐसा कहते हुए सुधिया ने बड़ी अदा से अपने भांजे का हाँथ पकड़ा और अपनी बूर पर ले गयी जो सूरज का पूरा लंड लीले हुए थी, और दोनों नीचे देखने लगे, लंड पूरा बूर में घुसा हुआ था।

सुधियां - किसी के मुँह से निवाला नही छीनते बेटा, देखो कैसे बेसुध होकर मस्ती में तुम्हारा मोटा लंड खा रही है मेरी ये बुरिया, अब आप निकाल लोगे तो ये रोने लगेगी और फिर चुप कराए चुप भी नही होगी,
अभी आधी मजधार में न छोड़ो इसे, न रुलाओ बेटा इसको, इसके हक़ का खा लेने दो इसे पूरा। अब निवाला मुँह में ले रखा है तो खा लेने दो पूरा अपनी इस मामी की बुरिया को।

इतना सुनते ही सूरज ने सर उठा के सुधिया की आंखों में देखा तो सुधिया खिलखिला के हंस भी दी और वासना भारी आंखों से विनती भी करने लगी की बेटा अभी चोदो रुको मत चाहे आग ही लग जाये पूरी दुनिया को।

सूरज ने बड़े प्यार से मामी के गाल को चूम लिया और बोला- बहुत प्यारी प्यारी बातें आती है मेरी मामी को, तेरी इन बातों का ही दीवाना हूँ मैं।

सुधिया सिसकते हुए- मामी नही पत्नी, आज से पत्नी हूँ न आपकी मैं।

सूरज - हां मेरी पत्नी, अब तो चाहे कुछ भी हो अपनी पत्नी को चोद के ही छोडूंगा।

और फिर सूरज ने सुधियां के ऊपर अच्छे से चढ़ते हुए अपने दोनों हांथों से उसके विशाल साइज की चौड़ी गांड को अपने हांथों से उठा लिया और अपना मोटा दहाड़ता लंड तेज तेज धक्कों के साथ पूरा पूरा बूर में डाल डाल कर कराहते हुए रसीली बूर चोदने लगा,
सुधिया की दुबारा सिसकिया निकलने लगी, कुछ ही देर में पूरी झाड़ियों में मादक सिसकियों से गूंज उठा, पूरी घास तेज धक्कों से बिखर गई, करीब 10 मिनट की लगातार मामी भांजे की धुँवाधार चुदाई से दोनों के बदन थरथराने लगे और दोनो ही एक बार फिर तेज तेज हाँफते हुए कस के एक दूसरे से लिपट गए और सीत्कारते हुए एक साथ झड़ने लगे, कुछ देर तक झड़ने के बाद दोनों शांत होकर एक दूसरे को चूमने सहलाने लगे फिर सूरज ने एक जोरदार चुम्बन सिधिया के होंठों पर लिया और बोला

अब जलादि से साड़ी पहनो मामी हमे जाना चाहिए नही तो मामा चिला चिला कर आसपास के लोगो को इकट्ठा कर देंगे और फिर कही हम पकड़े न जाए
सुधियां जलादि कच्छी ब्रा पहन कर के साड़ी पहन लेती
ओर सूरज भी धोती पहन कर तयार हो जाता है।
ओर दोनो चुपके से से झाड़ियों से निकल कर गेहूं के खेतो से होते हुवे बाहर निकलने लगाते है
तभी विलास की नजर उन दोनो पे पड़ती है
ओर दोनो भी विलास मामा को सामने देख कर डर जाते हे।

विलास - दोपहर से तू कहा था तू शाम हो गई फिर भी तेरा आता पता नही हे।ओर में तुझे कबसे आवाज दे रहा हु और सुधिया भाभी के साथ क्या कर रहा हे।

सूरज - डरते हुवे वो में वो मामी के खेत का बांध टूट गया था और सारा पानी पास के खेत में जा रहा था इस लिए में दोपहर से मामी की बांध लगाने में मदत कर रह था।

विलास - अच्छा हुवा की तुमने भाभीजी की मदत की,
पर बेटा आज बिजली जलादि चली जाने की वजह से खेतो की सिंचाई नहीं हो पाई अब हमे रात को खेत आ के पानी देना होगा क्योंकि कल दिन में बिजली नही हे।
भाभीजी आपके खेत की सिंचाई हुवी की नही

सुधिया - नही भाई साहब अब रात में ही देना पड़ेगा पर में अकेली ये सब कैसे करूंगी,

विलास - फिकर मत कीजिए में रात में अपना खेत संभाल लूंगा और सूरज आपकी मदत करेगा,

सुधीया - ठीक हे भाई साहब

विलास ठीक ही अब जल्दी घर चलते ही बहोत देर हो गई हे फिर हमे वापस खेतो में आना हे।

तो तीनों मिलके घर जी और निकल पड़ते हे।
विलास आगे आगे चल रहा था और सूरज और सुधियां पीछे पीछे
तभी सूरज ने मामी को कस के बाहों में भर लिया और बोला देख न मामी ये फिर से खड़ा हो गया हे अपने धोती में बने तंबू को दिखते हुवे

सुधियां - अब नही बेटा... आज रात खेत में जमके चोदना।
सूरज ये बात सुन के ज़ूम उठा की अपनी प्यारी मामी को आज रात भर खेत में चोदेगा।
थोड़ी देर में सभी अपने घर पहुंच जाते थे।
अब सूरज को रात का इंतजार था।
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Anoop

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भाग ९

रात को सभी ने खाना खाया और सब सोने के लिए कमरे में चले गए। सूरज को आज थकान के कारण जलादि नींद अयि ये थकान सुधीया मामी के चुदाई के कारण आइ थी।
सुबह सूरज और विलास दोनो हर रोज की तरह खेतो पे निकल गए। खेतो से गुजरते हुवे सूरज ने सुधियां मामी की खेतो में देखा सुधिया मामी कही नजर अति हे क्या पर सुधियां मामी उसे नजर नहीं आती।
विलास और सूरज खेत पहुंच कर काम करने लगे

सुधियां कल की बात को सपना समझ कर सुबह अपनी मस्ती में उबड़ खाबड़ रास्तों से खेतों की तरफ चली जा रही थी,,,, ( सुधियां का पति खेती में कुछ भी मदत नही करता था सारा खेतो का काम सुधियां अकेली ही देखती थी उसका बेटा पप्पू भी दोस्तो के साथ दिन भर आवारा गस्ति करते घुमाता था अपनी मां की बिलकुल भी मदत नही करता था )

इसलिए सुधियां ज्यादातर वक्त खेतों में हीं गुजरता था,,,,

कुछ देर बाद सुधियां खेतों में पहुंच चुकी थी जहां पर गेहूं गन्ने मकई की फसल लहरा रही थी।
सुधियां खेत के किनारे खड़ी होकर मुआयना कर रही थी चारों तरफ गेहूं मकई गन्ने दिख रहे थे।
सुधियां अपने खेतो में काम करने लगी।

दिन चढ़ चुका था गर्मी का मौसम था। ऐसे तेज धूप में हवाएं भी गर्म चल रही थी,,,,। धीरे धीरे सुधियां के माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी प्यास से उसका गला सूखने लगा,,,, उसे प्यास लगी थी इधर उधर नजर दौड़ाई तो कुछ ही दूरी उसके खेतो पर ट्यूबवेल मैसे पानी निकल रहा था जो कि खेतों में जा रहा था,,,। ट्यूबवेल के पाइप में से निकल रहे हैं पानी को देख कर सुधिया की प्यास और ज्यादा भड़कने लगी,,, वह अपनी जगह से उठी और ट्यूबेल की तरफ जाने लगी,, तेज धूप होने के कारण सुधियां,,, पल्लू को हल्के से दोनों हाथों से ऊपर की तरफ उठा कर जाने लगी,,, दोनों हाथ को ऊपर की तरह हल्कै से उठाकर जाने की वजह से सुधिया की चाल और ज्यादा मादक हो चुकी थी,,, हालांकि समय सुधिया पर किसी की नजर नहीं पड़ी थी लेकिन इस समय किसी की भी नजर उस पर पड़ जाती तो उसे स्वर्ग से उतरी हुई अ्प्सरा देखने को मिल जाती,,, बेहद ही कामोत्तेजना से भरपुर नजारा था। इस तरह से चलने की वजह से सुधिया की मद मस्त गोलाई लिए हुए नितंब कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आ रही थी,,, कुछ ही देर में सुधिया ट्यूबवेल के पास पहुंच गई और दोनों हाथ आगे की तरफ करके पानी पीने लगी,,, शीतल जल को ग्रहण करने से उसकी तष्णा शांत हो गई,,,

सुधियां कुछ देर वहीं रुक कर अपने चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मार कर अपने आप को तरोताजा करने का प्रयास करने लगी,,,,। पानी पीने के बाद..
सुधियां पास में ही पेड़ की छांव में बैठ गई

थोड़ी देर बाद सुधियां को बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह अपने आप पर बहुत ज्यादा संयम रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके लिए इस समय मोचना बेहद आवश्यक हो चुका था। क्योंकि ज्यादा देर तक वह अपनी पेशाब को रोक नहीं पा रही थी पेट में दर्द सा महसूस होने लगा था। सुधिया पेड़ के नीचे से उठी और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करते हुए अपने पेशाब को रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन कोई भी इंसान ज्यादा देर तक पेशाब को रोक नहीं सकता था इसलिए सुधियां को भी मुतना बेहद जरूरी था। उसे डर था कि खेतो से गुजरात हुवा कोई आदमी उस ना देख ले। इसलिए वह बड़े पेड़ के पास भी जंगली झाड़ियों के नीचे से होकर धीरे-धीरे पेशाब करने के लिए अंदर जाने लगी और एक जगह पर पहुंच कर वह इधर उधर नजरे दौरा कर देखने की कोशिश करने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उस को झाड़ियों में से दूसरा कोई नजर नहीं आ रहा था सुगंधा जहां पर खड़ी थी वहां पर कुछ ज्यादा ही झाड़ियां थी और वहां पर किसी की नजर पड़ने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी


इधर दोपहर को सूरज को बहोत जोरो की प्यास लगती थी सूरज खेतो में बने हेड पंप के पास पहुंचकर कर पानी पीने लगा जी भर के पानी पीने के बाद पानी से हाथ मुंह धो कर अपने आप को ठंडा करने की कोशिश करने लगा जब सूरज वहा से प्यास बुझा के खेतो में जाने लगा तभी उसकी आंखों के सामने से एक खरगोश का बच्चा भागता हुआ नजर आया और सूरज उसके पीछे पीछे जाने लगा सूरज उसे पकड़ना चाहता था उसके साथ खेलना चाहता था इसलिए जहां जहां खरगोश जा रहा था सूरज उसके पीछे पीछे चला जा रहा था।


सूरज खरगोश के पीछे पीछे भागता चला जा रहा था और तभी खरगोश उसकी आंखों के सामने एक घनी जंगली झाड़ियों के अंदर चला गया सूरज उस खरगोश को पकड़ लेना चाहता था इसलिए दबे पांव वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा उसके सामने घनी झाड़ियां थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था उसे मालूम था कि इसी झाड़ियों के अंदर खरगोश दुबक कर बैठा हुआ है इसलिए वह घनी झाड़ियों के करीब पहुंचकर धीरे धीरे पत्तों को हटाने लगा लेकिन उसे खरगोश नजर नहीं आ रहा था वह अपनी चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा लेकिन वहां खरगोश का नामोनिशान नहीं था वह निराश होने लगा वह समझ गया कि खरगोश भाग गया है और अब उसके हाथ में नहीं आने वाला लेकिन फिर भी अपने मन में चल रही इस उथल-पुथल को अंतिम रूप देते हुए वह अपने मन की तसल्ली के लिए अपना एक कदम आगे बढ़ाकर घनी झाड़ियों को अपने दोनों हाथों से हटाकर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन फिर भी परिणाम शून्य ही आया वह उदास हो गया वह अपने दोनों हाथों को झाड़ियों पर से हटाने ही वाला था कि उसकी नजर थोड़ी दूर की घनी झाड़ियों के करीब गई और वहां का खरगोश नजर आया सूरज को देख कर झाड़ियों के पास बिल था उसमे जा के छुप गया। सूरज धीरे से रेंगता हुवा घनी झाड़ियों के पास जा के खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार करने लगा।

इधर सुधिया
का पेशाब की तीव्रता उसके पेट में ऐठन दे रही थी सुधिया धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी यह नजारा बेहद ही कामुकता से भरा हुआ था लेकिन इस नजारे को देखने वाला वहां कोई नहीं था धीरे-धीरे सुधिया पूरी तरह से अपनी कमर तक अपनी साड़ी को उठा दी थी उसकी नंगी चिकनी मोटी मोटी जांगे पीली धूप में स्वर्ण की तरह चमक रही थी बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ यह नजारा देखने वाला वहां कोई नहीं था और वैसे भी सुधियां यही चाहती थी कि कोई उसे इस अवस्था में ना देख ले सुधिया साड़ी को अपनी कमर तक उठा कर एक हाथ से अपनी लाल रंग की कच्छी को नीचे की तरफ सरकाने लगी धीरे धीरे सुधिया अपनी पैंटी को अपनी मोटी चिकनी जांघों तक नीचे कर दी और आंखे बंद कर के तुरंत नीचे बैठ गई मुतने के लिए। सुधिया की बुर फैल कर खूब मोटी धार निकाल कर मुतना शुरू कर दिया मूत की धार सीधे झाड़ियों के ऊपर से दूसरी तरफ गिरने लगी जहापारी सूरज नीचे लेटा हुवा खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार कर रहा था।
जैसे ही सूरज के ऊपर सुधियां की मूत की धार गिरी सूरज चौक गया की ये बिन बादल बरसात केसे होने लगी।
इस लिए सूरज रेंगता हुवा थोडासा आगे गया और झाड़ीयो को हटा के देखने लगा और सामने का नजारा नजारा देखकर एकदम सन्न रह गया।
सूरज को एक बार फिर से अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मामी
सुधिया को बहुत जोरों से पेशाब लगी कर रही थी। जिससे सूरज का मुंह खुल गया और बूर से निकलती हुवी पेशाब की धार सीधे सूरज के मुंह में चली गई।
जैसे ही सूरज के मुंह में पेशाब की धार गिरी सूरज का गला फिर से सूखने लगा थोड़ी देर पहले हैंडपंप पर के पानी से अपनी प्यास बुझाई थी लेकिन सुधिया की बूर की मूत की धार ने उसकी प्यास बढ़ा दी थी। ओर सूरज बूर से निकलती हुवी मूत की धार को पीने लगा।
सूरज को अपनी किस्मत पर नाज होने लगा क्योंकि कुछ दिनों से उसकी किस्मत उसके पक्ष में चल रही था

इस समय सूरज की आंखों के सामने उसकी सुधिया मामी की गुलाबी बूर थी जो तेजी से पानी छोड़ रही थी। जिसे सुधिया आंखे बंद किए हल्के से उठाए हुए थी और सुधियां को इस तरह देख कर पलभर में ही उसका लंड धोती के अंदर तन कर लोहे के रोड की तरह हो गया था।

अब सूरज खरगोश के बिल को कब का भूल चुका था अब उसके सामने एक नया बिल था जो लगातार मूत की धार उसके मुंह में छोड़ रहा था और धोती में उसका फन फनता हुवा साप उस बिल में घुसाने को बेताब था।

सूरज लेटे हुवे अपने हाथों से लंड को मसलने लगा था सुधियां की गुलाबी बूर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी जिसकी वजह से उसमें से एक सीटी सी बजने लगी थी और इस समय सुधियां की बुर से निकल रही सीटी की आवाज सूरज के लिए किसी बांसुरी के मधुर धुन से कम नहीं थी सूरज उस मादकता से भरे नजारे और बुर से आ रही मूत की धार को पी रहा था।
सूरज को ऐसा लग रहा था की मानो की सुधियां मामी के बूर से निकलता हुवे मूत की धार कभी बंद ना हो और ऐसे ही चलती रहे।
सूरज उस मधुर धुन में खोने लगा

सुधिया आंखे बंद किए पूरी तरह से निश्चिंत थी कि उसे इस समय पेशाब करते हुए कोई नहीं देख रहा है लेकिन इस बात से अनजान थी कि उसका ही भांजा झाड़ियों के नीचे लेटा हुवा उसके बूर से निकलती पेशाब को पी रहा है।
थोड़ी देर में आंखे बंद किए सुधियां ने पेशाब कर ली लेकिन उठते हुवे अपनी गुलाबी पुर की गुलाबी पतियों में से पेशाब की बूंद को गिराते हुए हल्के हल्के अपने नितंबों को झटकने लगी।
लेकिन सुधियां की यह हरकत बेहद ही कामुकता से भरी हुई थी सूरज खुद अपनी मामी की इस हरकत को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया था कल की चुदाई के बाद का लंड बार बार खड़ा होने लगा था।
सूरज को अब रहा नहीं गया

जैसे ही सुधिया पेशाब कर के जैसे ही खड़ी होने वाली थी
तभी सूरज ने आगे बढ़ते
अपना मूह आगे कर दिया, और सुधिया की बूर से लगा कर उसकी चूत को अपने मूह मे भर लिया,
जिससे सुधियां के शरीर में कम्पन या जाता है वह डर जाति हे की नीचे क्या चीज है वह देखने के लिए नीचे झुकी नीचे का नजारा देख कर सुधिया दंग रह जाती हे की कोई लड़का अपना मुंह बूर से लगाए हुवे चूस रहा था।
सुधियां डरते हुवे कोन हो तुम...?
सूरज अपना मुंह बूर से थोड़ा पीछे हटाके के बोलता ही में हु मामी सूरज आपका भांजा और इतना कहके फिरसे
सुधिया की बूर को अपने मुंह में भर के जोर जोर से चूसने लगा।


सुधिया- बेटा तू ये क्या कर रहा है यह गंदी जगह ही इसे मत चाट मुझे छोड़ से में तेरी मामी हू कोई हमे देख लेगा

उसकी बातो कोई भी का असर अब सूरज पर नही हो रहा था सूरज अपनी ही मस्ती में जोर जोर से बूर का चाटने लगा


सूरज- सूरज लंबी लंबी जीभ निकाल कर सुधिया की बुर को खूब कस कर दबोचते हुए चाटने लगता है, सुधिया की चूत एक दम मस्त हो जाती है

सुधियां को भी अब मजा आने लगा था पाहिली बार उसकी बूर कोई चूस रहा था।

सूरज सुधिया की चूत को खूब ज़ोर से अपने मूह मे दबा कर चूसने लगता है,

अब सुधिया अपनी जाँघो को और फैला देती हे और उसकी चूत को सूरज के मुंह में दबाने लगती है।

सूरज पागलो की तरह उसकी चूत को चूसने लगता है और सुधिया उसके सर को पकड़ कर खूब ज़ोर से अपनी चूत से
दबा लेती है,

सूरज किसी पागल कुत्ते की तरह सुधिया की पूरी बूर खोल खोल कर उसका रस चाटने और चूसने लगता है और

सुधिया अपनी चूत खूब कस कस कर सूरज के मूह पर दबा दबा कर रगड़ने लगती है,


सुधिया- आह सीईईईई कितना ज़ोर से चाट रहा है बेटे, ज़रा आराम से चाट आह आहह आह आ सीईईईईईईईई ओह सूरज...


सुधिया के पैर अब थरथराने लगे और सुधिया नीचे जमीन पर गिर गई
अब सुधियां अपने पैरों को हवा में जितना हो सके फैलाते हुए अपनी कसी कसी मांसल जाँघों को खुलकर अपने सूरज के लिए खोल दिया, जिससे उनकी बूर उभरकर सूरज के मुंह के सामने आ गयी और दोनों फांकें खुलकर फैल गयी, हल्के धूप कि रोशनी में सूरज अपनी मामी की फैली हुई बूर को देखकर और भी पागल हो गया और उसने अपनी लंबी सी जीभ निकाली, फिर जीभ को बूर के नीचे अंतिम छोर पे गांड की छेद के पास लगाया और सर्रर्रर्रर्रर से पूरी बूर को चाटता हुआ नीचे से एकदम ऊपर तक आया, सूरज के ऐसा करने से सुधिया फिरसे बौखला गयी और मदहोशी में अपनी आंखें बंद करके अपने होंठों को दांतों से काटते हुए बड़ी जोर से सिसकी और आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई.......... अम्मामामामामा......सूरजबेटा.... ऐसे बोलते हुए
पूरे बदन को धनुष की तरह ऊपर को मोड़ती चली गयी, उसकी विशाल चूचियाँ तनकर ऊपर को उठ चुकी थी और निप्पल तो इतने सख्त हो गए थे कि वो खुद ही उन्हें हल्का हल्का मसल रही थी।

बूर की पेशाब और काम रस की गंध से सूरज पागल हो चुका था, उसने इसी तरह कई बार पूरी की पूरी बूर को नीचे से लेकर ऊपर की तरफ विपरीत दिशा में लप्प लप्प करके चाटा, जब सूरज बूर के ऊपरी हिस्से पर पहुचता तो बूर के ऊपर बालों में अपनी जीभ फिराता और फिर जीभ को फैलाके गांड की छेद के पास रखता और फिर सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर से लपलपाते हुए पुरी बूर पर जीभ फिराते हुए ऊपर की ओर आता और कभी तो वो ऊपर आकर बूर के ऊपर घने बालों पर जीभ फिराता कभी जहां से दरार शुरू होती है वहां पर जीभ को नुकीली बना कर दरार में डुबोता और भगनासे को जी भरकर छेड़ता, फिर बूर के दाने के किनारे किनारे जीभ को गोल गोल घूमता।

सुधिया की पूरी बूर सूरज के थूक से गीली हो चुकी थी, उसकी बूर से निकलता काम रस सूरज बराबर अपनी जीभ से चाट ले रहा था, पूरी झाड़ियों में हल्की हल्की चप्प चप्प की आवाज के साथ दोनों मामी भांजे की सिसकियां गूंजने लगी।

सूरज ने फिर एक बार अपनी जीभ को नीचे गांड के छेद के पास लगाया और इस बार उसने जीभ को नुकीला बनाते हुए जीभ को अपनी मामी की बूर की दरार में नीचे की तरफ डुबोया और दरार में ही डुबोये डुबोये नुकीली जीभ को नीचे से खींचते हुए ऊपर तक लाया, पहले तो एक बार जीभ मामी की बूर के छेद में घुसने को हुई पर फिर फिसलकर ऊपर चल पड़ी और बूर के दाने से जा टकराई, फिर सूरज ने वहां ठहरकर बूर के दाने को लप्प लप्प करके कई बार चाटा।

सुधिया के बदन की एक एक नस आनंद की तरंगों से गनगना उठी, बड़ी ही तेज तेज उसके मुँह से अब सिसकियां निकल रही थी मानो अब लाज, संकोच और डर (की कोई सुन लेगा) जैसे हवा हो चुका था, अपने पैरों को मोड़कर उसने सूरज की पीठ पर रख लिया था,

गनगना कर कभी वो अपने सूरज को पैरों से जकड़ लेती कभी ढीला छोड़ देती। बेतहासा कभी अपना सर दाएं बाएं पटकने लगती, कभी अपने हांथों से चूचीयों को कस कस के मीजती, सुधिया मस्ती में नीचे की तरफ नही देख रही थी, उसकी आंखें अत्यंत नशे में बंद थी, कभी थोड़ी खुलती भी तो वो हल्का सा आसमान को देखती।

उनकी सांसे बहुत तेज ऊपर नीचे हो रही थी, लगातार उसके सूरज उसकी बूर को एक अभ्यस्त खिलाड़ी की भांति चाटे जा रहे थे, जीवन में पहली किसी मर्द की जीभ उसकी बूर पर लगी थी और वो भी खुद उसके भांजे की, आज पहली बार वो सूरज से अपनी बूर चटवा रही थी, इतना परम सुख उसे कभी नही मिला..
सूरज की मर्दाना जीभ की छुअन से सुधीया नशे में कहीं खो गयी थी।

झाड़ियों में से बूर चाटने की चप्प चप्प आवाज सिसकियों के साथ गूंज रही थी। एकएक सूरज को कुछ कमी महसूस हुई वो और ज्यादा गहराई से अपनी मामी बूर को खाना चाहता था, उसने मामी के बूर से मुँह हटाया तो उसके होंठों और मामी की बूर की फाँकों के बीच लिसलिसे कामरस और थूक के मिश्रण से दो तीन तार बन गए, सूरज ने बड़ी मादकता से उसे चाट लिया और उठने लगा।

उसने दहाड़ते हुए अपनी दो उंगलियों से अपनी मामी की बूर की फांकों को अच्छे से चीरा, एक तो जांघे फैलने से बूर पहले ही खुली हुई थी ऊपर से सूरज ने उंगलियों से फांकों को और चीर दिया जिससे बूर का लाल लाल छेद और बूर का दाना धूप की रोशनी में चमक उठा, सूरज लपकते हुए बूर पर बेकाबू होकर टूट पड़ा और जीभ से बूर के लाल लाल कमसिन कसे हुए छोटे से छेद को बेताहाशा चाटने लगा।

सुधियां का बदन अचानक ही बहुत तेजी से थरथराया और सुधिया ने
आ...हा.. आहा... ओ हो... ऊ महा....
कहते हुए बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज को सिसकते हुए दबाया।

सूरज लप्प लप्प जीभ से अपनी मामी की बूर के छेद को चाटे जा रहा था, सुधिया फिर से तड़प तड़प कर अपना सर दाएं बाएं पटकती, पूरा बदन ऐंठती, गनगना जाती, अपनी मुठ्ठियों को कस कस के भीचती, तो कभी अपने स्तन भींच लेती, अपने पैरों को उसने फिर से अपने सूरज की पीठ पर लपेट दिया और जब जब उसका बदन थरथराता वो अपने पैरों से अपने बाबू को जकड़ लेती।

सूरज ने थोड़ी देर अपनी मामी की बूर के छेद को चाटा फिर अपनी जीभ को नुकीला किया और बूर के नरम नरम से लाल लाल छेद के मुहाने पर गोल गोल घुमाने लगा, सुधिया अब जोर जोर से काफी तेज तेज छटपटाने और सिसकने लगी, उसे क्या पता था कि उसके सूरज बूर के इतने प्यासे हैं, वो बूर के इतने अच्छे खिलाड़ी हैं, वो बूर चाटने में इतने माहिर है, ऐसा सुख तो उसके पति ने कभी सपने में भी नही दिया, उसे पता लग चुका था कि उसके सूरज अपनी मामी की बूर के कितने भूखे हैं।

झाड़ियों में काफी तेज तेज सिसकारी गूंजने लगी।
सूरज ने एक बार फिर से पूरी बूर को नीचे से ऊपर की ओर अपनी जीभ से लपलपा के चाटा, सूरज का अब इरादा था अपनी जीभ अपनी मामी के बूर की छेद में डालने का पर इतने भर से ही सुधियां अब काफी त्राहि त्राहि करने लगी, उसके मुँह से अब थोड़ी ज्यादा जोर से
आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई..........अम्मामामामामा..................सूरज................हाहाहाहाहायययययय..............आआआआआआहहहहहह......
सिसकते हुए निकलने लगा।


उसकी बुर के अंदर बाहर करते हुए अपनी जीभ को उसकी बुर के बीचो बीच रखकर चाटते हुए उसे मजा देने लगा सूरज की हरकत की वजह से सुधियां के मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फिर से फूटने लगी,,, सुधिया की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,, उसका संपूर्ण वजुद कांपने लगा और देखते ही देखते,,, सुधियां जोर से सिसकारी लेते हुए झड़ने लगी,,,,, उसकी गुलाबी बुर के छेद से,, मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी,,,, लेकिन सूरज ने उस मदनरस की एक भी बूंद को जाया नहीं देना चाहता था,,, इसलिए अपनी जीभ लगाकर लपालप उसे पीना शुरू कर दिया,,,सिसकारी लेती हुई सुधिया सूरज की हरकत देखकर एकदम से सिहर उठी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक मर्द औरत की बुर से निकला हुआ उसका नमकीन पानी इस कदर चाट चाट कर अपनी गले के नीचे उतार लेता है,,,,, सुधिया झाड़ चुकी थी सुधिया हेरान भी थी कि,,, बिना बुर में लंड डाले उसकी बुर इतना पानी छोड़ रही थी,,,।
लेकिन उसे इस तरह से पानी छोड़ते हुए बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,, सुधियां कुछ देर तक उसी तरह से जमीन के ढेर हुइ।

अब सुधियां काफी गरम हो गई उसकी बूर अब लंड मांग रही थी।
सुधिया ने सिसकते हुए सूरज से कहा- बेटा, अपना लंड मोटा सा लंड, एक बार अपनी मामी की पनियायी बूर में गूसा दो, बस एक बार हल्का गूसा दो


मामी ने इस अदा से निवेदन किया कि सूरज अपनी मामी की अदा पर कायल ही हो गया।

सूरज - आआआआआहहहहहह......मामी, तूम अपने आप ही लंड खोलकर बूर में गूसा दो मेरी रानी, डुब लो जितना तेरा मन करे, ये तो तेरी ही अमानत है मामी।

इतना कहकर सूरज अपने दोनों हाँथ मामी की कमर के अगल बगल टिकाकर मामी के ऊपर झुक सा गया और अपनी मामी की आँखों में देखने लगा दोनों मुस्कुरा दिए और कई बार एक दूसरे के होंठों को चूमा।

सुधियां ने अपने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा जो अभी भी उसकी टांगो में फसा हुआ था और दूसरे हाँथ से उसने अपने भांजे के लोहे के समान हो चुके सख्त लंड को धोती के ऊपर से पकड़ लिया, ९ इंच लंबे और ४ इंच मोटे विशाल लंड को पकड़कर सुधिया गनगना गयी, वासना की मस्ती उसके नसों में दौड़ गयी, कितना बड़ा लन्ड था सूरज का, उसके भांजे का, उसपर वो उभरी हुई नसें, सुधियां की मस्ती में आआआआहहहह निकल गयी।
( कल चुदाई के दौरान सुधियां ने सूरज के लंड को बूर में महसूस किया था मगर हात से छुआ नहीं था )

सुधियां - ओह बेटा कितना सख्त हो रखा है तुमारा लंड, कितना मोटा है ये.......हाय........ कितना लंबा है.......ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़


सूरज- हाँ मेरी मामी ये सिर्फ और सिर्फ अब आपका है।


सुधिया ने कुछ देर पूरे लन्ड को आँहें भरते हुए सहलाया फिर दूसरे हाँथ से कच्छी को छोड़कर हाँथ को पीछे कमर पर ले गयी और धोती को कमर पर से ढीला किया, सूरज ने अपनी मामी की आंखों में देखते हुए अपनी धोती को खोलने में मदद की, धोती काफी हद तक ढीली हो गयी थी सूरज ने एक हाँथ से धोती खोलकर बगल रख दी, नीचे से वो पूरा नंगा हो गया ऊपर बनियान पहनी हुई थी, अपनी मामी के ऊपर वो दुबारा झुक गया और उसकी आँखों में देखते हुए उसे चूम लिया,
सुधिया सिसकते हुए अपने भांजे के निचले नग्न शरीर पर हाँथ फेरने लगी, उसने जाँघों को छूते हुए सूरज के लन्ड के ऊपर के घने बालों में हाँथ फेरा और फिर लंड को पकड़कर कराहते हुए सहलाने लगी,
सुधियालंड को मुट्ठी में पकड़कर पूरा पूरा सहलाने लगी, सिसकते हुए सहलाते सहलाते वो नीचे के दोनों बड़े बड़े आंड को भी हथेली में भरकर बड़े प्यार से दुलारने लगी और सहलाने लगी,
अपनी मामी की नरम मुलायम हांथों की छुअन से सूरज की नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने सिसकते हुए अपने एक हाँथ से अपनी कच्छी को दुबारा साइड किया और दूसरे हाँथ से लंड को सहलाते हुए बड़े प्यार से उसकी आगे की चमड़ी को पीछे की तरफ खींचकर खोला, दो बार में उसने लन्ड की चमड़ी को उतारा, खुद ही तेजी से ऐसा करते हुए जोश में सिसक पड़ी, क्योंकि एक मामी मां के लिए अपने ही बेटे समान भांजे की लंड की चमड़ी खोलना बहुत ही वासना भरा होता है


पहली बार में तो उसने चमड़ी को सिसकते हुए खाली फूले हुए सुपाड़े तक ही उतारा और चिकने सुपाड़े पर बड़े प्यार से उंगलिया फेरते हुए कराहने लगी मानो उसे नशा चढ़ गया हो, दोनों मामी भांजा एक दूसरे की आंखों में नशे में देख रहे थे, सूरज मामी की कमर के दोनों तरफ अपना हाथ टिकाए उसके ऊपर झुका हुआ था और सुधियां अपने दोनों पैर फैलाये साड़ी को कमर तक उठाये एक हाथ से अपनी कच्ची को साइड खींचें हुए, दूसरे हाँथ से अपने सूरज का लंड सहलाते हुए उसकी आगे की चमड़ी को पीछे को खींचकर उतार रही थी।


सुधिया के मुलायम हाँथ अपने चिकने संवेदनशील सुपाड़े पर लगते ही सूरज आँहें भरने लगा, अपने भांजे को मस्त होते देख सुधियां और प्यार से उनके सुपाड़े को सहलाने और दबाने लगी, अपने अंगूठे से सुधियांने अपने भांजे के लंड के पेशाब के छेद को बाद प्यार से रगड़ा और सहलाया, उसकी भी मस्ती में बार बार आंखें बंद हो जा रही थी, बार बार सिरह जा रही थी वो, बदन उसका गनगना जा रहा था मस्ती में, फिर उसने अपने भांजे के लंड की चमड़ी को खींचकर पूरा पीछे कर दिया और अच्छे से अपने भांजे के पूरे लंड को अपने मुलायम हांथों से सहलाने लगी।


फिर काफी देर सहलाने के बाद सुधिया ने एक हाँथ से अपनी कच्छी को साइड किया और अपने भांजे के लंड को अपनी बूर की रसीली फांकों के बीच रख दिया, जैसे ही सुधियां ने बूर पे लंड रखा दोनों मामी भांजा मस्ती में जोर से सीत्कार उठे-


सुधिया-आआआआआआआआआआहहहहहहहहहह...........ईईईईईईईशशशशशशशशश..........हाहाहाहाहाहाहाहाहायययययय........बेटा....…...आआआआआआहहहहह


सूरज - आआआआआआहहहहह.......मेरी मामी.....कितनी नरम है तेरी बूबूबूबूररररर..........ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़........मजा आ गया।


आज जीवन में पहली बार सूरज के लंड को, इतना असीम आनंद मिलेगा कभी सपने में भी नही सोचा था, सुधिया कराहते हुए अपने भांजे के लंड का सुपाड़ा अपनी दहकती बूर की फांक में रगड़ती जा रही थी, दोनों के नितम्ब हल्का हल्का मस्ती में थिरकने लगे, सूरज हल्का हल्का लंड को बूर की फांक में खुद रगड़ने लगा, पूरे बदन में चिंगारियां सी दौड़ने लगी, बूर से निकलता लिसलिसा रस लंड के आगे के चिकने भाग को अच्छे से भिगोने लगा, सुधिया ने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा हुआ था पर अब उसने उसको छोड़कर वो हाँथ अपने भांजे के हल्के हल्के धक्का लगाते चूतड़ पर रख कर कराहते हुए सहलाने लगी, बीच बीच में हाँथ से उनके चूतड़ को अपनी बूर की तरफ मचलते हुए दबा देती, दहाड़ते लंड का मोटा सा सुपाड़ा मखमली बूर की फाँकों में ऊपर से नीचे तक रगड़ खाने लगा, सूरज को इतना मजा आया कि वह धीरे धीरे अपनी मामी के ऊपर लेटता चला गया, सुधिया अपने दोनों हांथों को वहां से हटा कर बड़े प्यार से अपने भांजे को अपनी बाहों में भरकर मस्ती में दुलारने लगी, अत्यंत नशे में दोनों की आंखें बंद थी।


सूरज अपनी मामी के बाहों में समाए, उसपर लेटे हुए अपनी आंखें बंद किये अपने लंड को बूर की फाँकों में रगड़ते हुए नरम नरम फांकों का आनंद लेने लगा। सुधिया हल्का हल्का मस्ती में आंखें बंद किये आआआहहहह ह......आआआहहहहह करने लगी।


सुधियां ने बड़ी मुश्किल से अपनी नशीली आंखें खोली उसका का सारा ध्यान सिर्फ अपने भांजे के मोटे दहकते लन्ड पर था जो कि लगातार धीरे धीरे उसकी सनसनाती बूर की रसीली फांकों में नीचे से ऊपर तक बार बार लगातार रगड़ रहा था, वो मुलायम चिकना सुपाड़ा बार बार जब सुधियां की बूर के फांकों के बीच दाने से टकराता तो सुधियां का बदन जोर से झनझना जाता, पूरे बदन में सनसनाहट होने लगती।


सुधिया ने कराहते हुए अपने दोनों पैर मोड़कर अच्छे से फैला रखे थे, सूरज एक लय में अपने मोटे लंड को अपनी मामी की बूर की फांकों में रगड़ रहा था, सुधिया भी मादक सिसकारियां लेते हुए धीरे धीरे अपनी गांड को अपने भांजे के लंड से ताल से ताल मिला के उठाने लगी और अपनी बूर को नीचे से उठा उठा के लंड से रगड़ने लगी।


सुधियां की कच्छी का किनारा बार बार सूरज के लंड से रगड़ रहा था तो

सूरज ने धीरे से मामी के कान में बोला - मेरी प्यारी मामी


नीलम - हाँ मेरे प्यारे बेटे


सूरज - अपनी कच्छी पूरा उतार न, तब अच्छे से मजा आएगा।


सुधिया - हाँ बेटा तुम उठो जरा।


सूरज मामी के ऊपर से उठ जाता है उसका लंड भयंकर जोश में झटके लिए जा रहा, ९ इंच लंबा लंड पूरा खुला हुआ था, लोहे के समान सख्त और खड़ा था, सुधिया ने कराहते हुए अपनी छोटी सी कच्छी निकाल फेंकी और जल्दी से अपनी साड़ी भी खोल कर झाड़ियों में बगल में रख दी, अब सुधिया के बदन पर सिर्फ ब्लॉउज रह गया था नीचे से वो बिल्कुल नंगी हो गयी थी।


अपनी मामी को इस तरह अपने भांजे के सामने आज पूरी नंगी होते देख सूरज वासना में कराह उठा,
सूरज अपनी मामी का पुर्णतया नग्न निचला हिस्सा देखकर बौरा गया, सुधियां ने कच्छी और साड़ी उतारकर फिर से अपनी दोनों जांघें अच्छे से फैला कर अपनी बूर को अपने भांजे के सामने परोस दिया, सूरज एक पल तो मामी की मादक सुंदरता को देखता रह गया, फिर एकएक कराहते हुए उसने अपनी शादीशुदा मामी के पैरों को एड़ी और तलवों से चाटना शुरू किया, सुधियां तेजी से सिसक उठी,
दोनों पैरों की एड़ी, तलवों को अच्छे से चूमता चाटता वह आगे बढ़ा, घुटनों को चूमता हुआ वह जांघ तक पहुँचा, दोनों जाँघों को उसने काफी देर तक अच्छे से खाली चूमा ही नही बल्कि जीभ निकाल के किसी मलाई की तरह अच्छे से चाटा, सुधिया वासना से गनगना गयी, सूरज अपनी मामी की अंदरूनी जांघों को अच्छे से चूम और चाट रहा था, सुधिया रह रह कर झनझना जा रही थी।


सूरज जांघों को चाटते हुए वह महकती बूर की तरफ बढ़ा, बूर फिरसे लगातार लिसलिसा काम रस बहा रही थी,
सूरज ने एक बार फिर बूर को मुँह में भर लिया और एक जोरदार रसीला चुम्बन अपनी मामी की बूर पर लिया, सुधिया जोर से सिसकारते हुए चिंहुककर उछल सी पड़ी, बदन उसका पूरी तरह गनगना गया, कराहते हुए सुधियां ने खुद ही एक हाँथ से अपनी महकती पनियायी बूर को चीर दिया और सूरज मस्ती में आंखें बंद किये अपनी मामी की बूर को लपा लप्प चाटने लगा, सुधियां हाय हाय करने लगी, सुधिया कभी अपनी बूर की फांकों को फैलाती तो कभी अपने भांजे के गाल को सहलाती, कभी जोश में झनझनाते हुए अपने भांजे की पीठ पर कस के नाखून गड़ा देती, सुधिया के ऐसा करने से सूरज को और भी जोश चढ़ जा रहा था और वो और तेज तेज बूर को चाटे जा रहा था।


सुधियां जब अपनी उंगली से बूर की फांक को फैलाती तो सूरज तेज तेज बूर की लाल लाल फांक में जीभ घुमा घुमा के चाटता, कभी फूले हुए बूर के दाने को जीभ से छेड़ता कभी मुँह में भरकर चूसता, फिर कभी मामी की बूर के छेद में जीभ डालता और जीभ को अंदर डाल के हल्का हल्का गोल गोल घुमाता।


सुधिया वासना में पगला सी गयी, जोर जोर से सिसकने लगी, कराहने लगी, अपने भांजे के सर को कस कस के अपनी रसभरी बूर पर दबाने लगी, अपनी गांड को उछाल उछाल के अपनी बूर चटवाने लगी,


ओओओओहहहह..............बेटा...............हाय मेरी बूर...............कितना अच्छा लग रहा है बेटा................हाय तुमारी जीभ................ऊऊफ्फफ................ चाटो ऐसे ही बेटा...................मेरी बरसों की प्यास बुझा दो....................आआआआआआहहहहह................मेरे बेटे..........मेरे राजा.............मेरी बूर की प्यास सिर्फ तुमसे बुझेगी....................... तुमसे.....................ऐसे ही बूर को खोल खोल के चाटो मेरे बेटे........................अपनी मामी की बूर को चाट चाट के मुझे मस्त कर दो...................ऊऊऊऊईईईईईई अम्मा..................... कितना मजा आ रहा है..............ऊऊऊऊऊफ़्फ़फ़फ़


काफी देर तक यही सब चलता रहा और जब सुधियां से नही रहा गया तो उसने अपने भांजे को अपने ऊपर खींच लिया, सूरज अपनी मामी के ऊपर चढ़ गया, लन्ड एक बार फिर जाँघों के आस पास टकराता हुआ बूर पर आके लगा, लंड पहले से ही खुला हुआ था सुधिया ने कराहते हुए लंड को पकड़ लिया और मस्ती में आंखें बंद कर अपनी बूर की फांकों को दुबारा फैला कर उसपे रगड़ने लगी।


सुधियां ने जोर से सिसकते हुए अपने भांजे को अपनी बाहों में भर लिया और सूरज अपने लंड को अपनी मामी की बूर की फांक में तेज तेज रगड़ने लगा, जब झटके से लंड बूर की छेद पर भिड़ जाता और अंदर घुसने की कोशिश करता तो सुधियां दर्द से चिहुँक जाती पर जल्द ही लन्ड उछलकर ऊपर आ जाता और बूर के दाने से टकराता तब भी सुधिया जोर से सिस्कार उठती।


सुधिया ने अपने भांजे से सिसकते हुए बड़ी मादक अंदाज़ में कहा- बेटा...अच्छा लग रहा है अपनी मामी की बूर का स्वाद।


सूरज - आहा मामी मत पूछ कितना मजा आ रहा है, कितनी नरम और रसीली बूर है मामी की......हाय


सुधियां अपने भांजे के मुँह से ये सुनकर शरमा ही गयी।

सुधियां - बेटा

सूरज - हाँ मेरी मामी

सुधियां - अब घुसा न लंड अपना मेरी बूर में, रहा नही जाता अब, घुसा न अपना लंड मेरी बूर के रसीले छेद में।


सूरज अपनी मामी के मुँह से इतना कामुक आग्रह सुनकर वासना से पगला गया और उसने अपनी मामी के दोनों पैरों को उठाकर फैलाकर अच्छे से अपनी कमर पर लपेट लिया, सुधियां भी अच्छे से पैर फैलाकर लेट गयी और सूरज ने अपने लंड का मोटा सुपाड़ा अपनी शादीशुदा मामी की रस बहाती महकती प्यासी बूर की छेद पर लगाया, सुधियां की बूर बिल्कुल संकरी नही थी क्योंकि कल ही सूरज ने उसकी बुर को अपने लंड से खोला था
उसके भांजे का लंड उसके पति के लंड से डेढ़ गुना बड़ा और मोटा था। सुधियां की बूर रस छोड़ छोड़ के बहुत रसीली हो चुकी थी, चिकनाहट भरपूर थी, सूरज ने अपने विशाल लंड का दबाव अपनी मामी की बूर की छेद में लगाना शुरू किया और अपने दोनों हाँथ नीचे ले जाकर अपनी मामी की गांड को पकड़कर ऊपर को उठा लिया जिससे सुधिया की बूर और ऊपर को उठ गई।
सुधियां से बर्दाश्त नही हो रहा था तो उसने कराहते हुए बोला , डालो न अपना मोटा लंड अपनी मामी की बुर में,अब मत तड़पाओ बेटा।


सूरज ने दहाड़ते हुए एक दो बार लंड को बूर के छेद पर फिरसे रगड़ा और एक हल्का सा धक्का मारा तो लंड फिसलकर ऊपर को चला गया, सुधिया तेजी से वासना में चिहुँक उठी, हाहाहाहाहाहाहाहाहायययय .......अम्मा.......ऊऊऊऊऊईईईईईईईईईई,


बूर रस बहा बहा कर बहुत चिकनी हो गयी थी और उसका छेद सूरज के लंड के सुपाड़े के हिसाब से छोटा था, जैसे ही लंड फिसलकर ऊपर गया और तने हुए बूर के दाने से टकराया सुधियां तड़प कर मचल गयी आआआआआहहहह.......उई अम्मा,
सूरज ने जल्दी से बगल में रखा घास का ढेर उठाया और सुधियां की चौड़ी गांड के नीचे लगाने लगा, सुधियां ने भी झट गांड को उठाकर घास के ढेर लगाने में मदद की,
घास का ढेर लगने से अब सुधिया की बूर खुलकर ऊपर को उठ गई थी, क्या रिस रही थी सुधियां की बूर, तड़प तड़प के लंड मांग रही थी बस,
सुधियां फिर बोली- बेटा अब डाल दो न, अब चला जायेगा, नही फिसलेगा, डाल से बेटा, चोद दो मुझे अब।


सूरज ने जल्दी से लंड को दुबारा दहकती बूर के खुल चुके छेद पर लगाया और एक तेज धक्का दहाड़ते हुए माrar, मोटा सा लंड कमसिन सी बूर के छेद को चीरता हुआ लगभग आधा मखमली बूर में समा गया, सुधिया की जोर से चीख निकल गयी,


हाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाययययययय............बेटा..........आआआआहहहहहह............धीरे से बेटा.............. मेरी बूर.............ओओओओओहहहहह बेटा............कितना मोटा है तुमारा......... दर्द हो रहा है बेटा...........ऊऊऊईईईईईईई.......अम्मा...............बस करो बेटा...........रुको जरा...............आआआआहहहहहह......कितना अंदर तक चला गया है एक ही बार में............आआआआहहहहहह


सूरज की भी इतनी नरम कमसिन बूर पा के मस्ती में आह निकल गयी,


सूरज ने झट उसके मुँह पर हाथ रख दिया, सुधिया का पूरा बदन ही ऐंठ गया,

सूरज ने झट से सुधियां के मुँह को दबा लिया उसकी आवाज अंदर ही गूंजकर रह गयी, एक हांथ से सूरज ने सुधिया का ब्लॉउज खोल डाला और ब्रा का बटन पीछे से खोलने लगा तो उससे खुल नही रहा था, सुधिया ने दर्द से कराहते हुए ब्रा खोलकार अपने भांजे की मदद की और ब्लॉउज और ब्रा को निकालकर बगल रख दिया,
सूरज अपनी मामी की इस वफाई पर कायल हो गया एक तो उसको कल चुदाने के बाद भी काफी दर्द भी हो रहा था फिर भी वो अपने भांजे को अपना प्यार दे रही थी, ब्लॉउज और ब्रा खोलकर उसने खुद ही उतार दिया, इतना प्यार सिर्फ मां समान मामी ही अपने बेटे समान भांजे को दे सकती है, सूरज ने बड़े प्यार से अपनी मामी को चूम लिया।


ब्रा उतरते ही सुधियां की बड़ी बड़ी मादक तनी हुई विशाल चूचीयाँ उछलकर बाहर आ गयी, उन्हें देखकर सूरज और पागल हो गया, निप्पल तो कब से फूलकर खड़े थे सुधिया की चूची के, दोनों चूचीयों को देखकर सूरज उनपर टूट पड़ा और मुँह में भर भरकर पीने लगा, दोनों हांथों से कस कस के दबाने लगा, कभी धीरे धीरे सहलाता कभी तेज तेज सहलाता, लगातार दोनों चूचीयों को पिये भी जा रहा था, निप्पल को बड़े प्यार से चूसे जा रहा था, लगतार अपने भांजे द्वारा चूची सहलाने, मीजने और चूमने, दबाने से सुधिया का दर्द कम होने लगा और वो हल्का हल्का फिर सिसकने लगी, आह....सी......आह.... सी......ओह बेटा....ऐसे ही.....और चूसो......दबाओ इन्हें जोर से.........हाँ मेरे बेटे......पियो मेरी चूची को.........आह, बोलते हुए सुधिया सिसकने लगी, उसका दर्द अब मस्ती में बदलने लगा, अपनी मामी की मखमली रिसती बूर में अपना आधा लंड घुसाए सूरज बदहवासी में उसे चूमे चाटे जा रहा था।

सूरज ने सुधियां के मुँह पर से हाँथ हटा लिया पर अभी भी वो दर्द से हल्का सा कराह दे रही थी, सूरज ने उसे बाहों में भर लिया और सुधियां भी अपने भांजे से मस्ती में कराहते हुए लिपट गयी,
सूरज मामी को बेताहाशा चूमने लगा, सुधियां की दर्द भरी कराहटें अब पूरी तरह मीठी सिसकियों में बदल रही थी, सूरज अपनी मामी के होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा,
सुधिया ने भी मस्ती में अपने भांजे के चेहरे को बड़े प्यार से अपने हांथों में लिया और आंखें बंद कर उनका साथ देने लगी,
सूरज ने हल्का सा अपनी गांड को गोल गोल घुमाया तो लन्ड बूर की रस भरी दीवारों से घिसने लगा, सुधियां को बहुत अच्छा लगा और वो अपने भांजे का मोटा सा मूसल जैसा लंड अपनी बूर में अच्छे से महसूस करने लगी, कितना अच्छा लग रहा था अब, सुधियां की तो नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने खुद ही अब नशे में अपना हाँथ अपने भांजे की गांड पर ले जाकर उसे हल्का सा आगे की तरफ दबा कर और लंड डालने का इशारा किया, सूरज अपनी मामी के इस आमंत्रण पर गदगद हो गया और उसे चूमते हुए एक जोरदार धक्का गच्च से मारा, इस बार बिरजू का ९ इंच लंबा और ४ इंच मोटा लंड पूरा का पूरा सुधिया की रस बहाती बूर में अत्यंत गहराई तक समा गया, सुधियां की दर्द के मारे फिर से चीख निकल गयी पर इस बार उसने खुद ही अपना मुँह अपने भांजे के कंधों में लगाते हुए दर्द के मारे उनके कंधों पर दांत गड़ा दिए और उसके नाखून भी सूरज की पीठ पर गड़ गए, सूरज वासना में कराह उठा, एक बेटे का लंड मामी की बूर की अत्यंत गहराई में उतर चुका था, पूरी बूर किसी इलास्टिक की तरह फैलकर लंड को जकड़े हुए थी।


सूरज का लंड अपनी मामी की दहकती बूर के छेद की मखमली दीवारों को चीरकर उसे खोलता हुआ इतनी गहराई तक समा चुका था कि सुधियां बहुत देर तक अपनी उखड़ती सांसों को संभालती रही, अपने भांजे के कंधों में मुँह गड़ाए काफी देर सिसकती रही और बीच बीच में गनगना कर कस के अपने भांजे से लिपट जाती और उनकी पीठ को दबोच कर दर्द से कराह जाती, सूरज अपनी मामी को बड़े प्यार से बार बार चूमने लगा, उसके पूरे बदन को वो बड़े प्यार से सहलाने लगा, कमर, जाँघे, पैर, बगलें, कंधे, गाल, गर्दन, और मस्त मस्त दोनों सख्त चूचीयाँ वो बार बार लगातार सहलाये जा रहा था साथ ही साथ लगातार उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसे जा रहा था।


सुधिया को अपने भांजे का लंड अपनी बूर में इतनी गहराई तक महसूस हुआ कि वो दर्द के मारे एक पल के लिए दूसरी दुनियाँ में ही चली गयी, अभी तक जो लंड सुधिया की बूर में जाता था वो बस इसका आधा ही जाता था जो उसके शराबी पति का था और सुधिया को लगता था कि बूर में बस इतनी ही जगह है पर आज उसे पता चल गया कि उसके भांजे के लंड ने उसकी मखमली बूर की अनछुई रसभरी गहराई को भेदकर, वहां तक अपना अधिकार स्थापित कर दिया है, उसकी बूर की अत्यंत गहराई में छुपे रसीले अनछुए रस को आज उसके भांजे का लंड वहाँ तक पहुंचकर बड़े अधिकार से उसपर विजय पताका फहरा कर बड़े प्यार से उसे अपना इनाम समझ कर पी रहा है
और सुधिया की मखमली बूर की रसभरी अंदरूनी दीवारें इस छोर से लेकर उस छोर तक पूरे ९ इंच लंबे ४ इंच मोटे लंड से पूरी तरह कसकर लिपटी हुई उस मेहमान का बड़े ही दुलार से चूम चूम के बूर के अंदर आने का जमकर स्वागत कर रही थी, पहले जो लंड आता था उसके पति था पर आज जो लंड बूर में आया है उससे भांजे का कुवारा लंबा मोटा लंड है,
सुधियां की बूर की मखमली रसभरी अंदरूनी दीवारें उसके अंदर पूरी तरह घुसे हुए भांजे के लंड से लिपटी उसे चूम चूम के उसका स्वागत कर रही थीं मानो कह रही हों कि अब तक कहाँ थे आप, कब से तरस गयीं थी हम आपको छूने और चूमने के लिए।


सुधियां को ये सब महसूस कर दर्द के साथ साथ एक तरह से असीम आनंद भी होने लगा, सूरज अपनी मामी को उसकी बूर में अपना पूरा लंड ठूसे लगातार चूमे और सहलाये जा रहा था, वह सुधिया के होंठों को अपने होंठों में भरकर पीने लगा, सुधिया को अब फिर मजा आने लगा, दर्द सिसकियों में बदलना शुरू हो गया, लिपट गयी वो खुद ही अपने भांजे से अच्छी तरह और ताबड़तोड़ चूमने लगी सूरज को,
सूरज समझ गया कि अब उसकी मामी तैयार है बूर चुदवाने के लिए, सुधियां की बूर से लगातार रस बह रहा था।

काफी देर तक लंड बूर में पड़े रहने से बूर उसको अच्छे से लीलकर अभ्यस्त हो गयी थी।
सूरज ने अपनी मामी के पैरों को अपने कमर पर अच्छे से लपेटते हुए धीरे से लंड को थोड़ा बाहर खींचा और गच्च से दुबारा बूर की गहराई में उतार दिया, सुधिया मीठे मीठे दर्द से सिरह उठी, सूरज बार बार ऐसा ही करने लगा वह थोड़ा सा लंड को निकलता और दुबारा बूर में पेल देता, सुधियां को ये सब बहुत अच्छा लग रहा था,
सूरज अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर लंड को बूर की गहराई में अच्छे से रगड़ता तो सुधिया मस्ती में कराह जाती, जोर जोर से उसकी सीत्कार निकलने लगी।


सूरज अब पूरी तरह सुधिया से लिपटते हुए धीरे धीरे लंड को बूर से बाहर निकाल निकाल के गच्च गच्च धक्के मारने लगा, उसने अपनी मामी के होंठ अपने होंठों में भर लिए और चूसते हुए थोड़े तेज तेज अपनी मामी को चोदने लगा।


सुधिया का दर्द धीरे धीरे जाता गया और चुदाई के मीठे मीठे सुख ने उसकी जगह ले ली। सुधिया को ऐसा लग रहा था कि आज उसकी बूर की बरसों की भूख मिट रही है, इतना आनंद आजतक उसे कभी नही आया था, मोटे से लंड की रगड़ बूर की गहराई तक हो रही थी, सूरज का लंड अपनी ही मामी की बच्चेदानी के मुँह पर जाकर ठोकर मारने लगा जिससे सुधियां का बदन बार बार वासना में थरथरा जा रहा था, एक असीम गहरे सुख में सुधीया का बदन गनगना जा रहा था।


सुधियां - आआआआआआहहहहह.......हाय बेटा.....चोदो मुझे........चोदो अपनी मामी को.........कितना मजा आ रहा है, कितना प्यारा है तुमारा लंड........कितना मोटा और लम्बा है मेरे भांजे का लंड......... हाय बेटा.....ऐसे ही चोदते रहो अपनी मामी को.......हाय

सूरज अब अपनी मामी की रसभरी बूर में हचक हचक के थोड़ा और तेज तेज अपना मोटा लन्ड पेलने लगा, बूर बिल्कुल पनिया गयी थी, बहुत रसीली हो चुकी थी, लंड अब बहुत आसानी से बूर के अंदर बाहर होने लगा था, सूरज ने अब और अच्छी पोजीशन बनाई और अपनी मामी की चूचीयों को मसलते हुए उन्हें पीते हुए, निप्पल को मुँह में भर भरकर चूसते चाटते हुए कस कस के बूर में पूरा पूरा लंड हचक हचक कर पेलने लगा,
बीच में सूरज रुकता और अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर अपने मोटे लंड को अपने मामी की बूर की गहराई में किसी फिरकी की तरह घूमने की कोशिश करता जिससे लंड बूर की गहराई में अच्छे से उथल पुथल मचाता और रगड़ खाता, इससे सुधिया मस्ती में हाय हाय करती हुई सीत्कार उठती।


दोनों की मादक सिसकारियां थोड़ी तेज तेज गूंजने लगी, सुधिया लाख कोशिश करती की तेज सिसकी न निलके पर क्या करे मजा ही इतना असीम आ रहा था कि न चाहते हुए भी तेज सिसकियां निकल ही जा रही थी, बूर इतनी रसीली हो चुकी थी की बूर चोदने की फच्च फच्च आवाज़ आने लगी, एक लय में हो रही इस चुदाई की आवाज से दोनों मामी भांजा और मस्त होने लगे,
सुधियां तो अब मस्ती में नीचे से अपनी चौड़ी गांड उठा उठा के चुदाई में अपने भांजे का साथ देने लगी,
९ इंच लंबे लंड का रसीली प्यासी बूर में लगातार आवागमन सुधिया को मस्ती के सागर में न जाने कहाँ बहा ले गया।


सूरज अब सुधिया को पूरी ताकत से हुमच हुमच कर जोर जोर चोदने लगा, नीचे से घास का ढेर उनकी चुदाई से बिखरने लगा,
झाड़ियों में दोनों मामी भांजे की सिसकिया गूंजने लगी, साथ में चुदाई की फच्च फच्च आवाज भी आने लगी थी, माहौल बहुत गर्म हो चुका था, किसी को अब होश नही था, सुधिया का पूरा बदन उसके सूरज के जोरदार धक्कों से हिल रहा था,
सूरज अपनी मामी पर चढ़ा हुआ उसे घचा घच्च लंबे लंबे धक्के लगाते हुए चोदे जा रहा था। बूर बिल्कुल खुल गयी थी अब, लंड एक बार पूरा बाहर आता और दहाड़ता हुआ बूर की गहराई में उतर जाता, हर बार तेज तेज धक्कों के साथ नीचे से अपनी गांड को उछाल उछाल के चुदाई में ताल से ताल मिलाते हुए सुधिया सीत्कार उठती थी।

आह...........बेटा............हाय ऐसे ही चोदो मुझे............ऐसे ही चोदो अपनी मामी को....
...........अपनी मामी को...............ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़................. ऊऊऊऊईईईईईई..............अम्मा............चोद डालो बूर मेरी बेटा..............अच्छे से चोदो अपने लंड से मेरी बूर को बेटा...................आआआआआहहहहहहहह......... सिर्फ तुमरे मोटे लंड से बेटा.........सिर्फ तुमारा लंड से............हाय......... चोदो मेरे बेटे और तेज तेज चोदो अपनी मामी को..........हाय दैय्या........कितना मजा आ रहा है।


सूरज भी मस्ती में करीब 20-25 मिनट तक लगातार सुधिया की बूर में हचक हचक के लन्ड पेल पेल के चोदता रहा, सुधिया और सूरज के तन बदन में एक जोरदार सनसनाहट होने लगी, सुधिया की बूर की गहराई में मानो चींटियां सी रेंगने लगी, लगातार अपने भांजे के जोरदार धक्कों से उसकी बूर में सनसनी सी होने लगी और एकाएक उसका बदन ऐंठता चला गया, गनगना कर वो चीखती हुई अपने नितम्ब को उठा कर अपने भांजे से लिपटकर झड़ने लगी,

आआआआआहहहहह...........बेटामैं गयी.......... तुम्हारी मामी झड़ रही है बेटा.............ओओओओहहहह ह........हाय....... मैं गयी बेटा........और तेज तेज चोदो बेटा.........कस कस के पेलो मेरी बूर........ऊऊऊऊईईईईई.......बेटा.........हाय मेरी बूर...…..….कितना अच्छा है मेरे बेटे लंड.........आआआआआहहहहह


सूरज का लंड तड़बतोड़ सुधियां की बूर चोदे जा रहा था, सुधिया सीत्कारते हुए जोर जोर हाय हाय करते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ने लगी, सूरज को अपनी मामी की बूर के अंदर हो रही हलचल साफ महसूस होने लगी, कैसे सुधिया की बूर की अंदरूनी दीवारें बार बार सिकुड़ और फैल रही थी, काफी देर तक सुधिया बदहवास सी सीत्कारते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ती रही।


सूरज तेज तेज धक्के लगते हुए सुधीया की बूर चोदे जा रहा था, वह बड़े प्यार से चोदते हुए अपनी मामी को दुलारने लगा,
इतना मजा आजतक जीवन में सुधियां को कभी नही आया था, चरमसुख के असीम आनंद में वो खो गई, अब भी उसके भांजे का लंड तेज तेज उसकी बूर को चोदे जा रहा था, कभी कभी वो बीच बीच में तेजी से सिस्कार उठती, बूर झड़ने के बाद बहुत ही चिकनी हो गयी थी, सूरज का लंड अपनी मामी के रस से पूरा सन गया था, सुधिया का बदन अब ढीला पड़ गया वो बस आंखें बंद किये हल्का हल्का सिसकते हुए चरमसुख के आनंद में डूबी हुई थी कि तभी सूरज भी जोर से सिसकारते हुए एक तेज जबरदस्त धक्का अपनी मामी की बूर में मारते हुए झड़ने लगा, धक्का इतना तेज था कि सुधिया जोर से चिहुँक पड़ी आह........ बेटा......... हाय

एक तेज मोटे गाढ़े वीर्य की पिचकारी उसके लंड से निकलकर सुधिया की बूर की गहराई में जाकर लगी तो सुधियां उस गरम गरम लावे को अपनी बूर की गहराई में महसूस कर गनगना गयी और तेजी से मचलकर सिसकारने लगी बड़े प्यार से उसने अपने भांजे को अपनी बाहों में कस लिया और उनके बालों को सहलाने लगी, प्यार से दुलारने लगी, सूरज का मोटा लंड तेज तेज झटके खाता हुआ वीर्य की मोटी मोटी धार छोड़ते हुए अपनी मामी की बूर को भरने लगा, अपनी मामी के बूर में उसका गाढ़ा गरम वीर्य भरने लगा,
गरम गरम सूरज का वीर्य सुधियां की बूर से निकलकर गांड की दरार में बहने लगा और नीचे घास के ढेर को भिगोने लगा, सूरज काफी देर तक हाँफते हुए अपनी मामी की बूर में झाड़ता रहा,
आज उसे एक गदरायी कमसिन मखमली बूर मिली थी और भी उसकी मामी की, सूरज सच में अपनी मामी की बूर चोद कर निहाल हो चुका था, सूरज और सुधिया ने असीम चरमसुख का आनंद लेते हुए एक दूसरे को कस के बाहों में भर लिया और बड़े प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे, और अपनी सांसों को काबू करते हुए एक दूसरे को बाहों में लिए लेटे रहे।


सूरज का लंड थोड़ा शिथिल हो गया था पर सुधिया की बूर के अंदर ही घुसा हुआ था, सुधिया अपने भांजे के शिथिल हो चुके लंड को महसूस कर मुस्कुरा उठी, उसको अपने भांजे के लंड पर बहुत प्यार आ रहा था, जैसे कोई छोटा बच्चा खा पीकर सो गया हो ठीक वैसे ही उसके भांजे का लंड उसकी बूर में पड़ा हुआ था।

दोनो की चुदाई में इतना समय गुजर चुका था की,
आसमान में शाम का अंधेरा छाने लग गया,
सुधियां अपने भांजे के चेहरे को अपने हांथों में थाम लेती है और बड़े प्यार उसके ओठ चूमते हुए बोलती है
ओ मेरे बेटे मेरे बलमा, मजा आया, अपनी मामी को चोदके।

सूरज - हां मेरी मामी, मेरी सजनी बहुत मजा आया, पर मन नही भरा अभी।

सुधियां - हाय मेरे राजा, मेरा बेटा जिस मामी से उसका भांजा का मन एक ही बार में भर जाए तो उस मामी का हुस्न किस काम का, हम्म।

सूरज - सच, तुम तो कयामत हो मामी, कयामत, तुमें मजा आया।

सुधियां - बहुत बेटे....बहुत..मुझे तो बहुत मजा आया अपने भांजे का मोटा लंड अपनी बूर को खिलाकर,
देखो न बेटा अभी भी मेरी बूर कैसे चुपके चुपके हौले हौले तुम्हारे लंड को चूम रही है,

जैसे छोटी बच्ची मुँह में लॉलीपॉप लिए सो जाती है वैसे ही देखो न मेरी बुरिया भी कैसे तेरा लंड मुँह में लिए लिए सो सी रही है।
सच बेटा मुझे बहुत मजा आया, ऐसा सुख मुझे आजतक नही मिला था, बेटा एक बात बोलूं

सूरज - बोल न मेरी रानी

सुधियां धीरे से कान में - बेटा आज मुझे पहली बार चरमसुख प्राप्त हुआ है

सूरज मामी को आश्चर्य से देखते हुए- क्या, सच में।

सुधिया - हाँ, बेटा

सूरज - मामाजी अभी तक तुमें चरमसुख नही दे पाये?

सुधिया - चरमसुख लुल्ली से नही मिलता बाबू, औरत को चरमसुख तो मिलता है.....

सूरज - बोल न, रुक क्यों गयी मेरी जान।

सुधिया - चरमसुख तो मिलता है भांजे मोटे से लंड से, और तेरा तो लंड भी नही है

सूरज आश्चर्य से- फिर, अगर ये लंड नही है तो क्या है मेरी मामी, बता न।

सुधियां - बेटा समझ जाओ न।

सूरज - नही समझ आ रहा, तूम ही बता दो।

सुधिया ने थोड़ा रुककर फिर अपने बेटे के कान में सिसकते हुए बोला- तुम्हारा तो लौड़ा है लौड़ा, क्योंकि जिस तरह आपने अपनी मामी की कमसिन बूर को चोदा है वो एक लौड़ा ही कर सकता है, ये किसी लुल्ली के बस के नही

सूरज अपनी मामी के मुँह से ये शब्द सुनकर अचंभित रह गया और जोश में उसने एक धक्का खींच के बूर में मारा तो सुधिया जोर से चिंहुँक पड़ी आआआआआआआहहहहहहहह!

सूरज - तुमें मेरा लंड इतना पसंद आया।

सुधियां - लंड नही बेटा लौड़ा......आह.... लौड़ा, बहुत मजेदार है मेरे भांजे का लौड़ा। मैं तो तेरी दिवानी हो गयी मेरे भांजे, तुम्हारी मामी तेरी दीवानी हो गयी और भांजे का लंड क्यों मामी को पसंद नही आएगा भला, कितना रोमांचक होता है भांजे का लंड......आआआआआहहहह

सूरज मामी के कान में- लंड नही लौड़ा, मेरी मामी लौड़ा, अब खुद ही भूल गई।

सुधिया - हाँ मेरे प्यारे सैयां, लौड़ा, तुम्हारा लौड़ा, डालोगे न हमेशा अपना लौड़ा मेरी बुर में बेटा, बोलो न, मुझे तरसाओगे तो नही इस मस्त लौड़े के लिए कभी।

सूरज - न मेरी मामी, मैं तो खुद तुम्हारी मखमली बूर के बिना नही रह सकता अब। कितनी रसभरी है मेरी मामी की बूर....आह


शाम के समय मौसम थोड़ा ठंडा होने की वजह से सुधियां को फिरसे पेशाब लगी, उसके भांजे का लंड उसकी बूर में समाया हुआ था ही,
वह बोली- बेटा, देखो शाम हो गई ही सब हमारा इंतजार कर रहे होगे अगर हम नही मिले तो हमे ढूंढते हुवे यहा पर भी आ सकते ही हमे चलाना चाहिए

सूरज- हाँ मेरी जान, हमे चलाना चाहिए वैसे भी विलास मामा दोपहर से मुझे ढूंढ कर परेशान हो गए होगे।

ओर सूरज ने अपना फौलाद हो चुका लंड सुधिया की बूर में से बाहर निकाला तो सुधिया आह करके सिसक उठी।
सुधिया - बेटा मुझे पेशाब आ रहा है

सूरज - तो पिला दो न, इसमें पूछना क्या मेरी जान

सुधिया चौंकते हुए- क्या, फिरसे तुम पेशाब पियोगे?

सूरज - हाँ, पिला दे तेरा मूत मामी

सुधिया - मेरा मूत पियोगे, अपनी मामी का

सूरज - हाँ, प्यास बहुत लगी है

सुधियां- बहुत प्यास लगी है मेरे बेटे को, ठीक ही बेटे अभी पिलाती हू।

सूरज- ठीक है हुज़ूर


सूरज शाम की हलकी सी रोशनी में देखने लगा, दोनों मामी भांजा पूरे नंगे थे,
सूरज सुधियां को देखता रह गया, सुधिया भी अपने भांजे को वासना की नज़रों से निहारती रही, एक बार शाम की हलकी रोशनी में दोनों ने जब एक दूसरे को पूर्ण नग्न देखा तो रहा नही गया और दोनों एक दूसरे की बाहों में कस कर लिपट गए और एक दूसरे के बदन को मस्ती में सहलाने लगे, कुछ देर बाद

सुधिया - बेटा जोर से पिशाब आ रहा है।

सूरज ये सुनते ही फट घास पर लेट गया और सुधिया शाम की हलकी रोशनी में कराहते है अपने बेटे के सीने पर से अपनी बूर उसके मुँह के सामने करके बैठ गयी,

हलकी की रोशनी में अपनी मामी की महकती बूर जिसको अभी कुछ देर पहले ही सूरज ने घच्च घच्च चोद चुका था, देखकर फिर मदहोश हो गया, उस बूर की छेद से अभी भी उसका वीर्य हल्का हल्का निकल रहा था, जो गवाही दे रहा था कि एक मामी अपने ही भांजे से अच्छे से चुदी है।

बूर देखते ही सूरज ने अपने दोनों हांथों को सुधियां के नितम्ब पर रखा और आगे को ठेलकर उसकी रसभरी बूर को मुँह में भर लिया,
सुधियां जोर से सिसक उठी और खुद भी उसने मचलते हुए अपने भांजे का सर पकड़कर अपनी बूर उनके मुँह में रगड़ने लगी, सूरज लप्प लप्प अपनी मामी की बूर को चाटने लगा तो एक दम से सुधियां को झुरझुरी महसूस हुई और उसका पेशाब निकल गया, आआआआआआआआहहहह...........दैय्या, बेटा........आआआआहहहहह, सुधियां की बूर की फैली हुई दोनों फांकों के बीच से गरम गरम महकता हुआ पेशाब सुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर की आवाज के साथ सूरज के पूरे मुँह को भिगोने लगा, पेशाब छोड़ती बूर को सूरज जीभ निकाल के पहले तो चाटने लगा, फिर बूर को मुँह में भरकर अपनी मामी का मूत पीने लगा, क्या महक थी मामी के पेशाब की और मूतते हुए सुधिया क्या लग रही थी,
दोनों मामी भांजे की आंखें मस्ती में बंद थी, सूरज लपा लप सुधिया का पेशाब कभी चाटता कभी पीता, सूरज का पूरा चेहरा, उसकी गर्दन और सीना सब सुधियां के पेशाब से भीग चुका था, सुधियां अपने पेशाब से अपने भांजे को भिगोते हुए उनको बड़ी मादकता से देखती भी जा रही थी, काफी हद तक सूरज सुधियां का पेशाब पी चुका था,
एकाएक सुधियां ने अपनी उंगली से कराहते हुए अपनी बूर की फाँकों को चीरा और पेशाब की धार छोड़ती फैली हुई बूर को एकदम से अपने भांजे के मुँह में भर दिया और बोली- लो बेटा अपनी मामी का पेशाब, अब खत्म होने वाला है जल्दी पूरा पी लो..

सूरज ने लप्प से अपनी मामी की बूर को मुँह में भरा और सारा मूत पी गया, पेशाब बन्द होने के बाद सुधिया ने अपनी बूर अपने बेटे के मुँह से बाहर खींची और एक पल के लिए उनके सारे भीगे हिस्से को कामुकता से देखने लगी और बोली- कैसा लगा मेरे बेटे

सूरज - मेरे पास शब्द नही हे मामी , ऐसा मजा आजतक नही आया था।

सुधियां उठकर अपने बेटे के ऊपर लेट गयी और बोली- अब मैं अपने प्यारे बेटे को ऐसे ऐसे मजे दूंगी की तुमरी जिंदगी बदल जाएगी

सूरज का लंड सुधिया की बूर पर फिरसे दस्तक देने लगा, सूरज अपने दोनों हाँथों से सुधियां की गांड को भी सहलाने लगा, सुधियां सिसकते हुए अपने भांजे के चेहरे और गर्दन पर लगे पेशाब को मस्ती में चाटने लगी तो सूरज भी मस्ती में कराहने लगा- आह मेरी जान मामी

सुधिया मस्ती में अपने भांजे को चूमती चाटती हुई नीचे की तरफ बढ़ने लगी, सूरज उसके बालों को सिसकते हुए सहलाने लगा, सुधियां अपने भांजे के दुबारा तन चुके लन्ड तक आयी और हलकी की रोशनी में अपने सूरज का खड़ा लन्ड निहारने लगी,
उसने उसको हाँथ से पकड़ा और चमड़ी को धीरे से उतारा तो उसकी आंखें अपने भांजे के मोटे सुपाड़े और उस पर पेशाब के छेद को देखकर मस्ती में भर गई, उसने अपने भांजे की तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोली- कितना प्यारा है बेटा ये, बहुत प्यारा है मेरे मर्द का लंड और ऐसा कहते हुए सुधियां अपने भांजे का लंड हौले हौले चूमने लगी, पहली बार लंड पर अपनी मामी के गरम होंठ महसूस कर सूरज जन्नत में खो गया, कितने गरम चुम्बन दे रही थी सुधियां उसके लंड पर, धीरे धीरे चूमने के बाद सुधियां जीभ निकाल कर अपने भांजे के लंड चाटने लगी, सूरज मस्ती में उसका सर पकड़े अपने लंड को हौले हौले मामी के मुँह में खुद भी ठेलने लगा, अपनी मामी को अपना लंड चुसवाने में कितना मजा आ रहा था।

सुधिया आंखें बंद किये अपने भांजे का लंड बड़ी लगन से चूसे जा रही थी और अपने मन में सिसकते हुए सोचे जा रही थी कि लंड अगर दमदार हो तो चूसने का मजा ही कुछ और है, कभी वो सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसती, कभी उसपर जीभ फिराने लगती, कभी तो पूरे लंड को जड़ तक मुँह में भरने की कोशिश करती पर न हो पाता, कभी दोनों आंड को मुँह में भरकर पीती, लंड पर लगे उसकी बूर का रस और वीर्य का मिश्रण उसने कब का चाट चाट के साफ कर दिया था,
कभी जीभ नुकीली बना के अपने भांजे के लंड के छेद पर गोल गोल फिराती जिससे सूरज झनझना के मचल जाता, सूरज खुद भी मामी का सर पकड़ कर अपना लन्ड उसके मुँह में अंदर बाहर कर रहा था और जोर जोर से कराहते जा रहा था- ओह.... मामी.....कितने प्यारे हैं तेरे होंठ, कितने नरम है......मेरी प्यारी मामी इतना मजा तो मुझे आजतक नही आया......ओह मेरी रानी.......मजा आ गया

सुधिया - आह.....बेटा क्या लंड है तुम्हारा.......मेरा तो जीवन सवर गया इसे पाकर....... मैं तो दीवानी हो गयी अब इसकी............इसके बिना अब मैं रह नही सकती।


जैसे ही सुधिया ने ये शब्द बोला सूरज ने अपना लंड मुंह से निकल कर सुधियां की मखमली रिसती बूर में अंदर तक एक ही बार में घुसेड़ दिया।

सुधिया जोर से कराह उठी और मस्ती में अपने भांजे से लिपट गयी।

सूरज - हाय....क्या नशा है तेरी बातों में मामी....सच

कुछ देर तक सूरज मामी की बूर में लन्ड पेले पड़ा रहा और सुधिया अपने भांजे की पीठ सहलाती रही।

सुधियां सिसकते हुए बोली- बेटा मजा आ रहा हे और

सुधियां ने एक चपत अपने भांजे की पीठ पर मारा तो सूरज ने जवाब में लन्ड बूर में से आधा निकाल के एक धक्का जोर से मारा, सुधियां गनगना गयी।

सुधीया - हाय बेटा.....धीरे से......ऊऊऊऊईईईईईई धीरे से बेटा


सूरज धीरे धीरे लंड बूर में अंदर बाहर करने लगा

सुधिया सिसकने लगी और बोली- थोड़ी भी देर के लिए लंड को बूर में घुसे हुए रोककर आराम नही करने देते ये मेरे राम.....बाबू

सूरज- क्या करूँ मेरी मामी, तेरी बूर है ही इतनी मक्ख़न की डालने के बाद रुका ही नही जाता।

सुधियां सिसकते हुए- बेटा

सूरज - हाँ मेरी रानी

सुधियां - अपने मामा के सामने अपनी मामी को चोदोगे?

सूरज - मामा के सामने.....मतलब

सूरज बराबर बूर को हौले हौले चोद रहा था और दोनों सिसकते भी जा रहे थे

सुधिया - तेरे मामा ने मुझे बाहोत तड़पाया हे सताया हे में परेशान हो गई हू उससे में बदला लेना ही मुझे तुम इसमें मेरी मदत करोगे
मेरा मतलब वो पास में हो या बगल में सोता हो और तुम अपनी मामी को चोदना........हाय कितना मजा आएगा.....कितना रोमांच होगा।

सूरज को ये सोचकर अत्यधिक रोमांच सा हुआ कि कैसा लगेगा एक ही बिस्तर पर या फिर सामने मेरा मामा होगा और मैं अपनी मामी को उसके पति के मौजूदगी में चोदुंगा।

रोमांच में आकर उसने अपने धक्के थोड़ा तेज ही कर दिया, सुधिया के दोनों पैर उठाकर अपनी कमर पर लपेट दिए और थोड़ा तेज तेज अपनी मामी की बूर में लंड पेलने लगा, सुधियां की तो मस्ती में आंखें बंद हो गयी, क्या मस्त लौड़ा था उसके भांजे का, कैसे बूर के अंदर बाहर हो रहा था। मस्ती में वो अपने भांजे की पीठ सहलाने लगी और उन्हें दुलारने लगी।

सूरज - हां मेरी जान, मजा तो बहुत आएगा पर ये होगा कैसे,

सुधियां - हाँ बेटा......आह..... उई....बेटा जरा धीरे धीरे हौले हौले चोदो....बात तो तुम सही कह रहे हो, तुम अगर घर आकर मुझे अपने पति के मोजुदगी में चोदोगे रोमांच से बदन कितना गनगना जाएगा,

सूरज - तेरी बूर के बिना मैं भी नही रह सकता मेरी जान,


सूरज जोश में आकर हुमच हुमच कर सुधियां की रसीली बूर चोदने लगा, दोनों इस कल्पना से कामुक हो जा रहे थे और घचा घच्च चुदाई भी कर रहे थे, सुधियां कभी कभी तेजी से सिसक देती तो कभी कभी वासना में अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदने लगती।

सूरज - हां मेरी मामी ये भी सही कहा तूने, तू ही किसी बहाने तुम मुझे घर बुला फिर तेरे पति के मोजुदगी तुझे चोदूंगा।

सुधिया - मेरे पति के सामने

सुधियां ने आंख नाचते हुए कहा

सूरज- हां तेरे पति के सामने ही तो मेरे मामा के सामने

सुधिया - पगलू मेरे पति तो सिर्फ और सर्फ तुम हो, वो तो बस नाम के हैं अब से

सूरज - अच्छा जी

सुधियां - हम्म

सूरज - मैं तो भांजा हू तेरा

सुधियां- पति भी हो और भांजा तो हो ही....

सूरज - हाँ ठीक मामी

सूरज तेज तेज जोश में धक्के मारने लगा, सुधियां मस्ती में गांड उठा उठा के चुदवाने लगी, तेज तेज सिसकियों की आवाज गूंजने लगी, दोनों पूर्ण रूप से नंगे थे। तेज तेज धक्कों से सुधियां का पूरा बदन हिल रहा था, जोर जोर से सिसकते हुए वो अपने भांजे को सहलाये और दुलारे जा रही थी और वासना में सराबोर होकर कामुक बातें बोले जा रही थी
हाँ बेटा ऐसे ही चोदो..........ऐसे
ही हुमच हुमच के तेज धक्के मारो.......मेरी बुर में............आह बेटा.............ऊऊऊऊईईईईईई........... थोड़ा किनारे से बूर की दीवारों से रगड़ते हुए अपना लंड अपनी इस मामी की बूर में पेलो.......रगड़ता हुआ बच्चेदानी तक जाता है तो जन्नत का मजा आ जाता है बेटे जी...........मेरे बेटे जी..........आह..... मेरे पति जी.........चोदो अपनी पत्नी को..........तरस मत खाओ...........बूर तो होती ही है जमके चोदने के लिए..............एक बार और चोद चोद के फाड़ दो मेरी बूर...........आआआआआहहहहहहह

सुधियां ऐसे ही बड़बड़ाये जा रही थी और सूरज तेज तेज धक्के मारे जा रहा था, एकाएक सूरज ने सुधियां की चूची को मुँह में भरा और पीने लगा, मस्ती में सुधियां और मचल गयी, पूरा बदन उसका वासना में एक बार फिर ऐंठने सा लगा, एकाएक बाहर कुछ लोगों की हल्की हल्की आवाजें आने लगी।

सुधियां तो पूरी मस्ती में थी पर सूरज के कान खड़े हो गए, अभी तक तो वो यही सोच रहे थे कि शाम हो रही है तो कौन नही आएगा,
तभी विलास मामा जोर जोर से सूरज को आवाज़ देने लगे
सूरज ने मन में कोसते हुए उठने की कोशिश की तो सुधियां ने उनकी कमर को थाम लिया और पूछा- बेटा क्या हुआ चोदो न, रुक क्यों गए।

सूरज - लागत हे मामा पास में ही हे हमे चलाना चाहिए बहोत देर हो गई हे।

सुधियां - पर मेरी बुरिया वो रोने लगेगी।
वहीं जिसके मुँह से आप निवाला छीन रहे हो, देखो न कैसे मजे से खा रही है।

सूरज आश्चर्य से- कौन?....किसके मुँह से निवाला छीन रहा हूँ, मैं समझा नही।

सुधियां - अरे मेरे बुध्धू राम........ये

ऐसा कहते हुए सुधिया ने बड़ी अदा से अपने भांजे का हाँथ पकड़ा और अपनी बूर पर ले गयी जो सूरज का पूरा लंड लीले हुए थी, और दोनों नीचे देखने लगे, लंड पूरा बूर में घुसा हुआ था।

सुधियां - किसी के मुँह से निवाला नही छीनते बेटा, देखो कैसे बेसुध होकर मस्ती में तुम्हारा मोटा लंड खा रही है मेरी ये बुरिया, अब आप निकाल लोगे तो ये रोने लगेगी और फिर चुप कराए चुप भी नही होगी,
अभी आधी मजधार में न छोड़ो इसे, न रुलाओ बेटा इसको, इसके हक़ का खा लेने दो इसे पूरा। अब निवाला मुँह में ले रखा है तो खा लेने दो पूरा अपनी इस मामी की बुरिया को।

इतना सुनते ही सूरज ने सर उठा के सुधिया की आंखों में देखा तो सुधिया खिलखिला के हंस भी दी और वासना भारी आंखों से विनती भी करने लगी की बेटा अभी चोदो रुको मत चाहे आग ही लग जाये पूरी दुनिया को।

सूरज ने बड़े प्यार से मामी के गाल को चूम लिया और बोला- बहुत प्यारी प्यारी बातें आती है मेरी मामी को, तेरी इन बातों का ही दीवाना हूँ मैं।

सुधिया सिसकते हुए- मामी नही पत्नी, आज से पत्नी हूँ न आपकी मैं।

सूरज - हां मेरी पत्नी, अब तो चाहे कुछ भी हो अपनी पत्नी को चोद के ही छोडूंगा।

और फिर सूरज ने सुधियां के ऊपर अच्छे से चढ़ते हुए अपने दोनों हांथों से उसके विशाल साइज की चौड़ी गांड को अपने हांथों से उठा लिया और अपना मोटा दहाड़ता लंड तेज तेज धक्कों के साथ पूरा पूरा बूर में डाल डाल कर कराहते हुए रसीली बूर चोदने लगा,
सुधिया की दुबारा सिसकिया निकलने लगी, कुछ ही देर में पूरी झाड़ियों में मादक सिसकियों से गूंज उठा, पूरी घास तेज धक्कों से बिखर गई, करीब 10 मिनट की लगातार मामी भांजे की धुँवाधार चुदाई से दोनों के बदन थरथराने लगे और दोनो ही एक बार फिर तेज तेज हाँफते हुए कस के एक दूसरे से लिपट गए और सीत्कारते हुए एक साथ झड़ने लगे, कुछ देर तक झड़ने के बाद दोनों शांत होकर एक दूसरे को चूमने सहलाने लगे फिर सूरज ने एक जोरदार चुम्बन सिधिया के होंठों पर लिया और बोला

अब जलादि से साड़ी पहनो मामी हमे जाना चाहिए नही तो मामा चिला चिला कर आसपास के लोगो को इकट्ठा कर देंगे और फिर कही हम पकड़े न जाए
सुधियां जलादि कच्छी ब्रा पहन कर के साड़ी पहन लेती
ओर सूरज भी धोती पहन कर तयार हो जाता है।
ओर दोनो चुपके से से झाड़ियों से निकल कर गेहूं के खेतो से होते हुवे बाहर निकलने लगाते है
तभी विलास की नजर उन दोनो पे पड़ती है
ओर दोनो भी विलास मामा को सामने देख कर डर जाते हे।

विलास - दोपहर से तू कहा था तू शाम हो गई फिर भी तेरा आता पता नही हे।ओर में तुझे कबसे आवाज दे रहा हु और सुधिया भाभी के साथ क्या कर रहा हे।

सूरज - डरते हुवे वो में वो मामी के खेत का बांध टूट गया था और सारा पानी पास के खेत में जा रहा था इस लिए में दोपहर से मामी की बांध लगाने में मदत कर रह था।

विलास - अच्छा हुवा की तुमने भाभीजी की मदत की,
पर बेटा आज बिजली जलादि चली जाने की वजह से खेतो की सिंचाई नहीं हो पाई अब हमे रात को खेत आ के पानी देना होगा क्योंकि कल दिन में बिजली नही हे।
भाभीजी आपके खेत की सिंचाई हुवी की नही

सुधिया - नही भाई साहब अब रात में ही देना पड़ेगा पर में अकेली ये सब कैसे करूंगी,

विलास - फिकर मत कीजिए में रात में अपना खेत संभाल लूंगा और सूरज आपकी मदत करेगा,

सुधीया - ठीक हे भाई साहब

विलास ठीक ही अब जल्दी घर चलते ही बहोत देर हो गई हे फिर हमे वापस खेतो में आना हे।

तो तीनों मिलके घर जी और निकल पड़ते हे।
विलास आगे आगे चल रहा था और सूरज और सुधियां पीछे पीछे
तभी सूरज ने मामी को कस के बाहों में भर लिया और बोला देख न मामी ये फिर से खड़ा हो गया हे अपने धोती में बने तंबू को दिखते हुवे

सुधियां - अब नही बेटा... आज रात खेत में जमके चोदना।
सूरज ये बात सुन के ज़ूम उठा की अपनी प्यारी मामी को आज रात भर खेत में चोदेगा।
थोड़ी देर में सभी अपने घर पहुंच जाते थे।
अब सूरज को रात का इंतजार था।
Superb update bro

Ab to aisa lagta hai ki suraj sudhiya ki din raat lega aur jald hi mangla ka bhi number lagne wala hai

Keep it up
 

sunoanuj

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Bahut hi behtarin update …
 
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A.A.G.

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भाग ९

रात को सभी ने खाना खाया और सब सोने के लिए कमरे में चले गए। सूरज को आज थकान के कारण जलादि नींद अयि ये थकान सुधीया मामी के चुदाई के कारण आइ थी।
सुबह सूरज और विलास दोनो हर रोज की तरह खेतो पे निकल गए। खेतो से गुजरते हुवे सूरज ने सुधियां मामी की खेतो में देखा सुधिया मामी कही नजर अति हे क्या पर सुधियां मामी उसे नजर नहीं आती।
विलास और सूरज खेत पहुंच कर काम करने लगे

सुधियां कल की बात को सपना समझ कर सुबह अपनी मस्ती में उबड़ खाबड़ रास्तों से खेतों की तरफ चली जा रही थी,,,, ( सुधियां का पति खेती में कुछ भी मदत नही करता था सारा खेतो का काम सुधियां अकेली ही देखती थी उसका बेटा पप्पू भी दोस्तो के साथ दिन भर आवारा गस्ति करते घुमाता था अपनी मां की बिलकुल भी मदत नही करता था )

इसलिए सुधियां ज्यादातर वक्त खेतों में हीं गुजरता था,,,,

कुछ देर बाद सुधियां खेतों में पहुंच चुकी थी जहां पर गेहूं गन्ने मकई की फसल लहरा रही थी।
सुधियां खेत के किनारे खड़ी होकर मुआयना कर रही थी चारों तरफ गेहूं मकई गन्ने दिख रहे थे।
सुधियां अपने खेतो में काम करने लगी।

दिन चढ़ चुका था गर्मी का मौसम था। ऐसे तेज धूप में हवाएं भी गर्म चल रही थी,,,,। धीरे धीरे सुधियां के माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी प्यास से उसका गला सूखने लगा,,,, उसे प्यास लगी थी इधर उधर नजर दौड़ाई तो कुछ ही दूरी उसके खेतो पर ट्यूबवेल मैसे पानी निकल रहा था जो कि खेतों में जा रहा था,,,। ट्यूबवेल के पाइप में से निकल रहे हैं पानी को देख कर सुधिया की प्यास और ज्यादा भड़कने लगी,,, वह अपनी जगह से उठी और ट्यूबेल की तरफ जाने लगी,, तेज धूप होने के कारण सुधियां,,, पल्लू को हल्के से दोनों हाथों से ऊपर की तरफ उठा कर जाने लगी,,, दोनों हाथ को ऊपर की तरह हल्कै से उठाकर जाने की वजह से सुधिया की चाल और ज्यादा मादक हो चुकी थी,,, हालांकि समय सुधिया पर किसी की नजर नहीं पड़ी थी लेकिन इस समय किसी की भी नजर उस पर पड़ जाती तो उसे स्वर्ग से उतरी हुई अ्प्सरा देखने को मिल जाती,,, बेहद ही कामोत्तेजना से भरपुर नजारा था। इस तरह से चलने की वजह से सुधिया की मद मस्त गोलाई लिए हुए नितंब कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आ रही थी,,, कुछ ही देर में सुधिया ट्यूबवेल के पास पहुंच गई और दोनों हाथ आगे की तरफ करके पानी पीने लगी,,, शीतल जल को ग्रहण करने से उसकी तष्णा शांत हो गई,,,

सुधियां कुछ देर वहीं रुक कर अपने चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मार कर अपने आप को तरोताजा करने का प्रयास करने लगी,,,,। पानी पीने के बाद..
सुधियां पास में ही पेड़ की छांव में बैठ गई

थोड़ी देर बाद सुधियां को बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह अपने आप पर बहुत ज्यादा संयम रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके लिए इस समय मोचना बेहद आवश्यक हो चुका था। क्योंकि ज्यादा देर तक वह अपनी पेशाब को रोक नहीं पा रही थी पेट में दर्द सा महसूस होने लगा था। सुधिया पेड़ के नीचे से उठी और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करते हुए अपने पेशाब को रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन कोई भी इंसान ज्यादा देर तक पेशाब को रोक नहीं सकता था इसलिए सुधियां को भी मुतना बेहद जरूरी था। उसे डर था कि खेतो से गुजरात हुवा कोई आदमी उस ना देख ले। इसलिए वह बड़े पेड़ के पास भी जंगली झाड़ियों के नीचे से होकर धीरे-धीरे पेशाब करने के लिए अंदर जाने लगी और एक जगह पर पहुंच कर वह इधर उधर नजरे दौरा कर देखने की कोशिश करने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उस को झाड़ियों में से दूसरा कोई नजर नहीं आ रहा था सुगंधा जहां पर खड़ी थी वहां पर कुछ ज्यादा ही झाड़ियां थी और वहां पर किसी की नजर पड़ने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी


इधर दोपहर को सूरज को बहोत जोरो की प्यास लगती थी सूरज खेतो में बने हेड पंप के पास पहुंचकर कर पानी पीने लगा जी भर के पानी पीने के बाद पानी से हाथ मुंह धो कर अपने आप को ठंडा करने की कोशिश करने लगा जब सूरज वहा से प्यास बुझा के खेतो में जाने लगा तभी उसकी आंखों के सामने से एक खरगोश का बच्चा भागता हुआ नजर आया और सूरज उसके पीछे पीछे जाने लगा सूरज उसे पकड़ना चाहता था उसके साथ खेलना चाहता था इसलिए जहां जहां खरगोश जा रहा था सूरज उसके पीछे पीछे चला जा रहा था।


सूरज खरगोश के पीछे पीछे भागता चला जा रहा था और तभी खरगोश उसकी आंखों के सामने एक घनी जंगली झाड़ियों के अंदर चला गया सूरज उस खरगोश को पकड़ लेना चाहता था इसलिए दबे पांव वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा उसके सामने घनी झाड़ियां थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था उसे मालूम था कि इसी झाड़ियों के अंदर खरगोश दुबक कर बैठा हुआ है इसलिए वह घनी झाड़ियों के करीब पहुंचकर धीरे धीरे पत्तों को हटाने लगा लेकिन उसे खरगोश नजर नहीं आ रहा था वह अपनी चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा लेकिन वहां खरगोश का नामोनिशान नहीं था वह निराश होने लगा वह समझ गया कि खरगोश भाग गया है और अब उसके हाथ में नहीं आने वाला लेकिन फिर भी अपने मन में चल रही इस उथल-पुथल को अंतिम रूप देते हुए वह अपने मन की तसल्ली के लिए अपना एक कदम आगे बढ़ाकर घनी झाड़ियों को अपने दोनों हाथों से हटाकर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन फिर भी परिणाम शून्य ही आया वह उदास हो गया वह अपने दोनों हाथों को झाड़ियों पर से हटाने ही वाला था कि उसकी नजर थोड़ी दूर की घनी झाड़ियों के करीब गई और वहां का खरगोश नजर आया सूरज को देख कर झाड़ियों के पास बिल था उसमे जा के छुप गया। सूरज धीरे से रेंगता हुवा घनी झाड़ियों के पास जा के खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार करने लगा।

इधर सुधिया
का पेशाब की तीव्रता उसके पेट में ऐठन दे रही थी सुधिया धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी यह नजारा बेहद ही कामुकता से भरा हुआ था लेकिन इस नजारे को देखने वाला वहां कोई नहीं था धीरे-धीरे सुधिया पूरी तरह से अपनी कमर तक अपनी साड़ी को उठा दी थी उसकी नंगी चिकनी मोटी मोटी जांगे पीली धूप में स्वर्ण की तरह चमक रही थी बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ यह नजारा देखने वाला वहां कोई नहीं था और वैसे भी सुधियां यही चाहती थी कि कोई उसे इस अवस्था में ना देख ले सुधिया साड़ी को अपनी कमर तक उठा कर एक हाथ से अपनी लाल रंग की कच्छी को नीचे की तरफ सरकाने लगी धीरे धीरे सुधिया अपनी पैंटी को अपनी मोटी चिकनी जांघों तक नीचे कर दी और आंखे बंद कर के तुरंत नीचे बैठ गई मुतने के लिए। सुधिया की बुर फैल कर खूब मोटी धार निकाल कर मुतना शुरू कर दिया मूत की धार सीधे झाड़ियों के ऊपर से दूसरी तरफ गिरने लगी जहापारी सूरज नीचे लेटा हुवा खरगोश का बिल से बाहर आने का इंतजार कर रहा था।
जैसे ही सूरज के ऊपर सुधियां की मूत की धार गिरी सूरज चौक गया की ये बिन बादल बरसात केसे होने लगी।
इस लिए सूरज रेंगता हुवा थोडासा आगे गया और झाड़ीयो को हटा के देखने लगा और सामने का नजारा नजारा देखकर एकदम सन्न रह गया।
सूरज को एक बार फिर से अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मामी
सुधिया को बहुत जोरों से पेशाब लगी कर रही थी। जिससे सूरज का मुंह खुल गया और बूर से निकलती हुवी पेशाब की धार सीधे सूरज के मुंह में चली गई।
जैसे ही सूरज के मुंह में पेशाब की धार गिरी सूरज का गला फिर से सूखने लगा थोड़ी देर पहले हैंडपंप पर के पानी से अपनी प्यास बुझाई थी लेकिन सुधिया की बूर की मूत की धार ने उसकी प्यास बढ़ा दी थी। ओर सूरज बूर से निकलती हुवी मूत की धार को पीने लगा।
सूरज को अपनी किस्मत पर नाज होने लगा क्योंकि कुछ दिनों से उसकी किस्मत उसके पक्ष में चल रही था

इस समय सूरज की आंखों के सामने उसकी सुधिया मामी की गुलाबी बूर थी जो तेजी से पानी छोड़ रही थी। जिसे सुधिया आंखे बंद किए हल्के से उठाए हुए थी और सुधियां को इस तरह देख कर पलभर में ही उसका लंड धोती के अंदर तन कर लोहे के रोड की तरह हो गया था।

अब सूरज खरगोश के बिल को कब का भूल चुका था अब उसके सामने एक नया बिल था जो लगातार मूत की धार उसके मुंह में छोड़ रहा था और धोती में उसका फन फनता हुवा साप उस बिल में घुसाने को बेताब था।

सूरज लेटे हुवे अपने हाथों से लंड को मसलने लगा था सुधियां की गुलाबी बूर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी जिसकी वजह से उसमें से एक सीटी सी बजने लगी थी और इस समय सुधियां की बुर से निकल रही सीटी की आवाज सूरज के लिए किसी बांसुरी के मधुर धुन से कम नहीं थी सूरज उस मादकता से भरे नजारे और बुर से आ रही मूत की धार को पी रहा था।
सूरज को ऐसा लग रहा था की मानो की सुधियां मामी के बूर से निकलता हुवे मूत की धार कभी बंद ना हो और ऐसे ही चलती रहे।
सूरज उस मधुर धुन में खोने लगा

सुधिया आंखे बंद किए पूरी तरह से निश्चिंत थी कि उसे इस समय पेशाब करते हुए कोई नहीं देख रहा है लेकिन इस बात से अनजान थी कि उसका ही भांजा झाड़ियों के नीचे लेटा हुवा उसके बूर से निकलती पेशाब को पी रहा है।
थोड़ी देर में आंखे बंद किए सुधियां ने पेशाब कर ली लेकिन उठते हुवे अपनी गुलाबी पुर की गुलाबी पतियों में से पेशाब की बूंद को गिराते हुए हल्के हल्के अपने नितंबों को झटकने लगी।
लेकिन सुधियां की यह हरकत बेहद ही कामुकता से भरी हुई थी सूरज खुद अपनी मामी की इस हरकत को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया था कल की चुदाई के बाद का लंड बार बार खड़ा होने लगा था।
सूरज को अब रहा नहीं गया

जैसे ही सुधिया पेशाब कर के जैसे ही खड़ी होने वाली थी
तभी सूरज ने आगे बढ़ते
अपना मूह आगे कर दिया, और सुधिया की बूर से लगा कर उसकी चूत को अपने मूह मे भर लिया,
जिससे सुधियां के शरीर में कम्पन या जाता है वह डर जाति हे की नीचे क्या चीज है वह देखने के लिए नीचे झुकी नीचे का नजारा देख कर सुधिया दंग रह जाती हे की कोई लड़का अपना मुंह बूर से लगाए हुवे चूस रहा था।
सुधियां डरते हुवे कोन हो तुम...?
सूरज अपना मुंह बूर से थोड़ा पीछे हटाके के बोलता ही में हु मामी सूरज आपका भांजा और इतना कहके फिरसे
सुधिया की बूर को अपने मुंह में भर के जोर जोर से चूसने लगा।


सुधिया- बेटा तू ये क्या कर रहा है यह गंदी जगह ही इसे मत चाट मुझे छोड़ से में तेरी मामी हू कोई हमे देख लेगा

उसकी बातो कोई भी का असर अब सूरज पर नही हो रहा था सूरज अपनी ही मस्ती में जोर जोर से बूर का चाटने लगा


सूरज- सूरज लंबी लंबी जीभ निकाल कर सुधिया की बुर को खूब कस कर दबोचते हुए चाटने लगता है, सुधिया की चूत एक दम मस्त हो जाती है

सुधियां को भी अब मजा आने लगा था पाहिली बार उसकी बूर कोई चूस रहा था।

सूरज सुधिया की चूत को खूब ज़ोर से अपने मूह मे दबा कर चूसने लगता है,

अब सुधिया अपनी जाँघो को और फैला देती हे और उसकी चूत को सूरज के मुंह में दबाने लगती है।

सूरज पागलो की तरह उसकी चूत को चूसने लगता है और सुधिया उसके सर को पकड़ कर खूब ज़ोर से अपनी चूत से
दबा लेती है,

सूरज किसी पागल कुत्ते की तरह सुधिया की पूरी बूर खोल खोल कर उसका रस चाटने और चूसने लगता है और

सुधिया अपनी चूत खूब कस कस कर सूरज के मूह पर दबा दबा कर रगड़ने लगती है,


सुधिया- आह सीईईईई कितना ज़ोर से चाट रहा है बेटे, ज़रा आराम से चाट आह आहह आह आ सीईईईईईईईई ओह सूरज...


सुधिया के पैर अब थरथराने लगे और सुधिया नीचे जमीन पर गिर गई
अब सुधियां अपने पैरों को हवा में जितना हो सके फैलाते हुए अपनी कसी कसी मांसल जाँघों को खुलकर अपने सूरज के लिए खोल दिया, जिससे उनकी बूर उभरकर सूरज के मुंह के सामने आ गयी और दोनों फांकें खुलकर फैल गयी, हल्के धूप कि रोशनी में सूरज अपनी मामी की फैली हुई बूर को देखकर और भी पागल हो गया और उसने अपनी लंबी सी जीभ निकाली, फिर जीभ को बूर के नीचे अंतिम छोर पे गांड की छेद के पास लगाया और सर्रर्रर्रर्रर से पूरी बूर को चाटता हुआ नीचे से एकदम ऊपर तक आया, सूरज के ऐसा करने से सुधिया फिरसे बौखला गयी और मदहोशी में अपनी आंखें बंद करके अपने होंठों को दांतों से काटते हुए बड़ी जोर से सिसकी और आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई.......... अम्मामामामामा......सूरजबेटा.... ऐसे बोलते हुए
पूरे बदन को धनुष की तरह ऊपर को मोड़ती चली गयी, उसकी विशाल चूचियाँ तनकर ऊपर को उठ चुकी थी और निप्पल तो इतने सख्त हो गए थे कि वो खुद ही उन्हें हल्का हल्का मसल रही थी।

बूर की पेशाब और काम रस की गंध से सूरज पागल हो चुका था, उसने इसी तरह कई बार पूरी की पूरी बूर को नीचे से लेकर ऊपर की तरफ विपरीत दिशा में लप्प लप्प करके चाटा, जब सूरज बूर के ऊपरी हिस्से पर पहुचता तो बूर के ऊपर बालों में अपनी जीभ फिराता और फिर जीभ को फैलाके गांड की छेद के पास रखता और फिर सर्रर्रर्रर्रर्रर्रर से लपलपाते हुए पुरी बूर पर जीभ फिराते हुए ऊपर की ओर आता और कभी तो वो ऊपर आकर बूर के ऊपर घने बालों पर जीभ फिराता कभी जहां से दरार शुरू होती है वहां पर जीभ को नुकीली बना कर दरार में डुबोता और भगनासे को जी भरकर छेड़ता, फिर बूर के दाने के किनारे किनारे जीभ को गोल गोल घूमता।

सुधिया की पूरी बूर सूरज के थूक से गीली हो चुकी थी, उसकी बूर से निकलता काम रस सूरज बराबर अपनी जीभ से चाट ले रहा था, पूरी झाड़ियों में हल्की हल्की चप्प चप्प की आवाज के साथ दोनों मामी भांजे की सिसकियां गूंजने लगी।

सूरज ने फिर एक बार अपनी जीभ को नीचे गांड के छेद के पास लगाया और इस बार उसने जीभ को नुकीला बनाते हुए जीभ को अपनी मामी की बूर की दरार में नीचे की तरफ डुबोया और दरार में ही डुबोये डुबोये नुकीली जीभ को नीचे से खींचते हुए ऊपर तक लाया, पहले तो एक बार जीभ मामी की बूर के छेद में घुसने को हुई पर फिर फिसलकर ऊपर चल पड़ी और बूर के दाने से जा टकराई, फिर सूरज ने वहां ठहरकर बूर के दाने को लप्प लप्प करके कई बार चाटा।

सुधिया के बदन की एक एक नस आनंद की तरंगों से गनगना उठी, बड़ी ही तेज तेज उसके मुँह से अब सिसकियां निकल रही थी मानो अब लाज, संकोच और डर (की कोई सुन लेगा) जैसे हवा हो चुका था, अपने पैरों को मोड़कर उसने सूरज की पीठ पर रख लिया था,

गनगना कर कभी वो अपने सूरज को पैरों से जकड़ लेती कभी ढीला छोड़ देती। बेतहासा कभी अपना सर दाएं बाएं पटकने लगती, कभी अपने हांथों से चूचीयों को कस कस के मीजती, सुधिया मस्ती में नीचे की तरफ नही देख रही थी, उसकी आंखें अत्यंत नशे में बंद थी, कभी थोड़ी खुलती भी तो वो हल्का सा आसमान को देखती।

उनकी सांसे बहुत तेज ऊपर नीचे हो रही थी, लगातार उसके सूरज उसकी बूर को एक अभ्यस्त खिलाड़ी की भांति चाटे जा रहे थे, जीवन में पहली किसी मर्द की जीभ उसकी बूर पर लगी थी और वो भी खुद उसके भांजे की, आज पहली बार वो सूरज से अपनी बूर चटवा रही थी, इतना परम सुख उसे कभी नही मिला..
सूरज की मर्दाना जीभ की छुअन से सुधीया नशे में कहीं खो गयी थी।

झाड़ियों में से बूर चाटने की चप्प चप्प आवाज सिसकियों के साथ गूंज रही थी। एकएक सूरज को कुछ कमी महसूस हुई वो और ज्यादा गहराई से अपनी मामी बूर को खाना चाहता था, उसने मामी के बूर से मुँह हटाया तो उसके होंठों और मामी की बूर की फाँकों के बीच लिसलिसे कामरस और थूक के मिश्रण से दो तीन तार बन गए, सूरज ने बड़ी मादकता से उसे चाट लिया और उठने लगा।

उसने दहाड़ते हुए अपनी दो उंगलियों से अपनी मामी की बूर की फांकों को अच्छे से चीरा, एक तो जांघे फैलने से बूर पहले ही खुली हुई थी ऊपर से सूरज ने उंगलियों से फांकों को और चीर दिया जिससे बूर का लाल लाल छेद और बूर का दाना धूप की रोशनी में चमक उठा, सूरज लपकते हुए बूर पर बेकाबू होकर टूट पड़ा और जीभ से बूर के लाल लाल कमसिन कसे हुए छोटे से छेद को बेताहाशा चाटने लगा।

सुधियां का बदन अचानक ही बहुत तेजी से थरथराया और सुधिया ने
आ...हा.. आहा... ओ हो... ऊ महा....
कहते हुए बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज को सिसकते हुए दबाया।

सूरज लप्प लप्प जीभ से अपनी मामी की बूर के छेद को चाटे जा रहा था, सुधिया फिर से तड़प तड़प कर अपना सर दाएं बाएं पटकती, पूरा बदन ऐंठती, गनगना जाती, अपनी मुठ्ठियों को कस कस के भीचती, तो कभी अपने स्तन भींच लेती, अपने पैरों को उसने फिर से अपने सूरज की पीठ पर लपेट दिया और जब जब उसका बदन थरथराता वो अपने पैरों से अपने बाबू को जकड़ लेती।

सूरज ने थोड़ी देर अपनी मामी की बूर के छेद को चाटा फिर अपनी जीभ को नुकीला किया और बूर के नरम नरम से लाल लाल छेद के मुहाने पर गोल गोल घुमाने लगा, सुधिया अब जोर जोर से काफी तेज तेज छटपटाने और सिसकने लगी, उसे क्या पता था कि उसके सूरज बूर के इतने प्यासे हैं, वो बूर के इतने अच्छे खिलाड़ी हैं, वो बूर चाटने में इतने माहिर है, ऐसा सुख तो उसके पति ने कभी सपने में भी नही दिया, उसे पता लग चुका था कि उसके सूरज अपनी मामी की बूर के कितने भूखे हैं।

झाड़ियों में काफी तेज तेज सिसकारी गूंजने लगी।
सूरज ने एक बार फिर से पूरी बूर को नीचे से ऊपर की ओर अपनी जीभ से लपलपा के चाटा, सूरज का अब इरादा था अपनी जीभ अपनी मामी के बूर की छेद में डालने का पर इतने भर से ही सुधियां अब काफी त्राहि त्राहि करने लगी, उसके मुँह से अब थोड़ी ज्यादा जोर से
आआआआआआहहहहहह .......ऊऊऊऊईईईईईई..........अम्मामामामामा..................सूरज................हाहाहाहाहायययययय..............आआआआआआहहहहहह......
सिसकते हुए निकलने लगा।


उसकी बुर के अंदर बाहर करते हुए अपनी जीभ को उसकी बुर के बीचो बीच रखकर चाटते हुए उसे मजा देने लगा सूरज की हरकत की वजह से सुधियां के मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फिर से फूटने लगी,,, सुधिया की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,, उसका संपूर्ण वजुद कांपने लगा और देखते ही देखते,,, सुधियां जोर से सिसकारी लेते हुए झड़ने लगी,,,,, उसकी गुलाबी बुर के छेद से,, मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी,,,, लेकिन सूरज ने उस मदनरस की एक भी बूंद को जाया नहीं देना चाहता था,,, इसलिए अपनी जीभ लगाकर लपालप उसे पीना शुरू कर दिया,,,सिसकारी लेती हुई सुधिया सूरज की हरकत देखकर एकदम से सिहर उठी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक मर्द औरत की बुर से निकला हुआ उसका नमकीन पानी इस कदर चाट चाट कर अपनी गले के नीचे उतार लेता है,,,,, सुधिया झाड़ चुकी थी सुधिया हेरान भी थी कि,,, बिना बुर में लंड डाले उसकी बुर इतना पानी छोड़ रही थी,,,।
लेकिन उसे इस तरह से पानी छोड़ते हुए बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,, सुधियां कुछ देर तक उसी तरह से जमीन के ढेर हुइ।

अब सुधियां काफी गरम हो गई उसकी बूर अब लंड मांग रही थी।
सुधिया ने सिसकते हुए सूरज से कहा- बेटा, अपना लंड मोटा सा लंड, एक बार अपनी मामी की पनियायी बूर में गूसा दो, बस एक बार हल्का गूसा दो


मामी ने इस अदा से निवेदन किया कि सूरज अपनी मामी की अदा पर कायल ही हो गया।

सूरज - आआआआआहहहहहह......मामी, तूम अपने आप ही लंड खोलकर बूर में गूसा दो मेरी रानी, डुब लो जितना तेरा मन करे, ये तो तेरी ही अमानत है मामी।

इतना कहकर सूरज अपने दोनों हाँथ मामी की कमर के अगल बगल टिकाकर मामी के ऊपर झुक सा गया और अपनी मामी की आँखों में देखने लगा दोनों मुस्कुरा दिए और कई बार एक दूसरे के होंठों को चूमा।

सुधियां ने अपने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा जो अभी भी उसकी टांगो में फसा हुआ था और दूसरे हाँथ से उसने अपने भांजे के लोहे के समान हो चुके सख्त लंड को धोती के ऊपर से पकड़ लिया, ९ इंच लंबे और ४ इंच मोटे विशाल लंड को पकड़कर सुधिया गनगना गयी, वासना की मस्ती उसके नसों में दौड़ गयी, कितना बड़ा लन्ड था सूरज का, उसके भांजे का, उसपर वो उभरी हुई नसें, सुधियां की मस्ती में आआआआहहहह निकल गयी।
( कल चुदाई के दौरान सुधियां ने सूरज के लंड को बूर में महसूस किया था मगर हात से छुआ नहीं था )

सुधियां - ओह बेटा कितना सख्त हो रखा है तुमारा लंड, कितना मोटा है ये.......हाय........ कितना लंबा है.......ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़


सूरज- हाँ मेरी मामी ये सिर्फ और सिर्फ अब आपका है।


सुधिया ने कुछ देर पूरे लन्ड को आँहें भरते हुए सहलाया फिर दूसरे हाँथ से कच्छी को छोड़कर हाँथ को पीछे कमर पर ले गयी और धोती को कमर पर से ढीला किया, सूरज ने अपनी मामी की आंखों में देखते हुए अपनी धोती को खोलने में मदद की, धोती काफी हद तक ढीली हो गयी थी सूरज ने एक हाँथ से धोती खोलकर बगल रख दी, नीचे से वो पूरा नंगा हो गया ऊपर बनियान पहनी हुई थी, अपनी मामी के ऊपर वो दुबारा झुक गया और उसकी आँखों में देखते हुए उसे चूम लिया,
सुधिया सिसकते हुए अपने भांजे के निचले नग्न शरीर पर हाँथ फेरने लगी, उसने जाँघों को छूते हुए सूरज के लन्ड के ऊपर के घने बालों में हाँथ फेरा और फिर लंड को पकड़कर कराहते हुए सहलाने लगी,
सुधियालंड को मुट्ठी में पकड़कर पूरा पूरा सहलाने लगी, सिसकते हुए सहलाते सहलाते वो नीचे के दोनों बड़े बड़े आंड को भी हथेली में भरकर बड़े प्यार से दुलारने लगी और सहलाने लगी,
अपनी मामी की नरम मुलायम हांथों की छुअन से सूरज की नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने सिसकते हुए अपने एक हाँथ से अपनी कच्छी को दुबारा साइड किया और दूसरे हाँथ से लंड को सहलाते हुए बड़े प्यार से उसकी आगे की चमड़ी को पीछे की तरफ खींचकर खोला, दो बार में उसने लन्ड की चमड़ी को उतारा, खुद ही तेजी से ऐसा करते हुए जोश में सिसक पड़ी, क्योंकि एक मामी मां के लिए अपने ही बेटे समान भांजे की लंड की चमड़ी खोलना बहुत ही वासना भरा होता है


पहली बार में तो उसने चमड़ी को सिसकते हुए खाली फूले हुए सुपाड़े तक ही उतारा और चिकने सुपाड़े पर बड़े प्यार से उंगलिया फेरते हुए कराहने लगी मानो उसे नशा चढ़ गया हो, दोनों मामी भांजा एक दूसरे की आंखों में नशे में देख रहे थे, सूरज मामी की कमर के दोनों तरफ अपना हाथ टिकाए उसके ऊपर झुका हुआ था और सुधियां अपने दोनों पैर फैलाये साड़ी को कमर तक उठाये एक हाथ से अपनी कच्ची को साइड खींचें हुए, दूसरे हाँथ से अपने सूरज का लंड सहलाते हुए उसकी आगे की चमड़ी को पीछे को खींचकर उतार रही थी।


सुधिया के मुलायम हाँथ अपने चिकने संवेदनशील सुपाड़े पर लगते ही सूरज आँहें भरने लगा, अपने भांजे को मस्त होते देख सुधियां और प्यार से उनके सुपाड़े को सहलाने और दबाने लगी, अपने अंगूठे से सुधियांने अपने भांजे के लंड के पेशाब के छेद को बाद प्यार से रगड़ा और सहलाया, उसकी भी मस्ती में बार बार आंखें बंद हो जा रही थी, बार बार सिरह जा रही थी वो, बदन उसका गनगना जा रहा था मस्ती में, फिर उसने अपने भांजे के लंड की चमड़ी को खींचकर पूरा पीछे कर दिया और अच्छे से अपने भांजे के पूरे लंड को अपने मुलायम हांथों से सहलाने लगी।


फिर काफी देर सहलाने के बाद सुधिया ने एक हाँथ से अपनी कच्छी को साइड किया और अपने भांजे के लंड को अपनी बूर की रसीली फांकों के बीच रख दिया, जैसे ही सुधियां ने बूर पे लंड रखा दोनों मामी भांजा मस्ती में जोर से सीत्कार उठे-


सुधिया-आआआआआआआआआआहहहहहहहहहह...........ईईईईईईईशशशशशशशशश..........हाहाहाहाहाहाहाहाहायययययय........बेटा....…...आआआआआआहहहहह


सूरज - आआआआआआहहहहह.......मेरी मामी.....कितनी नरम है तेरी बूबूबूबूररररर..........ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़........मजा आ गया।


आज जीवन में पहली बार सूरज के लंड को, इतना असीम आनंद मिलेगा कभी सपने में भी नही सोचा था, सुधिया कराहते हुए अपने भांजे के लंड का सुपाड़ा अपनी दहकती बूर की फांक में रगड़ती जा रही थी, दोनों के नितम्ब हल्का हल्का मस्ती में थिरकने लगे, सूरज हल्का हल्का लंड को बूर की फांक में खुद रगड़ने लगा, पूरे बदन में चिंगारियां सी दौड़ने लगी, बूर से निकलता लिसलिसा रस लंड के आगे के चिकने भाग को अच्छे से भिगोने लगा, सुधिया ने एक हाँथ से कच्छी को साइड खींचा हुआ था पर अब उसने उसको छोड़कर वो हाँथ अपने भांजे के हल्के हल्के धक्का लगाते चूतड़ पर रख कर कराहते हुए सहलाने लगी, बीच बीच में हाँथ से उनके चूतड़ को अपनी बूर की तरफ मचलते हुए दबा देती, दहाड़ते लंड का मोटा सा सुपाड़ा मखमली बूर की फाँकों में ऊपर से नीचे तक रगड़ खाने लगा, सूरज को इतना मजा आया कि वह धीरे धीरे अपनी मामी के ऊपर लेटता चला गया, सुधिया अपने दोनों हांथों को वहां से हटा कर बड़े प्यार से अपने भांजे को अपनी बाहों में भरकर मस्ती में दुलारने लगी, अत्यंत नशे में दोनों की आंखें बंद थी।


सूरज अपनी मामी के बाहों में समाए, उसपर लेटे हुए अपनी आंखें बंद किये अपने लंड को बूर की फाँकों में रगड़ते हुए नरम नरम फांकों का आनंद लेने लगा। सुधिया हल्का हल्का मस्ती में आंखें बंद किये आआआहहहह ह......आआआहहहहह करने लगी।


सुधियां ने बड़ी मुश्किल से अपनी नशीली आंखें खोली उसका का सारा ध्यान सिर्फ अपने भांजे के मोटे दहकते लन्ड पर था जो कि लगातार धीरे धीरे उसकी सनसनाती बूर की रसीली फांकों में नीचे से ऊपर तक बार बार लगातार रगड़ रहा था, वो मुलायम चिकना सुपाड़ा बार बार जब सुधियां की बूर के फांकों के बीच दाने से टकराता तो सुधियां का बदन जोर से झनझना जाता, पूरे बदन में सनसनाहट होने लगती।


सुधिया ने कराहते हुए अपने दोनों पैर मोड़कर अच्छे से फैला रखे थे, सूरज एक लय में अपने मोटे लंड को अपनी मामी की बूर की फांकों में रगड़ रहा था, सुधिया भी मादक सिसकारियां लेते हुए धीरे धीरे अपनी गांड को अपने भांजे के लंड से ताल से ताल मिला के उठाने लगी और अपनी बूर को नीचे से उठा उठा के लंड से रगड़ने लगी।


सुधियां की कच्छी का किनारा बार बार सूरज के लंड से रगड़ रहा था तो

सूरज ने धीरे से मामी के कान में बोला - मेरी प्यारी मामी


नीलम - हाँ मेरे प्यारे बेटे


सूरज - अपनी कच्छी पूरा उतार न, तब अच्छे से मजा आएगा।


सुधिया - हाँ बेटा तुम उठो जरा।


सूरज मामी के ऊपर से उठ जाता है उसका लंड भयंकर जोश में झटके लिए जा रहा, ९ इंच लंबा लंड पूरा खुला हुआ था, लोहे के समान सख्त और खड़ा था, सुधिया ने कराहते हुए अपनी छोटी सी कच्छी निकाल फेंकी और जल्दी से अपनी साड़ी भी खोल कर झाड़ियों में बगल में रख दी, अब सुधिया के बदन पर सिर्फ ब्लॉउज रह गया था नीचे से वो बिल्कुल नंगी हो गयी थी।


अपनी मामी को इस तरह अपने भांजे के सामने आज पूरी नंगी होते देख सूरज वासना में कराह उठा,
सूरज अपनी मामी का पुर्णतया नग्न निचला हिस्सा देखकर बौरा गया, सुधियां ने कच्छी और साड़ी उतारकर फिर से अपनी दोनों जांघें अच्छे से फैला कर अपनी बूर को अपने भांजे के सामने परोस दिया, सूरज एक पल तो मामी की मादक सुंदरता को देखता रह गया, फिर एकएक कराहते हुए उसने अपनी शादीशुदा मामी के पैरों को एड़ी और तलवों से चाटना शुरू किया, सुधियां तेजी से सिसक उठी,
दोनों पैरों की एड़ी, तलवों को अच्छे से चूमता चाटता वह आगे बढ़ा, घुटनों को चूमता हुआ वह जांघ तक पहुँचा, दोनों जाँघों को उसने काफी देर तक अच्छे से खाली चूमा ही नही बल्कि जीभ निकाल के किसी मलाई की तरह अच्छे से चाटा, सुधिया वासना से गनगना गयी, सूरज अपनी मामी की अंदरूनी जांघों को अच्छे से चूम और चाट रहा था, सुधिया रह रह कर झनझना जा रही थी।


सूरज जांघों को चाटते हुए वह महकती बूर की तरफ बढ़ा, बूर फिरसे लगातार लिसलिसा काम रस बहा रही थी,
सूरज ने एक बार फिर बूर को मुँह में भर लिया और एक जोरदार रसीला चुम्बन अपनी मामी की बूर पर लिया, सुधिया जोर से सिसकारते हुए चिंहुककर उछल सी पड़ी, बदन उसका पूरी तरह गनगना गया, कराहते हुए सुधियां ने खुद ही एक हाँथ से अपनी महकती पनियायी बूर को चीर दिया और सूरज मस्ती में आंखें बंद किये अपनी मामी की बूर को लपा लप्प चाटने लगा, सुधियां हाय हाय करने लगी, सुधिया कभी अपनी बूर की फांकों को फैलाती तो कभी अपने भांजे के गाल को सहलाती, कभी जोश में झनझनाते हुए अपने भांजे की पीठ पर कस के नाखून गड़ा देती, सुधिया के ऐसा करने से सूरज को और भी जोश चढ़ जा रहा था और वो और तेज तेज बूर को चाटे जा रहा था।


सुधियां जब अपनी उंगली से बूर की फांक को फैलाती तो सूरज तेज तेज बूर की लाल लाल फांक में जीभ घुमा घुमा के चाटता, कभी फूले हुए बूर के दाने को जीभ से छेड़ता कभी मुँह में भरकर चूसता, फिर कभी मामी की बूर के छेद में जीभ डालता और जीभ को अंदर डाल के हल्का हल्का गोल गोल घुमाता।


सुधिया वासना में पगला सी गयी, जोर जोर से सिसकने लगी, कराहने लगी, अपने भांजे के सर को कस कस के अपनी रसभरी बूर पर दबाने लगी, अपनी गांड को उछाल उछाल के अपनी बूर चटवाने लगी,


ओओओओहहहह..............बेटा...............हाय मेरी बूर...............कितना अच्छा लग रहा है बेटा................हाय तुमारी जीभ................ऊऊफ्फफ................ चाटो ऐसे ही बेटा...................मेरी बरसों की प्यास बुझा दो....................आआआआआआहहहहह................मेरे बेटे..........मेरे राजा.............मेरी बूर की प्यास सिर्फ तुमसे बुझेगी....................... तुमसे.....................ऐसे ही बूर को खोल खोल के चाटो मेरे बेटे........................अपनी मामी की बूर को चाट चाट के मुझे मस्त कर दो...................ऊऊऊऊईईईईईई अम्मा..................... कितना मजा आ रहा है..............ऊऊऊऊऊफ़्फ़फ़फ़


काफी देर तक यही सब चलता रहा और जब सुधियां से नही रहा गया तो उसने अपने भांजे को अपने ऊपर खींच लिया, सूरज अपनी मामी के ऊपर चढ़ गया, लन्ड एक बार फिर जाँघों के आस पास टकराता हुआ बूर पर आके लगा, लंड पहले से ही खुला हुआ था सुधिया ने कराहते हुए लंड को पकड़ लिया और मस्ती में आंखें बंद कर अपनी बूर की फांकों को दुबारा फैला कर उसपे रगड़ने लगी।


सुधियां ने जोर से सिसकते हुए अपने भांजे को अपनी बाहों में भर लिया और सूरज अपने लंड को अपनी मामी की बूर की फांक में तेज तेज रगड़ने लगा, जब झटके से लंड बूर की छेद पर भिड़ जाता और अंदर घुसने की कोशिश करता तो सुधियां दर्द से चिहुँक जाती पर जल्द ही लन्ड उछलकर ऊपर आ जाता और बूर के दाने से टकराता तब भी सुधिया जोर से सिस्कार उठती।


सुधिया ने अपने भांजे से सिसकते हुए बड़ी मादक अंदाज़ में कहा- बेटा...अच्छा लग रहा है अपनी मामी की बूर का स्वाद।


सूरज - आहा मामी मत पूछ कितना मजा आ रहा है, कितनी नरम और रसीली बूर है मामी की......हाय


सुधियां अपने भांजे के मुँह से ये सुनकर शरमा ही गयी।

सुधियां - बेटा

सूरज - हाँ मेरी मामी

सुधियां - अब घुसा न लंड अपना मेरी बूर में, रहा नही जाता अब, घुसा न अपना लंड मेरी बूर के रसीले छेद में।


सूरज अपनी मामी के मुँह से इतना कामुक आग्रह सुनकर वासना से पगला गया और उसने अपनी मामी के दोनों पैरों को उठाकर फैलाकर अच्छे से अपनी कमर पर लपेट लिया, सुधियां भी अच्छे से पैर फैलाकर लेट गयी और सूरज ने अपने लंड का मोटा सुपाड़ा अपनी शादीशुदा मामी की रस बहाती महकती प्यासी बूर की छेद पर लगाया, सुधियां की बूर बिल्कुल संकरी नही थी क्योंकि कल ही सूरज ने उसकी बुर को अपने लंड से खोला था
उसके भांजे का लंड उसके पति के लंड से डेढ़ गुना बड़ा और मोटा था। सुधियां की बूर रस छोड़ छोड़ के बहुत रसीली हो चुकी थी, चिकनाहट भरपूर थी, सूरज ने अपने विशाल लंड का दबाव अपनी मामी की बूर की छेद में लगाना शुरू किया और अपने दोनों हाँथ नीचे ले जाकर अपनी मामी की गांड को पकड़कर ऊपर को उठा लिया जिससे सुधिया की बूर और ऊपर को उठ गई।
सुधियां से बर्दाश्त नही हो रहा था तो उसने कराहते हुए बोला , डालो न अपना मोटा लंड अपनी मामी की बुर में,अब मत तड़पाओ बेटा।


सूरज ने दहाड़ते हुए एक दो बार लंड को बूर के छेद पर फिरसे रगड़ा और एक हल्का सा धक्का मारा तो लंड फिसलकर ऊपर को चला गया, सुधिया तेजी से वासना में चिहुँक उठी, हाहाहाहाहाहाहाहाहायययय .......अम्मा.......ऊऊऊऊऊईईईईईईईईईई,


बूर रस बहा बहा कर बहुत चिकनी हो गयी थी और उसका छेद सूरज के लंड के सुपाड़े के हिसाब से छोटा था, जैसे ही लंड फिसलकर ऊपर गया और तने हुए बूर के दाने से टकराया सुधियां तड़प कर मचल गयी आआआआआहहहह.......उई अम्मा,
सूरज ने जल्दी से बगल में रखा घास का ढेर उठाया और सुधियां की चौड़ी गांड के नीचे लगाने लगा, सुधियां ने भी झट गांड को उठाकर घास के ढेर लगाने में मदद की,
घास का ढेर लगने से अब सुधिया की बूर खुलकर ऊपर को उठ गई थी, क्या रिस रही थी सुधियां की बूर, तड़प तड़प के लंड मांग रही थी बस,
सुधियां फिर बोली- बेटा अब डाल दो न, अब चला जायेगा, नही फिसलेगा, डाल से बेटा, चोद दो मुझे अब।


सूरज ने जल्दी से लंड को दुबारा दहकती बूर के खुल चुके छेद पर लगाया और एक तेज धक्का दहाड़ते हुए माrar, मोटा सा लंड कमसिन सी बूर के छेद को चीरता हुआ लगभग आधा मखमली बूर में समा गया, सुधिया की जोर से चीख निकल गयी,


हाहाहाहाहाहाहाहाहाहाहाययययययय............बेटा..........आआआआहहहहहह............धीरे से बेटा.............. मेरी बूर.............ओओओओओहहहहह बेटा............कितना मोटा है तुमारा......... दर्द हो रहा है बेटा...........ऊऊऊईईईईईईई.......अम्मा...............बस करो बेटा...........रुको जरा...............आआआआहहहहहह......कितना अंदर तक चला गया है एक ही बार में............आआआआहहहहहह


सूरज की भी इतनी नरम कमसिन बूर पा के मस्ती में आह निकल गयी,


सूरज ने झट उसके मुँह पर हाथ रख दिया, सुधिया का पूरा बदन ही ऐंठ गया,

सूरज ने झट से सुधियां के मुँह को दबा लिया उसकी आवाज अंदर ही गूंजकर रह गयी, एक हांथ से सूरज ने सुधिया का ब्लॉउज खोल डाला और ब्रा का बटन पीछे से खोलने लगा तो उससे खुल नही रहा था, सुधिया ने दर्द से कराहते हुए ब्रा खोलकार अपने भांजे की मदद की और ब्लॉउज और ब्रा को निकालकर बगल रख दिया,
सूरज अपनी मामी की इस वफाई पर कायल हो गया एक तो उसको कल चुदाने के बाद भी काफी दर्द भी हो रहा था फिर भी वो अपने भांजे को अपना प्यार दे रही थी, ब्लॉउज और ब्रा खोलकर उसने खुद ही उतार दिया, इतना प्यार सिर्फ मां समान मामी ही अपने बेटे समान भांजे को दे सकती है, सूरज ने बड़े प्यार से अपनी मामी को चूम लिया।


ब्रा उतरते ही सुधियां की बड़ी बड़ी मादक तनी हुई विशाल चूचीयाँ उछलकर बाहर आ गयी, उन्हें देखकर सूरज और पागल हो गया, निप्पल तो कब से फूलकर खड़े थे सुधिया की चूची के, दोनों चूचीयों को देखकर सूरज उनपर टूट पड़ा और मुँह में भर भरकर पीने लगा, दोनों हांथों से कस कस के दबाने लगा, कभी धीरे धीरे सहलाता कभी तेज तेज सहलाता, लगातार दोनों चूचीयों को पिये भी जा रहा था, निप्पल को बड़े प्यार से चूसे जा रहा था, लगतार अपने भांजे द्वारा चूची सहलाने, मीजने और चूमने, दबाने से सुधिया का दर्द कम होने लगा और वो हल्का हल्का फिर सिसकने लगी, आह....सी......आह.... सी......ओह बेटा....ऐसे ही.....और चूसो......दबाओ इन्हें जोर से.........हाँ मेरे बेटे......पियो मेरी चूची को.........आह, बोलते हुए सुधिया सिसकने लगी, उसका दर्द अब मस्ती में बदलने लगा, अपनी मामी की मखमली रिसती बूर में अपना आधा लंड घुसाए सूरज बदहवासी में उसे चूमे चाटे जा रहा था।

सूरज ने सुधियां के मुँह पर से हाँथ हटा लिया पर अभी भी वो दर्द से हल्का सा कराह दे रही थी, सूरज ने उसे बाहों में भर लिया और सुधियां भी अपने भांजे से मस्ती में कराहते हुए लिपट गयी,
सूरज मामी को बेताहाशा चूमने लगा, सुधियां की दर्द भरी कराहटें अब पूरी तरह मीठी सिसकियों में बदल रही थी, सूरज अपनी मामी के होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा,
सुधिया ने भी मस्ती में अपने भांजे के चेहरे को बड़े प्यार से अपने हांथों में लिया और आंखें बंद कर उनका साथ देने लगी,
सूरज ने हल्का सा अपनी गांड को गोल गोल घुमाया तो लन्ड बूर की रस भरी दीवारों से घिसने लगा, सुधियां को बहुत अच्छा लगा और वो अपने भांजे का मोटा सा मूसल जैसा लंड अपनी बूर में अच्छे से महसूस करने लगी, कितना अच्छा लग रहा था अब, सुधियां की तो नशे में आंखें बंद हो गयी।


सुधिया ने खुद ही अब नशे में अपना हाँथ अपने भांजे की गांड पर ले जाकर उसे हल्का सा आगे की तरफ दबा कर और लंड डालने का इशारा किया, सूरज अपनी मामी के इस आमंत्रण पर गदगद हो गया और उसे चूमते हुए एक जोरदार धक्का गच्च से मारा, इस बार बिरजू का ९ इंच लंबा और ४ इंच मोटा लंड पूरा का पूरा सुधिया की रस बहाती बूर में अत्यंत गहराई तक समा गया, सुधियां की दर्द के मारे फिर से चीख निकल गयी पर इस बार उसने खुद ही अपना मुँह अपने भांजे के कंधों में लगाते हुए दर्द के मारे उनके कंधों पर दांत गड़ा दिए और उसके नाखून भी सूरज की पीठ पर गड़ गए, सूरज वासना में कराह उठा, एक बेटे का लंड मामी की बूर की अत्यंत गहराई में उतर चुका था, पूरी बूर किसी इलास्टिक की तरह फैलकर लंड को जकड़े हुए थी।


सूरज का लंड अपनी मामी की दहकती बूर के छेद की मखमली दीवारों को चीरकर उसे खोलता हुआ इतनी गहराई तक समा चुका था कि सुधियां बहुत देर तक अपनी उखड़ती सांसों को संभालती रही, अपने भांजे के कंधों में मुँह गड़ाए काफी देर सिसकती रही और बीच बीच में गनगना कर कस के अपने भांजे से लिपट जाती और उनकी पीठ को दबोच कर दर्द से कराह जाती, सूरज अपनी मामी को बड़े प्यार से बार बार चूमने लगा, उसके पूरे बदन को वो बड़े प्यार से सहलाने लगा, कमर, जाँघे, पैर, बगलें, कंधे, गाल, गर्दन, और मस्त मस्त दोनों सख्त चूचीयाँ वो बार बार लगातार सहलाये जा रहा था साथ ही साथ लगातार उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसे जा रहा था।


सुधिया को अपने भांजे का लंड अपनी बूर में इतनी गहराई तक महसूस हुआ कि वो दर्द के मारे एक पल के लिए दूसरी दुनियाँ में ही चली गयी, अभी तक जो लंड सुधिया की बूर में जाता था वो बस इसका आधा ही जाता था जो उसके शराबी पति का था और सुधिया को लगता था कि बूर में बस इतनी ही जगह है पर आज उसे पता चल गया कि उसके भांजे के लंड ने उसकी मखमली बूर की अनछुई रसभरी गहराई को भेदकर, वहां तक अपना अधिकार स्थापित कर दिया है, उसकी बूर की अत्यंत गहराई में छुपे रसीले अनछुए रस को आज उसके भांजे का लंड वहाँ तक पहुंचकर बड़े अधिकार से उसपर विजय पताका फहरा कर बड़े प्यार से उसे अपना इनाम समझ कर पी रहा है
और सुधिया की मखमली बूर की रसभरी अंदरूनी दीवारें इस छोर से लेकर उस छोर तक पूरे ९ इंच लंबे ४ इंच मोटे लंड से पूरी तरह कसकर लिपटी हुई उस मेहमान का बड़े ही दुलार से चूम चूम के बूर के अंदर आने का जमकर स्वागत कर रही थी, पहले जो लंड आता था उसके पति था पर आज जो लंड बूर में आया है उससे भांजे का कुवारा लंबा मोटा लंड है,
सुधियां की बूर की मखमली रसभरी अंदरूनी दीवारें उसके अंदर पूरी तरह घुसे हुए भांजे के लंड से लिपटी उसे चूम चूम के उसका स्वागत कर रही थीं मानो कह रही हों कि अब तक कहाँ थे आप, कब से तरस गयीं थी हम आपको छूने और चूमने के लिए।


सुधियां को ये सब महसूस कर दर्द के साथ साथ एक तरह से असीम आनंद भी होने लगा, सूरज अपनी मामी को उसकी बूर में अपना पूरा लंड ठूसे लगातार चूमे और सहलाये जा रहा था, वह सुधिया के होंठों को अपने होंठों में भरकर पीने लगा, सुधिया को अब फिर मजा आने लगा, दर्द सिसकियों में बदलना शुरू हो गया, लिपट गयी वो खुद ही अपने भांजे से अच्छी तरह और ताबड़तोड़ चूमने लगी सूरज को,
सूरज समझ गया कि अब उसकी मामी तैयार है बूर चुदवाने के लिए, सुधियां की बूर से लगातार रस बह रहा था।

काफी देर तक लंड बूर में पड़े रहने से बूर उसको अच्छे से लीलकर अभ्यस्त हो गयी थी।
सूरज ने अपनी मामी के पैरों को अपने कमर पर अच्छे से लपेटते हुए धीरे से लंड को थोड़ा बाहर खींचा और गच्च से दुबारा बूर की गहराई में उतार दिया, सुधिया मीठे मीठे दर्द से सिरह उठी, सूरज बार बार ऐसा ही करने लगा वह थोड़ा सा लंड को निकलता और दुबारा बूर में पेल देता, सुधियां को ये सब बहुत अच्छा लग रहा था,
सूरज अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर लंड को बूर की गहराई में अच्छे से रगड़ता तो सुधिया मस्ती में कराह जाती, जोर जोर से उसकी सीत्कार निकलने लगी।


सूरज अब पूरी तरह सुधिया से लिपटते हुए धीरे धीरे लंड को बूर से बाहर निकाल निकाल के गच्च गच्च धक्के मारने लगा, उसने अपनी मामी के होंठ अपने होंठों में भर लिए और चूसते हुए थोड़े तेज तेज अपनी मामी को चोदने लगा।


सुधिया का दर्द धीरे धीरे जाता गया और चुदाई के मीठे मीठे सुख ने उसकी जगह ले ली। सुधिया को ऐसा लग रहा था कि आज उसकी बूर की बरसों की भूख मिट रही है, इतना आनंद आजतक उसे कभी नही आया था, मोटे से लंड की रगड़ बूर की गहराई तक हो रही थी, सूरज का लंड अपनी ही मामी की बच्चेदानी के मुँह पर जाकर ठोकर मारने लगा जिससे सुधियां का बदन बार बार वासना में थरथरा जा रहा था, एक असीम गहरे सुख में सुधीया का बदन गनगना जा रहा था।


सुधियां - आआआआआआहहहहह.......हाय बेटा.....चोदो मुझे........चोदो अपनी मामी को.........कितना मजा आ रहा है, कितना प्यारा है तुमारा लंड........कितना मोटा और लम्बा है मेरे भांजे का लंड......... हाय बेटा.....ऐसे ही चोदते रहो अपनी मामी को.......हाय

सूरज अब अपनी मामी की रसभरी बूर में हचक हचक के थोड़ा और तेज तेज अपना मोटा लन्ड पेलने लगा, बूर बिल्कुल पनिया गयी थी, बहुत रसीली हो चुकी थी, लंड अब बहुत आसानी से बूर के अंदर बाहर होने लगा था, सूरज ने अब और अच्छी पोजीशन बनाई और अपनी मामी की चूचीयों को मसलते हुए उन्हें पीते हुए, निप्पल को मुँह में भर भरकर चूसते चाटते हुए कस कस के बूर में पूरा पूरा लंड हचक हचक कर पेलने लगा,
बीच में सूरज रुकता और अपनी गांड को गोल गोल घुमा कर अपने मोटे लंड को अपने मामी की बूर की गहराई में किसी फिरकी की तरह घूमने की कोशिश करता जिससे लंड बूर की गहराई में अच्छे से उथल पुथल मचाता और रगड़ खाता, इससे सुधिया मस्ती में हाय हाय करती हुई सीत्कार उठती।


दोनों की मादक सिसकारियां थोड़ी तेज तेज गूंजने लगी, सुधिया लाख कोशिश करती की तेज सिसकी न निलके पर क्या करे मजा ही इतना असीम आ रहा था कि न चाहते हुए भी तेज सिसकियां निकल ही जा रही थी, बूर इतनी रसीली हो चुकी थी की बूर चोदने की फच्च फच्च आवाज़ आने लगी, एक लय में हो रही इस चुदाई की आवाज से दोनों मामी भांजा और मस्त होने लगे,
सुधियां तो अब मस्ती में नीचे से अपनी चौड़ी गांड उठा उठा के चुदाई में अपने भांजे का साथ देने लगी,
९ इंच लंबे लंड का रसीली प्यासी बूर में लगातार आवागमन सुधिया को मस्ती के सागर में न जाने कहाँ बहा ले गया।


सूरज अब सुधिया को पूरी ताकत से हुमच हुमच कर जोर जोर चोदने लगा, नीचे से घास का ढेर उनकी चुदाई से बिखरने लगा,
झाड़ियों में दोनों मामी भांजे की सिसकिया गूंजने लगी, साथ में चुदाई की फच्च फच्च आवाज भी आने लगी थी, माहौल बहुत गर्म हो चुका था, किसी को अब होश नही था, सुधिया का पूरा बदन उसके सूरज के जोरदार धक्कों से हिल रहा था,
सूरज अपनी मामी पर चढ़ा हुआ उसे घचा घच्च लंबे लंबे धक्के लगाते हुए चोदे जा रहा था। बूर बिल्कुल खुल गयी थी अब, लंड एक बार पूरा बाहर आता और दहाड़ता हुआ बूर की गहराई में उतर जाता, हर बार तेज तेज धक्कों के साथ नीचे से अपनी गांड को उछाल उछाल के चुदाई में ताल से ताल मिलाते हुए सुधिया सीत्कार उठती थी।

आह...........बेटा............हाय ऐसे ही चोदो मुझे............ऐसे ही चोदो अपनी मामी को....
...........अपनी मामी को...............ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़................. ऊऊऊऊईईईईईई..............अम्मा............चोद डालो बूर मेरी बेटा..............अच्छे से चोदो अपने लंड से मेरी बूर को बेटा...................आआआआआहहहहहहहह......... सिर्फ तुमरे मोटे लंड से बेटा.........सिर्फ तुमारा लंड से............हाय......... चोदो मेरे बेटे और तेज तेज चोदो अपनी मामी को..........हाय दैय्या........कितना मजा आ रहा है।


सूरज भी मस्ती में करीब 20-25 मिनट तक लगातार सुधिया की बूर में हचक हचक के लन्ड पेल पेल के चोदता रहा, सुधिया और सूरज के तन बदन में एक जोरदार सनसनाहट होने लगी, सुधिया की बूर की गहराई में मानो चींटियां सी रेंगने लगी, लगातार अपने भांजे के जोरदार धक्कों से उसकी बूर में सनसनी सी होने लगी और एकाएक उसका बदन ऐंठता चला गया, गनगना कर वो चीखती हुई अपने नितम्ब को उठा कर अपने भांजे से लिपटकर झड़ने लगी,

आआआआआहहहहह...........बेटामैं गयी.......... तुम्हारी मामी झड़ रही है बेटा.............ओओओओहहहह ह........हाय....... मैं गयी बेटा........और तेज तेज चोदो बेटा.........कस कस के पेलो मेरी बूर........ऊऊऊऊईईईईई.......बेटा.........हाय मेरी बूर...…..….कितना अच्छा है मेरे बेटे लंड.........आआआआआहहहहह


सूरज का लंड तड़बतोड़ सुधियां की बूर चोदे जा रहा था, सुधिया सीत्कारते हुए जोर जोर हाय हाय करते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ने लगी, सूरज को अपनी मामी की बूर के अंदर हो रही हलचल साफ महसूस होने लगी, कैसे सुधिया की बूर की अंदरूनी दीवारें बार बार सिकुड़ और फैल रही थी, काफी देर तक सुधिया बदहवास सी सीत्कारते हुए अपने भांजे से लिपटी झड़ती रही।


सूरज तेज तेज धक्के लगते हुए सुधीया की बूर चोदे जा रहा था, वह बड़े प्यार से चोदते हुए अपनी मामी को दुलारने लगा,
इतना मजा आजतक जीवन में सुधियां को कभी नही आया था, चरमसुख के असीम आनंद में वो खो गई, अब भी उसके भांजे का लंड तेज तेज उसकी बूर को चोदे जा रहा था, कभी कभी वो बीच बीच में तेजी से सिस्कार उठती, बूर झड़ने के बाद बहुत ही चिकनी हो गयी थी, सूरज का लंड अपनी मामी के रस से पूरा सन गया था, सुधिया का बदन अब ढीला पड़ गया वो बस आंखें बंद किये हल्का हल्का सिसकते हुए चरमसुख के आनंद में डूबी हुई थी कि तभी सूरज भी जोर से सिसकारते हुए एक तेज जबरदस्त धक्का अपनी मामी की बूर में मारते हुए झड़ने लगा, धक्का इतना तेज था कि सुधिया जोर से चिहुँक पड़ी आह........ बेटा......... हाय

एक तेज मोटे गाढ़े वीर्य की पिचकारी उसके लंड से निकलकर सुधिया की बूर की गहराई में जाकर लगी तो सुधियां उस गरम गरम लावे को अपनी बूर की गहराई में महसूस कर गनगना गयी और तेजी से मचलकर सिसकारने लगी बड़े प्यार से उसने अपने भांजे को अपनी बाहों में कस लिया और उनके बालों को सहलाने लगी, प्यार से दुलारने लगी, सूरज का मोटा लंड तेज तेज झटके खाता हुआ वीर्य की मोटी मोटी धार छोड़ते हुए अपनी मामी की बूर को भरने लगा, अपनी मामी के बूर में उसका गाढ़ा गरम वीर्य भरने लगा,
गरम गरम सूरज का वीर्य सुधियां की बूर से निकलकर गांड की दरार में बहने लगा और नीचे घास के ढेर को भिगोने लगा, सूरज काफी देर तक हाँफते हुए अपनी मामी की बूर में झाड़ता रहा,
आज उसे एक गदरायी कमसिन मखमली बूर मिली थी और भी उसकी मामी की, सूरज सच में अपनी मामी की बूर चोद कर निहाल हो चुका था, सूरज और सुधिया ने असीम चरमसुख का आनंद लेते हुए एक दूसरे को कस के बाहों में भर लिया और बड़े प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे, और अपनी सांसों को काबू करते हुए एक दूसरे को बाहों में लिए लेटे रहे।


सूरज का लंड थोड़ा शिथिल हो गया था पर सुधिया की बूर के अंदर ही घुसा हुआ था, सुधिया अपने भांजे के शिथिल हो चुके लंड को महसूस कर मुस्कुरा उठी, उसको अपने भांजे के लंड पर बहुत प्यार आ रहा था, जैसे कोई छोटा बच्चा खा पीकर सो गया हो ठीक वैसे ही उसके भांजे का लंड उसकी बूर में पड़ा हुआ था।

दोनो की चुदाई में इतना समय गुजर चुका था की,
आसमान में शाम का अंधेरा छाने लग गया,
सुधियां अपने भांजे के चेहरे को अपने हांथों में थाम लेती है और बड़े प्यार उसके ओठ चूमते हुए बोलती है
ओ मेरे बेटे मेरे बलमा, मजा आया, अपनी मामी को चोदके।

सूरज - हां मेरी मामी, मेरी सजनी बहुत मजा आया, पर मन नही भरा अभी।

सुधियां - हाय मेरे राजा, मेरा बेटा जिस मामी से उसका भांजा का मन एक ही बार में भर जाए तो उस मामी का हुस्न किस काम का, हम्म।

सूरज - सच, तुम तो कयामत हो मामी, कयामत, तुमें मजा आया।

सुधियां - बहुत बेटे....बहुत..मुझे तो बहुत मजा आया अपने भांजे का मोटा लंड अपनी बूर को खिलाकर,
देखो न बेटा अभी भी मेरी बूर कैसे चुपके चुपके हौले हौले तुम्हारे लंड को चूम रही है,

जैसे छोटी बच्ची मुँह में लॉलीपॉप लिए सो जाती है वैसे ही देखो न मेरी बुरिया भी कैसे तेरा लंड मुँह में लिए लिए सो सी रही है।
सच बेटा मुझे बहुत मजा आया, ऐसा सुख मुझे आजतक नही मिला था, बेटा एक बात बोलूं

सूरज - बोल न मेरी रानी

सुधियां धीरे से कान में - बेटा आज मुझे पहली बार चरमसुख प्राप्त हुआ है

सूरज मामी को आश्चर्य से देखते हुए- क्या, सच में।

सुधिया - हाँ, बेटा

सूरज - मामाजी अभी तक तुमें चरमसुख नही दे पाये?

सुधिया - चरमसुख लुल्ली से नही मिलता बाबू, औरत को चरमसुख तो मिलता है.....

सूरज - बोल न, रुक क्यों गयी मेरी जान।

सुधिया - चरमसुख तो मिलता है भांजे मोटे से लंड से, और तेरा तो लंड भी नही है

सूरज आश्चर्य से- फिर, अगर ये लंड नही है तो क्या है मेरी मामी, बता न।

सुधियां - बेटा समझ जाओ न।

सूरज - नही समझ आ रहा, तूम ही बता दो।

सुधिया ने थोड़ा रुककर फिर अपने बेटे के कान में सिसकते हुए बोला- तुम्हारा तो लौड़ा है लौड़ा, क्योंकि जिस तरह आपने अपनी मामी की कमसिन बूर को चोदा है वो एक लौड़ा ही कर सकता है, ये किसी लुल्ली के बस के नही

सूरज अपनी मामी के मुँह से ये शब्द सुनकर अचंभित रह गया और जोश में उसने एक धक्का खींच के बूर में मारा तो सुधिया जोर से चिंहुँक पड़ी आआआआआआआहहहहहहहह!

सूरज - तुमें मेरा लंड इतना पसंद आया।

सुधियां - लंड नही बेटा लौड़ा......आह.... लौड़ा, बहुत मजेदार है मेरे भांजे का लौड़ा। मैं तो तेरी दिवानी हो गयी मेरे भांजे, तुम्हारी मामी तेरी दीवानी हो गयी और भांजे का लंड क्यों मामी को पसंद नही आएगा भला, कितना रोमांचक होता है भांजे का लंड......आआआआआहहहह

सूरज मामी के कान में- लंड नही लौड़ा, मेरी मामी लौड़ा, अब खुद ही भूल गई।

सुधिया - हाँ मेरे प्यारे सैयां, लौड़ा, तुम्हारा लौड़ा, डालोगे न हमेशा अपना लौड़ा मेरी बुर में बेटा, बोलो न, मुझे तरसाओगे तो नही इस मस्त लौड़े के लिए कभी।

सूरज - न मेरी मामी, मैं तो खुद तुम्हारी मखमली बूर के बिना नही रह सकता अब। कितनी रसभरी है मेरी मामी की बूर....आह


शाम के समय मौसम थोड़ा ठंडा होने की वजह से सुधियां को फिरसे पेशाब लगी, उसके भांजे का लंड उसकी बूर में समाया हुआ था ही,
वह बोली- बेटा, देखो शाम हो गई ही सब हमारा इंतजार कर रहे होगे अगर हम नही मिले तो हमे ढूंढते हुवे यहा पर भी आ सकते ही हमे चलाना चाहिए

सूरज- हाँ मेरी जान, हमे चलाना चाहिए वैसे भी विलास मामा दोपहर से मुझे ढूंढ कर परेशान हो गए होगे।

ओर सूरज ने अपना फौलाद हो चुका लंड सुधिया की बूर में से बाहर निकाला तो सुधिया आह करके सिसक उठी।
सुधिया - बेटा मुझे पेशाब आ रहा है

सूरज - तो पिला दो न, इसमें पूछना क्या मेरी जान

सुधिया चौंकते हुए- क्या, फिरसे तुम पेशाब पियोगे?

सूरज - हाँ, पिला दे तेरा मूत मामी

सुधिया - मेरा मूत पियोगे, अपनी मामी का

सूरज - हाँ, प्यास बहुत लगी है

सुधियां- बहुत प्यास लगी है मेरे बेटे को, ठीक ही बेटे अभी पिलाती हू।

सूरज- ठीक है हुज़ूर


सूरज शाम की हलकी सी रोशनी में देखने लगा, दोनों मामी भांजा पूरे नंगे थे,
सूरज सुधियां को देखता रह गया, सुधिया भी अपने भांजे को वासना की नज़रों से निहारती रही, एक बार शाम की हलकी रोशनी में दोनों ने जब एक दूसरे को पूर्ण नग्न देखा तो रहा नही गया और दोनों एक दूसरे की बाहों में कस कर लिपट गए और एक दूसरे के बदन को मस्ती में सहलाने लगे, कुछ देर बाद

सुधिया - बेटा जोर से पिशाब आ रहा है।

सूरज ये सुनते ही फट घास पर लेट गया और सुधिया शाम की हलकी रोशनी में कराहते है अपने बेटे के सीने पर से अपनी बूर उसके मुँह के सामने करके बैठ गयी,

हलकी की रोशनी में अपनी मामी की महकती बूर जिसको अभी कुछ देर पहले ही सूरज ने घच्च घच्च चोद चुका था, देखकर फिर मदहोश हो गया, उस बूर की छेद से अभी भी उसका वीर्य हल्का हल्का निकल रहा था, जो गवाही दे रहा था कि एक मामी अपने ही भांजे से अच्छे से चुदी है।

बूर देखते ही सूरज ने अपने दोनों हांथों को सुधियां के नितम्ब पर रखा और आगे को ठेलकर उसकी रसभरी बूर को मुँह में भर लिया,
सुधियां जोर से सिसक उठी और खुद भी उसने मचलते हुए अपने भांजे का सर पकड़कर अपनी बूर उनके मुँह में रगड़ने लगी, सूरज लप्प लप्प अपनी मामी की बूर को चाटने लगा तो एक दम से सुधियां को झुरझुरी महसूस हुई और उसका पेशाब निकल गया, आआआआआआआआहहहह...........दैय्या, बेटा........आआआआहहहहह, सुधियां की बूर की फैली हुई दोनों फांकों के बीच से गरम गरम महकता हुआ पेशाब सुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रर की आवाज के साथ सूरज के पूरे मुँह को भिगोने लगा, पेशाब छोड़ती बूर को सूरज जीभ निकाल के पहले तो चाटने लगा, फिर बूर को मुँह में भरकर अपनी मामी का मूत पीने लगा, क्या महक थी मामी के पेशाब की और मूतते हुए सुधिया क्या लग रही थी,
दोनों मामी भांजे की आंखें मस्ती में बंद थी, सूरज लपा लप सुधिया का पेशाब कभी चाटता कभी पीता, सूरज का पूरा चेहरा, उसकी गर्दन और सीना सब सुधियां के पेशाब से भीग चुका था, सुधियां अपने पेशाब से अपने भांजे को भिगोते हुए उनको बड़ी मादकता से देखती भी जा रही थी, काफी हद तक सूरज सुधियां का पेशाब पी चुका था,
एकाएक सुधियां ने अपनी उंगली से कराहते हुए अपनी बूर की फाँकों को चीरा और पेशाब की धार छोड़ती फैली हुई बूर को एकदम से अपने भांजे के मुँह में भर दिया और बोली- लो बेटा अपनी मामी का पेशाब, अब खत्म होने वाला है जल्दी पूरा पी लो..

सूरज ने लप्प से अपनी मामी की बूर को मुँह में भरा और सारा मूत पी गया, पेशाब बन्द होने के बाद सुधिया ने अपनी बूर अपने बेटे के मुँह से बाहर खींची और एक पल के लिए उनके सारे भीगे हिस्से को कामुकता से देखने लगी और बोली- कैसा लगा मेरे बेटे

सूरज - मेरे पास शब्द नही हे मामी , ऐसा मजा आजतक नही आया था।

सुधियां उठकर अपने बेटे के ऊपर लेट गयी और बोली- अब मैं अपने प्यारे बेटे को ऐसे ऐसे मजे दूंगी की तुमरी जिंदगी बदल जाएगी

सूरज का लंड सुधिया की बूर पर फिरसे दस्तक देने लगा, सूरज अपने दोनों हाँथों से सुधियां की गांड को भी सहलाने लगा, सुधियां सिसकते हुए अपने भांजे के चेहरे और गर्दन पर लगे पेशाब को मस्ती में चाटने लगी तो सूरज भी मस्ती में कराहने लगा- आह मेरी जान मामी

सुधिया मस्ती में अपने भांजे को चूमती चाटती हुई नीचे की तरफ बढ़ने लगी, सूरज उसके बालों को सिसकते हुए सहलाने लगा, सुधियां अपने भांजे के दुबारा तन चुके लन्ड तक आयी और हलकी की रोशनी में अपने सूरज का खड़ा लन्ड निहारने लगी,
उसने उसको हाँथ से पकड़ा और चमड़ी को धीरे से उतारा तो उसकी आंखें अपने भांजे के मोटे सुपाड़े और उस पर पेशाब के छेद को देखकर मस्ती में भर गई, उसने अपने भांजे की तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोली- कितना प्यारा है बेटा ये, बहुत प्यारा है मेरे मर्द का लंड और ऐसा कहते हुए सुधियां अपने भांजे का लंड हौले हौले चूमने लगी, पहली बार लंड पर अपनी मामी के गरम होंठ महसूस कर सूरज जन्नत में खो गया, कितने गरम चुम्बन दे रही थी सुधियां उसके लंड पर, धीरे धीरे चूमने के बाद सुधियां जीभ निकाल कर अपने भांजे के लंड चाटने लगी, सूरज मस्ती में उसका सर पकड़े अपने लंड को हौले हौले मामी के मुँह में खुद भी ठेलने लगा, अपनी मामी को अपना लंड चुसवाने में कितना मजा आ रहा था।

सुधिया आंखें बंद किये अपने भांजे का लंड बड़ी लगन से चूसे जा रही थी और अपने मन में सिसकते हुए सोचे जा रही थी कि लंड अगर दमदार हो तो चूसने का मजा ही कुछ और है, कभी वो सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसती, कभी उसपर जीभ फिराने लगती, कभी तो पूरे लंड को जड़ तक मुँह में भरने की कोशिश करती पर न हो पाता, कभी दोनों आंड को मुँह में भरकर पीती, लंड पर लगे उसकी बूर का रस और वीर्य का मिश्रण उसने कब का चाट चाट के साफ कर दिया था,
कभी जीभ नुकीली बना के अपने भांजे के लंड के छेद पर गोल गोल फिराती जिससे सूरज झनझना के मचल जाता, सूरज खुद भी मामी का सर पकड़ कर अपना लन्ड उसके मुँह में अंदर बाहर कर रहा था और जोर जोर से कराहते जा रहा था- ओह.... मामी.....कितने प्यारे हैं तेरे होंठ, कितने नरम है......मेरी प्यारी मामी इतना मजा तो मुझे आजतक नही आया......ओह मेरी रानी.......मजा आ गया

सुधिया - आह.....बेटा क्या लंड है तुम्हारा.......मेरा तो जीवन सवर गया इसे पाकर....... मैं तो दीवानी हो गयी अब इसकी............इसके बिना अब मैं रह नही सकती।


जैसे ही सुधिया ने ये शब्द बोला सूरज ने अपना लंड मुंह से निकल कर सुधियां की मखमली रिसती बूर में अंदर तक एक ही बार में घुसेड़ दिया।

सुधिया जोर से कराह उठी और मस्ती में अपने भांजे से लिपट गयी।

सूरज - हाय....क्या नशा है तेरी बातों में मामी....सच

कुछ देर तक सूरज मामी की बूर में लन्ड पेले पड़ा रहा और सुधिया अपने भांजे की पीठ सहलाती रही।

सुधियां सिसकते हुए बोली- बेटा मजा आ रहा हे और

सुधियां ने एक चपत अपने भांजे की पीठ पर मारा तो सूरज ने जवाब में लन्ड बूर में से आधा निकाल के एक धक्का जोर से मारा, सुधियां गनगना गयी।

सुधीया - हाय बेटा.....धीरे से......ऊऊऊऊईईईईईई धीरे से बेटा


सूरज धीरे धीरे लंड बूर में अंदर बाहर करने लगा

सुधिया सिसकने लगी और बोली- थोड़ी भी देर के लिए लंड को बूर में घुसे हुए रोककर आराम नही करने देते ये मेरे राम.....बाबू

सूरज- क्या करूँ मेरी मामी, तेरी बूर है ही इतनी मक्ख़न की डालने के बाद रुका ही नही जाता।

सुधियां सिसकते हुए- बेटा

सूरज - हाँ मेरी रानी

सुधियां - अपने मामा के सामने अपनी मामी को चोदोगे?

सूरज - मामा के सामने.....मतलब

सूरज बराबर बूर को हौले हौले चोद रहा था और दोनों सिसकते भी जा रहे थे

सुधिया - तेरे मामा ने मुझे बाहोत तड़पाया हे सताया हे में परेशान हो गई हू उससे में बदला लेना ही मुझे तुम इसमें मेरी मदत करोगे
मेरा मतलब वो पास में हो या बगल में सोता हो और तुम अपनी मामी को चोदना........हाय कितना मजा आएगा.....कितना रोमांच होगा।

सूरज को ये सोचकर अत्यधिक रोमांच सा हुआ कि कैसा लगेगा एक ही बिस्तर पर या फिर सामने मेरा मामा होगा और मैं अपनी मामी को उसके पति के मौजूदगी में चोदुंगा।

रोमांच में आकर उसने अपने धक्के थोड़ा तेज ही कर दिया, सुधिया के दोनों पैर उठाकर अपनी कमर पर लपेट दिए और थोड़ा तेज तेज अपनी मामी की बूर में लंड पेलने लगा, सुधियां की तो मस्ती में आंखें बंद हो गयी, क्या मस्त लौड़ा था उसके भांजे का, कैसे बूर के अंदर बाहर हो रहा था। मस्ती में वो अपने भांजे की पीठ सहलाने लगी और उन्हें दुलारने लगी।

सूरज - हां मेरी जान, मजा तो बहुत आएगा पर ये होगा कैसे,

सुधियां - हाँ बेटा......आह..... उई....बेटा जरा धीरे धीरे हौले हौले चोदो....बात तो तुम सही कह रहे हो, तुम अगर घर आकर मुझे अपने पति के मोजुदगी में चोदोगे रोमांच से बदन कितना गनगना जाएगा,

सूरज - तेरी बूर के बिना मैं भी नही रह सकता मेरी जान,


सूरज जोश में आकर हुमच हुमच कर सुधियां की रसीली बूर चोदने लगा, दोनों इस कल्पना से कामुक हो जा रहे थे और घचा घच्च चुदाई भी कर रहे थे, सुधियां कभी कभी तेजी से सिसक देती तो कभी कभी वासना में अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदने लगती।

सूरज - हां मेरी मामी ये भी सही कहा तूने, तू ही किसी बहाने तुम मुझे घर बुला फिर तेरे पति के मोजुदगी तुझे चोदूंगा।

सुधिया - मेरे पति के सामने

सुधियां ने आंख नाचते हुए कहा

सूरज- हां तेरे पति के सामने ही तो मेरे मामा के सामने

सुधिया - पगलू मेरे पति तो सिर्फ और सर्फ तुम हो, वो तो बस नाम के हैं अब से

सूरज - अच्छा जी

सुधियां - हम्म

सूरज - मैं तो भांजा हू तेरा

सुधियां- पति भी हो और भांजा तो हो ही....

सूरज - हाँ ठीक मामी

सूरज तेज तेज जोश में धक्के मारने लगा, सुधियां मस्ती में गांड उठा उठा के चुदवाने लगी, तेज तेज सिसकियों की आवाज गूंजने लगी, दोनों पूर्ण रूप से नंगे थे। तेज तेज धक्कों से सुधियां का पूरा बदन हिल रहा था, जोर जोर से सिसकते हुए वो अपने भांजे को सहलाये और दुलारे जा रही थी और वासना में सराबोर होकर कामुक बातें बोले जा रही थी
हाँ बेटा ऐसे ही चोदो..........ऐसे
ही हुमच हुमच के तेज धक्के मारो.......मेरी बुर में............आह बेटा.............ऊऊऊऊईईईईईई........... थोड़ा किनारे से बूर की दीवारों से रगड़ते हुए अपना लंड अपनी इस मामी की बूर में पेलो.......रगड़ता हुआ बच्चेदानी तक जाता है तो जन्नत का मजा आ जाता है बेटे जी...........मेरे बेटे जी..........आह..... मेरे पति जी.........चोदो अपनी पत्नी को..........तरस मत खाओ...........बूर तो होती ही है जमके चोदने के लिए..............एक बार और चोद चोद के फाड़ दो मेरी बूर...........आआआआआहहहहहहह

सुधियां ऐसे ही बड़बड़ाये जा रही थी और सूरज तेज तेज धक्के मारे जा रहा था, एकाएक सूरज ने सुधियां की चूची को मुँह में भरा और पीने लगा, मस्ती में सुधियां और मचल गयी, पूरा बदन उसका वासना में एक बार फिर ऐंठने सा लगा, एकाएक बाहर कुछ लोगों की हल्की हल्की आवाजें आने लगी।

सुधियां तो पूरी मस्ती में थी पर सूरज के कान खड़े हो गए, अभी तक तो वो यही सोच रहे थे कि शाम हो रही है तो कौन नही आएगा,
तभी विलास मामा जोर जोर से सूरज को आवाज़ देने लगे
सूरज ने मन में कोसते हुए उठने की कोशिश की तो सुधियां ने उनकी कमर को थाम लिया और पूछा- बेटा क्या हुआ चोदो न, रुक क्यों गए।

सूरज - लागत हे मामा पास में ही हे हमे चलाना चाहिए बहोत देर हो गई हे।

सुधियां - पर मेरी बुरिया वो रोने लगेगी।
वहीं जिसके मुँह से आप निवाला छीन रहे हो, देखो न कैसे मजे से खा रही है।

सूरज आश्चर्य से- कौन?....किसके मुँह से निवाला छीन रहा हूँ, मैं समझा नही।

सुधियां - अरे मेरे बुध्धू राम........ये

ऐसा कहते हुए सुधिया ने बड़ी अदा से अपने भांजे का हाँथ पकड़ा और अपनी बूर पर ले गयी जो सूरज का पूरा लंड लीले हुए थी, और दोनों नीचे देखने लगे, लंड पूरा बूर में घुसा हुआ था।

सुधियां - किसी के मुँह से निवाला नही छीनते बेटा, देखो कैसे बेसुध होकर मस्ती में तुम्हारा मोटा लंड खा रही है मेरी ये बुरिया, अब आप निकाल लोगे तो ये रोने लगेगी और फिर चुप कराए चुप भी नही होगी,
अभी आधी मजधार में न छोड़ो इसे, न रुलाओ बेटा इसको, इसके हक़ का खा लेने दो इसे पूरा। अब निवाला मुँह में ले रखा है तो खा लेने दो पूरा अपनी इस मामी की बुरिया को।

इतना सुनते ही सूरज ने सर उठा के सुधिया की आंखों में देखा तो सुधिया खिलखिला के हंस भी दी और वासना भारी आंखों से विनती भी करने लगी की बेटा अभी चोदो रुको मत चाहे आग ही लग जाये पूरी दुनिया को।

सूरज ने बड़े प्यार से मामी के गाल को चूम लिया और बोला- बहुत प्यारी प्यारी बातें आती है मेरी मामी को, तेरी इन बातों का ही दीवाना हूँ मैं।

सुधिया सिसकते हुए- मामी नही पत्नी, आज से पत्नी हूँ न आपकी मैं।

सूरज - हां मेरी पत्नी, अब तो चाहे कुछ भी हो अपनी पत्नी को चोद के ही छोडूंगा।

और फिर सूरज ने सुधियां के ऊपर अच्छे से चढ़ते हुए अपने दोनों हांथों से उसके विशाल साइज की चौड़ी गांड को अपने हांथों से उठा लिया और अपना मोटा दहाड़ता लंड तेज तेज धक्कों के साथ पूरा पूरा बूर में डाल डाल कर कराहते हुए रसीली बूर चोदने लगा,
सुधिया की दुबारा सिसकिया निकलने लगी, कुछ ही देर में पूरी झाड़ियों में मादक सिसकियों से गूंज उठा, पूरी घास तेज धक्कों से बिखर गई, करीब 10 मिनट की लगातार मामी भांजे की धुँवाधार चुदाई से दोनों के बदन थरथराने लगे और दोनो ही एक बार फिर तेज तेज हाँफते हुए कस के एक दूसरे से लिपट गए और सीत्कारते हुए एक साथ झड़ने लगे, कुछ देर तक झड़ने के बाद दोनों शांत होकर एक दूसरे को चूमने सहलाने लगे फिर सूरज ने एक जोरदार चुम्बन सिधिया के होंठों पर लिया और बोला

अब जलादि से साड़ी पहनो मामी हमे जाना चाहिए नही तो मामा चिला चिला कर आसपास के लोगो को इकट्ठा कर देंगे और फिर कही हम पकड़े न जाए
सुधियां जलादि कच्छी ब्रा पहन कर के साड़ी पहन लेती
ओर सूरज भी धोती पहन कर तयार हो जाता है।
ओर दोनो चुपके से से झाड़ियों से निकल कर गेहूं के खेतो से होते हुवे बाहर निकलने लगाते है
तभी विलास की नजर उन दोनो पे पड़ती है
ओर दोनो भी विलास मामा को सामने देख कर डर जाते हे।

विलास - दोपहर से तू कहा था तू शाम हो गई फिर भी तेरा आता पता नही हे।ओर में तुझे कबसे आवाज दे रहा हु और सुधिया भाभी के साथ क्या कर रहा हे।

सूरज - डरते हुवे वो में वो मामी के खेत का बांध टूट गया था और सारा पानी पास के खेत में जा रहा था इस लिए में दोपहर से मामी की बांध लगाने में मदत कर रह था।

विलास - अच्छा हुवा की तुमने भाभीजी की मदत की,
पर बेटा आज बिजली जलादि चली जाने की वजह से खेतो की सिंचाई नहीं हो पाई अब हमे रात को खेत आ के पानी देना होगा क्योंकि कल दिन में बिजली नही हे।
भाभीजी आपके खेत की सिंचाई हुवी की नही

सुधिया - नही भाई साहब अब रात में ही देना पड़ेगा पर में अकेली ये सब कैसे करूंगी,

विलास - फिकर मत कीजिए में रात में अपना खेत संभाल लूंगा और सूरज आपकी मदत करेगा,

सुधीया - ठीक हे भाई साहब

विलास ठीक ही अब जल्दी घर चलते ही बहोत देर हो गई हे फिर हमे वापस खेतो में आना हे।

तो तीनों मिलके घर जी और निकल पड़ते हे।
विलास आगे आगे चल रहा था और सूरज और सुधियां पीछे पीछे
तभी सूरज ने मामी को कस के बाहों में भर लिया और बोला देख न मामी ये फिर से खड़ा हो गया हे अपने धोती में बने तंबू को दिखते हुवे

सुधियां - अब नही बेटा... आज रात खेत में जमके चोदना।
सूरज ये बात सुन के ज़ूम उठा की अपनी प्यारी मामी को आज रात भर खेत में चोदेगा।
थोड़ी देर में सभी अपने घर पहुंच जाते थे।
अब सूरज को रात का इंतजार था।
super hot update..!!
iss update aapne sirf varnan nahi rakha..suraj aur sudhiya ki baate bhi dali..jiski wajah se bahot achha ban gaya yeh update..dono me romantic baate ho rahi thi aur sath me chudayi bhi..bas reh gaya sudhiya ka suraj ka mut pina aur gand marna..woh agle update me hojayega..!!
 

Chhaga420

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मुख मैथुन का रस भरा अद्भुत वर्णन , और धुआँधार सम्भोग का जबरदस्त वर्णन
 
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