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Incest मामा का गांव ( बड़ा प्यारा )

Chhaga420

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भाग ७

सुबह में और मामा जल्दी उठ कर खेतो की तरफ निकल पड़े ओर खेत पहुंच कर काम करने लगे। सूरज का कल से बुरा हाल हो रहा था। उसक लंड धोती में बार बार खड़ा हो रहा था। उसे तो बस पहिली चुदाई का इंतजार था।
तभी सुधिया जो रिश्ते में सूरज की मामी लगती हे वह विलास मामा के खेतो में आइ।

सुधिया ४२ साल की औरत


( सुधियां मामी के बड़े भाई की पत्नी जो इसी गांव में रहकर खेती करता था। सुधियां मामी की सहेली भी हे और मेरे दोस्त पप्पू की मां भी )
वह हमारे खेतो में आइ।
उसका खेत हमारे खेतो के पास में ही था। खेत में आके मामा से बात करने लगी

सुधीया - विलासजी जरा सूरज को मेरे साथ भेजिए ना जरा खेतो में कुछ काम हे।
विलास - इस में पूछने की क्या बात ले जाइए
मामा मुझसे कहने लगे सूरज बेटा जा भाभीजी की मदत कर के घर चला जा आज खेतो में ज्यादा काम नही हे।
सूरज - ठीक ही मामाजी और में सुधिया मामी के साथ उनके खेतो में चला गया।

सुधिया सूरज को लेकर खेत में के के चली गई।
सुधियां ट्रांसपेरेंट पीली रंग की साड़ी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ट्रांसपेरेंट साड़ी की वजह से उसका गोरा बदन पीले रंग की साड़ी में भी साफ-साफ नजर आ रहा था। सुधियां की गहरी नाभि एक छोटी सी बुर के समान बेहद मनमोहक और कामुक लग रही थी जिस पर नजर पड़ते हैं सूरज के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी। सुधियां आगे आगे चल रही थी और सूरज पीछे पीछे चल रहा था।

सुधियां के नितंबों में एक अजीब सा भारीपन और थिरकन नजर आ रहा था और वह पीले कल साड़ी के अंदर होने के बावजूद भी साफ साफ महसूस हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे सुधियां के कमर के नीचे दो बड़े-बड़े गुब्बारे पानी से भरे हुए बांधे हो और चलने पर इधर-उधर हो रहे हैं। सूरज को अपनी मामी की मटकती हुई गांड बहुत ही खूबसूरत लग रही थी जिसकी वजह से धोती में सोया हुआ उसका लंड हरकत कर रहा था।
सुधियां ऊंची नीची पगडंडी पर संभाल संभाल कर अपने पैर रखते हुए आगे बढ़ रही थी।

लेकिन सुधिया को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके पीछे चल रहा उसका भांजा उसके भराव दार बड़ी बड़ी गांड को घूर रहा है।

कुछ देर के बाद सुधियां और सूरज खेत में पाहोच गए।

सुधियां - अच्छा हुआ तू आ गया अब जल्दी से घास का ढेर रस्सी से बांधकर मेरे सर पर रख दे,,,,।( सुधिया एकदम सीधी खड़ी होते हुए और अपने दोनों हाथ को कमर पर रखकर बड़ी ही मादक अदा दिखाते हुए बोली हालांकि यह बिल्कुल उसके लिए सहज था उसने कोई जानबूझकर इस तरह की अदा नहीं दिखाई थी लेकिन सूरज के देखने का रवैया पूरी तरह से बदल चुका था इसलिए सुधिया के इस तरह से खड़े होने पर भी ऐसे सुधिया के अंदर मादकता नजर आ रही थी,,, सूरज घास के ढेर को रस्सी से बांधते बांधते सुधिया के खूबसूरत यौवन का रस अपनी आंखों से पीने लगा,,,, सुधीया की दोनों चूचियां कसे हुए ब्लाउज में और भी ज्यादा उछाल मार रहे थे,,,। उनको देखते ही सूरज के मुंह में पानी आ गया,,,,,

सूरज घास के ढेर के बोझ को रस्सी से अच्छी तरह से बांध चुका था,,,। वैसे तो इस बोझ को सूरज को ही उठाना था लेकिन सूरज के मन में कुछ और चल रहा था,,,। इसलिए वह घास के ढेर को उठाकर सुधिया के सर पर रखने की तैयारी करने लगा और सुधिया भी इसके लिए पूरी तरह से तैयार थी वह अपने लिए जगह बना कर अच्छी तरह से खड़ी हो गई ताकि सूरज आराम से उसके सर पर घास का ढेर रख सके,,, घास के बोझ को उठाकर सूरज सुधिया के सर पर रखने लगा,,, घास का ढेर कुछ ज्यादा ही था,,, सूरज सुधिया के ठीक सामने से उसके सर पर बोझ रखने लगा,,, वह बोझ उसके सर पर रखने के बहाने धीरे-धीरे सुधिया के एकदम करीब आने लगा इतना करीब के देखते ही देखते सुधिया की मदमस्त जवान चूचियां सूरज के सीने से स्पर्श होने लगी,,, सुधिया की मस्त चूचियों की कड़ी गोलाईया जैसे ही सूरज के सीने में स्पर्श करते हुए चुभने लगी वैसे ही तुरंत सूरज के तन बदन में आग लग गई उसका पूरा शरीर उत्तेजना के मारे गनगना गया,,,,, पल भर में ही सूरज को लगने लगा कि जैसे वह उछल कर चांद को छू लिया हो,,, अद्भुत अहसास से वह पूरी तरह से भर गया,,,, पर यही हाल सुधिया का भी होगा बोझ उसके सर पर रखने के बहाने चुचियों के बेहद करीब आ गया था और उसे भी अपनी मदमस्त चूचियां सूरज की चौड़ी छाती पर स्पर्श के साथ-साथ रगड़ होती हुई भी महसूस होने लगी थी,,,, सुधिया के तन बदन में भी उत्तेजना का संचार होने लगा,,,। पल भर में ही उसे भी ना जाने क्या अपने तन बदन में हलचल महसूस होने लगी थी,,,,। सूरज के इतने करीब होते हुए सुधिया अपने आप को असहज महसूस करने लगी थी,,,। सूरज अभी भी उसके माथे पर घास के बोझे को ठीक तरह से रखने की कोशिश कर रहा था,,,, और इसी कोशिश में वह सुधिया के और ज्यादा करीब आ गया अब वह इतना ज्यादा करीब आ गया था कि उसके धोती में बना तंबू देखते ही देखते सुधियां की दोनों टांगों के बीच स्पर्श होने लगी,,,, और देखते ही देखते सूरज के धोती का तंबू लग जा की दोनों टांगों के बीच के मखमली द्वार पर ठोकर मारने लगा,,,
दोनों टांगों के बीच में ठोकर सूरज के बदन के कौन से अंग की है पर यह एहसास सुधियां को होते ही वह पूरी तरह से कसमसाने लगी और वह पूरी तरह से लाचार और असहज हो गई जिसकी वजह से वह अपने आप को संभाल नहीं पाई और पीछे की तरफ गिर गई साथ ही वह गिरते-गिरते अनजाने में ही अपने दोनों हाथ को सूरज के कमर पर रखकर अपने आप को संभालने की कोशिश करते हुए उसको भी लेकर गिर गई,,,, सूरज ठीक उसके दोनों टांगों के बीच गिरा हुआ था और सुधिया उसके ठीक नीचे थी,,,।

सुधिया के होश उड़ गए जब उसे साफ महसूस होने लगा कि सूरज का लंड जोकि धोती में होने के बावजूद भी तंबू की तरह खड़ा था वह ठीक उसकी बुर के ऊपर ठोकर लगा रहा था सूरज का लंड तो धोती के अंदर था लेकिन गिरने की वजह से सुधीया की साड़ी पूरी तरह से कमर के ऊपर चढ़ चुकी थी जिससे वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी हो गई थी और इस समय सुधिया की नंगी बुर पर सूरज के धोती मैं बना तंबू पूरी तरह से छा चुका था,,,। सूरज के लंड के कठोरपन को अपनी मखमली बुर के ऊपर महसूस करते ही सुधिया एकदम से गनगना गई,,,, सूरज को इस बात का एहसास हो गया था कि उसके लंड की ठोकर सुधिया की नंगी बुर के ऊपर हो रही है इसलिए वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा था।सूरज ने जानबूझकर अपनी कमर को हल्के से नीचे की तरफ दबा दिया जिससे इस बार सूरज के धोती के तंबू का घेराव सुधिया की मखमली बुरके गुलाबी पत्तियों को हल्का सा खोल कर अंदर की तरफ जाने का प्रयास करने लगी,,। और सुधिया को इसका एहसास हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बड़ी गर्मजोशी के साथ वह सूरज को अपने आप में समाने की इजाजत दे दे या उसे रोक दें इसी कशमकश में वह,,, दर्द के मारे कराह उठी,,,,


आहहहहह,,,,,,


सूरज - क्या हुआ मामी तुम्हें चोट तो नहीं लगी,,,,


मेरे ऊपर गिरा पड़ा है और कहता है कि चोट नहीं लगी तेरी वजह से मेरे पैर में दर्द हो रहा है,,,

( सूरज अभी भी बातें करता हुआ अपने कमर का दबाव सुधिया कि दोनों टांगों के बीच उसकी मखमली बुर पर बनाया हुआ था,,,। सच पूछो तो सूरज का मन सुधियां के ऊपर से उठने का बिल्कुल भी नहीं कर रहा था उसका मन तो कर रहा था कि धोती थोड़ा नीचे करके अपने नंगे लंड को उसकी नंगी बुर में डालकर उसकी चुदाई कर दें लेकिन इस तरह से करना अभी उचित नहीं था,,,।)

सुधिया - चल अब उठेगा भी या इसी तरह से पड़ा रहेगा,,,,

सूरज - हां मामी उठता हूं मुझे तो तुम्हारी फिक्र थी,,,,( सूरज अच्छी तरह से जानता था कि कमर के नीचे से सुधिया पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी इसलिए उसके मखमली बदन को स्पर्श करने के लालच को रोक नहीं सका,,, और उसने के बहाने वह सुधिया की नंगी चिकनी जांघों को अपनी हथेली से स्पर्श करते हुए उठा
जिस तरह से वह अपनी हथेली उसकी जांघों पर रखकर उसे हल्का सा दबाया था,,,, सुधिया पूरी तरह से उत्तेजना में सिहर उठी थी उसका संपूर्ण बदन अपना वजूद होता हुआ महसूस कर रहा था,,,,। अपने मन के अरमान को पूरा करते हुए रखो सुधिया के ऊपर से उठा तो लग जा झट से अपनी साड़ी को अपनी कमर के नीचे फेंक कर अपने नंगे जिस्म को ढक ली,,,, सूरज उसका हाथ पकड़ कर उसे खड़ी किया,,,, पल भर में ही सुधिया के लिए सब कुछ बदला बदला सा हो गया था,,,,
( सुधियां का पति शराबी था। शराबी पति की चुदाई का सुख ना के बराबर था और सूरज के जवान लंड ने जिस तरह का स्पर्श कराकर उसे पूरी तरह से झकझोर दिया था उस तरह का एहसास उसके पति के द्वारा कभी नहीं उसे हुआ था,,, )
उत्तेजना के मारे उसका गला सूख गया था जिसे वह अपने थूक से गीला करने की कोशिश कर रही थी,,,। सूरज भी समझ रहा था कि कुछ ज्यादा ही हो गया था,,,। इसलिए वह ज्यादा छूट लेने की कोशिश नहीं कर रहा था कहीं लेने के देने न पड़ जाए यही सोचकर वह बोला,,,।
सूरज चलिए में आपको झोपड़ी में छोड़ देता हू।( सुधियां के खेत में झोपड़ी बनी हुवि थी जो गरमी में आराम करने के काम अति थी )
सुधियां नही बेटा मेरा पैर दर्द कर रहा ही मुजसे चला नही जायेगा।

सूरज - मामी आपकी झोपड़ी पास में ही हे में आपको गोद में उठा कर झोपड़ी में छोड़ देता हू और बाद में इस घास को ले आता हू।
पहले तो सुधिया ने मना किया फिराबाद में उसके घुटने में दर्द हो रहा था,, इस लिए मान गई

सूरज - में आपको गोद में उठा ता हू
सुधियां - संभाल कर सूरज गिरा मत देना,,,।

सूरज - आप मेरे हाथों में हो मामी गिरने नहीं दूंगा,,,।
इतना कहने के साथ ही सूरज ने सुधीया को गोद मे उठा लिया
गोद में उठा ने की वजह से ब्लाउज का पहला बटन खुल चुका था जिसकी वजह से उसके दोनों खरबूजे आपस में एकदम सटे हुए थे और दोनों खरबूजा के बीज की पतली लकीर बेहद लुभावनी लग रही थी,,ब्लाउज में से निप्पल ब्लाउज के अंदर से भी बाहर झलक रही थी,, सूरज को सुधियां के निप्पल का नूकीलापन बेहद आकर्षक लग रहा था।

सुधियां की भारी-भरकम चूचियां ब्लाउज में से उसकी सांसों की गति के साथ होले होले ऊपर नीचे हो रही थी जो कि बेहद मादकता का अनुभव करा रही थी यह सब देख कर सूरज के तन बदन में नशा सा छाने लगा था

सूरज इच्छा हो रही थी कि सुधीया चूची को मुंह में भर कर जी भर कर पीए,,, उत्तेजना के मारे सूरज का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,, उसका लंड आसमान की तरफ मुंह करके खड़ा था और अब धीरे-धीरे सुधियां की साड़ी के ऊपर से बूर पर स्पर्श होने लगा था कुछ देर तक तो सुधियां को समझ में नहीं आया कि उसकी साड़ी के ऊपर से बूर पर रगड़ खा रही और चुभन दे रही चीज क्या है,,,लेकिन जैसे ही उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी बूर पर चुभ रही और रगड़ खा रही चीज कुछ और नहीं बल्कि सूरज का मोटा तगड़ा लंबा लंड है तो इस बात के एहसास से ही पल भर में ही उसकी बुर ऊतेजना के मारे गरम रोटी की तरह फूलने पिचकने लगी,,।
( सुधियां सोचने लगी की शुक्र हे की मेने साड़ी पहनी हे अगर ये साड़ी नही होती तो सूरज का तगड़ा मोटा लंड मेरी बूर में घुस जाता )

काफी महीने गुजर गए थे उसे उत्तेजना का अनुभव किए हुए लेकिन पलभर में ही उसे उत्तेजना का एहसास होने लगा था
सूरज मोटे तगड़े लंड को अपनी बूर पे एकदम साफ तौर पर महसूस की थी,,,और एक अनुभवी औरत होने के नाते उसे इतना तो पता ही होगा कि एक मर्द का लंड किस अवस्था में और कब खड़ा होता है,,

सूरज का लंड उसकी साड़ी के ऊपर से बूर पर बार बार ठोकर मार रहा है,,,,,, सुधीया को मजा आने लगा था। पर डर भी लग रहा था

सूधिया - बेटा कोई देख लेगा हमे इस हालत में जाते हुए तो।
सूरज - मामी कोई नही हे यह पे चारो तरफ गन्ने का खेत हे आप फिकर मत कीजिए।

सूरज का लंड खड़ा होने की वजह से चलते चलते उसकी धोती खुल गई और उसका लंबा मोटा लंड हवा में लहराने लगा।
और सुधियां की साड़ी भी कमर तक चढ़ गई अब सुधिया भी नीचे से नंगी थी।

अब नीचे से दोनो नंगे होने की वजह से सुधियां की बूर का पूरा भार सूरज के लोहे जैसे लंड पर आ गया था "

पहली बार अपने लंड को किसी औरत की बुर के ऊपर पाकर सूरज पूरी तरह से जोश में आ गया था उसकी उत्तेजना और प्रसन्नता समाए नहीं समा रही थी वो बेहद खुश था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आसमान में उड़ रहा हो उसे जन्नत का मज़ा मिलने लगा था लेकिन अभी तो उसका लंड केवल बूर के प्रवेश द्वार पर ही दस्तक दे रहा था।

सुधियां को अपनी बुर की गुलाबी पत्ती के ऊपर सूरज के मोटे तगड़े गरम लंड का एहसास हुआ वह पूरी तरह से उत्तेजना में आकर सिहर उठी,,,,,आहहहहहहह सूरज,,,,, उसके मुंह से गर्म सिसकारी के साथ सूरज का नाम निकल गया,,,,,।

"लन्ड सुधिया की बूर पर टकराते ही लन्ड जोर से फड़फड़ाने की कोशिश करने लगा लेकिन लंड गांड़ के नीचे दबे होने से उसके सुपाड़े की खाल ही आगे पीछे हो पा रही थी "

सुधियां को अपनी बुर के ऊपर रगड़ते हुवे लंड से इस बात का एहसास हो गया था कि सूरज का लंड ज्यादा ही मोटा और लंबा है जो कि बड़े आराम से उसकी बुर के ऊपर रेशमी बालों के झुरमुट पर आगे पीछे हो रहा था,,,,,
सुधिया को अपनी बूर के रेशमी बालों के झुरमुट पर सूरज का लंड काले नाग की तरह लग रहा था जो कि उसकी गुलाबी बिल में जाने के लिए बेताब था,,,,।

सूरज की सांसे बेहद गहरी चल रही थी उसका चौड़ा सीना ओर चौड़ी छाती को देखकर सुधियां समझ गई थी कि सूरज पूरी तरह से मर्दाना ताकत से भरा हुआ जवान लड़का है जो उसे अपनी गोद में उठाए हूवा चल रहा है।

सुधियां - बेटा जल्दी से चलो ,

"सूरज तेजी से चलने लगा जिससे उसका लंड का सुपाडा जोर-जोर से सुधियां की गुलाबी बुर पर पटकने ओर रगड़ने लगा और तेजी से चलने की वजह से सुधियां के चूतड ऊपर नीचे उछल कूद कर रहे थे "
जिससे सुधियां को अंदर ही अंदर बहोत मजा आ रहा था।
( सुधियां मन में ससससहहहह,,,आहहहहहहह,,,,ओहहहहहह, सूरज,,,,, मेरे राजा तूने तो कमाल कर दिया है रे,,,। लंड रगड़ने की वजह से जब इतना मजा आ रहा है तो जब तेरा लंड मेरी बुर में जाएगा तब कितना मजा आएगा,,,,)

"सूरज ने चलते हुए एक हल्की सी छलांग लगाई जिससे सुधियां की कमर ज्यादा ऊपर की ओर उछल गई और सूरज का लंड झटके खाते हुए सुपाड़ा आसमान की तरफ हो गया और जैसे ही सुधियां उछलने के बाद पहले वाली अवस्था में आने की कोशिश करने लगी , सूरज का आधा लंड सुधिया की बूर में घुस गया"

लंड का सुपाड़ा बुर की गुलाबी पत्तियों को चीरता हुआ अंदर धंस गया था,,,

सुधियां के दर्द के मारे चीख पडी"

सुधिया - आआआह....आह्हह्हह ...ऊऊह्ह्ह्ह....बेटा मर गई मैं तो ......आह्ह्ह्....

पहली बार सूरज का लंड बूर के अंदर जाने की वजह से
"हल्का सा दर्द सूरज को भी हुआ
उसका सुपाड़ा पूरा खुल गया था।धक्का इतना जबरदस्त और तेज था कि सुधियां के मुंह से चीख निकल गई लेकिन उस चीज को उस सन्नाटे में उस वीराने में सुनने वाला इस समय कोई नहीं था,,,।

सूरज - आआह्ह्ह....मामी..

आशा - आआआअह्हह्ह्....बेटा निकाल

सूरज (अनजान बनते हुए ) - किसको निकालू मामी ...

सुधियां - आहहहहहहह,,,, हाय रे ,,,,आहहहहहहह,,,, मैं मर जाऊंगी बहुत दर्द कर रहा है निकाल तेरा लंड मेरी बूर से ,,,,, ( उसे एहसास हो रहा था कि सूरज उसे सबसे अच्छा सुख देने वाला है उसे तृप्त कर देने वाला है इसलिए वह भले ऊपर से बोल रही थी कि अपने लंड को बाहर निकाल ले लेकिन अंदर से यही चाहती थी कि वह अपने लंड को बाहर ना निकालें,,,,)

सुधिया दर्द से छटपटा रही थी वह जानती थी कि सूरज के लंड की मोटाई उसकी बुर की छेद से काफी बड़ा था इसलिए उसे इस तरह का दर्द हो रहा था,,,, लेकिन सूरज पहली बार किसी औरत की बुर में अपना लंड मिल रहा था इसलिए उस में से निकालने की उसकी इच्छा बिल्कुल भी नहीं हो रही थी,,,,

सुधिया को इस बात का एहसास हो गया की सूरज के लंड का सुपाड़ा काफी मोटा है अब तो उसे दर्द भी होने लगा था लेकिन दर्द के बाद मिलने वाले अद्भुत सुख को महसूस करने के लिए वह इस दर्द को झेलने के लिए पूरी तरह से तैयार थी,,,,

सुधियां को डर था कि किसने उन दोनो को इस हालत में देख लिया तो बहोत बदनामी होगी इस लिए सुधिया सूरज को कहती हे।

सुधिया - सूरज बेटा तू जल्दी चल झोपड़ी में कोई हमे देख लेगा।

"अभी सूरज और सुधिया को आधा रास्ता और चलाना था "

"सूरज तेजी से चल रहा था और सुधिया के उछलने की वजह से उसका आधा लन्ड तेजी से ही सुधिया की चूत में आगे पीछे हो रहा था "

" सुधियां दर्द में साथ हल्की हल्की मादक सिसकारियां भी निकाल रही थी "

सुधिया अपने आप को रोक नहीं पायि ओर उसकी बूर ने पानी छोड़ दिया आआआअह्हह्ह्ह.....आआह्ह्ह्ह बेटा...
बूर के पानी ने सूरज के लंड को पूरा गीला कर दिया।
सूरज समझ गया था की सुधिया मामी की बूर ने पानी छोड़ दिया हे।

"अब सूरज तेज दौड़ने लगता है और तेजी से आधा लंड अपने मामी की गरमा गर्म बूर पेले जा रहा था "
सूरज का आधे से ज्यादा लंड सुधिया के बुर में प्रवेश करा चुका था,,,,
"सूरज भागते हुए अब झोपड़ी के दरवाजे के पास पहुंच जाता है "
"और वहां पहुंच तेहि सूरज का पैर फिसल जाता है और
नीचे गिर जाता है और सुधियां उसके ऊपर गिर जाति हे।( गिरने की वजह से सुधियां की साड़ी और ब्लाउज पूरी तरह से खुल जाता है और वह पूरी नंगी हो जाति हे )

गिरते हुवे सूरज का मोटा लंड जोकि पहले से ही आधा सुधियां की बूर में था अब बुर की गुलाबी पतियों को चीरता हुवा बुर की गहराई में चला गया। सुधिया की बुर खुलते हुए सूरज के लंड पर अपनी कसाव की गिरफ्त में ले लेती हे।

सुधियां - आआआहहह....अह्हह्हह....मर गई .....बेटा अह्हह्ह्ह......अहहाह्ह्ह.

सूरज (गिरते हुए) - आआह्ह्ह् ..... मामी.....आआआह्हह्ह्ह....

गिरने की वजह थोड़ी देर के लिए दोनो सुन्न हो गए।
कुछ देर बाद
सूरज नीचे देखता हे वैसे वैसे आश्चर्य से सूरज का मुंह खुलता चला जा रहा था,,,। उसका का मोटा तगड़ा लंड सुधियां की बुर की गहराई में कहां खो गया पता ही नहीं चल रहा था
सुगंधा इस समय अपने भांजे ऊपर बूर में लंड डाले लेटी हुई थी,,, अपने भांजे के मोटे लंड को अपनी बुर की गहराई में उतारकर सुधियां मदहोश हुवे जा रही थी उसका रोम-रोम प्रसन्नता के भाव से पुलकित हुए जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसने अपने भांजे के ऊपर गिरकर उसके खड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में उतार लीया है,,, ।
सूरज तो अपनी मामी की इस मादकता भरे वजन से पूरी तरह से सिहर उठा और अपनी आंखों से अपनी मामी की गुलाबी बुर गुलाबी पत्तियों को उसके लंड के इर्द-गिर्द कसता हुआ देख कर उसके मुख से से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,,।

सससहहहहहहहह,,, मामी,,,,,

( सुधियां पे अब चुदाई का बुखार चढ़ गया था अब सुधियां रुकने वाली नही थी )

सुधिया - क्या हुआ बेटा,,,, (सुगंधा अपनी मादक अदा बिखेरते हुए बोली,,)

सूरज - मामी मुझे ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई मेरा हाथ पकड़ कर मुझे हवा में उड़ाए ले जा रहा है मैं बता नहीं सकता कि मुझे कैसा लग रहा है बहुत मजा आ रहा है,,,,( सूरज की आंखों में खुमारी छाई हुई थी वह उत्तेजना के मारे अपनी आंखों को मूंद कर मदहोश होता हुआ बोल रहा था यह देखकर सुधिया मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

सुधिया - मुझे भी मजा आ रहा हे तेरे घोड़े पर बैठकर,,,,,
( सुधिया इतना कहकर अपनी भारी भरकम गांड को एक बार फिर से ऊपर की तरफ उठाई और फिर से उसी लय में नीचे की तरफ लाते हुए फिर से बैठ गई,, सूरज अपनी आंखों से अपनी मामी की हरकत की वजह से अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मामी की बुर के अंदर बाहर होता हुआ देखकर प्रसन्न हो रहा था उसे अच्छा लग रहा था और धीरे-धीरे करके सुधिया अपनी भारी-भरकम कमर के ऊपर नीचे करते हुए अपने भांजे के लंड पर ऊपर नीचे उठना बैठना शुरु कर दीया।ऐसा लग रहा था कि मानो सुधियां घोड़े पर बैठकर घुड़सवारी कर रही हो,,,, बड़ा ही मादक दृश्य था,,, झोपड़ी में पूरी तरह से वातावरण के विरुद्ध गर्मी छाई हुई थी

सुधियां जोर जोर से अपनी भारी-भरकम गांड को अपने बेटे के लंड पर पटक रही थी,, मानो ऐसा लग रहा था कि वह जोर-जोर से फर्श पर पटक पटक कर कपड़े धो रही हो,,,, सुधियां में मानो उत्तेजना के कारण फुर्ती सी आ गई हो वह अपनी मदमस्त बूर को एक ही लेय मे अपने भांजे के लंड पर पटक रही थी जिससे उसका पूरा का पूरा लंड उसकी बूर की गहराई में समा जा रहा था,,,,।

एक बार झड़ने के बावजूद भी सुधीया इस बार दुगनजोश के साथ अपने भांजे से चुदवा रही थी,, चुदवा नहीं रही बल्कि खुद ही चोद रही थी सुधियां अपनी भारी-भरकम गांड को जोर-जोर से उसके भांजे के लंड पर पटक रही थी मानो उसके लंड पर अपनी बूर से तमाचा मार रही हो जो कि उसका लंड इस तमाचे से बेहद प्रसन्न और जोशीला नजर आ रहा था,,,, सूरज का लंड पूरी तरह से सुधियां के मदन रस में डूब चुका था एकदम गिला हो चुका था जो कि धूप की पीली रोशनी में चमक रहा था,,,,

मामी मुझे कितना मजा आ रहा है मैं बता नहीं सकता,,,,। अपने ये सब कहा से सीखा...
सुधिया - बस अभी-अभी तेरे मजबूत लंड को देखकर मैं सीखी हूं इससे पहले मैंने आज तक ऐसा कभी नहीं किया लेकिन सच बताऊं तो तेरे ऊपर चढ़कर तेरी चुदाई करने में मुझे और ज्यादा मजा आ रहा है,,,,।
( सुधिया ऐसा कहते हुए जोर-जोर से अपनी बूर को अपने भांजे के लंड पर पटक रही थी जिससे उसका सारा मादक मांसल बदन हिचकोले खा रहा था साथ ही उसके दोनों दशहरी आम हवा में जैसे झूल रहे हो और उन झूलते हुए दशहरी आम को देखकर सूरज अपनी लालच को रोक नहीं पाया और दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उन्हें अपनी हथेली में भर भर कर दबाना शुरू कर दिया जिससे सुधियां के मुख से सिसकारी निकल जा रही थी,,,)

ससससससहहहहह आहहहहहहहह सूरज,,, सूरज मेरे बेटे मेरे भांजे ऐसे ही जोर जोर से दबा मुझे मजा आ रहा है इसका सारा रस निचोड़ डाल इसे अपने मुंह में लेकर पी,,, (और इतना कहते हुए सुधिया थोड़ा सा झुक गई ताकि उसके झूलते हुए दोनों दशहरी आम उसके सूरज के मुंह तक आराम से पहुंच सके और ऐसा हुआ भी जैसे ही सुधियां थोड़ा सा झुकी तो सूरज अपनी लालच को रोक नहीं पाया और अपनी मामी के दशहरी आम को मुंह में लेकर पीने के लिए अपना मुंह उठाकर सीधे उन्हें मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया जिससे सुधिया का मजा दुगना हो गया और सूरज भी काफी जोश में आ गया जिससे वह नीचे से अपनी कमर उछाल उछाल कर अपने लंड को अपनी मामी की बुर में पेलना शुरु कर दिया दोनों तरफ से बराबर की जंग छिड़ी हुई थी दोनों एक दूसरे में समाने के लिए पूरा दम लगाए हुए थे,,,,।

पूरे झोपड़ी में सुधिया और सूरज की सिसकारी और कराने की आवाज गूंज रही थी दोनों में नशा छाया हुआ था दोनों एक दूसरे को परास्त करने में लगे हुए थे नीचे से सूरज और ऊपर से सुधिया दोनों अपने अपने तरीके से एक दूसरे के अंगों से खेल कर मजा लूट रहे थे,,,,।

कुछ देर तक यूं ही बूर ऊचलने के बाद सुधियां सासो की गति तेज होने लगी उसका पानी निकलने वाला था और यही हाल सूरज का भी हो रहा था वह अपनी मामी की चुचियों को जोर-जोर से दबाता हुआ अपने मुंह में बारी-बारी से भरकर नीचे से अपनी कमर उछाल रहा था उसका भी पानी निकलने वाला था,,,,

ओहहहहहहहह.,,,,, सूरज बेटा ऐसे ही ससससकहहहहहह,,,, और जोर जोर से,,,,, आहहहहहहह,,,, सूरज,,,,, नीचे से जोर जोर से अपनी कमर उछाल,,,,मेरे राजा आहहहहहहहहह,,, मेरी बुर में पेल दे अपने लंड को,,,,,,ऊमममममममम,,, ऐसे ही मार ऐसे ही चोद मुझे,,,,,,,,( सुधीया पागलों की तरह सिसकारी लेते हुए अपने भांजे को उकसा रही थी और सूरज अपनी मामी की गर्म सिसकारी और उसकी बातें सुनकर इतना मदहोश हो गया l

सूरज अपने दोनों हाथों को अपनी मामी की चूची पर से हटा कर वैसे ही मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से अपनी मामी की बड़ी बड़ी गांड को थामकर उसे पकड़े हुए नीचे से अपने लंड को पेलना शुरू कर दिया और साथ ही सुधियां भी ऊपर से जोर दे रही थी,,,

थोड़ी ही देर में सुधियां सूरज को अपनी बाहों में कसते हुए उसकी बूर ने पानी फेंकना शुरू कर दी और सूरज भी अपना लंड की पिचकारी अपनी मामी की बुर में मार दिया दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे और एक दूसरे पर निढाल होकर अपनी ऊखड़ती हुई सांसों को नियंत्रित करने लगे एक बार फिर से दोनों सफलतापूर्वक संतुष्टि प्राप्त कर चुके थे एक अद्भुत एहसास दोनों के तन बदन में भरा हुआ था दोनों एकदम तरोताजा महसूस कर रहे थे दोनों उसी तरह से संपूर्ण नग्ना अवस्था में एक-दूसरे को बाहों में लेकर सो गए,,,,

सुधियां को अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन और संतुष्टि भरा दिन गुजारा था,, जिसकी कसक अभी तक उसके बदन में महसूस हो रही थी,,। सूरज के एक-एक जबरदस्त धक्के को याद करके मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,। उसने कभी जिंदगी में नहीं सोची थी कि ४२ की उम्र के इस पड़ाव पर आकर उसे इस तरह से एक अद्भुत सुख का अनुभव होगा,,,। सूरज के साथ वक्त गुजारने का उसे बिल्कुल भी मलाल नहीं था,,। भले ही वह अपने पति को धोखा दे चुकी थी लेकिन जिंदगी का बेहतरीन सुख उसने प्राप्त की थी,

वासना का तूफान थमने के बाद सुधियां अपने आप को धिक्कार आने लगा उसे अपने आप से घिन्न आने लगी,,, क्योंकि उसने बहुत ही घिनौनी हरकत कर दी थी
थोड़ी देर पहले उसने अपने भांजे से चुदवाया था
लेकिन अपनी प्यासी जवानी के आगे घुटने टेकते हुए वह अपनी उम्र की परवाह ना करते हुए अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ उसके मोटे तगड़े लंड का मजा लूटते हुए चुदाई का आनंद लीया,,, और अब सूरज से नजरें मिलाने से कतरा रही थी,,, लेकिन सूरज काफी खुश था और संतुष्ट,,, क्योंकि दिन भर उसे सुधियां की बेहतरीन रसमलाई दार बुर चोदने को जो मिली थी,,,,

सुधिया सूरज से झोपड़ी के बाहर जाने को कहती हे। सूरज बिना कुछ कहे झोपड़ी बाहर जाने अपनी धोती पहन कर घर की ओर निकल पड़ता हे।

झोपड़ी के अंदर सुधियां अपने आपको अपनी ही नजर से गिरता हुआ महसूस कर रही थी,,, उसकी आंखों में आंसू थे वह अपने आप को कोस रही थी,,,क्योंकि झोपड़ी के अंदर जो कुछ भी हुआ था उसमे उसकी गलती थी।
सुधियां दोबारा कभी ऐसा नहीं होगा ऐसा सोचकर उसने मन ही मन ठान लिया था।
सुधियां अपनी साड़ी पहन कर अपने घर की ओर निकल पडी

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सुधियां मामी
मंगला मामी नहीं तो सुधिया मामी, बस "काम" होना चाहिए
 

Devrajan

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भाग ८

सूरज की जिंदगी का सबसे बेहतरीन वक्त गुजर चुका था,,,। आज के दिन के बाद से उसकी जिंदगी की नई शुरुआत हो रही थी इस दिन ने सूरज को एकदम से बदल कर रख दिया था,,, उसके सोचने समझने का तरीका एकदम से बदल गया था,,,। जिंदगी में पहली बार एक औरत की चुदाई की थी जो रिश्ते में उसकी मामी लगती थी औरत के जिस्मानी शब्दों को वह भली-भांति समझ गया था,,,
सूरज काफी खुश नजर आ रहा था वह अपने खेतों से होता हुवा अपने मस्ती में घर की ओर निकल पड़ा।


( मंगल के पुराने दिन जब शादी के ४ साल तक विलास उसे जम के चोदता था लेकिन वक्त के साथ साथ धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी पहले हफ्ते में एक बार फिर महीने में एक बार और फिर साल में एक बार अब पिछले ५ सालो से उसकी बूर प्यासी थी लेकिन कल से जो हो रहा था उससे उसके दिल में फिर से नई उमंग भर आइ थी लेकिन अपने संस्कारो के चलते वह रुक गई और सब कुछ भूल कर नए तारीखे से जीने की ठान लिया लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था )

दोपहर का समय था घर में काम करके से मंगल का बदन पसीने से तरबतर हो गया था इसी लिए उसने नहाने का सोचा और बाथरूम जाने के लिए ठंडा पानी लिया ओर नहाने के लिए चली गई।

इधर गौरी को कल से बैचेनी सी हो रही थी पहली बार चुदाई देख कर उसके शरीर में बदलाव होने लगा था। गौरी ने कुछ दिन कम्मो के घर नहीं जाने का सोचा और अपने सुधियां मामी के घर की ओर निकल पड़ी।

तेज कदमों से चलती हुई मंगल जल्दी से कच्ची ईटो से
बने बाथरूम में प्रवेश कर गई
बाथरूम में घुसते ही वह अपने बदन से लाल रंग की साड़ी को उतारने लगी,,,, मंगल का गोरा बदन लाल रंग की साड़ी में खिल रहा था,,, बला की खूबसूरत मंगल धीरे-धीरे करके अपने बदन पर से अपनी साड़ी को दूर कर रही थी,,,, अगले ही पल उसने अपने बदन पर से अपनी साड़ी को उतारकर जमीन पर गिरा दीया उसके बदन पर अब केवल पीले रंग का ब्लाउज और पेटीकोट था और इन वस्त्रों में खूबसूरत मंगल कामदेवी लग रही थी वह कुछ पल के लिए अपनी नजर को अपने पैरों से होते हुए अपनी ब्लाउज के बीच से झांक रही चूचियों के बीच की गहरी दरार को देखने लगी,,, ना जाने क्या सोचकर उसके होठों पर मुस्कुराहट फैल गई और वहां अपने दोनों हाथों को ऊपर लाकर, अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों से अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी,,,, यह नजारा बेहद कामुक और मादक था। हालांकि इस बेहद कामोत्तेजक नजारे को देखने वाला इस समय कोई भी नहीं था परंतु एक औरत के द्वारा अपने हाथों से अपने कपड़े उतारने की कल्पना ही मर्दों की उत्तेजना में बढ़ोतरी कर देती है। और जब बात मंगल की हो तो मंगल तो स्वर्ग से उतरी हुई किसी अप्सरा की तरह ही बेहद खूबसूरत थी, उसके बदन की बनावट उसका भरा हुआ बदन और जगह जगह पर बदन पर बने कामुक कटाव मर्दों को पूरी तरह से चुदवासा बना देते थे,,,,
धीरे-धीरे करके मंगल ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दीया ब्लाउज के बटन खोलते हैं लाल रंग की ब्रा नजर आने लगी और साथ ही मंगल की जवानी के दोनों कटोरे जो कि मधुर रस से भरे हुए थे। और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि किसी भी समय वह छलक जाएंगे क्योंकि मंगल कि दोनों चूचियां कुछ ज्यादा ही बड़ी और गोल थी,,, और वह दोनों जवानी की केंद्रीय बिंदु मंगल की लाल रंग की ब्रा में समा नहीं पा रहे थे।,,, अगले ही पल मंगल अपने बदन पर से ब्लाउज भी उतार फेंकी,, बाथरूम में मंगल धीरे-धीरे अपने ही हाथों से अपने आप को वस्त्र विहीन करती जा रही थी इस समय ऊसके बदन पर मात्र पेटीकोट और लाल रंग की ब्रा ही थी।
मंगल बाथरूम में मात्र ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी लेकिन उसका रूप लावण्य किसी काम देवी की तरह ही लग रहा था जब वस्त्रों में मंगल इतनी कामुक लगती हो तो संपूर्ण नग्ना अवस्था में तो कहर ढाती होगी,,,, मंगल अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ लाकर पेटीकोट की डोरी को अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर खोलने लगी,,,, और देखते ही देखते उसकी पेटीकोट उसके कदमों में जा गिरी,, इस समय का यह दृश्य ऐसा लग रहा था मानो सावन अपनी बाहें फैलाए प्रकृति को अपने अंदर समेट रहा हो,,, मंगल के गोरे गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा और गुलाबी रंग की कच्छी उसके कामुक बदन को और भी ज्यादा मादक बना रहे थे। 40 वर्ष की आयु में भी मंगल का बदन और खूबसूरती अल्हड़ जवानी की महक बिखेर रही थी। वैसे तो अधिकतर औरतें वस्त्र पहनकर ही स्नान करती हैं लेकिन जब इस तरह का एकांत बाथरूम में मिलता हो तो वह भी अपने सारे कपड़े, उतार कर नंगी होकर नहाने का लुत्फ उठाती है।

मंगल आदत अनुसार अपनी ब्रा के ऊपर खोलने के लिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा के हुक को खोलने लगी इस तरह की हरकत की वजह से उसकी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां सीना ताने और ज्यादा ऊभरकर सामने आ गई । और जैसे ही ब्रा का हुक खुला मंगल की दोनों की योजना आजाद परिंदे की तरह हवा में पंख फड़फड़ाने लगे,
अगर कोई अपनी आंखों से मंगल की नंगी चूचियां देख ले तो उसे यकीन ही ना हो कि यह एक ४० वर्षीय औरत की चूचीया है।,, क्योंकि अक्सर और ज्यादातर इस उमर में आकर औरतों की चुचियों का आकार भले ही बड़ा हो वह झूल जाती हैं,,, लेकिन मंगल के पक्ष में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था इस उम्र में भी उसकी चूचियां जवा ताजा और खरबूजे की तरह गोल गोल और बड़ी बड़ी थी और और देखने और आश्चर्य करने वाली बात यह थी कि,,, बड़ी-बड़ी और गोल होने के बावजूद भी उसमे लटकन बिल्कुल भी नहीं थी कहीं से भी ऐसा नहीं लगता था कि झूल गई हो,,, चॉकलेटी रंगी की निप्पल किसी कैडबरी की चॉकलेट की तरह लग रही थी जिस में से दूध की कुछ बुंदे टपक रही थी। जिसे किसी का भी मन मुंह में लेकर चूसने को हो जाए। ( मंगल ४० साल की होने के बाद भी उसकी चूचियों से दूध आता था )

मंगल अपनी ब्रा को भी अपनी बाहों से निकाल कर नीचे जमीन पर फेंक दी थी एक औरत होने के बावजूद भी मंगल अपनी चुचियों को स्पर्स करने का लालच रोक नहीं पाई और उत्सुकता बस वह अपने दोनों हाथों से अपने दोनों खरबूजे को पकड़कर हल्के से दबाने लगी
मंगल ने खुद ही दोनों चुचीयों को अपनी हथेली में भर कर हल्के से दबाई जोकी ऊसकी बड़ी बड़ी चूचियां उसकी हथेली में सिर्फ आधी ही आ रही थी
और दबाते दबाते कुछ सोचने लगी वह अपने पति के बारे में ही सोच रही थी जो कि उसकी जवानी को,
महसूस करने का सुख उसे दे नहीं पाया था और ना ही मंगल को,,, अद्भुत सुख का एहसास करा पाया था,,,, मंगल को इस बात का दुख अब तक अखर रहा था कि ना तो वह कुछ कर पाया और ना ही उसे कुछ करने दिया यही बात सोचते हुए वह अपने दोनों खरबूजो पर हथेली का स्पर्श कराकर हटा ली और अपना मन भटकने ना देकर तुरंत अपनी कच्छी को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ सरकाते हुए अपनी दुधिया चिकनी लंबी लंबी टांगों से होते हुए नीचे की तरफ लाई है और अगले ही पल अपनी पेंटी को भी उतार फेंका,,,, अब मंगल बाथरूम में संपूर्ण नग्नवस्था में थी,,, इस समय मंगल स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही थी,,, इस पल का नजारा किसी के भी लंड से पानी फेंक देने के लिए काफी था। गोरा गोरा बदन कामुकता से भरा हुआ, लंबे काले काले घने बाल जो कि उसकी कमर के नीचे भराव दार उन्नत नितंबों को स्पर्श करते थे, गोल चेहरा भरा हुआ किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं था जवानी से भरे हुए बदन पर मंगल की तनी हुई दोनों चूचियां कुदरत के द्वारा दी हुई संपूर्ण जवानी को पुरस्कृत करते हुए दूध की थैली की तरह लग रही थी। जिसमे से दूध रिस रहा था।
पेट पर चर्बी का नामोनिशान नहीं था हालांकि मंगल किसी भी प्रकार का योग व्यायाम नहीं करती थी लेकिन जिस तरह से सारा दिन हुआ इधर उधर दौड़ती फिरती हुई काम करती और कभी कभार खेतो में भी काम किया करती थी,,, इस कारण से उसका बदन इस उम्र में भी पूरी तरह से कसा हुआ था। मोटी मोटी चिकनी जांघें केले के तने के समान नजर आती थी,, जिसे हाथों से सहैलाना और चूमना हर मर्द की ख्वाहिश थी।,,,
जिस तरह की खूबसूरती से भरी हुई मंगल थी उसी तरह से बेहद खूबसूरत उसकी बेशकीमती बुर थी। जिसका आकार केवल एक हल्की सी दरार के रूप में नजर आ रही थी। हल्की सी उपसी हुई,,, या युं कहलो की गरम रोटी की तरह फुली हुई थी जिस पर हल्के हल्के सुनहरी रंग की झांटों का झुरमुट बेहद हसीन लग रहा था।,,,,। यह औरत के बदन का वह बेशकीमती हिस्सा था,,, जिसे पाने के लिए दुनिया का हर मर्द कुछ भी कर जाने को तैयार रहता है। और यह तो मंगल की बुर थी, जिसके बारे में सोच कर सूरज का लंड बार बार खड़ा हो जाता है।
मंगल का कसा हुआ बदन और उसकी पतली दरार रुपी बुर को देखकर यह अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था कि वह एक बेटी की मां है।

नितंबों पर अभी भी जवानी के दिनों वाला ही कसाव बरकरार था। गांड के दोनों फांखों के बीच की गहरी लकीर,,,,, ऊफ्फ्फ्फ,,,,,,,, किसी के भी लंड का पानी निकालने में पूरी तरह से सक्षम थी। इतना समझ लो कि मंगल पूरी तरह से खूबसूरती से भरी हुई कयामत थी ।
बाल्डी में से पानी का लोटा ले के खड़ी होकर नहाना शुरू कर दी । वह आहिस्ते आहिस्ते साबुन को अपने पूरे बदन पर रगड़ रगड़ कर नहाने लग गई,,,,, वह साबुन लगाए जा रही थी और उसके बदन पर लोटे से पानी का गिरता जा रहा था। थोड़ी देर में वह नहा चुकी थी और अपने नंगे बदन पर से पानी की बूंदों को साफ करके अपने बदन पर टॉवल लपेट लीया।
अपने नंगे बदन पर टावल लपेटने के बाद वह बाथरुम से निकल कर सीधे अपने कमरे में चली गई।

कमरे में जाते ही उसने अलमारी खोली जिसमें उसकी साड़ियां भरी हुई थी। उसमें से उसने अपने मनपसंद की साड़ी निकाल कर के उसके मैचिंग का ब्लाउज पेटीकोट और उसी रंग की ब्रा पेंटी भी निकाल ली।
उसके बाद वह आईने के सामने खड़ी होकर के अपने बदन पर लपेटे हुए टॉवल को भी निकालकर बिस्तर पर फेंक दी और एक बार फिर से उसकी नंगे पन की खूबसूरती से पूरा कमरा जगमगा उठा। सबसे पहले उसने लाल रंग की कच्छी पहनी फिर पेटीकोट को कमर तक चढ़ाकर गाट बांध दिया। नीचे से साड़ी लपेट कर ब्रा पहनने लगी....

तभी सूरज घर के अंदर आ जाता है। उसे चुदाई के बाद जोरो की भूख लगी थी।
सूरज जोर से आवाज करता हुआ अपनी मामी को यहां वहां ढुंढता हुआ सीधे कमरे में घुसने से पहले ही इतनी जोर से अपनी मामी को आवाज लगाया कि मंगल एकदम से चौक गई और उसके हाथ से ब्रा छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई,,, और सूरज अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर एकदम हक्का-बक्का रह गया,,,।

दरवाजे पर ही सूरज के पैर ठिठक गए थे,,, सूरज की तेज आवाज सुनते ही मंगल के हाथों से उसका ब्रा जोंकी वह पहनने ही वाली थी वह छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई थी,,, दोनों की आपस में नजरें टकराई,, कुछ पल के लिए सब कुछ थम सा गया एकदम स्थिर हो गया ऐसा लग रहा था मानो समय रुक गया हो,, दोनों मामी भांजा एक दूसरे को देखें,, लेकिन इस अफरातफरी में क्या करना है दोनों को समझ में नहीं आ रहा था,,, सूरज की जवान प्यासी नजरें उसकी मामी की मदमस्त भरी हुई जवानी के केंद्र बिंदु रुपी दोनों खरबूजे पर टिक गई,,,,, सूरज की तो सांसे अटक गई थी उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह अपने होशो हवास खो बैठा था करता भी क्या बिचारा आंखों के सामने जब इस तरह का बेहतरीन कामुक नजारा हो तो दुनिया का कोई भी मर्द अपने होशो हवास खो दें,,
सूरज की सांसे तेज चलने लगी थी पलभर में ही उसके तन बदन में उत्तेजना की वो लहर दौड़ने लगी की,,, अगर उसकी डोर खींचकर अगर काबू में ना लिया जाए तो बेकाबू हो जाती है,,,
मंगल को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें नीचे जमीन पर गिरा हुआ ब्रा उठाकर अपना तन ढकने तक की सुध उसमें बिल्कुल नहीं थी,,,, वह भी एक तक अपने भांजे को देखे जा रही थी,,, सूरज अपनी मामी की दोनों गोलाइयों को देखकर मदहोश हुआ जा रहा था,,,बेहद करीब से अब थोड़ी देर पहले उसने सुधियां मामी की चुचियों को देखा था उन्हें छू कर स्पर्श करके उन्हें मसल कर हर तरीके से उनका मजा लिया था लेकिन आज अपनी मामी की चुचियों को बड़े ध्यान से और बड़े करीब से देख रहा था,,, पर उसे इस बात का ज्ञान हो रहा था कि सुधियां मामी की चुचियों में और ऊसकी मंगल मामी की चुचियों में जमीन आसमान का फर्क था,,,,भले ही सुधियां मामी के चुचियों का आकार को ज्यादा बड़ा था लेकिन उसमे लचक थी,, लेकिन मंगल मामी की चुचियों का आकार एकदम कड़क था,,,खूबसूरत औरत के पास जिस तरह की चूची होना चाहिए उसी तरह की चूची मंगल के पास थी,,, उनमें बिल्कुल भी लचक नहीं थी दोनों की दोनों एकदम तनी हुई थी,,, और उन दोनों के बीच में चॉकलेटी रंग की निप्पल किसमिस के दाने की तरह लग रही थी जोकि अगर उनसे खेला जाए तो उत्तेजना में आकर अपना रूप छुआरा बना लेती है,,,
सूरज की इच्छा हो रही थी कि वह अपनी मामी की दोनों चूचियों को पकड़ कर उनके आकार को अपनी हथेली में महसूस करें उसकी गर्माहट से अपने तन बदन को गर्म कर ले,, लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसमें अभी नहीं थी वह केवल एक टक देखें ही जा रहा था,,,, तभी मंगल को इस बात का अहसास हुआ कि कुछ गलत हो रहा है,,इसलिए झट से नीचे झुकी और अपना ब्रा उठाकर उसे अपने दोनों चूचियों पर बिना पहने ही डाल दी,,, और अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेरते हुए बोली,,,।

मंगल - क्या हूवा इतनी दोपहर को चिलाने को और कमरे में देख के नही आ सकता क्या,,,,

सूरज - अब मुझे क्या मालूम था कि तुम कपड़े बदल रही हो...


मंगल - इतनी धोपहर के घर पर क्या काम हे
सूरज - आज खेत में ज्यादा काम नही हे इस लिए मामा बोले घर चला जा ओर फिर मेने सोचा घर जा के थोड़ा आराम कर लू और मुझे जोरो की भूख लगी है।

मंगल - अच्छा रुक मैं खाना देती हूं,,,
इतना कहकर वह दीवार की तरफ मुंह करके अपन ब्रा को पहनने लगी अपनी बड़ी बड़ी चूचीयो को अपने बेश कीमती खजाने को अपनी ब्रा में छुपा लीया,
उसके बाद ब्लाउज पहनने लगे सूरज से रहा नहीं जा रहा था वह अपनी नजर को चोरी से अपनी मामी की तरफ घुमाते हुए देखने लगा तो उसकी नंगी चिकनी एकदम गोरी पीठ अपनी मांसलता लिए नजर आने लगी,,,, देख कर मन में हो रहा था कि वह पीछे से जाकर अपनी मामी को अपनी बाहों में भर ले लेकिन वह ऐसा सोच सकता था करने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,, अपने भांजे की आंखों के सामने ही दीवाल की तरफ मुंह करके मंगल अपना ब्लाउज पहन ली और आखरी बटन बंद करते हुए बोली,,,।

मंगल - खाना रसोई घर में ही जा के खाले मुझे काम हे थोड़ा...
सूरज - अब मैं जाऊं,,,,

मंगल - तो तुझे रोका किसने है,,, जल्दी जा,,,(इतना कहकर नीचे गिरी हुई कंघी उठाने के लिए नीचे झुकी तो उसकी नजर सूरज के धोती पर पड़ी जो कि आगे की तरफ से उठा हुआ था,,, और मन में ही उसके मुंह से निकल गया यह क्या है,,,, लेकिन वह अपने मन में आए शब्दों को होठों पर नहीं लाई और दूसरी तरफ मुंह करके अपने बालों को सवारने लगी,,,, और सूरज भी कमरे से बाहर रसोई में चला गया,,,

कमरे से बाहर आने पर उसे इस बात का एहसास होगा कि उसके धोती में तंबू बना हुआ है,,, वह मन में अपने आप से बातें करते हुए बोला कि अच्छा हुआ कि इस पर मामी की नजर नहीं पड़ी वरना क्या सोचती,,,
सूरज कुछ देर पहले के हादसे के बारे में सोचता हुआ खाना खाने लगता हे उसके दिलो-दिमाग पर हलचल मची हुई थी,,, बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मामी के कसे हुए चुचियों के दो जोड़े नजर आने लगते थे,,, सूरज के लिए उसकी मामी की दोनों चूचियां फड़फड़ाते हुए कबूतर थे,,, जीन्हे अब अपने हाथ में लेकर दुलार ने खेलने और दबाने का मन कर रहा था,, सुधिया मामी की चुचियों के साथ वह जी भरकर खेल चुका था और उसकी चूचियों से खेल कर ऊसे जो आनंद प्राप्त हुआ था अब वही आनंद वह अपनी मंगल मामी की चुचियों के साथ लेना चाहता था वह देखना चाहता था कि सुधिया मामी की चुचियों में और उसकी मामी की चूचीयो में से किस की चूची ज्यादा आनंद देती है,,, अब वह आतुर था अपनी मामी के खूबसूरत जवान जिस्म से खेलने को,,,
लेकिन उसके मन में डर भी था,, वह इतनी जल्दी आगे बढ़ने से डर रहा था क्योंकि क्या पता सब कुछ अनजाने में हो रहा हो और उसे यह लग रहा हो कि उसकी मामी यह सबकुछ जानबूझकर कर रही है,,, यही बात सूरज के पल्ले नहीं पड़ रही थी कि यह जो कुछ भी कुछ दिनों से हो रहा है वह अनजाने में हो रहा है या जानबूझकर लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।
वह अपने मन में यही मानकर तसल्ली कर ले रहा था कि मंजिल मिले ना मिले सफर का आनंद उसे पूरा मिल तो रहा है,,।
सूरज खाना खाने के बाद अपने कमरे में आराम करने चला गया।

दूसरी तरफ मंगल को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह खटिया पर बैठी हुई थी धीरे-धीरे अपने बालों में कंघी कर रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्यों हो जाता है,,, सूरज तो खाना मांगने के लिए आया था और उसके हाथ से ही ब्रा छुट कर नीचे गिर गया था,,, मंगल मन में यही सोच रही थी कि उसकी खुद की ही गलती है,,, लेकिन फिर अपने मन में यह सोच रही थी कि सूरज का फर्ज बनता है कि जब उसकी आंखों के सामने इस तरह का दृश्य दिखा था तब उसे अपनी नजरों को फेंक देना चाहिए था लेकिन वह ऐसा ना करके बस टकटकी बांधकर उसे ही देख रहा था,,,लेकिन फिर उसके मन में यही ख्याल आता था कि सूरज जवान हो रहा है और इस उम्र में लड़के अक्सर बहक जाते हैं,,, सूरज के साथ भी यही हुआ होगा,,,अनजाने में ही सही लेकिन उसके सामने एक औरत का जवान जिस्म नंगा नजर आ जा रहा है और वह भी किसी गैर औरत का नहीं बल्कि उसकी खुद की मां समान मामी का,, ऐसे में भला एक बेटा सूरज क्या कर सकता है देखने के सिवा,,,
सब कुछ सोचने के बाद वह इसी नतीजे पर उतरी की इसमें उसके सूरज की गलती बिल्कुल भी नहीं थी,,ना तो उस दिन जब उसने मुझे मुतते हुवे देखा था और ना ही आज दोनों में उसकी ही गलती थी,, ब्रा कैसे नीचे गिर गईं यह उसे भी पता नहीं चला था अपने बेटे के सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी यह अनजाने में हुआ था आज भी उसका बेटा सूरज उसकी मदमस्त चुचियों के दर्शन कर गया था इसमें भी उसे अपनी ही गलती नजर आ रही थी,,, बस उसे एक चीज हैरान कर रही थी और वह थी बार-बार उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके सूरज के धोती के आगे वाला भाग का ऊंचा उठ जाना,,,,, और यह बात सोच कर उसके तन बदन में भी हलचल सी मच जा रही थी,,, इसी तरह की हलचल को कल बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और ना चाहते हुए भी अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली डालकर अपनी गर्मी शांत कर ली थी,,, आज भी उसे वही हरकत दौहराने की इच्छा हो रही थी लेकिन वह बड़ी मुश्किल से अपने मन पर काबू कर गई,,,।
ओर अपने आप को कामों में व्यस्त करने लगी।
 

Abhi32

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भाग ८

सूरज की जिंदगी का सबसे बेहतरीन वक्त गुजर चुका था,,,। आज के दिन के बाद से उसकी जिंदगी की नई शुरुआत हो रही थी इस दिन ने सूरज को एकदम से बदल कर रख दिया था,,, उसके सोचने समझने का तरीका एकदम से बदल गया था,,,। जिंदगी में पहली बार एक औरत की चुदाई की थी जो रिश्ते में उसकी मामी लगती थी औरत के जिस्मानी शब्दों को वह भली-भांति समझ गया था,,,
सूरज काफी खुश नजर आ रहा था वह अपने खेतों से होता हुवा अपने मस्ती में घर की ओर निकल पड़ा।


( मंगल के पुराने दिन जब शादी के ४ साल तक विलास उसे जम के चोदता था लेकिन वक्त के साथ साथ धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी पहले हफ्ते में एक बार फिर महीने में एक बार और फिर साल में एक बार अब पिछले ५ सालो से उसकी बूर प्यासी थी लेकिन कल से जो हो रहा था उससे उसके दिल में फिर से नई उमंग भर आइ थी लेकिन अपने संस्कारो के चलते वह रुक गई और सब कुछ भूल कर नए तारीखे से जीने की ठान लिया लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था )

दोपहर का समय था घर में काम करके से मंगल का बदन पसीने से तरबतर हो गया था इसी लिए उसने नहाने का सोचा और बाथरूम जाने के लिए ठंडा पानी लिया ओर नहाने के लिए चली गई।

इधर गौरी को कल से बैचेनी सी हो रही थी पहली बार चुदाई देख कर उसके शरीर में बदलाव होने लगा था। गौरी ने कुछ दिन कम्मो के घर नहीं जाने का सोचा और अपने सुधियां मामी के घर की ओर निकल पड़ी।

तेज कदमों से चलती हुई मंगल जल्दी से कच्ची ईटो से
बने बाथरूम में प्रवेश कर गई
बाथरूम में घुसते ही वह अपने बदन से लाल रंग की साड़ी को उतारने लगी,,,, मंगल का गोरा बदन लाल रंग की साड़ी में खिल रहा था,,, बला की खूबसूरत मंगल धीरे-धीरे करके अपने बदन पर से अपनी साड़ी को दूर कर रही थी,,,, अगले ही पल उसने अपने बदन पर से अपनी साड़ी को उतारकर जमीन पर गिरा दीया उसके बदन पर अब केवल पीले रंग का ब्लाउज और पेटीकोट था और इन वस्त्रों में खूबसूरत मंगल कामदेवी लग रही थी वह कुछ पल के लिए अपनी नजर को अपने पैरों से होते हुए अपनी ब्लाउज के बीच से झांक रही चूचियों के बीच की गहरी दरार को देखने लगी,,, ना जाने क्या सोचकर उसके होठों पर मुस्कुराहट फैल गई और वहां अपने दोनों हाथों को ऊपर लाकर, अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों से अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी,,,, यह नजारा बेहद कामुक और मादक था। हालांकि इस बेहद कामोत्तेजक नजारे को देखने वाला इस समय कोई भी नहीं था परंतु एक औरत के द्वारा अपने हाथों से अपने कपड़े उतारने की कल्पना ही मर्दों की उत्तेजना में बढ़ोतरी कर देती है। और जब बात मंगल की हो तो मंगल तो स्वर्ग से उतरी हुई किसी अप्सरा की तरह ही बेहद खूबसूरत थी, उसके बदन की बनावट उसका भरा हुआ बदन और जगह जगह पर बदन पर बने कामुक कटाव मर्दों को पूरी तरह से चुदवासा बना देते थे,,,,
धीरे-धीरे करके मंगल ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दीया ब्लाउज के बटन खोलते हैं लाल रंग की ब्रा नजर आने लगी और साथ ही मंगल की जवानी के दोनों कटोरे जो कि मधुर रस से भरे हुए थे। और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि किसी भी समय वह छलक जाएंगे क्योंकि मंगल कि दोनों चूचियां कुछ ज्यादा ही बड़ी और गोल थी,,, और वह दोनों जवानी की केंद्रीय बिंदु मंगल की लाल रंग की ब्रा में समा नहीं पा रहे थे।,,, अगले ही पल मंगल अपने बदन पर से ब्लाउज भी उतार फेंकी,, बाथरूम में मंगल धीरे-धीरे अपने ही हाथों से अपने आप को वस्त्र विहीन करती जा रही थी इस समय ऊसके बदन पर मात्र पेटीकोट और लाल रंग की ब्रा ही थी।
मंगल बाथरूम में मात्र ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी लेकिन उसका रूप लावण्य किसी काम देवी की तरह ही लग रहा था जब वस्त्रों में मंगल इतनी कामुक लगती हो तो संपूर्ण नग्ना अवस्था में तो कहर ढाती होगी,,,, मंगल अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ लाकर पेटीकोट की डोरी को अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर खोलने लगी,,,, और देखते ही देखते उसकी पेटीकोट उसके कदमों में जा गिरी,, इस समय का यह दृश्य ऐसा लग रहा था मानो सावन अपनी बाहें फैलाए प्रकृति को अपने अंदर समेट रहा हो,,, मंगल के गोरे गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा और गुलाबी रंग की कच्छी उसके कामुक बदन को और भी ज्यादा मादक बना रहे थे। 40 वर्ष की आयु में भी मंगल का बदन और खूबसूरती अल्हड़ जवानी की महक बिखेर रही थी। वैसे तो अधिकतर औरतें वस्त्र पहनकर ही स्नान करती हैं लेकिन जब इस तरह का एकांत बाथरूम में मिलता हो तो वह भी अपने सारे कपड़े, उतार कर नंगी होकर नहाने का लुत्फ उठाती है।

मंगल आदत अनुसार अपनी ब्रा के ऊपर खोलने के लिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा के हुक को खोलने लगी इस तरह की हरकत की वजह से उसकी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां सीना ताने और ज्यादा ऊभरकर सामने आ गई । और जैसे ही ब्रा का हुक खुला मंगल की दोनों की योजना आजाद परिंदे की तरह हवा में पंख फड़फड़ाने लगे,
अगर कोई अपनी आंखों से मंगल की नंगी चूचियां देख ले तो उसे यकीन ही ना हो कि यह एक ४० वर्षीय औरत की चूचीया है।,, क्योंकि अक्सर और ज्यादातर इस उमर में आकर औरतों की चुचियों का आकार भले ही बड़ा हो वह झूल जाती हैं,,, लेकिन मंगल के पक्ष में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था इस उम्र में भी उसकी चूचियां जवा ताजा और खरबूजे की तरह गोल गोल और बड़ी बड़ी थी और और देखने और आश्चर्य करने वाली बात यह थी कि,,, बड़ी-बड़ी और गोल होने के बावजूद भी उसमे लटकन बिल्कुल भी नहीं थी कहीं से भी ऐसा नहीं लगता था कि झूल गई हो,,, चॉकलेटी रंगी की निप्पल किसी कैडबरी की चॉकलेट की तरह लग रही थी जिस में से दूध की कुछ बुंदे टपक रही थी। जिसे किसी का भी मन मुंह में लेकर चूसने को हो जाए। ( मंगल ४० साल की होने के बाद भी उसकी चूचियों से दूध आता था )

मंगल अपनी ब्रा को भी अपनी बाहों से निकाल कर नीचे जमीन पर फेंक दी थी एक औरत होने के बावजूद भी मंगल अपनी चुचियों को स्पर्स करने का लालच रोक नहीं पाई और उत्सुकता बस वह अपने दोनों हाथों से अपने दोनों खरबूजे को पकड़कर हल्के से दबाने लगी
मंगल ने खुद ही दोनों चुचीयों को अपनी हथेली में भर कर हल्के से दबाई जोकी ऊसकी बड़ी बड़ी चूचियां उसकी हथेली में सिर्फ आधी ही आ रही थी
और दबाते दबाते कुछ सोचने लगी वह अपने पति के बारे में ही सोच रही थी जो कि उसकी जवानी को,
महसूस करने का सुख उसे दे नहीं पाया था और ना ही मंगल को,,, अद्भुत सुख का एहसास करा पाया था,,,, मंगल को इस बात का दुख अब तक अखर रहा था कि ना तो वह कुछ कर पाया और ना ही उसे कुछ करने दिया यही बात सोचते हुए वह अपने दोनों खरबूजो पर हथेली का स्पर्श कराकर हटा ली और अपना मन भटकने ना देकर तुरंत अपनी कच्छी को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ सरकाते हुए अपनी दुधिया चिकनी लंबी लंबी टांगों से होते हुए नीचे की तरफ लाई है और अगले ही पल अपनी पेंटी को भी उतार फेंका,,,, अब मंगल बाथरूम में संपूर्ण नग्नवस्था में थी,,, इस समय मंगल स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही थी,,, इस पल का नजारा किसी के भी लंड से पानी फेंक देने के लिए काफी था। गोरा गोरा बदन कामुकता से भरा हुआ, लंबे काले काले घने बाल जो कि उसकी कमर के नीचे भराव दार उन्नत नितंबों को स्पर्श करते थे, गोल चेहरा भरा हुआ किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं था जवानी से भरे हुए बदन पर मंगल की तनी हुई दोनों चूचियां कुदरत के द्वारा दी हुई संपूर्ण जवानी को पुरस्कृत करते हुए दूध की थैली की तरह लग रही थी। जिसमे से दूध रिस रहा था।
पेट पर चर्बी का नामोनिशान नहीं था हालांकि मंगल किसी भी प्रकार का योग व्यायाम नहीं करती थी लेकिन जिस तरह से सारा दिन हुआ इधर उधर दौड़ती फिरती हुई काम करती और कभी कभार खेतो में भी काम किया करती थी,,, इस कारण से उसका बदन इस उम्र में भी पूरी तरह से कसा हुआ था। मोटी मोटी चिकनी जांघें केले के तने के समान नजर आती थी,, जिसे हाथों से सहैलाना और चूमना हर मर्द की ख्वाहिश थी।,,,
जिस तरह की खूबसूरती से भरी हुई मंगल थी उसी तरह से बेहद खूबसूरत उसकी बेशकीमती बुर थी। जिसका आकार केवल एक हल्की सी दरार के रूप में नजर आ रही थी। हल्की सी उपसी हुई,,, या युं कहलो की गरम रोटी की तरह फुली हुई थी जिस पर हल्के हल्के सुनहरी रंग की झांटों का झुरमुट बेहद हसीन लग रहा था।,,,,। यह औरत के बदन का वह बेशकीमती हिस्सा था,,, जिसे पाने के लिए दुनिया का हर मर्द कुछ भी कर जाने को तैयार रहता है। और यह तो मंगल की बुर थी, जिसके बारे में सोच कर सूरज का लंड बार बार खड़ा हो जाता है।
मंगल का कसा हुआ बदन और उसकी पतली दरार रुपी बुर को देखकर यह अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था कि वह एक बेटी की मां है।

नितंबों पर अभी भी जवानी के दिनों वाला ही कसाव बरकरार था। गांड के दोनों फांखों के बीच की गहरी लकीर,,,,, ऊफ्फ्फ्फ,,,,,,,, किसी के भी लंड का पानी निकालने में पूरी तरह से सक्षम थी। इतना समझ लो कि मंगल पूरी तरह से खूबसूरती से भरी हुई कयामत थी ।
बाल्डी में से पानी का लोटा ले के खड़ी होकर नहाना शुरू कर दी । वह आहिस्ते आहिस्ते साबुन को अपने पूरे बदन पर रगड़ रगड़ कर नहाने लग गई,,,,, वह साबुन लगाए जा रही थी और उसके बदन पर लोटे से पानी का गिरता जा रहा था। थोड़ी देर में वह नहा चुकी थी और अपने नंगे बदन पर से पानी की बूंदों को साफ करके अपने बदन पर टॉवल लपेट लीया।
अपने नंगे बदन पर टावल लपेटने के बाद वह बाथरुम से निकल कर सीधे अपने कमरे में चली गई।

कमरे में जाते ही उसने अलमारी खोली जिसमें उसकी साड़ियां भरी हुई थी। उसमें से उसने अपने मनपसंद की साड़ी निकाल कर के उसके मैचिंग का ब्लाउज पेटीकोट और उसी रंग की ब्रा पेंटी भी निकाल ली।
उसके बाद वह आईने के सामने खड़ी होकर के अपने बदन पर लपेटे हुए टॉवल को भी निकालकर बिस्तर पर फेंक दी और एक बार फिर से उसकी नंगे पन की खूबसूरती से पूरा कमरा जगमगा उठा। सबसे पहले उसने लाल रंग की कच्छी पहनी फिर पेटीकोट को कमर तक चढ़ाकर गाट बांध दिया। नीचे से साड़ी लपेट कर ब्रा पहनने लगी....

तभी सूरज घर के अंदर आ जाता है। उसे चुदाई के बाद जोरो की भूख लगी थी।
सूरज जोर से आवाज करता हुआ अपनी मामी को यहां वहां ढुंढता हुआ सीधे कमरे में घुसने से पहले ही इतनी जोर से अपनी मामी को आवाज लगाया कि मंगल एकदम से चौक गई और उसके हाथ से ब्रा छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई,,, और सूरज अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर एकदम हक्का-बक्का रह गया,,,।

दरवाजे पर ही सूरज के पैर ठिठक गए थे,,, सूरज की तेज आवाज सुनते ही मंगल के हाथों से उसका ब्रा जोंकी वह पहनने ही वाली थी वह छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई थी,,, दोनों की आपस में नजरें टकराई,, कुछ पल के लिए सब कुछ थम सा गया एकदम स्थिर हो गया ऐसा लग रहा था मानो समय रुक गया हो,, दोनों मामी भांजा एक दूसरे को देखें,, लेकिन इस अफरातफरी में क्या करना है दोनों को समझ में नहीं आ रहा था,,, सूरज की जवान प्यासी नजरें उसकी मामी की मदमस्त भरी हुई जवानी के केंद्र बिंदु रुपी दोनों खरबूजे पर टिक गई,,,,, सूरज की तो सांसे अटक गई थी उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह अपने होशो हवास खो बैठा था करता भी क्या बिचारा आंखों के सामने जब इस तरह का बेहतरीन कामुक नजारा हो तो दुनिया का कोई भी मर्द अपने होशो हवास खो दें,,
सूरज की सांसे तेज चलने लगी थी पलभर में ही उसके तन बदन में उत्तेजना की वो लहर दौड़ने लगी की,,, अगर उसकी डोर खींचकर अगर काबू में ना लिया जाए तो बेकाबू हो जाती है,,,
मंगल को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें नीचे जमीन पर गिरा हुआ ब्रा उठाकर अपना तन ढकने तक की सुध उसमें बिल्कुल नहीं थी,,,, वह भी एक तक अपने भांजे को देखे जा रही थी,,, सूरज अपनी मामी की दोनों गोलाइयों को देखकर मदहोश हुआ जा रहा था,,,बेहद करीब से अब थोड़ी देर पहले उसने सुधियां मामी की चुचियों को देखा था उन्हें छू कर स्पर्श करके उन्हें मसल कर हर तरीके से उनका मजा लिया था लेकिन आज अपनी मामी की चुचियों को बड़े ध्यान से और बड़े करीब से देख रहा था,,, पर उसे इस बात का ज्ञान हो रहा था कि सुधियां मामी की चुचियों में और ऊसकी मंगल मामी की चुचियों में जमीन आसमान का फर्क था,,,,भले ही सुधियां मामी के चुचियों का आकार को ज्यादा बड़ा था लेकिन उसमे लचक थी,, लेकिन मंगल मामी की चुचियों का आकार एकदम कड़क था,,,खूबसूरत औरत के पास जिस तरह की चूची होना चाहिए उसी तरह की चूची मंगल के पास थी,,, उनमें बिल्कुल भी लचक नहीं थी दोनों की दोनों एकदम तनी हुई थी,,, और उन दोनों के बीच में चॉकलेटी रंग की निप्पल किसमिस के दाने की तरह लग रही थी जोकि अगर उनसे खेला जाए तो उत्तेजना में आकर अपना रूप छुआरा बना लेती है,,,
सूरज की इच्छा हो रही थी कि वह अपनी मामी की दोनों चूचियों को पकड़ कर उनके आकार को अपनी हथेली में महसूस करें उसकी गर्माहट से अपने तन बदन को गर्म कर ले,, लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसमें अभी नहीं थी वह केवल एक टक देखें ही जा रहा था,,,, तभी मंगल को इस बात का अहसास हुआ कि कुछ गलत हो रहा है,,इसलिए झट से नीचे झुकी और अपना ब्रा उठाकर उसे अपने दोनों चूचियों पर बिना पहने ही डाल दी,,, और अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेरते हुए बोली,,,।

मंगल - क्या हूवा इतनी दोपहर को चिलाने को और कमरे में देख के नही आ सकता क्या,,,,

सूरज - अब मुझे क्या मालूम था कि तुम कपड़े बदल रही हो...


मंगल - इतनी धोपहर के घर पर क्या काम हे
सूरज - आज खेत में ज्यादा काम नही हे इस लिए मामा बोले घर चला जा ओर फिर मेने सोचा घर जा के थोड़ा आराम कर लू और मुझे जोरो की भूख लगी है।

मंगल - अच्छा रुक मैं खाना देती हूं,,,
इतना कहकर वह दीवार की तरफ मुंह करके अपन ब्रा को पहनने लगी अपनी बड़ी बड़ी चूचीयो को अपने बेश कीमती खजाने को अपनी ब्रा में छुपा लीया,
उसके बाद ब्लाउज पहनने लगे सूरज से रहा नहीं जा रहा था वह अपनी नजर को चोरी से अपनी मामी की तरफ घुमाते हुए देखने लगा तो उसकी नंगी चिकनी एकदम गोरी पीठ अपनी मांसलता लिए नजर आने लगी,,,, देख कर मन में हो रहा था कि वह पीछे से जाकर अपनी मामी को अपनी बाहों में भर ले लेकिन वह ऐसा सोच सकता था करने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,, अपने भांजे की आंखों के सामने ही दीवाल की तरफ मुंह करके मंगल अपना ब्लाउज पहन ली और आखरी बटन बंद करते हुए बोली,,,।

मंगल - खाना रसोई घर में ही जा के खाले मुझे काम हे थोड़ा...
सूरज - अब मैं जाऊं,,,,

मंगल - तो तुझे रोका किसने है,,, जल्दी जा,,,(इतना कहकर नीचे गिरी हुई कंघी उठाने के लिए नीचे झुकी तो उसकी नजर सूरज के धोती पर पड़ी जो कि आगे की तरफ से उठा हुआ था,,, और मन में ही उसके मुंह से निकल गया यह क्या है,,,, लेकिन वह अपने मन में आए शब्दों को होठों पर नहीं लाई और दूसरी तरफ मुंह करके अपने बालों को सवारने लगी,,,, और सूरज भी कमरे से बाहर रसोई में चला गया,,,

कमरे से बाहर आने पर उसे इस बात का एहसास होगा कि उसके धोती में तंबू बना हुआ है,,, वह मन में अपने आप से बातें करते हुए बोला कि अच्छा हुआ कि इस पर मामी की नजर नहीं पड़ी वरना क्या सोचती,,,
सूरज कुछ देर पहले के हादसे के बारे में सोचता हुआ खाना खाने लगता हे उसके दिलो-दिमाग पर हलचल मची हुई थी,,, बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मामी के कसे हुए चुचियों के दो जोड़े नजर आने लगते थे,,, सूरज के लिए उसकी मामी की दोनों चूचियां फड़फड़ाते हुए कबूतर थे,,, जीन्हे अब अपने हाथ में लेकर दुलार ने खेलने और दबाने का मन कर रहा था,, सुधिया मामी की चुचियों के साथ वह जी भरकर खेल चुका था और उसकी चूचियों से खेल कर ऊसे जो आनंद प्राप्त हुआ था अब वही आनंद वह अपनी मंगल मामी की चुचियों के साथ लेना चाहता था वह देखना चाहता था कि सुधिया मामी की चुचियों में और उसकी मामी की चूचीयो में से किस की चूची ज्यादा आनंद देती है,,, अब वह आतुर था अपनी मामी के खूबसूरत जवान जिस्म से खेलने को,,,
लेकिन उसके मन में डर भी था,, वह इतनी जल्दी आगे बढ़ने से डर रहा था क्योंकि क्या पता सब कुछ अनजाने में हो रहा हो और उसे यह लग रहा हो कि उसकी मामी यह सबकुछ जानबूझकर कर रही है,,, यही बात सूरज के पल्ले नहीं पड़ रही थी कि यह जो कुछ भी कुछ दिनों से हो रहा है वह अनजाने में हो रहा है या जानबूझकर लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।
वह अपने मन में यही मानकर तसल्ली कर ले रहा था कि मंजिल मिले ना मिले सफर का आनंद उसे पूरा मिल तो रहा है,,।
सूरज खाना खाने के बाद अपने कमरे में आराम करने चला गया।

दूसरी तरफ मंगल को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह खटिया पर बैठी हुई थी धीरे-धीरे अपने बालों में कंघी कर रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्यों हो जाता है,,, सूरज तो खाना मांगने के लिए आया था और उसके हाथ से ही ब्रा छुट कर नीचे गिर गया था,,, मंगल मन में यही सोच रही थी कि उसकी खुद की ही गलती है,,, लेकिन फिर अपने मन में यह सोच रही थी कि सूरज का फर्ज बनता है कि जब उसकी आंखों के सामने इस तरह का दृश्य दिखा था तब उसे अपनी नजरों को फेंक देना चाहिए था लेकिन वह ऐसा ना करके बस टकटकी बांधकर उसे ही देख रहा था,,,लेकिन फिर उसके मन में यही ख्याल आता था कि सूरज जवान हो रहा है और इस उम्र में लड़के अक्सर बहक जाते हैं,,, सूरज के साथ भी यही हुआ होगा,,,अनजाने में ही सही लेकिन उसके सामने एक औरत का जवान जिस्म नंगा नजर आ जा रहा है और वह भी किसी गैर औरत का नहीं बल्कि उसकी खुद की मां समान मामी का,, ऐसे में भला एक बेटा सूरज क्या कर सकता है देखने के सिवा,,,
सब कुछ सोचने के बाद वह इसी नतीजे पर उतरी की इसमें उसके सूरज की गलती बिल्कुल भी नहीं थी,,ना तो उस दिन जब उसने मुझे मुतते हुवे देखा था और ना ही आज दोनों में उसकी ही गलती थी,, ब्रा कैसे नीचे गिर गईं यह उसे भी पता नहीं चला था अपने बेटे के सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी यह अनजाने में हुआ था आज भी उसका बेटा सूरज उसकी मदमस्त चुचियों के दर्शन कर गया था इसमें भी उसे अपनी ही गलती नजर आ रही थी,,, बस उसे एक चीज हैरान कर रही थी और वह थी बार-बार उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके सूरज के धोती के आगे वाला भाग का ऊंचा उठ जाना,,,,, और यह बात सोच कर उसके तन बदन में भी हलचल सी मच जा रही थी,,, इसी तरह की हलचल को कल बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और ना चाहते हुए भी अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली डालकर अपनी गर्मी शांत कर ली थी,,, आज भी उसे वही हरकत दौहराने की इच्छा हो रही थी लेकिन वह बड़ी मुश्किल से अपने मन पर काबू कर गई,,,।
ओर अपने आप को कामों में व्यस्त करने लगी।
Ati uttam update
 

Ocean

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भाग ८

सूरज की जिंदगी का सबसे बेहतरीन वक्त गुजर चुका था,,,। आज के दिन के बाद से उसकी जिंदगी की नई शुरुआत हो रही थी इस दिन ने सूरज को एकदम से बदल कर रख दिया था,,, उसके सोचने समझने का तरीका एकदम से बदल गया था,,,। जिंदगी में पहली बार एक औरत की चुदाई की थी जो रिश्ते में उसकी मामी लगती थी औरत के जिस्मानी शब्दों को वह भली-भांति समझ गया था,,,
सूरज काफी खुश नजर आ रहा था वह अपने खेतों से होता हुवा अपने मस्ती में घर की ओर निकल पड़ा।


( मंगल के पुराने दिन जब शादी के ४ साल तक विलास उसे जम के चोदता था लेकिन वक्त के साथ साथ धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी पहले हफ्ते में एक बार फिर महीने में एक बार और फिर साल में एक बार अब पिछले ५ सालो से उसकी बूर प्यासी थी लेकिन कल से जो हो रहा था उससे उसके दिल में फिर से नई उमंग भर आइ थी लेकिन अपने संस्कारो के चलते वह रुक गई और सब कुछ भूल कर नए तारीखे से जीने की ठान लिया लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था )

दोपहर का समय था घर में काम करके से मंगल का बदन पसीने से तरबतर हो गया था इसी लिए उसने नहाने का सोचा और बाथरूम जाने के लिए ठंडा पानी लिया ओर नहाने के लिए चली गई।

इधर गौरी को कल से बैचेनी सी हो रही थी पहली बार चुदाई देख कर उसके शरीर में बदलाव होने लगा था। गौरी ने कुछ दिन कम्मो के घर नहीं जाने का सोचा और अपने सुधियां मामी के घर की ओर निकल पड़ी।

तेज कदमों से चलती हुई मंगल जल्दी से कच्ची ईटो से
बने बाथरूम में प्रवेश कर गई
बाथरूम में घुसते ही वह अपने बदन से लाल रंग की साड़ी को उतारने लगी,,,, मंगल का गोरा बदन लाल रंग की साड़ी में खिल रहा था,,, बला की खूबसूरत मंगल धीरे-धीरे करके अपने बदन पर से अपनी साड़ी को दूर कर रही थी,,,, अगले ही पल उसने अपने बदन पर से अपनी साड़ी को उतारकर जमीन पर गिरा दीया उसके बदन पर अब केवल पीले रंग का ब्लाउज और पेटीकोट था और इन वस्त्रों में खूबसूरत मंगल कामदेवी लग रही थी वह कुछ पल के लिए अपनी नजर को अपने पैरों से होते हुए अपनी ब्लाउज के बीच से झांक रही चूचियों के बीच की गहरी दरार को देखने लगी,,, ना जाने क्या सोचकर उसके होठों पर मुस्कुराहट फैल गई और वहां अपने दोनों हाथों को ऊपर लाकर, अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों से अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी,,,, यह नजारा बेहद कामुक और मादक था। हालांकि इस बेहद कामोत्तेजक नजारे को देखने वाला इस समय कोई भी नहीं था परंतु एक औरत के द्वारा अपने हाथों से अपने कपड़े उतारने की कल्पना ही मर्दों की उत्तेजना में बढ़ोतरी कर देती है। और जब बात मंगल की हो तो मंगल तो स्वर्ग से उतरी हुई किसी अप्सरा की तरह ही बेहद खूबसूरत थी, उसके बदन की बनावट उसका भरा हुआ बदन और जगह जगह पर बदन पर बने कामुक कटाव मर्दों को पूरी तरह से चुदवासा बना देते थे,,,,
धीरे-धीरे करके मंगल ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दीया ब्लाउज के बटन खोलते हैं लाल रंग की ब्रा नजर आने लगी और साथ ही मंगल की जवानी के दोनों कटोरे जो कि मधुर रस से भरे हुए थे। और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि किसी भी समय वह छलक जाएंगे क्योंकि मंगल कि दोनों चूचियां कुछ ज्यादा ही बड़ी और गोल थी,,, और वह दोनों जवानी की केंद्रीय बिंदु मंगल की लाल रंग की ब्रा में समा नहीं पा रहे थे।,,, अगले ही पल मंगल अपने बदन पर से ब्लाउज भी उतार फेंकी,, बाथरूम में मंगल धीरे-धीरे अपने ही हाथों से अपने आप को वस्त्र विहीन करती जा रही थी इस समय ऊसके बदन पर मात्र पेटीकोट और लाल रंग की ब्रा ही थी।
मंगल बाथरूम में मात्र ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी लेकिन उसका रूप लावण्य किसी काम देवी की तरह ही लग रहा था जब वस्त्रों में मंगल इतनी कामुक लगती हो तो संपूर्ण नग्ना अवस्था में तो कहर ढाती होगी,,,, मंगल अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ लाकर पेटीकोट की डोरी को अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर खोलने लगी,,,, और देखते ही देखते उसकी पेटीकोट उसके कदमों में जा गिरी,, इस समय का यह दृश्य ऐसा लग रहा था मानो सावन अपनी बाहें फैलाए प्रकृति को अपने अंदर समेट रहा हो,,, मंगल के गोरे गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा और गुलाबी रंग की कच्छी उसके कामुक बदन को और भी ज्यादा मादक बना रहे थे। 40 वर्ष की आयु में भी मंगल का बदन और खूबसूरती अल्हड़ जवानी की महक बिखेर रही थी। वैसे तो अधिकतर औरतें वस्त्र पहनकर ही स्नान करती हैं लेकिन जब इस तरह का एकांत बाथरूम में मिलता हो तो वह भी अपने सारे कपड़े, उतार कर नंगी होकर नहाने का लुत्फ उठाती है।

मंगल आदत अनुसार अपनी ब्रा के ऊपर खोलने के लिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा के हुक को खोलने लगी इस तरह की हरकत की वजह से उसकी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां सीना ताने और ज्यादा ऊभरकर सामने आ गई । और जैसे ही ब्रा का हुक खुला मंगल की दोनों की योजना आजाद परिंदे की तरह हवा में पंख फड़फड़ाने लगे,
अगर कोई अपनी आंखों से मंगल की नंगी चूचियां देख ले तो उसे यकीन ही ना हो कि यह एक ४० वर्षीय औरत की चूचीया है।,, क्योंकि अक्सर और ज्यादातर इस उमर में आकर औरतों की चुचियों का आकार भले ही बड़ा हो वह झूल जाती हैं,,, लेकिन मंगल के पक्ष में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था इस उम्र में भी उसकी चूचियां जवा ताजा और खरबूजे की तरह गोल गोल और बड़ी बड़ी थी और और देखने और आश्चर्य करने वाली बात यह थी कि,,, बड़ी-बड़ी और गोल होने के बावजूद भी उसमे लटकन बिल्कुल भी नहीं थी कहीं से भी ऐसा नहीं लगता था कि झूल गई हो,,, चॉकलेटी रंगी की निप्पल किसी कैडबरी की चॉकलेट की तरह लग रही थी जिस में से दूध की कुछ बुंदे टपक रही थी। जिसे किसी का भी मन मुंह में लेकर चूसने को हो जाए। ( मंगल ४० साल की होने के बाद भी उसकी चूचियों से दूध आता था )

मंगल अपनी ब्रा को भी अपनी बाहों से निकाल कर नीचे जमीन पर फेंक दी थी एक औरत होने के बावजूद भी मंगल अपनी चुचियों को स्पर्स करने का लालच रोक नहीं पाई और उत्सुकता बस वह अपने दोनों हाथों से अपने दोनों खरबूजे को पकड़कर हल्के से दबाने लगी
मंगल ने खुद ही दोनों चुचीयों को अपनी हथेली में भर कर हल्के से दबाई जोकी ऊसकी बड़ी बड़ी चूचियां उसकी हथेली में सिर्फ आधी ही आ रही थी
और दबाते दबाते कुछ सोचने लगी वह अपने पति के बारे में ही सोच रही थी जो कि उसकी जवानी को,
महसूस करने का सुख उसे दे नहीं पाया था और ना ही मंगल को,,, अद्भुत सुख का एहसास करा पाया था,,,, मंगल को इस बात का दुख अब तक अखर रहा था कि ना तो वह कुछ कर पाया और ना ही उसे कुछ करने दिया यही बात सोचते हुए वह अपने दोनों खरबूजो पर हथेली का स्पर्श कराकर हटा ली और अपना मन भटकने ना देकर तुरंत अपनी कच्छी को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ सरकाते हुए अपनी दुधिया चिकनी लंबी लंबी टांगों से होते हुए नीचे की तरफ लाई है और अगले ही पल अपनी पेंटी को भी उतार फेंका,,,, अब मंगल बाथरूम में संपूर्ण नग्नवस्था में थी,,, इस समय मंगल स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही थी,,, इस पल का नजारा किसी के भी लंड से पानी फेंक देने के लिए काफी था। गोरा गोरा बदन कामुकता से भरा हुआ, लंबे काले काले घने बाल जो कि उसकी कमर के नीचे भराव दार उन्नत नितंबों को स्पर्श करते थे, गोल चेहरा भरा हुआ किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं था जवानी से भरे हुए बदन पर मंगल की तनी हुई दोनों चूचियां कुदरत के द्वारा दी हुई संपूर्ण जवानी को पुरस्कृत करते हुए दूध की थैली की तरह लग रही थी। जिसमे से दूध रिस रहा था।
पेट पर चर्बी का नामोनिशान नहीं था हालांकि मंगल किसी भी प्रकार का योग व्यायाम नहीं करती थी लेकिन जिस तरह से सारा दिन हुआ इधर उधर दौड़ती फिरती हुई काम करती और कभी कभार खेतो में भी काम किया करती थी,,, इस कारण से उसका बदन इस उम्र में भी पूरी तरह से कसा हुआ था। मोटी मोटी चिकनी जांघें केले के तने के समान नजर आती थी,, जिसे हाथों से सहैलाना और चूमना हर मर्द की ख्वाहिश थी।,,,
जिस तरह की खूबसूरती से भरी हुई मंगल थी उसी तरह से बेहद खूबसूरत उसकी बेशकीमती बुर थी। जिसका आकार केवल एक हल्की सी दरार के रूप में नजर आ रही थी। हल्की सी उपसी हुई,,, या युं कहलो की गरम रोटी की तरह फुली हुई थी जिस पर हल्के हल्के सुनहरी रंग की झांटों का झुरमुट बेहद हसीन लग रहा था।,,,,। यह औरत के बदन का वह बेशकीमती हिस्सा था,,, जिसे पाने के लिए दुनिया का हर मर्द कुछ भी कर जाने को तैयार रहता है। और यह तो मंगल की बुर थी, जिसके बारे में सोच कर सूरज का लंड बार बार खड़ा हो जाता है।
मंगल का कसा हुआ बदन और उसकी पतली दरार रुपी बुर को देखकर यह अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था कि वह एक बेटी की मां है।

नितंबों पर अभी भी जवानी के दिनों वाला ही कसाव बरकरार था। गांड के दोनों फांखों के बीच की गहरी लकीर,,,,, ऊफ्फ्फ्फ,,,,,,,, किसी के भी लंड का पानी निकालने में पूरी तरह से सक्षम थी। इतना समझ लो कि मंगल पूरी तरह से खूबसूरती से भरी हुई कयामत थी ।
बाल्डी में से पानी का लोटा ले के खड़ी होकर नहाना शुरू कर दी । वह आहिस्ते आहिस्ते साबुन को अपने पूरे बदन पर रगड़ रगड़ कर नहाने लग गई,,,,, वह साबुन लगाए जा रही थी और उसके बदन पर लोटे से पानी का गिरता जा रहा था। थोड़ी देर में वह नहा चुकी थी और अपने नंगे बदन पर से पानी की बूंदों को साफ करके अपने बदन पर टॉवल लपेट लीया।
अपने नंगे बदन पर टावल लपेटने के बाद वह बाथरुम से निकल कर सीधे अपने कमरे में चली गई।

कमरे में जाते ही उसने अलमारी खोली जिसमें उसकी साड़ियां भरी हुई थी। उसमें से उसने अपने मनपसंद की साड़ी निकाल कर के उसके मैचिंग का ब्लाउज पेटीकोट और उसी रंग की ब्रा पेंटी भी निकाल ली।
उसके बाद वह आईने के सामने खड़ी होकर के अपने बदन पर लपेटे हुए टॉवल को भी निकालकर बिस्तर पर फेंक दी और एक बार फिर से उसकी नंगे पन की खूबसूरती से पूरा कमरा जगमगा उठा। सबसे पहले उसने लाल रंग की कच्छी पहनी फिर पेटीकोट को कमर तक चढ़ाकर गाट बांध दिया। नीचे से साड़ी लपेट कर ब्रा पहनने लगी....

तभी सूरज घर के अंदर आ जाता है। उसे चुदाई के बाद जोरो की भूख लगी थी।
सूरज जोर से आवाज करता हुआ अपनी मामी को यहां वहां ढुंढता हुआ सीधे कमरे में घुसने से पहले ही इतनी जोर से अपनी मामी को आवाज लगाया कि मंगल एकदम से चौक गई और उसके हाथ से ब्रा छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई,,, और सूरज अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर एकदम हक्का-बक्का रह गया,,,।

दरवाजे पर ही सूरज के पैर ठिठक गए थे,,, सूरज की तेज आवाज सुनते ही मंगल के हाथों से उसका ब्रा जोंकी वह पहनने ही वाली थी वह छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई थी,,, दोनों की आपस में नजरें टकराई,, कुछ पल के लिए सब कुछ थम सा गया एकदम स्थिर हो गया ऐसा लग रहा था मानो समय रुक गया हो,, दोनों मामी भांजा एक दूसरे को देखें,, लेकिन इस अफरातफरी में क्या करना है दोनों को समझ में नहीं आ रहा था,,, सूरज की जवान प्यासी नजरें उसकी मामी की मदमस्त भरी हुई जवानी के केंद्र बिंदु रुपी दोनों खरबूजे पर टिक गई,,,,, सूरज की तो सांसे अटक गई थी उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह अपने होशो हवास खो बैठा था करता भी क्या बिचारा आंखों के सामने जब इस तरह का बेहतरीन कामुक नजारा हो तो दुनिया का कोई भी मर्द अपने होशो हवास खो दें,,
सूरज की सांसे तेज चलने लगी थी पलभर में ही उसके तन बदन में उत्तेजना की वो लहर दौड़ने लगी की,,, अगर उसकी डोर खींचकर अगर काबू में ना लिया जाए तो बेकाबू हो जाती है,,,
मंगल को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें नीचे जमीन पर गिरा हुआ ब्रा उठाकर अपना तन ढकने तक की सुध उसमें बिल्कुल नहीं थी,,,, वह भी एक तक अपने भांजे को देखे जा रही थी,,, सूरज अपनी मामी की दोनों गोलाइयों को देखकर मदहोश हुआ जा रहा था,,,बेहद करीब से अब थोड़ी देर पहले उसने सुधियां मामी की चुचियों को देखा था उन्हें छू कर स्पर्श करके उन्हें मसल कर हर तरीके से उनका मजा लिया था लेकिन आज अपनी मामी की चुचियों को बड़े ध्यान से और बड़े करीब से देख रहा था,,, पर उसे इस बात का ज्ञान हो रहा था कि सुधियां मामी की चुचियों में और ऊसकी मंगल मामी की चुचियों में जमीन आसमान का फर्क था,,,,भले ही सुधियां मामी के चुचियों का आकार को ज्यादा बड़ा था लेकिन उसमे लचक थी,, लेकिन मंगल मामी की चुचियों का आकार एकदम कड़क था,,,खूबसूरत औरत के पास जिस तरह की चूची होना चाहिए उसी तरह की चूची मंगल के पास थी,,, उनमें बिल्कुल भी लचक नहीं थी दोनों की दोनों एकदम तनी हुई थी,,, और उन दोनों के बीच में चॉकलेटी रंग की निप्पल किसमिस के दाने की तरह लग रही थी जोकि अगर उनसे खेला जाए तो उत्तेजना में आकर अपना रूप छुआरा बना लेती है,,,
सूरज की इच्छा हो रही थी कि वह अपनी मामी की दोनों चूचियों को पकड़ कर उनके आकार को अपनी हथेली में महसूस करें उसकी गर्माहट से अपने तन बदन को गर्म कर ले,, लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसमें अभी नहीं थी वह केवल एक टक देखें ही जा रहा था,,,, तभी मंगल को इस बात का अहसास हुआ कि कुछ गलत हो रहा है,,इसलिए झट से नीचे झुकी और अपना ब्रा उठाकर उसे अपने दोनों चूचियों पर बिना पहने ही डाल दी,,, और अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेरते हुए बोली,,,।

मंगल - क्या हूवा इतनी दोपहर को चिलाने को और कमरे में देख के नही आ सकता क्या,,,,

सूरज - अब मुझे क्या मालूम था कि तुम कपड़े बदल रही हो...


मंगल - इतनी धोपहर के घर पर क्या काम हे
सूरज - आज खेत में ज्यादा काम नही हे इस लिए मामा बोले घर चला जा ओर फिर मेने सोचा घर जा के थोड़ा आराम कर लू और मुझे जोरो की भूख लगी है।

मंगल - अच्छा रुक मैं खाना देती हूं,,,
इतना कहकर वह दीवार की तरफ मुंह करके अपन ब्रा को पहनने लगी अपनी बड़ी बड़ी चूचीयो को अपने बेश कीमती खजाने को अपनी ब्रा में छुपा लीया,
उसके बाद ब्लाउज पहनने लगे सूरज से रहा नहीं जा रहा था वह अपनी नजर को चोरी से अपनी मामी की तरफ घुमाते हुए देखने लगा तो उसकी नंगी चिकनी एकदम गोरी पीठ अपनी मांसलता लिए नजर आने लगी,,,, देख कर मन में हो रहा था कि वह पीछे से जाकर अपनी मामी को अपनी बाहों में भर ले लेकिन वह ऐसा सोच सकता था करने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,, अपने भांजे की आंखों के सामने ही दीवाल की तरफ मुंह करके मंगल अपना ब्लाउज पहन ली और आखरी बटन बंद करते हुए बोली,,,।

मंगल - खाना रसोई घर में ही जा के खाले मुझे काम हे थोड़ा...
सूरज - अब मैं जाऊं,,,,

मंगल - तो तुझे रोका किसने है,,, जल्दी जा,,,(इतना कहकर नीचे गिरी हुई कंघी उठाने के लिए नीचे झुकी तो उसकी नजर सूरज के धोती पर पड़ी जो कि आगे की तरफ से उठा हुआ था,,, और मन में ही उसके मुंह से निकल गया यह क्या है,,,, लेकिन वह अपने मन में आए शब्दों को होठों पर नहीं लाई और दूसरी तरफ मुंह करके अपने बालों को सवारने लगी,,,, और सूरज भी कमरे से बाहर रसोई में चला गया,,,

कमरे से बाहर आने पर उसे इस बात का एहसास होगा कि उसके धोती में तंबू बना हुआ है,,, वह मन में अपने आप से बातें करते हुए बोला कि अच्छा हुआ कि इस पर मामी की नजर नहीं पड़ी वरना क्या सोचती,,,
सूरज कुछ देर पहले के हादसे के बारे में सोचता हुआ खाना खाने लगता हे उसके दिलो-दिमाग पर हलचल मची हुई थी,,, बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मामी के कसे हुए चुचियों के दो जोड़े नजर आने लगते थे,,, सूरज के लिए उसकी मामी की दोनों चूचियां फड़फड़ाते हुए कबूतर थे,,, जीन्हे अब अपने हाथ में लेकर दुलार ने खेलने और दबाने का मन कर रहा था,, सुधिया मामी की चुचियों के साथ वह जी भरकर खेल चुका था और उसकी चूचियों से खेल कर ऊसे जो आनंद प्राप्त हुआ था अब वही आनंद वह अपनी मंगल मामी की चुचियों के साथ लेना चाहता था वह देखना चाहता था कि सुधिया मामी की चुचियों में और उसकी मामी की चूचीयो में से किस की चूची ज्यादा आनंद देती है,,, अब वह आतुर था अपनी मामी के खूबसूरत जवान जिस्म से खेलने को,,,
लेकिन उसके मन में डर भी था,, वह इतनी जल्दी आगे बढ़ने से डर रहा था क्योंकि क्या पता सब कुछ अनजाने में हो रहा हो और उसे यह लग रहा हो कि उसकी मामी यह सबकुछ जानबूझकर कर रही है,,, यही बात सूरज के पल्ले नहीं पड़ रही थी कि यह जो कुछ भी कुछ दिनों से हो रहा है वह अनजाने में हो रहा है या जानबूझकर लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।
वह अपने मन में यही मानकर तसल्ली कर ले रहा था कि मंजिल मिले ना मिले सफर का आनंद उसे पूरा मिल तो रहा है,,।
सूरज खाना खाने के बाद अपने कमरे में आराम करने चला गया।

दूसरी तरफ मंगल को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह खटिया पर बैठी हुई थी धीरे-धीरे अपने बालों में कंघी कर रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्यों हो जाता है,,, सूरज तो खाना मांगने के लिए आया था और उसके हाथ से ही ब्रा छुट कर नीचे गिर गया था,,, मंगल मन में यही सोच रही थी कि उसकी खुद की ही गलती है,,, लेकिन फिर अपने मन में यह सोच रही थी कि सूरज का फर्ज बनता है कि जब उसकी आंखों के सामने इस तरह का दृश्य दिखा था तब उसे अपनी नजरों को फेंक देना चाहिए था लेकिन वह ऐसा ना करके बस टकटकी बांधकर उसे ही देख रहा था,,,लेकिन फिर उसके मन में यही ख्याल आता था कि सूरज जवान हो रहा है और इस उम्र में लड़के अक्सर बहक जाते हैं,,, सूरज के साथ भी यही हुआ होगा,,,अनजाने में ही सही लेकिन उसके सामने एक औरत का जवान जिस्म नंगा नजर आ जा रहा है और वह भी किसी गैर औरत का नहीं बल्कि उसकी खुद की मां समान मामी का,, ऐसे में भला एक बेटा सूरज क्या कर सकता है देखने के सिवा,,,
सब कुछ सोचने के बाद वह इसी नतीजे पर उतरी की इसमें उसके सूरज की गलती बिल्कुल भी नहीं थी,,ना तो उस दिन जब उसने मुझे मुतते हुवे देखा था और ना ही आज दोनों में उसकी ही गलती थी,, ब्रा कैसे नीचे गिर गईं यह उसे भी पता नहीं चला था अपने बेटे के सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी यह अनजाने में हुआ था आज भी उसका बेटा सूरज उसकी मदमस्त चुचियों के दर्शन कर गया था इसमें भी उसे अपनी ही गलती नजर आ रही थी,,, बस उसे एक चीज हैरान कर रही थी और वह थी बार-बार उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके सूरज के धोती के आगे वाला भाग का ऊंचा उठ जाना,,,,, और यह बात सोच कर उसके तन बदन में भी हलचल सी मच जा रही थी,,, इसी तरह की हलचल को कल बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और ना चाहते हुए भी अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली डालकर अपनी गर्मी शांत कर ली थी,,, आज भी उसे वही हरकत दौहराने की इच्छा हो रही थी लेकिन वह बड़ी मुश्किल से अपने मन पर काबू कर गई,,,।
ओर अपने आप को कामों में व्यस्त करने लगी।
Shandar kahani he
 

A.A.G.

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भाग ८

सूरज की जिंदगी का सबसे बेहतरीन वक्त गुजर चुका था,,,। आज के दिन के बाद से उसकी जिंदगी की नई शुरुआत हो रही थी इस दिन ने सूरज को एकदम से बदल कर रख दिया था,,, उसके सोचने समझने का तरीका एकदम से बदल गया था,,,। जिंदगी में पहली बार एक औरत की चुदाई की थी जो रिश्ते में उसकी मामी लगती थी औरत के जिस्मानी शब्दों को वह भली-भांति समझ गया था,,,
सूरज काफी खुश नजर आ रहा था वह अपने खेतों से होता हुवा अपने मस्ती में घर की ओर निकल पड़ा।


( मंगल के पुराने दिन जब शादी के ४ साल तक विलास उसे जम के चोदता था लेकिन वक्त के साथ साथ धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी पहले हफ्ते में एक बार फिर महीने में एक बार और फिर साल में एक बार अब पिछले ५ सालो से उसकी बूर प्यासी थी लेकिन कल से जो हो रहा था उससे उसके दिल में फिर से नई उमंग भर आइ थी लेकिन अपने संस्कारो के चलते वह रुक गई और सब कुछ भूल कर नए तारीखे से जीने की ठान लिया लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था )

दोपहर का समय था घर में काम करके से मंगल का बदन पसीने से तरबतर हो गया था इसी लिए उसने नहाने का सोचा और बाथरूम जाने के लिए ठंडा पानी लिया ओर नहाने के लिए चली गई।

इधर गौरी को कल से बैचेनी सी हो रही थी पहली बार चुदाई देख कर उसके शरीर में बदलाव होने लगा था। गौरी ने कुछ दिन कम्मो के घर नहीं जाने का सोचा और अपने सुधियां मामी के घर की ओर निकल पड़ी।

तेज कदमों से चलती हुई मंगल जल्दी से कच्ची ईटो से
बने बाथरूम में प्रवेश कर गई
बाथरूम में घुसते ही वह अपने बदन से लाल रंग की साड़ी को उतारने लगी,,,, मंगल का गोरा बदन लाल रंग की साड़ी में खिल रहा था,,, बला की खूबसूरत मंगल धीरे-धीरे करके अपने बदन पर से अपनी साड़ी को दूर कर रही थी,,,, अगले ही पल उसने अपने बदन पर से अपनी साड़ी को उतारकर जमीन पर गिरा दीया उसके बदन पर अब केवल पीले रंग का ब्लाउज और पेटीकोट था और इन वस्त्रों में खूबसूरत मंगल कामदेवी लग रही थी वह कुछ पल के लिए अपनी नजर को अपने पैरों से होते हुए अपनी ब्लाउज के बीच से झांक रही चूचियों के बीच की गहरी दरार को देखने लगी,,, ना जाने क्या सोचकर उसके होठों पर मुस्कुराहट फैल गई और वहां अपने दोनों हाथों को ऊपर लाकर, अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों से अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी,,,, यह नजारा बेहद कामुक और मादक था। हालांकि इस बेहद कामोत्तेजक नजारे को देखने वाला इस समय कोई भी नहीं था परंतु एक औरत के द्वारा अपने हाथों से अपने कपड़े उतारने की कल्पना ही मर्दों की उत्तेजना में बढ़ोतरी कर देती है। और जब बात मंगल की हो तो मंगल तो स्वर्ग से उतरी हुई किसी अप्सरा की तरह ही बेहद खूबसूरत थी, उसके बदन की बनावट उसका भरा हुआ बदन और जगह जगह पर बदन पर बने कामुक कटाव मर्दों को पूरी तरह से चुदवासा बना देते थे,,,,
धीरे-धीरे करके मंगल ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दीया ब्लाउज के बटन खोलते हैं लाल रंग की ब्रा नजर आने लगी और साथ ही मंगल की जवानी के दोनों कटोरे जो कि मधुर रस से भरे हुए थे। और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि किसी भी समय वह छलक जाएंगे क्योंकि मंगल कि दोनों चूचियां कुछ ज्यादा ही बड़ी और गोल थी,,, और वह दोनों जवानी की केंद्रीय बिंदु मंगल की लाल रंग की ब्रा में समा नहीं पा रहे थे।,,, अगले ही पल मंगल अपने बदन पर से ब्लाउज भी उतार फेंकी,, बाथरूम में मंगल धीरे-धीरे अपने ही हाथों से अपने आप को वस्त्र विहीन करती जा रही थी इस समय ऊसके बदन पर मात्र पेटीकोट और लाल रंग की ब्रा ही थी।
मंगल बाथरूम में मात्र ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी लेकिन उसका रूप लावण्य किसी काम देवी की तरह ही लग रहा था जब वस्त्रों में मंगल इतनी कामुक लगती हो तो संपूर्ण नग्ना अवस्था में तो कहर ढाती होगी,,,, मंगल अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ लाकर पेटीकोट की डोरी को अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर खोलने लगी,,,, और देखते ही देखते उसकी पेटीकोट उसके कदमों में जा गिरी,, इस समय का यह दृश्य ऐसा लग रहा था मानो सावन अपनी बाहें फैलाए प्रकृति को अपने अंदर समेट रहा हो,,, मंगल के गोरे गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा और गुलाबी रंग की कच्छी उसके कामुक बदन को और भी ज्यादा मादक बना रहे थे। 40 वर्ष की आयु में भी मंगल का बदन और खूबसूरती अल्हड़ जवानी की महक बिखेर रही थी। वैसे तो अधिकतर औरतें वस्त्र पहनकर ही स्नान करती हैं लेकिन जब इस तरह का एकांत बाथरूम में मिलता हो तो वह भी अपने सारे कपड़े, उतार कर नंगी होकर नहाने का लुत्फ उठाती है।

मंगल आदत अनुसार अपनी ब्रा के ऊपर खोलने के लिए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा के हुक को खोलने लगी इस तरह की हरकत की वजह से उसकी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां सीना ताने और ज्यादा ऊभरकर सामने आ गई । और जैसे ही ब्रा का हुक खुला मंगल की दोनों की योजना आजाद परिंदे की तरह हवा में पंख फड़फड़ाने लगे,
अगर कोई अपनी आंखों से मंगल की नंगी चूचियां देख ले तो उसे यकीन ही ना हो कि यह एक ४० वर्षीय औरत की चूचीया है।,, क्योंकि अक्सर और ज्यादातर इस उमर में आकर औरतों की चुचियों का आकार भले ही बड़ा हो वह झूल जाती हैं,,, लेकिन मंगल के पक्ष में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था इस उम्र में भी उसकी चूचियां जवा ताजा और खरबूजे की तरह गोल गोल और बड़ी बड़ी थी और और देखने और आश्चर्य करने वाली बात यह थी कि,,, बड़ी-बड़ी और गोल होने के बावजूद भी उसमे लटकन बिल्कुल भी नहीं थी कहीं से भी ऐसा नहीं लगता था कि झूल गई हो,,, चॉकलेटी रंगी की निप्पल किसी कैडबरी की चॉकलेट की तरह लग रही थी जिस में से दूध की कुछ बुंदे टपक रही थी। जिसे किसी का भी मन मुंह में लेकर चूसने को हो जाए। ( मंगल ४० साल की होने के बाद भी उसकी चूचियों से दूध आता था )

मंगल अपनी ब्रा को भी अपनी बाहों से निकाल कर नीचे जमीन पर फेंक दी थी एक औरत होने के बावजूद भी मंगल अपनी चुचियों को स्पर्स करने का लालच रोक नहीं पाई और उत्सुकता बस वह अपने दोनों हाथों से अपने दोनों खरबूजे को पकड़कर हल्के से दबाने लगी
मंगल ने खुद ही दोनों चुचीयों को अपनी हथेली में भर कर हल्के से दबाई जोकी ऊसकी बड़ी बड़ी चूचियां उसकी हथेली में सिर्फ आधी ही आ रही थी
और दबाते दबाते कुछ सोचने लगी वह अपने पति के बारे में ही सोच रही थी जो कि उसकी जवानी को,
महसूस करने का सुख उसे दे नहीं पाया था और ना ही मंगल को,,, अद्भुत सुख का एहसास करा पाया था,,,, मंगल को इस बात का दुख अब तक अखर रहा था कि ना तो वह कुछ कर पाया और ना ही उसे कुछ करने दिया यही बात सोचते हुए वह अपने दोनों खरबूजो पर हथेली का स्पर्श कराकर हटा ली और अपना मन भटकने ना देकर तुरंत अपनी कच्छी को दोनों हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ सरकाते हुए अपनी दुधिया चिकनी लंबी लंबी टांगों से होते हुए नीचे की तरफ लाई है और अगले ही पल अपनी पेंटी को भी उतार फेंका,,,, अब मंगल बाथरूम में संपूर्ण नग्नवस्था में थी,,, इस समय मंगल स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही थी,,, इस पल का नजारा किसी के भी लंड से पानी फेंक देने के लिए काफी था। गोरा गोरा बदन कामुकता से भरा हुआ, लंबे काले काले घने बाल जो कि उसकी कमर के नीचे भराव दार उन्नत नितंबों को स्पर्श करते थे, गोल चेहरा भरा हुआ किसी फिल्मी हीरोइन से कम नहीं था जवानी से भरे हुए बदन पर मंगल की तनी हुई दोनों चूचियां कुदरत के द्वारा दी हुई संपूर्ण जवानी को पुरस्कृत करते हुए दूध की थैली की तरह लग रही थी। जिसमे से दूध रिस रहा था।
पेट पर चर्बी का नामोनिशान नहीं था हालांकि मंगल किसी भी प्रकार का योग व्यायाम नहीं करती थी लेकिन जिस तरह से सारा दिन हुआ इधर उधर दौड़ती फिरती हुई काम करती और कभी कभार खेतो में भी काम किया करती थी,,, इस कारण से उसका बदन इस उम्र में भी पूरी तरह से कसा हुआ था। मोटी मोटी चिकनी जांघें केले के तने के समान नजर आती थी,, जिसे हाथों से सहैलाना और चूमना हर मर्द की ख्वाहिश थी।,,,
जिस तरह की खूबसूरती से भरी हुई मंगल थी उसी तरह से बेहद खूबसूरत उसकी बेशकीमती बुर थी। जिसका आकार केवल एक हल्की सी दरार के रूप में नजर आ रही थी। हल्की सी उपसी हुई,,, या युं कहलो की गरम रोटी की तरह फुली हुई थी जिस पर हल्के हल्के सुनहरी रंग की झांटों का झुरमुट बेहद हसीन लग रहा था।,,,,। यह औरत के बदन का वह बेशकीमती हिस्सा था,,, जिसे पाने के लिए दुनिया का हर मर्द कुछ भी कर जाने को तैयार रहता है। और यह तो मंगल की बुर थी, जिसके बारे में सोच कर सूरज का लंड बार बार खड़ा हो जाता है।
मंगल का कसा हुआ बदन और उसकी पतली दरार रुपी बुर को देखकर यह अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था कि वह एक बेटी की मां है।

नितंबों पर अभी भी जवानी के दिनों वाला ही कसाव बरकरार था। गांड के दोनों फांखों के बीच की गहरी लकीर,,,,, ऊफ्फ्फ्फ,,,,,,,, किसी के भी लंड का पानी निकालने में पूरी तरह से सक्षम थी। इतना समझ लो कि मंगल पूरी तरह से खूबसूरती से भरी हुई कयामत थी ।
बाल्डी में से पानी का लोटा ले के खड़ी होकर नहाना शुरू कर दी । वह आहिस्ते आहिस्ते साबुन को अपने पूरे बदन पर रगड़ रगड़ कर नहाने लग गई,,,,, वह साबुन लगाए जा रही थी और उसके बदन पर लोटे से पानी का गिरता जा रहा था। थोड़ी देर में वह नहा चुकी थी और अपने नंगे बदन पर से पानी की बूंदों को साफ करके अपने बदन पर टॉवल लपेट लीया।
अपने नंगे बदन पर टावल लपेटने के बाद वह बाथरुम से निकल कर सीधे अपने कमरे में चली गई।

कमरे में जाते ही उसने अलमारी खोली जिसमें उसकी साड़ियां भरी हुई थी। उसमें से उसने अपने मनपसंद की साड़ी निकाल कर के उसके मैचिंग का ब्लाउज पेटीकोट और उसी रंग की ब्रा पेंटी भी निकाल ली।
उसके बाद वह आईने के सामने खड़ी होकर के अपने बदन पर लपेटे हुए टॉवल को भी निकालकर बिस्तर पर फेंक दी और एक बार फिर से उसकी नंगे पन की खूबसूरती से पूरा कमरा जगमगा उठा। सबसे पहले उसने लाल रंग की कच्छी पहनी फिर पेटीकोट को कमर तक चढ़ाकर गाट बांध दिया। नीचे से साड़ी लपेट कर ब्रा पहनने लगी....

तभी सूरज घर के अंदर आ जाता है। उसे चुदाई के बाद जोरो की भूख लगी थी।
सूरज जोर से आवाज करता हुआ अपनी मामी को यहां वहां ढुंढता हुआ सीधे कमरे में घुसने से पहले ही इतनी जोर से अपनी मामी को आवाज लगाया कि मंगल एकदम से चौक गई और उसके हाथ से ब्रा छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई,,, और सूरज अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर एकदम हक्का-बक्का रह गया,,,।

दरवाजे पर ही सूरज के पैर ठिठक गए थे,,, सूरज की तेज आवाज सुनते ही मंगल के हाथों से उसका ब्रा जोंकी वह पहनने ही वाली थी वह छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई थी,,, दोनों की आपस में नजरें टकराई,, कुछ पल के लिए सब कुछ थम सा गया एकदम स्थिर हो गया ऐसा लग रहा था मानो समय रुक गया हो,, दोनों मामी भांजा एक दूसरे को देखें,, लेकिन इस अफरातफरी में क्या करना है दोनों को समझ में नहीं आ रहा था,,, सूरज की जवान प्यासी नजरें उसकी मामी की मदमस्त भरी हुई जवानी के केंद्र बिंदु रुपी दोनों खरबूजे पर टिक गई,,,,, सूरज की तो सांसे अटक गई थी उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह अपने होशो हवास खो बैठा था करता भी क्या बिचारा आंखों के सामने जब इस तरह का बेहतरीन कामुक नजारा हो तो दुनिया का कोई भी मर्द अपने होशो हवास खो दें,,
सूरज की सांसे तेज चलने लगी थी पलभर में ही उसके तन बदन में उत्तेजना की वो लहर दौड़ने लगी की,,, अगर उसकी डोर खींचकर अगर काबू में ना लिया जाए तो बेकाबू हो जाती है,,,
मंगल को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें नीचे जमीन पर गिरा हुआ ब्रा उठाकर अपना तन ढकने तक की सुध उसमें बिल्कुल नहीं थी,,,, वह भी एक तक अपने भांजे को देखे जा रही थी,,, सूरज अपनी मामी की दोनों गोलाइयों को देखकर मदहोश हुआ जा रहा था,,,बेहद करीब से अब थोड़ी देर पहले उसने सुधियां मामी की चुचियों को देखा था उन्हें छू कर स्पर्श करके उन्हें मसल कर हर तरीके से उनका मजा लिया था लेकिन आज अपनी मामी की चुचियों को बड़े ध्यान से और बड़े करीब से देख रहा था,,, पर उसे इस बात का ज्ञान हो रहा था कि सुधियां मामी की चुचियों में और ऊसकी मंगल मामी की चुचियों में जमीन आसमान का फर्क था,,,,भले ही सुधियां मामी के चुचियों का आकार को ज्यादा बड़ा था लेकिन उसमे लचक थी,, लेकिन मंगल मामी की चुचियों का आकार एकदम कड़क था,,,खूबसूरत औरत के पास जिस तरह की चूची होना चाहिए उसी तरह की चूची मंगल के पास थी,,, उनमें बिल्कुल भी लचक नहीं थी दोनों की दोनों एकदम तनी हुई थी,,, और उन दोनों के बीच में चॉकलेटी रंग की निप्पल किसमिस के दाने की तरह लग रही थी जोकि अगर उनसे खेला जाए तो उत्तेजना में आकर अपना रूप छुआरा बना लेती है,,,
सूरज की इच्छा हो रही थी कि वह अपनी मामी की दोनों चूचियों को पकड़ कर उनके आकार को अपनी हथेली में महसूस करें उसकी गर्माहट से अपने तन बदन को गर्म कर ले,, लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसमें अभी नहीं थी वह केवल एक टक देखें ही जा रहा था,,,, तभी मंगल को इस बात का अहसास हुआ कि कुछ गलत हो रहा है,,इसलिए झट से नीचे झुकी और अपना ब्रा उठाकर उसे अपने दोनों चूचियों पर बिना पहने ही डाल दी,,, और अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेरते हुए बोली,,,।

मंगल - क्या हूवा इतनी दोपहर को चिलाने को और कमरे में देख के नही आ सकता क्या,,,,

सूरज - अब मुझे क्या मालूम था कि तुम कपड़े बदल रही हो...


मंगल - इतनी धोपहर के घर पर क्या काम हे
सूरज - आज खेत में ज्यादा काम नही हे इस लिए मामा बोले घर चला जा ओर फिर मेने सोचा घर जा के थोड़ा आराम कर लू और मुझे जोरो की भूख लगी है।

मंगल - अच्छा रुक मैं खाना देती हूं,,,
इतना कहकर वह दीवार की तरफ मुंह करके अपन ब्रा को पहनने लगी अपनी बड़ी बड़ी चूचीयो को अपने बेश कीमती खजाने को अपनी ब्रा में छुपा लीया,
उसके बाद ब्लाउज पहनने लगे सूरज से रहा नहीं जा रहा था वह अपनी नजर को चोरी से अपनी मामी की तरफ घुमाते हुए देखने लगा तो उसकी नंगी चिकनी एकदम गोरी पीठ अपनी मांसलता लिए नजर आने लगी,,,, देख कर मन में हो रहा था कि वह पीछे से जाकर अपनी मामी को अपनी बाहों में भर ले लेकिन वह ऐसा सोच सकता था करने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,, अपने भांजे की आंखों के सामने ही दीवाल की तरफ मुंह करके मंगल अपना ब्लाउज पहन ली और आखरी बटन बंद करते हुए बोली,,,।

मंगल - खाना रसोई घर में ही जा के खाले मुझे काम हे थोड़ा...
सूरज - अब मैं जाऊं,,,,

मंगल - तो तुझे रोका किसने है,,, जल्दी जा,,,(इतना कहकर नीचे गिरी हुई कंघी उठाने के लिए नीचे झुकी तो उसकी नजर सूरज के धोती पर पड़ी जो कि आगे की तरफ से उठा हुआ था,,, और मन में ही उसके मुंह से निकल गया यह क्या है,,,, लेकिन वह अपने मन में आए शब्दों को होठों पर नहीं लाई और दूसरी तरफ मुंह करके अपने बालों को सवारने लगी,,,, और सूरज भी कमरे से बाहर रसोई में चला गया,,,

कमरे से बाहर आने पर उसे इस बात का एहसास होगा कि उसके धोती में तंबू बना हुआ है,,, वह मन में अपने आप से बातें करते हुए बोला कि अच्छा हुआ कि इस पर मामी की नजर नहीं पड़ी वरना क्या सोचती,,,
सूरज कुछ देर पहले के हादसे के बारे में सोचता हुआ खाना खाने लगता हे उसके दिलो-दिमाग पर हलचल मची हुई थी,,, बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मामी के कसे हुए चुचियों के दो जोड़े नजर आने लगते थे,,, सूरज के लिए उसकी मामी की दोनों चूचियां फड़फड़ाते हुए कबूतर थे,,, जीन्हे अब अपने हाथ में लेकर दुलार ने खेलने और दबाने का मन कर रहा था,, सुधिया मामी की चुचियों के साथ वह जी भरकर खेल चुका था और उसकी चूचियों से खेल कर ऊसे जो आनंद प्राप्त हुआ था अब वही आनंद वह अपनी मंगल मामी की चुचियों के साथ लेना चाहता था वह देखना चाहता था कि सुधिया मामी की चुचियों में और उसकी मामी की चूचीयो में से किस की चूची ज्यादा आनंद देती है,,, अब वह आतुर था अपनी मामी के खूबसूरत जवान जिस्म से खेलने को,,,
लेकिन उसके मन में डर भी था,, वह इतनी जल्दी आगे बढ़ने से डर रहा था क्योंकि क्या पता सब कुछ अनजाने में हो रहा हो और उसे यह लग रहा हो कि उसकी मामी यह सबकुछ जानबूझकर कर रही है,,, यही बात सूरज के पल्ले नहीं पड़ रही थी कि यह जो कुछ भी कुछ दिनों से हो रहा है वह अनजाने में हो रहा है या जानबूझकर लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।
वह अपने मन में यही मानकर तसल्ली कर ले रहा था कि मंजिल मिले ना मिले सफर का आनंद उसे पूरा मिल तो रहा है,,।
सूरज खाना खाने के बाद अपने कमरे में आराम करने चला गया।

दूसरी तरफ मंगल को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह खटिया पर बैठी हुई थी धीरे-धीरे अपने बालों में कंघी कर रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्यों हो जाता है,,, सूरज तो खाना मांगने के लिए आया था और उसके हाथ से ही ब्रा छुट कर नीचे गिर गया था,,, मंगल मन में यही सोच रही थी कि उसकी खुद की ही गलती है,,, लेकिन फिर अपने मन में यह सोच रही थी कि सूरज का फर्ज बनता है कि जब उसकी आंखों के सामने इस तरह का दृश्य दिखा था तब उसे अपनी नजरों को फेंक देना चाहिए था लेकिन वह ऐसा ना करके बस टकटकी बांधकर उसे ही देख रहा था,,,लेकिन फिर उसके मन में यही ख्याल आता था कि सूरज जवान हो रहा है और इस उम्र में लड़के अक्सर बहक जाते हैं,,, सूरज के साथ भी यही हुआ होगा,,,अनजाने में ही सही लेकिन उसके सामने एक औरत का जवान जिस्म नंगा नजर आ जा रहा है और वह भी किसी गैर औरत का नहीं बल्कि उसकी खुद की मां समान मामी का,, ऐसे में भला एक बेटा सूरज क्या कर सकता है देखने के सिवा,,,
सब कुछ सोचने के बाद वह इसी नतीजे पर उतरी की इसमें उसके सूरज की गलती बिल्कुल भी नहीं थी,,ना तो उस दिन जब उसने मुझे मुतते हुवे देखा था और ना ही आज दोनों में उसकी ही गलती थी,, ब्रा कैसे नीचे गिर गईं यह उसे भी पता नहीं चला था अपने बेटे के सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी यह अनजाने में हुआ था आज भी उसका बेटा सूरज उसकी मदमस्त चुचियों के दर्शन कर गया था इसमें भी उसे अपनी ही गलती नजर आ रही थी,,, बस उसे एक चीज हैरान कर रही थी और वह थी बार-बार उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके सूरज के धोती के आगे वाला भाग का ऊंचा उठ जाना,,,,, और यह बात सोच कर उसके तन बदन में भी हलचल सी मच जा रही थी,,, इसी तरह की हलचल को कल बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और ना चाहते हुए भी अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली डालकर अपनी गर्मी शांत कर ली थी,,, आज भी उसे वही हरकत दौहराने की इच्छा हो रही थी लेकिन वह बड़ी मुश्किल से अपने मन पर काबू कर गई,,,।
ओर अपने आप को कामों में व्यस्त करने लगी।
zabardast update..!!
 
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