भाग १३
सुधियां की नींद सुबह ५ बजे खुल जाति हे।वह देखती है
की सूरज किसी मासूम बच्चे की तरह गहरी नींद में सो रहा था।
रात भर चुदाई के कारण सुधियां की बूर में हल्का दर्द हो रहा था।सुधियां वहा से उठ कर सारे वस्त्र पहन कर खेत का मुआयना करने चली जाती है।
सुधियां खेत पहुंच कर देखती है की सारे खेत की सिंचाई अच्छे से हो गई थी।
सुधियां ने सोचा की अब पानी बंद करके घर चलाना चाहिए इसी लिए सुधियां सूरज को जगाने वापस उसी जगह पेड़ के पास आती हे और देखती ही की सूरज अभी भी एकदम गहरी नींद में था उसका लंड पूरी तरह से टनटना कर खड़ा था जिसे उसने नींद में भी अपने हाथों से पकड़ा हुआ था,,,
खड़े लंड को देख कर एक बार फिर से सुधियां की दर्द कर रही बुर में सुरसुराहट होने लगी,,, उसकी बूर का दर्द मानो अब गायब हो कर बूर हिलोरे मारने लगी,,,,, रात भर सूरज के लंड को अपनी बुर में लेकर उसकी प्यास बुझने की बजाए और ज्यादा बढ़ गई थी,,,।
सुधियां अपने भांजे खड़े-खड़े टनटनाए हुए लंड को देख कर चुदवासी हुए जा रही थी। रात भर सूरज से जबरदस्ती चुदाई का वह एहसास अभी भी उसके मन में ताजा था वह जानती थी कि उसके सूरज का मोटा लंड उसकी बुर में एकदम रगड़ता हुआ अंदर बाहर होता था। जिसकी रगड़ की गर्मी में उसकी बुर की अंदरूनी दीवारे पसीज पसीज कर पानी छोड़ रही थी। सूरज के लंड को देखकर उसका जोर-जोर से कमर हिलाना याद आ गया जो कि बिना रुके अपनी गति को बिना परिवर्तित कीए एक ही लय में उसकी बुर में अंदर बाहर डालते हुए उसे चोद रहा था। सूरज की जबरजस्त कमर हिलाई से ही वह समझ चुकी थी कि उसके सूरज में बहुत दम है।
क्योंकि इस तरह के जबरदस्त प्रहार के साथ आज तक उसके पति ने कभी भी उसकी चुदाई नही किया था,,, सुधियां के पति का लंड को बुर की पूरी तरह से गहराई भी कभी नहीं नाप पाया था और सूरज हर धक्के के साथ सुधियां की बुर की गहराई में उतर जाता था। उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि सूरज इतनी जबरदस्त धक्कों के साथ उसकी चुदाई करेगा और इतनी देर तक टिका भी रहेगा वरना उसका का पति तो पत्ते की महल की तरह दो चार धक्को मेही ढेर हो जाता था।
सुधियां की सांसो की गति गति अब तीव्र गति से चल रही थी बड़ा ही मोहक और मादक नजारा सामने बना हुआ था सूरज जमीन पर पीठ के बल एकदम चित लेटा हुआ था,,, उसका लंड नींद में होने के बावजूद भी पूरी तरह से आसमान की तरफ मुंह उठाए खड़ा था। सुधियां के बदन में फिर से हलचल सी मची हुई थी उसकी बुर उत्तेजना के मारे पानी पानी हुए जा रही थी कच्छी पूरी तरह से गीली होने लगी थी। सुधियां की बुर में चीटियां रेंगने लगी थी सुधियां की सांसे बड़ी ही तीव्र गति से चल रही थी।
एक बार फिर से उसके मन में चुदवाने की कसक जगने लगी थी। वैसे भी वह कर भी क्या सकती थी चुदाई का सुख होता है इतना बेहतरीन और आनंद दायक कि इंसान उस सुख को पाने के लिए हमेशा लालायित रहता है। रात भर सुधियां सूरज के लंड को अपनी बुर में ले चुकी थी इसलिए सारी सरमाया कभ की दूर हो चुकी थी
सूरज का लंड पूरी तरह से ऐसा खड़ा था कि मानो किसी की चुदाई करने जा रहा हो,,, तभी सुधियां को ख्याल आया कि कुछ ही घंटे पहले सूरज ने उसकी जमकर चुदाई किया था हो सकता है अभी भी उसके सपने में वह उसे ही चोद रहा हो तभी तो उसका लंड इस तरह से टनटना कर खड़ा है।
खेत का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था एक तरफ उसका भांजा पूरी गहरी नींद में लेटा हुआ था जिसका लंड तनकर एकदम आसमान की तरफ मुंह उठाए खड़ा था। और दूसरी तरफ सुधियां पेड़ के करीब खड़ी होकर उसके लंबे लंड को ही देखे जा रही थी और एक बार फिर से उसकी बुर कुबुलाने लगी थी सूरज के लंड को फिर से पूरी तरह से अपने अंदर उतारने के लिए।
सुधियां की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी इसलिए उसने अपने साड़ी पूरी तरह से कमर तक उठा कर कच्छी के ऊपर से ही अपनी बुर को रगड़ना शुरु कर दी थी जो की पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।
सुधियां के साड़ी का पल्लू उसके कंधे से नीचे गिर चुका था जिससे उसकी भारी भरकम छातियां सूरज के फिर से होश उड़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी सूरज अभी नींद में था सुधियां को यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसे जगाना ठीक रहेगा या नहीं। क्योंकि उसे इस तरह से गहरी नींद में जगाने से कहीं उसका जोस ठंडा ना हो जाए यही सोचकर उस ने उसे नींद से नहीं जगाई। लेकिन अपनी उत्तेजना अपनी प्यास कैसे बुझाएं यह भी उसे समझ में नहीं आ रहा था। धीरे-धीरे उत्तेजना के मारे उसने अपनी पैंटी को जांघो तक सरका दी थी। उसकी रसीली बुर फुल कर गरम रोटी की तरह हो गई थी जो कि उसमें से पानी के समान रस टपक रहा था। यह पानी मर्दों के लिए किसी अमृत से कम नहीं था जिसे वह किसी बर्तन से नहीं बल्कि खुद ही अपनी जीभ लगा कर उसके स्वाद का रसपान करने के लिए तड़पते रहते हैं।
सुधियां धीरे धीरे करके अपनी कच्ची को पूरी तरह से अपनी लंबी चिकनी टांगो से बाहर कर दीया,,,, और साड़ी को भी उतार फेंका,,,, साड़ी को उतार ने के बाद वह अपनी पेटीकोट की डोरी को खोलकर पेटीकोट को भी नीचे मिट्टी पर फेंक दीया। उसे अपने बदन की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए जल्दी-जल्दी अपने ब्लाउज के बटन को खोलकर ब्रा सहित उसे भी उतार फेंका,,,
सुधियां फिर से एकदम बिल्कुल नंगी हो चुकी थी।सुधियां का यह रूप आज तक किसी ने नहीं देखा था खुद सूरज भी उसका नया और कामी रुप देख कर हैरान हो चुका था।
लेकिन अभी भी सूरज सो रहा था इसलिए जो भी करना था वह सुधियां को ही करना था सुधियां एक बार अपनी बूर को अपनी हथेली से रगड़ लिया और अगले ही पल अपने सूरज के ऊपर चढ़ गई,,,,
और एक घुटने को आगे बढ़ाकर उसकी कमर के बगल में रखी और दूसरे घुटने को आगे की तरफ करके सूरज के कमर के इर्द गिर्द अपनी पोजीशन को ठीक तरह से बना ली,,,,,, वह एक नजर अपने सूरज पर डाली तो बड़ी मासूमियत के साथ वह गहरी नींद का आनंद ले रहा था जिसे देखकर उसके होठों पर मुस्कान खिल गई,,,,
सुधीय धीरे से एक हाथ नीचे ले जाकर अपने सूरज के खड़े लंड को पकड़ लीया,,, लंड की गर्माहट उसके बदन को पूरी तरह से झन झनाकर रख दी,,,, उत्तेजना के मारे सुधियां का गला सूख रहा था,,,,,,
सुधियां सूरज का लंड थामें नजरें झुका कर अपनी बुर की गुलाबी छेंद की तरफ देख रही थी और लंड के सुपाड़े से टटोल कर अपनी गुलाबी बुर का सुराग ढूंढ रही थी। और जैसे ही सुपाड़े का स्पर्श बुर के गुलाबी छेद पर हुआ वैसे ही तुरंत सुधियां के बदन में जैसे करंट दौड़ गया हो,,,, उसका बदन पूरी तरह से एक अजीब से ऊन्माद में सिहर उठा। सुधियां को सूरज के लंड का ठिकाना मिल चुका था,,, वह एक पल की भी देरी किए बिना तुरंत अपना पूरा दबाव,,, सूरज के लंड पर बढ़ाने लगी। बुर पूरी तरह से गिली थी और रात भर सूरज सुधियां की बुर में लंड डालकर पूरी तरह से चोद चुका था,,, जिससे सुधियां की बुर का आकार सूरज के लंड के जितना बन चुका था इसलिए बड़े ही आराम से जैसे जैसे सुधियां अपनी भारी भरकम गांड का दबाव लंड पर बढ़ा रहीे थीे वैसे वैसे धीरे धीरे सूरज लंड ऊसकी मामी की बुर मे धंसता चला जा रहा था। धीरे धीरे करके सुधियां ने सूरज का लंड पूरी तरह से अपनी बुर के अंदर उतार ली और उसकी जांघों पर बैठ गई,,,,, सुधियां के बदन में पूरी तरह से उत्तेजना बढ़ चुकी थी।
ऊसकी सांसे बड़ी तीव्र गति से चल रही थी और सांसो के साथ साथ उसकी बड़ी बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी। बड़ा ही उत्तेजक नजारा था सुधियां ने सूरज का लंड पूरा अपने बुर में उतार चुकी थी लेकिन सूरज के बदन में जरा भी हरकत नहीं हो रही थी वह पूरी तरह से गहरी नींद में था।
सुधियां से अब बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था वह धीरे-धीरे सूरज के लंड पर उठने बैठने लगी,,,, सुधियां के बदन में उत्तेजना की लहर अपना असर दिखा रही थी सुधियां को बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी। धीरे-धीरे सुधियां अपनी गति को बढ़ाना शुरू कर दी उसे बहुत ही ज्यादा मजा आया था वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह से अद्भुत आनंद की अनुभूति होती है।
सुधियां की गति अब बढ़ने लगी थी।
वह अब जोर-जोर से सूरज की लंड पर कुदने लगी थी।
ऊसकी बड़ी बड़ी चुचीयां हवा मे झुल रही थी। सूरज की नींद अब भंग हो चुकी थी वह अपनी मामी की हरक़त देखकर पूरी तरह से उत्तेजना मे सरोबोर हो चुका था। वह कुछ भी बोल नहीं पाया बस उत्तेजना के मारे उसका मुंह खुला का खुला रह गया था।
सूरज को नींद से जगता देखा सुधियां ने सूरज की दोनों हाथ को पकड़कर उस की हथेलियों को अपनी दोनो चुचियों पर रख दि और सूरज भी मौके की नजाकत को समझते वह जोर जोर से दबाने लगा जैसे कि पके हुए आम को दबा रहा हो,,,
सूरज अब सुधियां को पूरी ताकत से हुमच हुमच कर जोर जोर चोदने लगा, घास उनकी चुदाई से हिलाने लगी, दोनों मामी भांजे की सिसकियों के वातावरण में गूंजने लगी, साथ में चुदाई की फच्च फच्च आवाज भी आने लगी थी, माहौल बहुत गर्म हो चुका था, किसी को अब होश नही था, सुधियां का पूरा बदन उसके भांजे के जोरदार धक्कों से हिल रहा था, सूरज अपनी मामी के बूर में नीचे से घचा घच्च लंबे लंबे धक्के लगाते हुए चोदे जा रहा था। बूर बिल्कुल खुल गयी थी अब, लंड एक बार पूरा बाहर आता और दहाड़ता हुआ बूर की गहराई में उतर जाता, हर बार तेज तेज धक्कों के साथ नीचे से अपनी गांड को उछाल उछाल के चुदाई में ताल से ताल मिलाते हुए सुधियां सीत्कार उठती थी।
सुधियां जोर जोर से अपनी भारी-भरकम गांड को सूरज के लंड पर पटक रही थी,, मानो ऐसा लग रहा था कि वह जोर-जोर से फर्श पर पटक पटक कर कपड़े धो रही हो,,,, सुधियां में मानो उत्तेजना के कारण फुर्ती सी आ गई हो वह अपनी मदमस्त गांड को एक ही लेय मे सूरज के लंड पर पटक रही थी जिससे सूरज का पूरा का पूरा लंड उसकी गहराई में समा जा रहा था,,,,।
ओहहहहहहहह.,,,,, सूरज राजा ऐसे ही ससससकहहहहहह,,,, और जोर जोर से,,,,, आहहहहहहह,,,, सूरज,,,,, नीचे से जोर जोर से अपनी कमर उछाल,,,,मेरे राजा आहहहहहहहहह,,, मेरी बुर में पैल दे अपने लंड को,,,,,,ऊमममममममम,,, ऐसे ही मार ऐसे ही चोद मुझे,,,,,,,,( सुधियां पागलों की तरह सिसकारी लेते हुए अपने भांजे को उकसा रही थी और सूरज अपनी मामी की गर्म सिसकारी और उसकी बातें सुनकर इतना मदहोश हो गया कि वह अपने दोनों हाथों को अपनी मामी की चूची पर से हटा कर वैसे ही मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से अपनी मामी की बड़ी बड़ी गांड को थामकर उसे पकड़े हुए नीचे से अपने लैंड को पे लेना शुरू कर दिया और साथ ही सुधिया भी ऊपर से जोर दे रही थी,,,
आह...........सूरज...........हाय ऐसे ही चोदो मुझे............ऐसे ही चोदो अपनी मामी को....
...........अपनी मामी को...............ऊऊऊऊउफ़्फ़फ़फ़................. ऊऊऊऊईईईईईई..............अम्मा.............फाड़ डालो बूर मेरी बाबू..............अच्छे से फाड़ो अपने लंड से मेरी बूर को सूरज...................आआआआआहहहहहहहह..........ये सिर्फ आपके मोटे लंड से ही फटेगी सूरज..........सिर्फ तुम्हारे लंड से............हाय......... चोदो मेरे राजाऔर तेज तेज चोदो अपनी मामी को..........हाय दैय्या........कितना मजा आ रहा है।
सूरज भी मस्ती में करीब 20-25 मिनट तक लगातार सुधियां की बूर में हचक हचक के लन्ड पेल पेल के चोदता रहा, सुधियां और सूरज के तन बदन में एक जोरदार सनसनाहट होने लगी, सुधियां की बूर की गहराई में मानो चींटियां सी रेंगने लगी, लगातार अपने सूरज के जोरदार धक्कों से उसकी बूर में सनसनी सी होने लगी और एकाएक उसका बदन ऐंठता चला गया, गनगना कर वो चीखती हुई अपने नितम्ब को उठा कर अपने सूरज से लिपटकर झड़ने लगी,
आआआआआहहहहह...........बेटा मैं गयी...........तुम्हारी मामी झड़ रही है मेरे भांजे.............ओओओओहहहह ह........हाय....... मैं गयी राजा........और तेज तेज चोदो सूरज.........कस कस के पेलो मेरी बूर........ऊऊऊऊईईईईई.......सूरज........हाय मेरी बूर...…..….कितना अच्छा है भांजे का लंड.........आआआआआहहहहह
सूरज का लंड तड़बतोड़ सुधियां की बूर नीचे से चोदे जा रहा था, सुधियां सीत्कारते हुए जोर जोर हाय हाय करते हुए सूरज से लिपटी झड़ने लगी, सूरज को अपनी मामी की बूर के अंदर हो रही हलचल साफ महसूस होने लगी, कैसे सुधियां की बूर की अंदरूनी दीवारें बार बार सिकुड़ और फैल रही थी, काफी देर तक सुधियां बदहवास सी सीत्कारते हुए सूरज से लिपटी झड़ती रही।
सूरज तेज तेज धक्के लगते हुए सुधियां की बूर चोदे जा रहा था, वह बड़े प्यार से चोदते हुए अपनी मामी को दुलारने लगा, इतना मजा आजतक जीवन में सुधियां को कभी नही आया था, चरमसुख के असीम आनंद में वो खो गई, अब भी सूरज का लंड तेज तेज उसकी बूर को चोदे जा रहा था, कभी कभी वो बीच बीच में तेजी से सिस्कार उठती, बूर झड़ने के बाद बहुत ही चिकनी हो गयी थी, सूरज का लंड अपनी मामी के रस से पूरा सन गया था, सुधियां का बदन अब ढीला पड़ गया वो बस आंखें बंद किये हल्का हल्का सिसकते हुए चरमसुख के आनंद में डूबी हुई थी कि तभी सूरज भी जोर से सिसकारते हुए एक तेज जबरदस्त धक्का अपनी मामी की बूर में मारते हुए झड़ने लगा, धक्का इतना तेज था कि सुधियां जोर से चिहुँक पड़ी आह........ सूरज........ हाय
एक तेज मोटे गाढ़े वीर्य की पिचकारी सूरज के लंड से निकलकर सुधियां की बूर की गहराई में जाकर लगी तो सुधियां उस गरम गरम लावे को अपनी बूर की गहराई में महसूस कर गनगना गयी और तेजी से मचलकर सिसकारने लगी बड़े प्यार से उसने अपने भांजे को अपनी बाहों में कस लिया और उनके बालों को सहलाने लगी, प्यार से दुलारने लगी, सूरज का मोटा लंड तेज तेज झटके खाता हुआ वीर्य की मोटी मोटी धार छोड़ते हुए अपनी मामी की बूर को भरने लगा, अपनी मामी के गर्भ में उसका गाढ़ा गरम वीर्य भरने लगा, गरम गरम सूरज का वीर्य सुधियां की बूर से निकलकर गांड की दरार में बहने लगा और मिट्टी तक को भिगोने लगा, सूरज काफी देर तक हाँफते हुए अपनी मामी की बूर में झाड़ता रहा, अपनी मामी की बूर चोद कर निहाल हो चुका था, सूरज और सुधियां ने असीम चरमसुख का आनंद लेते हुए एक दूसरे को कस के बाहों में भर लिया और बड़े प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे, और अपनी सांसों को काबू करते हुए एक दूसरे को बाहों में लिए लेटे रहे।