बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयातृप्ति के आने से पहले सुगंधा अपने बेटे के साथ नैनीताल घूमने जाना चाहती थी वैसे तो वहां घूमने जाने का उसका बहुत पहले से मन था। लेकिन वह कभी जा नहीं पाई थी अब तो उसके पास उसके बेटे के रूप में उसका साथी भी था जिसके साथ वहां पर जाकर वह मजे लूट सकती थी और वहां घूम कर आनंद भी ले सकती थी इस बारे में सुनकर अंकित भी बहुत खुश हुआ था वह भी अपनी बहन के आने से पहले खुलकर अपनी मां के साथ मजा ले लेना चाहता था इसलिए वह भी तैयार हो गया था और अपनी मां को जरूरी कपड़े लेने के लिए भी बोल दिया था।
लेकिन वहां जाने से पहले अंकित को एक जरूरी काम पूरा करना था और वह भी राहुल के साथ मिलकर,,, वह ईस काम को अधूरा नहीं छोड़ना चाहता था,,, सोमवार का दिन था और सुबह जल्दी वह तैयार हो गया था। घर से उसे 10:00 निकलना था,,, जिस तरह से अंकित को सोमवार का बड़ी बेसब्री से इंतजार था उसी तरह से राहुल को भी इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार था। घड़ी में 10 बजाते ही वह घर से निकल गया था वह अच्छी तरह से जानता था कि इस समय राहुल के घर पर उसके पापा नहीं होंगे इस बारे में उसने राहुल की मां को कुछ भी नहीं बताया था। अपने घर पर भी बहुत जरूरी काम का बात कर वहां घर से निकल चुका था राहुल के घर जाने के लिए,,, दूसरी तरफ राहुल भी अपने घर से काम का बहाना बनाकर निकल चुका था क्योंकि वह जानता था कि जिस उद्देश्य को पुरा करना था उसके लिए उसे इस समय घर पर होना जरूरी नहीं था वह अपनी मां को अंकित के साथ एकांत देना चाहता था ताकि दोनों अपनी काम लीला में मशगूल हो सके। सब कुछ पहले से ही तय था जैसा अंकित ने बताया था ठीक वैसा ही राहुल कर रहा था इस समय राहुल अंकित के हाथों की कठपुतली बन चुका था उसके पास उसकी बात मानने के सिवा और कोई चारा नहीं था। अपने घर से निकल कर वहां कुछ दूरी पर उसी जगह पर जाकर खड़ा हो गया जहां पर उसे दिन वह अंकित का अपने घर से निकलने का इंतजार कर रहा था।
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थोड़ी ही देर में ऑटो पकड़कर अंकित उसके घर पहुंच चुका था राहुल सब कुछ वहीं खड़े खड़े देख रहा था वैसे तो उसका मन नहीं मान रहा था वह अभी इसी समय घर पर पहुंच जाना चाहता था लेकिन वह जानता था कि इस समय उसका घर पर जाना उचित नहीं था अगर खेल का असली मजा लेना है तो कुछ देर बाद ही उसका वहां जाना उचित था इसलिए वह धीरे के साथ वही खड़ा होकर इंतजार करने लगा देखते ही देखते अंकित दरवाजे पर पहुंच कर डोर बेल बजाने लगा,,, चूड़ियों के खनकने की आवाज सुनकर अंकित को एहसास हो गया कि राहुल की मां दरवाजा खोलने के लिए आ रही थी,,, और उसने जल्दी से दरवाजा भी खोल दी उसे लगा कि उसका बेटा वापस आ गया है लेकिन दरवाजे पर अंकित को देखकर एकदम से खुश हो गई अंकित भी राहुल की मां को देखकर एकदम खुश होते हुए बोला।
गुड मॉर्निंग आंटी,,,,।
कितनी बार बोली कि जब अकेले हो तो मुझे नूपुर कहा कर,,।
ओके गुड मॉर्निंग मेरी जान नूपुर,,,,।
(इतना सुनकर नूपुर मुस्कुराने लगी,,,, पीले रंग की साड़ी में उसका गोरा बदन और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था और उसने लो कट ब्लाउज पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसकी आधे से ज्यादा चूचियां बाहर दिखाई दे रही थी अंकित की नजर उसकी चूचियों पर ही टिकी हुई थी जिसे देखकर नुपुर बोली,,,)
दूध पीने का इरादा है क्या,,,?
तुम्हारे पास आऊंगा तुम्हारा दूध ना पियूं ऐसा भला कैसे हो सकता है,,, मेरी रानी तुम्हारा दूध पीने के लिए ही तो इतनी दूर से तुम्हारे घर आया हूं,,,।
क्यों आज मम्मी ने चाय नहीं बनाई क्या,,,?
चाय तो बनाई थी लेकिन आज मेरा दूध पीने का मन कर रहा था,,,।
तो अपनी मां का ही पी लिया होता तेरी मां का दूध तो मेरे से भी ज्यादा खूबसूरत और स्वादिष्ट है।
अब यह तो पता नहीं लेकिन मुझे तो तुम्हारा दूध पीने की आदत पड़ गई है,,,।
तो आज़ा मेरे राजा देर किस बात की है,,,।(नूपुर मुस्कुराते हुए बोली,,)
क्यों आज घर पर कोई नहीं है क्या,,,?
तभी तो कह रही हूं,,,,,,, राहुल के पापा ऑफिस गए हैं शाम को 6:00 7:00 बजे ही वापस आएंगे
और राहुल,,,,,!(सब कुछ जानते हुए भी जानबूझकर अंकित बोला)
वह भी अभी-अभी किसी काम से बाहर किया है वह भी दो-चार घंटे से पहले आने वाला नहीं है उसकी आदत ऐसी ही है।
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ओहहह तब तो उसकी आदत अच्छी है,,,, लेकिन साला समझ नहीं आता इतनी खूबसूरत घर में औरत है और वह छोड़कर बाहर घूम रहा है।
जैसे तु सुगंधा जैसी खूबसूरत औरत को घर में छोड़कर मेरे पास आया है।
(इतना सुनकर अंकित हंसने लगा और हंसते हुए वह घर में आ गया घर में प्रवेश करते ही वह राहुल की मां को अपनी बाहों में लेकर उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने वाला और जानबूझकर अपने पैर से दरवाजा बंद कर दिया लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगाया,,, नूपुर को लगा कि अंकित ने दरवाजा बंद कर दिया है वह एकदम से अंकित की बाहों में पिघलने लगी अंकित उसके होठों का रसपान करते हुए,, उसके गोलाकार बड़े-बड़े नितंबों को दोनों हाथ से लेकर दबाना शुरू कर दिया पहले स्पर्श से ही नूपुर के बदन में थरथराहट होने लगी वह मदहोश होने लगी अंकित की बाहों में न जाने कैसी कशिश की वह अंकित की बाहों में आते ही पिघलने लगती थी उसके जवानी का रस धीरे-धीरे उसकी बुर से पिघल रहा था जिसकी वजह से उसकी पैंटी गीली होने लगी थी। अंकित भी पूरे जोश के साथ उसे अपनी बाहों में कसके उसके अंगों से खेल रहा था उसके होठों का रस पी रहा था। अभी कुछ देर पहले ही वह नही हुई थी इसलिए उसके बालों से भीनी-भिनी खुशबू आ रही थी जिससे मदहोशी और ज्यादा बढ़ जा रही थी।
उसकी खूबसूरत बदन से खेलते हुए अंकित उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे एकदम से उठा लिया और डाइनिंग टेबल पर बिठा दिया उसकी ताकत देख कर एक बार फिर से नूपुर एकदम से अचंभित हो गई थी,,, इस तरह से आज तक उसके बेटे ने कभी उसे उठाकर डाइनिंग टेबल पर बिठाया नहीं था शायद इतना उसमें दम ही नहीं था इस बात का एहसास नूपुर को हो रहा था अंकित पूरी तरह से राहुल की मां की जवानी पर छा चुका था वह उसके होठों का रसपान करते हुए उसके ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था और नूपुर पेंट के ऊपर से ही उसके कड़े लंड को सहला रही थी। अंकित राहुल की मां के ब्लाउज का बटन एक-एक करके खोल रहा था और उसे उसके ब्लाउज का बटन खोलने में बहुत मजा आ रहा था क्योंकि उसकी चूचियां एकदम तनी हुई थी और उसने अपनी चूचियों के आकार से कम ही नाप का ब्लाउज पहनी हुई थी जिससे वह और भी ज्यादा बड़ी लग रही थी,,,, ब्लाउज का आखिरी बटन बंद करते हुए वह मदहोश होता हुआ बोला।)
तुम्हारी चूची बहुत बड़ी है,,,,,।
तेरे लिए ही है।
अंकल को नहीं पिलाती क्या,,,?
अंकल अब पीने लायक नहीं रह गए इसलिए तो तुझे पीला रही हूं,,,।
यह तो और भी अच्छा है माल किसी का मजा कोई और ले रहा है,,,,।
धत् बदमाश,,,, मैं तो तेरी माल हूं,,,,,,।
ओहहहहह मेरी जान,,,(ब्लाउज का आखिरी बटन खोलने के साथ ही ब्लाउज को उसकी बाहों से अलग करते हुए अंकित उसके गर्दन पर चुंबनों की बौछार कर दिया और अगले ही पल उसका ब्लाउज डाइनिंग टेबल के नीचे पड़ा हुआ था लाल रंग की ब्रा उसकी गोल गोल गोरी चुचियों को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रही थी,,,, अंकित पूरी तरह से मदहोश हो चुका था दोनों हाथों से उसकी गोलाइयों को पकड़कर हल्के हल्के उसे दबाने के साथ ही एक बार फिर से उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया अंकित का मां नूपुर के किसी भी अंक से पूरी तरह से बाहर ही नहीं रहा था वह मदहोश हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एक ही समय में वह क्या-क्या कर डाले राहुल की मां के साथ उसकी आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था,,,, और अगले ही पल वह ब्रा को नीचे से पड़कर एकदम से उसे ऊपर की तरफ खींचकर चूचियों से ऊपर कर दिया और उसकी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम से तन गई उसकी ईस हरकत से नूपुर को थोड़ा दर्द का एहसास हुआ लेकिन जैसे ही अंकित ने उसकी चूची पर अपना मुंह रखकर पीना शुरू किया वह एकदम से मस्त हो गई। अंकित दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाता हुआ दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था और नूपुर मदहोशी भारी निगाहों से अंकित को देखकर गहरी गहरी सांस ले रही थी उसे अपनी उत्तेजना संभाली नहीं जा रही थी,,,, अंकित अपनी हरकतों से उसे मदहोश कर दिया था वह तड़प रही थी मचल रहे थे और अंकित था कि उसकी दोनों चूचियों को गेंद की तरह दबा दबा कर उसका रस चूस रहा था,,,,,,।
अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए राहुल की मां अपना हाथ पेंट के ऊपर से ही उसके लंड पर रखकर उसे जोर-जोर से दबा रही थी,,, जिससे अंकित का भी जोश बढ़ता चला जा रहा था और वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर उसके ब्रा का होकर एकदम से खोल दिया और उसकी ब्रा को भी निकाल कर डाइनिंग टेबल के नीचे फेंक दिया उसका ब्लाउज और ब्रा फर्श पर पड़े हुए थे उसकी साड़ी का पल्लू डाइनिंग टेबल से नीचे लहरा रहा था और अंकित एकदम से उसे अपनी बाहों में भरकर उसकी गर्दन पर चुंबन करते हुए उसकी नंगी चूचियों को अपनी छाती पर महसूस करके मस्त हो रहा था। औरत को खुश करने की कला अंकित अच्छी तरह से जानता था और इसका एहसास राहुल की मां को भी हो गया था इसलिए तो राहुल की मां उसकी हाथों की कठपुतली बनी हुई थी क्योंकि वह जानती थी कि अंकित जो कुछ भी करेगा उसमें उसका ही भला है। अंकित जोश में अपनी भुजाओं का बल दिखाते हुए उसे करके अपनी छाती से चांप ले रहा था जिससे उसकी हड्डियां भी कडकड़ा जा रही थी। उसकी हरकत और उसका दम देखकर बार-बार राहुल की मां के मुंह से करने की आवाज निकल जा रही थी और वह बोल भी रही थी।
बाप रे एकदम सांड जैसा दम है तेरे में,,,,,, मेरी हड्डियां मत तोड़ देना,,,,।
तुम्हारी हड्डियां नहीं टूटेगी बल्कि तुम्हारी बुर जरूर चौड़ी हो जाएगी आज आज मैं तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,।
तो बनते मेरे राजा तुझे रोका किसने है मैं तो चाहती हूं कि तू मेरी बुर को अपने लंड से फाड़ डालें भोसड़ा बना दे मेरी बुर का इसकी अकड़ को ढीली कर दे,,,,सहहहहहह ।
ऐसा ही होगा मेरी रानी आज सरसों का तेल से मालिश करके आया हूं अपने लंड की आज तेरी बुर में जाकर तेरी नशे ढीली कर देगा,,,,(ऐसा कहते हुए वह अपना शर्ट निकालकर जमीन पर फेंक दिया और अपने पेंट का बटन खोलने लगा,,, नूपुर प्यासी नजरों से अंकित की हरकत को देख रही थी बहुत जल्द से जल्द अंकित के लंड का दर्शन कर लेना चाहती थी,,,, देखते ही देखते अंकित भी जल्दबाजी दिखाता हुआ अपना पेट भी उतार कर फर्श पर फेंक दिया और पूरी तरह से राहुल की मां की आंखों के सामने नंगा हो गया,,,, उसका कसरती बदन जितना आकर्षक था उसे भी कहीं ज्यादा कर सकता उसका मोटा तगड़ा लंबा लैंड जो उसकी टांगों के बीच झूल रहा था,,,, जिसे देखकर नूपुर की बुर पानी पानी हो रही थी। नूपुर से ज्यादा उसकी बुर ललाईत थी अंकित के लंड को अपने अंदर लेनेके लिए,,,, अंकित राहुल की मां के मन की मनसा को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था और इसे देखकर नूपुर की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी अंकित डाइनिंग टेबल के करीब अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी कमर को आगे की तरफ कर दिया था जो की राहुल की मां के लिए एक ही सहारा था और इसी सारे को राहुल की मां अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए डाइनिंग टेबल पर बैठे-बैठे ही वह पूरी तरह से झुक गई और अपने लाल-लाल होठों को खोलकर अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,।
बड़ा ही गजब का नजारा था एकदम मदहोशी भरा, वासना से लिप्त,,,,, ऐसा लग रहा है ताकि जैसे कोई गंदी फिल्म चल रही हो लेकिन इस समय यह नजारा देखने वाला तीसरा कोई नहीं था कुछ देर बाद राहुल इस खेल में शामिल होने वाला था लेकिन अभी भी कुछ समय बाकी था। बाहर खड़ा-खड़ा राहुल अपने मन में बहुत सारी बातें सोच रहा था वह भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था अपने पेट में बने तंबू को छुपाने के लिए वह एक जगह बड़े पत्थर पर बैठ गया था क्योंकि वह अपने मन में ही अपनी मां को लेकर अंकित के साथ कल्पना कर रहा था कि वह इस समय उसकी मां के साथ क्या कर रहा होगा और उसकी मां कितनी बेशर्मी से एक रंडी की तरह उसके साथ मजा ले रही होगी,,, यह सब सो कर उसे रहा नहीं जा रहा था वह भी जल्द से जल्द उन दोनों के बीच शामिल हो जाना चाहता था लेकिन वह जानता था कि जो समय निश्चित किया गया था उसी समय पर उसे जाना था। इसलिए वह भी अपने लंड को पकड़ कर अपने मन को दिलासा दे रहा था,,,,।
कमरे के अंदर डाइनिंग टेबल पर तो घमासान बचा हुआ था अंकित अपनी कमर को जोर-जोर से हिला रहा था इस समय वह राहुल की मां के मुंह को ही छोड़ रहा था उसके लाल-लाल होठों का कसाव अपने लैंड पर महसूस करके वह ऐसा ही सोच रहा था कि जैसे उसका लंड उसकी गुलाबी बुर में जा रहा हो,,,, राहुल की मां भी पूरी तरह से मत हो चुकी थी वह भी एक रंडी की तरह उसके दोनों नितंबों को पकड़कर उसके लंड की चुसाई कर रही थी,,,, अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिससे उसका मुंह भरा हुआ था लेकिन फिर भी वह पूरा का पूरा उसे अपने गले में निगल लेना चाहती थी,,,, अंकित इतना ज्यादा बावला हो चुका था कि वह रुकने का नाम नहीं ले रहा था और नूपुर भी उसका बराबर का साथ दे रही थी इस वजह से अंकित एकदम झड़ने के कगार पर आ चुका था वह अपने लंड को नूपुर के मुंह में से बाहर निकाल लेना चाहता था क्योंकि किसी भी वक्त उसके लंड से पिचकारी निकलने वाली थी और वह राहुल की मां से बोला,,,,।
ओ मेरी जान मेरा निकलने वाला है,,,,, मुझे निकाल लेने दो अपने लंड को,,,,(ऐसा कहकर अंकित अपनी कमर को पीछे लेने की कोशिश किया लेकिन राहुल की मां उसके नितंबों पर अपने हथेलियों का कसाव बढ़ाकर उसे रोके रह गई,,, अंकित समझ गया कि राहुल की मां क्या चाहती है और इसलिए अपनी थकान को और ज्यादा तेज कर दिया और अगले ही पल उसके लंड से पिचकारी निकलना शुरू हो गया जो की नूपुर के गले में सीधा बौछार मार रहा था और वह उसे अपने गले के नीचे उतार रही थी चूस रही थी पी रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा उसने आज तक अपने बेटे के साथ नहीं की थी लेकिन अंकित के साथ वह ऐसा करने पर मजबूर हो चुकी थी और वह तब तक अंकित के लंड को अपने मुंह में से नहीं निकाली जब तक कि वह उसके लंड की मलाई को पूरा चूस नहीं ले गई,,,, अंकित के साथ भी ऐसा पहली बार हो रहा था उसके जीवन में ऐसा मौका बहुत बार आया था लेकिन कभी भी उसे नहीं मुंह के अंदर अपनी पिचकारी नहीं निकाला था लेकिन आज वह भी नूपुर की हरकतों के आगे मजबूर हो चुका था और एक नए सुख और एक नए अनुभव के साथ वह झड़ने लगा था,,,,, झड़ जाने के बाद भी अंकित का लंड अभी भी खड़ा ही था जिसे वह बाहर निकाल कर धीरे-धीरे दिला रहा था और उसे पर लगे थुक और लार को फर्श पर गिरा रहा था,,,, मदहोशी में गहरी सांस लेता हुआ वह बोला।)
बाप रे तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी बहुत मजा आया,,,उफफफ,,,,,
(नूपुर की साड़ी के पल्लू से अपना मुंह साफ करते हुए वासना भरी नजरों से अंकित की तरफ देख रही थी और बोली)
बहुत गरम-गरम था रे,,,,,, बहुत गाढी मलाई है तेरी,,,,।
तो क्या पहली बार में ही तुम मां बन जाओगी,,,,।
चल रहने दे मुझे नहीं बनना मां,,,,(इतना कहने के साथ ही वह डाइनिंग टेबल से नीचे उतर गई,,, और साड़ी के पल्लू को हाथ में लिए हुए ही वह बाथरूम की तरफ जाने लगी तो अंकित बोला,,,)
कहां जा रही हो,,,?
पेशाब करने जा रही हूं कर लो नहीं तो तू अपना लंड डालेगा तो अपने आप पेशाब छुट जाएगी,,,,,,(इतना सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और वह बोला)
चलो मैं भी चलता हूं मुझे भी पेशाब लगी है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह भी नूपुर के पीछे-पीछे बाथरुम में आ गया नूपुर का बाथरूम काफी बड़ा था इसलिए दो लोगों की उपस्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था नूपुर अपनी साड़ी कमर तक उठा ली थी और अपनी लाल रंग की पेटी को एक हाथ से नीचे की तरफ सरका रही थी यह देखकर अंकित आगे पड़ा और खुदाई उसकी पेंटिं को पकड़कर उतारने लगा,,, और अगले ही पल वह घुटनों के बल बैठकर उसकी पेंटि को उतार कर बाथरूम मे हीं छोड़ दिया,,,,, उसकी आंखों के सामने नूपुर की कचोरी जैसी फुली हुई बुर थी एकदम चिकनी उसमें से मादक खुशबू आ रही थी,,,, उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर और उसमें से आ रही मादक खुशबू की वजह से अंकित अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और अगले ही पर अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रख दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया यह देखकर नुपुर एकदम से मदहोश हो गई और बोली,,,)
अरे रुक तो जा मुझे पेशाब तो कर लेने दे,,,,।
(लेकिन अब अंकित रुकने को तैयार ही नहीं था वह तो पागलों की तरह उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया था,,,,, उसकी हरकत से नूपुर भी एकदम मदहोश हो गई मस्त हो गई और खुद ही अपनी टांग उठा कर उसके कंधे पर रख ले और उसके सर पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे और ज्यादा अपनी बुर से सटाने लगी वह अपने पेशाब को रोक दी थी लेकिन रहाणे कर उसकी बुर से पेशाब की बूंदे बाहर निकल जा रही थी जिसे अंकित मस्त होकर चाट रहा था उसे मजा आ रहा था और बाथरूम में नूपुर की सिसकारी गूंज रही थी,,,, अंकित का लंड फिर से खड़ा हो गया था,,,, वैसे एक बार झड़ने के बाद भी उसमें कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था लेकिन इस समय जिस तरह से वह राहुल की मां की बुर की चटाई कर रहा था उसके बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था जिसके चलते उसका लंड अपनी औकात से बाहर आ गया था वह जल्द से जल्द राहुल की मां की बुर में घुस जाना चाहता था जिसे अंकित खुद अपने हाथ से मुठीया रहा था और उसकी बुर चाट रहा था। राहुल की मां मदहोश हो चुकी थी उसकी बुर में भी चीटियां रंग रही थी वह राहुल के लंड को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी उसकी गहराई में ले लेना चाहती थी,,,,, कुछ देर इसी तरह से उसकी बुर चाटने के बाद अंकित गहरी सांस लेता हुआ उठकर खड़ा हो गया और अपने लंड को उसकी बुर के आगे रखकर हिलाने लगा और बोला,,,)
अब मुतो ईस पे,,,,।
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(इतना सुनकर नूपुर एकदम से शर्मसार हो गई शर्म से पानी पानी हो गई भले ही उसके हरकतें एकदम रंडी वाली थी लेकिन इस तरह से उसने कभी हरकत नहीं की थी अंकित ने उसे अपने लंड पर पेशाब करने के लिए बोली थी यह मदहोशी की चरम सीमा थी,,,, जिसे सुनकर नूपुर का दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह आश्चर्य से अंकित की तरफ देख रही थी अंकित समझ गया था कि नूपुर के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह एकदम से अपने लंड को पकड़ कर उसके सुपाड़े को उसके गुलाबी छेद से रगड़ते हुए बोला,,,)
मुतो मेरी रानी,,,,,सहहहहह बहुत गर्म बर है तुम्हारी बौछार मारो अपनी पेशाब कैसे पर तैयार कर दो इसे अपनी बुर में लेने के लिए,,,,,,आहहहहह आज तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,,, बहुत घमंड है ना तुम्हें अपनी बुर पर आज इसका घमंड चूर-चूर कर दूंगा,,,,, ताकि किसी और के पास जाओ तो उसे फटी बुर मिले,,,,,।
(अंकित की मदहोशी भरी गंदी बातें सुनकर नूपुर से भी रहा नहीं किया और उसकी बुर से अगले ही पर पेशाब की धार निकलने लगी जो सीधा अंकित के लंड के सुपाड़े पर पड़ रही थी और उसके लंड को भिगो रही थी,,,,, अंकित एकदम से मत हो गया अपनी आंखों को बंद करके वह अपने लंड को पकड़े हुए ही बोला,,,)
आहहहहहा गजब,,,,ऊममममम एकदम गरम पैसाब है तुम्हारी,,,,ऊममममम मेरी रानी एकदम धार मारो इस पर,,आहहहहहह ,,,,,,,।
(अंकित की मदहोशी देखकर नूपुर दोनों हाथों से अपनी साड़ी पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ करके पेशाब की धार और जोर से मार रही थी और अपनी बुर के गुलाबी छेद को उसके लंड के सुपाड़े से रगड़ भी रही थी जिससे अंकित की उत्तेजना एकदम से बढ़ गई थी और जैसे ही नूपुर के पेशाब की धार कमजोर पड़ी वह एकदम से अपने लंड के सुपाड़े को उसकी बुर के छेद में डाल दिया और दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड पकड़कर अपने तरफ खींच लिया,,,, जिससे एकदम से रगड़ खाता हुआ उसका लंड उसकी बुर में समा गया,, नूपुर एकदम से आश्चर्यचकित हो गई क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि इस समय अंकित उसकी बुर में लंड डाल दूंगा लेकिन यह सब एकाएक हुआ था और आलम यह था कि अंकित का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में घुस चुका था और अंकित उसे अपनी बाहों में लेकर खड़े-खड़े अपनी कमर हिला रहा था,,,,, अंकित की हरकत से नूपुर पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी मस्त हो चुकी थी। वह बाथरूम में चुदाई का मजा लूट रही थी और अंकित पूरा जोश में आकर उसे चोदता हुआ बाथरुम की दीवार से सटा दिया था उसके धक्के एकदम तेज हो चुके थे और वह जोश में उसकी दोनों टांगें उठाकर अपनी कमर पर लपेट लिया था वह राहुल की मां को अपनी गोद में ले लिया था,,,,, नूपुर हैरान थी अचंभित थी वह बार-बार अंकित की भुजाओं का बल देख रही थी वाकई में अंकित में बहुत दम था वह अपने मन में ही ऐसा बोल रही थी अंकित उसे दीवाल से सटाकर उसकी गोद में उठाकर उसकी बुर का भोसड़ा बनाने में लगा था,,,,, एक बार झड़ने के बावजूद अंकित का हौसला बुलंद था वह धक्के पर धक्के लगा रहा था और हर धक्के के साथ नूपुर की बुर की अंदरूनी दीवारें भलभलाकर पानी छोड़ रही थी,,,, और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे बाथरूम में नूपुर की चुदाई का कोई इरादा नहीं था लेकिन मदहोशी इस कदर बढ़ की चुकी थी कि अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया था और बाथरूम में ही वहां राहुल की मां की जमकर चुदाई कर दिया था।
अपनी गोद में से उतर कर वह नूपुर की साड़ी को भी खोल दिया और उसकी पेटिकोट का नारा खींचकर उसकी साड़ी को भी बाथरुम में गिरा दिया और नंगी ही उसका हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम से बाहर ले आया अंकित जानता था कि नूपुर का कमरा कौन सा है,,,, ऐसा लग रहा था कि आज वह नूपुर को बिल्कुल भी आराम करने नहीं देगा वह नूपुर को बाथरूम से बाहर आते ही गोद में उठा लिया था। और गोद में उठाए हुए ही वह उसे कमरे की तरफ ले जा रहा था कमरे का दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था वहां कमरे में पहुंचते ही नरम गद्दे पर राहुल की मां को पटक दिया,,,,, राहुल की मां एकदम से मस्त हो चुकी थी क्योंकि अंकित ने इसकी जबरदस्त चुदाई किया था,,,,, अपने लंड को हिलता हुआ वह बिस्तर की तरफ आगे बढ़ने लगा लेकिन एक नजर घूमर वह खिड़की की तरफ देखने लगा कि कहीं खिड़की बंद तो नहीं है लेकिन खिड़की उसे दिन की तरह ही खुली भी थी और दरवाजा की कड़ी भी नहीं लगी थी क्योंकि इस समय दरवाजा बंद करना जरूरी नहीं था क्योंकि नूपुर को ऐसा ही लग रहा था कि घर का मुख्य दरवाजा बंद है । लंड को हिलाता हुआ वह घुटनों के बाल बिस्तर पर चढ़ने लगा और बोला,,)
कैसा लगा मेरी जान,,,,,
बाप रे तूने तो मेरी हड्डियां चूर-चूर कर दिया,, क्या खाता है रे जो तेरे में इतना दम है।
खाता नहीं हूं पीता हूं और वह भी तुम्हारा दूध इसलिए मेरे में इतना दम है,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित दोनों हाथों से राहुल की मां की टांगे पकड़ कर खोल दिया और फिर उसकी बुर पर अपना मुंह लगाकर चाटना शुरू कर दिया जो कुछ देर पहले उसकी बुर की मलाई और उसके लंड की मलाई से सना हुआ था,,,, बाहर खड़ा राहुल भी अब समय हो चुका था यह सोचकर अपने घर की तरफ आगे बढ़ने लगा पेट में अभी भी उसके तंबू बना हुआ था अपनी मां के बारे में सोच सोच कर देखते ही देखते वह अपने घर के दरवाजे पर पहुंच गया और धीरे से उसे खोला तो आराम से दरवाजा खुल गया वह समझ गया कि यह सब अंकित का ही करा धरा है वह मुस्कुराने लगा,,,, धीरे से दरवाजा बंद करके वह आगे बढ़ा तो देखा डाइनिंग टेबल के नीचे उसकी मां की ब्रा और ब्लाउज पड़ा हुआ था और पास में ही अंकित के कपड़े भी पड़े हुए थे इतना तो वह समझ गया था कि इस समय उसकी मां और अंकित दोनों नंगे ही है और दोनों की काम लीला शुरू हो चुकी है और फिर बाथरूम की तरफ देखा तो बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था,,,, अंदर झांक कर देखा तो उसकी मां की साड़ी पेटीकोट और चड्डी तीनों पड़ी थी वह समझ गया कि अंकित कितना बड़ा हरामी है क्योंकि जाते समय वह देखा था उसकी मां पीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी और इस समय साड़ी बाथरूम में पड़ी थी जिसका मतलब साफ था कि दोनों खुलकर मजा लूट रहे थे,,,,।
राहुल के पेंट में बना हुआ तंबू उसे परेशान करने लगा था,,,,, राहुल इधर-उधर देख रहा था लेकिन कहीं भी वह दोनों दिखाई नहीं दे रहे थे वह समझ गया था कि इस समय वह दोनों कमरे में ही है उसका दिन चोरों से धड़क रहा था वह धीरे-धीरे कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था और देखते ही देखते हैं वह अपनी मां के कमरे के पास पहुंच चुका था हल्की सी खुली खिड़की में से अंदर झांक कर देखा तो हैरान रह गया उसका सोचना बिल्कुल सही था,,, इस समय उसकी मां और अंकित दोनों पूरी तरह से नंगे थे उसकी मां अपनी टांगें खोलकर अंकित से अपनी बर चटवा रही थी और यही सही समय था कमरे के अंदर दाखिल होने का और वह एकदम से दरवाजा खोलकर कमरे में दाखिल हो गया एकदम से दरवाजा खुलने की आवाज से अंकित और राहुल की मन एकदम से दरवाजे की तरफ देखने लगे तो राहुल को दरवाजे पर खड़ा देखकर नूपुर एकदम से हैरान हो गई उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और अंकित हैरान होने का नाटक करने लगा वह एकदम से नूपुर की टांगों के बीच से हटके और बिस्तर पर बैठ गया उसके चेहरे पर एकदम डर के भाव आ गए थे ऐसा हुआ जानबूझकर कर रहा था और नूपुर भी एकदम से घबराकर बिस्तर पर पड़ी चादर को उठाकर अपने नंगे बदन को छुपाने की कोशिश कर रही थी।
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अब अंकित और राहुल के साथ नुपूर का थ्रिसम होने वाला हैं जो बडा ही खतरनाक होगा
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा









































