अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को सलवार कमीज में देखकर अंकित की आंखों में वासना की चमक एक बार फिर से फैल चुकी थी और वह अपनी मां के साथ मनमानी कर चुका था वैसे तो सुगंधा ने भी अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ही सलवार कमीज पहनी थी ऐसा नहीं था कि उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित नहीं था बस वहां रोज नए-नए तरकीब आजमाती थी अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए,,,, सलवार में उसकी बड़ी-बड़ी गांड और ज्यादा कसी हुई और उभार दार लग रही थी। जिसे देखकर अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया था और पूरी तरह से अपनी मां की जवानी को अपने काबू में करके उसे उसके ही कमरे में ले जाकर के जमकर उसकी चुदाई किया था।

रात को खाना खाने के बाद,, अंकित ऊपर छत पर जाकर बिस्तर लगा रहा था अब मां बेटे को छत पर सोने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था क्योंकि गर्मी का महीना था और छत पर ठंडी हवा चलती थी जिसे गर्मी में राहत मिलती थी और दोनों छत पर खुले आसमान के नीचे संभोग का रोग मजा लेते थे जिसका आनंद दोगुना हो जाता था,,,, ऐसे ही अंकित छत पर बिस्तर लगा रहा था तभी उसकी मां सीढ़ियां चढ़कर छत पर पहुंची तो अपनी मां को देखकर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि इस समय उसकी मां कुछ भी नहीं पहनी थी एकदम नंगी थी और अंकित को देखकर मुस्कुरा रही थी अंकित तो बिस्तर लगाना ही भूल गया था वह अपनी मां को ही पति आंखों से देख रहा था उसका मुंह खुला का खुला रह गया था और गहरी सांस लेते हुए अपनी मां को देखकर बोला।
बाप रे तुम तो पूरी कयामत लग रही हो क्या इरादा है आज,,,

इरादा क्या है जो रोज रहता है वही इरादा आज भी है,,, (इतना कहते हुए सुगंधा एकदम मादक चल भरते हुए छत की दूसरी तरफ जाने लगी जहां पर पीछे मैदान का हिस्सा था और वहां जाकर छत की दीवार पकड़ कर उसे पर अपने हाथ की कोनी लेकर खड़ी हो गई अपनी गांड को पीछे की तरफ निकल कर और पीछे बैठकर बिस्तर लगा रहा अंकित अपनी मां के इस नए रूप को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो गया,,,,, और वह अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,, और चलता हुआ अपनी मां के पास आया और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखकर उसे रगड़ कर सहलाते हुए मदहोश होता हुआ बोला,,,,)
आज तुम्हारा इरादा कुछ ज्यादा ही खतरनाक लग रहा है मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि आज बिना कपड़ों के तुम एकदम नंगी छत पर आ गई हो,,,।
क्यों इसमें नया क्या लग रहा है रोज छत पर कपड़े पहन कर आई थी और जो मेरे कपड़े उतार कर नंगी कर देता था आज तुझे ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ेगा इसलिए पहले ही से कपड़े उतार कर नंगी होकर आई हुं,,,, (अपने बेटे की तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर सुगंधा बोली)
कसम से तुम्हारा यह रूप और तुम्हारी अदा मुर्दे के लंड को भी खड़ा कर दे,,, (इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां की गांड पर जोर से चपत लगाया)

आऊचच,,,,,, थोड़ा धीरे से तू तो रोज मेरी गांड को लाल कर देता है,,,,।
तुम्हारी गांड है ही इस लायक की क्या बताऊं,,,, (गांड को फिर से सहलाते हुए) लेकिन एक बात बताओ रोज तो तुम इस तरह से खड़ी होने में नाटक करती हो और आज अपने आप से ही इस तरह से खड़ी हो कोई देख लेगा तो,,,.
यहां से भला कौन देखेगा बुद्धू पहले यह तो देख में खड़ी कहां हूं पीछे की तरफ खड़ी हूं यहां पर चारों तरफ मैदान ही मैदान है सामने की तरफ खड़े रहने में डर है,,,।
ओहहह,,,, बात तो सही है,,, लेकिन आज मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है।
तुझसे तो रोज रहा नहीं जाता,,, सुबह भी कहां तुझसे रहा जा रहा था अपनी मनमानी करने के बाद ही तो मुझे छोड़ा ।
तुम छोड़ने लायक नहीं चोदने लायक चीज हो,,,।
वो तो में हुं ही,,,,, (मैदान की तरफ देखते हुए) देख रहा है ये खूबसूरत नजारा,,,, चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है अगर इस अंधेरे में औरत और मर्द कुछ करना चाहे तो आराम से कुछ भी कर सकते हैं क्योंकि कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।
कहीं तुम्हारा तो कुछ करवाने का इरादा नहीं है इस अंधेरे में,,,,।

इरादा तो बहुत कुछ है,,, (इतना कहने के साथ ही सुगंधा घूम गई और गांड को छत की दीवार से टिकाकर अपनी दोनों टांगों को खोल दी ,, यह अंकीत के लिए ईशारा था और अंकीत ईस ईशारे को अच्छी तरह से समझता था और तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गया और अगले ही पल अपने प्यार से होठों को अपनी मां की दहकती हुए बुर पर रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,, सुगंधा एकदम से मस्त हो गई और दीवार को कस के पकड़कर अपनी कमर को थोड़ा सा और आगे की तरफ कर दी ताकि उसका बेटा आराम से उसकी बुर की चटाई कर सके, वैसे ही अपनी मां को नंगी देखकर अंकित की आंखों में मदहोशी छा गई थी वह अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर अपनी मां की बुर को पागलों की तरह चाट रहा था और जैसे-जैसे उसकी जीभ बुर पर फिसल रही थी वैसे-वैसे सुगंधा की हालत खराब हो रही थी वह मदहोश हो रही थी और अपनी आंखों को बंद करके इस पल को पूरी तरह से जी लेने की कोशिश कर रही थी,,,, सुगंधा पूरी तरह से निश्चित थी सबसे ऊंची छत होने का उसे पूरा फायदा मिल रहा था,,,, वह पूरी तरह से नंगी होकर अपनी जवानी का मजा लूट रही थी,,,,, अपने बेटे के सर को रह रहे कर वह सहला दे रही थी और अपनी बुर की किसी एक जगह उसकी जीभ को महसूस करके वही स्थिर भी कर दे रही थी जो कि उसकी तरफ से यह इशारा था कि उसी जगह पर उसे ज्यादा मजा आ रहा है।

छत पर गरमा गरम शिसकारीयो की आवाज गुंज रही थी,,, उसकी सिसकारीयो की आवाज सुनकर अंकित का जोश बढ़ रहा था,,,, और इसी जोश की बदौलत अंकित अपनी मां की बुर में एक साथ दो उंगलियां पेल रहा था। जिससे उसकी मां को भी बहुत मजा आ रहा था। वैसे आज चांदनी रात बिल्कुल भी नहीं थी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था इसलिए दूर से भी किसी के देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी वैसे तो जिस जगह पर दोनों खड़े थे वहां पर वैसे भी किसी की नजर पडने वाली नहीं थी। कुछ देर तक इसी तरह से अपनी मां को मस्त करने के बाद,,, अंकित धीरे से अपनीमां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को देखकर गहरी गहरी सांस लेने लगा सुगंधा की भी सांस ऊपर नीचे हो रही थी और अगले ही पल सुगंधा खुद अपने बेटे को अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का रसपान करने लगी और अंकित तुरंत उसे भी अपनी बाहों में दबोच कर अपने दोनों हथेलियां को उसकी नंगी गांड पर रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया वह भी पूरी तरह से जोश से भरा हुआ था, सुगंधा बावली हुई जा रही थी उसकी सांसों की गति के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी अंकित की छाती से रगड़ खा रही थी। और यह एहसास दोनों को गर्म कर रहा था,, दोनों के बीच चुदाई का खेल रोज चल रहा था लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे सब कुछ नया-नया सा हो पहली बार सब कुछ हो रहा है दोनों का एहसास इतना गजब का था कि दोनों का मन एक दूसरे से भरता ही नहीं था और यह बहुत जरूरी भी होता है मर्द और औरत के बीच,,,।

अगर सभी मर्दों और औरत के बीच इसी तरह का एहसास होने लगे तो शायद मर्द दूसरी औरत की तरफ कभी देखे बिना लेकिन ऐसा होता है नहीं है मर्द अक्सर एक औरत से मन भर जाने के बाद दूसरी औरत की तरफ आकर्षित हो जाता है लेकिन यहां पर सुगंधा को लेकर अंकित पूरी तरह से वफादार था जब तक की दूसरी औरतों से खुद आगे से निमंत्रण ना दे क्योंकि जो सुख जो संतुष्टि उसे अपनी मां से मिल रहा था ऐसा एहसास उसे दूसरी औरतों से नहीं मिल पाता था हालांकि मजा बहुत आता था लेकिन वह एहसास और संतुष्टि उसे अपनी मां से ही मिलता था इसीलिए वहां जब भी अपनी मां को देखा था तब उत्तेजित हो जाता था और हर बार नया एहसास लेकर उसकी चुदाई करता था,, अपनी मां के लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से जोर-जोर से दबोच रहा था दबा रहा था इस बीच सुगंधा भी अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर के पेंट के ऊपर से ही उसके खड़े लंड को दबा रही थी। और देखते ही देखे अपनी उंगलियों का सहारा लेकर वह पेट के बटन को खोलकर अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल और उसे हाथ से मुट्ठीयाने लगी हालांकि इस बीच वह अपने होठों को बिल्कुल भी अपने बेटे के होंठ से अलग नहीं की। अंकित का मन मचल रहा था अपनी मां की बुर में डालने के लिए लेकिन उस पड़ाव पर पहुंचने से पहले का सफर उसे बेहद रोचक और उन्मादित कर देने वाला लग रहा था। इसीलिए तो वह बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिख रहा था और वैसे भी दोनों के पास काफी समय था दोनों के पास समय का अभाव बिल्कुल भी नहीं था।

कुछ देर तक इसी तरह से आनंद लेने के बाद अंकित अपनी मां से कुछ पल के लिए अलग हुआ सिर्फ अपने कपड़े उतारने के लिए और जैसे ही वह निर्वस्त्र हो गया फिर से अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया वैसे भी इस खेल को खेलने में सबसे योग्य अवस्था नग्न अवस्था ही होती है इसमें संभोग का एहसास पूरी तरह से मर्द और औरत को डुबो देता है।और ईस समय मां बेटे दोनों इस एहसास में पूरी तरह से डूबे हुए थे दोनों एक दूसरे को बाहों में भरकर एक दूसरे के अंगों को खंगाल रहे थे दबोच रहे थे पकड़ रहे थे ऐसा करने में दोनों को मजा आ रहा था,,,, तभी सुगंधा से रहा नहीं गया और सुगंधा धीरे रे से नीचे की तरफ बैठने लगी और देखते-ही देखते वह अपने घुटनों के बल बैठ गई। अंकित जानता था कि अब उसकी मां क्या करने वाली है इसलिए अंकित अपनी मां की तरह ही छत की दीवार को पकड़ कर जो की 4 फीट की थी,, खड़ा हो गया और अपने लंड को थोड़ा और आगे की तरफ कर दिया,,, सुगंधा मुस्कुराकर अपने बेटे की तरफ देख और बिना अपने बेटे के लंड को हाथ लगाए उसे सीधा अपने लाल-लाल होठों को खोलकर उसे अंदर ले ली,, और चूसना शुरू कर दी अंकित एकदम से गहरी सांस लेता हुआ मदहोश हो गया और अपनी मां की तरफ देखने लगा उसकी मां भी अपने बेटे के लंड को मुंह में लिए हुए उसे ही देख रही थी। अंकित अपनी आंख के इशारे से ही मानो कह रहा हो कि पूरा अंदर तक ले लो,, क्योंकि अगले ही पल सुगंधा पूरा का पूरा लंड अपने गले के नीचे तक उतार ली थी,,, उसे सांस लेने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन जो आनंद जो उत्तेजना उसे महसूस हो रही थी उसके आगे यह थोड़ी सी तकलीफ कुछ भी नहीं थी इसीलिए तो सुगंधा पूरी तरह से मस्त हो गई थी। सुगंधा घुटनों के बल और थोड़ा आगे की तरफ झुक कर बैठी हुई थी,,, जिससे अंकित को उसकी मां की बड़ी-बड़ी गाड़ी एकदम साफ दिखाई दे रही थी और वह अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर के उसकी बड़ी-बड़ी गांड को सहलाते हुए उसे जोर-जोर से दबा रहा था और मजा ले रहा था।

सुगंधा अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चुस चुस कर एकदम मस्त कर दी थी,,,, अंकित पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की बुर में घुसने के लिए इसलिए वह अपनी मां के दोनों हाथ को पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाया और छत की वही 4 फीट की दीवार को पकड़ कर घोड़ी बना दिया और खुद अपनी मां के पीछे आ गया उसकी बड़ी-बड़ी गांड अंधेरे में भी चमक रही थी जिसे अंकित को कोई परेशानी नहीं हो रही थी और अगले पल वह अपने लंड को उसके गुलाबी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा एकदम मस्त हो गई अंकित पागलों की तरह पहले ही धक्के से अपनी मां को पूरी ताकत से चोद रहा था। सुगंधा तो जैसे हवा में उड़ रही थी,, पूरी ताकत से छत की दीवार को पकड़ कर वह अपने बेटे की प्रहार को झेल रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था उसके मुंह से हर धक्के के साथ चीख निकल जा रही थी और वह बहुत खुलकर चीख की आवाज निकल रही थी और शिसकारी भी भर रही थी। अंकित को अपनी मां की चुदाई करने में बहुत मजा आता था वह पूरी तरह से मस्त हो जाता था असली मर्दानी की दिखाने का अवसर उसे अपनी मां के साथ ही मिलता था। जिसमें वह खरा भी उतरता था। अंकित अपनी मां के साथ प्राप्त अनुभव का पूरा उपयोग कर रहा था वह कभी अपनी मां की कमर पकड़ लेता तो कभी दोनों चुचियां को जोर-जोर से दबाता हुआ धक्के पर धक्के लगाता तो कभी कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर लगाम की तरह अपनी तरफ खींचता ऐसा करने में अंकित को तो मजा ही रहा था उसकी मां भी पूरी तरह से मस्त हो जा रही थी। थोड़ी ही देर में दोनों का बदन एकदम से अकड़ने लगा और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,,।

वासना का तूफान शांत हो चुका था अपनी मां से अलग होकर बिस्तर पर नंगा बैठकर अंकित गहरी गहरी सांस ले रहा था उसकी मां दीवार से सट कर खड़ी होकर अपने बेटे को ही मुस्कुरा कर देख रही थी। औरबोली।
तू सच में पूरा सांड है।
तुम भी एकदम छिनार हो,,,,,।
(अपने बेटे के मुंह से इतना सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी,,,, दोनों के बीच कुछ देर तक ईसी तरह से बातचीत चलती रही तो सुगंधा अपने बेटे से बोली।)
रुक मैं अभी आती हूं,,,।
क्यों कहां जा रही हो,,,?
बाथरूम,,,।
तो यही कर लो ना,,,,।
समझ कर दो नंबर,,,,।
ओहहहहह,,,,, तो यह बात है,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया और खुले मैदान की तरफ देखते हुए बोला) तो बाहर क्यों नहीं चली जाती देखो कोई बाहर देखने वाला भी नहीं है,,,,
इसी तरह से,,,।
तो क्या एकदम नंगी होकर चांदनी रात तो है नहीं की कोई देखेगा तो दिख जाओगी एकदम अंधेरा है देखने पर भी नहीं दिखाई देता और एक नया अनुभव भी मिल जाएगा,,,।
नहीं नहीं मुझे तो डर लगता है,,,।
अरे चलो ना मैं भी इसी तरह से चलता हूं मजा आ जाएगा,,,,।
कोई देख लेगा तो,,,।

कोई नहीं देखने वाला,,,, आधी रात से भी ज्यादा समय हो रहा है सब गहरी नींद में सो रहे होंगे और वैसे भी रात एकदम अंधेरी है चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है कुछ दिखाई दे रहा है तुम्हें तुम खुद ही देखने की कोशिश करो,,,(मैदान की तरफ इशारा करते हुए अंकित बोल तो सुगंधा भी मैदान की तरफ देखने लगी वाकई में मैदान में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और अपने बेटे की बात सुनकर उसके बदन में भी उत्सुकता जागने लगी,,,,,, वह सोच में पड़ गई तो यह देखकर अंकित फिर से बोला,,,,)
तुम बिल्कुल भी मत डरो मैं भी इसी तरह से चलता हूं कोई नहीं देखेगा,,,,।
तू पता नहीं क्या-क्या करवाएगा मुझसे,,,,।
जिस जिस चीज में मजा मिलेगा वह सब करवाऊंगा तुमसे,,,,,,,अब चलो,,,, मजा आ जाएगा,,,(इतना कहकर वह खुद सीढीयो से नीचे उतरने लगा,,, अपने बेटे की हिम्मत देखकर सुगंधा भी हिम्मत करके उसके पीछे-पीछे चल दी,,, देखते ही देखते दोनों घर के पीछे पहुंच चुके थे लकड़ी के छोटे से दरवाजे को खोलकर अंकित सबसे पहले मैदान की तरफ आगे बढ़ा वह भी पूरी तरह से अपनी मां की तरह ही नंगा था उसके पीछे-पीछे सुगंधा भी बाहर निकलने लगी लेकिन वह चारों तरफ नजर घूमाकर देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है जबकि इस समय उसे कोई देखने वाला नहीं था चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था,,,, 2 मीटर की दूरी दोनों में हो जाए तो वह दोनों खुद ही नहीं दिखाई दे रहे थे। अंकित को तो बहुत मचा रहा था पहली बार हुआ एक नंगा होकर इस तरह से मैदान में घूम रहा था खुली हवा में उसे अच्छा एहसास हो रहा था उसका लंड झूल रहा था और जब वह चलता था उसका लंड का वजन उसे साफ महसूस हो रहा था सुगंधा भी अपने बेटे के पीछे-पीछे आगे बढ़ रही थी वह भी पूरी तरह से नंगी थी शीतल हवा उसके नंगे बदन को छूकर गुजर जाती तो उसके बदन में सिहरन सी दौड़ जाती थी,,, अंकित आगे आगे चला जा रहा था सुगंधा पीछे-पीछे कभी-कभी अंकित तोड़ने लगता तो सुगंधा भी नंगी उसके पीछे दौड़ने लगती थी वाकई में खूब मदहोश कर देने वाला नजारा था,,, लेकिन इस खूबसूरत नजारे को देखने वाला इस समय वहां कोई नहीं था सिवाय अंकित के,,,,।

अरे बस कर अब झाड़ियों के अंदर तक जाएगा क्या,,,।
हां तो क्या हो गया तुम्हें सौच भी तो करना है,,,,।
लेकिन झाड़ियों के अंदर जाना जरूरी है,,, मुझे डर लग रहा है,,,,,।
किस बात का यहां कोई देखने वाला नहीं है,,, देखो तो सही कितना अच्छा लग रहा है,,,।
अरे मुझे भूत का डर लग रहा है।
(इतना सुनकर अंकित जोर-जोर से हंसने लगा क्योंकि वह जानता था कोई उसके हंसने की आवाज कोई सुनने वाला नहीं था और वह हंसते हुए बोला)
तुम भी कहां यह बेकार की बातों में मानती हो,,, अगर भूत हुआ भी तो तुम्हें डराएगा नहीं,,,।
मुझे क्यों नहीं डराएगा,,,,!
तुम्हारी खूबसूरती देखकर वह भी तुम्हारा दीवाना हो जाएगा और तुम्हारी चुदाई करेगा,,,।
धत् पागल,,,,,, कुछ भी बोलता रहता है अब तु यहीं पर रुक,,,, बड़े जोरों की लगी है,,,,,(इतना कहने के साथ ही पास में बड़ा सा पत्थर था वह उसके पीछे चली गई,,,, और वहीं बैठकर सौच करने लगी,,,, अंकित भी हंसता हुआ वहीं पर रुक गया लेकिन फिर जैसे कुछ याद आया हो वह एकदम से बोला,,,)
अरे लेकिन पानी का डब्बा लाना तो भूल ही गए,,,।
ओहहह,,,(सुगंधा को भी एकाएक याद आया) अब क्या होगा,,,!
तुम चिंता मत करो तुम बैठकर कर लो मैं अभी पानी का डब्बा लेकर आता हूं,,,,।
नहीं नहीं,,,, तू कहीं मत जा मुझे डर लगता है,,,।
लेकिन गांड कैसे धोओगी,,,,।
सुगंधा

मैं कुछ कर लूंगी तु चिंता मत कर लेकिन यहां से जाना नहीं,,,,,।
ठीक है,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को थोड़ी राहत हुई उसे अच्छी तरह से मालूम था की आस स्थिति में क्या करना है,,,, और सौच कर लेने के बाद,,, वह मिट्टी का पत्थर ढूंढने लगी अपनी गांड पोंछने के लिए,,,, और वह खड़ी होकर थोड़ा आगे बढ़ गई और मिट्टी के पत्थर का छोटा सा टुकड़ा ढूंढ़ने लगी अंकित जहां पर खड़ा था वहां से उसकी मैं एकदम साफ दिखाई दे रही थी अंकित भी समझ गया था कि उसकी मां अब क्या करने वाली है,,,, और अगले ही पल सुगंधा को छोटा सा मिट्टी का टुकड़ा मिल भी गया जिससे वह अपनी गांड पोंछ रही थी लेकिन यह देखकर अंकित का लंड फिर से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया,,,, और बिना कुछ बोल सीधा अपनी मां के पीछे पहुंच गया,, और एकदम से उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया सुगंधा तो पल भर के लिए घबरा गई थी क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा उसके पीछे आ गया है अंधेरा ही करना था कि उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन अगले ही पल अंकित ने बोला,,,,)
बस ऐसे ही रहना,,,,।

(खुला वातावरण पाकर और अपने बेटे के सामने सौच करते हुए वह भी उत्तेजित हो गई थी और अंकित अंधेरे में ही अपने लंड के सुपाड़े को इधर-उधर रगड़कर अपनी मां के गुलाबी छेद को ढूंढ ही लिया और अगले ही फल उसका पूरा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में था और वह पीछे से अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था,,, सुगंधा भी पूरी तरह से मदहोश हो गई थी। खुला मैदान पाकर वह जोर-जोर से सिसकारी लेना शुरू कर दी थी क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी इस तरह की आवाजे किसी के कानों में पडने वाली नहीं थी, और अंकित जमकर अपनी मां की चुदाई कर रहा था और तब तक चुदाई करता रहा जब तक कि वह अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और साथ में खुद भी झड़ नहीं गया,,,, फिर दोनों वापस घर की ओर लौट आए,,, घर पहुंच कर सुगंधा ने पानी से अपनी गांड को साफ की,,,, और अपने बेटे के साथ छत पर आकर बिस्तर पर लेट गई दोनों बहुत खुश थे दोनों को बहुत मजा आया था। सुगंधा अपने बेटे से बोली।)
कहां से आता है तेरे दिमाग में ऐसे ऐसे ख्याल,,,।
क्यों तुम्हें मजा नहीं आया क्या,,,!
मजा तो बहुत आया तभी तो कह रही हूं,,,,, लेकिन अब यह मजा कुछ दिन का ही है,,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित थोड़ा हैरान हो गया और एकदम से अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला)

कुछ दिन का क्यों,,,?
क्योंकि कुछ ही दिन में तेरी बड़ी बहन आ जाएगी फिर ऐसा मौका कहां मिलने वाला है फिर तो पता नहीं मौका मिलेगा भी कि नहीं,,,,।
हां मम्मी मैं तो भूल ही गया था कि अपने दोनों के सिवा तृप्ति भी है,,, हम दोनों जिस तरह से रहते थे मैं तो भूल ही गया था कि मेरी कोई बड़ी बहन भी है।
वही तो कह रही हूं तेरी बड़ी बहन जाएगी तब क्या होगा मुझे तो तेरे बिना एक पल भी रहा नहीं जाता।
मुझे भी कहां रहा जाता है,,,, जब तक तुम्हारी बुर में,,,(अपनी मां की बुर पर हथेली रखकर उसे सहलाते हुए) लंड डालकर पानी नहीं निकाल देता तब तक मुझे नींद नहीं आती,,,,
अब कर भी क्या सकते हैं उसे आने से तो रोक नहीं सकते,,,, मैं सोच रही थी कि,,,।
क्या सोच रही थी,,,?
मैं सोच रही थी कि जब तक तृप्ति नहीं आ जाती क्यों ना हम दोनों कहीं घूमने चलते हैं बहुत मजा करेंगे,,,,।
यह बात तो तुमने बहुत अच्छी कही लेकिन कहां,,,?
नैनीताल चलते हैं पहाड़ियों में वहां मजा आएगा हम दोनों को कोई पहचानेगा भी नहीं हम दोनों कुछ भी कर सकते हैं,,,,,।
तुम सच कह रही हो हम दोनों को कोई वहां जाने वाला भी नहीं होगा जैसे मन वैसे घूमेंगे,,, लेकिन पैसे,,,!
तु इसकी चिंता मत कर पैसे है मेरे पास,,,,।
वाह मम्मी तुम तो महान हो,,,,,, मजा आ जाएगा पहाड़ियों में,,,,,ऊममममम,(इतना कहने के साथ है यह वहां एकदम से अपनी मां की गर्दन पर चुंबन करने लगा हथेली से तो वह अपनी मां की बुर को सहला ही रहा था एक बार फिर से सुगंधा की बुर कचोरी की तरह हो गई थी और अपनी खुशी जाहिर करते हुए अंकित अपनी मां के ऊपर चढ़ गया और सुगंधा भी अपनी दोनों टांगें खोलकर अपने बेटे का स्वागत करने लगी अंकित फिर से अपनी मां की बुर में अपने लंड को डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था और तीसरी बार चुदाई करने के बाद वह अपनी मां के ऊपर ही ढेर हो गया,,,,, सुबह जब नींद खुली तो वह अपनी मां के ऊपर ही सो रहा था धीरे से वह अपनी मां के ऊपर से हटा दो उसका लंड भी बुरे में से बाहर निकल गया यह देखकर वह मुस्कुराने लगा उसकी मां की भी नींद खुल गई थी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

अब जल्दी से नैनीताल चलने की तैयारी करो थोड़े बहुत कपड़े भी खरीदने होंगे,,,,।
मेरे पास तो सब कुछ है तुम बस एक जींस और टॉप खरीद लेना एकदम पटाखा लगोगी,,,।
यह सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और धीरे से छत से नीचे चली गई।