• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Erotica मेरी बीवी अनुश्री

आपकी पसंदीदा कौन है?

  • अनुश्री

    Votes: 197 72.4%
  • रेखा

    Votes: 45 16.5%
  • अंब्दुल

    Votes: 57 21.0%
  • मिश्रा

    Votes: 18 6.6%
  • चाटर्जी -मुख़र्जी

    Votes: 28 10.3%
  • फारुख

    Votes: 12 4.4%

  • Total voters
    272

andypndy

Active Member
721
3,015
139
अपडेट -36

हवाएं तेज़ गति से चल रही थी, आसमान बिल्कुल कला पड़ गया था.
images.jpg

"भैया भाभी कही दिख नहीं रही बोट पे,चढ़ी तो थी ना?" राजेश ने कोतुहालवंश पूछा
"Aàअह्ह्ह..हाँ..हाँ...चढ़ी होगी भागमभाग मे मैंने ध्यान नहीं दिया था "मंगेश को भी अब फ़िक्र होने लगी थी गर्दन उठा के आस पास देख रहा था लेकिन अनुश्री कही नहीं थी.
उसका माथा पसीने से तर हो गया.
"हे भगवान...कही..कही....अनुश्री पीछे तो नहीं रह गई?" मंगेश कि शंका 100% जायज थी.
कि तभी एक जबरजस्त झटका लगा.. "उतरो भाई सब लोग जल्दी किनारा आ गया है, तूफान रुकेगा नहीं आज " नाव के चालक ने सभी को सम्बोधित किया.
सभी यात्री एक एक कर उतरने लगे....एक दो...तीन....दस...पंद्रह...नाव चालक बब्बन गिनती किये जा रहा था.
"अरे भाई तुम लोग भी उतरो अंदर क्यों बैठे हो " बब्बन लगभग चिल्लाते हुए बोला उसे भी अपनी नाव ठिकाने लगानी थी.
अंदर मंगेश को कही अनुश्री नहीं दिखाई दे रही थी पूरी बोट खाली हो चुकी थी....
मंगेश और राजेश भी बोट से उतर गए...दोनों के चेहरे पे हवाईया उडी हुई थी....चब्बीस....स्तट्ट....सत...सताइस ...गिनती गिनते गिनते बब्बन कि आवाज़ लड़खड़ाने लगी....
"ये...ये....ये....क्या बाकि कहाँ गए " बब्बन हैरान परेशान बोट के अंदर भागा,इधर उधर कूदने लगा लेकिन नतीजा वही उसके होश उड़ते जा रहे थे.
इधर मंगेश का दिल बैठा जा रहा था.
"बाकि...बाकि के तीन कहाँ गए " बब्बन चिल्लाया
"भाईसाहब लगता है हमारी भाभी पीछे टापू पे ही छूट गई है " राजेश ने बब्बन को कहाँ.
"ऐसे कैसे हो सकता है आज तक नहीं हुआ,कैसे लोग हो तुम?" बब्बन का गुस्सा सातवे आसमान पे था वो बरसो से बोट चलाता आया था लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ

"भाई मेरी बीवी पीछे रह गई है " मंगेश गिड़गिड़ाया
दो लोग और नहीं है,क्या वो भी तुम्हारे साथ थे?"
"नहीं....सिर्फ हम तीन ही लोग थे जिसमे से मेरी बीवी पीछे रह गई है " मंगेश कि दिल कि धड़कन उसका साथ छोड़ती महसूस होने लगी थी.
"भैया वो दो बंगाली बूढ़े भी नहीं दिख रहे है जो बोट मे पीछे बैठे थे " राजेश ने चौंकते हुए कहा.
"चलो भाई बब्बन वापस चलो,जीतना पैसा बनता हो वो ले लेना " मंगेश व्याकुल हो उठा

"मरना है क्या साहब आपको भी,ऐसे तूफान मे क्या कश्ती चलती है भला,एक तो आप लोगो ने मेरी इज़्ज़त पानी मे मिला दि कोई सुनेगा तो भला क्या मेरी बोट पे बैठेगा?" बब्बन नाराज था.
"तो क्या अपनी बीवी को मरने के लिए छोड़ दू वहाँ?" मंगेश भी चिल्लाया
"देखिये साहब आपकी बीवी और वो बंगाली बोट पे चढ़े ही नहीं,वो वही टापू पे ही होंगे. ये टूरिस्ट इलाका है कोई खतरा नहीं है बस तूफान हल्का होने दो फिर चलते है " बब्बन ने मंगेश और राजेश को दिलासा दिया
"आओ मेरे साथ पास ही मेरा ठिकाना है वही इंतज़ार करते है " बब्बन अपनी नाव का लंगर डाल आगे बढ़ चला

राजेश मंगेश भारी मन से पीछे पीछे चल दिये.
"भाभी ठीक होंगी भैया फ़िक्र ना करे " राजेश ने दिलासा दिया

तूफ़ान ओर जोर पकड़ रहा था.
यहाँ टापू पे भी अभी अभी एक तूफान आ के गुजरा था, अनुश्री का बदन कि गर्माहट कम होने का नाम नहीं ले रही थी.
चाय कि चुस्की भी इस आग के सामने फीकी ही थी.
ठण्ड तो कबकी खत्म हो चुकी थी, सामने मांगीलाल अपने हाथ आगे किये खड़ा था जैसे कुछ छुपा रहा हो.
"चाय तो अच्छी बानाई है बाबू मोशाय " चाटर्जी कि आवाज़ ने उसके कमरे मे मौजूद अजीब सन्नाटे को चिर दिया.
"जी...जी धन्यवाद साब " मांगीलाल झिझक के बोला उसकी आवाज़ मे एक कम्पन था.
"तुम्हे अच्छी नहीं अनु बेट " मुखर्जी ने धीरे से अनुश्री कि बाह मे हाथ रखते हुए कहा.
"ईईस्स्स्स......उफ्फ्फ..." ठंडा हाथ लगते ही अनुश्री सिहर उठी जैसे किसी ने गर्म तवे पर पानी के छींटे मारे हो.
अनुश्री कि सिसकारी ने मांगीलाल के रोंगटे खड़े कर दिये ऐसा नजारा ऐसी खूबसूरती उसे कभी नसीब ही नहीं हुई थी.
"बबबब.....बिटिया रानी तुम बहुत सुन्दर हो " आखिर मांगीलाल से राहा नहीं क्या अपने जज्बात उसने उडेल ही दिये.
"खो...खो.....खास...."अनुश्री को एकदम से खांसी आ गई उसकी चाय साड़ी पे गिर पढ़ी मुँह खुला रह गया.
चाटर्जी मुखर्जी भी एकटक मांगीलाल को ही देखते रहै गए यहाँ किसी को उम्मीद नहीं थी कि ऐसा कुछ होगा.
अनुश्री को तो कतई नहीं.
"कंम्म्म.....क्या कह रह हो काका " अनुश्री अचंभित थी आँखों मे गुस्सा उतर आया था
गुस्से से उसने मांगीलाल को घुरा
20211009-204826.jpg

"ममम....मैंने मैंने अभी देखा आप लोग क्या कर रहे थे " मांगीलाल को कोई परवाह नहीं हुई अनुश्री के गुस्से कि वो बेपरवाह बोलता गया.
ये सुनना ही था कि अनुश्री का चेहरा लज्जा से झुकता चला गया, उसने गलती कर दि थी कैसे वो किसी तीसरे आदमी के सामने बहक गई थी वो भी ऐसा आदमी जो उसके दादा कि उम्र का था.
"मैंने ऐसी सुंदरता कभी नहीं देखी बिटिया रानी, आज तुम्हे देख के मुझे कुछ कुछ हुआ आज जीवन मर पहली बार मेरा लंड खड़ा हुआ है " मांगीलाल जैसे कोई चैप्टर याद कर के आया था बोले जा रहा था ना जाने किस नशे मे था.
अनुश्री के तो होश उड़ गए थे उसे अपने कानो पे विश्वास ही नहीं हो रहा था, मांगीलाल ने सीधा ही लंड शब्द बोल दिया था
"लो देखो अनु एक और आदमी तुम्हारे हुश्न का शिकार हो गया " चाटर्जी ने चाय कि लास्ट चुस्की को खिंचते हुए कहा.
"क्यों भाई तुम्हारा लंड पहली बार कैसे खड़ा हुआ? कभी किसी को चोदा नहीं क्या?" मुखर्जी ने आश्चर्य से पूछा
अनुश्री का बदन कंपने लगा, उसके सामने ही तीन मर्द उसके के सामने ही सम्भोग कि बात कर रहे थे परन्तु इस शर्माहत लज्जात मे कही ना कही हवास का अंश भी था जो अनुश्री के कामुक बदन को झकझोर रहा था.
"सच कह रहा हूँ साहब मेरी शादी तो हुई थी,लेकिन सुहागरात के दिन मेरा खड़ा ही नहीं हुआ, उसके रात के बाद भी मेरा यही हाल रहा मै कभी भी सम्भोग करने जाता तो लंड खड़ा ही नहीं होता था, मेरी बीवी मुझे नपुंसक बुलाने लगी. धीरे धीरे सारे गांव मे ये बात फ़ैल गई,मै भारी जवांज मे ही गांव छोड़ के यहाँ चला आया तभी से ये होटल चला रहा हूँ. इतने सालो मे मैंने सम्भोग का विचार ही त्याग दिया परन्तु आज जब बिटिया रानी को देखा,इनकी खूबसूरती देख मेरे लंड मे हलचल होने लगी.
ये देखिये....साहाररररर.......करते हुए मांगीलाल ने अपनी धोती खोल दि.
मैली कुचली धोती सरसराती जमीन पे आ टिकी.
तीनो कि नजर सामने पढ़ी तो सभी के मुँह खुले रह गए.
"हहहह.....हे.....हे...भगवान ये क्या है " अनुश्री ने अपने मुँह पे हाथ रख लिया उसकी आंखे फटी रह गई दिल धाड़ धाड़ कर चलने लगा.
20220115-021443.jpg




आगे क्या हुआ जानने के किये यहाँ पढ़े.
 
Last edited:

Mass

Well-Known Member
10,088
20,997
229
andypndy bhai, Thakur Zalim kab post kar rahe ho?
 
Top