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निर्माला : आह बड़ा दर्द हुआ रे।
कालू : ज्यादा मोटा था ना।
निर्माला : मंद मंद मुस्कुराते हुये, हाय रे बहुत ही मोटा था क्या।
उस दिन पूरा दिन मेरे सामने माँ के मोटे मोटे चूतड़ और मस्त फुली चुत ही घूमते रहा, अगले दिन गुड़िया जाने को तैयार हो गई।
कालू : गुड़िया अब कब आयेगि।
गीतिका : भैया अब तो जल्दी ही आउंगी और कुछ दिनों की छुटटी लेकर आउंगी, मैंने गीतिका को साईकल पर बेठा लिया और उसकी गुदाज गाण्ड मेरे लंड से सट गई फिर साईकल चलाते हुये मै उससे बाते करने लगा, और फिर बस स्टैंड आ गया और गुड़िया एक दम से मेरे सिने से लग गई, आज पहली बार मुझे गीतिका के मोटे मोटे कसे हुए दूध का मस्त सा
एहसास हुआ क्योंकि गीतिका ने अपनी छातिया बहुत जोरो से मेरे सिने से चिपका ली थी, मैंने भी गुड़िया के गालो को चुमते हुए एक बार उसके भारी चूतडो में हाथ फेर दिया।
गुडिया : भैया मुझे आपकी सबसे ज्यादा याद आती है, मै आपको बहुत मिस करुँगी।
कालू : मुझे भी तेरे बिना अच्छा नहीं लगता तो जल्दी से एक लम्बी छुटटी लेकर आजा फिर हम खूब मजे करेगे।
गुड़िया : रोते हुए ओके भेया।
कालू : जरा एक बार मुसकुराकर कर बोल।
गुडिया : मुस्कुराते हुए बाय भैया आई लव यु, उसके बाद बस चल दी और कल्लु बुझे बुझे मन से वापस गांव की और साईकल मोड़ देता है।
होस्टल में मोनिका टी वी देख रही थी और फिर गीतिका आ गई गीतिका को देख कर मोनिका उससे चिपक गई।
मोनिका : क्यों परी क्या विचार है, अपना रसीला जूस पिलाओगी।
गीतिका : रुक जा पहले मुझे चेंज तो कर लेने दे।
मोनिका : गीतिका का हाथ पकड़ कर बेड पर खीचते हुये, मेरी जान तू तो मुझे नंगी ही अछि लगती है।
गीतिका : पहले मुझे वो निग्रो वाली मूवी तो दिखा।
मोनिका : लगता है तो भी बड़ी चुदासी है अपने गांव में किसी का तगड़ा लंड ले लेती ना।
गीतिका : यार मोका ही नहीं लगा नहीं तो लंड तो बहुत है।
मोनिका : वो देख उस निग्रो के मोटे और काला लंड की बात कर रही थी मैं।
गीतिका : हाय क्या मस्त लंड है, कितना मोटा है।
मोनिका : क्या बात है आज तेरी चुत पहले से ही पानी छोड़ रही है।
गीतिका : अरे मेरी चुत तो 4 दिन पहले से ही पानी छोड़ रही है।
मोनिका : क्यों ऐसा क्या हो गया।
गीतिका : अरे इस बार गांव में आम खाने में बड़ा मजा आया, मै अपने भैया के ऊपर चढ़ कर आम तोड़ रही थी और भैया मुझे अपनी गोद में उठाये खड़े थे।
मोनिका : क्या बात कर रही है, फिर तो तेरे भैया ने तुझे खूब मसला और दबोचा होगा।
गीतिका : हाँ पर मै भी जानबूझ कर घाघरे के निचे पेंटी पहन कर नहीं गई थी मै पहले से ही भैया के साथ घाघरे के निचे नंगी जाने को रेड्डी हो गई।
मोनिका : ऐसा क्योँ।
गीतिका : मैंने भैया की एक किताब देखी जिस्मे भाई और बहन की चुदाई की कहानिया लिखी थी बस मैंने वह पढ़ी और मुझे भैया की नीयत का अन्दाजा हो गया।
मोनिका : तेरा मतलब यह है की तुझे ऐसा लगता है जैसे तेरे भैया तुझे चोदना चाहते हो।
गीतिका : हाँ और फिर जब मै उनके ऊपर चढ़ी तो कई बात तो मैंने अपनी चुत भी उनके मुह से रगड दी।
कालू : ज्यादा मोटा था ना।
निर्माला : मंद मंद मुस्कुराते हुये, हाय रे बहुत ही मोटा था क्या।
उस दिन पूरा दिन मेरे सामने माँ के मोटे मोटे चूतड़ और मस्त फुली चुत ही घूमते रहा, अगले दिन गुड़िया जाने को तैयार हो गई।
कालू : गुड़िया अब कब आयेगि।
गीतिका : भैया अब तो जल्दी ही आउंगी और कुछ दिनों की छुटटी लेकर आउंगी, मैंने गीतिका को साईकल पर बेठा लिया और उसकी गुदाज गाण्ड मेरे लंड से सट गई फिर साईकल चलाते हुये मै उससे बाते करने लगा, और फिर बस स्टैंड आ गया और गुड़िया एक दम से मेरे सिने से लग गई, आज पहली बार मुझे गीतिका के मोटे मोटे कसे हुए दूध का मस्त सा
एहसास हुआ क्योंकि गीतिका ने अपनी छातिया बहुत जोरो से मेरे सिने से चिपका ली थी, मैंने भी गुड़िया के गालो को चुमते हुए एक बार उसके भारी चूतडो में हाथ फेर दिया।
गुडिया : भैया मुझे आपकी सबसे ज्यादा याद आती है, मै आपको बहुत मिस करुँगी।
कालू : मुझे भी तेरे बिना अच्छा नहीं लगता तो जल्दी से एक लम्बी छुटटी लेकर आजा फिर हम खूब मजे करेगे।
गुड़िया : रोते हुए ओके भेया।
कालू : जरा एक बार मुसकुराकर कर बोल।
गुडिया : मुस्कुराते हुए बाय भैया आई लव यु, उसके बाद बस चल दी और कल्लु बुझे बुझे मन से वापस गांव की और साईकल मोड़ देता है।
होस्टल में मोनिका टी वी देख रही थी और फिर गीतिका आ गई गीतिका को देख कर मोनिका उससे चिपक गई।
मोनिका : क्यों परी क्या विचार है, अपना रसीला जूस पिलाओगी।
गीतिका : रुक जा पहले मुझे चेंज तो कर लेने दे।
मोनिका : गीतिका का हाथ पकड़ कर बेड पर खीचते हुये, मेरी जान तू तो मुझे नंगी ही अछि लगती है।
गीतिका : पहले मुझे वो निग्रो वाली मूवी तो दिखा।
मोनिका : लगता है तो भी बड़ी चुदासी है अपने गांव में किसी का तगड़ा लंड ले लेती ना।
गीतिका : यार मोका ही नहीं लगा नहीं तो लंड तो बहुत है।
मोनिका : वो देख उस निग्रो के मोटे और काला लंड की बात कर रही थी मैं।
गीतिका : हाय क्या मस्त लंड है, कितना मोटा है।
मोनिका : क्या बात है आज तेरी चुत पहले से ही पानी छोड़ रही है।
गीतिका : अरे मेरी चुत तो 4 दिन पहले से ही पानी छोड़ रही है।
मोनिका : क्यों ऐसा क्या हो गया।
गीतिका : अरे इस बार गांव में आम खाने में बड़ा मजा आया, मै अपने भैया के ऊपर चढ़ कर आम तोड़ रही थी और भैया मुझे अपनी गोद में उठाये खड़े थे।
मोनिका : क्या बात कर रही है, फिर तो तेरे भैया ने तुझे खूब मसला और दबोचा होगा।
गीतिका : हाँ पर मै भी जानबूझ कर घाघरे के निचे पेंटी पहन कर नहीं गई थी मै पहले से ही भैया के साथ घाघरे के निचे नंगी जाने को रेड्डी हो गई।
मोनिका : ऐसा क्योँ।
गीतिका : मैंने भैया की एक किताब देखी जिस्मे भाई और बहन की चुदाई की कहानिया लिखी थी बस मैंने वह पढ़ी और मुझे भैया की नीयत का अन्दाजा हो गया।
मोनिका : तेरा मतलब यह है की तुझे ऐसा लगता है जैसे तेरे भैया तुझे चोदना चाहते हो।
गीतिका : हाँ और फिर जब मै उनके ऊपर चढ़ी तो कई बात तो मैंने अपनी चुत भी उनके मुह से रगड दी।