अब मजा नही आ रहा है, पता नही क्यों मगर मजा नही आ रहा है। हर अपडेट के बाद इच्छाएं बढ़ती जाती है कि अब आगे जल्दी जल्दी अपडेट आयेंगे, एक साथ कई अपडेट आयेंगे, मगर नही आते है और हम निराश हो जाते है। इस सबके लिए दोषी सिर्फ एक है वो है बूज्जी भाई
Kala Nag
क्या करूँ
Lib am भाई संसारिक प्राणी हूँ
सांसारिक जंजाल के बीच कहानी परोस रहा हूँ
कोशिश भरसक रहती है जल्दी जल्दी अपडेट लाने की
कभी कामयाब रहता हूँ कभी चूक जाता हूँ
हर अपडेट के बाद थोड़ा ओर, थोड़ा और ज्यादा की ललक जगा देते है मगर अपडेट फिर भी उतना ही बड़ा और उतने ही या कभी कभी ज्यादा समय अंतराल से आता है और हम टूट जाते है बिखर जाते है।
अरे नहीं आप ऐसा ना कहें इस बार गुरुवार तक एक अच्छा और बड़ा अपडेट देने की कोशिश करता हूँ
चलो ये मेलोड्रामा बंद करते है और अपडेट पर आते है मगर ये बात सच है कि हर अपडेट के बाद थोड़ा ज्यादा थोड़ा जल्दी की इच्छा रहती है मगर हर किसी की अपनी पर्सनल लाइफ और समस्याएं होती है ठीक है मगर फिर भी दिल हैं कि मानता नहीं
धन्यबाद मेरे भाई बहुत बहुत धन्यबाद
तो अब मुलाकात हो ही गई सुप्रिया और विश्व की और सुप्रिया काफी इंप्रेस भी हो गई विश्व की प्लानिंग की, कि उसने सुप्रिया की सारी खबर इतनी जल्दी निकाल ली और उसकी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उससे पब्लिक प्लेस पर मिला।
सुप्रिया को अंदाजा भी हो गया विश्व कितना तेज है
ये मुलाकात आगे बहुत बड़ा निर्णायक मोड़ बनेगी इस कहानी में, क्योंकि ये प्रवीण रथ जो की सुप्रिया का भाई था ये वो ही पत्रकार था जिसे शुभ्रा ने खबर पहुंचाई थी और कहीं ना कहीं शुभ्रा अभी भी प्रवीण की गुमशुदगी/मौत के लिए खुद को जिम्मेदार मानती है तो जब उसे सारी सच्चाई पता चलेगी तो वो भी सुप्रिया की मदद करेगी और विश्व तो साथ है ही।
ह्म्म्म्म इस पर मैं थोड़ा ख़ामोश रहूँगा
शुभ्रा मतलब पूरा दी हेल । वैसे भी दी हेल के सारे सदस्य विश्व के साथ ही है। रूप अपने प्यार के लिए, शुभ्रा रूप और विश्व के प्यार और प्रवीण के प्रति अपनी जिम्मेदारी के लिए, वीर अपनी दोस्ती के लिए और अपने प्यार को पाने में विश्व की सहायता के लिए और विक्रम, शुभ्रा और शुभ्रा और उसको दिए अपने वचन के लिए।
हाँ आने वाले समय में एक टीम तो बनेगी जरूर
आखिर वीर ने अपना वादा निभाया और जब तक अपनी मां को अनु को शगुन देने नही भेजा तब तक खुद भी नही मिला। सुषमा को देख कर अनु चौंकी तो ज़रूर मगर झल्ली पहचान नहीं पाई। मगर दादी की पारखी नजर एक बार में ही पहचान गई। सुषमा ने अनु को प्यार से छेड़ा भी और अपनी बेटी भी बना लिया। मगर अब एक और बात ये है कि अनु और वीर के हर अपडेट में वीर के वो शब्द याद आ जाते है
पर मुझे... ऐसा क्यूँ लग रहा है कि... मेरा दिल... कोई... निचोड़ रहा है... ऐसा क्यूँ लग रहा है... जैसे... मेरे जिस्म में से... कोई... मेरी जान को खिंच ले जा रहा है... मैं क्यूँ टुट रहा हूँ... टुकड़ों में बिखर रहा हूँ... अनु....
क्या ही लाइन लिख डाली है ये
Kala Nag भाई
अब इस पर क्या कहूँ आपके दिल को छु गया यह बहुत बड़ी बात है
वैसे आगे भी कुछ लम्हें ऐसे आयेंगे
बेचारा भैरव इतनी महंगी गाड़ी होने के बाद भी पैदल चलना पड़ा, पक्का यहां भी विश्व ने ही कोई झोल करवाया होगा जब शीलू पार्टी में आया होगा नींद की गोली देने। हर बार भैरव वैदेही से टकराता है उसको नीचा दिखाने मगर हर बार खुद मुंह की खा कर आ जाता है।
हा हा हा
वैदेही ने कहा भी है
भैरव सिंह से दो जन डरते नहीं हैं एक वैदेही दुसरा विश्व
विक्रम अब भी दोराहे पर है, वो क्षेत्रपाल बनना भी नही चाहता है और छोड़ना भी चाहता है। शायद दौलत और ताकत का नशा इसे ही कहते है मगर अब विश्व को लेकर वो ज्यादा सजग और संतुलित सोच ले कर चल रहा है क्योंकि कहीं ना कहीं वो विश्व को तोल कर ये जान चुका है कि विश्व सही है और जिस तरह और जिन हालातो में उसकी विश्व से मुलाकात हुई है उससे विक्रम अब कोई भी कदम आवेश में नही उठाना चाहता है।
विक्रम बहुत बुद्धिमान है
जैसा कि आपने कहा
अहंकार.... क्षेत्रपाल का तो नहीं पुरुष वाला अहंकार से आहत है वह
धन्यबाद फिरसे आभार तह दिल से