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Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

Rajizexy

❣️and let ❣️
Supreme
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52,905
354
पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..

अपने मायके के पड़ोसियों द्वारा कुछ असहज कर देने वाली खबरों के चलते कविता अपनी माँ, रमिलाबहन के घर के ओर गई.. उसका दिल तो कह रहा था की जो कुछ उसने सुना था वह सच न हो पर तसल्ली करने के लिए वहाँ जाकर देख लेने से बेहतर ओर कोई विकल्प न था.. घर पर पहुंचकर जब उसने छुपकर देखा तो उसकी जुबान हलक में उतर गई.. अपनी संस्कारी माँ को घोड़ी बनकर उनके नौकर से चुदते हुए देख कविता के पैरों तले से जमीन खिसक गई..

गुस्से में आकर उसने दरवाजा खटखटाया और अंदर घुसकर सब से पहले उस नौकर पर बरस पड़ी.. बेचारे नौकर ने बताया की वो यह सब कविता की माँ के कहने पर ही कह रहा था.. कविता के पास बोलने को शब्द न थे..!! जिस माँ की सादगी और धार्मिक जीवनशैली के चलते उसने उन्हें अपने मन में इतना ऊंचा दर्जा दे रखा था, उनसे ऐसी घिनौनी हरकत की अपेक्षा न थी

जब कविता अपनी माँ पर क्रोध से बरस पड़ी तब आखिर रमिलाबहन ने अपना मुंह खोला.. और अपना दुखड़ा सुनाया.. कैसे वह अपने पति स्व. सुबोधकांत की विकृत हरकतें और असीमित वासना का भोग बनती आई थी.. आखिर थक हार कर उन्हों ने ही सुबोधकांत को अवैद्य संबंध बनाने की छूट दे रखी थी.. भले ही वह सीधीसादी थी पर उनकी जिस्मानी जरूरतें जब सिर चढ़कर बोलने लगी.. तब मजबूरन उन्हें यह कदम उठाना पड़ा..

अपनी माँ की सारी बातें सुनने के बाद कविता थोड़ा पिघली जरूर और उसे अपनी माँ की मजबूरी का एहसास भी हुआ पर वह अब भी इसे पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर पा रही थी

अब आगे..

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गाउन पहने सोफ़े पर बैठी शीला ने अपने पैर त्रिपाई पर रखे हुए थे.. एक तरफ करवट लेकर वह अपने कूल्हों को टेढ़ा कर बिंदास लेटी हुई थी और रिमोट से चेनल पर चेनल बदलते जा रही थी

"एक भी ढंग का सीरियल नहीं चल रहा है कहीं.. देखें तो आखिर क्या देखें..!!"

तभी मदन ने ड्रॉइंग रूम में प्रवेश किया.. वह शर्ट और पैन्ट पहनकर तैयार था.. जाहीर था, वह कहीं बाहर जाने की तैयारी कर रहा था

मदन: "क्या बड़बड़ा रही है शीला..!!"

मदन की तरफ एक नजर देखकर शीला वापिस टीवी के स्क्रीन को देखते हुए बोली "यार, टीवी पर कुछ भी ढंग का नहीं चल रहा है.. टाइम पास करने के लिए कुछ तो चाहिए"

मदन हँसते हुए उसकी बगल में बैठ गया और उसके उभरे हुए नितंब पर थपकी देते हुए कहा "कोई हॉट सी डीवीडी लगा दूँ देखने के लिए?"

शीला ने मुंह बिगाड़ते हुए अपनी चूत की और इशारा करते हुए कहा "और फिर देखकर यहाँ आग लग गई तो?? तू तो कहीं बाहर जा रहा है..!! फिर क्या करूँ? मुली और गाजर का सीजन भी चला गया.. घर पर कोई सब्जी भी नहीं है अंदर डालने लायक"

मदन: "अरे यार, मज़ाक कर रहा था.. अगर बोर हो रही हो तो चल मेरे साथ.. मैं राजेश के घर जा रहा हूँ.. तू भी रेणुका से मिल लेना.."

शीला: "अचानक राजेश के घर?? क्यों कुछ काम है क्या?"

मदन: "पीयूष का फोन आया था.. अब प्रोजेक्ट काफी आगे बढ़ चुका है.. उसने हमें बुलाया है.. शायद कल हम दोनों वहाँ जाएंगे.. दो दिन वहीं रुकेंगे पीयूष के घर"

शीला तुरंत खड़ी हो गई.. उसका दिमाग तेजी से चलने लगा..!!

शीला: "मुझे पता है कौन से प्रोजेक्ट के लिए वहाँ जा रहे हो..!! उस फाल्गुनी की फुद्दी में घुसे रहोगे दो दिन..!! हमने तय किया था की हम सब साथ चलेंगे..!!! याद रखना मदन..!! अगर तुम दोनों वहाँ अकेले गए तो मैं तेरी गांड फाड़ दूँगी"

मदन भड़कते हुए बोला "यार शीला.. ऐसा कुछ भी नहीं है..!! हम सच में काम के सिलसिले में ही जा रहे है.!! यकीन न हो तो पूछ ले राजेश से"

शीला: "और राजेश जैसे दूध का धुला है.. वो तो सच बताने से रहा"

परेशान होते हुए मदन ने कहा "अगर तुझे विश्वास नहीं हो रहा तो हमारे साथ चल..!! सिर पर बैठी रहना मेरे.. तभी तसल्ली होगी तुझे..!!" गुस्से में पैर पटकते हुए मदन चला गया..

शीला को अब भी मदन की बात पर भरोसा नहीं था.. उसने फाल्गुनी को कॉल किया.. बिल्कुल स्वाभाविक तरह से.. जैसे हाल चाल पूछने के लिए फोन किया हो.. बातों बातों में पता चला की फाल्गुनी तो अपने कज़िन की शादी में मुंबई गई हुई थी कुछ दिनों के लिए..!! तब जाकर शीला को यकीन हुआ की मदन सच बोल रहा था..

शीला का मन अब शांत हुआ.. वह टीवी देखते देखते अपने जिस्म को जगह जगह मसल रही थी..

पिछले कुछ दिनों से मदन को बुखार रहता था.. बदले हुए मौसम के कारण वायरल इन्फेक्शन ने मदन को कमजोर भी कर दिया था.. शीला का बिस्तर इस वजह से सूना पड़ा हुआ था.. तीन दिनों से, रसिक भी शहर से बाहर था और दूध देने नहीं आ रहा था.. शीला का जिस्म अब हर दूसरे दिन इस तरह भोग माँगता था जैसे नींद से जागा हुआ कोई असुर भोजन माँगता है..!! अगर मदन आज शाम को जाने वाला हो तो उसके साथ एक मस्त संभोग की आशा लगाएँ लेटी शीला की आँख लग गई..

शीला की नींद मुश्किल से आधे घंटे के लिए लगी थी.. वह तब टूटी जब मदन ने अपनी चाबी से दरवाजा खोला.. और तेजी से बेडरूम के अंदर घुस गया

शीला ने आलस्य भरी आवाज लगाते हुए पूछा "इतनी जल्दी आ गया? क्यों भागा अचानक?"

मदन ने जवाब नहीं दिया.. शीला ने सोचा की शायद बाथरूम में गया होगा.. पर उसे वॉर्डरोब के खुलने बंद होने की आवाज आई..

वह अंगड़ाई लेकर सोफ़े से खड़ी हुई और अपने बेडरूम में गई.. वहाँ जाकर देखा तो मदन अपना बेग पेक कर रहा था.. अभी एक घंटे पहले मदन पर बेवजह गुस्सा करने के कारण हुए हल्के से पछतावे के असर में, शीला ने बड़े ही प्यार से पूछा

शीला: "क्या कर रहे हो मदन? अभी शाम को जाना है ना.. इतनी भी क्या जल्दी है..!! आओ थोड़ी देर बेड पर साथ सोते है"

कहते हुए शीला मदन के करीब आई और उसका हाथ खिंचने लगी.. सोना तो बहाना था.. शीला अपनी भूख मिटाना चाहती थी..!!

मदन ने अपना हाथ छुड़ाया और बेग में कपड़े ठुँसता रहा.. वह बोला "अभी राजेश के साथ था तब पीयूष का फोन आया.. आज हमें किसी भी सूरत में बेंक मेनेजर से मिलना ही पड़ेगा.. क्योंकि वह मेनेजर फिर १० दिन की छुट्टी पर जा रहा है.. बैंक बंद होने से पहले हमें पहुंचना होगा.. राजेश अभी पाँच मिनट में गाड़ी लेकर पहुँच रहा है.. उसके आते ही हम तुरंत निकल जाएंगे.. रास्ते में दो घंटे लग जाएंगे"

हताश हो गई शीला,.. वह बेड पर लेट गई और मदन को पेकिंग करते हुए देखती रही.. तभी बाहर से गाड़ी का हॉर्न तीन बार बजा

मदन: "लगता है राजेश आ गया.. मैं निकलता हूँ शीला..!!"

बिना शीला के उत्तर की प्रतीक्षा किए, मदन बेग लेकर तेजी से बाहर निकल गया.. जाते हुए उसने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया और शीला बेडरूम में बिस्तर पर वैसे ही पड़ी रही

काफी लंबे अंतराल के बाद आज शीला अकेलापन महसूस कर रही थी

शीला, जो एक गृहिणी के रूप में अपने जीवन का अधिकांश समय परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में व्यतीत कर चुकी हैं, आज स्वयं को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा पाती हैं जहाँ उसकी सभी जिम्मेदारियाँ समाप्त हो चुकी हैं.. उसकी बेटी की शादी हो चुकी है और आर्थिक रूप से परिवार सुखी है.. परंतु, इस सबके बीच आज शीला स्वयं को अत्यंत एकाकी और अतृप्त महसूस कर रही हैं.. उसका पति मदन, अपने काम में व्यस्त हैं, और जब शीला को उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, तब वह उसके साथ नहीं है.. शीला के शरीर और मन में प्रेम और संभोग की तीव्र इच्छा हो रही है, और आज रसिक भी उपलब्ध नहीं हैं.. यह स्थिति उसे गहरी निराशा और अकेलेपन की ओर धकेल रही थी..

शीला की कहानी केवल एक महिला की नहीं है, बल्कि उन अनेक महिलाओं की है जो मध्यम आयु वर्ग में पहुँचकर स्वयं को शारीरिक और भावनात्मक रूप से अतृप्त पाती हैं.. यह उम्र ऐसी होती है जब महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल परिवर्तन होते हैं, और उनकी शारीरिक इच्छाएँ अधिक प्रबल हो सकती हैं.. परंतु, समाज और परिवार में इस विषय पर चर्चा करने का कोई स्थान नहीं है.. इसलिए, अधिकांश महिलाएँ अपनी इच्छाओं को दबाकर रखती हैं, जो उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है.. खैर..!! शीला उनमें से एक तो नहीं है.. पर आज शीला की हालत खस्ता है..!!

शीला जैसी महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी जटिल तब हो जाती है जब उसके पति उसकी आवश्यकताओं को समझने में असमर्थ होते हैं.. पुरुषों का ध्यान अक्सर काम और अन्य गतिविधियों में इतना अधिक व्यस्त हो जाता है कि वह अपनी पत्नी की भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं.. इसके परिणामस्वरूप, महिलाएँ स्वयं को उपेक्षित और अकेला महसूस करती हैं.. कुछ महिलाएँ, इस अतृप्त इच्छा को पूरा करने के लिए अवैद्य संबंध बना लेती हैं, लेकिन यह समाधान नहीं है.. यह उनके जीवन में और भी अधिक जटिलताएँ लाता है और उसे आत्म-ग्लानि और चिंता से भर देता है..

शीला का मन अब हवस से फड़फड़ा रहा था.. उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था.. तभी उसकी नजर मदन के खुले वॉर्डरोब पर पड़ी.. कपड़ों के पीछे पड़ी शराब की बोतल देखकर शीला की आँखें चमक उठी.. वह खड़ी हुई और जैक डेनियल्स की व्हिस्की की बोतल निकाली.. पीने से पहले उसने सोचा की ठंडे पानी से शावर ले लिया जाएँ..

शीला ने अपने कपड़े उतारे और नहाने चली गई.. बाहर आकर वो आईने में अपने नंगे बदन को हर एंगल से निहार रही थी.. अपनी खूबसूरती की नजर उतारने का मन कर गया उसे.. उसने तय किया की भले ही कहीं बाहर न जाना हो पर वो आज मस्त तैयार होकर शराब पीने बैठेगी

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अलमारी से एक ब्लैक साड़ी निकालकर पहन ली.. नीचे सुनहरे रंग के हाई हिल्स वाले सेंडल पहने.. और ऐसे तैयार हुई जैसे पार्टी में जा रही हो.. वह शराब की बोतल लेकर बाहर आई.. टेबल पर बोतल रखने के बाद वह किचन से बर्फ के टुकड़े ले आई.. बिना पानी एक बढ़िया सा पेग बनाकर, वो पैर फैलाकर बैठ गई और हल्के हल्के पीने लगी..!!

दो पेग पीते ही उसके पूरे बदन में सरसराहट होने लगी.. जिस आग को बुझाने के लिए उसने शराब का सहारा लिया था.. वह आग तो और भी भयंकर तरह से भड़कने लगी.. शीला का दिमाग अब तेजी से चलने लगा.. किसे बुलाएँ जो आकर उसकी हवस मिटा सकें..!!! रसिक तो था नहीं.. रूखी को बुला सकती थी पर अभी जो आग लगी थी वो बुझाने के लिए उसे एक असली मर्द की आवश्यकता थी.. रूखी का नाम लेते ही शीला को, उसके यार जीवा की याद आई.. काफी समय पहले, रूखी ने जीवा और रघु को शीला की घनघोर चुदाई करने भेजा था.. जब मदन विदेश था..!!

जीवा..!!!! हाँ जीवा बढ़िया रहेगा.. बिल्कुल रसिक के जैसा तगड़ा..!! और उसका लंड रसिक के मुकाबले एक इंच बड़ा था.. इस जीवा की याद पहले क्यों नहीं आई..!!!

अपने मोबाइल में शीला उसका नंबर ढूँढने लगी.. आखिर नंबर मिल गया और उसने फोन लगाया

जीवा: "कौन?"

शीला: "पहचाना नहीं?? मैं शीला.. कुछ महीनों पहले तुम और रघु आए थे मेरे घर रात को.. रूखी ने भेजा था"

कुछ पल तक जीवा ने जवाब नहीं दिया.. फिर दिमाग पर जोर लगाते ही बत्ती जली

जीवा: "अरे हाँ.. आप..!! बताइए कैसे याद किया"

शीला: "उसी बात के लिए जिस लिए तुम पहले आए थे.. आ सकते हो अभी?"

जीवा: "अभी?? अभी तो मैं नौकरी पर हूँ"

शीला: "तो नहीं आ सकते क्या?"

जीवा: "अगर कल आऊँ तो कैसा रहेगा? मैं छुट्टी लेकर आ जाऊंगा"

शीला: "कल नहीं आज.. हो सके तो अभी"

कुछ सोचकर जीवा ने कहा "ठीक है.. मैं कोशिश करता हूँ"

शीला: "कोशिश नहीं.. पक्का बताओ.. आ रहा है या नहीं?"

जीवा: "ठीक है.. थोड़ा वक्त दीजिए, मैं आपके घर पहुंचता हूँ"

शीला ने फोन काटा और शराब की बोतल अपने मुंह से लगाकर एक घूंट लगा दिया.. गले से लेकर पेट तक जलन होने लगी..!! पर उसे अच्छा लगा.. जिस्म की आग थोड़ी देर के लिए क्षुब्ध हो गई.. कुछ देर बाद शीला ने और दो घूंट ऐसे ही लगा दिए..

शराब अपना रंग दिखाने लगी.. शीला को घर की दीवारें गोल गोल घूमती नजर आ रही थी..

शीला किसी तरह अपने बेडरूम में पहुँची.. नशे और अपनी हवस में उसे दरवाजा बंद करने का भी होश नहीं था.. खड़े-खड़े ही उसने फटाफट अपनी साड़ी उतार फेंकी और आननफ़ानन पेटीकोट भी उतार दिया.. पैंटी के ऊपर से उसने अपनी चूत पर अपना हाथ रखा तो चूत इतनी गर्म महसूस हुई कि शीला को लगा कि उसकी हथेली पर छाले पड़ जायेंगे.. साथ ही पैंटी इतनी तरबतर थी कि शीला की हथेली भी भीग गयी.. उसने अपनी अंगुलियाँ पैंटी के इलास्टिक में डाल कर पैंटी नीचे खिसकायी और निकाल कर एक तरफ उछाल दी.. दीवार पर कपड़े टाँगने के लिए हुक लगा था और शीला की चूत-रस से तरबतर पैंटी उछल कर उसी में अटक गयी.. कुछ पलों में उसकी ब्रा भी ऊपर पंखे पर लटकी हुई थी..

जितनी देर तक शीला नंगी हो रही थी, वो नशे में खड़ी-खड़ी आगे पीछे गिरती हुई डगमगा रही थी.. शीला ने झुक कर अपनी चूत निहारी और उसे ताज्जुब हुआ कि आज उसमें से इतना रस क्यों टपक रहा होगा..!!! उसे ऐसा लगा जैसे ज़िंदगी में पहले उसकी चूत इस कदर नहीं भड़की थी.. उसकी चूत की गुलाबी फाँकें ऐसे खुली हुई थी जैसे कि मोतियों जैसी शबनम की बूँदों से भीगी हुई किसी गुलाब की कली की पँखुड़ियाँ खिल रही हों.. उसकी चूत की दरार ने फैल कर अंडे का आकार धारण कर लिया था और चूत की अंदरूनी परतें योनिरस के झाग से भीगी हुई नज़र आ रही थीं.. उसकी तनी हुई गुलाबी क्लिट भी बाहर को खड़ी थी.. चूत-रस की कईं धारें चू कर शीला की अंदरूनी जाँघों से नीचे बह रही थीं..

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शीला ने अपनी अँगुलियों को अपनी चूत पे फिराया तो उसे अपनी अंगूर जैसी बड़ी क्लिट थिरकती हुई महसूस हुई.. उसने धीरे से सहलाते हुए अपनी अँगुलियाँ चूत के अंदर खिसका दीं.. उसकी चूत में लहरें उठने लगीं और उसके हाथ में और ज़्यादा चूत-रस बह निकला.. वो दोनों हाथों से अपनी चूत रगड़ने लगी.. वो वहीं फॉयर-प्लेस के पास खड़ी-खड़ी ही अपनी चूत की गर्मी कम कर लेना चाहती थी.. लेकिन उसकी टाँगें बुरी तरह काँप रही थीं और नशे में उन हाई हील सैंडलों में वो टिक कर खड़ी नहीं हो पा रही थी.. शीला को लगा कि कहीं वो गिर ना पड़े..

शीला लड़खड़ाती हुई पास ही रखी चमड़े की कुर्सी पर जा का इस तरह बैठ गयी कि उसकी ठोस गाँड सीट के किनारे पर टिकी थी और उसकी लंबी टाँगें फैली हुई थीं.. उसी पल उसकी चूत में से रस बह कर यास्मीन की गाँड के नीचे लैदर की सीट पर फैल गया.. एक पल के लिए अपनी चूत को बगैर छुए शीला ने सारस की तरह अपनी सुराहीदार गर्दन आगे को निकाल कर अपना सिर झुकाया.. शीला झड़ने के लिए तड़प रही थी लेकिन फिर भी वो उसे टाल रही थी.. उसे एहसास था कि आज उसका झड़ना निहायत ही तूफानी और ज़बरदस्त होगा और वो चूदासी औरत इसी उम्मीद में हवस में मदमस्त हो रही थी..

थोड़ा और नीचे झुक कर शीला ने अपनी टाँगों के बीच में फूँक मारी.. उसकी क्लिट धधकने लगी और चूत जलती हुई मालूम हुई जैसे कि उसने सुलगती हुई लकड़ी में अपनी साँस फूँक कर उसमें आग भड़का दी हो.. अपनी चूत की शदीद गर्मी का झोंका उसे अपने चेहरे पर महसूस हो रहा था.. अपनी ही चूत की तेज़ खशबू से उसकी नाक फड़क उठी..

शीला अपनी गोद में आगे झुकी.. उसकी ज़ुबान उसके निचले होंठ पर आगे-पीछे फिसलने लगी.. उसके मुँह में उसके झागदार थूक के बुलबुले उठने लगे.. शीला सोच रही थी कि काश वो इतनी लचकदार होती कि खुद अपनी चूत चाट सकती.. उसे अपनी चूत इतनी ज़ायकेदार और आकर्षक लग रही थी कि उसे अपनी ज़ुबान भी अपनी क्लिट जितनी ही गरम महसूस होने लगी.. कितना मज़ेदार होता अगर वो अपनी खुद की चूत चाट सकती और अपनी फड़फड़ाती ज़ुबान पर झड़ सकती.. कितना जबरदस्त मज़ा आता अगर वो अपनी खुद की ही चूत का गरमागरम रस अपने ही मुँह में बहा सकती.. झड़ते हुए अपनी ही चूत से लेसदार चिपचिपा रस पीने की दोहरी लज़्ज़त कितनी बेमिसाल होती..!! ये ख़याल उसे और उत्तेजित कर रहे थे और साथ ही तड़पा भी रहे थे क्योंकि वो जानती थी कि ये उसके बस की बात नहीं है.. उसने पहले भी कई बार कोशिश कर रखी थी..

हांफते हुए फिर से पीछे हो कर शीला अपनी गर्म और गीली अंदरूनी जाँघों पर अपने हाथ फिराने लगी.. उसकी गाँड नीचे की सीट पर मथ रही थी और उसका पेट ऊपर-नीचे हो रहा था.. उसने अपना एक हाथ चूत की मेंड़ पर रखा और उसकी अँगुलियाँ फिसल कर क्लिट को आहिस्ता से सहलाने लगी..

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शीला ने अपने दूसरे हाथ की चार अंगुलियाँ आपस में जोड़कर लंड की शक्ल में इकट्ठी करीं और धीरे से चूत में अंदर घुसा दीं.. उसकी क्लिट हिलकोरे मारने लगी और चूत से बहुत सारा झाग निकलने लगा..

शीला थरथराते हुए सिसकने लगी.. वो एक हाथ की अंगुलियों से अपनी चूत को चोद रही थी और दूसरे हाथ से अपनी क्लिट सहला रही थी.. उसकी जाँघें हिलोरे मारते हुए झटक रही थीं.. वो जानती थी कि आज पूर्ण तसल्ली के लिए उसे एक से ज़्यादा बार झड़ना पड़ेगा..

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उसकी पलकें बंद हो गयी और उसके हाथ मेहनत करते हुए एक मलाईदार स्खलन पर पहुँचने के लिए मेहनत करने लगे.. उसकी चूत जितनी गर्मी ही उसके दिमाग में भी चढ़ी हुई थी.. कई तसवीरें उसके दिमाग में पुरजोश नाच रही थीं.. बारबार उसके ख्यालों में रसिक के गधे जैसे लंड की तसवीर ही आ रही थी..

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ज़ोर से हिलकोरे मारती हुई एक लहर उसके पेट और चूत में दौड़ गयी.. हांफते हुए शीला ने अपनी चारों अंगुलियाँ पूरी की पूरी अपने भोसड़े में घुसा दीं.. दूसरे हाथ से अपनी क्लिट को जोर से रगड़ते हुए शीला अपनी तरबतर चूत के अंदर चारों अंगुलियाँ घुमाने लगी..

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अचानक ही वो बदहवास होकर झड़ने लगी.. एक पल वो आनंद के उच्च शिखर की बुलंदी पर मंडरा रही थी और दूसरे ही पल उसका भोसड़ा ज्वालमुखी की तरह फट पड़ा..

एक के बाद एक लहर उसके शरीर में हिलोरे मारती हुई दौड़ने लगी और एक के बाद एक ऐंठन उसकी चूत और जाँघों को झंझोड़ने लगी.. शीला को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसका पूरा जिस्म पिघल रहा है और रगों में चुदासी मस्ती की करोड़ों चिंगारियाँ फूट रही हैं और जैसे उसका दिमाग फट जायेगा और उसकी चूत का रस फव्वारे की तरह बाहर उड़ेगा..

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शीला आगे झुकी और फिर कमर पीछे मोड़कर अपनी चूत को अंगुलियों से लगातार चोदते हुए बदमस्त अपनी चूत का रस निकालने लगी और ऑर्गैज़्म की लहरें सिलसिला-वार फूटने लगी.. उसकी चूत का रस उसके पेट के नीचे झाग बनाने लगा और उसकी धारायें टाँगों से नीचे बहने लगी.. उसकी क्लिट में भी बार-बार धमाका होने लगा और हर धमाके के साथ उसकी चूत की गहराइयों से चूत-रस की धार फूट पड़ती..


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चूत मे जुनूनी लज़्ज़त की एक जोरदार आखिरी लहर ने उसे झंझोड़ कर रख दिया और शीला हाँफती हुई कुर्सी पर पीछे फिसल कर मुस्कुराने लगी.. उसकी अंगुलियाँ अभी भी उसकी चूत में आंदोलन कर रही थी कि कहीं कोई सनसनी ख़ेज़ लहर अंदर ना रह जाये.. उसकी हवस कुछ कम हुई पर जैसे-जैसे उसने अपनी चूत को सहलाना जारी रखा, उसकी क्लिट फिर से तनने लगी.. इतनी बार झड़ने के कुछ ही पलों के बाद वो चुदक्कड़ औरत फिर से हवस से भर गयी थी..


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शीला की हवस इतनी बढ़ गयी थी कि उसकी चूत में ऐसा महसूस हो रहा था मानो आग की लपटें धधक रही हो..!!

तभी दरवाजे पर दस्तक पड़ी.. बेड पर निर्वस्त्र अवस्था में पड़ी शीला उठ खड़ी हुई.. अपने नंगे बदन पर उसने गाउन डाल लिया.. और लड़खड़ाते कदम से चलते हुए बाहर गई.. दरवाजा खोलते ही जीवा नजर आया.. शीला ने इशारे से उसे अंदर आ जाने के लिए कहा और उसके अंदर घुसते ही शीला ने.. अगल बगल नजर डालकर, दरवाजा बंद कर दिया..
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अपनी माँ की सारी बातें सुनने के बाद कविता थोड़ा पिघली जरूर और उसे अपनी माँ की मजबूरी का एहसास भी हुआ पर वह अब भी इसे पूरी तरह से स्वीकार नहीं कर पा रही थी

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"एक भी ढंग का सीरियल नहीं चल रहा है कहीं.. देखें तो आखिर क्या देखें..!!"

तभी मदन ने ड्रॉइंग रूम में प्रवेश किया.. वह शर्ट और पैन्ट पहनकर तैयार था.. जाहीर था, वह कहीं बाहर जाने की तैयारी कर रहा था

मदन: "क्या बड़बड़ा रही है शीला..!!"

मदन की तरफ एक नजर देखकर शीला वापिस टीवी के स्क्रीन को देखते हुए बोली "यार, टीवी पर कुछ भी ढंग का नहीं चल रहा है.. टाइम पास करने के लिए कुछ तो चाहिए"

मदन हँसते हुए उसकी बगल में बैठ गया और उसके उभरे हुए नितंब पर थपकी देते हुए कहा "कोई हॉट सी डीवीडी लगा दूँ देखने के लिए?"

शीला ने मुंह बिगाड़ते हुए अपनी चूत की और इशारा करते हुए कहा "और फिर देखकर यहाँ आग लग गई तो?? तू तो कहीं बाहर जा रहा है..!! फिर क्या करूँ? मुली और गाजर का सीजन भी चला गया.. घर पर कोई सब्जी भी नहीं है अंदर डालने लायक"

मदन: "अरे यार, मज़ाक कर रहा था.. अगर बोर हो रही हो तो चल मेरे साथ.. मैं राजेश के घर जा रहा हूँ.. तू भी रेणुका से मिल लेना.."

शीला: "अचानक राजेश के घर?? क्यों कुछ काम है क्या?"

मदन: "पीयूष का फोन आया था.. अब प्रोजेक्ट काफी आगे बढ़ चुका है.. उसने हमें बुलाया है.. शायद कल हम दोनों वहाँ जाएंगे.. दो दिन वहीं रुकेंगे पीयूष के घर"

शीला तुरंत खड़ी हो गई.. उसका दिमाग तेजी से चलने लगा..!!

शीला: "मुझे पता है कौन से प्रोजेक्ट के लिए वहाँ जा रहे हो..!! उस फाल्गुनी की फुद्दी में घुसे रहोगे दो दिन..!! हमने तय किया था की हम सब साथ चलेंगे..!!! याद रखना मदन..!! अगर तुम दोनों वहाँ अकेले गए तो मैं तेरी गांड फाड़ दूँगी"

मदन भड़कते हुए बोला "यार शीला.. ऐसा कुछ भी नहीं है..!! हम सच में काम के सिलसिले में ही जा रहे है.!! यकीन न हो तो पूछ ले राजेश से"

शीला: "और राजेश जैसे दूध का धुला है.. वो तो सच बताने से रहा"

परेशान होते हुए मदन ने कहा "अगर तुझे विश्वास नहीं हो रहा तो हमारे साथ चल..!! सिर पर बैठी रहना मेरे.. तभी तसल्ली होगी तुझे..!!" गुस्से में पैर पटकते हुए मदन चला गया..

शीला को अब भी मदन की बात पर भरोसा नहीं था.. उसने फाल्गुनी को कॉल किया.. बिल्कुल स्वाभाविक तरह से.. जैसे हाल चाल पूछने के लिए फोन किया हो.. बातों बातों में पता चला की फाल्गुनी तो अपने कज़िन की शादी में मुंबई गई हुई थी कुछ दिनों के लिए..!! तब जाकर शीला को यकीन हुआ की मदन सच बोल रहा था..

शीला का मन अब शांत हुआ.. वह टीवी देखते देखते अपने जिस्म को जगह जगह मसल रही थी..

पिछले कुछ दिनों से मदन को बुखार रहता था.. बदले हुए मौसम के कारण वायरल इन्फेक्शन ने मदन को कमजोर भी कर दिया था.. शीला का बिस्तर इस वजह से सूना पड़ा हुआ था.. तीन दिनों से, रसिक भी शहर से बाहर था और दूध देने नहीं आ रहा था.. शीला का जिस्म अब हर दूसरे दिन इस तरह भोग माँगता था जैसे नींद से जागा हुआ कोई असुर भोजन माँगता है..!! अगर मदन आज शाम को जाने वाला हो तो उसके साथ एक मस्त संभोग की आशा लगाएँ लेटी शीला की आँख लग गई..

शीला की नींद मुश्किल से आधे घंटे के लिए लगी थी.. वह तब टूटी जब मदन ने अपनी चाबी से दरवाजा खोला.. और तेजी से बेडरूम के अंदर घुस गया

शीला ने आलस्य भरी आवाज लगाते हुए पूछा "इतनी जल्दी आ गया? क्यों भागा अचानक?"

मदन ने जवाब नहीं दिया.. शीला ने सोचा की शायद बाथरूम में गया होगा.. पर उसे वॉर्डरोब के खुलने बंद होने की आवाज आई..

वह अंगड़ाई लेकर सोफ़े से खड़ी हुई और अपने बेडरूम में गई.. वहाँ जाकर देखा तो मदन अपना बेग पेक कर रहा था.. अभी एक घंटे पहले मदन पर बेवजह गुस्सा करने के कारण हुए हल्के से पछतावे के असर में, शीला ने बड़े ही प्यार से पूछा

शीला: "क्या कर रहे हो मदन? अभी शाम को जाना है ना.. इतनी भी क्या जल्दी है..!! आओ थोड़ी देर बेड पर साथ सोते है"

कहते हुए शीला मदन के करीब आई और उसका हाथ खिंचने लगी.. सोना तो बहाना था.. शीला अपनी भूख मिटाना चाहती थी..!!

मदन ने अपना हाथ छुड़ाया और बेग में कपड़े ठुँसता रहा.. वह बोला "अभी राजेश के साथ था तब पीयूष का फोन आया.. आज हमें किसी भी सूरत में बेंक मेनेजर से मिलना ही पड़ेगा.. क्योंकि वह मेनेजर फिर १० दिन की छुट्टी पर जा रहा है.. बैंक बंद होने से पहले हमें पहुंचना होगा.. राजेश अभी पाँच मिनट में गाड़ी लेकर पहुँच रहा है.. उसके आते ही हम तुरंत निकल जाएंगे.. रास्ते में दो घंटे लग जाएंगे"

हताश हो गई शीला,.. वह बेड पर लेट गई और मदन को पेकिंग करते हुए देखती रही.. तभी बाहर से गाड़ी का हॉर्न तीन बार बजा

मदन: "लगता है राजेश आ गया.. मैं निकलता हूँ शीला..!!"

बिना शीला के उत्तर की प्रतीक्षा किए, मदन बेग लेकर तेजी से बाहर निकल गया.. जाते हुए उसने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया और शीला बेडरूम में बिस्तर पर वैसे ही पड़ी रही

काफी लंबे अंतराल के बाद आज शीला अकेलापन महसूस कर रही थी

शीला, जो एक गृहिणी के रूप में अपने जीवन का अधिकांश समय परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में व्यतीत कर चुकी हैं, आज स्वयं को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा पाती हैं जहाँ उसकी सभी जिम्मेदारियाँ समाप्त हो चुकी हैं.. उसकी बेटी की शादी हो चुकी है और आर्थिक रूप से परिवार सुखी है.. परंतु, इस सबके बीच आज शीला स्वयं को अत्यंत एकाकी और अतृप्त महसूस कर रही हैं.. उसका पति मदन, अपने काम में व्यस्त हैं, और जब शीला को उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, तब वह उसके साथ नहीं है.. शीला के शरीर और मन में प्रेम और संभोग की तीव्र इच्छा हो रही है, और आज रसिक भी उपलब्ध नहीं हैं.. यह स्थिति उसे गहरी निराशा और अकेलेपन की ओर धकेल रही थी..

शीला की कहानी केवल एक महिला की नहीं है, बल्कि उन अनेक महिलाओं की है जो मध्यम आयु वर्ग में पहुँचकर स्वयं को शारीरिक और भावनात्मक रूप से अतृप्त पाती हैं.. यह उम्र ऐसी होती है जब महिलाओं के शरीर में हॉर्मोनल परिवर्तन होते हैं, और उनकी शारीरिक इच्छाएँ अधिक प्रबल हो सकती हैं.. परंतु, समाज और परिवार में इस विषय पर चर्चा करने का कोई स्थान नहीं है.. इसलिए, अधिकांश महिलाएँ अपनी इच्छाओं को दबाकर रखती हैं, जो उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है.. खैर..!! शीला उनमें से एक तो नहीं है.. पर आज शीला की हालत खस्ता है..!!

शीला जैसी महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी जटिल तब हो जाती है जब उसके पति उसकी आवश्यकताओं को समझने में असमर्थ होते हैं.. पुरुषों का ध्यान अक्सर काम और अन्य गतिविधियों में इतना अधिक व्यस्त हो जाता है कि वह अपनी पत्नी की भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं.. इसके परिणामस्वरूप, महिलाएँ स्वयं को उपेक्षित और अकेला महसूस करती हैं.. कुछ महिलाएँ, इस अतृप्त इच्छा को पूरा करने के लिए अवैद्य संबंध बना लेती हैं, लेकिन यह समाधान नहीं है.. यह उनके जीवन में और भी अधिक जटिलताएँ लाता है और उसे आत्म-ग्लानि और चिंता से भर देता है..

शीला का मन अब हवस से फड़फड़ा रहा था.. उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था.. तभी उसकी नजर मदन के खुले वॉर्डरोब पर पड़ी.. कपड़ों के पीछे पड़ी शराब की बोतल देखकर शीला की आँखें चमक उठी.. वह खड़ी हुई और जैक डेनियल्स की व्हिस्की की बोतल निकाली.. पीने से पहले उसने सोचा की ठंडे पानी से शावर ले लिया जाएँ..

शीला ने अपने कपड़े उतारे और नहाने चली गई.. बाहर आकर वो आईने में अपने नंगे बदन को हर एंगल से निहार रही थी.. अपनी खूबसूरती की नजर उतारने का मन कर गया उसे.. उसने तय किया की भले ही कहीं बाहर न जाना हो पर वो आज मस्त तैयार होकर शराब पीने बैठेगी

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अलमारी से एक ब्लैक साड़ी निकालकर पहन ली.. नीचे सुनहरे रंग के हाई हिल्स वाले सेंडल पहने.. और ऐसे तैयार हुई जैसे पार्टी में जा रही हो.. वह शराब की बोतल लेकर बाहर आई.. टेबल पर बोतल रखने के बाद वह किचन से बर्फ के टुकड़े ले आई.. बिना पानी एक बढ़िया सा पेग बनाकर, वो पैर फैलाकर बैठ गई और हल्के हल्के पीने लगी..!!

दो पेग पीते ही उसके पूरे बदन में सरसराहट होने लगी.. जिस आग को बुझाने के लिए उसने शराब का सहारा लिया था.. वह आग तो और भी भयंकर तरह से भड़कने लगी.. शीला का दिमाग अब तेजी से चलने लगा.. किसे बुलाएँ जो आकर उसकी हवस मिटा सकें..!!! रसिक तो था नहीं.. रूखी को बुला सकती थी पर अभी जो आग लगी थी वो बुझाने के लिए उसे एक असली मर्द की आवश्यकता थी.. रूखी का नाम लेते ही शीला को, उसके यार जीवा की याद आई.. काफी समय पहले, रूखी ने जीवा और रघु को शीला की घनघोर चुदाई करने भेजा था.. जब मदन विदेश था..!!

जीवा..!!!! हाँ जीवा बढ़िया रहेगा.. बिल्कुल रसिक के जैसा तगड़ा..!! और उसका लंड रसिक के मुकाबले एक इंच बड़ा था.. इस जीवा की याद पहले क्यों नहीं आई..!!!

अपने मोबाइल में शीला उसका नंबर ढूँढने लगी.. आखिर नंबर मिल गया और उसने फोन लगाया

जीवा: "कौन?"

शीला: "पहचाना नहीं?? मैं शीला.. कुछ महीनों पहले तुम और रघु आए थे मेरे घर रात को.. रूखी ने भेजा था"

कुछ पल तक जीवा ने जवाब नहीं दिया.. फिर दिमाग पर जोर लगाते ही बत्ती जली

जीवा: "अरे हाँ.. आप..!! बताइए कैसे याद किया"

शीला: "उसी बात के लिए जिस लिए तुम पहले आए थे.. आ सकते हो अभी?"

जीवा: "अभी?? अभी तो मैं नौकरी पर हूँ"

शीला: "तो नहीं आ सकते क्या?"

जीवा: "अगर कल आऊँ तो कैसा रहेगा? मैं छुट्टी लेकर आ जाऊंगा"

शीला: "कल नहीं आज.. हो सके तो अभी"

कुछ सोचकर जीवा ने कहा "ठीक है.. मैं कोशिश करता हूँ"

शीला: "कोशिश नहीं.. पक्का बताओ.. आ रहा है या नहीं?"

जीवा: "ठीक है.. थोड़ा वक्त दीजिए, मैं आपके घर पहुंचता हूँ"

शीला ने फोन काटा और शराब की बोतल अपने मुंह से लगाकर एक घूंट लगा दिया.. गले से लेकर पेट तक जलन होने लगी..!! पर उसे अच्छा लगा.. जिस्म की आग थोड़ी देर के लिए क्षुब्ध हो गई.. कुछ देर बाद शीला ने और दो घूंट ऐसे ही लगा दिए..

शराब अपना रंग दिखाने लगी.. शीला को घर की दीवारें गोल गोल घूमती नजर आ रही थी..

शीला किसी तरह अपने बेडरूम में पहुँची.. नशे और अपनी हवस में उसे दरवाजा बंद करने का भी होश नहीं था.. खड़े-खड़े ही उसने फटाफट अपनी साड़ी उतार फेंकी और आननफ़ानन पेटीकोट भी उतार दिया.. पैंटी के ऊपर से उसने अपनी चूत पर अपना हाथ रखा तो चूत इतनी गर्म महसूस हुई कि शीला को लगा कि उसकी हथेली पर छाले पड़ जायेंगे.. साथ ही पैंटी इतनी तरबतर थी कि शीला की हथेली भी भीग गयी.. उसने अपनी अंगुलियाँ पैंटी के इलास्टिक में डाल कर पैंटी नीचे खिसकायी और निकाल कर एक तरफ उछाल दी.. दीवार पर कपड़े टाँगने के लिए हुक लगा था और शीला की चूत-रस से तरबतर पैंटी उछल कर उसी में अटक गयी.. कुछ पलों में उसकी ब्रा भी ऊपर पंखे पर लटकी हुई थी..

जितनी देर तक शीला नंगी हो रही थी, वो नशे में खड़ी-खड़ी आगे पीछे गिरती हुई डगमगा रही थी.. शीला ने झुक कर अपनी चूत निहारी और उसे ताज्जुब हुआ कि आज उसमें से इतना रस क्यों टपक रहा होगा..!!! उसे ऐसा लगा जैसे ज़िंदगी में पहले उसकी चूत इस कदर नहीं भड़की थी.. उसकी चूत की गुलाबी फाँकें ऐसे खुली हुई थी जैसे कि मोतियों जैसी शबनम की बूँदों से भीगी हुई किसी गुलाब की कली की पँखुड़ियाँ खिल रही हों.. उसकी चूत की दरार ने फैल कर अंडे का आकार धारण कर लिया था और चूत की अंदरूनी परतें योनिरस के झाग से भीगी हुई नज़र आ रही थीं.. उसकी तनी हुई गुलाबी क्लिट भी बाहर को खड़ी थी.. चूत-रस की कईं धारें चू कर शीला की अंदरूनी जाँघों से नीचे बह रही थीं..

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शीला ने अपनी अँगुलियों को अपनी चूत पे फिराया तो उसे अपनी अंगूर जैसी बड़ी क्लिट थिरकती हुई महसूस हुई.. उसने धीरे से सहलाते हुए अपनी अँगुलियाँ चूत के अंदर खिसका दीं.. उसकी चूत में लहरें उठने लगीं और उसके हाथ में और ज़्यादा चूत-रस बह निकला.. वो दोनों हाथों से अपनी चूत रगड़ने लगी.. वो वहीं फॉयर-प्लेस के पास खड़ी-खड़ी ही अपनी चूत की गर्मी कम कर लेना चाहती थी.. लेकिन उसकी टाँगें बुरी तरह काँप रही थीं और नशे में उन हाई हील सैंडलों में वो टिक कर खड़ी नहीं हो पा रही थी.. शीला को लगा कि कहीं वो गिर ना पड़े..

शीला लड़खड़ाती हुई पास ही रखी चमड़े की कुर्सी पर जा का इस तरह बैठ गयी कि उसकी ठोस गाँड सीट के किनारे पर टिकी थी और उसकी लंबी टाँगें फैली हुई थीं.. उसी पल उसकी चूत में से रस बह कर यास्मीन की गाँड के नीचे लैदर की सीट पर फैल गया.. एक पल के लिए अपनी चूत को बगैर छुए शीला ने सारस की तरह अपनी सुराहीदार गर्दन आगे को निकाल कर अपना सिर झुकाया.. शीला झड़ने के लिए तड़प रही थी लेकिन फिर भी वो उसे टाल रही थी.. उसे एहसास था कि आज उसका झड़ना निहायत ही तूफानी और ज़बरदस्त होगा और वो चूदासी औरत इसी उम्मीद में हवस में मदमस्त हो रही थी..

थोड़ा और नीचे झुक कर शीला ने अपनी टाँगों के बीच में फूँक मारी.. उसकी क्लिट धधकने लगी और चूत जलती हुई मालूम हुई जैसे कि उसने सुलगती हुई लकड़ी में अपनी साँस फूँक कर उसमें आग भड़का दी हो.. अपनी चूत की शदीद गर्मी का झोंका उसे अपने चेहरे पर महसूस हो रहा था.. अपनी ही चूत की तेज़ खशबू से उसकी नाक फड़क उठी..

शीला अपनी गोद में आगे झुकी.. उसकी ज़ुबान उसके निचले होंठ पर आगे-पीछे फिसलने लगी.. उसके मुँह में उसके झागदार थूक के बुलबुले उठने लगे.. शीला सोच रही थी कि काश वो इतनी लचकदार होती कि खुद अपनी चूत चाट सकती.. उसे अपनी चूत इतनी ज़ायकेदार और आकर्षक लग रही थी कि उसे अपनी ज़ुबान भी अपनी क्लिट जितनी ही गरम महसूस होने लगी.. कितना मज़ेदार होता अगर वो अपनी खुद की चूत चाट सकती और अपनी फड़फड़ाती ज़ुबान पर झड़ सकती.. कितना जबरदस्त मज़ा आता अगर वो अपनी खुद की ही चूत का गरमागरम रस अपने ही मुँह में बहा सकती.. झड़ते हुए अपनी ही चूत से लेसदार चिपचिपा रस पीने की दोहरी लज़्ज़त कितनी बेमिसाल होती..!! ये ख़याल उसे और उत्तेजित कर रहे थे और साथ ही तड़पा भी रहे थे क्योंकि वो जानती थी कि ये उसके बस की बात नहीं है.. उसने पहले भी कई बार कोशिश कर रखी थी..

हांफते हुए फिर से पीछे हो कर शीला अपनी गर्म और गीली अंदरूनी जाँघों पर अपने हाथ फिराने लगी.. उसकी गाँड नीचे की सीट पर मथ रही थी और उसका पेट ऊपर-नीचे हो रहा था.. उसने अपना एक हाथ चूत की मेंड़ पर रखा और उसकी अँगुलियाँ फिसल कर क्लिट को आहिस्ता से सहलाने लगी..

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शीला ने अपने दूसरे हाथ की चार अंगुलियाँ आपस में जोड़कर लंड की शक्ल में इकट्ठी करीं और धीरे से चूत में अंदर घुसा दीं.. उसकी क्लिट हिलकोरे मारने लगी और चूत से बहुत सारा झाग निकलने लगा..

शीला थरथराते हुए सिसकने लगी.. वो एक हाथ की अंगुलियों से अपनी चूत को चोद रही थी और दूसरे हाथ से अपनी क्लिट सहला रही थी.. उसकी जाँघें हिलोरे मारते हुए झटक रही थीं.. वो जानती थी कि आज पूर्ण तसल्ली के लिए उसे एक से ज़्यादा बार झड़ना पड़ेगा..

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उसकी पलकें बंद हो गयी और उसके हाथ मेहनत करते हुए एक मलाईदार स्खलन पर पहुँचने के लिए मेहनत करने लगे.. उसकी चूत जितनी गर्मी ही उसके दिमाग में भी चढ़ी हुई थी.. कई तसवीरें उसके दिमाग में पुरजोश नाच रही थीं.. बारबार उसके ख्यालों में रसिक के गधे जैसे लंड की तसवीर ही आ रही थी..

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ज़ोर से हिलकोरे मारती हुई एक लहर उसके पेट और चूत में दौड़ गयी.. हांफते हुए शीला ने अपनी चारों अंगुलियाँ पूरी की पूरी अपने भोसड़े में घुसा दीं.. दूसरे हाथ से अपनी क्लिट को जोर से रगड़ते हुए शीला अपनी तरबतर चूत के अंदर चारों अंगुलियाँ घुमाने लगी..

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अचानक ही वो बदहवास होकर झड़ने लगी.. एक पल वो आनंद के उच्च शिखर की बुलंदी पर मंडरा रही थी और दूसरे ही पल उसका भोसड़ा ज्वालमुखी की तरह फट पड़ा..

एक के बाद एक लहर उसके शरीर में हिलोरे मारती हुई दौड़ने लगी और एक के बाद एक ऐंठन उसकी चूत और जाँघों को झंझोड़ने लगी.. शीला को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसका पूरा जिस्म पिघल रहा है और रगों में चुदासी मस्ती की करोड़ों चिंगारियाँ फूट रही हैं और जैसे उसका दिमाग फट जायेगा और उसकी चूत का रस फव्वारे की तरह बाहर उड़ेगा..

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शीला आगे झुकी और फिर कमर पीछे मोड़कर अपनी चूत को अंगुलियों से लगातार चोदते हुए बदमस्त अपनी चूत का रस निकालने लगी और ऑर्गैज़्म की लहरें सिलसिला-वार फूटने लगी.. उसकी चूत का रस उसके पेट के नीचे झाग बनाने लगा और उसकी धारायें टाँगों से नीचे बहने लगी.. उसकी क्लिट में भी बार-बार धमाका होने लगा और हर धमाके के साथ उसकी चूत की गहराइयों से चूत-रस की धार फूट पड़ती..


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चूत मे जुनूनी लज़्ज़त की एक जोरदार आखिरी लहर ने उसे झंझोड़ कर रख दिया और शीला हाँफती हुई कुर्सी पर पीछे फिसल कर मुस्कुराने लगी.. उसकी अंगुलियाँ अभी भी उसकी चूत में आंदोलन कर रही थी कि कहीं कोई सनसनी ख़ेज़ लहर अंदर ना रह जाये.. उसकी हवस कुछ कम हुई पर जैसे-जैसे उसने अपनी चूत को सहलाना जारी रखा, उसकी क्लिट फिर से तनने लगी.. इतनी बार झड़ने के कुछ ही पलों के बाद वो चुदक्कड़ औरत फिर से हवस से भर गयी थी..


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शीला की हवस इतनी बढ़ गयी थी कि उसकी चूत में ऐसा महसूस हो रहा था मानो आग की लपटें धधक रही हो..!!

तभी दरवाजे पर दस्तक पड़ी.. बेड पर निर्वस्त्र अवस्था में पड़ी शीला उठ खड़ी हुई.. अपने नंगे बदन पर उसने गाउन डाल लिया.. और लड़खड़ाते कदम से चलते हुए बाहर गई.. दरवाजा खोलते ही जीवा नजर आया.. शीला ने इशारे से उसे अंदर आ जाने के लिए कहा और उसके अंदर घुसते ही शीला ने.. अगल बगल नजर डालकर, दरवाजा बंद कर दिया..
Nice we waiting for something new and different
 
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