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Incest संस्कारी परिवार की बेशर्म कामुक रंडियां। अंदर छुपी हवस जब सामने आयी ।

किस तरह की कहानी चाहते हैं आप , Tell me your taste .


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Rachit Chaudhary

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Rachit Chaudhary

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Tumhare kahani par like aur comments bhi karna bekar lagta hai kyuki ek update dene me 10 - 15 lagate ho tumhe week me kam se kam 3 update dene chahiye
Achha dost
 
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Rachit Chaudhary

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बिंदास अपडेट था भाई...
मज़ा आ गया ....
Thanku jaan
 
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Rachit Chaudhary

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Rachit Chaudhary

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आपके अपडेट का जबाब नही रचित भाई।जमकर गाँड़ मारो साली की।
Dil se dhanyawad bhai
 
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Kabir

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jabaradast update bhai

aise hi uppdate regular dete rho...........


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Incestlala

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Update - 29.

Hi दोस्तों । माफी चाहता हूं काफी इंतजार कराया । छोटा भाई समझकर माफ करना और इस update का लुफ्त और आनंद लेना ।

*******

अगले दिन शालिनि , आरती और बलवीर दिन में खूब जगहों पर घूमे । ढेर सारी शॉपिंग की उन्होंने ।
बलवीर ने आरती के सामने ऐसी कोई भी प्रितिक्रिया नही दी जिससे आरती को शक हो कि बलवीर और उसकी भतीजी शालिनि के बीच कोई खिचड़ी पक रही है । लेकिन अंदर ही अंदर बलवीर सोच में डूबा था कि शालिनि ने आखिर अपने भाई को क्यों मारा , इसके पीछे क्या वजह है ।

उधर शालिनि भी सोचों में डूबी हुई थी लेकिन वो ये सोच रही थी कि आखिर बलवीर को कैसे रास्ते से हटाया जाए ।
हां दोस्तो शालिनि अपने चाचा बलवीर को भी अपने भाई राकेश की तरह भगवान को प्यारा करने की योजना पर मन ही मन मे मंथन करने लगी थी ।

डिनर करने के बाद सब सोने की तैयारी कर रहे थे ।
आरती अपने मोबाइल में घुसी पड़ी थी क्योंकि वो सलमान से चैटिंग कर रही थी मैसेज द्वारा ।
शालिनि लैपटॉप में कोई गेम खेल रही थी ।
बलवीर अपने लैपटॉप में कुछ ऑफिसियल वर्क कर रहा था ।

तकरीबन आधे घंटे बाद आरती वाशरूम जाने के लिए उठी तभी बलवीर की नजर आरती के चहरे पर पड़ी ।
बलवीर को कुछ अटपटा सा लगा क्योंकि आरती मुस्कुराती हुई मोबाइल हाथ मे लेकर उठी थी ।

बलवीर सोच रहा था कि आखिर ऐसी क्या बात हो सकती है जो आरती का चेहरा इतना खिला हुआ है । क्या आरती का कोई बॉयफ्रेंड है ।
--- नही नही आती ऐसी नही है । और वैसे भी मेरी आरती बहन विधवा है ।

अपने दिमाग को झटकते हुए बलवीर ने सोचा ।

------ वक्त था रात के 1 बजे --------
सब सो चुके थे । तभी बलवीर की आंखे खुली । दोस्तो बलवीर की आंखे कोई नींद से नही खुली थी बल्कि बलवीर ने आंखे बिल्कुल ऐसे खोली थी जैसे कोई आंख बंद करके सोने का बहाना कर रहा हो और फिर अचानक से अपनी आंखों को खोल ले । जैसे मूवी में जब विलेन मरने का नाटक करता है और फिर एकदम से आंखे खोल लेता है, बिल्कुल इसी तरह आंखे खोली थी बलवीर सिंह ने ।

बलवीर ने फिर एक नजर आरती और शालिनि पर डाली । दोनों सो रही थीं गहरी नींद में ।
बलवीर धीरे से आरती के पास आया और कुछ ढूंढने लगा । तभी उसने तकिया के नीचे हाथ डाला तो उसके हाथ मे आरती का मोबाइल आगया ।

बलवीर ने मोबाइल हाथ मे लिया और चुपके से वापस अपनी जगह पर लेट गया । बलवीर मोबाइल का लॉक खोलने की कोशिश करने लगा । कई पैटर्न डालने के बाद भी जब लॉक नही खुला तो हताश सा हो गया बलवीर । फिर अचानक उसके मन मे एक आईडिया आया और उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान फैल गयी ।

बलवीर धीरे से उठकर दोबारा आरती के पास गया । उसने धीरे से मोबाइल के फिंगरप्रिंट सेंसर को आरती की उंगली से लगाया ,
बलवीर फिर उदास हो गया क्योंकि मोबाइल नही खुला ।
बलवीर ने फिर से दूसरी उंगली से लगाया तब भी नही खुला ।
फिर बलवीर ने लास्ट वाली सबसे छोटी उंगली से लगाया अचानक से मोबाइल अनलॉक हो गया ।
बलवीर का चेहरा ख़ुसी और प्रसन्नता के भावों से भर गया ।

बलवीर फिर वापस अपनी जगह पर आकर लेट गया ।
बलवीर ने सबसे पहले गैलरी खोली उसे कुछ नही मिला, बस आरती के फोटोज और कुछ वीडियो पड़ी हुई थीं । फिर उसने कॉल लॉग खोला उसे तब भी कुछ नही मिला ।
फिर उसने व्हाट्सएप खोला उसे वहाँ भी कुछ नही मिला ।

फिर बलवीर के मन मे पता नही क्या आया उसने मोबाइल का इनबॉक्स यानी मैसेज एप्प खोल लिया ।
बलवीर की नजर एक नाम पर पड़ी जो था - सलमान ।

बलवीर ने मैसेज खोली तो उसकी आंखें खुली की खुली रह गयीं , क्योंकि सलमान के साथ एक लंबी कन्वर्सेशन थी उसमे ।
बलवीर आज की चैट पढ़ने लगा ।

सलमान - hi

आरती - hi

सलमान- कैसी हो आरती जी आप । लगता है कि आप हमें भूल गयी हो ।

आरती - ऐसा कुछ नही ह सल्लू मियां । मैंने बताया था ना आपको भईया के साथ घूमने आई हूँ ।

सलमान - हम्म बताया था तुमने । और बताओ वापस कब आरही हो ।

आरती - एक दो दिन और लगेंगे अभी । वैसे तुमको क्या करना है मुझे बुलाकर ।

सलमान - करना तो कुछ नही है बस मिलने का मन था आपसे ।

आरती - ना बाबा ना । मुझे नही मिलना आपसे ।

सलमान - क्यों ।

आरती - क्योंकि मुझे डर लगता है आपसे ।

सलमान- डर hahaha और वो भी तुम्हे ।

आरती - इसमे हसने वाली क्या बात है ?

सलमान- रहने दो ,अब नहीं बता रहा वरना तुम फिर बोलोगी की मैं बदतमीजी करता हूँ ।

आरती - बदतमीजी में तो आपने पीएचडी की हुई है , तो बदतमीजी करने से आप वैसे भी बाज नही आते । पर मैं ये जानना चाहती हूं कि मुझे तुमसे मिलने में डर क्यों नही लग सकता ।

सलमान - आरती जी वो इसलिए क्योंकि अगर तुम्हारे जैसे फिगर की औरत भी डरने लगी तो बाकी स्लिम लड़कियों का क्या होगा ।


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आरती - अब डर से फिगर का क्या कनेक्शन सलमान जी ।

सलमान - कनेक्शन है तभी तो बोला है आरती जी । तुम क्या चाहती हो कि तुमसे कोई दुबला पतला इंसान मिले ।

आरती - नही ऐसा नही चाहती मैं ।

सलमान - तो बताओ फिर क्या चाहती हो ?

आरती की तरफ से फिर 3 मिनट तक कोई रिप्लाई नही किया गया । फिर कुछ देर बाद आरती ने रिप्लाई किया । शायद आरती हिम्मत जुटा रही होगी कुछ बोलने के लिए । लेकिन आरती तो अपनी भावनाएं अपने एक दोस्त सलमान के सामने रख रही थी । आरती को क्या पता था कि सलमान कोई और नही बल्कि उसका बड़ा भाई धर्मवीर ही सलमान बना बैठा है ।

आरती - दुबला पतला क्यों चाहूंगी मैं तो हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त दोस्त चाहती हूं ।

सलमान - क्यों चाहती हो हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त दोस्त।

आरती - ये भी कोई पूछने वाली बात है ।

सलमान - क्यों मुझसे पूछो की तुम क्यों चाहती हो हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त दोस्त । मैं बता सकता हूँ ।

आरती - अच्छा साहब । चलो तुम ही बताओ ।

सलमान - फिर ये मत कहना कि बदतमीजी पर उतर आए ।

आरती - अच्छा बाबा नही कहूंगी ।

सलमान - तो सुनो , तुम इसलिए चाहती हो हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त दोस्त ताकि वो तुम्हे अच्छे से संतुष्ट कर सके । दुबले पतले मर्द के बसकी बात नही है तुम जैसी घोड़ी की सवारी करना ।

आरती - shutup .... मैं तुम्हे घोड़ी नजर आती हूं क्या ?

सलमान - और नही तो क्या । तुम जैसी घोड़ी को लगाम डालने के लिए मेरे जैसे हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त मर्द की ही जरूरत पड़ेगी ।

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आरती - अच्छा जी आपको तो बहुत पता है । और फिर तो तुम भी घोड़ा हो ।

सलमान - हां मैं तू हूं घोड़ा कब मना किया मैंने ।

आरती - अच्छा घोड़े जी ।

सलमान - हम्म घोड़ी जी । अब बताओ ना कब मिल रही हो ।

आरती - जब आप चाहो ।

सलमान - संडे को फ्री हो ।

आरती - ओके डन ।

सलमान - ठीक है तो मिलते है संडे दोपहर 12 बजे ।

आरती - दोपहर को नही शाम को । एक रात के लिए।

सलमान - ओह मेरी घोड़ी चाहती है कि रात भर मेरा बाजा बजे ।

आरती - छी कितने गंदे हो तुम ।

सलमान - तो रात में क्या पूजा पाठ करोगी ।

आरती - तुमसे कोई नही जीत सकता ।

सलमान - अच्छा बताओ क्या करोगी रात को ।

आरती - मुझे नही पता ।

सलमान - तुम्हे मेरी कसम है अगर तुमने अपने दिल की बात नही बोली तो ।

फिर आरती की तरफ से फिर 3 मिनट तक कोई रिप्लाई नही किया गया । फिर कुछ देर बाद आरती ने रिप्लाई किया । शायद आरती हिम्मत जुटा रही होगी कुछ बोलने के लिए ।


आरती - कसम मत दो मुझे ।

सलमान - बोला ना । अगर कुछ मानती ही तो दिल की बात बोलो । मेरी कसम है आपको ।

आरती - चुदने आऊंगी अपने घोड़े से रात भर के लिए ----- अब खुश ।

सलमान - haye तेरी चूत का भोसड़ा नही बनाया तो मैं भी सलमान नही ।

आरती - हट्ट गंदे इंसान । bye पगले ।

सलमान - bye मेरी चुदक्कड़ घोड़ी ।

आरती - ओके bye मेरे चोदू घोड़े ।


बलवीर की आंखे चौड़ी हो गयी यह कन्वर्सेशन पढ़कर । बलवीर ने जल्दी से सलमान का नंबर निकाला और अपने मोबाइल में सर्च मिशन के नाम से सेव कर लिया , और आरती का मोबाइल उसके तकिए के निचे रखकर वापस अपनी जगह पर आकर लेट गया ।

बलवीर की आंखों में नींद दूर दूर तक नही थी । वह सोच में डूबा हुआ था कि पहले तो उसकी भतीजी शालिनि एक शातिर और चालाक निकली और अब उसकी सगी बहन आरती जो एक विधवा है , वो भी no नो नो ---- ये क्या हो गया है मेरे परिवार को । अंदर ही अंदर क्या चल रहा है मेरे परिवार में । अगर आरती धर्मवीर भइया को बोलती तो क्या वो इसकी दूसरी शादी नही करा सकते थे । लेकिन आरती ने बोला क्यों नही । और अगर नही भी बोला तो ये किसी सलमान से इतनी गंदी बाते करने की क्या जरूरत है ।
मैं मानता हूं कि आरती की body की भी कुछ जरूरतें है लेकिन अगर वो बोलती तो क्या हम उसकी दूसरी शादी नही करते । इस तरह रंडपना करने की क्या जरूरत थी ।
क्या आरती जैसी संस्कारी विधवा के पीछे एक रंडी छुपी हुई है । नही ऐसा नही हो सकता । मैं अपनी बहन को किसी गैर इंसान के नीचे नही लेटने दूंगा ।


ये सब सोच ही रहा था बलवीर की तभी उसके दिमाग मे पता नही क्या आया बलवीर चुपचाप उठा और आरती के पास आकर आरती को देखने लगा ।

सुंदरता की मूरत लग रही थी बलवीर की छोटी बहन आरती इस वक्त ।
आंखे बंद थी चेहरे पर बालों की कुछ लटे बिखरी पड़ी थी ।
सीने पर सूट में फसे चूचे नीचे सपाट पेट । पेट से नीचे दोनों जांघो का फैलाव । बलवीर ने देखा कि आरती की जांघो का फैलाव कुछ ज्यादा ही है जिसका मतलब है कि उसकी बहन की जांघे खूब मोटी मोटी हैं । बलवीर का आरती को देखने का नजरिया बिल्कुल बदल गया । अब उसे आरती अपनी बहन नही बल्कि गदराई हुई एक प्यासी छिनाल नजर आरही थी ।


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फिर बलवीर से जब रहा नही गया तो उसने आरती की जांघों पर से उसका सूट ऊपर की तरफ उठा दिया ।

सामने का नजारा देखकर तो बलवीर के लंड ने एक उछाल मारी और बलवीर का थूक उसके हलक में अटक गया । क्योंकि आरती ने नीचे तंग पजामी पहनी हुई थी और उसकी मोटी मोटी जांघे वास्तव में कितनी गदरायी हुई , कितनी मोटी लग रही थी । और दोनों जांघो के बीच मे चूत के पास कितना उठान था जैसे कोई वी शेप का पकोड़ा रखा हो । बलवीर से अब इन्जार करना मुश्किल हो रहा था ।


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बलवीर ने दो मिनट तक इस दृश्य से अपनी आंखें सेकी । फिर अचानक से उसने आरती के हाथ को पकड़कर हिलाया ।

आरती हड़बड़ाकर उठी आरती ने देखा तो बलवीर खड़ा हुआ था । आरती को कुछ समझ नही आया उसने जल्दी से अपना सूट ठीक किया । नाईट बल्ब के अंधेरे में बलवीर का चेहरा भी साफ नही दिख रहा था आरती को ।
आरती ने सवालिया नजरों से बलवीर की तरफ देखा ।

बलवीर ने अपने होठों पर उंगली रखी और आरती के कान के पास अपना मुह लाकर धीरे से बोला - जरा एक मिनट के लिए बाहर आओ ।

आरती को अब तक कुछ समझ नही आया था । आरती चुपके से उठी और चली गयी बलवीर के पीछे पीछे ।
बलवीर बाहर गैलरी पर आकर रुक गया । आरती भी बाहर आकर रुक गयी ।

आरती (चहकती हुई आवाज में भोली सी सूरत बनाकर )- क्या हुआ भईया इतनी रात में सब ठीक तो है ना ।

बलवीर - आरती मैं सोच रहा हूँ तुम्हारी शादी कर देनी चाहिए ।

आरती ( इसबार गुस्से वाला मुह बनाकर ) - भइया आधी रात को अपने मुझे ये बात करने के लिये उठाया है । दिमाग तो ठीक है आपका । और मैंने पहले ही कहा है कि मुझे नही करनी शादी ।

बलवीर - तो चाहती क्या हो तुम आरती । जिंदगी भर बिना शादी के ही रहोगी क्या यूं विधवा बनकर ।

आरती - भईया ये क्या हो गया है आपको । क्यों ऐसी अटपटी बातें कर रहे हैं । और हां मैं अपनी बाकी की जिंदगी अपने पति की यादों में गुजरना चाहती हूं ।


बलवीर - अच्छा चली जैसी आपकी मर्जी ।

आरती ने सोचा हो सकता है किसी ने भईया को ज्यादा force किया हो या भईया को अभी कुछ पता चला हो । ऐसा सोचते हुए आरती बोली - वैसे कौन है वो जिससे आप मेरी शादी करना चाहते है ।

बलवीर - मैं खुद हूँ वो ।

ये सुनते ही आरती हैरान रह गयी । वो गुस्से से एकटक बलवीर को देखने लगी । तभी ऊंची आवाज में बोली ।

आरती - छी कितने गंदे इंसान हो आप । मैं सोच भी नही सकती थी । मैं अभी धर्मवीर भईया को फोन लगाती हूं देखना वो आपको जिंदा नही छोड़ेंगे । और वैसे भी कोई हक नही है इतनी गंदी नजर वालों को जीने का ।

आरती जैसे ही मुड़ी तुरंत बलवीर बोला ।

बलवीर - हां धर्मवीर भैया को ये भी बता देना कि मैं सलमान से चुदने का वादा कर चुकी हूं । यही है ना सलमान का नम्बर, अपने मोबाइल में सलमान का नम्बर दिखाते हुए बलवीर बोला ।

इतना सुनते ही आरती खड़ी की खड़ी रह गयी । उसे यह समझ नहीं आया की बलवीर को उसके और सलमान के बारे में कैसे पता चला , जबकि आरती का मोबाइल भी उसी जगह रखा था जहां वो रखकर सोई थी । आरती को कुछ भी समझ नही आरहा था । आरती भोलेपन का नाटक करते हुए बोली जैसे उसे कुछ पता ही ना हो ।

आरती - क-कौन सलमान । मैं किसी सलमान को नही जानती ।

अब बलवीर के लिए ये एक उल्टा पासा फेंका आरती ने ।

बलवीर ने मन ही मन सोचा यदि मैंने इसको ये बताया कि तेरा मोबाइल चेक किया है मैंने तो ये मुझे हल्के में लेगी ।

इसलिए बलवीर ने अपना दिमाग चलाते हुए कहा- वाह अब तुम किसी सलमान को जानती नहीं हो । तुम क्या समझती हो मैं पागल हूं । जिस दिन सलमान ने तुमसे पहली बार बात की थी मुझे उसी दिन से पता है, और अब यह बात मैं धर्मवीर भैया को बताऊंगा सबूत के साथ। तुम नहीं जानती हो ना किसी सलमान को, कोई बात नहीं । जाकर सो जाओ ।

इतना कहकर बलवीर ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और सिगरेट पीने लगा ।
आरती के लिए अब आगे कुआं पीछे खाई जैसी स्थिति हो गई थी , क्योंकि आरती जानती थी अगर बलबीर ने धर्मवीर भैया को बताया तो धर्मवीर अपने गुस्से में कुछ भी कर सकता है । जो धर्मवीर उसकी इतनी इज्जत करता है वही धर्मवीर भैया उसे घर से निकाल देंगे। इतना सोचते ही कांप गई आरती ।
आरती को क्या पता था कि सलमान कोई और नहीं धर्मवीर ही है । वह तो बस फंस चुकी थी और बलवीर उसे ब्लैकमेल करने की पूरी कोशिश कर रहा था । आरती 1 मिनट तक वहीं चुपचाप चुपचाप खड़ी रही । 1 मिनट बाद उसके मुंह से निकला।

आरती - तुम क्या चाहते हो ।

बलवीर - मैं चाहता हूं यह जानना कि तुमने ऐसा क्यों किया ।

आरती - मुझे इस बारे में कुछ बात नहीं करनी। मुझे कुछ नहीं पता ।

बलवीर - तो मैंने कब कहा तुम्हें पता है । मैंने तो कह दिया पहले ही जाकर सो जाओ । धर्मवीर भैया जब पूछेंगे तब तुम्हें सब कुछ पता होगा। चलो जाओ सो जाओ ।

इतना बोल कर बलबीर फिर सिगरेट पीने में मगन हो गया ।


आरती - भैया मुझसे गलती हो गई मुझे माफ कर दो । प्लीज धर्मवीर भैया को इसबारे में कुछ मत बताना।

बलवीर - आ गई ना लाइन पर । तूने क्या सोचा था मैं तेरी खुशामद करूंगा। मैं क्यों करूं खुशामद । खुशामद तो तुझे करनी पड़ेगी मेरी। ठीक है नहीं बताऊंगा लेकिन बदले में मुझे कुछ चाहिए ।

आरती- बोलो क्या चाहिए तुम्हें ।

बलवीर - यहां से जाकर सीधे बाथरूम में चलो मैं वहीं आता हूं ।

आरती इतना सुनकर सवालिया नजरों से बलवीर की तरफ देखने लगी और बोली - बाथरूम में क्या बात करनी है आपको । यहीं पर कर लो ।


बलबीर - यहां पर बाहर से कोई हमें खड़े हुए देख सकता है और हर कोई यही सोचेगा यह लोग पता नहीं इस वक्त क्या बात कर रहे हैं । इसलिए बाथरूम में बात करनी है ।

अब आरती को बलवीर की बातें अटपटी लगने लगी थी । उसने फिर बलवीर की तरफ सवालिया नजरों से देखा और बोला ।


आरती - तो बाथरूम में अब बात ही क्या करनी है ।

बलवीर थोड़ा सा गुस्से में- अब तू मुझसे सुनना ही चाहती है तो सुन । तुझे चेक करना है , मैं भी तो देखूं मेरी जो बहन इतनी सीधी साधी और संस्कारी बनती है आखिर वह दिखती कैसी है। तेरी गांड की इस चौड़ाई को नाप कर देखना ही पड़ेगा ।

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बलवीर के मुंह से ऐसी खुल्लम-खुल्ला बातें सुनकर आरती डर गई , साथ में शर्म से भी दोहरी हो गई ।


आरती - जरा तमीज से बात कीजिए ।

बलवीर - तमीज से और वह भी तुझसे जो दूसरों के नीचे लेटने के लिए मरी जा रही है । पता नहीं किस सलमान से अपनी चूत को ठंडा करना चाहती है। अब अगर एक भी शब्द फालतू बोली तो इसी वक्त अपना बैग उठाकर धर्मवीर भैया के पास चला जाऊंगा, फिर अपनी मां चुदाती रहना, इसलिए अगर चाहती है कि सब कुछ ठीक रहे तो चुपचाप बाथरूम में मिल । मैं सिगरेट खत्म करके आता हूं ।


अब आरती के पास कोई ऑप्शन नहीं बचा था। आरती 1 मिनट तक चुप खड़ी रही फिर गुस्से से कमरे में घुस गई ।
अपनी सिगरेट खत्म करने के बाद बलवीर कमरे में आया तो शालिनी सोई हुई थी और आरती बेड पर नहीं थी । बलवीर समझ गया की आरती बाथरूम में पहुंच गई है ।

बलवीर ने बाथरूम का दरवाजा देखा जो लॉक नहीं था । बलवीर बाथरूम का दरवाजा खोल कर अंदर घुसा और दरवाजा लॉक कर दिया।

दोस्तों बाथरूम बहुत बड़ा था लेकिन उसमें अंधेरा ही अंधेरा था क्योंकि आरती ने लाइट ऑन नहीं की थी । बलवीर ने बाथरूम की लाइट ऑन की की तो आरती बाथरूम की दीवार के पास दरवाजे की तरफ पीठ करके खड़ी थी बिल्कुल चुपचाप ।

बलवीर धीरे से आरती के पास गया और उसकी गांड पर हाथ फेरने लगा आरती को जैसे झटका सा लगा ।
आरती कुछ नहीं बोली चुपचाप खड़ी रही लेकिन बलवीर कहां चुप रहने वाला था ।

बलवीर - गांड तो तूने अच्छी खासी रौंदने लायक बना रखी है। तुझ पर चढ़ना मामूली बात नहीं है। तू तो पूरा निचोड़ देगी ।

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आरती ने अपनी आंखें खोली और तिरछी नजर से आंखों में गुस्सा भरते हुए बलवीर को घूरा । लेकिन बलवीर ने तभी बदले में बदले मुस्कुराते हुए आरती की गांड में पजामी के ऊपर से ही उंगली घुसा दी ।

जो आरती अभी गुस्से से बलवीर को घूर रही थी उसका मुंह हल्का सा खुला और हल्की सी सिसकारी निकल गई --- आह ,
अपने सगे भाई की उंगली अपने चूतड़ों के बीच से होते हुए अपनी गांड के छेद पर महसूस की आरती ने।


बलवीर- कितने गहरे चूतड़ हैं तेरे । कैसे बनाए हैं तूने इतने गहरे चूतड़। तेरी तो चूत भी गहरी खाई में होगी। तेरे जैसी को तो संतुष्ट करने के लिए दो-तीन दिन भी कम पड़ेंगे । चल अपने सूट को ऊपर उठा ।

आरती ने अपना सूट ऊपर नहीं उठाया चुपचाप खड़ी रही, तभी बलवीर का एक जोरदार चांटा उसकी गांड पर पड़ा ।

बलवीर - सुनाई नहीं दिया क्या या मुंह में लंड डालकर बताऊं कि सूट ऊपर कैसे उठाते हैं ।
अपनी भारी-भरकम गांड पर चांटा पड़ते ही आरती की गांड हिलने लगी ।शर्म से पानी पानी होकर होकर आरती ने अपनी हिलती हुई गांड पर अपने दोनों हाथ रख लिए, जिससे कि उसकी गांड हिलना बंद कर दे । चूतड़ तो हिलना बंद कर दिए लेकिन बलवीर कहां पीछे रहने वाला था ।
बलबीर ने आरती के बालों को पकड़ा और उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाते हुए उसकी आंखों में देखने लगा । आरती भी बलवीर को घूरे जा रही थी।


बलवीर- कब तक यह शर्म का चोला पहनकर रहेगी। उतार कर फेंक दे इस शर्म के चोले को । मुझे पता है तू लंड की बहुत प्यासी है और तू है कि शर्म ही नहीं छोड़ रही ।
आरती कुछ नहीं बोली बलवीर को घूरते रही ।
तभी बलवीर ने उसके चेहरे को अपनी तरफ को दबाते हुए अपने मोटे मोटे होठों से उसके होठों को भींच लिया ।

यह आरती के लिए बिल्कुल नया था । आरती और बलवीर दोनों की आंखें खुली हुई थी और दोनों एक दूसरे की आंखों में देखे जा रहे थे । तकरीबन 1 मिनट तक बलवीर ने अपने होठों में आरती के होठों को दबाए रखा और एक दूसरे को देखते रहे ।
जब आरती की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं मिला तो बलबीर ने अपने मुंह को और चौड़ा खोला और आरती के होठों को मुंह में भर कर चबाने लग गया । दोनों की सांसें एक दूसरे की सांसो से बुरी तरह टकरा रही थी ।

तकरीबन 1 मिनट तक आरती के होठों को चूसते हुए बलवीर आरती की आंखों में देखे जा रहा था ।
1 मिनट बाद आरती के बालों को पकड़े हुए बलवीर ने आरती के मुंह को पीछे की तरफ झटका जिससे कि बहुत ही तेजी से दोनों के मुंह एक दूसरे से अलग हो गए ।

दृश्य कुछ ऐसा हो गया था कमरे का की आरती बलवीर के सामने खड़ी हुई बलवीर की आंखों में घूरती हुई हांफ रही थी । दोनों की सांसें तेज चल रही थी । तभी बलवीर बोला ।


बलवीर - अब उठा अपने सूट को ऊपर चल ।

लेकिन आरती ने फिर भी कोई रिस्पांस नहीं दिया ना ही अपना सूट ऊपर उठाया ।

अब तो बलवीर को गुस्सा भी आने लगा बलवीर अपने मन में सोचने लगा कितनी ज्यादा हेकड़ी दिखा रही है । मेरे कहने का जैसे इस पर कुछ असर ही ना हो रहा हो । कितनी शरीफ बन रही है मेरे सामने। इसकी गांड की सारी मस्ती अभी झाड़ता हूं ।


बलवीर - तुझे सुनाई नहीं दे रहा ना। तू क्या समझती है कि तेरा सूट मैं ऊपर नहीं उठा सकता , जब मैं तेरे होठों को चूस सकता हूं , जब मैं तेरी गांड पर थप्पड़ मार सकता हूं, जब मैं तेरी गांड में उंगली कर सकता हूं , तो क्या मैं तेरा सूट नहीं उठा सकता । मैं तेरा सूट भी उठा सकता हूं लेकिन मैं नहीं उठाऊंगा क्योंकि अब मेरे सामने अपना सूट तू खुद उठाएगी और अगर तूने 1 मिनट के अंदर अपना सूट नहीं ऊपर किया , तो फिर दो काम होंगे या तो तुझे अभी कमरे में ले जाकर शालिनी के सामने ही नंगी करके पूरे कमरे में दौड़ा-दौड़ा कर चोदूंगा या फिर अपना बैग उठाकर सीधा धर्मवीर भैया के पास चला जाऊंगा । इनमें से जो मेरे मन में आया वह काम मैं करूँगा । अब फैसला तुझे करना है कि तुझे सूट ऊपर करना है या नहीं। ये ले मैं बैठ गया तेरे सामने ।

ऐसा कह कर बलवीर आरती के सामने घुटनों के बल बैठ गया और बलवीर का चेहरा आरती की जांघों के बिल्कुल सामने आ गया। बीच में था तो बस आरती का सूट । आरती अभी भी चुपचाप खड़ी थी तभी अपनी सोच से निकलकर आरती ने अपना चेहरा छत की तरफ उठा दिया और छत की तरफ देखते हुए अपनी आंखें बंद कर लीं जैसे भगवान से कोई गुहार लगा रही हो । 1 मिनट का समय होने वाला था कि तभी बलवीर की तरफ से कुछ हरकत महसूस हुई आरती समझ गई बलवीर अब अपना काम करने वाला है । तभी बिजली की फुर्ती से आरती ने गर्दन नीचे करके बलवीर की तरफ देखा और बोली ।

आरती - रुको क्या चाहते हो तुम कि तुम्हारी बहन तुम्हारे सामने अपना सूट ऊपर उठाये । जितनी गंदी जबान तुमने इस्तेमाल की है शायद ही दुनिया में कोई भाई अपनी बहन के सामने इतनी गंदी जुबान इस्तेमाल कर सकता है । लेकिन जब तुमने अपनी यह गंदी जबान इस्तेमाल कर ही दी है और तुम क्या समझते हो कि मुझे पता नहीं है कि तुम मेरा सूट ऊपर क्यों उठाना चाहते हो , तो यह तुम्हारी गलतफहमी है । मुझे पता है तुम मेरा सूट ऊपर इसलिए उठवाना चाहते हो ताकि तुम मेरी जांघों के बीच मेरी चूत को देख सको । अगर किस्मत को यही मंजूर है तो ले देख अपनी बहन की चूत ।


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ऐसा कहकर आरती ने अपना सूट बिल्कुल अपना नाभि से ऊपर उठा दिया और बलवीर के आगे खड़ी हो गई ।

बलवीर को पहले तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन जैसे ही आरती ने सूट उठाया तो उसकी आंखें चुंधिया गई सामने का नजारा देखकर ।

पजामी में कसी हुई मोटी मोटी जांघें और उसके बीच चूत का हिस्सा जो कि काफी मोटा लग रहा था । और हल्का सा आरती का पेट के नीचे वाला पेड़ू भी उभरा हुआ था । बलबीर बहुत ही मंझा हुआ खिलाड़ी था । बलवीर समझ गया कि पेड़ू उन्हीं लड़कियों का उभरा हुआ होता है जिन की चूत बड़े और मोटे लोड़े की मांग करती है । बलवीर को आरती की मोटी मोटी जांघों को निहारते हुए जब 1 मिनट हो गई । तो उसने फुर्ती से अपने दोनों हाथों को आरती की गांड से लगाया और आरती को अपनी तरफ खींच लिया और अपना मुंह आरती की भारी भारी मोटी मोटी जांघो के बीच बिल्कुल चूत पर लगा दिया ।

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कहानी आगे जारी रहेगी । दोस्तो बताना जरूर कहानी सही दिशा में जा रही है या नही ।
आपका अपना - Rachit
 
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Rachit Chaudhary

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jabaradast update bhai

aise hi uppdate regular dete rho...........


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Dhanyavad bhaisab
 
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