Episode 11.1
रूपा के जाने के बाद कविता वही बेड पर ही पड़ी रही. और पड़े पड़े सोचती ही रही. उसकी सोच बस यही थी. अपना अकेलापन. पर कुछ एक डेढ़ घंटे बाद रूपा फिर डोर पर खड़ी हो गई.
रूपा : (स्माइल ) किस सोच मे डूबी हुई हो बीबीजी???
कविता पेट के बल उलटी ही लेटी हुई थी. उसने थोड़ासा सर ऊपर उठाकर घुमाया. और रूपा की तरफ देख कर स्माइल की. रूपा के हाथ मे कटोरी थी. जिसमे गुन गुना से थोड़ासा ज्यादा गरम लहेसून वाला तेल था. गरम लहेसून की गंध भी आ रही थी.
रूपा आकर कविता की कमर के पास बैठ गई. और एक हाथ से कविता की हिप्स पे रख कर उसे साहलाया. कविता को हलके स्पर्श से ही दर्द महसूस हुआ. वो सिसकने लगी.
कविता : ससससस...
रूपा ने हिप्स को चौड़ा किया. मतलब खोला. दोनों हिप्स के बिच पिछवाड़े के छेद का हिस्सा लाल हो गया था. कविता को तकलीफ हो रही थी. रूपा कटोरी से हलका गरम लहेसून वाला तेल डालती है. जिस से कविता को पहले तो तकलीफ हुई. पर बाद मे आराम मिलने लगा.
कविता : (आंखे बंद, दर्द, सुकून ) अह्ह्ह्ह ससससस.... हहहस्स्स्स ससस...
रूपा : (स्माइल ) अच्छा बीबीजी......???
कविता : (आंखे बंद ) हम्म्म्म...
रूपा : (स्माइल ) क्या उसने अपना पूरा घुसा दिया था क्या???
कविता को लगा जैसे रूपा उस से मज़ाक कर रही है. उसे चिढ़ा रही है.
कविता : मुझे क्या पता. मै उसे घूम कर देख रही थी. हम्म... बात करती हो.
तभि रूपा ने अपनी तेल वाली ऊँगली कविता के पिछवाड़े मे घुसा दी. कविता की दर्द से चीख निकल गई.
कविता : (आंखे बंद, दर्द, जलन ) अह्हह्ह्ह्ह....... ससससस........ क्या कर रही हो. अह्ह्ह्ह सससससस... निकालोओओओओ....... सससससस......
रूपा : (स्माइल, शारारत) देखा नही तो क्या. झेला तो है. अंदर तक. मझा आया या नही.
कविता को पहले तो जलन हुई. लेकिन तेल के कारण राहत भी मिली तो उसने रूपा को रोका नही. उल्टा ऐसे ही पड़ी रूपा को ऊँगली करने देती है.
कविता : (मदहोश, आंखे बंद) अह्ह्ह ससससस.. मझा??? जान निकल गई मेरी. मझा तो सिर्फ उस बेस्टर्ड को आ रहा था.
रूपा : (स्माइल) अरे पहेली बार तो सबको दर्द करता है. (सोचते हुए) पर साला उसे तो बहोत अच्छे से आता है. फिर तेरी हालत कैसे खराब हो गई. कही....
रूपा कविता के पिछवाड़े मे आहिस्ता आहिस्ता ऊँगली किए जा रही थी. पर रूपा के ऐसा बोलने पर कविता वीरू का ही पक्ष लेने लगी.
कविता : नही नही... बोला ना. वो बाहेक गया था. और मेने भी उसे नही रोका.
बोलकर कविता चुप हो गई. कविता को वीरू का ज्यादा पक्ष लेते देख रूपा भी चुप हो गई. पर कविता का दर्द अपने आप उभर आया. और वो जो नही बोलना चाहती थी. वो जुबान पर आ गया.
कविता : पता है रूपा. मुझे यह डर नही है की वो मुझसे प्यार नही करता.
रूपा : तो क्या डर लगता है...... तुम्हे???
कविता : (सोचते हुए, खोई खोई) बस यही की वो मुझसे कही नफरत ना करता हो.
रूपा समझ तो गई की कुछ गड़बड़ है. पर वो बिच मे नही आई. वो कुछ पल बाद बोली.
रूपा : अरे नही करेगा बाबा.....
कविता : अह्ह्ह्हह ससससस...
बोलते हुए रूपा ने पट देकर कविता की हिप्स पर एक चमाट मारी. इस बार कविता को वैसा ज्यादा दर्द नही हुआ. रूपा ने ऊँगली बहार निकल ली थी. वो कविता की हिप्स सहलाने लगी.
रूपा : अब तो वो तुम्हारे इसका दीवाना हो गया है. सिर्फ इसके दम पर तुम जो चाहे वो करवा देना.
कविता ने तुरंत ही रूपा का हाथ झटक दिया. और सर घुमाकर थोड़ा नाराजगी वाला फेस बनाते रूपा को देखने लगी. कुछ पल दोनों शांत रहे तो रूपा फिर वही काम पर लग गई. तेल तो ठंडा हो गया था.
पर वो अब भी कविता को सुकून दे रहा था. दोनों हिप्स के बिच दरारो मे जब वह तेल डालती तो कविता को अच्छा लग रहा था. लेकिन कविता के पास सवालों की कमी नही थी.
कविता : क्या तुम्हे भी पहेली बार दर्द हुआ था???
रूपा : हा.... मेरी भी तुम्हारी तरह ही जान निकल गई थी. पर उसका तुम्हारे वाले जितना बडा नही था. फिर भी. मै तो उस टाइम तुमसे भी ज्यादा दुबली पतली थी.
कविता : कौन था वो??? क्या तुम्हारा हस्बैंड???
रूपा : ना रे. उस बेवड़े के बस का आगाड़ा नही था पिछवाडा क्या होगा. वो तो था साला एक हलकट.
कविता ने फिर सर घुमाकर रूपा की तरफ देखा.
कविता : तो बताओ ना. कौन था वो???
रूपा : मेरे बेवड़े बाप का दोस्त. भूरा. साले ने बिलकुल रहेम नही किया.
कविता ने देखा. रूपा का फेस मूरझा गया है. पर बाप का दोस्त सुनकर वो भी सॉक हो गई.
कविता : क्या??? पर कैसे?? और तुम मान कैसे गई.
रूपा कुछ पल शांत रही. और फिर अपनी कहानी सुनाने लगी.
रूपा : मै तब 18 साल की थी. मै और मेरी माँ सब घरों मे झाड़ू पोछा बर्तन साफ करती. पर मेरा बापू बस शराब पिता रहता. साला दिन रात वो और उसका दोस्त. कभी खोली मे तो कभी ठेके पर. बस शराब.
उस दिन दोपहर का 1 बज रहा था. मै काम से जल्दी आ जाती थी. क्यों की मेरी माँ एक दो घर ज्यादा काम करती थी. इसी लिए वो 4 बजे तक आती. मै आकर खाना बनती. कभी किसी के घर से कुछ खाने को मिलता तो वो भी ले आती. उस दिन भी मै घर आई.
घर आई तो देखा की बापू और उसका दोस्त पकिया दारू पी रहे थे. पकिया साला सूखा दुबला पतला बिलकुल. पर बापू से वो रोज कम पिता था. साला वो मेरेको और मेरी माँ को ताड़ने आता था. माँ को तो वो बिलकुल पसंद नही था. पर साला वो जुवारी था. और साले के पास पैसा बहोत था.
कविता : (स्माइल) मतलब क्या??? तुम्हारी माँ का अफेयर था उसके साथ???
इस बात पर रूपा को भी हसीं आ गई.
रूपा : (स्माइल, शारारत) कच.... (मुँह से आवज) उसको तो माँ चुतिया बनती थी. कुछ करने ठोड़ी देती थी. मूरझाया चहेरा.
कविता : तो फिर तुम....
रूपा : उस दिन मै काम से आई. बापू और पकिया खोली के बहार चारपाई डालकर दारू पी रहे थे. मै जिनके यहाँ काम करती थी. उनके बच्चे का बर्थडे था. तो खाना मै वही खाकर भी आई थी. और लेकर भी आई थी. मेने बापू से खाना खाने को बोला.
पर वो तो पकिया के साथ दारू पिने मे मस्त थे. मै खाना रख कर खाने का बोली. और अंदर खोली मे आकर लेट गई. मुझे नींद आ गई. काम करने के बाद बहोत गहेरी नींद आती है. मै भी बहोत गहेरी नींद मे थी.
पर मुझे कुछ गुद गुदी महसूस होने लगी. थोड़ा गिला गिला लग रहा था. मझा भी बहोत आ रहा था. (स्माइल) ऐसा लग रहा था. जैसे मै हवा मे उड़ रही हु. तभि मेरी नींद खुल गई. मुझे लगा की मेरी दोनों टांगो के बिच कुछ है.
कविता : (सॉक) तो क्या वो तुम्हारा रेप कर रहा था???
रूपा : (स्माइल) अरे नही बीबीजी. वो तो साला चाट रहा था.
कविता को हसीं नही आई. उसे उल्टा गुस्सा आया.
कविता : वो तुम्हारी मर्जी के बिना तुम्हे हाथ लगा रहा था. और तुम ऐसे बोल रही हो जैसे....
रूपा ने कविता की बात काट दी.
रूपा : हाथ लगता तो साले का हाथ काट डालती मै. पर साला हाथ नही जीभ लगा रहा था. साले से कुछ होता नही था. उसको बस मुँह लगाने का सोख था. और उसे पता था की मै मरवा कर आई हु.
कविता फिर सॉक हुई. पर उसे हसीं भी आई.
कविता : एए एक मिनट. मरवाके आई मतलब सेक्स कर के आई थी???
रूपा कविता से बड़ी भी थी. और बेसर्म भी. फिर भी वो शर्मा गई. और एक्ससिटेड होते हुए हा मे सर हिलाया.
रूपा : (स्माइल, एक्ससिटेड) मेरा बॉयफ्रेंड कुट्टन.
कविता : (स्माइल) अरे वाह. तुम्हारा भी बॉयफ्रेंड था??
रूपा : (स्माइल) हा बीबीजी. वो मद्रासी था. टेक्सी चलाता था. और मुझसे बहोत प्यार करता था.
बोलते बोलते रूपा मायूस हो गई.
कविता : तो क्या हुआ?? तुमने उस से शादी क्यों नही की??
रूपा : (मायूस) क्यों की साला पकिया के साथ मुझको वो देख लिया.
कविता : पर तुम तो कहे रही थी की पकिया कुछ कर नही पाता था.
रूपा : वही तो बीबीजी. उस दिन मुझे पकिया का चस्का लग गया ना. साला उस दिन मेने माँ की मैक्सी पहनी हुई थी. मै लेटी हुई थी. मुझे अच्छा लगा. पर नींद खुली तब मेने देखा की मेरी मैक्सी पूरी ऊपर उठी हुई थी. झंगो तक. और मेरे दोनों टांगे भी खुले थे. और वो साला मेरी दोनों टांगो के बिच मुँह लगाकर चाट रहा था.
मै उसे धक्का दिया. वो मुझे दूर हुआ. मेने देखा की मेरा बापू दारू के नशे मे धुत पड़ा हुआ है. मै उसपर गुस्सा हो गई. और उसे धमका दिया.
मै (रूपा) : (गुस्सा) साले हलकट. यह क्या कर रहा है. मै तो तेरे दोस्त की बेटी हु ना. साले अपने ही दोस्त के साथ धोखा करेगा. मै रुक अभी पोलिस स्टेशन जाती हु.
पकिया : ओय रुक रुक. तू भी कोई दूध की धूलि नही है. और फिकर मत कर. मै कुछ करूँगा नही. मेरे को बस चाटने मे मझा आता है.
वो आगे बढ़ा तो मेने उसके मुँह पर लात मारी. उसे लगी पर उसने मेरा पाऊ पकड़ लिया.
पकिया : ससससस अबे साली क्या करती है. तू पैसे ले ले.
उसने जेब से पैसे निकले. कुछ सो सो की नोट थी. उसने मुझे 300 रूपय दिए. मुझे भी पता थी. माँ भी उस से वही करवाती थी. और मझा भी मुझे बहोत आया तो मै मान गई. मै कुछ नही बोली तो वो समझ गया. मेरे हाथ मे सो सो के तीन नोट थे.
वो आगे बढ़ा. और मेरी छाती पर अपना हाथ घूमने लगा. मेने उसका हाथ नही हटाया. वो बस मेरे बोबो दबाकर मुझे धक्का दिया. मै वापस लेट गई. वो मेरी दोनों टांगो के बिच आ गया. वही तो पहला था. जिसने मेरी चुत मे मुँह लगाया था. मझा भी बहोत आ रहा था.
मेने अपनी आंखे बंद करली. जिस हाथ मे नोट थे. उस मुट्ठी को जोर से बिंच कर बंद कर लिया. और मेरे पानी छूट गया. वो बाद मे चले गया. पर जाते जाते बोलकर गया की मै जब भी बनवाउंगी तब धोऊ नही. साफ ना करू. साला वही चाट कर साफ करेगा.
साला वो उसके तो ज्यादा पैसे देता था. एक दिन खोली मे कोई नही था. मेने कुट्टन को बुला लिया. मेने और कुट्टन ने जमकर प्यार किया. कुट्टन जैसे गया. साला पकिया आ गया. साले को चुत से ताज़ा माल चाटने मे ज्यादा मझा आता था. वो आकर दरवाजा बंद करता है. और तुरंत मेरे पास आ गया. उसने मुझे 500 रूपय दिये.
साला मझा आता है जब चुदवाने के बाद कोई तुम्हारी चुत चाट कर साफ करदे. मै मान गई. और वो हर बार की तरह मेरी दोनों टांगो के बिच आ गया. पर मुझे नही मालूम था की कुट्टन गया नही था. साला उसकी गाड़ी की चाबी तो खोली मे ही रहे गई थी.
अचानक धड़ाम देकर उसने दरवाजे को लात मारी और अंदर आया. मै उसे रिक्वेस्ट करती रही. माफ़ी मांगती रही. पर कुट्टन का गुस्सा बहोत खराब है. उसने मुझे और पकिया दोनों को मारा. पर वो पकिया का सच नही जानता था. वो गलत समझा. और उसने मुझे छोड़ दिया.
उसके चक्कर मे मेने काम पे जाना भी छोड़ दिया. उसे ढूढ़ने निकली. पर वो मुझे कही नही मिला. और कभी मिलता भी तो बात नही करता. वो मुझे सुन ने को भी तैयार नही था. एक दिन मै उसकी टेक्सी के पीछे भागी. बहोत दूर तक. उसे उस दिन तरस आ गया.
उसने टेक्सी रोक दी. वो गुस्से से निचे उतरा. पर मै रो पड़ी तो उसने मेरी बात सुनी. पर पता उसे मुझसे पहले ही चल गया था. लेकिन मुझे लगा की उसने मुझे मौका दिया. पर ऐसा था नही. वो मुझे टेक्सी मे घुमाया, फिराया, खिलाया. मै बहोत खुश थी.
फिर वो मुझे दरिया किनारे ले गया. वो तो मेरे साथ पहले भी सेक्स करता था तो मुझे कोई प्रॉब्लम नही थी. लेकिन वो सेक्स नही कर रहा था. साला जैसे बदला ले रहा हो. साले ने रेत पर ही. एकदम खुले मे. मुझे पलटाया. और बहोत जोरो से.
रूपा बोलते हुए रो पड़ी. वो भी बोलते हुए हाकलने लगी. सिसकने लगी.
रूपा : मै मै मै छट पटा रही थी. लेकिन वो.
कविता ने तुरंत ही उसे बाहो मे भर लिया. कविता ने यही महसूस किया की वीरू ने भी रात यही सब किया था. सायद वो सेक्स नही बदला ही ले रहा था. दोनों कुछ पल शांत हुए. पर रूपा को अब भी कुछ बोलना था.
रूपा : लेकिन बीबीजी एक बात कहु. वो साला प्यार तो साला मुझसे ही करता था. मेरी गलती थी. साला बदला ले रहा था पर मुझे उसे एक मौका देना चाहिये था.
कविता : अच्छा... और तुम्हे ऐसा क्यों लगा.
रूपा : क्यों की मेने तो उसी वक्त सोच लिया था की आज के बाद कभी इसके पास नही आउंगी. और जो गलती थी. मेने उसे सच कर दिया. उसके बाद बीबीजी जो मर्द मुझे पसंद आया. मेने उसके साथ सेक्स किया. वो बाद मे आया था. मुझसे माफ़ी मांगने. पर साले को खूब गली दी. उसने अपने गांव मे शादी की. उसे लेकर भी आया था.
पर उसकी बस्ती मे मेरी एक दोस्त है. वो बता रही थी की कुट्टन रोज दारू पिता है. और रूपा रूपा बोलता रहता है. अभी तो बहोत बूढा हो गया. उसकी बीवी भी उसे छोड़ कर चली गई. वो तो मुझे भी अब नही पहचानता. मगर हर वक्त रूपा रूपा बोलता है.
कविता : (स्माइल) तुमसे प्यार करता था वो.
रूपा : हा बीबीजी. मुझे उसे एक बार माफ कर देना चाहिये था. पर क्या करती मै. उस चूतिये को क्या पता. साला मुझे इतना दर्द हुआ था. क्या बताऊ. साला टाइम निकल जाता है. तब साला अकल आती है. अभी मै जाऊ. खाना बनाना है. तुम्हारे उस को भी खिलाना है.
रूपा तो चली गई. पर कविता को कई चीजे समझ आई. एक की जो प्यार करता है. वो अपने पार्टनर को किसी दूसरे के साथ देखना बरदास नही करेगा. और दूसरा की जिंदगी मे एक और मौका जरूर देना चाहिये था. दोपहर हो चुकी थी. रूपा बार बार वीरू के पास जाकर सब संभालती रही. रूपा और कविता ने बादमे भी साथ टाइम बिताया. कविता ने दोपहर को खाना भी खाया.
लेकिन वो वीरू के पास नही गई. वही वीरू कविता के लिए बहोत गिल्टी फील कर रहा था. और कविता को देखने और मिलने को बेताब हो गया. जब जब रूपा आती तो वो कविता के बारे मे ही पूछता. कविता से मिलने की, उस से माफ़ी मांगने की प्यास वीरू मे बढ़ती गई. और शाम और शाम से रात हो गई. पर कविता बीरु के पास नही गई.