Tension mat lo goli chali he par goli lagi ya nehi ye darshaya nehi gaya dost.......dil se thank you dost support krne ke liye........shukriyaRahul ka kuch ho gaya to story me maza nehni ayega bro...Rahul inspector se badla lena chahiye ..
SHAANDAAR LIKHANI ...... BANDH KE RAKHNE WALA SHURUWAT ......Updated 3
बर्फिलेन चादर से किनारा धके सड़क पे कार चल रही थी……अचानक कार के आगे एक हीरन दौर के रास्ता पार कर के घने जंगल में घुस गया और कार अचानक तीब्र ब्रेक के साथ तेज़ झटके के साथ रुक गया लेकिन पेड़ से तकड़ते तकड़ते रह गए…।।
" काका क्या कर रहे हो……।"
"छोटे बाबा माफ़ करना गाड़ी के आगे हिरन आ गयी थी…।।बरफ की वज़ह से ब्रेक भी देर से लगी…।आपको लगी तो नेही…।"
" लगी तो नेही……पर जिस तरह से ड्रिफ्ट गया था कार में तो डर गया था……काका टायर बयार चेक करते हो ना…।।ऐसे स्नोफॉल हाईवे में हमेशा आँखे खुली रखनी चाहिए…।।"
" हां छोटे बाबा…।।मेरा ध्यान रहता हे इन सुरक्षा के मामले में…।आप सिंटा मत करिये……।"
शान फिर अपने मोबाइल में लग गया……।वो बेफिक्र अपने ड्राइवर पे भरोसा कर के निधांदा हो गया……
Upadate 2
घने चिढ़ और देवदार जंगलों घेरा एक छोटा सरूम्य तश्तरी…..एक पौराणिक चिन्ह का गेट केसकांड नामक छोटे शहर को स्वागत करता हे… जो समुद्रतल से 7000 फीट ऊंचा पर हे…।
घने चिढ़ और देवदार जंगल के केजकंद शेहर ऊंची ऊंची भव्य धोलाधार पर्वत की चौटियों की आवाज से जनजात थे….सुंदर नक्काशी केजकांड शेहेर प्रकृति की सौंदर्य से भरपुर खास तरह पर्यटक स्थल माना जाता था… ..हर साल टूरिस्ट की भीदभाड़ लगा रहता था … ……सर्द मौसम में पूरा शहर बर्फिली सादर से ढक जाता था जिसकी मनामहक खूबसूरती लोगो के दिलो में बस जाते थे....
और उसी शेहर में एक बहुत बड़ी हस्ती रहने को आए... उद्योगपति सुरजीत कुमार बालादेव तरबूस्त टेक्नोलॉजी लिमिटेड कंपनी के संस्थापक और अधख्य थे……।
उनके साथ उनकी पत्नी रीना कुमारी बलादेव जो तरबूस्त टेक्नोलॉजी लिमिटेड कंपनी के सह संस्थापक और अधख्य भी थी……।
और उनका एक लौटा सपुत्र……. शानक्य शुरजीत कुमार बलादेव……..25 साल का गबरू जवान………..लेकिन उपनाम शान था………।
ध्यान दे : मुख्य पात्र यही ही कहानी में.....गौना पात्र कहानी के माध्यम से जुड़ते जायेंगे…...
Update 1
फोन की रिंग जा रही थी………..दिल जोरो से धड़क रहा था… नर्म पेशिश दिल उम्मिद से फिर से बिस्त्रित रूप से बरनन कर रहा था की दिल कितना बयकुल था तफशिलता से………..
जिस धंग से उत्कृष्ट था ………लगता था उसका दिल फिर से सिहनत जाए नए सीरे से जुड जाए………।
" हेलो"
सर कपकपाती होंथो पे मुस्कान फैल गया माथे का सिकान दूर हो गया तनव से भरे नैश खुल सा गया……..
" हे बेबी………"
" हूस दिस? "
"आन्हा……. अभी भी नारज हो…….प्लीजमें मर रहा हूं…..प्लीज बात करो……” प्लीज बात करो मुझसे ...."सायेद ही किसी की लफ्ज में इतना दर्द निश्पत कसूबर आभास था...
"हुस दिस ?……… आप बार-बार क्यों कॉल कर रहे हैं …… क्यू परसन कर रहे हो ……….देखो लास्ट वार्निंग दे रही हूं फिर से दुबारा कॉल किया ना तो सीधा तुम्हारे नम्बर पर पुलिस के पास केस दर्ज कर के आउंगी”
कॉल डिसकनेक्ट हो गया……..वो पागलों की तरह चीखा चिल्लाया और अपना मोबाइल सड़क पे पटका…….
सड़क के किनारे घुटने टेक के रोने लगा "क्यूं क्यों…..क्या किया मैंने जो तुम मुझे इतनी नफरत करने लगी हो अचानक.... क्यू आखिर क्यूं...क्या तुम मुझे इग्नोर कर रही हो ... ना मेरे फोन उठाती हो और उठा भी लेती हो तो न पहचानने से इन्कार कर देती हो...क्या हुआ है तुम्हे....कुछ बताती भी नही हो.......ऐसा क्या गुनाह कर दिया जो इतना नफरत करने लगी हो मुझसे....
एक आभाग पागल आशिक फूट फूट के रोये जा रहा था ……….मोहब्बत आज यूं सड़क पेनिषप्रभाव स्वरूप से अशशिष्ट सुर सुर हो रहा था.......
प्यार वो भावना वह जो किसी ब्यक्ति या वस्तु या स्थान या जीव जंतु के लिए निस्वार्थ पैदा होता हे …… प्यार एक निस्सल जज्बात होती है………। प्यार वो शब्द है जिस्की बख्या असंभव हे पर इसमे जीवन छुपा हे… जिने में चाह छुपी हे कभी दर तो कभी निदान छुपी है कभी बोहोत प्रेम तो कभी घृणा छुपी हे और प्रेम को समझते समझते जिंदगी समझने की अपने आपको समझने की कला छुपी ही....प्रेम वो शून्य हे जो सबकुछ असत्य होने का परिशय देता है प्रेम वो जो खूबियों पर चहकने का मौका देता हे और अपनी कमियों पर रूसवा भी करवाता है……..इसलिये प्रेम बिना जीना बेकर वह…..प्यार के कोई नाम इश्क, मोहब्बत, प्यार आदि नमन से प्रशारित………।
ये लडका भी इसी मोहब्बत से रूसवा था ……..उसका फाजिल मोहब्बत नासुत से वाकिफ था……….उसके दृष्टिकन से मोहब्बत जिंदगी जीने की राह थी……. किसी के सांस लेना मोहब्बत ने सिखाया था….. किसी के जलती राग में कदम रखना मोहब्बत ने सिखाया था……
जिस परी के लिए बेइंतेहा प्यार महसूस करता था …… जिस परी की नज़र से दुनिया को देखता था वो दुनिया पहले रंगीन लगता था ……
लेकिन आज तूते मोहब्बत ने बुनियादी दुनिया से आधारभूत याथार्थ करवाया….. ना चाह कर भी बिस्वास उठा चुका था प्यार शब्द से……जिस खुद से नफरत होने लगा क्यों इतने वो बेवकूफ बना रहा……
उसके आसूं बेहते बहते सुख गए…..लेकिन दिल में जो दर्द था वो धीरे धीरे जाखम दे रहा था…….. सायेद ही कभी उसने इतना झेला होगा…..
ठक हार के गिरने की कगार पे था …..तभी उसे एक सरहर कांधे पे किसी मजबूर हाथो की परख महसूस हुआ…….उसने मुड़ कर देखा…….और वो फिर दुख में तड़पता हुआ उस से लिपट के रोने लगा... ….
वो शख्स उसे सहारा देके उठाया और सहारा दे के अपने कंधे पे जीता चाहे रोने दिया……… और जब रोटे रोते ठक गया तब अपनी कार में बिठा के ले के गया……….
ओर कुछ देर में वो क्लब पोहोच गया……।।जो उसने हाल ही में ख़रीदा था एक धार्मिक सदी की १०० साल पुराना जलपान गृह जो उसने नयी सदी के सैनिक चिह्न से सजा के संघ बना लिया था……।
शान ड्राइवर काका को रुख करवाते हुए क्लब में एंटर हुआ…।।जेइसे ही उसने प्रबिस्ती कदम बढ़ाये उसके शिर के ऊपर गुब्बारे फूटी और वो शोक गए……
सरप्राइज,…।ओओओओओ हूँ………।।कमरे में तालियां बजने लगी……।। और खुशी को चिंखे
शान के सामने उसके दोस्त (विक्रम, जतिन, प्रीती) अभिवादन करते हुए खड़े हो के झुम रहे थे…।।
शान उन सबके पास गया सबसे गैल मिल के पूछा………" कमबख़्तो क्या हुआ किस बात इतनी खुशी मना रहे हो…।।"
प्रीति बोली……।" हमने कर दिखाया"
शान…। " क्या कर दिखाया"
जातीं……। " हमने गेम डिज़ाइन कर लिया… कैरेक्टर एनिमेटर का काम भी पूरा कर लिया……।"
शान की होंठो पे मुस्कान आ गया……विक्रम खुसी से शान पे चढ़ गया……।दोस्ति में चढ़म चढाई ना हो क्या दोस्ती……
चारों में बियर पार्टी शुरू हुई……
शान……" अच्छा ७० % काम तो लगभग हो गए……।लकिन लेवल स्क्रिप्टेर चाहिए उसके लिए कोई क्रिएटिव दिमाग वाला राइटर चाहिए……।"
विक्रम…।। " भाई……।ऐसा बंदा मिलेगा कहा……"
प्रीति…… " वही तो……गेम में जीतना भी ग्राफ़िक्स स्पेशल इफेक्ट्स से भर दो लेकिन प्लायर को लेवल ूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूूू आप पर किक नही मिलेगा तो गेम छोड़ देगा…।।"
जतीन…।।" शान धुंदो किसी को जो धाँसू स्क्रिप्ट लिखे……"
शान……।।" ढूंड तो रहा हूँ……"
विक्रम……।।" शान…तुझे पता है…।हुमारी फूल कन्या की शादी हो रही हे…।। "…।
शान मुस्कुराते हुए कोण्ही नज़रों से प्रीती की तरफ नज़र डाली…।।तो प्रीती ने इसारे से जतिन की तरफ इशारा की…।। शान कुछ समझ नही पाया……।
जतिन……। " इसके बापू बोले की फूल खिल गया हे अब गढ़बंधन कर देना चाहिए……"
प्रीति…… " ये मुस्टंडा किस एंगल से खिले हुए फूल लगते हे ज़रा बताओ…।।"
जतीन चिढ गया……"सालो यहा मेरा बाप मेरी शादी करवाने में तुले हे सुबह से एक ही रट लगाये बैठे…।।और तुम लाग मेरी माझक उदा रहे हो…।।"
प्रीति हास के बोली…… " क्यों इतना टेंशन ले रहे हो……तेल् योर फादर डेट यू विल नॉट मर्री नाउ…।।"
शान विक्रम को इशारा कर के बोलै……।" देखा भाई……आग किसी और पे लगी लेकिन ज्वली कोई और…। "
प्रीति नख़रे में…… " क्या मतलब हे तुम लोगो का…।।मे क्यों जलूँगी…।। "
प्रीति मुँह फूला के कमरे से निकल गयी……।और जाते जाते एक एन्तिक गुद्दा तोड़ के चली गयी……।
विक्रम चिल्लाया पीछे से……।। ोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोोो ओए नकचढ़ी हमने कहा तुझे बोला कुछ……मेरा ाा एंटीक चीज़ तोड़ दिया कमीनी ने…
शान जतिन से बोलै……।" देख तेरे पे फ़िदा हे बंदी……।एहि समय हे केसर की ढूढ़ की कमाल दिखाने का……कोई और ले जाए इससे पहले कमसे कम प्रोपोज़ मार दे…।।"
जतीन…… " क्या पागल जैसे बाते करते हो……।कोइ पसंद बसंद नही करती और न ही में……हमारे बिच ऐसा कुछ नही हे……हम सब जैसे दोस्त हे ऐसे ही हम दोनों दोस्त हे…। "
विक्रम………" तो फिर में पता लूण…।।कामिनी आज काल बोहोत मटक मटक के चलती हे……।बोहोत मज़े देगी… "…।
जतीन ग़ुस्से में विक्रम की तरफ लपका…।।विक्रम भागने लगा और जतिन उसके पीछे………
शान हसने लगा………शानक्य को इस सेहर में आते हुए एक महीना ही हुआ था……और इन तीन टिकरी से दोस्ती हुई……।दोस्ति की सुरुवात मिसुन्दरस्टण्डींग से हुई थी…।।लकिन बाद में मिथ्याबोध मित के दोस्ती के इल्तिफाद शुरू हो गए…।।
शान रात के ८ बजे अपने बलादेव भवन पोहोचा………हमेशा की तरह वो अपने आलीशान सदृश घर में घुसा……।।
उसके डैडी मानो उसका ही इंतज़ार कर रहे थे……। मिस्टर बालादेव अपने भब्या वज़न आवाज़ पर्श कंठ से बोलै…।। " हे माय ब्रेव बेबी……काम हेयर तू डैडी……।"
शान मुस्कुरा के अपने डैडी के बगल में बैठ गया और अपने मान्यता पिता के समादर करते हुए गले मिल लिया…।।
शान……" डैडी आपने डिनर किया……।"…
म्र। बलदेव……।" न, हवे'त ईटेंत, येत ी .... आई वास् वेटिंग फॉर यू……कभी में अपने बेटे के बिना खाना खता हूँ क्या…।।"
येही मुद्रित बिचारों की वज़ह से अपने डैडी से गर्व करते हे की वो उनका बेटा हे……
शान बोलै…।।" चलिये आप तैयार हो जाइये में अभी चेंज कर के आपसे डाइनिंग हॉल में मिलता हूँ……वैसे मॉम कहा हे…। "
मिस्टर बालादेव……।" तुम्हारी मॉम को ब्यूटी क्रिएशन्स का सोक लग गया हे……एक इवेंट ओर्गानिसद प्लानिंग कर रही हे…। जीसमे बुढ़िया रैंप वाक करेगी……"
दोनो बाप बेटे हसन लगे ताली मार के…।।
Nice updateUpdate 6
राहुल रात १० बजे एक कन्फेक्शनरी स्टोर में पोहोच गया…।। स्टोर बंद हो रही थी कर्मचारी स्टोर को बंद कर रहा था…।।
स्टोर के मालिक उसे देख के आश्माभित हो गया……और काउंटर से निकल के राहुल के पास आया……
स्टोर के मालिक का नाम जगन लाल था और राहुल उसे ताओ कर के संबद्धित करता था…।।रहुल पिछले दो महीनो से उसके कन्फेक्शनरी स्टोर पे काम कर रहा था…।।और बाकि कर्मचारियो के साथ जगण लाल की घर पे ही रहता था जहा कर्मचारी का रेहने को अलग से कमरा और चारे निजी सुबिधाय दी राखी गयी थी……।
जगण लाल…… " राहुल तेरे शर्ट पे इतने सारे खून…।।"
राहुल…। " ताऊ में आपको बाद में सब बताता हु……अभी मुझे खुद को साफ़ करना हे…।"
राहुल स्टोर की पीछे से निकलने वाली रास्ते से निकल गया और कर्मचारी के सामान्य स्नानाघर में घुस गया…।और नाहा ढो के निकला……।।
जगण लाल के परिवार वाले देर रात को डिनर करते थे और देर रात तक जागते थे……।रहुल के एक नेक दिल का लड़का था
जो सबके सुख दुःख में शरीक होता था…।सब्से दया और सहानुभूति से पेश आता था…।लोगो से विनमृ से बाता करता था सबकी सुन्ता था…।।जो सबको बराबर भी सन्मान देता था चाहे वो कोई उससे छोटा ही क्यों न हो…।दुसरो को कभी नीचा नही दिखाता था और हर बात पे ईमानदार था……इसलिए जगण लाल उसे बोहोत प्रभाभित था और देखते ही देखते जगण लाल के सबसे भरोसेमन्द कर्मचारी बन गया था……
राहुल को अक्सर डिनर या सुबह की चाय नाश्ते पे बुलाया करती थी जगल लाल की पत्नी शारदा…।उसके भलेपन बिकर्सन चेहरे पे ककसियत पे लड्डू थी……।
राहुल को भी बड़ी जोड़ो की भूख लगी थी तो वो जगल लाल के घर डिनर करने इरादे गए……।जगल लाल को उसके मुँह से पूरी बारदात जानना था तो उसने अपने पहलु में बिठा लिया……डाइनिंग टेबल के सारों ओर पूरा परिवार था जगल लाल के पत्नी और उसके बहु बेटे समीर और रत्ना………
जगण लाल राहुल के थाली में मटर पनीर की सब्जी दाल के बोलै…।। " लो बेटा आराम से खाते हुए बताओ हुआ क्या था तुम्हारा साथ……"
शारदा भी काफी उत्सुक्त थी……वो रूमाली रोटी दाल के बोली…।। " हां तुम्हारे महाजन बता रहे थे की तुम्हरे शर्ट में खून ही खून था…।।"
समीर और रत्ना भी कूद पड़े जैसे बहस-मुबाबिसा में दो पाक्स सन्देहास्पद आरम्भ कर दिया हो……।बेसरा राहुल खाते हुए चर्चा करे या फिर सबको शांत कराय इस उधेरबुन्द में पानी पि पूरी ग्लॉस……
राहुल एक गहरी सांस ले के बोलै………" आप लग मुझे बोलने तो दो……आप लग तो ऐसे फिकरमंद हो रहे हे जैसे मुझे कुछ हो गया हो…।।पर देखो में आपके सामने बिलकुल सुस्त तंदरुस्त बैठा हूँ……"
समीर…… " कैसे ना करे भाई फिक्र……।छोटा भाई मानता हूँ तुझे…।।उपर से लल्लूराम हो…।।"…
राहुल…।।" ठीक हे में लल्लूराम हूँ…।। अब सुनो हुआ क्या था……" राहुल ने पूरी घटना बता दिए……
शारदा उसके शिर पर हाथ रख के बोली…।। " हाय दैय्या तेरे साथ इतना बड़ा हादसा हो गया…।"
रत्ना सुस्ती लेती हुई मझाक में बोली…।। " मम्मी जी उसके साथ कोई हादसा नही हुआ हे वो तो हादसे का फरिस्ता था…।।ये नही होता तो सायेद उस पोलिसवाले की बीवी ते बोल जाती…।"
जगान लाल आँखे बड़ी कर के अपनी बहु की तरफ देखता हे…।। जिससे रत्ना नज़रे निचे कर ली। डर के निवाला मुँह में थुस्ने लगती हे……
जगण लाल…।।" बेटा तूने तो बोहोत बहादूरी का काम किया……।मुझे तो गर्व होता तुझ पर……।टूझे में जल्दी ही मैनेजर बना दूंगा अपनी दुकान की……"
राहुल टपक से बोल पड़ा……।" वो मुझे मैनेजर नही बनना हे बस तन्खा बढा दो ना ४७५ रुपये……।"
साब हास पड़े……।।
समीर……।" क्यों ४७५ ही क्यों बढवाना हे भाई…… "
राहुल……।" वो मुझे रॉयल एनफील्ड बाइक लेना हे न……।मैने डाउन पेमेंट की जुगर कर लिया हे……५ हज़ार तनखे में ४७५ रूपए बढ़ जाये तो मेरा हिसाब बेठेगा…।।"
शारदा अपनी बहु को कोहनी मार के बोली…।।" सीख कुछ इस बच्चे से……।टूझे तो इसके चरन ढो के पीना चाहिए……२ लख क्या हार चाहिए…गुच्ची की बैग चाहिए…। "
रत्ना इत्तराती जुल्फे हटा के बोली……।।" हां तो किसने कहा चाँद जैसे राजकुमारी बहु ला के घर पे बिठाने की…।।"
राहुल सास बहु का नोक झोंक देख के हसने लगा………शारदा और रत्ना का नए सदी के सास बहु का लड़ना जगड़ना चलता ही रहता है…।।लडते भी थे तो अपने पन से……
राहुल……।" वो मुझे एक बात ठीक नही लगा…।।"
जगान लाल…।।" क्या बात ठीक नही लगी बेटा…।"
राहुल……। " पता हे उस औरत की हस्बैंड जो पुलिस वाला था…।वो ज़रा भी दुखी नही था अपने पत्नी की एक्सीडेंट को ले कर……"
जगन लाल……।।" पुलिस वाला था इस्लिये जज़्बात काबू कर लिया होगा…… "
राहुल चीन्तित था वो घटनाक्रम के हर एक बकिये को अपने दिमाग में दोहरते हुए समझने की कशिश कर रहा था……।।"फिर भी ताऊ…।।उसकी पत्नी ज़िन्दगी और मौत से जुज रही थी और उसके आखों में ज़रा भी दुःख दर्द नही था…।।"
समीर…।। " ओये छोटे भाई…।तेरा फ़र्ज़ तूने निभाया न अब खुश रह…।।कोइ खुस होता हे दुखी होता हे इससे तुझे क्या लेना देना…।।मकखन मार के रोटी खा और आराम से सोना…।"
रातना……" हां मेरे प्यार देवर तेरे भैया सही केह रहा हे…।। तू भी मां जी की तरह दुखियारी आत्मा मत बन…।। वेसे भी पुलिस वाले ख़रूज होते हे………"
शारदा अपनी बहु को खा जाने वाली निग़ाहों से देखने लगी……उसकी शकल देख के सब हसने लगे……
जगन लाल…।" हां बेटा……तू ये सब शिंता मत ले ……"
राहुल ने पूरा डिनर किया और सोने चला गया ……। लेकिन उसको अच्छी नींद नही आई बार बार आखो के सामने उस लहु लुहान औरत की शकल याद आ रहा था जिसको उसने खून से सनी चेहरा देखा था । अनुमान भी नही लगा पाया की केसी दिखती होगी वो ……………
Nice updateUpdate 7
शान आज बड़ी जल्दी उठ गया………उसने सोचा की जोगिंग पे निकले लेकिन सर्द मौसम था चारों तरफ कोहरा ही कोहरा …।।तो वो सर्दी के डर से बस ऐसे ही हूडि और जैकेट पहने ही बहार निकला टहलने ……।।
मिस्टर एंड मिसेज बालादेव लेट उठे…।।आज दोनों की कोई ज़रूरी काम था …कोई बिज़नेस मीटिंग थी बोर्ड के मेंबर्स के साथ ……।।
रीना अपनी घर के ऑफिस में मीटिंग की ज़रूरी फाइल तइयार कर रही थी …।। तभी शूरजीत सोल लपेटे ऑफिस में घुस गए …।
मिसेज बलादेव……।" हनी दिस इस नॉट फेयर हाँ……ये मेरा ऑफिस रूम हे ……यू शुड हैव कॉम नोकिंग ऑन द डोर……।।"
शुरजित अपनी पत्नी को आगोश में लेता हे …।।ठण्ड के कारन उसके सांस और आह से धूये निकल रही थी……
मिस्टर बालादेव……।।" ओह कॉम ऑन……।आज बोहोत ठण्ड हे बहार बर्फ गिर रहा हे ……धुप तो हे ही नही …।। थोरि मस्ती करे …क्या कहते हो "
मिसेज बालादेव……।" उम्महु आपने ब्रश भी नही किये ……जाओ देर हो जायेगी …।। मीटिंग के बाद जितना मस्ती करना हे कर लेंगे……। बी सीरियस पता हे मिस्टर गोवर्धन एक डील रखने वाले हे……"
मिस्टर बालादेव ……।" आई नो व्हाट डील हीस गोंना हैव……उसकी छुइ वही पे अटकी हे ८ % का शेयर कैसे १५ % तक बढ़ाये……।"
…मिसेज बलादेव…।।" तो फिर कुछ सोचा हे की नही …।।"
मिस्टर बालादेव……।" डो'त यू वॉररी, आई हैव आलरेडी डॉन व्हाट आई हद हेड तू डू……।। वैसे हमारा राजकुमार नज़र नही आ रहा हे……"
मिसेज बालादेव ……।" वो तेहेलने गया हे मुझे मैसेज किया था…।। क्यू"
मिस्टर बालादेव ……।" अरे बस ऐसे ही …।।आज कल बाप से ख़फ़ा जो रहता हे …। कुछ कहु तो राकेट बम बन जाता हे "
मिसेज बालादेव……।।" तो आप बारूद पे चिंगारी क्यों डालते हो…… आपके कंधे पे बैठ के खेलने की उम्र नही उसकी अब …… थोरा स्पेस दो जब ज़मीदारी का एहसास होगा तब आपके नक्से कदम पर ही चलेगा "
मिस्टर बालादेव……।।" अरे में बस फ़िक्र जताता हूँ……सोच रहा था तुम दोनों के नाम एक कंपनी खोल लूँ ……तुम दोनों कंपनी सम्भालना उसको भी स्टेप बी स्टेप लेसन देते जाना …।"
मिसेज बालादेव………" नो वय …।।नवेर……… तीन तीन कंपनी संभल रही हूँ …।आप तो बस राउंड मारने निकलते हे जब मन करे …।। आप ही उसको शिखाओ …।"
मिस्टर बालादेव ……।" भाई वो शिखे तो में शिखाऊ ……वैसे वो तुम्हारी हर बात मानता हे लेकिन मेरी एक नही सुनता …"
मिस्टर बालादेव……" बच्चा अपने बाप से ज़्यादा अपनी माँ से ज़ुरा होता हे………आप से बोहोत प्यार करता हे भले ही आपसे बात न करता हो लेकिन आपके बारे में पूछता हे आप ठीक हो की नही "
मिस्टर बालादेव …।। " मेरा शेर पुत्तर हे ……थोड़ी गरमा गरमी हो जाये "
मिस्टर बलादेव मूड में थे मिसेज बालादेव भी मूड में आ गयी दोनों पति पाँति बैब्याहिक आनंद में ऐसे ही अकसर बहक जाते थे ………।।
शान बर्फ के दलदल में चलते जा रहा था ……पहाड़ी के ढलान पर थोरी दूरि पे उसे एक काठ लड़की से बना हुआ घर दिखाई दिया …।।वो उसी घर की तरफ बढ़ रहा था बहार एक लैंप जला हुआ था सुबह के ९ बजे ……।
शान घर के दरवाज़े पे खड़े हो के आवाज़ लगाया " काका …।। ओ काका "
अंदर से दरवाज़ा खुला कर कर आवाज़ के साथ और एक अधेर उम्र ब्यक्ति शान को देख बोल " अरे छोटे बाबू आप …… इतनी ठण्ड में मेरे घर …… में बस निकल ही रहा था …।। आज पता नही चला ठण्ड के मारे कब सुबह हुई …।।"
शान……" काका अंदर तो बुलाओ…। शिर पर बर्फ जमा हो रहा हे"
" अरे में भी न…। आओ अंदर आओ …। एहि हे मेरा गरीब खाना "
शान चारों और का नज़र देखा …।। लड़की की दीवारे भले मजबुती से बानी हुई थी लेकिन बर्फ की आंधी को झेलने की मुकम्मल नही था …।।
" काका आप यहा रहते कैसे हो …। तूफान आता हे तो ये घर झेल कैसे लेता हे"
" झेल लेता हे…।।क्या हे की आंधीध का असर ज़्यादा नही होता हे …।। तीनो और घने जंगल हे तीनों और ऊँचे ऊंचे पेड़ हे और सामने ये पहाड़ "
" फिर भी आप अकेले रहते हो …। आप चाहो तो हमारे बाकि सर्वेन्ट के साथ मिल के रह सकते हो"
" अरे नही मालिक ने पहले ही बोहोत कुछ दे रखा हे और में अकेले ही रेहना चाहता हूँ मुझे लोगो का झंझट ही पसंद नही हे …। अच्छा बताओ तो ज़रा आपको यहा क्यों आना हुआ "
" बस ऐसे ही घूमने आया था सोचा की आपसे मिलता चला जाऊ …।। चाय काफी कुछ मिलेगी काका "
" मिलेगी …।। क्यों नही मिलेगी …।। मालिक घर पे आया हे और कॉफ़ी न मिले कोई सवाल ही नही "
शान की नज़र एक टूटी फूटी पुस्तक दौड़ पे पड़ी और वो पुस्तक दौड पे जा के कोई सा भी कितबे उठा के देखने लगा और सोचने लगा ' ये काका इन क़िताबों का क्या करता हे …। पढता हे क्या …।"
" काका ये किताबे तो युही पड़े पड़े चढ़ रहा हे…। "
" हां ऐसे ही रखा था …। मेरा तो कोई काम का हे नही "
शान एक उपन्यास उठा के ऐसे ही पात काठ पडने लगा और उसकी नज़र लेखक के नाम पर पड़ी जो राभा कांत बैश्य के नाम से था और १९९४ में प्रकाशित था …… अचनाक शान के दिमाग में आया की काका का नाम भी तो राभा कांत हे …। क्या काका …।
" काका इस उपन्यास में तो आपका नाम लिखा हे …।।"
काका हार्बरा गया और अपनी झेंप मिटाने के लिए मुस्कुराके बोलै …।।" अरे हां याद आया तो वही किताब हे जिसके लेखक मेरे ही नाम से मिलता झुलता हे थोरा बोहोत…।।लेखक का नाम रभा कांत बैश्य हे और मेरा नाम आधा हे …।।"
" अच्छा ……।आप कुछ सोच रहे हे …… आपकी गाला क्यों सुख गया …।।"
" अरे नही …।। लो कॉफ़ी लो गरमा गर्म …।।हुमे भी अब चलना चाहिए मालिक को कोही जाना हुआ होगा तो मुश्किल हो जायेगी "
" काका टेंशन मत लो ...दो और ड्राइवर भी हे …।। लेकिन आपकी हरबराहट मुझे बता रहा हे की आप कुछ छुपा रहे हे …।। अब अपना रेडिओ ऑन करिये नही तो में डैडी को बोल दूंगा की आप टीका के ड्राइविंग करते हे "
" अरे छोटे बाबू दया ……। भूखा मर जाउँगा मालिक के शत्र सया हद गया तो ……।।रुको बताता हूँ …।। बोहोत सैतान बच्चे हो "
Jayanta bhai kahani bohot ulje hui hai par intresting lag rahi haiupdated 8
do dashak pehle rabha kant usson shiksa ke liye chote se gaaon se seher aaya tha ……jab maha vidyalaya me shiksa arijit kar raha tha usi abadhi tarunai wilin tha …… aur ek jagur stri se prem kar baithe ….wo kamsin stri bhi usi maha vidyalaya me padhai karti thi….. dono ek aad mulakat me dosti kar baithe aur samay ke prasshat dono dosti gehri ho gayi …….ek rabha kant ko pata chala ki uski dost ko kabita bohot pasand he …… rabha kant bhi apni dost ki drahti me prabhavashaalee banne ke liye do pangtiya likh dala prem ki bashte aur samuh anusthan me apni pangtiya aavriti bhi kiya ………wo ladki hi nehi samuh byaktiyon ne uske pangtiya ke liye prabhabhit ho ke taliyon se naman kiya gaya …….
bas phir kya tha uski premi ne use prassahit kiya ki wo likhe …..aur rabha kant bhi prassahit ho ke ek pangtiyo ki kitab likh dala …. logo ne uske kitab bohot pasand kiye …… upanyas prakashit walo rabha kant ko anubandh liya ki wo teen upanyas likhe …. lekin usko upanays likhne ka koi abdharana nehi tha lekin use laga wo lekhak ban gaya to uska naam roshan hoga saath hi saath aajeevika milega jivan me pragati milegi ……rabha Kant ne sapne rukhsatne lage …….aur dil hi dil apni premi se beinteha Ishq kar baithe………
samay anukram uski padhai chal raha tha aur wo likhte jaa raha tha …..do upanyas wo maha vidyalaya shikha ki avadhi purn karne tak prakashit ho chuka tha …. use kamiyabi ki chidhi hasil huya usne apna nam badha diye title me bashya jod jisse uska naam badh ke rabha kant bashya ho gaya…… degree milne ke baad wo ladki apne seher apne ghar chali gayi …… dono ke bich stithi patra preshan karna silsila chalta raha …….
jab tisri upanyas prakashit huya to apni premi se sitthi likha uske tisri upanyas padh ke ray mashara de ….. lekin jawab me aisa mashara mila ki wo aaj tak us jawab ka nishpadan tha ………
jawab me ye likha tha ki ……. " uske mata pita uski aur uske rishte ke sakht khilab he jaat paat nehi milne ke karan …… isliye use bhool jaye aur saath me uski shadi ka newta bhi bheja "
rabha kant ke pedo tale jameen khisak gaye uske samast jism me bijiliya giri mano duniya hi khatam ho gaya ho …… rabha kant gali gali bhatne laga pagal aahishq tarah jab nashe me dhut kisi sadak ke kinare ya bhid bhad me gire pade rehte the to uske bagal me sikke gira ke jaate the log ……. dhire dhire rabha kant bashya se rabha kant ban gaya ek sharabi ke roop me gali gali badnaam ho gaya ……. log bewra kutta bol ke apne paas bhi bhatakne nehi deta tha use………… ।।।।।।।………
rama kant kap kapate huye aasoon baha ke coffee ka mug khatam kar diya ……shaan uske paas baitha ab tak jo dhyaan magna tha usne bhi coffee ka mug khatam kar diya ……..
shaan labmi saans le ke bola …….." kaka kabhi socha nehi tha ki aap jeise log us jamane me bhi aisa dardnak Ishq kar baithe rehte the …… saalam aapki prem katha ka "
kaka ……." shukriya chote babu…. lekin kisi ko bolna nehi "
shaan….." are nei …… me kisi zindegi ki aisi baatein kabhi nehi uchalta ….aapki prem gatha mere dil me dafan hoga "
kaka ….." achcha ab hume chalna chahiye ….."
shaan…….." waise kabhi mile ho us ladki se ….."
rabha kant kuch soch kar bola ….." nehi kabhi nehi …."
shaan bhi kuch soch kar bola….." kaka agar aapko dubara likhne ko mouka mile to aap lokhoge ……"
kaka……" are nehi …… kalam chhore jamana ho gaya ….. apna tak likhna bhool gaya ……"
shaan …….." lekin aapko mere liye likhna padega ….. chalo mere saath"
kaka ….." kaha chote babu ….kya likhna he aapke liye …… sach keh raha hoon kuch likh nehi paunga me hanth kaanpte he mere to ……
shaan ….." likhna nehi bas typing karna he …… aapke paas koi bike he "
shaan ne kaka ghar se bahar le ke aaya…..kaka ke paas ek khatara motorcycle tha ……..shaan use zabardasti motorcycle me bith ke le gaya…….
thori hi der me shaan kaka ko le ke club pohoch gaya apne adde pe ……. Vikram aur jatin dono chairs me dher pade ghode bech ke so rahe the ….. bas preeti sasma pehene computer me bussy thi ……
shaan ne dono ke chairs pe jor se laat mare dono girte girte bache aur hadhbadha ke uth gaye …..
shaan…." kaka baitho na…."
kaka kamre ke saaro dekh raha tha naye jamane ki computer dekh paa raha tha jisse ek prosser ke saath teen teen bade bade monitor lagaye huye the ……kaka ko shaan ne apni kursi pe bitha diya …..
preeti boli….." shaan ye koun he"
shaan muskura ke bole ….." meri jaan ye purush nehi he"
kaka shaan ki taraf takne laga ki ye kya bol raha he uski itzat utari jaa rahi he kya …..
shaan haas ke bola ….." ye purush nehi mahapurush he …….ek mahan writter he …..humare liye ab kaka level script likhega "
kaka bhi asambhit tha saath me preeti, jatin aur vikram bhi …..aankhe phaad ke dekhne laga ….
kaka ….." chote baba kaha leke aa gaye mujhe……. malik datenge mujhe ….. mujhe jana chahiye "
preeti aur jatin shaan ko kone me leke gaya " abe ye chutiyapa he be….. ye baba adam ka jamane ka aadmi level up ke script likhega "
shaan bola " haa ….ye ek bade lekhak the ek jamane me " usne ek kitab nikali apne jacket ke andar se jo kaka ke ghar se chura ke laya tha …." ye dekh aisi koi noval aur poem likha he …….net pe search kar uski kundli mil jayegi ….. uske personality pe mat jao bhale hi garib dikhta ho lekin andar likhne ki junun he "
Jatin ….." achcha maan liya ki wo bade lekhek the ya abhi he …. lekin game ke liye script keise likhega humare stragedy roleplay game me kuch fantasy aur naye soch wale chahiye "
preeti ne jatin ke saath haa milai……..lekin shaan ne kaka ke andar kuch kabiliyat dekha tha isliye wo apne doston ko raazi karne me laga ……
shaan ……" ek baar try to karo ….ek demo to banta he na…. come on yaar tum logo ko mere upar zara bhi bharasa nehi he kya …….bhool mat tum logo ko bhi maine apne parki nazar se tum logo ki kabiliyat dekh ke yeha le aaya …."
preeti aur jatin maan gaya ….. teeno kaka ke paas gaye …..
kaka ….." chote baba ab bobot der ho rahi he ….. mujhe jana hoga nehi babu saheb bohot naraz honge ….."
shaan ….." don't worry kaka …… me daddy ko bol dunga ki me aapko le gaya tha …achcha ab suno aapko humare game ke liye level scripts likhna hoga …..hum aapko muft me kaam nehi karwayenge aapko thora bohot paisa denge aur jab game puri tarah ban jayega tab to aapka bhi naam hoga aur paisa bhi milega ….."
kaka ……" chote baba mujhe pasio ki lalach nehi he….baat paiso ki nehi chote baba …. par me ab likh nehi paunga wo jamana bit gaya wo kabiliyat nehi raha ab ….. aur kya likhna he level scripts kya bola tha "
jatin ……" haa kaka …… please na mat kariye hum bachchon ki feature ka sawal he please "
kaka saaron ke sakal dekhne lage jo bade aas lagaye umidd se use dekh rahe the …..
kaka….." kaha le aaye chote baba aapne……..aur me kaha waqt nikal paunga pura din to bade mailk ke saath kaam pe rahunga kabhi kabhi hi aapke saath hota hoon ……."
shaan ….." shinta mat karo kaka…. hum aako ek ipad denge likhne ki … jab bhi aako mouka mile aap likhana "
kaka bebas ho kar aakhir me haa kar diya ……
Polakh bhai bohot bohot shukriyaSHAANDAAR LIKHANI ...... BANDH KE RAKHNE WALA SHURUWAT ......![]()
Thanks for your precious feedbackNice update