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Fantasy Aryamani:- A Pure Alfa Between Two World's

nain11ster

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भाग:–149


इसके पूर्व आर्यमणि जैसे ही उन कीड़ों की कैद से आजाद हुआ सबसे पहला ख्याल रूही पर ही गया। अचेत अवस्था में वो बुरी तरह से कर्राह रही थी। विवियन और बाकी एलियन को तो यकीन तक नही हुआ की आर्यमणि के शरीर से कीड़े निकल चुके है। वो लोग झुंड बनाकर आर्यमणि पर हमला करने लगे, किंतु आर्यमणि के शरीर की हर कोशिका सक्रिय थी और किसी भी प्रकार के टॉक्सिक को खुद में समाने के लिये उतने ही सक्षम। बदन के जिस हिस्से पर लेजर की किरण और उन किरणों के साथ कितने भी भीषण प्रकोप क्यों नही बरसते, सब आर्यमणि के शरीर में गायब हो जाते।

विवियन और उसके सकड़ो साथी परेशान से हो गये। वहीं आर्यमणि रूही की हालत देखकर अंदर से रो रहा था। किसी तरह खुद पर काबू रखकर आर्यमणि ने आस–पास के माहोल को भांपा। उसपर लगातार एलियन के हमले हो रहे थे। सादिक यालविक और उसका बड़ा सा पैक आराम से वहीं बैठकर तमाशा देख रहा था। आर्यमणि पूरी समीक्षा करने के बाद तेज दौड़ने के लिये पोजिशन किया। किंतु जैसे ही 2 कदम आगे बढ़ाया वह तेज टकराकर नीचे रेत पर बिछ गया।

आर्यमणि को ध्यान न रहा की वह किरणों के एक घेरे में कैद था। किरणों का एक विचित्र गोल घेरा जिसे आर्यमणि पार ना कर सका। आर्यमणि हर संभव कोशिश कर लिया किंतु किरणों के उस गोल घेरे से बाहर नही निकल सका। विवियन और उसकी टीम भी जब लेजर की किरणों से आर्यमणि को मार न पाये, तब उन लोगों ने भी विश्राम लिया। वो सब भी आर्यमणि की नाकाम कोशिश देख रहे थे और हंस रहे थे।

विवियन:– क्या हुआ प्योर अल्फा, किरणों की जाल से निकल नही पा रहे?

आर्यमणि:– यदि निकल गया होता तो क्या तू मुझसे ऐसे बात कर रहा होता।

विवियन:– अकड़ नही गयी हां। आर्यमणि सर तो बड़े टसन वाले वेयरवोल्फ निकले भाई। सुनिए आर्यमणि सर यहां हमे कोई मारकर भी चला जाये, तो भी तुम उस घेरे को पार ना कर पाओगे। चलो अब तुम्हे मै एक और कमाल दिखाता हूं। दिखाता हूं कि कैसे हम घेरे में फसाकर अपने किसी भी शक्तिशाली दुश्मन को पहले निर्बल करते है, उसके बाद उसके प्राण निकालते हैं।

आर्यमणि:– फिर रुके क्यों हो? तुम अपना काम करो और मैं अपना...

आर्यमणि अपनी बात कहकर आसान लगाकर बैठ गया। वहीं विवियन ने गोल घेरे के चारो ओर छोटे–छोटे रॉड को गाड़ दिया, जिसके सर पर अलग–अलग तरह के पत्थर लगे हुये थे। गोल घेरे के चारो ओर रॉड लगाने के बाद विवियन पीछे हटा। देखते ही देखते रॉड पर लगे उन पत्थरों से रौशनी निकलने लगी जो आर्यमणि के सर से जाकर कनेक्ट हो गयी।

आर्यमणि ने वायु विघ्न मंत्र का जाप तो किया पर उन किरणों पर कुछ भी असर न हुआ। फिर आर्यमणि ने उन किरणों को किसी टॉक्सिक की तरह समझकर खुद में समाने लगा। जितनी तेजी से वह किरण आर्यमणि के शरीर में समाती, उतनी ही तेजी से उसके शरीर से काला धुवां निकल रहा था। यह काला धुवां कुछ और नहीं बल्कि आर्यमणि के शरीर में जमा टॉक्सिक था, जो बाहर निकल रहा था।

पहले काला धुवां बाहर निकला उसके बाद उजला धुवां। उजला धुवां आर्यमणि के शरीर का शुद्ध ऊर्जा था, जो शरीर से निकलकर हवा में विलीन हो रहा था। धीरे–धीरे उसकी शक्तियां हवा में विलीन होने लगी। आर्यमणि खुद में कमजोर, काफी कमजोर महसूस करने लगा। आसान लगाकर बैठा आर्यमणि कब रेत पर लुढ़का उसे खुद पता नही चला।

आर्यमणि के शरीर की ऊर्जा, उजली रौशनी बनकर लगातार निकल रही थी। वह पूर्ण रूपेण कमजोर पड़ चुका था। आंखें खुली थी और होश में था, इस से ज्यादा आर्यमणि के पास कुछ न बचा था। तभी वहां आर्यमणि के जोर–जोर से हंसने की आवाज गूंजने लगी। किसी तरह वह खुद में हिम्मत करके अट्टहास से परिपूर्ण हंसी हंस रहा था।

विवियन:– लगता है मृत्यु को करीब देख इसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।

आर्यमणि बिना कोई जवाब दिये हंसता ही रहा काफी देर तक सबने उसकी हंसी सुनी। जब बर्दास्त नही हुआ तब यालविक पैक का मुखिया सादिक यालविक चिल्लाते हुये पूछने लगा..... “क्यों बे ऐसे पागल की तरह क्यों हंस रहा है?”...

आर्यमणि:– अपने परिवार को धोखा दिया। नेरमिन से दुश्मनी भी हो ही जाना है, लेकिन जिस शक्ति के लिये तूने शिकारियों का साथ दिया, वो तुझे नही मिलेगी।

आर्यमणि इतना धीमे बोला की सबको कान लगाकर सुनना पड़ा। 3 बार में सबको उसकी बात समझ में आयी। आर्यमणि की बात पर विवियन ठहाके मारकर हंसते हुये..... “तुझे क्या लगता है हम अपनी बात पर कायम न रहेंगे। सादिक न सिर्फ तेरी शक्तियां लेगा बल्कि सरदार खान की तरह ही वह भी एक बीस्ट अल्फा बनेगा। बस थोड़ा वक्त और दे। अभी तेरी थोड़ी और अकड़ हवा होगी, फिर तू खुद भी देख लेगा, कैसे तेरी शक्तियां सादिक की होती है।”

आर्यमणि समझ चुका था कि विवियन खुद ये घेरा खोलने वाला है। पूरे मामले में सबसे अच्छी ये बात रही की किसी का भी ध्यान रूही पर नही गया। आर्यमणि ने सबका ध्यान अपनी ओर ही बनवाए रखा। वह कमजोर तो पड़ ही चुका था बस दिमाग को संतुलित रखे हुये था। आर्यमणि सोच चुका था कि घेरा खुलते ही उसे क्या करना है।

10 मिनट का और इंतजार करना पड़ा। आर्यमणि की जब आंखे बंद हो रही थी, ठीक उसी वक्त किरणों का वह घेरा खुला। किरणों का घेरा जैसे ही खुला, पंजे के एक इशारे मात्र से ही आर्यमणि ने सबको जड़ों में ढक दिया। आर्यमणि के अंदर इतनी जान नही बाकी थी कि वह खड़ा भी हो सके। यह बात आर्यमणि खुद भी समझता था, इसलिए सबकुछ जैसे पहले से ही सोच रखा हो।

सबको जड़ों में ढकने के बाद खुद को और रूही को भी जड़ों में ढका। कास्टल के रास्ते पर जड़ों की लंबी पटरी ही जैसे आर्यमणि ने बिछा रखी थी। जड़ें दोनो को आगे भी धकेल रही थी और उन्हे जरूरी पोषण भी दे रही थी। लगभग 3 किलोमीटर तक जड़ों पर खिसकने के बाद आर्यमणि के अंदर कुछ जान वापस आयी और वह रूही को उठाकर कैस्टल के ओर दौड़ लगा दिया।

आर्यमणि जैसे ही कास्टल के अंदर पहुंचा, इवान उसकी गोद से रूही को उठाकर सीधा बेड पर रखा। संन्यासी शिवम् भी उतनी ही तेजी से अपना काम करने लगे। और इधर आर्यमणि, जैसे ही उसकी नजर अपने लोगों पर पड़ी... वो घुटनो पर आ गया और फूट–फूट कर रोने लगा। ओजल नीचे बैठकर, अपने दोनो हाथ से आर्यमणि के आंसू पूछती... "बॉस, दीदी को कुछ नही हुआ है... उसका इलाज चल रहा है।"…

"सब मेरी गलती है... सब मेरी गलती है... मुझे इतने लोगों से दुश्मनी करनी ही नही चाहिए थी"… आर्यमणि विलाप करते हुये बड़बड़ाने लगा।

ओजल:– संभालो बॉस, खुद को संभालो...

आर्यमणि:– रूही.. कहां है... कहां है रूही"…

ओजल:– यहीं पास में है।

आर्यमणि:– हटो मुझे उसे हील करना है... सब पीछे हटो..

तभी संन्यासी शिवम पीछे मुड़े और दंश को भूमि पर पटकते... "अशांत मन केवल तबाही लाता है। अभी रूही का जिस्म हील करेंगे तो हमेशा के लिये 10 छेद उसके बदन में रह जाएंगे। खुद को शांत करो"…

संन्यासी शिवम की बात सुनने के बाद आर्यमणि पूरा हताश हो गया। वहीं जमीन पर बैठकर रूही, रूही बड़बड़ाने लगा। दूसरी ओर जड़ों में फसे एलियन ने पहले खुद को जड़ों से आजाद किया, बाद में सादिक यालक और उसके पूरे पैक को। कुछ ही देर में कास्टल के दरवाजे पर पूरी फौज खड़ी थी। फौज लगातार अंदर घुसने का प्रयास कर रही थी, लेकिन दरवाजे के 10 कदम आगे ही हवा में जैसे किसी ने दीवार बना दिया हो। सभी दरवाजे से 10 कदम की दूरी पर खड़े थे।

संन्यासी शिवम्:– गुरुदेव दुश्मन द्वार खड़े है। मैं रूही को देखता हूं, आपलोग उन बाहर वाले दुश्मनों को देखिए।

आर्यमणि:– हां सही कह रहे आप।

संन्यासी शिवम्:– ओजल अपने दंश से सामने की सुरक्षा दीवार गिरा दो।

कास्टल के ग्राउंड फ्लोर पर संन्यासी शिवम, रूही का इलाज शुरू कर चुके थे। पूरी अल्फा पैक कास्टल के दरवाजे से बाहर कतार लगाये खड़ी थी। उधर से विवियन चिल्लाया.... “तुम लोग बहुत टेढ़ी जान हो... तुम्हारी दुर्दशा हो गयी फिर भी बच गये। तुम्हारी बाजारू पत्नी के शरीर में इतने छेद हुये, लेकिन लेजर के साथ–साथ उसके भीषण जहर से भी बच गयी। कमाल ही कर दिया। अच्छा हुआ जो तुम और तुम्हारे लोग कतार लगाकर अपनी मौत के लिये पहले ही सामने आ गये।”

इवान कुछ तो कहना चाह रहा था किंतु आर्यमणि ने इशारे में बस चुप रहने के लिये कहा। उधर निशांत इशारे में सबको समझा चुका था कि आस पास का दायरा पूरे भ्रम जाल में घिरा हुआ है। तभी एक बड़े विस्फोट के साथ बाहर की अदृश्य दीवार टूट गयी। जब रेत और धूल छंटा तब वहां इकलौत आर्यमणि अपना पाऊं जमाए खड़ा था। बाकी अल्फा पैक सदस्य पर विस्फोट का ऐसा असर हुआ की वो लोग कई फिट पीछे जाकर कास्टल की दीवार से टकराये। दरअसल मंत्र उच्चारण के बाद ओजल द्वारा कल्पवृक्ष दंश को संतुलित रूप से भूमि पर पटकना था, किंतु ओजल से थोड़ी सी चूक हो गयी और दीवार गिराने वाले विस्फोट का असर न सिर्फ विपक्षी को हुआ बल्कि आंशिक रूप से अल्फा पैक पर भी पड़ा।

असर तो आर्यमणि पर भी होता लेकिन विस्फोट के ठीक पहले आर्यमणि के हाथ में उसका एम्यूलेट पहुंच चुका था। बाकी के अल्फा पैक अपना धूल झाड़ते खड़े हुये। सबसे ज्यादा गुस्सा निशांत को ही आया। गुस्से में झुंझलाते हुये..... “तुम (ओजल) कभी भी नही सिख सकती क्या? विस्फोट का असर खुद के खेमे पर भी कर दी।”..

ओजल:– निशांत सर अभी सिख ही रही हूं। किसी वक्त आप भी कच्चे होंगे...

निशांत:– कच्चा था लेकिन अपनी बेवकूफी से अपने लोगों के परखच्चे नही उड़ाता था। पागल कहीं की...

इवान:– अरे वाह एमुलेट वापस आ गया।

दरअसल एक–एक करके सबके एमुलेट लौट आये थे। हवा में बिखरे रेत जब आंखों के आगे से हटा, दृष्टि पूरी साफ हो चुकी थी। विपक्ष दुश्मनों के आगे की कतार तो जैसे गायब हो चुकी थी, लेकिन बाकी बचे लोग हमला बोल चुके थे। बेचारे एलियन और यालवीक की सेना अपनी मौत को मारने की कोशिश में जुटे थे।

इनकी कोशिश तो एक कदम आगे की थी। जिस जगह अल्फा पैक खड़ी थी उसके आस पास की जगह पर गोल–गोल घेरे बन रहे थे। गोला इतना बड़ा था कि उसमे आराम से 4–5 लोग घिर जाये। हर कोई जमीन पर किरणों के बने गोल घेरे साफ देख सकते थे। एक प्रकार का एलियन महा जाल था, जिसमे अल्फा पैक को फसाकर मारने की कोशिश की जा रही थी।

किंतु निशांत के भ्रम जाल में पूरे एलियन उलझ कर रह गये। विवियन को भी समझ में आ गया की उनका पाला किस से पड़ा है। किरणों के गोल जाल में जब अल्फा पैक नही फंसा तब विवियन ने टर्की के स्थानीय वेयरवोल्फ को इशारा किया। वुल्फ पैक का मुखिया सादिक यालविक, इशारा मिलते ही आर्यमणि पर हमला करने के लिये कूद गया।

सादिक याल्विक लंबी दहाड़ लगाकर सीधा आर्यमणि के ऊपर छलांग लगा चुका था। किंतु भ्रम जाल के कारण सादिक यालविक को लग रहा था कि वह आर्यमणि के ऊपर कूद रहा है और आर्यमणि साफ देख सकता था कि सादिक ने एक हाथ बाएं छलांग लगाया था। आर्यमणि ने पंजा झटक कर अपने क्ला को बाहर निकाला और जैसे ही सादिक याल्विक उसके हाथ के रेंज में आया फिर तो आर्यमणि ने अपना पंजा सीधा सादिक यालविक के सीने में घुसेड़ कर उसे हवा में ही टांग दिया। पूरा यालविक पैक ही दर्द भरी दहाड़ लगाते आर्यमणि के ऊपर हमला कर चुका था।

अल्फा पैक जो पीछे खड़ी थी, वह बिना वक्त गवाए तेज दौड़ लगा चुके थे। एमुलेट के पावर स्टोन ने फिर तो सबको ऐसा गतिमान किया की सभी कुछ दूर के दौड़ने के बाद जब छलांग लगाये, फिर तो हवा में कई फिट ऊंचा उठे और सीधा जाकर वुल्फ के भिड़ में गिरे। ओजल अपना कल्पवृक्ष दंश जब चलाना शुरू की फिर तो सभी वुल्फ ऐसे कट रहे थे, मानो गाजर मूली कटना शुरू हो चुके हो।

अलबेली और इवान तो पंजों से सबको ऐसे फाड़ रहे थे कि उसे देखकर यालविक पैक के दूसरे वुल्फ स्थूल पड़ जाते। भय से हृदय में ऐसा कंपन पैदा होता की डर से अपना मल–मूत्र त्याग कर देते। महज 5 मिनट में ही यालविक पैक को चिड़ने के बाद सभी एक साथ गरजते..... “बॉस यालविक पैक साफ हो गया। बेचारा सादिक आपके पंजों पर टंगा अकेला जिंदा रह बचा है।”...

“फिर ये अकेला वुल्फ बिना अपने पैक के करेगा क्या?”.... कहते हुये आर्यमणि ने अपना दूसरा पंजा सीधा उसके गर्दन में घुसाया और ऊपर के ओर खींचकर ऐसे फाड़ा जैसे किसी कपड़े में पंजे फंसाकर फाड़ते हो। पूरा चेहरा आड़ा तिरछा होते हुये फटा। सादिक यालविक का पार्थिव शरीर वहीं रेत पर फेंककर आर्यमणि चिल्लाया..... “ये हरमजादे एलियन अब तब अपने पाऊं पर क्यों है? वायु विघ्न मंत्र के साथ आगे बढ़ो और अपने क्ला से सबके बदन को चीड़ फाड़ दो। जलने का सुख तो बहुत से एलियन ने प्राप्त किया है, आज इन्हे दिखा दो की हम फाड़ते कैसे है। याद रहे इनके शरीर में एसिड दौड़ता है, इसलिए जब तुम इन्हें फाड़ो तो तुम्हारे पंजों में एसिड को भी जो गला दे, ऐसा टॉक्सिक दौड़ना चाहिए। चलो–चलो जल्दी करो, मेरे कानो में चीख की आवाज नही आ रही।”....

इवान अपनी तेज दहाड़ के साथ एलियन के ओर दौड़ते..... “बॉस बस एक मिनट में यहां का माहौल चींख और पुकार वाली होगी। और उसके अगले 5 मिनट में पूरा माहौल शांत।”...

अलबेली भी इवान के साथ दौड़ती..... “क्या बात है मेरे पतिदेव। आई लव यू”...

इवान एक पल रुककर अलबेली को झपट्टा मारकर चूमा और उसके अगले ही पल लंबी छलांग लगाकर धम्म से सीधा एलियन के बीच कूदा। इवान के पीछे अलबेली भी कुद चुकी थी। और उन दोनो के पीछे ओजल। इवान और अलबेली जबतक एक को चीड़–फाड़ रहे थे, तब तक ओजल अपने दंश को लहराकर जब शांत हुई चारो ओर कटे सर हवा में थे।

ओजल एक भीड़ को शांत कर दूसरे भिड़ को काटने निकल गयी। न तो क्ला निकला न ही फेंग। न ही एलियन के लेजर असर किये ना ही फसाने वाले गोल किरणे। बस ओजल का कल्पवृक्ष दंश था और चींख के साथ हवा में उड़ते धर से अलग सर। जबतक इवान और अलबेली दूसरी भिड़ तक पहुंचते तब तक ओजल दूसरी भिड़ काटकर तीसरी भिड़ के ओर प्रस्थान कर चुकी थी। पूर्ण रौद्र रूप में ओजल जैसे भद्र काली का रूप ले चुकी थी।

तीसरे भिड़ की ओर आगे बढ़ने के बजाय इवान और अलबेली वापस आकर निशांत के पास खड़े हो गये और चिल्लाते हुये बस ओजल को प्रोत्साहन दे रहे थे। एक बार जब ओजल शुरू हुई फिर तो महज 5 मिनट में एलियन को तादाद मात्र 1 बची थी। वो भी विवियन जीवित इसलिए बचा क्योंकि बदले मौहौल को देखकर वह सब छोड़ कर भाग रहा था।

ओजल भी उसे मारने के लिये दौड़ी ही थी कि इतने में पुलिस सायरन सुनकर वह रुक गयी। टर्की की स्थानीय पुलिस पहुंच चुकी थी। पुलिस को बुलाने में भी विवियन का ही हाथ था। आर्यमणि ने महज इशारे किये और पल भर में ही निशांत समझ चुका था कि क्या करना है। पुलिस आयी और गयी इस बीच में निशांत ने उसे वही दिखाया जिस से पुलिस जल्दी चली जाये। मौहौल जब शांत हुआ तब हर किसी में एक ही रोष था, विवियन जिंदा भाग गया।

 

Parthh123

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Wah nain bhai maza hi a gya. Esiliye intzar kr pate hai jb ap lamba gap lete hai to kuki pta hai jb ayenge ap to dhamal krdenge. Baki apke apne bhi kam hai wo bhi jaruri hai. Thank you
 

king cobra

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भाग:–149


इसके पूर्व आर्यमणि जैसे ही उन कीड़ों की कैद से आजाद हुआ सबसे पहला ख्याल रूही पर ही गया। अचेत अवस्था में वो बुरी तरह से कर्राह रही थी। विवियन और बाकी एलियन को तो यकीन तक नही हुआ की आर्यमणि के शरीर से कीड़े निकल चुके है। वो लोग झुंड बनाकर आर्यमणि पर हमला करने लगे, किंतु आर्यमणि के शरीर की हर कोशिका सक्रिय थी और किसी भी प्रकार के टॉक्सिक को खुद में समाने के लिये उतने ही सक्षम। बदन के जिस हिस्से पर लेजर की किरण और उन किरणों के साथ कितने भी भीषण प्रकोप क्यों नही बरसते, सब आर्यमणि के शरीर में गायब हो जाते।

विवियन और उसके सकड़ो साथी परेशान से हो गये। वहीं आर्यमणि रूही की हालत देखकर अंदर से रो रहा था। किसी तरह खुद पर काबू रखकर आर्यमणि ने आस–पास के माहोल को भांपा। उसपर लगातार एलियन के हमले हो रहे थे। सादिक यालविक और उसका बड़ा सा पैक आराम से वहीं बैठकर तमाशा देख रहा था। आर्यमणि पूरी समीक्षा करने के बाद तेज दौड़ने के लिये पोजिशन किया। किंतु जैसे ही 2 कदम आगे बढ़ाया वह तेज टकराकर नीचे रेत पर बिछ गया।

आर्यमणि को ध्यान न रहा की वह किरणों के एक घेरे में कैद था। किरणों का एक विचित्र गोल घेरा जिसे आर्यमणि पार ना कर सका। आर्यमणि हर संभव कोशिश कर लिया किंतु किरणों के उस गोल घेरे से बाहर नही निकल सका। विवियन और उसकी टीम भी जब लेजर की किरणों से आर्यमणि को मार न पाये, तब उन लोगों ने भी विश्राम लिया। वो सब भी आर्यमणि की नाकाम कोशिश देख रहे थे और हंस रहे थे।

विवियन:– क्या हुआ प्योर अल्फा, किरणों की जाल से निकल नही पा रहे?

आर्यमणि:– यदि निकल गया होता तो क्या तू मुझसे ऐसे बात कर रहा होता।

विवियन:– अकड़ नही गयी हां। आर्यमणि सर तो बड़े टसन वाले वेयरवोल्फ निकले भाई। सुनिए आर्यमणि सर यहां हमे कोई मारकर भी चला जाये, तो भी तुम उस घेरे को पार ना कर पाओगे। चलो अब तुम्हे मै एक और कमाल दिखाता हूं। दिखाता हूं कि कैसे हम घेरे में फसाकर अपने किसी भी शक्तिशाली दुश्मन को पहले निर्बल करते है, उसके बाद उसके प्राण निकालते हैं।

आर्यमणि:– फिर रुके क्यों हो? तुम अपना काम करो और मैं अपना...

आर्यमणि अपनी बात कहकर आसान लगाकर बैठ गया। वहीं विवियन ने गोल घेरे के चारो ओर छोटे–छोटे रॉड को गाड़ दिया, जिसके सर पर अलग–अलग तरह के पत्थर लगे हुये थे। गोल घेरे के चारो ओर रॉड लगाने के बाद विवियन पीछे हटा। देखते ही देखते रॉड पर लगे उन पत्थरों से रौशनी निकलने लगी जो आर्यमणि के सर से जाकर कनेक्ट हो गयी।

आर्यमणि ने वायु विघ्न मंत्र का जाप तो किया पर उन किरणों पर कुछ भी असर न हुआ। फिर आर्यमणि ने उन किरणों को किसी टॉक्सिक की तरह समझकर खुद में समाने लगा। जितनी तेजी से वह किरण आर्यमणि के शरीर में समाती, उतनी ही तेजी से उसके शरीर से काला धुवां निकल रहा था। यह काला धुवां कुछ और नहीं बल्कि आर्यमणि के शरीर में जमा टॉक्सिक था, जो बाहर निकल रहा था।

पहले काला धुवां बाहर निकला उसके बाद उजला धुवां। उजला धुवां आर्यमणि के शरीर का शुद्ध ऊर्जा था, जो शरीर से निकलकर हवा में विलीन हो रहा था। धीरे–धीरे उसकी शक्तियां हवा में विलीन होने लगी। आर्यमणि खुद में कमजोर, काफी कमजोर महसूस करने लगा। आसान लगाकर बैठा आर्यमणि कब रेत पर लुढ़का उसे खुद पता नही चला।

आर्यमणि के शरीर की ऊर्जा, उजली रौशनी बनकर लगातार निकल रही थी। वह पूर्ण रूपेण कमजोर पड़ चुका था। आंखें खुली थी और होश में था, इस से ज्यादा आर्यमणि के पास कुछ न बचा था। तभी वहां आर्यमणि के जोर–जोर से हंसने की आवाज गूंजने लगी। किसी तरह वह खुद में हिम्मत करके अट्टहास से परिपूर्ण हंसी हंस रहा था।

विवियन:– लगता है मृत्यु को करीब देख इसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।

आर्यमणि बिना कोई जवाब दिये हंसता ही रहा काफी देर तक सबने उसकी हंसी सुनी। जब बर्दास्त नही हुआ तब यालविक पैक का मुखिया सादिक यालविक चिल्लाते हुये पूछने लगा..... “क्यों बे ऐसे पागल की तरह क्यों हंस रहा है?”...

आर्यमणि:– अपने परिवार को धोखा दिया। नेरमिन से दुश्मनी भी हो ही जाना है, लेकिन जिस शक्ति के लिये तूने शिकारियों का साथ दिया, वो तुझे नही मिलेगी।

आर्यमणि इतना धीमे बोला की सबको कान लगाकर सुनना पड़ा। 3 बार में सबको उसकी बात समझ में आयी। आर्यमणि की बात पर विवियन ठहाके मारकर हंसते हुये..... “तुझे क्या लगता है हम अपनी बात पर कायम न रहेंगे। सादिक न सिर्फ तेरी शक्तियां लेगा बल्कि सरदार खान की तरह ही वह भी एक बीस्ट अल्फा बनेगा। बस थोड़ा वक्त और दे। अभी तेरी थोड़ी और अकड़ हवा होगी, फिर तू खुद भी देख लेगा, कैसे तेरी शक्तियां सादिक की होती है।”

आर्यमणि समझ चुका था कि विवियन खुद ये घेरा खोलने वाला है। पूरे मामले में सबसे अच्छी ये बात रही की किसी का भी ध्यान रूही पर नही गया। आर्यमणि ने सबका ध्यान अपनी ओर ही बनवाए रखा। वह कमजोर तो पड़ ही चुका था बस दिमाग को संतुलित रखे हुये था। आर्यमणि सोच चुका था कि घेरा खुलते ही उसे क्या करना है।

10 मिनट का और इंतजार करना पड़ा। आर्यमणि की जब आंखे बंद हो रही थी, ठीक उसी वक्त किरणों का वह घेरा खुला। किरणों का घेरा जैसे ही खुला, पंजे के एक इशारे मात्र से ही आर्यमणि ने सबको जड़ों में ढक दिया। आर्यमणि के अंदर इतनी जान नही बाकी थी कि वह खड़ा भी हो सके। यह बात आर्यमणि खुद भी समझता था, इसलिए सबकुछ जैसे पहले से ही सोच रखा हो।

सबको जड़ों में ढकने के बाद खुद को और रूही को भी जड़ों में ढका। कास्टल के रास्ते पर जड़ों की लंबी पटरी ही जैसे आर्यमणि ने बिछा रखी थी। जड़ें दोनो को आगे भी धकेल रही थी और उन्हे जरूरी पोषण भी दे रही थी। लगभग 3 किलोमीटर तक जड़ों पर खिसकने के बाद आर्यमणि के अंदर कुछ जान वापस आयी और वह रूही को उठाकर कैस्टल के ओर दौड़ लगा दिया।

आर्यमणि जैसे ही कास्टल के अंदर पहुंचा, इवान उसकी गोद से रूही को उठाकर सीधा बेड पर रखा। संन्यासी शिवम् भी उतनी ही तेजी से अपना काम करने लगे। और इधर आर्यमणि, जैसे ही उसकी नजर अपने लोगों पर पड़ी... वो घुटनो पर आ गया और फूट–फूट कर रोने लगा। ओजल नीचे बैठकर, अपने दोनो हाथ से आर्यमणि के आंसू पूछती... "बॉस, दीदी को कुछ नही हुआ है... उसका इलाज चल रहा है।"…

"सब मेरी गलती है... सब मेरी गलती है... मुझे इतने लोगों से दुश्मनी करनी ही नही चाहिए थी"… आर्यमणि विलाप करते हुये बड़बड़ाने लगा।

ओजल:– संभालो बॉस, खुद को संभालो...

आर्यमणि:– रूही.. कहां है... कहां है रूही"…

ओजल:– यहीं पास में है।

आर्यमणि:– हटो मुझे उसे हील करना है... सब पीछे हटो..

तभी संन्यासी शिवम पीछे मुड़े और दंश को भूमि पर पटकते... "अशांत मन केवल तबाही लाता है। अभी रूही का जिस्म हील करेंगे तो हमेशा के लिये 10 छेद उसके बदन में रह जाएंगे। खुद को शांत करो"…

संन्यासी शिवम की बात सुनने के बाद आर्यमणि पूरा हताश हो गया। वहीं जमीन पर बैठकर रूही, रूही बड़बड़ाने लगा। दूसरी ओर जड़ों में फसे एलियन ने पहले खुद को जड़ों से आजाद किया, बाद में सादिक यालक और उसके पूरे पैक को। कुछ ही देर में कास्टल के दरवाजे पर पूरी फौज खड़ी थी। फौज लगातार अंदर घुसने का प्रयास कर रही थी, लेकिन दरवाजे के 10 कदम आगे ही हवा में जैसे किसी ने दीवार बना दिया हो। सभी दरवाजे से 10 कदम की दूरी पर खड़े थे।

संन्यासी शिवम्:– गुरुदेव दुश्मन द्वार खड़े है। मैं रूही को देखता हूं, आपलोग उन बाहर वाले दुश्मनों को देखिए।

आर्यमणि:– हां सही कह रहे आप।

संन्यासी शिवम्:– ओजल अपने दंश से सामने की सुरक्षा दीवार गिरा दो।

कास्टल के ग्राउंड फ्लोर पर संन्यासी शिवम, रूही का इलाज शुरू कर चुके थे। पूरी अल्फा पैक कास्टल के दरवाजे से बाहर कतार लगाये खड़ी थी। उधर से विवियन चिल्लाया.... “तुम लोग बहुत टेढ़ी जान हो... तुम्हारी दुर्दशा हो गयी फिर भी बच गये। तुम्हारी बाजारू पत्नी के शरीर में इतने छेद हुये, लेकिन लेजर के साथ–साथ उसके भीषण जहर से भी बच गयी। कमाल ही कर दिया। अच्छा हुआ जो तुम और तुम्हारे लोग कतार लगाकर अपनी मौत के लिये पहले ही सामने आ गये।”

इवान कुछ तो कहना चाह रहा था किंतु आर्यमणि ने इशारे में बस चुप रहने के लिये कहा। उधर निशांत इशारे में सबको समझा चुका था कि आस पास का दायरा पूरे भ्रम जाल में घिरा हुआ है। तभी एक बड़े विस्फोट के साथ बाहर की अदृश्य दीवार टूट गयी। जब रेत और धूल छंटा तब वहां इकलौत आर्यमणि अपना पाऊं जमाए खड़ा था। बाकी अल्फा पैक सदस्य पर विस्फोट का ऐसा असर हुआ की वो लोग कई फिट पीछे जाकर कास्टल की दीवार से टकराये। दरअसल मंत्र उच्चारण के बाद ओजल द्वारा कल्पवृक्ष दंश को संतुलित रूप से भूमि पर पटकना था, किंतु ओजल से थोड़ी सी चूक हो गयी और दीवार गिराने वाले विस्फोट का असर न सिर्फ विपक्षी को हुआ बल्कि आंशिक रूप से अल्फा पैक पर भी पड़ा।

असर तो आर्यमणि पर भी होता लेकिन विस्फोट के ठीक पहले आर्यमणि के हाथ में उसका एम्यूलेट पहुंच चुका था। बाकी के अल्फा पैक अपना धूल झाड़ते खड़े हुये। सबसे ज्यादा गुस्सा निशांत को ही आया। गुस्से में झुंझलाते हुये..... “तुम (ओजल) कभी भी नही सिख सकती क्या? विस्फोट का असर खुद के खेमे पर भी कर दी।”..

ओजल:– निशांत सर अभी सिख ही रही हूं। किसी वक्त आप भी कच्चे होंगे...

निशांत:– कच्चा था लेकिन अपनी बेवकूफी से अपने लोगों के परखच्चे नही उड़ाता था। पागल कहीं की...

इवान:– अरे वाह एमुलेट वापस आ गया।

दरअसल एक–एक करके सबके एमुलेट लौट आये थे। हवा में बिखरे रेत जब आंखों के आगे से हटा, दृष्टि पूरी साफ हो चुकी थी। विपक्ष दुश्मनों के आगे की कतार तो जैसे गायब हो चुकी थी, लेकिन बाकी बचे लोग हमला बोल चुके थे। बेचारे एलियन और यालवीक की सेना अपनी मौत को मारने की कोशिश में जुटे थे।

इनकी कोशिश तो एक कदम आगे की थी। जिस जगह अल्फा पैक खड़ी थी उसके आस पास की जगह पर गोल–गोल घेरे बन रहे थे। गोला इतना बड़ा था कि उसमे आराम से 4–5 लोग घिर जाये। हर कोई जमीन पर किरणों के बने गोल घेरे साफ देख सकते थे। एक प्रकार का एलियन महा जाल था, जिसमे अल्फा पैक को फसाकर मारने की कोशिश की जा रही थी।

किंतु निशांत के भ्रम जाल में पूरे एलियन उलझ कर रह गये। विवियन को भी समझ में आ गया की उनका पाला किस से पड़ा है। किरणों के गोल जाल में जब अल्फा पैक नही फंसा तब विवियन ने टर्की के स्थानीय वेयरवोल्फ को इशारा किया। वुल्फ पैक का मुखिया सादिक यालविक, इशारा मिलते ही आर्यमणि पर हमला करने के लिये कूद गया।

सादिक याल्विक लंबी दहाड़ लगाकर सीधा आर्यमणि के ऊपर छलांग लगा चुका था। किंतु भ्रम जाल के कारण सादिक यालविक को लग रहा था कि वह आर्यमणि के ऊपर कूद रहा है और आर्यमणि साफ देख सकता था कि सादिक ने एक हाथ बाएं छलांग लगाया था। आर्यमणि ने पंजा झटक कर अपने क्ला को बाहर निकाला और जैसे ही सादिक याल्विक उसके हाथ के रेंज में आया फिर तो आर्यमणि ने अपना पंजा सीधा सादिक यालविक के सीने में घुसेड़ कर उसे हवा में ही टांग दिया। पूरा यालविक पैक ही दर्द भरी दहाड़ लगाते आर्यमणि के ऊपर हमला कर चुका था।

अल्फा पैक जो पीछे खड़ी थी, वह बिना वक्त गवाए तेज दौड़ लगा चुके थे। एमुलेट के पावर स्टोन ने फिर तो सबको ऐसा गतिमान किया की सभी कुछ दूर के दौड़ने के बाद जब छलांग लगाये, फिर तो हवा में कई फिट ऊंचा उठे और सीधा जाकर वुल्फ के भिड़ में गिरे। ओजल अपना कल्पवृक्ष दंश जब चलाना शुरू की फिर तो सभी वुल्फ ऐसे कट रहे थे, मानो गाजर मूली कटना शुरू हो चुके हो।

अलबेली और इवान तो पंजों से सबको ऐसे फाड़ रहे थे कि उसे देखकर यालविक पैक के दूसरे वुल्फ स्थूल पड़ जाते। भय से हृदय में ऐसा कंपन पैदा होता की डर से अपना मल–मूत्र त्याग कर देते। महज 5 मिनट में ही यालविक पैक को चिड़ने के बाद सभी एक साथ गरजते..... “बॉस यालविक पैक साफ हो गया। बेचारा सादिक आपके पंजों पर टंगा अकेला जिंदा रह बचा है।”...

“फिर ये अकेला वुल्फ बिना अपने पैक के करेगा क्या?”.... कहते हुये आर्यमणि ने अपना दूसरा पंजा सीधा उसके गर्दन में घुसाया और ऊपर के ओर खींचकर ऐसे फाड़ा जैसे किसी कपड़े में पंजे फंसाकर फाड़ते हो। पूरा चेहरा आड़ा तिरछा होते हुये फटा। सादिक यालविक का पार्थिव शरीर वहीं रेत पर फेंककर आर्यमणि चिल्लाया..... “ये हरमजादे एलियन अब तब अपने पाऊं पर क्यों है? वायु विघ्न मंत्र के साथ आगे बढ़ो और अपने क्ला से सबके बदन को चीड़ फाड़ दो। जलने का सुख तो बहुत से एलियन ने प्राप्त किया है, आज इन्हे दिखा दो की हम फाड़ते कैसे है। याद रहे इनके शरीर में एसिड दौड़ता है, इसलिए जब तुम इन्हें फाड़ो तो तुम्हारे पंजों में एसिड को भी जो गला दे, ऐसा टॉक्सिक दौड़ना चाहिए। चलो–चलो जल्दी करो, मेरे कानो में चीख की आवाज नही आ रही।”....

इवान अपनी तेज दहाड़ के साथ एलियन के ओर दौड़ते..... “बॉस बस एक मिनट में यहां का माहौल चींख और पुकार वाली होगी। और उसके अगले 5 मिनट में पूरा माहौल शांत।”...

अलबेली भी इवान के साथ दौड़ती..... “क्या बात है मेरे पतिदेव। आई लव यू”...

इवान एक पल रुककर अलबेली को झपट्टा मारकर चूमा और उसके अगले ही पल लंबी छलांग लगाकर धम्म से सीधा एलियन के बीच कूदा। इवान के पीछे अलबेली भी कुद चुकी थी। और उन दोनो के पीछे ओजल। इवान और अलबेली जबतक एक को चीड़–फाड़ रहे थे, तब तक ओजल अपने दंश को लहराकर जब शांत हुई चारो ओर कटे सर हवा में थे।

ओजल एक भीड़ को शांत कर दूसरे भिड़ को काटने निकल गयी। न तो क्ला निकला न ही फेंग। न ही एलियन के लेजर असर किये ना ही फसाने वाले गोल किरणे। बस ओजल का कल्पवृक्ष दंश था और चींख के साथ हवा में उड़ते धर से अलग सर। जबतक इवान और अलबेली दूसरी भिड़ तक पहुंचते तब तक ओजल दूसरी भिड़ काटकर तीसरी भिड़ के ओर प्रस्थान कर चुकी थी। पूर्ण रौद्र रूप में ओजल जैसे भद्र काली का रूप ले चुकी थी।

तीसरे भिड़ की ओर आगे बढ़ने के बजाय इवान और अलबेली वापस आकर निशांत के पास खड़े हो गये और चिल्लाते हुये बस ओजल को प्रोत्साहन दे रहे थे। एक बार जब ओजल शुरू हुई फिर तो महज 5 मिनट में एलियन को तादाद मात्र 1 बची थी। वो भी विवियन जीवित इसलिए बचा क्योंकि बदले मौहौल को देखकर वह सब छोड़ कर भाग रहा था।

ओजल भी उसे मारने के लिये दौड़ी ही थी कि इतने में पुलिस सायरन सुनकर वह रुक गयी। टर्की की स्थानीय पुलिस पहुंच चुकी थी। पुलिस को बुलाने में भी विवियन का ही हाथ था। आर्यमणि ने महज इशारे किये और पल भर में ही निशांत समझ चुका था कि क्या करना है। पुलिस आयी और गयी इस बीच में निशांत ने उसे वही दिखाया जिस से पुलिस जल्दी चली जाये। मौहौल जब शांत हुआ तब हर किसी में एक ही रोष था, विवियन जिंदा भाग गया।

viviyan sasur bhag liya maro sasur ko jane na paye kaise bhi usko maro
 

krish1152

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भाग:–149


इसके पूर्व आर्यमणि जैसे ही उन कीड़ों की कैद से आजाद हुआ सबसे पहला ख्याल रूही पर ही गया। अचेत अवस्था में वो बुरी तरह से कर्राह रही थी। विवियन और बाकी एलियन को तो यकीन तक नही हुआ की आर्यमणि के शरीर से कीड़े निकल चुके है। वो लोग झुंड बनाकर आर्यमणि पर हमला करने लगे, किंतु आर्यमणि के शरीर की हर कोशिका सक्रिय थी और किसी भी प्रकार के टॉक्सिक को खुद में समाने के लिये उतने ही सक्षम। बदन के जिस हिस्से पर लेजर की किरण और उन किरणों के साथ कितने भी भीषण प्रकोप क्यों नही बरसते, सब आर्यमणि के शरीर में गायब हो जाते।

विवियन और उसके सकड़ो साथी परेशान से हो गये। वहीं आर्यमणि रूही की हालत देखकर अंदर से रो रहा था। किसी तरह खुद पर काबू रखकर आर्यमणि ने आस–पास के माहोल को भांपा। उसपर लगातार एलियन के हमले हो रहे थे। सादिक यालविक और उसका बड़ा सा पैक आराम से वहीं बैठकर तमाशा देख रहा था। आर्यमणि पूरी समीक्षा करने के बाद तेज दौड़ने के लिये पोजिशन किया। किंतु जैसे ही 2 कदम आगे बढ़ाया वह तेज टकराकर नीचे रेत पर बिछ गया।

आर्यमणि को ध्यान न रहा की वह किरणों के एक घेरे में कैद था। किरणों का एक विचित्र गोल घेरा जिसे आर्यमणि पार ना कर सका। आर्यमणि हर संभव कोशिश कर लिया किंतु किरणों के उस गोल घेरे से बाहर नही निकल सका। विवियन और उसकी टीम भी जब लेजर की किरणों से आर्यमणि को मार न पाये, तब उन लोगों ने भी विश्राम लिया। वो सब भी आर्यमणि की नाकाम कोशिश देख रहे थे और हंस रहे थे।

विवियन:– क्या हुआ प्योर अल्फा, किरणों की जाल से निकल नही पा रहे?

आर्यमणि:– यदि निकल गया होता तो क्या तू मुझसे ऐसे बात कर रहा होता।

विवियन:– अकड़ नही गयी हां। आर्यमणि सर तो बड़े टसन वाले वेयरवोल्फ निकले भाई। सुनिए आर्यमणि सर यहां हमे कोई मारकर भी चला जाये, तो भी तुम उस घेरे को पार ना कर पाओगे। चलो अब तुम्हे मै एक और कमाल दिखाता हूं। दिखाता हूं कि कैसे हम घेरे में फसाकर अपने किसी भी शक्तिशाली दुश्मन को पहले निर्बल करते है, उसके बाद उसके प्राण निकालते हैं।

आर्यमणि:– फिर रुके क्यों हो? तुम अपना काम करो और मैं अपना...

आर्यमणि अपनी बात कहकर आसान लगाकर बैठ गया। वहीं विवियन ने गोल घेरे के चारो ओर छोटे–छोटे रॉड को गाड़ दिया, जिसके सर पर अलग–अलग तरह के पत्थर लगे हुये थे। गोल घेरे के चारो ओर रॉड लगाने के बाद विवियन पीछे हटा। देखते ही देखते रॉड पर लगे उन पत्थरों से रौशनी निकलने लगी जो आर्यमणि के सर से जाकर कनेक्ट हो गयी।

आर्यमणि ने वायु विघ्न मंत्र का जाप तो किया पर उन किरणों पर कुछ भी असर न हुआ। फिर आर्यमणि ने उन किरणों को किसी टॉक्सिक की तरह समझकर खुद में समाने लगा। जितनी तेजी से वह किरण आर्यमणि के शरीर में समाती, उतनी ही तेजी से उसके शरीर से काला धुवां निकल रहा था। यह काला धुवां कुछ और नहीं बल्कि आर्यमणि के शरीर में जमा टॉक्सिक था, जो बाहर निकल रहा था।

पहले काला धुवां बाहर निकला उसके बाद उजला धुवां। उजला धुवां आर्यमणि के शरीर का शुद्ध ऊर्जा था, जो शरीर से निकलकर हवा में विलीन हो रहा था। धीरे–धीरे उसकी शक्तियां हवा में विलीन होने लगी। आर्यमणि खुद में कमजोर, काफी कमजोर महसूस करने लगा। आसान लगाकर बैठा आर्यमणि कब रेत पर लुढ़का उसे खुद पता नही चला।

आर्यमणि के शरीर की ऊर्जा, उजली रौशनी बनकर लगातार निकल रही थी। वह पूर्ण रूपेण कमजोर पड़ चुका था। आंखें खुली थी और होश में था, इस से ज्यादा आर्यमणि के पास कुछ न बचा था। तभी वहां आर्यमणि के जोर–जोर से हंसने की आवाज गूंजने लगी। किसी तरह वह खुद में हिम्मत करके अट्टहास से परिपूर्ण हंसी हंस रहा था।

विवियन:– लगता है मृत्यु को करीब देख इसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।

आर्यमणि बिना कोई जवाब दिये हंसता ही रहा काफी देर तक सबने उसकी हंसी सुनी। जब बर्दास्त नही हुआ तब यालविक पैक का मुखिया सादिक यालविक चिल्लाते हुये पूछने लगा..... “क्यों बे ऐसे पागल की तरह क्यों हंस रहा है?”...

आर्यमणि:– अपने परिवार को धोखा दिया। नेरमिन से दुश्मनी भी हो ही जाना है, लेकिन जिस शक्ति के लिये तूने शिकारियों का साथ दिया, वो तुझे नही मिलेगी।

आर्यमणि इतना धीमे बोला की सबको कान लगाकर सुनना पड़ा। 3 बार में सबको उसकी बात समझ में आयी। आर्यमणि की बात पर विवियन ठहाके मारकर हंसते हुये..... “तुझे क्या लगता है हम अपनी बात पर कायम न रहेंगे। सादिक न सिर्फ तेरी शक्तियां लेगा बल्कि सरदार खान की तरह ही वह भी एक बीस्ट अल्फा बनेगा। बस थोड़ा वक्त और दे। अभी तेरी थोड़ी और अकड़ हवा होगी, फिर तू खुद भी देख लेगा, कैसे तेरी शक्तियां सादिक की होती है।”

आर्यमणि समझ चुका था कि विवियन खुद ये घेरा खोलने वाला है। पूरे मामले में सबसे अच्छी ये बात रही की किसी का भी ध्यान रूही पर नही गया। आर्यमणि ने सबका ध्यान अपनी ओर ही बनवाए रखा। वह कमजोर तो पड़ ही चुका था बस दिमाग को संतुलित रखे हुये था। आर्यमणि सोच चुका था कि घेरा खुलते ही उसे क्या करना है।

10 मिनट का और इंतजार करना पड़ा। आर्यमणि की जब आंखे बंद हो रही थी, ठीक उसी वक्त किरणों का वह घेरा खुला। किरणों का घेरा जैसे ही खुला, पंजे के एक इशारे मात्र से ही आर्यमणि ने सबको जड़ों में ढक दिया। आर्यमणि के अंदर इतनी जान नही बाकी थी कि वह खड़ा भी हो सके। यह बात आर्यमणि खुद भी समझता था, इसलिए सबकुछ जैसे पहले से ही सोच रखा हो।

सबको जड़ों में ढकने के बाद खुद को और रूही को भी जड़ों में ढका। कास्टल के रास्ते पर जड़ों की लंबी पटरी ही जैसे आर्यमणि ने बिछा रखी थी। जड़ें दोनो को आगे भी धकेल रही थी और उन्हे जरूरी पोषण भी दे रही थी। लगभग 3 किलोमीटर तक जड़ों पर खिसकने के बाद आर्यमणि के अंदर कुछ जान वापस आयी और वह रूही को उठाकर कैस्टल के ओर दौड़ लगा दिया।

आर्यमणि जैसे ही कास्टल के अंदर पहुंचा, इवान उसकी गोद से रूही को उठाकर सीधा बेड पर रखा। संन्यासी शिवम् भी उतनी ही तेजी से अपना काम करने लगे। और इधर आर्यमणि, जैसे ही उसकी नजर अपने लोगों पर पड़ी... वो घुटनो पर आ गया और फूट–फूट कर रोने लगा। ओजल नीचे बैठकर, अपने दोनो हाथ से आर्यमणि के आंसू पूछती... "बॉस, दीदी को कुछ नही हुआ है... उसका इलाज चल रहा है।"…

"सब मेरी गलती है... सब मेरी गलती है... मुझे इतने लोगों से दुश्मनी करनी ही नही चाहिए थी"… आर्यमणि विलाप करते हुये बड़बड़ाने लगा।

ओजल:– संभालो बॉस, खुद को संभालो...

आर्यमणि:– रूही.. कहां है... कहां है रूही"…

ओजल:– यहीं पास में है।

आर्यमणि:– हटो मुझे उसे हील करना है... सब पीछे हटो..

तभी संन्यासी शिवम पीछे मुड़े और दंश को भूमि पर पटकते... "अशांत मन केवल तबाही लाता है। अभी रूही का जिस्म हील करेंगे तो हमेशा के लिये 10 छेद उसके बदन में रह जाएंगे। खुद को शांत करो"…

संन्यासी शिवम की बात सुनने के बाद आर्यमणि पूरा हताश हो गया। वहीं जमीन पर बैठकर रूही, रूही बड़बड़ाने लगा। दूसरी ओर जड़ों में फसे एलियन ने पहले खुद को जड़ों से आजाद किया, बाद में सादिक यालक और उसके पूरे पैक को। कुछ ही देर में कास्टल के दरवाजे पर पूरी फौज खड़ी थी। फौज लगातार अंदर घुसने का प्रयास कर रही थी, लेकिन दरवाजे के 10 कदम आगे ही हवा में जैसे किसी ने दीवार बना दिया हो। सभी दरवाजे से 10 कदम की दूरी पर खड़े थे।

संन्यासी शिवम्:– गुरुदेव दुश्मन द्वार खड़े है। मैं रूही को देखता हूं, आपलोग उन बाहर वाले दुश्मनों को देखिए।

आर्यमणि:– हां सही कह रहे आप।

संन्यासी शिवम्:– ओजल अपने दंश से सामने की सुरक्षा दीवार गिरा दो।

कास्टल के ग्राउंड फ्लोर पर संन्यासी शिवम, रूही का इलाज शुरू कर चुके थे। पूरी अल्फा पैक कास्टल के दरवाजे से बाहर कतार लगाये खड़ी थी। उधर से विवियन चिल्लाया.... “तुम लोग बहुत टेढ़ी जान हो... तुम्हारी दुर्दशा हो गयी फिर भी बच गये। तुम्हारी बाजारू पत्नी के शरीर में इतने छेद हुये, लेकिन लेजर के साथ–साथ उसके भीषण जहर से भी बच गयी। कमाल ही कर दिया। अच्छा हुआ जो तुम और तुम्हारे लोग कतार लगाकर अपनी मौत के लिये पहले ही सामने आ गये।”

इवान कुछ तो कहना चाह रहा था किंतु आर्यमणि ने इशारे में बस चुप रहने के लिये कहा। उधर निशांत इशारे में सबको समझा चुका था कि आस पास का दायरा पूरे भ्रम जाल में घिरा हुआ है। तभी एक बड़े विस्फोट के साथ बाहर की अदृश्य दीवार टूट गयी। जब रेत और धूल छंटा तब वहां इकलौत आर्यमणि अपना पाऊं जमाए खड़ा था। बाकी अल्फा पैक सदस्य पर विस्फोट का ऐसा असर हुआ की वो लोग कई फिट पीछे जाकर कास्टल की दीवार से टकराये। दरअसल मंत्र उच्चारण के बाद ओजल द्वारा कल्पवृक्ष दंश को संतुलित रूप से भूमि पर पटकना था, किंतु ओजल से थोड़ी सी चूक हो गयी और दीवार गिराने वाले विस्फोट का असर न सिर्फ विपक्षी को हुआ बल्कि आंशिक रूप से अल्फा पैक पर भी पड़ा।

असर तो आर्यमणि पर भी होता लेकिन विस्फोट के ठीक पहले आर्यमणि के हाथ में उसका एम्यूलेट पहुंच चुका था। बाकी के अल्फा पैक अपना धूल झाड़ते खड़े हुये। सबसे ज्यादा गुस्सा निशांत को ही आया। गुस्से में झुंझलाते हुये..... “तुम (ओजल) कभी भी नही सिख सकती क्या? विस्फोट का असर खुद के खेमे पर भी कर दी।”..

ओजल:– निशांत सर अभी सिख ही रही हूं। किसी वक्त आप भी कच्चे होंगे...

निशांत:– कच्चा था लेकिन अपनी बेवकूफी से अपने लोगों के परखच्चे नही उड़ाता था। पागल कहीं की...

इवान:– अरे वाह एमुलेट वापस आ गया।

दरअसल एक–एक करके सबके एमुलेट लौट आये थे। हवा में बिखरे रेत जब आंखों के आगे से हटा, दृष्टि पूरी साफ हो चुकी थी। विपक्ष दुश्मनों के आगे की कतार तो जैसे गायब हो चुकी थी, लेकिन बाकी बचे लोग हमला बोल चुके थे। बेचारे एलियन और यालवीक की सेना अपनी मौत को मारने की कोशिश में जुटे थे।

इनकी कोशिश तो एक कदम आगे की थी। जिस जगह अल्फा पैक खड़ी थी उसके आस पास की जगह पर गोल–गोल घेरे बन रहे थे। गोला इतना बड़ा था कि उसमे आराम से 4–5 लोग घिर जाये। हर कोई जमीन पर किरणों के बने गोल घेरे साफ देख सकते थे। एक प्रकार का एलियन महा जाल था, जिसमे अल्फा पैक को फसाकर मारने की कोशिश की जा रही थी।

किंतु निशांत के भ्रम जाल में पूरे एलियन उलझ कर रह गये। विवियन को भी समझ में आ गया की उनका पाला किस से पड़ा है। किरणों के गोल जाल में जब अल्फा पैक नही फंसा तब विवियन ने टर्की के स्थानीय वेयरवोल्फ को इशारा किया। वुल्फ पैक का मुखिया सादिक यालविक, इशारा मिलते ही आर्यमणि पर हमला करने के लिये कूद गया।

सादिक याल्विक लंबी दहाड़ लगाकर सीधा आर्यमणि के ऊपर छलांग लगा चुका था। किंतु भ्रम जाल के कारण सादिक यालविक को लग रहा था कि वह आर्यमणि के ऊपर कूद रहा है और आर्यमणि साफ देख सकता था कि सादिक ने एक हाथ बाएं छलांग लगाया था। आर्यमणि ने पंजा झटक कर अपने क्ला को बाहर निकाला और जैसे ही सादिक याल्विक उसके हाथ के रेंज में आया फिर तो आर्यमणि ने अपना पंजा सीधा सादिक यालविक के सीने में घुसेड़ कर उसे हवा में ही टांग दिया। पूरा यालविक पैक ही दर्द भरी दहाड़ लगाते आर्यमणि के ऊपर हमला कर चुका था।

अल्फा पैक जो पीछे खड़ी थी, वह बिना वक्त गवाए तेज दौड़ लगा चुके थे। एमुलेट के पावर स्टोन ने फिर तो सबको ऐसा गतिमान किया की सभी कुछ दूर के दौड़ने के बाद जब छलांग लगाये, फिर तो हवा में कई फिट ऊंचा उठे और सीधा जाकर वुल्फ के भिड़ में गिरे। ओजल अपना कल्पवृक्ष दंश जब चलाना शुरू की फिर तो सभी वुल्फ ऐसे कट रहे थे, मानो गाजर मूली कटना शुरू हो चुके हो।

अलबेली और इवान तो पंजों से सबको ऐसे फाड़ रहे थे कि उसे देखकर यालविक पैक के दूसरे वुल्फ स्थूल पड़ जाते। भय से हृदय में ऐसा कंपन पैदा होता की डर से अपना मल–मूत्र त्याग कर देते। महज 5 मिनट में ही यालविक पैक को चिड़ने के बाद सभी एक साथ गरजते..... “बॉस यालविक पैक साफ हो गया। बेचारा सादिक आपके पंजों पर टंगा अकेला जिंदा रह बचा है।”...

“फिर ये अकेला वुल्फ बिना अपने पैक के करेगा क्या?”.... कहते हुये आर्यमणि ने अपना दूसरा पंजा सीधा उसके गर्दन में घुसाया और ऊपर के ओर खींचकर ऐसे फाड़ा जैसे किसी कपड़े में पंजे फंसाकर फाड़ते हो। पूरा चेहरा आड़ा तिरछा होते हुये फटा। सादिक यालविक का पार्थिव शरीर वहीं रेत पर फेंककर आर्यमणि चिल्लाया..... “ये हरमजादे एलियन अब तब अपने पाऊं पर क्यों है? वायु विघ्न मंत्र के साथ आगे बढ़ो और अपने क्ला से सबके बदन को चीड़ फाड़ दो। जलने का सुख तो बहुत से एलियन ने प्राप्त किया है, आज इन्हे दिखा दो की हम फाड़ते कैसे है। याद रहे इनके शरीर में एसिड दौड़ता है, इसलिए जब तुम इन्हें फाड़ो तो तुम्हारे पंजों में एसिड को भी जो गला दे, ऐसा टॉक्सिक दौड़ना चाहिए। चलो–चलो जल्दी करो, मेरे कानो में चीख की आवाज नही आ रही।”....

इवान अपनी तेज दहाड़ के साथ एलियन के ओर दौड़ते..... “बॉस बस एक मिनट में यहां का माहौल चींख और पुकार वाली होगी। और उसके अगले 5 मिनट में पूरा माहौल शांत।”...

अलबेली भी इवान के साथ दौड़ती..... “क्या बात है मेरे पतिदेव। आई लव यू”...

इवान एक पल रुककर अलबेली को झपट्टा मारकर चूमा और उसके अगले ही पल लंबी छलांग लगाकर धम्म से सीधा एलियन के बीच कूदा। इवान के पीछे अलबेली भी कुद चुकी थी। और उन दोनो के पीछे ओजल। इवान और अलबेली जबतक एक को चीड़–फाड़ रहे थे, तब तक ओजल अपने दंश को लहराकर जब शांत हुई चारो ओर कटे सर हवा में थे।

ओजल एक भीड़ को शांत कर दूसरे भिड़ को काटने निकल गयी। न तो क्ला निकला न ही फेंग। न ही एलियन के लेजर असर किये ना ही फसाने वाले गोल किरणे। बस ओजल का कल्पवृक्ष दंश था और चींख के साथ हवा में उड़ते धर से अलग सर। जबतक इवान और अलबेली दूसरी भिड़ तक पहुंचते तब तक ओजल दूसरी भिड़ काटकर तीसरी भिड़ के ओर प्रस्थान कर चुकी थी। पूर्ण रौद्र रूप में ओजल जैसे भद्र काली का रूप ले चुकी थी।

तीसरे भिड़ की ओर आगे बढ़ने के बजाय इवान और अलबेली वापस आकर निशांत के पास खड़े हो गये और चिल्लाते हुये बस ओजल को प्रोत्साहन दे रहे थे। एक बार जब ओजल शुरू हुई फिर तो महज 5 मिनट में एलियन को तादाद मात्र 1 बची थी। वो भी विवियन जीवित इसलिए बचा क्योंकि बदले मौहौल को देखकर वह सब छोड़ कर भाग रहा था।

ओजल भी उसे मारने के लिये दौड़ी ही थी कि इतने में पुलिस सायरन सुनकर वह रुक गयी। टर्की की स्थानीय पुलिस पहुंच चुकी थी। पुलिस को बुलाने में भी विवियन का ही हाथ था। आर्यमणि ने महज इशारे किये और पल भर में ही निशांत समझ चुका था कि क्या करना है। पुलिस आयी और गयी इस बीच में निशांत ने उसे वही दिखाया जिस से पुलिस जल्दी चली जाये। मौहौल जब शांत हुआ तब हर किसी में एक ही रोष था, विवियन जिंदा भाग गया।
Nice update
 

ASR

I don't just read books, wanna to climb & live in
Divine
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nain11ster 🐺 🐺 🐺 🐺 🐺 🐺 🐺 🐺
अद्भुत अद्वितीय विगत अंकों ने आपकी अनुपस्थिति को सार्थक कर दिया है..
बहुत ही चतुराई से पिरोया गया ये युद्ध क्या क्या नहीं दिखा गया.. 🐺 🐺 की अपनी शक्ति को आर्य की शक्ति का समागम लालच एलियंस की अद्भुत क्षमता आज तो पूरे मजे करा दिया है...
रूही की दुर्दशा तो क्या उसकी किस्मत में लिखा है.. आर्य ने अंतत अपने को सम्भाल कर सभी को उनके परलोक में पहुचा दिया.. अहम शिवम क्या क्षमतावान है..
बहुत से पराक्रम व प्रकरण के बाद बहुत कुछ होना बाकी है... देखते हैं कि अब क्या होता है.. युद्ध का बिगुल बज चुका है दुर्दांत एलियंस को कैसे कंट्रोल कर उन्हें समाप्त करते हैं.. 😴 😚 🤗 😏 😘 😱 😉 😁 😅
अगले प्रेक्षण के इंतजार में...
 

Monty cool

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Monty bhai itne hatsh kyon.... Yadi aisi baat hai ki update me deri ke karan aapka aakhri comment ho jata hai ya fir ek story ko judge karke aap mujh par yah pressure bana rahe ki is story ka haal bhi wahi hoga fir Mai un story ke liye kya kahun... jinme mushkil se 2 ya 3 readers the... Fir bhi main wo story complete Kiya.... kya mai likhna chhod dun...

Sab waqt waqt ki baat hai monty bhai.... Mai tab tak ek update nahi chhapta jabtak Mai khud santust na ho jaun... Aapko kya pata ki "too young too old" me aapne jitne bhi update padhe honnge unse 4 guna jyada almost 700 se 750 update ko delete Kiya tha.... Fir aap meri mehnat ko kya kahnege....

Jo aaj ek update chhapta hai uske piche mere 24 ghante se jyade ki mehnat hoti ha...... Fir us mehnat ka kya kahenge... Khair.... Mujhe ab is mamle me jyada nahi kahna....
नैन भाई आप अगर बोल के गायब हो जाओगे तो हताश होना लाजमी है वैसे वेलकम बैंक
 

Monty cool

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वापसी तो धमाकेदार है बस लेय बनाये रखना चाहे हमें जी भरकर कोस लेना

वैसे जितना सोचा था उससे ज्यादा धमाकेदार शादी थी आर्य की लेकिन साला उन एलियानो का बॉस भाग गया कोई नहीं जायेगा किधर एक ना एक दिन आर्य के हाथ लग ही जाना है
 
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