Ignore those, You are going so good...
Support ke liye dhanyawaad, samay Milne par next update jaldi hi dunga...भाई जी, सही लिख रहे हो। आगे बढ़ो और, और बढ़िया लिखो एवम् गधो को इग्नोर करो
Ignore those, You are going so good...
Support ke liye dhanyawaad, samay Milne par next update jaldi hi dunga...भाई जी, सही लिख रहे हो। आगे बढ़ो और, और बढ़िया लिखो एवम् गधो को इग्नोर करो
Wahhh kya update diya h bhut hi kamuk update, 5 baar read kr chuka hu bt mann nhi bhra, please update nextUpdate 69 :
ट्रेन प्लेटफार्म पे लग चुकी थी पापा , टिकट के हिसाब से अपनी बॉगी का नंबर ढूंढ रहे थे । बॉगी नंबर था H2 । जल्दी ही पापा को बोगी दिख गई । बाहर एक स्टाफ खड़ा था । वो दोनों गेट के तरफ बढ़े तो पापा ने गौर किया कि प्रज्ञा आगे आगे चल रही थी । उसका गांड मटकते हुए बहुत अच्छा दिख रहा था । पास में ही कुछ अवारा लड़के एक दूसरे से प्रज्ञा की ओऱ इशारा कर के दिखा रहे थे । वो थोड़ी दूरी पर थे तो वो क्या बोल रहे थे ये तो पापा को भी सुनाई नहीं दे रहा था। मगर इनकी राक्षसों वाली हंसी पापा और प्रज्ञा दोनों को सुनाई दे रह था । पापा को गुस्सा आ रहा था , मगर प्रज्ञा सुन के अनसुना सा कर रही थी । गेट पे जब दोनों पहुंच ही गए थे कि एक ने चिल्ला के बोला : अरे अंकल , इतना कड़क माल लिये कहा जा रहे हो , जरा हमे भी तो चखा दो। हाहाहाहा.....
उनको लग रहा था कि वो बहुत कूल लग रहे है ऐसा कर के मगर पापा का गुस्सा आसमान पे चल गया था । प्रज्ञा ने वो सुना तो शर्म से सिर झुका लिया । पापा ने प्रज्ञा को बोला बेटी तू ये बैग लेके अंदर जा जरा इनकी खबर लेता हु । प्राची डर गई कि कही पापा उन अवारा लोगों से लड़ाई तो नहीं कर लेंगे , वो अवारा लड़के पापा को चोट ना पहुंचा दे ?
उसने पापा से कहा : पापा ट्रेन बस खुल ही जाएगी । इन सब में मत पड़ो, चलिए अपने शीट पे बैठते है ।
तभी एक और लड़का चिल्लाया : क्या अंकल , अकेले अकेले जवानी का रस पियोगे ।
प्रज्ञा शर्म से लाल हो गई । पापा का गुस्सा अब सर पे चढ़ गया । वही गेट पे कुछ पुलिस गार्ड भी खरे थे । पापा ने बैग वही रखा और तेजी से उन लड़कों के पास गए और एक लड़का जो बहुत ज्यादा हस रहा था और प्रज्ञा के बारे में चिल्ला के अभद्र बात की थी ,उसके गाल पे एक रसीद के चाटा जड़ दिया । चटाक..... की आवाज आस पास गूंज गई और वो लड़के एकदम सदमे में आ के शांत से हो गए । उसे पहले वो लड़के पापा पे हाथ उठाते वो गार्ड जो 1st AC के गेट पे खड़े थे , वो वहां पहुंच गए ।
गार्ड उन लड़कों से : क्यों बे लफंगो, क्या चुतिया गिरी कर रहा है ?
पापा : अरे ये लोग देखिए , आती जाती लड़कियों को छेड़ते रहते है । अभी मेरे बेटी पे अभद्र टिप्पणी कर रहे थे । मुझे से रहा नहीं गया और मैने रसीद के एक कान पे बजा दिया । उसके लिए माफ करियेगा सर ।
गार्ड : बिल्कुल सही किया , मै अभी RPF वालों को बोलता हु , इसी स्टेशन पे खबर लेंगे इसकी ।
तभी गेट पे खड़ा स्टाफ भी ये सब देख रहा था । पापा का ये रूप देख के सब पापा की प्रशंसा करने लगे । प्रज्ञा वही खरी पापा के इस दबंग अंदाज को दिखती रही पर कुछ बोल नहीं पाई । उसने मन में कहा : आज पापा नहीं होते तो पता नहीं ये लड़के कुछ कहने से ज़्यादा कुछ के सख्त थे । पापा ने कितना हिम्मत दिखाया मेरे लिए । पापा मुझे पे कभी आँच नहीं आने देंगे । पापा ने कैसे उस कामिने को रसीद के चाटा जड़ा , वाह मजा ही आ गया । पापा मेरे लिए किसी से भी भीड़ जाते है । कितना प्यार करते है वो मुझे ।
यहाँ प्रज्ञा के प्यार का मतबल पापा वाला प्यार से ही था । उसके दिल में पापा के लिए अभी तक उस तरह का प्रेम जग नहीं था । अगर प्रज्ञा को पापा से उस तरह का प्यार चाहिए होता तो उस दिन उनके गोद में ही कुछ ना कुछ कर बैठती। मगर आज के घटना ने पापा के मर्दानगी का छाप प्रज्ञा के दिल पे छोड़ दिया था ।
गार्ड ने पापा को करवाई का सांतवना दे के बोला , सर आपकी ट्रेन खुलने वाली है आप चलिए , इनका ठिकाना ह्म लगते है । तभी दूर से RPF के कुछ जवान आते दिखे । पापा समझ गए कि ये मावली पकड़े गए आज । वो गेट के तरफ आ गए । गत पे खड़े स्टाफ ने आगे बढ़ के पापा का सामान लिया और बोला : अच्छा किया सर आपने , कितने ही लड़कियों हो छेड़ रहे थे , जब से ट्रेन रुकी है । मै कुछ बोल नहीं रहा था क्योंकि मैं बाहर का हु ओर ये लोकल लोग। चक्कर में फंस गया तो ट्रेन को कौन देखेगा । वैसे मै आपका बोगी स्टाफ हु । आपकी बोगी H2 ही है ना।
पापा : जी , सही कहा अपने H 2 सीट नंबर 15-16 ।
स्टाफ : वेलकम sir ।
वो पापा और प्राची का सामान लेके आगे आगे बढ़ा और दोनों उसके पीछे पीछे बोगी में अंदर चल दिए ।
पापा ने स्टाफ से पूछा : और भैया ,कहा से हो ?
स्टाफ : लखनऊ से हु सर । आज रात को मै यही ड्यूटी कर रहा हूं। आपको कुछ भी चीज की जरूरत हो तुरंत मुझे बताइए । आपका दोनों सीट केबिन में है , आपके साथ वहां एक कपल भी है । होप यू डॉन्ट माइंड सर ।
पापा: ओह...हमे लगा कि हमे कूप में सीट मिला है ।
स्टाफ : नहीं सर , आपकी सीट नंबर 15-16 है जो 13-14 के साथ है सर ।
पापा : अरे यार , हम दोनों फैमिली है । एक कूप से केबिन का सीट एक्सचेंज हो जाता तो बहुत अच्छा होता ।
स्टाफ : सॉरी सर , वो तो मै कैसे बता पाऊंगा । वैसे टीटी सर आयेंगे तो उनसे पूछ के कोई जुगाड़ करवा दूंगा ,मगर तब तक आपको एडजस्ट करना पड़ेगा । टी टी अगले 3 स्टेशन बाद ही आयेंगे ।
पापा : ओह यानी एक घंटा । चलो मैनेज कर लेंगे ।
उसने दोनों को उनके केबिन तक पहुचा दिया । अंदर 4 शीट थी । एक साइड के ऊपर नीचे , प्रज्ञा और पापा का था । और दूसरे साइड का दोनों सीट एक मुस्लिम बाप बेटी जैसे दिख रहे 2 लोगों का था ।
पापा: क्या नाम है तुम्हारा ।
स्टाफ : सर राकेश ।
पापा: ठीक है राकेश , थैंक्यू। कुछ जरूरी होगी तो बुलाता हूं तुम्हें।
राकेश : ओके सर , बिल्कुल । आप कंफर्टेबल हो जाइए ।
पापा और प्रज्ञा ,केबिन के अंदर गए । एक तरफ सीट पे ,एक 50-55 साल का दाढ़ी वाले मौलवी की तरह दिखने वाले शख्स बैठे थे और वही पास में एक 18-19 साल की लड़की जो उनकी बेटी की उम्र की जान पड़ती थी , वो बैठी थी । उसके गले में काले रंग का हिजाब जैसा स्कार्फ था ।
पापा और प्रज्ञा ने अपना सामान को ठिकाने सीट के नीच लगा दिया और सीट पे बैठ चुके थे ।
प्रज्ञा साथ कुछ किताब लाई थी तो वो पढ़ने के लिए ले कर बैठ गई । और तभी ट्रेन चल पड़ी।
मौलवी : सुब्हानला, ट्रेन खुल गई ।
पापा : जी ।
पापा ने थोड़ा मौन रह के उस से पूछा : आप कहा से है , और कहा तक जा रहे है ।
मौलवी: अजी हम लखनऊ से है और अभी वहीं जा रहे है , हमारी फुफेरी बहन के बेटे की निकाह है । उसी में जा रहे है ।
पापा: अच्छा , लखनऊ से है आप ।
मौलवी: जी जी , जमाने से हमारा वहां एक होटल चलता है , बाप - दादा , सब चलाते रहे । अब मेरे बच्चे चलते है । मैने भी लगभग 30 साल चलाया । अब बम्बई में रहने लगा हु ।
पापा: अच्छा , हम लोग तो आप के ही शहर जा रहे है , लखनऊ, वहां हमारे बेटी का एग्जाम है कॉलेज के एडमिशन का।
मौलवी : वहां, चलिए , हम आपको अपने शहर का खरीददारी दिखाएंगे , आइएगा एक बार हमारे होटल पे , बहुत अच्छी कबाब मिलते है ।
पापा: जरूर आते , मगर हम शाकाहारी है ।
मौलवी: ओह अच्छा अच्छा , कोई नहीं , बादाम शरबत ही पिला देंगे आपको । हाहाहाहा...
पापा भी हस पड़े । प्रज्ञा के कानों में भी सारी बाते जा रही थी मगर वो अपने किताब में मुंह छुपाए पढ़ रही थी ।
पापा और उस आदमी की लंबी बात होने लगी , कॉलेज कहा है ? क्या क्या घूमने का जगह है लखनऊ में ?....बगैरा बगैरा।
तभी पापा का ध्यान उस लड़की ने खींचा और उन्होंने ऐसे ही पूछ लिया : और आपके कितने बच्चे है, ये आपकी छोटी बेटी है ?
उस मौलवी के मुंह पे एक मुस्कान आ गई : मेरी खुदा के फज़ल से ३ शादी हुई है जनाब। पहले बीवी से 6, दूसरी से 4 , और तीसरी से अभी कार्य प्रगति में है , नहीं भी तो 3-4 उनसे भी हो ही जाएगा अब तक बुढ़ा होऊंगा । हाहाहा....
पापा : हाहाहा..बारे क़िस्मत वाले है । काफ़ी मेहनत किया है अपने जीवन में ....हाहाहा...
मौलवी : जी अब जो है वो आल्हा की देन है ।
पापा: अच्छा ये आपकी बड़ी वाली पत्नी की बेटी है या २nd वाइफ़ से?
मौलवी: अजी , आप नहीं समझे लग रहा है , ये ही मेरी तीसरी बेगम है । मेरे चेहरे भाई की लड़की है । हमारे में चलता है चचेरे भाई वाली भतीजी से निकाह । और शादी भी 4 कर सकते है ।
पापा आवक रह गए । वही प्रज्ञा एकदम से अपना किताब नीचे कर के उस लड़की की ओर देखने लगी । एकदम मासूम चेहरा , एकदम गोरा दमकता , सेब की तरह लाल, बॉडी पार्ट समीज सलवार से ढकी हुए , सर के चारों तरफ एक हिजाब । बूढ़े ने लॉटरी मार लिया था ।
पापा: वाह जी वाह, किस्मत हो तो आपके जैसा । २ बीविया के रहते हुए , तीसरी से शादी किए और वो भी इतनी सुंदर। वाह।
प्रज्ञा को पापा के बातों के आश्चर्य हो रहा था । पापा ये क्या कह रहे है ? अच्छा किया ? ये बूढ़े ने इतनी छोटी लड़की के साथ शादी कर के उसे मां बनाने के चक्कर में है और पापा इसकी तारीफ कर रहे है ?
पापा : मगर आपको तीसरी शादी क्यों करनी पड़ी ? २ बीविया तो थी ही , ओर अब आपकी उमर भी जायदा है इनके साथ के लिए ।
मौलवी : अरे , इनकी अम्मि अब इस दुनिया में नहीं रही । और अबु भी पिछले ही साल एक एक्सीडेंट में चल बसे । तो इनकी चाचा इसका निकाह मेरे बेटे से करना चाहते थे । मगर उसने शादी वाले दिन ही पता नहीं क्या गया , रिश्ता तोड़ दिया । और ये बेचारी जहर खाने के चक्कर में थी , सब ने इसको बचाया । मगर एक लड़की का उसके शादी के दिन ही शादी टूट जाए तो उसकी शादी आगे भी होने में बहुत मुश्किल होती है । और मैने इसके चाचा को जवान भी दिया था कि ये मेरे घर की बहु बनेगी । अंत में कोई उपाय नहीं हो सका तो मैने हो इनके चाचा को बोला कि मैं ही शादी करने के लिए तैयार हु , क्योंकि जवान मैने दो थी । इस तरह हमारा निकाह हुआ ।
पापा और प्रज्ञा कहानी सुन के ही आवक हो गए थे । पर दूसरे को क्या कोसना जब पापा खुद ही अपने बेटी से ही शादी के के उसे प्रेग्नेंट बना चुके थे ।
वो दोनों बाते करते रहे । और खाना आ गया । पापा और प्रज्ञा घर से ही थोड़ा खा के आए थे तो एक थाली में ही खा लिया । उधर वो दोनों मियां बीवी भी खा लिए और वो हिजाब वाली लड़की को उसके शौहर ने उसे ऊपर वाले सीट पे सुला दिया ।
पापा ने राकेश को एक बार बुलाया और सीट के बारे में पूछा , उसने कहा , सर कोई भी कूप अवेलेबल नहीं है , और कुछ लोगों से मैने एक्सचेंज के लिए भी पूछा मगर वो भी केबिन नहीं लेना चाहते है। टीटी सर ने भी कोई जुगाड़ नहीं बिठा पाए । सॉरी सर ।
पापा को थोड़ा गुस्सा आया मगर अब क्या के सकते थे , एक रात की तो बात थी । पापा दरअसल प्रज्ञा के साथ अकेले में कुछ समय बिताना चाहते थे । खैर उस अरमान पे तो पानी फिर गया था । चलो वैसे भी 5-6 बजे तक तो उतर ही जाना था । रात को वो कितना ही प्रज्ञा के साथ बात के सकते थे ।
पापा ने प्रज्ञा से बोला : अब तो यही सोना पड़ेगा बेटी । तू ऊपर चली जा मै नीच सो जाता हूं।
प्रज्ञा : ok papa.
AC काफी तेज चल रहा था सो सबने चादर ओढ़ा हुआ था ।
पापा भी मन मार के नीचे वाले सीट पे लेट गए , और सोने की कोशिश करने लगे ।
लगभग आधी रात का समय था , पापा पूरे दिन का काम ऑफिस में करने से थक गए थे और गहरी नींद में सो गए थे । वही प्रज्ञा को कल एग्जाम का टेंशन को लेके नींद नहीं आ पा रही थी । और अभी जा के थोड़ा थोड़ा आंख लगाना शुरू हुआ था ।
गाड़ी अपने गति से भागे जा रही थी । और बाहर ट्रेन से छुक छुक की आवाज आ रही थी । सब का शरीर भी स्थिर नहीं था और गाड़ी के गति के कारण डोल रहा था । अचानक की प्रज्ञा को आभास हुआ कि एक कला जा आकृति सामने वाले सीट ले सोई लड़की के सीट पे चढ़ने की कोशिश के रहा है। प्रज्ञा ने हल्का सा अपना आंख खोला तो वो ओर कोई नहीं वो मौलवी ही था । बड़ा बड़ा दाढ़ी से ही प्रज्ञा को पता चल गया ।
उसने एकदम हल्की आवाज में उस लड़की को आवाज दिया : अमीना वो मेरी अमीना , सो गई क्या ?
लड़की : न....नहीं अब्बू, नींद नहीं आ रही आपके बिना ।
प्रज्ञा को अब्बू शब्द सुनते ही एकदम से धक्का लगा : क्या , क्या उसने उस आदमी को अब्बू बोला ? क्या ये आदमी इस लड़की का बाप है ? इसने पापा से कितना झूठ बोला ? और झूठ भी ऐसा कि कोई भी यकीन कर ले ।
प्रज्ञा का मन दहल गया कि ये बूढ़ा अभी इतनी रात को यूं अपने बेटी के सीट पे क्यों चढ़ आया है , और प्रज्ञा को इस सवाल का जवाब मिलने में ज्यादा वक्त नहीं लगा ।
अब्बू: अमीना मेरी जान , मुझे भी कहा तेरे बिना नींद आनी है । मगर मैने कितनी बार बोला है , बाहर अब्बू मत बुलाया कर , लोग सुनेगे तो क्या सोचेंगे ।
अमीना : सॉरी खान साहब ।
अब्बू : हां ये हुए बात। अब जरा मेरे ज्वालामुखी का लावा तेरे बुर में उड़ेलने दे ना।
प्रज्ञा एकदम ठिठुर गई ये सुन के ।
अमीना : यहां कितने लोग है अब्बू । नहीं नहीं ।
अब्बू : अरे मेरी जान , कोई नहीं आएगा , देख नीचे केबिन का दरवाजा बंद है ना।
अमीना : पर से लोग भी तो है , जो उस सीट में सो रहे है , और ये लड़की तो एकदम सामने ही है ।
अब्बू : अरे गहरी नींद में है , उन्हें क्या पता चलेगा । मैने नीचे वाले आदमी को थोड़ा हिलाया , एकदम घोड़ा बेच के सो रहा है ।
अमीना : मगर अब्बू , ये लड़की जग गई तो ।
अब्बू : तो इसको भी अपने मुस्लिम लार का मजा दे दूंगा ।
प्रज्ञा ये बात सुन के दहल गई , वो पानी पानी हो गई थी । वो जीवन में पहली बार ऐसा कुछ देख रही थी । एक बाप उसके सामने अपनी बेटी को चोदने की बात कर रहा था । उसका दिमाग तुरन्त अपने पापा और प्राची के बीच हुए मिलन पे चला गया , क्या पापा भी ऐसा कुछ करते होंगे दीदी के साथ ? ये क्या करने वाला है इस लड़की के साथ ? ओह ये तो उस लड़की को चूमने लगा है । हाय मै शर्म से पानी पानी हो रही हू , और ये कितने निर्लज्ज लोग है कि इन्हें बगल में २ अंजान लोग रहते भी शरम नहीं आ रही ।
उम्म्म...उम्म्म... कर के एकदम हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी । प्रज्ञा के पास कोई चारा नहीं था । पापा को तो ये सब पता भी नहीं चल रहा होगा ,वो इतमीनान से नीचे सो रहे थे । मगर ऊपर अब प्रज्ञा के आंखों से नींद एकदम गायब थी । मगर प्रज्ञा ऐसा दिखा रही थी कि वो सो रही है , वो भी गहरी नींद में । ओर ये दोनों बाप बेटी अपना काम शुरू कर चुके थे ।
अमीना : अब्बू ओके ये दाढ़ी चुभ रही है । मेरे होठ छिल जाएंगे ।
अब्बू : मेरी जान , अभी तो बुर में मिटा काँटा चुभोंगा उसका क्या ? वो तो चीर के रख देगा तेरा बुर अगर तुझे दाढ़ी से होठ छिल रहे है तो ।
प्रज्ञा का परा भी बढ़ता जा रहा था ।
वो दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे । और अब्बू उस लड़की का सीने का गोलाई अपने हथेली में भर के बैलून की तरह दबा रहा था ।
अमीना : अब्बू आऊच.....
अब्बू : सीईईई....क्या कर रही है , ये लोग जग गए तो गड़बड़ हो जाएगी । छोड़ सीधा आज पेलाई की कर लेता हू , रोज़ तो अच्छे से मजा लेके तो चोदता ही ही तुम्हे ।
प्रज्ञा मन में : हाय राम ये बूढ़ा रोज़ करता है ऐसा अपने बेटी के साथ ? क्या पापा भी दीदी के साथ ? बाप रे दीदी ये अब की होगी पापा के साथ ।
प्रज्ञा को अंधेरे में कुछ साफ साफ दिख नहीं रहा था । मगर इतना पता चल रहा था कि क्या क्या हो रहा है । उस आदमी ने अपने पजामे का नारा खोला और खींच के नीचे के लिया ,साथ ही अंडरवियर भी , अब उसका लिंग अंधेरे में ही आकर का दिखा था था । एकदम फ़ानफाया हुआ । उसने बोला : खोल अमीना , जल्दी , रहा नहीं जाता , नहीं तो नींद भी नहीं आएगी ।
उस लड़की ने भी अपने सलवार की डोरी खोल दी , कि तभी अब्बू ने कस के उसका सलवार खींच के गांड और चुत को आजाद के दिया ।
और उसने अपने बेटी का चुत चाटना शुरू के दिया ,ओर लगभग २ मिनट तक चाटता रहा ।
अमीना : अब्बू , बड़ा दुखता है , आराम से डालियेगा । यहां चीख़ निकल गई तो गजब हो जाएगा ।
अब्बू अपने लन्ड के छिले हुए टोपे पर थूक मलते हुए : एकदम मेरी बच्ची , आराम से , एकदम आराम से करूंगा । तू बस लेती रहा ।
प्रज्ञा ये सारा दृष्य दबी आंखों से देख रही थी । अब उसको दादी की सारी बाते याद आने लगी थी । दादी ने जो लड़का और लड़की के मिलन के बारे में बताया था । इतने में वो मौलवी ने अपना लिंग अमीना के बुर पे लगाया और एकदम धीरे से अंदर सरकने लगा , प्रज्ञा ये देख के दंग रह गई , इतना मोटा , इतना आराम से कैसे जा रहा है इस लड़की में ।
ये लड़की भी तो प्रज्ञा के उमर की ही लग रही थी । क्या इसको इस बूढ़े ने बहुत बार ऐसा किया है कि इसका इतना आराम से ले ले रही है ये लड़की ?
देखते ही देखते पूरा का पूरा लिंग अंदर के दिया उस मौलवी ने अपने बेटी के बुर में । अमीना के मुंह से एक सिसकी निकली , सीईईई....
अब्बू : बस बस मेरी बच्ची हो गया , चला गया अंदर ।
इतना सुनते ही प्रज्ञा की चुत से उसे कुछ चिपचिपा गढ़ा रस बहता भी महसूस हो रहा था , असल में वो गीली हो रही थी ।
एकदम धीरे धीरे वो आदमी अपने बेटी के चुत पे शॉर्ट लगने लगा । पट पट...चप चप...फच फच की हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी ।
प्रज्ञा को ये आवाज सोचने को मजबूर के रही थी कि , इसका एहसास कैसा होगा ? वो अब एकदम गरम हो गई थी ।
अब्बू : बस अमीना , ज़रा जल्दी जल्दी मारने दे बुर , मजा आ रहा है बेटी....आह....
चुदाई अपने पेस पे चालू था । ट्रेन तो वैसे भी झूल रही थी , तो किसी को सीट झुलाने का भी पता नहीं चल रहा था । उधर बस एक आदमी था जो ये सब देख रहा था , वो थी प्रज्ञा ।
चुदाई होती जा रही थी , होती जा रही थी । अब दोनों ने अपने कमर पे चादर डाल लिया था और कुछ दंग से दिख भी नहीं रहा था । पर हर स्टॉक जो अब्बू अमीना के चुत पे मर रहे थे , वो महसूस या पता एकदम चल रहा था ।
प्रज्ञा एकदम चिपके से अपना हाथ नीचे ले जा कर एक उंगली से अपने सलवार के अंदर हाथ डाल चुकी थी । और अनचुदी , मखमली चुत को रगड़ रही थी ।
लगभग अब्बू और बेटी का खेल 10-15 मिनट चल होगा और एक दो झटका खा के वो दाढ़ी वाला आदमी एकदम शांत हो गया । इसबार कोई कुछ नहीं बोला । वो उठा और अपना नारा बांध कर वो नीचे चला गया और गए खोल केबिन से बाहर निकल गया ।
वही वो लड़की अमीना , अपने चुत पकड़े ऐसी बैठी रही जैसे किसी ने उसको घोड़े के लन्ड से चुदाई करा दिया हो ।
थोड़े देर ऐसा लग रहा था कि उसे कोई होश नहीं है , फिर वो भी उठी और अपना सलवार टाइट कर के नीचे उतर के लेडीज़ बाथरूम के तरफ चल दिया ।
आप उस केबिन में बस पापा और प्रज्ञा ही बचे थे । पापा की सांसे तेज तेज चलने का आवाज आ रहा था । और पैगी को एक मदहोश करता जा रहा था । अभी अभी उसके सामने एक बाप ने अपनी बेटी चोदि थी । और नीचे पापा की मौजूदगी का एहसास उसे और जायदा जोश से भर रहा था । अचानक उसका शरीर आकरा और भलभला के उसने बुर से पानी छोड़ दिया । और एकदम शांत हो गई ।
इन सब से बेखबर पापा सो रहे थे । धीरे धीरे प्रज्ञा का भी आँख लगना शुरू हो गया और वो नींद के आगोश में चली गई ।
5 बजे के करीब पापा का अलार्म बजा, उन्होंने उठ के स्टेशन का नाम चेक किया था अगले 3 स्टेशन के बाद लखनऊ आने ही वाला था । पापा सब कुछ व्यवस्थित करने लगी। उधर वो आदमी भी उठ गया और सारा सामान निकालने लगा , उसे भी लखनऊ ही उतरना था । प्रज्ञा नीचे आ के अपना मुंह हाथ धो के फ्रेश हो गई थी , आज उसका एग्जाम था । सब लखनऊ आने का इंतजार के रहे थे तो प्रज्ञा ने उस लड़की को देखा । एकदम मासूम सी , पर रात को जो हुआ उसके साथ ये सोच के प्रज्ञा को पता चल गया था कि ये मासूम तो बिल्कुल नहीं है । उसपर से वो दाढ़ी वाल मौलवी, बार बार प्रज्ञा को घूरे जा रहा था। उसे गुस्सा भी आ रहा था ।
15- 20 मिनट बाद ही , लखनऊ आ चुका था । पापा ने मुझे बोला अभी इंतजार करो , अब उतर जाए तो उतरेंगे आराम से ।
वो मौलवी ने पापा को अपना होटल का कार्ड थमते हुए बोला : अच्छा भाई साहब , अच्छे से दिलवाई बेटी का एग्जाम , मै निकलता हूं। वैसे किसी चीज की परेशानी हो तो याद कर लीजिएगा।
पापा: अच्छा अच्छा ठीक है ।
पापा और प्रज्ञा , भी ट्रेन से बाहर आए , पापा ने एक ऑटो बुक किया और एक अच्छे होटल ले जाने को बोला , उसने पापा को बोल : सर बेस्ट होटल ले चलता हु । आइय बैठिये ।
पापा : बेस्ट ले चल और ये भी होना चाहिए कि कॉलेज के पास ही होना चाहिए । आज ही एग्जाम है ।
ऑटो वाला : सर बैठिए तो , कितनो के एग्जाम के लिए मैने यही होटल में ठहराया है । चालिया ना ,उस होटल से 300 m पे ही दीदी का कॉलेज है ।
पापा, : चलो फिर ये अच्छा हो गया ।
30-40 मिनट में ही वो लोग होटल पहुंच गए । होटल सच में बहुत खूबसूरत था । और एकदम एकांत वाले जगह पे था , वही दूर से ही प्रज्ञा के सेंटर वाले कॉलेज का बिल्डिंग भी दिख रहा था जो उस ऑटोवाले ने बताया था ।
प्रज्ञा : वाह पापा, मै ऐसे होटल में कभी नहीं रुकी हूं ।
पापा : तब अब रुक लेना ।
और वो समान निकलवाने लगे । वो लोग अंदर जाने लगे तो होटल का चकाचौंध देख के प्रज्ञा बहुत खुश हो गई ।
प्रज्ञा : पापा कितना सुंदर होटल है । बहुत महंगा होगा पापा , एक सप्ताह में तो और भी ज्यादा पैसे लगेंगे ।
पापा: तू उसकी चिंता मत कर बस एग्जाम की चिंता कर । पैसे मै किस लिए कमाता हु तेरे ही लिए ना ?
प्रज्ञा पापा का ये जवाब सुन के खुशी से झूम उठी ।
प्रज्ञा : सच पापा...आप मेरे बारे में इतना सोचते है ।
पापा : पगली , कैसी बात करती है तेरे बारे में नहीं सोचूंगा तो ओर किसके बारे में सोचूंगा , प्राची तो पत्नी है , अब तू ही तो मेरी इकलौती बेटी है ।
प्रज्ञा : थैंक यू पापा ।
पापा : थैंक्यू किस बात की , बाप हु तेरा , मेरे ऊपर हक है तेरा , और तेरे ऊपर भी मेरा पूरा हक है ।
प्रज्ञा : जी पापा , अब से थैंक्यू नहीं बोलूंगी। हाहाहा...
पापा: तेरे ऊपर हक है मेरा ये तो मानती है ना ?
प्राची थोड़ी झेप गई , वो पापा की बात को समझ गई ।
पापा: अरे बोल ।
प्रज्ञा : हां पापा , पूरा हक है , आप ही तो हमारा घर के मालिक है , मेरे पापा है , आपका ह्म सब पे पूरा हक है ।
पापा : ह्म्म्म...चलो हक है तो हक जताने दो और इस होटल में बुकिंग करने दो ।
प्रज्ञा : ओके पापा।
पापा: एग्जाम तेरे कितने बजे तक है ?
प्रज्ञा : पापा 11 बजे से 3 बजे तक ।
पापा : बढ़िया , उसके बाद मजे करेंगे ।
प्रज्ञा : थोड़ी शरमाई मजे के नाम पे फिर बोली : जी पापा।
प्रज्ञा वही लगे सोफे पे बैठ गई ,जब तक पापा बुकिंग करने गए ।
पापा रिसेप्शन पे गए तो वहां बैठी लड़की बोली : YES sir , how may I help you ?
पापा: मुझे एक कमरा चाहिए ।
लड़की : ओके सर ,कितने मेंबर्स के लिए ?
पापा: 2 लोगों के लिए ।
लड़की : ओके आप लोग कपल है ?
पापा को लगा कि अगर बेटी बोल के एक कमरे में रहेंगे तो ये लोग क्या सोचेंगे और २ कमरा इतने महंगे होटल में एक सप्ताह के लिए आउट ऑफ बजट है , इनको सब कुछ क्यों बताना की हमारा रिश्ता क्या है । पापा ने बस एक ह्म्म्म.... में जवाब दिया ।
लड़की : ओके सर , अपना नाम बताइए और मैडम का का नाम बताइए । और आप अपना क्या मैडम जी में से किसी एक का ID भी दीजिए ।
पापा ने उसे ये भी बता दिया कि रूम वो एक वीक का जरूर बुक कर रहे है मगर उनका काम जल्दी खत्म हो गया तो वो जल्दी भी चेक आउट कर सकते है ।
इसपे उस लड़की ने बोला : नो प्रॉबलम, सर आप जब चाहो चेक आउट के सकते है ।
पापा ने अपना ID देते हुए अपना नाम और प्रज्ञा का नाम लिखा दिया । वो रेस्पेसिनिष्ट झट झट सारा डाटा अपने कंप्यूट में एंट्री करने लगी । पापा का id स्कैन किया ओर फिर वापस दे दिया । एड्रेस और पर्पस ऑफ विजिट पूछ के उसने बोला : ok sir , your room will be ready in 10 mins , please just wait sir.
पापा भी प्रज्ञा के पास जा के सोफे पे बैठ गए । और प्रज्ञा से बोला : बेटी , एक प्रॉब्लम है , रूम्स बहुत महंगे है । इसलिए २ रूम करना सही नहीं लगा , एक ही रूम किया है , मगर काफी स्पेस वाला है तो कोई दिक्कत नहीं होगा । और रूम में सोफा भी है तो तू बोलेगी तो मै सोफे पे सो जाऊंगा , तो उसकी चिंता मत करना ।
प्रज्ञा : हां पापा , मै तो पहले ही बोली थी बहुत महंगा होटल होगा । की बात नहीं मुझे चलेगा पापा ।
पापा अब जा के आश्वत हुए ।
थोड़े देर बाद वो लड़की पापा के पास आई
और बोली : सर , हमे खेद है कि आप ने जो रूम बुक किया है , वो इन्फॉरफुनेटली अभी उपलब्ध नहीं हो सकेगा । उसके गेस्ट ने अपना स्टे को बढ़ा दिया है । मगर हमने आपको कमिटमेंट किया था तो हम आपको अपग्रेड के के कपल स्वीट प्रोवाइड कर रहे है । Is that ok for you sir ?
पापा: लेकिन उसके चार्जेज ?
लड़की : डॉन्ट वैरी सर, हम सेम प्राइस में हो आपको अपग्रेड के रहे है ।
पापा: फिर ठीक है ।
प्रज्ञा भी खुश हो गई ।
एक लड़का उन दोनों का सामान ले कर उन्हें अपने पीछे आने को बोला । लिफ्ट से 4 मंजिल पे पहुंच कर एक बारे से दरवाजे के कि ओर ले गया । कार्ड डाल के उसने रूम नंबर 405 खोला और पापा से बोल : वेलकम sir.
ये अगले एक सप्ताह तक आपका कमरा है , बाथरूम राइट साइड में है । और आप ठंडा और गरम दिनों पानी का उपयोग कर सकते है । लेफ्ट कॉर्नर में फ्रिज भी है , सो u can enjoy bear or softdrinks .
फिर वो पापा और प्राची को उनका बेडरूम दिखाया । वो बहुत ही शानदार और सुंदर था । कमरे के बीचोबीज एक बार सा बेड लगा था साइड में सोफा और एक साइड बालकनी में आराम कुर्सी डाला हुआ था । अगले 5 मीनट तक वो लड़का , पापा और प्रज्ञा को सारा रूल और सामान के उपलब्धता के बारे में बताता रहा । सब कुछ बताने के बाद वो जाने लगा ।
लड़का : चलिए सर मै निकलता हूं। आप लोगों किसी भी चीज की जरूरत हो , तो बताए हुए नंबर ले कॉल के लेना ।
पापा: थैंक्यू भाई , थैंक्स ।
लड़का : मेंशन नॉट सर । ओके सर, ओके मैम। इंजॉय यौर हनीमून और सर आपको अगर कोंडोम का जरूरी परे तो आप के बेड के दराज़ में परे है । You are free to use it. And if you need more just give a call we will provide.
![]()
दरअसल वो कपल स्वीट ज्यादातर कपल लोग ही बुक करते थे । और उस लड़के को ये पता नहीं था कि पापा और प्रज्ञा ने नार्मल रूम बुक किया था और उन्हें अपग्रेड के के ये रून दिया गया है । उसे बस रिसेपशन वाली लड़की ने बताया था कि ये कपल है , क्योंकि पापा ने प्रज्ञा का नाम कपल के तौर पे हो लिखवाया था ।
तो उस करके को लगा कि ये पक्का हनीमून मनाने हो आए होंगे , जैसे और लोग आते है । इसलिए उसने ऐसा बोल जाते जाते ।
पापा और प्रज्ञा एकदम से स्तब्ध रह गए । की ये क्या हुआ । प्रज्ञा को एक झटका सा लगा कि उसने पापा को कोंडोम के बारे में क्यों बताया ? और हनीमून?
पापा भी समझ नहीं पा रहे थे कि अब प्रज्ञा को कैसे समझाए ?
अगला अपडेट जल्द ही.....
Wahhh kya update diya h bhut hi kamuk update, 5 baar read kr chuka hu bt mann nhi bhra, please update next
Update 68:
पापा प्राची के एक छुअन से परेशान हो गए थे । वो रूम में चले तो आए थे मगर उनका दिल अब प्रज्ञा के छोटे और मुलायम मौसंबियों ने चुरा लिया था । आज पहलीबार उन्हें प्रज्ञा के जवानी का अंदाजा अच्छे से लगा था । 18 साल की कच्ची कली । फुदकती आई और पापा को इतना जोर से गले लगा गई कि अब पापा का मन मादकता से भर गया । उनका खड़ा लिंग ,इस बात का सबूत दे रहा था ।
रूम में आ जाने के बाद उन्होंने झट से रूम का दरवाजा बंद कर लिया, बेड पे लेट गए और सोचने लगे : ये मुझे क्या हो रहा है ? प्रज्ञा के साथ ये मै क्या कर रहा हूं? अभी जो हुआ , क्या ये जायज था ? मेरी नादान प्रज्ञा क्या इतना नहीं समझ पाई कि अब वो जवान हो चुकी है , और उसे पापा के गले ऐसे नहीं लगना चाहिए ? मुझे तो उसकी शरीर की गर्माहट पागल कर रही है । आह...ये वही एहसास है , जब प्राची संग मेरी शादी तय हुई थी , और उसने पहली बार मुझ से गले लगाया था । ये मेरा लिंग भी , इतना आउट ऑफ कंट्रोल हो रहा है । समझ नहीं आता ये सब मेरे साथ क्या हो रहा है । जीवन का ये क्या खेल चल रहा है । एक बेटी के कोख में मेरा बीज पल रहा है और मेरा मन अब प्रज्ञा के साथ संभोग करने का हो रहा है । क्या ये गलत नहीं होगा ? क्या घर में सबको पता भी चल जाएगा ? नहीं ये मै नहीं कर सकता । प्राची को दोखा कैसे दे दु ? प्राची अब मेरी पत्नी ही नहीं ,मेरे होने वाले बच्चे की मां भी बनने वाली है । उसके साथ विश्वासघात कैसे करूं ? उसका सौतन उसके छोटी बहन को ही कैसे बना दूं? और क्या प्रज्ञा इस रिश्ते के लिए मानेगी ? उस दिन जब वो मेरी गोद में थी और मेरे लन्ड का स्पर्श अपने गुप्तांग पे किया था तो , एकदम नरम और बेजान सी हो गई थी । कुछ बोल भी नहीं पाई थी बेचारी ।
आह...उसका वो चुलबुली अंदाज से तुरंत मेरे गोद में एकदम शांत हो जाना ,कितना कामुक था । आह.....मेरा लौरा....लग रहा है आज उसकी सारी नसे फटी जा रही है । प्रज्ञा ने ये क्या जादू कर दिया है । क्या सही क्या गलत ? प्राची भी तो मेरी बेटी ही थी शादी से पहले , उसे तो रगड़ रगड़ के चोदा है मैने । इसमें मां ने भी मेरी मदद ही की है । अब प्रज्ञा ने जो आग लगाई है वो कैसे बुझेगी ? पर ये सही भी तो नहीं है ? प्राची को तो सबके सहमति से मैने अपना बनाया था । मगर प्रज्ञा के साथ अगर ऐसा कुछ करता हु तो ये तो और घर में सबको पता लग गया तो मै सबकी नजरों में गिर जाऊंगा ।
पापा अपने ख्यालों में डूबे हुए थे । उनका मन प्रज्ञा संग मिलन को तरस के रह गया था । मगर साथ ही जब वो अपने कामुकता से ऊपर उठ के बातों को सोच रहे थे तो उन्हें प्रज्ञा के संग कुछ भी करना , घर में सबको धोखा देना जैसे लग रहा था । उन्हें तो ये भी पता अभी नहीं चल पाया था कि सच में प्रज्ञा को कोई ऐसी भावना उनके प्रति भी आती होगी या नहीं । इन सब में पापा का लिंग इतना कड़क हो गया था ,कि लग रहा था उनकी सारी नसे फट जाएगी । आज से पहले इतना कड़कपन बस प्राची के सील तोड़ने वाले दिन ही महसूस किया था उन्होंने ।
पापा का बस चलता तो वो अभी प्रज्ञा के रूम में जा के उसको अपने लिंग का स्वाद चखा देते , मगर अभी तो उन्हें प्रज्ञा को पटाने की जरूरत थी ,क्योंकि प्राची के जैसे , प्रज्ञा को दादी उनके नीचे आसानी से थोड़े ही आने देने वाली थी । पापा आज मर्यादा तोड़ देना चाहते थे । उनका लिंग कड़कपन के कारण अब दर्द देने लगा था । एक मीठा दर्द । अपने छोटी बेटी के बुर का स्वाद चखने को तैयार। मगर दिल्ली अभी दूर था , यानी पापा के सोचने से प्रज्ञा उनको थोड़े न आसानी से मिलने वाली थी । ऊपर से उनको प्राची के साथ वाले रिश्ते का बंधन भी इसकी इजाजत नहीं दे रहा था ।
मिला जुला कर पापा बहुत कन्फ्यूज थे । उनको समझ नहीं आ रह था कि करना क्या है । क्या उन्हें इस भावना को यही दावा देना चाहिए या आगे बढ़ना चाहिए । वो अगर इस भावना से आए बढ़ते है तो रस्ते में काटे ही काटे होंगे । एक बीवी के रहते, प्रज्ञा के संग ये सब करना उनको घर के सदस्यों के नज़रों में गिरा सकता था । मगर प्रज्ञा के शरीर की गर्मी की बात ही कुछ ओर थी ।
पापा ने ये सोचते हुए अपना लिंग को अपने हाथ में भर किया लिया था । इन सब बातों को सोचते हुए कब उन्होंने अपना लोअर उतार लिया उन्हें खुद पता नहीं चला। उनका लिंग एकदम फांफनाया हुआ एकदम डंडे की तरह खड़ा था । उसपे नसे उभर के नज़र आ रही थी । ये सब प्रज्ञा के बदन के गर्मी का असर था । पापा का जी बेचैन हो गया था । उस एक आलिंगन ने सब बदल के रख दिया था।
इस बेचैनी ने उनके आंखों से नींद तो कोशों दूर ही थी । अगर बेचैनी शांत नहीं होती तो वो सो भी नहीं पाते । वो प्रज्ञा के बारे में सोचने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे ।
वो इसकी शुरुआत करे कि ना करे , इस कशमकश में थे । एक बाप का दिल उनको इसकी इजाजत नहीं दे रहा था मगर एक मर्द का दिल प्रज्ञा संग संभोग का दृश्य देख रहा था । पापा का हाथ उनके मचलते लिंग पे अब ऊपर नीच करने लगा था ।
धीरे धीरे पापा के मरदाना सोच ने उनके बाप वाले सोच को दावा दिया और वो पूरी तरह कामना के आशक्त हो गए । उनका सुपारा इतना फुल गया था कि एक बारे आलू जैसा देख रहा था । उनकी फोरस्किन भी ऊपर नीचे नहीं हो पा रही थी बिना दर्द के । पापा ने अपने पास वाले दराज़ से वो लुब्रिकेंट निकला जो वो प्राची के संग चुदाई के दौरान उपयोग किया करते थे और उसे अपने सुपारे और लिंग पे अच्छे से मला। लिंग में चिकनाई आने के बाद सुपारे पे फोरस्किन का घर्षण थोड़ा कम हुआ । पापा आज प्रज्ञा के नाम का हस्तमैथुन जिंदगी में पहली बार कर रहे थे ।
उनके मुंह से आहे निकल रही थी साथ ही एकदम धीमे आवाज में प्रज्ञा का नाम : आह....प्रज्ञा...मेरी कच्ची कली प्रज्ञा.... आजा अपने डैडी के पास.....अह्ह्ह्ह....घुसने दे ना...आह्ह्ह्ह...मेरी प्यारी....इतना टाइट होगा तेरा....देख तूने कैसे अपने पापा को अपना दीवाना बस एक आलिंगन दे के बना दिया है.....मेरा लिंग का चोट तू अपने चुत पे सह लेगी न मेरी बच्ची.....आह्ह्ह्ह...ओह्ह्ह्ह....मज़ा आ रहा है...।
पापा प्रज्ञा को प्यार करने के लिए मचल गए थे । उनका हाथ अब ओर तेज़ चलने लगा । उनके ख्यालों में प्रज्ञा थी , और आज उन्हें हस्तमैथुन करते हुए ऐसा लग रहा था कि जैसे वो प्रज्ञा का चुनमुनिया सा चुत चोद रहे हो। उनके मुंह से आहे और सिसकारियां रह रह के निकल रहीं थी । वो निरंतर प्रज्ञा का नाम भी लेने लगे : आह....प्रज्ञा मेरी जान....आह्ह्ह...मज़ा आ गया...असली मज़ा भी मै तेरे साथ लेना चाहता हु मेरी छुटकी....आह्ह्ह...तेरा शरीर कितना गर्म था ....वो तेरे चूचो की मखमली एहसास जो मेरे सीने पे हुआ....आह्ह्ह्ह... कमाल का था....वही चुचि को जब मैं अपने मुंह में भर के पियूँगा तो कितना मजा आएगा मेरी बेटी ।
पापा का हाथ तेज होता गया और साथ ही आहे और तेज। और लगभग 10 मिनट के इस काल्पनिक प्रज्ञा के चुदाई के बाद पापा के लिंग से एक गाढ़ा वीर्य की धारा निकली
और उनके पेट , जांघ और अंडकोष पे झलक के गिर गई ।
उनको ऐसा लगा जैसे दिल का सारा बोझ उस धारा के साथ निकल गया । पापा हाफ रहे थे और प्रज्ञा से अपने दिल में ही बात कर रहे थे : आह मेरी प्रज्ञा , देख तेरे चक्कर में कितना माल निकला है मेरा , तूने ये क्या जादू के दिया है मेरी जान। जितना रस मेरा तेरे नाम में निकला है , उतना अगर तेरे योनि में अपना लिंग डाल के बच्चेदानी में डालता तो तू भी तो प्राची की तरह ही पक्का प्रेग्नेंट हों जाती ।
उधर प्रज्ञा अपने कमरे में आराम से सोई हुई थी । उसे इस की कोई भनक तक नहीं थी कि पापा उसका नाम ले के अपने रूम में क्या कर रहे है ? शिकार आराम से सोया हुआ था , और शिकारी शिकार को जाल में फंसाने का मन बना चुका था ।
उस दिन के बाद पापा ने फैसला ले लिया था कि , अगर प्राची के साथ उन्होंने सम्बन्ध बना ही लिया है , तो प्रज्ञा भी तो उनकी बेटी ही है । एक से शादी तो वो कर ही चुके है , दादी ने खुद से कराया और सब कुछ परिवार के रज़ा मंडी में हुआ तो प्रज्ञा के साथ क्यों नहीं कर सकता मैं । कभी प्राची भी बेटी हुआ करती थी अब जीवन संगनी है , और प्रज्ञा भी बेटी से माशूका बन जाए तो क्या हर्ज है । एक बेटी के गर्भ में जब मेरा बच्चा तक पल रहा है , तो मै अब बाप ओर बेटी के मर्यादा का पाठ पढ़ने वाला , या खुद को मर्यादा के दायरे में रखने वाला कौन होता हु ?
पापा ये सब सोच के अपने आप को तसल्ली दे रहे थे कि जो उन्होंने किया या अब करने का मन बना रहे थे वो जायज है । अपने छोटी बेटी को भी वो भोग लेना चाहते थे और इसके लिए अब उन्हें प्रज्ञा को हासिल करना ही होगा । क्योंकि प्रज्ञा का नाक नक्श प्राची से भी सुंदर था और जवानी उसपे भी आ ही चुकी थी । पापा जब से प्रज्ञा पे गौर करने लगे थे तो उन्हें ये आभास हो गया था कि उनको प्रज्ञा के चुचियो को चूसने में बड़ा मजा आएगा । और प्रज्ञा का चूतड़ भी जब वो चलती थी तो मटकते हुए बहुत शानदार लगने लगा था उन्हें । और वो प्राची से ज्यादा गुदाज़ लगते थे । वैसे भी प्रज्ञा और प्राची के उमर में जायदा फासला तो था नहीं , दोनों बस 1 ही वर्ष के छोटी बड़ी थी ।
प्रज्ञा की इसकी कोई भी आभास नहीं था कि उसके पापा का मन , उसके जवानी चखने पे आ गया है । वो आने वाले एग्जाम की तैयारी जोरो शोरों से कर रही थी ।
समय बीतता जा रहा था और प्रज्ञा की तैयारी बहुत अच्छी हुई थी , उसे लग रहा था कि उसका एग्जाम बहुत ही अच्छा जाएगा ।
दादी को वैसे तो कोई प्रॉब्लम नहीं था मगर उसे अगर प्राची का ख्याल नहीं रखना पड़ता तो वो भी प्रज्ञा संग जरूर जाती । प्रज्ञा पापा के साथ दूर जा रही थी वो भी 1 सप्ताह के लिए तो उनको लग रहा था कि एक महिला भी साथ जाए दोनों के तो अच्छा होता , मगर अब परिस्थिति ही ऐसी बनी थी कि प्रज्ञा के साथ दादी नहीं जा सकती थी । वैसे दादी को , प्रज्ञा को पापा के साथ जाने देने से ये निश्चिंतता जरूर थी कि प्रज्ञा सुरक्षित रहेगी । बस दिल में एक कसक थी कि एक मर्द के साथ वो पहली बार प्रज्ञा को बाहर भेज रही थी ,क्योंकि पापा भी एक मर्द पहले है , बाद में प्रज्ञा के पापा ।
खैर सारी तैयारी हो गई थी। आज शनिवार था और शाम होने को आ गई थी । पापा अभी ऑफिस से आए नहीं थे और उन्हें आने के बाद स्टेशन निकलना था प्रज्ञा को लेके । प्रज्ञा ने सारा सामान पैक कर लिया था । और प्राची ने पापा का बैग तैयार कर दिया था । कपड़े , पानी की बोतल और सारे बेसिक सामान ।
सामान की तैयारी करते देख ,प्रज्ञा को दादी ने पूछा : बेटी सब कुछ ध्यान से रखना । और कुछ रेडिमेड खाने का सामान भी रख लेना । अपने जरूरत का सारा तेल कंघी, अपने अंडरवियर और ब्रा वगैरह रखना ना भूलना ।
प्रज्ञा : अरे दादी में बच्ची थोड़े ना हूं ? सब रख लिया है , जरूरत का ।
दादी : अच्छा , एक पैकेट सेनेट्री पैड भी रख लेना , अगर वहां जरूरत पड़ी तो पापा से कहेगी ? या कहां ढूंढती फिरेगी ? वो अब याद से ।
प्रज्ञा : हां दादी , रख लूंगी , वैसे भी मासिक का दिन को अभी टाइम है , हो सकता है इस सप्ताह में ना आए ।
दादी : अरे , एमर्सेंजी के लिए रख ले ।
प्रज्ञा : ठीक है दादी ।
प्राची दादी और प्रज्ञा की बाते सुन के हँस पड़ी: हाहाहा...दादी आपका बस चलेगा तो आप खुद प्रज्ञा के साथ चल देती ।
दादी : और नहीं तो क्या , मेरी पोती को इतना कुछ अकेले संभालना पर रहा है । मै साथ रहती तो इन सब चीजों में ध्यान थोड़े लगाना पड़ता ।
प्राची : अरे दादी , पापा हैं ना उसका ख्याल रखने के लिए , वो अच्छे से रखेंगे , प्रज्ञा का ख्याल , आप निश्चिंत रहिए ।
प्रज्ञा : हां दादी , मै अकेले थोड़ी ना जा रही हु , मै तो जीजा जी के साथ जा रही हु।
प्राची : प्रज्ञा , रस्ते में पापा से कोई मजाक नहीं , ओर परेशान मत करना।
प्रज्ञा : वाह, पति की इतनी फिक्र हो रही है तुम्हे , चलो मै परेशान नहीं करूंगी अपने जीजा जी को ।
प्राची : हट बदमाश....
तभी पापा घर में आ गए : कौन किसको परेशान के रहा है ?
प्रज्ञा एकदम से झेप गई ।
प्राची : पापा , आपकी लाडो बेटी , आपको परेशान ना करे वही बोल रही हु इसे ।
पापा : अरे ये क्यों परेशान करेगी मुझे । ये तो मेरी प्यारी बच्ची है ।
पापा के हाव भाव से बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि ये वही आदमी है जो उस रात अपने बेटी का नाम लेले के अपने लिंग की मालिश कर रहा था ।
प्रज्ञा : हां पापा , बोलो ना इसको , इसको जलन हो रही है , मै आपके साथ बाहर जा रही हु तो ।
पापा : ऐसी कोई बात नहीं है प्रज्ञा , उसे जलन क्यों होगी , हमने तो हनीमून का प्लान बनाया ही था । अब प्राची के डिलीवरी के बाद उसे घुमा दूंगा ।
दादी : हां , चलो हाथ मुंह धो लो और खा के तैयार हो जाओ , ट्रेन २ घंटे में ही है ।
पापा : अरे हां , मै आता हु चेंज कर के ।
आज भी सबने साथ खाना खाया । दादी अपना ज्ञान प्रज्ञा को देती रही । और पापा को भी सब बाते समझती रही । वो पापा को बोल रही थी : बेटा नया जगह है , प्रज्ञा को अकेले मत छोड़ना , हर समय साथ रहना , और एग्जाम भी खुद दिलवाने जाना इसके साथ । होटल थिर डंग का लेना जहां सभ्य लोग रहे ।
पापा: अरे मां, आप टेंशन मत लो , मै सब देख लूंगा ।
पापा दादी को हर तरीके से संतुष्ट कर रहे थे कि उनकी पोती एकदम ठीक रहेगी ।
जल्दी ही जाने का समय हो गया ।
पापा ने प्राची को गले लगाया और उसके पेट पे हाथ फेरते हुए बोला । बस कुछ दिन में आ जाएंगे पापा , मां को तंग मत करना नन्हे बदमाश। प्राची हस परी । पापा ने प्राची को चूम लिया तो उसके आंखों में आंशू आ गए ।
पापा: अरे पागल मै यू गया और यू प्रज्ञा को एग्जाम दिला कर आ गया । तू मन क्यों छोटा करती है । वैसे भी दादी है ना , और कुछ भी हो, तुरंत अस्पताल वाले नंबर पे कॉल कारण , वो तुरंत हेल्प के लिए किसी को वेज देंगे । मैने सारी बात कर ली है ।
प्राची : ठीक है पापा, आराम से जाइए ।
दादी को भी पापा ने प्रणाम किया और प्रज्ञा ने भी किया । बाहर गाड़ी आ चुकी थी ,जो उन दोनों को स्टेशन ले के जाने वाली थी ।
पापा और प्रज्ञा गाड़ी में अपना सामान डाल के बैठ चुके थे । और दादी और प्राची को बाय बोल के स्टेशन की ओर ड्रा
इवर को गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए बोला ।
पापा और प्रज्ञा लगभग ३० मिनट में स्टेशन पहुंच गए ।
अगला अपडेट जल्द ही....
Update 69 :
ट्रेन प्लेटफार्म पे लग चुकी थी पापा , टिकट के हिसाब से अपनी बॉगी का नंबर ढूंढ रहे थे । बॉगी नंबर था H2 । जल्दी ही पापा को बोगी दिख गई । बाहर एक स्टाफ खड़ा था । वो दोनों गेट के तरफ बढ़े तो पापा ने गौर किया कि प्रज्ञा आगे आगे चल रही थी । उसका गांड मटकते हुए बहुत अच्छा दिख रहा था । पास में ही कुछ अवारा लड़के एक दूसरे से प्रज्ञा की ओऱ इशारा कर के दिखा रहे थे । वो थोड़ी दूरी पर थे तो वो क्या बोल रहे थे ये तो पापा को भी सुनाई नहीं दे रहा था। मगर इनकी राक्षसों वाली हंसी पापा और प्रज्ञा दोनों को सुनाई दे रह था । पापा को गुस्सा आ रहा था , मगर प्रज्ञा सुन के अनसुना सा कर रही थी । गेट पे जब दोनों पहुंच ही गए थे कि एक ने चिल्ला के बोला : अरे अंकल , इतना कड़क माल लिये कहा जा रहे हो , जरा हमे भी तो चखा दो। हाहाहाहा.....
उनको लग रहा था कि वो बहुत कूल लग रहे है ऐसा कर के मगर पापा का गुस्सा आसमान पे चल गया था । प्रज्ञा ने वो सुना तो शर्म से सिर झुका लिया । पापा ने प्रज्ञा को बोला बेटी तू ये बैग लेके अंदर जा जरा इनकी खबर लेता हु । प्राची डर गई कि कही पापा उन अवारा लोगों से लड़ाई तो नहीं कर लेंगे , वो अवारा लड़के पापा को चोट ना पहुंचा दे ?
उसने पापा से कहा : पापा ट्रेन बस खुल ही जाएगी । इन सब में मत पड़ो, चलिए अपने शीट पे बैठते है ।
तभी एक और लड़का चिल्लाया : क्या अंकल , अकेले अकेले जवानी का रस पियोगे ।
प्रज्ञा शर्म से लाल हो गई । पापा का गुस्सा अब सर पे चढ़ गया । वही गेट पे कुछ पुलिस गार्ड भी खरे थे । पापा ने बैग वही रखा और तेजी से उन लड़कों के पास गए और एक लड़का जो बहुत ज्यादा हस रहा था और प्रज्ञा के बारे में चिल्ला के अभद्र बात की थी ,उसके गाल पे एक रसीद के चाटा जड़ दिया । चटाक..... की आवाज आस पास गूंज गई और वो लड़के एकदम सदमे में आ के शांत से हो गए । उसे पहले वो लड़के पापा पे हाथ उठाते वो गार्ड जो 1st AC के गेट पे खड़े थे , वो वहां पहुंच गए ।
गार्ड उन लड़कों से : क्यों बे लफंगो, क्या चुतिया गिरी कर रहा है ?
पापा : अरे ये लोग देखिए , आती जाती लड़कियों को छेड़ते रहते है । अभी मेरे बेटी पे अभद्र टिप्पणी कर रहे थे । मुझे से रहा नहीं गया और मैने रसीद के एक कान पे बजा दिया । उसके लिए माफ करियेगा सर ।
गार्ड : बिल्कुल सही किया , मै अभी RPF वालों को बोलता हु , इसी स्टेशन पे खबर लेंगे इसकी ।
तभी गेट पे खड़ा स्टाफ भी ये सब देख रहा था । पापा का ये रूप देख के सब पापा की प्रशंसा करने लगे । प्रज्ञा वही खरी पापा के इस दबंग अंदाज को दिखती रही पर कुछ बोल नहीं पाई । उसने मन में कहा : आज पापा नहीं होते तो पता नहीं ये लड़के कुछ कहने से ज़्यादा कुछ के सख्त थे । पापा ने कितना हिम्मत दिखाया मेरे लिए । पापा मुझे पे कभी आँच नहीं आने देंगे । पापा ने कैसे उस कामिने को रसीद के चाटा जड़ा , वाह मजा ही आ गया । पापा मेरे लिए किसी से भी भीड़ जाते है । कितना प्यार करते है वो मुझे ।
यहाँ प्रज्ञा के प्यार का मतबल पापा वाला प्यार से ही था । उसके दिल में पापा के लिए अभी तक उस तरह का प्रेम जग नहीं था । अगर प्रज्ञा को पापा से उस तरह का प्यार चाहिए होता तो उस दिन उनके गोद में ही कुछ ना कुछ कर बैठती। मगर आज के घटना ने पापा के मर्दानगी का छाप प्रज्ञा के दिल पे छोड़ दिया था ।
गार्ड ने पापा को करवाई का सांतवना दे के बोला , सर आपकी ट्रेन खुलने वाली है आप चलिए , इनका ठिकाना ह्म लगते है । तभी दूर से RPF के कुछ जवान आते दिखे । पापा समझ गए कि ये मावली पकड़े गए आज । वो गेट के तरफ आ गए । गत पे खड़े स्टाफ ने आगे बढ़ के पापा का सामान लिया और बोला : अच्छा किया सर आपने , कितने ही लड़कियों हो छेड़ रहे थे , जब से ट्रेन रुकी है । मै कुछ बोल नहीं रहा था क्योंकि मैं बाहर का हु ओर ये लोकल लोग। चक्कर में फंस गया तो ट्रेन को कौन देखेगा । वैसे मै आपका बोगी स्टाफ हु । आपकी बोगी H2 ही है ना।
पापा : जी , सही कहा अपने H 2 सीट नंबर 15-16 ।
स्टाफ : वेलकम sir ।
वो पापा और प्राची का सामान लेके आगे आगे बढ़ा और दोनों उसके पीछे पीछे बोगी में अंदर चल दिए ।
पापा ने स्टाफ से पूछा : और भैया ,कहा से हो ?
स्टाफ : लखनऊ से हु सर । आज रात को मै यही ड्यूटी कर रहा हूं। आपको कुछ भी चीज की जरूरत हो तुरंत मुझे बताइए । आपका दोनों सीट केबिन में है , आपके साथ वहां एक कपल भी है । होप यू डॉन्ट माइंड सर ।
पापा: ओह...हमे लगा कि हमे कूप में सीट मिला है ।
स्टाफ : नहीं सर , आपकी सीट नंबर 15-16 है जो 13-14 के साथ है सर ।
पापा : अरे यार , हम दोनों फैमिली है । एक कूप से केबिन का सीट एक्सचेंज हो जाता तो बहुत अच्छा होता ।
स्टाफ : सॉरी सर , वो तो मै कैसे बता पाऊंगा । वैसे टीटी सर आयेंगे तो उनसे पूछ के कोई जुगाड़ करवा दूंगा ,मगर तब तक आपको एडजस्ट करना पड़ेगा । टी टी अगले 3 स्टेशन बाद ही आयेंगे ।
पापा : ओह यानी एक घंटा । चलो मैनेज कर लेंगे ।
उसने दोनों को उनके केबिन तक पहुचा दिया । अंदर 4 शीट थी । एक साइड के ऊपर नीचे , प्रज्ञा और पापा का था । और दूसरे साइड का दोनों सीट एक मुस्लिम बाप बेटी जैसे दिख रहे 2 लोगों का था ।
पापा: क्या नाम है तुम्हारा ।
स्टाफ : सर राकेश ।
पापा: ठीक है राकेश , थैंक्यू। कुछ जरूरी होगी तो बुलाता हूं तुम्हें।
राकेश : ओके सर , बिल्कुल । आप कंफर्टेबल हो जाइए ।
पापा और प्रज्ञा ,केबिन के अंदर गए । एक तरफ सीट पे ,एक 50-55 साल का दाढ़ी वाले मौलवी की तरह दिखने वाले शख्स बैठे थे और वही पास में एक 18-19 साल की लड़की जो उनकी बेटी की उम्र की जान पड़ती थी , वो बैठी थी । उसके गले में काले रंग का हिजाब जैसा स्कार्फ था ।
पापा और प्रज्ञा ने अपना सामान को ठिकाने सीट के नीच लगा दिया और सीट पे बैठ चुके थे ।
प्रज्ञा साथ कुछ किताब लाई थी तो वो पढ़ने के लिए ले कर बैठ गई । और तभी ट्रेन चल पड़ी।
मौलवी : सुब्हानला, ट्रेन खुल गई ।
पापा : जी ।
पापा ने थोड़ा मौन रह के उस से पूछा : आप कहा से है , और कहा तक जा रहे है ।
मौलवी: अजी हम लखनऊ से है और अभी वहीं जा रहे है , हमारी फुफेरी बहन के बेटे की निकाह है । उसी में जा रहे है ।
पापा: अच्छा , लखनऊ से है आप ।
मौलवी: जी जी , जमाने से हमारा वहां एक होटल चलता है , बाप - दादा , सब चलाते रहे । अब मेरे बच्चे चलते है । मैने भी लगभग 30 साल चलाया । अब बम्बई में रहने लगा हु ।
पापा: अच्छा , हम लोग तो आप के ही शहर जा रहे है , लखनऊ, वहां हमारे बेटी का एग्जाम है कॉलेज के एडमिशन का।
मौलवी : वहां, चलिए , हम आपको अपने शहर का खरीददारी दिखाएंगे , आइएगा एक बार हमारे होटल पे , बहुत अच्छी कबाब मिलते है ।
पापा: जरूर आते , मगर हम शाकाहारी है ।
मौलवी: ओह अच्छा अच्छा , कोई नहीं , बादाम शरबत ही पिला देंगे आपको । हाहाहाहा...
पापा भी हस पड़े । प्रज्ञा के कानों में भी सारी बाते जा रही थी मगर वो अपने किताब में मुंह छुपाए पढ़ रही थी ।
पापा और उस आदमी की लंबी बात होने लगी , कॉलेज कहा है ? क्या क्या घूमने का जगह है लखनऊ में ?....बगैरा बगैरा।
तभी पापा का ध्यान उस लड़की ने खींचा और उन्होंने ऐसे ही पूछ लिया : और आपके कितने बच्चे है, ये आपकी छोटी बेटी है ?
उस मौलवी के मुंह पे एक मुस्कान आ गई : मेरी खुदा के फज़ल से ३ शादी हुई है जनाब। पहले बीवी से 6, दूसरी से 4 , और तीसरी से अभी कार्य प्रगति में है , नहीं भी तो 3-4 उनसे भी हो ही जाएगा अब तक बुढ़ा होऊंगा । हाहाहा....
पापा : हाहाहा..बारे क़िस्मत वाले है । काफ़ी मेहनत किया है अपने जीवन में ....हाहाहा...
मौलवी : जी अब जो है वो आल्हा की देन है ।
पापा: अच्छा ये आपकी बड़ी वाली पत्नी की बेटी है या २nd वाइफ़ से?
मौलवी: अजी , आप नहीं समझे लग रहा है , ये ही मेरी तीसरी बेगम है । मेरे चेहरे भाई की लड़की है । हमारे में चलता है चचेरे भाई वाली भतीजी से निकाह । और शादी भी 4 कर सकते है ।
पापा आवक रह गए । वही प्रज्ञा एकदम से अपना किताब नीचे कर के उस लड़की की ओर देखने लगी । एकदम मासूम चेहरा , एकदम गोरा दमकता , सेब की तरह लाल, बॉडी पार्ट समीज सलवार से ढकी हुए , सर के चारों तरफ एक हिजाब । बूढ़े ने लॉटरी मार लिया था ।
पापा: वाह जी वाह, किस्मत हो तो आपके जैसा । २ बीविया के रहते हुए , तीसरी से शादी किए और वो भी इतनी सुंदर। वाह।
प्रज्ञा को पापा के बातों के आश्चर्य हो रहा था । पापा ये क्या कह रहे है ? अच्छा किया ? ये बूढ़े ने इतनी छोटी लड़की के साथ शादी कर के उसे मां बनाने के चक्कर में है और पापा इसकी तारीफ कर रहे है ?
पापा : मगर आपको तीसरी शादी क्यों करनी पड़ी ? २ बीविया तो थी ही , ओर अब आपकी उमर भी जायदा है इनके साथ के लिए ।
मौलवी : अरे , इनकी अम्मि अब इस दुनिया में नहीं रही । और अबु भी पिछले ही साल एक एक्सीडेंट में चल बसे । तो इनकी चाचा इसका निकाह मेरे बेटे से करना चाहते थे । मगर उसने शादी वाले दिन ही पता नहीं क्या गया , रिश्ता तोड़ दिया । और ये बेचारी जहर खाने के चक्कर में थी , सब ने इसको बचाया । मगर एक लड़की का उसके शादी के दिन ही शादी टूट जाए तो उसकी शादी आगे भी होने में बहुत मुश्किल होती है । और मैने इसके चाचा को जवान भी दिया था कि ये मेरे घर की बहु बनेगी । अंत में कोई उपाय नहीं हो सका तो मैने हो इनके चाचा को बोला कि मैं ही शादी करने के लिए तैयार हु , क्योंकि जवान मैने दो थी । इस तरह हमारा निकाह हुआ ।
पापा और प्रज्ञा कहानी सुन के ही आवक हो गए थे । पर दूसरे को क्या कोसना जब पापा खुद ही अपने बेटी से ही शादी के के उसे प्रेग्नेंट बना चुके थे ।
वो दोनों बाते करते रहे । और खाना आ गया । पापा और प्रज्ञा घर से ही थोड़ा खा के आए थे तो एक थाली में ही खा लिया । उधर वो दोनों मियां बीवी भी खा लिए और वो हिजाब वाली लड़की को उसके शौहर ने उसे ऊपर वाले सीट पे सुला दिया ।
पापा ने राकेश को एक बार बुलाया और सीट के बारे में पूछा , उसने कहा , सर कोई भी कूप अवेलेबल नहीं है , और कुछ लोगों से मैने एक्सचेंज के लिए भी पूछा मगर वो भी केबिन नहीं लेना चाहते है। टीटी सर ने भी कोई जुगाड़ नहीं बिठा पाए । सॉरी सर ।
पापा को थोड़ा गुस्सा आया मगर अब क्या के सकते थे , एक रात की तो बात थी । पापा दरअसल प्रज्ञा के साथ अकेले में कुछ समय बिताना चाहते थे । खैर उस अरमान पे तो पानी फिर गया था । चलो वैसे भी 5-6 बजे तक तो उतर ही जाना था । रात को वो कितना ही प्रज्ञा के साथ बात के सकते थे ।
पापा ने प्रज्ञा से बोला : अब तो यही सोना पड़ेगा बेटी । तू ऊपर चली जा मै नीच सो जाता हूं।
प्रज्ञा : ok papa.
AC काफी तेज चल रहा था सो सबने चादर ओढ़ा हुआ था ।
पापा भी मन मार के नीचे वाले सीट पे लेट गए , और सोने की कोशिश करने लगे ।
लगभग आधी रात का समय था , पापा पूरे दिन का काम ऑफिस में करने से थक गए थे और गहरी नींद में सो गए थे । वही प्रज्ञा को कल एग्जाम का टेंशन को लेके नींद नहीं आ पा रही थी । और अभी जा के थोड़ा थोड़ा आंख लगाना शुरू हुआ था ।
गाड़ी अपने गति से भागे जा रही थी । और बाहर ट्रेन से छुक छुक की आवाज आ रही थी । सब का शरीर भी स्थिर नहीं था और गाड़ी के गति के कारण डोल रहा था । अचानक की प्रज्ञा को आभास हुआ कि एक कला जा आकृति सामने वाले सीट ले सोई लड़की के सीट पे चढ़ने की कोशिश के रहा है। प्रज्ञा ने हल्का सा अपना आंख खोला तो वो ओर कोई नहीं वो मौलवी ही था । बड़ा बड़ा दाढ़ी से ही प्रज्ञा को पता चल गया ।
उसने एकदम हल्की आवाज में उस लड़की को आवाज दिया : अमीना वो मेरी अमीना , सो गई क्या ?
लड़की : न....नहीं अब्बू, नींद नहीं आ रही आपके बिना ।
प्रज्ञा को अब्बू शब्द सुनते ही एकदम से धक्का लगा : क्या , क्या उसने उस आदमी को अब्बू बोला ? क्या ये आदमी इस लड़की का बाप है ? इसने पापा से कितना झूठ बोला ? और झूठ भी ऐसा कि कोई भी यकीन कर ले ।
प्रज्ञा का मन दहल गया कि ये बूढ़ा अभी इतनी रात को यूं अपने बेटी के सीट पे क्यों चढ़ आया है , और प्रज्ञा को इस सवाल का जवाब मिलने में ज्यादा वक्त नहीं लगा ।
अब्बू: अमीना मेरी जान , मुझे भी कहा तेरे बिना नींद आनी है । मगर मैने कितनी बार बोला है , बाहर अब्बू मत बुलाया कर , लोग सुनेगे तो क्या सोचेंगे ।
अमीना : सॉरी खान साहब ।
अब्बू : हां ये हुए बात। अब जरा मेरे ज्वालामुखी का लावा तेरे बुर में उड़ेलने दे ना।
प्रज्ञा एकदम ठिठुर गई ये सुन के ।
अमीना : यहां कितने लोग है अब्बू । नहीं नहीं ।
अब्बू : अरे मेरी जान , कोई नहीं आएगा , देख नीचे केबिन का दरवाजा बंद है ना।
अमीना : पर से लोग भी तो है , जो उस सीट में सो रहे है , और ये लड़की तो एकदम सामने ही है ।
अब्बू : अरे गहरी नींद में है , उन्हें क्या पता चलेगा । मैने नीचे वाले आदमी को थोड़ा हिलाया , एकदम घोड़ा बेच के सो रहा है ।
अमीना : मगर अब्बू , ये लड़की जग गई तो ।
अब्बू : तो इसको भी अपने मुस्लिम लार का मजा दे दूंगा ।
प्रज्ञा ये बात सुन के दहल गई , वो पानी पानी हो गई थी । वो जीवन में पहली बार ऐसा कुछ देख रही थी । एक बाप उसके सामने अपनी बेटी को चोदने की बात कर रहा था । उसका दिमाग तुरन्त अपने पापा और प्राची के बीच हुए मिलन पे चला गया , क्या पापा भी ऐसा कुछ करते होंगे दीदी के साथ ? ये क्या करने वाला है इस लड़की के साथ ? ओह ये तो उस लड़की को चूमने लगा है । हाय मै शर्म से पानी पानी हो रही हू , और ये कितने निर्लज्ज लोग है कि इन्हें बगल में २ अंजान लोग रहते भी शरम नहीं आ रही ।
उम्म्म...उम्म्म... कर के एकदम हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी । प्रज्ञा के पास कोई चारा नहीं था । पापा को तो ये सब पता भी नहीं चल रहा होगा ,वो इतमीनान से नीचे सो रहे थे । मगर ऊपर अब प्रज्ञा के आंखों से नींद एकदम गायब थी । मगर प्रज्ञा ऐसा दिखा रही थी कि वो सो रही है , वो भी गहरी नींद में । ओर ये दोनों बाप बेटी अपना काम शुरू कर चुके थे ।
अमीना : अब्बू ओके ये दाढ़ी चुभ रही है । मेरे होठ छिल जाएंगे ।
अब्बू : मेरी जान , अभी तो बुर में मिटा काँटा चुभोंगा उसका क्या ? वो तो चीर के रख देगा तेरा बुर अगर तुझे दाढ़ी से होठ छिल रहे है तो ।
प्रज्ञा का परा भी बढ़ता जा रहा था ।
वो दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे । और अब्बू उस लड़की का सीने का गोलाई अपने हथेली में भर के बैलून की तरह दबा रहा था ।
अमीना : अब्बू आऊच.....
अब्बू : सीईईई....क्या कर रही है , ये लोग जग गए तो गड़बड़ हो जाएगी । छोड़ सीधा आज पेलाई की कर लेता हू , रोज़ तो अच्छे से मजा लेके तो चोदता ही ही तुम्हे ।
प्रज्ञा मन में : हाय राम ये बूढ़ा रोज़ करता है ऐसा अपने बेटी के साथ ? क्या पापा भी दीदी के साथ ? बाप रे दीदी ये अब की होगी पापा के साथ ।
प्रज्ञा को अंधेरे में कुछ साफ साफ दिख नहीं रहा था । मगर इतना पता चल रहा था कि क्या क्या हो रहा है । उस आदमी ने अपने पजामे का नारा खोला और खींच के नीचे के लिया ,साथ ही अंडरवियर भी , अब उसका लिंग अंधेरे में ही आकर का दिखा था था । एकदम फ़ानफाया हुआ । उसने बोला : खोल अमीना , जल्दी , रहा नहीं जाता , नहीं तो नींद भी नहीं आएगी ।
उस लड़की ने भी अपने सलवार की डोरी खोल दी , कि तभी अब्बू ने कस के उसका सलवार खींच के गांड और चुत को आजाद के दिया ।
और उसने अपने बेटी का चुत चाटना शुरू के दिया ,ओर लगभग २ मिनट तक चाटता रहा ।
अमीना : अब्बू , बड़ा दुखता है , आराम से डालियेगा । यहां चीख़ निकल गई तो गजब हो जाएगा ।
अब्बू अपने लन्ड के छिले हुए टोपे पर थूक मलते हुए : एकदम मेरी बच्ची , आराम से , एकदम आराम से करूंगा । तू बस लेती रहा ।
प्रज्ञा ये सारा दृष्य दबी आंखों से देख रही थी । अब उसको दादी की सारी बाते याद आने लगी थी । दादी ने जो लड़का और लड़की के मिलन के बारे में बताया था । इतने में वो मौलवी ने अपना लिंग अमीना के बुर पे लगाया और एकदम धीरे से अंदर सरकने लगा , प्रज्ञा ये देख के दंग रह गई , इतना मोटा , इतना आराम से कैसे जा रहा है इस लड़की में ।
ये लड़की भी तो प्रज्ञा के उमर की ही लग रही थी । क्या इसको इस बूढ़े ने बहुत बार ऐसा किया है कि इसका इतना आराम से ले ले रही है ये लड़की ?
देखते ही देखते पूरा का पूरा लिंग अंदर के दिया उस मौलवी ने अपने बेटी के बुर में । अमीना के मुंह से एक सिसकी निकली , सीईईई....
अब्बू : बस बस मेरी बच्ची हो गया , चला गया अंदर ।
इतना सुनते ही प्रज्ञा की चुत से उसे कुछ चिपचिपा गढ़ा रस बहता भी महसूस हो रहा था , असल में वो गीली हो रही थी ।
एकदम धीरे धीरे वो आदमी अपने बेटी के चुत पे शॉर्ट लगने लगा । पट पट...चप चप...फच फच की हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी ।
प्रज्ञा को ये आवाज सोचने को मजबूर के रही थी कि , इसका एहसास कैसा होगा ? वो अब एकदम गरम हो गई थी ।
अब्बू : बस अमीना , ज़रा जल्दी जल्दी मारने दे बुर , मजा आ रहा है बेटी....आह....
चुदाई अपने पेस पे चालू था । ट्रेन तो वैसे भी झूल रही थी , तो किसी को सीट झुलाने का भी पता नहीं चल रहा था । उधर बस एक आदमी था जो ये सब देख रहा था , वो थी प्रज्ञा ।
चुदाई होती जा रही थी , होती जा रही थी । अब दोनों ने अपने कमर पे चादर डाल लिया था और कुछ दंग से दिख भी नहीं रहा था । पर हर स्टॉक जो अब्बू अमीना के चुत पे मर रहे थे , वो महसूस या पता एकदम चल रहा था ।
प्रज्ञा एकदम चिपके से अपना हाथ नीचे ले जा कर एक उंगली से अपने सलवार के अंदर हाथ डाल चुकी थी । और अनचुदी , मखमली चुत को रगड़ रही थी ।
लगभग अब्बू और बेटी का खेल 10-15 मिनट चल होगा और एक दो झटका खा के वो दाढ़ी वाला आदमी एकदम शांत हो गया । इसबार कोई कुछ नहीं बोला । वो उठा और अपना नारा बांध कर वो नीचे चला गया और गए खोल केबिन से बाहर निकल गया ।
वही वो लड़की अमीना , अपने चुत पकड़े ऐसी बैठी रही जैसे किसी ने उसको घोड़े के लन्ड से चुदाई करा दिया हो ।
थोड़े देर ऐसा लग रहा था कि उसे कोई होश नहीं है , फिर वो भी उठी और अपना सलवार टाइट कर के नीचे उतर के लेडीज़ बाथरूम के तरफ चल दिया ।
आप उस केबिन में बस पापा और प्रज्ञा ही बचे थे । पापा की सांसे तेज तेज चलने का आवाज आ रहा था । और पैगी को एक मदहोश करता जा रहा था । अभी अभी उसके सामने एक बाप ने अपनी बेटी चोदि थी । और नीचे पापा की मौजूदगी का एहसास उसे और जायदा जोश से भर रहा था । अचानक उसका शरीर आकरा और भलभला के उसने बुर से पानी छोड़ दिया । और एकदम शांत हो गई ।
इन सब से बेखबर पापा सो रहे थे । धीरे धीरे प्रज्ञा का भी आँख लगना शुरू हो गया और वो नींद के आगोश में चली गई ।
5 बजे के करीब पापा का अलार्म बजा, उन्होंने उठ के स्टेशन का नाम चेक किया था अगले 3 स्टेशन के बाद लखनऊ आने ही वाला था । पापा सब कुछ व्यवस्थित करने लगी। उधर वो आदमी भी उठ गया और सारा सामान निकालने लगा , उसे भी लखनऊ ही उतरना था । प्रज्ञा नीचे आ के अपना मुंह हाथ धो के फ्रेश हो गई थी , आज उसका एग्जाम था । सब लखनऊ आने का इंतजार के रहे थे तो प्रज्ञा ने उस लड़की को देखा । एकदम मासूम सी , पर रात को जो हुआ उसके साथ ये सोच के प्रज्ञा को पता चल गया था कि ये मासूम तो बिल्कुल नहीं है । उसपर से वो दाढ़ी वाल मौलवी, बार बार प्रज्ञा को घूरे जा रहा था। उसे गुस्सा भी आ रहा था ।
15- 20 मिनट बाद ही , लखनऊ आ चुका था । पापा ने मुझे बोला अभी इंतजार करो , अब उतर जाए तो उतरेंगे आराम से ।
वो मौलवी ने पापा को अपना होटल का कार्ड थमते हुए बोला : अच्छा भाई साहब , अच्छे से दिलवाई बेटी का एग्जाम , मै निकलता हूं। वैसे किसी चीज की परेशानी हो तो याद कर लीजिएगा।
पापा: अच्छा अच्छा ठीक है ।
पापा और प्रज्ञा , भी ट्रेन से बाहर आए , पापा ने एक ऑटो बुक किया और एक अच्छे होटल ले जाने को बोला , उसने पापा को बोल : सर बेस्ट होटल ले चलता हु । आइय बैठिये ।
पापा : बेस्ट ले चल और ये भी होना चाहिए कि कॉलेज के पास ही होना चाहिए । आज ही एग्जाम है ।
ऑटो वाला : सर बैठिए तो , कितनो के एग्जाम के लिए मैने यही होटल में ठहराया है । चालिया ना ,उस होटल से 300 m पे ही दीदी का कॉलेज है ।
पापा, : चलो फिर ये अच्छा हो गया ।
30-40 मिनट में ही वो लोग होटल पहुंच गए । होटल सच में बहुत खूबसूरत था । और एकदम एकांत वाले जगह पे था , वही दूर से ही प्रज्ञा के सेंटर वाले कॉलेज का बिल्डिंग भी दिख रहा था जो उस ऑटोवाले ने बताया था ।
प्रज्ञा : वाह पापा, मै ऐसे होटल में कभी नहीं रुकी हूं ।
पापा : तब अब रुक लेना ।
और वो समान निकलवाने लगे । वो लोग अंदर जाने लगे तो होटल का चकाचौंध देख के प्रज्ञा बहुत खुश हो गई ।
प्रज्ञा : पापा कितना सुंदर होटल है । बहुत महंगा होगा पापा , एक सप्ताह में तो और भी ज्यादा पैसे लगेंगे ।
पापा: तू उसकी चिंता मत कर बस एग्जाम की चिंता कर । पैसे मै किस लिए कमाता हु तेरे ही लिए ना ?
प्रज्ञा पापा का ये जवाब सुन के खुशी से झूम उठी ।
प्रज्ञा : सच पापा...आप मेरे बारे में इतना सोचते है ।
पापा : पगली , कैसी बात करती है तेरे बारे में नहीं सोचूंगा तो ओर किसके बारे में सोचूंगा , प्राची तो पत्नी है , अब तू ही तो मेरी इकलौती बेटी है ।
प्रज्ञा : थैंक यू पापा ।
पापा : थैंक्यू किस बात की , बाप हु तेरा , मेरे ऊपर हक है तेरा , और तेरे ऊपर भी मेरा पूरा हक है ।
प्रज्ञा : जी पापा , अब से थैंक्यू नहीं बोलूंगी। हाहाहा...
पापा: तेरे ऊपर हक है मेरा ये तो मानती है ना ?
प्राची थोड़ी झेप गई , वो पापा की बात को समझ गई ।
पापा: अरे बोल ।
प्रज्ञा : हां पापा , पूरा हक है , आप ही तो हमारा घर के मालिक है , मेरे पापा है , आपका ह्म सब पे पूरा हक है ।
पापा : ह्म्म्म...चलो हक है तो हक जताने दो और इस होटल में बुकिंग करने दो ।
प्रज्ञा : ओके पापा।
पापा: एग्जाम तेरे कितने बजे तक है ?
प्रज्ञा : पापा 11 बजे से 3 बजे तक ।
पापा : बढ़िया , उसके बाद मजे करेंगे ।
प्रज्ञा : थोड़ी शरमाई मजे के नाम पे फिर बोली : जी पापा।
प्रज्ञा वही लगे सोफे पे बैठ गई ,जब तक पापा बुकिंग करने गए ।
पापा रिसेप्शन पे गए तो वहां बैठी लड़की बोली : YES sir , how may I help you ?
पापा: मुझे एक कमरा चाहिए ।
लड़की : ओके सर ,कितने मेंबर्स के लिए ?
पापा: 2 लोगों के लिए ।
लड़की : ओके आप लोग कपल है ?
पापा को लगा कि अगर बेटी बोल के एक कमरे में रहेंगे तो ये लोग क्या सोचेंगे और २ कमरा इतने महंगे होटल में एक सप्ताह के लिए आउट ऑफ बजट है , इनको सब कुछ क्यों बताना की हमारा रिश्ता क्या है । पापा ने बस एक ह्म्म्म.... में जवाब दिया ।
लड़की : ओके सर , अपना नाम बताइए और मैडम का का नाम बताइए । और आप अपना क्या मैडम जी में से किसी एक का ID भी दीजिए ।
पापा ने उसे ये भी बता दिया कि रूम वो एक वीक का जरूर बुक कर रहे है मगर उनका काम जल्दी खत्म हो गया तो वो जल्दी भी चेक आउट कर सकते है ।
इसपे उस लड़की ने बोला : नो प्रॉबलम, सर आप जब चाहो चेक आउट के सकते है ।
पापा ने अपना ID देते हुए अपना नाम और प्रज्ञा का नाम लिखा दिया । वो रेस्पेसिनिष्ट झट झट सारा डाटा अपने कंप्यूट में एंट्री करने लगी । पापा का id स्कैन किया ओर फिर वापस दे दिया । एड्रेस और पर्पस ऑफ विजिट पूछ के उसने बोला : ok sir , your room will be ready in 10 mins , please just wait sir.
पापा भी प्रज्ञा के पास जा के सोफे पे बैठ गए । और प्रज्ञा से बोला : बेटी , एक प्रॉब्लम है , रूम्स बहुत महंगे है । इसलिए २ रूम करना सही नहीं लगा , एक ही रूम किया है , मगर काफी स्पेस वाला है तो कोई दिक्कत नहीं होगा । और रूम में सोफा भी है तो तू बोलेगी तो मै सोफे पे सो जाऊंगा , तो उसकी चिंता मत करना ।
प्रज्ञा : हां पापा , मै तो पहले ही बोली थी बहुत महंगा होटल होगा । की बात नहीं मुझे चलेगा पापा ।
पापा अब जा के आश्वत हुए ।
थोड़े देर बाद वो लड़की पापा के पास आई
और बोली : सर , हमे खेद है कि आप ने जो रूम बुक किया है , वो इन्फॉरफुनेटली अभी उपलब्ध नहीं हो सकेगा । उसके गेस्ट ने अपना स्टे को बढ़ा दिया है । मगर हमने आपको कमिटमेंट किया था तो हम आपको अपग्रेड के के कपल स्वीट प्रोवाइड कर रहे है । Is that ok for you sir ?
पापा: लेकिन उसके चार्जेज ?
लड़की : डॉन्ट वैरी सर, हम सेम प्राइस में हो आपको अपग्रेड के रहे है ।
पापा: फिर ठीक है ।
प्रज्ञा भी खुश हो गई ।
एक लड़का उन दोनों का सामान ले कर उन्हें अपने पीछे आने को बोला । लिफ्ट से 4 मंजिल पे पहुंच कर एक बारे से दरवाजे के कि ओर ले गया । कार्ड डाल के उसने रूम नंबर 405 खोला और पापा से बोल : वेलकम sir.
ये अगले एक सप्ताह तक आपका कमरा है , बाथरूम राइट साइड में है । और आप ठंडा और गरम दिनों पानी का उपयोग कर सकते है । लेफ्ट कॉर्नर में फ्रिज भी है , सो u can enjoy bear or softdrinks .
फिर वो पापा और प्राची को उनका बेडरूम दिखाया । वो बहुत ही शानदार और सुंदर था । कमरे के बीचोबीज एक बार सा बेड लगा था साइड में सोफा और एक साइड बालकनी में आराम कुर्सी डाला हुआ था । अगले 5 मीनट तक वो लड़का , पापा और प्रज्ञा को सारा रूल और सामान के उपलब्धता के बारे में बताता रहा । सब कुछ बताने के बाद वो जाने लगा ।
लड़का : चलिए सर मै निकलता हूं। आप लोगों किसी भी चीज की जरूरत हो , तो बताए हुए नंबर ले कॉल के लेना ।
पापा: थैंक्यू भाई , थैंक्स ।
लड़का : मेंशन नॉट सर । ओके सर, ओके मैम। इंजॉय यौर हनीमून और सर आपको अगर कोंडोम का जरूरी परे तो आप के बेड के दराज़ में परे है । You are free to use it. And if you need more just give a call we will provide.
![]()
दरअसल वो कपल स्वीट ज्यादातर कपल लोग ही बुक करते थे । और उस लड़के को ये पता नहीं था कि पापा और प्रज्ञा ने नार्मल रूम बुक किया था और उन्हें अपग्रेड के के ये रून दिया गया है । उसे बस रिसेपशन वाली लड़की ने बताया था कि ये कपल है , क्योंकि पापा ने प्रज्ञा का नाम कपल के तौर पे हो लिखवाया था ।
तो उस करके को लगा कि ये पक्का हनीमून मनाने हो आए होंगे , जैसे और लोग आते है । इसलिए उसने ऐसा बोल जाते जाते ।
पापा और प्रज्ञा एकदम से स्तब्ध रह गए । की ये क्या हुआ । प्रज्ञा को एक झटका सा लगा कि उसने पापा को कोंडोम के बारे में क्यों बताया ? और हनीमून?
पापा भी समझ नहीं पा रहे थे कि अब प्रज्ञा को कैसे समझाए ?
यह कहानी इसलिए इतनी प्रभावशाली लगी क्योंकि यह सिर्फ पढ़ी नहीं जाती, महसूस होती है। इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी वास्तविकता और बारीकियों में है। हर दृश्य को जिस तरह विस्तार से रचा गया है, वह कहानी को कल्पना से उठाकर जीवन के बहुत करीब ले आता है।
किरदारों के बीच का भावनात्मक जुड़ाव बेहद स्वाभाविक है। उनके संवाद, चुप्पियाँ, छोटी-छोटी प्रतिक्रियाएँ और मन के भीतर चलने वाली हलचल—सब कुछ इतना वास्तविक लगता है कि पाठक अनायास ही उनके साथ जुड़ जाता है।
कहानी में भावनाएँ जबरदस्ती नहीं थोपी गईं; वे घटनाओं और किरदारों के व्यवहार से अपने आप निकलती हैं। यही इसे रियल, डिटेल्ड और emotionally engaging बनाता है।
अगला अपडेट जल्द ही.....