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Raja jani

आवारा बादल
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है तो पर
wo aalready ha dono ke man me so no need
ये और लोग भी कर रहे ये तो उसे सामान्य रूप में लेने में प्रभावित करेगा न उसकी हिचक और कमजोर होगी
 

park

Well-Known Member
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Update 69 :

ट्रेन प्लेटफार्म पे लग चुकी थी पापा , टिकट के हिसाब से अपनी बॉगी का नंबर ढूंढ रहे थे । बॉगी नंबर था H2 । जल्दी ही पापा को बोगी दिख गई । बाहर एक स्टाफ खड़ा था । वो दोनों गेट के तरफ बढ़े तो पापा ने गौर किया कि प्रज्ञा आगे आगे चल रही थी । उसका गांड मटकते हुए बहुत अच्छा दिख रहा था । पास में ही कुछ अवारा लड़के एक दूसरे से प्रज्ञा की ओऱ इशारा कर के दिखा रहे थे । वो थोड़ी दूरी पर थे तो वो क्या बोल रहे थे ये तो पापा को भी सुनाई नहीं दे रहा था। मगर इनकी राक्षसों वाली हंसी पापा और प्रज्ञा दोनों को सुनाई दे रह था । पापा को गुस्सा आ रहा था , मगर प्रज्ञा सुन के अनसुना सा कर रही थी । गेट पे जब दोनों पहुंच ही गए थे कि एक ने चिल्ला के बोला : अरे अंकल , इतना कड़क माल लिये कहा जा रहे हो , जरा हमे भी तो चखा दो। हाहाहाहा.....

उनको लग रहा था कि वो बहुत कूल लग रहे है ऐसा कर के मगर पापा का गुस्सा आसमान पे चल गया था । प्रज्ञा ने वो सुना तो शर्म से सिर झुका लिया । पापा ने प्रज्ञा को बोला बेटी तू ये बैग लेके अंदर जा जरा इनकी खबर लेता हु । प्राची डर गई कि कही पापा उन अवारा लोगों से लड़ाई तो नहीं कर लेंगे , वो अवारा लड़के पापा को चोट ना पहुंचा दे ?

उसने पापा से कहा : पापा ट्रेन बस खुल ही जाएगी । इन सब में मत पड़ो, चलिए अपने शीट पे बैठते है ।

तभी एक और लड़का चिल्लाया : क्या अंकल , अकेले अकेले जवानी का रस पियोगे ।

प्रज्ञा शर्म से लाल हो गई । पापा का गुस्सा अब सर पे चढ़ गया । वही गेट पे कुछ पुलिस गार्ड भी खरे थे । पापा ने बैग वही रखा और तेजी से उन लड़कों के पास गए और एक लड़का जो बहुत ज्यादा हस रहा था और प्रज्ञा के बारे में चिल्ला के अभद्र बात की थी ,उसके गाल पे एक रसीद के चाटा जड़ दिया । चटाक..... की आवाज आस पास गूंज गई और वो लड़के एकदम सदमे में आ के शांत से हो गए । उसे पहले वो लड़के पापा पे हाथ उठाते वो गार्ड जो 1st AC के गेट पे खड़े थे , वो वहां पहुंच गए ।

गार्ड उन लड़कों से : क्यों बे लफंगो, क्या चुतिया गिरी कर रहा है ?

पापा : अरे ये लोग देखिए , आती जाती लड़कियों को छेड़ते रहते है । अभी मेरे बेटी पे अभद्र टिप्पणी कर रहे थे । मुझे से रहा नहीं गया और मैने रसीद के एक कान पे बजा दिया । उसके लिए माफ करियेगा सर ।

गार्ड : बिल्कुल सही किया , मै अभी RPF वालों को बोलता हु , इसी स्टेशन पे खबर लेंगे इसकी ।

तभी गेट पे खड़ा स्टाफ भी ये सब देख रहा था । पापा का ये रूप देख के सब पापा की प्रशंसा करने लगे । प्रज्ञा वही खरी पापा के इस दबंग अंदाज को दिखती रही पर कुछ बोल नहीं पाई । उसने मन में कहा : आज पापा नहीं होते तो पता नहीं ये लड़के कुछ कहने से ज़्यादा कुछ के सख्त थे । पापा ने कितना हिम्मत दिखाया मेरे लिए । पापा मुझे पे कभी आँच नहीं आने देंगे । पापा ने कैसे उस कामिने को रसीद के चाटा जड़ा , वाह मजा ही आ गया । पापा मेरे लिए किसी से भी भीड़ जाते है । कितना प्यार करते है वो मुझे ।

यहाँ प्रज्ञा के प्यार का मतबल पापा वाला प्यार से ही था । उसके दिल में पापा के लिए अभी तक उस तरह का प्रेम जग नहीं था । अगर प्रज्ञा को पापा से उस तरह का प्यार चाहिए होता तो उस दिन उनके गोद में ही कुछ ना कुछ कर बैठती। मगर आज के घटना ने पापा के मर्दानगी का छाप प्रज्ञा के दिल पे छोड़ दिया था ।

गार्ड ने पापा को करवाई का सांतवना दे के बोला , सर आपकी ट्रेन खुलने वाली है आप चलिए , इनका ठिकाना ह्म लगते है । तभी दूर से RPF के कुछ जवान आते दिखे । पापा समझ गए कि ये मावली पकड़े गए आज । वो गेट के तरफ आ गए । गत पे खड़े स्टाफ ने आगे बढ़ के पापा का सामान लिया और बोला : अच्छा किया सर आपने , कितने ही लड़कियों हो छेड़ रहे थे , जब से ट्रेन रुकी है । मै कुछ बोल नहीं रहा था क्योंकि मैं बाहर का हु ओर ये लोकल लोग। चक्कर में फंस गया तो ट्रेन को कौन देखेगा । वैसे मै आपका बोगी स्टाफ हु । आपकी बोगी H2 ही है ना।

पापा : जी , सही कहा अपने H 2 सीट नंबर 15-16 ।

स्टाफ : वेलकम sir ।

वो पापा और प्राची का सामान लेके आगे आगे बढ़ा और दोनों उसके पीछे पीछे बोगी में अंदर चल दिए ।

पापा ने स्टाफ से पूछा : और भैया ,कहा से हो ?

स्टाफ : लखनऊ से हु सर । आज रात को मै यही ड्यूटी कर रहा हूं। आपको कुछ भी चीज की जरूरत हो तुरंत मुझे बताइए । आपका दोनों सीट केबिन में है , आपके साथ वहां एक कपल भी है । होप यू डॉन्ट माइंड सर ।

पापा: ओह...हमे लगा कि हमे कूप में सीट मिला है ।

स्टाफ : नहीं सर , आपकी सीट नंबर 15-16 है जो 13-14 के साथ है सर ।

पापा : अरे यार , हम दोनों फैमिली है । एक कूप से केबिन का सीट एक्सचेंज हो जाता तो बहुत अच्छा होता ।

स्टाफ : सॉरी सर , वो तो मै कैसे बता पाऊंगा । वैसे टीटी सर आयेंगे तो उनसे पूछ के कोई जुगाड़ करवा दूंगा ,मगर तब तक आपको एडजस्ट करना पड़ेगा । टी टी अगले 3 स्टेशन बाद ही आयेंगे ।

पापा : ओह यानी एक घंटा । चलो मैनेज कर लेंगे ।

उसने दोनों को उनके केबिन तक पहुचा दिया । अंदर 4 शीट थी । एक साइड के ऊपर नीचे , प्रज्ञा और पापा का था । और दूसरे साइड का दोनों सीट एक मुस्लिम बाप बेटी जैसे दिख रहे 2 लोगों का था ।

पापा: क्या नाम है तुम्हारा ।

स्टाफ : सर राकेश ।

पापा: ठीक है राकेश , थैंक्यू। कुछ जरूरी होगी तो बुलाता हूं तुम्हें।

राकेश : ओके सर , बिल्कुल । आप कंफर्टेबल हो जाइए ।

पापा और प्रज्ञा ,केबिन के अंदर गए । एक तरफ सीट पे ,एक 50-55 साल का दाढ़ी वाले मौलवी की तरह दिखने वाले शख्स बैठे थे और वही पास में एक 18-19 साल की लड़की जो उनकी बेटी की उम्र की जान पड़ती थी , वो बैठी थी । उसके गले में काले रंग का हिजाब जैसा स्कार्फ था ।

पापा और प्रज्ञा ने अपना सामान को ठिकाने सीट के नीच लगा दिया और सीट पे बैठ चुके थे ।

प्रज्ञा साथ कुछ किताब लाई थी तो वो पढ़ने के लिए ले कर बैठ गई । और तभी ट्रेन चल पड़ी।

मौलवी : सुब्हानला, ट्रेन खुल गई ।

पापा : जी ।

पापा ने थोड़ा मौन रह के उस से पूछा : आप कहा से है , और कहा तक जा रहे है ।

मौलवी: अजी हम लखनऊ से है और अभी वहीं जा रहे है , हमारी फुफेरी बहन के बेटे की निकाह है । उसी में जा रहे है ।

पापा: अच्छा , लखनऊ से है आप ।

मौलवी: जी जी , जमाने से हमारा वहां एक होटल चलता है , बाप - दादा , सब चलाते रहे । अब मेरे बच्चे चलते है । मैने भी लगभग 30 साल चलाया । अब बम्बई में रहने लगा हु ।

पापा: अच्छा , हम लोग तो आप के ही शहर जा रहे है , लखनऊ, वहां हमारे बेटी का एग्जाम है कॉलेज के एडमिशन का।

मौलवी : वहां, चलिए , हम आपको अपने शहर का खरीददारी दिखाएंगे , आइएगा एक बार हमारे होटल पे , बहुत अच्छी कबाब मिलते है ।

पापा: जरूर आते , मगर हम शाकाहारी है ।

मौलवी: ओह अच्छा अच्छा , कोई नहीं , बादाम शरबत ही पिला देंगे आपको । हाहाहाहा...

पापा भी हस पड़े । प्रज्ञा के कानों में भी सारी बाते जा रही थी मगर वो अपने किताब में मुंह छुपाए पढ़ रही थी ।

पापा और उस आदमी की लंबी बात होने लगी , कॉलेज कहा है ? क्या क्या घूमने का जगह है लखनऊ में ?....बगैरा बगैरा।

तभी पापा का ध्यान उस लड़की ने खींचा और उन्होंने ऐसे ही पूछ लिया : और आपके कितने बच्चे है, ये आपकी छोटी बेटी है ?

उस मौलवी के मुंह पे एक मुस्कान आ गई : मेरी खुदा के फज़ल से ३ शादी हुई है जनाब। पहले बीवी से 6, दूसरी से 4 , और तीसरी से अभी कार्य प्रगति में है , नहीं भी तो 3-4 उनसे भी हो ही जाएगा अब तक बुढ़ा होऊंगा । हाहाहा....

पापा : हाहाहा..बारे क़िस्मत वाले है । काफ़ी मेहनत किया है अपने जीवन में ....हाहाहा...

मौलवी : जी अब जो है वो आल्हा की देन है ।

पापा: अच्छा ये आपकी बड़ी वाली पत्नी की बेटी है या २nd वाइफ़ से?

मौलवी: अजी , आप नहीं समझे लग रहा है , ये ही मेरी तीसरी बेगम है । मेरे चेहरे भाई की लड़की है । हमारे में चलता है चचेरे भाई वाली भतीजी से निकाह । और शादी भी 4 कर सकते है ।

पापा आवक रह गए । वही प्रज्ञा एकदम से अपना किताब नीचे कर के उस लड़की की ओर देखने लगी । एकदम मासूम चेहरा , एकदम गोरा दमकता , सेब की तरह लाल, बॉडी पार्ट समीज सलवार से ढकी हुए , सर के चारों तरफ एक हिजाब । बूढ़े ने लॉटरी मार लिया था ।

पापा: वाह जी वाह, किस्मत हो तो आपके जैसा । २ बीविया के रहते हुए , तीसरी से शादी किए और वो भी इतनी सुंदर। वाह।

प्रज्ञा को पापा के बातों के आश्चर्य हो रहा था । पापा ये क्या कह रहे है ? अच्छा किया ? ये बूढ़े ने इतनी छोटी लड़की के साथ शादी कर के उसे मां बनाने के चक्कर में है और पापा इसकी तारीफ कर रहे है ?

पापा : मगर आपको तीसरी शादी क्यों करनी पड़ी ? २ बीविया तो थी ही , ओर अब आपकी उमर भी जायदा है इनके साथ के लिए ।

मौलवी : अरे , इनकी अम्मि अब इस दुनिया में नहीं रही । और अबु भी पिछले ही साल एक एक्सीडेंट में चल बसे । तो इनकी चाचा इसका निकाह मेरे बेटे से करना चाहते थे । मगर उसने शादी वाले दिन ही पता नहीं क्या गया , रिश्ता तोड़ दिया । और ये बेचारी जहर खाने के चक्कर में थी , सब ने इसको बचाया । मगर एक लड़की का उसके शादी के दिन ही शादी टूट जाए तो उसकी शादी आगे भी होने में बहुत मुश्किल होती है । और मैने इसके चाचा को जवान भी दिया था कि ये मेरे घर की बहु बनेगी । अंत में कोई उपाय नहीं हो सका तो मैने हो इनके चाचा को बोला कि मैं ही शादी करने के लिए तैयार हु , क्योंकि जवान मैने दो थी । इस तरह हमारा निकाह हुआ ।

पापा और प्रज्ञा कहानी सुन के ही आवक हो गए थे । पर दूसरे को क्या कोसना जब पापा खुद ही अपने बेटी से ही शादी के के उसे प्रेग्नेंट बना चुके थे ।

वो दोनों बाते करते रहे । और खाना आ गया । पापा और प्रज्ञा घर से ही थोड़ा खा के आए थे तो एक थाली में ही खा लिया । उधर वो दोनों मियां बीवी भी खा लिए और वो हिजाब वाली लड़की को उसके शौहर ने उसे ऊपर वाले सीट पे सुला दिया ।

पापा ने राकेश को एक बार बुलाया और सीट के बारे में पूछा , उसने कहा , सर कोई भी कूप अवेलेबल नहीं है , और कुछ लोगों से मैने एक्सचेंज के लिए भी पूछा मगर वो भी केबिन नहीं लेना चाहते है। टीटी सर ने भी कोई जुगाड़ नहीं बिठा पाए । सॉरी सर ।

पापा को थोड़ा गुस्सा आया मगर अब क्या के सकते थे , एक रात की तो बात थी । पापा दरअसल प्रज्ञा के साथ अकेले में कुछ समय बिताना चाहते थे । खैर उस अरमान पे तो पानी फिर गया था । चलो वैसे भी 5-6 बजे तक तो उतर ही जाना था । रात को वो कितना ही प्रज्ञा के साथ बात के सकते थे ।

पापा ने प्रज्ञा से बोला : अब तो यही सोना पड़ेगा बेटी । तू ऊपर चली जा मै नीच सो जाता हूं।

प्रज्ञा : ok papa.

AC काफी तेज चल रहा था सो सबने चादर ओढ़ा हुआ था ।

पापा भी मन मार के नीचे वाले सीट पे लेट गए , और सोने की कोशिश करने लगे ।

लगभग आधी रात का समय था , पापा पूरे दिन का काम ऑफिस में करने से थक गए थे और गहरी नींद में सो गए थे । वही प्रज्ञा को कल एग्जाम का टेंशन को लेके नींद नहीं आ पा रही थी । और अभी जा के थोड़ा थोड़ा आंख लगाना शुरू हुआ था ।

गाड़ी अपने गति से भागे जा रही थी । और बाहर ट्रेन से छुक छुक की आवाज आ रही थी । सब का शरीर भी स्थिर नहीं था और गाड़ी के गति के कारण डोल रहा था । अचानक की प्रज्ञा को आभास हुआ कि एक कला जा आकृति सामने वाले सीट ले सोई लड़की के सीट पे चढ़ने की कोशिश के रहा है। प्रज्ञा ने हल्का सा अपना आंख खोला तो वो ओर कोई नहीं वो मौलवी ही था । बड़ा बड़ा दाढ़ी से ही प्रज्ञा को पता चल गया ।

उसने एकदम हल्की आवाज में उस लड़की को आवाज दिया : अमीना वो मेरी अमीना , सो गई क्या ?

लड़की : न....नहीं अब्बू, नींद नहीं आ रही आपके बिना ।

प्रज्ञा को अब्बू शब्द सुनते ही एकदम से धक्का लगा : क्या , क्या उसने उस आदमी को अब्बू बोला ? क्या ये आदमी इस लड़की का बाप है ? इसने पापा से कितना झूठ बोला ? और झूठ भी ऐसा कि कोई भी यकीन कर ले ।

प्रज्ञा का मन दहल गया कि ये बूढ़ा अभी इतनी रात को यूं अपने बेटी के सीट पे क्यों चढ़ आया है , और प्रज्ञा को इस सवाल का जवाब मिलने में ज्यादा वक्त नहीं लगा ।

अब्बू: अमीना मेरी जान , मुझे भी कहा तेरे बिना नींद आनी है । मगर मैने कितनी बार बोला है , बाहर अब्बू मत बुलाया कर , लोग सुनेगे तो क्या सोचेंगे ।

अमीना : सॉरी खान साहब ।

अब्बू : हां ये हुए बात। अब जरा मेरे ज्वालामुखी का लावा तेरे बुर में उड़ेलने दे ना।

प्रज्ञा एकदम ठिठुर गई ये सुन के ।

अमीना : यहां कितने लोग है अब्बू । नहीं नहीं ।

अब्बू : अरे मेरी जान , कोई नहीं आएगा , देख नीचे केबिन का दरवाजा बंद है ना।

अमीना : पर से लोग भी तो है , जो उस सीट में सो रहे है , और ये लड़की तो एकदम सामने ही है ।

अब्बू : अरे गहरी नींद में है , उन्हें क्या पता चलेगा । मैने नीचे वाले आदमी को थोड़ा हिलाया , एकदम घोड़ा बेच के सो रहा है ।

अमीना : मगर अब्बू , ये लड़की जग गई तो ।

अब्बू : तो इसको भी अपने मुस्लिम लार का मजा दे दूंगा ।

प्रज्ञा ये बात सुन के दहल गई , वो पानी पानी हो गई थी । वो जीवन में पहली बार ऐसा कुछ देख रही थी । एक बाप उसके सामने अपनी बेटी को चोदने की बात कर रहा था । उसका दिमाग तुरन्त अपने पापा और प्राची के बीच हुए मिलन पे चला गया , क्या पापा भी ऐसा कुछ करते होंगे दीदी के साथ ? ये क्या करने वाला है इस लड़की के साथ ? ओह ये तो उस लड़की को चूमने लगा है । हाय मै शर्म से पानी पानी हो रही हू , और ये कितने निर्लज्ज लोग है कि इन्हें बगल में २ अंजान लोग रहते भी शरम नहीं आ रही ।

उम्म्म...उम्म्म... कर के एकदम हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी । प्रज्ञा के पास कोई चारा नहीं था । पापा को तो ये सब पता भी नहीं चल रहा होगा ,वो इतमीनान से नीचे सो रहे थे । मगर ऊपर अब प्रज्ञा के आंखों से नींद एकदम गायब थी । मगर प्रज्ञा ऐसा दिखा रही थी कि वो सो रही है , वो भी गहरी नींद में । ओर ये दोनों बाप बेटी अपना काम शुरू कर चुके थे ।

अमीना : अब्बू ओके ये दाढ़ी चुभ रही है । मेरे होठ छिल जाएंगे ।

अब्बू : मेरी जान , अभी तो बुर में मिटा काँटा चुभोंगा उसका क्या ? वो तो चीर के रख देगा तेरा बुर अगर तुझे दाढ़ी से होठ छिल रहे है तो ।

प्रज्ञा का परा भी बढ़ता जा रहा था ।

वो दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे । और अब्बू उस लड़की का सीने का गोलाई अपने हथेली में भर के बैलून की तरह दबा रहा था ।

अमीना : अब्बू आऊच.....

अब्बू : सीईईई....क्या कर रही है , ये लोग जग गए तो गड़बड़ हो जाएगी । छोड़ सीधा आज पेलाई की कर लेता हू , रोज़ तो अच्छे से मजा लेके तो चोदता ही ही तुम्हे ।

प्रज्ञा मन में : हाय राम ये बूढ़ा रोज़ करता है ऐसा अपने बेटी के साथ ? क्या पापा भी दीदी के साथ ? बाप रे दीदी ये अब की होगी पापा के साथ ।

प्रज्ञा को अंधेरे में कुछ साफ साफ दिख नहीं रहा था । मगर इतना पता चल रहा था कि क्या क्या हो रहा है । उस आदमी ने अपने पजामे का नारा खोला और खींच के नीचे के लिया ,साथ ही अंडरवियर भी , अब उसका लिंग अंधेरे में ही आकर का दिखा था था । एकदम फ़ानफाया हुआ । उसने बोला : खोल अमीना , जल्दी , रहा नहीं जाता , नहीं तो नींद भी नहीं आएगी ।

उस लड़की ने भी अपने सलवार की डोरी खोल दी , कि तभी अब्बू ने कस के उसका सलवार खींच के गांड और चुत को आजाद के दिया ।

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और उसने अपने बेटी का चुत चाटना शुरू के दिया ,ओर लगभग २ मिनट तक चाटता रहा ।

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अमीना : अब्बू , बड़ा दुखता है , आराम से डालियेगा । यहां चीख़ निकल गई तो गजब हो जाएगा ।

अब्बू अपने लन्ड के छिले हुए टोपे पर थूक मलते हुए : एकदम मेरी बच्ची , आराम से , एकदम आराम से करूंगा । तू बस लेती रहा ।

प्रज्ञा ये सारा दृष्य दबी आंखों से देख रही थी । अब उसको दादी की सारी बाते याद आने लगी थी । दादी ने जो लड़का और लड़की के मिलन के बारे में बताया था । इतने में वो मौलवी ने अपना लिंग अमीना के बुर पे लगाया और एकदम धीरे से अंदर सरकने लगा , प्रज्ञा ये देख के दंग रह गई , इतना मोटा , इतना आराम से कैसे जा रहा है इस लड़की में ।


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ये लड़की भी तो प्रज्ञा के उमर की ही लग रही थी । क्या इसको इस बूढ़े ने बहुत बार ऐसा किया है कि इसका इतना आराम से ले ले रही है ये लड़की ?

देखते ही देखते पूरा का पूरा लिंग अंदर के दिया उस मौलवी ने अपने बेटी के बुर में । अमीना के मुंह से एक सिसकी निकली , सीईईई....

अब्बू : बस बस मेरी बच्ची हो गया , चला गया अंदर ।



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इतना सुनते ही प्रज्ञा की चुत से उसे कुछ चिपचिपा गढ़ा रस बहता भी महसूस हो रहा था , असल में वो गीली हो रही थी ।


एकदम धीरे धीरे वो आदमी अपने बेटी के चुत पे शॉर्ट लगने लगा । पट पट...चप चप...फच फच की हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी ।


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प्रज्ञा को ये आवाज सोचने को मजबूर के रही थी कि , इसका एहसास कैसा होगा ? वो अब एकदम गरम हो गई थी ।

अब्बू : बस अमीना , ज़रा जल्दी जल्दी मारने दे बुर , मजा आ रहा है बेटी....आह....

चुदाई अपने पेस पे चालू था । ट्रेन तो वैसे भी झूल रही थी , तो किसी को सीट झुलाने का भी पता नहीं चल रहा था । उधर बस एक आदमी था जो ये सब देख रहा था , वो थी प्रज्ञा ।


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चुदाई होती जा रही थी , होती जा रही थी । अब दोनों ने अपने कमर पे चादर डाल लिया था और कुछ दंग से दिख भी नहीं रहा था । पर हर स्टॉक जो अब्बू अमीना के चुत पे मर रहे थे , वो महसूस या पता एकदम चल रहा था ।

प्रज्ञा एकदम चिपके से अपना हाथ नीचे ले जा कर एक उंगली से अपने सलवार के अंदर हाथ डाल चुकी थी । और अनचुदी , मखमली चुत को रगड़ रही थी ।

लगभग अब्बू और बेटी का खेल 10-15 मिनट चल होगा और एक दो झटका खा के वो दाढ़ी वाला आदमी एकदम शांत हो गया । इसबार कोई कुछ नहीं बोला । वो उठा और अपना नारा बांध कर वो नीचे चला गया और गए खोल केबिन से बाहर निकल गया ।

वही वो लड़की अमीना , अपने चुत पकड़े ऐसी बैठी रही जैसे किसी ने उसको घोड़े के लन्ड से चुदाई करा दिया हो ।


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थोड़े देर ऐसा लग रहा था कि उसे कोई होश नहीं है , फिर वो भी उठी और अपना सलवार टाइट कर के नीचे उतर के लेडीज़ बाथरूम के तरफ चल दिया ।

आप उस केबिन में बस पापा और प्रज्ञा ही बचे थे । पापा की सांसे तेज तेज चलने का आवाज आ रहा था । और पैगी को एक मदहोश करता जा रहा था । अभी अभी उसके सामने एक बाप ने अपनी बेटी चोदि थी । और नीचे पापा की मौजूदगी का एहसास उसे और जायदा जोश से भर रहा था । अचानक उसका शरीर आकरा और भलभला के उसने बुर से पानी छोड़ दिया । और एकदम शांत हो गई ।

इन सब से बेखबर पापा सो रहे थे । धीरे धीरे प्रज्ञा का भी आँख लगना शुरू हो गया और वो नींद के आगोश में चली गई ।

5 बजे के करीब पापा का अलार्म बजा, उन्होंने उठ के स्टेशन का नाम चेक किया था अगले 3 स्टेशन के बाद लखनऊ आने ही वाला था । पापा सब कुछ व्यवस्थित करने लगी। उधर वो आदमी भी उठ गया और सारा सामान निकालने लगा , उसे भी लखनऊ ही उतरना था । प्रज्ञा नीचे आ के अपना मुंह हाथ धो के फ्रेश हो गई थी , आज उसका एग्जाम था । सब लखनऊ आने का इंतजार के रहे थे तो प्रज्ञा ने उस लड़की को देखा । एकदम मासूम सी , पर रात को जो हुआ उसके साथ ये सोच के प्रज्ञा को पता चल गया था कि ये मासूम तो बिल्कुल नहीं है । उसपर से वो दाढ़ी वाल मौलवी, बार बार प्रज्ञा को घूरे जा रहा था। उसे गुस्सा भी आ रहा था ।

15- 20 मिनट बाद ही , लखनऊ आ चुका था । पापा ने मुझे बोला अभी इंतजार करो , अब उतर जाए तो उतरेंगे आराम से ।


वो मौलवी ने पापा को अपना होटल का कार्ड थमते हुए बोला : अच्छा भाई साहब , अच्छे से दिलवाई बेटी का एग्जाम , मै निकलता हूं। वैसे किसी चीज की परेशानी हो तो याद कर लीजिएगा।

पापा: अच्छा अच्छा ठीक है ।

पापा और प्रज्ञा , भी ट्रेन से बाहर आए , पापा ने एक ऑटो बुक किया और एक अच्छे होटल ले जाने को बोला , उसने पापा को बोल : सर बेस्ट होटल ले चलता हु । आइय बैठिये ।

पापा : बेस्ट ले चल और ये भी होना चाहिए कि कॉलेज के पास ही होना चाहिए । आज ही एग्जाम है ।

ऑटो वाला : सर बैठिए तो , कितनो के एग्जाम के लिए मैने यही होटल में ठहराया है । चालिया ना ,उस होटल से 300 m पे ही दीदी का कॉलेज है ।

पापा, : चलो फिर ये अच्छा हो गया ।

30-40 मिनट में ही वो लोग होटल पहुंच गए । होटल सच में बहुत खूबसूरत था । और एकदम एकांत वाले जगह पे था , वही दूर से ही प्रज्ञा के सेंटर वाले कॉलेज का बिल्डिंग भी दिख रहा था जो उस ऑटोवाले ने बताया था ।

प्रज्ञा : वाह पापा, मै ऐसे होटल में कभी नहीं रुकी हूं ।

पापा : तब अब रुक लेना ।
और वो समान निकलवाने लगे । वो लोग अंदर जाने लगे तो होटल का चकाचौंध देख के प्रज्ञा बहुत खुश हो गई ।

प्रज्ञा : पापा कितना सुंदर होटल है । बहुत महंगा होगा पापा , एक सप्ताह में तो और भी ज्यादा पैसे लगेंगे ।

पापा: तू उसकी चिंता मत कर बस एग्जाम की चिंता कर । पैसे मै किस लिए कमाता हु तेरे ही लिए ना ?

प्रज्ञा पापा का ये जवाब सुन के खुशी से झूम उठी ।

प्रज्ञा : सच पापा...आप मेरे बारे में इतना सोचते है ।

पापा : पगली , कैसी बात करती है तेरे बारे में नहीं सोचूंगा तो ओर किसके बारे में सोचूंगा , प्राची तो पत्नी है , अब तू ही तो मेरी इकलौती बेटी है ।

प्रज्ञा : थैंक यू पापा ।

पापा : थैंक्यू किस बात की , बाप हु तेरा , मेरे ऊपर हक है तेरा , और तेरे ऊपर भी मेरा पूरा हक है ।

प्रज्ञा : जी पापा , अब से थैंक्यू नहीं बोलूंगी। हाहाहा...

पापा: तेरे ऊपर हक है मेरा ये तो मानती है ना ?

प्राची थोड़ी झेप गई , वो पापा की बात को समझ गई ।

पापा: अरे बोल ।

प्रज्ञा : हां पापा , पूरा हक है , आप ही तो हमारा घर के मालिक है , मेरे पापा है , आपका ह्म सब पे पूरा हक है ।

पापा : ह्म्म्म...चलो हक है तो हक जताने दो और इस होटल में बुकिंग करने दो ।

प्रज्ञा : ओके पापा।

पापा: एग्जाम तेरे कितने बजे तक है ?

प्रज्ञा : पापा 11 बजे से 3 बजे तक ।

पापा : बढ़िया , उसके बाद मजे करेंगे ।

प्रज्ञा : थोड़ी शरमाई मजे के नाम पे फिर बोली : जी पापा।

प्रज्ञा वही लगे सोफे पे बैठ गई ,जब तक पापा बुकिंग करने गए ।

पापा रिसेप्शन पे गए तो वहां बैठी लड़की बोली : YES sir , how may I help you ?

पापा: मुझे एक कमरा चाहिए ।

लड़की : ओके सर ,कितने मेंबर्स के लिए ?

पापा: 2 लोगों के लिए ।

लड़की : ओके आप लोग कपल है ?

पापा को लगा कि अगर बेटी बोल के एक कमरे में रहेंगे तो ये लोग क्या सोचेंगे और २ कमरा इतने महंगे होटल में एक सप्ताह के लिए आउट ऑफ बजट है , इनको सब कुछ क्यों बताना की हमारा रिश्ता क्या है । पापा ने बस एक ह्म्म्म.... में जवाब दिया ।

लड़की : ओके सर , अपना नाम बताइए और मैडम का का नाम बताइए । और आप अपना क्या मैडम जी में से किसी एक का ID भी दीजिए ।

पापा ने उसे ये भी बता दिया कि रूम वो एक वीक का जरूर बुक कर रहे है मगर उनका काम जल्दी खत्म हो गया तो वो जल्दी भी चेक आउट कर सकते है ।

इसपे उस लड़की ने बोला : नो प्रॉबलम, सर आप जब चाहो चेक आउट के सकते है ।

पापा ने अपना ID देते हुए अपना नाम और प्रज्ञा का नाम लिखा दिया । वो रेस्पेसिनिष्ट झट झट सारा डाटा अपने कंप्यूट में एंट्री करने लगी । पापा का id स्कैन किया ओर फिर वापस दे दिया । एड्रेस और पर्पस ऑफ विजिट पूछ के उसने बोला : ok sir , your room will be ready in 10 mins , please just wait sir.

पापा भी प्रज्ञा के पास जा के सोफे पे बैठ गए । और प्रज्ञा से बोला : बेटी , एक प्रॉब्लम है , रूम्स बहुत महंगे है । इसलिए २ रूम करना सही नहीं लगा , एक ही रूम किया है , मगर काफी स्पेस वाला है तो कोई दिक्कत नहीं होगा । और रूम में सोफा भी है तो तू बोलेगी तो मै सोफे पे सो जाऊंगा , तो उसकी चिंता मत करना ।

प्रज्ञा : हां पापा , मै तो पहले ही बोली थी बहुत महंगा होटल होगा । की बात नहीं मुझे चलेगा पापा ।

पापा अब जा के आश्वत हुए ।

थोड़े देर बाद वो लड़की पापा के पास आई
और बोली : सर , हमे खेद है कि आप ने जो रूम बुक किया है , वो इन्फॉरफुनेटली अभी उपलब्ध नहीं हो सकेगा । उसके गेस्ट ने अपना स्टे को बढ़ा दिया है । मगर हमने आपको कमिटमेंट किया था तो हम आपको अपग्रेड के के कपल स्वीट प्रोवाइड कर रहे है । Is that ok for you sir ?

पापा: लेकिन उसके चार्जेज ?


लड़की : डॉन्ट वैरी सर, हम सेम प्राइस में हो आपको अपग्रेड के रहे है ।

पापा: फिर ठीक है ।

प्रज्ञा भी खुश हो गई ।


एक लड़का उन दोनों का सामान ले कर उन्हें अपने पीछे आने को बोला । लिफ्ट से 4 मंजिल पे पहुंच कर एक बारे से दरवाजे के कि ओर ले गया । कार्ड डाल के उसने रूम नंबर 405 खोला और पापा से बोल : वेलकम sir.


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ये अगले एक सप्ताह तक आपका कमरा है , बाथरूम राइट साइड में है । और आप ठंडा और गरम दिनों पानी का उपयोग कर सकते है । लेफ्ट कॉर्नर में फ्रिज भी है , सो u can enjoy bear or softdrinks .

फिर वो पापा और प्राची को उनका बेडरूम दिखाया । वो बहुत ही शानदार और सुंदर था । कमरे के बीचोबीज एक बार सा बेड लगा था साइड में सोफा और एक साइड बालकनी में आराम कुर्सी डाला हुआ था । अगले 5 मीनट तक वो लड़का , पापा और प्रज्ञा को सारा रूल और सामान के उपलब्धता के बारे में बताता रहा । सब कुछ बताने के बाद वो जाने लगा ।

लड़का : चलिए सर मै निकलता हूं। आप लोगों किसी भी चीज की जरूरत हो , तो बताए हुए नंबर ले कॉल के लेना ।

पापा: थैंक्यू भाई , थैंक्स ।

लड़का : मेंशन नॉट सर । ओके सर, ओके मैम। इंजॉय यौर हनीमून और सर आपको अगर कोंडोम का जरूरी परे तो आप के बेड के दराज़ में परे है । You are free to use it. And if you need more just give a call we will provide.


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दरअसल वो कपल स्वीट ज्यादातर कपल लोग ही बुक करते थे । और उस लड़के को ये पता नहीं था कि पापा और प्रज्ञा ने नार्मल रूम बुक किया था और उन्हें अपग्रेड के के ये रून दिया गया है । उसे बस रिसेपशन वाली लड़की ने बताया था कि ये कपल है , क्योंकि पापा ने प्रज्ञा का नाम कपल के तौर पे हो लिखवाया था ।

तो उस करके को लगा कि ये पक्का हनीमून मनाने हो आए होंगे , जैसे और लोग आते है । इसलिए उसने ऐसा बोल जाते जाते ।


पापा और प्रज्ञा एकदम से स्तब्ध रह गए । की ये क्या हुआ । प्रज्ञा को एक झटका सा लगा कि उसने पापा को कोंडोम के बारे में क्यों बताया ? और हनीमून?


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पापा भी समझ नहीं पा रहे थे कि अब प्रज्ञा को कैसे समझाए ?


अगला अपडेट जल्द ही.....
Nice and superb update.....
 

dhparikh

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Update 69 :

ट्रेन प्लेटफार्म पे लग चुकी थी पापा , टिकट के हिसाब से अपनी बॉगी का नंबर ढूंढ रहे थे । बॉगी नंबर था H2 । जल्दी ही पापा को बोगी दिख गई । बाहर एक स्टाफ खड़ा था । वो दोनों गेट के तरफ बढ़े तो पापा ने गौर किया कि प्रज्ञा आगे आगे चल रही थी । उसका गांड मटकते हुए बहुत अच्छा दिख रहा था । पास में ही कुछ अवारा लड़के एक दूसरे से प्रज्ञा की ओऱ इशारा कर के दिखा रहे थे । वो थोड़ी दूरी पर थे तो वो क्या बोल रहे थे ये तो पापा को भी सुनाई नहीं दे रहा था। मगर इनकी राक्षसों वाली हंसी पापा और प्रज्ञा दोनों को सुनाई दे रह था । पापा को गुस्सा आ रहा था , मगर प्रज्ञा सुन के अनसुना सा कर रही थी । गेट पे जब दोनों पहुंच ही गए थे कि एक ने चिल्ला के बोला : अरे अंकल , इतना कड़क माल लिये कहा जा रहे हो , जरा हमे भी तो चखा दो। हाहाहाहा.....

उनको लग रहा था कि वो बहुत कूल लग रहे है ऐसा कर के मगर पापा का गुस्सा आसमान पे चल गया था । प्रज्ञा ने वो सुना तो शर्म से सिर झुका लिया । पापा ने प्रज्ञा को बोला बेटी तू ये बैग लेके अंदर जा जरा इनकी खबर लेता हु । प्राची डर गई कि कही पापा उन अवारा लोगों से लड़ाई तो नहीं कर लेंगे , वो अवारा लड़के पापा को चोट ना पहुंचा दे ?

उसने पापा से कहा : पापा ट्रेन बस खुल ही जाएगी । इन सब में मत पड़ो, चलिए अपने शीट पे बैठते है ।

तभी एक और लड़का चिल्लाया : क्या अंकल , अकेले अकेले जवानी का रस पियोगे ।

प्रज्ञा शर्म से लाल हो गई । पापा का गुस्सा अब सर पे चढ़ गया । वही गेट पे कुछ पुलिस गार्ड भी खरे थे । पापा ने बैग वही रखा और तेजी से उन लड़कों के पास गए और एक लड़का जो बहुत ज्यादा हस रहा था और प्रज्ञा के बारे में चिल्ला के अभद्र बात की थी ,उसके गाल पे एक रसीद के चाटा जड़ दिया । चटाक..... की आवाज आस पास गूंज गई और वो लड़के एकदम सदमे में आ के शांत से हो गए । उसे पहले वो लड़के पापा पे हाथ उठाते वो गार्ड जो 1st AC के गेट पे खड़े थे , वो वहां पहुंच गए ।

गार्ड उन लड़कों से : क्यों बे लफंगो, क्या चुतिया गिरी कर रहा है ?

पापा : अरे ये लोग देखिए , आती जाती लड़कियों को छेड़ते रहते है । अभी मेरे बेटी पे अभद्र टिप्पणी कर रहे थे । मुझे से रहा नहीं गया और मैने रसीद के एक कान पे बजा दिया । उसके लिए माफ करियेगा सर ।

गार्ड : बिल्कुल सही किया , मै अभी RPF वालों को बोलता हु , इसी स्टेशन पे खबर लेंगे इसकी ।

तभी गेट पे खड़ा स्टाफ भी ये सब देख रहा था । पापा का ये रूप देख के सब पापा की प्रशंसा करने लगे । प्रज्ञा वही खरी पापा के इस दबंग अंदाज को दिखती रही पर कुछ बोल नहीं पाई । उसने मन में कहा : आज पापा नहीं होते तो पता नहीं ये लड़के कुछ कहने से ज़्यादा कुछ के सख्त थे । पापा ने कितना हिम्मत दिखाया मेरे लिए । पापा मुझे पे कभी आँच नहीं आने देंगे । पापा ने कैसे उस कामिने को रसीद के चाटा जड़ा , वाह मजा ही आ गया । पापा मेरे लिए किसी से भी भीड़ जाते है । कितना प्यार करते है वो मुझे ।

यहाँ प्रज्ञा के प्यार का मतबल पापा वाला प्यार से ही था । उसके दिल में पापा के लिए अभी तक उस तरह का प्रेम जग नहीं था । अगर प्रज्ञा को पापा से उस तरह का प्यार चाहिए होता तो उस दिन उनके गोद में ही कुछ ना कुछ कर बैठती। मगर आज के घटना ने पापा के मर्दानगी का छाप प्रज्ञा के दिल पे छोड़ दिया था ।

गार्ड ने पापा को करवाई का सांतवना दे के बोला , सर आपकी ट्रेन खुलने वाली है आप चलिए , इनका ठिकाना ह्म लगते है । तभी दूर से RPF के कुछ जवान आते दिखे । पापा समझ गए कि ये मावली पकड़े गए आज । वो गेट के तरफ आ गए । गत पे खड़े स्टाफ ने आगे बढ़ के पापा का सामान लिया और बोला : अच्छा किया सर आपने , कितने ही लड़कियों हो छेड़ रहे थे , जब से ट्रेन रुकी है । मै कुछ बोल नहीं रहा था क्योंकि मैं बाहर का हु ओर ये लोकल लोग। चक्कर में फंस गया तो ट्रेन को कौन देखेगा । वैसे मै आपका बोगी स्टाफ हु । आपकी बोगी H2 ही है ना।

पापा : जी , सही कहा अपने H 2 सीट नंबर 15-16 ।

स्टाफ : वेलकम sir ।

वो पापा और प्राची का सामान लेके आगे आगे बढ़ा और दोनों उसके पीछे पीछे बोगी में अंदर चल दिए ।

पापा ने स्टाफ से पूछा : और भैया ,कहा से हो ?

स्टाफ : लखनऊ से हु सर । आज रात को मै यही ड्यूटी कर रहा हूं। आपको कुछ भी चीज की जरूरत हो तुरंत मुझे बताइए । आपका दोनों सीट केबिन में है , आपके साथ वहां एक कपल भी है । होप यू डॉन्ट माइंड सर ।

पापा: ओह...हमे लगा कि हमे कूप में सीट मिला है ।

स्टाफ : नहीं सर , आपकी सीट नंबर 15-16 है जो 13-14 के साथ है सर ।

पापा : अरे यार , हम दोनों फैमिली है । एक कूप से केबिन का सीट एक्सचेंज हो जाता तो बहुत अच्छा होता ।

स्टाफ : सॉरी सर , वो तो मै कैसे बता पाऊंगा । वैसे टीटी सर आयेंगे तो उनसे पूछ के कोई जुगाड़ करवा दूंगा ,मगर तब तक आपको एडजस्ट करना पड़ेगा । टी टी अगले 3 स्टेशन बाद ही आयेंगे ।

पापा : ओह यानी एक घंटा । चलो मैनेज कर लेंगे ।

उसने दोनों को उनके केबिन तक पहुचा दिया । अंदर 4 शीट थी । एक साइड के ऊपर नीचे , प्रज्ञा और पापा का था । और दूसरे साइड का दोनों सीट एक मुस्लिम बाप बेटी जैसे दिख रहे 2 लोगों का था ।

पापा: क्या नाम है तुम्हारा ।

स्टाफ : सर राकेश ।

पापा: ठीक है राकेश , थैंक्यू। कुछ जरूरी होगी तो बुलाता हूं तुम्हें।

राकेश : ओके सर , बिल्कुल । आप कंफर्टेबल हो जाइए ।

पापा और प्रज्ञा ,केबिन के अंदर गए । एक तरफ सीट पे ,एक 50-55 साल का दाढ़ी वाले मौलवी की तरह दिखने वाले शख्स बैठे थे और वही पास में एक 18-19 साल की लड़की जो उनकी बेटी की उम्र की जान पड़ती थी , वो बैठी थी । उसके गले में काले रंग का हिजाब जैसा स्कार्फ था ।

पापा और प्रज्ञा ने अपना सामान को ठिकाने सीट के नीच लगा दिया और सीट पे बैठ चुके थे ।

प्रज्ञा साथ कुछ किताब लाई थी तो वो पढ़ने के लिए ले कर बैठ गई । और तभी ट्रेन चल पड़ी।

मौलवी : सुब्हानला, ट्रेन खुल गई ।

पापा : जी ।

पापा ने थोड़ा मौन रह के उस से पूछा : आप कहा से है , और कहा तक जा रहे है ।

मौलवी: अजी हम लखनऊ से है और अभी वहीं जा रहे है , हमारी फुफेरी बहन के बेटे की निकाह है । उसी में जा रहे है ।

पापा: अच्छा , लखनऊ से है आप ।

मौलवी: जी जी , जमाने से हमारा वहां एक होटल चलता है , बाप - दादा , सब चलाते रहे । अब मेरे बच्चे चलते है । मैने भी लगभग 30 साल चलाया । अब बम्बई में रहने लगा हु ।

पापा: अच्छा , हम लोग तो आप के ही शहर जा रहे है , लखनऊ, वहां हमारे बेटी का एग्जाम है कॉलेज के एडमिशन का।

मौलवी : वहां, चलिए , हम आपको अपने शहर का खरीददारी दिखाएंगे , आइएगा एक बार हमारे होटल पे , बहुत अच्छी कबाब मिलते है ।

पापा: जरूर आते , मगर हम शाकाहारी है ।

मौलवी: ओह अच्छा अच्छा , कोई नहीं , बादाम शरबत ही पिला देंगे आपको । हाहाहाहा...

पापा भी हस पड़े । प्रज्ञा के कानों में भी सारी बाते जा रही थी मगर वो अपने किताब में मुंह छुपाए पढ़ रही थी ।

पापा और उस आदमी की लंबी बात होने लगी , कॉलेज कहा है ? क्या क्या घूमने का जगह है लखनऊ में ?....बगैरा बगैरा।

तभी पापा का ध्यान उस लड़की ने खींचा और उन्होंने ऐसे ही पूछ लिया : और आपके कितने बच्चे है, ये आपकी छोटी बेटी है ?

उस मौलवी के मुंह पे एक मुस्कान आ गई : मेरी खुदा के फज़ल से ३ शादी हुई है जनाब। पहले बीवी से 6, दूसरी से 4 , और तीसरी से अभी कार्य प्रगति में है , नहीं भी तो 3-4 उनसे भी हो ही जाएगा अब तक बुढ़ा होऊंगा । हाहाहा....

पापा : हाहाहा..बारे क़िस्मत वाले है । काफ़ी मेहनत किया है अपने जीवन में ....हाहाहा...

मौलवी : जी अब जो है वो आल्हा की देन है ।

पापा: अच्छा ये आपकी बड़ी वाली पत्नी की बेटी है या २nd वाइफ़ से?

मौलवी: अजी , आप नहीं समझे लग रहा है , ये ही मेरी तीसरी बेगम है । मेरे चेहरे भाई की लड़की है । हमारे में चलता है चचेरे भाई वाली भतीजी से निकाह । और शादी भी 4 कर सकते है ।

पापा आवक रह गए । वही प्रज्ञा एकदम से अपना किताब नीचे कर के उस लड़की की ओर देखने लगी । एकदम मासूम चेहरा , एकदम गोरा दमकता , सेब की तरह लाल, बॉडी पार्ट समीज सलवार से ढकी हुए , सर के चारों तरफ एक हिजाब । बूढ़े ने लॉटरी मार लिया था ।

पापा: वाह जी वाह, किस्मत हो तो आपके जैसा । २ बीविया के रहते हुए , तीसरी से शादी किए और वो भी इतनी सुंदर। वाह।

प्रज्ञा को पापा के बातों के आश्चर्य हो रहा था । पापा ये क्या कह रहे है ? अच्छा किया ? ये बूढ़े ने इतनी छोटी लड़की के साथ शादी कर के उसे मां बनाने के चक्कर में है और पापा इसकी तारीफ कर रहे है ?

पापा : मगर आपको तीसरी शादी क्यों करनी पड़ी ? २ बीविया तो थी ही , ओर अब आपकी उमर भी जायदा है इनके साथ के लिए ।

मौलवी : अरे , इनकी अम्मि अब इस दुनिया में नहीं रही । और अबु भी पिछले ही साल एक एक्सीडेंट में चल बसे । तो इनकी चाचा इसका निकाह मेरे बेटे से करना चाहते थे । मगर उसने शादी वाले दिन ही पता नहीं क्या गया , रिश्ता तोड़ दिया । और ये बेचारी जहर खाने के चक्कर में थी , सब ने इसको बचाया । मगर एक लड़की का उसके शादी के दिन ही शादी टूट जाए तो उसकी शादी आगे भी होने में बहुत मुश्किल होती है । और मैने इसके चाचा को जवान भी दिया था कि ये मेरे घर की बहु बनेगी । अंत में कोई उपाय नहीं हो सका तो मैने हो इनके चाचा को बोला कि मैं ही शादी करने के लिए तैयार हु , क्योंकि जवान मैने दो थी । इस तरह हमारा निकाह हुआ ।

पापा और प्रज्ञा कहानी सुन के ही आवक हो गए थे । पर दूसरे को क्या कोसना जब पापा खुद ही अपने बेटी से ही शादी के के उसे प्रेग्नेंट बना चुके थे ।

वो दोनों बाते करते रहे । और खाना आ गया । पापा और प्रज्ञा घर से ही थोड़ा खा के आए थे तो एक थाली में ही खा लिया । उधर वो दोनों मियां बीवी भी खा लिए और वो हिजाब वाली लड़की को उसके शौहर ने उसे ऊपर वाले सीट पे सुला दिया ।

पापा ने राकेश को एक बार बुलाया और सीट के बारे में पूछा , उसने कहा , सर कोई भी कूप अवेलेबल नहीं है , और कुछ लोगों से मैने एक्सचेंज के लिए भी पूछा मगर वो भी केबिन नहीं लेना चाहते है। टीटी सर ने भी कोई जुगाड़ नहीं बिठा पाए । सॉरी सर ।

पापा को थोड़ा गुस्सा आया मगर अब क्या के सकते थे , एक रात की तो बात थी । पापा दरअसल प्रज्ञा के साथ अकेले में कुछ समय बिताना चाहते थे । खैर उस अरमान पे तो पानी फिर गया था । चलो वैसे भी 5-6 बजे तक तो उतर ही जाना था । रात को वो कितना ही प्रज्ञा के साथ बात के सकते थे ।

पापा ने प्रज्ञा से बोला : अब तो यही सोना पड़ेगा बेटी । तू ऊपर चली जा मै नीच सो जाता हूं।

प्रज्ञा : ok papa.

AC काफी तेज चल रहा था सो सबने चादर ओढ़ा हुआ था ।

पापा भी मन मार के नीचे वाले सीट पे लेट गए , और सोने की कोशिश करने लगे ।

लगभग आधी रात का समय था , पापा पूरे दिन का काम ऑफिस में करने से थक गए थे और गहरी नींद में सो गए थे । वही प्रज्ञा को कल एग्जाम का टेंशन को लेके नींद नहीं आ पा रही थी । और अभी जा के थोड़ा थोड़ा आंख लगाना शुरू हुआ था ।

गाड़ी अपने गति से भागे जा रही थी । और बाहर ट्रेन से छुक छुक की आवाज आ रही थी । सब का शरीर भी स्थिर नहीं था और गाड़ी के गति के कारण डोल रहा था । अचानक की प्रज्ञा को आभास हुआ कि एक कला जा आकृति सामने वाले सीट ले सोई लड़की के सीट पे चढ़ने की कोशिश के रहा है। प्रज्ञा ने हल्का सा अपना आंख खोला तो वो ओर कोई नहीं वो मौलवी ही था । बड़ा बड़ा दाढ़ी से ही प्रज्ञा को पता चल गया ।

उसने एकदम हल्की आवाज में उस लड़की को आवाज दिया : अमीना वो मेरी अमीना , सो गई क्या ?

लड़की : न....नहीं अब्बू, नींद नहीं आ रही आपके बिना ।

प्रज्ञा को अब्बू शब्द सुनते ही एकदम से धक्का लगा : क्या , क्या उसने उस आदमी को अब्बू बोला ? क्या ये आदमी इस लड़की का बाप है ? इसने पापा से कितना झूठ बोला ? और झूठ भी ऐसा कि कोई भी यकीन कर ले ।

प्रज्ञा का मन दहल गया कि ये बूढ़ा अभी इतनी रात को यूं अपने बेटी के सीट पे क्यों चढ़ आया है , और प्रज्ञा को इस सवाल का जवाब मिलने में ज्यादा वक्त नहीं लगा ।

अब्बू: अमीना मेरी जान , मुझे भी कहा तेरे बिना नींद आनी है । मगर मैने कितनी बार बोला है , बाहर अब्बू मत बुलाया कर , लोग सुनेगे तो क्या सोचेंगे ।

अमीना : सॉरी खान साहब ।

अब्बू : हां ये हुए बात। अब जरा मेरे ज्वालामुखी का लावा तेरे बुर में उड़ेलने दे ना।

प्रज्ञा एकदम ठिठुर गई ये सुन के ।

अमीना : यहां कितने लोग है अब्बू । नहीं नहीं ।

अब्बू : अरे मेरी जान , कोई नहीं आएगा , देख नीचे केबिन का दरवाजा बंद है ना।

अमीना : पर से लोग भी तो है , जो उस सीट में सो रहे है , और ये लड़की तो एकदम सामने ही है ।

अब्बू : अरे गहरी नींद में है , उन्हें क्या पता चलेगा । मैने नीचे वाले आदमी को थोड़ा हिलाया , एकदम घोड़ा बेच के सो रहा है ।

अमीना : मगर अब्बू , ये लड़की जग गई तो ।

अब्बू : तो इसको भी अपने मुस्लिम लार का मजा दे दूंगा ।

प्रज्ञा ये बात सुन के दहल गई , वो पानी पानी हो गई थी । वो जीवन में पहली बार ऐसा कुछ देख रही थी । एक बाप उसके सामने अपनी बेटी को चोदने की बात कर रहा था । उसका दिमाग तुरन्त अपने पापा और प्राची के बीच हुए मिलन पे चला गया , क्या पापा भी ऐसा कुछ करते होंगे दीदी के साथ ? ये क्या करने वाला है इस लड़की के साथ ? ओह ये तो उस लड़की को चूमने लगा है । हाय मै शर्म से पानी पानी हो रही हू , और ये कितने निर्लज्ज लोग है कि इन्हें बगल में २ अंजान लोग रहते भी शरम नहीं आ रही ।

उम्म्म...उम्म्म... कर के एकदम हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी । प्रज्ञा के पास कोई चारा नहीं था । पापा को तो ये सब पता भी नहीं चल रहा होगा ,वो इतमीनान से नीचे सो रहे थे । मगर ऊपर अब प्रज्ञा के आंखों से नींद एकदम गायब थी । मगर प्रज्ञा ऐसा दिखा रही थी कि वो सो रही है , वो भी गहरी नींद में । ओर ये दोनों बाप बेटी अपना काम शुरू कर चुके थे ।

अमीना : अब्बू ओके ये दाढ़ी चुभ रही है । मेरे होठ छिल जाएंगे ।

अब्बू : मेरी जान , अभी तो बुर में मिटा काँटा चुभोंगा उसका क्या ? वो तो चीर के रख देगा तेरा बुर अगर तुझे दाढ़ी से होठ छिल रहे है तो ।

प्रज्ञा का परा भी बढ़ता जा रहा था ।

वो दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे । और अब्बू उस लड़की का सीने का गोलाई अपने हथेली में भर के बैलून की तरह दबा रहा था ।

अमीना : अब्बू आऊच.....

अब्बू : सीईईई....क्या कर रही है , ये लोग जग गए तो गड़बड़ हो जाएगी । छोड़ सीधा आज पेलाई की कर लेता हू , रोज़ तो अच्छे से मजा लेके तो चोदता ही ही तुम्हे ।

प्रज्ञा मन में : हाय राम ये बूढ़ा रोज़ करता है ऐसा अपने बेटी के साथ ? क्या पापा भी दीदी के साथ ? बाप रे दीदी ये अब की होगी पापा के साथ ।

प्रज्ञा को अंधेरे में कुछ साफ साफ दिख नहीं रहा था । मगर इतना पता चल रहा था कि क्या क्या हो रहा है । उस आदमी ने अपने पजामे का नारा खोला और खींच के नीचे के लिया ,साथ ही अंडरवियर भी , अब उसका लिंग अंधेरे में ही आकर का दिखा था था । एकदम फ़ानफाया हुआ । उसने बोला : खोल अमीना , जल्दी , रहा नहीं जाता , नहीं तो नींद भी नहीं आएगी ।

उस लड़की ने भी अपने सलवार की डोरी खोल दी , कि तभी अब्बू ने कस के उसका सलवार खींच के गांड और चुत को आजाद के दिया ।

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और उसने अपने बेटी का चुत चाटना शुरू के दिया ,ओर लगभग २ मिनट तक चाटता रहा ।

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अमीना : अब्बू , बड़ा दुखता है , आराम से डालियेगा । यहां चीख़ निकल गई तो गजब हो जाएगा ।

अब्बू अपने लन्ड के छिले हुए टोपे पर थूक मलते हुए : एकदम मेरी बच्ची , आराम से , एकदम आराम से करूंगा । तू बस लेती रहा ।

प्रज्ञा ये सारा दृष्य दबी आंखों से देख रही थी । अब उसको दादी की सारी बाते याद आने लगी थी । दादी ने जो लड़का और लड़की के मिलन के बारे में बताया था । इतने में वो मौलवी ने अपना लिंग अमीना के बुर पे लगाया और एकदम धीरे से अंदर सरकने लगा , प्रज्ञा ये देख के दंग रह गई , इतना मोटा , इतना आराम से कैसे जा रहा है इस लड़की में ।


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ये लड़की भी तो प्रज्ञा के उमर की ही लग रही थी । क्या इसको इस बूढ़े ने बहुत बार ऐसा किया है कि इसका इतना आराम से ले ले रही है ये लड़की ?

देखते ही देखते पूरा का पूरा लिंग अंदर के दिया उस मौलवी ने अपने बेटी के बुर में । अमीना के मुंह से एक सिसकी निकली , सीईईई....

अब्बू : बस बस मेरी बच्ची हो गया , चला गया अंदर ।



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इतना सुनते ही प्रज्ञा की चुत से उसे कुछ चिपचिपा गढ़ा रस बहता भी महसूस हो रहा था , असल में वो गीली हो रही थी ।


एकदम धीरे धीरे वो आदमी अपने बेटी के चुत पे शॉर्ट लगने लगा । पट पट...चप चप...फच फच की हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी ।


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प्रज्ञा को ये आवाज सोचने को मजबूर के रही थी कि , इसका एहसास कैसा होगा ? वो अब एकदम गरम हो गई थी ।

अब्बू : बस अमीना , ज़रा जल्दी जल्दी मारने दे बुर , मजा आ रहा है बेटी....आह....

चुदाई अपने पेस पे चालू था । ट्रेन तो वैसे भी झूल रही थी , तो किसी को सीट झुलाने का भी पता नहीं चल रहा था । उधर बस एक आदमी था जो ये सब देख रहा था , वो थी प्रज्ञा ।


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चुदाई होती जा रही थी , होती जा रही थी । अब दोनों ने अपने कमर पे चादर डाल लिया था और कुछ दंग से दिख भी नहीं रहा था । पर हर स्टॉक जो अब्बू अमीना के चुत पे मर रहे थे , वो महसूस या पता एकदम चल रहा था ।

प्रज्ञा एकदम चिपके से अपना हाथ नीचे ले जा कर एक उंगली से अपने सलवार के अंदर हाथ डाल चुकी थी । और अनचुदी , मखमली चुत को रगड़ रही थी ।

लगभग अब्बू और बेटी का खेल 10-15 मिनट चल होगा और एक दो झटका खा के वो दाढ़ी वाला आदमी एकदम शांत हो गया । इसबार कोई कुछ नहीं बोला । वो उठा और अपना नारा बांध कर वो नीचे चला गया और गए खोल केबिन से बाहर निकल गया ।

वही वो लड़की अमीना , अपने चुत पकड़े ऐसी बैठी रही जैसे किसी ने उसको घोड़े के लन्ड से चुदाई करा दिया हो ।


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थोड़े देर ऐसा लग रहा था कि उसे कोई होश नहीं है , फिर वो भी उठी और अपना सलवार टाइट कर के नीचे उतर के लेडीज़ बाथरूम के तरफ चल दिया ।

आप उस केबिन में बस पापा और प्रज्ञा ही बचे थे । पापा की सांसे तेज तेज चलने का आवाज आ रहा था । और पैगी को एक मदहोश करता जा रहा था । अभी अभी उसके सामने एक बाप ने अपनी बेटी चोदि थी । और नीचे पापा की मौजूदगी का एहसास उसे और जायदा जोश से भर रहा था । अचानक उसका शरीर आकरा और भलभला के उसने बुर से पानी छोड़ दिया । और एकदम शांत हो गई ।

इन सब से बेखबर पापा सो रहे थे । धीरे धीरे प्रज्ञा का भी आँख लगना शुरू हो गया और वो नींद के आगोश में चली गई ।

5 बजे के करीब पापा का अलार्म बजा, उन्होंने उठ के स्टेशन का नाम चेक किया था अगले 3 स्टेशन के बाद लखनऊ आने ही वाला था । पापा सब कुछ व्यवस्थित करने लगी। उधर वो आदमी भी उठ गया और सारा सामान निकालने लगा , उसे भी लखनऊ ही उतरना था । प्रज्ञा नीचे आ के अपना मुंह हाथ धो के फ्रेश हो गई थी , आज उसका एग्जाम था । सब लखनऊ आने का इंतजार के रहे थे तो प्रज्ञा ने उस लड़की को देखा । एकदम मासूम सी , पर रात को जो हुआ उसके साथ ये सोच के प्रज्ञा को पता चल गया था कि ये मासूम तो बिल्कुल नहीं है । उसपर से वो दाढ़ी वाल मौलवी, बार बार प्रज्ञा को घूरे जा रहा था। उसे गुस्सा भी आ रहा था ।

15- 20 मिनट बाद ही , लखनऊ आ चुका था । पापा ने मुझे बोला अभी इंतजार करो , अब उतर जाए तो उतरेंगे आराम से ।


वो मौलवी ने पापा को अपना होटल का कार्ड थमते हुए बोला : अच्छा भाई साहब , अच्छे से दिलवाई बेटी का एग्जाम , मै निकलता हूं। वैसे किसी चीज की परेशानी हो तो याद कर लीजिएगा।

पापा: अच्छा अच्छा ठीक है ।

पापा और प्रज्ञा , भी ट्रेन से बाहर आए , पापा ने एक ऑटो बुक किया और एक अच्छे होटल ले जाने को बोला , उसने पापा को बोल : सर बेस्ट होटल ले चलता हु । आइय बैठिये ।

पापा : बेस्ट ले चल और ये भी होना चाहिए कि कॉलेज के पास ही होना चाहिए । आज ही एग्जाम है ।

ऑटो वाला : सर बैठिए तो , कितनो के एग्जाम के लिए मैने यही होटल में ठहराया है । चालिया ना ,उस होटल से 300 m पे ही दीदी का कॉलेज है ।

पापा, : चलो फिर ये अच्छा हो गया ।

30-40 मिनट में ही वो लोग होटल पहुंच गए । होटल सच में बहुत खूबसूरत था । और एकदम एकांत वाले जगह पे था , वही दूर से ही प्रज्ञा के सेंटर वाले कॉलेज का बिल्डिंग भी दिख रहा था जो उस ऑटोवाले ने बताया था ।

प्रज्ञा : वाह पापा, मै ऐसे होटल में कभी नहीं रुकी हूं ।

पापा : तब अब रुक लेना ।
और वो समान निकलवाने लगे । वो लोग अंदर जाने लगे तो होटल का चकाचौंध देख के प्रज्ञा बहुत खुश हो गई ।

प्रज्ञा : पापा कितना सुंदर होटल है । बहुत महंगा होगा पापा , एक सप्ताह में तो और भी ज्यादा पैसे लगेंगे ।

पापा: तू उसकी चिंता मत कर बस एग्जाम की चिंता कर । पैसे मै किस लिए कमाता हु तेरे ही लिए ना ?

प्रज्ञा पापा का ये जवाब सुन के खुशी से झूम उठी ।

प्रज्ञा : सच पापा...आप मेरे बारे में इतना सोचते है ।

पापा : पगली , कैसी बात करती है तेरे बारे में नहीं सोचूंगा तो ओर किसके बारे में सोचूंगा , प्राची तो पत्नी है , अब तू ही तो मेरी इकलौती बेटी है ।

प्रज्ञा : थैंक यू पापा ।

पापा : थैंक्यू किस बात की , बाप हु तेरा , मेरे ऊपर हक है तेरा , और तेरे ऊपर भी मेरा पूरा हक है ।

प्रज्ञा : जी पापा , अब से थैंक्यू नहीं बोलूंगी। हाहाहा...

पापा: तेरे ऊपर हक है मेरा ये तो मानती है ना ?

प्राची थोड़ी झेप गई , वो पापा की बात को समझ गई ।

पापा: अरे बोल ।

प्रज्ञा : हां पापा , पूरा हक है , आप ही तो हमारा घर के मालिक है , मेरे पापा है , आपका ह्म सब पे पूरा हक है ।

पापा : ह्म्म्म...चलो हक है तो हक जताने दो और इस होटल में बुकिंग करने दो ।

प्रज्ञा : ओके पापा।

पापा: एग्जाम तेरे कितने बजे तक है ?

प्रज्ञा : पापा 11 बजे से 3 बजे तक ।

पापा : बढ़िया , उसके बाद मजे करेंगे ।

प्रज्ञा : थोड़ी शरमाई मजे के नाम पे फिर बोली : जी पापा।

प्रज्ञा वही लगे सोफे पे बैठ गई ,जब तक पापा बुकिंग करने गए ।

पापा रिसेप्शन पे गए तो वहां बैठी लड़की बोली : YES sir , how may I help you ?

पापा: मुझे एक कमरा चाहिए ।

लड़की : ओके सर ,कितने मेंबर्स के लिए ?

पापा: 2 लोगों के लिए ।

लड़की : ओके आप लोग कपल है ?

पापा को लगा कि अगर बेटी बोल के एक कमरे में रहेंगे तो ये लोग क्या सोचेंगे और २ कमरा इतने महंगे होटल में एक सप्ताह के लिए आउट ऑफ बजट है , इनको सब कुछ क्यों बताना की हमारा रिश्ता क्या है । पापा ने बस एक ह्म्म्म.... में जवाब दिया ।

लड़की : ओके सर , अपना नाम बताइए और मैडम का का नाम बताइए । और आप अपना क्या मैडम जी में से किसी एक का ID भी दीजिए ।

पापा ने उसे ये भी बता दिया कि रूम वो एक वीक का जरूर बुक कर रहे है मगर उनका काम जल्दी खत्म हो गया तो वो जल्दी भी चेक आउट कर सकते है ।

इसपे उस लड़की ने बोला : नो प्रॉबलम, सर आप जब चाहो चेक आउट के सकते है ।

पापा ने अपना ID देते हुए अपना नाम और प्रज्ञा का नाम लिखा दिया । वो रेस्पेसिनिष्ट झट झट सारा डाटा अपने कंप्यूट में एंट्री करने लगी । पापा का id स्कैन किया ओर फिर वापस दे दिया । एड्रेस और पर्पस ऑफ विजिट पूछ के उसने बोला : ok sir , your room will be ready in 10 mins , please just wait sir.

पापा भी प्रज्ञा के पास जा के सोफे पे बैठ गए । और प्रज्ञा से बोला : बेटी , एक प्रॉब्लम है , रूम्स बहुत महंगे है । इसलिए २ रूम करना सही नहीं लगा , एक ही रूम किया है , मगर काफी स्पेस वाला है तो कोई दिक्कत नहीं होगा । और रूम में सोफा भी है तो तू बोलेगी तो मै सोफे पे सो जाऊंगा , तो उसकी चिंता मत करना ।

प्रज्ञा : हां पापा , मै तो पहले ही बोली थी बहुत महंगा होटल होगा । की बात नहीं मुझे चलेगा पापा ।

पापा अब जा के आश्वत हुए ।

थोड़े देर बाद वो लड़की पापा के पास आई
और बोली : सर , हमे खेद है कि आप ने जो रूम बुक किया है , वो इन्फॉरफुनेटली अभी उपलब्ध नहीं हो सकेगा । उसके गेस्ट ने अपना स्टे को बढ़ा दिया है । मगर हमने आपको कमिटमेंट किया था तो हम आपको अपग्रेड के के कपल स्वीट प्रोवाइड कर रहे है । Is that ok for you sir ?

पापा: लेकिन उसके चार्जेज ?


लड़की : डॉन्ट वैरी सर, हम सेम प्राइस में हो आपको अपग्रेड के रहे है ।

पापा: फिर ठीक है ।

प्रज्ञा भी खुश हो गई ।


एक लड़का उन दोनों का सामान ले कर उन्हें अपने पीछे आने को बोला । लिफ्ट से 4 मंजिल पे पहुंच कर एक बारे से दरवाजे के कि ओर ले गया । कार्ड डाल के उसने रूम नंबर 405 खोला और पापा से बोल : वेलकम sir.


images

ये अगले एक सप्ताह तक आपका कमरा है , बाथरूम राइट साइड में है । और आप ठंडा और गरम दिनों पानी का उपयोग कर सकते है । लेफ्ट कॉर्नर में फ्रिज भी है , सो u can enjoy bear or softdrinks .

फिर वो पापा और प्राची को उनका बेडरूम दिखाया । वो बहुत ही शानदार और सुंदर था । कमरे के बीचोबीज एक बार सा बेड लगा था साइड में सोफा और एक साइड बालकनी में आराम कुर्सी डाला हुआ था । अगले 5 मीनट तक वो लड़का , पापा और प्रज्ञा को सारा रूल और सामान के उपलब्धता के बारे में बताता रहा । सब कुछ बताने के बाद वो जाने लगा ।

लड़का : चलिए सर मै निकलता हूं। आप लोगों किसी भी चीज की जरूरत हो , तो बताए हुए नंबर ले कॉल के लेना ।

पापा: थैंक्यू भाई , थैंक्स ।

लड़का : मेंशन नॉट सर । ओके सर, ओके मैम। इंजॉय यौर हनीमून और सर आपको अगर कोंडोम का जरूरी परे तो आप के बेड के दराज़ में परे है । You are free to use it. And if you need more just give a call we will provide.


images (1) images (2)

दरअसल वो कपल स्वीट ज्यादातर कपल लोग ही बुक करते थे । और उस लड़के को ये पता नहीं था कि पापा और प्रज्ञा ने नार्मल रूम बुक किया था और उन्हें अपग्रेड के के ये रून दिया गया है । उसे बस रिसेपशन वाली लड़की ने बताया था कि ये कपल है , क्योंकि पापा ने प्रज्ञा का नाम कपल के तौर पे हो लिखवाया था ।

तो उस करके को लगा कि ये पक्का हनीमून मनाने हो आए होंगे , जैसे और लोग आते है । इसलिए उसने ऐसा बोल जाते जाते ।


पापा और प्रज्ञा एकदम से स्तब्ध रह गए । की ये क्या हुआ । प्रज्ञा को एक झटका सा लगा कि उसने पापा को कोंडोम के बारे में क्यों बताया ? और हनीमून?


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पापा भी समझ नहीं पा रहे थे कि अब प्रज्ञा को कैसे समझाए ?


अगला अपडेट जल्द ही.....
Nice update....
 
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sexsarkar

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n

new chrachter jabardasti daale lgta ha please avoid it
Bhai , apko story nhi pasand aati to bolo nhi likhuga, magar agar likh rha hu, to story ke liye jo jaruri plots hai, wo likhunga. Jabardasti ka charector kis angle se laga jara batao. Kya sansar me bas prachi or uske papa hi sex kr rhe hai ?

Waise bhi pragya ka shadi nhi hua hai papa se ki wo bina kisi hichak ke papa se milan karne ko razi hogi , ye choti choti ghatnaye uske dimag me papa ke parti aakarshan tez karta jayega.

Agar khanai pasand nhi aa rhi hai bolo mai kahani likhna band kr deta hu. Waise bhi samay nikal ke likhna mere liye kathin jaan parta hai.

Kuch pathako ko khanai pasand aa rhi hai to isliye likh rha hu. Nhi aati to mujhe koi harz nhi, kahani aage na badhane me.
 
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sexsarkar

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है तो पर

ये और लोग भी कर रहे ये तो उसे सामान्य रूप में लेने में प्रभावित करेगा न उसकी हिचक और कमजोर होगी
Wo charectors ka man padh lete hai..unhe kuch na kaha jaye...🤔
 

rajeev13

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Bhai , apko story nhi pasand aati to bolo nhi likhuga, magar agar likh rha hu, to story ke liye jo jaruri plots hai, wo likhunga. Jabardasti ka charector kis angle se laga jara batao. Kya sansar me bas prachi or uske papa hi sex kr rhe hai ?

Waise bhi pragya ka shadi nhi hua hai papa se ki wo bina kisi hichak ke papa se milan karne ko razi hogi , ye choti choti ghatnaye uske dimag me papa ke parti aakarshan tez karta jayega.

Agar khanai pasand nhi aa rhi hai bolo mai kahani likhna band kr deta hu. Waise bhi samay nikal ke likhna mere liye kathin jaan parta hai.

Kuch pathako ko khanai pasand aa rhi hai to isliye likh rha hu. Nhi aati to mujhe koi harz nhi, kahani aage na badhane me.
Ignore those, You are going so good...
 
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