• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

rockwin

New Member
77
124
34
भाई, आपने तो मूड ही बना दिया.. शुक्रिया.. जितनी भी तारीफ करूँ कम है.. बढ़िया अपडेट था... अब बस नए अपडेट का इंतज़ार है... छोटी बेटी का अपने बाप के साथ गुप्त संबंध दिखाना।
 
  • Love
Reactions: sexsarkar

rockwin

New Member
77
124
34
भाई, आपने तो मूड ही बना दिया.. शुक्रिया.. जितनी भी तारीफ करूँ कम है.. बढ़िया अपडेट था... अब बस नए अपडेट का इंतज़ार है... छोटी बेटी का अपने बाप के साथ गुप्त संबंध दिखाना।
 
  • Love
Reactions: sexsarkar

Delta101

Active Member
1,430
1,334
158
Update: 55 (संयम का बांध टूटा: भाग-1)

दादी अपने पोती की कलाबाजियां खाती नंगी बदन को देख के स्तब्ध रह गई। उसके योनि से जो छलछला के काम जल निकला , दादी उसे देख समझ गई थी कि प्रज्ञा आम लड़कियों जैसी नहीं ,वो बिलकुल अलग लड़की है और जो भी पुरूष एक बार प्रज्ञा के कला से बाकीफ़ हो गया , उसे तो फिर किसी ओर महिला संग संभोग करने का मन ही नहीं करेगा । वो बस प्रज्ञा की ही खोजेगा। प्रज्ञा झरने के एकदम निवस्त्र और निढाल अपने दादी के गोद में सर रखे परी हुई थी । दादी ने आज उसे एक ऐसा ज्ञान दिया था और उसे उस ज्ञान का ऐसा पहला अनुभव मिला था कि उसका रोम रोम तृप्त हो गया था । वो 18 वर्ष की नवयौवना का पहला चरम सुख प्राप्ति था ये। दादी भी इस बात से फुले नहीं समा रही थी कि उसकी पोती को वो आज जीवन का एक नया पहलू समझा चुकी थी । स्त्री के लिए इन कलाओं में पारंगत होना बहुत ही जरूरी होता है , ताकि वो अपने खुशी का ख्याल खुद रख सके , क्योंकि बहुत सी स्त्री ऐसी है, जिन्हें मर्द अच्छा नहीं मिलता या जल्दी झड़ जाता है , और तो जीवन भर भी चरम सुख महसूस ही नहीं कर पाती ।
दादी अपने पोती के सर पे हाथ फेरते हुए : कैसा लगा मेरी बच्ची? कैसा महसूस हुआ तुझे तेरा पहला चरम सुख ?
प्रज्ञा अपने निढ़ाल परे शरीर से थोड़ा बल दिखाते हुए बोली : दादी , मैने आज से पहले ऐसा कभी नहीं फिल किया था । मैं तो अपना सुध बुद्ध भी खो गई थी दादी । अपने मेरे योनि पे इस तरह से उंगलियां फिराई की मै तो एक अलग ही दुनिया में पहुंच गई थी दादी । आपके हाथों में जादू तो नहीं ?
दादी : कोई जादू नहीं मेरी पोती , कोई जादू नहीं। ये तो एक स्त्री की अपनी क्षमता है कि वो चरम सुख पा सकती है और स्वर्ग सा अनुभव कर सकती है।
प्रज्ञा : हाँ दादी , मै तो स्वर्ग में ही पहुंच गई थी । पर दादी वो चरम सुख मिलने के समय जो मेरी पेशाब निकल गई ना, उसके लिए मै शर्मिंदा हु । देखिये ना आपका सारा बिस्तर, चादर और यह तक की आपके कपड़ों पे भी मेरा पेशाब गिर गया है। मुझे माफ के दीजिए दादी । मुझे अपने आप पे काबू ही नहीं रहा । मैं बस उस आनंद भरे पल में बह सी गई । मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मैने पेशाब के दिया है।
दादी ,प्राची के नादानी पे हंसती हुई : हाहा...अरे ये किसने कहा कि ये तेरी मूत है ? ये तो काम जल है बेटी , जो कि १००० लड़कियों में से किसी एक के पास ,सेक्स करने के दौरान निकलता है।
प्रज्ञा : मतलब दादी , मै समझी नहीं ।

दादी : अरे वो एक बहुत ही अदभुत चीज़ है , जिसका कला हर महिला के पास नहीं होता , उसे अंग्रेजी में "squirting" कहा जाता है , यानी महिला वीर्यस्खलन।

प्रज्ञा : पर दादी ये सबको क्यों नहीं होता ?

दादी : देख बेटी चरम सुख के समय , सब स्त्री को उनके योनि के अंदर ही पानी निकलता है । मगर बहुत कम स्त्री का ही पानी छलछला के बाहर निकलता है , और तू उनमें से से है ।

दोनों दादी और पोती ऐसे ही बाते करते रहीं। प्रज्ञा थक के चूर हो चुकी थी , उसे पहली बार चरम सुख जो मिला था । वो अपने कमरे में जा के दोपहर के समय थोड़ा सो गई। उधर दादी अपने बिस्तर को साफ सुथरा कर के आराम करने लगी । वही प्राची भी अपने कमरे में सोई हुई थी । दादी अपने दोनों पोतियों का मार्ग दर्शन अच्छे से कर रही थी ।

ऐसा ही दिन चलता रहा , प्रज्ञा अपने दीदी , प्राची का बहुत ख्याल रख रही थी । प्राची की अच्छी खातिरदारी और देखभाल के कारण उसका वजन भी बढ़ने लगा था । आज उसे अपने पापा से मिलन किए हुए 15 दिन बीत चुके थे , यानी उसे अपने प्रेग्नेंट होने का खबर ठीक 15 दिन पहले ही मिला था । पापा ने इन 15 दिनों में प्राची की पूरी सुख सुविधाओं का ध्यान रखना शुरू कर दिया था । और करते भी क्यों ना, आखिर उनकी अपनी बेटी थी , और पहली बार प्रेग्नेंट हुई थी , और वो उस होने वाले बच्चे का पिता और नाना दोनों होने वाले थे । अब प्राची का ध्यान रखना उनके लिए एकदम अनिवार्य कामों के लिस्ट में शामिल हो गया था , सुबह शाम वो प्राची को मालिश करते , उसे हंसाते और खुश रखने का कोशिश करते । ये सब कभी उन्होंने , प्राची के मम्मी के साथ भी किया था और उस समय प्राची उनकी बेटी बन के दुनिया में आई थी । आज ये क्या विधि का विधान था कि उसी अपनी बेटी को उन्होंने ही फिर गर्भवती कर दिया था और उनकी अपनी खुद की बेटी, उनका संतान को जन्म देने वाली थी ।

इन 15 दिनों में पापा की हवस और प्यास बढ़ती ही जा रही थी । उन्होंने तो अब हनीमून का प्लान वो कैंसिल कर दिया था । अगर वो कैंसिल नहीं होगा तो इस समय वो मनाली के किसी खूबसूरत रिज़ॉर्ट में अपनी बेटी को जी भर के चोद रहे होते ,पहाड़ों और वादियों के बीच। खैर अब उनको सब्र रखना होगा । वो भी 9 महीनों तक , और उसके बाद भी शायद प्राची को चोदने के लिए उन्हें 1-2 महीने का इंतज़ार करना ही पड़ता , क्योंकि एक महिला बच्चे को जन्म देने के बाद कुछ दिनों तक सेक्स तो नहीं ही करना चाहेंगी । पापा को अपने बेटी को प्रेग्नेंट कर देना अब भारी पर रहा था । हालांकि वो अपनी प्यास प्राची के मुंह में अपना लौड़ा दे के , चुसवाँ के , पूरा कर लेते थे कभी कभी । पर उनको प्राची के साथ , रात रात भर चुदाई करते हुए रात बिता देना ,बहुत याद आता था । वो हर रात 5-6 राउंड की बहुत ही जबर्दस्त चुदाई जो वो अपने बेटी के साथ करते थे , वो उस चुदाई को बहुत ज्यादा मिस कर रहे थे । उधर प्रज्ञा भी अपने दादी के हाथों से चरम सुख का शिक्षा लेने के बाद अब खुद कभी कभी अपने गुप्तांग से खेलने लगी थी । एकांत पा के वो अपने कमरे में ही कभी कभी अपने नारीत्व का आनंद लेने लगी थी ।

खैर समय बीतता गया । एक रात पापा प्राची के साथ अपने कमरे में बैठ उसकी पैरों में तेल मालिस कर रहे थे। उन्हें प्राची का बदन छूते हुए उसका मालिश करना बहुत मज़ा दे रहा था । उनका मन चंचल होता जा रहा था । ये कैसी परिस्थिति थी , कि वो अपने पत्नी के साथ रह सकते थे , उसे छू सकते थे , मगर उसके योनि में अपने लिंग का प्रवेश नहीं कर सकते थे । प्राची आंखे मूंदे परी हुई थी , उसका चेहरा देख के भी कोई भी बता सकता था कि उसका चेहरा शांत जरूर है । मगर उसके दिल में एक उफान मचा है । काम की लालसा उसके चेहरे पे साफ झलक रही थी , पापा के हाथ जैसे जैसे उसके बदन पे तेल से तर फिसल रहे थे , वैसे वैसे उसकी मुख पे एक्सप्रेशन ओर भावनाओं का अलग अलग रंग दिख रहा था ।

पापा लगभग अगले 15 मीन प्राची की मालिश करते रहे ,फिर तेल का डब्बा अलग रख के ,प्राची के बगल में ही लेट गये ।

पापा : बेटी !

प्राची जो आधी नींद में जा चुकी थी , पापा के आवाज सुनते ही पूरा जाग गई : जी पापा।

पापा: बेटी , कही मैने तुम्हे प्रेग्नेंट कर के गलती तो नहीं कर दी ? तू अभी मात्र 19 साल की है , और मेरी हवस की प्यास बुझाने के लिए तुझे कितना कुछ करना पर है। 19 साल की नन्ही सी जान होने के बाद भी , मुझ जैसे 40 साल के आदमी का तगड़ा बमपिलाट लन्ड के नीचे तड़पते हुए पूरी रात मुझसे चुदावाना । बस मेरी खुशी के लिए ! तेरा इतना दर्द सहना । और अब ये , 19 साल के उमर में अपने पापा की बच्चे को पालना । ये सब कितना जल्दी हो गया । शायद मुझे शादी के लिए मानना ही नहीं चाहिए था ।

प्राची : पापा , आप ऐसा क्यों सोचते है , मै आपकी बेटी थी , भले ही मेरी उमर कम है मगर अब मैं आपकी पत्नी हूं। मुझे आपसे प्यार है पापा, ओर आपके बच्चे को अपने कोख में पलने में मुझे कोई भी शिकायत नहीं है । हवस तो मेरी भी अपने पूरा किया है पापा। आपके जैसे मर्द शायद ही किसी स्त्री को मिलता है जो ५-६ राउंड तक जाता है , मै तो उसे एंजॉय करती थी पापा। अब आपके बच्चे को पालूंगी तो मुझे खुशी ही होगा । अपने कोई गलती नहीं की है पापा। मै आपको पति बना के बहुत भाग्यशाली महसूस करती हु ।



अगला अपडेट जल्दी ही.....
रोमांचक.....अब दादी ने प्रज्ञा का talent पहचान लिया है, बस उसे इसके बारे में पापा को अवगत कराना है
 
  • Love
Reactions: sexsarkar

sexsarkar

Member
384
1,335
124
इस कहानी को एक अलग आयाम भी दिया जा सकता है। यदि प्राची को पुत्र होता है, तो वह भी उसी विकृत पारिवारिक मानसिकता का शिकार बनकर बड़ा होता है और इस कुप्रथा (Incest'GRAST') को आगे बढ़ाने का माध्यम बनता है। इस प्रकार वह अनजाने में अपने ही वंश की भयावह परंपरा को निभाता है!
अपने विचार देने के लिए धन्यवाद मित्र। इसपे सोचा जा सकता है।
 
  • Love
Reactions: rajeev13
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

sexsarkar

Member
384
1,335
124
रोमांचक.....अब दादी ने प्रज्ञा का talent पहचान लिया है, बस उसे इसके बारे में पापा को अवगत कराना है
Delta101 बीतते समय के साथ प्रज्ञा और पापा का मिलन निश्चित ही होगा। धन्यवाद।
 

sexsarkar

Member
384
1,335
124
Update: 56 (संयम का बांध टूटा: भाग-२)

पापा:
सच में बेटी , तुझे ये नहीं लगता ना कि मैने तेरे साथ कोई गलत काम किया है , तुझे प्रेग्नेंट कर के ।

प्राची : बिल्कुल नहीं पापा। मुझे ऐसा कुछ नहीं लग रहा । मुझे तो आपके दिए हुए , ये मेरे कोख में आपके प्यार की निशानी जैसा लग रहा है।

पापा का दिल प्रज्ञा ने इन मैच्योर बातों से जीत लिया था । पापा ने प्रज्ञा को अपने बांहो में लपेट लिया और सर पे एक हल्की सी चुम्बन कर दिया । प्राची भी पापा के आलिंगन पा के पिघल सी गई । पापा और प्राची एक दूसरे से ऐसे ही गले लग के , आपस में बदन से बदन चिपकाये परे रहे । मगर ये आलिंगन उन दोनों को सुकून से ज़्यादा उनके अंदर की कामाग्नि को भड़कता जा रहा था। दोनों ने ही अंतिम मिलन लगभग १ महीना पहले किया था , और दोनों प्यासे थे । पापा की तो प्राची एक तरह से हर रात की जरूरत ही बन चुकी थी। अब ये दूरी उनसे बर्दाश्त नहीं हो पा रही थी । पापा को प्राची के बदन का छुअन मात्र से ही लिंग में गर्मी आने लगी थी । प्राची को भी पापा का मोटा लौरा जगता हुआ प्रतीत हो गया था और उसे महसूस हो गया था । वो इस बात से भी अनजान नहीं थी कि पापा कितने सेक्स को चाहने वाले इंसान है। पापा की तड़प का अंदेशा प्राची को ही गया था ।

उधर प्राची को भी , उसके योनि को आग तड़पाए जा रही थी । उसकी हालत तो ये हो गई थी कि वो किसी दूसरे इंसान के हाथ जांघो पे रगड़ लगते ही चु जाती थी, भले ही उसकी योनि पे छूअन हुआ भी ना हो। ऐसे ही वो प्रज्ञा के मालिश करते समय चू गई थी।

कुल मिला के आग दिनों तरफ जबरदस्त लगी हुई थी। पापा का लौड़ा बिकराल रूप ले चुका था और उनके पैजामे में एक नुकीला तब्बू सा बना गया था । वो तब्बू, प्राची के पेट पे सट रहा था , जिसे प्राची की आग भड़कती जा रही थी । पापा बिना कुछ बोले , आंखों को बंद किए हुए प्राची को आलिंगन में ले के लेते हुए थे । प्राची भी पापा की ओर देखना नहीं जाह रही थी । अगर उसकी आंखें अभी पापा से मिल जाती तो उसे अपने आप को रोक पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता । पापा का हाथ प्राची के नंगे पीठ पे हल्का हल्का हरकत कर रहा था और पापा प्राची का पीट सहलाते जा रहे थे ।

पापा जानते थे कि प्राची की अभी वो चोद नहीं सकते , वो बेचारी प्रेग्नेंट है और डॉक्टर ओर माँ दोनों ने ही उनको मना कर रखा है , कि प्राची के साथ किसी रूप का(धीरे या तेज़) चुदाई से । हालांकि डॉक्टर सुषमा ने ये जरूर कहा था कि अगर संयम बना के धीरे धीरे शॉर्ट लगा के चोदना चाहे तो पापा प्राची को २महीने तक चोद सकते है पर उसके बाद नहीं। पर ये तो दादी ने ही एकदम करे नियम बना दिए थे । अब एक स्त्री ही तो स्त्री की समस्याएं जान पाएगी । दादी को पता था कि कम उमर में प्राची का यूँ माँ बन जाना और 9 महीने के सफ़र के बाद बच्चे को जन्म देना आसान बात नहीं है ।

खैर अभी पापा और प्राची के बेडरूम का माहौल ही कुछ अलग सा था । पापा ने अपने आप को पूरा कंट्रोल करने की कोशिश कर रखी थी , मगर काम वासना ऐसी चीज है कि जिसको आप जितना दबाते है , वो इक्छा उतना ही तीव्र होता जाता है । पापा और प्राची के साथ भी यही हो रहा था । दोनों धर्म संकट में परे थे । चिंगारी बढ़ती ही जा रही थी , और उस शांत अंधेरे बंद कमरे में किसी भी वक़्त आग लगने की संभावना थी । उस कमरे में खिड़की से छन के चाँद की लाली आ रही थी और वो कमरा चांदनी रौशनी से हल्का रोशन हो गया था । प्राची के बदन भी नंगा था क्योंकि वो पापा से मालिश कर रही थी , वही पापा का बदन पे बस एक पैजामा ही था । ऊपर का बदन उनका भी खुला हुआ था और प्राची के बदन से चिपका हुआ था । प्राची की चूची पापा के सीने में धस सी गई थी । कामाग्नि के कारण , चूची भी टाइट हो गई थी और प्राची के चूचक तन के खड़े हो चुके थे । माहौल पूरा मादकता से भर चुका था पर विडंबना यही कि आग बुझाने का पानी निकालना उन दोनों को निषेध था । इस आग को बुझाने का तो एक ही उपाय था ,की पापा अपनी पानी के पाइप का नोजल, प्राची के जलती छेद में घुसाए और पानी का फ़व्वारा उस छेद में मारा जाए । पापा का लौड़ा अब इतना कड़क हो चुका था कि उन्हें हल्का सा दर्द महसूस हो रहा था । पापा का सुपारा फुल के किसी आलू के तरह गोल हो गया था ।

पापा से अब रहा नहीं जा रहा था । प्राची को ये महसूस होता जा रहा था । उधर उसका भी हाल खराब था । पापा का यूँ खड़ा ही जाना उसके दिल के अरमान भी भरका रहे थे । वो क्या करे ? उसके दिल में एक द्वंद्व जैसा चल रहा था । क्या वो पापा के साथ आज रात सारे नियम भूल के ,एक बार ,बस एक बार मिलन कर ले , अच्छे से संभोग कर ले ? या डॉक्टर ओर दादी की बात का मान रखे ? क्या करे वो इस हवस के प्यास का ? कैसी हालात हो गई है उसकी ? पति बगल में सेक्स के लिए तड़प रहा है और वो अपना चुत अपने पति की लिंग सेवा के लिए नहीं परोस पा रही।

पापा को अब दर्द होता जा रहा था । इतना जोश आ गया था उनके लिंग में की वो सह नहीं पा रहे थे

उन्होंने प्राची से पूछ ही लिया: अरे मेरी रानी , देखों ना , तुझे गले लगाने से ये क्या हो गया है इसे । इतना कड़ा हो गया है कि मुझे अब दर्द होने लगा है बेटी । मै क्या करूं मुझे समझ नहीं आ रहा है ?

पापा की इस लाचारी को देख के प्राची का दिल भी पिघल सा गया । उसका पति तड़प रहा है और वो अभागन अपने पति के लिंग की सेवा कर के उस को राहत भी नहीं दे पा रही है ।

प्राची : पापा ,इतना दुख रहा है क्या ? आप तो जानते है , अभी तो मैं किसी प्रकार से चाह के भी आपको संतुष्ट नहीं कर पाऊंगी , भले उसे चूस के थोड़ी राहत जरूर दे सकती हूं पापा। मुझे माफ करियेगा।

पापा : हां बेटी , मै भी अभी तुम्हारे अंदर घुसने का सोच भी नहीं सकता । मगर ये दर्द है कि क्या बोलूं , ऐसा लग रहा है कि मेरी सारी लिंग की नसे फटे जा रही है। शायद मुझे तेरे बदन में इतना सट के नहीं सोना चाहिए । इसी कारण से मेरा अंदर ये लावा फूट पर है ।

पापा ने प्राची को अपने आलिंगन से आजाद के दिया और अपना पजामा नीचे कर के अपने लिंग को थोड़ा सुकून देने के लिए अपने मुठी में भर लिया ।

IMG 20260702 084505


पापा की बिरह में ये हालत प्राची से देखी नहीं जा रही थी ।

प्राची : पापा, मुझे माफ कर दीजिए । मेरी भी हालत कुछ ऐसी ही है पापा , पता है , एक दिन तो मै प्रज्ञा के सामने ही अपने कामाग्नि पे काबू नहीं कर पाई।

पापा: मतलब बेटी ?


प्राची : अरे पापा, एक दिन प्रज्ञा जब मेरी मालिश कर रही थी , तो बिना योनि में कुछ गए और बिना योनि रगड़े ही मै हिचकोले खा के उसके सामने ही झड़ गई थी । उसके हाथ जब मेरी जांघो को मसल रहे थे तो मुझे इतना जोश आया , ओर आपकी याद इतना ज़ोर से मुझ आई कि मै चू गई पापा। शायद उसने मेरी पैंटी से रिश रहे चुत रस को भी देख लिया होगा । मै तो इतना शर्मिंदा हुई कि मुझे उससे आँख भी मिलने की हिम्मत हुई , इसलिए मैने सोने का नाटक किया , उसके बाद वो चली गई ।

पापा इस बात से चकित हो गए ।

पापा: ओह मेरी रानी , मेरी साली का हाथ इतना नरम है क्या ? जो तुम अपने आप पे काबू नहीं कर पाई ।

प्राची : हां पापा , पता नहीं ऐसा गलती मुझ से कैसे हो गया । उसमें प्रज्ञा की कोई गलती नहीं है । मगर उसका हाथ ने ही तो सारा शरारत किया था मेरी जांघों पे ।

इन बातो का असर उल्टा और पापा के जोश को भड़का दिया था । वो इस जोस में एक गलती कर बैठे।

पापा : सच में क्या ? मेरी साली का हाथ इतना कमाल का है क्या ? काश उसका हाथ अभी मेरे लिंग की मालिश कर देता, तो सारा दर्द , गाढ़ा सफेद पानी बन के बह जाता ।

प्राची को पापा की ये बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी : पापा , ये आप क्या कह रहे है ? प्रज्ञा हमारी छोटी बेटी है । उसके लिए आप ऐसे बोल रहे है? साली जरूर लगती है रिश्ते में आपकी ,मगर आप ये क्यों भूल गए कि वो आपकी बेटी है। मै तो आपसे ब्याह कर के पत्नी बनी ,तब तो हमारा रिश्ता ऐसा बन पे , मगर आप उसके लिए ऐसा बोल रहे है , जब वो आपकी बेटी के रिश्ते में है?

पापा को तुरंत अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें थोड़ी शर्मिंदगी भी हुई, कि प्राची उनके, प्रज्ञा को ले के, किस तरह के विचार है, उसे भाप गई और उसे बिलकुल भी ये बात अच्छी नहीं लगी । मुझे प्रज्ञा के बारे में ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी । मगर इस मादक जोश से भरे माहौल में प्राची ने ही तो प्रज्ञा की बात छेड़ी थी। वो प्रज्ञा के बारे में बात करे तो ठीक मै करूं तो बुरा बन गया । पापा को थोड़ा गुस्सा भी आया । मगर गलती तो हो गई थी । उनके बदलते विचार , उनका ध्यान वासना से अब थोड़ा भटक गया ,मगर ये उनके दर्द के लिए कारगर साबित हुआ और पापा का लिंग थोड़ा ढीला हुआ ।

पापा: अरे मेरा ये मतलब नहीं था बाबू। वो तो सच में मेरी बेटी ही है । और मैं मानता भी ही उसे अपनी बेटी ही । इसी लिए तो मैं साली वाले जायदा मजाक भी उसके साथ नहीं करता। ओर तुम तो जानती हो न मुझे अच्छे से , मै तुमसे ही प्यार करता हु। क्या आज तक तुमने मुझे इस नज़र से प्रज्ञा को देखते हुए भी देखा है? वो तो तुमने ही प्रज्ञा का बात बीच में लाया , और मादकता से भरे दिमाग से मेरे मुंह से ऐसे शब्द निकल गए उसके लिए । मुझे माफ कर दो ।

पापा को जोश अभी थोड़ा ठंडा होने हो लगा था। मगर प्राची का जोश, अपने पापा के मुंह से प्यार का इजहार सुन के दुगना हो गया ।

प्राची : मुझे लगा पापा, की आप प्रज्ञा के बारे में ऐसा तो नहीं बोल सकते । मगर मुझे विश्वास है पापा की आप मेरे से ही प्यार करते है ।

इतना कहते ही प्राची ज़बरदस चुंबन पापा के होंठों पे चस्पा कर दी । पापा का ठंडा परता जोश एकदम से फिर से भड़क गया । प्राची फिर उनके आलिंगन में आ गई थी । और पापा ने भी इसबार अपने आप को रोकने का कोई कोशिश नहीं किया ।वो प्राची को होंठो को चूसने लगे । उन दोनों के चुम्बन के आवाज से कमरा गुलज़ार होने लगा । ऊम्म्ह... चुप्प...ऊम्म्ह...कि आवाज , एक पति पत्नी के बीच का मिलन का आदेश दे रहा था। और इस बार पहल भी प्राची ने की थी । एक मादा जब अपने जोश पे काबू नहीं कर पाती तो उसे जो चाहिए होता है वो ले ही लेती है । जाहे आप उसपे कितनी भी पाबंदी लगा दो । प्राची आज उसी विचार में थी । वो भूल गई कि डॉक्टर ने क्या कहा था , दादी ने क्या कहा था । अब उसकी काम सहन क्षमता खत्म हो चुकी थी । आज वो अपने पापा के लिए तरप उठी थी ।

पापा भी अब उन नियमों को भूल गए थे और प्राची को चूसते और चाटते जा रहे थे । लग रहा था आज उनके संयम का बांध टूटने वाला था।

प्राची पापा से अब अलग नहीं होना चाहती थी । लगभग महीने दिन से वो पापा से अलग रह रह के परेशान हो गई थी और अब ओर नहीं सह सकती थी । पापा ने अचानक ही प्राची के चूची को अपने हाथों से भींचना शुरू कर दिया और उसे मसलना और चाटना भी चालू कर दिया । क्या दृश्य था ये । जोश में होश खाना इसी को कहते है । प्राची का पापा पूरा इस्तेमाल कर रहे थे । मगर थोड़ा ये भी देख रहे ये की प्राची के पेट या गर्व पे वो ज़्यादा जोर न आजमाये या उसपे ज्यादा भार ना दे । पापा को तो इसका अनुभव था । प्राची के जनम के समय तो वो डरे हुए थे और प्राची के मां के साथ पूरा संयम बरता था । मगर जब प्रज्ञा, प्राची के मम्मी के पेट में थी , तब उन्होंने कितनी बार ही प्राची के मां को चोदा था । वो जानते थे कि एक चुदाई ,नियम को तोड़ के , कोई हानि नहीं करेगा ।

प्राची और पापा एक उसे में समा जाना चाहते थे । इतना जोश की कमरे की गर्मी बढ़ चुकी थी । प्राची के बदन पसीने से तर हो गया था । ओर चांद की रोशनी से चमकने लग गया था । पापा भी पसीने से लथ पथ होने लगे थे। उनके अंदर आज आग ही इतनी तेज़ भड़की हुई थी ।

पापा प्राची को ऊपर से नीचे तक चूसते - चाटते जा रहे थे । प्राची का नग्न शरीर अपने पापा की सेवा में बिछ चुका था ।

पापा ने प्राची की चूत चूसाई की और फिर पोजीशन बना के अपना लिंग प्राची के योनि द्वार पे टिका दिया । प्राची अपने जोश से भरे पापा को बड़े गौर से प्यार भरी नजरों से देखी जा रही थी । मगर चुप थी । जैसे की सवाल पूछ रही हो ।

पापा ने लिंग अंदर डालने से पहले प्राची के तरफ देखा , और प्राची का यूँ एक टक से उनको देखना , देख के वो भाप गए कि प्राची के मन में कुछ सवाल है ।

पापा : बेटी , क्या हुआ ? ठीक नहीं लग रहा ?

प्राची : नहीं पापा , मै बस आपको देख रही हूँ।

पापा: हाँ, मगर ये नज़र मुझसे कुछ सवाल के जवाब चाह रहे है , है ना? देख बेटी तू कहती है तो मैं नहीं करता हूं।

प्राची : नहीं पापा। आज मत रुकिए , मुझे तो बस आप पे इतना प्यार आ रहा है आज , की आप का यूँ,नियम तोड़ के भी मुझे प्यार करना, मेरे मन को बहुत भा रहा है पापा। आज मुझे आपकी बहुत जरूरत है पापा। मै बहुत प्यासी हूं।

पापा: मैं भी तो कब से प्यासा ही हु बेटी । मगर क्या ये करना ठीक होगा ? तू प्रेग्नेंट है बाबू, और दादी और डॉक्टर ने मना किया है ना चुदाई से ? ये मै कैसे करूं मुझे समझ नहीं आ रहा है ? मन कर रहा है ,तुम्हे खूब प्यार करूं , तेरी अच्छी चुदाई करूँ , मगर दिमाग कह रहा कि मत कर ऐसा ।

पापा धर्म संकट में पर गए , और पापा ने जो प्राची के चुत चुदाई के लिए पोजीशन बनाई थी , वहाँ से वो हट गए ।

प्राची ने पापा को कस के अपने बांहो में भर लिया : नहीं पापा, मुझे आज मत तड़पाए । मै सह नहीं पाऊंगी , मै चाहती हु आज आप मेरी चुदाई कीजिये ना , प्लीज पापा, मै मर जाऊंगी नहीं तो ।

पापा: पर बेटी , डॉक्टर ने हमे परहेज करने हो बोला था ना?

प्राची : पर उन्होंने तो ये भी कहा था कि २ महीने तक तो के सकते है ना ये आराम आराम से उसके बाद ही तो पेट भी निकलने की बात बताई थी उन्होंने ।

प्राची पापा को धर्म संकट से निकलने की पूरी कोशिश कर रही थी ।

प्राची : प्लीज, प्लीज़ ,प्लीज़ ना पापा, आज करिये ना । मुझे रहा नहीं जाएगा आज ।

प्राची पापा से चुदाई की भीख माँग थी थी । बहुत ज़्यादा तरप रही थी वो एक संभोग के लिए । कहते है स्त्री का जोश मर्दो से कही ज्यादा प्रबल होता है । वही प्राची का भी हाल हो गया था । बेटी की ऐसे , चुदाई की गुहार लगाने के बाद , पापा कैसे न चोदते उसे ? कैसे वो अपनी फुल से प्यारी बेटी को तड़पते छोड़ देते ? यहाँ तक ऋषि मुनि भी , किसी स्त्री की गुहार पे अपना ब्रह्मचर्य तोड़ देते है , फिर पापा तो बस एक मामूली पुरुष है , जो अपनी बेटी को प्यास और तड़पता नहीं छोड़ सकता।

पापा ने भी वही किया : ठीक है मेरी बच्ची, आ तुझे आज जन्नत का सैर करा दूं। वादा करता हु कि ,तुझे आज मै, एकदम आराम आराम से चोदूंगा।

प्राची ने अपने टांगें पापा के सामने फैला दी : ठीक है पापा, आइये ना , घुसा दीजिए , अपना मोटा लौरा , कब से तरफ रही ही मै।

उसका चुत एकदम पनियाया हुआ था । योनि द्वार से चिपचिपा पानी बह रहा था । चूचे तन तन के एकदम कड़े और गोल गोल हो गए थे , चूची का गुड़ी भी एकदम कड़क हो गया था । पापा अब इंतेज़ार नहीं करना चाहते थे । उनका सब्र का बांध अब टूट चुका था । उन्होंने देर ना करते हुए ,प्राची के चुत पे पोजीशन बनाई और एक झटके में आधा लिंग चुत में उतार दिया । उनके योनि में प्रवेश करते ही , वो गिली योनि की , फच्च..... की आवाज कमरे में गूंज गई । प्राची को एक टीस सी उठी और उसके मुंह से एक आह..... की कराहती हुई आवाज भी कमरे को अशांत कर गई।

पापा ने झुक के प्राची की एक चूची को अपने मुंह में भर के चूसने लगे और दूसरे चूची को अपने हाथों से मसलने लगे । प्राची नीचे पड़ी छटपटा रही थी । पापा ने फिर से एक धीमा सा धक्का मारा और पूरा लन्ड अंदर । पापा ने प्राची की माँ को प्रेग्नेंट होने के बाद भी चुदाई की थी , तो इस कारण से उन्हें एक प्रेग्नेंट लड़की को चोदने का अनुभव था । वो जानते थे कि प्राची की चुदाई वो कैसा करेंगे कि प्राची कोर्फोटेबल रहेगी ।

प्राची का शरीर थोड़ा ढीला पर गया , पापा का मोटा लौरा उसके अंदर समाते ही । उसके योनि के दीवाल पे पापा की लन्ड के रगड़ से उसे थोड़ी राहत तो मिली थी । उसका योनि तो ऐसा महसूस हो रहा था , जैसे जल रहा हो , एकदम गरम , और गर्मी के साथ नमी भी पर्याप्त। इस नरम , गरम और गीलापन से पापा का लौरा मोटा होता हुआ भी अपने बेटी का योनि अच्छे से भेद पा रहा था ।

दोनों की चुदाई चालू हो गई । प्राची के मुंह से आह आह... लगातार निकलता जा रहा था। प्रैग्नेंट होने के बाद उसकी ये पहली चुदाई थी । और पापा का हर स्ट्रोक उसे स्वर्ग सा मजा दे रहा था । चुदाई लगभग ३० मिनट तक चलती ही जा रही थी । पापा आज इतने ज्यादा जोश में थे कि झड़ ही नहीं रहे थे । मगर प्राची खुल के अपने अरमान पूरी कर रही थी , और वो ३ बार , हिचकोले खाते हुए झर चुकी थी ।

पापा ने चुदाई जारी रखी हुई थी । आज कोई जल्दी नहीं थी , कोई रगड़ के चोदने की बात नहीं थी , एकदम मध्यम गति से , आराम आराम से , बिना पेट पे बल दिये , पापा प्राची का योनि भोग रहे थे । ऐसा लग रहा था , ये चुदाई आज उन दोनों के लिए बहुत ही आवश्यक था ।

प्राची की धीमी धीमी सिसकारी कमरे में लगातार गूंजे जा रही थी । दोनों हाफ रहे थे । पापा की सांसों की धुन प्राची के सांसों की सरगम से मिल रही थी। माहौल बड़ा ही मादक था । पापा को आज कोई जल्दी नहीं थी । अगले 15 मिनट तक पापा प्राची की ऐसी ही चुदाई करते रहे । उनको अब लगने लगा था कि उनका चरम उद्वेग आने ही वाला है ।

पापा आज प्राची के योनि में अपना पानी नहीं देने वाले थे । उन्होंने एकदम से लिंग को योनि से बाहर निकल लिया और झटके से प्राची के मुंह के सामने आ के बैठ गए । प्राची को जैसे एकदम पता हो कि पापा क्या कहने वाले है , उसने समय नहीं गंवाते हुए इनका लौड़ा अपने मुंह में भर लिया और उसकी चमड़ी हो अपने होंठों से आगे पीछे करने लगी । वो अपना जीभ पापा के बड़े सुपारे पे भी फिरा रही थी । पापा से अब रहा नहीं गया और सारा माल , प्राची के मुंह में ही छोड़ दिया । प्राची ने पापा के लन्ड का सारा पानी, एक घुट में घटक गई ।

आज प्रेगनेंट होने के बाद ये प्राची की पहली चुदाई थी । और वो बहुत ही मजेदार था । पापा चरम सुख पाते ही निढ़ाल हो के प्राची के बगल में बेड पे पड़ गए । प्राची भी पापा के सीने पे अपना सर रख के उनके दिल की तेज़ धड़कन सुनने लगी । प्राची को आज पापा पे बहुत प्यार आ था थे । वो पापा को अपना पति बना के बहुत खुश थी । आज सारे नियम कानून तोड़ के जो उसने पापा की चुदाई की थी । उसे उससे बहुत खुशी हो रही थी ।

दोनों एकदूसरे से लिपटे हुए , थोड़ी देर में ही सो गए । और तब जा के कमरे में आया तूफान अब शांत हो गया ।
 
Last edited:
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories
Top