Update: 55 (संयम का बांध टूटा: भाग-1)
दादी अपने पोती की कलाबाजियां खाती नंगी बदन को देख के स्तब्ध रह गई। उसके योनि से जो छलछला के काम जल निकला , दादी उसे देख समझ गई थी कि प्रज्ञा आम लड़कियों जैसी नहीं ,वो बिलकुल अलग लड़की है और जो भी पुरूष एक बार प्रज्ञा के कला से बाकीफ़ हो गया , उसे तो फिर किसी ओर महिला संग संभोग करने का मन ही नहीं करेगा । वो बस प्रज्ञा की ही खोजेगा। प्रज्ञा झरने के एकदम निवस्त्र और निढाल अपने दादी के गोद में सर रखे परी हुई थी । दादी ने आज उसे एक ऐसा ज्ञान दिया था और उसे उस ज्ञान का ऐसा पहला अनुभव मिला था कि उसका रोम रोम तृप्त हो गया था । वो 18 वर्ष की नवयौवना का पहला चरम सुख प्राप्ति था ये। दादी भी इस बात से फुले नहीं समा रही थी कि उसकी पोती को वो आज जीवन का एक नया पहलू समझा चुकी थी । स्त्री के लिए इन कलाओं में पारंगत होना बहुत ही जरूरी होता है , ताकि वो अपने खुशी का ख्याल खुद रख सके , क्योंकि बहुत सी स्त्री ऐसी है, जिन्हें मर्द अच्छा नहीं मिलता या जल्दी झड़ जाता है , और तो जीवन भर भी चरम सुख महसूस ही नहीं कर पाती ।
दादी अपने पोती के सर पे हाथ फेरते हुए : कैसा लगा मेरी बच्ची? कैसा महसूस हुआ तुझे तेरा पहला चरम सुख ?
प्रज्ञा अपने निढ़ाल परे शरीर से थोड़ा बल दिखाते हुए बोली : दादी , मैने आज से पहले ऐसा कभी नहीं फिल किया था । मैं तो अपना सुध बुद्ध भी खो गई थी दादी । अपने मेरे योनि पे इस तरह से उंगलियां फिराई की मै तो एक अलग ही दुनिया में पहुंच गई थी दादी । आपके हाथों में जादू तो नहीं ?
दादी : कोई जादू नहीं मेरी पोती , कोई जादू नहीं। ये तो एक स्त्री की अपनी क्षमता है कि वो चरम सुख पा सकती है और स्वर्ग सा अनुभव कर सकती है।
प्रज्ञा : हाँ दादी , मै तो स्वर्ग में ही पहुंच गई थी । पर दादी वो चरम सुख मिलने के समय जो मेरी पेशाब निकल गई ना, उसके लिए मै शर्मिंदा हु । देखिये ना आपका सारा बिस्तर, चादर और यह तक की आपके कपड़ों पे भी मेरा पेशाब गिर गया है। मुझे माफ के दीजिए दादी । मुझे अपने आप पे काबू ही नहीं रहा । मैं बस उस आनंद भरे पल में बह सी गई । मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मैने पेशाब के दिया है।
दादी ,प्राची के नादानी पे हंसती हुई : हाहा...अरे ये किसने कहा कि ये तेरी मूत है ? ये तो काम जल है बेटी , जो कि १००० लड़कियों में से किसी एक के पास ,सेक्स करने के दौरान निकलता है।
प्रज्ञा : मतलब दादी , मै समझी नहीं ।
दादी : अरे वो एक बहुत ही अदभुत चीज़ है , जिसका कला हर महिला के पास नहीं होता , उसे अंग्रेजी में "squirting" कहा जाता है , यानी महिला वीर्यस्खलन।
प्रज्ञा : पर दादी ये सबको क्यों नहीं होता ?
दादी : देख बेटी चरम सुख के समय , सब स्त्री को उनके योनि के अंदर ही पानी निकलता है । मगर बहुत कम स्त्री का ही पानी छलछला के बाहर निकलता है , और तू उनमें से से है ।
दोनों दादी और पोती ऐसे ही बाते करते रहीं। प्रज्ञा थक के चूर हो चुकी थी , उसे पहली बार चरम सुख जो मिला था । वो अपने कमरे में जा के दोपहर के समय थोड़ा सो गई। उधर दादी अपने बिस्तर को साफ सुथरा कर के आराम करने लगी । वही प्राची भी अपने कमरे में सोई हुई थी । दादी अपने दोनों पोतियों का मार्ग दर्शन अच्छे से कर रही थी ।
ऐसा ही दिन चलता रहा , प्रज्ञा अपने दीदी , प्राची का बहुत ख्याल रख रही थी । प्राची की अच्छी खातिरदारी और देखभाल के कारण उसका वजन भी बढ़ने लगा था । आज उसे अपने पापा से मिलन किए हुए 15 दिन बीत चुके थे , यानी उसे अपने प्रेग्नेंट होने का खबर ठीक 15 दिन पहले ही मिला था । पापा ने इन 15 दिनों में प्राची की पूरी सुख सुविधाओं का ध्यान रखना शुरू कर दिया था । और करते भी क्यों ना, आखिर उनकी अपनी बेटी थी , और पहली बार प्रेग्नेंट हुई थी , और वो उस होने वाले बच्चे का पिता और नाना दोनों होने वाले थे । अब प्राची का ध्यान रखना उनके लिए एकदम अनिवार्य कामों के लिस्ट में शामिल हो गया था , सुबह शाम वो प्राची को मालिश करते , उसे हंसाते और खुश रखने का कोशिश करते । ये सब कभी उन्होंने , प्राची के मम्मी के साथ भी किया था और उस समय प्राची उनकी बेटी बन के दुनिया में आई थी । आज ये क्या विधि का विधान था कि उसी अपनी बेटी को उन्होंने ही फिर गर्भवती कर दिया था और उनकी अपनी खुद की बेटी, उनका संतान को जन्म देने वाली थी ।
इन 15 दिनों में पापा की हवस और प्यास बढ़ती ही जा रही थी । उन्होंने तो अब हनीमून का प्लान वो कैंसिल कर दिया था । अगर वो कैंसिल नहीं होगा तो इस समय वो मनाली के किसी खूबसूरत रिज़ॉर्ट में अपनी बेटी को जी भर के चोद रहे होते ,पहाड़ों और वादियों के बीच। खैर अब उनको सब्र रखना होगा । वो भी 9 महीनों तक , और उसके बाद भी शायद प्राची को चोदने के लिए उन्हें 1-2 महीने का इंतज़ार करना ही पड़ता , क्योंकि एक महिला बच्चे को जन्म देने के बाद कुछ दिनों तक सेक्स तो नहीं ही करना चाहेंगी । पापा को अपने बेटी को प्रेग्नेंट कर देना अब भारी पर रहा था । हालांकि वो अपनी प्यास प्राची के मुंह में अपना लौड़ा दे के , चुसवाँ के , पूरा कर लेते थे कभी कभी । पर उनको प्राची के साथ , रात रात भर चुदाई करते हुए रात बिता देना ,बहुत याद आता था । वो हर रात 5-6 राउंड की बहुत ही जबर्दस्त चुदाई जो वो अपने बेटी के साथ करते थे , वो उस चुदाई को बहुत ज्यादा मिस कर रहे थे । उधर प्रज्ञा भी अपने दादी के हाथों से चरम सुख का शिक्षा लेने के बाद अब खुद कभी कभी अपने गुप्तांग से खेलने लगी थी । एकांत पा के वो अपने कमरे में ही कभी कभी अपने नारीत्व का आनंद लेने लगी थी ।
खैर समय बीतता गया । एक रात पापा प्राची के साथ अपने कमरे में बैठ उसकी पैरों में तेल मालिस कर रहे थे। उन्हें प्राची का बदन छूते हुए उसका मालिश करना बहुत मज़ा दे रहा था । उनका मन चंचल होता जा रहा था । ये कैसी परिस्थिति थी , कि वो अपने पत्नी के साथ रह सकते थे , उसे छू सकते थे , मगर उसके योनि में अपने लिंग का प्रवेश नहीं कर सकते थे । प्राची आंखे मूंदे परी हुई थी , उसका चेहरा देख के भी कोई भी बता सकता था कि उसका चेहरा शांत जरूर है । मगर उसके दिल में एक उफान मचा है । काम की लालसा उसके चेहरे पे साफ झलक रही थी , पापा के हाथ जैसे जैसे उसके बदन पे तेल से तर फिसल रहे थे , वैसे वैसे उसकी मुख पे एक्सप्रेशन ओर भावनाओं का अलग अलग रंग दिख रहा था ।
पापा लगभग अगले 15 मीन प्राची की मालिश करते रहे ,फिर तेल का डब्बा अलग रख के ,प्राची के बगल में ही लेट गये ।
पापा : बेटी !
प्राची जो आधी नींद में जा चुकी थी , पापा के आवाज सुनते ही पूरा जाग गई : जी पापा।
पापा: बेटी , कही मैने तुम्हे प्रेग्नेंट कर के गलती तो नहीं कर दी ? तू अभी मात्र 19 साल की है , और मेरी हवस की प्यास बुझाने के लिए तुझे कितना कुछ करना पर है। 19 साल की नन्ही सी जान होने के बाद भी , मुझ जैसे 40 साल के आदमी का तगड़ा बमपिलाट लन्ड के नीचे तड़पते हुए पूरी रात मुझसे चुदावाना । बस मेरी खुशी के लिए ! तेरा इतना दर्द सहना । और अब ये , 19 साल के उमर में अपने पापा की बच्चे को पालना । ये सब कितना जल्दी हो गया । शायद मुझे शादी के लिए मानना ही नहीं चाहिए था ।
प्राची : पापा , आप ऐसा क्यों सोचते है , मै आपकी बेटी थी , भले ही मेरी उमर कम है मगर अब मैं आपकी पत्नी हूं। मुझे आपसे प्यार है पापा, ओर आपके बच्चे को अपने कोख में पलने में मुझे कोई भी शिकायत नहीं है । हवस तो मेरी भी अपने पूरा किया है पापा। आपके जैसे मर्द शायद ही किसी स्त्री को मिलता है जो ५-६ राउंड तक जाता है , मै तो उसे एंजॉय करती थी पापा। अब आपके बच्चे को पालूंगी तो मुझे खुशी ही होगा । अपने कोई गलती नहीं की है पापा। मै आपको पति बना के बहुत भाग्यशाली महसूस करती हु ।
अगला अपडेट जल्दी ही.....