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लेखक महोदय, आपकी कहानी बेहद रोचक और प्रभावी है। लेकिन आपकी कहानी पर मेरा दृष्टिकोण कुछ भिन्न है। हालांकि इस कहानी के हीरो पापा ही है, और हेरोइन प्राची है, लेकिन आज कहानी जिस मोड पर खड़ी है, उससे ऐसा लगता है की दादी इस कहानी की सबसे बड़ी विलयन है। स्पष्ट करती हूँ क्यों,
1. दादी की ही जिद थी की पापा और उनकी बड़ी बेटी प्राची की शादी हो। ये हुई, बहुत बेहतर भी हुआ।
2. दादी की ही जिद थी की प्राची जल्दी से जल्दी अपने पापा के बच्चे की माँ बने। अब दादी तो अनुभवी थी, उन्होंने कितने ही सावन देखें होंगे। क्या उनको जरा भी पता नहीं रहा होगा की प्राची की कोख अभी कमजोर है, वो इतनी कम उम्र मे एक सामान्य स्त्री की तरह माँ नहीं बन सकती। मेरा मानना है की उनको ये बात पता होनी चाहिए थी।
3. हालांकि मैंने पहले भी अपना यही मत दिया था की प्रज्ञा को अपने पापा के साथ हमबिस्तरी नहीं करनी चाहिए, अभी भी मेरा मत यही है। लेकिन फिर भी आपकी इच्छा सर्वोपरि है।
4. अब कहानी के भविष्य की कल्पना करे तो यदि प्रज्ञा अपने पापा के साथ हमबिस्तरी करती है, तो ये प्राची के साथ पूरी तरह बेवफाई होगी। क्योंकि दादी के दबाव मे प्राची जल्दी गर्भवती होना स्वीकार किया, और अपने वो सपने भी पूरे नहीं कर पाई, जो एक नवविवाहित लड़की अपनी शादी के बाद पूरे करती है, और दादी की इच्छा पूरी करने के लिए उसने अपने अरमानों का पूरी तरह गला घोंट दिया।
5. कहानी जिस दिशा मे बढ़ रही है, उस दिशा मे चलती रही और प्रज्ञा और उसके पापा की हमबिस्तरी होती है, और प्रज्ञा भी गर्भवती हो जाती है तो इस कहानी मे पाठकों को सेक्स, अश्लीलता, नंगापन सब कुछ मिलेगा। लेकिन कहानी का जो मर्म है वो पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
6. मान लेते है की प्रज्ञा भी प्राची की तरह घर के बाहर शादी नहीं करती और हो सकता है की वो अपने पापा से ही शादी कर लेती है, और गर्भवती भी हो जाएगी। तो प्राची और प्रज्ञा के पापा अपनी दोनों बेटियों की होने वाली नाजायज संतानों के पापा हो जाएंगे। क्योंकि अभी तक तो प्राची और उसके पापा की शादी को भी सामाजिक मान्यता नहीं है, पता नहीं उसकी होने वाली संतान का क्या होगा। तो प्रज्ञा की वर्तमान स्थति इसी भविष्य के अनुसार तो और ज्यादा गलत होगी।
7. यदि ऐसा हो भी जाता है, और उनके पापा को कुछ हो जाता है तो कहानी का एक बुरा भविष्य ये भी हो सकता है की एक बाप की दो विधवा बेटीया अपनी नाजायज संतानों के साथ रह रही है।
 

sexsarkar

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लेखक महोदय, आपकी कहानी बेहद रोचक और प्रभावी है। लेकिन आपकी कहानी पर मेरा दृष्टिकोण कुछ भिन्न है। हालांकि इस कहानी के हीरो पापा ही है, और हेरोइन प्राची है, लेकिन आज कहानी जिस मोड पर खड़ी है, उससे ऐसा लगता है की दादी इस कहानी की सबसे बड़ी विलयन है। स्पष्ट करती हूँ क्यों,
1. दादी की ही जिद थी की पापा और उनकी बड़ी बेटी प्राची की शादी हो। ये हुई, बहुत बेहतर भी हुआ।
2. दादी की ही जिद थी की प्राची जल्दी से जल्दी अपने पापा के बच्चे की माँ बने। अब दादी तो अनुभवी थी, उन्होंने कितने ही सावन देखें होंगे। क्या उनको जरा भी पता नहीं रहा होगा की प्राची की कोख अभी कमजोर है, वो इतनी कम उम्र मे एक सामान्य स्त्री की तरह माँ नहीं बन सकती। मेरा मानना है की उनको ये बात पता होनी चाहिए थी।
3. हालांकि मैंने पहले भी अपना यही मत दिया था की प्रज्ञा को अपने पापा के साथ हमबिस्तरी नहीं करनी चाहिए, अभी भी मेरा मत यही है। लेकिन फिर भी आपकी इच्छा सर्वोपरि है।
4. अब कहानी के भविष्य की कल्पना करे तो यदि प्रज्ञा अपने पापा के साथ हमबिस्तरी करती है, तो ये प्राची के साथ पूरी तरह बेवफाई होगी। क्योंकि दादी के दबाव मे प्राची जल्दी गर्भवती होना स्वीकार किया, और अपने वो सपने भी पूरे नहीं कर पाई, जो एक नवविवाहित लड़की अपनी शादी के बाद पूरे करती है, और दादी की इच्छा पूरी करने के लिए उसने अपने अरमानों का पूरी तरह गला घोंट दिया।
5. कहानी जिस दिशा मे बढ़ रही है, उस दिशा मे चलती रही और प्रज्ञा और उसके पापा की हमबिस्तरी होती है, और प्रज्ञा भी गर्भवती हो जाती है तो इस कहानी मे पाठकों को सेक्स, अश्लीलता, नंगापन सब कुछ मिलेगा। लेकिन कहानी का जो मर्म है वो पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
6. मान लेते है की प्रज्ञा भी प्राची की तरह घर के बाहर शादी नहीं करती और हो सकता है की वो अपने पापा से ही शादी कर लेती है, और गर्भवती भी हो जाएगी। तो प्राची और प्रज्ञा के पापा अपनी दोनों बेटियों की होने वाली नाजायज संतानों के पापा हो जाएंगे। क्योंकि अभी तक तो प्राची और उसके पापा की शादी को भी सामाजिक मान्यता नहीं है, पता नहीं उसकी होने वाली संतान का क्या होगा। तो प्रज्ञा की वर्तमान स्थति इसी भविष्य के अनुसार तो और ज्यादा गलत होगी।
7. यदि ऐसा हो भी जाता है, और उनके पापा को कुछ हो जाता है तो कहानी का एक बुरा भविष्य ये भी हो सकता है की एक बाप की दो विधवा बेटीया अपनी नाजायज संतानों के साथ रह रही है।
आपने इतना समय निकाल के अपना सुझाव रखा , उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद। आपके संवाद से ये लग रहा है कि कहानी जिस ओर अब अग्रसर है , वो आपको कुछ खास पसंद नहीं आ रहा । दादी के बारे में आपकी राय बिल्कुल ठीक है, उसने अपने बेटे की हवस मिटाने के लिए अपनी पोती को उनके साथ एक तरह से जबर्दस्ती ही बाँध दिया। और आपको सब पता है कि प्राची को क्या क्या झेलना पड़ा, वो सुहागरत के दिन का दर्द और फिर भी 5 राउंड का सेक्स , फिर दादी का यू प्राची को बच्चे के लिए मजबूर करना , फिर प्राची के गर्भवती हो जाना । अब दादी की ही देन है। अपने बेटे के खुशी के लिए प्राची के अरमानों की बलि दादी ने जरूर चढ़ाई , मगर प्राची ने उसी रिश्ते में अपना सुख खोज लिया और पापा के संग ही रम गई है। उनके साथ अब वो भी मजे ले ले कर सेक्स करती है ओर दिल से उन्हें अपना मान लिया है । ये कहानी का पहला भाग था । अब जो प्रज्ञा के साथ पापा का जो रिश्ता बनेगा या नहीं बनेगा । वो दादी के जबरदस्ती करने से या पापा के हवस मिटाने के लिए उनके साथ जबर्दस्ती मिलन कर देने से नहीं बनेगा । इस भाग में मैने प्रज्ञा के मत को प्रधानता देने का सोचा है। जिसमें एक स्त्री ही एक पुरूष की आस रखेगी । आगे कहानी किस ओर जाएगा उसकी ज्यादा जानकारी अभी आपको तो नहीं दे सकता क्योंकि कहानी में बहुत ट्विस्ट आने वाला है । आप ये बात पे निश्चिन्त रहे को प्रज्ञा के एंट्री होने से कहानी ओर ज्यादा रोमांचक होने वाला है । प्राची के संग तो पापा का मिलन हुआ , उसका रिजल्ट भी अब प्राची के पेट में पल रहा है । मगर आगे कहानी की बढ़ाने के लिए हमें एक कैरेक्टर की जरूरत बेशक है। जरा सोचिए , अगर प्रज्ञा और पापा का कुछ चलता है , तो उसे कहानी में आपको बहुत कुछ देखने को मिल जाएगा । प्यार , तकरार, बेबफाई, दिलों का टूटना और बहुत सारे ट्विस्ट । नहीं तो ये कहानी निरस हो जाएगी बहुत से पढ़को के लिए । मै आपसे वादा करता हु कि आने वाले अपडेट्स को पढ़ आप निराश तो बिल्कुल भी नहीं होने वाली ।

बांकी आपका सुझाव वाक़ई बहुत अच्छा था । आपके पॉइंट्स एकदम सटीक थे और कहानी को लेके आपकी उत्सुकता को दर्शाते है। कहानी का इस तरह का विवरण देने के लिए ,फिर से , धन्यवाद।
 

ranjeet123

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बहुत ही मजेदार अपडेट था अगले अपडेट का बहुत ही बेसब्री से इंतजार है
 
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sexsarkar

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Mai bilkul thik hu , mafi chahta hu thora break ke liye , agla update time milte hi dunga. Samay ka abhav hai abhi mere liye jara.

sexsarkar

भाई, क्या आप ठीक हैं? उम्मीद है आपकी सेहत ठीक होगी।
 

sexsarkar

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Update :61 (गलती का एहसास)

प्राची को, दादी के पापा पे लांछन लगाने, के लिए बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था । प्रज्ञा को भी एहसास हो गया था, कि वो नाहक अपने पापा पे शक या गुस्सा कर रही थी । उसका भी ऐसी धारणा तो दादी के शब्दों ने ही बनाई थी । वही आज वो प्राची जो दादी के एक बात पे बिना सोचे पापा से शादी को तैयार हो गई और दादी के कहने के अनुसार प्रेग्नेंट भी होना स्वीकर किया था ,बिना कुछ बोले । आज अपने पापा के सम्मान के लिए उनसे भिड़ने चली थी ।

दादी अपने कमरे में आराम कर रही थी । प्राची ने ताव में दादी से बोला : दादी , आपने पापा से क्या बोला है ?

दादी को प्राची को देख के खुशी हुई : वाह मेरी बच्ची तू ठीक तो है ।

प्राची : मै बिल्कुल ठीक हु दादी ,मगर पापा के बारे ने जो आपने बोला है , उसे सुन के मै ये विश्वास नहीं कर पा रही कि अपने अपने ही बेटे को ऐसा बोल दिया । क्या वो आपको हवसी दरिंदा दिखते है ? क्या आपको अपने बेटे पे थोड़ा भी विश्वास नहीं रहा ?

दादी समझ गई कि प्राची इतना गुस्से से क्यों बात कर रही है । बात उसके पति के सम्मान की थी ।

दादी : अरे इतना गुस्सा मत कर , तेरी तबियत ठीक नहीं , आ बैठ इधर , जरा तेरे तबियत का हाल चाल के लूँ।

प्राची : मेरी तबियत बिल्कुल ठीक है । मुझे आप ये बताइए कि आपने पापा को ऐसी बात बोल भी कैसे दी कि वो घर में किसी महिला को नहीं छोड़ेंगे , यहाँ तक की प्रज्ञा को भी नहीं ? पापा ने आपको कभी गलत नज़र से देखा है क्या ? कभी प्रज्ञा के साथ एक बेटी के अलावा किसी ओर तरह से व्यवहार किया है क्या ? मै तो अब उनकी पत्नी हु , उनका बच्चा अपने कोख में पाल रही हु । मेरे साथ पापा का प्यार भरा पल बिताना आपको ठरक कैसे लग सकता है ?

दादी समझ गई कि मामला संगीन है और प्राची को प्रज्ञा ने सब बता दिया है । दादी ने प्रज्ञा को एक पल के लिए आंखे दिखाई,जैसे दादी प्रज्ञा को बोल रही हो कि , ये तूने क्या किया , प्राची को ये सब क्यों बताया ।

दादी : तो मै ओर क्या कहती बेटे , गुस्सा ने आ के मेरे मुंह से निकल गाया ये सब बात । तेरी क्या हालत हो गई थी , उस रात । अगर तेरा पापा , उस दिन अपने ठरक पे काबू रख पाता तो तुझे इतना दर्द न सहना पड़ता । और तेरे बच्चे पे इतना खतरा होता । ना ही हॉस्पिटल का चक्कर लगता । ऐसे आदमी पे गुस्सा नहीं आएगा क्या ?

प्राची : पर उन्होंने कभी मेरे साथ उस रात संभोग करने का सोचा भी नहीं था दादी । वो तो मै थी जो उनसे जुदाई सह नहीं पा रही थी । और उनको मेरे साथ संभोग के लिए मजबूर किया दादी । पापा को इसमें कोई दोष नहीं । मै ही अपने जोश पे काबू नहीं कर पा रही थी दादी । जब से मै प्रेग्नेंट हुई , और अपने हमारे लिए सेक्स निषेध के दिया , तब से हमेशा मेरी योनि में इतना गीलापन भरा रहता था । मुझे पापा से जुदाई बर्दाश्त नहीं हो रही थी । और मैने हो पापा को रिझाया की वो मेरे अरमानो को पूरा करे । ये मेरी गलती थी जिसके कारण मेरा ये हाल हुआ था दादी । पापा का इसमें कोई दोष नहीं । पर अपने तो पापा को जम के खड़ी खोटी सुना दिया । अगर आपको ऐसा करना ही था तो मुझे सुना देते ये सब। पापा को आपने इतना बड़ा गुनेहगार मान लिया और इतनी गन्दी बात बोल दो उनसे ? उनके दिल पे क्या बीत रही होगी । वो आपको माँ ये अलावा किसी ओर नज़रो से आज तक नहीं देखे । प्रज्ञा को अपने बेटी या अब साली के नज़रों के अलावा ओर किसी नज़र से नहीं देखा । उनको आपने एक दरिंदा कह दिया जो सबको नोंच के चोद देना चाहता है घर में ? ये क्या बहियात बाते अपने पापा से कह दिया दादी ? उनका दिल कितना दुख रहा होगा ?

दादी को प्राची का अपने पति के लिए इस तरह से खड़ा होना अच्छा लगा । और उन्हें अपने गलती का एहसास हो गया । पर शब्द तो तीर के तरह होते है । एक बार मुंह से निकल गए तो वापस नहीं आते , जैसे तेरे एक बार धनुष से निकल गया तो सीना चीर ही देती है । दादी के शब्दों ने बिल्कुल ऐसे हो पापा का सीना चीर दिया होगा । प्राची के आंखों में आंशू आ गया था । उसके पति की बेज्जती जो हुई थी । प्राची को दुख ने देख प्रज्ञा की आंखें भी नम हो गई । दादी को अपनी गलती का एहसास प्राची ने दिलवा दिया था। दादी आज प्राची का हिम्मत देख के भी दंग थी ।

दादी : बेटी , मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है । मुझे माफ के दो बेटी । मैने अपने बेटे और तेरे पति को इतना गलत समझा और इतना कुछ बोल दिया । मै गुस्सा में थी बेटी ओर मुझसे ये भूल हो गईं, उसके लिए मै माफी मांगती हु । मै सोच भी नहीं सकती कि मेरा बेटा जो सारी घर की जिम्मेदारी उठा रहा है , उसके दिल पे आज क्या बीत रही होगी ?

दादी भी प्राची के दिल में पापा के लिए प्यार देख के रुआषि सी हो गई थी ।

प्राची : आप सोच भी नहीं सकती, पापा पे क्या बीत रही होगी आज। आपने अपने बेटे को ये कैसे शब्द कहे है । वो घर की सारी जिम्मेदारी उठा रहे है । मुझे , आपको ओर प्रज्ञा की सारी जरूरतें पूरी करते है । ओर आप पापा को इस तरह का इंसान मान रही है ?

दादी : मुझे माफ कर दे बेटी , मै समझ नहीं पाई । मेरे करावे शब्द मेरे बेटे के सीने को चीर रहे होंगे । मुझे माफ कर दे ।

प्राची : दादी आप मुझ से माफी मांग के क्या करेंगे? माफ़ी तो आपको अपने बेटे से मांगनी चाहिए ।

प्रज्ञा : जी , दादी , आपके उस गुस्से के बात भी मै भी अपने पापा को एक घंटिया इंसान मान लिया था , जबकि ऐसा नहीं है , पापा ने दीदी के साथ कभी जबरदस्ती नहीं किया । दीदी के मन से सब हुआ, और मै भी पापा पे गलत नज़र से देख रही थी । वो सब आपके कारण दादी । आपके कारण मैने पापा पे शक किया । दीदी मुझे भी माफ कर दो । पापा तो कितने अच्छे है।

प्राची : प्रज्ञा , इसमें तेरी कोई गलती नहीं है । दादी ने पापा के ऊपर खुद से एक धारणा बना के उनपे आरोप लगाया । उसी कारण तेरा पापा पे इस तरह शक करना हुआ। माफ़ी दादी को ही मांगनी चाहिए । इन्होंने मुझ से बिना पूरे मामले का हाल लिए । अपनी एक धारणा बना ली , कि जरूर पापा ने मेरे साथ जबरदस्ती सेक्स किया होगा , और उन्हें बदनाम किया । दादी को माफी मांगनी चाहिए तुझे नहीं ।

दादी को गलती का एहसास हो गया । वो समझ गई ,कि उनसे कितनी बड़ी गलती हो गई है।

दादी : बेटी , मुझे से बहुत बड़ी , गलती हो गई है । मै तेरे पापा से बात करूंगी । और तुम सबके सामने माफी मांगूंगी ।

प्राची : ठीक है दादी । आपने पापा को दुख पहुंचाया है , और आप ही उनसे माफी मांगेंगी।

दादी : ठीक है मेरी बच्ची । ऐसा ही होगा ।
 

kas1709

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Update :61 (गलती का एहसास)

प्राची को, दादी के पापा पे लांछन लगाने, के लिए बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था । प्रज्ञा को भी एहसास हो गया था, कि वो नाहक अपने पापा पे शक या गुस्सा कर रही थी । उसका भी ऐसी धारणा तो दादी के शब्दों ने ही बनाई थी । वही आज वो प्राची जो दादी के एक बात पे बिना सोचे पापा से शादी को तैयार हो गई और दादी के कहने के अनुसार प्रेग्नेंट भी होना स्वीकर किया था ,बिना कुछ बोले । आज अपने पापा के सम्मान के लिए उनसे भिड़ने चली थी ।

दादी अपने कमरे में आराम कर रही थी । प्राची ने ताव में दादी से बोला : दादी , आपने पापा से क्या बोला है ?

दादी को प्राची को देख के खुशी हुई : वाह मेरी बच्ची तू ठीक तो है ।

प्राची : मै बिल्कुल ठीक हु दादी ,मगर पापा के बारे ने जो आपने बोला है , उसे सुन के मै ये विश्वास नहीं कर पा रही कि अपने अपने ही बेटे को ऐसा बोल दिया । क्या वो आपको हवसी दरिंदा दिखते है ? क्या आपको अपने बेटे पे थोड़ा भी विश्वास नहीं रहा ?

दादी समझ गई कि प्राची इतना गुस्से से क्यों बात कर रही है । बात उसके पति के सम्मान की थी ।

दादी : अरे इतना गुस्सा मत कर , तेरी तबियत ठीक नहीं , आ बैठ इधर , जरा तेरे तबियत का हाल चाल के लूँ।

प्राची : मेरी तबियत बिल्कुल ठीक है । मुझे आप ये बताइए कि आपने पापा को ऐसी बात बोल भी कैसे दी कि वो घर में किसी महिला को नहीं छोड़ेंगे , यहाँ तक की प्रज्ञा को भी नहीं ? पापा ने आपको कभी गलत नज़र से देखा है क्या ? कभी प्रज्ञा के साथ एक बेटी के अलावा किसी ओर तरह से व्यवहार किया है क्या ? मै तो अब उनकी पत्नी हु , उनका बच्चा अपने कोख में पाल रही हु । मेरे साथ पापा का प्यार भरा पल बिताना आपको ठरक कैसे लग सकता है ?

दादी समझ गई कि मामला संगीन है और प्राची को प्रज्ञा ने सब बता दिया है । दादी ने प्रज्ञा को एक पल के लिए आंखे दिखाई,जैसे दादी प्रज्ञा को बोल रही हो कि , ये तूने क्या किया , प्राची को ये सब क्यों बताया ।

दादी : तो मै ओर क्या कहती बेटे , गुस्सा ने आ के मेरे मुंह से निकल गाया ये सब बात । तेरी क्या हालत हो गई थी , उस रात । अगर तेरा पापा , उस दिन अपने ठरक पे काबू रख पाता तो तुझे इतना दर्द न सहना पड़ता । और तेरे बच्चे पे इतना खतरा होता । ना ही हॉस्पिटल का चक्कर लगता । ऐसे आदमी पे गुस्सा नहीं आएगा क्या ?

प्राची : पर उन्होंने कभी मेरे साथ उस रात संभोग करने का सोचा भी नहीं था दादी । वो तो मै थी जो उनसे जुदाई सह नहीं पा रही थी । और उनको मेरे साथ संभोग के लिए मजबूर किया दादी । पापा को इसमें कोई दोष नहीं । मै ही अपने जोश पे काबू नहीं कर पा रही थी दादी । जब से मै प्रेग्नेंट हुई , और अपने हमारे लिए सेक्स निषेध के दिया , तब से हमेशा मेरी योनि में इतना गीलापन भरा रहता था । मुझे पापा से जुदाई बर्दाश्त नहीं हो रही थी । और मैने हो पापा को रिझाया की वो मेरे अरमानो को पूरा करे । ये मेरी गलती थी जिसके कारण मेरा ये हाल हुआ था दादी । पापा का इसमें कोई दोष नहीं । पर अपने तो पापा को जम के खड़ी खोटी सुना दिया । अगर आपको ऐसा करना ही था तो मुझे सुना देते ये सब। पापा को आपने इतना बड़ा गुनेहगार मान लिया और इतनी गन्दी बात बोल दो उनसे ? उनके दिल पे क्या बीत रही होगी । वो आपको माँ ये अलावा किसी ओर नज़रो से आज तक नहीं देखे । प्रज्ञा को अपने बेटी या अब साली के नज़रों के अलावा ओर किसी नज़र से नहीं देखा । उनको आपने एक दरिंदा कह दिया जो सबको नोंच के चोद देना चाहता है घर में ? ये क्या बहियात बाते अपने पापा से कह दिया दादी ? उनका दिल कितना दुख रहा होगा ?

दादी को प्राची का अपने पति के लिए इस तरह से खड़ा होना अच्छा लगा । और उन्हें अपने गलती का एहसास हो गया । पर शब्द तो तीर के तरह होते है । एक बार मुंह से निकल गए तो वापस नहीं आते , जैसे तेरे एक बार धनुष से निकल गया तो सीना चीर ही देती है । दादी के शब्दों ने बिल्कुल ऐसे हो पापा का सीना चीर दिया होगा । प्राची के आंखों में आंशू आ गया था । उसके पति की बेज्जती जो हुई थी । प्राची को दुख ने देख प्रज्ञा की आंखें भी नम हो गई । दादी को अपनी गलती का एहसास प्राची ने दिलवा दिया था। दादी आज प्राची का हिम्मत देख के भी दंग थी ।

दादी : बेटी , मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है । मुझे माफ के दो बेटी । मैने अपने बेटे और तेरे पति को इतना गलत समझा और इतना कुछ बोल दिया । मै गुस्सा में थी बेटी ओर मुझसे ये भूल हो गईं, उसके लिए मै माफी मांगती हु । मै सोच भी नहीं सकती कि मेरा बेटा जो सारी घर की जिम्मेदारी उठा रहा है , उसके दिल पे आज क्या बीत रही होगी ?

दादी भी प्राची के दिल में पापा के लिए प्यार देख के रुआषि सी हो गई थी ।

प्राची : आप सोच भी नहीं सकती, पापा पे क्या बीत रही होगी आज। आपने अपने बेटे को ये कैसे शब्द कहे है । वो घर की सारी जिम्मेदारी उठा रहे है । मुझे , आपको ओर प्रज्ञा की सारी जरूरतें पूरी करते है । ओर आप पापा को इस तरह का इंसान मान रही है ?

दादी : मुझे माफ कर दे बेटी , मै समझ नहीं पाई । मेरे करावे शब्द मेरे बेटे के सीने को चीर रहे होंगे । मुझे माफ कर दे ।

प्राची : दादी आप मुझ से माफी मांग के क्या करेंगे? माफ़ी तो आपको अपने बेटे से मांगनी चाहिए ।

प्रज्ञा : जी , दादी , आपके उस गुस्से के बात भी मै भी अपने पापा को एक घंटिया इंसान मान लिया था , जबकि ऐसा नहीं है , पापा ने दीदी के साथ कभी जबरदस्ती नहीं किया । दीदी के मन से सब हुआ, और मै भी पापा पे गलत नज़र से देख रही थी । वो सब आपके कारण दादी । आपके कारण मैने पापा पे शक किया । दीदी मुझे भी माफ कर दो । पापा तो कितने अच्छे है।

प्राची : प्रज्ञा , इसमें तेरी कोई गलती नहीं है । दादी ने पापा के ऊपर खुद से एक धारणा बना के उनपे आरोप लगाया । उसी कारण तेरा पापा पे इस तरह शक करना हुआ। माफ़ी दादी को ही मांगनी चाहिए । इन्होंने मुझ से बिना पूरे मामले का हाल लिए । अपनी एक धारणा बना ली , कि जरूर पापा ने मेरे साथ जबरदस्ती सेक्स किया होगा , और उन्हें बदनाम किया । दादी को माफी मांगनी चाहिए तुझे नहीं ।

दादी को गलती का एहसास हो गया । वो समझ गई ,कि उनसे कितनी बड़ी गलती हो गई है।

दादी : बेटी , मुझे से बहुत बड़ी , गलती हो गई है । मै तेरे पापा से बात करूंगी । और तुम सबके सामने माफी मांगूंगी ।

प्राची : ठीक है दादी । आपने पापा को दुख पहुंचाया है , और आप ही उनसे माफी मांगेंगी।

दादी : ठीक है मेरी बच्ची । ऐसा ही होगा ।
Nice update.....
 
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dhparikh

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Update :61 (गलती का एहसास)

प्राची को, दादी के पापा पे लांछन लगाने, के लिए बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था । प्रज्ञा को भी एहसास हो गया था, कि वो नाहक अपने पापा पे शक या गुस्सा कर रही थी । उसका भी ऐसी धारणा तो दादी के शब्दों ने ही बनाई थी । वही आज वो प्राची जो दादी के एक बात पे बिना सोचे पापा से शादी को तैयार हो गई और दादी के कहने के अनुसार प्रेग्नेंट भी होना स्वीकर किया था ,बिना कुछ बोले । आज अपने पापा के सम्मान के लिए उनसे भिड़ने चली थी ।

दादी अपने कमरे में आराम कर रही थी । प्राची ने ताव में दादी से बोला : दादी , आपने पापा से क्या बोला है ?

दादी को प्राची को देख के खुशी हुई : वाह मेरी बच्ची तू ठीक तो है ।

प्राची : मै बिल्कुल ठीक हु दादी ,मगर पापा के बारे ने जो आपने बोला है , उसे सुन के मै ये विश्वास नहीं कर पा रही कि अपने अपने ही बेटे को ऐसा बोल दिया । क्या वो आपको हवसी दरिंदा दिखते है ? क्या आपको अपने बेटे पे थोड़ा भी विश्वास नहीं रहा ?

दादी समझ गई कि प्राची इतना गुस्से से क्यों बात कर रही है । बात उसके पति के सम्मान की थी ।

दादी : अरे इतना गुस्सा मत कर , तेरी तबियत ठीक नहीं , आ बैठ इधर , जरा तेरे तबियत का हाल चाल के लूँ।

प्राची : मेरी तबियत बिल्कुल ठीक है । मुझे आप ये बताइए कि आपने पापा को ऐसी बात बोल भी कैसे दी कि वो घर में किसी महिला को नहीं छोड़ेंगे , यहाँ तक की प्रज्ञा को भी नहीं ? पापा ने आपको कभी गलत नज़र से देखा है क्या ? कभी प्रज्ञा के साथ एक बेटी के अलावा किसी ओर तरह से व्यवहार किया है क्या ? मै तो अब उनकी पत्नी हु , उनका बच्चा अपने कोख में पाल रही हु । मेरे साथ पापा का प्यार भरा पल बिताना आपको ठरक कैसे लग सकता है ?

दादी समझ गई कि मामला संगीन है और प्राची को प्रज्ञा ने सब बता दिया है । दादी ने प्रज्ञा को एक पल के लिए आंखे दिखाई,जैसे दादी प्रज्ञा को बोल रही हो कि , ये तूने क्या किया , प्राची को ये सब क्यों बताया ।

दादी : तो मै ओर क्या कहती बेटे , गुस्सा ने आ के मेरे मुंह से निकल गाया ये सब बात । तेरी क्या हालत हो गई थी , उस रात । अगर तेरा पापा , उस दिन अपने ठरक पे काबू रख पाता तो तुझे इतना दर्द न सहना पड़ता । और तेरे बच्चे पे इतना खतरा होता । ना ही हॉस्पिटल का चक्कर लगता । ऐसे आदमी पे गुस्सा नहीं आएगा क्या ?

प्राची : पर उन्होंने कभी मेरे साथ उस रात संभोग करने का सोचा भी नहीं था दादी । वो तो मै थी जो उनसे जुदाई सह नहीं पा रही थी । और उनको मेरे साथ संभोग के लिए मजबूर किया दादी । पापा को इसमें कोई दोष नहीं । मै ही अपने जोश पे काबू नहीं कर पा रही थी दादी । जब से मै प्रेग्नेंट हुई , और अपने हमारे लिए सेक्स निषेध के दिया , तब से हमेशा मेरी योनि में इतना गीलापन भरा रहता था । मुझे पापा से जुदाई बर्दाश्त नहीं हो रही थी । और मैने हो पापा को रिझाया की वो मेरे अरमानो को पूरा करे । ये मेरी गलती थी जिसके कारण मेरा ये हाल हुआ था दादी । पापा का इसमें कोई दोष नहीं । पर अपने तो पापा को जम के खड़ी खोटी सुना दिया । अगर आपको ऐसा करना ही था तो मुझे सुना देते ये सब। पापा को आपने इतना बड़ा गुनेहगार मान लिया और इतनी गन्दी बात बोल दो उनसे ? उनके दिल पे क्या बीत रही होगी । वो आपको माँ ये अलावा किसी ओर नज़रो से आज तक नहीं देखे । प्रज्ञा को अपने बेटी या अब साली के नज़रों के अलावा ओर किसी नज़र से नहीं देखा । उनको आपने एक दरिंदा कह दिया जो सबको नोंच के चोद देना चाहता है घर में ? ये क्या बहियात बाते अपने पापा से कह दिया दादी ? उनका दिल कितना दुख रहा होगा ?

दादी को प्राची का अपने पति के लिए इस तरह से खड़ा होना अच्छा लगा । और उन्हें अपने गलती का एहसास हो गया । पर शब्द तो तीर के तरह होते है । एक बार मुंह से निकल गए तो वापस नहीं आते , जैसे तेरे एक बार धनुष से निकल गया तो सीना चीर ही देती है । दादी के शब्दों ने बिल्कुल ऐसे हो पापा का सीना चीर दिया होगा । प्राची के आंखों में आंशू आ गया था । उसके पति की बेज्जती जो हुई थी । प्राची को दुख ने देख प्रज्ञा की आंखें भी नम हो गई । दादी को अपनी गलती का एहसास प्राची ने दिलवा दिया था। दादी आज प्राची का हिम्मत देख के भी दंग थी ।

दादी : बेटी , मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है । मुझे माफ के दो बेटी । मैने अपने बेटे और तेरे पति को इतना गलत समझा और इतना कुछ बोल दिया । मै गुस्सा में थी बेटी ओर मुझसे ये भूल हो गईं, उसके लिए मै माफी मांगती हु । मै सोच भी नहीं सकती कि मेरा बेटा जो सारी घर की जिम्मेदारी उठा रहा है , उसके दिल पे आज क्या बीत रही होगी ?

दादी भी प्राची के दिल में पापा के लिए प्यार देख के रुआषि सी हो गई थी ।

प्राची : आप सोच भी नहीं सकती, पापा पे क्या बीत रही होगी आज। आपने अपने बेटे को ये कैसे शब्द कहे है । वो घर की सारी जिम्मेदारी उठा रहे है । मुझे , आपको ओर प्रज्ञा की सारी जरूरतें पूरी करते है । ओर आप पापा को इस तरह का इंसान मान रही है ?

दादी : मुझे माफ कर दे बेटी , मै समझ नहीं पाई । मेरे करावे शब्द मेरे बेटे के सीने को चीर रहे होंगे । मुझे माफ कर दे ।

प्राची : दादी आप मुझ से माफी मांग के क्या करेंगे? माफ़ी तो आपको अपने बेटे से मांगनी चाहिए ।

प्रज्ञा : जी , दादी , आपके उस गुस्से के बात भी मै भी अपने पापा को एक घंटिया इंसान मान लिया था , जबकि ऐसा नहीं है , पापा ने दीदी के साथ कभी जबरदस्ती नहीं किया । दीदी के मन से सब हुआ, और मै भी पापा पे गलत नज़र से देख रही थी । वो सब आपके कारण दादी । आपके कारण मैने पापा पे शक किया । दीदी मुझे भी माफ कर दो । पापा तो कितने अच्छे है।

प्राची : प्रज्ञा , इसमें तेरी कोई गलती नहीं है । दादी ने पापा के ऊपर खुद से एक धारणा बना के उनपे आरोप लगाया । उसी कारण तेरा पापा पे इस तरह शक करना हुआ। माफ़ी दादी को ही मांगनी चाहिए । इन्होंने मुझ से बिना पूरे मामले का हाल लिए । अपनी एक धारणा बना ली , कि जरूर पापा ने मेरे साथ जबरदस्ती सेक्स किया होगा , और उन्हें बदनाम किया । दादी को माफी मांगनी चाहिए तुझे नहीं ।

दादी को गलती का एहसास हो गया । वो समझ गई ,कि उनसे कितनी बड़ी गलती हो गई है।

दादी : बेटी , मुझे से बहुत बड़ी , गलती हो गई है । मै तेरे पापा से बात करूंगी । और तुम सबके सामने माफी मांगूंगी ।

प्राची : ठीक है दादी । आपने पापा को दुख पहुंचाया है , और आप ही उनसे माफी मांगेंगी।

दादी : ठीक है मेरी बच्ची । ऐसा ही होगा ।
Nice update.....
 
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