Dilki_rani2003
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लेखक महोदय, आपकी कहानी बेहद रोचक और प्रभावी है। लेकिन आपकी कहानी पर मेरा दृष्टिकोण कुछ भिन्न है। हालांकि इस कहानी के हीरो पापा ही है, और हेरोइन प्राची है, लेकिन आज कहानी जिस मोड पर खड़ी है, उससे ऐसा लगता है की दादी इस कहानी की सबसे बड़ी विलयन है। स्पष्ट करती हूँ क्यों,
1. दादी की ही जिद थी की पापा और उनकी बड़ी बेटी प्राची की शादी हो। ये हुई, बहुत बेहतर भी हुआ।
2. दादी की ही जिद थी की प्राची जल्दी से जल्दी अपने पापा के बच्चे की माँ बने। अब दादी तो अनुभवी थी, उन्होंने कितने ही सावन देखें होंगे। क्या उनको जरा भी पता नहीं रहा होगा की प्राची की कोख अभी कमजोर है, वो इतनी कम उम्र मे एक सामान्य स्त्री की तरह माँ नहीं बन सकती। मेरा मानना है की उनको ये बात पता होनी चाहिए थी।
3. हालांकि मैंने पहले भी अपना यही मत दिया था की प्रज्ञा को अपने पापा के साथ हमबिस्तरी नहीं करनी चाहिए, अभी भी मेरा मत यही है। लेकिन फिर भी आपकी इच्छा सर्वोपरि है।
4. अब कहानी के भविष्य की कल्पना करे तो यदि प्रज्ञा अपने पापा के साथ हमबिस्तरी करती है, तो ये प्राची के साथ पूरी तरह बेवफाई होगी। क्योंकि दादी के दबाव मे प्राची जल्दी गर्भवती होना स्वीकार किया, और अपने वो सपने भी पूरे नहीं कर पाई, जो एक नवविवाहित लड़की अपनी शादी के बाद पूरे करती है, और दादी की इच्छा पूरी करने के लिए उसने अपने अरमानों का पूरी तरह गला घोंट दिया।
5. कहानी जिस दिशा मे बढ़ रही है, उस दिशा मे चलती रही और प्रज्ञा और उसके पापा की हमबिस्तरी होती है, और प्रज्ञा भी गर्भवती हो जाती है तो इस कहानी मे पाठकों को सेक्स, अश्लीलता, नंगापन सब कुछ मिलेगा। लेकिन कहानी का जो मर्म है वो पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
6. मान लेते है की प्रज्ञा भी प्राची की तरह घर के बाहर शादी नहीं करती और हो सकता है की वो अपने पापा से ही शादी कर लेती है, और गर्भवती भी हो जाएगी। तो प्राची और प्रज्ञा के पापा अपनी दोनों बेटियों की होने वाली नाजायज संतानों के पापा हो जाएंगे। क्योंकि अभी तक तो प्राची और उसके पापा की शादी को भी सामाजिक मान्यता नहीं है, पता नहीं उसकी होने वाली संतान का क्या होगा। तो प्रज्ञा की वर्तमान स्थति इसी भविष्य के अनुसार तो और ज्यादा गलत होगी।
7. यदि ऐसा हो भी जाता है, और उनके पापा को कुछ हो जाता है तो कहानी का एक बुरा भविष्य ये भी हो सकता है की एक बाप की दो विधवा बेटीया अपनी नाजायज संतानों के साथ रह रही है।
1. दादी की ही जिद थी की पापा और उनकी बड़ी बेटी प्राची की शादी हो। ये हुई, बहुत बेहतर भी हुआ।
2. दादी की ही जिद थी की प्राची जल्दी से जल्दी अपने पापा के बच्चे की माँ बने। अब दादी तो अनुभवी थी, उन्होंने कितने ही सावन देखें होंगे। क्या उनको जरा भी पता नहीं रहा होगा की प्राची की कोख अभी कमजोर है, वो इतनी कम उम्र मे एक सामान्य स्त्री की तरह माँ नहीं बन सकती। मेरा मानना है की उनको ये बात पता होनी चाहिए थी।
3. हालांकि मैंने पहले भी अपना यही मत दिया था की प्रज्ञा को अपने पापा के साथ हमबिस्तरी नहीं करनी चाहिए, अभी भी मेरा मत यही है। लेकिन फिर भी आपकी इच्छा सर्वोपरि है।
4. अब कहानी के भविष्य की कल्पना करे तो यदि प्रज्ञा अपने पापा के साथ हमबिस्तरी करती है, तो ये प्राची के साथ पूरी तरह बेवफाई होगी। क्योंकि दादी के दबाव मे प्राची जल्दी गर्भवती होना स्वीकार किया, और अपने वो सपने भी पूरे नहीं कर पाई, जो एक नवविवाहित लड़की अपनी शादी के बाद पूरे करती है, और दादी की इच्छा पूरी करने के लिए उसने अपने अरमानों का पूरी तरह गला घोंट दिया।
5. कहानी जिस दिशा मे बढ़ रही है, उस दिशा मे चलती रही और प्रज्ञा और उसके पापा की हमबिस्तरी होती है, और प्रज्ञा भी गर्भवती हो जाती है तो इस कहानी मे पाठकों को सेक्स, अश्लीलता, नंगापन सब कुछ मिलेगा। लेकिन कहानी का जो मर्म है वो पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
6. मान लेते है की प्रज्ञा भी प्राची की तरह घर के बाहर शादी नहीं करती और हो सकता है की वो अपने पापा से ही शादी कर लेती है, और गर्भवती भी हो जाएगी। तो प्राची और प्रज्ञा के पापा अपनी दोनों बेटियों की होने वाली नाजायज संतानों के पापा हो जाएंगे। क्योंकि अभी तक तो प्राची और उसके पापा की शादी को भी सामाजिक मान्यता नहीं है, पता नहीं उसकी होने वाली संतान का क्या होगा। तो प्रज्ञा की वर्तमान स्थति इसी भविष्य के अनुसार तो और ज्यादा गलत होगी।
7. यदि ऐसा हो भी जाता है, और उनके पापा को कुछ हो जाता है तो कहानी का एक बुरा भविष्य ये भी हो सकता है की एक बाप की दो विधवा बेटीया अपनी नाजायज संतानों के साथ रह रही है।
