AI dwara nirmit ye posters kafi sexy hai , maine use is kahani ke top pe stick kr diya hai. Ab ye poster hr post se pahle dikhega.
Sahi kaha apne.Sexsarkar ji pls don't involve Dadi in this sex story.
Dadi ki apne wish list se hata digiye , kahani me scope nhi hai.sexsarkar ji aapne ek baar pucha tha sabse ki story ki sequence kya rahkni hai to bataya gaya tha ki
1) Prachi
2) Praygya
3) Dadi
to pragya ne aapko acha moka diya hai story ki aage ki sequence ab achi ban jayegi.
Dekhte hai , waise papa ko or na pathako ko , kisi ko bhi jayda intezaar nhi karne degi pragya.लड़की तेज निकली, नहीं तो पापा उसे आज ही चोदकर सुहागरात मना लेते....अब देखना है कि पापा को और कितना इंतजार करना पड़ता है. waiting for next update....
Excellent update more horny then i thought.
I am glad tha you are liking it.Excellent nind blowing update.
100000 time excellent pls fast your update.
Papa bhi to yahi kah rhe haiअब ये शादी कब होगी अरे पहले सुहागरात मना लो फिर करती रहना शादी फुर्सत से
Thanks bhabhi.Very sexyyyyyyyupdate Sarkar devar ji hi c cc ji
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Wahhh kya move aaya h story me, bemisaal ati uttamUpdate 75:
पापा दुविधा में थे कि आगे क्या किया जाए । शादी मतलब सबको जवाब देना । प्राची को बोलूंगा , मां को क्या बोलूंगा , कि मैं लखनऊ प्रज्ञा के साथ शादी मनाने आया था ? उन्हें लगेगा मैने ये सारा प्लानिंग बना के किया है । प्राची का विश्वास तोड़ने को दिल नहीं मान रहा । मगर अब ये प्यास तो बर्दाश्त भी नहीं होती । और प्रज्ञा जैसी सुन्दर, गौरी चिट्टी और एकदम ख़िज्जा माल जब देने के लिए तैयार हो तो मै कैसे मन कर सकता हूँ।
मगर जब मै राज़ी हूं, प्रज्ञा भी राज़ी है तो घर वाली को मनाने में कितना ही समय लगेगा । कुछ दिनों तक ये रिश्ता गुप्त ही रखूंगा और समय आने पे सबको बता दूंगा । मगर प्रज्ञा के मंगलसूत्र और सिंदूर का क्या करूंगा ? वो कैसे छिपेगा सब से । ये तो समस्या हो जाएगी । प्रज्ञा ने तो जिद ही बांध दी थी कि उसको पाना हैं तो शादी करनी ही पड़ेगी । क्या कोई ओर रास्ता नहीं ? नहीं नहीं प्रज्ञा को मनाता हूं। कुछ हल निकल आए ।
पापा का मन आज थोड़ा शांत था । सुबह की लाली बिखर चुकी थी और कमरे ने खिड़की के पर्दे से छन के हल्की हल्की रोशनी आने लगी थी । प्रज्ञा बिस्तर से उठ के जा चुकी थी । वो अपने आप को साफ करने गई थी । पापा ने अभी कुछ ही देर पहले तो अपने पिचकारी से प्रज्ञा के ऊपर सफेद रंग जो उड़ेला था । उसे ही साफ करने गई थी उनकी बेटी । पापा के पेट पे गिरे छिटको को प्रज्ञा पहले ही साफ कर दी थी । फिर भी पापा का दम आज प्रज्ञा ने अच्छे से लन्ड के रस्ते निकल दिया था । एक नंबसिखु के जैसे हाथ चलाए थे प्रज्ञा ने । पापा को आज तक मूठ मारने में इतना मजा नहीं आया था जितना आज प्रज्ञा के हाथों से अपने लन्ड को फेटवा के आया था ।
प्रज्ञा जल्दी ही बाथरूम से निकली , मगर बहुत शर्मा रही थी । पापा से नज़रे तक नहीं मिलना चाहती थी । पापा का लिंग सिकुड़ गया था ।
और प्रज्ञा के कमरे में आने के बाद भी पापा ने नीचे अभी भी कुछ पहना नहीं था । प्रज्ञा ने नज़ारे तिरछी कर के पापा की ओर देखा , लिंग छोटा हो चुका था । प्रज्ञा घबरा गई : अरे ये क्या हुआ पापा को ,मैने कुछ गलत कर दिया क्या , अभी तो पापा का इतना बड़ा था , अभी इतना छोटा कैसे हो गया ? प्रज्ञा के मन में ये सवाल अचानक ही पनप गई । बेचारी कितनी नादान थी कि शायद उसे पुरुष शरीर के बारे में कुछ भी पता नहीं था । पुरुष क्या उसे तो महिला के शरीर के बारे में भी बहुत कुछ पता नहीं था , अभी हाल तक , वो तो शुक्र है कि पापा और प्राची का मिलन हुआ ,तब जा के प्रज्ञा को एक औरत और मर्द के मिलन के बारे में दादी से पता चला ।
प्रज्ञा घबराई आवाज में : पापा अरे ये क्या हो गया आपको ,मैने कुछ गलत कर दिया क्या ?
पापा भी सकपका गए : क्या , क्या हुआ ? कुछ भी थी नहीं मै ठीक तो हूं !
प्रज्ञा : पापा , मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है । कुछ पल पहले तक ठीक था , अभी अचानक इसे क्या हुआ ?
पापा अभी भी अचंभे में थे कि प्रज्ञा किसकी बात कर रही थी : क..किसकी बात कर रही है तू बेटी ।
प्रज्ञा झट से पापा के कमर के पास बैठ गई और पापा के लिंग को अपने मुंह से फूंकने लगी । उसे कभी भी चोट लगती तो बचपन से ही उसकी मां या दादी या दीदी , उसे ऐसे ही चोट लगे अंग पर फूंक मार देती थी , जिससे थोड़ी राहत होती थी । प्रज्ञा को कुछ सूझा नहीं तो उसे लगा पापा के दर्द का इलाज वो फूंक मार के कुछ तो कम के सकती है ।
पापा के लिंग से अभी अभी माल निकला था , और ढंग से अभी पूरी तरह सुखा भी नहीं था , यानी गिला था , ऊपर से सुबह की हल्की ठंडक , प्रज्ञा ने जैसे ही पापा के लिंग पे फूंक मारना शुरू किया पापा एकदम से सिहर उठे , उनके लिंग में एक सनसनी सी महसूस हुआ उन्हें , आह.....बड़ा अच्छा लगा पापा को । उनको आंखे बर्बस ही बंद हो गई । और हाथ प्रज्ञा के सर पे चला गया ।
प्रज्ञा : पापा , क्या कर रहे है ,मै आपको राहत देना चाह रही हूं और आप मेरे सर के पकड़ के अलग कर रहे है । पापा ने तो जोश में प्रज्ञा के सर में हाथ फेरा था ,उसे लगा पापा उसकी सिर को हटाना चाहते है और फूंकने से रोकना चाहते है ।
पापा : आह...क्या करती हो मेरी बच्ची। ये क्यों कर रही ।
प्रज्ञा : आपको चोट लग गई ना ? ये इतना छोटा कैसे हो गया । ये अभी कितना बड़ा था पापा ।
पापा : अरे.......हाहाहाहाहा....
पापा को जोर की हंसी आ गई ।
प्रज्ञा थोड़ी सी चिढ़ाती हुई: पापा , क्यों हस रहे हो , एक तो आपको चोट लगी है ,मेरे उतने तेज हाथ चलने के कारण ,ऊपर से आप हस रहे है ।
पापा: तुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मुझे चोट लगी है ? हाहा..
प्रज्ञा : देखो कितना छोटा हो गया , अब तो इतना कड़क भी नहीं है कि मेरे उसमें आपका जा पाए ।
पापा की हंसी और तेज हो गई : हाहाहाहाहा.... अरे मेरी नादान बेटी , छुटकी बेटी , तू कितनी नादान है री?
प्रज्ञा को लगा कि उसने ऐसा कुछ बोल दिया है , जिसके बारे में उसे कुछ पता नहीं है : क्या हुआ पापा ?
पापा: अरे बेटी , ये तो बस चुदाई के टाइम ही खड़ा होता है ना।
प्रज्ञा अचंभे में थी : मतलब ?
पापा: अरे यार , पुरुष का लिंग , तभी खड़ा होता है जब उसको किसी मादा हो चोदना होता है । बांकी टाइम इसका साइज छोटा ही होता है मेरी बच्ची ।
प्रज्ञा ने ऐसे आचार्य में थी जैसे उसे परम ज्ञान की प्राप्ति हुई हो ।
प्रज्ञा : अच्छा , तभी में सोचूं की आपका इतना बड़ा है , मगर आज तक मुझे ये आपकी पेंट के अंदर से दिखा क्यों नहीं । अब समझ में आया , क्योंकि ये इतना छोटा हो जाता है ।
प्रज्ञा को आज मानव के एक नेचर का अद्भुत बनावट के बारे में पता चला था ।
पापा : ह्म्म्म...सही कहा । ये तो तेरे साथ हमबिस्तरी के समय उठ गया था । मगर अब तूने इसे अपने हाथ से फेंट के ठंडा कर दिया ना तो ये छोटा हो गया । प्रज्ञा के फूंकने से और इन सब बातों की वजह से पापा का लिंग प्रज्ञा के सामने ही धीरे धीरे बड़ा होने लगा ।
प्रज्ञा : पापा , वाओ, देखो कैसे बड़ा हो रहा है ।
पापा : हाहा...हां तेरा कमाल है। तूने ऐसी बाते की कि अब झर हो रहा है ।
देखते ही देखते , लिंग फिर से कड़क होके कमरे के छत को ओर अपना सुपारा उठाये , खड़ा हो के टांकने लगा ।
प्रज्ञा : पापा ,नीचे करिए ना इसे , फिर क्यों खरा के रहे है , मैने आपको कहा ना ,मै आपको मुझे प्यार करने , सिर्फ हमारे सुहागरात वाले दिन ही दूँगी।
पापा : अब तूने ही ऐसी बात की .... मै इस बारे में तुझ से बात भी करना चाहता हूं।
प्रज्ञा : जी पापा करिये ।
पापा : इधर आ मेरी बाहों में बैठ , फिर बताता हु बेटी ।
प्रज्ञा को भी पापा के मजबूत बांहों में बैठना बहुत पसंद था , वो झट से पापा के पास उसके हाथ पे अपना सर रख के उनके नंगे बदन से चिपक गई और पापा ने भी उसे पाने बाँहों में कस लिया हल्के से ।
पापा : बेटी , तू मुझ से शादी ही क्यों करना चाहती है ? प्यार तो हम बिना शादी के भी कर सकते है ना ?
प्रज्ञा : पर पापा मैने तो देखा है कि सब लोग ये सब शादी के बाद ही करते है ।
पापा : कहाँ देखा ?
प्रज्ञा : मतलब सुना है पापा , हमारे अरे जानने वाले या मेरी फ्रेड की दीदी , अब शादी के बाद ही ये सब करते है ।
पापा : ऐसा तो कुछ नहीं है बेटी , प्यार तो प्यार है , उसका शादी से क्या लेना देना , हां प्यार को समाजिक तौर पे पहचान देने के लिए लोग शादी करते है । मैने तो शादी के के भी समाजिक तौर पे ये बात छुपा के ही रखी है , क्योंकि समाज एक बाप ओर बेटी का प्यार भी नहीं समझ पाएगा ना।
प्रज्ञा : ह्म्म्म...मतलब प्यार करने के लिए शादी की जरूरत नहीं है पापा ?
पापा : नहीं ।
पापा : मगर पापा , दीदी से तो आप प्यार शादी के बाद ही किए थे ना , इसलिए मुझे भी शादी करनी है आपसे, फिर प्यार ।
पापा : अरे ऐसा कोई जरूरी नहीं है मेरी नादान बिटिया रानी , प्यार तो आराम से बिना शादी के भी हो सकता है , फिर शादी ।
प्रज्ञा के मन में हजारी सवाल थे ।
प्रज्ञा : पर पापा , मैने तो आज तक ये कभी नहीं सुना ।
पापा : तूने तो लौरे का छोटा होना भी नहीं देखा था । हाहाहा...अभी उमर ही क्या हुई है तेरी , 18 की तो तू है । लोग शादी से पहले भी घर बसाते है , उसे लीव-इन कहते है ।
प्रज्ञा : अच्छा पापा , लिव इन , मैने सुन है , वो क्या है ?
पापा : अच्छा कहा सुना है ?
प्रज्ञा : अरे पापा फिल्मों में ।
पापा : अच्छा । तो फिल्मों में प्यार तो शादी से पहले होता है ये नहीं सुना है ?
प्रज्ञा : हां , पर फिर वो बेड वाला प्यार शादी के बाद ही करते है ना।
पापा : तू बहुत भोली है । देख लोग को एक दूसरे से प्यार या चुदाई करने के लिए शादी की ही जरूरत नहीं होती है । प्यार होने के लिए मन में मिलन की इक्छा होनी चाहिए बस । तेरे दीदी से मैने शादी किया , इसका मतलब ये थोड़ी है कि मैं उससे पहले प्यार नहीं कर सकता था। शायद तुझे पता नहीं होगा , पर तेरे मां की मैने कालेज में ही पटाया था । और बतानी तो तुझे भी चाहिए , पर मैने तेरे मां को उन्हीं दिनों कली से फूल बना दिया था , फिर जा के हमारा शादी कही महीनों के बाद हुआ । तो अगर तू प्यार करना चाह रही है , और इस लाज से नहीं कर रही कि शादी के बाद करेगी , तो बहुत गलत है , अपने भावना को मत दबा । प्यार कर ले अभी मुझसे जी भर के , और मै वादा करता हूं कि तुझ से एकदिन मै परिवार से सामने , सबके सहमति से शादी करूंगा , प्राची को भी समझा बुझा के राज़ी करना मेरी जिम्मेदारी है ।
प्रज्ञा : पर पापा , मै शादी के पहले ये सब नहीं करना चाहती ,मै चाहती हूं कि अपने पति से ही पहला प्यार पाऊं । जो आपको मान चुकी हूं ।
पापा: अच्छा तू मुझे पति मान चुकी है ना तो समझ हमारी शादी होना तय है। क्योंकि शादी करने का ये समय सही नहीं है । देख अभी हमारे बारे में किसी को पता नहीं है । ऊपर से प्राची भी पेट से है । इस हालात में अगर उसे बिना बताए तुमसे शादी के लिया तो उसे कैसा लगेगा । मै उससे बात कर के उसे तेरे से शादी करने के लिए कन्विंस कर लूंगा । फिर सही समय होगा । वही दादी भी तो आग बबूला हो जाएगी की मैने तुझे धोखे से शादी के लिए उनकी बिना बताए ही फुसला लिया । मगर सोच दादी बिल्कुल सेम प्यार से तुझे मेरे कमरे में भेजेगी , जैसे प्राची को भेजा था तो कैसा मजा आएगा तुझे । तब तो तुझे असली शादी का मजा आएगा ना । ओर अगर मान ले अभी तुझ से शादी कर भी लिया तो घर में तो छुपा भी नहीं पाएंगे । दादी पहले दीन ही तेरी सिंदूर देख के समझ जाएगी । और तू बोलेगी कि इस ट्रिप पे प्यार करना क्यों जरूरी है ? बेटी , क्यूंकि हमे इसे अच्छा मौका प्यार को फरमान चढ़ाने के लिए नहीं मिलेगा , घर में दादी और प्राची होगी । हमारा मिलन बहुत मुश्किल होगा जब तक सबकी सहमति नहीं आ जाती । इसलिए हमें इन 8 दिनों का फायदा उठाना चाहिए , और मै इन आठ दिनों को तेरे जीवन के सबसे हसीन पलो में बदल दूंगा मेरी रानी ।
प्रज्ञा को पापा की हर बात अब जा के समझ में आने लगी थी ।
प्रज्ञा : पापा , सही तो आप कह रहे है , प्राची दीदी की शादी में इसलिए मजा आया क्योंकि परिवार साथ था । अगर अभी हम शादी कर भी ले तो घर में बवाल मच जाएगा , ऊपर से दीदी की वो हालत भी है कि उसे अपने सौतन से लड़ना परे । मै नहीं चाहती कि मैं दीदी या दादी को धोखा दूं पापा । आप सही कह रहे है , हमारी शादी भी दादी के मदद के बिना अधूरी रह जाएगी पापा , इसलिए शादी आपको जब सही लगे तब करिएगा , मगर पापा, मेरे अरमानो का क्या ?
पापा : कैसे अरमान बेटी?
प्रज्ञा : पापा मैने आपके ओर दीदी के सुहागरात होते वक्त ही ये सोचा था कि जब भी मै भी अपना पहला सेक्स करूंगी तो दीदी की तरह ही दुल्हन बनने के बाद ही करूंगी । पापा मेरे अरमानो पे तो पानी फिर जाएगा अगर मै आपसे बिना शादी के ही.....
बोलते हुए प्रज्ञा थोड़ी शरम और थोड़ा दुख से भर गई ।
पापा : ह्म्म्म....बेटी इसका एक उपाय है मेरे पास ।
प्रज्ञा : क्या पापा ?
पापा: प्रज्ञा , तेरा अरमान ये है ना कि दूल्हन के रूप में सज धज के अपना पहला सेक्स करे ?
प्रज्ञा : हां पापा , मेरा बस इतना सा अरमान है ।
पाप: ठीक है , वैसा ही होगा , आज तू दुल्हन की तरह सजेगी , और मै भी एक दूल्हे ही तरह , और फिल्मी शादी कर के मैं तेरे अरमान को बिना चोट पहुंचाये ,तेरे साथ सुहागरात मनाऊंगा । हमारी शादी अभी रियल में नहीं होगी , मगर इससे तुझे मेरे पत्नी का दर्जा आज ही मिल जाएगा , और सही समय आने पे , मै सबको मना के ,तुझ से मेरी, एकदम प्राची जैसी ही ,शादी रचेंगी ।
प्रज्ञा को पापा की बात भा गई ।
प्रज्ञा : अच्छा पापा , तो आप मुझसे मिलन के लिए इतने उतावले है कि आज ही सुहागरात मनाना चाहते है इस नन्ही से छोटी लड़की के साथ ?
पापा: नन्ही लड़की अब जवान होगी है बेटी , उसके यौवन निखर आया है , अपने दीदी से भी ज्यादा सुंदर, सुडौल और नशीला यौवन।
प्रज्ञा : पापा...
शरम से लाल हो गई थी प्रज्ञा ।
पापा प्रज्ञा को अगले आधे-एक घंटे तक प्लान को सफल बनाने के लिए बाते समझते रहे । और अंततः प्रज्ञा ने पाप के प्लान को हरी झंडी दे ही दिया ।
तभी दरवाजे पे दस्तक हुई : टक...टक...टक ....
पापा ने समय देखते हुए कहा , इतनी सुबह सुबह कोन कबख्त आ गया । सुबह के 7 बजाने को आ गए थे । प्रज्ञा से बाते करते करते समय का पता ही नहीं चला।
पापा नंगे थे , और प्रज्ञा भी बस ब्रा
और पैंटी में ही पापा से चिपकी बाते कर रही थी । वो दोनों झटके से अपना अपना कपड़ा पहनने लगे ।
दरवाजे पे फिर दस्तक हुई : टक... टक.... टक....!