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Bilkul sahi aat boli hai sanju bhai aapne par usme ek baat ye bhi hai ke ab is vichardhara aur mansikta ke bahut kam log bache hai aur umeed hai unki bhi soch badlegi aur rahi baat yaha komal ke pita hi aur aage aage dekhte jaiye kya hota haiइक्कीसवीं सदी में भी पुरानी विचारधारा कायम है । जब लड़की और लड़का एक दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते हैं तो फिर कोई न कोई चाहे वो लड़की के गार्डियन हो या लड़का के , विलेन बन के सामने टपक ही पड़ते हैं । न जाने इन्हें क्या परेशानी होती है ! अरे , जीवन लड़की और लड़का को बितानी है तो शादी ब्याह के फैसले उन्हीं को करने दो न !
ठीक है , आज से तीस चालीस साल पहले अधिकांशतः फैसले घर के गार्डियन लिया करते थे पर वो समय और था , आज का समय कुछ और है ।
मां बाप को भी समय के अनुसार बदलना चाहिए जैसे कि अनिकेत के फादर ने किया । पर कोमल के फादर अभी भी दकियानूसी सोच के शिकार लगते हैं। ऐसे लोग अपने फैसले जबरदस्ती अपने औलादों पर थोपते है जिसका खामियाजा बच्चों को ताउम्र उठाना पड़ता है ।
is behtarin samiksha ke liye bahut bahut shukriya sanju bhaiखैर देखते हैं आगे चलकर दोनों की लवस्टोरी का क्या अंजाम होगा ।
बहुत ही बेहतरीन लिख रहे हो भाई । कोमल का कायापलट जिन शब्दों के साथ लिखा वो सच में बहुत बढ़िया था । उसके रूप सौंदर्य का वर्णन बहुत ही बढ़िया ढंग से किया गया है । डायलॉग में कामेडी तो कभी सेंटिमेंट ! लाजबाव ।
कन्वर्सेशन लिखने में भी बहुत कमाल किया है ।
अविनाश के रूप में एक बेहतरीन दोस्त का किरदार गठन किया गया है जो हर समय अपने दोस्तों के लिए एक पांव पे खड़ा है ।
बहुत बहुत सुंदर अपडेट्स । आउटस्टैंडिंग एंड टू गुड अपडेट ।
