ढाई घंटे के बाद में अपने गांव से पांच किलोमीटर दूर छोटे से कस्बे में था जहां मां की ड्यूटी थी । में बैंक में नहीं जा सकता था इसलिए फोन निकाला और दूसरी सिम से प्यून को फोन किया ।
पियोन ने फोन उठाया तो मैने उसे बाहर मिलने को बोला । पर उसने बैंक में आने को बोला तो मैने उसे गैलरी से मां की और उसकी फोटो भेज दी और बैंक से थोड़ी सी दूर एक होटल में बैठकर उसका इंतज़ार करने लगा ।

…
में फोन को ही देख रहा था और वो कुछ देर में ऑनलाइन हुआ तो उसने फोटो देख ली और तुरंत उसका फोन आया । उसने मुझे पूछा कहा आना है तो मेरे उसे अपना बैठने का जगह बताया तो वो भागा भागा आया ।
मैने उसे कोने में आने को बोला था होटल में जहां मैने एक चाय का ऑर्डर किया हुआ था । वो मुझे देखते ही पहचान गया और बोला ,-- तुम सागर हो ना ।
में ,- हां , तुम ।
मैने देखा वो तीस साल के आस पास रहा होगा थोड़ा सांवला था पर फेस कटिंग सुंदर था उसके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था इसलिए वो बोला ,-- में रमेश ।
में ,-- बैठो, तुम आ गए वरना में तुम्हारे घर जाने वाला था चाय पीकर । बैठो
में एक चाय और देने का आवाज लगाया तो वो बैठ गया उसका चेहरा डर से पीला पड़ गया और वो कांपने लगा ।
में ,- डरो मत , मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है तुम पियोन हो इसलिए हो सकता है तुम्हारी मजबूरी रही होगी ।
रमेश ,-- मैने जबरदस्ती कुछ नहीं किया सर ।
में ,- चलो में तुम्हारे घर नहीं जाऊंगा बस मुझे पूरी बात बताओ ये कब से चल रहा है ।
रमेश ,-- दो साल से , जब से मैनेजर साहब आए है ड्यूटी से ।
मुझे याद आया कि लगभग ढाई साल पहले मेरे पिताजी की मौत के बाद मां की नौकरी अनुकंपा पर लगी थी और छह महीने बाद ही ये सब शुरू हो गया।
में ,-- किसने शुरू किया ।
रमेश ,-- मैनेजर साहब को सरोज मेम ने ही घर दिया था अपने घर के पास जो खाली था ।
में ,-- तो मैनेजर साहब के साथ उनका परिवार नहीं रहता ।
रमेश नजर झुका कर ,-- वो सरोज मेम के साथ परिवार की तरह ही रहते है ।
में ,-- मतलब ।
रमेश ,-- आप के बगल वाला घर ही तो है जिसकी दीवार जुड़ी है और मैनेजर साहब को परिवार की जरूरत कहा है ।
में ,-- मतलब उन्होंने शादी नहीं की ।
रमेश ,-- उनका परिवार शहर में है और वो महीने में एक बार जाते है बाकी वो मेम के पास ही रहते है और उनके घर ही खाना खाते है ।
मुझे याद आया कि मेरा घर गांव में खेत के पास ही था जहां पर ज्यादा घर नहीं थे और बगल वाला घर खाली था जो हमारे ही परिवार का था जो अब दूसरे शहर में शिफ्ट हो गए थे और पिताजी ने उनकी जमीन और घर खरीद लिया था ।
में ,-- तो मैनेजर साहब के आने के बाद शुरू हुआ ।पर ये बाकी के लोग कैसे शामिल हुए ।
रमेश ,-- मुझे बाकी का पता नहीं । हां में शुरू शुरू में दारू वगैरह पहुंचाने जाता था और कुछ दिन में मुझे मैनेजर साहब ने शामिल कर लिया तो में भी मेम की खूबसूरती की वजह से दो तीन बार गया हूं।
में ,-- मैनेजर साहब कहा के है ।
रमेश ने शहर का नाम बताया तो वो मेरे ही शहर के निकले ।मैने रमेश को आश्वासन दिया कि में उसके घर ये फोटो नहीं दिखाऊंगा तो वो थोड़ा रिलेक्स हुआ और चाय पीने लगा ।
मैने उसे विश्वास में लिया कि में उसको किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता ।बस वो मुझे मां के प्रोग्राम की जानकारी देता रहे और मैनेजर का एड्रेस वगैरह लिया तो मैने उसे पांच सो रुपये भी दिए ।
वो खुश हो गया और मुझे जानकारी देने का वादा किया तो मैने उसे हम दोनों की मुलाकात को गुप्त रखने का कहा और उसे मां से इसकी चर्चा करने पर फोटो घर भेजने का डर दिखाया तो वो किसी भी हालत में किसी को कुछ बताने की बात बड़ी आसानी से मान गया ।
मैने चाय के पैसे दिए और बाइक से वापस रवाना हुआ और जब शहर पहुंचा तो मुझे शाम हो गई और में सीधा कॉलेज पहुंचा तो शालिनी और रिया मुझे गेट के बाहर ही मिल गई ।
में दोनों को देखकर ,-- आज बर्गर नहीं खाना ।
रिया ,-- चलो।
शालिनी मुझे देख कर मुस्कराई और बोली ,-- क्या बात है आज भाईजी को फिर से बर्गर खाने का मन ही रहा है ।
में ,-- तुम जैसी हसीनाओ के साथ बर्गर खाने में मजा आता है ।
रिया मुस्करा कर,-- वो तो आयेगा ही भाई जी ।
हम कैफे में बैठे तो बर्गर ओडर हुआ और आज फिर वैसे ही बैठे थे तभी शालिनी बोली ,-- रिया , सोच लेना एक बार फिर मुझे शिकायत मत करना रजिया की तरह ।
में शालिनी को देखने लगा जो मुस्करा कर मुझे देख रही थी वहीं रिया मुस्करा कर बोली ,-- मुझे भी डर लगने लगा है यार अब मुझे पहले रजिया से मिलना पड़ेगा ।
कुछ देर में वेटर बर्गर और कॉफी दे गया तो पर्दे लग गए और रिया का हाथ मेरे लंड पर आ गया । में शालिनी की आंखों में देखने लगा जो बहुत सेक्सी थी। वो मेरी आंखों में देख कर शरमा रही थी और ज्यादा देर तक नजर नहीं मिला रही थी बीच बीच में वो रिया को देख रही थी ।
आज रिया ने वो किया जो मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी उसने मेरे पेंट की चैन खोलकर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और एक हाथ से मेरे लंड से खेलने लगी उसने शालिनी को देखा तो शालिनी मुस्करा रही थी ।
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रिया आज आराम से बर्गर खा रही थी और शालिनी भी बहुत धीरे धीरे बर्गर खा रही थी । रिया मेरे लंड से खेलते हुए मूठ मारती रही और जब मेरा वीर्य निकलने को हुवा तो उसने एक हाथ से टिश्यू पेपर लेकर मेरे लंड से लपेट लिया और उसने मेरे सुपाड़े को भींचा तो मेरा लंड वीर्य फेंक दिया जिसे उसने टिशू से साफ कर दिया ।
वीर्य फेंकते समय मेरे मुंह से सिसकी निकली तो मेरी आह निकल गई तो शालिनी मुस्करा कर बोली ,-- लगता है भाईजी को मिर्ची लग गई बर्गर में ।
में कुछ नहीं बोल पाया तो रिया ने मेरा लंड वापस पेंट में डाल दिया हमने बर्गर खत्म करके कॉफी पी और बाहर आए तो आज भी रिया ने ही पेमेंट किया और हम बाइक पर बैठे तो शालिनी मुझ से चिपक गई और बोली ,-- लगता है जनाब को बर्गर ज्यादा हो अच्छे लगने लगे है ।
में रिया के लंड सहलाने से पहले ही डाउन हो गया था। पर अब शालिनी अपने चूचे मेरी पीठ पर घिस कर मुझे फिर से गरम कर रही थी ।
मैने उसकी बात का जवाब नहीं दिया और घर पहुंच कर हाथ मुंह धोया और बनियान और बरमूडा पहन कर कुर्सी पर आकर बैठा तो शालिनी भी नाइटी वाला तीसरा पीस पहन कर आई और दो सिगरेट एक साथ जला कर बोली ,-- चाय पियोगे ।
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में ,-- अभी तो कॉफी पिए थे रहने दो ।
मुझे वो सिगरेट दी तो में उसके नजदीक कुर्सी किया और सिगरेट पीते हुए उसकी आंखों में देखने लगा।
शालिनी ,-- इसे क्या देख रहे हो सुबह से ।
में ,-- तुम्हारी ये आंखे जो तुम सुबह भी बंद कर ली और कैफे में भी नहीं मिला रही थी ।
शालिनी मुस्करा कर,-- ओह्ह तो जनाब को दो दो हसीनाओं के एक साथ मजे चाहिए थे ।
में ,-- तुम्हारी आंखों में जो नशा है वो किसी चीज में नहीं ।
शालिनी मुस्करा कर ,-- तो रिया का हाथ हटा देते फिर।
में हैरानी से उसे देखने लगा तो वो बोली ,-- रिया मेरी सहेली है और मैने ही उसे कहा था ।
में ,-- क्यों ।
शालिनी ,-- ताकि आपकी मां की इच्छा पूरी हो।
में ,-- कौनसी इच्छा ।
शालिनी ,-- आप सुने नहीं उनका बेटा रांड बाजी करे तो उनकी नजर में पुण्य का काम है ।
में ,-- तुम दे दो तो में किसी को आंख उठा कर भी नहीं देखूं ।
शालिनी ,-- मैने आपको रोका क्या की आप आंख मत उठाओ ।
में ,-- यही तो मुसीबत है । रोकती भी नहीं ना तुम ।
शालिनी ,-- तकदीर वाले हो जो ऐसी बहन मिली है।
में ,-- ये तो है । ऐसी बहन किस्मत वालों को मिलती है।
शालिनी ,-- एक एक पेग लगाएं।
में ,-- क्या बात है पर एक शर्त पर पियूँगा ।
शालिनी मुस्करा कर,-- बोलिए नवाब , अब आप को शर्त भी रखनी है ।
में ,-- मुझे तुम्हारी आंखों में देख कर पीना है ।
शालिनी , मुस्करा कर ,-- क्यों ।
में ,-- मुझे ज्यादा नशा होगा ।
शालिनी ,-- साले हरामी , तुझे शरम हया कुछ है कि नहीं अपनी जवान बहन की आंखों में देख कर शराब पियोगे।
में ,-- बस ये समझ लो तुम्हारा भाई जो बेशर्म बन कर पियेगा ।
शालिनी प्यार से मेरे गाल पर चुंबन ली और बोली ,-- कर ले अपनी मन मानी साले । चल तू भी क्या याद रखेगा । में लेकर आती हूं ।
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शालिनी उठकर अपनी सेक्सी गांड हिलाते हुए किचन में चली गई तो में उसकी गांड की थिरकन को उसकी सेक्सी नाइटी से देख कर लंड को एडजस्ट किया जो उठ चुका था ।
शालिनी ने किचन में घुसने से पहले घूम कर देखा और मेरी नजर अपनी गांड पर पाकर वो मुस्कराई तो में उसे आंख मारा।