कंचन ने उसके गाल को सहलाते हुए उससे कहा विवान ये सुनके पागल हो गया और उसके ऊपर पूरा चढ़के उसे चोदने लगा कंचन उसके नीचे दबी हुई आह्ह्ह्ह.. उह्ह्ह्ह्ह.. आह्ह्ह्ह् कर रही थी
थोड़ी देर के बाद फिर विवान ने उससे कहा ..अब अपने मालिक उपर आ जाओ
..जैसाआप कहे ..कंचन ने नशीली आवाज में कहा
कंचन की नशीली आवाज सुनके विवान और पागल हो गया और उसको जट से कमर से पकड़ के अपने ऊपर ले लिया
विवान इतना पागल हो चुका था कंचन को पलटा ते ही धक्के लगाना शुरू कर दिया उसे रुका नही जा रहा था और वो नीचे से धक्के मारने लगा था कंचन को पोजीशन में आने में थोड़ी मुश्किल हुई विवान के धक्कों से पर जैसे भी वो रह सकती थी वैसे वो अपने हाथ और पैर के जोर से अपने बदन को स्थिर कर लिया जब तक विवान धक्के लगाता रहा तब तक अपने आप को ऐसे ही रखा जब विवान रुका तो वो ठीक से अपने पंजों के बल बैठ गई और अपनी गान्ड को उपर नीचे करने लगी विवान के मुकाबले उसकी स्पीड कम थी वो मजे लेते हुए अपनी गान्ड को उपर नीचे कर रही थी उसकी स्पीड भले ही विवान के जैसे नही थी पर उसकी बलखाती हुई कमर जो उपर नीचे हो रही थी उसके हाथो की हरकतों से ऐसा लग रहा था की वो स्तन के साथ अपनी चूत भी सहला रही है उसके बाल जो चोटी से बंधे हुए पीठ से लेके गान्ड तक थे जहा विवान का लन्ड अंदर बाहर हो रहा था जिसे विवान पीछे से देख रहा था जिस से उसका जोश और बढ़ रहा था लन्ड की नशे और फूल गई थी विवान ने अपने हाथ बढ़ा के कंचन की बड़ी गान्ड को पकड़ा और फैला दिया और अपने लन्ड को अंदर बाहर होता देखने लगा उसे इतना मजा आ रहा था की उसने कंचन की पीठ पे हाथ रख के उसे आगे की और जुकने का इशारा किया कंचन उसकी इच्छा समझते हुए और आगे जुक गई और अपने घुटने के बल हो गई जिस से उसकी गांड़ और खुल गई और विवान अब और अच्छी तरह से अपने लन्ड को अंदर बाहर होता देख रहा था कंचन ने बैलेंस के लिए उसके पैर पकड़ लिए थे जितना हो सके अपनी गान्ड को बाहर की और निकाले अपनी गान्ड आगे पीछे कर रही थी
विवान ने उसे थोड़ा और आगे जूकने को कहा कंचन और आगे झुक गई इस पोजीशन में कंचन से अच्छे से लन्ड अंदर बाहर नही हो रहा था फिर भी वो विवान के लिए कुछ भी करने को तैयार थी इस पोजीशन में विवान का लन्ड नीचे की और हो गया था और घर्षण भी धीमा हो गया था फिर भी विवान को अपना लन्ड अंदर जाते हुए देखना अच्छा लग रहा था उसने कंचन की गांड़ को पकड़ के और खोल दिया और अपने लन्ड को अंदर जाता हुआ देखने लगा फिर कंचन जूक गई जिस से उसके स्तन विवान की टांगो में चुभने लगे और कंचन ने आगे बढ़ के विवान के अंगूठे को अपने मुंह में ले लिया और उसे लन्ड की तरह चूसने लगी इस नए अनुभव से विवान को और मजा आने लगा आंखे बंद कर के वो कंचन की गान्ड को पकड़ के जितना हो सके अपनी और खींच ने लगा और गान्ड का घर्षण अपने लन्ड पर करने लगा कंचन भी उसकी भावना समझ के जितना हो सके अपनी गान्ड को पीछे धकेल ने लगी फिर भी उतना घर्षण नही हो रहा था जितना वो पहले कर रही थी लेकिन विवान पे असर हो रहा था उसकी आंखे बंद होने से उसके मन में अपनी मां की लन्ड को चूसती हुई छबि बन रही थी जिस तरह से वो पैर के दोनो अंगूठों को बारी बारी चूसते हुए अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी उसका असर उसके लन्ड पर भी हो रहा था उसके मन मस्तिक में अपने मां के मुंह में लन्ड को अंदर डालके गले तक उतरने की इच्छा हुई जिसका असर लन्ड पे हुआ और लन्ड और कड़क हो गया और उपर उठने को कोशिश करने लगा लेकिन कंचन के आगे की तरफ जुके होने और गान्ड को अंदर होने की वजह से लन्ड नीचे की तरफ होके दबा रहा लन्ड अब दुखने लगा था अब उसमे जलन भी शुरू होने लगी थी