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UPDATE 80
युसुफ उसकी चुचियों को मक्खन की तरह बिलो रहा था. कभी-कभी उसके कड़क बूब्स से खेलने लगता. तो वहीं संजू की उंगली उसकी चूत में हाहाकार मचाए हुए थी. नन्ही अपनी टाँगें फैलाकर नीचे से अपनी गान्ड उठा-उठाकर संजू की उंगली को और गहराई तक लेने का प्रयास करने लगी. नन्ही की गर्मी देख कर संजू भी बहुत गरम हो उठा, अपनी उंगलियों की मदद से उसने अपने पैंट की जिप खोल दी. लन्ड को बाहर करके नन्ही के हाथ में पकड़ा दिया. नन्ही की एक जाँघ लगातार संजू के लन्ड की वाट लगाए हुए थी, साथ ही वो अपने हाथ से भी उसकी मुट्ठी मारने लगी. उत्तेजना के चरम पर पहुँच कर संजू ने अपनी दो उंगली चूत की गहराईयों में उतार दी और तेज-तेज अंदर बाहर करके एक तरह से हाथ से ही उसे चोदने लगा.
उधर युसुफ ने भी गाड़ी के अंदर के अंधेरे का लाभ लेकर अपना लन्ड भी बाहर कर लिया. उसने नन्ही को अपनी तरफ पलटा कर अपना लन्ड उसके मुँह में दे दिया. ऐसे खेलों से अंजान होते हुए भी नन्ही वासना में अंधी हो चुकी थी. उसे ये भी होश नहीं था कि उसके मुँह में कब लन्ड घुस गया. नन्ही तो युसुफ के कटे हुए टोपे पर लगे नमकीन पानी को चाटते ही और ज़्यादा मदहोश हो गयी. लॉलीपॉप की तरह युसुफ के लन्ड को चाटने लगी. बिना आवाज़ किए ये तीनों बिना किसी की परवाह किए अपने-अपने कामों लगे थे.
युसुफ का लन्ड सबसे पहले जवाब दे गया, उसने नन्ही के गले तक अपनी पिचकारी छोड़ दी. इधर नन्ही भी अपने चरम पर थी. उसके पेट में क्या जा रहा है इस बात को नजरंदाज करके उसने बहुत तेज़ संजू के लन्ड को अपनी मुट्ठी में कस लिया. नन्ही अपनी गान्ड हवा में लहराकर भलभलाकर झड़ने लगी, उसके चूतरस से संजू का हाथ तर हो गया. लन्ड को कसकर दबाने से उसके लन्ड ने भी अपना लावा उगल दिया. लन्ड की सीधी पिचकारी नन्ही की जाँघ और चूत के मुँह पर पड़ी. गरम-गरम माल की बौछार अपनी चूत की फांकों पर पड़ते ही, झड़ी हुई नन्ही की आँखें मज़े से फिर मूंद गयी. मुँह में युसुफ के माल का स्वाद, हाथ, जाँघ, चूत संजू और खुद के पानी से लथपथ. जब तीनों को सुकून मिला तब होश आया.
संजू ने अपना हाथ चाटते हुए चटकारा सा लेकर बोला – नन्ही बड़ी नमकीन लौंडिया है यार..
संजू की बात सुनकर नन्ही बुरी तरह शरमा गयी. अपना लहँगा नीचे सरकाते हुए फुसफुसाई - मेरे घर आना आप दोनों.
अभी युसुफ कोई जवाब देता, मॅजिक झटके से रुक गया. धीरे-धीरे करके भीड़ खाली हुई, लास्ट में वो तीनों भी निकले.
नन्ही ने अपना थैला उठाया, नज़र झुकाए बोली – मैं इंतजार करूँगी… आना ज़रूर…
इतना कहकर वो किसी चंचल हिरनी की तरह कुलाँचें भरती हुई अपने घर की तरफ भाग गयी. पीछे से वो दोनों उसके लहंगे में थिरकती गान्ड को देखते हुए अपने-अपने लन्ड सेट कर के युसुफ के घर की तरफ बढ़ गये. युसुफ का घर बहुत छोटा सा ही था, कम हाइट के दो छोटे से कच्ची मिट्टी की ईंटों के कोठे बने हुए थे. मुख्य दरवाजे से घुसते ही एक आधी खुली और आधी छप्पर पड़ी थोड़ी सी जगह दोनों कोठों के सामने थी, जहाँ एक कोने में नहाने धोने के लिए लकड़ी के पुराने पत्तों से आड़ बनाकर एक पत्थर रख कर बनाया हुआ था. उसके ठीक बगल में ही खाना पीना बनाने के लिए छप्पर के नीचे चौका बना रखा था. इस समय परिवार के सभी लोग बड़ी बेटी वहीदा को छोड़कर चौके के आस-पास बैठे सुखी रोटियाँ लाल मिर्च की चटनी के साथ खा रहे थे. बीच वाली रेहाना रोटियाँ बना रही थी. वहीदा कहीं बाहर गयी थी, शायद किसी के सिले हुए कपड़े देने. दरवाजे को धकेल कर जब वो दोनों घर में प्रवेश हुए तो बूढ़ी आँखें अपने बेटे को देख कर ख़ुशी से चमक उठी, छोटी बहन रुखसार अपने भाई जान को देख कर चहकते हुए दरवाजे की तरफ दौड़ी और जाकर उसके गले से लग गयी. अपनी छोटी बहन रुखसार के गुदाज उभारों का दबाव अपने सीने पर पाकर युसुफ का लन्ड जो कुछ देर पहले ही पिचकारी मार चुका था, पाजामा में फिर से कुलबुलाने लगा.
युसुफ ने भी रुखसार के गोल-मटोल वॉलीबॉल जैसे कूल्हों पर हाथ फेरकर सहलाते हुए कहा – कैसी है मेरी गुड़िया??
रुखसार ने अपने भाई की आँखों में देखा, जानना चाहा कि आपका ये हाथ किस मकसद से मेरी गान्ड सहला रहा है?? फिर मुस्कराते हुए और ज़ोर से उससे चिपकते हुए बोली.
रुखसार – मैं तो ठीक हूँ, आप सुनाओ… कितने दिनों के बाद याद आई हम लोगों की और ये भाई कौन हैं??
युसुफ ने हल्के से रुखसार के एक चूतड़ को दबा दिया, फिर अपने से अलग करते हुए बोला – यहाँ लौटने लायक मैं बन ही नहीं पाया अब तक. जब इस लायक हुआ कि तुम सब लोगों को कुछ दे सकूँ तो दौड़ा चला आया. ये मेरा सबसे अज़ीज़ दोस्त संजू है अब ये भी हमारे परिवार का हिस्सा ही है.
फिर युसुफ पास जाकर अपने अब्बू-अम्मी को सलाम किया. संजू ने भी अपने हाथ जोड़ दिए. राज़ी ख़ुशी आदान प्रदान हुई. बातों-बातों में युसुफ ने उन्हें बता दिया कि दो दिन में ही हम लोग यहाँ से शहर में शिफ्ट हो रहे हैं. ज़रूरत का समान ही ले लेना, फालतू का यहाँ किसी को दे देना. फिर दोनों बारी-बारी से हाथ मुँह धोकर फ्रेश हुए. बेचारी रुखसार ने कहीं से साग भाजी का इंतजाम किया.
तब तक वहीदा भी आ गयी. वो भी अपने भाई के गले मिली. वहीदा के आगे पीछे के साइज़ को देख कर तो युसुफ का लन्ड पूरा ही खड़ा हो गया. वहीदा के गले मिलते ही युसुफ के लन्ड ने अपने लिए बिल तलाश कर लिया. युसुफ का लन्ड वहीदा की चूत के मुहाने पर जाकर ठोकरें देने लगा. खा-पीकर गांव में वैसे भी जल्दी सोने की आदत है, करें भी तो क्या? और कोई काम भी तो नहीं, बिजली होती नहीं, मनोरंजन के साधन कुछ थे नहीं. अब दो छोटे-छोटे कोठे थे उनमें ही इन सभी को एडजस्ट होना था.
वहीदा अपने अम्मी-अब्बू के साथ सोती थी, उसी में युसुफ का भी बिस्तर ज़मीन पर लगा दिया. दूसरा कोठा जिसमें सिलाई की मशीन, पास में एक 6” ऊँची तख़्ती सी पड़ी थी. जिसपर कपड़ों की काट छांट और इस्त्री वग़ैरह करते थे, उसी को साफ करके दोनों छोटी बहनें सो जाती थी. बाकी का कोठा कपड़ों से भरा होता था. जगह ही कितनी थी?
अब संजू को भी उसी कोठे में एडजस्ट करना था. तख़्ती दो के ही लायक थी, तीसरे की तो किसी भी सूरत में गुंजाइश हो ही नहीं सकती. चलो तीनों लड़कियाँ हो तो एडजस्ट कर भी लें. तो फिर कपड़े एक तरफ करके थोड़ी और जगह की और ज़मीन पर ही उसके लिए भी एक दरी डालकर बिस्तर का इंतज़ाम किया गया.
अभी लेटे हुए उन्हें कोई एक घंटा भी नहीं हुआ था, कि संजू को बाहर कुछ ख़ुसर-पुसर सी सुनाई दी. कुछ देर तो वो ये अनुमान लगाता रहा कि ये आवाज़ घर के बाहर से आ रही हैं या अंदर से? फिर जब उसे कन्फर्म हो गया तो वो चुपके से उठा और जाकर दरवाजे के बीच की झिरी से आँख सटा कर बाहर देखने की कोशिश करने लगा. कुछ देर तो उसे कुछ नहीं दिखा बस आवाज़ें ही सुनाई दे रही थी, जो शर्तिया युसुफ और उसकी बहन वहीदा की थी. कुछ देर में उसकी आँखें अंधेरे की अभ्यस्त हो गयी और जैसे ही उसे बाहर का दृश्य क्लियर सा हुआ, जिसे देखते ही एक साथ उसके लन्ड ने ठुनकी सी लगाई.
युसुफ वहीदा को पीछे से जकड़े हुए था और उसके दोनों हाथ उसकी बड़ी-बड़ी 36” की चुचियों पर जमे हुए थे जिन्हें वो बड़ी बेदर्दी से मसल रहा था. युसुफ का लन्ड खड़ा होकर वहीदा की गान्ड में घुसा जा रहा था.
वहीदा बुरी तरह सिसक कर बोली – आआहह… भाई जान धीरे से मसलो ना… और कितने बड़े करोगे इनको??? अभी तो मेरा निकाह भी नहीं हुआ उससे पहले ही ये इतने बड़े हो गये है. बाहर चलते हुए जब हिलते हैं तो मुझे बड़ी लज्जा आती है. अब जल्दी से मेरा निकाह करवाओ… वरना कोई करेगा भी नहीं…
युसुफ – बस मेरी बहना.. शहर में शिफ्ट होते ही सबसे पहले तेरा निकाह पक्का.. कोई अच्छा सा लड़का मिलते ही सबसे पहला काम यही करूँगा..
शहर का नाम सुनते ही वहीदा पलट गयी. अपने भाई के गले से लिपट कर वहीदा के होंठों का रस चूसकर बोली – क्या सच भाई जान?? हम लोग शहर में शिफ्ट होंगे??
युसुफ ने वहीदा का कुर्ता उतार दिया. एक पुरानी सी ढीली ढाली ब्रा से बाहर उबल पड़ रहे उसके सुडौल मोटे-मोटे चुचों को देख कर युसुफ बावला सा होकर वहीदा के बूब्स पर टूट पड़ा. वहीदा ने भी युसुफ के पाजामा को नीचे खिसका दिया और उसके तन्नाए लन्ड को अपनी चूत की मोटी-मोटी फांकों पर घिसते हुए बोली – शहर में आप लोग क्या करोगे??
युसुफ का अपनी बहन के मखमली गुदाज बदन की गर्मी से बुरा हाल होने लगा था. ऊपर से वहीदा युसुफ के लन्ड को लगातार अपनी गीली चूत पर रगडे जा रही थी. वहीदा को पलटा कर युसुफ ने दीवार के सहारे झुका लिया. पीछे से वहीदा की गदरायी गान्ड पर हाथ फिराते हुए युसुफ बोला
युसुफ – पहले तो मैं अपनी सेक्सी बहन को जी भर कर चोदूँगा, उसके बाद बताता हूँ…
इतना कहकर युसुफ ने अपना गरम लन्ड वहीदा की चूत के छेद पर अड़ा दिया और सर्रर्रर्ररर.. से एक झटके में ही पूरा अंदर तक पेल दिया. वहीदा के मुँह से एक बेहद ही कामुक सिसकी निकल पड़ी.
साथ ही संजू का लन्ड भी उसके पाजामा के अंदर फुल फॉर्म में आ गया, वो लगातार बाहर झाँक कर उस गरम सीन में खोया हुआ था. उसे पता भी नहीं चला कि कब वो दोनों घोड़ियाँ आकर उसके आजू-बाजू खड़ी हो गयी. खड़ी ही नहीं हुई, बल्कि दोनों तरफ से वो संजू के बदन से सट कर अपने बदन को उसके साथ रगड़ने लगी…
जब संजू को इस बात का एहसास हुआ तो उसने बारी-बारी से दोनों की तरफ देखा, मानो उसकी कोई चोरी पकड़ी गयी हो. उस अंदाज में संजू ने अपनी गर्दन झुका ली.
रेहाना ने संजू की चौड़ी छाती को सहलाते हुए कहा – यहाँ क्यों खड़े हैं जनाब?? बाहर कोई तमाशा हो रहा है क्या??
संजू पीछे हटना चाहता था, लेकिन रेहाना ने मजबूती से जकड़ कर संजू को हिलने भी नहीं दिया और रुखसार से बोली.
रेहाना – देख तो रुखसार.. बाहर जनाब क्या नज़ारा देख रहे थे??
वैसे तो उन दोनों को भी पता था, फिर भी रुखसार ने झाँक कर देखा, जहाँ युसुफ हुंकार भरते हुए अपनी बहन की पीछे से चुदाई कर रहा था. युसुफ की जांघों की ठप-ठप जब वहीदा के चुतड़ों पर पड़ती, तो उनमें मानो भूचाल सा आ जाता और वो दोनों सागर की लहरों की लहराकर ऊपर को हो जाते.
रुखसार – हाय… रेहाना… क्या गरमा-गरम चुदाई हो रही है?? दीदी और भाई की… देख तू भी देख…
संजू समझ गया कि ये तीनों ही बहनें चुदक्कड़ हैं… और इन्हें अपने ही सगे भाई से चुदवाने में कोई एतराज़ नहीं है…
संजू पीछे खिसकते हुए बोला - तुम दोनों मज़े लो. मैं चला सोने…
लेकिन जैसे ही संजू पलटा, पीछे से रुखसार संजू से चिपकते हुए बोली – अब इतना अच्छा सीन तो आप ही की वजह से देखने को मिला है… तो इसका समापन भी तो तुम्हें ही करना पड़ेगा जनाब…
संजू रुखसार के हाथ हटाते हुए बोला – यहाँ खड़े-खड़े ही चुदना चाहती हो.. अपनी दीदी की तरह??
संजू के मुँह से रज़ामंदी भरे शब्द सुनकर दोनों घोड़ियाँ कुलाँचें भरती हुई अपनी तख़्ती पर जा जमी. बीच में संजू के लिए जगह बनाकर वो दोनों बड़ी बेसब्री से संजू का इंतजार करने लगी... बाहर का गरमा गरम स्टेज शो कुछ देर और चला, फिर वहाँ एक दम से शांति छा गयी. गरम-गरम आहों का बाज़ार अब थम चुका था. इसका मतलब उन दोनों का कार्यक्रम अब समाप्त हो चुका था. लेकिन उसकी वजह से इस छोटे से कोठे का तापमान काफ़ी बढ़ चुका था…
दोनों बहनों को उनके अपने सगे भाई बहन की चुदाई के सीन ने इतना ज़्यादा कामोत्तेजित कर दिया था कि अब उन्हें संजू के उस दो कदम के फ़ासले को भी सहन करना दूभर लग रहा था. दोनों की चूत में मानो भट्टियाँ जल रही थीं. रेहाना एक हाथ से अपनी चूत को सहलाते हुए दूसरे हाथ की उंगली को अपने मुँह में डालकर चूसते हुए बोली.
रेहाना – क्या नई नवेली दुल्हन की तरह आ रहे हो.. जल्दी करो ना…
संजू के उन दोनों के पास आने तक उन दोनों ने समय बरबाद ना करते हुए अपने-अपने कुर्ते निकाल फेंके. उन दोनों हवस में अंधी हो रही जवान घोड़ियों को इस अवस्था में देखकर संजू का लन्ड उसके पाजामे में कबड्डी खेलने लगा. उसे लगा कि कहीं साला कपड़े फाड़कर बाहर ना निकल पड़े. जैसे ही संजू उन दोनों के सामने जाकर खड़ा हुआ, रेहाना के सब्र का बाँध टूट गया. बड़ी बेदर्दी से संजू का हाथ पकड़ कर एक ज़ोर का झटका दिया, वो धप्प से उन दोनों के बीच में फँस गया. संजू ने अपने एक-एक हाथ को उनकी गर्दन के पीछे से निकाल कर दोनों की एक–एक चुचि पर कब्जा जमा लिया. उन्हें तेज़ उमेठते हुए बोला
संजू – तीनों बहनें बड़ी गरम माल हो तुम लोग..
रुखसार ने संजू के पाजामे को नीचे सरका दिया. अंडरवियर के ऊपर से ही संजू के तनतनाते लन्ड को मुँह दबोचते हुए बोली.
रुखसार – यहाँ भी कुछ कम गर्मी नहीं है जनाब…
संजू के मुँह से एक कराह निकल गयी – सस्सिईईईई.. आअहह… उसके थोबड़े को क्यों मसल रही है??
इतना कहकर संजू ने रुखसार के होंठों को अपने मुँह में भर कर चब-चबा डाला. रुखसार बस मुँह ही मुँह में गूँ… गूँ… करती रह गयी.
दूसरी तरफ रेहाना ने संजू के टीशर्ट और अपनी ब्रा को नोच डाला और अपनी 34” के बूब्स को संजू की चौड़ी कठोर छाती से रगड़ने लगी. रेहाना के निप्पल कड़क होकर जंगली बेर जैसे हो गये. रुखसार ने होंठ चुसाई करते हुए ही हल्के से अपनी गोल-मटोल गान्ड अधर की और अपनी पजामी को भी टाँगों से बाहर निकाल दिया. अपने बूब्स को संजू के सीने से रगड़ती हुई रेहाना ने पैंटी के ऊपर से ही अपनी छोटी बहन रुखसार की चूत को सहला दिया. मज़े से रुखसार की कमर और आगे को सरक गयी. संजू होंठों के साथ-साथ रुखसार की चुचियों को भी मथ रहा था. पुरानी अंगिया ना जाने कब धाराशाई हो चुकी थी. इधर रेहाना ने भी रुखसार की पैंटी सरका दी और अब वो रुखसार की चूत में अपनी उंगलियाँ डालकर उसे चोद रही थी. रुखसार से ये दोहरा हमला सहन नहीं हुआ, उसकी चूत लगातार रस छोड़ने लगी थी. चूत की गर्मी ने उसे इतना बहाल कर दिया कि संजू की छाती पर अपनी हथेली का भार डालकर उसे तख़्ती पर धकेल दिया. रुखसार अपनी गरम दहकती चूत को संजू के लन्ड पर सेट कर के उसपर बैठती चली गयी. पूरा लन्ड अंदर पहुँचते-पहुँचते रुखसार के मुँह से एक बेहद मादकता भरी आहहह… निकल गयी. आअहह… उउउम्म्मन…. जिसे सुनकर संजू अपनी गान्ड उचकाते हुए बोला.
संजू – क्यों रुखसार… बिना कटे लन्ड को लेकर मज़ा आया कि नहीं??
रुखसार - हाय अल्लाह… कितना लंबा है… उउउफफफ्फ़… बड़ा मज़ा दे रहा है ये तो…
कहते हुए रुखसार संजू के लन्ड पर कूदने लगी. कुछ देर बाद संजू ने भी नीचे से धक्के लगाना चालू कर दिया. उन दोनों की मदमस्त चुदाई देख कर रेहाना का हाल बेहाल होने लगा. अब रेहाना की चूत में भी बुरी तरह से चींटियां सी काटने लगी थी. रेहाना की चूत में लगी आग का जल्दी ही बुझना ज़रूरी था. रेहाना को इन दोनों की चुदाई जल्दी खतम होने के आसार नज़र नहीं आ रहे थे. तो उसने भी अपनी पैंटी निकाल फेंकी और रुखसार की तरफ मुँह करके वो संजू के मुँह पर अपनी चूत रख कर बैठ गयी. संजू ने भी उसकी मस्त सेक्सी मदमाती मखमली गान्ड पर थपकी देकर उसकी गीली चूत के रस को अपनी जीभ डालकर चपर-चपर चाटने लगा. दोनों बहनें किसी बैलगाड़ी के हिचकोलों की तरह संजू के ऊपर और नीचे लहरा रही थी. दोनों के हाथ एक दूसरी की चुचियों पर जम गये और वो दोनों आपस में एक दूसरी के होंठ भी चूसती जा रही थी. तीनों की आहों कराहो से उस छोटे से कोठे का तापमान बहुत बढ़ चुका था, वातावरण में चुदाई की खुशबू महकने लगी थी.
कुछ देर में ही रुखसार अपना पानी निकाल बैठी. तूफ़ानी रफ़्तार से अपनी गान्ड को आगे-पीछे घिसते हुए रुखसार भलभलाकर झड़ने लगी. थोड़ी देर तक रुखसार यूँ ही शांत संजू के ऊपर बैठी रही. उधर रेहाना का लावा भी फूटने वाला था. रेहाना भी अपनी चूत को संजू के मुँह पर दबाकर झड़ने लगी और अपना सारा अमृत कलश संजू के मुँह में खाली कर दिया. फिर दोनों ने बारी-बारी से संजू के लन्ड को चूसा. कुछ देर में ही उन दोनों ने बराबर-बराबर मात्रा में उसके लन्ड का प्रसाद अपने पेट में उतार लिया. चुसाई से रेहाना की चूत की खुजली कम होने की बजाए और तेज हो गयी थी, जो आग एक मोटे लन्ड के चूत की दीवारों से रगड़ने से बुझनी चाहिए वो जीभ से कहाँ बुझने वाली थी. रेहाना ने संजू के होश लौटने का भी इंतजार नहीं किया और संजू के मरे चूहे जैसे मुरझाए लन्ड पर बुरी तरह टूट पड़ी. संजू भी आख़िर जवान मर्द था, दो मिनट में ही उसका लन्ड फिर से टनटना कर दूसरी चूत में जाने के लिए तैयार था. घोड़ी बनाकर इस बार रेहाना की चूत की उसने वो चुदाई की, वो हाय तौबा मचाती हुई उसके लन्ड पर अपनी गान्ड पटक-पटक कर चुदने लगी. दोनों ही बहनें बहुत ही गरम माल निकली. पूरी रात वो तीनों जागकर भरपूर चुदाई का मज़ा लूटते रहे. संजू की सारी टंकी उन दोनों ने खाली कर दी और खुद भी खाली हो गयी.
दूसरे दिन खाना खा पीकर युसुफ गांव में अपने यार दोस्तों से मिलने चला गया. संजू से पूछा तो उसने रात की थकान के कारण मना कर दिया. मौके का फ़ायदा उठाकर उन दोनों घोड़ियों ने वहीदा को भी संजू से चुदवा दिया. ये घोड़ी तो बिल्कुल खोखली निकली. संजू को उसकी चूत मारने में बिल्कुल मज़ा नहीं आया. फिर उसने लौड़े को चूत से निकालकर उसकी गान्ड में डाल दिया. हिनहिना कर वो घोड़ी उसके लन्ड को गान्ड में भी आसानी से ले गयी.
गान्ड पर थप्पड़ लगाते हुए संजू ने कहा – तू तो सब तरफ से खोखली है वहीदा. बहुत लन्ड खोर लगती है, कितने ले चुकी है अब तक??
वहीदा ने अपनी गान्ड पीछे धकेलते हुए कहा – तुझे जैसे मज़ा मिलता है वैसे ले ना… लन्ड की गिनती जानकर क्या करेगा??? मैं चुदने के मामले में कभी परहेज नहीं करती, जैसा मिले ले लेती हूँ…
एक बार वहीदा की गान्ड में अपना पानी निकाल कर संजू गहरी नींद में डूब गया. तीसरे दिन उन सबने कुछ ज़रूरत का समान एक टेंपो में लादा और शहर की तरफ रवाना हो लिए. शहर में इतना बड़ा और अच्छा मकान देख कर युसुफ के परिवार वाले खुश हो गये. जहाँ जिसको अच्छा लगा अपना डेरा जमा दिया. थोड़े ही दिनों में उनके धंधे का खोम्चा इस शहर में जम गया. उनके ही गैंग के एक वफादार मुस्लिम जो तलाकशुदा था, उससे वहीदा का निकाह करा दिया. तीनों बहनें भी उसी धंधे में लग गयी. हिजाब में छुपा कर माल सप्लाई करने में वो माहिर हो गयी. कोई येड़ा कस्टमर होता उसे वो अपने हुस्न-शबाब के दर्शन कराकर काम निकाल लेती थी. उन्हें अपना काम निकालने के लिए किसी के सामने चूत खोलने पर भी कोई एतराज नहीं होता था.
कुछ ही दिनों में युसुफ और संजू गैंग ने अपने झंडे गाड़ दिए. उनकी परफॉरमेंस देख कर लीना बहुत खुश थी. उसने भी अपना मुंबई का धंधा कुछ भरोसेमंद लोगों को सौंपा, खुद भी इसी शहर में एक अच्छा सा बंगला खरीद कर शिफ्ट हो गयी. दिन-दूनी रात चौगुनी तरक्की से वो कुछ ही दिनों में एक छोटी-मोटी ड्रग डीलर से एक बड़े माफिया ग्रुप में तबदील हो गये..