UPDATE 23
ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह ने पापा से मिलकर सबसे पहले हाथ जोड़कर अपने बेटे के व्यवहार के लिए माफी माँगी. एक दूसरे से बड़े अपनेपन से मिले. घर-परिवार की चर्चा की और भविष्य में आपस में संबंध अच्छे रहें इस बात का आश्वासन दिया और कुछ देर बैठकर चाय नाश्ता लेकर वो चले गये. उनके जाने के बाद पापा ने मुझे अपने पास बुलाया, और उनके साथ जो भी बात-चीत हुई, वो सब उन्होंने बताते हुए कहा.
पापा - बेटा अंकुश! ठाकुर साहब ने कहा है, कि अब इस बात को यहीं खतम करो, तो मैं चाहता हूँ, तुम अपनी तरफ से उनके बच्चों के प्रति कोई बैर मत रखना.
मैंने हां में अपनी सहमति जताई, और अपने कमरे में आकर कुछ देर के लिए सो गया. 3 बजते ही मैं और कामिनी भाभी गाड़ी लेकर चल दिए ग्राउंड की ओर. मेरे मन में उथल-पुथल मची हुई थी. कामिनी भाभी की कल की हरकतों ने मुझे मेरे लंड तक हिला दिया था, ना जाने आज क्या होने वाला था?? कल का वाक़या याद करते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा और उसने पाजामे के अंदर तंबू बनाना शुरू कर दिया.
जान बूझकर मैंने आज काफ़ी पुराना पड़ा हुआ फ्रेंची पहना था, जिससे उसका कपड़ा काफ़ी लूज़ हो गया था, उसमें मेरे लौड़ा आज कुछ कम्फर्टेबल फील कर रहे था. उसकी लंबाई आज ऊपर से पाजामे के बावज़ूद भी कुछ ज़्यादा ही लग रही थी. कामिनी भाभी गाड़ी चलाते हुए बीच-2 में मेरी तरफ मुँह कर के बातें भी करती जा रही थी. लाख छुपाने के बावज़ूद भी कामिनी भाभी की नज़र मेरे तंबू पर पड़ गयी, जिसे देखकर उनके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान तैर गयी.
मैदान में पहुँचकर कल की तरह अपने कामिनी भाभी ने अपने कपड़े चेंज किए और मुझे ट्रायल देने को कहा. कई बार की कोशिशों के बाद भी मैं गाड़ी को ठीक से चला नहीं पाया. हर बार गाड़ी झटके मार कर बंद हो जाती.
कामिनी भाभी – क्या बात है अंकुश?? अभी भी तुम्हारा क्लच के ऊपर पैर का कंट्रोल सही नहीं आ रहा. खैर कोई बात नहीं धीरे-धीरे आ जाएगा. चलो कल की तरह ही चलाते हैं.
आज कामिनी भाभी के कपड़े कल से भी ज़्यादा टाइट थे. उनके बूब्स आज टाइट टॉप की वजह से थोड़े दबे हुए से लगे, जिसकी वजह से कामिनी भाभी की बगलें ज़्यादा मांसल दिख रही थी, और ऊपर से कुछ ज़्यादा ही दर्शन हो रहे थे. नीचे तो कहने ही क्या?? एक बहुत ही सॉफ्ट कपड़े की लोवर में कामिनी भाभी की पैंटी का आकर भी साफ-साफ पता चल रहा था. मुझे लगा जैसे कामिनी भाभी की पैंटी गान्ड की तरफ तो ना के बराबर ही रही होगी. कामिनी भाभी के दोनों बम्स एकदम गोल मटोल, एकदूसरे से जुड़े-जुड़े मानो दो बॉल फेविकॉल से चिपका दिए हों.
जब कामिनी भाभी अपनी एक टाँग अंदर डाल कर मेरी गोद में बैठने को हुई, तो उनकी गान्ड का दूसरा भाग, किसी फुटबॉल की तरह और ज़्यादा पीछे की तरफ उभर गया. सीन देखते ही मेरे लौड़े ने एक जोरदार झटका खाया, और मेरा लंड एकदम से फ्रेंची में तन गया. बीच की दरार एकदम से क्लियर ही दिखाई दे रही थी. कपड़े का जैसे कोई कतरा ही नहीं दिख रहा था. आज कामिनी भाभी शायद ये ठान के आई थी, की मेरा पानी निकलवा कर ही रहेंगी.
कामिनी भाभी आज कुछ आगे को झुक कर बैठ गयी मेरी गोद में. जिससे उनकी गान्ड की दरार का ऊपरी भाग मेरे लंड के ठीक सामने आ गया. मेरा लंड तो वैसे भी फ्रेंची के अंदर फड़फड़ा रहा था, ऊपर से फ्रेंची का कपड़ा भी आज उसे कंट्रोल में रख पाने में असमर्थ लग रहा था. कामिनी भाभी के गान्ड के एलिवेशन को देखकर तो मेरा लंड सारी हदें तोड़ने पर आमादा होने की कोशिश करने लगा. बेचारा फ्रेंची जैसे-तैसे कर के उसे संभाले हुए था.
बैठने के समय कामिनी भाभी ने हल्का सा गैप बना के रखा था. मैंने गाड़ी स्टार्ट की और उनके पैर के गाइडेंस से क्लच छोड़ने से आगे बढ़ गयी. गाड़ी के आगे बढ़ते ही आज कामिनी भाभी ने अपना पैर मेरे पैर से हटा लिया. कुछ देर बाद उन्होंने मुझे गियर चेंज करने को कहा. मैंने क्लच दबा कर दूसरा गियर डाला. क्लच छोड़ने में फिर से थोड़ा झटका सा लगा. जिससे कामिनी भाभी की तशरीफ़ पीछे को खिसक गयी, और हमारे बीच का गैप खतम हो गया. अब मेरे लंड को उसकी फ़ेवरेट जगह मिल चुकी थी.
आज मेरा स्टीयरिंग पर कंट्रोल कल के मुक़ाबले अच्छा था. हम 20-25 की स्पीड तक गाड़ी को कुछ देर चलाते रहे. कामिनी भाभी के बम्स की दरार में मेरे लंड की उछल कूद जारी थी. कुछ देर बाद कामिनी भाभी के कहने पर मैंने थर्ड गियर भी डाल दिया. अब गाड़ी तेज चलने लगी. लेकिन मुझे कुछ डर सा लगने लगा.
मैंने कहा – ओह कामिनी भाभी! ये तो बिना एक्सेलेटर के ही इतनी तेज भाग रही है.
कामिनी हँसते हुए बोली – भागने दो ना अंकुश! थर्ड गियर में है, भागेगी ही. तुम बस स्टीयरिंग को संभाले रखो. अगर ज़रूरत हो तो बस ब्रेक मार देना. हल्के से…
बातों-बातों में कामिनी भाभी ने अपने कूल्हों को थोड़ा सा और पीछे को दबा दिया. मेरा लंड कड़क होने लगा. उसकी हार्डनेस फील करते ही कामिनी भाभी बोली.
कामिनी भाभी – आउच… अंकुश… मेरे पीछे कुछ चुभ सा रहा है???
मैंने कहा – भाभी आप थोड़ा सा आगे खिसक जाओ.
तो कामिनी भाभी स्माइल करते हुए बोली – नहीं अंकुश… मुझे कोई दिक्कत नहीं है… मेरे आगे होने से मेरे पैरों को मूव्मेंट नहीं मिलेगी. तुम्हें तो कोई प्राब्लम नहीं है ना???
मैंने कहा - मुझे तो कोई प्राब्लम नहीं है भाभी… वो आपको कुछ चुभा था न… इसलिए मैंने बोला…
इतना सुनते ही कामिनी भाभी ने अपनी पीठ भी मेरे सीने से सटा दी. उनकी बगलों की मांसलता मेरी बाजुओं को छुए जा रही थी. मेरी साँसें कामिनी भाभी के गाल को सहलाने लगी. कामिनी भाभी के ऊपर मदहोशी सी छाने लगी और कामिनी भाभी ने अपनी गान्ड को मेरे लंड के ऊपर और ज़्यादा दबाया.
कामिनी भाभी ने अपनी बाजुओं को मेरी बाजुओं के ऊपर से बाहर की साइड से लाकर स्टीयरिंग पर रख लिया. अब कामिनी भाभी के गुदाज बूब्स साइड से मेरी बाजुओं पर फील हो रही थी. इधर मेरा लंड कामिनी भाभी की गान्ड की दरार में फिट हो चुका था, जो बीच-बीच में झटके मार देता था. इस चक्कर में एक बार मेरा कंट्रोल स्टीयरिंग से हट गया. गाड़ी 30-35 की स्पीड में लहरा उठी. मैंने फिर से अपने ऊपर कंट्रोल किया और गाड़ी को संभाला.
बीच-बीच में कामिनी भाभी अपने एक हाथ को अपनी जांघों के बीच लाकर अपनी चूत को सहला देती और इधर-उधर होकर मेरे लौड़े को अपनी गान्ड की दरार से रगड़ देती. कामिनी भाभी के इधर-उधर होने के मूवमेंट से उनकी चुचियों की साइड मेरे बाजुओं से दब जाती, जिसके मखमली अहसास से मेरा हाल बेहाल हो रहा था.
डेढ़ घंटे की प्रैक्टिस में हम दोनों के शरीर दहकने लगे. इससे पहले कि बात कंट्रोल से बाहर हो. मैंने गाड़ी रोक दी क्योंकि मेरा लंड फूल कर फटने की कगार तक पहुँच गया था. मुझे लगने लगा कि मेरा पानी छूटने ही वाला है. अगर ऐसा हो गया तो कामिनी भाभी ना जाने क्या सोचेंगी मेरे बारे में. मैंने गाड़ी रोक दी, झटके की वजह से कामिनी भाभी की आँखें खुल गयी और मेरे से पूछा.
कामिनी भाभी – क्या हुआ अंकुश?? गाड़ी क्यों रोक दी???
मैंने कहा – आज के लिए इतना ही काफ़ी है भाभी.
कामिनी भाभी ने मुस्करा कर कहा - ठीक है. कल चौथे गियर की प्रैक्टिस करेंगे और कामिनी भाभी मेरे आगे से उठ गयी.
मैं फ़ौरन सीट से उठा और अपनी लिट्ल फिंगर दिखा कर झाड़ियों की तरफ भागा. मैं जल्द से जल्द अपने लौड़े को रिलीस करना चाहता था. मेरी तेज़ी देख कर कामिनी भाभी समझ गयी और मंद-मंद मुसकुरातीं रही. झाड़ियों के पीछे जाकर आज मुझे अपने लंड को मुठियाना ही पड़ा. कुछ ही पलों में मेरे लंड ने इतनी तेज माल की पिचकारी मारी कि वो कम से कम 5-7 फीट दूर तक चली गयी. जब लंड का टेंशन रिलीस हुआ तब जाकर मुझे शांति मिली.
यही सब एक हफ्ते तक चलता रहा. मेरा गाड़ी पर अच्छा कंट्रोल आने लगा था. आज जब हम लौटने लगे तो कामिनी भाभी ने कहा.
कामिनी - कल तुम्हारा लास्ट ट्रेनिंग सेशन होगा. कल तुम्हें बैक गियर की प्रैक्टिस करनी है. उसके बाद आपकी ट्रेनिंग पूरी.
अब मैं घर से मैदान तक गाड़ी खुद ही चलाकर ले जाने लगा था. आज गाड़ी सीखने का लास्ट दिन था, इस लास्ट सेशन में गाड़ी को रिवर्स गियर डालकर चलाने का तरीक़ा सीखना था. मैं घर से ग्राउंड तक गाड़ी को अच्छी स्पीड से चलाकर ले गया.
कामिनी भाभी ने मेरी ड्राइविंग को एप्रीसिएट करते हुए कहा - वाह अंकुश… तुम तो एकदम मंजे हुए ड्राइवर की तरह चलाने लगे… वेल डन अंकुश!!
अब कामिनी भाभी मेरे आगे नहीं बैठती थी, लेकिन अलग-अलग तरीकों से मुझे सिड्यूस करना उन्होंने बंद नहीं किया था. कभी समझाने के बहाने मेरी जांघों को सहला देना, तो कभी जान बूझकर मेरे लंड पर हाथ रख देना, बाद में सॉरी बोलकर जताना कि ये अनजाने में उनसे हुआ हो जैसे.
ना जाने उनके मन में क्या चल रहा था. लेकिन मैंने अपने मन में ठान लिया था कि किसी भी परिस्थिति में पहल मेरी तरफ से नहीं होगी. चाहे जैसे भी हो, मुझे अपने आप पर कंट्रोल बनाए रखना ही होगा. उधर भाभी भी दिनों-दिन मेरे धैर्य की परीक्षा ले रही थी. नित नये तरीक़े अपनाकर मुझे उनके साथ पहल करने पर मजबूर करने की कोशिश में लगी थी. आज उन्होंने फिर से कपड़े चेंज किए, जो पिछले दो दिन से बंद कर दिए थे.
मैंने पूछा - अब क्यों चेंज कर रही हो कामिनी भाभी??
कामिनी भाभी – अंकुश, आज तुम्हें नया सबक सीखना हैं, एंड आई आम श्योर, वो तुम मेरे बिना नहीं कर पाओगे.
कामिनी भाभी चेंज कर के जैसे ही गाड़ी से बाहर आईं. मेरा मुँह खुला का खुला रह गया. मैंने उनसे ऐसे कपड़ों की उम्मीद कतई नहीं की थी. कामिनी भाभी एक स्लीवलेस वेस्ट पहने हुए थीं, जो बहुत ही लो कट था. उस वेस्ट में से उनकी आधी से अधिक बूब्स नंगे दिखाई दे रहे थे और वो स्लीवलेस वेस्ट उनकी 34 साइज़ की चुचियों से कुछ ही नीचे तक कवर कर रहा था.
कमर से नीचे कामिनी भाभी ने एक बहुत ही सॉफ्ट कपड़े का मिनी स्कर्ट डाला हुआ था, जो झुकने पर पैंटी की झलक भी दिखा रहा था. मिनी स्कर्ट मात्र 8-10 इंच ही लंबा ही था, जो कमर की हड्डियों पर ही टिका हुआ था और पीछे से उनकी बम्स की ऊपरी दरार भी दिख रही थी. कमर पर उनकी पैंटी की एक डोरी जैसी ही दिखी मुझे, जो उनकी गान्ड की दरार में फँसी दिखाई दे रही थी. नीचे वो सिर्फ़ गान्ड की गोलाईयों के खतम होने से पहले ही उसकी हद खतम हो रही थी. यानी उनका वो मिनी स्कर्ट कूल्हों की ढलान तक ही सिमट कर रह गया था.
कामिनी भाभी को इन कपड़ों में देखते ही मेरे लंड ने एक जोरदार अंगड़ाई ली, मानो आज वो खुशी में झूमना चाहता हो. कामिनी भाभी ने शायद आज ठान लिया था, कि वो मेरे धैर्य की माँ-बहन एक कर के ही मानेंगी.
क्योंकि कामिनी भाभी जैसे ही मेरे सामने बैठी. कुछ देर तो मेरे मुँह के आगे कामिनी भाभी अपनी गान्ड लिए खड़ी रही, जो उनकी नाम मात्र की स्कर्ट से साफ-2 दिखाई दे रही थी. बहुत कोशिश कर के में अपने हाथ को कंट्रोल किए हुए था, वरना मेरा हाथ बार-बार कामिनी भाभी की गान्ड को सहलाने के लिए उठने की कोशिश करता. फिर एक लंबा सा घिस्सा अपनी गान्ड से मेरे लंड पर मारते हुए कामिनी भाभी मेरे आगे बैठ गयी.
झटके खाता मेरा लंड अपने लिए आरामगाह देखते ही भड़क उठा और बुरी तरह से अकड़ कर कामिनी भाभी की गान्ड की दरार मैं घुसने लगा. ये बात तय थी, कि अगर बीच में कपड़े नहीं होते तो मेरा लंड आज किसी के बाप की भी सुनने वाला नहीं था. आज वो शर्तिया कामिनी भाभी की गान्ड फाड़ कर ही रहता.
मैंने जैसे-तैसे कर के अपने आप पर कंट्रोल रखा. यहाँ तक कि मेरे लंड का मुँह चिपचिपाने लगा था.
कामिनी भाभी – अंकुश पहले आप सिर्फ़ देखो, उसके बाद में आपको स्टीयरिंग दूँगी.
इतना कहकर उन्होंने मेरे दोनों हाथ अपनी नंगी जांघों पर रखवा दिए. आअहह. क्या मखमली अहसास था कामिनी भाभी की चिकनी मुलायम मक्खन जैसी जांघों का. हाथ रखते ही, मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी. मेरा लंड फ्रेंची फाड़ कर कामिनी भाभी की गांड में घुसने की फिराक में था.
कामिनी भाभी ने बैक गियर में गाड़ी डाल कर, स्टीयरिंग कैसे कंट्रोल करना होता है, ये सब वो बताने लगी. लेकिन कामिनी भाभी का ध्यान पूरी तरह से गाड़ी सिखाने पर नहीं था. मेरे लंड और हाथों के अहसास ने उनकी भी साँसें फूलने पर मजबूर कर दिया था. जिसकी वजह से गाड़ी कहीं की कहीं जाने लगी. वो तो अच्छा था, कि कुछ कंट्रोल मुझे भी आ गये थे, तो मैंने अपने हाथ स्टीयरिंग रख लिए और गाड़ी को कंट्रोल करने में हेल्प की.
कामिनी भाभी की हरकतें बढ़ती ही जा रही थी, एक बार तो उन्होंने अपनी गान्ड को खुजाने के बहाने ऊपर को उचकाया और सीधे अपने गान्ड के छेद को मेरे लंड के ऊपर ही टिका दिया. इतना ही नहीं, कामिनी भाभी ने दो-तीन झटके भी आगे पीछे कर के अपनी गान्ड को दिए. मेरा पेशेंस जवाब देता जा रहा था.
मुझे लगा मेरा पानी निकल जाएगा, तो मैंने कामिनी भाभी को गाड़ी रोकने को कहा – कामिनी भाभी… प्लीज़… जल्दी से गाड़ी रोकिए, मुझे सुसु करने जाना है.
कामिनी भाभी की वासना इस समय एकदम चरम पर थी. मेरे कहने पर कामिनी भाभी ने गाड़ी तो रोक दी. लेकिन नीचे उतरने की बजाय, भाभी पलट कर मेरी गोद में आ बैठी और मेरे सर के बालों को जकड़कर उन्होंने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया.
मेरी हवा वैसे ही टाइट थी. कुछ देर तो मैंने अपने हाथ अलग रखे लेकिन जब कोई चारा नहीं बचा तो मैंने कामिनी भाभी की फुटबॉल जैसी गान्ड की गोलाईयों को जोर से मसल दिया. एक मादक सिसकी भरते हुए उन्होंने अपनी गान्ड को मेरे लंड पर ज़ोर से रगड़ दिया.
कामिनी भाभी - सीईईईई… ईईशशशश… आहहहह… उफफफ्फ़… अंकुश…
किस करते-करते, कामिनी भाभी और मेरी, हम दोनों की साँसें डूबने लगी. भाभी लगातार अपनी गान्ड के साथ-साथ अपनी चूत को भी मेरे लंड पर रगड़ा दे रही थी. मेरे हाथ अनायास ही उनके मम्मों पर कस गये… और उन्हें ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा.
कामिनी भाभी की कमर बुरी तरह से ऊपर नीचे हो रही थी, मेरे लंड को अपनी चूत के होंठों पर फील कर के उन्होंने मेरे होंठों को चबा दिया. भाभी मेरे ऊपर किसी भूखी बिल्ली की तरह टूट पड़ी थी. मेरे लंड की हालत बहुत ही खराब होती जा रही थी, मुझे लगने लगा कि अब सिवाय पानी छोड़ने के और कोई चारा नहीं बचा है.
उधर कामिनी भाभी भी अपने होश-हवास खो चुकी थी, भाभी बुरी तरह कमर मटका-मटका कर मेरे लौड़े को अपनी चूत की फांकों पर घिस रही थी. एकाएक हम दोनों के शरीर अकड़ने लगे, मैंने कामिनी भाभी की कमर को अपने दोनों हाथों से कसकर उनकी गान्ड को अपने लंड पर दबा दिया. इसी के साथ मेरे लंड ने और भाभी की चूत ने एक साथ पानी छोड़ दिया. कामिनी भाभी मेरे गले में बाहें डाले लटक गयी. उनका सर अपने आप पीछे को लटक गया. उनके चुच्चों ने मेरे मुँह को दबा रखा था.
कुछ देर कामिनी भाभी ऐसे ही बैठी रही. फिर जब सब कुछ शांत हो गया तो भाभी अपनी नज़रें झुकाए नीचे उतर गयी और पिछली सीट पर जाकर अपने कपड़े चेंज करने लगी. मैं अपनी टंकी खाली करने झाड़ियों की तरफ चला गया.
झाड़ियों के पीछे जाकर मैंने जीन्स की जेब से रुमाल निकाला और अपने लंड और फ्रेंची को उससे पोंछ कर साफ किया वरना धीरे-2 उसका गीलापन जीन्स के ऊपर से भी दिखने लगता. रास्ते में हम दोनों के बीच गहन चुप्पी छाई रही. कहीं ना कहीं कामिनी भाभी अपने मन में गिल्टी फील कर रही थी.
कुछ देर की चुप्पी के बाद कामिनी भाभी बोली – अंकुश… सॉरी फॉर दैट… प्लीज़ तुम मुझे ग़लत मत समझना. दरअसल मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाई.
मैं – इट्स ओके भाभी. हम दोनों ही जवान हैं, अब इतने नज़दीक रह कर ये सब तो हो ही जाता है. प्लीज़ इसके लिए आपको सॉरी कहने की ज़रूरत नहीं है.
कामिनी भाभी कुछ देर चुप रही, फिर बोली – तो फिर अंकुश क्या मैं ये समझूँ कि आज जो कुछ हम दोनों के बीच हुआ, उसे और आगे बढ़ाना चाहिए???
मैंने कामिनी भाभी की तरफ देखा, वो मुझे ही देख रही थी. फिर मैंने अपनी नज़रें सामने कर ली और रास्ते पर ध्यान केंद्रित कर के बोला – मेरे ख्याल से ये सब अब और नहीं होना चाहिए कामिनी भाभी… ये ठीक नहीं होगा…
कामिनी भाभी – किस एंगल से ठीक नहीं होगा?? लाइफ में थोड़ा एन्जॉयमेंट मिलता है, तो उसमें बुराई क्या है?? और ये हम दोनों की ज़रूरत भी है…
मैं – कामिनी भाभी, क्या ये भैया के साथ धोखा नहीं होगा?
कामिनी भाभी – तो तुम क्या समझते हो, कि तुम्हारे भैया ये सब नहीं करते होंगे?? ओह्ह्ह... कमऑन अंकुश डार्लिंग… ऐसा कौन है इस दुनिया में जो इससे अछूता हो??
मैंने मन ही मन सोचा, कि बात तो आपकी सही है. अब मुझे ही ले लो, हर रोज़ गिनती बढ़ती जा रही है. यहाँ तक कि पापा भी नहीं रह पा रहे हैं इसके बिना, फिर भी मैंने में कहा.
मैं - लेकिन मैं उनके साथ धोखा नहीं कर सकता, प्लीज़ भाभी… आप मेरी मजबूरी समझने की कोशिश कीजिए.
कामिनी भाभी कसमसाते हुए बोली – धोखा… तो तब होगा ना अंकुश, जब ये बात उनको पता चलेगी… अब ये शरीर की ज़रूरतें तो पूरी करनी ही होगी ना.
मैंने उन्हें काफ़ी समझाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्होंने कोई ना कोई लॉजिक देकर मुझे हथियार डालने पर मजबूर कर दिया और आख़िर में मुझे कहना ही पड़ा.
मैं - जैसा आप ठीक समझो भाभी. अब मैं आपको क्या कह सकता हूँ. मेरे से ज़्यादा तो आपने दुनियादारी देखी है.
कामिनी भाभी – फिर आज रात को मेरे कमरे में आ जाना अंकुश. प्लीज़… मैं तुम्हारा इंतजार करूँगी.
कामिनी भाभी की इस बात का मैंने कोई जवाब नहीं दिया. इतने में घर आ गया और हम गाड़ी खड़ी कर के घर के अंदर चले गये. घर मैं घुसते ही दो खबरें एक साथ सुनने को मिली.
एक – मोहिनी भाभी के भाई राजेश की शादी तय हो गयी थी, जिसकी डेट भी नज़दीक थी. और मोहिनी भाभी को अभी बुलाया गया था. चूँकि उनके यहाँ कोई और नहीं था उन्हें ले जाने के लिए तो हमें ही छोड़ कर आना था उनको. वो भी दो दिन बाद ही, 15 दिन बाद शादी थी.
दूसरा- कृष्णा भैया आज आने वाले हैं, उनका फोन आ गया था. वैसे तो वो कामिनी भाभी को ले जाने के लिए आ रहे थे.
ये खबर कामिनी भाभी को कुछ नागवार गुज़री. उनके चेहरे को देखकर लग रहा था, मानो गरम चूत पर ठंडा पानी डाल दिया हो. लेकिन चूँकि मोहिनी भाभी अपने घर जाने वाली हैं तो शायद अगर वो मान गये तो उन्हें कुछ दिनों के लिए और यहाँ रुकना पड़ सकता है.
कृष्णा भैया देर रात घर पहुँचे. तो आपस में कोई बात नहीं हो पाई. रात को में मोहिनी भाभी के पास बैठने चला गया, क्योंकि अब वो कुछ दिनों मुझसे दूर रहने वाली थी. मैं रुचि को गोद में लिए उनके बगल में बैठा था, कि तभी भाभी ने पूछ लिया.
मोहिनी भाभी - अंकुश, गाड़ी अच्छे से चलाना आ गया तुम्हें, या और सीखना बाकी है??
मैं – चलाना तो सीख गया हूँ भाभी, अब तो बस जैसे-जैसे प्रैक्टिस होगी, हाथ साफ होता रहेगा.
मोहिनी भाभी – वैसे आज जब तुम लौटे थे अंकुश, तो तुम्हारे हाव-भाव कुछ अजीब से थे, कुछ हुआ था क्या?
मैं – नहीं तो ऐसा तो कुछ नहीं हुआ, आपको ऐसा कैसे लगा?
मोहिनी भाभी – नहीं… वो, तुम्हारी आँखें कुछ चढ़ी हुई थी. शरीर भी कुछ कांप-कंपा रहा था, सच बताना, कुछ तो हुआ है अंकुश??
मैंने मन में सोचा – भाभी आप क्यों इतनी तेज हो, कुछ भी परदा नहीं रहने दोगी??
जब कुछ देर मैंने कोई जवाब नहीं दिया, तो मोहिनी भाभी ने फिर पूछा – बोलो ना अंकुश क्या हुआ था?
मैंने हिचकते हुए आज की घटना उन्हें सुना दी, कुछ देर तो वो मौन रहकर मन ही मन मुस्कराती रही, फिर बोली.
मोहिनी भाभी - जिसका मुझे अंदेशा था अंकुश वही हुआ, खैर छोड़ो ये सब, ये बताओ अब आगे क्या सोचा है?
मैं – किस बारे में?
मोहिनी भाभी – अरे कामिनी के बारे में?? मेरे पीछे अगर उसने फिर से पहल की तो???
मैं – कोशिश करूँगा, उनसे दूर ही रहूं. फिर भी बात ना बनी तो साफ-साफ मना कर दूँगा.
मोहिनी भाभी – भूल से भी ये ग़लती मत करना अंकुश. एक बार कामिनी को समझाने की कोशिश भर ज़रूर करना, अगर नहीं माने तो फिर हालत से समझौता कर लेना. क्योंकि ये ऐसे मामले होते हैं, जिन्हें तूल पकड़ते देर नहीं लगती. अपनी बात मनवाने के लिए औरत किसी भी हद तक जा सकती है.
बातों के दौरान रुचि मेरी गोद में ही सो गयी, तो उसे मोहिनी भाभी ने मेरी गोद से लेकर बेड के एक सिरे पर सुला दिया, और फिर वो मुझसे सटकर बैठ गयी. उन्होंने मेरी जांघों को सहलाते हुए कहा.
मोहिनी भाभी – मैं इतने दिन तुमसे दूर रहूंगी, याद करोगे ना मुझे अंकुश??? या कामिनी भाभी की मस्ती में भूल जाओगे??
मोहिनी भाभी सोने से पहले मात्र एक गाउन ही पहनती थी. तो मैंने उनके गाउन की डोरी खींच कर आगे से उनके बदन को उजागर कर दिया.
मैंने उनके भरे-भरे मम्मों को प्यार से सहलाया और होंठों का चुंबन लेकर कहा – ये तो मरते दम तक भी नहीं हो पाएगा भाभी मुझसे, की मैं आपको भूल जाऊं. मौत आने के बाद ही आप मेरे दिल से निकल पाओगी.
मेरी बात सुनते ही मोहिनी भाभी ने मुझे अपने सीने से लिपटा लिया और फिर आँखों में आँसू भरकर भर्राए गले से बोली – अंकुश भूल कर भी ऐसे शब्द मत निकालना अपने मुँह से, वरना मैं तुमसे कभी बात नहीं करूँगी… समझे???
मैं भी किसी बच्चे की तरह उनसे लिपट गया.
मोहिनी भाभी – अंकुश… लेकिन समय के साथ ये प्यार बाँटना तो पड़ेगा ही तुम्हें, जब निशा तुम्हारे साथ शादी कर के कर इस घर में आ जाएगी.
मैं – वो तो मैं अभी भी उससे करता ही हूँ, आगे भी करता रहूँगा, लेकिन जो प्यार आपके लिए है, उसमें कभी कमी नहीं आएगी. इतना कह कर मैंने मोहिनी भाभी को अपने चौड़े सीने से चिपका कर उनके होंठों को चूम लिया.
मोहिनी भाभी ने मेरी आँखों में झाँकते हुए कहा – अंकुश… आज मुझे तुम्हारा इतना प्यार चाहिए की आने वाले 15-20 दिन तक मुझे तुम्हारी तलब महसूस ना हो.
मैंने मुस्कराते हुए मोहिनी भाभी की चुचियों को मसल कर कहा – जो हुक्म मेरे आका… इतना कहकर उन्हें निर्वस्त्र कर के, बेड पर लिटा दिया और उनके नाज़ुक अंगों से खेलने लगा. मोहिनी भाभी ने भी, पूरी शिद्दत से अपने बदन को मेरे सुपुर्द कर दिया, बेड पर पड़ी मोहिनी भाभी मेरी हरकतों से बिन जल मछली की तरह मचल रही थी. एक समय था, जब मैं भाभी के इशारों पर नाचता था, लेकिन आज मोहिनी भाभी मेरे हाथों के इशारों पर इस तरह मचल रही थी, जैसे उनके बदन का रिमोट मेरे हाथों में हो. कुछ ही पलों में कमरे का वातावरण वासनामय हो गया. मादकता से भरी आहों, कराहो के बीच चुदाई के कई तूफान आए, चले गये, फिर आए फिर चले गये. मोहिनी भाभी अब पूरी तरह तृप्त हो चुकी थी, फिर उन्होंने मुझे बड़े प्यार से मेरे माथे को चूमकर कोई 3 बजे अपने कमरे में सोने के लिए भेज दिया.
सुबह जब सबने मिलकर नाश्ता किया, उस समय पापा ने भैया से बात चलाई.
पापा – और कृष्णा बेटा, कैसी चल रही है तुम्हारी ड्यूटी?
कृष्णा भैया – वैसे तो ठीक है पापा, ड्यूटी की कोई प्राब्लम नहीं है. लेकिन घर में खाने पीने का सब कुछ गड़बड़ रहता है. सब कुछ नौकरों के सहारे नहीं हो पता है, तो मैं सोच रहा था, कि कामिनी को भी अपने साथ ले जाता हूँ.
पापा – हमें तो कोई दिक्कत नहीं है, बस एक छोटी सी समस्या है, मोहिनी बहू के भाई की शादी है, कल वो अपने घर जाने वाली है, तो तब तक के लिए कामिनी बहू यहाँ बनी रहती तो कुछ सहारा रहता इन बच्चों को. रमा बिटिया अभी इतनी परिपक्व नहीं है, जो अकेले घर संभाल ले.
कृष्णा भैया – वैसे मुझे तो कोई प्राब्लम नहीं है. अगर कामिनी रुकना चाहे तो मोहिनी भाभी के आने तक रुक सकती है. लेकिन क्या कामिनी अकेली घर संभाल पाएगी?
मोहिनी भाभी – रमा तो है ना यहाँ पर उसके साथ.
कृष्णा भैया ने कामिनी भाभी की तरफ देखा – तुम क्या कहती हो कामिनी? रुक सकती हो?
कामिनी भाभी तो चाहती भी यही थी, तो तपाक से बोली – अब दीदी चली जाएँगी तो मुझे तो रुकना ही होगा. मेरा भी घर है, मैं नहीं सोचूँगी तो और कौन सोचेगा. दीदी ने इस घर के लिए इतने साल न्योछावर कर दिए, अब वो अपने घर की खुशी में शामिल होने जा रही हैं. तो मेरा भी कुछ फ़र्ज़ बनता है कि उनके बाद घर की देखभाल करूँ.
कृष्णा भैया – ठीक है, ठीक है.. बाबा… मैंने तो बस पूछा ही था. तुमने तो पूरा भाषण ही दे डाला. वैसे अपने घर के प्रति तुम्हारी संवेदन शीलता देख कर अच्छा लगा. है ना पापा??
पापा जी बस मुस्करा कर रह गये और कामिनी भाभी के सर पर हाथ रख कर बाहर चले गये. भैया उस रात और रुके. अगले दिन मुझे भी भाभी को छोड़ने जाना था, तो भाभी ने कृष्णा भैया से गाड़ी ले जाने के लिए पूछा.
मोहिनी भाभी – कृष्णा, तुम कहो तो हम लोग तुम्हारी गाड़ी ले जाएँ?
कृष्णा भैया – चला के कौन ले जाएगा, भाभी?
मोहिनी भाभी – अंकुश ने ड्राइविंग सीख ली है कृष्णा. क्यों कामिनी?? तुम्हें भरोसा तो है ना अंकुश की ड्राइविंग पर??
कामिनी भाभी – भरोसा तो है दीदी. पर मैं क्या कहती हूँ, क्यों ना मैं भी आपके साथ चलूं?? भले ही अंकुश ड्राइव करे. लेकिन अगर कुछ प्राब्लम आई तो मैं हेल्प तो कर सकती हूँ.
कृष्णा भैया – तो इसमें मेरी परमिशन की क्या ज़रूरत थी मोहिनी भाभी?
मोहिनी भाभी – आख़िर तुम्हारी गाड़ी है. पूछना तो ज़रूरी है कृष्णा.
कृष्णा भैया – ये कह कर आपने मुझे पराया कर दिया भाभी. मैं अगर ऐसा सोचता तो गाड़ी अपने साथ नहीं ले जाता?? अपने घर के मान सम्मान के लिए ही तो इसे यहाँ छोड़ा है, फिर इसपर मेरा हक़ कहाँ रह गया?
मोहिनी भाभी – सॉरी कृष्णा, मेरा मतलब तुम्हारा दिल दुखाना नहीं था. मैंने तो बस इसलिए पूछा कि घर की एकता बनी रहे और आपस में कभी कोई ऐसी बात ना बने जिससे किसी को कोई उंगली उठाने की नौबत आए.
अब जब ये तय हो गया कि मैं और कामिनी भाभी दोनों ही भाभी को छोड़ने जा रहे हैं. तो रमा दीदी भी बोलने लगी.
रमा – फिर मैं अकेली यहाँ क्या करूँगी?? मैं भी आप लोगों के साथ चलती हूँ.
कामिनी भाभी – ये भी ठीक है, फिर ये फिक्स हुआ कि भैया के निकलते ही हम सब भी मोहिनी भाभी को छोड़ने उनके गाँव जाएँगे. पापा का लंच रेडी कर के रख दिया जाएगा. अगर शाम को आने में हमें देर होती है, तो पापा छोटी चाची के यहाँ खाना खा लेंगे.
ये बात छोटी चाची को भी बता दी गयी. सुबह चाय नाश्ते के बाद ही भैया अपनी ऑफिस की गाड़ी से निकल गये. उनके कुछ देर बाद ही हम चारों भी चल दिए मोहिनी भाभी के घर की तरफ. 11:30 को हम उनके घर पहुँच गये. सारे रास्ते मैं ही ड्राइव कर के ले गया था. अब मुझे और ज़्यादा कॉन्फिडेंस आने लगा था.
निशा, मेरी जान, मुझे देखते ही किसी ताज़े फूल की तरह खिल उठी. मोहिनी भाभी के घरवाले हम लोगों की आवभगत में लग गये. उनके गाँव में भाभी का सम्मान दुगना हो गया, उनको इतनी शानदार गाड़ी में आते देख कर. किसी तरह मौका निकाल कर मैं और निशा एकांत में मिले, वो तड़प कर मेरे सीने से लग गयी.
निशा मेरी छाती के बालों से खेलते हुए शिकायत भरे लहजे में बोली - निर्मोही कहीं के… जब से मुझे छोड़कर गये हो, एक बार पलट कर भी नहीं देखा इधर को. कम से कम एक बार मिलने नहीं आ सकते थे???
मैंने निशा के गोल-गोल नितंबों को सहलाते हुए कहा – निशा… घर की ज़िम्मेदारियाँ और कालेज से कहाँ समय मिलता है, वैसे मैं फोन तो करता ही हूँ ना…
निशा मेरे होंठों को चूमकर बोली – अंकुश… फोन से कहीं इस बेकरार दिल की प्यास बुझती है भला?? अब ये दूरियाँ सही नहीं जाती हैं जानू!!!
मैंने उसकी झील सी गहरी आँखों में झाँकते हुए कहा – निशा मेरी जान! मैं भी कहाँ तुमसे दूर रहना चाहता हूँ, लेकिन अपनी कुछ मजबूरियाँ हैं, जिन्हें हम नज़र अंदाज तो नहीं कर सकते ना.
इतना कहकर मैंने जैसे ही निशा के गले पर चुंबन लिया, वो सिसक कर मेरे सीने से लिपट गयी. उसके कठोर बूब्स मेरे बदन से दब कर एक सुखद अहसास का अनुभव करा रहे थे.
निशा मेरे गले में बाँहों का हार डाले हुए बोली – मैं समझती हूँ अंकुश, पर इस दिल का क्या करूँ, ये जानते हुए भी कि तुम नहीं आने वाले, फिर भी हर समय तुम्हारे आने की आस लगाए रहता है.
मैंने उसकी चिन को हाथ लगाकर उसके चेहरे को ऊपर किया और उसके होंठों को फिर एक बार चूम कर बोला – निशा इस दिल से कहो, कुछ दिन और इंतजार करे.
कुछ देर हम यूँ ही एक दूसरे की बाँहों में खड़े बीते दिनों की याद ताज़ा करते रहे. कुछ नये कसमें वादे, नये इरादे किए. बातों-2 में कुछ इमोशनल मोमेंट भी आए. हम दोनों की आँखें नम हो गयी. ये समय और मौका हमें इससे ज़्यादा की इज़ाज़त नहीं दे सकता था तो शादी पर आने का वादा कर के हम अलग हुए ही थे, कि तभी रमा दीदी हमें ढूँढते हुए वहाँ आ पहुँची.
रमा - अच्छा! तो तोता-मैना यहाँ चोंच भिड़ा रहे हैं… अंकुश मैं तुम दोनों को कब से ढूंढ रही हूँ. हमें यूं खड़े देख कर वो बोली.
निशा झेंप कर वहाँ से भाग गयी, फिर मैंने रमा दीदी से कहा - क्या हुआ दीदी?? हमें क्यों ढूँढ रहीं थी??
रमा दीदी – अरे वहाँ आंटी तुम्हें खाने के लिए बुला रही हैं और तुम यहाँ अपनी मैना के साथ गुटर-गूँ कर रहे हो. ये कहकर वो खिल खिलाकर हंस पड़ी.
मैं अपनी नज़र नीची कर रमा दीदी के साथ बैठक की तरफ चल पड़ा, जहाँ बाकी लोग बैठे खाने पर मेरा इंतजार कर रहे थे. शाम ढलते ही हम ने वहाँ से विदा ली. मोहिनी भाभी के घर वाले हमें रोकना चाहते थे. लेकिन वहाँ घर सुना पड़ा था, तो उन्हें भी इज़ाज़त देनी ही पड़ी. रात 8 बजे तक हम अपने घर लौट आए. हम लोगों को तो कोई खास भूख नहीं थी और पापा के लिए चाची ने खाना बनाकर भेज दिया था. तो पापा को खाना खिलाकर बस अब सोना ही था.
कामिनी भाभी ने कई बार मुझे इशारे कर के वो बात याद दिलाने की कोशिश की लेकिन मैं अंत तक अंजान बनाने का नाटक करता रहा और अपने कमरे में सोने चला गया. मुझे आज नींद नहीं आ रही थी. करवट बदलते-बदलते काफ़ी रात निकल गयी, रह-रह कर निशा मेरी आँखों के सामने आ जाती थी. उसकी बातें मेरे कानों में गूँजने लगती.
रात कोई 11:30 को मेरे गेट पर आहट हुई. मैंने उठ कर गेट खोला. देखा तो सामने एक मिनी गाउन पहने कामिनी भाभी खड़ी थी. जो इस समय रति का स्वरूप लग रही थी. जिसमें से कामिनी भाभी के निप्पल्स भी बाहर झाँकने का भरसक प्रयास कर रहे थे. कामिनी भाभी को इस रूप में देखकर मेरे फ्रेंची में उथल पुथल शुरू हो गयी.
कामिनी भाभी - अब प्लीज़ बातों में वक़्त जाया मत करो अंकुश... आज मुझे भरपूर प्यार करो अंकुश… ये कहकर वो मेरे बदन से किसी बेल की तरह लिपट गयी.
मैंने चूतिया बनाने की एक्टिंग करते हुए कहा - लेकिन कामिनी भाभी मुझे तो कुछ भी नहीं आता है, आप ही बताइए कि कैसे करते हैं प्यार??
मैंने उन्हें ये जताना चाहा, जैसे मैंने ये पहले कभी किसी के साथ किया ही नहीं है.
कामिनी भाभी – क्या??... अंकुश तुम ने अभी तक किसी के साथ सेक्स किया ही नहीं है??? कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं बनाई अभी तक?? वो मेरी बात सुन कर आश्चर्य से बोली.
मैंने कहा – नहीं भाभी, सच में मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है. अब आपको ही मुझे ये सब सीखना पड़ेगा.
कामिनी भाभी – कोई बात नहीं अंकुश… मैं तुम्हें सब कुछ सिखा दूँगी. हाय… मेरा अनाड़ी देवर अंकुश…
ये कह कर कामिनी भाभी ने अपने हाथ मेरी पीठ पर कस दिए, जिससे उनकी 34” साइज़ की कठोर चुचिया मेरे सीने में दब गयी. भाभी ने अपना वो नाम मात्र का गाउन भी निकाल कर फेंक दिया. नीचे कामिनी भाभी बिना ब्रा के ही थी, बस एक माइक्रो पैंटी. जिसमें से उनकी चूत के मोटे-मोटे होंठ भी बाहर को दिख रहे थे. पीछे एक डोरी सी थी, जो उनकी गान्ड की दरार में घुसी पड़ी थी. अब इसको क्या कहते हैं, आप लोग खुद नामकरण कर लेना. हेहेहे.
भाभी को ऐसे रूप में देख कर मेरा लंड मेरे कच्छे को फाड़ कर बाहर आने को आमादा था. कामिनी भाभी ने मेरी टीशर्ट निकाल कर फर्श पर फेंक दी. भाभी मेरे चौड़े सीने को हाथ से सहलाने लगी और उसे चूम लिया. कामिनी भाभी ने अपनी जीभ निकाल कर मेरे निप्पल को पहले लिक किया फिर दांतो से हलके-हलके काटने लगीं, उसके बाद अपनी जीभ की नोक फेरने लगीं और मेरे निप्पल सक करने लगीं. मेरे शरीर में झनझनाहट सी शुरू हो गयी.
मेरे हाथ स्वतः ही कामिनी भाभी के फुटबॉल जैसे चुतड़ों के उभारों पर पहुँच गये और मैंने उन्हें अपने हाथों में लेकर मसल दिया. कामिनी भाभी मेरे सीने को चूमते चाटते हुए नीचे बैठने लगी, अपने पंजों पर बैठ कर उन्होंने मेरा शॉर्ट खींच दिया. नीचे में बिना फ्रेंची के था. मेरे फुल्ली इरेक्टेड लंड को देख कर, जो अब 90 डिग्री पर हिल-हिल कर उनके इस जानमारू हुस्न को सलामी दे रहा था, कामिनी भाभी मंत्रमुग्ध हो गयी और अपने हाथ में लेकर अपने गालों से रगड़ते हुए बोली.
कामिनी भाभी - आअहह… अंकुश… तुम कितने बड़े झूठे हो… तुम्हारा ये हथौड़े सा लंड बता रहा है कि इसने ना जाने कितनों की सील तोड़ी है.
मैं – क्या कामिनी भाभी आप भी! इसने आपको कैसे बता दिया ये सब??
कामिनी भाभी मेरे लंड को सहलाते हुए मेरी आँखों में देख कर बोली – अंकुश तुम मुझे अनाड़ी समझते हो?? जिस तरह से ये मस्ती में अपना मुँह खोले झूम रहा है, लगता है इसे सब पता है कि अब इसे क्या करना है.
फिर उन्होंने मेरे सुपाड़े को खोल कर अपनी जीभ से चाट लिया.
मैं – आअहह... भाभी…. सीईईईई….
मेरी सिसकी निकल गयी. कामिनी भाभी मेरे फुल्ली इरेक्ट लंड अपने होंठों में ले चुकी थी और अब लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी. मैं मस्ती से उनके सर को सहलाने लगा. कामिनी भाभी के थोड़ी देर लंड चूसने के बाद मैं आनंद के सागर में गोते लगाने लगा.
उन्होंने मुझे पलंग पर धक्का दे दिया और अपनी नाम मात्र की पैंटी भी निकाल फेंकी.
अब वो किसी भूखी शेरनी की तरह मेरे पूरे शरीर पर हाथ फेरती हुई मेरी छाती पर चढ़ बैठी. उनके गोरे-गोरे मस्त भरे चुच्चों को देख कर मेरी उत्तेजना दुगनी हो गयी और मैंने उन्हें अपनी मुट्ठी में भरकर बहुत ज़ोर से मसल दिया.
कामिनी भाभी - आआहह… अंकुश... आराम से अंकुश... उखाड़ोगे क्या इन्हें?
तो मैंने भाभी के कंधों को पकड़ कर अपने ऊपर झुका लिया, और उनके मम्मों को चूसने लगा. कामिनी भाभी अपनी रसीली चूत को मेरे पेट पर मसलने लगी. फिर धीरे-धीरे नीचे को सरकती हुई अपनी रसीली चूत के मुहाने को मेरे लंड की तरफ ले गयी. एक-एक इंच का फासला तय करती उनकी रसीली चूत मेरे लंड की तरफ सरक रही थी. मेरा लंड मन ही मन बड़बड़ा रहा था, भेन्चोद साली जल्दी से पास आ, इतना तरसा क्यों रही है.
शायद उसकी बात कामिनी भाभी ने सुन ही ली, तो अपने पंजों को मोड़कर मेरी जांघों पर रख लिया. इस तरह से कामिनी भाभी की रस से सराबोर हो चुकी चूत के होंठ अपने आप फैल गये. मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर पहले कसकर दबाया, शायद कामिनी भाभी उसकी ताक़त आजमा रही थी.
कामिनी भाभी - तैयार हो जाओ अंकुश... आज तुम्हें स्वर्ग का द्वार दिखाती हूँ.
भाभी ने कातिलाना अंदाज़ में मुझे मुस्कुराते हुए देखा और उनके अनोखे जिस्म का पूरा नज़ारा दिखने पर ना चाहते हुए भी, मैं अपने लंड को मसलने पर मजबूर हो गया था. वैसे कामिनी भाभी की कामुक हरकतों का मेरे ऊपर सही वाला प्रभाव पड़ रहा था..
क्योंकि मेरा लंड बहुत ही कड़क हो चुका था. कामिनी भाभी का कसा हुआ जिस्म इतना कामुक लग रहा था… कि मेरी सांस जोर पकड़ने लगी थी….
मैं बिना कुछ बोला बस कामिनी भाभी को देखे जा रहा था और उन्हें भी पता था कि मैं वही देख रहा हूँ जो वो दिखा रही है. कामिनी भाभी अपने हाथ पीछे ले जाती है और अपने जिस्म को थोड़े आगे की तरफ करती है, जिसकी बड़ी और उभरी हुई चुचियों का दर्शन पाकर मेरा जीवन ध्यान जो जाता है. मैंने अपने लंड को जोर-जोर से मसलता रहा..
मैं - उफ्फ्फ्फ़.. कामिनी भाभी आप कितनी खूबसूरत हो...
कामिनी भाभी मुझे देख के मुस्कुरा कर कहती हैं - अंकुश अभी तो असली काम बाकी है और उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी रसीली चिकनी बिना बालों वाली चूत पर हाथ रख दिया..
मैं- भाभी जल्दी करो ना…
मैंने किसी मासूम बच्चे की तरह जिद की, जिसे सुनकर कामिनी भाभी भी मुस्कुरा उठी. उन्होंने अगले ही पल मुझे देखते हुए धीरे से अपनी टांगो को फ़ैलाना शुरू कर दिया और कामिनी भाभी के ऐसा करने से उनके जाँघों के बीच एक बहुत ही खूबसूरत चिकनी मखमली मुलायम चूत का नज़ारा मेरी आँखों के आगे था. शायद कामिनी भाभी ने मेरे लिए ही अपनी चूत को मक्खन जैसी चिकनी किया था.
कामिनी भाभी अब टाँगों को तब तक फैलाती रही जब तक उनकी चूत का सम्पूर्ण नज़ारा मेरी आँखों के आगे नहीं आ जाता.
आज पहली बार मैं कामिनी भाभी की चूत का इतना खूबसूरत नज़ारा यूँ इतने करीब से देख पा रहा था, मुझे अपनी किस्मत पर आज बहुत ही नाज़ हो रहा था. मैं आगे बढ़ता हूँ और अपने तने हुए लंड को कामिनी भाभी की चूत की फांकों पर रख के धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर देता हूँ.
मैं – उफ़फ्फ़… कामिनी भाभी… कितना सुकून भरा एहसास है ये???
मेरी हरकत देख के कामिनी भाभी मुस्कुरा उठती हैं... और खुद ही अपना हाथ आगे करके अपनी चूत को सहलाती हुई मेरे लंड पर अपनी चूत का घर्षण करना शुरू कर देती हैं
कामिनी भाभी - सीख रहे हो अंकुश??
भाभी ने ये बात मुस्कुराते हुए मुझसे कह रहीं थीं. क्योंकि कामिनी भाभी शायद जान चुकी थी की मैंने जो पहले उनसे कहा था की "सेक्स के मामले में मैं अनाड़ी हूँ", वो शायद ग़लत है. जिस तरह मैंने अपने तने हुए लंड को कामिनी भाभी की चूत की फांकों पर रख के धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया था, शायद उसी से भाभी ने ये अंदाजा लगाया था.
परन्तु मेरी ये स्थिति हुई कैसे?? और होती भी क्यों नहीं???
जब कामिनी भाभी जैसी कामुक औरत आपके सामने टाँगे खोल के पड़ी हो, उनकी चिकनी रसीली बिना बालों वाली चूत आपके आगे यूँ परोसी गई हो, तो भला खुद को कैसे कोई रोक सकता है??
मैं अपने लंड को भाभी की चूत की गुलाबी फांकों के बीच रख के आगे की तरफ धक्का देने का असफ़ल प्रयास करता हूँ, क्योंकि कामिनी भाभी को चुदाई के मामले में मेरा नौसिखियापन साफ-साफ पता चलना चाहिए था. मैंने असफल धक्का ऐसा मारा की मेरा लंड भाभी की चूत का एक कामुक घर्षण करते हुए आगे की तरफ सरक जाता है.
कामिनी भाभी मुस्कुरा उठती हैं.. साथ के साथ उनकी कामुक आह भी मुँह से निकल पड़ती है - आआहह... अंकुश तुम तो बिलकुल बुद्धू हो.. अपनी भाभी को चोदना भी नहीं जानते हो???
मैं - कामिनी भाभी, अब तक आप जैसी कोई मिली नहीं मुझे, जो ये सब खेल सिखा देती…
कामिनी भाभी- (मुस्कुराते हुए) कोई नहीं मेरे बुद्धू अंकुश… चिंता मत करो तुम्हारी कामिनी भाभी तुम को सब कुछ सिखा देगी…
और उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी चिकनी चूत के द्वार पर रख दिया.. और मेरी आँखों में देखते हुए इशारा किया, मानो कह रही हों "घुसाओ.. अंकुश... अपना हथोड़े सा लंड... पेल दो अपना लौड़ा अपनी भाभी की चूत में...".
मैंने भी कामिनी भाभी के इशारे को अच्छे से पकड़ लिया और उनकी कमर को मज़बूती से पकड़ कर बहुत प्यार से अपने लंड को उनकी पनियाई चूत के अंदर धकेल दिया...
लेकिन कामिनी भाभी तो अलग ही मूड में थीं. भाभी पूरी चुदासी हो रखी थीं. तुरंत उन्होंने मुझे बिस्तर पर धकेल के लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गयीं फिर अपनी गर्म भाप जैसा पानी छोड़ती रसीली चिकनी बिना बालों वाली चूत को मेरे लंड के ऊपर रख कर कामिनी भाभी उसपर बैठती चली गयी.
भाभी- आआआआआआआहहह.......... अंकुश..
भाभी की कामुक सिसकारी फुट पड़ी थी.. मुझे भी एक अलग आनंद मिला, ऐसा लग रहा था ये मेरी जिंदगी की पहली चूत थी, जिसमें मेरे लंड ने गोता खाया था…
मैं - आआआहहह..... कामिनी भाभी...... यू आर सो सेक्सीईईईईईई......
कामिनी भाभी - आआहह.. अंकुश… सस्सिईईईईईईईईईईईईईई.. उउउफफफफफफफफफ्फ़... म्म्म्मा आह..
मस्ती में कामिनी भाभी की आँखें बंद होती चली गयी, मुँह अपने आप खुल गया. मेरे तगड़े लंड को लेने में शुरुआत में भाभी को थोड़ी तकलीफ़ हुई. लेकिन अपने होंठों को कस कर भींचते हुए कामिनी भाभी धीरे-धीरे उसके ऊपर बैठ ही गयी और पूरा आठ इंच का मेरा हथौड़े सा लंड उनकी चूत में जड़ तक समा गया. जब पूरा लंड जड़ तक कामिनी भाभी की रसीली चूत में समा गया तो भाभी कुछ देर मेरे ऊपर बैठ कर लंबी-लंबी साँसें लेने लगी.
कामिनी भाभी - उउउफफफ्फ़… अंकुश... कितना तगड़ा और दमदार हथियार है तुम्हारा… मेरी चूत को अंदर तक भर दिया है इसने… सस्सिईइ... आअहह… मज़ाअ… आ गाया… अंकुश डार्लिंग..
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद कामिनी भाभी ने अपनी गान्ड को ऊपर नीचे करना शुरू किया. भाभी धीरे-2 चूत के मुँह को सुपाड़े तक निकाल लेती और फिर से धीरे-2 ही पूरा अंदर कर लेती. मुझे इस तरह से बहुत मज़ा आ रहा था, जब मेरा सुपाड़ा कामिनी भाभी की चूत के होंठों से रगड़ता.
मैं - आअहह… सीईईईईईई…. उफफफ्फ़…. मस्ती में मैंने उनके दोनों बूब्स को अपनी मुठ्ठियों में भरकर ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा.
कामिनी भाभी - आअहह… उउउफफफ्फ़… अंकुश.... हान्न्न… ऐसे ही करो. बड़ा मज़ा आरहााआ.. हाीइ... हइईए... सीईईईईईई…. उफफफ्फ़…. मुऊुआाहह….
अब कामिनी भाभी की स्पीड कुछ बढ़ने लगी. और वो तेज़ी से मेरे लंड पर कूदने लगी. मैंने भी नीचे से अपनी कमर उछालना शुरू कर दिया. कभी भाभी मेरे होंठ चूसने लगती, तो कभी मेरे सीने को सहलाती और अजीब-अजीब सी आवाज़ें निकालते हुए मुझे चोद रही थी. 10 मिनिट बाद कामिनी भाभी बड़ी बुरी तरह से झड़ने लगी. कामिनी भाभी ने मेरे लंड और टट्टों को अपने चूत रस से गीला कर दिया और मेरे ऊपर पसर गयी. इधर मेरा मज़े से बुरा हाल था तो मैंने उन्हें पलट कर नीचे लिया और एक बार कामिनी भाभी की रस छोड़ती चूत को जीभ से चाटा और एक तगड़े से झटके में अपना लंड उनकी चूत में पेल दिया. उनके मुँह से एक लंबी सी सिसकी निकल गयी.
कामिनी भाभी – आआहह… धीरे.. उउउफफफ्फ़… अंकुश.... डार्लिंग, थोड़ा साँस तो लेने दो.
लेकिन मैंने अनसुनी करते हुए अपने धक्के शुरू कर दिए. कुछ देर बाद कामिनी भाभी फिर से गरम होने लगी और अपनी कमर उछाल–2 कर सहयोग करने लगी. मेरे धक्के इतने तेज और तगड़े होते जा रहे थे. की पूरे कमरे में मेरी जांघों की थाप उनकी गान्ड पर पड़ने की आवाज़ गूँज रही थी.
कामिनी भाभी अब नीचे से अपनी कमर हिलाना शुरू कर चुकी थी.. और मैंने उनकी एक चुची को कसके मुट्ठी में भरकर जोर-जोर से उनको चोदना शुरू कर दिया पर अबकी बार भाभी चीख नहीं रही थीं.. क्योंकि उनकी चूत में काफ़ी चिकनाहट आ चुकी थी, जिससे मेरा लंड बड़े ही आराम से उनकी चूत की गहराई नाप रहा था. कामिनी भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थी और कमर को खूब जोर-जोर से हिलाकर मेरे लंड को अपनी गहरी का नाप दे रही थी..
मैं- आआआहहह... कामिनी भाभी.... यू आर सो सेक्सीईईईईईई…
मैं कामिनी भाभी पर पूरी तरह झुक गया.. और उनके होंठों से अपने होंठों को मिला के अब मैं उनको चूमते हुए, दनादन भाभी की चूत चोद रहा था.
कामिनी भाभी - उउउम्म्म्मम.... उम्मम्मम्मम......... उम्मम्मम्म...... अंकुश… और जोर से चोदो मेरी चूत को... आआआह्ह्ह... उम्मम्मम्मम.... उम्मम्मम्मम... तुम्हारे हथौड़े जैसे लंड ने मुझे पागल कर दिया है...
भाभी जोर-जोर से अपने कमर को हिला रही थी, मानो मेरे लंड को अपनी चूत के अंत तक ले जाना चाहती हो.. और मैं भी इसमें पीछे नहीं था. कामिनी भाभी की टांगों को कसके जकड़े हुए भाभी को अच्छे से दबा-दबा के चोद रहा था. आधे घंटे मैंने भाभी को रगड़-रगड़ कर पेला, उसके बाद कामिनी भाभी की चूत को अपने माल से लबालब भर दिया और उनके ऊपर लेट कर हाँफने लगा. भाभी मेरे साथ चुदाई कर के मस्त हो गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों बाथरूम में जाकर फ्रेश होने लगे.
थोड़ी देर के बाद कामिनी भाभी अपने हाथों से मेरे लंड को फिर से सहलाने और मुठियाने लगीं और उसकी सेवा करते हुए बोली.
कामिनी भाभी – क्या कह रहे थे जनाब की, तुम्हें कुछ नहीं आता है??? फिर ये क्या था अंकुश??? हां!!!... मेरी चुदी चुदाई चूत का तुम्हारे लंड ने कचूमर निकाल दिया…
उनके सेवा भाव से खुश होकर मेरा लंड दुबारा अकड़ने लगा और फन-फना कर उन्हें मुँह चिढ़ाने लगा.
मैंने कामिनी भाभी को चूमते हुए कहा – हेहेहे… कामिनी भाभी वो तो बस अपने आप ही होने लगा. वैसे कैसा लगा आपको मेरे साथ सेक्स करने में?
कामिनी भाभी अपनी मखमली जाँघ से मेरे लौड़े को मसलते हुए बोली – अंकुश बस कुछ पुछो मत… मेरे पास ये सब बताने के लिए शब्द नहीं हैं. बस इतना ही कहूँगी अंकुश… यू आर सिम्पली द बेस्ट! थैंक्स अंकुश…. मेरी इच्छा पूरी करने का बहुत-बहुत धन्यवाद, बिन मोल खरीद लिया तुमने मुझे.
कामिनी भाभी की जाँघ की रगड़ से मेरा लंड बहुत उत्तेजित हो गया और वो उनकी गुदाज जाँघ में ही अपने लिए रास्ता ढूँढने लगा. मेरे लंड की सख्ती देखकर कामिनी भाभी को भी ताव आ गया और उन्होंने उसे अपने मुँह में गप्प से ले लिया और फिर वो चुसाई की, कि साले को नानी याद आने लगी.
मैंने कामिनी भाभी को अपनी गोद में उठाया और पलंग पर लाकर औंधे मुँह पटक दिया और उनकी पीठ पर चढ़ गया. भाभी ने अपनी गान्ड को पलंग से ऊपर की तरफ उठा लिया जिससे उनकी चूत का मुँह खुल कर मेरे लंड को चुदाई का निमंत्रण देने लगा. मैंने कामिनी भाभी के मस्त गोल मटोल कलश जैसे चुतड़ों को मसल-मसल कर लाल कर दिया, साइड से कमर में हाथ डालकर कामिनी भाभी की गान्ड को और थोड़ा उठा कर चूत का मुँह खोला और अपनी 3 उंगलियाँ उसमें पेल दी. भाभी के चूतड़ हवा में और ज़्यादा उठ गये. मैंने पीछे से अपना लौड़ा कामिनी भाभी की सुरंग के मुँह पर रखकर पूरी ताक़त से अंदर पेल दिया.
कामिनी भाभी – उउउइईईईईईईई… माआआ... उउउफफफफफफफफफ्फ़… आराम से … प्यार से अंकुश... मैं तुम्हारी भाभी हूँ कोई रंडी नहीं... ज़रा प्यार से अपना लौड़ा मेरी कमसिन चूत में पेलो...
कामिनी भाभी की कराह की परवाह ना करते हुए, मैंने उनके सुनहरे लंबे बालों को जकड़ कर पीछे को खींचा, जिससे कामिनी भाभी का सर भी हवा में उठ गया. तकिये पर हाथ टिकाए भाभी मस्ती से मेरे लंड का मज़ा लूटने लगी. मैंने उनकी चिकनी पीठ को चूमते हुए अपने धक्के शुरू कर दिए. कामिनी भाभी की गान्ड और थोड़ी ऊपर हो गयी. क्या मस्त नज़ारा था?? मेरी जांघें जैसे ही उनकी गान्ड के निचले हिस्से पर पड़ती तो उनके गोल-गोल चूतड़ बॉल की तरह और ऊपर को उठ जाते. गान्ड को मसलते हुए बीच-2 में मैं उसपर चांटे भी बरसाता जा रहा था, जिससे कामिनी भाभी की गान्ड लाल सुर्ख हो गयी. जब ज़्यादा मज़ा आने लगा तो भाभी अपनी घुटने टेककर घोड़ी बन गयी. फिर तो चुदाई का वो तूफ़ानी दौर शुरू हुआ की बस पूछो मत. धक्के-पे धक्के… थपा-थप… फचा-फच... हम दोनों के शरीर भट्टी की तरह दहकने लगे.
कामिनी भाभी – आअहह… अंकुश...... मेरे लाड़ले देवर जी, चोदो मुझे… फाड़ डालो मेरी चूत को…. हइईए… रीई. मैं…. तो गईयीईईईई…. आआआह्ह्ह.... अंकुश... थोड़ा धीरे..... आआआह्ह्ह... माँ.... धीरे... अंकुश... हाईई.... माँ.....
पर मैं तो कामिनी भाभी की चूत को ऐसे चोद रहा था, जैसे मुझे तो जिंदगी में पहली बार चूत नसीब हुई थी... मैं कहाँ उनकी सुनने वाला था.. मैं तो जैसे पूरा पागल होकर उन्हें चोद जा रहा था..
मैं- आआआह्ह... भाभी... आआआह्ह्ह...........
कामिनी भाभी की जोरदार चुदाई की वजह से चप-चप-चप की मधुर आवाज़ में हम दोनों ही सुन रहे थे.
कामिनी भाभी - आआआह्ह्ह... बस करो अंकुश... आआह्ह्ह.. अब रुक जाओ.. रुक जाओ अंकुश... आआआह्ह्ह.. माँ...
धीरे-धीरे मैं भी लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर बहुत चुका था, इसलिए मैं थोड़ा सीधा होता हूँ और उनके एक पैर को पकड़कर जोर-जोर से अंतिम धक्के लगाना शुरू कर देता हूँ
मैं- अह्ह्ह्ह.... कामिनी... आआआह्ह्ह.... भाभी.... आआआह्ह्ह......
मेरे जोरदार धक्कों की वजह से कामिनी भाभी का पूरा जिस्म पसीने में भीगा हुआ बुरी तरह हिल रहा था और उनका कामुक नंगा शरीर कामुकता की अधिकता में काँप रहा था
कामिनी भाभी - आआआआह्ह्ह्ह... अंकुश..... माँआआ..... जल्दी करो.... आआआह्ह्ह्ह्ह.... हाय....... और तेज़.... और तेज़....
मेरा लंड अपने आखिरी धक्कों के साथ जोर-जोर से कामिनी भाभी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था.. जिस कारण कामिनी भाभी का काम रस भी साथ में उनकी चूत से बहता हुआ बाहर आ रहा था..
कामिनी भाभी - आआआआह्ह्ह्ह... माँ...... अंकुश... आआआआह्ह्ह्ह...... उफफफ्फ़... अंकुश...
इसी बीच मैं एक अंतिम धक्का मारता हूँ और कामिनी भाभी ऊपर बिछ जाता हूँ. मेरा लंड भाभी की गर्म चूत के अंदर झड़ जाता है और मेरा गाढ़ा वीर्य भाभी की चूत से होता हुआ, उनके बच्चे दानी तक जा रहा था. कामिनी भाभी ने भी अपने कमर को ऊपर उठा के मेरे लंड से अपनी चूत को ऐसे चिपका दिया मानो उन्हें डर हो कि कहीं मेरे वीर्य का कोई कतरा बाहर ना रह जाये. इसी के साथ कामिनी भाभी भलभलाकर झड़ने लगी और मेरे ऊपर पसर कर हाँफने लगी.
कामिनी भाभी - आआआआआआआआ... आआआह्ह... मज़ा आ गया अंकुश, तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी. कसम से गज़ब के चोदू हो तुम और कमाल का लंड है तुम्हारा. जो कोई भी तुम्हारे लौड़े का स्वाद एक बार चख लेगी वो तुम्हारी दासी बनने को तैयार हो जाएगी.
लंड अंदर डाले-डाले ही मेरी आँखें बंद हो गयी. करीब 10 मिनिट मैं यूँ ही उनकी पीठ पर पड़ा रहा फिर कामिनी भाभी ने मुझे अपने ऊपर से साइड को लुढ़का दिया और फ्रेश होकर मेरा भी लंड साफ किया. उस रात मैंने उन्हें दो बार और चोदा. वो मेरे लंड की दीवानी हो चुकी थी. लेकिन कामिनी भाभी थी बहुत गरम औरत. उसने मुझे एकदम से जैसे निचोड़ ही लिया था.
थकान और नींद की खुमारी में सुबह के 4 बजे मैं जैसे तैसे कर के अपने कमरे में पहुँचा और से बिस्तर पर गिर पड़ा. बेड पर पड़ते ही, मुझे होश नहीं रहा कि कब नींद आ गयी. सुबह 8 बजे रमा दीदी ने मुझे झकझोरकर बड़ी मुश्किल से उठाया. घड़ी पर नज़र पड़ते ही मैंने झटपट से बिस्तर छोड़ा, और आधे घंटे में फ्रेश होकर नाश्ता कर के कालेज को भाग लिया.
दूसरे दिन कालेज में ग़रीब अनाथ बच्चों के वेलफेयर के लिए हम सभी स्टूडेंट्स को टाउन में जाकर लोगों के घरों में कुछ काम – धाम कर के उनसे खरी कमाई कर के फंड इकट्ठा करने का टास्क मिला.
रागिनी उसके भाई की पिटाई की घटना के बाद बिल्कुल सिंपल तरीके से, दूसरे स्टूडेंट्स की तरह ही कालेज में सबके साथ बिहेव करने लगी थी. उसने मुझे रिक्वेस्ट के, की अगर में उसके साथ, उसके घर जाकर फंड इकट्ठा करूँ., इसी बहाने वो भी मेरे साथ मिलकर अपने घर का कुछ काम करना चाहती है. वैसे तो घर में उसे कोई कुछ करने नहीं देता, मुझे भी इसमें कोई बुराई नहीं लगी. तो हम दोनों उसके घर की तरफ चल दिए.
ठाकुर साहब मुझे देख कर बड़े खुश हुए और अपनी पत्नी और नौकरों को बोल कर मेरे लिए खाने पीने का इंतजाम करने को कहा तो मैंने उन्हें हाथ जोड़कर रोका और कहा.
मैं - ठाकुर साहब आज मैं आपका परिचित या अतिथि नहीं हूँ. मैं और रागिनी मिलकर आपके घर में कुछ काम करने आए हैं. उससे जो कमाई होगी वो हम ग़रीब और अनाथ बच्चों की भलाई के लिए कुछ करेंगे.
ठाकुर साहब बोले – अरे! भाई तुम लोग बोलो. कितना पैसा चाहिए?? मैं देता हूँ ना! तुम लोगों को काम करने की क्या ज़रूरत है.
रागिनी – नहीं पापा. हम बिना काम किए आपसे एक पाई भी नहीं लेंगे, तो प्लीज़ बताइए. हम दोनों आपका क्या काम करें?
ठाकुर साहब सोचते हुए हँसकर बोले – ठीक है भाई, अगर तुम लोग कुछ करना ही चाहते हो तो गराज़ में हमारी गाड़ियों की सफाई कर दो. ठीक है? कर लोगे ना??
मैं – जी बिल्कुल. और हम दोनों पानी की बाल्टियाँ भर के गराज़ की तरफ चल दिए.
हम दोनों ही इस समय टीशर्ट और जीन्स पहने हुए थे. टाइट टीशर्ट में रागिनी की बड़ी-2 चुचिया एक दम कसी हुई. कपड़ों को फाड़ कर निकल पड़ने को हो रही थी. गराज़ में दो गाड़ियाँ खड़ी थी. एक उनकी स्कॉर्पियो और दूसरी सडान मॉडेल कार. मैंने दोनों को पहले कपड़ा मार कर धूल साफ की फिर रागिनी को पानी मारने को बोला. उसने एक मग से भर-भर कर गाड़ियों पर पानी उछालना शुरू किया. रागिनी के अनाड़ीपन की वजह से गाड़ियों पर पानी कम पड़ रहा था, लेकिन खुद पूरी भीग गयी. कपड़े गीले होने से उसके बदन से बुरी तरह चिपक गये. मेरा उसे देखते ही लंड खड़ा होने लगा. जिसे मैंने अपनी जीन्स में एडजस्ट किया.
मुझे उसे देख-देख कर हँसी आ रही थी. मुझे हँसता हुआ देख कर रागिनी ने एक मग भर कर मेरी तरफ उछाला. मैंने पीछे हट कर बचने की कोशिश की लेकिन फिर भी रागिनी ने मुझे भिगो ही दिया.
मैंने कहा - तुम्हें तो कुछ भी नहीं आता रागिनी. लाओ मैं ही करता हूँ, तो उसने मना कर दिया और फिर से गाड़ियों पर पानी डालने लगी.
जब रागिनी पानी डाल चुकी तो मैं एक कपड़े से उन्हें फिर से पोंछने लगा. स्कॉर्पियो ऊँची गाड़ी थी तो मैं उसके पायदान पर चढ़ कर उसकी छत को पोंछ रहा था. रागिनी भी गाड़ी के दूसरी तरफ पायदान पर खड़ी हो गयी, और मेरी तरह ही कपड़ा मारने का प्रयास करने लगी. रागिनी की हाइट कुछ कम थी, तो गाड़ी की छत तक पहुँचने के लिए रागिनी उसपर अपने बूब्स टिका कर पोंछने लगी.
रागिनी के मोटे-मोटे दूधिया बूब्स गाड़ी की शीट से दब कर बाहर को निकलने के लिए मचल उठे. मेरी नज़र अनायास उसकी चुचियों पर चली गयी. दो बड़ी-बड़ी बॉल मानो उसके टॉप के अंदर एक दूसरे से मिला कर रख दी गयी हों. मेरी नज़रों को ताड़कर रागिनी ने उन्हें और ज़्यादा उभारते हुए गाड़ी को पोंछना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद रागिनी मेरे बाजू में ही आ गयी और मेरे हाथ से कपड़ा लेने लगी. मैंने मना किया तो रागिनी छीना-झपटी करने लगी.
मैं – रहने दे रागिनी, मैं साफ कर लूँगा, वैसे भी तुझे कुछ आता जाता नहीं है.
ये बात रागिनी को थोड़ी चुभ गयी और रागिनी मेरे हाथ से जबरदस्ती कपड़े को खींचने लगी. मैंने उस कपड़े को अपने पीछे छिपाने की कोशिश की, तो रागिनी ऊपर ही चढ़ने लगी, और कपड़ा लेने के बहाने मेरे सीने से चिपक गयी. गीले हो चुके टॉप से वैसे भी रागिनी की बड़ी-2 बूब्स उबली पड़ रही थी. मेरी छाती से दब कर और चौड़ी होकर आधी तक ऊपर को उभर आई. आख़िर मर्द के लौड़े को इस सिचुएशन में जो फील होता है, वहीं मेरे वाले को भी हुआ, भले ही सामने वाली से कैसा भी रिश्ता रहा हो.
अब मेरा लंड कड़क होकर रागिनी की चूत के ऊपर ठोकर मारने लगा, जिसकी वजह से रागिनी की चूत और ज़्यादा खुंदस में आकर आँसू बहाने लगी होगी. वैसे तो मैं रागिनी की मंशा बहुत पहले ही समझ चुका था. लेकिन फिर भी मैंने अपनी ओर से उसे और ज़्यादा कुछ नहीं कहा. चुप-चाप से वो कपड़ा रागिनी को थमाया, और दूसरा कपड़ा उठा कर दूसरी गाड़ी को पोंछने लगा.
रागिनी बुरा सा मुँह बना कर गुस्से में भुन-भुनाई और कपड़ा ज़मीन पर फेंक कर अपने पैर पटकती हुई घर की तरफ चली गयी. ये मेरे लिए अच्छा हो गया, चलो मुसीबत टली, अब मैं शांति से गाड़ियों को साफ कर सकता था.
आधे घंटे में मैंने दोनों गाड़ियों को एक दम साफ कर के चमका दिया और आकर ठाकुर साहब को बोला – लीजिए सर आपकी दोनों गाड़ियाँ साफ हो गयी, चाहो तो आप चेक कर सकते हैं.
ठाकुर साहब बोले – अरे बेटा, कैसी बात करते हो. बोलो तुम्हारी कितनी कमाई हुई?
मैंने कहा – जो आप अपने नौकर को देते हो इतने काम के लिए उतना ही दे दो. तो उन्होंने मुझे 500/- का एक नोट पकड़ा दिया.
मैंने कहा – ये तो इतने छोटे से काम के लिए बहुत ज़्यादा है.
ठाकुर साहब बोले – अरे रख लो, ग़रीब बच्चों के ही तो काम आना है.
मैंने उनकी बात का मान रखते हुए वो नोट ले लिया, तब तक रागिनी भी अपने कपड़े चेंज कर के आ चुकी थी. फिर हम दोनों वापस कालेज लौट आए. लेकिन रास्ते भर रागिनी मुझे गुस्से से ही घूरती रही, लेकिन बोली कुछ नहीं. कालेज पहुँचते-2 दूसरे स्टूडेंट्स भी आ चुके थे. सब का कलेक्शन कर के जितना पैसा इकट्ठा हुआ, उसे अनाथ आश्रम को भिजवा दिया. ये सब काम निबटाने में 3 बज गये थे.
मैं घर आया और सीधा बाथरूम में जाकर कपड़े चेंज किए और एक टीशर्ट के साथ शॉर्ट पहन कर बाहर आया. बाहर मुझे कोई नहीं दिखा. किचन से बर्तन खटकने की आवाज़ आ रही थी. जाकर देखा तो रमा दीदी बर्तन साफ कर रही थी.
रमा दीदी ने मुझे देखते ही पूछा – अरे अंकुश!! भाई तू आज इतना लेट कैसे हो गया?
मैंने उन्हें पूरी बात बताई और खाना लेकर वहीं बैठ कर खाने लगा. खाना खाते-2 ही मैंने दीदी से पूछा – दीदी, कामिनी भाभी कहाँ हैं, जो तुम बर्तन साफ कर रही हो??
रमा दीदी – महारानी साहिबा सो रही हैं. उनका वैसे भी काम करने का कोई मतलब नहीं है. कुछ आता-जाता हो तो कुछ करें भी. इससे अच्छा था कि भैया अपने साथ ले ही जाते तो ठीक रहता. कम से कम मेरे लिए काम तो कम होता.
मैं – अरे! ये क्या कह रही हो, कामिनी भाभी तो काम की वजह से ही रुकी थी. ऐसा है तो रमा दीदी आप उन्हें सिखाओ ना.
रमा दीदी – सिखाया उसको जाता है अंकुश, जो सीखना चाहे. कामिनी भाभी को ये काम करने ही नहीं हैं तो सीख कर क्या करेंगी. कृष्णा भैया की कमाई पर ऐश करनी है उनको तो.
मैं – तो क्यों ना हम कृष्णा भैया को फोन कर दें कि उन्हें अपने साथ ले ही जायें?
रमा दीदी – रहने दे अंकुश. उन दोनों को ही बुरा लगेगा. अब जैसे-तैसे कर के ये दिन तो निकालने ही पड़ेंगे. पर मैं क्या बोलती हूँ. तू ना!! कामिनी भाभी के साथ इतना मत चिपके रहा कर.
मैं - मैं कहाँ चिपका रहता हूँ. जब मैंने ये कहा, तो रमा एकदम से बोल पड़ी.
रमा दीदी – रात भर कहाँ था तो फिर?
मैंने झटके से रमा दीदी की तरफ देखा, वो मेरे पास आकर बैठ गयी और मंद-2 मुस्कराते हुए बोली.
रमा दीदी – अब मैं बच्ची नहीं हूँ अंकुश! तेरे से बड़ी हूँ और ग्रैजुएट भी हूँ. मुझे सब पता है. तू क्या-2 करता है.
फिर कुछ सीरीयस होकर रमा दीदी बोली – तुझे अपनी बहन के अलावा बाकी सब दिखाई देते हैं इस घर में.
मैं रमा दीदी की बात सुनकर खाना ही भूल गया और उसकी तरफ देखने लगा.
रमा दीदी – क्या मैंने ग़लत कहा कुछ? अब तक तो मोहिनी भाभी ही थी. अब कामिनी भाभी भी आ गयी. मैं तो जैसे तेरे लिए इस घर में हूँ ही नहीं.
फिर रमा दीदी मेरे कंधे को हिलाते हुए बोली - अब खाना खा ले. यूं मुँह फाड़े मत देखता रह मुझे. मोहिनी भाभी ने भी कभी-कभार के लिए तो बोला ही था.
मैंने कहा - ठीक है दीदी. आज हम दोनों एक साथ सोएंगे.
रमा दीदी खुशी से मेरे गले से लिपटे हुए बोली – क्या??? सच!!??
फिर अलग होते हुए बोली – लेकिन कामिनी भाभी का क्या करोगे. भाभी तुम्हें अकेला छोड़ेंगी भला?
मैं – उसका भी कोई ना कोई हल निकल आएगा. आज रात तुम मेरा अपने कमरे में इंतजार करना.
मेरी बात सुनकर रमा दीदी खुश हो गयी और जाकर अपने काम में लग गयी. मैंने भी अपना खाना खतम किया, अपनी बुलेट उठाई और टाउन की तरफ निकल गया. मैंने सोचा कि अगर कामिनी भाभी को यहाँ से जल्दी से जल्दी विदा करना है, तो उनके साथ ऐसा कुछ करना होगा, जिससे कामिनी भाभी कृष्णा भैया को सामने से बुलाकर यहाँ से चली जाएँ.
यही सब सोचते-सोचते, मैंने अपनी बुलेट एक मेडिकल स्टोर के सामने रोकी और उससे एक 500 एम.जी. वियाग्रा लेकर घर लौट लिया. रात के खाने के बाद, कामिनी भाभी ने मुझे अपने कमरे में आने का इशारा किया. मैंने उन्हें थोड़ी देर इंतजार करने का इशारा कर दिया. रमा दीदी तिरछी नज़र से ये सब देख रही थी और मन ही मन कामिनी भाभी को गालियाँ दे रही थी… खाने के बाद मैंने वियाग्रा पानी के साथ गटक लिया. इस दवा के बारे में ये जानकारी मैंने नेट से निकाली थी, जिसका असर डेढ़-दो घंटे के अंदर पूरी तरह हो जाना था. मैंने दीदी को शांत रहने का इशारा कर के, अपने कमरे में चला गया. कुछ देर के बाद उसको गेट खुला रखने का बोल कर मैं कामिनी भाभी के कमरे की तरफ बढ़ गया.
वियाग्रा लिए हुए अभी मुझे एक घंटा ही हुआ होगा, कि उसका असर मेरे शरीर में महसूस होने लगा. मुझे कामिनी भाभी के घर के कामों में सहयोग ना देने से गुस्सा आ रहा था, कृष्णा भैया के सामने तो बड़े-बड़े भाषण दे रही थी, मानो वो इस घर के लिए कितनी समर्पित है और अब अपनी औकात दिखाने लगी.
कामिनी भाभी बड़े घर की बेटी होगी अपने लिए. यहाँ उसे रहना है तो एक आदर्श बहू बनकर ही रहना होगा, ना कि किसी महारानी की तरह हुक्म चला कर. रमा दीदी को मोहिनी भाभी ने अब तक अपनी छोटी बहन की तरह माना है और कामिनी भाभी ने उसे अपनी नौकरानी बना दिया. ये सब सोच कर मेरे अंदर कामिनी भाभी के प्रति एक गुस्से की भावना पनप चुकी थी, इसलिए मैंने अब सोच लिया था कि इनको इनकी औकात दिखानी ही पड़ेगी.
कामिनी भाभी चुदने की पूरी तैयारी कर के बैठी थी. अपनी मिनी ब्रा और पैंटी के ऊपर एक छोटा सा पारदर्शी गाउन डाल रख था जिसका होना ना होना एक जैसा ही था. मैंने भी देर नहीं की और अपने कपड़े निकाल दिए, फिर कामिनी भाभी के गाउन को उतार कर एक ओर फेंक दिया.
भाभी मेरी जल्दबाज़ी देख कर बोली – क्यों अंकुश आज बड़े उतावले हो रहे हो??
मैं – कामिनी भाभी! सामने इतना हॉट माल हो तो इंतजार कहाँ होता है??
ये कह कर मैंने अपने भी कपड़े निकाल दिए और अपना कड़क लंड उनके मुँह के सामने लहरा दिया. मेरे मस्ती में झूमते लौड़े को देख कर उन्होंने उसे अपनी मुट्ठी कस लिया, और उसके सुपाड़े को चाटते हुए बोली.
कामिनी भाभी - आअहह… अंकुश, क्या बात है, आज तो ये और ज़्यादा मस्त कड़क लग रहा है???
मैंने मुस्कराते हुए कहा – कल की मलाई खाकर ये और ज़्यादा चाक-चौबंद हो गया है.
कामिनी भाभी की आँखों में हवास के लाल डोरे दिखने लगे थे, वैसे यही हाल मेरा भी था उन्होंने मेरे लंड को कसके पकड़ा और मेरे टोपे पे अपने होंठों को रख दिया. इस असीम आनंद की वजह से मेरी आँखें बंद होती चली गई पर भाभी ने मेरे लंड को पूरा मुँह नहीं भरा था, बल्कि मेरे लंड को यहाँ वहाँ चूमना शुरू कर दिया. टोपे पे, मेरे आंड पे..
कामिनी भाभी मेरे लंड को हर तरह से घुमा-घुमा के उसे चूम रही थी और मैं मुश्किल से अपनी आह रोक रहा था, क्योंकि रमा दीदी पास के कमरे में ही सो रही थीं, और मैं नहीं चाहता था कि ये आनंद बंद हो या दीदी को बुरा लगे. पर कामिनी भाभी भी एक मंझी हुई खिलाड़ी थी, उन्हें मर्द की जरूरत का संपूर्ण ज्ञान था.
कामिनी भाभी ने मेरे लंड पर धीरे से थूक दिया और उसे ऊपर से लेकर नीचे तक ऐसे मसलने लगी मानो मेरे लंड की मालिश कर रही हों. कामिनी भाभी की ऐसी हरकतों से मेरे लंड में तूफान आने लगा था, क्योंकि मेरा आज का पहला बार था और मैं बहुत कोशिश कर रहा था कि मेरा माल ना निकले, पर उनकी हरकतों की वजह से मैं शायद और ज़्यादा देर तक रुक नहीं सकता था.
कामिनी भाभी ने मेरे लंड पर अपने थूक की मालिश करने के बाद अपनी प्यारी से जीभ निकाली और मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया. भाभी की इस हरकत से तो मेरे जिस्म में कंपकंपी सी भर गई थी पर भाभी ने तो अभी बस शुरू ही किया था.
कामिनी भाभी ने अपनी हरकतों में पूरी तेज़ी ला दी थी, वो मेरे लंड को ऊपर उठा के उसे नीचे से लेकर ऊपर तक चाट रहीं थीं
मैं - आईईई... आआआह्ह्ह्ह्ह..... भाभी........
मैं बड़ी ही मुश्किल से अपनी आह रोक रहा था, पर कामिनी भाभी पूरी मेहनत में लगी हुई थी. भाभी मेरे लंड को हर तरह से चूस रही थी.. चाट रही थी..
मेरा पूरा जिस्म बुरी तरह से कांप रहा था, ऐसा लग रहा था कि कभी भी मेरे माल की बारिश हो सकती है.. और बड़ी बात ये थी कि अभी तक कामिनी भाभी ने मेरे लंड को ढ़ंग से मुँह के अंदर भी नहीं लिया था. कामिनी भाभी ने मेरी ये हालत बिना लंड को मुँह में लिए ही कर दी थी. कामिनी भाभी ने अब पहली बार ऐसा किया था कि मेरे टोपे को अपने होंठों के बीच लेकर उसे कस कर चूस लिया था… ना सिर्फ चूसा था, बल्कि निचोड़ ही लिया था.
मैं – आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह्ह… कामिनी भाभी… भाभी…
मेरी बात सुनकर कामिनी भाभी भी मुस्कराने लगी, और मेरी आँखों में देखते हुए उसे अपने मुँह में भर लिया. कुछ देर भाभी मेरे लौड़े को मज़े ले कर लॉलीपॉप की तरह चूसती रही, फिर जैसे-जैसे मेरी उत्तेजना में बढ़ोत्तरी हुई, मैंने अपनी कमर भी चलाना शुरू कर दिया, और एक तरह से उनके मुँह को चोदने लगा.
मेरा लंड गोली के असर से एकदम डंडे की तरह सख्त हो चुका था, अचानक मैंने कामिनी भाभी के सर को अपने हाथों में जकड़ा, और पूरा लंड मुँह में ठेल दिया. मेरा लंड जाकर कामिनी भाभी के गले में फँस गया. कुछ देर मैं यूँ ही उसे दबाए रहा. उनकी गले की नसें फूलने लगी, आँखें बाहर को उबल पड़ने को हो गयी.
मैंने सोचा, अगर ज़्यादा देर ऐसे ही रखा तो कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए, तो मैंने झटके से उसे बाहर खींच लिया. पूरा रॉड जैसा सख्त लंड उनकी लार से लिथड़ा हुआ था, कामिनी भाभी कुछ देर तक खाँसते हुए अपनी साँसें नियंत्रित करती रही. फिर कुछ राहत की साँस लेकर, शिकायत करते हुए बोली.
कामिनी भाभी - अंकुश, बड़े जालिम हो तुम, ऐसे भी कोई करता है?? मेरी साँस ही रोक दी तुमने तो.
मैंने मासूम सा चेहरा बनाकर कहा – सॉरी भाभी, मुझसे रहा नहीं गया, ग़लती हो गयी. अब नहीं करूँगा.
कामिनी भाभी ने आँखें मटकाते हुए वापस मेरे लौड़े को मुँह में भर कर जबरदस्त चुसाई करने लगी. 10 मिनट की चुसाई के बाद मेरा लंड झड़ने को हो गया.
मैं- आआआह्ह....भाभी.......
मेरी हिम्मत टूट चुकी थी, उनकी इस हरकत की वजह से मेरे लंड से सफेद गाड़ा रस निकल पड़ा था, जो सीधा कामिनी भाभी के खूबसूरत चेहरे को और खूबसूरत करता जा रहा था
मेरे वीर्य के निकलते ही, कामिनी ने अपने होंठों को अलग कर दिया था, जिस वजह से मेरे वीर्य की बौछार सीधी उनके मुंह पे हो रही थी.. और जल्दी ही कामिनी के मुंह पे मेरा सफ़ेद गाढ़ा रस था. मैं तो कुछ पलों के लिए अपनी आंखों को बंद करके उस पल में खो सा गया था.
कामिनी भाभी को ये बुरा नहीं लगा, उलटा कामिनी ने मुस्कुराते हुए मेरे लंड को मुंह में लेकर एक बार अच्छे से चूस लिया और मेरे लंड का बचा खुचा वीर्य भी निचोड़ लिया.
कामिनी भाभी - आअह्ह्ह अंकुश तुम्हारा माल तो बहुत ही स्वादिष्ट है.
कामिनी ने मुस्कुराते हुए मेरे माल में सने हुए अपने चेहरे और होंठों पर मेरे लंड को लगा के उसे सहलाने लगी. भला भाभी की ऐसी हरकतों से कौन नहीं पसीज जायेगा. कामिनी ने उंगली से अपने चेहरे से मेरे माल को ले के मुंह में रख उसे चाटना शुरू कर दिया.. उफ्फ… उनकी इस हरकत ने तो मुझे पूरा पागल कर दिया था, और धीरे-धीरे करके अपने चेहरे से मेरा सारा वीर्य पोंछ के चाट गई थी. मेरा लंड अब तक सुस्त पड़ चुका था.
उफफफ्फ़... भाभी ने मुझे अपना दीवाना बना लिया था. भाभी खड़ी होती है और मुझे एक बार फिर से चूम लेती हैं.
कामिनी भाभी - उम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्म्म्म.... अंकुश यू आर सो हॉट... और फिर एक कदम पीछे हो के मुझे कातिलाना अंदाज़ में देखते हुए मुस्कुरा कर धीरे से कहती है.
कामिनी भाभी - तैयार हो जाओ अंकुश डार्लिंग.. आज तुमको मैं स्वर्ग का द्वार दिखती हूँ
ना चाह कर भी, मैं अपने लंड को मसलने पर मजबूर हो गया था, वैसे कामिनी भाभी की कामुक हरकतों का मेरे ऊपर सही वाला प्रभाव पड़ रहा था.. क्योंकि मेरा लंड जो सो चुका था, वापस से जागने लगा. अगले ही पल उन्होंने अपने जिस्म से अपनी ब्रा को अलग कर दिया, उनका टाइट जिस्म इतना कामुक लग रहा था.. कि मेरी सांसे जोर से पकड़ने लगी थी. मैं बिना कुछ बोले बस उन्हें देखे जा रहा था, और कामिनी भाभी को भी पता था कि मैं वही देख रहा हूँ.. जो वो दिखा रही हैं. वो अपने हाथ पीछे ले जाती हैं, और अपने जिस्म को थोड़े आगे की तरफ करती हैं, जिनकी बड़ी और उभरी हुई चुचियों के दर्शन पाकर मेरा जीवन ध्यान जो जाता है.
मैं अपने लंड को जोर-जोर से मसल रहा था..
मैं - हाय.. कामिनी भाभी आप कितनी खूबसूरत हो…
कामिनी भाभी मुझे देख कर मुस्कुराती है और कहती है "अभी तो असली खजाना बाकी है"
मुस्कुराते हुए कामिनी भाभी ने अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी चूत पर हाथ रख दिया..
मैं- कामिनी भाभी जल्दी करो ना…
मैंने किसी मासूम बच्चे की तरह जिद की, जिसे सुनकर भाभी भी मुस्कुरा उठी. उन्होंने अगले ही पल अपनी पैंटी को यूं जिस्म से अलग कर दिया, जैसे वो बस यहीं रखी हो. फिर मैं उनके चुचे मसलते हुए बोला.
मैं - कामिनी भाभी मुझे आपकी गान्ड बहुत अच्छी लगती है. एक बार दो ना प्लीज़.
कामिनी ना नुकुर करने लगी. तो मैंने भी धमकी दे दी. तो ठीक है रखो उसे अपने शो केस में सज़ा कर, मुझे नहीं चाहिए. और अपने कपड़े उठाने लगा.
कामिनी भाभी ने झपट कर मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली – प्लीज़ अंकुश ज़िद मत करो. मैंने कभी ट्राइ नहीं की है. फिर भी अगर तुम्हें गान्ड ही चाहिए तो प्लीज़ एक बार मुझे आगे से कर दो. लेकिन थोड़ा प्यार से करना अंकुश. प्लीज़, मुझे दर्द होगा.
मैं - ठीक है कामिनी भाभी. अब आप बेफिक्र रहो. मैं आपको दर्द नहीं होने दूँगा.
मैंने थोड़ी देर उन्हें गरम किया. और जब उसकी चूत पानी देने लगी तो मैंने अपना लौड़ा कामिनी भाभी की चूत में डाल दिया. और जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी. कामिनी भाभी हाय- हाय करती हुई 10 मिनिट में ही झड़ने लगी. फिर मैंने उसे घोड़ी बनाने को कहा.
कामिनी भाभी – प्लीज़ अंकुश मान जाओ ना. मुझे दर्द होगा.
मैंने कहा – भाभी इसकी आप चिंता ना करो.
मैंने उसकी गान्ड चाटना शुरू कर दिया. घोड़ी बनाने के बाद भी मैंने उसकी टाँगों को और चौड़ा कर दिया, अब कामिनी भाभी की गान्ड का सुराख थोड़ा खुल गया था. मैंने उसकी चूत में तीन उंगलियाँ डाल कर उन्हें मोड़ कर बाहर निकाला. तो कामिनी भाभी की चूत की मलाई ढेर सारी मेरी उंगलियों के साथ आ गयी. जिसे मैंने भाभी की गान्ड के सुराख में डाल कर एक उंगली से अंदर बाहर कर के चिकना कर दिया. कुछ देर उंगली से गान्ड चोदने के बाद मैंने अपने सुपाड़े थूक लगा कर गीला किया और उसके टाइट गान्ड के सुराख पर रख कर अंदर ठेल दिया.
कामिनी भाभी कराह कर अपनी टाँगें सिकोड़ने लगी. मेरा पूरा सुपाड़ा उसकी गान्ड में घुस चुका था. फिर मैंने अपनी टाँगों को कामिनी भाभी की जांघों के आगे से अड़ा दिया और कंधों पर दोनों हाथों को जमा कर एक करारा सा धक्का दे मारा.
कामिनी भाभी - अरईईईईईईई... मैय्आआआआआआअ… माआआआअरर्र्र्र्ररर.. डलल्ल्ल्ल्लाआाआअ.. रीईईईई.
कामिनी भाभी मुझे अपने ऊपर से धकेलने की भरसक कोशिश कर रही थी. लेकिन मेरी टाँगें उसे हिलने तक नहीं दे रही थी. ऊपर से दोनों हाथों ने उसका अगला धड़ दबोच रखा था.
मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी गान्ड में था. एक बार लंड की साइड में अपना थूक और डाल कर उसे थोड़ा सा बाहर खींचा और एक लंबी साँस खींचकर एक जबरदस्त झटका मारा. मोटे बबूल के डंडे जैसा मेरा सख्त लंड, भाभी की कोमल गान्ड को चीरता हुआ जड़ तक फिट हो गया. अपना एक हाथ में पहले ही उसके मुँह पर फिट कर चुका था. उसने चीखना चाहा. लेकिन चीख ना सकी. उसकी आँखों से आँसू झरने लगे.
मैंने यहीं हद नहीं की और कामिनी भाभी की चुचियों को मसलते हुए धक्के देना शुरू कर दिया. बहुत देर तक वो कराहती रही. दर्द से तड़पती रही. कामिनी भाभी अपनी गान्ड को हिला डुला कर मेरे सोटे को गान्ड से निकालने का प्रयास करती रही लेकिन मेरी टाँगों की पकड़ ने उन्हें हिलने तक नहीं दिया. फिर मैंने अपना एक हाथ कामिनी भाभी की चूत पर ले जाकर सहलाने लगा. भाभी का दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी. मैं पूरी लंबाई के स्ट्रोक के साथ उनकी गान्ड फाड़ने में लगा हुआ था.
वियाग्रा के असर से मेरा लंड गान्ड में जाकर और ज़्यादा फूल गया, कामिनी भाभी की टाइट गान्ड के होल की दीवारें छिल सी गयी, मेरे लंड में भी दर्द सा होने लगा था. लेकिन उसकी परवाह ना करते हुए मैं लगा रहा गान्ड चोदने में, टाइट गान्ड की रगड़ और उसके अंदर की गर्मी से मेरा लंड भी जल्दी ही पिघलने लगा और मैं झड़ गया.
मेरे पैर हटते ही कामिनी भाभी धप्प से बिस्तर पर औंधे मुँह गिर पड़ी. उसके गिरते ही मेरा लंड ऑटोमेटिकली बाहर आ गया. मैंने देखा तो उसपर कुछ खून के धब्बे से लगे हुए थे. जो कामिनी भाभी की गान्ड की अंदर दीवार के फटने से लग गये थे.
कामिनी भाभी की गान्ड का छेद लाल सुर्ख हो गया था, लंड बाहर आने के बाद भी कुछ देर तक वो एक सर्किल के शेप में खुला ही रहा. उन्हें यूँ ही पड़ा छोड़कर मैंने चुप चाप अपने कपड़े उठाए और उनके रूम से खिसक लिया. दरवाजे को भिड़ा कर बाहर निकल आया. वो यूँ ही बेसुध पड़ी रह गयी. बाहर आकर मैंने बाथरूम में जाकर अपने लंड को साफ किया और बिना कपड़े पहने ही रमा दीदी के रूम में घुस गया. टाइट गान्ड की ज़बरदस्ती की रगड़ और वियाग्रा के असर से मेरे लंड में भी थोड़ा सा दर्द जैसा था. लेकिन उसकी अच्छी-खासी कसरत होने से वो अभी भी ढीला नहीं हुआ था.
रमा दीदी एक चादर ओढ़े मेरा इंतजार कर रही थी. गेट बंद कर के मैंने उसकी चादर हटाई...वाउ! उसके बदन पर कपड़े के नाम पर एक रेशा तक नहीं था. मैं उनके साथ लेट गया, और उसके नंगे तपते बदन को अपनी कामुक हरकतों से और ज़्यादा पिघलने लगा.
जब रमा दीदी लंड लेने के लिए उतावली दिखने लगी, तो मैंने बड़े प्यार से अपना डंडे जैसा लंड जो अभी भी दवा के असर में था, उसकी रसीली चूत में धीरे-2 डालने लगा. लंड फूल कर इतना कड़क हो चुका था, की दीदी की गीली चूत आधे में ही फड़फड़ाने लगी.
रमा के मुँह से कराह निकलने लगी. मैं आधे लंड से ही रमा की तमन्ना पूर्ति करता रहा और जितनी निर्दयता से मैंने भाभी की गान्ड फाड़ी थी. उसके ठीक उलट मैं रमा दीदी के साथ बड़े इतमीनान के साथ चुदाई करने लगा. अब मेरी कोशिश रहती थी, कि मैं अपनी रमा दीदी को आधे लंड से ही संतुष्ट करूँ जिससे उसके कुंवारे पन पर ज़्यादा फ़र्क ना पड़े. ये भाभी का ही सुझाव था हम दोनों के लिए. कभी-कभी तो बिना अंदर डाले ही हम दोनों संतुष्ट हो जाते थे.
आज भी बड़े सॉफ्ट तरीके से चोदकर मैं रमा दीदी को संतुष्ट करना चाहता था, लेकिन दवा का असर, ऐसा ना करने पर मजबूर कर रहा था., और ना चाहते हुए भी जब वो मेरा सहयोग करने लगी तो मैंने उन्हें थोड़ा ज़ोर से रगड़ दिया. रमा दीदी तो इस तरह का वाइल्ड सेक्स पाकर मस्त हो गयी, देर रात तक हम दोनों एक दूसरे में गूँथे रहे, और फिर मैं उसके बगल में ही सो गया.
दूसरे दिन सुबह मेरे कालेज जाने तक भी कामिनी भाभी अपने कमरे से बाहर नहीं आई तो मैं एक नज़र उनको देखने चला गया. वो अभी भी सो रही थी. लेकिन अब उनके बदन पर व्यवस्थित कपड़े थे. फिर मैंने सोचा की कालेज से लौट कर ही बात करता हूँ. और मैं वहाँ से अपने कालेज चला गया. दोपहर को कालेज से वापस आने के बाद देखा, तो कामिनी भाभी अभी भी अपने कमरे में ही थी. मैं सीधा उनके पास चला गया.
कामिनी भाभी मुझे देख कर सुबकने लगी. और शिकायत करते हुए बोली - मेरे साथ तुमने ऐसा क्यों किया अंकुश?? तुमने कौन से जन्म की दुश्मनी निकाली मेरे साथ??
मैंने कहा – सॉरी कामिनी भाभी, मैं आपकी सुन्दर सी मदमस्त गान्ड देख कर अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाया. और वो सब मुझसे हो गया जो में कभी नहीं करना चाहता था. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए. अब मैं आज आपसे एक वादा करता हूँ. कि आज के बाद मैं आपको कभी हाथ भी नहीं लगाऊंगा. कामिनी भाभी हड़बड़ाते हुए कुछ बोलना चाहती थी, कि मैंने हाथ का इशारा कर के उन्हें रोक दिया और बोला.
मैं - आपको कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है. अब मेरे लिए यही सज़ा है. कि मैं आज के बाद अपनी प्यारी और परी जैसी सुन्दर कामिनी भाभी के पास भी ना फटकूं. हो सके तो मुझे माफ़ कर देना.
उसके बाद मैंने उनके जवाब का भी इंतजार नहीं किया और उनके पास से उठ कर चला आया. रमा दीदी छिपकर हमारी बातें सुन रही थी. मुझे बाहर आते देख वो किचन में चली गयी और मुझे इशारे से अपने पास बुलाकर हँसते हुए बोली.
रमा दीदी – वाह भाई. क्या सबक सिखाया है तूने कामिनी भाभी को?? मज़ा आ गया.. साँप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी, इस बात पर हम दोनों ही ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे.