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Incest Mera Pyara Devar - Ankush

aidenabhishek

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UPDATE 20

पापा - रमा बेटी… कहाँ हो सब लोग?

पापा की आवाज़ सुनकर, हम तीनों को जैसे साँप सूंघ गया, जो जिस पोज़िशन में था, वहीं जम गया. फिर मोहिनी भाभी को जैसे होश आया हो.

मोहिनी भाभी झटपट मेरे मुँह से उठी और रमा दीदी से बोली – रमा तुम जल्दी से नीचे चलो, मैं दो मिनिट में आती हूँ.

रमा दीदी लपक कर उठी और गेट खोलकर नीचे भागती हुई चली गयी. मोहिनी भाभी भुनभुनाते हुए अपनी गाउन पहनने लगी – ये पापा को भी अभी आना था, थोड़ी देर बाद नहीं आ सकते थे.

मोहिनी भाभी और मेरी, हम दोनों, की हालत हद से ज़्यादा खराब थी, हम ऐसी स्थिति में थे जहाँ से लौट पाना हर किसी के वश में नहीं होता. लेकिन मेरे लिए खड़े लंड पे धोखा (KLPD) कहो या भाभी के लिए गीली चूत पे धोखा (GCPD) हो ही गया था. रमा दीदी तो बेचारी अभी शुरू ही हुई थी.

मोहिनी भाभी गाउन पहन कर थोड़ा अपने बाल सही कर के, मेरे नंगे लंड को चूमकर जो किसी तोप की तरह अभी भी सीधा खड़ा था बोली - कोई बात नहीं बच्चू, तुझे मैं बाद में देखती हूँ और स्माइल कर के वो भी नीचे चली गयी.

आज हमें कृष्णा भैया और कामिनी भाभी के पगफेरे कराने जाना था. सुबह से ही घर में चहल-पहल थी. दोनों भाई कल शाम को ही घर आ चुके थे. दो गाड़ियों से हम भाभी के घर पहुँचे. एमएलए साहब ने हम लोगों की खूब खातिरदारी की. कामिनी भाभी ने जाते ही मेरा गिफ्ट, एप्पल का लेटेस्ट आई-फ़ोन, मुझे दे दिया जो अभी-2 लांच हुआ था.

मैंने कामिनी भाभी के गालों को किस कर के थैंक्स कहा, तो वो मुस्कराते हुए बोली – ये तो आपका उधार था जो मैंने चुकाया है. इसका थैंक्स में आपसे कैसे ले सकती हूँ.

उसी दिन शाम को हम भाभी को लेकर विदा हो लिए. एमएलए साहब ने विदा के तौर पर कृष्णा भैया और कामिनी भाभी को एक शानदार Audi A4 कार गिफ्ट में दी. जिसे अच्छे से डेकोरेट कर के नव वधू को विदा किया. कृष्णा भैया खुद गाड़ी चला कर अपनी दुल्हन के साथ लाए.

राम भैया तो दूसरे दिन ही अपनी ड्यूटी पर निकल गये, कृष्णा भैया भी दो दिन अपनी दुल्हन को भरपूर प्यार देकर अपनी ड्यूटी लौट गये. कृष्णा भैया अब एसपी प्रोमोट हो चुके थे. तो लाज़िमी है, ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ गयी थी. इसलिए वो ज़्यादा समय नहीं दे पाए अपनी नव ब्याहता पत्नी को. लेकिन कृष्णा भैया का प्लान था कि कुछ दिनों के बाद वो कामिनी भाभी को साथ रखने वाले थे. इसमें घर पर भी किसी को एतराज नहीं था.

इधर कालेज में रागिनी मुझसे हर संभव मिलने का मौका ढूँढती रहती. मुझे नहीं पता कि उसके मन में क्या चल रहा था. लेकिन कुछ तो था जो मेरी समझ से परे था.

छोटी चाची की प्रेग्नेन्सी को भी पूरा समय हो चुका था. जिससे मोहिनी भाभी ज़्यादातर उनके पास ही रहती थी. अकसर मैं भी उनके पास चला जाता उनकी खैर खबर लेने, या कोई बाज़ार का अर्जेंट काम हो तो, ये सब जानने के लिए. लेकिन शायद इतना काफ़ी नहीं था, कोई तो एक ऐसी अनुभवी औरत चाहिए थी, जो अब 24 घंटे उनके पास रह सके तोचाचा अपनी ससुराल जाकर अपने छोटे साले की पत्नी (सलहज), भाव्या मामी, को ले आए जो चाची की उमर की ही थी.

30 वर्षीय भाव्या मामी, भरे पूरे बदन की मस्त माल थी, खास कर उनकी गान्ड देख कर किसी का भी लंड ठुमके लगाने पर मजबूर हो जाए. हल्के से साँवले रंग की 2 बच्चों की माँ भाव्या मामी, 36-32-38 का उनका कर्वी बदन बड़ा ही जान मारु था. कुछ-2 इस तरह का.

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मैं शाम को जब चाची के यहाँ पहुँचा तो भाव्या मामी को उनके पास बैठा देख कर सर्प्राइज़ हो गया, मैंने पहले उन्हें कभी देखा नहीं था. तो चाची से पूछ लिया.

मैं - चाची ये कौन हैं?

चाची - ये मेरी भाव्या भाभी हैं, तुम्हारी भाव्या मामी.

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मैंने उन्हें नमस्ते किया, तो उन्होंने अपनी कजरारी आँखें मेरे ऊपर गढ़ा दी, और बड़ी ही कामुक नज़र से देखते हुए मेरी नमस्ते का जवाब दिया.

चाची - भाभी, ये मेरे बड़े जेठ जी के सबसे छोटे लड़के हैं, अंकुश नाम है इनका. कालेज में पढ़ते हैं.

भाव्या मामी – बड़ा ही प्यारा भतीजा है आपका. इनसे तो मेलजोल बढ़ाना पड़ेगा.

मैं – क्यों नहीं भाव्या मामी, आप जैसी मामी से कौन उल्लू का पट्ठा दूर रह सकता है. मेरी बात पर वो दोनों खिल-खिलाकर हँसने लगी.

फिर चाची आँखें तिरछी कर के बोली – हैं अंकुश! आते ही मामी पर लाइन मारने लगे.

भाव्या मामी – अरे दीदी! हमारी ऐसी किस्मत कहाँ? इनके जैसा सुन्दर सजीला नौजवान, मुझ जैसी 2 बच्चों की माँ पर भला क्यों लाइन मारने लगा?

मैंने ब्लश करते हुए कहा – अरे मामी, आप इशारा तो करिए. लाइन तो क्या और भी बहुत कुछ मिल जाएगा आपको. रही बात दो बच्चों की, तो उससे क्या फर्क पड़ता है, ज़मीन उपजाऊ होगी तो फसल तो उगनी ही है.

भाव्या मामी – हाय दैया दीदी! ये अंकुश तो बड़ी पहुँची हुई चीज़ मालूम होते हैं. इनसे तो बच के रहना पड़ेगा.

चाची – अरे भाभी, अब मामी से मज़ाक नहीं करेंगे तो और किससे करेंगे. वैसे मैंने तो आज पहली बार इन्हें ऐसी मज़ाक करते देखा है.

ऐसी ही हँसी मज़ाक के बाद चाची बोली – अरे भाभी, ज़रा अंकुश के लिए चाय तो बना दो, हम भी थोड़ी सी पी लेंगे.

जब वो चाय बनाने किचन में चली गयी, तो चाची बोली –अंकुश, मुझे नहीं पता था, कि तुम ऐसे भी खुलकर मज़ाक कर सकते हो.

मैं – अरे चाची, जब भाव्या मामी ऐसी मज़ाक कर रही थी, तो मैं क्यों पीछे रहता, और वैसे भी मामी के साथ तो खुलकर मज़ाक कर ही सकते हैं ना?

चाची – हां वो तो है अंकुश, खैर ये बताओ कैसी लगी भाव्या मामी??

मैं – क्या कड़क माल है चाची. सच में, देखना कहीं चाचा लाइन मारना शुरू ना कर दें.

चाची – अरे अंकुश, वो क्या लाइन मारेंगे?? तुम अपनी कहो, मज़े करने हों तो जाओ कोशिश कर के देख लो, शायद हाथ रखने दे.

मैं – क्या चाची आप भी, मैं तो बस ऐसे ही मज़ाक कर रहा था.

चाची – जैसी तुम्हारी मर्ज़ी अंकुश, मैं तो बस तुम्हें खुश देखना चाहती थी.

मैं – ठीक है चाची, आप कहती हैं तो ट्राइ मार के देखता हूँ. ये कह कर मैं चाची को किस कर के, उनके आमों को तोड़ा सहलाया, और किचन की तरफ बढ़ गया.

भाव्या मामी स्लैब के पास खड़ी होकर चाय बना रहीं थी. कसे हुए सारी के पल्लू की वजह से उनकी गान्ड के उभार किन्हीं दो बड़े तरबूज जैसे बाहर को उठे हुए मुझे अपनी ओर खींचने लगे.

मैं चुप चाप से भाव्या के एक दम पीछे जाकर खड़ा हो गया और उनके कान के पास मुँह ले जाकर बोला – भाव्या मामी… बन गयी चाय?

अपने कान के इतने पास मेरी आवाज़ सुनकर भाव्या मामी, एकदम से चौंक गयी, और पलटने के लिए जैसे ही वो पीछे को हटी, भाव्या मामी की गान्ड मेरी जांघों से सट गयी. आहहह… क्या मखमली अहसास था उनकी गद्देदार गान्ड का?? ऐसा लगा जैसे दो डनलप की गद्दियाँ मेरी जांघों पर आ टिकी हों. इतने से ही मेरा बब्बर शेर अंगड़ाई लेने लगा. फिर भाव्या मामी ने जैसे ही पलट कर मेरी तरफ मुँह किया, उनके मस्त दो पके हुए आम, मेरे सीने से रगड़ गये. उनकी आँखों में खुमारी सी उतरने लगी.

अपनी पलकों को उठाकर भाव्या मामी मेरी तरफ देख कर बोली – बस बन ही गयी, अभी लाती हूँ, तुम चलो तब तक.

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मैं – क्यों मेरा यहाँ आना आपको अच्छा नहीं लगा भाव्या मामी?

भाव्या मामी मेरे सीने से अपने दोनों आमों को रगड़ते हुए बोली – अंकुश ऐसा तो नहीं कहा मैंने… वो तो बस मैं…

मैंने भी उनकी आँखों में झाँकते हुए अपने हाथ उनकी गद्देदार गान्ड पर रखकर अपने से और सटाते हुए कहा – वो बस क्या भाव्या मामी??? बोलो ना…

भाव्या मामी – हाय… अंकुश जी, छोड़ो ना! दीदी क्या सोचेंगी, तुम यहाँ ज़्यादा देर रहे तो??

मैं – चाची की चिंता मत करो, आप क्या सोच रही हैं, ये बताओ? इसके साथ ही मैंने उनकी गान्ड को ज़ोर से मसल दिया.

भाव्या मामी – सीईईई… ईईई… उईईईईईईईई... ईईई... अंकुश… मेरे सोचने से क्या होगा? वो मादक सिसकी लेते हुए बोली..

मैं - सब कुछ, जो आप चाहें. बस आप हां तो बोलिए.

कहकर मैंने भाव्या की गान्ड को और ज़ोर से मसल दिया. मेरे गान्ड मसलते ही वो अपने पंजों पर खड़ी हो गयी. जिससे मेरे लंड का उभार ठीक भाव्या की चूत के दरवाजे पर दस्तक देने लगा.

मेरे लंड का उभार अपनी चूत के मुँह पर महसूस करते ही भाव्या ने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी भर लिया और कसकर मसलते हुए बोली – इतने शानदार हथियार को भला कैसे मना कर सकती हूँ मैं, लेकिन अभी तो छोड़ो अंकुश, रात को मौका लग जाए तो देखेंगे…

मैंने कहा – पहले मेरा हथियार तो छोड़ो. वो खिल खिला कर हंस पड़ी, और मेरा लंड छोड़ दिया.

फिर भाव्या मामी जैसे ही स्लैब की तरफ पलटी, मैंने पीछे से भाव्या के दोनों बूब्स को अपने हाथों में भर लिया और भाव्या की गान्ड की दरार में अपना लंड फँसाकर बोला - आज रात को बहुत मज़ा आने वाला है भाव्या. मैं अपने लंड से आपकी चूत की बहुत ही जबरदस्त तरीके से चुदाई करूँगा.

भाव्या ने मेरे हाथ अपने बूब्स से अलग किए, और पलट कर मेरे होंठ चूम लिए. फिर अपने होंठों पर कामुक हँसी लाते हुए मेरे सीने पर हाथ रख कर किचन से बाहर धकेलते हुए बोली – देखते हैं अंकुश, कैसी सर्विस कर लेते हो?? अब जाओ यहाँ से.

मैं मन ही मन मुस्कराता हुआ चाची के पास आकर बैठ गया.

मेरे बैठते ही चाची ने पूछा – बात बनी अंकुश?

मैंने चाची के बूब्स को सहलाते हुए कहा – अरे चाची! आपके लाड़ले को भला मामी मना कर सकती हैं?

कुछ देर बाद भाव्या मामी चाय ले आई, हम तीनों गप्पें मारते हुए चाय पीने लगे.

चाची ने कहा – अंकुश, आज खाना यहीं खा लेना, क्यों भाभी?? आपको कोई प्राब्लम तो नहीं होगी ना.

भाव्या – कैसी बात करती हैं दीदी आप भी, भला मुझे क्या प्राब्लम होगी.

चाची ने मुझे आँख मारते हुए कहा – तो ठीक है अंकुश, आज घर मना कर देना खाने के लिए, और हां जल्दी आ जाना.

मैं उन्हें हां बोल कर अपने घर आ गया.

मैं - भाभी मेरे लिए आज खाना मत बनाना.

जब मैंने ये भाभी को बोला, तो भाभी मुझे अजीब सी नज़रों से घूरते हुए बोली.

मोहिनी भाभी – क्यों अंकुश?? कहीं स्पेशल दावत में जा रहे हो क्या?

मैं – नहीं ऐसी कोई दावत नहीं है मोहिनी भाभी. वो छोटी चाची ज़िद करने लगी कि आज हमारे साथ खाना, तो फिर मुझे भी हां करनी पड़ी.

मोहिनी भाभी – तो इसका मतलब, भाव्या मामी के हाथ का खाना खाओगे अंकुश?? हुउंम्म… ठीक है भाई, अब तरह–तरह के पकवान खाने की आदत जो पड़ गयी है जनाब को. ये कह कर मोहिनी भाभी मंद-मंद मुस्कराने लगी.

मैंने मोहिनी भाभी की द्विअर्थी बातों को सुनते ही मन ही मन कहा, सच में मोहिनी भाभी बहुत तेज हैं. इनसे कोई बात छिपाना बहुत मुश्किल है. लेकिन फिर भी मैं बोला.

मैं - ऐसा कुछ नहीं है मोहिनी भाभी. आप तो जानती ही हैं, सबसे ज़्यादा अच्छा खाना तो मुझे आपके ही हाथ का लगता है, पर उन्होंने ज़िद कर के कहा, तो फिर मैं भी मना नहीं कर सका.

मोहिनी भाभी – हां तो ठीक है अंकुश, चले जाना खाना खाने उसमें क्या है, वो भी तो अपना ही घर है. लेकिन सोने तो आओगे, या फिर सोना भी.. और अपनी बात अधूरी छोड़ कर वो मुस्कराने लगी.

मैं भी मुस्करा दिया और बोला – देखता हूँ, ज़्यादा कोई काम नहीं हुआ तो आ जाऊँगा.

मोहिनी भाभी हंस कर बोली – अंकुश पूरी रात का काम है, वहाँ???

फिर मोहिनी भाभी मेरे एकदम करीब आकर बोली – लगता है, देवर जी को भाव्या मामी पसंद आ गयीं? क्यों??

मैंने बिना कोई जवाब दिए नज़रें झुका ली तो भाभी मेरे गाल चूमते हुए बोली – अब भाव्या भी क्या करे बेचारी?? नज़र मिलते ही लट्टू हो गयी होगी अपने हीरो पर.

मैं कोई जवाब दिए बिना मुस्कराता हुआ चाची के घर की तरफ चला आया. वरना मोहिनी भाभी और भी टाँग खींचने लगती. मैं जब चाची के घर खाना खाने पहुँचा, तब भाव्या मामी खाना बना रहीं थी और चाचा खाने बैठे थे.

चाची ने चाचा से कहा – सुनो जी, आज आप जेठ जी के साथ बैठक में सो जाना, मैं और भाव्या भाभी, एक कमरे में सो जाएँगे और अंकुश भी यहीं सो जाएँगे.

चाचा ने अपनी मुंडी हिलाकर हामी भर दी और खाना खा कर कुछ देर बैठे, बात-चीत की. फिर बैठक में सोने चले गये. उसके बाद हम तीनों ने मिलकर खाना खाया, मैंने भाव्या मामी के खाने की जम कर तारीफ की, जिससे भाव्या खुश हो गयी. खाना खाकर मैं यूँ ही चाची के बगल में ही लेट गया, उनकी तरफ मुँह कर के, और उनसे बातें करने लगा.

भाव्या मामी किचन का काम निपटाकर हमारे पास आ गयी. इस समय भाव्या एक सिल्क की टाइट फिटिंग गाउन पहने थी, जिसमें से उनके कर्वी बदन का सारा इतिहास-भूगोल पता चल रहा था.

डिलीवरी के पहले पेट की मालिश करवाने से मांसपेशियाँ सॉफ्ट रहती हैं, जिससे नॉर्मल डिलीवरी में कोई कम्प्लीकेसी नहीं होती. तो भाव्या मामी तेल गरम कर के चाची की मालिश के लिए लाई थी और भाव्या मामी हम दोनों के पैरों की तरफ बैठ कर पहले चाची के पैरों के तलवों और पिंडलियों की मालिश करने लगी.

भाव्या का शरीर हिलने से मेरे पैर उनके मांसल कूल्हों से टच हो रहे थे, जिससे मेरे शरीर में झनझनाहट सी होने लगी. फिर भाव्या हम दोनों के बीच आकर चाची के पेट की हल्के-हल्के हाथों से मालिश करने लगी. जब भाव्या चाची के पेट को दूसरी साइड तक मालिश करती तो भाव्या की सेक्सी गांड ऊपर को उठ जाती.

मैंने मज़ा लेने के लिए जैसे ही भाव्या की गांड हवा में उठी, मैं और थोड़ा उनकी तरफ खिसक गया. अब भाव्या की गांड जैसे ही नीचे आती, तो मेरे खड़े हो चुके लंड से ज़रूर रगड़ती. हुआ भी ऐसा ही, जैसे ही भाव्या मामी की गांड नीचे आई, वो मेरे लंड से रगड़ गयी.

भाव्या ने थोड़ा ठहर कर स्थिति को समझा, और मन ही मन मुस्करा दी. अगली बार जैसे ही भाव्या मामी की गान्ड हवा में उठी, मैंने फटाफट हाथ डालकर अपना लंड, फ्रेंची को नीचे कर के, बाहर निकाल लिया. अब केवल पाजामे का हल्का सा कपड़ा ही बीच में था. लंड पूरा अकड़ चुका ही था. अब वो पाजामे के हल्के से कपड़े को आगे से उठाए हुए एकदम सीधे खड़ा था.

भाव्या ने भी इस बार जान बूझकर नीचे की तरफ लाते हुए अपनी गान्ड को और ज़्यादा पीछे की तरफ लहरा दिया… नतीजा… मेरा लंड उनकी गान्ड की दरार में फिट होकर उसके छेद पर अटक गया.

भाव्या - उईईई… मां.. आ… भाव्या मामी के मुँह से ना चाहते हुए भी एक हल्की सी सिसकी निकल पड़ी, जिसे चाची ने सुन लिया और अपनी आँखें खोलकर बोली - क्या हुआ भाभी?

भाव्या मामी – दीदी! ऐसा लग रहा था जैसे मेरे पीछे कुछ चुभा हो?

चाची बात को समझते हुए मन ही मन मुस्कराते हुए बोली – अंकुश! ज़रा देखो तो क्या चुभ रहा है भाव्या भाभी के पीछे?

मैंने अपने लंड को और थोड़ा पुश करते हुए कहा – मुझे तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा चाची यहाँ?

भाव्या मामी ने भी अपनी गान्ड का दबाव मेरे लंड पर डालते हुए कहा – अंकुश रहने दो मुझे ऐसे ही कुछ लगा होगा और वो फिर से मालिश करने में लग गयी.

बार-बार लंड की ठोकर, अपनी गान्ड के छेद पर महसूस कर के भाव्या मामी की आँखों में लाल-लाल डोरे तैरने लगे. चाची सब समझ रहीं थी, तो कुछ देर में ही खर्राटे लेने का नाटक करने लगी.

मैंने भाव्या मामी की गान्ड को सहला कर कहा – चाची तो सो गयीं भाव्या मामी, अब तुम भी आ जाओ सोते हैं.

भाव्या मामी बोली – अंकुश तुम भी यहीं सोने वाले हो क्या?

मैंने कहा – तो क्या हुआ?? आ जाओ, एक साथ सोते हैं.

भाव्या मामी – नहीं नहीं अंकुश.. भला दीदी क्या सोचेंगी???

मैं दूसरे पलंग पर चला गया, और भाव्या मामी को भी अपने पलंग पर खींचते हुए बोला – तुम बहुत डरती हो भाव्या.

इतना कहकर मैंने उनकी कमर में अपने हाथ लपेट कर उन्हें अपने बाजू में लिटा लिया. भाव्या मेरी ओर पीठ कर के लेट गयीं. हम दोनों का मुँह चाची की तरफ ही था. मैंने अपना सर उठाकर उनके होंठों को चूम लिया, फिर गान्ड मसलते हुए मैंने कहा.

मैं – आअहह… भाव्या मामी क्या सेक्सी माल हो आप?

भाव्या मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर बोली – इतनी भी सेक्सी नहीं हूँ मैं, अंकुश.

मैंने उनकी इकलौती गाउन भी निकलवा दी, भाव्या के शरीर की बनावट देख कर मेरा लंड ठुमके मारने लगा. मैंने अपने लंड को भाव्या की गान्ड की दरार में फंसकर एक जोरदार रगड़ा लगाते हुए उनके गले को चूम लिया.

भाव्या मामी - सस्सिईईईईईईईईई… आआअहह... अंकुश, कितना गरम और मोटा लंड है तुम्हारा.

मैं – आहहह… क्या मस्त गान्ड और बूब्स हैं आपकी?? जी करता है, खा जाऊं इन्हें.

भाव्या मामी सिसकते हुए बोली – सीईईईई… तो खाओ ना. मना किसने किया है. तुम्हारे लिए ही तो आई हूँ यहाँ.

भाव्या की गान्ड और मस्त बड़ी-2 एकदम तनी हुई चुचियों को देख कर मेरा लंड टनटना कर पेंडुलम की तरह ऊपर नीचे होने लगा. मैंने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए. मेरा लंड देख कर मामी अपनी पलकें झपकाना भूल गयीं.

मैंने पूछा – क्या देख रही हो भाव्या, पसंद आया??

भाव्या – आअहह… क्या मस्त लंड है तुम्हारा. इसे तो पूरी रात मैं अपनी चूत में ही डाले रहूंगी..

और मेरे लंड को कसकर मसलते हुए, भाव्या ने उसे अपने मुँह में भर लिया और मस्त लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी. मैं उनकी गान्ड और चुचियों को मसलने लगा. जल्दी ही मैंने भाव्या को सीधा लिटा दिया और उनकी टाँगों को चौड़ा कर के मैंने अपना लौड़े उनकी हल्की झांटो वाली गरम चूत में पेल दिया.

भाव्या - ससिईईईई… आआहह.. अंकुश.. अ. क्या मस्त लंड है तुम्हारा.. थोड़ा आराम से… उफफफ्फ़… मेरी चूत को पूरी तरह कस दिया है इसने. हाए... रामम्म… मज़ा आ गया कसम से.

चुदाई करते हुए मेरी नज़र चाची की तरफ गयी. वो अपनी पलकों से हल्की सी झिर्री बनाकर हमारी चुदाई का मज़ा ले रही थी. उनका एक हाथ उनकी चूत के ऊपर था, जिसे वो मसले जा रही थी. वाह! क्या सीन था?? एक मस्त भरे बदन की औरत मेरे लंड से चुद रही थी, दूसरी एक प्रेग्नेंट औरत उस चुदाई को अपनी आँखों से देख कर अपनी चूत मसल कर आनंद के दरिया में गोते लगा रही थी. हम तीनों ही अपने-अपने हिस्से के मज़े को पाने की कोशिश में जुटे हुए थे. अब तक भाव्या मामी दो बार अपना पानी छोड़ चुकी थी, तब जाकर मैंने अपना गाढ़ा मक्खन उनकी रसीली चूत में भरा.

थोड़ी देर एक दूसरे से चिपके पड़े रहने के बाद, मेरा लंड भाव्या मामी की गान्ड की गर्मी पाकर फिर से अंगड़ाई लेने लगा. मैंने उठ के अपना लंड भाव्या के मुँह में डाल दिया, जिसे भाव्या बड़े तन-मन से चूसने लगी. फिर मैंने भाव्या से उनकी गान्ड मारने को कहा. कुछ ना नुकुर के बाद वो मान गयी. भाव्या मामी की गान्ड थी ही ऐसी की वो अगर नहीं भी मानती, तो मैं आज उसे जबरदस्ती फाड़ देता. पास में ही तेल था. अच्छे से भाव्या मामी की चौड़ी गान्ड की मालिश कर के, थोड़ा धार बनाकर उनके छेद में डाला.

फिर अच्छे से दो उंगलियों से भाव्या मामी की गान्ड को अंदर तक चिकनाया और अपना लंड भाव्या की कसी हुई गान्ड के छेद में पेल दिया. भाव्या मामी के मुँह से कराह निकल गयी, लेकिन जल्दी ही उन्होंने अपने होंठ कसकर भींच लिए. मैंने मामी की दोनों टाँगों को उनके पेट से सटा रखा था, जिससे उनकी गान्ड का छेद पूरी तरह लंड के सामने आकर खुल गया. इस पोज़ में गान्ड मारने का अपना अलग ही मज़ा था, पूरा लंड आसानी से गान्ड में आ-जा रहा था. भाव्या मामी के बूब्स को मसलते हुए, मैं उनकी गान्ड में सटासट लंड पेलने लगा.

भाव्या ने मस्ती में आकर अपनी दो उंगलियाँ अपनी चूत में डाल दी और उसे चोदने लगी. कभी भाव्या उंगलियों को अंदर पेल देती, तो कभी बाहर निकाल कर अपनी चूत को थपथपाने लगती. अब भाव्या मस्ती में अपनी गान्ड को पलंग से अधर उठाकर चुदाई का मज़ा ले रही थी. ज़ोर-ज़ोर से मादक आवाज़ें निकालते हुए, मेरी जाँघों की थाप उनकी गान्ड के टेबल पर ताबड़तोड़ तरीक़े से पड़ रही थी. अब भाव्या मामी को चाची की भी कोई परवाह नहीं थी. हम दोनों ही अपने चरम की तरफ तेज़ी से बढ़ते जा रहे थे.

भाव्या मामी का पूरा शरीर बुरी तरह अकड़ने लगा और उन्होंने अपनी तीन उंगलियाँ एक साथ अपनी चूत में डालकर झड़ने लगी. इधर मैंने भी अपना नल उनकी गान्ड में खोल दिया. और उसने मदमस्त गान्ड के छेद को अपनी मलाई से भर दिया. भाव्या को अपनी गान्ड का आज पहली बार उद्घाटन करवा कर बहुत मज़ा आया, मुझे भी भाव्या मामी जैसी चौड़ी गान्ड वाली यौवन से भरपूर औरत को चोदने में और हम दोनों की मस्त चुदाई का लाइव शो देखकर चाची को अपनी चूत मसलकर पानी निकालने में. हम तीनों ही अपनी-अपनी तरह से देर रात तक मज़े लेते रहे.

ऐसे ही मस्तियों में कुछ दिन और निकल गये, मौका लगते ही भाव्या मामी और मैं शुरू हो जाते अपने पसंदीदा काम में. चाची को हमारा गेम देखने में बड़ा मज़ा आता और फिर एक दिन चाची ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया. घर भर में खुशियों की जैसे बहार ही आ गयी. शादी के इतने सालों के बाद छोटे चाचा को पिता बनने का सुख प्राप्त हुआ था, उनकी तो ख़ुशी की कोई सीमा ही नहीं थी.

डिलीवरी नॉर्मल घर पर ही हो गयी थी. लास्ट मोमेन्ट तक घर के कामों की वजह से कोई कम्प्लीकेशन नहीं हुई. एक नर्स को बुलाकर सब कुछ अच्छे से हो गया था. गाँव की नर्स की देखभाल से चाची को कोई परेशानी पेश नहीं आई. भाभी और बहनों ने भी अपने परिवार के नाते अपना फ़र्ज़ निभाया था. बच्चे का नामकरण भी संपन्न हो गया. मोहिनी भाभी ने ही उसका नाम अंश रखा. बीते कुछ दिनों में परिवार में एक के बाद एक खुशियाँ मिलती जा रही थी.

हफ्ते दर हफ्ते, कुछ महीनों तक मैं पंडितजी की बहू वर्षा को उसके इलाज़ के बहाने ले जाता रहा और उसे जंगल में मंगल करवाता रहा. इस बीच मैंने वर्षा के साथ जैसे चाहा सेक्स किया. वर्षा तो जैसे एक तरह से मेरी दीवानी ही हो गयी थी. लेकिन ये ज़्यादा लंबा नहीं चल सकता था. फिर एक दिन वर्षा भी प्रेग्नेंट हो गयी और उसके मुताबिक ये बच्चा भी मेरा ही था.

पंडिताइन उसे लेकर हमारे घर आईं ख़ासतौर से मोहिनी भाभी का धन्यवाद करने, जिनके सुझाव से उनकी बहू एक बड़ी मुसीबत से निकली थी, साथ ही एक बड़ी खुशखबरी भी सुनने को मिली. उनका मानना था, कि भूत बाधा हटने के बाद ही वो उनके बेटे का अंश धारण करने योग्य हो पाई है. लेकिन एकांत पाते ही वर्षा ने मोहिनी भाभी को ये सच्चाई बता दी, कि ये बच्चा मेरा ही अंश है.

उसी दिन शाम को मोहिनी भाभी ने मेरी टाँग खींचते हुए कहा - क्या बात है अंकुश जी?? आजकल गाँव की खूब आबादी बढ़ा रहे हो.

मैंने भी हँसते हुए कहा – ये सब आपकी मेहरबानी से हो रहा है मोहिनी भाभी, मेरा इसमें कोई हाथ नहीं है.

मोहिनी भाभी प्यार से मेरा कान खींचते हुए बोली– अच्छा जी! बीज तुम डालो और बदनाम मोहिनी भाभी को करते हो?? ये कह कर वो खिल-खिलाकर हँसने लगी, मैं भी उनके साथ हँसी में शामिल हो गया.

हम दोनों को इस तरह ज़ोर-ज़ोर से हँसते हुए देख कर कामिनी भाभी वहाँ आ गयी और बोली - क्या हुआ?? ऐसी कौन सी बात हो गयी, जो देवर भाभी इतने खुल कर हँस रहे हैं??? अरे भाई हमें भी तो कुछ बताओ…

मोहिनी भाभी बात संभालते हुए बोली – अरे कामिनी, ऐसी कोई बात नहीं है. अंकुश एक जोक सुना रहे थे. तो उसी को सुन कर हँसी आ गयी.

कामिनी भाभी – अंकुश हमें नहीं सुनाओगे वो जोक?

मोहिनी भाभी ने मुझे फँसा दिया, अब मैं उन्हें क्या जोक सुनाऊँ?​
 

DB Singh

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Ye hui na baat.. Pehle chachi ne ankush ke bache ko janam diya.. Ab versha bhi pregnant ho gai... Aise hi maza ata kahaani me..,nahi toh bina hath pair ke kahaani lgne lgta hai.. Tanvi ka kuchh sunne ko nahi mila... Na rekha ka rekha bhi pet se hoti toh shayad kuch romanch bnta twist ata.. Bhavya toh Bach nikli...
 
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aidenabhishek

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UPDATE 21

कामिनी भाभी – अंकुश हमें नहीं सुनाओगे वो जोक?

मोहिनी भाभी ने मुझे फँसा दिया, अब मैं उन्हें क्या जोक सुनाऊँ?

मुझे चुप देख कर कामिनी भाभी ज़िद कर बैठी - सुनाओ ना अंकुश. क्या अपनी बड़ी भाभी को ही सुना सकते हो?? हमें नहीं??

अचानक से मेरे दिमाग़ में स्कूल के समय का एक जोक क्लिक कर गया जो मेरे दोस्त ने सुनाया था.

मैंने कहा – ठीक है तो फिर सुनिए. लेकिन मतलब आपको निकालना पड़ेगा.

जोक - “सारी रात गुजर गयी, उसके इंतजार में मगर वो नहीं आई और हिला के सोना पड़ा??? “

दोनों भाभी मुँह बाए मुझे देखने लगी..

मैंने कहा – ऐसे क्या देख रही हो आप लोग?

कामिनी भाभी – अंकुश ऐसे जोक पसंद करते हो? और वो भी हमारे सामने ही?

मैंने कहा – इसमें ग़लत क्या है? ओह! इसका मतलब आप कुछ और ही समझ रही हो. अरे भाई, सारी रात लाइट नहीं आई. और पंखा हिला के सोना पड़ा.

इसपर दोनों खिल-खिलाकर हँसने लगी. ओह्ह्ह… – तो ये था. हम तो कुछ और ही समझे. कामिनी भाभी बोली.

मैंने कहा – आप क्या समझी? हाहाहा…

कामिनी भाभी झेंप गयी और चुप-चाप वहाँ से चली गयी. मैं और मोहिनी भाभी फिर से हँसने लगे. फिर मोहिनी भाभी थोड़ा सीरीयस होते हुए बोली – अंकुश, निशा से कभी बात चीत होती है?

मैं – हां कभी-कभार मैं ही अपनी तरफ से फोन कर लेता हूँ क्योंकि उसके पास मोबाइल तो है नहीं.

मोहिनी भाभी – वैसे तुम दोनों कितना आगे तक बढ़ चुके हो? मेरा मतलब है, कि सिर्फ़ बात-चीत तक ही सीमित है या इसके आगे भी कुछ??

मैंने भाभी के चेहरे की तरफ गौर से देखा, आज अचानक मोहिनी भाभी ने निशा की बात क्यों छेड़ी? मैं अपने मन में ये सोच ही रहा था कि वो फिर बोली.

मोहिनी भाभी - क्या हुआ?? क्या सोचने लगे? कुछ ऐसी-वैसी बात तो नहीं है ना??? मुझे बताओ अगर कुछ भी है तो.

मैंने कहा – नहीं भाभी ऐसी-वैसी कोई बात नहीं है, बस ये सोच रहा था, कि आज अचानक से आपने ये बात क्यों छेड़ी?

मोहिनी भाभी मुस्कराते हुए बोली – अरे अंकुश! तुम परेशान ना हो, मैं तो बस ऐसे ही पूछ बैठी, वैसे तुमने कोई जवाब नहीं दिया मेरी बात का?

मैंने कहा – बस एक दो बार किस ज़रूर किया था हम दोनों ने, उससे ज़्यादा और कुछ नहीं.

मोहिनी भाभी – तुम एक रात वहाँ रुके थे, तो बस इतना ही हुआ?

कुछ सोचकर, मैंने मोहिनी भाभी को उस रात की पूरी दास्तान सुना दी, कि कैसे मेरी रिक्वेस्ट पर निशा ने मुझसे अपने सारे कपड़े निकलवा कर अपने नग्न रूप का दीदार करवाया था. मेरी बातें सुनकर ना जाने क्यों मोहिनी भाभी की आँखें डबडबा गयी और उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया.

जब कुछ देर गले लगने के बाद मोहिनी भाभी अलग हुई तो उनकी आँखों में आँसू देखकर मैंने पूछा – क्या हुआ भाभी, मुझसे कोई भूल हो गयी?

मोहिनी भाभी ने मेरे माथे को चूमकर कहा – मेरे प्यारे देवर अंकुश से कोई भूल हो सकती है भला?? ये आँसू तो इस खुशी से निकल पड़े, कि जैसा मैंने सोचा था, तुम दोनों का प्यार तो उससे भी बढ़कर निकला. तुम दोनों जिस पोज़िशन में पहुँच चुके थे, वहाँ से वापस मुड़ना ही तुम्हारे सच्चे प्रेम को दर्शाता है. अब मैं तुम दोनों को मिलने के लिए सारी दुनिया से लड़ सकती हूँ.

भाभी की बातें सुनकर मैं भी अपना कंट्रोल खो बैठा, और झपट कर उनके सीने से लग गया, मेरी आँखें भी भाभी का प्यार देख कर छलक पड़ी. मोहिनी भाभी मेरी पीठ को स्नेह से सहलाती रही. कुछ देर हम इसी पोज़िशन में एक दूसरे से लिपटे रहे तभी रुचि वहाँ आकर हमारे पैरों से लिपट गयी और हम दोनों एक दूसरे से अलग होकर उसके साथ खेलने लगे.

मँझले चाचा का लड़का सोनू भी अब मेरे साथ कालेज में ही पढ़ने लगा था, उसके आर्ट्स सब्जेक्ट थे, कभी-2 हम दोनों एक ही बाइक पर कालेज चले जाते थे. आज भी वो मेरे साथ ही कालेज आया था. दो पीरियड के बाद एक पीरियड खाली था, तो मैं लाइब्रेरी में चला गया. और स्टडी करने लगा. कुछ देर बाद रागिनी आई और मेरे बगल में आकर बैठ गयी. मैंने जस्ट उसे हाई बोला और पढ़ने लगा.

कुछ देर बाद रागिनी बोली – अंकुश तुम्हें नहीं लगता कि तुम मुझे इग्नोर करने की कोशिश करते हो.

मैं – नहीं तो, ऐसा तुम्हें क्यों लगता है. बस में थोड़ा रिज़र्व टाइप का हूँ तो पढ़ाई पर ध्यान ज़्यादा रहता है मेरा.

रागिनी – जब मैं तुमसे माफी भी माँग चुकी हूँ. तुमने मुझे अपना फ्रेंड भी मान लिया है. तो फ्रेंड के साथ भी ऐसा कोई व्यवहार करता है भला?

मैं – रागिनी तुम ग़लत समझ रही हो मुझे. अच्छा एक बात बताओ, तुमने किसी और से भी कभी मुझे बात करते या गप्पें लगाते देखा है?

रागिनी – लेकिन मैं किसी और में नहीं हूँ अंकुश?? मैं तुम्हारी दोस्त हूँ यार!

मैं – मेरा कोई दुश्मन भी तो नहीं है कालेज में. सभी दोस्त ही हैं. अब मेरा नेचर ही ऐसा है तो इसमें तुम्हें बुरा मानने की ज़रूरत नहीं है रागिनी. प्लीज़…

रागिनी – अंकुश मैं तुम्हारी खास दोस्त हूँ, मुझे तो टाइम देना ही पड़ेगा तुम्हें.

मैं – खास दोस्त मतलब? किस तरह की खास?? क्या मैंने कभी कहा तुम्हें कि तुम मेरी खास दोस्त हो.

रागिनी अपनी नज़रें झुका कर – वो मैं.. तुम ना… मुझे अच्छे लगते हो. मैं तुम्हें चाहने लगी हूँ.

मैं बहुत देर तक उसकी तरफ ही देखता रहा. रागिनी नज़र नीची किए हुए थी. फिर जब उसने मेरी ओर देखा तो मैंने उससे कहा.

मैं - ये तुम क्या बोल रही हो रागिनी?? मुझे चाहने लगी हो मतलब? कहना क्या चाहती हो?? साफ-साफ कहो प्लीज़. ये पहेलियाँ मत बुझाओ.

रागिनी – मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ अंकुश. ये कह कर रागिनी ने मेरे दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए.

मैं मुँह फाड़े उसे देखता ही रह गया फिर मैंने थोड़ा संभल कर कहा - लेकिन मैं तो तुम्हें प्यार नहीं करता. मेरी दोस्ती को तुमने प्यार समझ लिया रागिनी.

रागिनी – तो करो ना मुझे प्यार. क्या कमी है मुझमें?? यहाँ कालेज ही नहीं पूरे टाउन में कितने सारे लड़के हैं, जो मुझे पाना चाहते हैं.

मैंने कहा - मैं किसी और से प्यार करता हूँ और उसे ही जिंदगी भर करता रहूँगा. तो प्लीज़ ये सब बातें यहीं खतम करो रागिनी और मुझे पढ़ने दो.

रागिनी – तो मैं कौन सा तुम्हें जीवन भर प्यार करने के लिए कह रही हूँ, बस एक बार मुझे जी भर कर अपना प्यार दे दो, उसके बाद मैं तुम्हें कभी परेशान नहीं करूँगी. प्रॉमिस…

मैं – तो ये कहो ना रागिनी कि तुम मेरे साथ सेक्स करना चाहती हो.

रागिनी – हां, प्लीज़ अंकुश बस एक बार. देखो मान जाओ.

मैं – नहीं मैं ये नहीं कर सकता रागिनी, प्लीज़ तुम मेरा पीछा छोड़ो.

रागिनी – मान जा ना यार! क्यों ज़्यादा भाव खा रहा है??

मैंने कहा – मैं यहाँ सिर्फ़ पढ़ने आता हूँ रागिनी, ना कि इश्क फरमाने. तू जा के किसी और का दामन पकड़.

रागिनी – लगता है, तू ऐसे नहीं मानेगा, तेरी अकल ठिकाने पर लानी ही पड़ेगी, उस दिन अपने भाई से बचाकर मैंने भूल कर दी. अब देख मैं तेरा क्या हाल करवाती हूँ.

मैं - जा तुझे जो अच्छा लगे वो कर, और मेरा पीछा छोड़.

इतना कह कर मैं वहाँ से उठ कर बाहर चला आया, और बाइक उठाकर सीधा अपने घर का रास्ता नाप लिया. मैं अपने रूटिन के हिसाब से सुबह-सुबह अपने आँगन में कसरत और एक्सरसाइज कर रहा था. वैसे तो घर में इस वक़्त तक केवल मोहिनी भाभी ही जाग पाती थी. लेकिन आज पता नहीं कामिनी भाभी कैसे जल्दी उठ गयी और वो अपने कमरे से बाहर आई. मुझे कसरत करते देख कामिनी भाभी वहाँ आकर खड़ी हो गयी.

मेरा कसरती बदन देख कर कामिनी भाभी मानो सम्मोहित सी हो गयी. और मेरे पास आकर मेरे नंगे बदन को दबा-दबा कर देखने लगी. कभी बाजुओं को तो कभी कंधों को, या कभी मेरे सीने को टटोलकर देख रही थी.

मैंने हँसकर कहा - क्या देख रही हो कामिनी भाभी?

कामिनी भाभी – बिना जिम के तुम्हारा शरीर कितना मस्त फिट है अंकुश… कैसे?

मैं – अपनी देसी जिम है ना भाभी.. इसे देख रही हो ना भाभी. जो मैं कर रहा हूँ. अब यहाँ जिम तो है नहीं. देसी डंड ही पेलने पड़ते है.

कुछ देर और देख-दाख के कामिनी भाभी चली गयी. मैं फिर से अपने एक्सरसाइज में जुट गया. अगले दो-तीन दिन रागिनी मुझे कालेज में दिखाई नहीं दी. मुझे कुछ गड़बड़ी की आशंका हो रही थी. चौथे दिन मैं जैसे ही कालेज से घर जाने को निकला. रागिनी का भाई आपने गुंडे साथियों को लेकर आ धमका. सोनू मेरे पीछे बैठा था. उन्होंने मेरी बुलेट रुकवाई. और गाली-गलौच करने लगा. सोनू ने बीच में बोलना चाहा. तो मैंने उसे चुप रहने को बोला.

मैं मामले को ज़्यादा तूल नहीं देना चाहता था. लेकिन वो मुझसे उलझने के इरादे से ही आया था. तो थोड़े से वार्तालाप के बाद ही उसने मेरे साथ मार-पीट शुरू कर दी. सोनू भाई ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उन्होंने उसको भी दो-चार थप्पड़ जड़ दिए. उन्होंने मुझे बहुत मारा. हॉकी स्टिक से मेरा सर भी फोड़े दिया. लेकिन मैंने अपना हाथ नहीं उठाया. देखनेवालों की भीड़ जमा हो गयी.

फिर प्रिन्सिपल ने आकर मुझे बचाया. और मेरा फर्स्ट-एड करवा कर घर भेज दिया.

चौपाल पर ही पापा ने जब मेरे सर पर पट्टियाँ देखी. मेरे मुँह पर भी चोटों के निशान थे. तो वो घबरा गये. और उन्होंने पूछताछ की. सोनू भैया ने उन्हें सारी बात बता दी. उन्हें बहुत गुस्सा आया. सारे परिवार के लोग जमा हो चुके थे.

पापा ने गुस्से में आकर भाभी से कहा – बहू अभी के अभी तुम कृष्णा को फोन लगाओ. उस ठाकुर की इतनी हिम्मत बढ़ गयी. कि किसी के साथ भी कुछ भी करेगा.

मैंने पापा को समझाया कि खामख्वाह बात को बढ़ाने से कोई फ़ायदा नहीं है. सब ठीक हो जाएगा. अगर आगे कुछ और बात बढ़ती है तब देखा जाएगा. कुछ देर समझाने के बाद वो मेरी बात मान गये. जब में घर के अंदर पहुँचा तो मोहिनी भाभी ने मुझे आड़े हाथों लिया, और चटाक से एक चांटा मेरे गाल पर जड़ दिया. क्योंकि सोनू ने बता दिया था कि मैंने अपना हाथ नहीं उठाया था, इतना सब होने के बाद भी. ये सुन कर उन्हें बड़ा दुख हुआ, और मोहिनी भाभी मेरे ऊपर भड़क गयी.

मोहिनी भाभी गुस्से से बोली – मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी अंकुश. तुमने आज मेरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

मैं – क्यों मोहिनी भाभी? ऐसा क्यों कह रही हो??

मोहिनी भाभी – मैंने तुम्हें इसी दिन के लिए तुम्हारी देखभाल की? खिलाया-पिलाया?? कि तुम नामर्दों की तरह पिट-पिटा के घर लौटो???? मैं जानती हूँ, अगर तुम चाहते तो उन हरामजादों को उनकी औकात दिखा सकते थे. लेकिन तुम तो खुद ही फूट-फाट कर चले आए.

मैं – मुझे माफ़ कर दो मोहिनी भाभी. आप ही ने तो मुझे शालीनता का पाठ पढ़ाया है, और आप ही मुझे मार-पीट करने को बोल रही हो.

मोहिनी भाभी – शालीनता का मतलब ये नहीं होता अंकुश, कि कोई तुम्हें मारता रहे और तुम चुप-चाप पिटते रहो. अपराध को सहन करना भी अपराध ही होता है. वादा करो. आइन्दा ये नौबत नहीं आएगी.

मैंने उन्हें वादा किया कि ऐसा से आगे कभी नहीं होगा. तो उन्होंने मुझे लाड़ से अपने सीने से लगा लिया और मेरी तीमारदारी में जुट गयीं. मैं दो दिन कालेज नहीं गया. क्योंकि सर की चोट थोड़ा गहरी थी, बदन पर भी चोटों की वजह से दर्द सा था. तीसरे दिन जब मैं कालेज पहुँचा. तो मुझे देखकर रागिनी मेरा मज़ाक उड़ाने लगी.

मुझे सुना कर रागिनी अपनी सहेलियों से कहने लगी – क्यों? तुम लोग तो इसे हीरो समझ रही थी. ये देखो इस चूहे की क्या गत बना दी मेरे भाई ने.

रागिनी की सहेलियों ने कुछ नहीं कहा. वो चुप-चाप उसकी बकवास सुनती रही. फिर वो आगे बोली – कुछ लोगों को अपने ऊपर बड़ा गुमान हो जाता है और अपने आप को पता नहीं क्या समझने लगते हैं??

मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हुआ और उसके सामने खड़े होकर बोला – ये मेरी शालीनता की इंतहा थी जो अब खतम हो गयी. अब तू अपने उस मवाली भाई से बोल देना, भूल से भी मेरे सामने ना पड़े. वरना हॉस्पिटल में पड़ा अपनी हड्डियों की गिनती करता नज़र आएगा और तू!! साली छिनाल, क्या कह रही थी, कि तेरे अलावा कोई और मुझसे प्यार करेगी उसका खून पी जाएगी. हां… यही औकात है तुम लोगों की दूसरों का खून पीना तुम लोगों की आदत जो है. मेरी बातें सुनकर वहाँ खड़े सभी लोग अचंभे में पड़ गये. क्यों की उनको सच्चाई का अंदाज़ा ही नहीं था अब तक. रागिनी भुन-भुनाकर वहाँ से चली गयी अपने घर, सब लोग आपस में ख़ुसर-पुसर करने लगे. उन्हें रागिनी से इतनी ओछि हरकत की उम्मीद नहीं थी. लेकिन अब सब को लग रहा था कि आने वाले पलों में कोई बहुत बड़ा तूफान आने वाला है. क्योंकि उन्हें उसके भाई के बारे में जो पता था, उसके हिसाब से अब वो मुझे छोड़ेगा नहीं.

मैं वहाँ से अपनी क्लास में चला गया. और सारे पीरियड अटेंड किए. कालेज के बाद जैसे ही मैं स्टैंड पर पहुँचा अपनी बाइक लेने.

तभी एक लड़का भागता हुआ आया और बोला - अंकुश, तू कही छुप जा. रागिनी का भाई आया है अपने गुंडों के साथ.

मैंने कहा – कहाँ है?

वो बोला – वो गेट पर खड़ा तेरा ही इंतजार कर रहा है.

मैं बिना बाइक लिए गेट की तरफ बढ़ गया. सोनू भाई ने मेरा बाजू पकड़ते हुए मुझे रोकने की कोशिश की. मैंने उसके हाथ से अपना बाजू छुड़ाया और बोला – भैया मुसीबत से छुटकारा पाना है तो उसका सामना करना पड़ता है, वरना मुसीबत और बढ़ जाती है. आप चिंता मत करो. मुझे कुछ नहीं होगा. आप बस देखते जाओ.

मैं गेट पर जैसे ही पहुँचा, वो गुटका रागिनी का भाई मेरी ओर लपका और बोला- क्यों रे लौन्डे?? लगता है अभी ढंग से मरम्मत नहीं हो पाई है तेरी. क्या बोल रहा था तू मेरी बहन को?

मैं – तू ही बता दे क्या कह रहा था मैं तेरी उस छिनाल बहन से??

मेरे मुँह से अपनी बहन के लिए ऐसे अप-शब्द सुनने की उसे उम्मीद नहीं थी. वो दाँत भींचते हुए मेरी तरफ बढ़ते हुए चीखा. उसके साथ उसके चमचे भी बढ़े - अब तू जिंदा नहीं बचेगा हरामजादे.

मैंने उसे हाथ के इशारे से रोका. और कहा – अगर तू असल बाप से पैदा है, तो अकेला लड़ के दिखा. फिर देख कौन हरामजादा है और कौन नहीं..

उसे मेरी बात लग गयी और उसने अपने साथियों से कहा – कोई मेरे साथ नहीं आएगा. इससे में अकेला ही निपटाऊंगा. उसके साथी जहाँ थे वहीं खड़े रह गये.

मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी और मैंने उसे अपनी उंगली का इशारा कर के अपनी तरफ आने को कहा. मेरे इस तरह इशारा करने से उसकी झांटे और ज़्यादा सुलग उठी. वो अपने दाँत पीसते हुए मेरी ओर झपटा..

मैं अपनी टाँगें चौड़ा कर, कमर पर हाथ रखे खड़ा उसका इंतजार कर रहा था. कोई 10 फीट दूर से उसने तेज़ी से मेरे ऊपर झपट्टा मारा, जैसे आम तौर पर गुंडे मार-पीट में करते हैं..

वो पूरी तरह कॉन्फिडेंट था, कि इस कल के लौन्डे को दो मिनिट में ही धूल चटा देगा. मैंने अपनी रोज़ की एक्सरसाइज का दाव अपनाते हुए, मैं अपने एक पैर पर बैठ गया और दूसरा पैर ज़मीन के पैरेलल रखा, चूँकि में साइड में एक पैर पर बैठ चुका था, तो वो सीधा झोंक में मेरे बगल से गुज़रता चला गया, जिधर मेरा दूसरा पैर ज़मीन के समानांतर था, तभी मैंने उसी पैर से उसको अड़ंगी मार दी. वो झोंक में पैर की अड़ंगी लगने से भडाम से मेरे पीछे जाकर मुँह के बल ज़मीन पर गिरा.

मैं उसके पीछे जाकर फिर से खड़ा हो गया., अब वो और गुस्से में आ चुका था. उसका चेहरा गुस्से से तमतमा उठा. मैं भी यही चाहता था. वो उठ कर खड़ा हुआ और पलट कर किसी भैंसे की तरह हुंकारता हुआ फिर से पूरा दम लगाकर मेरे ऊपर झपटा. मैं वहीं के वहीं अपने एक पैर पर घूम गया. वो झोंक में आगे को बढ़ता चला गया. इतने में मैंने फिरकी लेते हुए, पीछे से उसकी गान्ड पर किक जमा दी. वो अपने को संभाल ना सका और फिर से मुँह के बल जा गिरा., इस बार वो ज़्यादा तेज़ी से पक्की ज़मीन पर गिरा था, तो इस वजह से उसका होंठ फट गया और उसमें से खून रिसने लगा. कालेज के तमाम लड़के-लड़कियाँ वहाँ जमा हो चुके थे. वो कुछ देर तक पड़ा रहा. तो मैंने उसको ललकारा. उठ. आ. आजा. क्या हुआ. निकल गयी तेरी सारी हेकड़ी.

ये कहते हुए मैं उसके सर के ऊपर जा खड़ा हुआ., यहाँ उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे दोनों पैर पकड़ लिए और एक तेज झटका दिया. मैं पीछे को अपनी गान्ड के बल जा गिरा. इतना ही नहीं, उसने फुर्ती दिखाते हुए मेरे ऊपर जंप भी लगा दी, और मेरे सीने पर सवार हो गया. वो मेरे सीने पर बैठकर उसने मेरे गले को कस कर पकड़ लिया और उसे पूरा दम लगाकर दबाने लगा.

दाँत पीसते हुए बोला – तू तो गया लौन्डे, ग़लत आदमी से पंगा ले बैठा तू.

मेरे गले की नसें तक फूलने लगी थी, मैंने मन ही मन सोचा कि अब अगर जल्दी ही कुछ नहीं किया, तो ये मेरे ऊपर हावी हो जाएगा. ये सोचते ही मैंने अपने दोनों टाँगों को फुर्ती से हवा में लहराया, यहाँ तक कि मेरी कमर भी हवा में उठ गयी और देखते ही देखते मैंने अपनी लंबी टाँगों को उसकी गर्दन में कैंची की तरह लपेट दिया. टाँगों में एक जोरदार झटका देकर मैंने उसे अपने से दूर उछाल दिया. इससे पहले कि वो उठ कर मुझ पर अगला वार कर पाता. मैं अपनी साँसों को नियंत्रित कर के फुर्ती से उछल कर उठ खड़ा हुआ. वो भी खड़ा हो चुका था, और उसने मुझे मारने के लिए अपना मुक्का चलाया. जिसे मैंने हवा में ही थाम लिया और उसी बाजू को लपेटते हुए, उसके शरीर को अपनी पीठ पर लेकर एक धोबी पछाड़ दे मारा. धोबी पछाड़ एक ऐसा दाँव है, जिसके बाद अच्छे-अच्छे पहलवान दोबारा उठ नहीं पाते. पक्की सड़क पर ज़ोर से वो पीठ के बल पड़ा, .साले की कमर ही चटक गयी.

अपने बॉस का हश्र देख कर उसके चमचे आगे बढ़े तो उनमें से एक को सोनू भाई ने लपक लिया और तीन को मैंने लात घूँसों पर रख लिया. फिर बाकी के स्टूडेंट्स को भी लगा कि ये ग़लत हो रहा है, तो वो भी हमारी हेल्प के लिए आ गये. मार-मार कर उन पाँचों का भर्ता बना दिया. 10 मिनिट में ही वो साले ज़मीन पर पड़े कराह रहे थे.

मैंने रागिनी के भाई को कॉलर पकड़ कर जबरदस्ती से खड़ा किया और उसका मुँह दबाकर बोला - बेटा! अभी तो ये ट्रेलर था, मुझे अभी अपनी औकात दिखाना बाकी है. आशा करता हूँ. तेरे भेजे में ये बात आ गयी होगी कि सब जगह तुम लोगों की दबंगई नहीं चल सकती. सच्चाई जाननी हो तो अपनी उस नासमझ बहन से पूछना, कि असल बात क्या थी. इतना कहकर मैंने उसे पीछे को धक्का दिया और वहाँ से चल दिया. पीछे से सभी स्टूडेंट्स तालियाँ बजकर मुझे एप्रीसिएट कर रहे थे.

रात को हम सब खाने की टेबल पर बैठे डिनर कर रहे थे. पापा पहले ही खाना खा लेते थे. क्योंकि उन्हें ट्यूबवेल पर सोने जाना होता था. वैसे आजकल पापा की मंझली चाची के साथ अच्छी ट्यूनिंग चल रही थी. घर का सारा हिसाब किताब तो मोहिनी भाभी के कंधों पर डाल दिया था, जिसमें मोहिनी भाभी मेरी और रमा दीदी की मदद भी ले लेती थी.

खाना खाते समय मोहिनी भाभी बोली – कामिनी, तुम कार चला लेती हो ना?

कामिनी भाभी – हां दीदी, मैं तो बहुत पहले से ही चलाना सीख गयी थी.

मोहिनी भाभी – तो फिर ये इतनी बड़ी गाड़ी दरवाजे पर खड़ी क्यों है?? देवर जी भी ले नहीं गये और शायद फिलहाल उनका कोई इरादा भी नहीं है. तो ये भी कुछ थोड़ी बहुत चलनी तो चाहिए ना, वरना खड़े-2 बेकार ही हो जाएगी.

कामिनी भाभी – हां दीदी बात तो आपकी सही है, लेकिन यहाँ ज़रूरत भी तो नहीं पड़ती कहीं आने जाने की.

मोहिनी भाभी – वही तो! अब कोई चलाना जाने तो ज़रूरत पड़ने पर ले तो जा सकते हैं. क्यों ना तुम अंकुश को गाड़ी चलना सिखा दो, वो सीख गया तो ज़रूरत पड़ने पर काम तो आएगी.

कामिनी भाभी – लेकिन दीदी यहाँ गाँव में कहाँ है जगह सीखने लायक. ले दे के एक सिंगल पुराना सा रोड है. उस पे तो वैसे ही चलना मुश्किल होता है, सीखने की तो बात ही अलग है.

मोहिनी भाभी – अंकुश, अपने गाँव से थोड़ा दूर पर एक उसर पड़ी बहुत सारी ज़मीन थी ना. वहाँ जा के सीख सकते हो ना.

मैं – हां भाभी! वो बहुत बड़ी ज़मीन है और समतल भी. क्रिकेट के टूर्नामेंट भी लोग करते हैं वहाँ कभी-कभी.

कामिनी भाभी – अच्छा! फिर तो बात बन सकती है. एक काम करते हैं कल हम सब लोग चलेंगे. एक बार देख लेते हैं उसे, फिर मैं अंकुश को सिखा दूँगी. उसमें कोई बहुत बड़ी बात नहीं है.

मैं कार सीखने की बात से बहुत एक्साईटेड था. जैसे-तैसे रात काटी, और सुबह ही नाश्ता पानी निबटा के हम चारों गाड़ी लेकर चल दिए मैदान देखने. ये गाँव से कोई 2-ढाई किमी दूर था.

कामिनी भाभी मैदान देखते ही खुश हो गयी. और बोली – एक दम परफेक्ट ग्राउंड है… अब देखना अंकुश, मैं तुम्हें एक हफ्ते में ही कार चलाना सिखा दूँगी.

मोहिनी भाभी – शुभ काम में देरी क्यों?? शुरू कर दो आज से ही.

कामिनी भाभी – आप लोगों के साथ थोड़ा रिस्क रहेगा.

मोहिनी भाभी – तो हमें किसी पेड़ के नीचे उतार दो. घंटा, आधा घंटा बैठे रहेंगे. क्यों रमा? ठीक है ना.

रमा – हां भाभी, हम लोग दूर से ही देखते रहेंगे. आप लोग शुरू करो.

मैदान के पास से ही एक नहर निकलती है. उसके किनारे एक पेड़ के नीचे वो दोनों बैठ गयी. और कामिनी भाभी ने फिर एक बार गाड़ी को मैदान में लाकर एक जगह खड़ी कर दी.

कामिनी भाभी मुझे समझते हुए बोली – देखो अंकुश, अब जो मैं तुम्हें बताने जा रही हूँ, उसे ध्यान से देखना और अपने दिमाग़ में अच्छे से सारी बातें बिठा लेना.

फिर कामिनी भाभी ने सारे मेकॅनिसम को बताया, ये गियर हैं और इस तरह से डाले जाते हैं. और उन्होंने फिज़िकली डलवा कर भी बताए. उसके बाद, क्लच, एक्सेलेटर सबकी नॉलेज दी.

कामिनी भाभी - बाद बाकी फंक्शन्स सब जैसा तुम बाइक चलाते हो वैसा ही रहेगा ओके.

मैंने समझने वाले अंदाज में अपनी मुंडी हिलाई. इतना सब कुछ समझा कर उन्होंने मुझे ड्राइविंग सीट पर बिठा दिया और खुद साइड सीट पर आ गयी. मैंने चाबी घुमा कर गाड़ी स्टार्ट की. स्टार्ट होते ही मेरे शरीर में कंप-कपि सी होने लगी.

कामिनी भाभी - अंकुश डरो नहीं, अब क्लच को पैर से दबाकर फर्स्ट गियर डालो और धीरे-2 से क्लच को छोड़ो.

गियर डालकर मैंने धीरे से क्लच से पैर का दबाव कम किया लेकिन गाड़ी नहीं बढ़ी तो और दबाव कम किया, फिर भी नहीं बढ़ी, फिर एक साथ ज़्यादा पैर ऊपर हो गया और गाड़ी एक झटके के साथ आगे बढ़ी. झटका थोड़ा ज़्यादा था, तो मेरा चेस्ट स्टीरिंग से जा टकराया. मेरा ध्यान क्लच की तरफ था, तो स्टीरिंग लहराने लगी.

कामिनी भाभी भी डर गयी. और उन्होंने झट से स्टीरिंग को एक हाथ से संभाला और बोली – अंकुश ध्यान स्टीरिंग पर रखो और उसे सीधा रखने की कोशिश करो.

कामिनी भाभी स्टीरिंग को संभालने की कोशिश कर रही थी और मैं उसे सीधा रखने की. बात बिगड़ गयी और गाड़ी एक तरफ को भागने लगी.

कामिनी भाभी चिल्लाई – अंकुश क्या कर रहे हो?? स्टीरिंग छोड़ो और एक्सेलेटर से अपना पैर हटाकर उसे ब्रेक पर रखो.

मैंने स्टीरिंग छोड़ कर एक्सेलेटर से पैर हटा कर जैसे ही ब्रेक पर रखा, वो एकदम से डूब गया और गाड़ी झटके खाकर बंद हो गयी.

कामिनी भाभी – उफफफ्फ़… तुम्हें सिखाना थोड़ा मुश्किल होगा. अंकुश तुम थोड़ा इधर आ के बैठो और मैं जैसा करती हूँ, उसे पहले ध्यान से देखो.

हमने अपनी सीट एकबार फिर से बदल ली. कामिनी भाभी गाड़ी समझाते हुए चलाने लगी. और बोली – देखो कितना आसान है. इसमें क्या है?​
 

DB Singh

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Nice very nice.. Mohini ne ankush ke lund ke liye kaha tha ki uski virginity pr pehle haq mohini ka hai.. Lekin bache ke liye kuchh nhi kaha.. mohini bhi ankush se bache krti toh maza ajata.. Pyar gehra or Ho jata... Kamini bhi ankush ke body se impress Ho gai hai...
 
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urc4me

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Mohini ne Kamini aur Ankush ko najdik lane ki tarkib achchhi lagayi. Dekhe kitne najdik aate hai/ Pratiksha agle rasprad update ki
 
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aidenabhishek

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UPDATE 22

हमने अपनी सीट एकबार फिर से बदल ली. कामिनी भाभी गाड़ी समझाते हुए चलाने लगी. और बोली – देखो कितना आसान है. इसमें क्या है?

कामिनी भाभी - अंकुश वापस ड्राइविंग सीट पर आओ और कार चलाने की कोशिश करो.

हम फिर से अदला-बदली कर के बैठ गये और फिर कोशिश की. नतीजा ढाक के तीन पात. फिर से वही ग़लती हो गयी, और गाड़ी झटके खाकर फिर से बंद हो गयी.

कामिनी भाभी बोली – इतना आसान काम भी तुमसे नहीं हो पा रहा?

मैंने कहा – ये आपके लिए आसान होगा कामिनी भाभी, क्योंकि आप जानती हैं, लेकिन मेरे लिए तो ये अभी बहुत मुश्किल लग रहा है.

मेरी बात समझते हुए कामिनी भाभी बोली – सही कह रहे हो, अब आपको सिखाने का एक ही तरीक़ा है.

मैंने पूछा – क्या??

तो कामिनी भाभी थोड़ा मुस्कराते हुए बोली – कल बताऊंगी, अब चलो चलते हैं यहाँ से. अब कल से ही शुरू करेंगे.

फिर हमने मोहिनी भाभी और रमा दीदी को भी वहाँ से पिक किया और घर वापस लौट लिए. दूसरे दिन मंडे था, मैं सुबह-2 कालेज चला गया. अपने पीरियड अटेंड किए. फिर जैसे ही घर निकलने लगा. तो कुछ दोस्तों ने मुझे रोक लिया. और उस दिन हुई घटना के बारे में चर्चा करने लगे. मैंने उन सब को साथ देने के लिए थैंक्स बोला. उनमें से कुछ ने प्रॉमिस किया कि वो हमेशा उसके साथ रहेंगे. ज़्यादातर का विचार था कि रागिनी और उसका भाई ग़लत हैं. और उन्हें जो सज़ा मिली है वो एकदम सही है.

उसके बाद मैं घर आया, खाना खा कर थोड़ा लेक्चरर रिव्यू किए. कोई 3 बजे कामिनी भाभी मेरे पास आई और गाड़ी सीखने जाने के लिए कहा. कामिनी भाभी आज भी साड़ी- ब्लाउज में ही थी. जो एक गाँव में ससुराल के चलन के हिसाब से अवॉयड नहीं किया जा सकता था. पहनना मजबूरी थी. फरवरी का एंड था, ज़्यादा ठंड भी नहीं थी तो मैंने भी एक ट्रैक सूट पहन लिया और चल दिए गाड़ी सीखने.

ग्राउंड में पहुँच कर कामिनी भाभी ने गाड़ी खड़ी की और मुझे कहा – अंकुश तुम ज़रा बाहर जाकर खड़े हो जाओ.

मैंने कहा – क्यों भाभी?

कामिनी भाभी – अरे बस थोड़ी देर के लिए जाओ तो सही.

मैं बाहर उतर गया.

कामिनी भाभी भी बाहर आ गयी और बोली – गाड़ी के पीछे खड़े होकर देखो, कोई इधर-उधर है तो नहीं???

मैं पीछे जाकर चारों तरफ नज़र दौड़ा कर देखने लगा. कामिनी भाभी पीछे की सीट पर गयी, वहाँ जाकर उन्होंने अपनी साड़ी और ब्लाउज निकालकर एक टीशर्ट पहन ली. कमर के नीचे कामिनी भाभी पेटीकोट की जगह एक स्लैक्स जैसी पहने हुए थी, जो बहुत ही सॉफ्ट और हल्की एकदम फिट थी. साड़ी की वजह से पता नहीं चला कि वो पेटीकोट पहने थी या नहीं. कामिनी भाभी फिर से बाहर आकर साइड वाली सीट पर बैठ गयी और मुझे आवाज़ दी कि अब आ जाओ.

मैंने जैसे ही उन्हें देखा. मेरा तो मुँह खुला का खुला रह गया. गाढ़े लाल रंग की टीशर्ट और ब्लू रंग की स्लैक्स, दोनों ही इतने टाइट फिट थे की कामिनी भाभी के शरीर का एक-एक कटाव साफ-साफ दिख रहा था. इन कपड़ों में कामिनी भाभी एकदम माल लग रही थी.

ऐसे क्या देख रहे हो? कामिनी भाभी ने जब मुझसे कहा, तब मेरी तंद्रा टूटी.

मैंने अपना सर झटक कर कहा – ये आपने इतनी जल्दी चेंज कर लिया??? पर भाभी आपको यहाँ किसी ने इन कपड़ों में देख लिया तो??

कामिनी भाभी – यहाँ कौन जानता है कि हम कौन हैं?? वैसे साड़ी में तुम्हें ड्राइविंग सिखाना मुश्किल पड़ता इसलिए मैंने कल नहीं सिखाया. अब चलो कार स्टार्ट करो, देखें कितनी देर तक कार चला पाते हो??

मैं ड्राइविंग सीट पर बैठा और कार स्टार्ट की. फिर कामिनी भाभी जैसे-2 बताती गयी ठीक वैसे ही मैंने क्लच दबाया, फिर फर्स्ट गियर डाला, और गाड़ी आगे बढ़ाई ही थी कि कार फिर से झटका खाकर बंद हो गयी.

कामिनी भाभी – अंकुश ये अभी तुम्हारे बस का नहीं है. अब मुझे ही बैठना पड़ेगा तुम्हारे पास. तभी कुछ हो पाएगा.

फिर कामिनी भाभी उतर कर मेरी तरफ आई, गेट खोल कर बोली - अंकुश चलो खिसको उधर..

मैं थोड़ा गियर साइड को खिसक गया और आधी सीट उनके लिए खाली कर दी. कामिनी भाभी मेरे साथ बिलकुल सट कर बैठ गयी, मेरी तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी यार. क्या अहसास था कामिनी भाभी की मांसल जाँघ के टच होने का मेरी जाँघ के साथ. ऊपर से ना जाने कौन सा पर्फ्यूम लगाया था उन्होंने. उनके टच और बदन की मादक खुशबू से मेरा शरीर झनझना गया. उनकी खनकती आवाज़ से मैं होश में लौटा.

कामिनी भाभी बोली – अब गाड़ी स्टार्ट करो अंकुश! या ऐसे ही बैठ के मुझे देखते रहोगे.

अपनी तो साली इज़्ज़त की वाट लग गयी और मेरी स्थिति पर वो मन ही मन खुश हो रही थी. मैंने गाड़ी स्टार्ट की.

कामिनी भाभी ने कहा - अंकुश अपना लेफ्ट पैर क्लच पर रखो. मैंने रख लिया. फिर उन्होंने राइट पैर को एक्सेलेटर पर रखने को कहा और मुझे स्टीरिंग पकड़ा दी.

फिर उन्होंने मेरे पैरों के ऊपर से अपना भी एक पैर भी रख लिया और क्लच दबा कर गियर डालने को कहा. मैंने ठीक वैसा ही किया.

कामिनी भाभी - देखो अंकुश, एक्सेलेटर जब तक में ना कहूँ, दबाना मत और क्लच से जैसे–जैसे में तुम्हारे पैर के ऊपर से अपने पैर का दबाव कम करूँ, तुम भी उतना ही उसको छोड़ते जाना. ठीक है??

मैंने हां में सर हिलाया लेकिन मेरा दिमाग़ आधा उनके रूप लावण्य और टाइट फिट कपड़ों से उभरते हुए यौवन पर ही अटका पड़ा था. फिर कामिनी भाभी ने जैसे-जैसे अपने पैर का दबाव हटाया. मैं भी अपना पैर ऊपर करता गया.

कामिनी भाभी ने झिड़कते हुए कहा - पूरा पैर क्यों उठाते हो अंकुश. सिर्फ पंजे का दबाव कम करना है. हील गाड़ी के फ्लोर पर ही टिकी रहनी चाहिए.

फिर मैंने वैसे ही किया, अब गाड़ी बिना इंजन बंद हुए आगे को बढ़ने लगी.

कामिनी भाभी – यस अंकुश! अब स्टीरिंग को जस्ट देखो और गाड़ी तुम्हारे हिसाब से दूसरी तरफ जाती हुई दिखे तभी उसे हल्के से दिशा देना है. अब थोड़ा-थोड़ा एक्सेलेटर पर दबाव डालो.

मैंने जैसे ही पैर दबाया. वो थोड़ा ज़्यादा दब गया और गाड़ी झटके के साथ आगे बढ़ने लगी. हड़बड़ी में मैं स्टीरिंग संभालना भी भूल गया. देखते-देखते गाड़ी मैदान से बाहर की तरफ जाने लगी.

कामिनी भाभी एकदम से चिल्लाई - संभालो अंकुश… और उन्होंने झटके से अपने हाथ स्टीरिंग पर लगाए तो उनकी मांसल गोरी-गोरी नंगी बाहें मेरे सीने से रगड़ने लगी. गाड़ी तो कंट्रोल हो गयी. लेकिन अब भाभी का शरीर मेरे शरीर से और ज़्यादा सट गया. मेरे पूरे शरीर में सिहरन सी लगी. अभी मैं अपने होश इकट्ठा करने की कोशिश में ही था.

कि तभी कामिनी भाभी बोली – अंकुश देखो गाड़ी के इंजन की आवाज़ ज़्यादा है, इसका मतलब अब तुम्हें दूसरा गियर डालना पड़ेगा और उन्होंने मेरे क्लच वाले पैर को दबा दिया.

जब क्लच दब गयी तो कामिनी भाभी बोली – अब एक्सेलेटर कम करो और दूसरा गियर डालो.

मैंने एक्सेलेटर कम कर के दूसरा गियर डाला तो वो नहीं पड़ा. क्योंकि मैं उसे न्यूट्रल स्लॉट में लाना भूल गया था.

कामिनी भाभी – अरे क्या करते हो अंकुश. गियर डालो ना…

मैंने कहा – पड़ ही नहीं रहा भाभी. मैं क्या करूँ?

तो फिर कामिनी भाभी ने अपना हाथ लंबा कर के गियर डालने के लिए बढ़ाया. जिससे उनकी एल्बो आहहह… मेरे लंड को दबा दिया. मेरे मुँह से फिर से अह्ह्ह्ह… निकल गयी. गियर तो पड़ गया और कामिनी भाभी ने अपनी एल्बो का दबाव भी कम कर दिया लेकिन मेरे नाग को जगा दिया. जिसको अब यहाँ मनाने का कोई इलाज़ संभव नहीं था. मेरी आह सुन कर उन्होंने एक नज़र मेरी ओर देखा और मुस्करा उठी. अब लगभग गाड़ी का सारा कंट्रोल तो उनके हाथ में ही था तो दूसरे गियर में भी गाड़ी अच्छे से चल रही थी, लेकिन ऐसे हम दोनों को ही बड़ी दिक्कत हो रही थी.

कुछ देर के बाद कामिनी भाभी ने गाड़ी रोक दी और गेट खोल कर बाहर निकल गयी.

कामिनी भाभी – गाड़ी से उतरो अंकुश…

उन्होंने आदेश सा दिया. मैं बाहर आ गया. तो उन्होंने सीट का लीवर उठाकर सीट को थोड़ा और पीछे को कर दिया.

कामिनी भाभी - अब बैठो अंकुश.

मैं सीधा तनकर बैठ गया.

कामिनी भाभी - अरे आराम से पीठ टिका कर बैठो अंकुश.

जब मैं उनके हिसाब से बैठ गया.

तो कामिनी भाभी फिर बोली - अपनी टाँगें चौड़ी करो अंकुश.

मैंने अपनी टाँगें चौड़ी कर दी, अब मेरे आगे काफ़ी जगह बन गयी थी.

मैं अभी ये सोच ही रहा था कि आख़िर इनका आईडिया है क्या?? तभी कामिनी भाभी मेरे आगे की जगह पर आकर बैठ गयी. सत्यानाश हो सिचुएशन का, वैसे भी शरीर में गर्मी बढ़ने लगी थी. अब ये कामिनी भाभी के गुदगुदे रूई जैसे सॉफ्ट कूल्हे एकदम मेरे लंड के सामने रखे थे, वो भी एकदम सट कर.

कामिनी भाभी के कपड़े तो वैसे भी इतने सॉफ्ट और टाइट फिट थे, कि उनका होना ना होना एक बराबर था. ऊपर से कामिनी भाभी की टाइट टीशर्ट से झाँकते बूब्स के उभार और उनका दूध जैसा गोरा सफेद डीप क्लीवेज मेरी आँखों के ठीक सामने था. सोने पे सुहागा, उनके बदन से उठती मादक सुगंध.

कुल मिलाकर मेरे लंड की माँ बहन एक होने लगी. मेरा लौड़ा मेरे शॉर्ट के अंदर किसी गुस्सैल नाग की तरह फुफकार मारने लगा. ऊपर से मुसीबत ये, कि हम दोनों के बीच इतनी जगह भी नहीं थी, कि अपना हाथ डालकर मैं अपने लंड को एडजस्ट भी कर सकूँ. मेरा लंड एकदम खूँटे की तरह खड़ा होकर कामिनी भाभी की कमर में ठोकरें मारने लगा.

आख़िर में मैंने हथियार डालते हुए कहा - कामिनी भाभी छोड़िए, अब घर चलते हैं, ये गाड़ी चलाना मेरे बस का नहीं है.

कामिनी भाभी ने तिरछी नज़र कर के मेरी तरफ देखा. अब उनके कंधे का दबाव भी मेरे सीने पर था और नज़रों का तीखापन देख कर मेरी रही सही हिम्मत की माँ चुद गयी.

कामिनी भाभी – अंकुश, यहाँ तब से मज़ाक चल रहा है?? उन्होंने किसी इंस्ट्रक्टर की तरह कड़क आवाज़ में कहा.

कामिनी भाभी - चलो चुप चाप गाड़ी स्टार्ट करो अंकुश. ऐसा कोई काम है जो इंसान ना कर सके??

बात वो नहीं थी कि मुझे कोई प्राब्लम हो रही थी. मेरे लौड़े के तो मज़े हो रहे थे, बहुत अच्छा भी लग रहा था. लेकिन मेरे लंड महाराज की उत्तेजना लगातार बढ़ती जा रही थी उसका क्या किया जाए? एक तो कामिनी भाभी घर की नई सदस्य. ठीक से अभी तक हँसी मज़ाक भी नहीं हो पाई थी उनके साथ. ऊपर से एमएलए की बेटी और एसपी की बीवी. साला कुछ उलटा-पुल्टा हो गया, तो इतने जूते पड़ेंगे की गान्ड लाल हो जाएगी. बस ये डर सताए जा रहा था मुझे.

कामिनी भाभी - अब शुरू करो अंकुश या सोचते ही रहोगे???

उनके एक साथ झटके से बोलने पर मेरे हाथ पैर और ज़्यादा फूल गये, फिर भी काँपते हाथों से मैंने गाड़ी स्टार्ट की. भाभी मेरी स्थिति पर मन ही मन खुश हो रही थी. लेकिन मानना पड़ेगा, कमाल की एक्टिंग थी उनकी. क्या मजाल, ज़रा भी फेस पर ऐसा एक्सप्रेशन आने दिया हो कि वो मेरे मज़े ले रहीं हैं.

कामिनी भाभी - अंकुश चलो अब वो सब दोहराओ, जो पहले कर चुके हो. गाड़ी अनकंट्रोल दिखेगी तो ही मैं हाथ लगाऊंगी.

मैंने क्लच दबा कर गियर डाला और धीरे-2 क्लच छोड़ा. शुरुआत तो सही हुई. लेकिन लास्ट में झटका लग ही गया और कामिनी भाभी स्टीरिंग की तरफ झुक गयी. मैं भी झटके से कामिनी भाभी की पीठ से चिपक गया. झुकने से कामिनी भाभी के बूब्स एक दम से मेरी नज़रों के सामने आ गये. दूसरा सबसे बुरा ये हुआ कि मेरे सीने के दबाव से कामिनी भाभी जैसे ही आगे को हुई, कामिनी भाभी की मखमली गान्ड थोड़ी ऊपर हो गयी. मेरा लंड तो इसी ताक में था, कि कब स्पेस मिले, सट से कामिनी भाभी के गान्ड के नीचे सरक गया, और गान्ड की दरार के ऊपरी भाग पर कब्जा जमा लिया… खैर… मेरे लंड की तो बल्ले-बल्ले हो रही थी. लेकिन अपनी तो साली आफ़त में जान अटकी पड़ी थी. कामिनी भाभी की गुदगुदी गान्ड के स्पर्श मात्र से ही मेरा लंड फूल कर कुप्पा हुआ जा रहा था.

कामिनी भाभी गाड़ी संभालते हुए बोली – कोई बात नहीं अंकुश. ये अच्छा है कि इस बार गाड़ी बंद नहीं हुई. गुड… अब थोड़ा-थोड़ा एक्सेलेटर दो.

पैर फिर से थोड़ा ज़्यादा दब गया एक्सेलेटर पर और गाड़ी फिर से झटके से आगे बढ़ी. स्टीरिंग थोड़ा डिसबैलेंस हुई तो कामिनी भाभी ने अपने हाथ मेरे हाथों के ऊपर रख कर उसे कंट्रोल कर लिया लेकिन कामिनी भाभी की गान्ड और मेरे लंड के बीच एक अच्छा सा झटका लग गया. जब गाड़ी कंट्रोल हुई तो उन्होंने क्लच दबा कर गियर चेंज करने को कहा. मैंने क्लच तो दबा दी लेकिन एक्सेलेटर कम नहीं किया. गाड़ी का इंजन बहुत तेज़ आवाज़ करने लगा.

कामिनी भाभी – अंकुश! मैंने कितनी बार कहा है, कि जब क्लच दबाओ तो एक्सेलेटर नहीं देना है.. क्या बुलेट भी ऐसे ही चलाते हो??

मैंने दूसरा गियर ठीक से चेंज कर के कहा – कामिनी भाभी बुलेट तो मेरी प्रैक्टिस में आ गयी है, इसलिए. अब इन्हें कौन बताए, की इस सिचुएशन में जो भी आता है वो भी भूले बैठे हैं. अब धीरे–धीरे मेरा थोड़ा कॉन्फिडेंस आने लगा था.

कामिनी भाभी - गुड अंकुश! वैसे उसी एक्सपीरियंस से इसको भी कंट्रोल करो.

जब गाड़ी ठीक से चलने लगी. तो मैंने कहा भाभी अब तीसरा डालूं.

कामिनी भाभी – नहीं, आज दो तक ही प्रैक्टिस करो. यहाँ तक की अच्छी प्रैक्टिस होने दो.

उनके हाथ अभी भी मेरे हाथों पर ही थे. जब गाड़ी सही से कंट्रोल में आने लगी. तो मेरा ध्यान भटकने लगा. वो मेरे सीने से अपनी पीठ टिकाए हुए थी. मेरा लंड कामिनी भाभी की गान्ड की दरार के साथ शरारत कर रहा था. उसका मैं फिलहाल कुछ कर भी नहीं सकता था, क्योंकि मेरे पास पीछे हटने के लिए स्पेस भी नहीं था. लाख कंट्रोल के बाद भी मेरा लंड गाहे-बगाहे कामिनी भाभी की गान्ड में धक्का लगा ही देता था.

मेरे लंड की ठोकर कामिनी भाभी को भी महसूस हो रही थी. मेरा मुँह उनके कान के बिल्कुल पास था और नाक से निकलने वाली हवा उनके कान की लौ को सर-सरा रही थी. ऐसे मादक बदन की महक और जवानी से लवरेज़ यौवन अगर किसी युवक की गोद में हो तो ये कहना बेमानी होगा कि वो अपने आप पर कंट्रोल रख पाएगा.

मैंने अपना मुँह कामिनी भाभी के गाल के पास कर लिया. मेरे होंठों और उनके गाल का फासला ना के बराबर था. मेरे मुँह की भाप से कामिनी भाभी भी उत्तेजित हो रही थी.

ना जाने कब कामिनी भाभी के हाथ स्टीरिंग से हटकर मेरी जांघों पर आ गये और भाभी धीरे-धीरे उन्हें सहलाने लगी. उनकी जुल्फों की खुशबु मेरा नियंत्रण खोने पर मजबूर कर रही थी. लंड बुरी तरह उनकी गान्ड पर ठोकरें मार रहा था. जिसका कामिनी भाभी अपनी आँखें मूंदकर स्वाद ले रही थी. मेरे लौड़े की हालत लगातार बद से बदतर होती जा रही थी, वो फ्रेंची के अंदर ऐंठने लगा था. प्री-कम से उसका टोपा गीला होने लगा. मेरा अपने ऊपर से नियंत्रण हटता जा रहा था, नतीजा ध्यान स्टीरिंग से हट गया और मेरे होंठ कामिनी भाभी के गाल से जा टकराए. गाड़ी ना जाने कब मैदान छोड़ कर बाजू के खेत में चली गयी और रेत में जा फँसी और बहुत तेज़ घर्र-घर्र की आवाज़ करने लगी.

कामिनी भाभी और मैं, हम दोनों ही हड़बड़ा गये. तेज़ घर्र-घर्र की आवाज़ कर के गाड़ी का इंजन बंद हो गया. हम दोनों की नज़रें मिली तो वो एक नशीली मुस्कराहट देकर गाड़ी का गेट खोल कर नीचे उतर गयी. फिर कामिनी भाभी ने मुझे भी उतरने का इशारा किया और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ कर गाड़ी को बैक गियर में डाल कर वहाँ से निकाला.

फिर कामिनी भाभी ने मुझे बगल वाली सीट पर बैठने का इशारा करते हुए कहा – अंकुश अब आज के लिए इतना ही काफ़ी है, आगे का कल सीखना. चलो अब घर चलते हैं. वैसे दूसरे गियर तक तुमने अच्छा किया. वेल डन अंकुश.

फिर से कामिनी भाभी ने पीछे सीट पर जाकर कपड़े चेंज किए, मौके का फ़ायदा उठाकर मैं थोड़ी दूर झाड़ियों के पीछे जाकर अपनी टंकी रिलीस करने चला गया. खड़े लंड से पेशाब भी रुक-रुक कर आ रहा था, जिस के वजह से बहुत देर तक में पेशाब करता रहा. आख़िर जब टंकी रिलीस हुई, तब जाकर कुछ राहत महसूस हुई. रास्ते में हमने ज़्यादा कोई बात नहीं की. बस कुछ एक दो ड्राइविंग से ही रिलेटेड कुछ बातें.

घर आते-आते शाम हो चुकी थी. तो मैं थोड़ी देर के लिए चाची के पास चला गया. बच्चे को गोद में लेकर खेलता रहा. चाची अपने काम काज में लगी रही. रात का खाना खा-पीकर मोहिनी भाभी ने मुझे अपने कमरे में आने का इशारा किया.

मेरे पहुँचते ही मोहिनी भाभी बोली – हां अंकुश, तो आज कितना तक सीखा??

तो मैंने उन्हें बताया कि आज दूसरे गियर तक ही सीखा है. लगता है हफ्ते-दस दिन में आ जाएगी.

मोहिनी भाभी – थोड़ा डीटेल में बताओ अंकुश. कैसे शुरुआत की?? क्या-क्या प्राब्लम हुई??

मैं – अरे मोहिनी भाभी! इन सब को जान कर आपको क्या लेना देना?

मोहिनी भाभी – मेरा भी मन किया तो मैं तुमसे सीख लूँगी ना.

वो थोड़ा शोख अंदाज में बोली. मैं मोहिनी भाभी के कहने का मतलब समझ गया और वैसे भी मैं मोहिनी भाभी से कोई बात छिपा भी नहीं पाता था. पता नहीं वो कैसे मेरे मन के चोर को भाँप लेती थी. तो मैंने सब डीटेल उन्हें बता दिया. मोहिनी भाभी कुछ देर तक मुस्कराती रही.

मैंने पूछा – मोहिनी भाभी आप मुस्करा क्यों रही हो??

मोहिनी भाभी – बस ऐसे ही अंकुश. अब तुम मन लगा कर ऐसे ही सीखते रहो, जाओ आराम करो. कल कालेज भी जाना है.

मैं अपने कमरे में चला आया और कुछ देर किताब निकाल कर पढ़ता रहा. और फिर सो गया. दूसरे दिन मैं और सोनू कालेज गये. लेक्चर अटेंड किए. तीसरे पीरियड में चपरासी ने आकर कहा – अंकुश शर्मा. आपको प्रिन्सिपल साहब बुला रहे हैं.

मैं जब उनके ऑफिस में पहुँचा. देखा कि उनके सामने एक अधेड़ व्यक्ति मध्यम हाइट. गोरा लाल चेहरा, जिसपर बड़ी-2 मूंछें, फक्क सफेद कुर्ता और धोती. ऊपर से एक नेहरू कट जैकेट पहने बैठे हुए थे. मैंने ऑफिस के गेट से ही अंदर जाने की परमिशन ली.

प्रिन्सिपल साहब मुझे देखते ही बोले – आओ अंकुश. हम तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे. इनसे मिलो, ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह. यहाँ के जमींदार साहब और ठाकुर साहब यही है अंकुश. बहुत ही नेक और मेहनती लड़का है. अपनी पढ़ाई के अलावा बाकी से इसको कोई मतलब नहीं. सभी स्टूडेंट्स इसे बहुत मानते हैं.

मैंने उनको नमस्ते किया, तो उन्होंने अपनी बगल वाली कुर्सी पर बैठने के लिए कहा.

मैंने कहा – मैं ऐसे ठीक हूँ ठाकुर साहब. फिर उन्होंने बात शुरू की.

ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह - बेटे अंकुश, तुम *** गाँव के मास्टर सुंदर लाल शर्मा के बेटे हो ना?

मैंने कहा – जी.

ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह – बड़े ही भले आदमी हैं मास्टर जी, मेरे ख्याल से सबसे ज़्यादा पढ़ा लिखा परिवार है तुम्हारा. एक भाई, राम, प्रोफेसर है और दूसरा भाई, कृष्णा, एसपी है. मैं सही कह रहा हूँ ना?

तो मैंने कहा जी बिल्कुल.

ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह - एसपी साहब की शादी अपने एमएलए की बेटी से हुई है. है ना?? देखो बेटे अंकुश. मैं यहाँ अपनी बेटी और लड़के की हरकतों के लिए तुम्हारे पिताजी से माफी माँगने जाने वाला था. फिर सोचा उससे पहले तुम से मिल लूँ. अंकुश, मेरे बच्चों से अनजाने में जो ग़लती हुई है. उसे तो मैं सुधार नहीं सकता. लेकिन आगे के लिए विश्वास दिलाता हूँ कि ऐसा फिर कभी नहीं होगा.

मैं – मुझे आपकी बात पर भरोसा है ठाकुर साहब.

ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह – अब मैं तुम्हारे पिताजी के पास जा रहा हूँ. क्या तुम मेरे साथ चलना चाहोगे?

मैं – बिल्कुल चलिए. मेरे घर पर आपका स्वागत है. ये कह कर वो उठ गये और प्रिन्सिपल साहब को नमस्ते बोल कर हम बाहर आ गये.

ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह अपनी गाड़ी में थे. मैं आगे-2 अपनी बुलेट पर आ रहा था, हम घर की तरफ चल दिए.
 

aidenabhishek

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UPDATE 23

ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह ने पापा से मिलकर सबसे पहले हाथ जोड़कर अपने बेटे के व्यवहार के लिए माफी माँगी. एक दूसरे से बड़े अपनेपन से मिले. घर-परिवार की चर्चा की और भविष्य में आपस में संबंध अच्छे रहें इस बात का आश्वासन दिया और कुछ देर बैठकर चाय नाश्ता लेकर वो चले गये. उनके जाने के बाद पापा ने मुझे अपने पास बुलाया, और उनके साथ जो भी बात-चीत हुई, वो सब उन्होंने बताते हुए कहा.

पापा - बेटा अंकुश! ठाकुर साहब ने कहा है, कि अब इस बात को यहीं खतम करो, तो मैं चाहता हूँ, तुम अपनी तरफ से उनके बच्चों के प्रति कोई बैर मत रखना.

मैंने हां में अपनी सहमति जताई, और अपने कमरे में आकर कुछ देर के लिए सो गया. 3 बजते ही मैं और कामिनी भाभी गाड़ी लेकर चल दिए ग्राउंड की ओर. मेरे मन में उथल-पुथल मची हुई थी. कामिनी भाभी की कल की हरकतों ने मुझे मेरे लंड तक हिला दिया था, ना जाने आज क्या होने वाला था?? कल का वाक़या याद करते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा और उसने पाजामे के अंदर तंबू बनाना शुरू कर दिया.

जान बूझकर मैंने आज काफ़ी पुराना पड़ा हुआ फ्रेंची पहना था, जिससे उसका कपड़ा काफ़ी लूज़ हो गया था, उसमें मेरे लौड़ा आज कुछ कम्फर्टेबल फील कर रहे था. उसकी लंबाई आज ऊपर से पाजामे के बावज़ूद भी कुछ ज़्यादा ही लग रही थी. कामिनी भाभी गाड़ी चलाते हुए बीच-2 में मेरी तरफ मुँह कर के बातें भी करती जा रही थी. लाख छुपाने के बावज़ूद भी कामिनी भाभी की नज़र मेरे तंबू पर पड़ गयी, जिसे देखकर उनके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान तैर गयी.

मैदान में पहुँचकर कल की तरह अपने कामिनी भाभी ने अपने कपड़े चेंज किए और मुझे ट्रायल देने को कहा. कई बार की कोशिशों के बाद भी मैं गाड़ी को ठीक से चला नहीं पाया. हर बार गाड़ी झटके मार कर बंद हो जाती.

कामिनी भाभी – क्या बात है अंकुश?? अभी भी तुम्हारा क्लच के ऊपर पैर का कंट्रोल सही नहीं आ रहा. खैर कोई बात नहीं धीरे-धीरे आ जाएगा. चलो कल की तरह ही चलाते हैं.

आज कामिनी भाभी के कपड़े कल से भी ज़्यादा टाइट थे. उनके बूब्स आज टाइट टॉप की वजह से थोड़े दबे हुए से लगे, जिसकी वजह से कामिनी भाभी की बगलें ज़्यादा मांसल दिख रही थी, और ऊपर से कुछ ज़्यादा ही दर्शन हो रहे थे. नीचे तो कहने ही क्या?? एक बहुत ही सॉफ्ट कपड़े की लोवर में कामिनी भाभी की पैंटी का आकर भी साफ-साफ पता चल रहा था. मुझे लगा जैसे कामिनी भाभी की पैंटी गान्ड की तरफ तो ना के बराबर ही रही होगी. कामिनी भाभी के दोनों बम्स एकदम गोल मटोल, एकदूसरे से जुड़े-जुड़े मानो दो बॉल फेविकॉल से चिपका दिए हों.

जब कामिनी भाभी अपनी एक टाँग अंदर डाल कर मेरी गोद में बैठने को हुई, तो उनकी गान्ड का दूसरा भाग, किसी फुटबॉल की तरह और ज़्यादा पीछे की तरफ उभर गया. सीन देखते ही मेरे लौड़े ने एक जोरदार झटका खाया, और मेरा लंड एकदम से फ्रेंची में तन गया. बीच की दरार एकदम से क्लियर ही दिखाई दे रही थी. कपड़े का जैसे कोई कतरा ही नहीं दिख रहा था. आज कामिनी भाभी शायद ये ठान के आई थी, की मेरा पानी निकलवा कर ही रहेंगी.

कामिनी भाभी आज कुछ आगे को झुक कर बैठ गयी मेरी गोद में. जिससे उनकी गान्ड की दरार का ऊपरी भाग मेरे लंड के ठीक सामने आ गया. मेरा लंड तो वैसे भी फ्रेंची के अंदर फड़फड़ा रहा था, ऊपर से फ्रेंची का कपड़ा भी आज उसे कंट्रोल में रख पाने में असमर्थ लग रहा था. कामिनी भाभी के गान्ड के एलिवेशन को देखकर तो मेरा लंड सारी हदें तोड़ने पर आमादा होने की कोशिश करने लगा. बेचारा फ्रेंची जैसे-तैसे कर के उसे संभाले हुए था.

बैठने के समय कामिनी भाभी ने हल्का सा गैप बना के रखा था. मैंने गाड़ी स्टार्ट की और उनके पैर के गाइडेंस से क्लच छोड़ने से आगे बढ़ गयी. गाड़ी के आगे बढ़ते ही आज कामिनी भाभी ने अपना पैर मेरे पैर से हटा लिया. कुछ देर बाद उन्होंने मुझे गियर चेंज करने को कहा. मैंने क्लच दबा कर दूसरा गियर डाला. क्लच छोड़ने में फिर से थोड़ा झटका सा लगा. जिससे कामिनी भाभी की तशरीफ़ पीछे को खिसक गयी, और हमारे बीच का गैप खतम हो गया. अब मेरे लंड को उसकी फ़ेवरेट जगह मिल चुकी थी.

आज मेरा स्टीयरिंग पर कंट्रोल कल के मुक़ाबले अच्छा था. हम 20-25 की स्पीड तक गाड़ी को कुछ देर चलाते रहे. कामिनी भाभी के बम्स की दरार में मेरे लंड की उछल कूद जारी थी. कुछ देर बाद कामिनी भाभी के कहने पर मैंने थर्ड गियर भी डाल दिया. अब गाड़ी तेज चलने लगी. लेकिन मुझे कुछ डर सा लगने लगा.

मैंने कहा – ओह कामिनी भाभी! ये तो बिना एक्सेलेटर के ही इतनी तेज भाग रही है.

कामिनी हँसते हुए बोली – भागने दो ना अंकुश! थर्ड गियर में है, भागेगी ही. तुम बस स्टीयरिंग को संभाले रखो. अगर ज़रूरत हो तो बस ब्रेक मार देना. हल्के से…

बातों-बातों में कामिनी भाभी ने अपने कूल्हों को थोड़ा सा और पीछे को दबा दिया. मेरा लंड कड़क होने लगा. उसकी हार्डनेस फील करते ही कामिनी भाभी बोली.

कामिनी भाभी – आउच… अंकुश… मेरे पीछे कुछ चुभ सा रहा है???

मैंने कहा – भाभी आप थोड़ा सा आगे खिसक जाओ.

तो कामिनी भाभी स्माइल करते हुए बोली – नहीं अंकुश… मुझे कोई दिक्कत नहीं है… मेरे आगे होने से मेरे पैरों को मूव्मेंट नहीं मिलेगी. तुम्हें तो कोई प्राब्लम नहीं है ना???

मैंने कहा - मुझे तो कोई प्राब्लम नहीं है भाभी… वो आपको कुछ चुभा था न… इसलिए मैंने बोला…

इतना सुनते ही कामिनी भाभी ने अपनी पीठ भी मेरे सीने से सटा दी. उनकी बगलों की मांसलता मेरी बाजुओं को छुए जा रही थी. मेरी साँसें कामिनी भाभी के गाल को सहलाने लगी. कामिनी भाभी के ऊपर मदहोशी सी छाने लगी और कामिनी भाभी ने अपनी गान्ड को मेरे लंड के ऊपर और ज़्यादा दबाया.

कामिनी भाभी ने अपनी बाजुओं को मेरी बाजुओं के ऊपर से बाहर की साइड से लाकर स्टीयरिंग पर रख लिया. अब कामिनी भाभी के गुदाज बूब्स साइड से मेरी बाजुओं पर फील हो रही थी. इधर मेरा लंड कामिनी भाभी की गान्ड की दरार में फिट हो चुका था, जो बीच-बीच में झटके मार देता था. इस चक्कर में एक बार मेरा कंट्रोल स्टीयरिंग से हट गया. गाड़ी 30-35 की स्पीड में लहरा उठी. मैंने फिर से अपने ऊपर कंट्रोल किया और गाड़ी को संभाला.

बीच-बीच में कामिनी भाभी अपने एक हाथ को अपनी जांघों के बीच लाकर अपनी चूत को सहला देती और इधर-उधर होकर मेरे लौड़े को अपनी गान्ड की दरार से रगड़ देती. कामिनी भाभी के इधर-उधर होने के मूवमेंट से उनकी चुचियों की साइड मेरे बाजुओं से दब जाती, जिसके मखमली अहसास से मेरा हाल बेहाल हो रहा था.

डेढ़ घंटे की प्रैक्टिस में हम दोनों के शरीर दहकने लगे. इससे पहले कि बात कंट्रोल से बाहर हो. मैंने गाड़ी रोक दी क्योंकि मेरा लंड फूल कर फटने की कगार तक पहुँच गया था. मुझे लगने लगा कि मेरा पानी छूटने ही वाला है. अगर ऐसा हो गया तो कामिनी भाभी ना जाने क्या सोचेंगी मेरे बारे में. मैंने गाड़ी रोक दी, झटके की वजह से कामिनी भाभी की आँखें खुल गयी और मेरे से पूछा.

कामिनी भाभी – क्या हुआ अंकुश?? गाड़ी क्यों रोक दी???

मैंने कहा – आज के लिए इतना ही काफ़ी है भाभी.

कामिनी भाभी ने मुस्करा कर कहा - ठीक है. कल चौथे गियर की प्रैक्टिस करेंगे और कामिनी भाभी मेरे आगे से उठ गयी.

मैं फ़ौरन सीट से उठा और अपनी लिट्ल फिंगर दिखा कर झाड़ियों की तरफ भागा. मैं जल्द से जल्द अपने लौड़े को रिलीस करना चाहता था. मेरी तेज़ी देख कर कामिनी भाभी समझ गयी और मंद-मंद मुसकुरातीं रही. झाड़ियों के पीछे जाकर आज मुझे अपने लंड को मुठियाना ही पड़ा. कुछ ही पलों में मेरे लंड ने इतनी तेज माल की पिचकारी मारी कि वो कम से कम 5-7 फीट दूर तक चली गयी. जब लंड का टेंशन रिलीस हुआ तब जाकर मुझे शांति मिली.

यही सब एक हफ्ते तक चलता रहा. मेरा गाड़ी पर अच्छा कंट्रोल आने लगा था. आज जब हम लौटने लगे तो कामिनी भाभी ने कहा.

कामिनी - कल तुम्हारा लास्ट ट्रेनिंग सेशन होगा. कल तुम्हें बैक गियर की प्रैक्टिस करनी है. उसके बाद आपकी ट्रेनिंग पूरी.

अब मैं घर से मैदान तक गाड़ी खुद ही चलाकर ले जाने लगा था. आज गाड़ी सीखने का लास्ट दिन था, इस लास्ट सेशन में गाड़ी को रिवर्स गियर डालकर चलाने का तरीक़ा सीखना था. मैं घर से ग्राउंड तक गाड़ी को अच्छी स्पीड से चलाकर ले गया.

कामिनी भाभी ने मेरी ड्राइविंग को एप्रीसिएट करते हुए कहा - वाह अंकुश… तुम तो एकदम मंजे हुए ड्राइवर की तरह चलाने लगे… वेल डन अंकुश!!

अब कामिनी भाभी मेरे आगे नहीं बैठती थी, लेकिन अलग-अलग तरीकों से मुझे सिड्यूस करना उन्होंने बंद नहीं किया था. कभी समझाने के बहाने मेरी जांघों को सहला देना, तो कभी जान बूझकर मेरे लंड पर हाथ रख देना, बाद में सॉरी बोलकर जताना कि ये अनजाने में उनसे हुआ हो जैसे.

ना जाने उनके मन में क्या चल रहा था. लेकिन मैंने अपने मन में ठान लिया था कि किसी भी परिस्थिति में पहल मेरी तरफ से नहीं होगी. चाहे जैसे भी हो, मुझे अपने आप पर कंट्रोल बनाए रखना ही होगा. उधर भाभी भी दिनों-दिन मेरे धैर्य की परीक्षा ले रही थी. नित नये तरीक़े अपनाकर मुझे उनके साथ पहल करने पर मजबूर करने की कोशिश में लगी थी. आज उन्होंने फिर से कपड़े चेंज किए, जो पिछले दो दिन से बंद कर दिए थे.

मैंने पूछा - अब क्यों चेंज कर रही हो कामिनी भाभी??

कामिनी भाभी – अंकुश, आज तुम्हें नया सबक सीखना हैं, एंड आई आम श्योर, वो तुम मेरे बिना नहीं कर पाओगे.

कामिनी भाभी चेंज कर के जैसे ही गाड़ी से बाहर आईं. मेरा मुँह खुला का खुला रह गया. मैंने उनसे ऐसे कपड़ों की उम्मीद कतई नहीं की थी. कामिनी भाभी एक स्लीवलेस वेस्ट पहने हुए थीं, जो बहुत ही लो कट था. उस वेस्ट में से उनकी आधी से अधिक बूब्स नंगे दिखाई दे रहे थे और वो स्लीवलेस वेस्ट उनकी 34 साइज़ की चुचियों से कुछ ही नीचे तक कवर कर रहा था.

कमर से नीचे कामिनी भाभी ने एक बहुत ही सॉफ्ट कपड़े का मिनी स्कर्ट डाला हुआ था, जो झुकने पर पैंटी की झलक भी दिखा रहा था. मिनी स्कर्ट मात्र 8-10 इंच ही लंबा ही था, जो कमर की हड्डियों पर ही टिका हुआ था और पीछे से उनकी बम्स की ऊपरी दरार भी दिख रही थी. कमर पर उनकी पैंटी की एक डोरी जैसी ही दिखी मुझे, जो उनकी गान्ड की दरार में फँसी दिखाई दे रही थी. नीचे वो सिर्फ़ गान्ड की गोलाईयों के खतम होने से पहले ही उसकी हद खतम हो रही थी. यानी उनका वो मिनी स्कर्ट कूल्हों की ढलान तक ही सिमट कर रह गया था.

कामिनी भाभी को इन कपड़ों में देखते ही मेरे लंड ने एक जोरदार अंगड़ाई ली, मानो आज वो खुशी में झूमना चाहता हो. कामिनी भाभी ने शायद आज ठान लिया था, कि वो मेरे धैर्य की माँ-बहन एक कर के ही मानेंगी.

क्योंकि कामिनी भाभी जैसे ही मेरे सामने बैठी. कुछ देर तो मेरे मुँह के आगे कामिनी भाभी अपनी गान्ड लिए खड़ी रही, जो उनकी नाम मात्र की स्कर्ट से साफ-2 दिखाई दे रही थी. बहुत कोशिश कर के में अपने हाथ को कंट्रोल किए हुए था, वरना मेरा हाथ बार-बार कामिनी भाभी की गान्ड को सहलाने के लिए उठने की कोशिश करता. फिर एक लंबा सा घिस्सा अपनी गान्ड से मेरे लंड पर मारते हुए कामिनी भाभी मेरे आगे बैठ गयी.

झटके खाता मेरा लंड अपने लिए आरामगाह देखते ही भड़क उठा और बुरी तरह से अकड़ कर कामिनी भाभी की गान्ड की दरार मैं घुसने लगा. ये बात तय थी, कि अगर बीच में कपड़े नहीं होते तो मेरा लंड आज किसी के बाप की भी सुनने वाला नहीं था. आज वो शर्तिया कामिनी भाभी की गान्ड फाड़ कर ही रहता.

मैंने जैसे-तैसे कर के अपने आप पर कंट्रोल रखा. यहाँ तक कि मेरे लंड का मुँह चिपचिपाने लगा था.

कामिनी भाभी – अंकुश पहले आप सिर्फ़ देखो, उसके बाद में आपको स्टीयरिंग दूँगी.

इतना कहकर उन्होंने मेरे दोनों हाथ अपनी नंगी जांघों पर रखवा दिए. आअहह. क्या मखमली अहसास था कामिनी भाभी की चिकनी मुलायम मक्खन जैसी जांघों का. हाथ रखते ही, मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी. मेरा लंड फ्रेंची फाड़ कर कामिनी भाभी की गांड में घुसने की फिराक में था.

कामिनी भाभी ने बैक गियर में गाड़ी डाल कर, स्टीयरिंग कैसे कंट्रोल करना होता है, ये सब वो बताने लगी. लेकिन कामिनी भाभी का ध्यान पूरी तरह से गाड़ी सिखाने पर नहीं था. मेरे लंड और हाथों के अहसास ने उनकी भी साँसें फूलने पर मजबूर कर दिया था. जिसकी वजह से गाड़ी कहीं की कहीं जाने लगी. वो तो अच्छा था, कि कुछ कंट्रोल मुझे भी आ गये थे, तो मैंने अपने हाथ स्टीयरिंग रख लिए और गाड़ी को कंट्रोल करने में हेल्प की.

कामिनी भाभी की हरकतें बढ़ती ही जा रही थी, एक बार तो उन्होंने अपनी गान्ड को खुजाने के बहाने ऊपर को उचकाया और सीधे अपने गान्ड के छेद को मेरे लंड के ऊपर ही टिका दिया. इतना ही नहीं, कामिनी भाभी ने दो-तीन झटके भी आगे पीछे कर के अपनी गान्ड को दिए. मेरा पेशेंस जवाब देता जा रहा था.

मुझे लगा मेरा पानी निकल जाएगा, तो मैंने कामिनी भाभी को गाड़ी रोकने को कहा – कामिनी भाभी… प्लीज़… जल्दी से गाड़ी रोकिए, मुझे सुसु करने जाना है.

कामिनी भाभी की वासना इस समय एकदम चरम पर थी. मेरे कहने पर कामिनी भाभी ने गाड़ी तो रोक दी. लेकिन नीचे उतरने की बजाय, भाभी पलट कर मेरी गोद में आ बैठी और मेरे सर के बालों को जकड़कर उन्होंने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया.

मेरी हवा वैसे ही टाइट थी. कुछ देर तो मैंने अपने हाथ अलग रखे लेकिन जब कोई चारा नहीं बचा तो मैंने कामिनी भाभी की फुटबॉल जैसी गान्ड की गोलाईयों को जोर से मसल दिया. एक मादक सिसकी भरते हुए उन्होंने अपनी गान्ड को मेरे लंड पर ज़ोर से रगड़ दिया.

कामिनी भाभी - सीईईईई… ईईशशशश… आहहहह… उफफफ्फ़… अंकुश…

किस करते-करते, कामिनी भाभी और मेरी, हम दोनों की साँसें डूबने लगी. भाभी लगातार अपनी गान्ड के साथ-साथ अपनी चूत को भी मेरे लंड पर रगड़ा दे रही थी. मेरे हाथ अनायास ही उनके मम्मों पर कस गये… और उन्हें ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा.

कामिनी भाभी की कमर बुरी तरह से ऊपर नीचे हो रही थी, मेरे लंड को अपनी चूत के होंठों पर फील कर के उन्होंने मेरे होंठों को चबा दिया. भाभी मेरे ऊपर किसी भूखी बिल्ली की तरह टूट पड़ी थी. मेरे लंड की हालत बहुत ही खराब होती जा रही थी, मुझे लगने लगा कि अब सिवाय पानी छोड़ने के और कोई चारा नहीं बचा है.

उधर कामिनी भाभी भी अपने होश-हवास खो चुकी थी, भाभी बुरी तरह कमर मटका-मटका कर मेरे लौड़े को अपनी चूत की फांकों पर घिस रही थी. एकाएक हम दोनों के शरीर अकड़ने लगे, मैंने कामिनी भाभी की कमर को अपने दोनों हाथों से कसकर उनकी गान्ड को अपने लंड पर दबा दिया. इसी के साथ मेरे लंड ने और भाभी की चूत ने एक साथ पानी छोड़ दिया. कामिनी भाभी मेरे गले में बाहें डाले लटक गयी. उनका सर अपने आप पीछे को लटक गया. उनके चुच्चों ने मेरे मुँह को दबा रखा था.

कुछ देर कामिनी भाभी ऐसे ही बैठी रही. फिर जब सब कुछ शांत हो गया तो भाभी अपनी नज़रें झुकाए नीचे उतर गयी और पिछली सीट पर जाकर अपने कपड़े चेंज करने लगी. मैं अपनी टंकी खाली करने झाड़ियों की तरफ चला गया.

झाड़ियों के पीछे जाकर मैंने जीन्स की जेब से रुमाल निकाला और अपने लंड और फ्रेंची को उससे पोंछ कर साफ किया वरना धीरे-2 उसका गीलापन जीन्स के ऊपर से भी दिखने लगता. रास्ते में हम दोनों के बीच गहन चुप्पी छाई रही. कहीं ना कहीं कामिनी भाभी अपने मन में गिल्टी फील कर रही थी.

कुछ देर की चुप्पी के बाद कामिनी भाभी बोली – अंकुश… सॉरी फॉर दैट… प्लीज़ तुम मुझे ग़लत मत समझना. दरअसल मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाई.

मैं – इट्स ओके भाभी. हम दोनों ही जवान हैं, अब इतने नज़दीक रह कर ये सब तो हो ही जाता है. प्लीज़ इसके लिए आपको सॉरी कहने की ज़रूरत नहीं है.

कामिनी भाभी कुछ देर चुप रही, फिर बोली – तो फिर अंकुश क्या मैं ये समझूँ कि आज जो कुछ हम दोनों के बीच हुआ, उसे और आगे बढ़ाना चाहिए???

मैंने कामिनी भाभी की तरफ देखा, वो मुझे ही देख रही थी. फिर मैंने अपनी नज़रें सामने कर ली और रास्ते पर ध्यान केंद्रित कर के बोला – मेरे ख्याल से ये सब अब और नहीं होना चाहिए कामिनी भाभी… ये ठीक नहीं होगा…

कामिनी भाभी – किस एंगल से ठीक नहीं होगा?? लाइफ में थोड़ा एन्जॉयमेंट मिलता है, तो उसमें बुराई क्या है?? और ये हम दोनों की ज़रूरत भी है…

मैं – कामिनी भाभी, क्या ये भैया के साथ धोखा नहीं होगा?

कामिनी भाभी – तो तुम क्या समझते हो, कि तुम्हारे भैया ये सब नहीं करते होंगे?? ओह्ह्ह... कमऑन अंकुश डार्लिंग… ऐसा कौन है इस दुनिया में जो इससे अछूता हो??

मैंने मन ही मन सोचा, कि बात तो आपकी सही है. अब मुझे ही ले लो, हर रोज़ गिनती बढ़ती जा रही है. यहाँ तक कि पापा भी नहीं रह पा रहे हैं इसके बिना, फिर भी मैंने में कहा.

मैं - लेकिन मैं उनके साथ धोखा नहीं कर सकता, प्लीज़ भाभी… आप मेरी मजबूरी समझने की कोशिश कीजिए.

कामिनी भाभी कसमसाते हुए बोली – धोखा… तो तब होगा ना अंकुश, जब ये बात उनको पता चलेगी… अब ये शरीर की ज़रूरतें तो पूरी करनी ही होगी ना.

मैंने उन्हें काफ़ी समझाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उन्होंने कोई ना कोई लॉजिक देकर मुझे हथियार डालने पर मजबूर कर दिया और आख़िर में मुझे कहना ही पड़ा.

मैं - जैसा आप ठीक समझो भाभी. अब मैं आपको क्या कह सकता हूँ. मेरे से ज़्यादा तो आपने दुनियादारी देखी है.

कामिनी भाभी – फिर आज रात को मेरे कमरे में आ जाना अंकुश. प्लीज़… मैं तुम्हारा इंतजार करूँगी.

कामिनी भाभी की इस बात का मैंने कोई जवाब नहीं दिया. इतने में घर आ गया और हम गाड़ी खड़ी कर के घर के अंदर चले गये. घर मैं घुसते ही दो खबरें एक साथ सुनने को मिली.

एक – मोहिनी भाभी के भाई राजेश की शादी तय हो गयी थी, जिसकी डेट भी नज़दीक थी. और मोहिनी भाभी को अभी बुलाया गया था. चूँकि उनके यहाँ कोई और नहीं था उन्हें ले जाने के लिए तो हमें ही छोड़ कर आना था उनको. वो भी दो दिन बाद ही, 15 दिन बाद शादी थी.

दूसरा- कृष्णा भैया आज आने वाले हैं, उनका फोन आ गया था. वैसे तो वो कामिनी भाभी को ले जाने के लिए आ रहे थे.

ये खबर कामिनी भाभी को कुछ नागवार गुज़री. उनके चेहरे को देखकर लग रहा था, मानो गरम चूत पर ठंडा पानी डाल दिया हो. लेकिन चूँकि मोहिनी भाभी अपने घर जाने वाली हैं तो शायद अगर वो मान गये तो उन्हें कुछ दिनों के लिए और यहाँ रुकना पड़ सकता है.

कृष्णा भैया देर रात घर पहुँचे. तो आपस में कोई बात नहीं हो पाई. रात को में मोहिनी भाभी के पास बैठने चला गया, क्योंकि अब वो कुछ दिनों मुझसे दूर रहने वाली थी. मैं रुचि को गोद में लिए उनके बगल में बैठा था, कि तभी भाभी ने पूछ लिया.

मोहिनी भाभी - अंकुश, गाड़ी अच्छे से चलाना आ गया तुम्हें, या और सीखना बाकी है??

मैं – चलाना तो सीख गया हूँ भाभी, अब तो बस जैसे-जैसे प्रैक्टिस होगी, हाथ साफ होता रहेगा.

मोहिनी भाभी – वैसे आज जब तुम लौटे थे अंकुश, तो तुम्हारे हाव-भाव कुछ अजीब से थे, कुछ हुआ था क्या?

मैं – नहीं तो ऐसा तो कुछ नहीं हुआ, आपको ऐसा कैसे लगा?

मोहिनी भाभी – नहीं… वो, तुम्हारी आँखें कुछ चढ़ी हुई थी. शरीर भी कुछ कांप-कंपा रहा था, सच बताना, कुछ तो हुआ है अंकुश??

मैंने मन में सोचा – भाभी आप क्यों इतनी तेज हो, कुछ भी परदा नहीं रहने दोगी??

जब कुछ देर मैंने कोई जवाब नहीं दिया, तो मोहिनी भाभी ने फिर पूछा – बोलो ना अंकुश क्या हुआ था?

मैंने हिचकते हुए आज की घटना उन्हें सुना दी, कुछ देर तो वो मौन रहकर मन ही मन मुस्कराती रही, फिर बोली.

मोहिनी भाभी - जिसका मुझे अंदेशा था अंकुश वही हुआ, खैर छोड़ो ये सब, ये बताओ अब आगे क्या सोचा है?

मैं – किस बारे में?

मोहिनी भाभी – अरे कामिनी के बारे में?? मेरे पीछे अगर उसने फिर से पहल की तो???

मैं – कोशिश करूँगा, उनसे दूर ही रहूं. फिर भी बात ना बनी तो साफ-साफ मना कर दूँगा.

मोहिनी भाभी – भूल से भी ये ग़लती मत करना अंकुश. एक बार कामिनी को समझाने की कोशिश भर ज़रूर करना, अगर नहीं माने तो फिर हालत से समझौता कर लेना. क्योंकि ये ऐसे मामले होते हैं, जिन्हें तूल पकड़ते देर नहीं लगती. अपनी बात मनवाने के लिए औरत किसी भी हद तक जा सकती है.

बातों के दौरान रुचि मेरी गोद में ही सो गयी, तो उसे मोहिनी भाभी ने मेरी गोद से लेकर बेड के एक सिरे पर सुला दिया, और फिर वो मुझसे सटकर बैठ गयी. उन्होंने मेरी जांघों को सहलाते हुए कहा.

मोहिनी भाभी – मैं इतने दिन तुमसे दूर रहूंगी, याद करोगे ना मुझे अंकुश??? या कामिनी भाभी की मस्ती में भूल जाओगे??

मोहिनी भाभी सोने से पहले मात्र एक गाउन ही पहनती थी. तो मैंने उनके गाउन की डोरी खींच कर आगे से उनके बदन को उजागर कर दिया.

मैंने उनके भरे-भरे मम्मों को प्यार से सहलाया और होंठों का चुंबन लेकर कहा – ये तो मरते दम तक भी नहीं हो पाएगा भाभी मुझसे, की मैं आपको भूल जाऊं. मौत आने के बाद ही आप मेरे दिल से निकल पाओगी.

मेरी बात सुनते ही मोहिनी भाभी ने मुझे अपने सीने से लिपटा लिया और फिर आँखों में आँसू भरकर भर्राए गले से बोली – अंकुश भूल कर भी ऐसे शब्द मत निकालना अपने मुँह से, वरना मैं तुमसे कभी बात नहीं करूँगी… समझे???

मैं भी किसी बच्चे की तरह उनसे लिपट गया.

मोहिनी भाभी – अंकुश… लेकिन समय के साथ ये प्यार बाँटना तो पड़ेगा ही तुम्हें, जब निशा तुम्हारे साथ शादी कर के कर इस घर में आ जाएगी.

मैं – वो तो मैं अभी भी उससे करता ही हूँ, आगे भी करता रहूँगा, लेकिन जो प्यार आपके लिए है, उसमें कभी कमी नहीं आएगी. इतना कह कर मैंने मोहिनी भाभी को अपने चौड़े सीने से चिपका कर उनके होंठों को चूम लिया.

मोहिनी भाभी ने मेरी आँखों में झाँकते हुए कहा – अंकुश… आज मुझे तुम्हारा इतना प्यार चाहिए की आने वाले 15-20 दिन तक मुझे तुम्हारी तलब महसूस ना हो.

मैंने मुस्कराते हुए मोहिनी भाभी की चुचियों को मसल कर कहा – जो हुक्म मेरे आका… इतना कहकर उन्हें निर्वस्त्र कर के, बेड पर लिटा दिया और उनके नाज़ुक अंगों से खेलने लगा. मोहिनी भाभी ने भी, पूरी शिद्दत से अपने बदन को मेरे सुपुर्द कर दिया, बेड पर पड़ी मोहिनी भाभी मेरी हरकतों से बिन जल मछली की तरह मचल रही थी. एक समय था, जब मैं भाभी के इशारों पर नाचता था, लेकिन आज मोहिनी भाभी मेरे हाथों के इशारों पर इस तरह मचल रही थी, जैसे उनके बदन का रिमोट मेरे हाथों में हो. कुछ ही पलों में कमरे का वातावरण वासनामय हो गया. मादकता से भरी आहों, कराहो के बीच चुदाई के कई तूफान आए, चले गये, फिर आए फिर चले गये. मोहिनी भाभी अब पूरी तरह तृप्त हो चुकी थी, फिर उन्होंने मुझे बड़े प्यार से मेरे माथे को चूमकर कोई 3 बजे अपने कमरे में सोने के लिए भेज दिया.

सुबह जब सबने मिलकर नाश्ता किया, उस समय पापा ने भैया से बात चलाई.

पापा – और कृष्णा बेटा, कैसी चल रही है तुम्हारी ड्यूटी?

कृष्णा भैया – वैसे तो ठीक है पापा, ड्यूटी की कोई प्राब्लम नहीं है. लेकिन घर में खाने पीने का सब कुछ गड़बड़ रहता है. सब कुछ नौकरों के सहारे नहीं हो पता है, तो मैं सोच रहा था, कि कामिनी को भी अपने साथ ले जाता हूँ.

पापा – हमें तो कोई दिक्कत नहीं है, बस एक छोटी सी समस्या है, मोहिनी बहू के भाई की शादी है, कल वो अपने घर जाने वाली है, तो तब तक के लिए कामिनी बहू यहाँ बनी रहती तो कुछ सहारा रहता इन बच्चों को. रमा बिटिया अभी इतनी परिपक्व नहीं है, जो अकेले घर संभाल ले.

कृष्णा भैया – वैसे मुझे तो कोई प्राब्लम नहीं है. अगर कामिनी रुकना चाहे तो मोहिनी भाभी के आने तक रुक सकती है. लेकिन क्या कामिनी अकेली घर संभाल पाएगी?

मोहिनी भाभी – रमा तो है ना यहाँ पर उसके साथ.

कृष्णा भैया ने कामिनी भाभी की तरफ देखा – तुम क्या कहती हो कामिनी? रुक सकती हो?

कामिनी भाभी तो चाहती भी यही थी, तो तपाक से बोली – अब दीदी चली जाएँगी तो मुझे तो रुकना ही होगा. मेरा भी घर है, मैं नहीं सोचूँगी तो और कौन सोचेगा. दीदी ने इस घर के लिए इतने साल न्योछावर कर दिए, अब वो अपने घर की खुशी में शामिल होने जा रही हैं. तो मेरा भी कुछ फ़र्ज़ बनता है कि उनके बाद घर की देखभाल करूँ.

कृष्णा भैया – ठीक है, ठीक है.. बाबा… मैंने तो बस पूछा ही था. तुमने तो पूरा भाषण ही दे डाला. वैसे अपने घर के प्रति तुम्हारी संवेदन शीलता देख कर अच्छा लगा. है ना पापा??

पापा जी बस मुस्करा कर रह गये और कामिनी भाभी के सर पर हाथ रख कर बाहर चले गये. भैया उस रात और रुके. अगले दिन मुझे भी भाभी को छोड़ने जाना था, तो भाभी ने कृष्णा भैया से गाड़ी ले जाने के लिए पूछा.

मोहिनी भाभी – कृष्णा, तुम कहो तो हम लोग तुम्हारी गाड़ी ले जाएँ?

कृष्णा भैया – चला के कौन ले जाएगा, भाभी?

मोहिनी भाभी – अंकुश ने ड्राइविंग सीख ली है कृष्णा. क्यों कामिनी?? तुम्हें भरोसा तो है ना अंकुश की ड्राइविंग पर??

कामिनी भाभी – भरोसा तो है दीदी. पर मैं क्या कहती हूँ, क्यों ना मैं भी आपके साथ चलूं?? भले ही अंकुश ड्राइव करे. लेकिन अगर कुछ प्राब्लम आई तो मैं हेल्प तो कर सकती हूँ.

कृष्णा भैया – तो इसमें मेरी परमिशन की क्या ज़रूरत थी मोहिनी भाभी?

मोहिनी भाभी – आख़िर तुम्हारी गाड़ी है. पूछना तो ज़रूरी है कृष्णा.

कृष्णा भैया – ये कह कर आपने मुझे पराया कर दिया भाभी. मैं अगर ऐसा सोचता तो गाड़ी अपने साथ नहीं ले जाता?? अपने घर के मान सम्मान के लिए ही तो इसे यहाँ छोड़ा है, फिर इसपर मेरा हक़ कहाँ रह गया?

मोहिनी भाभी – सॉरी कृष्णा, मेरा मतलब तुम्हारा दिल दुखाना नहीं था. मैंने तो बस इसलिए पूछा कि घर की एकता बनी रहे और आपस में कभी कोई ऐसी बात ना बने जिससे किसी को कोई उंगली उठाने की नौबत आए.

अब जब ये तय हो गया कि मैं और कामिनी भाभी दोनों ही भाभी को छोड़ने जा रहे हैं. तो रमा दीदी भी बोलने लगी.

रमा – फिर मैं अकेली यहाँ क्या करूँगी?? मैं भी आप लोगों के साथ चलती हूँ.

कामिनी भाभी – ये भी ठीक है, फिर ये फिक्स हुआ कि भैया के निकलते ही हम सब भी मोहिनी भाभी को छोड़ने उनके गाँव जाएँगे. पापा का लंच रेडी कर के रख दिया जाएगा. अगर शाम को आने में हमें देर होती है, तो पापा छोटी चाची के यहाँ खाना खा लेंगे.

ये बात छोटी चाची को भी बता दी गयी. सुबह चाय नाश्ते के बाद ही भैया अपनी ऑफिस की गाड़ी से निकल गये. उनके कुछ देर बाद ही हम चारों भी चल दिए मोहिनी भाभी के घर की तरफ. 11:30 को हम उनके घर पहुँच गये. सारे रास्ते मैं ही ड्राइव कर के ले गया था. अब मुझे और ज़्यादा कॉन्फिडेंस आने लगा था.

निशा, मेरी जान, मुझे देखते ही किसी ताज़े फूल की तरह खिल उठी. मोहिनी भाभी के घरवाले हम लोगों की आवभगत में लग गये. उनके गाँव में भाभी का सम्मान दुगना हो गया, उनको इतनी शानदार गाड़ी में आते देख कर. किसी तरह मौका निकाल कर मैं और निशा एकांत में मिले, वो तड़प कर मेरे सीने से लग गयी.

निशा मेरी छाती के बालों से खेलते हुए शिकायत भरे लहजे में बोली - निर्मोही कहीं के… जब से मुझे छोड़कर गये हो, एक बार पलट कर भी नहीं देखा इधर को. कम से कम एक बार मिलने नहीं आ सकते थे???

मैंने निशा के गोल-गोल नितंबों को सहलाते हुए कहा – निशा… घर की ज़िम्मेदारियाँ और कालेज से कहाँ समय मिलता है, वैसे मैं फोन तो करता ही हूँ ना…

निशा मेरे होंठों को चूमकर बोली – अंकुश… फोन से कहीं इस बेकरार दिल की प्यास बुझती है भला?? अब ये दूरियाँ सही नहीं जाती हैं जानू!!!

मैंने उसकी झील सी गहरी आँखों में झाँकते हुए कहा – निशा मेरी जान! मैं भी कहाँ तुमसे दूर रहना चाहता हूँ, लेकिन अपनी कुछ मजबूरियाँ हैं, जिन्हें हम नज़र अंदाज तो नहीं कर सकते ना.

इतना कहकर मैंने जैसे ही निशा के गले पर चुंबन लिया, वो सिसक कर मेरे सीने से लिपट गयी. उसके कठोर बूब्स मेरे बदन से दब कर एक सुखद अहसास का अनुभव करा रहे थे.

निशा मेरे गले में बाँहों का हार डाले हुए बोली – मैं समझती हूँ अंकुश, पर इस दिल का क्या करूँ, ये जानते हुए भी कि तुम नहीं आने वाले, फिर भी हर समय तुम्हारे आने की आस लगाए रहता है.

मैंने उसकी चिन को हाथ लगाकर उसके चेहरे को ऊपर किया और उसके होंठों को फिर एक बार चूम कर बोला – निशा इस दिल से कहो, कुछ दिन और इंतजार करे.

कुछ देर हम यूँ ही एक दूसरे की बाँहों में खड़े बीते दिनों की याद ताज़ा करते रहे. कुछ नये कसमें वादे, नये इरादे किए. बातों-2 में कुछ इमोशनल मोमेंट भी आए. हम दोनों की आँखें नम हो गयी. ये समय और मौका हमें इससे ज़्यादा की इज़ाज़त नहीं दे सकता था तो शादी पर आने का वादा कर के हम अलग हुए ही थे, कि तभी रमा दीदी हमें ढूँढते हुए वहाँ आ पहुँची.

रमा - अच्छा! तो तोता-मैना यहाँ चोंच भिड़ा रहे हैं… अंकुश मैं तुम दोनों को कब से ढूंढ रही हूँ. हमें यूं खड़े देख कर वो बोली.

निशा झेंप कर वहाँ से भाग गयी, फिर मैंने रमा दीदी से कहा - क्या हुआ दीदी?? हमें क्यों ढूँढ रहीं थी??

रमा दीदी – अरे वहाँ आंटी तुम्हें खाने के लिए बुला रही हैं और तुम यहाँ अपनी मैना के साथ गुटर-गूँ कर रहे हो. ये कहकर वो खिल खिलाकर हंस पड़ी.

मैं अपनी नज़र नीची कर रमा दीदी के साथ बैठक की तरफ चल पड़ा, जहाँ बाकी लोग बैठे खाने पर मेरा इंतजार कर रहे थे. शाम ढलते ही हम ने वहाँ से विदा ली. मोहिनी भाभी के घर वाले हमें रोकना चाहते थे. लेकिन वहाँ घर सुना पड़ा था, तो उन्हें भी इज़ाज़त देनी ही पड़ी. रात 8 बजे तक हम अपने घर लौट आए. हम लोगों को तो कोई खास भूख नहीं थी और पापा के लिए चाची ने खाना बनाकर भेज दिया था. तो पापा को खाना खिलाकर बस अब सोना ही था.

कामिनी भाभी ने कई बार मुझे इशारे कर के वो बात याद दिलाने की कोशिश की लेकिन मैं अंत तक अंजान बनाने का नाटक करता रहा और अपने कमरे में सोने चला गया. मुझे आज नींद नहीं आ रही थी. करवट बदलते-बदलते काफ़ी रात निकल गयी, रह-रह कर निशा मेरी आँखों के सामने आ जाती थी. उसकी बातें मेरे कानों में गूँजने लगती.

रात कोई 11:30 को मेरे गेट पर आहट हुई. मैंने उठ कर गेट खोला. देखा तो सामने एक मिनी गाउन पहने कामिनी भाभी खड़ी थी. जो इस समय रति का स्वरूप लग रही थी. जिसमें से कामिनी भाभी के निप्पल्स भी बाहर झाँकने का भरसक प्रयास कर रहे थे. कामिनी भाभी को इस रूप में देखकर मेरे फ्रेंची में उथल पुथल शुरू हो गयी.

कामिनी भाभी - अब प्लीज़ बातों में वक़्त जाया मत करो अंकुश... आज मुझे भरपूर प्यार करो अंकुश… ये कहकर वो मेरे बदन से किसी बेल की तरह लिपट गयी.

मैंने चूतिया बनाने की एक्टिंग करते हुए कहा - लेकिन कामिनी भाभी मुझे तो कुछ भी नहीं आता है, आप ही बताइए कि कैसे करते हैं प्यार??

मैंने उन्हें ये जताना चाहा, जैसे मैंने ये पहले कभी किसी के साथ किया ही नहीं है.

कामिनी भाभी – क्या??... अंकुश तुम ने अभी तक किसी के साथ सेक्स किया ही नहीं है??? कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं बनाई अभी तक?? वो मेरी बात सुन कर आश्चर्य से बोली.

मैंने कहा – नहीं भाभी, सच में मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है. अब आपको ही मुझे ये सब सीखना पड़ेगा.

कामिनी भाभी – कोई बात नहीं अंकुश… मैं तुम्हें सब कुछ सिखा दूँगी. हाय… मेरा अनाड़ी देवर अंकुश…

ये कह कर कामिनी भाभी ने अपने हाथ मेरी पीठ पर कस दिए, जिससे उनकी 34” साइज़ की कठोर चुचिया मेरे सीने में दब गयी. भाभी ने अपना वो नाम मात्र का गाउन भी निकाल कर फेंक दिया. नीचे कामिनी भाभी बिना ब्रा के ही थी, बस एक माइक्रो पैंटी. जिसमें से उनकी चूत के मोटे-मोटे होंठ भी बाहर को दिख रहे थे. पीछे एक डोरी सी थी, जो उनकी गान्ड की दरार में घुसी पड़ी थी. अब इसको क्या कहते हैं, आप लोग खुद नामकरण कर लेना. हेहेहे.

भाभी को ऐसे रूप में देख कर मेरा लंड मेरे कच्छे को फाड़ कर बाहर आने को आमादा था. कामिनी भाभी ने मेरी टीशर्ट निकाल कर फर्श पर फेंक दी. भाभी मेरे चौड़े सीने को हाथ से सहलाने लगी और उसे चूम लिया. कामिनी भाभी ने अपनी जीभ निकाल कर मेरे निप्पल को पहले लिक किया फिर दांतो से हलके-हलके काटने लगीं, उसके बाद अपनी जीभ की नोक फेरने लगीं और मेरे निप्पल सक करने लगीं. मेरे शरीर में झनझनाहट सी शुरू हो गयी.

मेरे हाथ स्वतः ही कामिनी भाभी के फुटबॉल जैसे चुतड़ों के उभारों पर पहुँच गये और मैंने उन्हें अपने हाथों में लेकर मसल दिया. कामिनी भाभी मेरे सीने को चूमते चाटते हुए नीचे बैठने लगी, अपने पंजों पर बैठ कर उन्होंने मेरा शॉर्ट खींच दिया. नीचे में बिना फ्रेंची के था. मेरे फुल्ली इरेक्टेड लंड को देख कर, जो अब 90 डिग्री पर हिल-हिल कर उनके इस जानमारू हुस्न को सलामी दे रहा था, कामिनी भाभी मंत्रमुग्ध हो गयी और अपने हाथ में लेकर अपने गालों से रगड़ते हुए बोली.

कामिनी भाभी - आअहह… अंकुश… तुम कितने बड़े झूठे हो… तुम्हारा ये हथौड़े सा लंड बता रहा है कि इसने ना जाने कितनों की सील तोड़ी है.

मैं – क्या कामिनी भाभी आप भी! इसने आपको कैसे बता दिया ये सब??

कामिनी भाभी मेरे लंड को सहलाते हुए मेरी आँखों में देख कर बोली – अंकुश तुम मुझे अनाड़ी समझते हो?? जिस तरह से ये मस्ती में अपना मुँह खोले झूम रहा है, लगता है इसे सब पता है कि अब इसे क्या करना है.

फिर उन्होंने मेरे सुपाड़े को खोल कर अपनी जीभ से चाट लिया.

मैं – आअहह... भाभी…. सीईईईई….

मेरी सिसकी निकल गयी. कामिनी भाभी मेरे फुल्ली इरेक्ट लंड अपने होंठों में ले चुकी थी और अब लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी. मैं मस्ती से उनके सर को सहलाने लगा. कामिनी भाभी के थोड़ी देर लंड चूसने के बाद मैं आनंद के सागर में गोते लगाने लगा.



उन्होंने मुझे पलंग पर धक्का दे दिया और अपनी नाम मात्र की पैंटी भी निकाल फेंकी.

अब वो किसी भूखी शेरनी की तरह मेरे पूरे शरीर पर हाथ फेरती हुई मेरी छाती पर चढ़ बैठी. उनके गोरे-गोरे मस्त भरे चुच्चों को देख कर मेरी उत्तेजना दुगनी हो गयी और मैंने उन्हें अपनी मुट्ठी में भरकर बहुत ज़ोर से मसल दिया.

कामिनी भाभी - आआहह… अंकुश... आराम से अंकुश... उखाड़ोगे क्या इन्हें?

तो मैंने भाभी के कंधों को पकड़ कर अपने ऊपर झुका लिया, और उनके मम्मों को चूसने लगा. कामिनी भाभी अपनी रसीली चूत को मेरे पेट पर मसलने लगी. फिर धीरे-धीरे नीचे को सरकती हुई अपनी रसीली चूत के मुहाने को मेरे लंड की तरफ ले गयी. एक-एक इंच का फासला तय करती उनकी रसीली चूत मेरे लंड की तरफ सरक रही थी. मेरा लंड मन ही मन बड़बड़ा रहा था, भेन्चोद साली जल्दी से पास आ, इतना तरसा क्यों रही है.

शायद उसकी बात कामिनी भाभी ने सुन ही ली, तो अपने पंजों को मोड़कर मेरी जांघों पर रख लिया. इस तरह से कामिनी भाभी की रस से सराबोर हो चुकी चूत के होंठ अपने आप फैल गये. मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर पहले कसकर दबाया, शायद कामिनी भाभी उसकी ताक़त आजमा रही थी.

कामिनी भाभी - तैयार हो जाओ अंकुश... आज तुम्हें स्वर्ग का द्वार दिखाती हूँ.

भाभी ने कातिलाना अंदाज़ में मुझे मुस्कुराते हुए देखा और उनके अनोखे जिस्म का पूरा नज़ारा दिखने पर ना चाहते हुए भी, मैं अपने लंड को मसलने पर मजबूर हो गया था. वैसे कामिनी भाभी की कामुक हरकतों का मेरे ऊपर सही वाला प्रभाव पड़ रहा था..

क्योंकि मेरा लंड बहुत ही कड़क हो चुका था. कामिनी भाभी का कसा हुआ जिस्म इतना कामुक लग रहा था… कि मेरी सांस जोर पकड़ने लगी थी….

मैं बिना कुछ बोला बस कामिनी भाभी को देखे जा रहा था और उन्हें भी पता था कि मैं वही देख रहा हूँ जो वो दिखा रही है. कामिनी भाभी अपने हाथ पीछे ले जाती है और अपने जिस्म को थोड़े आगे की तरफ करती है, जिसकी बड़ी और उभरी हुई चुचियों का दर्शन पाकर मेरा जीवन ध्यान जो जाता है. मैंने अपने लंड को जोर-जोर से मसलता रहा..

मैं - उफ्फ्फ्फ़.. कामिनी भाभी आप कितनी खूबसूरत हो...

कामिनी भाभी मुझे देख के मुस्कुरा कर कहती हैं - अंकुश अभी तो असली काम बाकी है और उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी रसीली चिकनी बिना बालों वाली चूत पर हाथ रख दिया..

मैं- भाभी जल्दी करो ना…

मैंने किसी मासूम बच्चे की तरह जिद की, जिसे सुनकर कामिनी भाभी भी मुस्कुरा उठी. उन्होंने अगले ही पल मुझे देखते हुए धीरे से अपनी टांगो को फ़ैलाना शुरू कर दिया और कामिनी भाभी के ऐसा करने से उनके जाँघों के बीच एक बहुत ही खूबसूरत चिकनी मखमली मुलायम चूत का नज़ारा मेरी आँखों के आगे था. शायद कामिनी भाभी ने मेरे लिए ही अपनी चूत को मक्खन जैसी चिकनी किया था.

कामिनी भाभी अब टाँगों को तब तक फैलाती रही जब तक उनकी चूत का सम्पूर्ण नज़ारा मेरी आँखों के आगे नहीं आ जाता.

आज पहली बार मैं कामिनी भाभी की चूत का इतना खूबसूरत नज़ारा यूँ इतने करीब से देख पा रहा था, मुझे अपनी किस्मत पर आज बहुत ही नाज़ हो रहा था. मैं आगे बढ़ता हूँ और अपने तने हुए लंड को कामिनी भाभी की चूत की फांकों पर रख के धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर देता हूँ.

मैं – उफ़फ्फ़… कामिनी भाभी… कितना सुकून भरा एहसास है ये???

मेरी हरकत देख के कामिनी भाभी मुस्कुरा उठती हैं... और खुद ही अपना हाथ आगे करके अपनी चूत को सहलाती हुई मेरे लंड पर अपनी चूत का घर्षण करना शुरू कर देती हैं

कामिनी भाभी - सीख रहे हो अंकुश??

भाभी ने ये बात मुस्कुराते हुए मुझसे कह रहीं थीं. क्योंकि कामिनी भाभी शायद जान चुकी थी की मैंने जो पहले उनसे कहा था की "सेक्स के मामले में मैं अनाड़ी हूँ", वो शायद ग़लत है. जिस तरह मैंने अपने तने हुए लंड को कामिनी भाभी की चूत की फांकों पर रख के धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया था, शायद उसी से भाभी ने ये अंदाजा लगाया था.

परन्तु मेरी ये स्थिति हुई कैसे?? और होती भी क्यों नहीं???

जब कामिनी भाभी जैसी कामुक औरत आपके सामने टाँगे खोल के पड़ी हो, उनकी चिकनी रसीली बिना बालों वाली चूत आपके आगे यूँ परोसी गई हो, तो भला खुद को कैसे कोई रोक सकता है??

मैं अपने लंड को भाभी की चूत की गुलाबी फांकों के बीच रख के आगे की तरफ धक्का देने का असफ़ल प्रयास करता हूँ, क्योंकि कामिनी भाभी को चुदाई के मामले में मेरा नौसिखियापन साफ-साफ पता चलना चाहिए था. मैंने असफल धक्का ऐसा मारा की मेरा लंड भाभी की चूत का एक कामुक घर्षण करते हुए आगे की तरफ सरक जाता है.

कामिनी भाभी मुस्कुरा उठती हैं.. साथ के साथ उनकी कामुक आह भी मुँह से निकल पड़ती है - आआहह... अंकुश तुम तो बिलकुल बुद्धू हो.. अपनी भाभी को चोदना भी नहीं जानते हो???

मैं - कामिनी भाभी, अब तक आप जैसी कोई मिली नहीं मुझे, जो ये सब खेल सिखा देती…

कामिनी भाभी- (मुस्कुराते हुए) कोई नहीं मेरे बुद्धू अंकुश… चिंता मत करो तुम्हारी कामिनी भाभी तुम को सब कुछ सिखा देगी…

और उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी चिकनी चूत के द्वार पर रख दिया.. और मेरी आँखों में देखते हुए इशारा किया, मानो कह रही हों "घुसाओ.. अंकुश... अपना हथोड़े सा लंड... पेल दो अपना लौड़ा अपनी भाभी की चूत में...".

मैंने भी कामिनी भाभी के इशारे को अच्छे से पकड़ लिया और उनकी कमर को मज़बूती से पकड़ कर बहुत प्यार से अपने लंड को उनकी पनियाई चूत के अंदर धकेल दिया...

लेकिन कामिनी भाभी तो अलग ही मूड में थीं. भाभी पूरी चुदासी हो रखी थीं. तुरंत उन्होंने मुझे बिस्तर पर धकेल के लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गयीं फिर अपनी गर्म भाप जैसा पानी छोड़ती रसीली चिकनी बिना बालों वाली चूत को मेरे लंड के ऊपर रख कर कामिनी भाभी उसपर बैठती चली गयी.

भाभी- आआआआआआआहहह.......... अंकुश..

भाभी की कामुक सिसकारी फुट पड़ी थी.. मुझे भी एक अलग आनंद मिला, ऐसा लग रहा था ये मेरी जिंदगी की पहली चूत थी, जिसमें मेरे लंड ने गोता खाया था…

मैं - आआआहहह..... कामिनी भाभी...... यू आर सो सेक्सीईईईईईई......

कामिनी भाभी - आआहह.. अंकुश… सस्सिईईईईईईईईईईईईईई.. उउउफफफफफफफफफ्फ़... म्म्म्मा आह..

मस्ती में कामिनी भाभी की आँखें बंद होती चली गयी, मुँह अपने आप खुल गया. मेरे तगड़े लंड को लेने में शुरुआत में भाभी को थोड़ी तकलीफ़ हुई. लेकिन अपने होंठों को कस कर भींचते हुए कामिनी भाभी धीरे-धीरे उसके ऊपर बैठ ही गयी और पूरा आठ इंच का मेरा हथौड़े सा लंड उनकी चूत में जड़ तक समा गया. जब पूरा लंड जड़ तक कामिनी भाभी की रसीली चूत में समा गया तो भाभी कुछ देर मेरे ऊपर बैठ कर लंबी-लंबी साँसें लेने लगी.

कामिनी भाभी - उउउफफफ्फ़… अंकुश... कितना तगड़ा और दमदार हथियार है तुम्हारा… मेरी चूत को अंदर तक भर दिया है इसने… सस्सिईइ... आअहह… मज़ाअ… आ गाया… अंकुश डार्लिंग..

कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद कामिनी भाभी ने अपनी गान्ड को ऊपर नीचे करना शुरू किया. भाभी धीरे-2 चूत के मुँह को सुपाड़े तक निकाल लेती और फिर से धीरे-2 ही पूरा अंदर कर लेती. मुझे इस तरह से बहुत मज़ा आ रहा था, जब मेरा सुपाड़ा कामिनी भाभी की चूत के होंठों से रगड़ता.

मैं - आअहह… सीईईईईईई…. उफफफ्फ़…. मस्ती में मैंने उनके दोनों बूब्स को अपनी मुठ्ठियों में भरकर ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा.

कामिनी भाभी - आअहह… उउउफफफ्फ़… अंकुश.... हान्न्न… ऐसे ही करो. बड़ा मज़ा आरहााआ.. हाीइ... हइईए... सीईईईईईई…. उफफफ्फ़…. मुऊुआाहह….

अब कामिनी भाभी की स्पीड कुछ बढ़ने लगी. और वो तेज़ी से मेरे लंड पर कूदने लगी. मैंने भी नीचे से अपनी कमर उछालना शुरू कर दिया. कभी भाभी मेरे होंठ चूसने लगती, तो कभी मेरे सीने को सहलाती और अजीब-अजीब सी आवाज़ें निकालते हुए मुझे चोद रही थी. 10 मिनिट बाद कामिनी भाभी बड़ी बुरी तरह से झड़ने लगी. कामिनी भाभी ने मेरे लंड और टट्टों को अपने चूत रस से गीला कर दिया और मेरे ऊपर पसर गयी. इधर मेरा मज़े से बुरा हाल था तो मैंने उन्हें पलट कर नीचे लिया और एक बार कामिनी भाभी की रस छोड़ती चूत को जीभ से चाटा और एक तगड़े से झटके में अपना लंड उनकी चूत में पेल दिया. उनके मुँह से एक लंबी सी सिसकी निकल गयी.

कामिनी भाभी – आआहह… धीरे.. उउउफफफ्फ़… अंकुश.... डार्लिंग, थोड़ा साँस तो लेने दो.

लेकिन मैंने अनसुनी करते हुए अपने धक्के शुरू कर दिए. कुछ देर बाद कामिनी भाभी फिर से गरम होने लगी और अपनी कमर उछाल–2 कर सहयोग करने लगी. मेरे धक्के इतने तेज और तगड़े होते जा रहे थे. की पूरे कमरे में मेरी जांघों की थाप उनकी गान्ड पर पड़ने की आवाज़ गूँज रही थी.

कामिनी भाभी अब नीचे से अपनी कमर हिलाना शुरू कर चुकी थी.. और मैंने उनकी एक चुची को कसके मुट्ठी में भरकर जोर-जोर से उनको चोदना शुरू कर दिया पर अबकी बार भाभी चीख नहीं रही थीं.. क्योंकि उनकी चूत में काफ़ी चिकनाहट आ चुकी थी, जिससे मेरा लंड बड़े ही आराम से उनकी चूत की गहराई नाप रहा था. कामिनी भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थी और कमर को खूब जोर-जोर से हिलाकर मेरे लंड को अपनी गहरी का नाप दे रही थी..

मैं- आआआहहह... कामिनी भाभी.... यू आर सो सेक्सीईईईईईई…

मैं कामिनी भाभी पर पूरी तरह झुक गया.. और उनके होंठों से अपने होंठों को मिला के अब मैं उनको चूमते हुए, दनादन भाभी की चूत चोद रहा था.

कामिनी भाभी - उउउम्म्म्मम.... उम्मम्मम्मम......... उम्मम्मम्म...... अंकुश… और जोर से चोदो मेरी चूत को... आआआह्ह्ह... उम्मम्मम्मम.... उम्मम्मम्मम... तुम्हारे हथौड़े जैसे लंड ने मुझे पागल कर दिया है...

भाभी जोर-जोर से अपने कमर को हिला रही थी, मानो मेरे लंड को अपनी चूत के अंत तक ले जाना चाहती हो.. और मैं भी इसमें पीछे नहीं था. कामिनी भाभी की टांगों को कसके जकड़े हुए भाभी को अच्छे से दबा-दबा के चोद रहा था. आधे घंटे मैंने भाभी को रगड़-रगड़ कर पेला, उसके बाद कामिनी भाभी की चूत को अपने माल से लबालब भर दिया और उनके ऊपर लेट कर हाँफने लगा. भाभी मेरे साथ चुदाई कर के मस्त हो गयी थी. कुछ देर बाद हम दोनों बाथरूम में जाकर फ्रेश होने लगे.

थोड़ी देर के बाद कामिनी भाभी अपने हाथों से मेरे लंड को फिर से सहलाने और मुठियाने लगीं और उसकी सेवा करते हुए बोली.

कामिनी भाभी – क्या कह रहे थे जनाब की, तुम्हें कुछ नहीं आता है??? फिर ये क्या था अंकुश??? हां!!!... मेरी चुदी चुदाई चूत का तुम्हारे लंड ने कचूमर निकाल दिया…

उनके सेवा भाव से खुश होकर मेरा लंड दुबारा अकड़ने लगा और फन-फना कर उन्हें मुँह चिढ़ाने लगा.

मैंने कामिनी भाभी को चूमते हुए कहा – हेहेहे… कामिनी भाभी वो तो बस अपने आप ही होने लगा. वैसे कैसा लगा आपको मेरे साथ सेक्स करने में?

कामिनी भाभी अपनी मखमली जाँघ से मेरे लौड़े को मसलते हुए बोली – अंकुश बस कुछ पुछो मत… मेरे पास ये सब बताने के लिए शब्द नहीं हैं. बस इतना ही कहूँगी अंकुश… यू आर सिम्पली द बेस्ट! थैंक्स अंकुश…. मेरी इच्छा पूरी करने का बहुत-बहुत धन्यवाद, बिन मोल खरीद लिया तुमने मुझे.

कामिनी भाभी की जाँघ की रगड़ से मेरा लंड बहुत उत्तेजित हो गया और वो उनकी गुदाज जाँघ में ही अपने लिए रास्ता ढूँढने लगा. मेरे लंड की सख्ती देखकर कामिनी भाभी को भी ताव आ गया और उन्होंने उसे अपने मुँह में गप्प से ले लिया और फिर वो चुसाई की, कि साले को नानी याद आने लगी.

मैंने कामिनी भाभी को अपनी गोद में उठाया और पलंग पर लाकर औंधे मुँह पटक दिया और उनकी पीठ पर चढ़ गया. भाभी ने अपनी गान्ड को पलंग से ऊपर की तरफ उठा लिया जिससे उनकी चूत का मुँह खुल कर मेरे लंड को चुदाई का निमंत्रण देने लगा. मैंने कामिनी भाभी के मस्त गोल मटोल कलश जैसे चुतड़ों को मसल-मसल कर लाल कर दिया, साइड से कमर में हाथ डालकर कामिनी भाभी की गान्ड को और थोड़ा उठा कर चूत का मुँह खोला और अपनी 3 उंगलियाँ उसमें पेल दी. भाभी के चूतड़ हवा में और ज़्यादा उठ गये. मैंने पीछे से अपना लौड़ा कामिनी भाभी की सुरंग के मुँह पर रखकर पूरी ताक़त से अंदर पेल दिया.

कामिनी भाभी – उउउइईईईईईईई… माआआ... उउउफफफफफफफफफ्फ़… आराम से … प्यार से अंकुश... मैं तुम्हारी भाभी हूँ कोई रंडी नहीं... ज़रा प्यार से अपना लौड़ा मेरी कमसिन चूत में पेलो...

कामिनी भाभी की कराह की परवाह ना करते हुए, मैंने उनके सुनहरे लंबे बालों को जकड़ कर पीछे को खींचा, जिससे कामिनी भाभी का सर भी हवा में उठ गया. तकिये पर हाथ टिकाए भाभी मस्ती से मेरे लंड का मज़ा लूटने लगी. मैंने उनकी चिकनी पीठ को चूमते हुए अपने धक्के शुरू कर दिए. कामिनी भाभी की गान्ड और थोड़ी ऊपर हो गयी. क्या मस्त नज़ारा था?? मेरी जांघें जैसे ही उनकी गान्ड के निचले हिस्से पर पड़ती तो उनके गोल-गोल चूतड़ बॉल की तरह और ऊपर को उठ जाते. गान्ड को मसलते हुए बीच-2 में मैं उसपर चांटे भी बरसाता जा रहा था, जिससे कामिनी भाभी की गान्ड लाल सुर्ख हो गयी. जब ज़्यादा मज़ा आने लगा तो भाभी अपनी घुटने टेककर घोड़ी बन गयी. फिर तो चुदाई का वो तूफ़ानी दौर शुरू हुआ की बस पूछो मत. धक्के-पे धक्के… थपा-थप… फचा-फच... हम दोनों के शरीर भट्टी की तरह दहकने लगे.

कामिनी भाभी – आअहह… अंकुश...... मेरे लाड़ले देवर जी, चोदो मुझे… फाड़ डालो मेरी चूत को…. हइईए… रीई. मैं…. तो गईयीईईईई…. आआआह्ह्ह.... अंकुश... थोड़ा धीरे..... आआआह्ह्ह... माँ.... धीरे... अंकुश... हाईई.... माँ.....

पर मैं तो कामिनी भाभी की चूत को ऐसे चोद रहा था, जैसे मुझे तो जिंदगी में पहली बार चूत नसीब हुई थी... मैं कहाँ उनकी सुनने वाला था.. मैं तो जैसे पूरा पागल होकर उन्हें चोद जा रहा था..

मैं- आआआह्ह... भाभी... आआआह्ह्ह...........

कामिनी भाभी की जोरदार चुदाई की वजह से चप-चप-चप की मधुर आवाज़ में हम दोनों ही सुन रहे थे.

कामिनी भाभी - आआआह्ह्ह... बस करो अंकुश... आआह्ह्ह.. अब रुक जाओ.. रुक जाओ अंकुश... आआआह्ह्ह.. माँ...

धीरे-धीरे मैं भी लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर बहुत चुका था, इसलिए मैं थोड़ा सीधा होता हूँ और उनके एक पैर को पकड़कर जोर-जोर से अंतिम धक्के लगाना शुरू कर देता हूँ

मैं- अह्ह्ह्ह.... कामिनी... आआआह्ह्ह.... भाभी.... आआआह्ह्ह......

मेरे जोरदार धक्कों की वजह से कामिनी भाभी का पूरा जिस्म पसीने में भीगा हुआ बुरी तरह हिल रहा था और उनका कामुक नंगा शरीर कामुकता की अधिकता में काँप रहा था

कामिनी भाभी - आआआआह्ह्ह्ह... अंकुश..... माँआआ..... जल्दी करो.... आआआह्ह्ह्ह्ह.... हाय....... और तेज़.... और तेज़....

मेरा लंड अपने आखिरी धक्कों के साथ जोर-जोर से कामिनी भाभी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था.. जिस कारण कामिनी भाभी का काम रस भी साथ में उनकी चूत से बहता हुआ बाहर आ रहा था..

कामिनी भाभी - आआआआह्ह्ह्ह... माँ...... अंकुश... आआआआह्ह्ह्ह...... उफफफ्फ़... अंकुश...

इसी बीच मैं एक अंतिम धक्का मारता हूँ और कामिनी भाभी ऊपर बिछ जाता हूँ. मेरा लंड भाभी की गर्म चूत के अंदर झड़ जाता है और मेरा गाढ़ा वीर्य भाभी की चूत से होता हुआ, उनके बच्चे दानी तक जा रहा था. कामिनी भाभी ने भी अपने कमर को ऊपर उठा के मेरे लंड से अपनी चूत को ऐसे चिपका दिया मानो उन्हें डर हो कि कहीं मेरे वीर्य का कोई कतरा बाहर ना रह जाये. इसी के साथ कामिनी भाभी भलभलाकर झड़ने लगी और मेरे ऊपर पसर कर हाँफने लगी.

कामिनी भाभी - आआआआआआआआ... आआआह्ह... मज़ा आ गया अंकुश, तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी. कसम से गज़ब के चोदू हो तुम और कमाल का लंड है तुम्हारा. जो कोई भी तुम्हारे लौड़े का स्वाद एक बार चख लेगी वो तुम्हारी दासी बनने को तैयार हो जाएगी.

लंड अंदर डाले-डाले ही मेरी आँखें बंद हो गयी. करीब 10 मिनिट मैं यूँ ही उनकी पीठ पर पड़ा रहा फिर कामिनी भाभी ने मुझे अपने ऊपर से साइड को लुढ़का दिया और फ्रेश होकर मेरा भी लंड साफ किया. उस रात मैंने उन्हें दो बार और चोदा. वो मेरे लंड की दीवानी हो चुकी थी. लेकिन कामिनी भाभी थी बहुत गरम औरत. उसने मुझे एकदम से जैसे निचोड़ ही लिया था.

थकान और नींद की खुमारी में सुबह के 4 बजे मैं जैसे तैसे कर के अपने कमरे में पहुँचा और से बिस्तर पर गिर पड़ा. बेड पर पड़ते ही, मुझे होश नहीं रहा कि कब नींद आ गयी. सुबह 8 बजे रमा दीदी ने मुझे झकझोरकर बड़ी मुश्किल से उठाया. घड़ी पर नज़र पड़ते ही मैंने झटपट से बिस्तर छोड़ा, और आधे घंटे में फ्रेश होकर नाश्ता कर के कालेज को भाग लिया.

दूसरे दिन कालेज में ग़रीब अनाथ बच्चों के वेलफेयर के लिए हम सभी स्टूडेंट्स को टाउन में जाकर लोगों के घरों में कुछ काम – धाम कर के उनसे खरी कमाई कर के फंड इकट्ठा करने का टास्क मिला.

रागिनी उसके भाई की पिटाई की घटना के बाद बिल्कुल सिंपल तरीके से, दूसरे स्टूडेंट्स की तरह ही कालेज में सबके साथ बिहेव करने लगी थी. उसने मुझे रिक्वेस्ट के, की अगर में उसके साथ, उसके घर जाकर फंड इकट्ठा करूँ., इसी बहाने वो भी मेरे साथ मिलकर अपने घर का कुछ काम करना चाहती है. वैसे तो घर में उसे कोई कुछ करने नहीं देता, मुझे भी इसमें कोई बुराई नहीं लगी. तो हम दोनों उसके घर की तरफ चल दिए.

ठाकुर साहब मुझे देख कर बड़े खुश हुए और अपनी पत्नी और नौकरों को बोल कर मेरे लिए खाने पीने का इंतजाम करने को कहा तो मैंने उन्हें हाथ जोड़कर रोका और कहा.

मैं - ठाकुर साहब आज मैं आपका परिचित या अतिथि नहीं हूँ. मैं और रागिनी मिलकर आपके घर में कुछ काम करने आए हैं. उससे जो कमाई होगी वो हम ग़रीब और अनाथ बच्चों की भलाई के लिए कुछ करेंगे.

ठाकुर साहब बोले – अरे! भाई तुम लोग बोलो. कितना पैसा चाहिए?? मैं देता हूँ ना! तुम लोगों को काम करने की क्या ज़रूरत है.

रागिनी – नहीं पापा. हम बिना काम किए आपसे एक पाई भी नहीं लेंगे, तो प्लीज़ बताइए. हम दोनों आपका क्या काम करें?

ठाकुर साहब सोचते हुए हँसकर बोले – ठीक है भाई, अगर तुम लोग कुछ करना ही चाहते हो तो गराज़ में हमारी गाड़ियों की सफाई कर दो. ठीक है? कर लोगे ना??

मैं – जी बिल्कुल. और हम दोनों पानी की बाल्टियाँ भर के गराज़ की तरफ चल दिए.

हम दोनों ही इस समय टीशर्ट और जीन्स पहने हुए थे. टाइट टीशर्ट में रागिनी की बड़ी-2 चुचिया एक दम कसी हुई. कपड़ों को फाड़ कर निकल पड़ने को हो रही थी. गराज़ में दो गाड़ियाँ खड़ी थी. एक उनकी स्कॉर्पियो और दूसरी सडान मॉडेल कार. मैंने दोनों को पहले कपड़ा मार कर धूल साफ की फिर रागिनी को पानी मारने को बोला. उसने एक मग से भर-भर कर गाड़ियों पर पानी उछालना शुरू किया. रागिनी के अनाड़ीपन की वजह से गाड़ियों पर पानी कम पड़ रहा था, लेकिन खुद पूरी भीग गयी. कपड़े गीले होने से उसके बदन से बुरी तरह चिपक गये. मेरा उसे देखते ही लंड खड़ा होने लगा. जिसे मैंने अपनी जीन्स में एडजस्ट किया.

मुझे उसे देख-देख कर हँसी आ रही थी. मुझे हँसता हुआ देख कर रागिनी ने एक मग भर कर मेरी तरफ उछाला. मैंने पीछे हट कर बचने की कोशिश की लेकिन फिर भी रागिनी ने मुझे भिगो ही दिया.

मैंने कहा - तुम्हें तो कुछ भी नहीं आता रागिनी. लाओ मैं ही करता हूँ, तो उसने मना कर दिया और फिर से गाड़ियों पर पानी डालने लगी.

जब रागिनी पानी डाल चुकी तो मैं एक कपड़े से उन्हें फिर से पोंछने लगा. स्कॉर्पियो ऊँची गाड़ी थी तो मैं उसके पायदान पर चढ़ कर उसकी छत को पोंछ रहा था. रागिनी भी गाड़ी के दूसरी तरफ पायदान पर खड़ी हो गयी, और मेरी तरह ही कपड़ा मारने का प्रयास करने लगी. रागिनी की हाइट कुछ कम थी, तो गाड़ी की छत तक पहुँचने के लिए रागिनी उसपर अपने बूब्स टिका कर पोंछने लगी.

रागिनी के मोटे-मोटे दूधिया बूब्स गाड़ी की शीट से दब कर बाहर को निकलने के लिए मचल उठे. मेरी नज़र अनायास उसकी चुचियों पर चली गयी. दो बड़ी-बड़ी बॉल मानो उसके टॉप के अंदर एक दूसरे से मिला कर रख दी गयी हों. मेरी नज़रों को ताड़कर रागिनी ने उन्हें और ज़्यादा उभारते हुए गाड़ी को पोंछना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद रागिनी मेरे बाजू में ही आ गयी और मेरे हाथ से कपड़ा लेने लगी. मैंने मना किया तो रागिनी छीना-झपटी करने लगी.

मैं – रहने दे रागिनी, मैं साफ कर लूँगा, वैसे भी तुझे कुछ आता जाता नहीं है.

ये बात रागिनी को थोड़ी चुभ गयी और रागिनी मेरे हाथ से जबरदस्ती कपड़े को खींचने लगी. मैंने उस कपड़े को अपने पीछे छिपाने की कोशिश की, तो रागिनी ऊपर ही चढ़ने लगी, और कपड़ा लेने के बहाने मेरे सीने से चिपक गयी. गीले हो चुके टॉप से वैसे भी रागिनी की बड़ी-2 बूब्स उबली पड़ रही थी. मेरी छाती से दब कर और चौड़ी होकर आधी तक ऊपर को उभर आई. आख़िर मर्द के लौड़े को इस सिचुएशन में जो फील होता है, वहीं मेरे वाले को भी हुआ, भले ही सामने वाली से कैसा भी रिश्ता रहा हो.

अब मेरा लंड कड़क होकर रागिनी की चूत के ऊपर ठोकर मारने लगा, जिसकी वजह से रागिनी की चूत और ज़्यादा खुंदस में आकर आँसू बहाने लगी होगी. वैसे तो मैं रागिनी की मंशा बहुत पहले ही समझ चुका था. लेकिन फिर भी मैंने अपनी ओर से उसे और ज़्यादा कुछ नहीं कहा. चुप-चाप से वो कपड़ा रागिनी को थमाया, और दूसरा कपड़ा उठा कर दूसरी गाड़ी को पोंछने लगा.

रागिनी बुरा सा मुँह बना कर गुस्से में भुन-भुनाई और कपड़ा ज़मीन पर फेंक कर अपने पैर पटकती हुई घर की तरफ चली गयी. ये मेरे लिए अच्छा हो गया, चलो मुसीबत टली, अब मैं शांति से गाड़ियों को साफ कर सकता था.

आधे घंटे में मैंने दोनों गाड़ियों को एक दम साफ कर के चमका दिया और आकर ठाकुर साहब को बोला – लीजिए सर आपकी दोनों गाड़ियाँ साफ हो गयी, चाहो तो आप चेक कर सकते हैं.

ठाकुर साहब बोले – अरे बेटा, कैसी बात करते हो. बोलो तुम्हारी कितनी कमाई हुई?

मैंने कहा – जो आप अपने नौकर को देते हो इतने काम के लिए उतना ही दे दो. तो उन्होंने मुझे 500/- का एक नोट पकड़ा दिया.

मैंने कहा – ये तो इतने छोटे से काम के लिए बहुत ज़्यादा है.

ठाकुर साहब बोले – अरे रख लो, ग़रीब बच्चों के ही तो काम आना है.

मैंने उनकी बात का मान रखते हुए वो नोट ले लिया, तब तक रागिनी भी अपने कपड़े चेंज कर के आ चुकी थी. फिर हम दोनों वापस कालेज लौट आए. लेकिन रास्ते भर रागिनी मुझे गुस्से से ही घूरती रही, लेकिन बोली कुछ नहीं. कालेज पहुँचते-2 दूसरे स्टूडेंट्स भी आ चुके थे. सब का कलेक्शन कर के जितना पैसा इकट्ठा हुआ, उसे अनाथ आश्रम को भिजवा दिया. ये सब काम निबटाने में 3 बज गये थे.

मैं घर आया और सीधा बाथरूम में जाकर कपड़े चेंज किए और एक टीशर्ट के साथ शॉर्ट पहन कर बाहर आया. बाहर मुझे कोई नहीं दिखा. किचन से बर्तन खटकने की आवाज़ आ रही थी. जाकर देखा तो रमा दीदी बर्तन साफ कर रही थी.

रमा दीदी ने मुझे देखते ही पूछा – अरे अंकुश!! भाई तू आज इतना लेट कैसे हो गया?

मैंने उन्हें पूरी बात बताई और खाना लेकर वहीं बैठ कर खाने लगा. खाना खाते-2 ही मैंने दीदी से पूछा – दीदी, कामिनी भाभी कहाँ हैं, जो तुम बर्तन साफ कर रही हो??

रमा दीदी – महारानी साहिबा सो रही हैं. उनका वैसे भी काम करने का कोई मतलब नहीं है. कुछ आता-जाता हो तो कुछ करें भी. इससे अच्छा था कि भैया अपने साथ ले ही जाते तो ठीक रहता. कम से कम मेरे लिए काम तो कम होता.

मैं – अरे! ये क्या कह रही हो, कामिनी भाभी तो काम की वजह से ही रुकी थी. ऐसा है तो रमा दीदी आप उन्हें सिखाओ ना.

रमा दीदी – सिखाया उसको जाता है अंकुश, जो सीखना चाहे. कामिनी भाभी को ये काम करने ही नहीं हैं तो सीख कर क्या करेंगी. कृष्णा भैया की कमाई पर ऐश करनी है उनको तो.

मैं – तो क्यों ना हम कृष्णा भैया को फोन कर दें कि उन्हें अपने साथ ले ही जायें?

रमा दीदी – रहने दे अंकुश. उन दोनों को ही बुरा लगेगा. अब जैसे-तैसे कर के ये दिन तो निकालने ही पड़ेंगे. पर मैं क्या बोलती हूँ. तू ना!! कामिनी भाभी के साथ इतना मत चिपके रहा कर.

मैं - मैं कहाँ चिपका रहता हूँ. जब मैंने ये कहा, तो रमा एकदम से बोल पड़ी.

रमा दीदी – रात भर कहाँ था तो फिर?

मैंने झटके से रमा दीदी की तरफ देखा, वो मेरे पास आकर बैठ गयी और मंद-2 मुस्कराते हुए बोली.

रमा दीदी – अब मैं बच्ची नहीं हूँ अंकुश! तेरे से बड़ी हूँ और ग्रैजुएट भी हूँ. मुझे सब पता है. तू क्या-2 करता है.

फिर कुछ सीरीयस होकर रमा दीदी बोली – तुझे अपनी बहन के अलावा बाकी सब दिखाई देते हैं इस घर में.

मैं रमा दीदी की बात सुनकर खाना ही भूल गया और उसकी तरफ देखने लगा.

रमा दीदी – क्या मैंने ग़लत कहा कुछ? अब तक तो मोहिनी भाभी ही थी. अब कामिनी भाभी भी आ गयी. मैं तो जैसे तेरे लिए इस घर में हूँ ही नहीं.

फिर रमा दीदी मेरे कंधे को हिलाते हुए बोली - अब खाना खा ले. यूं मुँह फाड़े मत देखता रह मुझे. मोहिनी भाभी ने भी कभी-कभार के लिए तो बोला ही था.

मैंने कहा - ठीक है दीदी. आज हम दोनों एक साथ सोएंगे.

रमा दीदी खुशी से मेरे गले से लिपटे हुए बोली – क्या??? सच!!??

फिर अलग होते हुए बोली – लेकिन कामिनी भाभी का क्या करोगे. भाभी तुम्हें अकेला छोड़ेंगी भला?

मैं – उसका भी कोई ना कोई हल निकल आएगा. आज रात तुम मेरा अपने कमरे में इंतजार करना.

मेरी बात सुनकर रमा दीदी खुश हो गयी और जाकर अपने काम में लग गयी. मैंने भी अपना खाना खतम किया, अपनी बुलेट उठाई और टाउन की तरफ निकल गया. मैंने सोचा कि अगर कामिनी भाभी को यहाँ से जल्दी से जल्दी विदा करना है, तो उनके साथ ऐसा कुछ करना होगा, जिससे कामिनी भाभी कृष्णा भैया को सामने से बुलाकर यहाँ से चली जाएँ.

यही सब सोचते-सोचते, मैंने अपनी बुलेट एक मेडिकल स्टोर के सामने रोकी और उससे एक 500 एम.जी. वियाग्रा लेकर घर लौट लिया. रात के खाने के बाद, कामिनी भाभी ने मुझे अपने कमरे में आने का इशारा किया. मैंने उन्हें थोड़ी देर इंतजार करने का इशारा कर दिया. रमा दीदी तिरछी नज़र से ये सब देख रही थी और मन ही मन कामिनी भाभी को गालियाँ दे रही थी… खाने के बाद मैंने वियाग्रा पानी के साथ गटक लिया. इस दवा के बारे में ये जानकारी मैंने नेट से निकाली थी, जिसका असर डेढ़-दो घंटे के अंदर पूरी तरह हो जाना था. मैंने दीदी को शांत रहने का इशारा कर के, अपने कमरे में चला गया. कुछ देर के बाद उसको गेट खुला रखने का बोल कर मैं कामिनी भाभी के कमरे की तरफ बढ़ गया.

वियाग्रा लिए हुए अभी मुझे एक घंटा ही हुआ होगा, कि उसका असर मेरे शरीर में महसूस होने लगा. मुझे कामिनी भाभी के घर के कामों में सहयोग ना देने से गुस्सा आ रहा था, कृष्णा भैया के सामने तो बड़े-बड़े भाषण दे रही थी, मानो वो इस घर के लिए कितनी समर्पित है और अब अपनी औकात दिखाने लगी.

कामिनी भाभी बड़े घर की बेटी होगी अपने लिए. यहाँ उसे रहना है तो एक आदर्श बहू बनकर ही रहना होगा, ना कि किसी महारानी की तरह हुक्म चला कर. रमा दीदी को मोहिनी भाभी ने अब तक अपनी छोटी बहन की तरह माना है और कामिनी भाभी ने उसे अपनी नौकरानी बना दिया. ये सब सोच कर मेरे अंदर कामिनी भाभी के प्रति एक गुस्से की भावना पनप चुकी थी, इसलिए मैंने अब सोच लिया था कि इनको इनकी औकात दिखानी ही पड़ेगी.

कामिनी भाभी चुदने की पूरी तैयारी कर के बैठी थी. अपनी मिनी ब्रा और पैंटी के ऊपर एक छोटा सा पारदर्शी गाउन डाल रख था जिसका होना ना होना एक जैसा ही था. मैंने भी देर नहीं की और अपने कपड़े निकाल दिए, फिर कामिनी भाभी के गाउन को उतार कर एक ओर फेंक दिया.

भाभी मेरी जल्दबाज़ी देख कर बोली – क्यों अंकुश आज बड़े उतावले हो रहे हो??

मैं – कामिनी भाभी! सामने इतना हॉट माल हो तो इंतजार कहाँ होता है??

ये कह कर मैंने अपने भी कपड़े निकाल दिए और अपना कड़क लंड उनके मुँह के सामने लहरा दिया. मेरे मस्ती में झूमते लौड़े को देख कर उन्होंने उसे अपनी मुट्ठी कस लिया, और उसके सुपाड़े को चाटते हुए बोली.

कामिनी भाभी - आअहह… अंकुश, क्या बात है, आज तो ये और ज़्यादा मस्त कड़क लग रहा है???

मैंने मुस्कराते हुए कहा – कल की मलाई खाकर ये और ज़्यादा चाक-चौबंद हो गया है.

कामिनी भाभी की आँखों में हवास के लाल डोरे दिखने लगे थे, वैसे यही हाल मेरा भी था उन्होंने मेरे लंड को कसके पकड़ा और मेरे टोपे पे अपने होंठों को रख दिया. इस असीम आनंद की वजह से मेरी आँखें बंद होती चली गई पर भाभी ने मेरे लंड को पूरा मुँह नहीं भरा था, बल्कि मेरे लंड को यहाँ वहाँ चूमना शुरू कर दिया. टोपे पे, मेरे आंड पे..

कामिनी भाभी मेरे लंड को हर तरह से घुमा-घुमा के उसे चूम रही थी और मैं मुश्किल से अपनी आह रोक रहा था, क्योंकि रमा दीदी पास के कमरे में ही सो रही थीं, और मैं नहीं चाहता था कि ये आनंद बंद हो या दीदी को बुरा लगे. पर कामिनी भाभी भी एक मंझी हुई खिलाड़ी थी, उन्हें मर्द की जरूरत का संपूर्ण ज्ञान था.

कामिनी भाभी ने मेरे लंड पर धीरे से थूक दिया और उसे ऊपर से लेकर नीचे तक ऐसे मसलने लगी मानो मेरे लंड की मालिश कर रही हों. कामिनी भाभी की ऐसी हरकतों से मेरे लंड में तूफान आने लगा था, क्योंकि मेरा आज का पहला बार था और मैं बहुत कोशिश कर रहा था कि मेरा माल ना निकले, पर उनकी हरकतों की वजह से मैं शायद और ज़्यादा देर तक रुक नहीं सकता था.

कामिनी भाभी ने मेरे लंड पर अपने थूक की मालिश करने के बाद अपनी प्यारी से जीभ निकाली और मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया. भाभी की इस हरकत से तो मेरे जिस्म में कंपकंपी सी भर गई थी पर भाभी ने तो अभी बस शुरू ही किया था.

कामिनी भाभी ने अपनी हरकतों में पूरी तेज़ी ला दी थी, वो मेरे लंड को ऊपर उठा के उसे नीचे से लेकर ऊपर तक चाट रहीं थीं

मैं - आईईई... आआआह्ह्ह्ह्ह..... भाभी........

मैं बड़ी ही मुश्किल से अपनी आह रोक रहा था, पर कामिनी भाभी पूरी मेहनत में लगी हुई थी. भाभी मेरे लंड को हर तरह से चूस रही थी.. चाट रही थी..

मेरा पूरा जिस्म बुरी तरह से कांप रहा था, ऐसा लग रहा था कि कभी भी मेरे माल की बारिश हो सकती है.. और बड़ी बात ये थी कि अभी तक कामिनी भाभी ने मेरे लंड को ढ़ंग से मुँह के अंदर भी नहीं लिया था. कामिनी भाभी ने मेरी ये हालत बिना लंड को मुँह में लिए ही कर दी थी. कामिनी भाभी ने अब पहली बार ऐसा किया था कि मेरे टोपे को अपने होंठों के बीच लेकर उसे कस कर चूस लिया था… ना सिर्फ चूसा था, बल्कि निचोड़ ही लिया था.

मैं – आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह्ह… कामिनी भाभी… भाभी…

मेरी बात सुनकर कामिनी भाभी भी मुस्कराने लगी, और मेरी आँखों में देखते हुए उसे अपने मुँह में भर लिया. कुछ देर भाभी मेरे लौड़े को मज़े ले कर लॉलीपॉप की तरह चूसती रही, फिर जैसे-जैसे मेरी उत्तेजना में बढ़ोत्तरी हुई, मैंने अपनी कमर भी चलाना शुरू कर दिया, और एक तरह से उनके मुँह को चोदने लगा.



मेरा लंड गोली के असर से एकदम डंडे की तरह सख्त हो चुका था, अचानक मैंने कामिनी भाभी के सर को अपने हाथों में जकड़ा, और पूरा लंड मुँह में ठेल दिया. मेरा लंड जाकर कामिनी भाभी के गले में फँस गया. कुछ देर मैं यूँ ही उसे दबाए रहा. उनकी गले की नसें फूलने लगी, आँखें बाहर को उबल पड़ने को हो गयी.

मैंने सोचा, अगर ज़्यादा देर ऐसे ही रखा तो कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए, तो मैंने झटके से उसे बाहर खींच लिया. पूरा रॉड जैसा सख्त लंड उनकी लार से लिथड़ा हुआ था, कामिनी भाभी कुछ देर तक खाँसते हुए अपनी साँसें नियंत्रित करती रही. फिर कुछ राहत की साँस लेकर, शिकायत करते हुए बोली.

कामिनी भाभी - अंकुश, बड़े जालिम हो तुम, ऐसे भी कोई करता है?? मेरी साँस ही रोक दी तुमने तो.

मैंने मासूम सा चेहरा बनाकर कहा – सॉरी भाभी, मुझसे रहा नहीं गया, ग़लती हो गयी. अब नहीं करूँगा.

कामिनी भाभी ने आँखें मटकाते हुए वापस मेरे लौड़े को मुँह में भर कर जबरदस्त चुसाई करने लगी. 10 मिनट की चुसाई के बाद मेरा लंड झड़ने को हो गया.

मैं- आआआह्ह....भाभी.......

मेरी हिम्मत टूट चुकी थी, उनकी इस हरकत की वजह से मेरे लंड से सफेद गाड़ा रस निकल पड़ा था, जो सीधा कामिनी भाभी के खूबसूरत चेहरे को और खूबसूरत करता जा रहा था

मेरे वीर्य के निकलते ही, कामिनी ने अपने होंठों को अलग कर दिया था, जिस वजह से मेरे वीर्य की बौछार सीधी उनके मुंह पे हो रही थी.. और जल्दी ही कामिनी के मुंह पे मेरा सफ़ेद गाढ़ा रस था. मैं तो कुछ पलों के लिए अपनी आंखों को बंद करके उस पल में खो सा गया था.

कामिनी भाभी को ये बुरा नहीं लगा, उलटा कामिनी ने मुस्कुराते हुए मेरे लंड को मुंह में लेकर एक बार अच्छे से चूस लिया और मेरे लंड का बचा खुचा वीर्य भी निचोड़ लिया.

कामिनी भाभी - आअह्ह्ह अंकुश तुम्हारा माल तो बहुत ही स्वादिष्ट है.

कामिनी ने मुस्कुराते हुए मेरे माल में सने हुए अपने चेहरे और होंठों पर मेरे लंड को लगा के उसे सहलाने लगी. भला भाभी की ऐसी हरकतों से कौन नहीं पसीज जायेगा. कामिनी ने उंगली से अपने चेहरे से मेरे माल को ले के मुंह में रख उसे चाटना शुरू कर दिया.. उफ्फ… उनकी इस हरकत ने तो मुझे पूरा पागल कर दिया था, और धीरे-धीरे करके अपने चेहरे से मेरा सारा वीर्य पोंछ के चाट गई थी. मेरा लंड अब तक सुस्त पड़ चुका था.

उफफफ्फ़... भाभी ने मुझे अपना दीवाना बना लिया था. भाभी खड़ी होती है और मुझे एक बार फिर से चूम लेती हैं.

कामिनी भाभी - उम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्म्म्म.... अंकुश यू आर सो हॉट... और फिर एक कदम पीछे हो के मुझे कातिलाना अंदाज़ में देखते हुए मुस्कुरा कर धीरे से कहती है.

कामिनी भाभी - तैयार हो जाओ अंकुश डार्लिंग.. आज तुमको मैं स्वर्ग का द्वार दिखती हूँ

ना चाह कर भी, मैं अपने लंड को मसलने पर मजबूर हो गया था, वैसे कामिनी भाभी की कामुक हरकतों का मेरे ऊपर सही वाला प्रभाव पड़ रहा था.. क्योंकि मेरा लंड जो सो चुका था, वापस से जागने लगा. अगले ही पल उन्होंने अपने जिस्म से अपनी ब्रा को अलग कर दिया, उनका टाइट जिस्म इतना कामुक लग रहा था.. कि मेरी सांसे जोर से पकड़ने लगी थी. मैं बिना कुछ बोले बस उन्हें देखे जा रहा था, और कामिनी भाभी को भी पता था कि मैं वही देख रहा हूँ.. जो वो दिखा रही हैं. वो अपने हाथ पीछे ले जाती हैं, और अपने जिस्म को थोड़े आगे की तरफ करती हैं, जिनकी बड़ी और उभरी हुई चुचियों के दर्शन पाकर मेरा जीवन ध्यान जो जाता है.

मैं अपने लंड को जोर-जोर से मसल रहा था..

मैं - हाय.. कामिनी भाभी आप कितनी खूबसूरत हो…

कामिनी भाभी मुझे देख कर मुस्कुराती है और कहती है "अभी तो असली खजाना बाकी है"

मुस्कुराते हुए कामिनी भाभी ने अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी चूत पर हाथ रख दिया..

मैं- कामिनी भाभी जल्दी करो ना…

मैंने किसी मासूम बच्चे की तरह जिद की, जिसे सुनकर भाभी भी मुस्कुरा उठी. उन्होंने अगले ही पल अपनी पैंटी को यूं जिस्म से अलग कर दिया, जैसे वो बस यहीं रखी हो. फिर मैं उनके चुचे मसलते हुए बोला.

मैं - कामिनी भाभी मुझे आपकी गान्ड बहुत अच्छी लगती है. एक बार दो ना प्लीज़.

कामिनी ना नुकुर करने लगी. तो मैंने भी धमकी दे दी. तो ठीक है रखो उसे अपने शो केस में सज़ा कर, मुझे नहीं चाहिए. और अपने कपड़े उठाने लगा.

कामिनी भाभी ने झपट कर मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली – प्लीज़ अंकुश ज़िद मत करो. मैंने कभी ट्राइ नहीं की है. फिर भी अगर तुम्हें गान्ड ही चाहिए तो प्लीज़ एक बार मुझे आगे से कर दो. लेकिन थोड़ा प्यार से करना अंकुश. प्लीज़, मुझे दर्द होगा.

मैं - ठीक है कामिनी भाभी. अब आप बेफिक्र रहो. मैं आपको दर्द नहीं होने दूँगा.

मैंने थोड़ी देर उन्हें गरम किया. और जब उसकी चूत पानी देने लगी तो मैंने अपना लौड़ा कामिनी भाभी की चूत में डाल दिया. और जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी. कामिनी भाभी हाय- हाय करती हुई 10 मिनिट में ही झड़ने लगी. फिर मैंने उसे घोड़ी बनाने को कहा.

कामिनी भाभी – प्लीज़ अंकुश मान जाओ ना. मुझे दर्द होगा.

मैंने कहा – भाभी इसकी आप चिंता ना करो.

मैंने उसकी गान्ड चाटना शुरू कर दिया. घोड़ी बनाने के बाद भी मैंने उसकी टाँगों को और चौड़ा कर दिया, अब कामिनी भाभी की गान्ड का सुराख थोड़ा खुल गया था. मैंने उसकी चूत में तीन उंगलियाँ डाल कर उन्हें मोड़ कर बाहर निकाला. तो कामिनी भाभी की चूत की मलाई ढेर सारी मेरी उंगलियों के साथ आ गयी. जिसे मैंने भाभी की गान्ड के सुराख में डाल कर एक उंगली से अंदर बाहर कर के चिकना कर दिया. कुछ देर उंगली से गान्ड चोदने के बाद मैंने अपने सुपाड़े थूक लगा कर गीला किया और उसके टाइट गान्ड के सुराख पर रख कर अंदर ठेल दिया.

कामिनी भाभी कराह कर अपनी टाँगें सिकोड़ने लगी. मेरा पूरा सुपाड़ा उसकी गान्ड में घुस चुका था. फिर मैंने अपनी टाँगों को कामिनी भाभी की जांघों के आगे से अड़ा दिया और कंधों पर दोनों हाथों को जमा कर एक करारा सा धक्का दे मारा.

कामिनी भाभी - अरईईईईईईई... मैय्आआआआआआअ… माआआआअरर्र्र्र्ररर.. डलल्ल्ल्ल्लाआाआअ.. रीईईईई.

कामिनी भाभी मुझे अपने ऊपर से धकेलने की भरसक कोशिश कर रही थी. लेकिन मेरी टाँगें उसे हिलने तक नहीं दे रही थी. ऊपर से दोनों हाथों ने उसका अगला धड़ दबोच रखा था.



मेरा आधे से ज़्यादा लंड उसकी गान्ड में था. एक बार लंड की साइड में अपना थूक और डाल कर उसे थोड़ा सा बाहर खींचा और एक लंबी साँस खींचकर एक जबरदस्त झटका मारा. मोटे बबूल के डंडे जैसा मेरा सख्त लंड, भाभी की कोमल गान्ड को चीरता हुआ जड़ तक फिट हो गया. अपना एक हाथ में पहले ही उसके मुँह पर फिट कर चुका था. उसने चीखना चाहा. लेकिन चीख ना सकी. उसकी आँखों से आँसू झरने लगे.

मैंने यहीं हद नहीं की और कामिनी भाभी की चुचियों को मसलते हुए धक्के देना शुरू कर दिया. बहुत देर तक वो कराहती रही. दर्द से तड़पती रही. कामिनी भाभी अपनी गान्ड को हिला डुला कर मेरे सोटे को गान्ड से निकालने का प्रयास करती रही लेकिन मेरी टाँगों की पकड़ ने उन्हें हिलने तक नहीं दिया. फिर मैंने अपना एक हाथ कामिनी भाभी की चूत पर ले जाकर सहलाने लगा. भाभी का दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी. मैं पूरी लंबाई के स्ट्रोक के साथ उनकी गान्ड फाड़ने में लगा हुआ था.

वियाग्रा के असर से मेरा लंड गान्ड में जाकर और ज़्यादा फूल गया, कामिनी भाभी की टाइट गान्ड के होल की दीवारें छिल सी गयी, मेरे लंड में भी दर्द सा होने लगा था. लेकिन उसकी परवाह ना करते हुए मैं लगा रहा गान्ड चोदने में, टाइट गान्ड की रगड़ और उसके अंदर की गर्मी से मेरा लंड भी जल्दी ही पिघलने लगा और मैं झड़ गया.

मेरे पैर हटते ही कामिनी भाभी धप्प से बिस्तर पर औंधे मुँह गिर पड़ी. उसके गिरते ही मेरा लंड ऑटोमेटिकली बाहर आ गया. मैंने देखा तो उसपर कुछ खून के धब्बे से लगे हुए थे. जो कामिनी भाभी की गान्ड की अंदर दीवार के फटने से लग गये थे.

कामिनी भाभी की गान्ड का छेद लाल सुर्ख हो गया था, लंड बाहर आने के बाद भी कुछ देर तक वो एक सर्किल के शेप में खुला ही रहा. उन्हें यूँ ही पड़ा छोड़कर मैंने चुप चाप अपने कपड़े उठाए और उनके रूम से खिसक लिया. दरवाजे को भिड़ा कर बाहर निकल आया. वो यूँ ही बेसुध पड़ी रह गयी. बाहर आकर मैंने बाथरूम में जाकर अपने लंड को साफ किया और बिना कपड़े पहने ही रमा दीदी के रूम में घुस गया. टाइट गान्ड की ज़बरदस्ती की रगड़ और वियाग्रा के असर से मेरे लंड में भी थोड़ा सा दर्द जैसा था. लेकिन उसकी अच्छी-खासी कसरत होने से वो अभी भी ढीला नहीं हुआ था.

रमा दीदी एक चादर ओढ़े मेरा इंतजार कर रही थी. गेट बंद कर के मैंने उसकी चादर हटाई...वाउ! उसके बदन पर कपड़े के नाम पर एक रेशा तक नहीं था. मैं उनके साथ लेट गया, और उसके नंगे तपते बदन को अपनी कामुक हरकतों से और ज़्यादा पिघलने लगा.

जब रमा दीदी लंड लेने के लिए उतावली दिखने लगी, तो मैंने बड़े प्यार से अपना डंडे जैसा लंड जो अभी भी दवा के असर में था, उसकी रसीली चूत में धीरे-2 डालने लगा. लंड फूल कर इतना कड़क हो चुका था, की दीदी की गीली चूत आधे में ही फड़फड़ाने लगी.

रमा के मुँह से कराह निकलने लगी. मैं आधे लंड से ही रमा की तमन्ना पूर्ति करता रहा और जितनी निर्दयता से मैंने भाभी की गान्ड फाड़ी थी. उसके ठीक उलट मैं रमा दीदी के साथ बड़े इतमीनान के साथ चुदाई करने लगा. अब मेरी कोशिश रहती थी, कि मैं अपनी रमा दीदी को आधे लंड से ही संतुष्ट करूँ जिससे उसके कुंवारे पन पर ज़्यादा फ़र्क ना पड़े. ये भाभी का ही सुझाव था हम दोनों के लिए. कभी-कभी तो बिना अंदर डाले ही हम दोनों संतुष्ट हो जाते थे.

आज भी बड़े सॉफ्ट तरीके से चोदकर मैं रमा दीदी को संतुष्ट करना चाहता था, लेकिन दवा का असर, ऐसा ना करने पर मजबूर कर रहा था., और ना चाहते हुए भी जब वो मेरा सहयोग करने लगी तो मैंने उन्हें थोड़ा ज़ोर से रगड़ दिया. रमा दीदी तो इस तरह का वाइल्ड सेक्स पाकर मस्त हो गयी, देर रात तक हम दोनों एक दूसरे में गूँथे रहे, और फिर मैं उसके बगल में ही सो गया.

दूसरे दिन सुबह मेरे कालेज जाने तक भी कामिनी भाभी अपने कमरे से बाहर नहीं आई तो मैं एक नज़र उनको देखने चला गया. वो अभी भी सो रही थी. लेकिन अब उनके बदन पर व्यवस्थित कपड़े थे. फिर मैंने सोचा की कालेज से लौट कर ही बात करता हूँ. और मैं वहाँ से अपने कालेज चला गया. दोपहर को कालेज से वापस आने के बाद देखा, तो कामिनी भाभी अभी भी अपने कमरे में ही थी. मैं सीधा उनके पास चला गया.

कामिनी भाभी मुझे देख कर सुबकने लगी. और शिकायत करते हुए बोली - मेरे साथ तुमने ऐसा क्यों किया अंकुश?? तुमने कौन से जन्म की दुश्मनी निकाली मेरे साथ??

मैंने कहा – सॉरी कामिनी भाभी, मैं आपकी सुन्दर सी मदमस्त गान्ड देख कर अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाया. और वो सब मुझसे हो गया जो में कभी नहीं करना चाहता था. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए. अब मैं आज आपसे एक वादा करता हूँ. कि आज के बाद मैं आपको कभी हाथ भी नहीं लगाऊंगा. कामिनी भाभी हड़बड़ाते हुए कुछ बोलना चाहती थी, कि मैंने हाथ का इशारा कर के उन्हें रोक दिया और बोला.

मैं - आपको कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है. अब मेरे लिए यही सज़ा है. कि मैं आज के बाद अपनी प्यारी और परी जैसी सुन्दर कामिनी भाभी के पास भी ना फटकूं. हो सके तो मुझे माफ़ कर देना.

उसके बाद मैंने उनके जवाब का भी इंतजार नहीं किया और उनके पास से उठ कर चला आया. रमा दीदी छिपकर हमारी बातें सुन रही थी. मुझे बाहर आते देख वो किचन में चली गयी और मुझे इशारे से अपने पास बुलाकर हँसते हुए बोली.

रमा दीदी – वाह भाई. क्या सबक सिखाया है तूने कामिनी भाभी को?? मज़ा आ गया.. साँप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी, इस बात पर हम दोनों ही ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे.
 
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