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UPDATE 69
हॉल के एक-एक एंगल पर मैंने पावरफुल मिनी कैमरा फिट कर दिए, जिससे यहाँ का हर एक मूव्मेंट पता लग सके. ये कमरे कोई मामूली कैमरे नहीं थे, ये स्पाई कमरे थे जिनका लिंक डालकर नेट के द्वारा कहीं से भी एक्सेस किया जा सकता था. सारा काम निपटाकर मैं फिर से भानु के पास आया. उसे होश में लाने से पहले मैं अपने असली रूप में आ गया था. होश में आते ही भानु मुझे अपने सामने देख कर बुरी तरह से चौंक पड़ा.
भानु - अंकुश तुउउम्म्म्मममम…????
मैं - हां मैं भानु.. मैं ही जोसेफ हूँ… और मैंने ही उस्मान और कामिनी के अड्डे को तबाह करवाया था.
भानु अभी भी हैरत भरी नज़रों से मुझे देख रहा था. वो समझ गया कि अब उसका खेल खतम है, इतना सब कुछ होने के बाद अब ये मुझे नहीं छोड़ेगा. लेकिन ये भी सोचने पर मजबूर हो गया कि मैं उसे यहाँ जीवित क्यों लाया हूँ??
ये विचार आते ही भानु बोला – लेकिन तुमने अभी तक मुझे मारा क्यों नहीं अंकुश??
मैं – तू मुझे अभी तक समझा ही नहीं भानु.. मैं बार-बार कहता रहा, एक बार फिर कहता हूँ.. मेरा अभी भी तेरे साथ कोई बैर नहीं है.. तुझे जिसने भी यूज़ किया एक मोहरे की तरह यूज़ किया वो भी ग़लत कामों के लिए. लेकिन मैं तुझे बचने का एक मौका और देता हूँ… अगर तू मेरा काम करे तो वादा करता हूँ, मैं तुझे हमेशा के लिए बचा लूँगा. तेरा पुलिस भी कुछ नहीं बिगाड़ सकेगी.
भानु मुँह बाए मेरी बात सुन रहा था. उसे ये विश्वास ही नहीं हो पा रहा था, कि मैं अभी भी उसे बचना चाहता हूँ.
मैं – क्या सोच रहे हो भानु भैया?? सच मानो, मेरा आज भी यही मानना है, कि एक अच्छे पड़ोसी की तरह हमारे संबंध फिर से सुधर जायें, लेकिन हर बार तुमने मेरे साथ दगा की. वो भी ग़लत लोगों के साथ मिलकर. अब एक अच्छा काम करके अपने को बचा लो. वरना तुम तो जानते ही हो मेरे पास ऐसा मसाला है, जिससे तुम तो जेल की हवा खाओगे ही, तुम्हारे खानदान की इज़्ज़त दो कौड़ी की नहीं रहेगी. लोग थूकेंगे ठाकुर सूर्य प्रताप के मुँह पर. सोचो अगर मैं तुमसे बदला ही लेना चाहता तो क्या अब तक इंतजार करता. तुम्हारे अंडरग्राउंड होते ही ये सारे वीडियो, सारे सबूत सार्वजनिक कर चुका होता.
भानु को कहीं ना कहीं मेरी बात जायज़ लगाने लगी और वो बोला – तो अंकुश.. अब मुझसे तुम क्या चाहते हो??
मैंने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा – मैं चाहता हूँ, तुम अपने कुछ आदमी लेकर श्वेता और उसकी फ्रेंड हेमा को पकड़ कर यहीं इसी जगह लेकर आओ, जिससे मैं उसे उसी तरह की सज़ा दे सकूँ जैसी उसने मुझे दी थी. तुम उन दोनों को ड्रग्स देकर ज़्यादा से ज़्यादा आदमियों के साथ उन दोनों को इतना चोदो कि वो मौत के लिए तड़पें. मेरी बात सुनकर भानु की आँखें फटी की फटी रह गयी.
मैंने फिर कहा – ऐसे क्यों आँखें फाड़कर देख रहे हो?? जब यही सब उसने मेरे साथ किया था तब तुम्हें बुरा नहीं लगा?? सच मानो भानु… ये लोग किसी के सगे नहीं होते. क्या तुम्हारे बचकर भागने के बाद श्वेता ने एक बार भी तुम्हें खोजने या पुलिस से बचाने की कोशिश की?? नहीं ना??? इनके लिए तुम हमेशा ही एक मोहरा रहे हो और रहोगे… इससे ज़्यादा कुछ नहीं.
भानु पर मेरी बात का सही असर हुआ, वो अब मुझसे सहमत होता नज़र आ रहा था. कुछ देर चुप रहने के बाद बोला.
भानु – अंकुश.. मैं अगर तुम्हारा ये काम कर दूं तो उसके बाद तुम मुझे बचा लोगे ना??
मैं – ये एक मर्द की ज़बान है… वादा करता हूँ, तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होगा… और तुम अपनी आराम की जिंदगी अपने परिवार के साथ जी सकोगे.
भानु – इस बीच अगर पुलिस ने मुझे धर लिया तो?
मैं – आज के बाद पुलिस का कोई भी आदमी तुम पर हाथ नहीं डालेगा… ये मेरा वादा है. अब चाहो तो तुम यहीं आराम से रात गुज़ार सकते हो या अपने घर जाकर बीवी के साथ सुकून से मज़े कर सकते हो… जैसे ही तुम उन्हें यहाँ ले आओगे, मुझे एक कॉल ज़रूर कर देना.
भानु – ठीक है मैं तुम्हारा ये काम ज़रूर करूँगा… अब मुझे मेरे घर छोड़ दो… आज की रात मैं अपनी बीवी के साथ सुकून से गुज़ारना चाहता हूँ. वो बेचारी बहुत दिनों से मेरे बिना अकेली ही है.
मैं – वो भी बेचारी तुम्हारे ग़लत कामों का फल भोग रही है… ज़रा सोचो इन सब कामों से तुमने क्या मिला? खैर कोई बात नहीं देर से ही सही तुम्हें मेरी बात समझ तो आई. चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक छोड़ देता हूँ.
अगले दिन भानु अपने आदमियों को इकट्ठा करता रहा, तीसरे रोज़ दिन के कोई 11 बजे उसका फोन आया और उसने बताया कि वो उन दोनों को उठा लाया है.
मैं - ठीक है, उन दोनों को ड्रग्स के हेवी डोज देकर अपने आदमियों के साथ उन दोनों की जमकर चुदाई शुरू करो…
भानु उन्हें ड्रग्स के इंजेक्शन देने के बाद होश में लाया. जब वो ड्रग के असर में आने लगी तभी उसने अपने आदमियों को उनके ऊपर छोड़ दिया. मैंने अपने डिवाइस से कमरों का लिंक डालकर वहाँ का सारा आँखों देखा हाल देखने लगा. सीन देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गये. भानु और उसके आदमी जो उसके समेत 8 लोग थे, दारू के नशे में दे दनादन उन दोनों की चुदाई कर रहे थे.
श्वेता और हेमा का गैंगबैंग देख कर मज़ा आ गया. एक-एक आदमी दोनों की चूत में लंड डाले था, एक-एक उनकी गान्ड में, एक-एक ने उनके मुँह में लंड डाला हुआ था तो बाकी के दो उनकी चुचियों को मीँजने में लगे हुए थे. ड्रग के नशे में धुत्त श्वेता और हेमा दोनों किन्हीं पेशेवर रंडियों की तरह उन आठों लोगों के साथ पूरी मस्त होकर चुद रही थी. मैंने अपने मोबाइल से श्वेता के पति पुष्पराज को फोन लगाया. कॉल कनेक्ट होते ही उसने कहा.
पुष्पराज – हेलो कौन??
मैंने टपोरी वाली भाषा में कहा – तुम्हारी बीवी श्वेता इस समय कहाँ है पुष्पराज??
पुष्पराज – क्यों?? तुम कौन हो?? और मेरी बीवी के बारे में क्यों पूछ रहे हो???
मैं – लगता है तुम्हें भी अब तुम्हारी बीवी श्वेता में कोई इंट्रेस्ट नहीं रहा.. ठीक है भाई चुदने दो साली को किसी के भी साथ हमें क्या?? मैंने सोचा शायद तुम उसे किसी और के साथ चुदते हुए नहीं देखना चाहोगे इसलिए बोल दिया…
पुष्पराज – कौन हो तुम और ये क्या बकवास कर रहे हो?? मेरी बीवी मेरे घर पर है…
मैं – हाहाहा… अच्छा… तो एक काम करो. एचटीटीपी\\व्व्व.****** इस लिंक को अपने डिवाइस में टाइप करके कनेक्ट कर लो… लाइव शो देखने को मिल जाएगा.
ये कहकर मैंने कॉल कट कर दी. कोई 5 मिनट के बाद ही पुष्पराज का दोबारा फोन आ गया. वो गुस्से से पागल हो रहा था.
पुष्पराज – ये सब कहाँ चल रहा है????
मैं – तेरे ही फार्म हाउस में… जा जाकर तू भी इस खेल का मज़ा ले पुष्पराज…
मेरा प्लान कामयाब रहा… पुष्पराज गुस्से में अँधा हो चुका था. उसने अपनी माउज़र ली और अकेले ही गाड़ी ड्राइव करके आँधी-तूफान की तरह दौड़ा कर अपने फार्म हाउस जा पहुँचा. भड़ाक से गेट खोलते ही, उसकी आँखों के सामने अपनी बीवी श्वेता और उसकी दोस्त हेमा को एक साथ 4-4 लोगों के साथ चुदते देखकर पुष्पराज पागल हो उठा. सीन ही इतना आपत्तिजनक था, कोई भी सभ्य समाज का व्यक्ति इस तरह अपनी बीवी के साथ गैंगबैंग होते देख सहन नहीं कर सकता था…
दरवाजे की आवाज़ सुनकर भानु समेत उन लोगों का ध्यान दरवाजे की तरफ गया जहाँ पुष्पराज को गन हाथ में लिए खड़ा देख कर उनके होश उड़ गये. इससे पहले कि वो लोग अपना चुदाई अभियान बंद करते. पुष्पराज ने अपना मानसिक संतुलन खोते हुए उन पर गोलियों की बरसात कर दी. अंदर चुदाई अभियान में लिप्त 10 के 10 लोगों को उसने गोलियों से उड़ा दिया और फिर लास्ट बची एक गोली से उसने गन अपनी कनपटी पर रख कर खुद को भी खतम कर लिया… ये सारा घटनाक्रम मैं अपने ऑफिस में बैठा देख रहा था.
मैं अभी अपना सिस्टम बंद करने ही वाला था कि वहाँ पड़े 11 निर्जीव मानव शरीरों में से एक के शरीर में हरकत हुई. उनमें से एक आदमी कराहते हुए अपने सिर को पकड़े खड़ा होने की कोशिश कर रहा था. शायद गोली निशाने से चूक गयी थी, उसके सिर के बीच में न लगकर उसके सिर के दायें तरफ घाव बनती हुई निकल गयी थी. वो किसी शराबी की तरह लहराता हुआ जैसे तैसे करके खड़ा हुआ और फिर जैसे ही उसका मुँह कैमरे के सामने आया. मैं बुरी तरह चौंक पड़ा. ये कोई और नहीं बल्कि भानु ही था. किस्मत ने एक बार फिर भानु का साथ दिया और गोली ठीक निशाने पर नहीं लगी थी, लेकिन सिर से निकलने वाले खून को देखकर तो ऐसा लग रहा था कि घाव काफ़ी गहरा होना चाहिए. साला भानु भी बड़ा जीवट प्राणी था. भानु अपने गोली के घाव को कसके दबाए हुए वो खड़ा हुआ और एक बार वहाँ पड़े सभी निर्जीव लाशों को देखा जिनमें कहीं भी, किसी में भी कोई हलचल दिखाई नहीं दी. फिर भानु ने एक कोने में पड़े अपने कपड़े उठाए और अपनी हिम्मत बटोरकर किसी तरह उस हॉल से बाहर निकल गया. अब भानु मेरी नज़रों से ओझल हो चुका था. इसी के साथ ही मैंने भी अपना सिस्टम बंद किया और सब समान समेट कर अपना बैग पैक कर लिया.
मैंने कृष्णा भैया को पहले ही कॉल कर दिया था, तो उन्होंने पूरी पुलिस फोर्स को ले जाकर फार्म हाउस अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस के मुताबिक सारा मामला एकदम आईने की तरह साफ था. सेक्स की भूखी औरतों ने खुद ही उन लोगों के साथ सामूहिक सेक्स किया. किसी तरह श्वेता के पति को इस बात का पता चल गया और उसने मौकाए वारदात पर पहुँचकर सबको गोली से उड़ा दिया, और ज़िल्लत के कारण उसने खुद को भी गोली मार ली.
इस तरह लगभग सारे गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुँचाकर आज मुझे सुकून मिला था. प्राची का रेप केस यहाँ तक पहुँचेगा ये किसी ने भी नहीं सोचा होगा, लेकिन उसकी वजह से ये शहर अब अपराध मुक्त था. जो यहाँ की पुलिस के लिए एक बड़ी राहत की बात थी.
भानु का क्या हुआ वो बच पाया या नहीं इस बात की मुझे कोई फिकर नहीं थी, क्योंकि अब वो नितांत अकेला था और अपनी जिंदगी सार्वजनिक तौर पर नहीं जी सकता था. उसकी तरफ से बेफिक्र होकर अब जल्द से जल्द मैं अपने घर पहुँचना चाहता था. अपनी इस कामयाबी को मैं अपनी भाभी के साथ मिलकर सेलिब्रेट करना चाहता था, जिनसे मुझे हर मुश्किल से लड़ने की प्रेरणा मिलती रहती थी.
शहर की बुराइयों के अंतिम बीज की समाप्ति होने तक का सारा आँखों देखा हाल अपने सिस्टम पर देखने के बाद मैंने अपने ऑफिस को बंद किया. घर पहुँचकर अपना समान पैक करने से पहले मैंने छाया को कॉल किया और सारी बातों से अवगत कराया. वो ये सब सुनकर ख़ुशी के मारे फोन पर ही चीखने लगी.
फिर जब मैंने छाया को बताया कि मैं अभी बस घर निकलने ही वाला हूँ, तो वो चहकते हुए बोली – अरे वाह! अकेले-अकेले सेलिब्रेट करने का इरादा है क्या?? मुझे शामिल नहीं करोगे??
मैंने फ़ौरन कहा – क्यों नहीं छाया… लेकिन क्या तुम अभी 15 मिनट में यहाँ आ सकती हो?
छाया – अंकुश तुम गाड़ी लेकर यहीं आ जाओ ना... मैं तुम्हें रेडी मिलूंगी. उनको खबर कर देती हूँ, यहीं से साथ निकलते हैं.
मैंने अपना बैग उठाया और मधु आंटी को बोलकर गाड़ी कृष्णा भैया के आवास की तरफ दौड़ा दी. वहाँ मुझे छाया एकदम रेडी मिली, फिर हम दोनों घर की ओर निकल पड़े. घर पहुँचते- पहुँचते हमें काफ़ी अंधेरा हो गया था. गाड़ी खड़ी करके जैसे ही घर के अंदर पहुँचे, आँगन में बैठी रुचि जो अपने छोटे भाई सुवंश के साथ चारपाई पर खेल रही थी, हमें देखते ही हमेशा की तरह चीखती हुई मेरी तरफ दौड़ी.
रुचि – चाचू!!! चाची!!!
रुचि उछल कर मेरे गले से लटक गयी. छाया ने मेरी गोद में लटकी रुचि के गाल को चूमकर उसे प्यार दिया और फिर वो निशा के कमरे की तरफ बढ़ गयी.
मैंने अपने हाथ रुचि की पीठ पर कसते हुए उसे अपने सीने में कस लिया और उसके दोनों कोमल गालों पर किस करके बोला – कैसा है मेरा बेटा??
रुचि – मैं तो ठीक हूँ, लेकिन देखो ना चाचू ये भैया मुझे बहुत परेशान करता है.
मैं उसे गोद में लिए चारपाई पर खेल रहे सुवंश के पास आया और बोला – वो तो बेचारा चुप चाप पड़ा खेल रहा है, फिर क्या परेशान किया तुम्हें इसने??
रुचि – ये मम्मा.. मम्मा.. तो बोलता है, लेकिन दीदी… दीदी… नहीं कहता…
रुचि की भोली भली बातें सुनकर मुझे बड़ा प्यार आया और उसके माथे पर एक किस करके कहा – बेटा अभी भैया छोटा है ना… कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा आपको इसके मुँह से दीदी सुनने के लिए.
फिर मैंने रुचि को नीचे उतार कर सुवंश को अपनी गोद में उठा लिया. मैंने जैसे ही उसके गाल पर अपना गाल सटाया, उसने मुँह घुमाकर मेरे गाल पर किस कर लिया. ये नज़ारा थोड़ी दूर खड़ी मोहिनी भाभी देख रही थी, जो रुचि की आवाज़ सुनकर रसोई से बाहर निकल आई थी और मुझे बच्चों के साथ खेलते हुए देख रही थी.
मोहिनी भाभी मेरे पास आकर धीरे से बोली – देखा कैसा अपने बाप को झट से पहचान लेता है ये नटखट सुवंश?? रुचि के पापा की तो गोद में भी मुश्किल से जाता है.
मैं बस मोहिनी भाभी को देखता ही रह गया. फिर मैंने अपने बेटे के माथे पर एक किस करके सुवंश को मोहिनी भाभी की गोद में दे दिया.
फिर जैसे मोहिनी भाभी को कुछ याद आया हो, तो निशा को आवाज़ देकर बोली – अरे निशा जल्दी से आरती की थाली तो सज़ा. देख अपना अर्जुन महाभारत का युद्ध जीतकर आया है.
मैंने कहा – क्या कहा भाभी आपने?? अर्जुन?? और कौन से महाभारत की बात कर रही हो?
मोहिनी भाभी – मुझे छाया ने निकलने से पहले फोन कर दिया था. तुमने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि वो सबके सब उसमें फँस गये और अपने आप ही सब खतम हो गये.
निशा आरती की थाली ले आई. साथ में छाया भी, दीपक जलाकर निशा ने मेरे माथे पर विजय तिलक किया और मेरी आरती करने लगी.
मैं – लेकिन भाभी इसमें आपका भी तो बड़ा योगदान रहा है. अगर आप प्रेरित ना करती तो मैं तो सब छोड़ ही चुका था. एक तरह से आप इस युद्ध की कृष्ण हैं.
मोहिनी भाभी – नहीं इस महाभारत के अर्जुन भी तुम हो और कृष्ण भी. प्रेरणा देने वाले तो और भी बहुत थे अर्जुन को, जिसमें साथ दिया था वासुदेव कृष्ण ने. पर यहाँ तो तुम अकेले ही थे.
फिर मोहिनी भाभी ने सुवंश को रुचि की गोद में देकर निशा के हाथ से थाली लेकर मुस्कराते हुए बोली – कुछ रिश्ता मेरा भी है तुम्हारी आरती उतारने का…
ये कहकर मोहिनी भाभी ने भी मुझे तिलक किया और मेरी आरती उतारने लगी. डिनर के समय बड़े भैया और पापा भी आ गये. सब मिलकर डिनर करने लगे. तभी…
मोहिनी भाभी – हां तो कृष्णा-अर्जुन अब बताओ अपने आख़िरी युद्ध की कथा..
सब लोग भाभी की तरफ देखने लगे, उन्होंने हँसते हुए कहा – अरे आप लोग ऐसे क्या देख रहे हो मेरी ओर?? आप खुद ही सुन लो कि मैंने अंकुश को ये नाम क्यों दिया है.
फिर मैंने सबको शुरू से लेकर अंत तक का सारा वृतांत कह सुनाया. खाली चुदाई की बातें एस्केप कर के. मोहिनी भाभी और छाया के अलावा बाकी लोग मुँह फाड़े मेरी बातें सुन रहे थे और वो दोनों मंद-मंद मुस्करा रही थी.
अंत में मोहिनी भाभी बोली – क्यों पापा?? मैंने सही नामकरण किया है ना?
पापा और भैया प्रशंसा भरी नज़रों से मुझे देख रहे थे. उनका सीना अपने बेटे और भाई के कारनामों की वजह से गर्व से दुगना हो रहा था.
फिर पापा बोले – मोहिनी बेटा लाओ, दूध भी दे ही दो. सोते हैं… सुबह जल्दी पंचायत के लिए भी जाना है तुम्हें भी.
मैं – कैसी पंचायत पापा?
मोहिनी भाभी – वो मैं तुम्हें बाद में बताती हूँ…
निशा ने लाकर सबको दूध दिया, जिसे पीकर वो दोनों सोने चले गये और भाभी मुझे लेकर मेरे कमरे में आ गयी और कल होने वाली पंचायत के बारे में बताने लगी. कुछ देर बाद निशा और छाया भी वहीं आ गयी और हम चारों मिलकर देर रात तक बातों में लगे रहे. मोहिनी भाभी ने मेरा और छाया के रिश्ते का टॉपिक छेड़ दिया, और बातों-बातों में हमें बताना पड़ा कि हमारी दोस्ती किस लेवल तक की थी. मोहिनी भाभी को ये पता लगना ही था कि मैं और छाया पहले ही चुदाई का मज़ा लूटते रहे थे कि फ़ौरन चुटकी लेते हुए बोली.
मोहिनी भाभी - तुम्हारे अंदर तनिक भी लाज शर्म है कि नहीं अंकुश?? अपने सगे भाई और वो भी पुलिस का इतना बड़ा ऑफिसर उसे तुमने अपनी झूठन पकड़ा दी??
उनकी ये बात सुनकर छाया ने शर्म से अपना सिर झुका लिया. वहीं मैंने मोहिनी भाभी को अपनी गोद में खींच कर उनके होंठों को चूमते हुए कहा.
मैं - अच्छा देवर की बड़ी फिकर हो गयी आपको?? और अपने पति का तनिक भी ख्याल नहीं आया??
मेरी इस बात पर निशा समेत हम तीनों खिल-खिलाकर हँसने लगे. ये देखकर छाया की सारी शंकाएँ दूर हो गयी और वो भी हमारे साथ शामिल हो गयी. निशा प्रेग्नेन्सी की वजह से कुछ टॉनिक लेती थी, जिसके असर से उसे जल्दी नींद आने लगी, तो उसे मोहिनी भाभी ने रुचि के कमरे में सोने भेज दिया.
फिर मोहिनी भाभी छाया की कमर में चिकोटी काटते हुए बोली- क्यों छुटकी क्या कहती है?? जीत की ख़ुशी मनाई जाए?? हो जाए एक बार थ्रीसम अंकुश के साथ??
झेंपते हुए छाया ने भी हामी भर दी. फिर क्या था वो दोनों घोड़ियाँ एक साथ मेरे ऊपर टूट पड़ी.
दूसरे दिन सुबह 9 बजे से ही पंचायत घर पर लोग जमा होने लगे. मामला था – पूर्व सरपंच रामसिंह के बेटे का चक्कर दुलारी के टोले की एक लड़की से चल रहा था. बहनचोद लड़का भी बाप के पद चिन्हों पर चल रहा है.
हमारे कालेज में एक कहावत थी – “अनाड़ी का चोदना, चूत का सत्यानाश”
लड़की पेट से हो गयी. जब ये बात दुलारी को पता लगी, वो तो रामसिंह से खाए हुए धोखे की वजह से खार खाए बैठी थी, फिर क्या था, उछाल दी उसने ये बात पूरे गांव में. अब लड़का था शादीशुदा. लेकिन दुलारी ने हाथ रख दिया लड़की के परिवार वालों पर, कहने लगे जी इसे लड़की के साथ शादी करनी पड़ेगी. उधर लड़का सीधा पलट गया.
कहने लगा – ये झूठा इल्जाम लगा रही है मुझे बदनाम करने के लिए. मेरा इसके साथ कोई लेना देना नहीं है.
पंचायत घर ज़्यादा बड़ा नहीं था. हां उसके सामने का मैदान ज़रूर अच्छा ख़ासा था, जिसमें गांव के ज़्यादातर लोग जमा थे. दो कमरों के आगे के बरामदा में सरपंच के लिए एक कुर्सी डाल दी गयी थी, जिसपर मोहिनी भाभी बैठ गयी. मैं उनके बाजू में किसी सेवक की तरह खड़ा हो गया. सामने एक बड़े से सोफे पर पापा, चाचाओं और रामसिंह समेत गांव के और भी लोग बैठे थे. दोनों पक्षों की बातें सुनी गयी, जो लगभग वही थी जो पहले से ही वो कहते आ रहे थे.
मोहिनी भाभी ने धीमी आवाज़ में कहा – अंकुश… तुम क्या सोचते हो? क्या फ़ैसला होना चाहिए इसका?
मैं – अभी तक दोनों तरफ से यही साफ नहीं है, कि ग़लती किसकी है तो फ़ैसला किस बात का? और कैसे होगा?
मोहिनी भाभी – तो अब क्या करें? ये तो बड़ा जटिल मामला है.
मैंने कहा – बस आप देखती जाओ मेरा कमाल…
ये कह कर मैंने ऊँची आवाज़ में कहा – सरपंच चाहती हैं कि वो एक बार दोनों तरफ से अलग-अलग बात करके सच्चाई पता की जाए. उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है. तो पहले चाचा रामसिंह जी और उनके बेटे से बात होगी, उसके बाद लड़की के परिवार वालों के साथ.
मेरी बात सुनकर रामसिंह और उनका लड़का उठकर हमारे पास आए, उन्हें लेकर मैं और मोहिनी भाभी एक कमरे में चले गये.
मैंने लड़के से कहा – हां भाई… अब हमें तो तुम सच-सच बताओ बात क्या है??
लड़का – अरे भाई वकील साहब.. वो साली मेरे ऊपर ग़लत-सलत आरोप मढ़ रही है. मैं बीवी बच्चे वाला आदमी भला उस साली छिनाल के पीछे पड़ूँगा??
मैं – देख भाई, आज के जमाने में इस तरह की बातें नहीं होती. वो जमाने गये जो सारे मसले पंचायत में ही हल होते थे. अभी तो बात अपने ही हाथ में है, अगर ये पुलिस या कोर्ट तक पहुँच गयी, तो दोनों की मेडिकल रिपोर्ट निकाली जाएगी. जिसमें डीएनए से तुरंत पता चल जाएगा कि उसके पेट में पल रहा बच्चा किसका है?
लड़का – हां!! ऐसा भी कहीं होता है!!! कि जाँच से उसके बीज का पता चल जाए?
मैं – बिल्कुल… और अगर वो तेरा ही निकला तो फिर सोच ले कोर्ट जो फ़ैसला करेगा वो तुम लोगों को मानना ही पड़ेगा, इसलिए भलाई इसी में है कि जो सच है वो बता दे. हम कुछ ले देकर बात को रफ़ा दफ़ा कर सकते हैं. रामसिंह अपने लड़के की तरफ देखने लगा.
लड़का अपनी गर्दन झुकाए बोला – हां… वो ग़लती से हो गया.. पर इसमें मेरी सारी ग़लती थोड़ी ना है. वो भी तो इतने दिनों से मज़े कर रही थी मेरे साथ.
मैंने रामसिंह से कहा – देखो चाचा.. घर गांव की बात है… किसी ग़रीब की लड़की का घर बस जाएगा और आपकी भी बात बनी रहेगी. मेरे विचार से आप उसकी लड़की की शादी का जिम्मा ले लो. उसी की बिरादरी में कोई अच्छा सा लड़का देख कर उसकी शादी कर दो. खर्चा आप उठा लेना.
रामसिंह ने फ़ौरन मेरी बात को मान लिया. फिर हमने लड़की के परिवार को अकेले में बुलाया. साथ में दुलारी भी आई और आते ही शुरू हो गयी अपनी राम कहानी लेकर.
मैंने दुलारी को शांत करते हुए समझाया – देखो भाभी… मैं जानता हूँ, ये बच्चा उसी लड़के का है. पर तुम खुद सोचो… एक तो जात बिरादरी का मामला, दूसरा अगर उसको ज़बरदस्ती शादी के लिए कहा भी तो कोर्ट एक पत्नी होते हुए दूसरी की इज़ाज़त कभी नहीं देता है. जब तक कि पहली वाली से तलाक़ ना हो. मान लो तलाक़ भी दिलवा दी… तो पहली को घर से तो निकाल नहीं सकता. अब तुम खुद सोचो, कि तुम्हारे ही घर में तुम्हारी ही सौत लाकर बिठा दी जाए, तो क्या तुम उसे अपना लोगी? नहीं ना??? तो अब तुम खुद सोचो, क्या वो लड़की ऐसे में खुश रह पाएगी? मेरी राय है, कि हम कुछ भी करके उसकी शादी का खर्चा रामसिंह से दिलवा देंगे, बस तुम लोग कोई अच्छा सा लड़का उसके लिए तलाश कर लो.
मेरी बात से लड़की के माँ-बाप राज़ी दिखाई देने लगे लेकिन दुलारी अभी भी भड़की हुई लग रही थी.
मैं दुलारी को अकेले एक कोने में ले गया और सबकी नज़र बचाकर उसकी गान्ड को मसलते हुए कहा – भाभी ये मसला जाति दुश्मनी निकालने का नहीं है. बात बढ़ाने से लड़की की बदनामी होगी. अभी तो बात गांव तक ही सीमित है. इलाक़े में फैल गयी तो कोई भला आदमी शादी भी नहीं करेगा उसके साथ. उस लड़की का घर बस जाने दो. कोई अच्छा सा घर तलाश करो, दहेज की चिंता मत करना. रामसिंह से हम फिर कभी बदला ले लेंगे, जिसमें मैं आपका साथ दूँगा.
इस तरह दुलारी को पटा कर हम बाहर आए और सभी लोगों के सामने ऊँची आवाज़ में मैंने कहा – भाइयों… ये हमारे गांव और समाज की इज़्ज़त का मामला है. अब इसमें रामसिंह के बेटे की ग़लती है या वो लड़की ग़लत बयान बाज़ी कर रही है, हम लोग इसी के पीछे पड़े रहे तो इससे हमारे गांव की बदनामी आस-पास के इलाक़े में होगी, जो हम सबके लिए शर्म की बात होगी. इसलिए सच्चाई जो भी हो हम उसपर बहस ना करते हुए पंचायत ये फ़ैसला लेती है कि लड़की के लिए उचित वर तलाश करके उसकी शीघ्र शादी कर दी जाए. दहेज और शादी में और जो भी खर्चा आएगा उसे हमारे पूर्व सरपंच श्री रामसिंह जी अपनी तरफ से उठाएंगे. अब आप लोग बताइए क्या ये सही फ़ैसला है या ग़लत??
ज़्यादातर समझदार लोगों ने इस बात का समर्थन किया और दोनों पक्षों की रज़ामंदी लेकर पंचायत खतम की..
घर आकर मोहिनी भाभी ने मेरी बहुत तारीफ़ की और बोली – अंकुश… सच में तुमने आज मेरा दिल जीत लिया. वाह!!! क्या फ़ैसला किया है?? मैं ये कभी नहीं कर पाती.
मैंने मोहिनी भाभी के दोनों चुतड़ों को अपने हाथों में कसकर अपने सीने से सटाते हुए कहा – कोरी तारीफ से काम नहीं चलेगा सरपंच साहिबा आज तो कुछ स्पेशल गिफ्ट देना होगा आपको…
मोहिनी भाभी ने मेरा गाल काट लिया और मेरे होंठों को चूमकर बोली – सब कुछ तुम्हारा है अंकुश… जो चाहिए ले लो…
मैंने उनकी रूई जैसी गुदगुदी गान्ड की दरार में उंगली डालते हुए कहा – आज इसका मन है.. दोगी क्या??
अपने चुतड़ों को कसकर भींचते हुए मोहिनी भाभी ने मेरी उंगली को अपनी दरार में जब्त करते हुए कहा – डाल लो अंकुश… एक दिन सारा काम निशा को ही करना पड़ेगा… मुझे क्या???
मैंने कसकर भाभी की चूत को अपने लंड पर दबाते हुए कहा – मज़ाक कर रहा था… अपनी जान को दर्द हो वो काम में अब कभी नहीं करूँगा…
मोहिनी भाभी मेरे होंठों पर टूट पड़ी. कुछ देर चूसकर अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर रगड़ते हुए बोली – तुम्हारे लिए हर दर्द मंजूर है अंकुश… बस हुक्म करो…
मैं - रहने दीजिए भाभी… वरना आपके इस मदमस्त गान्ड के चक्कर में सारे दिन निशा मुझे गालियाँ देगी…
ये कह कर मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से ही भाभी की एक चुचि को दाँतों में दबाकर काट लिया.
मोहिनी भाभी – आअहह… अंकुश… बदमाश!! अब ये क्या है?? अब छोड़ो… कोई आ जाएगा… चौड़े में खड़े हैं.. दिन का मामला है.
मैंने मोहिनी भाभी को नीचे उतारते हुए कहा – ठीक है… तो आज दोपहर को थ्रीसम करते हैं… अपनी चूत को चिकनी करके रखना…
भाभी ने मेरे लंड को मसलते हुए कहा – पक्का… एक दम चिकनी चूत मिलेगी तुम्हें… जी भर कर चाटना… खूब रस पिलाऊंगी तुम्हें आज…
हमारी ये रासलीला निशा जाने कब से देख रही थी. अपनी चूत को भींचते हुए बोली.
निशा – चलो दीदी… दोनों एक साथ अपनी-अपनी चूत को चिकनी करते हैं.
भाभी ने कपड़ों के ऊपर से ही निशा की चूत मसलते हुए कहा – बड़ा जल्दी है चुसवाने की.. हां?? आज अंकुश नहीं मैं तेरा रस पीऊंगी… बोल निशा की बच्ची, पिलाएगी ना??
निशा – हाय दीदी, सच में… आआहह… सुनकर ही गीली हो गयी मैं तो. वैसे भी अंकुश अब जमके चुदाई नहीं करते मेरी, तो फिर आपको ही लेना पड़ेगा अंकुश का…
ये कहकर निशा भाभी के होंठ चूसने लगी. वो दोनों एक दूसरे की चूत को मसलते हुए किस में जुट गयी. मैं धीरे से वहाँ से खिसक कर चाची के घर की तरफ निकाल लिया.