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Incest Mera Pyara Devar - Ankush

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aidenabhishek

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UPDATE 69​

हॉल के एक-एक एंगल पर मैंने पावरफुल मिनी कैमरा फिट कर दिए, जिससे यहाँ का हर एक मूव्मेंट पता लग सके. ये कमरे कोई मामूली कैमरे नहीं थे, ये स्पाई कमरे थे जिनका लिंक डालकर नेट के द्वारा कहीं से भी एक्सेस किया जा सकता था. सारा काम निपटाकर मैं फिर से भानु के पास आया. उसे होश में लाने से पहले मैं अपने असली रूप में आ गया था. होश में आते ही भानु मुझे अपने सामने देख कर बुरी तरह से चौंक पड़ा.

भानु - अंकुश तुउउम्म्म्मममम…????

मैं - हां मैं भानु.. मैं ही जोसेफ हूँ… और मैंने ही उस्मान और कामिनी के अड्डे को तबाह करवाया था.

भानु अभी भी हैरत भरी नज़रों से मुझे देख रहा था. वो समझ गया कि अब उसका खेल खतम है, इतना सब कुछ होने के बाद अब ये मुझे नहीं छोड़ेगा. लेकिन ये भी सोचने पर मजबूर हो गया कि मैं उसे यहाँ जीवित क्यों लाया हूँ??

ये विचार आते ही भानु बोला – लेकिन तुमने अभी तक मुझे मारा क्यों नहीं अंकुश??

मैं – तू मुझे अभी तक समझा ही नहीं भानु.. मैं बार-बार कहता रहा, एक बार फिर कहता हूँ.. मेरा अभी भी तेरे साथ कोई बैर नहीं है.. तुझे जिसने भी यूज़ किया एक मोहरे की तरह यूज़ किया वो भी ग़लत कामों के लिए. लेकिन मैं तुझे बचने का एक मौका और देता हूँ… अगर तू मेरा काम करे तो वादा करता हूँ, मैं तुझे हमेशा के लिए बचा लूँगा. तेरा पुलिस भी कुछ नहीं बिगाड़ सकेगी.

भानु मुँह बाए मेरी बात सुन रहा था. उसे ये विश्वास ही नहीं हो पा रहा था, कि मैं अभी भी उसे बचना चाहता हूँ.

मैं – क्या सोच रहे हो भानु भैया?? सच मानो, मेरा आज भी यही मानना है, कि एक अच्छे पड़ोसी की तरह हमारे संबंध फिर से सुधर जायें, लेकिन हर बार तुमने मेरे साथ दगा की. वो भी ग़लत लोगों के साथ मिलकर. अब एक अच्छा काम करके अपने को बचा लो. वरना तुम तो जानते ही हो मेरे पास ऐसा मसाला है, जिससे तुम तो जेल की हवा खाओगे ही, तुम्हारे खानदान की इज़्ज़त दो कौड़ी की नहीं रहेगी. लोग थूकेंगे ठाकुर सूर्य प्रताप के मुँह पर. सोचो अगर मैं तुमसे बदला ही लेना चाहता तो क्या अब तक इंतजार करता. तुम्हारे अंडरग्राउंड होते ही ये सारे वीडियो, सारे सबूत सार्वजनिक कर चुका होता.

भानु को कहीं ना कहीं मेरी बात जायज़ लगाने लगी और वो बोला – तो अंकुश.. अब मुझसे तुम क्या चाहते हो??

मैंने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा – मैं चाहता हूँ, तुम अपने कुछ आदमी लेकर श्वेता और उसकी फ्रेंड हेमा को पकड़ कर यहीं इसी जगह लेकर आओ, जिससे मैं उसे उसी तरह की सज़ा दे सकूँ जैसी उसने मुझे दी थी. तुम उन दोनों को ड्रग्स देकर ज़्यादा से ज़्यादा आदमियों के साथ उन दोनों को इतना चोदो कि वो मौत के लिए तड़पें. मेरी बात सुनकर भानु की आँखें फटी की फटी रह गयी.

मैंने फिर कहा – ऐसे क्यों आँखें फाड़कर देख रहे हो?? जब यही सब उसने मेरे साथ किया था तब तुम्हें बुरा नहीं लगा?? सच मानो भानु… ये लोग किसी के सगे नहीं होते. क्या तुम्हारे बचकर भागने के बाद श्वेता ने एक बार भी तुम्हें खोजने या पुलिस से बचाने की कोशिश की?? नहीं ना??? इनके लिए तुम हमेशा ही एक मोहरा रहे हो और रहोगे… इससे ज़्यादा कुछ नहीं.

भानु पर मेरी बात का सही असर हुआ, वो अब मुझसे सहमत होता नज़र आ रहा था. कुछ देर चुप रहने के बाद बोला.

भानु – अंकुश.. मैं अगर तुम्हारा ये काम कर दूं तो उसके बाद तुम मुझे बचा लोगे ना??

मैं – ये एक मर्द की ज़बान है… वादा करता हूँ, तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होगा… और तुम अपनी आराम की जिंदगी अपने परिवार के साथ जी सकोगे.

भानु – इस बीच अगर पुलिस ने मुझे धर लिया तो?

मैं – आज के बाद पुलिस का कोई भी आदमी तुम पर हाथ नहीं डालेगा… ये मेरा वादा है. अब चाहो तो तुम यहीं आराम से रात गुज़ार सकते हो या अपने घर जाकर बीवी के साथ सुकून से मज़े कर सकते हो… जैसे ही तुम उन्हें यहाँ ले आओगे, मुझे एक कॉल ज़रूर कर देना.

भानु – ठीक है मैं तुम्हारा ये काम ज़रूर करूँगा… अब मुझे मेरे घर छोड़ दो… आज की रात मैं अपनी बीवी के साथ सुकून से गुज़ारना चाहता हूँ. वो बेचारी बहुत दिनों से मेरे बिना अकेली ही है.

मैं – वो भी बेचारी तुम्हारे ग़लत कामों का फल भोग रही है… ज़रा सोचो इन सब कामों से तुमने क्या मिला? खैर कोई बात नहीं देर से ही सही तुम्हें मेरी बात समझ तो आई. चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक छोड़ देता हूँ.

अगले दिन भानु अपने आदमियों को इकट्ठा करता रहा, तीसरे रोज़ दिन के कोई 11 बजे उसका फोन आया और उसने बताया कि वो उन दोनों को उठा लाया है.

मैं - ठीक है, उन दोनों को ड्रग्स के हेवी डोज देकर अपने आदमियों के साथ उन दोनों की जमकर चुदाई शुरू करो…

भानु उन्हें ड्रग्स के इंजेक्शन देने के बाद होश में लाया. जब वो ड्रग के असर में आने लगी तभी उसने अपने आदमियों को उनके ऊपर छोड़ दिया. मैंने अपने डिवाइस से कमरों का लिंक डालकर वहाँ का सारा आँखों देखा हाल देखने लगा. सीन देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गये. भानु और उसके आदमी जो उसके समेत 8 लोग थे, दारू के नशे में दे दनादन उन दोनों की चुदाई कर रहे थे.

श्वेता और हेमा का गैंगबैंग देख कर मज़ा आ गया. एक-एक आदमी दोनों की चूत में लंड डाले था, एक-एक उनकी गान्ड में, एक-एक ने उनके मुँह में लंड डाला हुआ था तो बाकी के दो उनकी चुचियों को मीँजने में लगे हुए थे. ड्रग के नशे में धुत्त श्वेता और हेमा दोनों किन्हीं पेशेवर रंडियों की तरह उन आठों लोगों के साथ पूरी मस्त होकर चुद रही थी. मैंने अपने मोबाइल से श्वेता के पति पुष्पराज को फोन लगाया. कॉल कनेक्ट होते ही उसने कहा.

पुष्पराज – हेलो कौन??

मैंने टपोरी वाली भाषा में कहा – तुम्हारी बीवी श्वेता इस समय कहाँ है पुष्पराज??

पुष्पराज – क्यों?? तुम कौन हो?? और मेरी बीवी के बारे में क्यों पूछ रहे हो???

मैं – लगता है तुम्हें भी अब तुम्हारी बीवी श्वेता में कोई इंट्रेस्ट नहीं रहा.. ठीक है भाई चुदने दो साली को किसी के भी साथ हमें क्या?? मैंने सोचा शायद तुम उसे किसी और के साथ चुदते हुए नहीं देखना चाहोगे इसलिए बोल दिया…

पुष्पराज – कौन हो तुम और ये क्या बकवास कर रहे हो?? मेरी बीवी मेरे घर पर है…

मैं – हाहाहा… अच्छा… तो एक काम करो. एचटीटीपी\\व्व्व.****** इस लिंक को अपने डिवाइस में टाइप करके कनेक्ट कर लो… लाइव शो देखने को मिल जाएगा.

ये कहकर मैंने कॉल कट कर दी. कोई 5 मिनट के बाद ही पुष्पराज का दोबारा फोन आ गया. वो गुस्से से पागल हो रहा था.

पुष्पराज – ये सब कहाँ चल रहा है????

मैं – तेरे ही फार्म हाउस में… जा जाकर तू भी इस खेल का मज़ा ले पुष्पराज…

मेरा प्लान कामयाब रहा… पुष्पराज गुस्से में अँधा हो चुका था. उसने अपनी माउज़र ली और अकेले ही गाड़ी ड्राइव करके आँधी-तूफान की तरह दौड़ा कर अपने फार्म हाउस जा पहुँचा. भड़ाक से गेट खोलते ही, उसकी आँखों के सामने अपनी बीवी श्वेता और उसकी दोस्त हेमा को एक साथ 4-4 लोगों के साथ चुदते देखकर पुष्पराज पागल हो उठा. सीन ही इतना आपत्तिजनक था, कोई भी सभ्य समाज का व्यक्ति इस तरह अपनी बीवी के साथ गैंगबैंग होते देख सहन नहीं कर सकता था…

दरवाजे की आवाज़ सुनकर भानु समेत उन लोगों का ध्यान दरवाजे की तरफ गया जहाँ पुष्पराज को गन हाथ में लिए खड़ा देख कर उनके होश उड़ गये. इससे पहले कि वो लोग अपना चुदाई अभियान बंद करते. पुष्पराज ने अपना मानसिक संतुलन खोते हुए उन पर गोलियों की बरसात कर दी. अंदर चुदाई अभियान में लिप्त 10 के 10 लोगों को उसने गोलियों से उड़ा दिया और फिर लास्ट बची एक गोली से उसने गन अपनी कनपटी पर रख कर खुद को भी खतम कर लिया… ये सारा घटनाक्रम मैं अपने ऑफिस में बैठा देख रहा था.

मैं अभी अपना सिस्टम बंद करने ही वाला था कि वहाँ पड़े 11 निर्जीव मानव शरीरों में से एक के शरीर में हरकत हुई. उनमें से एक आदमी कराहते हुए अपने सिर को पकड़े खड़ा होने की कोशिश कर रहा था. शायद गोली निशाने से चूक गयी थी, उसके सिर के बीच में न लगकर उसके सिर के दायें तरफ घाव बनती हुई निकल गयी थी. वो किसी शराबी की तरह लहराता हुआ जैसे तैसे करके खड़ा हुआ और फिर जैसे ही उसका मुँह कैमरे के सामने आया. मैं बुरी तरह चौंक पड़ा. ये कोई और नहीं बल्कि भानु ही था. किस्मत ने एक बार फिर भानु का साथ दिया और गोली ठीक निशाने पर नहीं लगी थी, लेकिन सिर से निकलने वाले खून को देखकर तो ऐसा लग रहा था कि घाव काफ़ी गहरा होना चाहिए. साला भानु भी बड़ा जीवट प्राणी था. भानु अपने गोली के घाव को कसके दबाए हुए वो खड़ा हुआ और एक बार वहाँ पड़े सभी निर्जीव लाशों को देखा जिनमें कहीं भी, किसी में भी कोई हलचल दिखाई नहीं दी. फिर भानु ने एक कोने में पड़े अपने कपड़े उठाए और अपनी हिम्मत बटोरकर किसी तरह उस हॉल से बाहर निकल गया. अब भानु मेरी नज़रों से ओझल हो चुका था. इसी के साथ ही मैंने भी अपना सिस्टम बंद किया और सब समान समेट कर अपना बैग पैक कर लिया.

मैंने कृष्णा भैया को पहले ही कॉल कर दिया था, तो उन्होंने पूरी पुलिस फोर्स को ले जाकर फार्म हाउस अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस के मुताबिक सारा मामला एकदम आईने की तरह साफ था. सेक्स की भूखी औरतों ने खुद ही उन लोगों के साथ सामूहिक सेक्स किया. किसी तरह श्वेता के पति को इस बात का पता चल गया और उसने मौकाए वारदात पर पहुँचकर सबको गोली से उड़ा दिया, और ज़िल्लत के कारण उसने खुद को भी गोली मार ली.

इस तरह लगभग सारे गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुँचाकर आज मुझे सुकून मिला था. प्राची का रेप केस यहाँ तक पहुँचेगा ये किसी ने भी नहीं सोचा होगा, लेकिन उसकी वजह से ये शहर अब अपराध मुक्त था. जो यहाँ की पुलिस के लिए एक बड़ी राहत की बात थी.

भानु का क्या हुआ वो बच पाया या नहीं इस बात की मुझे कोई फिकर नहीं थी, क्योंकि अब वो नितांत अकेला था और अपनी जिंदगी सार्वजनिक तौर पर नहीं जी सकता था. उसकी तरफ से बेफिक्र होकर अब जल्द से जल्द मैं अपने घर पहुँचना चाहता था. अपनी इस कामयाबी को मैं अपनी भाभी के साथ मिलकर सेलिब्रेट करना चाहता था, जिनसे मुझे हर मुश्किल से लड़ने की प्रेरणा मिलती रहती थी.

शहर की बुराइयों के अंतिम बीज की समाप्ति होने तक का सारा आँखों देखा हाल अपने सिस्टम पर देखने के बाद मैंने अपने ऑफिस को बंद किया. घर पहुँचकर अपना समान पैक करने से पहले मैंने छाया को कॉल किया और सारी बातों से अवगत कराया. वो ये सब सुनकर ख़ुशी के मारे फोन पर ही चीखने लगी.

फिर जब मैंने छाया को बताया कि मैं अभी बस घर निकलने ही वाला हूँ, तो वो चहकते हुए बोली – अरे वाह! अकेले-अकेले सेलिब्रेट करने का इरादा है क्या?? मुझे शामिल नहीं करोगे??

मैंने फ़ौरन कहा – क्यों नहीं छाया… लेकिन क्या तुम अभी 15 मिनट में यहाँ आ सकती हो?

छाया – अंकुश तुम गाड़ी लेकर यहीं आ जाओ ना... मैं तुम्हें रेडी मिलूंगी. उनको खबर कर देती हूँ, यहीं से साथ निकलते हैं.

मैंने अपना बैग उठाया और मधु आंटी को बोलकर गाड़ी कृष्णा भैया के आवास की तरफ दौड़ा दी. वहाँ मुझे छाया एकदम रेडी मिली, फिर हम दोनों घर की ओर निकल पड़े. घर पहुँचते- पहुँचते हमें काफ़ी अंधेरा हो गया था. गाड़ी खड़ी करके जैसे ही घर के अंदर पहुँचे, आँगन में बैठी रुचि जो अपने छोटे भाई सुवंश के साथ चारपाई पर खेल रही थी, हमें देखते ही हमेशा की तरह चीखती हुई मेरी तरफ दौड़ी.

रुचि – चाचू!!! चाची!!!

रुचि उछल कर मेरे गले से लटक गयी. छाया ने मेरी गोद में लटकी रुचि के गाल को चूमकर उसे प्यार दिया और फिर वो निशा के कमरे की तरफ बढ़ गयी.

मैंने अपने हाथ रुचि की पीठ पर कसते हुए उसे अपने सीने में कस लिया और उसके दोनों कोमल गालों पर किस करके बोला – कैसा है मेरा बेटा??

रुचि – मैं तो ठीक हूँ, लेकिन देखो ना चाचू ये भैया मुझे बहुत परेशान करता है.

मैं उसे गोद में लिए चारपाई पर खेल रहे सुवंश के पास आया और बोला – वो तो बेचारा चुप चाप पड़ा खेल रहा है, फिर क्या परेशान किया तुम्हें इसने??

रुचि – ये मम्मा.. मम्मा.. तो बोलता है, लेकिन दीदी… दीदी… नहीं कहता…

रुचि की भोली भली बातें सुनकर मुझे बड़ा प्यार आया और उसके माथे पर एक किस करके कहा – बेटा अभी भैया छोटा है ना… कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा आपको इसके मुँह से दीदी सुनने के लिए.

फिर मैंने रुचि को नीचे उतार कर सुवंश को अपनी गोद में उठा लिया. मैंने जैसे ही उसके गाल पर अपना गाल सटाया, उसने मुँह घुमाकर मेरे गाल पर किस कर लिया. ये नज़ारा थोड़ी दूर खड़ी मोहिनी भाभी देख रही थी, जो रुचि की आवाज़ सुनकर रसोई से बाहर निकल आई थी और मुझे बच्चों के साथ खेलते हुए देख रही थी.

मोहिनी भाभी मेरे पास आकर धीरे से बोली – देखा कैसा अपने बाप को झट से पहचान लेता है ये नटखट सुवंश?? रुचि के पापा की तो गोद में भी मुश्किल से जाता है.

मैं बस मोहिनी भाभी को देखता ही रह गया. फिर मैंने अपने बेटे के माथे पर एक किस करके सुवंश को मोहिनी भाभी की गोद में दे दिया.

फिर जैसे मोहिनी भाभी को कुछ याद आया हो, तो निशा को आवाज़ देकर बोली – अरे निशा जल्दी से आरती की थाली तो सज़ा. देख अपना अर्जुन महाभारत का युद्ध जीतकर आया है.

मैंने कहा – क्या कहा भाभी आपने?? अर्जुन?? और कौन से महाभारत की बात कर रही हो?

मोहिनी भाभी – मुझे छाया ने निकलने से पहले फोन कर दिया था. तुमने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि वो सबके सब उसमें फँस गये और अपने आप ही सब खतम हो गये.

निशा आरती की थाली ले आई. साथ में छाया भी, दीपक जलाकर निशा ने मेरे माथे पर विजय तिलक किया और मेरी आरती करने लगी.

मैं – लेकिन भाभी इसमें आपका भी तो बड़ा योगदान रहा है. अगर आप प्रेरित ना करती तो मैं तो सब छोड़ ही चुका था. एक तरह से आप इस युद्ध की कृष्ण हैं.

मोहिनी भाभी – नहीं इस महाभारत के अर्जुन भी तुम हो और कृष्ण भी. प्रेरणा देने वाले तो और भी बहुत थे अर्जुन को, जिसमें साथ दिया था वासुदेव कृष्ण ने. पर यहाँ तो तुम अकेले ही थे.

फिर मोहिनी भाभी ने सुवंश को रुचि की गोद में देकर निशा के हाथ से थाली लेकर मुस्कराते हुए बोली – कुछ रिश्ता मेरा भी है तुम्हारी आरती उतारने का…

ये कहकर मोहिनी भाभी ने भी मुझे तिलक किया और मेरी आरती उतारने लगी. डिनर के समय बड़े भैया और पापा भी आ गये. सब मिलकर डिनर करने लगे. तभी…

मोहिनी भाभी – हां तो कृष्णा-अर्जुन अब बताओ अपने आख़िरी युद्ध की कथा..

सब लोग भाभी की तरफ देखने लगे, उन्होंने हँसते हुए कहा – अरे आप लोग ऐसे क्या देख रहे हो मेरी ओर?? आप खुद ही सुन लो कि मैंने अंकुश को ये नाम क्यों दिया है.

फिर मैंने सबको शुरू से लेकर अंत तक का सारा वृतांत कह सुनाया. खाली चुदाई की बातें एस्केप कर के. मोहिनी भाभी और छाया के अलावा बाकी लोग मुँह फाड़े मेरी बातें सुन रहे थे और वो दोनों मंद-मंद मुस्करा रही थी.

अंत में मोहिनी भाभी बोली – क्यों पापा?? मैंने सही नामकरण किया है ना?

पापा और भैया प्रशंसा भरी नज़रों से मुझे देख रहे थे. उनका सीना अपने बेटे और भाई के कारनामों की वजह से गर्व से दुगना हो रहा था.

फिर पापा बोले – मोहिनी बेटा लाओ, दूध भी दे ही दो. सोते हैं… सुबह जल्दी पंचायत के लिए भी जाना है तुम्हें भी.

मैं – कैसी पंचायत पापा?

मोहिनी भाभी – वो मैं तुम्हें बाद में बताती हूँ…

निशा ने लाकर सबको दूध दिया, जिसे पीकर वो दोनों सोने चले गये और भाभी मुझे लेकर मेरे कमरे में आ गयी और कल होने वाली पंचायत के बारे में बताने लगी. कुछ देर बाद निशा और छाया भी वहीं आ गयी और हम चारों मिलकर देर रात तक बातों में लगे रहे. मोहिनी भाभी ने मेरा और छाया के रिश्ते का टॉपिक छेड़ दिया, और बातों-बातों में हमें बताना पड़ा कि हमारी दोस्ती किस लेवल तक की थी. मोहिनी भाभी को ये पता लगना ही था कि मैं और छाया पहले ही चुदाई का मज़ा लूटते रहे थे कि फ़ौरन चुटकी लेते हुए बोली.

मोहिनी भाभी - तुम्हारे अंदर तनिक भी लाज शर्म है कि नहीं अंकुश?? अपने सगे भाई और वो भी पुलिस का इतना बड़ा ऑफिसर उसे तुमने अपनी झूठन पकड़ा दी??

उनकी ये बात सुनकर छाया ने शर्म से अपना सिर झुका लिया. वहीं मैंने मोहिनी भाभी को अपनी गोद में खींच कर उनके होंठों को चूमते हुए कहा.

मैं - अच्छा देवर की बड़ी फिकर हो गयी आपको?? और अपने पति का तनिक भी ख्याल नहीं आया??

मेरी इस बात पर निशा समेत हम तीनों खिल-खिलाकर हँसने लगे. ये देखकर छाया की सारी शंकाएँ दूर हो गयी और वो भी हमारे साथ शामिल हो गयी. निशा प्रेग्नेन्सी की वजह से कुछ टॉनिक लेती थी, जिसके असर से उसे जल्दी नींद आने लगी, तो उसे मोहिनी भाभी ने रुचि के कमरे में सोने भेज दिया.

फिर मोहिनी भाभी छाया की कमर में चिकोटी काटते हुए बोली- क्यों छुटकी क्या कहती है?? जीत की ख़ुशी मनाई जाए?? हो जाए एक बार थ्रीसम अंकुश के साथ??

झेंपते हुए छाया ने भी हामी भर दी. फिर क्या था वो दोनों घोड़ियाँ एक साथ मेरे ऊपर टूट पड़ी.

दूसरे दिन सुबह 9 बजे से ही पंचायत घर पर लोग जमा होने लगे. मामला था – पूर्व सरपंच रामसिंह के बेटे का चक्कर दुलारी के टोले की एक लड़की से चल रहा था. बहनचोद लड़का भी बाप के पद चिन्हों पर चल रहा है.

हमारे कालेज में एक कहावत थी – “अनाड़ी का चोदना, चूत का सत्यानाश”

लड़की पेट से हो गयी. जब ये बात दुलारी को पता लगी, वो तो रामसिंह से खाए हुए धोखे की वजह से खार खाए बैठी थी, फिर क्या था, उछाल दी उसने ये बात पूरे गांव में. अब लड़का था शादीशुदा. लेकिन दुलारी ने हाथ रख दिया लड़की के परिवार वालों पर, कहने लगे जी इसे लड़की के साथ शादी करनी पड़ेगी. उधर लड़का सीधा पलट गया.

कहने लगा – ये झूठा इल्जाम लगा रही है मुझे बदनाम करने के लिए. मेरा इसके साथ कोई लेना देना नहीं है.

पंचायत घर ज़्यादा बड़ा नहीं था. हां उसके सामने का मैदान ज़रूर अच्छा ख़ासा था, जिसमें गांव के ज़्यादातर लोग जमा थे. दो कमरों के आगे के बरामदा में सरपंच के लिए एक कुर्सी डाल दी गयी थी, जिसपर मोहिनी भाभी बैठ गयी. मैं उनके बाजू में किसी सेवक की तरह खड़ा हो गया. सामने एक बड़े से सोफे पर पापा, चाचाओं और रामसिंह समेत गांव के और भी लोग बैठे थे. दोनों पक्षों की बातें सुनी गयी, जो लगभग वही थी जो पहले से ही वो कहते आ रहे थे.

मोहिनी भाभी ने धीमी आवाज़ में कहा – अंकुश… तुम क्या सोचते हो? क्या फ़ैसला होना चाहिए इसका?

मैं – अभी तक दोनों तरफ से यही साफ नहीं है, कि ग़लती किसकी है तो फ़ैसला किस बात का? और कैसे होगा?

मोहिनी भाभी – तो अब क्या करें? ये तो बड़ा जटिल मामला है.

मैंने कहा – बस आप देखती जाओ मेरा कमाल…

ये कह कर मैंने ऊँची आवाज़ में कहा – सरपंच चाहती हैं कि वो एक बार दोनों तरफ से अलग-अलग बात करके सच्चाई पता की जाए. उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है. तो पहले चाचा रामसिंह जी और उनके बेटे से बात होगी, उसके बाद लड़की के परिवार वालों के साथ.

मेरी बात सुनकर रामसिंह और उनका लड़का उठकर हमारे पास आए, उन्हें लेकर मैं और मोहिनी भाभी एक कमरे में चले गये.

मैंने लड़के से कहा – हां भाई… अब हमें तो तुम सच-सच बताओ बात क्या है??

लड़का – अरे भाई वकील साहब.. वो साली मेरे ऊपर ग़लत-सलत आरोप मढ़ रही है. मैं बीवी बच्चे वाला आदमी भला उस साली छिनाल के पीछे पड़ूँगा??

मैं – देख भाई, आज के जमाने में इस तरह की बातें नहीं होती. वो जमाने गये जो सारे मसले पंचायत में ही हल होते थे. अभी तो बात अपने ही हाथ में है, अगर ये पुलिस या कोर्ट तक पहुँच गयी, तो दोनों की मेडिकल रिपोर्ट निकाली जाएगी. जिसमें डीएनए से तुरंत पता चल जाएगा कि उसके पेट में पल रहा बच्चा किसका है?

लड़का – हां!! ऐसा भी कहीं होता है!!! कि जाँच से उसके बीज का पता चल जाए?

मैं – बिल्कुल… और अगर वो तेरा ही निकला तो फिर सोच ले कोर्ट जो फ़ैसला करेगा वो तुम लोगों को मानना ही पड़ेगा, इसलिए भलाई इसी में है कि जो सच है वो बता दे. हम कुछ ले देकर बात को रफ़ा दफ़ा कर सकते हैं. रामसिंह अपने लड़के की तरफ देखने लगा.

लड़का अपनी गर्दन झुकाए बोला – हां… वो ग़लती से हो गया.. पर इसमें मेरी सारी ग़लती थोड़ी ना है. वो भी तो इतने दिनों से मज़े कर रही थी मेरे साथ.

मैंने रामसिंह से कहा – देखो चाचा.. घर गांव की बात है… किसी ग़रीब की लड़की का घर बस जाएगा और आपकी भी बात बनी रहेगी. मेरे विचार से आप उसकी लड़की की शादी का जिम्मा ले लो. उसी की बिरादरी में कोई अच्छा सा लड़का देख कर उसकी शादी कर दो. खर्चा आप उठा लेना.

रामसिंह ने फ़ौरन मेरी बात को मान लिया. फिर हमने लड़की के परिवार को अकेले में बुलाया. साथ में दुलारी भी आई और आते ही शुरू हो गयी अपनी राम कहानी लेकर.

मैंने दुलारी को शांत करते हुए समझाया – देखो भाभी… मैं जानता हूँ, ये बच्चा उसी लड़के का है. पर तुम खुद सोचो… एक तो जात बिरादरी का मामला, दूसरा अगर उसको ज़बरदस्ती शादी के लिए कहा भी तो कोर्ट एक पत्नी होते हुए दूसरी की इज़ाज़त कभी नहीं देता है. जब तक कि पहली वाली से तलाक़ ना हो. मान लो तलाक़ भी दिलवा दी… तो पहली को घर से तो निकाल नहीं सकता. अब तुम खुद सोचो, कि तुम्हारे ही घर में तुम्हारी ही सौत लाकर बिठा दी जाए, तो क्या तुम उसे अपना लोगी? नहीं ना??? तो अब तुम खुद सोचो, क्या वो लड़की ऐसे में खुश रह पाएगी? मेरी राय है, कि हम कुछ भी करके उसकी शादी का खर्चा रामसिंह से दिलवा देंगे, बस तुम लोग कोई अच्छा सा लड़का उसके लिए तलाश कर लो.

मेरी बात से लड़की के माँ-बाप राज़ी दिखाई देने लगे लेकिन दुलारी अभी भी भड़की हुई लग रही थी.

मैं दुलारी को अकेले एक कोने में ले गया और सबकी नज़र बचाकर उसकी गान्ड को मसलते हुए कहा – भाभी ये मसला जाति दुश्मनी निकालने का नहीं है. बात बढ़ाने से लड़की की बदनामी होगी. अभी तो बात गांव तक ही सीमित है. इलाक़े में फैल गयी तो कोई भला आदमी शादी भी नहीं करेगा उसके साथ. उस लड़की का घर बस जाने दो. कोई अच्छा सा घर तलाश करो, दहेज की चिंता मत करना. रामसिंह से हम फिर कभी बदला ले लेंगे, जिसमें मैं आपका साथ दूँगा.

इस तरह दुलारी को पटा कर हम बाहर आए और सभी लोगों के सामने ऊँची आवाज़ में मैंने कहा – भाइयों… ये हमारे गांव और समाज की इज़्ज़त का मामला है. अब इसमें रामसिंह के बेटे की ग़लती है या वो लड़की ग़लत बयान बाज़ी कर रही है, हम लोग इसी के पीछे पड़े रहे तो इससे हमारे गांव की बदनामी आस-पास के इलाक़े में होगी, जो हम सबके लिए शर्म की बात होगी. इसलिए सच्चाई जो भी हो हम उसपर बहस ना करते हुए पंचायत ये फ़ैसला लेती है कि लड़की के लिए उचित वर तलाश करके उसकी शीघ्र शादी कर दी जाए. दहेज और शादी में और जो भी खर्चा आएगा उसे हमारे पूर्व सरपंच श्री रामसिंह जी अपनी तरफ से उठाएंगे. अब आप लोग बताइए क्या ये सही फ़ैसला है या ग़लत??

ज़्यादातर समझदार लोगों ने इस बात का समर्थन किया और दोनों पक्षों की रज़ामंदी लेकर पंचायत खतम की..

घर आकर मोहिनी भाभी ने मेरी बहुत तारीफ़ की और बोली – अंकुश… सच में तुमने आज मेरा दिल जीत लिया. वाह!!! क्या फ़ैसला किया है?? मैं ये कभी नहीं कर पाती.

मैंने मोहिनी भाभी के दोनों चुतड़ों को अपने हाथों में कसकर अपने सीने से सटाते हुए कहा – कोरी तारीफ से काम नहीं चलेगा सरपंच साहिबा आज तो कुछ स्पेशल गिफ्ट देना होगा आपको…

मोहिनी भाभी ने मेरा गाल काट लिया और मेरे होंठों को चूमकर बोली – सब कुछ तुम्हारा है अंकुश… जो चाहिए ले लो…

मैंने उनकी रूई जैसी गुदगुदी गान्ड की दरार में उंगली डालते हुए कहा – आज इसका मन है.. दोगी क्या??

अपने चुतड़ों को कसकर भींचते हुए मोहिनी भाभी ने मेरी उंगली को अपनी दरार में जब्त करते हुए कहा – डाल लो अंकुश… एक दिन सारा काम निशा को ही करना पड़ेगा… मुझे क्या???

मैंने कसकर भाभी की चूत को अपने लंड पर दबाते हुए कहा – मज़ाक कर रहा था… अपनी जान को दर्द हो वो काम में अब कभी नहीं करूँगा…

मोहिनी भाभी मेरे होंठों पर टूट पड़ी. कुछ देर चूसकर अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर रगड़ते हुए बोली – तुम्हारे लिए हर दर्द मंजूर है अंकुश… बस हुक्म करो…

मैं - रहने दीजिए भाभी… वरना आपके इस मदमस्त गान्ड के चक्कर में सारे दिन निशा मुझे गालियाँ देगी…

ये कह कर मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से ही भाभी की एक चुचि को दाँतों में दबाकर काट लिया.

मोहिनी भाभी – आअहह… अंकुश… बदमाश!! अब ये क्या है?? अब छोड़ो… कोई आ जाएगा… चौड़े में खड़े हैं.. दिन का मामला है.

मैंने मोहिनी भाभी को नीचे उतारते हुए कहा – ठीक है… तो आज दोपहर को थ्रीसम करते हैं… अपनी चूत को चिकनी करके रखना…

भाभी ने मेरे लंड को मसलते हुए कहा – पक्का… एक दम चिकनी चूत मिलेगी तुम्हें… जी भर कर चाटना… खूब रस पिलाऊंगी तुम्हें आज…

हमारी ये रासलीला निशा जाने कब से देख रही थी. अपनी चूत को भींचते हुए बोली.

निशा – चलो दीदी… दोनों एक साथ अपनी-अपनी चूत को चिकनी करते हैं.

भाभी ने कपड़ों के ऊपर से ही निशा की चूत मसलते हुए कहा – बड़ा जल्दी है चुसवाने की.. हां?? आज अंकुश नहीं मैं तेरा रस पीऊंगी… बोल निशा की बच्ची, पिलाएगी ना??

निशा – हाय दीदी, सच में… आआहह… सुनकर ही गीली हो गयी मैं तो. वैसे भी अंकुश अब जमके चुदाई नहीं करते मेरी, तो फिर आपको ही लेना पड़ेगा अंकुश का…

ये कहकर निशा भाभी के होंठ चूसने लगी. वो दोनों एक दूसरे की चूत को मसलते हुए किस में जुट गयी. मैं धीरे से वहाँ से खिसक कर चाची के घर की तरफ निकाल लिया.
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Premkumar65

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UPDATE 69​

हॉल के एक-एक एंगल पर मैंने पावरफुल मिनी कैमरा फिट कर दिए, जिससे यहाँ का हर एक मूव्मेंट पता लग सके. ये कमरे कोई मामूली कैमरे नहीं थे, ये स्पाई कमरे थे जिनका लिंक डालकर नेट के द्वारा कहीं से भी एक्सेस किया जा सकता था. सारा काम निपटाकर मैं फिर से भानु के पास आया. उसे होश में लाने से पहले मैं अपने असली रूप में आ गया था. होश में आते ही भानु मुझे अपने सामने देख कर बुरी तरह से चौंक पड़ा.

भानु - अंकुश तुउउम्म्म्मममम…????

मैं - हां मैं भानु.. मैं ही जोसेफ हूँ… और मैंने ही उस्मान और कामिनी के अड्डे को तबाह करवाया था.

भानु अभी भी हैरत भरी नज़रों से मुझे देख रहा था. वो समझ गया कि अब उसका खेल खतम है, इतना सब कुछ होने के बाद अब ये मुझे नहीं छोड़ेगा. लेकिन ये भी सोचने पर मजबूर हो गया कि मैं उसे यहाँ जीवित क्यों लाया हूँ??

ये विचार आते ही भानु बोला – लेकिन तुमने अभी तक मुझे मारा क्यों नहीं अंकुश??

मैं – तू मुझे अभी तक समझा ही नहीं भानु.. मैं बार-बार कहता रहा, एक बार फिर कहता हूँ.. मेरा अभी भी तेरे साथ कोई बैर नहीं है.. तुझे जिसने भी यूज़ किया एक मोहरे की तरह यूज़ किया वो भी ग़लत कामों के लिए. लेकिन मैं तुझे बचने का एक मौका और देता हूँ… अगर तू मेरा काम करे तो वादा करता हूँ, मैं तुझे हमेशा के लिए बचा लूँगा. तेरा पुलिस भी कुछ नहीं बिगाड़ सकेगी.

भानु मुँह बाए मेरी बात सुन रहा था. उसे ये विश्वास ही नहीं हो पा रहा था, कि मैं अभी भी उसे बचना चाहता हूँ.

मैं – क्या सोच रहे हो भानु भैया?? सच मानो, मेरा आज भी यही मानना है, कि एक अच्छे पड़ोसी की तरह हमारे संबंध फिर से सुधर जायें, लेकिन हर बार तुमने मेरे साथ दगा की. वो भी ग़लत लोगों के साथ मिलकर. अब एक अच्छा काम करके अपने को बचा लो. वरना तुम तो जानते ही हो मेरे पास ऐसा मसाला है, जिससे तुम तो जेल की हवा खाओगे ही, तुम्हारे खानदान की इज़्ज़त दो कौड़ी की नहीं रहेगी. लोग थूकेंगे ठाकुर सूर्य प्रताप के मुँह पर. सोचो अगर मैं तुमसे बदला ही लेना चाहता तो क्या अब तक इंतजार करता. तुम्हारे अंडरग्राउंड होते ही ये सारे वीडियो, सारे सबूत सार्वजनिक कर चुका होता.

भानु को कहीं ना कहीं मेरी बात जायज़ लगाने लगी और वो बोला – तो अंकुश.. अब मुझसे तुम क्या चाहते हो??

मैंने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा – मैं चाहता हूँ, तुम अपने कुछ आदमी लेकर श्वेता और उसकी फ्रेंड हेमा को पकड़ कर यहीं इसी जगह लेकर आओ, जिससे मैं उसे उसी तरह की सज़ा दे सकूँ जैसी उसने मुझे दी थी. तुम उन दोनों को ड्रग्स देकर ज़्यादा से ज़्यादा आदमियों के साथ उन दोनों को इतना चोदो कि वो मौत के लिए तड़पें. मेरी बात सुनकर भानु की आँखें फटी की फटी रह गयी.

मैंने फिर कहा – ऐसे क्यों आँखें फाड़कर देख रहे हो?? जब यही सब उसने मेरे साथ किया था तब तुम्हें बुरा नहीं लगा?? सच मानो भानु… ये लोग किसी के सगे नहीं होते. क्या तुम्हारे बचकर भागने के बाद श्वेता ने एक बार भी तुम्हें खोजने या पुलिस से बचाने की कोशिश की?? नहीं ना??? इनके लिए तुम हमेशा ही एक मोहरा रहे हो और रहोगे… इससे ज़्यादा कुछ नहीं.

भानु पर मेरी बात का सही असर हुआ, वो अब मुझसे सहमत होता नज़र आ रहा था. कुछ देर चुप रहने के बाद बोला.

भानु – अंकुश.. मैं अगर तुम्हारा ये काम कर दूं तो उसके बाद तुम मुझे बचा लोगे ना??

मैं – ये एक मर्द की ज़बान है… वादा करता हूँ, तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होगा… और तुम अपनी आराम की जिंदगी अपने परिवार के साथ जी सकोगे.

भानु – इस बीच अगर पुलिस ने मुझे धर लिया तो?

मैं – आज के बाद पुलिस का कोई भी आदमी तुम पर हाथ नहीं डालेगा… ये मेरा वादा है. अब चाहो तो तुम यहीं आराम से रात गुज़ार सकते हो या अपने घर जाकर बीवी के साथ सुकून से मज़े कर सकते हो… जैसे ही तुम उन्हें यहाँ ले आओगे, मुझे एक कॉल ज़रूर कर देना.

भानु – ठीक है मैं तुम्हारा ये काम ज़रूर करूँगा… अब मुझे मेरे घर छोड़ दो… आज की रात मैं अपनी बीवी के साथ सुकून से गुज़ारना चाहता हूँ. वो बेचारी बहुत दिनों से मेरे बिना अकेली ही है.

मैं – वो भी बेचारी तुम्हारे ग़लत कामों का फल भोग रही है… ज़रा सोचो इन सब कामों से तुमने क्या मिला? खैर कोई बात नहीं देर से ही सही तुम्हें मेरी बात समझ तो आई. चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक छोड़ देता हूँ.

अगले दिन भानु अपने आदमियों को इकट्ठा करता रहा, तीसरे रोज़ दिन के कोई 11 बजे उसका फोन आया और उसने बताया कि वो उन दोनों को उठा लाया है.

मैं - ठीक है, उन दोनों को ड्रग्स के हेवी डोज देकर अपने आदमियों के साथ उन दोनों की जमकर चुदाई शुरू करो…

भानु उन्हें ड्रग्स के इंजेक्शन देने के बाद होश में लाया. जब वो ड्रग के असर में आने लगी तभी उसने अपने आदमियों को उनके ऊपर छोड़ दिया. मैंने अपने डिवाइस से कमरों का लिंक डालकर वहाँ का सारा आँखों देखा हाल देखने लगा. सीन देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो गये. भानु और उसके आदमी जो उसके समेत 8 लोग थे, दारू के नशे में दे दनादन उन दोनों की चुदाई कर रहे थे.

श्वेता और हेमा का गैंगबैंग देख कर मज़ा आ गया. एक-एक आदमी दोनों की चूत में लंड डाले था, एक-एक उनकी गान्ड में, एक-एक ने उनके मुँह में लंड डाला हुआ था तो बाकी के दो उनकी चुचियों को मीँजने में लगे हुए थे. ड्रग के नशे में धुत्त श्वेता और हेमा दोनों किन्हीं पेशेवर रंडियों की तरह उन आठों लोगों के साथ पूरी मस्त होकर चुद रही थी. मैंने अपने मोबाइल से श्वेता के पति पुष्पराज को फोन लगाया. कॉल कनेक्ट होते ही उसने कहा.

पुष्पराज – हेलो कौन??

मैंने टपोरी वाली भाषा में कहा – तुम्हारी बीवी श्वेता इस समय कहाँ है पुष्पराज??

पुष्पराज – क्यों?? तुम कौन हो?? और मेरी बीवी के बारे में क्यों पूछ रहे हो???

मैं – लगता है तुम्हें भी अब तुम्हारी बीवी श्वेता में कोई इंट्रेस्ट नहीं रहा.. ठीक है भाई चुदने दो साली को किसी के भी साथ हमें क्या?? मैंने सोचा शायद तुम उसे किसी और के साथ चुदते हुए नहीं देखना चाहोगे इसलिए बोल दिया…

पुष्पराज – कौन हो तुम और ये क्या बकवास कर रहे हो?? मेरी बीवी मेरे घर पर है…

मैं – हाहाहा… अच्छा… तो एक काम करो. एचटीटीपी\\व्व्व.****** इस लिंक को अपने डिवाइस में टाइप करके कनेक्ट कर लो… लाइव शो देखने को मिल जाएगा.

ये कहकर मैंने कॉल कट कर दी. कोई 5 मिनट के बाद ही पुष्पराज का दोबारा फोन आ गया. वो गुस्से से पागल हो रहा था.

पुष्पराज – ये सब कहाँ चल रहा है????

मैं – तेरे ही फार्म हाउस में… जा जाकर तू भी इस खेल का मज़ा ले पुष्पराज…

मेरा प्लान कामयाब रहा… पुष्पराज गुस्से में अँधा हो चुका था. उसने अपनी माउज़र ली और अकेले ही गाड़ी ड्राइव करके आँधी-तूफान की तरह दौड़ा कर अपने फार्म हाउस जा पहुँचा. भड़ाक से गेट खोलते ही, उसकी आँखों के सामने अपनी बीवी श्वेता और उसकी दोस्त हेमा को एक साथ 4-4 लोगों के साथ चुदते देखकर पुष्पराज पागल हो उठा. सीन ही इतना आपत्तिजनक था, कोई भी सभ्य समाज का व्यक्ति इस तरह अपनी बीवी के साथ गैंगबैंग होते देख सहन नहीं कर सकता था…

दरवाजे की आवाज़ सुनकर भानु समेत उन लोगों का ध्यान दरवाजे की तरफ गया जहाँ पुष्पराज को गन हाथ में लिए खड़ा देख कर उनके होश उड़ गये. इससे पहले कि वो लोग अपना चुदाई अभियान बंद करते. पुष्पराज ने अपना मानसिक संतुलन खोते हुए उन पर गोलियों की बरसात कर दी. अंदर चुदाई अभियान में लिप्त 10 के 10 लोगों को उसने गोलियों से उड़ा दिया और फिर लास्ट बची एक गोली से उसने गन अपनी कनपटी पर रख कर खुद को भी खतम कर लिया… ये सारा घटनाक्रम मैं अपने ऑफिस में बैठा देख रहा था.

मैं अभी अपना सिस्टम बंद करने ही वाला था कि वहाँ पड़े 11 निर्जीव मानव शरीरों में से एक के शरीर में हरकत हुई. उनमें से एक आदमी कराहते हुए अपने सिर को पकड़े खड़ा होने की कोशिश कर रहा था. शायद गोली निशाने से चूक गयी थी, उसके सिर के बीच में न लगकर उसके सिर के दायें तरफ घाव बनती हुई निकल गयी थी. वो किसी शराबी की तरह लहराता हुआ जैसे तैसे करके खड़ा हुआ और फिर जैसे ही उसका मुँह कैमरे के सामने आया. मैं बुरी तरह चौंक पड़ा. ये कोई और नहीं बल्कि भानु ही था. किस्मत ने एक बार फिर भानु का साथ दिया और गोली ठीक निशाने पर नहीं लगी थी, लेकिन सिर से निकलने वाले खून को देखकर तो ऐसा लग रहा था कि घाव काफ़ी गहरा होना चाहिए. साला भानु भी बड़ा जीवट प्राणी था. भानु अपने गोली के घाव को कसके दबाए हुए वो खड़ा हुआ और एक बार वहाँ पड़े सभी निर्जीव लाशों को देखा जिनमें कहीं भी, किसी में भी कोई हलचल दिखाई नहीं दी. फिर भानु ने एक कोने में पड़े अपने कपड़े उठाए और अपनी हिम्मत बटोरकर किसी तरह उस हॉल से बाहर निकल गया. अब भानु मेरी नज़रों से ओझल हो चुका था. इसी के साथ ही मैंने भी अपना सिस्टम बंद किया और सब समान समेट कर अपना बैग पैक कर लिया.

मैंने कृष्णा भैया को पहले ही कॉल कर दिया था, तो उन्होंने पूरी पुलिस फोर्स को ले जाकर फार्म हाउस अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस के मुताबिक सारा मामला एकदम आईने की तरह साफ था. सेक्स की भूखी औरतों ने खुद ही उन लोगों के साथ सामूहिक सेक्स किया. किसी तरह श्वेता के पति को इस बात का पता चल गया और उसने मौकाए वारदात पर पहुँचकर सबको गोली से उड़ा दिया, और ज़िल्लत के कारण उसने खुद को भी गोली मार ली.

इस तरह लगभग सारे गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुँचाकर आज मुझे सुकून मिला था. प्राची का रेप केस यहाँ तक पहुँचेगा ये किसी ने भी नहीं सोचा होगा, लेकिन उसकी वजह से ये शहर अब अपराध मुक्त था. जो यहाँ की पुलिस के लिए एक बड़ी राहत की बात थी.

भानु का क्या हुआ वो बच पाया या नहीं इस बात की मुझे कोई फिकर नहीं थी, क्योंकि अब वो नितांत अकेला था और अपनी जिंदगी सार्वजनिक तौर पर नहीं जी सकता था. उसकी तरफ से बेफिक्र होकर अब जल्द से जल्द मैं अपने घर पहुँचना चाहता था. अपनी इस कामयाबी को मैं अपनी भाभी के साथ मिलकर सेलिब्रेट करना चाहता था, जिनसे मुझे हर मुश्किल से लड़ने की प्रेरणा मिलती रहती थी.

शहर की बुराइयों के अंतिम बीज की समाप्ति होने तक का सारा आँखों देखा हाल अपने सिस्टम पर देखने के बाद मैंने अपने ऑफिस को बंद किया. घर पहुँचकर अपना समान पैक करने से पहले मैंने छाया को कॉल किया और सारी बातों से अवगत कराया. वो ये सब सुनकर ख़ुशी के मारे फोन पर ही चीखने लगी.

फिर जब मैंने छाया को बताया कि मैं अभी बस घर निकलने ही वाला हूँ, तो वो चहकते हुए बोली – अरे वाह! अकेले-अकेले सेलिब्रेट करने का इरादा है क्या?? मुझे शामिल नहीं करोगे??

मैंने फ़ौरन कहा – क्यों नहीं छाया… लेकिन क्या तुम अभी 15 मिनट में यहाँ आ सकती हो?

छाया – अंकुश तुम गाड़ी लेकर यहीं आ जाओ ना... मैं तुम्हें रेडी मिलूंगी. उनको खबर कर देती हूँ, यहीं से साथ निकलते हैं.

मैंने अपना बैग उठाया और मधु आंटी को बोलकर गाड़ी कृष्णा भैया के आवास की तरफ दौड़ा दी. वहाँ मुझे छाया एकदम रेडी मिली, फिर हम दोनों घर की ओर निकल पड़े. घर पहुँचते- पहुँचते हमें काफ़ी अंधेरा हो गया था. गाड़ी खड़ी करके जैसे ही घर के अंदर पहुँचे, आँगन में बैठी रुचि जो अपने छोटे भाई सुवंश के साथ चारपाई पर खेल रही थी, हमें देखते ही हमेशा की तरह चीखती हुई मेरी तरफ दौड़ी.

रुचि – चाचू!!! चाची!!!

रुचि उछल कर मेरे गले से लटक गयी. छाया ने मेरी गोद में लटकी रुचि के गाल को चूमकर उसे प्यार दिया और फिर वो निशा के कमरे की तरफ बढ़ गयी.

मैंने अपने हाथ रुचि की पीठ पर कसते हुए उसे अपने सीने में कस लिया और उसके दोनों कोमल गालों पर किस करके बोला – कैसा है मेरा बेटा??

रुचि – मैं तो ठीक हूँ, लेकिन देखो ना चाचू ये भैया मुझे बहुत परेशान करता है.

मैं उसे गोद में लिए चारपाई पर खेल रहे सुवंश के पास आया और बोला – वो तो बेचारा चुप चाप पड़ा खेल रहा है, फिर क्या परेशान किया तुम्हें इसने??

रुचि – ये मम्मा.. मम्मा.. तो बोलता है, लेकिन दीदी… दीदी… नहीं कहता…

रुचि की भोली भली बातें सुनकर मुझे बड़ा प्यार आया और उसके माथे पर एक किस करके कहा – बेटा अभी भैया छोटा है ना… कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा आपको इसके मुँह से दीदी सुनने के लिए.

फिर मैंने रुचि को नीचे उतार कर सुवंश को अपनी गोद में उठा लिया. मैंने जैसे ही उसके गाल पर अपना गाल सटाया, उसने मुँह घुमाकर मेरे गाल पर किस कर लिया. ये नज़ारा थोड़ी दूर खड़ी मोहिनी भाभी देख रही थी, जो रुचि की आवाज़ सुनकर रसोई से बाहर निकल आई थी और मुझे बच्चों के साथ खेलते हुए देख रही थी.

मोहिनी भाभी मेरे पास आकर धीरे से बोली – देखा कैसा अपने बाप को झट से पहचान लेता है ये नटखट सुवंश?? रुचि के पापा की तो गोद में भी मुश्किल से जाता है.

मैं बस मोहिनी भाभी को देखता ही रह गया. फिर मैंने अपने बेटे के माथे पर एक किस करके सुवंश को मोहिनी भाभी की गोद में दे दिया.

फिर जैसे मोहिनी भाभी को कुछ याद आया हो, तो निशा को आवाज़ देकर बोली – अरे निशा जल्दी से आरती की थाली तो सज़ा. देख अपना अर्जुन महाभारत का युद्ध जीतकर आया है.

मैंने कहा – क्या कहा भाभी आपने?? अर्जुन?? और कौन से महाभारत की बात कर रही हो?

मोहिनी भाभी – मुझे छाया ने निकलने से पहले फोन कर दिया था. तुमने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि वो सबके सब उसमें फँस गये और अपने आप ही सब खतम हो गये.

निशा आरती की थाली ले आई. साथ में छाया भी, दीपक जलाकर निशा ने मेरे माथे पर विजय तिलक किया और मेरी आरती करने लगी.

मैं – लेकिन भाभी इसमें आपका भी तो बड़ा योगदान रहा है. अगर आप प्रेरित ना करती तो मैं तो सब छोड़ ही चुका था. एक तरह से आप इस युद्ध की कृष्ण हैं.

मोहिनी भाभी – नहीं इस महाभारत के अर्जुन भी तुम हो और कृष्ण भी. प्रेरणा देने वाले तो और भी बहुत थे अर्जुन को, जिसमें साथ दिया था वासुदेव कृष्ण ने. पर यहाँ तो तुम अकेले ही थे.

फिर मोहिनी भाभी ने सुवंश को रुचि की गोद में देकर निशा के हाथ से थाली लेकर मुस्कराते हुए बोली – कुछ रिश्ता मेरा भी है तुम्हारी आरती उतारने का…

ये कहकर मोहिनी भाभी ने भी मुझे तिलक किया और मेरी आरती उतारने लगी. डिनर के समय बड़े भैया और पापा भी आ गये. सब मिलकर डिनर करने लगे. तभी…

मोहिनी भाभी – हां तो कृष्णा-अर्जुन अब बताओ अपने आख़िरी युद्ध की कथा..

सब लोग भाभी की तरफ देखने लगे, उन्होंने हँसते हुए कहा – अरे आप लोग ऐसे क्या देख रहे हो मेरी ओर?? आप खुद ही सुन लो कि मैंने अंकुश को ये नाम क्यों दिया है.

फिर मैंने सबको शुरू से लेकर अंत तक का सारा वृतांत कह सुनाया. खाली चुदाई की बातें एस्केप कर के. मोहिनी भाभी और छाया के अलावा बाकी लोग मुँह फाड़े मेरी बातें सुन रहे थे और वो दोनों मंद-मंद मुस्करा रही थी.

अंत में मोहिनी भाभी बोली – क्यों पापा?? मैंने सही नामकरण किया है ना?

पापा और भैया प्रशंसा भरी नज़रों से मुझे देख रहे थे. उनका सीना अपने बेटे और भाई के कारनामों की वजह से गर्व से दुगना हो रहा था.

फिर पापा बोले – मोहिनी बेटा लाओ, दूध भी दे ही दो. सोते हैं… सुबह जल्दी पंचायत के लिए भी जाना है तुम्हें भी.

मैं – कैसी पंचायत पापा?

मोहिनी भाभी – वो मैं तुम्हें बाद में बताती हूँ…

निशा ने लाकर सबको दूध दिया, जिसे पीकर वो दोनों सोने चले गये और भाभी मुझे लेकर मेरे कमरे में आ गयी और कल होने वाली पंचायत के बारे में बताने लगी. कुछ देर बाद निशा और छाया भी वहीं आ गयी और हम चारों मिलकर देर रात तक बातों में लगे रहे. मोहिनी भाभी ने मेरा और छाया के रिश्ते का टॉपिक छेड़ दिया, और बातों-बातों में हमें बताना पड़ा कि हमारी दोस्ती किस लेवल तक की थी. मोहिनी भाभी को ये पता लगना ही था कि मैं और छाया पहले ही चुदाई का मज़ा लूटते रहे थे कि फ़ौरन चुटकी लेते हुए बोली.

मोहिनी भाभी - तुम्हारे अंदर तनिक भी लाज शर्म है कि नहीं अंकुश?? अपने सगे भाई और वो भी पुलिस का इतना बड़ा ऑफिसर उसे तुमने अपनी झूठन पकड़ा दी??

उनकी ये बात सुनकर छाया ने शर्म से अपना सिर झुका लिया. वहीं मैंने मोहिनी भाभी को अपनी गोद में खींच कर उनके होंठों को चूमते हुए कहा.

मैं - अच्छा देवर की बड़ी फिकर हो गयी आपको?? और अपने पति का तनिक भी ख्याल नहीं आया??

मेरी इस बात पर निशा समेत हम तीनों खिल-खिलाकर हँसने लगे. ये देखकर छाया की सारी शंकाएँ दूर हो गयी और वो भी हमारे साथ शामिल हो गयी. निशा प्रेग्नेन्सी की वजह से कुछ टॉनिक लेती थी, जिसके असर से उसे जल्दी नींद आने लगी, तो उसे मोहिनी भाभी ने रुचि के कमरे में सोने भेज दिया.

फिर मोहिनी भाभी छाया की कमर में चिकोटी काटते हुए बोली- क्यों छुटकी क्या कहती है?? जीत की ख़ुशी मनाई जाए?? हो जाए एक बार थ्रीसम अंकुश के साथ??

झेंपते हुए छाया ने भी हामी भर दी. फिर क्या था वो दोनों घोड़ियाँ एक साथ मेरे ऊपर टूट पड़ी.

दूसरे दिन सुबह 9 बजे से ही पंचायत घर पर लोग जमा होने लगे. मामला था – पूर्व सरपंच रामसिंह के बेटे का चक्कर दुलारी के टोले की एक लड़की से चल रहा था. बहनचोद लड़का भी बाप के पद चिन्हों पर चल रहा है.

हमारे कालेज में एक कहावत थी – “अनाड़ी का चोदना, चूत का सत्यानाश”

लड़की पेट से हो गयी. जब ये बात दुलारी को पता लगी, वो तो रामसिंह से खाए हुए धोखे की वजह से खार खाए बैठी थी, फिर क्या था, उछाल दी उसने ये बात पूरे गांव में. अब लड़का था शादीशुदा. लेकिन दुलारी ने हाथ रख दिया लड़की के परिवार वालों पर, कहने लगे जी इसे लड़की के साथ शादी करनी पड़ेगी. उधर लड़का सीधा पलट गया.

कहने लगा – ये झूठा इल्जाम लगा रही है मुझे बदनाम करने के लिए. मेरा इसके साथ कोई लेना देना नहीं है.

पंचायत घर ज़्यादा बड़ा नहीं था. हां उसके सामने का मैदान ज़रूर अच्छा ख़ासा था, जिसमें गांव के ज़्यादातर लोग जमा थे. दो कमरों के आगे के बरामदा में सरपंच के लिए एक कुर्सी डाल दी गयी थी, जिसपर मोहिनी भाभी बैठ गयी. मैं उनके बाजू में किसी सेवक की तरह खड़ा हो गया. सामने एक बड़े से सोफे पर पापा, चाचाओं और रामसिंह समेत गांव के और भी लोग बैठे थे. दोनों पक्षों की बातें सुनी गयी, जो लगभग वही थी जो पहले से ही वो कहते आ रहे थे.

मोहिनी भाभी ने धीमी आवाज़ में कहा – अंकुश… तुम क्या सोचते हो? क्या फ़ैसला होना चाहिए इसका?

मैं – अभी तक दोनों तरफ से यही साफ नहीं है, कि ग़लती किसकी है तो फ़ैसला किस बात का? और कैसे होगा?

मोहिनी भाभी – तो अब क्या करें? ये तो बड़ा जटिल मामला है.

मैंने कहा – बस आप देखती जाओ मेरा कमाल…

ये कह कर मैंने ऊँची आवाज़ में कहा – सरपंच चाहती हैं कि वो एक बार दोनों तरफ से अलग-अलग बात करके सच्चाई पता की जाए. उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता है. तो पहले चाचा रामसिंह जी और उनके बेटे से बात होगी, उसके बाद लड़की के परिवार वालों के साथ.

मेरी बात सुनकर रामसिंह और उनका लड़का उठकर हमारे पास आए, उन्हें लेकर मैं और मोहिनी भाभी एक कमरे में चले गये.

मैंने लड़के से कहा – हां भाई… अब हमें तो तुम सच-सच बताओ बात क्या है??

लड़का – अरे भाई वकील साहब.. वो साली मेरे ऊपर ग़लत-सलत आरोप मढ़ रही है. मैं बीवी बच्चे वाला आदमी भला उस साली छिनाल के पीछे पड़ूँगा??

मैं – देख भाई, आज के जमाने में इस तरह की बातें नहीं होती. वो जमाने गये जो सारे मसले पंचायत में ही हल होते थे. अभी तो बात अपने ही हाथ में है, अगर ये पुलिस या कोर्ट तक पहुँच गयी, तो दोनों की मेडिकल रिपोर्ट निकाली जाएगी. जिसमें डीएनए से तुरंत पता चल जाएगा कि उसके पेट में पल रहा बच्चा किसका है?

लड़का – हां!! ऐसा भी कहीं होता है!!! कि जाँच से उसके बीज का पता चल जाए?

मैं – बिल्कुल… और अगर वो तेरा ही निकला तो फिर सोच ले कोर्ट जो फ़ैसला करेगा वो तुम लोगों को मानना ही पड़ेगा, इसलिए भलाई इसी में है कि जो सच है वो बता दे. हम कुछ ले देकर बात को रफ़ा दफ़ा कर सकते हैं. रामसिंह अपने लड़के की तरफ देखने लगा.

लड़का अपनी गर्दन झुकाए बोला – हां… वो ग़लती से हो गया.. पर इसमें मेरी सारी ग़लती थोड़ी ना है. वो भी तो इतने दिनों से मज़े कर रही थी मेरे साथ.

मैंने रामसिंह से कहा – देखो चाचा.. घर गांव की बात है… किसी ग़रीब की लड़की का घर बस जाएगा और आपकी भी बात बनी रहेगी. मेरे विचार से आप उसकी लड़की की शादी का जिम्मा ले लो. उसी की बिरादरी में कोई अच्छा सा लड़का देख कर उसकी शादी कर दो. खर्चा आप उठा लेना.

रामसिंह ने फ़ौरन मेरी बात को मान लिया. फिर हमने लड़की के परिवार को अकेले में बुलाया. साथ में दुलारी भी आई और आते ही शुरू हो गयी अपनी राम कहानी लेकर.

मैंने दुलारी को शांत करते हुए समझाया – देखो भाभी… मैं जानता हूँ, ये बच्चा उसी लड़के का है. पर तुम खुद सोचो… एक तो जात बिरादरी का मामला, दूसरा अगर उसको ज़बरदस्ती शादी के लिए कहा भी तो कोर्ट एक पत्नी होते हुए दूसरी की इज़ाज़त कभी नहीं देता है. जब तक कि पहली वाली से तलाक़ ना हो. मान लो तलाक़ भी दिलवा दी… तो पहली को घर से तो निकाल नहीं सकता. अब तुम खुद सोचो, कि तुम्हारे ही घर में तुम्हारी ही सौत लाकर बिठा दी जाए, तो क्या तुम उसे अपना लोगी? नहीं ना??? तो अब तुम खुद सोचो, क्या वो लड़की ऐसे में खुश रह पाएगी? मेरी राय है, कि हम कुछ भी करके उसकी शादी का खर्चा रामसिंह से दिलवा देंगे, बस तुम लोग कोई अच्छा सा लड़का उसके लिए तलाश कर लो.

मेरी बात से लड़की के माँ-बाप राज़ी दिखाई देने लगे लेकिन दुलारी अभी भी भड़की हुई लग रही थी.

मैं दुलारी को अकेले एक कोने में ले गया और सबकी नज़र बचाकर उसकी गान्ड को मसलते हुए कहा – भाभी ये मसला जाति दुश्मनी निकालने का नहीं है. बात बढ़ाने से लड़की की बदनामी होगी. अभी तो बात गांव तक ही सीमित है. इलाक़े में फैल गयी तो कोई भला आदमी शादी भी नहीं करेगा उसके साथ. उस लड़की का घर बस जाने दो. कोई अच्छा सा घर तलाश करो, दहेज की चिंता मत करना. रामसिंह से हम फिर कभी बदला ले लेंगे, जिसमें मैं आपका साथ दूँगा.

इस तरह दुलारी को पटा कर हम बाहर आए और सभी लोगों के सामने ऊँची आवाज़ में मैंने कहा – भाइयों… ये हमारे गांव और समाज की इज़्ज़त का मामला है. अब इसमें रामसिंह के बेटे की ग़लती है या वो लड़की ग़लत बयान बाज़ी कर रही है, हम लोग इसी के पीछे पड़े रहे तो इससे हमारे गांव की बदनामी आस-पास के इलाक़े में होगी, जो हम सबके लिए शर्म की बात होगी. इसलिए सच्चाई जो भी हो हम उसपर बहस ना करते हुए पंचायत ये फ़ैसला लेती है कि लड़की के लिए उचित वर तलाश करके उसकी शीघ्र शादी कर दी जाए. दहेज और शादी में और जो भी खर्चा आएगा उसे हमारे पूर्व सरपंच श्री रामसिंह जी अपनी तरफ से उठाएंगे. अब आप लोग बताइए क्या ये सही फ़ैसला है या ग़लत??

ज़्यादातर समझदार लोगों ने इस बात का समर्थन किया और दोनों पक्षों की रज़ामंदी लेकर पंचायत खतम की..

घर आकर मोहिनी भाभी ने मेरी बहुत तारीफ़ की और बोली – अंकुश… सच में तुमने आज मेरा दिल जीत लिया. वाह!!! क्या फ़ैसला किया है?? मैं ये कभी नहीं कर पाती.

मैंने मोहिनी भाभी के दोनों चुतड़ों को अपने हाथों में कसकर अपने सीने से सटाते हुए कहा – कोरी तारीफ से काम नहीं चलेगा सरपंच साहिबा आज तो कुछ स्पेशल गिफ्ट देना होगा आपको…

मोहिनी भाभी ने मेरा गाल काट लिया और मेरे होंठों को चूमकर बोली – सब कुछ तुम्हारा है अंकुश… जो चाहिए ले लो…

मैंने उनकी रूई जैसी गुदगुदी गान्ड की दरार में उंगली डालते हुए कहा – आज इसका मन है.. दोगी क्या??

अपने चुतड़ों को कसकर भींचते हुए मोहिनी भाभी ने मेरी उंगली को अपनी दरार में जब्त करते हुए कहा – डाल लो अंकुश… एक दिन सारा काम निशा को ही करना पड़ेगा… मुझे क्या???

मैंने कसकर भाभी की चूत को अपने लंड पर दबाते हुए कहा – मज़ाक कर रहा था… अपनी जान को दर्द हो वो काम में अब कभी नहीं करूँगा…

मोहिनी भाभी मेरे होंठों पर टूट पड़ी. कुछ देर चूसकर अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर रगड़ते हुए बोली – तुम्हारे लिए हर दर्द मंजूर है अंकुश… बस हुक्म करो…

मैं - रहने दीजिए भाभी… वरना आपके इस मदमस्त गान्ड के चक्कर में सारे दिन निशा मुझे गालियाँ देगी…

ये कह कर मैंने उनके ब्लाउज के ऊपर से ही भाभी की एक चुचि को दाँतों में दबाकर काट लिया.

मोहिनी भाभी – आअहह… अंकुश… बदमाश!! अब ये क्या है?? अब छोड़ो… कोई आ जाएगा… चौड़े में खड़े हैं.. दिन का मामला है.

मैंने मोहिनी भाभी को नीचे उतारते हुए कहा – ठीक है… तो आज दोपहर को थ्रीसम करते हैं… अपनी चूत को चिकनी करके रखना…

भाभी ने मेरे लंड को मसलते हुए कहा – पक्का… एक दम चिकनी चूत मिलेगी तुम्हें… जी भर कर चाटना… खूब रस पिलाऊंगी तुम्हें आज…

हमारी ये रासलीला निशा जाने कब से देख रही थी. अपनी चूत को भींचते हुए बोली.

निशा – चलो दीदी… दोनों एक साथ अपनी-अपनी चूत को चिकनी करते हैं.

भाभी ने कपड़ों के ऊपर से ही निशा की चूत मसलते हुए कहा – बड़ा जल्दी है चुसवाने की.. हां?? आज अंकुश नहीं मैं तेरा रस पीऊंगी… बोल निशा की बच्ची, पिलाएगी ना??

निशा – हाय दीदी, सच में… आआहह… सुनकर ही गीली हो गयी मैं तो. वैसे भी अंकुश अब जमके चुदाई नहीं करते मेरी, तो फिर आपको ही लेना पड़ेगा अंकुश का…

ये कहकर निशा भाभी के होंठ चूसने लगी. वो दोनों एक दूसरे की चूत को मसलते हुए किस में जुट गयी. मैं धीरे से वहाँ से खिसक कर चाची के घर की तरफ निकाल लिया.
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Ankush is having a ball.
 
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aidenabhishek

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भाभी के साथ हुई छेड़-छाड़ की वजह से मेरा लंड पाजामा में बुरी तरह से फुफकार रहा था. घर से निकलते हुए मैंने जैसे तैसे अपने खड़े लंड को ट्राउज़र में एडजस्ट किया वरना वो खूँटे की तरह तना हुआ सामने से दिखाई दे रहा था.

चाची के दरवाजे को मैंने हल्का सा पुश किया तो वो खुलता चला गया. इस टाइम वंश और चाचा तो स्कूल में ही होने चाहिए. आँगन में जाकर मैं अभी चाची को आवाज़ देने ही वाला था, कि तभी वो अपने सोने के कमरे से बाहर आती हुई दिखी. शायद नहाने की तैयारी थी, तो मात्र एक कसे हुए ब्लाउज और पेटीकोट में चाची का कामुकता से भरपूर बदन इन दो कपड़ों में देखकर मेरे पहले से तने हुए लंड ने और ज़्यादा बग़ावत कर दी. जहाँ मैंने अपने लंड को जबरदस्ती ठूंस कर एडजस्ट किया था, वो वहाँ से निकलकर खूँटे की तरह फिर तनकर खड़ा हो गया, मानो इशारा कर रहो हो कि वो रही चूत.

कमरे से बाहर आती चाची की नज़र जैसे ही मेरे ऊपर पड़ी, वो एकदम खुश हो गयी और चहकते हुए बोली – ओह ओ.. अंश के बापू आज इधर का रास्ता कैसे भूल गये??

चाची का पेटीकोट और ब्लाउज दोनों ही कुछ ज़्यादा पुराने से लग रहे थे. एक तो वो छोटे पड़ गये थे, दूसरे उनका कपड़ा इतना हल्का हो गया था कि उनमें से चाची का कसा हुआ गोरा रंग साफ झलक रहा था. काले-काले निप्पल को ब्लाउज का कपड़ा छुपाने में असमर्थ था. फिर जैसे ही मेरी नीचे नज़र पड़ी, पेटीकोट के नाड़े के बाँधने की जगह पर वो कुछ ज़्यादा ही फटा हुआ था. सोने पे सुहागा, वो फटा हुआ हिस्सा ठीक चूत के सामने था, जिसमें से चाची की झांटो के बाल अपने मुँह चमका रहे थे.

मैंने पास जाकर उस फटे हुए झरोखे में अपना हाथ डालकर चाची की झांटो को पकड़ कर हल्के से खींचते हुए कहा – मैं कुछ दिन रास्ता क्या भूल गया, आपने तो पूरा जंगल ही खड़ा कर लिया यहाँ…

चाची – आअहह… तेज़ मत खींचो अंकुश… ससिईईईई… हाय… किसके लिए साफ करूँ??

मादक सिसकी लेकर चाची बोली - तुम तो आते ही नहीं अब.

मैंने अपने उस हाथ की एक उंगली चाची की चूत के अंदर कर दी. दूसरे हाथ से चाची की ब्लाउज के महीन कपड़े से चमकती निप्पल की एक घुंडी को पकड़ कर मरोड़ दिया.

चाची - सस्सिईईईईईईईईई…. आआहह…. अंकुश… ससिईईईई… हाय… खड़े-खड़े ही पानी निकाल दोगे तुम तो मेरा… बिस्तर तक तो चलो… यहाँ कोई देख लेगा..

मैंने चाची को पलटा दिया, उनकी गान्ड की शेप कसे हुए पेटीकोट से मस्त दिखाई दे रही थी. गान्ड के दोनों पाटों ने बीच की दरार को कस के दबा रखा था. तरबूज जैसी गान्ड के दोनों पाटों को तेज़ मसलते हुए मैंने अपने दोनों हाथ उनकी बगलों से निकाल कर उनकी मस्त गदर चुचियों पर कस दिए और अपने सोटे का उभार चाची की गान्ड की दरार में दबाकर चिपकते हुए कहा.

मैं - बस चुदाई तक का ही वास्ता रखती हो चाची, ये भी नहीं पूछा कि अंकुश क्या लोगे?? कुछ खाओगे पीओगे?

चाची – आअहह… बोलो ना अंकुश… क्या लोगे?? चाय या दूध?? ज़रा छोड़ो तो सही तभी तो बनाऊंगी…

मैं – क्या?

चाची – चाय.

मैं – आज तो मैं कुछ और ही पीने आया हूँ चाची..

वो – हाए… और क्या पीओगे अंकुश??

मैं – बताता हूँ…

ये कहकर मैंने उन्हें अपनी तरफ घुमाया और नीचे बैठकर मैंने उनके फटे हुए लहंगे को और ज़्यादा फाड़कर एक झरोखा बना दिया.

चाची – हाय अंकुश आअहह… ये क्या किया तुमने?? मेरा लहंगा फाड़ दिया?

मैं – मुझे जो पीना है, वो चासनी तो यहीं है ना…

ये कहकर मैंने अपना मुँह चाची की केले के तने जैसी चिकनी जाँघों के बीच फँसा दिया. चाची की चूत का रस टपक कर झांटो के बालों पर एक दो बूँद जमा हो गया था. उनकी जांघों को चूत के पास चाट कर मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में घुसेड़ दी. आअहह.. भरते हुए चाची की टाँगें चौड़ी हो गयी. मैं उनकी चासनी को चपर-चपर कुत्ते की तरह चाटने लगा. चाची ने अपनी एक जाँघ मेरे कंधे पर रख ली और अपनी गान्ड मटका-मटका कर मस्ती में आँखें बंद करके अपनी चूत चटवाने लगी.

चाची – सस्स्सिईई.. आअहह.. उउउफफफ्फ़.. अंकुश… और घुसाओ अंदर… हाय रे मर गयी.. माआआ… उंगली डाल दो एक संग… आहहह… और अंदर कर… उउउफफफ्फ़.. मर गई.. उउउऊऊहह.. उउउफफफ्फ़..

चाची मेरा सिर अपनी चूत के मुँह पर तेज़ दबा कर झड़ने लगी. मैंने अपनी जीभ से चाट कर उनके अमृत कलश से निकली हुई एक-एक बूँद को अपने पेट में पहुँचा दिया और चटकारे लेकर चाची से बोला.

मैं – बहुत मीठी हो चाची… मज़ा आ गया…

चाची ने झपट कर मेरे कंधे पकड़ कर मुझे खड़ा किया और मेरे होंठों पर टूट पड़ी.

चाची - बहुत जालिम हो अंकुश…

चाची नशीली अदा से मेरे गले में बाहें डालकर बोली – औरत को अपनी उंगलियों पर नचाना अच्छे से आता है तुम्हें…

मैंने चाची के ब्लाउज के बटन खोलते हुए कहा – आपको अच्छा नहीं लगता मेरा ये सब करना??

मेरे ट्राउज़र में हाथ डालकर लंड को अपनी मुट्ठी में लेने की कोशिश करती चाची बोली – अच्छा नहीं लगता होता तो टाँगें क्यों खोलती? अब तो चलो भीतर… यहाँ ऊपर से किसी ने देख लिया तो ग़ज़ब हो जाएगा.

मैं - ऊपर तो हमारा ही घर है ना चाची… फिर कौन देखेगा?

चाची - निशा या मोहिनी बहू ने देख लिया तो?? मान जाओ अंकुश अच्छा नहीं लगता… चलो अंदर चलते हैं.

मैंने चाची को अपनी गोद में उठा लिया और उनके कमरे में लेकर जाने लगा.

चाची – अंकुश.. मैं बहुत भारी हूँ, उतार दो मुझे.

मैंने गान्ड में उंगली करते हुए कहा – मुझे तो भारी नहीं लग रही हो.

चाची – तुम जवान मर्द हो इसलिए, तुम्हारे चाचा तो मेरी टाँग भी नहीं उठा पाते.

मैंने चाची को बेड पर पटका और बाकी के कपड़े नोच डाले. फिर अपना पाजामा नीचे करके अपना खूँटा उनके मुँह के सामने लहरा दिया.

मेरे हथौड़े जैसे लंड को अपनी आँखों के सामने झूमते हुए देख कर चाची की आँखों में चमक उभर आई और उसे चूमते हुए बोली – ये पहले से कुछ और ज़्यादा तगड़ा हो गया है अंकुश???

मैं - हां चाची अब ज़रा इसकी सर्विस तो करो..

चाची ने मेरे लंड अपने मुँह में भरने की कोशिश की. मुश्किल से चौथाई लंड मुँह में लेकर चाची उसे चूसने लगी. दो मिनट के बाद मैंने उसे बाहर खींच लिया, और चाची की मोटी-मोटी चुचियों के ऊपर चटकाया, लंड से उनके कड़क हो चुके चुचों को रगड़ा. फिर उनकी खाई के बीच फंसकर उन्हें अपनी चुचियों को उसके इर्दगिर्द दबाने को बोला और टिट फकिंग करने लगा. मक्खन जैसी मुलायम चुचियों के बीच सटासट चलता लंड जब ऊपर जाता तो उसका सुपाड़ा चाची के होंठों तक पहुँच जाता जिसे चाची अपने मुँह में ले लेती. टिट फकिंग करने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. लेकिन चाची की चूत को पानी पिलाना भी ज़रूरी था, वो इस समय पटल तोड़ बोर की तरह लगातार बहे जा रही थी. मैंने चाची की गान्ड के नीचे दो तकिये लगाए और उनकी मांसल जांघों को चूमकर ऊपर किया. अब उनकी रस परी ठीक मेरे लौड़ा के सामने थी. तो एक दो बार उसके रस से उसको चिकनाया और सट से एक धक्का मार दिया. सरसरा कर आधे से ज़्यादा वो उनकी रसीली चूत में समा गया.

चाची के मुँह से एक मादक कराह निकल गयी – आआहह… अंकुश बहुत मोटा है… आराम से चोद मेरी चूत को…

चाची की चुचियों को मसलते हुए मैंने बचे हुए को भी अंदर कर दिया, और हल्के-हल्के धक्के देने लगा. चाची मेरे लौड़े को ज़्यादा देर तक नहीं झेल सकी, थोड़ी ही देर में उनकी चूत ने अपना नल खोल दिया. फिर मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और पीछे से लंड डालकर चोदने लगा. मोटा खूँटे जैसा लंड लेते ही चाची नील गाय की तरह रम्भाने लगी.

चाची अपना सिर ऊपर करके पीछे मुड़ते हुए कराह कर बोली – कितने निर्दयी हो अंकुश.. आआहह… कम से कम अपनी माँ जैसी चाची की चूत का तो ख्याल करो… एक दम से डाल देते हो…. हाए…. कितना मोटा हो गया है तुम्हारा लौंड़ा.

मैंने चाची की पीठ सहलाते हुए अपने होंठ उनके लज़ीज़ होंठों से सटा दिए. वो अपना दर्द भूल कर गान्ड उचकाते हुए चुदाई का मज़ा लूटने लगी. चाची की जमकर चुदाई करके, उन्हें पूरी तरह से तृप्त कर दिया. उनके लहंगे से अपना लंड पोंछ कर कपड़े पहने और एक किस उनके मोटे-मोटे मालपुए जैसे गालों पर देकर अपने घर की तरफ चल दिया..

घर में कदम रखते ही निशा से सामना हो गया, वो देखते ही मेरे ऊपर राशन पानी लेकर चढ़ दौड़ी.

निशा - हम दोनों को गरम करके कहाँ खिसक लिए थे जनाब… हां?

मैंने खिसियानी हँसी हँसते हुए कहा – हेहेहे… मैं थोड़ा चाची के घर तक गया था… बहुत दिनों से मिल नहीं पाया था ना इसलिए. तुम बताओ, खाना बना कि नहीं??

निशा अपनी कमर पर दोनों हाथ रख कर बोली – खाना… कैसा खाना?? हम दोनों इतनी गरम हो गयी, कि एक दूसरे को शांत करने में लग गयी. अभी दीदी नहाने गयी हैं उसके बाद मैं जाऊंगी… तब कहीं बनेगा खाना…

लंच लेट होने के कारण दोपहर का थ्रीसम का प्रोग्राम पोस्टपोन करना पड़ा. मोहिनी भाभी ने रात को हमारे कमरे में आने का वादा कर दिया. खाने के बाद मैं दो घंटे की नींद लेकर शाम के समय खेतों की तरफ निकल गया. ट्यूबवेल पर मुझे कोई नहीं मिला, तो बगीचे में टहलता हुआ बड़ी चाची की तरफ निकल गया. उन्होंने अपने खेतों पर एक कच्ची ईंटों का एक घर बना लिया था, जिसमें काफ़ी जगह थी जिससे इमरजेंसी में अनाज वग़ैरह भी रखा जा सके मौसम बिगड़ने पर.

मैं जैसे ही झोंपड़ी जैसे मकान के नज़दीक पहुँचा, अंदर से मुझे आहें कराहें, सिसकियों की आवाज़ें सुनाई दी. मैंने सोचा आज चाचा दिन में ही मज़े लेने लगे शायद. चलो लेने दो इन्हें ये सोच कर मैं लौटने लगा कि तभी मुझे मंझली चाची की आवाज़ सुनाई दी.

मंझली चाची – आअहह… जेठ जी… और तेज़ पेलो… उउउफफफ्फ़.. बड़ा मज़ा आ रहा है…

मेरी तो खोपड़ी हवा में उड़ने लगी, ये मंझली चाची दुश्मन के घर… ये कैसे हुआ, मेरी उत्सुकता अंदर चल रहे खेल को देखने की हो उठी. एक झिरी सी ढूँढ कर मैंने अंदर का जायज़ा लिया. ओ तेरे की दो-दो घोड़ियाँ एक साथ एक ही घोड़े पे सवारी कर रही थी.

पापा इस समय मंझली चाची को घोड़ी बना कर सटासट पेल रहे थे. बड़ी चाची उनके बराबर में ही अपनी गान्ड औंधी कर घुटनों पर इंतजार कर रही थी. पापा अपने एक हाथ से बड़ी चाची की चौड़ी गान्ड पर हाथ फेरते जा रहे थे. कभी-कभी धक्के की लय पर उनकी गान्ड पर थाप भी लगा देते. बीच-बीच में अपनी दो उंगलियाँ बड़ी चाची की चूत में डाल देते, पापा के मुँह से बस हुन्न… हुन्न… जैसी आवाज़ें आ रही थी और वो दोनों घोड़ियाँ, मज़े से हिनहिना रही थी. कुछ देर में ही मंझली चाची ने हथियार डाल दिए और वो अपनी गान्ड के भूरे सुराख को सिकोड़ कर झड़ने लगी.

मंझली चाची – आआआईयईई.. आअहह… जेठ जी क्या खाते हो??? मेरी चूत तो अब पांच बार झड़ चुकी है… अब आप जीजी को संभलो.

पापा ने उनकी चूत से फच… कर के अपने लौड़े को बाहर खींचा और बड़ी चाची की गान्ड पर थपकी देते हुए नीचे लेट गये. इस उमर में भी पापा का खूँटा डंडे की तरह अकड़ कर ऊपर तरफ शान से खड़ा नई चूत का इंतजार कर रहा था. मंझली चाची की चूत रस से लवरेज़, जिसे देख कर बड़ी चाची उनका इशारा समझकर पापा के लौड़े को एक बार मुँह में लेकर चाटा और फिर अपनी धरा सी गान्ड लेकर उसके ऊपर सवार हो गयी.

बड़ी चाची - सस्सिईइ… आआहह… जेठ जी… कितना मज़ा आता है आपके मस्त लंड से चुद कर… उउउफफफ्फ़… मज़ा आ जाता है आपके लंड चूत में लेते ही…

बड़ी चाची सिसकारी भरते हुए लंड के ऊपर उठक बैठक करने लगी. चूत रस से गीला पापा का चमकता लंड किसी पिस्टन की तरह चाची की चूत में अंदर बाहर हो रहा था. इस नज़ारे ने मेरे सोए हुए लंड को पूरी तरह जगा दिया था. मैंने ज़्यादा देर वहाँ रुकना उचित नहीं समझा और लंड को पाजामे में ही उमेठ कर चुपचाप दबे पाँव वहाँ से खिसक लिया. इसका मतलब आख़िरकार पापा ने दोनों में सुलह करा ही दी. चलो अच्छा है, तीनों का भला हो रहा है और घर में सुख शांति कायम रहेगी. ये सोचता हुआ मैं घर की तरफ चल दिया..

मोहिनी भाभी इस समय अकेली किचन में स्लैब के सहारे खड़ी आटा गूंथ रही थी. फिटिंग वाली गाउन में उनकी मखमली मुलायम गान्ड रिदम के साथ हिलोरें ले रही थी. खेतों के गरमा-गरम चुदाई सीन को देखने के बाद से ही मेरे खून में वैसे ही गर्मी फैली हुई थी, अब ये नज़ारा देखते ही मेरे घोड़े ने हिनहिनाना शुरू कर दिया की अभी के अभी गाउन ऊपर करके डाल दे इस मक्खन जैसी गान्ड में मुझे. मैंने अपने लंड को नीचे को दबाते हुए उसे शांत करने की नाकाम कोशिश की और चुपके से भाभी के पीछे जाकर अपना लौड़ा उनकी गान्ड की दरार की सीध में रख कर उनको अपनी बाँहों में कस लिया. तीर एकदम सही निशाने पर लगा था. अपनी गान्ड के होल पर लंड की ठोकर वो भी अचानक से पाकर मोहिनी भाभी के रोंगटे खड़े हो गये, वो एकदम से सिहर कर आह भरते हुए पीछे को पलटी. बाँहों के घेरे की वजह से मोहिनी भाभी पलट तो नहीं पाई, लेकिन अपना मुँह मेरी तरफ मोड़ कर कुछ बोलना चाहती थी कि मैंने अपने तपते होंठ मोहिनी भाभी के लज्जत भरे होंठों पर टिका दिए. एक पल में ही भाभी की आँखों में गुलाबी डोरे तैरने लगे., मैंने अपना एक हाथ आगे से उनकी चूत पर ले जाकर उसे मुट्ठी में दबा लिया.

मोहिनी भाभी के मुँह से गुउन्ण. गगुउन्ण. जैसी आवाज़ें आने लगी. आटे से सने हाथों से वो कुछ तो कर नहीं सकती थी, फिर मैंने जैसे ही उनके होंठों को आज़ाद किया, वो झूठा गुस्सा जताकर बोली.

मोहिनी भाभी – गुंडे, बदमाश, मवाली… थोड़ी बहुत लाज शरम है कि नहीं, कम से कम इतना तो ख्याल करो, घर में इस समय सब लोग मौजूद हैं और एकदम से अटैक कर देते हो. अभी कोई देख ले तो??

उनकी बात सुनकर मैंने उन्हें अपने बंधन से मुक्त किया और अपने कान पकड़ कर बोला – सॉरी भाभी ग़लती हो गयी... माफ़ कर दो अपने अंकुश को.

मोहिनी भाभी – अंकुश के बच्चे… पता है तुमने क्या अनर्थ कर दिया?

मैं एकदम से घबरा गया और बोला – क्या हुआ भाभी?? कुछ गड़बड़ हो गयी क्या मुझसे???

मुझे घबराया देख कर मोहिनी भाभी के चेहरे पर अचानक से मुस्कान आ गयी और अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए शरारती स्वर में बोली – अंकुश तुमने मेरी चूत को गरम कर दिया है… मेरी चूत बेचारी गीली हो कर बहने लगी है… इसका क्या???

मैंने मोहिनी भाभी की चुचियों को पकड़ने के लिए हाथ आगे करते हुए कहा – लाओ आपकी चुदासी चूत को अभी शांत कर देता हूँ…

मोहिनी भाभी पीछे हटते हुए बोली – नहीं अभी रहने दो… रात में देखेंगे… ये बताओ तुम कहाँ चले गये थे??

मैं - मैं ज़रा खेतों की तरफ चला गया था…

फिर जैसे कुछ सोचते हुए मैंने कहा – भाभी, ज़रा पापा का अच्छे से ख़याल रखा करो.

मोहिनी भाभी मेरी बात सुनकर एकदम से चौंक पड़ी, अचानक ये बात मैंने उन्हें क्यों कही? तो थोड़ा असमंजस जैसी स्थित में आकर बोली – ये तुम्हें अचानक पापा का ख़याल रखने की बात क्यों सूझी?? क्या उन्होंने तुमसे कुछ कहा क्या?? या तुम्हें लगता है कि हम उनका अच्छे से ख़याल नहीं रखते???

उनकी दुविधा समझते हुए मैंने हँसते हुए कहा – अरे भाभी आप मेरी बात को अन्यथा मत लो… मैं तो बस मज़ाक में बोल रहा था और जानती हैं मैं ये क्यों कह रहा था?

मोहिनी भाभी मेरी तरफ सवालिया निगाहों से देखने लगी.

मैंने कहा - अब पापा एक साथ दो-दो घोड़ियों की सवारी करने लगे हैं.

मोहिनी भाभी चौंकते हुए बोली – क्या दो-घोड़ियों की सवारी मतलब? बुढ़ापे में घुड़सवारी करने का शौक चढ़ा है उनको??

मैं – अरे भाभी असली घोड़ी नहीं… अपने घर की वो दोनों घोड़ियाँ.

मोहिनी भाभी – ओह्ह्ह… तो ये बात है… मतलब बड़ी और मंझली चाची दोनों एक साथ???? पर तुमने कहाँ देख लिया उनको??

फिर मैंने उन्हें पूरी बात बताई, तो भाभी हँसते हुए बोली – बेटा तो बेटा बाप भी पक्का चोदू है…. हाहाहा….

इस बात पर हम दोनों खूब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे. हमें हँसते देखकर निशा हमारे पास आकर पूछने लगी कि हम इतने क्यों हंस रहे हैं??

मोहिनी भाभी – ये बच्चों को बताने लायक बात नहीं है.

निशा तुनकते हुए बोली –हुउन्न्ं दीदी! आप भी ना… मुझे अभी तक बच्चा ही समझती हैं, जबकि मैं खुद बच्चे की माँ बनने वाली हूँ.

मोहिनी भाभी ने छेड़ते हुए कहा – बनी तो नहीं ना?? जब बन जाएगी तो बड़ों में शामिल कर लेंगे… ओके??

निशा – हुउन्न्ं. बताओ ना प्लीज़ क्या बात है??

मोहिनी भाभी – अच्छा बाबा ठीक है… बता दो अंकुश इसे भी.

फिर मैंने निशा को भी बताया. निशा अपने मुँह पर हाथ रख कर बोली – हाय दीदी इनका तो खानदान ही बिगड़ा हुआ है…

इस बात पर हम तीनों ही हँसने लगे.

हँसी के बीच ही मोहिनी भाभी बोली – पूरा का पूरा खानदान तो नहीं… एक राजा रामचंद्र के पोते भी हैं इस घर में, जो अपनी ही बीवी से चार बार परमिशन मिलने पर ही चोदते हैं… हाहाहा….

मोहिनी भाभी का इशारा बड़े भैया की तरफ था. इस तरह हँसी ख़ुशी से ये दिन भी बीत गया था. अब रात का इंतजार था, जब हम तीनों प्रेमी एक साथ चुदाई करने वाले थे. वो रात भी आ गयी. निशा का ख़याल रखने के बहाने भाभी पूरी रात हमारे साथ ही रही, जमकर चुदाई अभियान चला, जमकर बारिश हुई. बस थोड़ा निशा को प्यार और एहतियात के साथ संतुष्ट किया, लेकिन मैंने और भाभी ने चुदाई की सारी हदें पार कर दी. जो तरीक़े किसी मूवी या किताब में भी नहीं देखे होंगे वो हमने आजमा लिए. दिनों-दिन गदराते जा रहे भाभी के बदन का अहसास होते ही मेरा लंड एक बार झड़ने के बाद जल्दी ही फिर से खड़ा हो जाता. गान्ड मराने के अलावा भाभी ने सारे आसान आजमा लिए, क्योंकि कहीं ना कहीं ये काम क्रीड़ा हमें अनैतिक लगती है, जो कि सत्य भी है. मैंने एक बुक में पढ़ा था, अकसर लगातार गुदा मैथुन करने से लिंग में इन्फेक्शन होने के चान्स बढ़ जाते हैं. गान्ड की अंदरूनी सतहों पर सफाई के बाद भी मैला चिपका रह जाता है. लंड जब ज़्यादा अंदर तक जाता है, तो उस मैला से उसकी नाज़ुक त्वचा पर कीटाणु लगे रह जाते हैं, जो अंदर ही अंदर लंड की मुलायम स्किन में इन्फेक्शन पैदा कर सकते हैं. वो अलहदा बात है कि कुछ लोग कहानी को ज़्यादा वल्गर और इंटरेस्टिंग बनाने के चक्कर में आदमी से मैला खिलवा भी देते हैं, जो वास्तविकता से बहुत दूर की बात हैं. एनीवेस, आख़िर उनकी चूत में ही लंड पेल कर हम सो गये और ये नया अनुभव हुआ कि वो जबतक अपनी सुरंग में रहा, तनकर खड़ा ही रहा. यही नहीं उनकी चूत भी गीली होती रही, तो जागते ही एक बार फिर से मैंने भाभी को जमकर चोद डाला.
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