thanks dearBhai apka boht boht shukriya apne ye story dobara continue ki me biht bara fan ho is story ka thnaks or bhai plz is story ko hinglish me likh lo ap ki bari mehrbani ho gi kyn k boht sare reader ko hindi nhe ati mjhe bhe nhe ati bohr mushkil ho rhe h story parhne ne
Ik bar phr apka boht boht shukriya
Lagta Hain ki pichhla update phir se repost kar diya hain aapne.अपडेट 127 -
निशा के यूँ घूरने से अज्जू कुछ ज्यादा ही अनकंफर्टेवल हो गया था, तभी अचानक निशा मुस्कुराने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली
निशा- मिस्टर अजय अगर आपको ऐसा ही लगता है कि आपके ही कारण मैं इस प्राब्लम में पडी हूँ, तो मेरी हेल्प करके आपने हिसाब बराबर कर दिया है। रही बात उस दिन मेरे आर्डर के डिसरिस्पेक्ट की…. तो वो सब मेरे प्लान का ही हिस्सा था, सच बात तो यह है कि मैं आपको या अपने किसी भी दूसरे ऐजेंट को इस मिशन पर कभी भेजना ही नहीं चाहती थी, पर चीफ ने मुझे आर्डर दिया था कि मैं इस मिशन पर नहीं जा सकती हूँ, लेकिन आपके मना करने के बाद मुझे उस मिशन पर जाने का एक बहाना मिल गया था। इसलिए जो हो गया सो हो गया…. अब उन बातों को भूल जाना ही बेहतर है। क्योंकि मैं आपको पहले ही माफ कर चुकी हूँ और उम्मीद करती हूँ कि मेरी बजह से आपको जो प्राब्लम हुई है, उसके लिऐ आप भी मुझे माफ कर देंगे।
निशा की बात सुनकर अज्जू खुश होते हुए बोला
अज्जू- तो इसका मतलब है कि अब हम दोनों दोस्तों की तरह एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
निशा- श्योर मिस्टर अजय….. पर मेरा मिजाज थोडा अलग तरह का है… आई होप फ्यूचर में भी आप मेरे स्ट्रिक्ट बिहेब को लेकर कभी बुरा नहीं मानेंगे।
अज्जू- बिल्कुल भी नहीं एजेंट जीरो…. और हो सकता है कि कुछ दिनों बाद मुझे भी अपने दूसरे साथियों की तरह आपके इस अलग मिजाज की आदत हो जाऐ। बैसे अब जब हम दोस्त बन ही चुके हैं तो क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ। इस तरह बार बार आपको ऐजेंट जीरो कहना मुझे थोडा ऑक्वर्ड लग रहा है।
निशा- मेरे कई सारे नाम और कई पहचाने हैं मिस्टर अजय….. लेकिन आप चाहें तो मुझे जोया कहकर बुला सकते हैं।
निशा की बात सुनकर अज्जू मन ही मन सोचने लगा कि
“शालीमार दीप पर इकराम ने भी ऐजेंट जीरो को कई बार जोया अप्पी कहकर बुलाया था। जिसका मतलब है कि ऐजेंट जीरो का असली नाम जोया है और शायद वो इकराम की बडी बहन भी है, तभी तो इकराम इन्हें बार बार अप्पी कहकर बुलाता है। लेकिन मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मैं एजेंट जीरो मतलब मिस जोया को पहले से ही जानता हूँ, पता नहीं क्यों पर मुझे मिस जोया से एक लग ही तरह का कनेक्शन फील हो रहा है।”
जहाँ एक तरफ अज्जू इस वक्त निशा की असली पहचान के बारे सोच रहा था, वहीं दूसरी तरफ मोनिका अज्जू और निशा के बीच चल रही बातों का मजा ले रही थी, पर फिर उसे याद आया कि वो वहाँ किस लिए आई थी, इसलिए वो निशा और अज्जू की बातों के बीच में आते हुए बोली
मोनिका- तो मिस्टर अजय अब जब आप जाग ही गए हैं तो क्या आप कुछ देर के लिए इस रूम से बाहर जाऐंगे, एक्चुअली मुझे ऐजेंट जीरो की बेंडेज और कपडे चेंज करने हैं।
मोनिका की बात सुनकर अज्जू को अपनी गलती का एहसास हुआ और वो तुरंत बोला
अज्जू- ओह आई एम सॉरी…
इतना बोलकर अज्जू जैसे ही उस कमरे से बाहर की तरफ जाने लगा, ठीक तभी निशा की आँखों के सामने इकराम का चेहरा आ गया। इकराम के बारे में याद आते ही निशा ने मोनिका से सबाल किया।
निशा- भाई मेरा मतलब इकराम दिखाई नहीं दे रहा… कहाँ है वो…..
इकराम की नाम सुनते ही मोनिका का चेहरा अचानक से सफेद पड गया, कुछ देर पहले निशा के होश में आने से उसके चेहरे पर जो मुक्कुराहट आई थी, वो अब गायब हो चुकी थी और उसकी जगह पर अब परेशानी साफ साफ दिखाई दे रही थी, वहीँ दूसरी तरफ अज्जू जो कमरे से बाहर जाने के लिए पहले ही दरवाजा खोल चुका था, वो भी इकराम का नाम सुनकर अपनी जगह पर पूरी तरह से फ्रिज गया। हाँलाकि अज्जू और मोनिका को इस बात का अंदाजा पहले से ही था कि निशा के होश में आते ही उन्हें इस सबाल का सामना करना ही पडेगा, पर अब तक उनके पास इस सबाल का कोई जबाब नहीं था। मोनिका और अज्जू के इस रिऐक्शन को देखकर निशा को समझते देर नहीं लगी कि जरूर इकराम के साथ कुछ गलत हुआ है। इसलिए निशा ने एक बार फिर जोर देते हुए अपना सबाल दोहराया
निशा- मोनिका मैं तुमसे कुछ पूछ रही हूँ…. आखिर इकराम कहाँ है…. वो ठीक तो है ना…
निशा के इस तरह अचानक गुस्सा करने से मोनिका थोडी डर गई थी, जिस कारण सच बोलने की उसकी हिम्मत ही नहीं हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ अज्जू मोनिका की कंडीशन अच्छी तरह से समझ रहा था, इसलिए वो निशा को टालते हुए बोला
अज्जू- मिस जोया पहले आप अपनी ड्रेसिंग चेंज करवा कर अपना ट्रीटमेंट ले लीजिए, उसके बाद हम तसल्ली से इस बारे में बात करेंगे।
अज्जू के इस गोलमाल जबाब को सुनकर निशा को दिल ही दिल में कुछ गलत होने का साफ साफ एहसास हो रहा था, हाँलाकि वो अपनी सुपर पॉवर का यूज करके मोनिका या फिर अज्जू का दिमाग पढकर सच जान सकती थी, लेकिन इस वक्त वो खुद भी गंभीर रूप से घायल थी, जिस कारण उसकी ज्यादातर सुपर पॉवर उसकी बॉडी को रिपेयर करने में खर्च हो रही थी, इसलिए वो इस वक्त किसी का दिमाग पढने की कंडीशन में नहीं थी, साथ ही साथ इस कंडीशन में अगर उसने अपनी सुपर पावर का यूज करने की कोशिश की तो अज्जू के सामने उसका राज खुलने का भी डर था। पर तभी उसे याद आया कि उसकी बनाई चिप की हेल्प से क्वीन हमेशा पूरे ऑपरेशन को बॉच करती रहती है और पूरे ऑपरेशन का बीडियो डाटा अपने पास सेव करके भी रखती है, जिसे केवल वो खुद या फिर रॉ चीफ ही एक्सेस कर सकते हैं। यह याद आते ही निशा जोर से चीखी
निशा- क्वीन…..
चूँकि अज्जू कमरे से बाहर जाने के लिए पहले ही दरवाजा खोल चुका था, जिस कारण निशा की आवाज उस कमरे से बाहर मौजूद दूसरे लोगों ने भी सुन ली थी, जिसे सुनकर सभी लोगों को पता चल गया कि निशा को होश आ चुका है। इसलिए हैडक्वाटर में मौजूद निशा की टीम के लगभग सभी मेंबर तुरंत भागते हुए उस कमरे के अंदर आ गए, जिनमें मोनू और रॉ चीफ भी सामिल थे। वहीं दूसरी तरफ निशा की कमांड सुनते ही क्वीन की एक 3D इमेज उस कमरे में दिखाई देने लगी। क्वीन को वहां देखकर उस कमरे में मौजूद सभी लोगों का दिल जोर जोर से धडकने लगा, क्योंकि उन्हें जिस बात का डर था, वो अब सच होने बाली थी, वहीं दूसरी तरफ क्वीन निशा को देखते हुए बोली
क्वीन- बैल्कम ऐजेंट जीरो…. आपको फिर से होश में आया हुआ देखकर मुझे बहुत खुशी हुई… कहिए मैं आपकी किस तरह मदद कर सकती हूँ।
क्वीन की बात सुनकर निशा ने उसे तुरंत आर्डर दिया
निशा- शालिमार दीप पर एसिड बॉम्ब ब्लास्ट के बाद क्या क्या हुआ था, मुझे सब कुछ जानना है…. अभी और इसी वक्त
निशा का ऑर्डर मिलते ही क्वीन ने कहा
क्वीन- ओक ऐजेंट जीरो
इतना बोलते ही क्वीन ने उस कमरे में लगी एक बडी सी एल.ई.डी. टी.बी को अपने कंट्रोल में ले लिया और उसपर शालीमार दीप पर हुए एसिड बॉम्ब ब्लास्ट के बाद का शीन दिखाने लगी, चूँकि उस वक्त तक निशा बेहोश हो चुकी थी, और शालीमार दीप पर निशा और इकराम केवल दो ही लोग मौजूद थे, जिनके दिमाग में वो चिप इंसर्ट की गई थी, जिससे क्वीन उनसे कनेक्ट रहती है। इसलिए क्वीन इस वक्त इकराम के द्वारा देखे गए विजुअल दिखा रही थी, टी.वी. पर दिखाई दिया कि किसी लडकी के चीखने की जोरदार आवाज सुनाई दी, जिसे सुनकर अचानक से इकराम की नींद खुल गई।
जागने के बाद इकराम ने चारों तरफ देखा तो उसे अपने पास ही नीचे फर्स पर दो इण्डियन साईंटिस्ट दिखाई दिए, जो खुद भी उस चीख को सुनकर जाग चुके थे, पर इकराम को वहाँ पर निशा कहीं भी दिखाई नहीं दे रही थी, इसलिए इकराम ने अपने पास में रखी पिस्टल उठाई और तेजी से गुफा के बाहर जा पहुँचा, वो इस वक्त झाडियों के पीछे छिपा हुआ, वाहर का नजारा देख रहा था, उसने देखा कि झील के पास गाडे हरे रंग का धुँआ फैला हुआ है, जिसके अंदर से एक लडकी के चीखने की आवाज आ रही है, अगले ही पल वो लडकी झील के अंदर कूद गई।
उसके बाद जंगल में किसी आदमी के हंसने की जोरदार आवाज सुनाई दी, उसने गालियाँ बकते हुए अपने साथियों से झील के अंदर गिरी लडकी को बाहर लाने का आर्डर दिया।कुछ देर बाद ही इकराम ने देखा कि दो आदमी जिन्होंने पी.पी.ई. किट पहनी हुई थी, वो उस झील के अंदर गए और उसमें से एक लडकी को किसी लाश की तरह खींचले हुए बाहर ले आऐ, उस लडकी का शरीर एसिड की बजह से लगभग पूरी तरह से जल चुका था, लेकिन वो अब भी जिंदा दी, जिसे देखकर दुशमनों का लीडर बिल्कुल भी खुश नहीं था, उसके बाद उस आदमी ने लडकी की बॉडी अपने अड्डे पर लाने का आर्डर दिया और वहाँ से अपने ज्यादातर साथियों को लेकर निकल गया।
उस लीडर के जाने के बाद वहाँ पर वस 8 आदमी ही बचे थे, जिनमें से 6 आदमी सिक्योरिटी गार्ड की तरह दिखाई दे रहे थे, जिन्होंने इस वक्त अपने हाथों में रायफल पकडी हुई थी, जबकी 2 आदमी वही दोनों आदमी थे, जिन्होंने इस वक्त पी.पी.ई. किट पहनी हुई थी और जो निशा को झील से बाहर लेकर आऐ थे, उन लोगों ने निशा को ताबूत की तरह दिखने बाले एक लकडी के बॉक्स के अंदर रखा और फिर अपना मास्क उतारकर उस ताबूत को लेकर पैदल ही अपने अड्डे की तरफ चल पडे, इकराम लगातार उन लोगों का पीछा कर रहा था, कुछ दूर जाने के बाद इकराम ने उन लोगों को एक एक करके जान से मार दिया और निशा को अपने साथ बापिस उस गुफा के पास ले आया।
जहाँ वो निशा को लेकर झऱने के नीचे जाकर खडा हो गया, ताकि उसकी बॉडी से बचा कुचा एसिड भी धुल जाऐ, उसके बाद वो निशा को बापिस गुफा के अंदर ले गया और उसे लिटाने के बाद इसने निशा को चादर से अच्छी तरह ढंक दिया, फिर इकराम ने उन दोनों साईँटिस्ट की अच्छी तरह से तलासी लेने के बाद उनसे पूछताछ की, लेकिन जब उन लोगों से इकराम को कुछ भी पता नहीं चला तो वो गुफा के बाहर चला गया, जहाँ उसने झील के पास से निशा के कपडे उठाऐ। लेकिन बापिस आते वक्त उसे झाडियों के पास एक छोटा सा ट्रांशमीटर दिखाई दिया, जिसे इकराम ने एक छोटे से पत्थर की हेल्प से तोड दिया था, जिसके बाद इकराम गुफा में बापिस आ गया।
गुफा में बापिस आकर इकराम ने निशा का सारा सामान अपने बैग में सुरक्षित तरीके से संभाल कर रख लिया और फिर वो जैसे ही उन साईंटिस्ट से दोबारा पूछताछ करने बाला था, ठीक तभी उसे निशा के कराहने की हल्कि सी आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वो निशा के पास चला गया और उससे बातें करने लगा, जहाँ निशा उसे उन दोनों साईंटिस्ट को अपने साथ वहाँ से बापिस इण्डिया ले जाने के लिए बोल रही थी और दर्द से तडपते हुए अपने आप को जान से मारने की रिक्वेस्ट कर रही थी। वो सारा सीन देखकर ना चाहते हुए भी उस कमरे में मौजूद सभी लोगों की आँखों में आंशू आ चुके थे।
तभी उस कमरे में गोली चलने की एक आवाज सुनाई दी, जिसे सुनकर कमरे के अंदर मौजूद सभी लोग बुरी तरह से डर गए, पर अगले ही पल उन लोगों ने देखा कि इकराम ने दुख और हताशा में निशा की जगह सामने बाली दीवाल पर गोली चलाई थी, शायद इकराम अपने अंदर निशा के आर्डर को पूरा करने की हिम्मत जुटा ही नहीं पाया था। इकराम अभी अपने अंदर चल रहे इमोशंस से जूझ ही रहा था कि तभी उसे गुफा के बाहर हलचल सुनाई दी, जिस कारण वो एकबार फिर गुफा के बाहर निकल गया, जहाँ उसे अज्जू, मोनू और बाकी के लोग दिखाई दिए, अपने साथियों को वहां देखकर इकराम जो अब तक किसी भी तरह से अपने आपको संभाले हुए था, वो पूरी तरह से टूट गया और अज्जू के पैरों में गिरकर निशा को बचाने की भीख माँगने लगा,
वो सारा सीन काफी ज्यादा इमोशनल करने बाला था, उस कमरे में मौजूद ज्यादातर लोग वो सब पहले ही अपनी आँखों से देख चुके थे, लेकिन टी.वी. पर एक बार फिर वो सब देखकर उन्हें सारी घटना फिर याद आ गई थी, आखिरकार इकराम ने अपने आपको संभाला और फिर वो अपने साथियों को गुफा के अंदर लेकर आया, जहाँ सारी सिचुऐशन देखने के बाद अज्जू ने रेसक्यू ऑपरेशन की पूरी कमांड अपने हाथों में ले ली और अपने कुछ साथियों को हैलीकॉप्टर लैंड होने की जगह सर्च करने और तुरंत हैलीकॉप्टर बुलाने के लिए भेज दिया। उन लोगों के जाते ही अचानक इकराम बेहोश होकर नीचे जमीन पर जा गिरा।
इकराम के बेहोश होने के बाद क्वीन हिना के द्वारा देखे गए विजुअल्स दिखाने लगी, क्योंकि हिना ही एक मात्र वो इंशान थी, जो आखिर तक इकराम के साथ रही थी, इकराम के बेहोश होने के बाद मोनू और हिना ने इकराम के कपडे उतार कर चैक किया तो उन्हें पता चला कि इकराम की बॉडी भी निशा की तरह एसिड के कारण पूरी तरह से जल चुकी है, जब इकराम को होश आया तो सबको इसका असली कारण पता चला। सारी बात जानने के बाद वो लोग वहां से निकलने की तैयारी करने लगे, तभी कमरे में ौमौजूद सभी लोगों ने देखा कि अज्जू ने निशा को अपनी बाहों में उठाया हुआ है, ठीक उसी वक्त कुछ पलों के लिए निशा को फिर से होश आया था और उसने बुदबुदाकर कुछ कहने की कोशिश भी की थी।
लेकिन निशा ने क्या कहा था, यह किसी को पता नहीं चला। निशा ने भी उस वक्त राहत की एक लम्बी सांस ली, क्योंकि उसका राज सबके सामने बस खुलने ही बाला था, लेकिन किस्मत से उसके मूंह से निकला वो शब्द इतना धीमा था कि किसी को वो सुनाई ही नहीं दिया। निशा ने अपने दिमाग में चल रही बातों को झटका और दोबारा से टी.बी. स्क्रीन को देखने लगी, उसने देखा कि गुफा के बाहर आते ही उन लोगों पर दुशमनों ने एक बार फिर हमला कर दिया था, जहाँ उसने देखा कि कुछ लोगों ने उसे और अज्जू को निशाना बनाकर गोलियाँ चलाईँ थीं, लेकिन ऐन वक्त पर इकराम उनके सामने आ गया और सारी गोलियाँ अपने सीने पर ले लीं। यह सीन देखते ही उस कमरे में निशा की जोरदार चीख गूँज उठी
निशा- नहींहींहीहींहीं………….. नहीं भाई नहीं…… ऐ तुमने क्या किया………
निशा के यूँ चीखते ही सभी लोगों का ध्यान फिर से निशा पर चला गया, जिसकी आंखों में इस वक्त आँशू थे, लेकिन वो चाहकर भी निशा को दिलासा नहीं दे सकते थे, क्योंकि जो कुछ भी हुआ था, उसकी बजह से वो लोग खुद भी काफी ज्यादा दुखी थे,
कहानी जारी है...........