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kshahzad55

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Bhai apka boht boht shukriya apne ye story dobara continue ki me biht bara fan ho is story ka thnaks or bhai plz is story ko hinglish me likh lo ap ki bari mehrbani ho gi kyn k boht sare reader ko hindi nhe ati mjhe bhe nhe ati bohr mushkil ho rhe h story parhne ne
Ik bar phr apka boht boht shukriya
 
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redhat.ag

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Bhai apka boht boht shukriya apne ye story dobara continue ki me biht bara fan ho is story ka thnaks or bhai plz is story ko hinglish me likh lo ap ki bari mehrbani ho gi kyn k boht sare reader ko hindi nhe ati mjhe bhe nhe ati bohr mushkil ho rhe h story parhne ne
Ik bar phr apka boht boht shukriya
thanks dear

bhai asal baat to yah he, ki pichhle kuchh saalo se me regular hindi font me typing kar raha hu, is liye hinglish typing me mujhe kaafi jyada problam ho rahi he..... ek chhota sa update type karne me bhi mujhe ghanto lag jaye he. bu isiliye hindi font me type kar raha hu.... bese mene apni english typing ki dobara se practice karni suru kar di he. jese hi meri english typing theek ho jayegi me hinglish me story post karne lagunga
 
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redhat.ag

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अपडेट 128 -

अगले ही पल सभी लोगों का ध्यान फिर से टी.वी. स्क्रीन पर चला गया, जिसमें इस वक्त इकराम अज्जू से बहस कर रहा था, कुछ देर चली इस बहस के बाद सभी लोगों ने देखा कि अज्जू निशा को लेकर वहाँ से चला गया और उसके साथ मोनू भी उन दोनों साईंटिस्ट को अपने साथ लेकर वहाँ से चला गया था, जबकि हिना वहीँ इकराम के साथ रूककर दुशमनों को ठिकाने लगा रही थी। सारे दुशमनों को खत्म करने के बाद वो लोग भी हैलीकॉप्टर के पास आ गए जहाँ इकराम एक बार फिर बेहोश हो गया था। यह सब देखते ही निशा एक बार फिर गुस्से में चीखी

निशा- बस बहुत हुआ…. अब मैं यह सब और नहीं देख सकती

निशा की बात सुनते ही क्वीन ने टी.बी. ऑफ कर दी, वहीं दूसरी तरफ निशा बिस्तर से उठने की कोशिश करने लगी, निशा को यूँ उठता देख मोनिका तुरंत उसके पास आई और उसे रोकते हुए बोली

मोनिका- ऐ आप क्या कर रहीं हैं मैम…. आपकी कंडीशन अभी बिल्कुल भी ठीक नहीं है

मोनिका की बात सुनकर निशा गुस्से में फुंफकारते हुए बोली

निशा- जहाँ एक तरफ मेरा भाई मौत से लड रहा है, वहाँ तुम मुझसे आराम करने के लिए आखिर कैसे कह सकती हो… मैं जा रही हूँ अपने भाई के पास…. इस वक्त उसे मेरी जरूरत है….

निशा की बात सुनकर अज्जू एक बार फिर उसके पास आया और उसे समझाते हुए बोला

अज्जू- मिस जोया…. अपने आपको संभालिए….

अज्जू की बात सुनकर निशा गुस्से में उसे डांटते हुए बोली

निशा- कैसे…. आखिर कैसे संभालूं मैं अपने आपको….. आखिर यह सब देखने के बाद कोई बहन अपने आपको कैसे संभाल सकती है। लेकिन तुम्हें तो सब कुछ पता था ना मिस्टर अजय…. फिर तुमने पहले ही मुझे सब कुछ सच सच क्यों नहीं बताया। आखिर तुम लोग मुझे बताते क्यों नहीं कि इकराम इस वक्त कहाँ है….. वो जिंदा भी है या नहीं…. आखिर तुम लोग मुझसे सच क्यों छिपा रहे हो….

निशा की ऐसी हालत देखकर सभी लोग काफी ज्यादा दुखी थे, उन्होंने पहली बार अपनी बॉस यानि ऐजेंट जीरो को इतना ज्यादा इमोशनल होते हुए देखा था, पर सच्चाई तो यह थी कि वो लोग खुद भी उतना ही दुखी थे, लेकिन इस बात के लिए नहीं कि इकराम ऐजेंट जीरो को बचाने के लिए मौत के इतने करीब पहुँच गया है और ना ही इस बात के लिए कि ऐजेंट जीरो इकराम को अपने भाई की तरह मानती है और उसकी इतनी परवाह करती हैं, बल्कि इस बात को लेकर वो लोग दुखी थे कि इकराम की तरह उन्हें भी ऐजेंट जीरो के लिए कुछ करने का मौका आखिर क्यों नहीं मिला है। आखिरकार उस बिगडती सिचुऐशन को संभालने के लिए रॉ चीफ मि. प्रभू आगे आऐ और निशा को समझाते हुए बोले

मि. प्रभू- शांत हो जाओ मेरी बच्ची, तुम्हारा इस हालत में स्ट्रैश लेना बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

ऑपरेशन के दौरान इकराम के साथ जो कुछ भी हुआ था, उसे देखकर निशा इस वक्त भूल ही चुकी थी कि वो इस वक्त रॉ हैडक्वाटर में अपनी पूरी टीम के साथ मौजूद है, और इस वक्त मि. प्रभू उसके अंकल नहीं बल्कि रॉ चीफ हैं। इसलिए मि. प्रभू की बात सुनकर निशा गुस्से में बिफरते हुए बोली

निशा- यह आप कैसी बात कर रहें हैं अंकल…. मैंने देखा कि मेरे भाई को गोलियाँ लगीं थीं और आप बोल रहे हैं कि मैं स्ट्रैश ना लूँ… अंकल आप ही बताईऐ भला कोई बहन अपने भाई को इस हालत में देखकर नॉर्मल कैसे रह सकती है।

मि. प्रभू- बेटा मैं तुम्हारी फीलिंग समझ रहा हूँ…. मैं तो बस इतना बोल रहा हूँ कि तुम एक बार ठण्डे दिमाग से मेरी बात सुनो, इस तरह परेशान होने से कोई फायदा नहीं है, बैसे भी जो हो चुका है, उसे कोई भी नहीं बदल सकता।

निशा- आखिर आपके कहने का क्या मतलब है अंकल…. क्या इकराम भाई…..

निशा की बात पूरी होने से पहले ही मि. प्रभू उसे बीच में टोकते हुए बोले….

मि. प्रभू- नहीं मेरे बच्चे कुछ भी उल्टा सीधा सोचने की जरूरत नहीं है…. इकराम जिंदा है और यहीं पर उसका ट्रीटमेंट भी चल रहा है।

मि. प्रभू की बात सुनकर निशा ने राहत की सांस ली और कुछ देर रिलेक्स होने के बाद बोली

निशा- थैंक्स गॉड मैं तो डर ही गई थी अंकल…. बैसे अब वो कैसा है… क्या मैं उससे मिल सकती हूँ।

निशा की बात सुनकर एक बार फिर सबके चेहरे लटक गऐ, क्योंकि निशा इस वक्त जो पूछ रही थी, उसी बात को सभी लोग फिलहाल निशा से छिपाना चाहते थे, लेकिन अब सिचुऐशन ऐसी बन गई थी कि निशा से कुछ भी छिपाना पॉसिवल नहीं था, अगर वो लोग निशा को सच ना भी बताऐं तो वो क्वीन की हेल्प से इकराम के बारे में सब कुछ पता कर सकती थी, जिस कारण मि. प्रभू को अब निशा से कुछ भी छिपाना ठीक नहीं लग रहा था। इसलिए वो निशा को समझाते हुऐ बोले

मि. प्रभू- देखो मेरी बच्ची इकराम की कंडीशन बिल्कुल भी ठीक नहीं है…. उसे इस वक्त लाईफ सेविंग मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। असल में तुम किस्मत बाली हो कि उस एसिड ने केवल तुम्हारी स्किन को ही नुकशान पहूँचाया था, लेकिन इकराम इतना लकी नहीं था, तुम्हारी बॉडी से एसिड को धोते वक्त वो एसिड इकराम की बा़डी ने सोख लिया था, जिस कारण उसकी बॉडी के कई आर्गन पूरी तरह से गल गए हैं, उपर से उसे कई सारी गोलियाँ भी लगीं थीं, जिन्होंने इकराम के नाजुक अंगों को काफी ज्यादा नुकशान पहुँचाया है। फिलहाल हम उसे लाईफ सेविंग आर्टिफीशियल आर्गन की मदद से किसी तरह जिंदा रखने में कामयाब रहे हैं। पर हम ज्यादा समय तक उसे मशीनों की हेल्प से जिंदा नहीं रख सकते। उसकी बॉडी लगभग पूरी तरह से डैमेज हो चुकी है, जिसे रिकरवर किया जाना पॉसिबल नहीं है, लेकिन अगर किसी तरह चमत्कार हो भी गया और इकराम सरवाईब कर गया, तो भी उसे सारी जिंदगी लाईफ सेविंग मशीनों के सहारे ही रहना होगा।

मि. प्रभू की बात सुनकर निशा को ऐसा लगा जैसे किसी ने बेरहमी से उसके दिल को मसल दिया हो, उसे पता ही नहीं चला कि कब उसकी आँखों से आँशू बहने लगे थे, हाँलाकि इस वक्त वो पूरी तरह से शांत दिखाई दे रही थी, पर उसके दिल और दिमाग में इस वक्त कई सारे इमोंशन की बाढ सी आ हुई थी। कुछ देर बात अपने इमोशंन को जैसे तैसे कंट्रोल करने के बाद निशा ने कहा

निशा- अगर ऐसा है तो हम उसे सारी जिंदगी ऐसे ही मशीनों के सहारे जिंदा रखेंगे।

मि. प्रभू- बेटा इस तरह हम बस उसकी तकलीफों को और ज्यादा बढाने का काम करेंगे, वो एक सच्चा सिपाही है, उसे सम्मान की मौत मरने दो मेरी बच्ची, उसे लचारी भरी जिंदगी देना बिल्कुल भी ठीक नहीं है। चूँकि हमें बहुत पहले ही उसे इस दर्द से आजाद कर देना चाहिए था, लेकिन मैं चाहता था कि तुम आखिरी बार अपने भाई को अलविदा कह सको, बस इसीलिए हम लोग अब तक उसे किसी तरह जिंदा रखे हुए हैं। हाँलाकि तुम उसके परिवार की एकमात्र सदस्य हो, इसलिए उसके साथ आगे क्या करना है, इसका फैसला अब तुम्हें ही करना है।

मि. प्रभू की बात सुनकर निशा ने थोडे कठोर स्वर में जबाब दिया

निशा- मैं अपना फैसला पहले ही आप लोगों को बता चुकी हूँ….. मुझे चाहे जो करना पडे लेकिन मैं इकराम को ऐसे मरने नहीं दे सकती….. मैं इतनी जल्दी गिवअप नहीं करूँगी अंकल… मेरे भाई को फिर से पहले जैसा करने का मैं कोई ना कोई रास्ता खोज लूँगी… मुझे बस कुछ वक्त की जरूरत है…..

निशा की बात सुनकर किसी के पास भी कहने के लिए कुछ नहीं बचा था। इसलिए सभी लोग किसी बुत की तरह शांत खडे रहे। आखिरकार निशा उस खामोशी को भंग करते हुए बोली

निशा- मुझे अभी और इसी वक्त अपने भाई से मिलना है….

इतना बोलकर निशा ने एक नजर मोनिका पर डाली और उससे बोली

निशा- मोनिका प्लीज मुझे इकराम के पास ले चलो…. जब तक मैं उसे अपनी आँखों से नहीं देख लूँगी तब तक मुझे शांति नहीं मिलेगी।

निशा की बात सुनकर मोनिका ने कहा

मोनिका- ठीक है मैम मैं आपको इकराम के पास ले चलूँगी, पर आपका प्रापर ट्रीटमेंट करने और आपकी ड्रेसिंग चेंज करने के बाद।

निशा- नहीं वो सब तुम बाद में करती रहना…. प्लीज पहले मुझे मेरे भाई के पास ले चलो… उसके बाद तुम्हें मेरे साथ जो करना है करती रहना…. मैं तुमसे कुछ भी नहीं कहूँगी।

निशा केे इस तरह रिक्वेस्सट करने पर आखिरकार मोनिका अपने हथियार डालते हुए बोली

मोनिका- ठीक है मैम मैं आपको इकराम के पास ले चलती हूँ। पर आपको वादा करना होगा कि आप अपने इमोशंस पर कंट्रोल रखेंगी, हम सबको आपकी जरूरत है, रॉ को और इस देश को आपकी जरूरत है… अगर आप ही इस तरह टूट जाऐंगी तो हमारा क्या होगा मैम….. आपके बिना हमारी पूरी टीम बिखर जाऐगी….. बैसे भी अगर आप सच में इकराम को बचाना चाहती हैं तो आपका मैंटली स्ट्रांग होना बहुत जरूरी है।

निशा इस वक्त बात को लम्बा खींचने के बिल्कुल भी मूढ में नहीं थी, इसलिए वो मोनिका को टालते हुए बोली

निशा- हां हाँ ठीक है मोनिका मैं तुम्हारी बात समझ गई… मैं वादा करती हूँ कि मैं अपने इमोशन को पूरी तरह से कंट्रोल करके रखूँगी…. क्या अब तुम मुझे इकराम के पास ले जा सकती हो।

मोनिका के पास अब और कोई रास्ता नहीं बचा था, इसलिए उसने निशा को खडे होने में मदद की और फिर उसे सहारा देकर इकराम के वार्ड की तरफ ले जाने लगी, हाँलाकि निशा की कंडीशन को देखते हुए बाकी लोगों की उसके साथ जाने की बिल्कुल भी हिम्मत नहीं हो रही थी, लेकिन मि. प्रभू, अज्जू और मोनू अपने आपको निशा के साथ इकराम के पास जाने से नहीं रोक पाऐ और वो भी निशा के साथ साथ इकराम के वार्ड की तरफ बड गए। असल में उन्हें डर था कि निशा कहीं इकराम की कंडीशन देखकर आऊट ऑफ कंट्रोल ना हो जाऐ। ऐसी स्थिती में मोनिका अकेली निशा को संभाल नहीं पाऐगी, इसलिए स्थिती को संभालने के लिए कुछ लोगों का उनके साथ होना जरूरी था।

निशा के बार्ड से थोडी दूर ही इकराम का वार्ड था, जब निशा उस वार्ड के अंदर पहुँची तो उसने देखा कि इकराम इस वक्त एक बडे से हाईटैक बैंटीलेटर पर लेटा हुआ है। लेकिन उसकी हालत इस वक्त बुरी तरह से खराब है। इकराम के सीने से लेकर कमर तक कि स्किन को काटकर उसकी बॉडी से अलग कर दिया गया था, शायद वो एसिड के कारण पूरी तरह से डैमेज हो गई थी। इकराम के सीने और पेट पर स्किन ना होने के कारण उसके इंटर्नल आर्गन साफ साफ दिकाई दे रहे थे, जो कि एसिड की बजह से गलने और गोलियाँ लगने से बुरी तरह से डैमेज हो गए थे, एक तरह से इकराम के लगभग सभी आर्गन फेल हो चुके थे, यहाँ तक कि उसका दिल भी बुरी तरह से डैमेज हो गया था।

इसलिए इकराम को किसी तरह जिंदा रखने के लिए उसकी बॉडी से ढेर सारी प्लास्टिक की नलियाँ जोडीं गईं थीं, जो आर्टिफीसियल आर्गन की मदद से उसके मस्तिस्क और बाकी बॉडी पार्टस् तक ब्लड एवं दूसरे जरूरी लिक्विड पहुँचा रहे थे। इकराम की इस हालत को देखकर निशा समझ चुकी थी कि अब उसे बचाना लगभग असंभव है। अगर एक पल के लिए भी इकराम की बॉडी से जुडी मशीनों को बंद कर दिया गया तो इकराम की तुरंत मौत हो जाऐगी। लेकिन निशा अब भी हार नहीं मानना चाहती थी, क्योंकि जब वो इसिड बॉम्ब से बुरी तरह घायल हो गई थी और उसे यकीन हो गया था कि अब वो जिंदा नहीं बचेगी। उस कंडीशन में इकराम ने भी उसपर गिवअप नहीं किया था, तो फिर वो इकराम के लिए गिवअप कैसे कर सकती थी।

इकराम को इस हालत में देखकर निशा की आँखों से लगातार आँशू बह रहे थे, हाँलाकि वो जानती थी कि इस वक्त वो इकराम की कोई मदद नहीं कर सकती है, क्योंकि अभी तक मेडिकल फील्ड में ऐसी कोई तकनीक मौजूद नहीं है जो इकराम को पूरी तरह से ठीक कर सके, लेकिन उसे पूरा यकीन था कि फ्यूचर में इकराम को बचाने का जरूर कोई ना कोई रास्ता निकल आऐगा। तभी अचानक निशा को उम्मीद की एक किरण नजर आई, वो अपने आँशुओं को पोंछते हुए मोनिका से बोली

निशा- मोनिका क्या हम इकराम के आर्गन ट्रांशप्लांट करके उसे फिर से ठीक नहीं कर सकते हैं।

निशा का सबाल सुनकर मोनिका थोडा हिचकिचाते हुए बोली

मोनिका- यह पॉसिवल नहीं है मैम… असल में इकराम के लगभग सभी आर्गन बेकार हो चुके हैं। इसलिए हमें एक तरह से इकराम की फुल बॉ़डी ट्रांशप्लांट करनी पडेगी। बैसे भी इकराम का ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव है। अब आप तो जानती ही हैं कि ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप काफी ज्यादा रेयर होता है। इसलिए इतनी जल्दी इकराम के लिए सारे आर्गन का इंतजाम करना लगभग नामुमकिन है। बैसे भी किसी इंशान के लगभग सभी आर्गन रीप्लेश करना काफी ज्यादा रिस्की काम है, और अगर हमने किसी तरह इकराम के सारे आर्गन ट्रांशप्लॉंट कर भी दिए, तो भी उसके जिंदा बचने की संभावना लगभग ना के बराबर है। क्योंकि कई बार किसी इंशान की बॉडी दूसरे इंशान के आर्गन को एक्सेप्ट नहीं करती है। इसलिए अगर हमसे जरा सी भी चूक हो गई, तो हमारी सारी मेहनत बेकार चली जाऐगी।

मोनिका की बात सुनकर निशा एक बार फिर पूरी तरह से निराश हो चुकी थी, लेकिन अब भी उसका दिल उसे हार ना मानने के लिए कह रहा था। वो धीरे धीरे लडखडाते कदमों के साथ इकराम के एकदम पास जा पहुँची, जो इस वक्त कोमा में था, इकराम के पास पहुँचकर निशा ने उसके एक हाथ को अपने दोनों हाथों से पकडकर बडे ही प्यार और मासूमियत के साथ उससे कहा

निशा- भाई प्लीज हार मत मानना… मैं वादा करती हूँ कि तुम्हें पहले की तरह बिल्कुल ठीक करने का मैं कोई ना कोई रास्ता जरूर ढूंड लूँगी…. तुम बस मेरा इंतजार करना भाई….. तुम्हें याद है ना कि तुमने हमेशा मेरा साथ देने का और मेरे अधूरे कामों को पूरा करने का वादा किया है, और तुमने मुझसे यह भी तो कहा था कि तुम एक सच्चे पठान हो और पठान कभी अपना वादा नहीं तोडते, और तुम्हें याद है ना जब मैंने तुमसे शादी करने के लिए कहा था, तब तुमने मुझसे कहा था कि जब तक मेरा घर नहीं बस जाता, तब तक तुम शादी नहीं करोगे, क्योंकि एक लडकी के पास केवल दो ठिकाने होते हैं, एक उसके पति का घऱ और दूसरा उसके भाई का घर, देखो भाई मेरा घर अभी नहीं वासा है, तो फिर तुम मुझे इस तरह अकेला छोडकर कैसे जा सकते हो भाई……

निशा की इन बातों को सुनकर वहाँ मौजूद हर एक इंशान की आँखों में इस वक्त आँशू थे, उन्हें इस बात का एसहास हो चुका था कि निशा और इकराम सगे भाई बहन से बडकर हैं और उनका एक दूसरे के लिए प्यार बिल्कुल पवित्र है।

कहानी जारी है.........
 
Last edited:

Raj Singh

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अपडेट 127 -

निशा के यूँ घूरने से अज्जू कुछ ज्यादा ही अनकंफर्टेवल हो गया था, तभी अचानक निशा मुस्कुराने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली

निशा- मिस्टर अजय अगर आपको ऐसा ही लगता है कि आपके ही कारण मैं इस प्राब्लम में पडी हूँ, तो मेरी हेल्प करके आपने हिसाब बराबर कर दिया है। रही बात उस दिन मेरे आर्डर के डिसरिस्पेक्ट की…. तो वो सब मेरे प्लान का ही हिस्सा था, सच बात तो यह है कि मैं आपको या अपने किसी भी दूसरे ऐजेंट को इस मिशन पर कभी भेजना ही नहीं चाहती थी, पर चीफ ने मुझे आर्डर दिया था कि मैं इस मिशन पर नहीं जा सकती हूँ, लेकिन आपके मना करने के बाद मुझे उस मिशन पर जाने का एक बहाना मिल गया था। इसलिए जो हो गया सो हो गया…. अब उन बातों को भूल जाना ही बेहतर है। क्योंकि मैं आपको पहले ही माफ कर चुकी हूँ और उम्मीद करती हूँ कि मेरी बजह से आपको जो प्राब्लम हुई है, उसके लिऐ आप भी मुझे माफ कर देंगे।

निशा की बात सुनकर अज्जू खुश होते हुए बोला

अज्जू- तो इसका मतलब है कि अब हम दोनों दोस्तों की तरह एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं।

निशा- श्योर मिस्टर अजय….. पर मेरा मिजाज थोडा अलग तरह का है… आई होप फ्यूचर में भी आप मेरे स्ट्रिक्ट बिहेब को लेकर कभी बुरा नहीं मानेंगे।

अज्जू- बिल्कुल भी नहीं एजेंट जीरो…. और हो सकता है कि कुछ दिनों बाद मुझे भी अपने दूसरे साथियों की तरह आपके इस अलग मिजाज की आदत हो जाऐ। बैसे अब जब हम दोस्त बन ही चुके हैं तो क्या मैं आपका नाम जान सकता हूँ। इस तरह बार बार आपको ऐजेंट जीरो कहना मुझे थोडा ऑक्वर्ड लग रहा है।

निशा- मेरे कई सारे नाम और कई पहचाने हैं मिस्टर अजय….. लेकिन आप चाहें तो मुझे जोया कहकर बुला सकते हैं।

निशा की बात सुनकर अज्जू मन ही मन सोचने लगा कि

“शालीमार दीप पर इकराम ने भी ऐजेंट जीरो को कई बार जोया अप्पी कहकर बुलाया था। जिसका मतलब है कि ऐजेंट जीरो का असली नाम जोया है और शायद वो इकराम की बडी बहन भी है, तभी तो इकराम इन्हें बार बार अप्पी कहकर बुलाता है। लेकिन मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मैं एजेंट जीरो मतलब मिस जोया को पहले से ही जानता हूँ, पता नहीं क्यों पर मुझे मिस जोया से एक लग ही तरह का कनेक्शन फील हो रहा है।”

जहाँ एक तरफ अज्जू इस वक्त निशा की असली पहचान के बारे सोच रहा था, वहीं दूसरी तरफ मोनिका अज्जू और निशा के बीच चल रही बातों का मजा ले रही थी, पर फिर उसे याद आया कि वो वहाँ किस लिए आई थी, इसलिए वो निशा और अज्जू की बातों के बीच में आते हुए बोली

मोनिका- तो मिस्टर अजय अब जब आप जाग ही गए हैं तो क्या आप कुछ देर के लिए इस रूम से बाहर जाऐंगे, एक्चुअली मुझे ऐजेंट जीरो की बेंडेज और कपडे चेंज करने हैं।

मोनिका की बात सुनकर अज्जू को अपनी गलती का एहसास हुआ और वो तुरंत बोला

अज्जू- ओह आई एम सॉरी…

इतना बोलकर अज्जू जैसे ही उस कमरे से बाहर की तरफ जाने लगा, ठीक तभी निशा की आँखों के सामने इकराम का चेहरा आ गया। इकराम के बारे में याद आते ही निशा ने मोनिका से सबाल किया।

निशा- भाई मेरा मतलब इकराम दिखाई नहीं दे रहा… कहाँ है वो…..

इकराम की नाम सुनते ही मोनिका का चेहरा अचानक से सफेद पड गया, कुछ देर पहले निशा के होश में आने से उसके चेहरे पर जो मुक्कुराहट आई थी, वो अब गायब हो चुकी थी और उसकी जगह पर अब परेशानी साफ साफ दिखाई दे रही थी, वहीँ दूसरी तरफ अज्जू जो कमरे से बाहर जाने के लिए पहले ही दरवाजा खोल चुका था, वो भी इकराम का नाम सुनकर अपनी जगह पर पूरी तरह से फ्रिज गया। हाँलाकि अज्जू और मोनिका को इस बात का अंदाजा पहले से ही था कि निशा के होश में आते ही उन्हें इस सबाल का सामना करना ही पडेगा, पर अब तक उनके पास इस सबाल का कोई जबाब नहीं था। मोनिका और अज्जू के इस रिऐक्शन को देखकर निशा को समझते देर नहीं लगी कि जरूर इकराम के साथ कुछ गलत हुआ है। इसलिए निशा ने एक बार फिर जोर देते हुए अपना सबाल दोहराया

निशा- मोनिका मैं तुमसे कुछ पूछ रही हूँ…. आखिर इकराम कहाँ है…. वो ठीक तो है ना…

निशा के इस तरह अचानक गुस्सा करने से मोनिका थोडी डर गई थी, जिस कारण सच बोलने की उसकी हिम्मत ही नहीं हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ अज्जू मोनिका की कंडीशन अच्छी तरह से समझ रहा था, इसलिए वो निशा को टालते हुए बोला

अज्जू- मिस जोया पहले आप अपनी ड्रेसिंग चेंज करवा कर अपना ट्रीटमेंट ले लीजिए, उसके बाद हम तसल्ली से इस बारे में बात करेंगे।

अज्जू के इस गोलमाल जबाब को सुनकर निशा को दिल ही दिल में कुछ गलत होने का साफ साफ एहसास हो रहा था, हाँलाकि वो अपनी सुपर पॉवर का यूज करके मोनिका या फिर अज्जू का दिमाग पढकर सच जान सकती थी, लेकिन इस वक्त वो खुद भी गंभीर रूप से घायल थी, जिस कारण उसकी ज्यादातर सुपर पॉवर उसकी बॉडी को रिपेयर करने में खर्च हो रही थी, इसलिए वो इस वक्त किसी का दिमाग पढने की कंडीशन में नहीं थी, साथ ही साथ इस कंडीशन में अगर उसने अपनी सुपर पावर का यूज करने की कोशिश की तो अज्जू के सामने उसका राज खुलने का भी डर था। पर तभी उसे याद आया कि उसकी बनाई चिप की हेल्प से क्वीन हमेशा पूरे ऑपरेशन को बॉच करती रहती है और पूरे ऑपरेशन का बीडियो डाटा अपने पास सेव करके भी रखती है, जिसे केवल वो खुद या फिर रॉ चीफ ही एक्सेस कर सकते हैं। यह याद आते ही निशा जोर से चीखी

निशा- क्वीन…..

चूँकि अज्जू कमरे से बाहर जाने के लिए पहले ही दरवाजा खोल चुका था, जिस कारण निशा की आवाज उस कमरे से बाहर मौजूद दूसरे लोगों ने भी सुन ली थी, जिसे सुनकर सभी लोगों को पता चल गया कि निशा को होश आ चुका है। इसलिए हैडक्वाटर में मौजूद निशा की टीम के लगभग सभी मेंबर तुरंत भागते हुए उस कमरे के अंदर आ गए, जिनमें मोनू और रॉ चीफ भी सामिल थे। वहीं दूसरी तरफ निशा की कमांड सुनते ही क्वीन की एक 3D इमेज उस कमरे में दिखाई देने लगी। क्वीन को वहां देखकर उस कमरे में मौजूद सभी लोगों का दिल जोर जोर से धडकने लगा, क्योंकि उन्हें जिस बात का डर था, वो अब सच होने बाली थी, वहीं दूसरी तरफ क्वीन निशा को देखते हुए बोली

क्वीन- बैल्कम ऐजेंट जीरो…. आपको फिर से होश में आया हुआ देखकर मुझे बहुत खुशी हुई… कहिए मैं आपकी किस तरह मदद कर सकती हूँ।

क्वीन की बात सुनकर निशा ने उसे तुरंत आर्डर दिया

निशा- शालिमार दीप पर एसिड बॉम्ब ब्लास्ट के बाद क्या क्या हुआ था, मुझे सब कुछ जानना है…. अभी और इसी वक्त

निशा का ऑर्डर मिलते ही क्वीन ने कहा

क्वीन- ओक ऐजेंट जीरो

इतना बोलते ही क्वीन ने उस कमरे में लगी एक बडी सी एल.ई.डी. टी.बी को अपने कंट्रोल में ले लिया और उसपर शालीमार दीप पर हुए एसिड बॉम्ब ब्लास्ट के बाद का शीन दिखाने लगी, चूँकि उस वक्त तक निशा बेहोश हो चुकी थी, और शालीमार दीप पर निशा और इकराम केवल दो ही लोग मौजूद थे, जिनके दिमाग में वो चिप इंसर्ट की गई थी, जिससे क्वीन उनसे कनेक्ट रहती है। इसलिए क्वीन इस वक्त इकराम के द्वारा देखे गए विजुअल दिखा रही थी, टी.वी. पर दिखाई दिया कि किसी लडकी के चीखने की जोरदार आवाज सुनाई दी, जिसे सुनकर अचानक से इकराम की नींद खुल गई।

जागने के बाद इकराम ने चारों तरफ देखा तो उसे अपने पास ही नीचे फर्स पर दो इण्डियन साईंटिस्ट दिखाई दिए, जो खुद भी उस चीख को सुनकर जाग चुके थे, पर इकराम को वहाँ पर निशा कहीं भी दिखाई नहीं दे रही थी, इसलिए इकराम ने अपने पास में रखी पिस्टल उठाई और तेजी से गुफा के बाहर जा पहुँचा, वो इस वक्त झाडियों के पीछे छिपा हुआ, वाहर का नजारा देख रहा था, उसने देखा कि झील के पास गाडे हरे रंग का धुँआ फैला हुआ है, जिसके अंदर से एक लडकी के चीखने की आवाज आ रही है, अगले ही पल वो लडकी झील के अंदर कूद गई।

उसके बाद जंगल में किसी आदमी के हंसने की जोरदार आवाज सुनाई दी, उसने गालियाँ बकते हुए अपने साथियों से झील के अंदर गिरी लडकी को बाहर लाने का आर्डर दिया।कुछ देर बाद ही इकराम ने देखा कि दो आदमी जिन्होंने पी.पी.ई. किट पहनी हुई थी, वो उस झील के अंदर गए और उसमें से एक लडकी को किसी लाश की तरह खींचले हुए बाहर ले आऐ, उस लडकी का शरीर एसिड की बजह से लगभग पूरी तरह से जल चुका था, लेकिन वो अब भी जिंदा दी, जिसे देखकर दुशमनों का लीडर बिल्कुल भी खुश नहीं था, उसके बाद उस आदमी ने लडकी की बॉडी अपने अड्डे पर लाने का आर्डर दिया और वहाँ से अपने ज्यादातर साथियों को लेकर निकल गया।

उस लीडर के जाने के बाद वहाँ पर वस 8 आदमी ही बचे थे, जिनमें से 6 आदमी सिक्योरिटी गार्ड की तरह दिखाई दे रहे थे, जिन्होंने इस वक्त अपने हाथों में रायफल पकडी हुई थी, जबकी 2 आदमी वही दोनों आदमी थे, जिन्होंने इस वक्त पी.पी.ई. किट पहनी हुई थी और जो निशा को झील से बाहर लेकर आऐ थे, उन लोगों ने निशा को ताबूत की तरह दिखने बाले एक लकडी के बॉक्स के अंदर रखा और फिर अपना मास्क उतारकर उस ताबूत को लेकर पैदल ही अपने अड्डे की तरफ चल पडे, इकराम लगातार उन लोगों का पीछा कर रहा था, कुछ दूर जाने के बाद इकराम ने उन लोगों को एक एक करके जान से मार दिया और निशा को अपने साथ बापिस उस गुफा के पास ले आया।

जहाँ वो निशा को लेकर झऱने के नीचे जाकर खडा हो गया, ताकि उसकी बॉडी से बचा कुचा एसिड भी धुल जाऐ, उसके बाद वो निशा को बापिस गुफा के अंदर ले गया और उसे लिटाने के बाद इसने निशा को चादर से अच्छी तरह ढंक दिया, फिर इकराम ने उन दोनों साईँटिस्ट की अच्छी तरह से तलासी लेने के बाद उनसे पूछताछ की, लेकिन जब उन लोगों से इकराम को कुछ भी पता नहीं चला तो वो गुफा के बाहर चला गया, जहाँ उसने झील के पास से निशा के कपडे उठाऐ। लेकिन बापिस आते वक्त उसे झाडियों के पास एक छोटा सा ट्रांशमीटर दिखाई दिया, जिसे इकराम ने एक छोटे से पत्थर की हेल्प से तोड दिया था, जिसके बाद इकराम गुफा में बापिस आ गया।

गुफा में बापिस आकर इकराम ने निशा का सारा सामान अपने बैग में सुरक्षित तरीके से संभाल कर रख लिया और फिर वो जैसे ही उन साईंटिस्ट से दोबारा पूछताछ करने बाला था, ठीक तभी उसे निशा के कराहने की हल्कि सी आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वो निशा के पास चला गया और उससे बातें करने लगा, जहाँ निशा उसे उन दोनों साईंटिस्ट को अपने साथ वहाँ से बापिस इण्डिया ले जाने के लिए बोल रही थी और दर्द से तडपते हुए अपने आप को जान से मारने की रिक्वेस्ट कर रही थी। वो सारा सीन देखकर ना चाहते हुए भी उस कमरे में मौजूद सभी लोगों की आँखों में आंशू आ चुके थे।

तभी उस कमरे में गोली चलने की एक आवाज सुनाई दी, जिसे सुनकर कमरे के अंदर मौजूद सभी लोग बुरी तरह से डर गए, पर अगले ही पल उन लोगों ने देखा कि इकराम ने दुख और हताशा में निशा की जगह सामने बाली दीवाल पर गोली चलाई थी, शायद इकराम अपने अंदर निशा के आर्डर को पूरा करने की हिम्मत जुटा ही नहीं पाया था। इकराम अभी अपने अंदर चल रहे इमोशंस से जूझ ही रहा था कि तभी उसे गुफा के बाहर हलचल सुनाई दी, जिस कारण वो एकबार फिर गुफा के बाहर निकल गया, जहाँ उसे अज्जू, मोनू और बाकी के लोग दिखाई दिए, अपने साथियों को वहां देखकर इकराम जो अब तक किसी भी तरह से अपने आपको संभाले हुए था, वो पूरी तरह से टूट गया और अज्जू के पैरों में गिरकर निशा को बचाने की भीख माँगने लगा,

वो सारा सीन काफी ज्यादा इमोशनल करने बाला था, उस कमरे में मौजूद ज्यादातर लोग वो सब पहले ही अपनी आँखों से देख चुके थे, लेकिन टी.वी. पर एक बार फिर वो सब देखकर उन्हें सारी घटना फिर याद आ गई थी, आखिरकार इकराम ने अपने आपको संभाला और फिर वो अपने साथियों को गुफा के अंदर लेकर आया, जहाँ सारी सिचुऐशन देखने के बाद अज्जू ने रेसक्यू ऑपरेशन की पूरी कमांड अपने हाथों में ले ली और अपने कुछ साथियों को हैलीकॉप्टर लैंड होने की जगह सर्च करने और तुरंत हैलीकॉप्टर बुलाने के लिए भेज दिया। उन लोगों के जाते ही अचानक इकराम बेहोश होकर नीचे जमीन पर जा गिरा।

इकराम के बेहोश होने के बाद क्वीन हिना के द्वारा देखे गए विजुअल्स दिखाने लगी, क्योंकि हिना ही एक मात्र वो इंशान थी, जो आखिर तक इकराम के साथ रही थी, इकराम के बेहोश होने के बाद मोनू और हिना ने इकराम के कपडे उतार कर चैक किया तो उन्हें पता चला कि इकराम की बॉडी भी निशा की तरह एसिड के कारण पूरी तरह से जल चुकी है, जब इकराम को होश आया तो सबको इसका असली कारण पता चला। सारी बात जानने के बाद वो लोग वहां से निकलने की तैयारी करने लगे, तभी कमरे में ौमौजूद सभी लोगों ने देखा कि अज्जू ने निशा को अपनी बाहों में उठाया हुआ है, ठीक उसी वक्त कुछ पलों के लिए निशा को फिर से होश आया था और उसने बुदबुदाकर कुछ कहने की कोशिश भी की थी।

लेकिन निशा ने क्या कहा था, यह किसी को पता नहीं चला। निशा ने भी उस वक्त राहत की एक लम्बी सांस ली, क्योंकि उसका राज सबके सामने बस खुलने ही बाला था, लेकिन किस्मत से उसके मूंह से निकला वो शब्द इतना धीमा था कि किसी को वो सुनाई ही नहीं दिया। निशा ने अपने दिमाग में चल रही बातों को झटका और दोबारा से टी.बी. स्क्रीन को देखने लगी, उसने देखा कि गुफा के बाहर आते ही उन लोगों पर दुशमनों ने एक बार फिर हमला कर दिया था, जहाँ उसने देखा कि कुछ लोगों ने उसे और अज्जू को निशाना बनाकर गोलियाँ चलाईँ थीं, लेकिन ऐन वक्त पर इकराम उनके सामने आ गया और सारी गोलियाँ अपने सीने पर ले लीं। यह सीन देखते ही उस कमरे में निशा की जोरदार चीख गूँज उठी

निशा- नहींहींहीहींहीं………….. नहीं भाई नहीं…… ऐ तुमने क्या किया………

निशा के यूँ चीखते ही सभी लोगों का ध्यान फिर से निशा पर चला गया, जिसकी आंखों में इस वक्त आँशू थे, लेकिन वो चाहकर भी निशा को दिलासा नहीं दे सकते थे, क्योंकि जो कुछ भी हुआ था, उसकी बजह से वो लोग खुद भी काफी ज्यादा दुखी थे,


कहानी जारी है...........
Lagta Hain ki pichhla update phir se repost kar diya hain aapne.
 
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