,, वह इसी उलझन में थी कि क्या वह यह अपने बेटे के लिए कर पाएगी,, अब उसे और भी ज्यादा पसीना आने लगा था,, सांस ऊपर नीचे हो रही थी और उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का विकराल लिंक दिखाई दे रहा था,,

डर के कारण उसकी धड़कनें और बढ़ गई थी अपने बेटे के लैंड के बारे में सोच के,, उसके मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहे थे इसलिए रोहन फिर से एक बार कहता है,,
रोहन :- बोलो मम्मी कर दोगी ना एक बार अपने बेटे की परेशानी दूर,,
सरोज :- रोहन.... मुझे... तेरी नानी बुला रही है मैं फोन रखती हूं..
,, इतना कहकर सरोज फोन काट देती है,, रोहन को उसकी बात का जवाब नहीं मिला था लेकिन उसे पूरा विश्वास था कि यह काम उसकी मां कर सकती है उसके प्यार के लिए,,, रोहन मन ही मन सोच रहा था कि जो भी हो अब घर जाकर एक बार इसे मुट्ठी जरूर मरवाऊंगा,, कितना सिंपल होगा वह जब मेरी मां मेरा ल** पकड़ कर रही आएगी,,, रोहन यह सोचते हुए अपने काम में लग जाता है और बस उसे इंतजार तक घर जाने का,, दूसरी तरफ सरोज अपनी धड़कनों पर ख्वाबों पानी की कोशिश करती है और रसोई के काम में लग जाती है,, मेहमान भी यही सोच रही थी कि उसका बेटा आएगा और इस काम के लिए उसे जीत करेगा,, क्या वह अपने बेटे के मोटे लिंग को पकड़ पाएगी क्या उसे खिलाकर एक बार संतुष्ट कर पाएगी,, फिर मन में विचार करती है कि नहीं यह बहुत गलत है मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी,,,

,, इसी तरह पूरा दिन भी जाता है,,, और रोहन अपने घर जाने की तैयारी करता है,, चारों तरफ खुशी का माहौल था दीपावली का दिन,,, सभी खुश नजर आ रहे थे सभी ने अपने-अपने घरों को अच्छे से सजाया हुआ था,, रोहन दीपावली के दिन अपने घर पहुंचता है,,, सबसे पहले अपने नाना और नानी जी के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है उसके बाद अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है,,, कुछ समय के लिए अपनी मां के चेहरे को देखकर मुस्कुराते हुए अंदर चला जाता है,,, वह जो गिफ्ट और सामान लेकर आया था अपनी मार्को दे देता है,,
,, सभी बहुत खुश थे रोहन के आने से वह ढेर सारी मिठाइयां लेकर आया था दीपावली के दिन,, अच्छा अच्छा खाना बनाया था उसकी मां ने वह खाना खाने के लिए सभी बैठ जाते हैं,, रोहन सबसे अलग बैठा अपनी मम्मी को रसोई में काम करते हुए देख रहा था,, सरोज भी कभी-कभी अपने बेटे की ओर देख रही थी,, तभी रोहन अपने लिंग को सहलाते हुए,, अपनी मम्मी की ओर देखा है,, सरोजिया देखकर अपना गर्दन घुमा लेती है,,
सरोज:- बेशर्म यह भी नहीं देख रहा है किसके नाना नानी बैठे हैं,,
,, धीरे-धीरे समय बीतता है शाम होती है सभी दीपावली के दीए जलते हैं और,, गांव में कुछ लोग पटाखे भी फोड़ रहे थे,,

लेकिन रोहन का ध्यान केवल अपनी मां पर ही था,, तभी रोहन की नई हीरोइन से कहती है,,
नानी:- रोहन बेटा अब तो दो-तीन दिन की छुट्टी पर आया होगा ना,,
रोहन:- हां नानी 3 दिन की छुट्टी पर आया हूं,,
नानाजी :- बेटा कंपनी वालों ने दीपावली पर तो गिफ्ट पार्टी होंगे,,
रोहन :- नानाजी गिफ्ट नहीं बाटे बोनस के रूप में पैसे दिए हैं और कुछ मिठाइयां भेज भाई,,
,, यही सब बातें चल रही थी कि रोहन खाना खाकर सीधा रसोई में जाता है और नजरे बचा कर अपनी मम्मी को पीछे से,,

रोहन :- क्या कर रही हो मम्मी मेरी तरफ ध्यान भी नहीं दे रही आप??? डर लग रहा है क्या??
सरोज:- मुझे क्यों डर लगेगा और किस बात का डर,,
रोहन: तो फिर लिपस्टिक लगा कर दिखाओ ना मुझे आपके होंठ लाल देखने,,
सरोज :- अभी नहीं रात को दिखा दूंगी तो जाना अपने दोस्तों के पास दीपावली मना,,
रोहन:- ठीक है मम्मी मैं जाता हूं और रात को, मैं भी आपको कुछ दिखाना चाहता हूं,, देखोगी ना,,
सरोज:- क्या दिखाना चाहता है???
रोहन:- वही जो मुझे परेशान करता है,,
सरोज:- रोहन बेटा यह गलत है तो समझता क्यों नहीं,,
रोहन:- मुझे नहीं पता मम्मी बस एक बार मेरी मुट्ठी मार देना
सरोज:- मेरे लाल इस बात की जितना कर मैं देख लूंगी बस मगर यह नहीं करूंगी,,
रोहन: तो चलो निकालो इसे बाहर और देख लो एक बार,, कितना बेचैन है,,
सरोज:- अभी नहीं रोहन अभी तो कर रात को देख लूंगी तेरे नाना नानी है यहां पर,,,
रोहन:- ठीक है मम्मी मैं जाता हूं दोस्तों के पास लेकिन जब तक मैं हूं आप लिपस्टिक लगाकर मुझे तैयार मिलना,,
,, रोहिणी है बोलकर चला जाता है लेकिन सरोज की नजरे शर्म से बड़ी झुकी हुई थी उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,
,, पूरे गांव में दीपावली का माहौल था रोहन जाकर अपने दोस्तों से मिलता है और दीपावली के आतिशबाजी में उनके साथ आतिशबाजी करने लगता है,, चारों तरफ पटाखे की गूंज और रोशनी से कौन जगमग रहा था

,, धीरे-धीरे समय बीत रहा था काफी रात हो चुकी थी रोहन को ध्यान नहीं रहा कि उसे घर भी जाना है,, तभी रोहन के फोन पर उसकी मम्मी की कॉल आती है,,
रोहन:- हां बोलो मम्मी क्या बात है??
,, लेकिन दूसरी तरफ से भगवान की नानी जी की आवाज आती है और वह कहती है,,
नानी:- रोहन कहां है बेटा बहुत रात हो गई है अब घर वापस आ जा,,,
रोहन:- जी नानी आ रहा हूं थोड़ी देर में,,,
,,, रोहन घर वापस आता है तो देखा है कि उसके नाना नानी बाहर सो रहे हैं पर अंडे में और कमरे में उसकी मम्मी अंदर है,,, रोहन दरवाजा खोल कर अंदर जाता है,, उसे सामने है उसकी मम्मी नजर आती है जिसमें लाल रंग के अपने होठों पर लिपस्टिक लगाई हुई थी,, जिसकी नजरे झुकी हुई थी और नाक में बनाई हुई रोहन की नथनी दमक रही थी,,
,, अपनी मम्मी को इस तरह देखकर रोहन अपने आप पर काबू नहीं पता और उसके लिंग में अकड़न शुरू हो जाती है,, उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि लिए लिपस्टिक लगाकर उसकी मां इतनी सुंदर लगती है,, चौहान का मन तो कर रहा था कि एक बार उसके फोटो को पी लो,, इन होटों का रस निको निकले के निकाल दो,, लेकिन वह अपने आप पर पागल कब उठाकर अपनी मम्मी के पास जाता है,, और उसके गर्दन को ऊपर उठकर बड़े प्यार से उसकी आंखों में देखते हुए कहता है,,
रोहन:- अपनी आंखें तो खोलो मम्मी,,
सरोज :- रोहन मैं तेरे नाना जी के पास जाकर सो जाती हूं बैठा था वहीं पर दूसरी चारपाई डालकर,, अब तो मैं तेरे मन की इच्छा पूरी कर दी तूने कहा था लिपस्टिक लगाने के लिए मैंने लगा ली,,
रोहन:- मम्मी बाकी आप बहुत सुंदर लग रही हो,, आप अपने बेटे की एक इच्छा और पूरी कर दो,,
,, रोहन हल्का सा अपनी मम्मी के बालों को पकड़ कर पीछे को खींचता है जिसकी वजह से उसका चेहरा उभर कर सामने आता है,, और उसकी आंखें खुल जाती है वह भी अपने बेटे की नजरों में देखते हुए,,

सरोज:- बेटा यह गलत है एक मां अपने बेटे के साथ ऐसा कभी नहीं करती मेरे बच्चे,, यह तो तेरी पूजा के फूल है जो तेरी बीवी को चढ़ाए जाएंगे ऐसे क्यों बर्बाद करना चाहता है मेरे लाल,,
,, यह सुनकर रोहन को सोचने लगता है उसे समझ में नहीं आता मम्मी फूल की क्या बात कर रही है कौन सी पूजा के फूल किसको चढ़ाई जाएंगे,, पूजा के कौन से फूल बीवी को चढ़ाए जाते हैं हमें समझ नहीं पता,,,
कौन से पूजा के फुल
रोहन:- कौन सी पूजा के फूल मम्मी जो मैं बीवी को चढ़ाऊंगा क्या कह रही हो आप मेरी समझ में नहीं आया,,
,, रोहन की बात सुनकर सरोजों से प्यार से बुलाती है,
सरोज : यही मेरे लाल जो तुम मुझसे करवाना चाहता है यह तेरी बीवी का काम है,, और उसे काम के लिए पहले तेरी बीवी का ही बनता है,,

रोहन:- ठीक है मम्मी आप ही नहीं पर सो जाओ मैं बाहर जाकर सो जाता हूं,, इतना कह कर रो हम बाहर चला जाता है,,
,, सरोज को कुछ समझ नहीं आता कि उसका बेटा इतनी आसानी से कैसे मांगे,, कहीं मैं फिर से नाराज तो नहीं हो गया,, नहीं मेरे बेटे ने वादा किया था क्या मुझसे नाराज नहीं होगा,,, सुमन बाहर जाकर सो जाता है सरोज भी लेट जाती है,, उसे समझ नहीं आता,, किसका बेटा उससे नाराज हुआ है या वह अपने मन से बाहर गया है,, फिर वह मन ही मां अपने आप से सवाल करती है कि जो उसका बेटा चाहता है क्या वह उसे कर देना चाहिए,, लेकिन मैं आज तक नहीं सुना की कोई मां अपने बेटे की मुट्ठी भी मार सकती है या उसके लिंग को हाथ में पड़ सकती है,, यह तो पाप है ऐसा तो कभी नहीं हो सकता,, लेकिन अगर बेटा जीत कर तो फिर मन को क्या करना चाहिए,, और जिसका एक ही बेटा हो वही जान से प्यार जो उसका घर चलना है उसके जीवन को सर्वत्र है,, बहन क्या करे थे उसका बेटा तकलीफ में है,, और ऊपर से उसका कोई दोस्त भी नहीं,, दोस्तों मेरा है कि मैं उसकी शादी नहीं कर पा रही इसलिए मेरा लाल इतना बेचैन रहता है,, मगर फिर भी कोई गलत काम नहीं करता मेहनत से काम करते हैं दो रोटी खिला है,,, और आज तो कितनी सारा सामान भी लेकर आया दीपावली पर खुशियां लेकर आया मेरा लाल,,
,, सही गलत और पाप पुण्य की लड़ाई में सरोज अपने आप से काफी देर तक लड़ती रहती है,, दो-तीन घंटे बीतने के बाद भी सरोज को नींद नहीं आती,, लेकिन उसे अपने बेटे के लिए बहुत दुख हो रहा था आखिरकार वह फैसला करती है कि जो होगा देखा जाएगा,, वह अपने बेटे को एक बार शांत कर दे,, मैं जरूर अपने बेटे को एक बार संतुष्टि दिलाऊंगा की हाथ से ही सही,,

,, कुछ देर सोचने के बाद सर्वर चुपके से बाहर जाती है,, तुम्हें देखती है कि उसके मम्मी पापा गहरी नींद में सोए हुए हैं और उधर रोहन भी अपने बिस्तर पर लेटा हुआ सो रहा है,, अपने बेटे के पास चुपके से जाकर खड़ी हो जाती है,, लेकिन उसे उठाने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी इसलिए मैं प्यार से धीरे से उसके कान में बोलती है,,
सरोज :- रोहन.... रोहन... सो गया क्या बेटा...
,, उसकी सांसों की गति और आवाज से रोहन की आंख खुल जाती है तो वह देखता है कि उसकी मम्मी उसके पास में बैठी है... रोहन अपनी मम्मी के चेहरे को गौर से देखते हुए

रोहन :- क्या हुआ मम्मी क्या बात है??
सरोज :- जालंधर चलो अंदर चलकर सो जाना,,
रोहन :- क्यों क्या हुआ अब क्या बात है???
सरोज:- कुछ नहीं मुझे अकेले को डर लग रहा है अंदर चल मेरे बच्चे अंदर चलकर सो जाना,,,
,, रोहन मन में विचार करते हुए,, लगता है मम्मी ने मत बना लिया है मेरी मुट्ठी मार देगी,, इसीलिए आई है रात में उठाने,,,
रोहन:- धीरे से पहले आप वादा करो कि एक बार मेरी मुट्ठी मरोगी,,
सरोज :- ठीक है तो अंदर चलो,,,
रोहन :- क्या ठीक है मुंह से बोलो ना,,
सरोज:- हां मेरे लाल तू अंदर चलना हाथ से एक बार कर दूंगी,,
रोहन : क्या कर दोगी मम्मी एक बार बोलो ना,,

,, सरोज थोड़ी ड्राइवर से हमें लब्ज में शर्मा कर कहती है
सरोज:- चल मुट्ठी मार देता हूं तेरी,,
,,, रोहन बहुत खुश होता है और मैं अपनी मम्मी के चेहरे को देखते हैं उठकर बिस्तर से अंदर जाने लगता है,, सरोज भी धीरे-धीरे उसके पीछे जाती है और वहां अंदर जाकर अपनी मम्मी को हाथ पकड़ कर अंदर आता है और दरवाजा बंद कर देता है,,, अब्रोहण बेड पर बैठ जाता है और अपनी मम्मी का इंतजार करता है कि कब वह पहल करेगी,,,
,, ऐसे क्या देख रहा है,,
,, चलो मम्मी कर दो एक बार,,
,,, कपड़े तो निकाल ऐसे बाहर निकाल तभी तो करूंगी,,
,, नहीं आप खुद ही इसको बाहर निकालो,,
,, रोहन की बात सुनकर वह शरमाते हुए कांपते हुए हाथ तो उसे उसका लोगो नीचे करने लगती है,, धीरे-धीरे बजने को नीचे करती है तो जैसे ही फोन का लिंग बाहर आता है सरोज उसे देखकर डर जाती है,,

,, क्या देख रही हो मम्मी बहुत परेशान करता है,, एक बार इसे पकड़ लो ना,, हो सकता है आपके प्यार भरे हाथों से मान जाए मुझे परेशान ना करें,, आज इसके एकड़ निकाल दो मम्मी बहुत पकड़ता है,, बहुत परेशान करता है,,
,, यह कहकर रोहन की आंखों में आंसू आ जाते हैं न जाने क्यों उसकी आंखों में इस दर्द के आंसू थे,,, रोहन की आंखों में आंसू देख कर सरोज तुरंत ही उसके लिंग को पकड़ लेती है,, और धीरे-धीरे हाथ चलने लगती है,,
,,,, सर्विस शर्म है या के कारण अपनी बेशर्मी छुपाए रखते हैं,, उसे बहुत ही शर्म आ रही थी लेकिन मैं चाहते हुए भी वह अपने बेटे के लिंग को पकड़ लेती है,, और प्यार से अपने बेटे से कहती है,,
,,, रो मत मेरे लाल मैं कर दूंगी आज शांत चाहे जो भी दुनिया कहे लेकिन यह बात किसी को बताना नहीं मेरे बच्चे,, आदमी से शांत कर दूंगी,, चाहे जो हो जाए मैं अपने बेटे को आज शांत करके ही रहूंगी,,
,,,, ओ मम्मी कितना अच्छा लग रहा है आपके हाथों से,,