,,, रोहन अपनी मम्मी की आंखों में देखते हुए,,, उसे अपनी बाहों में उठाकर बाहर बने मिट्टी के पेशाब घर की ओर ले जा रहा था,,, बाहर उसके नाना नानी भी सो रहे थे लेकिन किसी को कुछ पता नहीं चलता वह गहरी नींद में थे,, सरोज धीरे से शरमाते हुए अपने हाथों से दरवाजा खोलती है,, और रोहन दीपावली के उजाले में उसकी आंखों में देखते हैं उसे पेशाब घर की ओर ले जाने लगता है,,

,, सरोज को भी अपने बेटे की ताकत का अंदाजा हो गया था,, वह सोच रही थी कि इतने भारी बजनी औरत को उसके बेटे ने कैसे फूल की तरह अपनी बाहों में उठाया हुआ है,,, वह अपने बेटे की ताकत पर बहुत गर्म महसूस कर रही थी और उसे शर्म भी आ रही थी,,, रोहन लगातार उसे अपनी मां के फोटो और अपनी पहनी हुई नाथ को बड़े ध्यान से देख रहा था,,, जब रोहन अपनी नजर नहीं हटता तो सरोज उसे शरमाते हुए पूछता है

,,, ऐसे क्या देख रहे हो???
,, देख रहा हूं तुम कितनी सुंदर लग रही हो,, जब पूरी तरह दुल्हन सुहाग की सेज पर बैठोगे तो कितना अच्छा लगा,, कितनी प्यारी गोगी मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि आज तुम मेरी बाहों में हो,,, मैं केवल ख्वाबों में ही सोचता था कि काश ऐसा हो जाए कि तुम मेरे हो जाओ,, भगवान से प्रार्थना करता था कि काश ऐसा हो जाए लेकिन आज मैं भगवान को मानने लगा,, जो उसने मेरी इतनी बड़ी इच्छा पूरी कर दी,,,
,,,, इतना प्यार करते थे मुझे,,, पहले कभी बताया क्यों नहीं??
,, यह कहकर सरोज शर्मा जाती है,,

,, रोहन अपनी मम्मी की उभरी हुई छाती को देखते हुए,,
,, अगर पहले बता देता तो क्या तुम यह 20 साल से तड़पती हुई जवान मेरे,, को दे देती है,???
,,, सरोज कुछ जवाब नहीं देती वह अपने बेटे की बातों से बहुत शर्मिंदा हो रही थी,,, 20 साल तक उसने अपने यौवन को संभाल के रखा हुआ था,, 20 साल से उसके शरीर को किसी ने छुआ भी नहीं था,, पूरे शरीर में जवानी का रस टपक रहा था,, इन बातों से उसके सीने में और अकड़न पैदा होती है और वह,,
,, चलो मुझे नीचे उतरो,, बहुत जोर की लगी है,
,, रोहन अपनी मां को देखते हुए धीरे-धीरे नीचे उतरता है और उसके हाथों की चुभन से सरोज के,, नितंब पर निशान बन गए थे,,, जैसे हीरो हम उसे नीचे उतरता है अगर तुरंत ही पेशाब घर में घुस जाती है और और कपड़े का पर्दा गिरा देती है,,,
,,, हेलो हम तुरंत ही उसका हाथ पकड़ कर कहता है,,
,,, मैं भी अंदर आ जाऊं,,
,, सरोज अपना हाथ छुड़ाकर नहीं कोई जरूरत नहीं है मुझे बहुत शर्म आ रही है वैसे भी,,,
,,, रोहन अपनी मम्मी का हाथ छोड़ देता है और वह तुरंत ही अपने,, पेटिकोट को ऊपर करके पेशाब करने के लिए बैठ जाते हैं,,, सर्विस को इतनी जोर की पेशाब लगी थी बैठते ही एक तेज धार पेशाब की घाट नीचे गिरती है,,

,,, जैसे ही पेशाब की तेज धार उसकी योनि से निकलती है एक सिटी जैसी आवाज रोहन के कानों में घुसती है,,, जिसे सुनकर रोहन अपना हाउस को बैठता है और उसके लिंग में फिर से तनाव आना शुरू होता है,,, काफी देर तक यह आवाज होती रहती है जब तक कि वह पेशाब करनी ही लेती सरोज को भी बहुत शर्म आ रही थी उसे मालूम था कि उसका बेटा बाहर खड़ा हुआ इस आवाज को सुन रहा होगा,, मैं यही सोच रही थी कि इस आवाज को सुनकर उसका बेटा क्या सोच रहा है,, कुछ समय तक सरोज पेशाब करती रहती है उसे बहुत सुकून मिलता है पेशाब करने के बाद

,, सरोज की योनि पर हल्के हल्के बाल थे,, वह अपनी सफाई का पूरा ध्यान रखती थी लेकिन आज उसकी योनि न जाने क्यों बहुत ज्यादा खुली हुई नजर आ रही थी,, लंबे कद की मोती गाडरी हुई औरत की योनि,, कोई भी लड़का एक बुड्ढा आदमी देख ले तो वह अपना होश खो देगा,, सरोज सोच रही थी अगर उसका बेटा इस हाल में उसकी योनि को देख लेगा तुम्हें जाने क्या कर बैठेगी,, इसलिए उसे डर तक कहीं रोहन पर्दा हटाकर अंदर ना झांक ले वह जल्दी-जल्दी पेशाब कर कर खड़ी होती है और अपने कपड़े सही करने लगती है,,, जैसी वह बाहर आती है,, उसकी नजर रोहन से मिलती है वह शर्मा कर अपनी नज़रें नीचे कर लेती है,, लेकिन रोहन लगातार अपनी मां को ही देखे जा रहा था,,
,,, मम्मी एक बात बोलूं,
,,, जो भी बोलना है अंदर चलकर बोल देना,, जल्दी से पेशाब करो और चलो,,,
,,, सोहन अपनी मां के करीब आता है और उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसकी आंखों में देखते हुए कहता है,,
,, जो बात में बोलने जा रहा हूं वह अंदर बोलने में मजा नहीं आएगा,,,
,, सरोज की सांसे तेज होने लगी थी,, बहुत धीरे से शर्मा कर कहते हैं,,
,, तो फिर बोलो क्या बोलना चाहते हो,,,???
,,,, इसकी आवाज बहुत सुंदर है एक बार दिखा दोगी????
,,, यह सुनकर सरोज को बहुत शर्म आती है वह अपना चेहरा शर्म के मारे अपने हाथों से छुपानी लगती है,,

,,,, तभी कुछ रुकी ही बंदे जो उसकी योनि पर थी उनकी खुजली उसकी होती है और ना चाहते भी उसका हाथ साड़ी के ऊपर से ही अपनी योनि पर चला जाता है वह खो जाती है हल्का सा,, पेशाब की बूंदे साफ करने के लिए,

,, जिसे देखकर रोहन उसे कंधों से पकड़ कर उसके कान में फिर से कहता है,,

,,, बोल दिखा देगी एक बार जिसके आवाज से इतनी सुंदर है,, मैं उसे देखना चाहता हूं कि वह कितनी सुंदर होगी,, इतने सालों से तुम मुझसे छुपा कर रखी हो,,,
,,, सरोज को बहुत शर्म आती है लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी शरीर में कंपन हो रही थी पसीना हल्का माथे से आ गया था फिर भी वह हौसला बढ़ाते हुए अपने बेटे से कहती है,,,

,, अगर इतनी ही बेचैनी हो रही है तो कर लो अपनी नानी नाना से बात,,,
,,, यह कहकर सा रोशन से नजर झुका लेती है,,, और रोहन के जवाब का इंतजार करती है लेकिन रोहन उसके मासूमियत को देखते हुए,, कुछ सोचता है और फिर प्यार से उसके माथे पर किस कर देता है,,

,,, फिर थोड़ा पीछे हटकर अपनी मम्मी को गोद से ध्यान से देखने लगता है उसके उतार चढ़ाव और पिछले हिस्से को देखते हुए उसकी निगाह उसकी छाती पर जाती है वह प्यासी नजरों से उसे देखा है और कुछ देर देखने के बाद अपनी मां,, कि पिछले हिस्से को सहला कर धीरे से कहता है,,

,,, ठीक है मैं पहले नाना नानी से बात करता हूं उसके बाद सब कुछ जो तेरा है वह मेरा है और मैसेज जी भर के अपनी मर्जी से लूट लूंगा,,, और अपनी मां के पिछले हिस्से को दबाते हुए उसे सारे से कहता है,, उसके बाद तो सब कुछ मुझे मुझे चाहिए तेरा यह बहुत पसंद है मुझे तेरी,,,
,,, सरोज अपने बेटे का इशारा समझ जाती है कि वह उसकी गांड की बात कर रहा है,,, उसके शरीर में एक सीरम सी दौड़ जाती है वह उसकी बात का कोई जवाब नहीं देता उसे बहुत शर्म आती है और वह तुरंत ही कमरे के अंदर चली,,, दौड़ते हुए,,
,,, रोहन समझ जाता है कि उसकी मम्मी शर्मा गई है उसके दिल में डर है कि कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए,,, न जाने रोहन के मन में आज कितनी तरंगे उठ रही थी उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि जो खजाना उसकी मां ने 20 साल से बचा के रखा है सब उसका होने वाला है लेकिन क्या नाना नानी मां जाएंगे इस रिश्ते के लिए,, अब उससे और समझ नहीं होता वह जल्दी से पेशाब करता है और घर के अंदर जाता है, घर के बरामदे में ही उसके नाना नानी बड़े सुकून से गहरी नींद में सोए हुए थे,, सरोज कमरे के अंदर चारपाई पर लेटी हुई थी लेकिन उसकी आंखें बंद कि वह सोई नहीं थी अपने बेटे के आने का इंतजार कर रही थी और सोच रही थी कि कहीं उसका बेटा उसके साथ कोई हरकत आज ही ना करते दरवाजा उसमें बंद नहीं किया था

,,, रोहन एक निगाह अपनी मम्मी की ओर डालता है,, और उसकी छाती पर देखकर उसके मुंह में पानी आ भी लगता है वह सोचता है कि आज ही सब कुछ मिल जाए मुझे जो भी उसके पास है,, कितना भरा हुआ बदन है ऐसा माल तो मुझे जिंदगी में नहीं मिलेगा जो 20 साल से संभाल कर मेरी मम्मी ने रखा हुआ,, इसे तो रगड़ रगड़ के छोड़ने में कितना मजा आएगी हर चीज दावा दावा कर लूंगा,,, अब उससे और बर्दाश्त नहीं होता और वह अपनी नाना नानी की ओर देखकर उन्हें आवाज लगता है,,
,, नानी नाना जी उठिए ना मुझे आपसे कुछ जरूरी बात करनी है,,,
,,, जैसे ही यह आवाज रोहन की मम्मी सरोज सुनती है तुरंत आंखें खोल कर रोहन की ओर देखकर इशारा करती है कि अभी कोई बात नहीं करना सुबह में कर लेना,,, लेकिन रोहन ना में गार्डन हिलता है और अपनी मम्मी को इशारा करता है कि अब और बर्दाश्त नहीं होता मुझे आज ही बात कर लेने दो,,,, सरोज के दिल की धड़कन तेज हो जाती है कि उसका बेटा इस बात को कैसे उजागर करेगा कि वह मुझसे शादी करना चाहता है और अपनी दुल्हन बनना चाहता है,, उसे बहुत डर भी लग रहा था और शर्म भी आ रही थी कि उसके मम्मी पापा क्या सोचेंगे उसके बारे में अगर वह मेरे से पूछेंगे तो मुझे क्या करें,, मैं क्या कहेंगी अपने मम्मी पापा से की हां मुझे भी यह रिश्ता मंजूर है,,, एक मां होते हुए भी मैं अपने बेटे की दुल्हन बनना चाहती हूं उसकी हर इच्छा पूरी करना चाहती हूं उसकी पत्नी बनाकर उसे पति बनना चाहते हैं,,, उसके नाम का सिंदूर अपनी मांग में भरना चाहती है,,,
,, रोहन अपने नाना नानी को हाथ से जगाता है और जैसे ही उन दोनों की आंखें खुलती है वह रोहन को देखकर थोड़ा सा घबरा जाते हैं और प्यार से पूछते हैं,,
,, नानाजी,, अरे रोहन बेटा इतनी रात में क्या हुआ सब ठीक तो है ना,????
,,, नाना जी आप घबराइए मत सब ठीक है लेकिन मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी है,,,
,, नानाजी हां बोलो बेटा क्या बात है??
,, नाना जी आप मुझे हमेशा खुश देखना चाहते हो ना मेरी शादी के लिए आप बहुत चिंतित रहते हो,,, आप चाहते हो ना मैं भी घर बसा हूं और खुशी-खुशी रहो,,
,,, हां बेटा हम चाहते हैं तू भी अपना घर बसा है तेरा भी एक खुशहाल जीवन हो बीवी हो बच्चे हो यही तो हमारी आखिरी इच्छा है,,,,
,, तो नाना जी आप वादा करो कि मैं जिससे बोलूंगा आप उससे मेरी शादी कर दोगे,,,
,,, नाना जी कुछ देर रोहन को देखकर सोचते हैं,,, लेकिन बेटा तुम जिस बोलोगे हम तुम्हारी शादी कर देंगे क्या तुम उसको भी पसंद आओगे तभी तो शादी करवा सकती है मेरे लाल,,,
,, रोहन एक नजर अपनी मम्मी की ओर डालता है जो उसे ही देख रही थी और उसकी आंखों में देखते हुए कहता है,,
,, मैं उसे बहुत पसंद हूं वह भी मन से ज्यादा,,, दिल से मुझे चाहती है अपना पति बनाना,,, लेकिन बस आपकी राजा मंडी के बिना कुछ नहीं हो सकता अगर आप आगे दोगे तो मैं उसे अपनी पत्नी बना लूंगा,, दुनिया में एक वही है जो मुझे पत्नी का सुख दे सकती है और फिर बाद में बच्चों का भी,,,,
,,, बच्चों की बात सुनकर सरोज को बहुत शर्म आती है उसके शरीर में चीटियां रहने लगती है,, योनि में हल्की सी खुजली होने लगती है जिसे वह अपनी जांघों से रगड़ कर मिटाती है और शर्म के मारे अपनी नज़रें झुका लेती है दिल तेज से धड़कने लगता है कि अब रोहन क्या बोलने वाला है,,,,
,, नानाजी हमारी रजामंदी के बिना कुछ नहीं हो सकता बेटा लेकिन हम तो इसके लिए हमेशा से तैयार है तुम बताओ कौन है वह खुशनसीब जो तुमसे शादी करना चाहती है और मेरे,,, नाई की दुल्हन बनना चाहती है,,,
,,, नाना जी उससे पहले कि मैं उसका नाम आपको बताऊंगा मैं आपसे बताना चाहता हूं कि अगर वह मेरी जिंदगी में नहीं मिला आपने यह शादी मेरी नहीं कराई तो मैं आज ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर लूंगा मैं जहर खाकर आत्महत्या कर लूंगा नानाजी,,,
,,, रोहन की बात सुनकर उसके नाना नानी बहुत घबरा जाते हैं तभी उसकी नानी रोहन का हाथ पकड़ कर कहती है,,,
,, नानी जी रोहन बेटा ऐसी बातें ना किया कर मेरे लाल तेरे अलावा हमारी बेटी का है ही कौन तू बता किस शादी करना चाहता है हम तैयार हैं,,,
,,, रोहन कुछ देर सोते हुए अपनी नाना नानी के चेहरे को देखा है और फिर दिल पर हाथ रखकर अपने मन से बोलता है,,,
,, नानी जी मैं मम्मी से शादी करना चाहता हूं,,, उसे अपनी पत्नी बनना चाहता हूं,,,
,,, जैसे हीरोइन की बात सरोज के कानों में घूमती है उसका दिल तेजी से धड़कने लगता है और वह,, रजाई को उठाकर तुरंत ही रजाई में घुस जाती है और अपना मुंह छुपा लेती है लेकिन कानों पर ध्यान देते हुए बाहर की आवाज सुन रही थी,,, उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या होने वाला है लेकिन रोहन की बात का असर उसके नाना नानी पर ऐसा हुआ कि वह कुछ कह नहीं पाए वह रोहन को देखते रहते हैं,,, आज तक समझ में कोई इतनी हिम्मत नहीं कर पाया था कि अपनी मां से ही शादी करने की बात करें लेकिन उन्हें अचानक से धक्का लगता है और वह सच में पड़ जाते हैं कि यह क्या बोल रहा है,,,
,,, नानाजी,, रोहन बेटा तू यह क्या बोल रहा है मेरे लाल ऐसा कैसे हो सकता है समाज क्या रहेगा यह तो बहुत गलत है पाप है मेरे बच्चे और तेरी मां इस बात के लिए कैसे मान सकती है,,,
,, नाना जी मैंने पहले ही आपसे बोला था अगर यह नहीं हुआ तो मैं अपनी जान दे दूंगा रही मम्मी की बात तो आप मम्मी से ही पूछ लो वह इस बात के लिए तैयार है,,,,
,,, रोहन के नाना नानी एक दूसरे को देखते हुए कहते हैं,, क्या तुम्हारी मां इस बात के लिए रजिया तुमने बात भी कर लिया अपनी मम्मी से,,,
,, हां नाना जी वह इस बात के लिए तैयार है अगर आपको यकीन ना हो तो आप मम्मी से ही पूछ सकते हो,, अगर उसने मना कर दिया तो मैं कभी भी फिर आपसे इस बात की जीत नहीं करूंगा,,,,
,,, सरोज के दिल की धड़कन और बढ़ गई थी वह सोच रही थी कैसे अपनी मम्मी पापा से इस बात को बोल पाएगी उसके अंदर हिम्मत नहीं थी कि इस उम्र में अपने जवान बेटे से वह ब्याह करने के लिए कह रही है,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था कि कब उसके मम्मी पापा उसकी आवाज लगा कर बुलाएंगे और,, सरोज को आवाज लगाकर बुलाया,,
,,, नानी जी, सरोज और सरोज इधर आ बेटा यह तेरा बेटा क्या बोल रहा है देख,,,
,, लेकिन सरोज की हिम्मत नहीं हो रही थी रजाई से बाहर आने की फिर उसकी मम्मी रजाई के पास जाती और कमरे में जाकर सरोज को कंधे से पकड़ कर उठती है और कहती है
,,, सरोज यह रोहन क्या बोल रहा है बेटा यह कैसे हो सकता है क्या तू इस बात के लिए तैयार है,,,
,, क्या हुआ मम्मी क्या बोल रहा है मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा,,,
,,, रोहन बोल रहा है कि वह तुझे शादी करना चाहता है और तू भी इस बात के लिए तैयार है,,, क्या सच में तू यह करना चाहती है,,
,,,, सरोज अपनी नज़रें झुका लेती है उसका हाल ऐसा था कि वह जवाब भी नहीं दे पा रही थी लेकिन फिर से जब तेज आवाज में उसकी मम्मी पूछती है तो सरोज धीमी आवाज में रहती,,,
,,, मम्मी मैं अपने बेटे को खोना नहीं चाहती,,, मैं उसकी खुशी के लिए सब कुछ करने को तैयार,,, हूँ,,
,,, यह तो क्या बोल रही है बेटा समाज इसके लिए कैसे मानेगा और तू अपनी उम्र तो देख क्यों अपने बेटे को बर्बाद करना चाहती है,,,
,, मम्मी मैं अपने बेटे को बर्बाद करना नहीं चाहती है उसे बचाना चाहती हूं और उसकी जिंदगी भर साथ दोगे मम्मी,,,
,, लेकिन बेटा यह कैसे हो पाएगा यह मुमकिन नहीं है यह कैसे होगा लोग क्या कहेंगे,,,
,,, सर्वस्व बर्दाश्त नहीं होता और वह रोती हुई अपनी मम्मी के पैरों में गिर जाती है और रोते हुए कहती है,,,
,, मां जब मैं अपने बेटे के लिए एक मां होकर इतना बड़ा काम कर सकती हो आप तो फिर भी मेरी खुशी के लिए इतना नहीं कर सकती,, मान जाओ ना मम्मी पापा को कैसे भी करके मन होना मैं अपने बेटे का जिंदगी भर ख्याल रखेगी और यह सब उसे पर छोड़ दो वह खुद कर,, लगा हमारी शादी बाहर हो जाएगी हम बाहर रह लेंगे मम्मी मान जाओ ना मैं आपके हाथ पैर पड़ती हूं मम्मी,,,
,,, काफी टाइम तक ऐसे ही चलता रहता है लेकिन सरोज अपने आप के सामने हिम्मत नहीं जुड़ पाती वह रो-रो कर भी लगा कर अपनी मम्मी से गुहार लगा रही थी काफी समय बीत चुका था अब उजाला होने वाला था इस बात को लेकर आखिरकार हार कर सरोज की मम्मी ही हर मानती है और रोते हुए अपनी बेटी को गले लगा कर कहती है,,,
,, ठीक है मेरी बच्ची जैसी तेरी मर्जी अब हम कर भी क्या सकते हैं तेरे पापा तो मेरी बात डालेंगे नहीं मैं उन्हें मना लूंगी लेकिन तुम शादी कब करना चाहते हो और कैसे करोगे,,,
,, यह सुनकर सरोज की खुशी का भी ठिकाना नहीं रहता उसके मन में भी तरंगे दौड़ने लगती है उसे ऐसा लगता है जैसे वह कोई जवान लड़की हो और उसे उसका प्रेमी मिल गया हो,,, वह अपनी मम्मी को हंसते हुए गले लगा कर कहती है,,,
,, मम्मी मैं आपका यह आभार जिंदगी बन नहीं भूलूंगी मैं आपको बात नहीं सकती आप छापने कितनी बड़ी खुशी दी है,, शादी कब और कैसे करनी है यह रोहन बताया उसी से पूछ लेना मम्मी,,,
,, तभी सरोज की मां की नजर सरोज की हथेली पड़ जाती है और वह उसकी हथेलियां को ध्यान से देखते हैं पूछता है

,,, यह तेरे हाथों को क्या हुआ इतने लाल क्यों है,,,??
,,, तभी सरोज को ध्यान आता है कि उसने अपनी बेटी की जब लिंग को हाथ से चलाया था कितनी देर तक उसने उसे रगड़ा था उसकी रागदान से उसकी हथेली लाल हो गई है,,, उसने तो अपने हाथों पर ध्यान भी नहीं दिया था लेकिन अब वह सोच रही थी कि कितना ताकतवर है उसके बेटे का लिंग हाथ को भी लाल कर दिया अगर वह उसकी योनि के अंदर मर्दन करेगा तो उसका क्या हाल करेगा जब हाथों का ऐसा हाल है और यह सोचते हो उसका शरीर कम जाता है वह अपनी मां की बात का कुछ जवाब न देकर सर झुकाकर शर्मा जाती है,,,,
,, बोलना तेरे हाथ इतने लाल क्यों है क्या हुआ और शर्मा क्यों रही है,,,
,, अरे कुछ नहीं मम्मी मैं कुछ भजन उठा रही थी उसकी वजह से हो गया है,,,
,, उसके बाद सरोज की मां उससे कुछ नहीं पूछता माहौल शांत हो गया था सब अपनी-अपनी सोच में डूबे थे,,, रोहन को बहुत खुशी मिलती है अब उसे मंजूरी मिल गई थी कि वह अपनी मां से शादी कर सकता है अब आगे उसी को सब कुछ करना था इसलिए वह,,, रात भर सोया नहीं था इसलिए सुबह-सुबह ही अंदर जाकर बिस्तर पर लेट जाता है और सरोज रसोई में खाना बनाने लगती है सभी के लिए नाश्ता तैयार कर रही थी खुशी-खुशी और अपने बेटे की मर्दाना ताकत के बारे में सोच सोच कर कहां पर रही थी,,,

,, मन ही मन सोच रही थी कि,, कैसे उसका बेटा इस 20 साल की बचाई हुई जवान को रगड़ेगा,,, किस तरह उसके शरीर का मर्दन करेगा और उसका क्या हाल होगा क्या वह अपने बेटे को इतनी देर तक अपने शरीर पर झेल पाएगी,,,, यह सोच सोच कर इसका बुरा हाल था लेकिन मन में वह खुश हो रही थी उसे आज ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी की, पत्नी बन गई हो और पत्नी की तरह शर्मा रही थी अब वह अपने बेटे के पास जाने में भी शर्मा रही थी वह आराम से सो रहा था नाश्ता तैयार हो चुका था,,, सर्वोच्च चुपचाप पहले अपनी मम्मी पापा को नष्ट देती है और मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देखती है,, सरोज की मम्मी पापा भी उसके लिए मुस्कुरा कर देखते हैं और उसका हौसला बढ़ाते हैं कोई बात नहीं ठीक है जैसा तुम्हें अच्छा लगे कर लो हम तुम्हारे,, साथ हैं तुम्हें खोना नहीं चाहते,,,,
,,, नानी जी,, जा बेटा अब रोहन को भी उठा दो और उसको नाश्ता दे दो रात भर सोया नहीं पाया है,,,
,,, अपनी मम्मी की बात सुनकर सरोज के जहां में रोहन आता है,,, और वह कमरे की ओर देखती है दरवाजा थोड़ा सा लगा हुआ था,,, अपनी मम्मी को नाश्ता देखकर और पापा जी को नष्ट देकर कमरे की ओर बढ़ने लगती है लेकिन उसके पैरों में आज कमरे की ओर जाते हुए कंपन हो रहा था,, वह धीरे से दरवाजा खोलती है तो देखी है कि रोना भी भी गहरी नींद में सो रहा है,,, अपने बेटे को सोता हुआ देखकर, बहन उसके शरीर को ऊपर से नीचे तक देखते हैं जो की,,, लंबा चौड़ा और तगड़ा पुरुष लग रहा था,, जिसे देखकर सरोज की योनि में फिर से सीरम दौड़ जाती है और उसे उसके लिंग का जाकर उसकी आंखों के सामने नजर आता है,,, फिर वह मन ही मन सोचती है कि जो भी हो अब तो यह मेरे पति होने वाले हैं,,, सरोज अपनी सर पर साड़ी का पल्लू करती है और अपने चेहरे को छुपा कर प्यार से झुक कर रोहन के पैरों को छू लेती है,,,,, एक पतिव्रता नारी की तरह

,,, पैरों को स्पर्श पाकर सोने की आंखें तुरंत खुल जाती है वह देखता है कि उसकी मां उसके पर छोड़कर माथे से चूम रही है,,,, ऐसा देखकर रोहन के दिल की धड़कन बढ़ जाती है वह अपनी मां के चेहरे की ओर देखा है जो की हल्का सा शर्मा रही थी और उसे देखकर उसे बर्दाश्त नहीं होता,,, वह दरवाजे की ओर देखा है जो कि खुला हुआ था वह पर की लाश से दरवाजे को बंद करता है और अपनी मां को पकड़ कर अपनी बाहों में भर लेता है,,,

,,, यह क्या कर रही हो मेरे प्यार को छू रही हो,,,
,,, रोहन की बात सुनकर सरोज शर्मा जाती है और अपनी नज़रें नीचे कर करके,,

,,, मैं एक पत्नी धर्म निभा रही हूं,, जब आप मुझे अपनी पत्नी मानते हो तो मैं भी आपको अपना पति मानती हूं इसलिए मैं अपना पत्नी धर्म निभा रही हूं