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Incest Sagar (Completed)

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
Supreme
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Update 20.


पहाड़गंज जिस काम से मैं गया था वो हुआ नहीं तो मैंने संजय जी के होटल से ही उनको फोन लगाया और उनसे मिलने की इच्छा जताई । उन्होंने बताया कि वो अभी दिल्ली से बाहर है , थर्सडे तक वापस दिल्ली आयेंगे । आज सेटरडे था.... इसका मतलब वो पांचवें दिन वापस दिल्ली लौटेंगे ।

वहां से वापस मैं रोहिणी निकल पड़ा । रोहिणी पहुंचने के बाद उस बैंक में गया जिसमें आंटी का एकाउंट था । पहला सेटरडे होने के कारण बैंक खुला हुआ था । लेकिन न जाने क्यों आज भीड़ ज्यादा थी । पैसे निकालते निकालते तीन बज गए ।

वहां से फिर आंटी के घर गया और उन्हें उन रूपयों में से एक लाख रुपए वापस दे दिए । लेबर अभी भी काम में व्यस्त थे । उनका मजदूरी भी जोड़ जाड़ के काम शेष होने के पहले ही दे दिया । आंटी ने जो सामान मंगवानी थी उसका लिस्ट भी आज ही दे दिया तो वहां से फिर मैं मार्केट चला गया और आंटी के सामानों की खरीदारी कर उन्हें उनके घर देता हुआ अपने घर चला आया ।

जब मैं घर पहुंचा तब चार से कुछ ही मिनट उपर हुए थे । दरवाजा माॅम ने खोला था । माॅम ने खाने के लिए पुछा तो मैंने मना कर दिया । मैं सीधे अपने कमरे में चला गया । और बिना पैन्ट शर्ट चेंज किए बिस्तर पर लेट गया ।

मै हैरान था कि आखिर कल से माॅम ने मेरे मैसेज का कोई रियेक्सन क्यों नहीं दिया । वो मैसेज देख ली है , ये तो साफ कन्फर्म है ... और उस युवती का नाम भी पढ़ ली है जिसके बारे में मैंने बताया था कि नाइटी उस युवती के लिए लाया हूं और उसके साथ मेरा सेक्सुअल रिलेशन है और और वो युवती उनके जान पहचान में ही है । फिर भी उसके बारे में अभी तक मुझसे कुछ पुछा क्यों नहीं... मुझे फटकारा क्यों नहीं...। हो सकता है ये सब पुछने के लिए उन्हें समय ना मिला हो ।

माॅम को ह्वाट्सएप करने के बाद और फिर ताजातरीन घर में हुई चर्चा के बाद माहौल भी तो बदला था । शायद अभी उन सब बातों से ज्यादा उन्हें मेरी सलामती की फ़िक्र सताए जा रही हो । यही कारण हो सकता है कि उनके अभी तक नहीं पुछने का ।

सोचते सोचते मेरी आंख लग गई । पांच बजे माॅम ने जगाया । डैड और रीतु भी घर आ चुके थे । चाय नाश्ते के बाद मैं क्लब चला गया ।

फिर वही सब जो वहां रोज होता है । लड़के और लड़कियों को ट्रेनिंग देना । ट्रेनिंग खत्म होने के बाद आफिस जाना । आज भी मालिक कम मैनेजर कुलभूषण खन्ना नहीं था । वहां से वापस घर आ गया ।

माॅम और रीतु रात के खाने की तैयारी कर रही थी जबकि डैड हमेशा की तरह टीबी के सामने बैठे अपने पसंदीदा चैनल पर डेली ओपेरा सिरियल का लुत्फ उठा रहे थे । मैं सीढ़ियों से होता हुआ अपने कमरे में चला गया और पैंट शर्ट खोलकर पायजामा और हल्का शर्ट पहन लिया ।

अभी सात ही बजे थे । मैंने सोचा श्वेता दी को कल अपने गाजियाबाद आने की सूचना तो दी ही नहीं । मैं कमरे से बाहर निकल कर खुले छत पर आया , एक सिगरेट सुलगाया और उन्हें फोन लगाया ।

दो रिंग बजते ही उन्होंने फोन उठाया ।

" हैलो !" - श्वेता दी की मधुर आवाज़ आई ।

" क्या कर रही हो तुफाने हमदम ?"

" डिनर की तैयारी कर रही हूं....तु बता वहां क्या खबर है ?"

" कोई खास नहीं । और बताओ तुमलोग की पैकिंग शैकिंग हो गई ?"

" वो तो कल ही हो गई । बस कुछ बर्तन , कपड़े और कुछ खुचरा सामान बाकी है , वो सब कल कर लेंगे ।"

" पलंग खोल दिया है क्या ?"

" हां । कल हम जमीन पर ही चादर डाल कर सोये थे ।"

" और गाड़ी वगैरह ?"

" गाड़ी भी बुक हो गई है । हम कल सुबह दस बजे यहां से निकल भी जायेंगे ।"

" सुनो , मैं कल वहां आ रहा हूं । मेरे वहां पहुंचने के बाद ही निकलना है ।"

" क्यों ? क्या हुआ ? ...कोई काम है क्या ?"

" हां । थाने में थोड़ा काम है । वैसे मैं तुम्हारे पास ग्यारह बजे तक पहुंच जाऊंगा ।"

" देर नहीं हो जायेगी ?...वहां पहुंच कर सामान सब रखवाना है , एडजस्ट करवाना है ।"

" कुछ भी देर नहीं होगा । यहां के लिए मजदूर कर दिया है , एकाध घंटे में वो सब रख देंगे । और बाकी रहा एडजस्ट करने का वो धीरे धीरे बाद में करने के लिए तुम्हारे दो आशिक तो है ही ।"

" दो नहीं सिर्फ एक है ।"

" अपने हसबैंड को काम करने से बचाना चाहती हो ?"

" वो यहां रहेंगे तो न काम करेंगे ।"

" क्यों ? अमेरिका , युरोप जा रहे हैं ?"

" नहीं । मुम्बई जा रहे हैं ।"

" अरे ! किस्त किस्त में क्या बोल रही हो । साफ साफ बताओ ना ?"

" आज सुबह इनके आफिस से इनके बाॅस का फोन आया था तो वो सुबह आफिस चले गए थे । वहां बाॅस ने इन्हें मुम्बई में कम्पनी के डेलीगेट मीटिंग में शामिल होने को कहा है । वो मीटिंग बुधवार से शुरू होगी जो तीन चार दिनों तक चलेगी । इसलिए ये दिल्ली से सोमवार को ही निकल जायेंगे ।"

" लेकिन जीजू तो छुट्टी पर थे ना ?"

" ये बहुत ही अर्जेंट काम है इसलिए इन्हें जाना ही पड़ेगा । वैसे भी इनकी तबीयत ठीक हो ही गई है और सोमवार से ज्वाइनिंग भी करनी ही थी ।"

" जीजू अभी घर पे ही है ?

" नहीं । दोस्तों से मिलने गए हैं , अब आते ही होंगे ।"

" मुम्बई जाने का मतलब सात आठ दिन जीजू घर से बाहर...वाह ! और घर पर सिर्फ़ हम तुम ।"

" क्या हम तुम ?"

" हम तुम एक कमरे में बंद हो और चाबी खो जाय " - मैंने बाॅबी मूवी का गाना गाया ।

" बड़ा शौक है ना ! और तुम्हारे साथ मैं क्यों कमरे में बंद हुंगी , आन्टी है ना... उनके साथ रहुंगी ।"

" आंटी भी मंगलवार से चार धाम के यात्रा पर जा रही है । समझी ! एक हफ्ते तक...अब मैं ही तुम्हें बजाऊंगा... मुझे तो सोच सोच के न जाने क्या क्या हो रहा है ।"

" बड़ा आया बजाने वाला । मैं मम्मी को बुला लुंगी ।"

" चाची को बुला लोगी तो चाचा और राहुल का देखभाल कौन करेगा ? तुम करोगी ?...चाचा का मुड तो वैसे ही हर समय दुर्योधन के गुस्से जैसा रहता है... इधर तुमने चाची को अपने घर बुलाया उधर तात श्री रासन पानी लेकर चाची के पीछे पीछे तुम्हारे घर में ।"


" मैं उर्वशी को बुला लुंगी... वैसे भी संजय जी भी कहीं बाहर गए हैं तो वो पक्का आ जायेगी ।"

" वाह वाह ! दो फुल एक माली....मजा आ जायेगा ।"

" हमें फुल समझने की गलती मत करना बेटा...गन्ने की तरह चुस डालेंगे ।"

" मैं तो कब से तैयार बैठा हूं मम्मी कि कोई मुझे गन्ने की तरह चुस डाले । तुम पहले यहां आओ तो जानेमन ।"

" आ रही हूं बेटा... थोड़ा सब्र कर.... बस दो ही दिन की तो बात है ।"

" मैं तो बस सब्र ही किए जा रहा हूं कि कब आवोगी और मैं तुम्हें कब आगे पीछे दोनों साइड से बजाऊं ।"

" खबरदार जो दोनों साइड के बारे में सोचा... पीछे के बारे में भुल कर भी मत सोचना ।"

" पीछे के बारे में क्या बुराई है ?.... आजकल सारी लड़कियां करवाती है ।"

" मुझे औरों के बारे में नहीं सोचना... मैं सिर्फ अपने बारे में कह रही हूं.... मुझे तो सोचकर ही कंपकंपी छूट जाती है ।"

" अरे कुछ नहीं होता... लड़कियो को लड़कों से भी ज्यादा मजा आता है । ब्लू फिल्म में नहीं देखी है ?"

" मुझे बेवकूफ मत बनाओ... मुझे सब पता है । बाप रे ! वो इतना छोटा और तुम्हारा इतना बड़ा.... जायेगा ही नहीं , अगर भुले भटके चला भी गया तो वो मेरी जिंदगी का अन्तिम दिन ही हो जायेगा... असम्भव...नो...नेभर ।"

" बेकार में टेंशन ले रही हो... कुछ नहीं होता... हां , पहली बार थोड़ा सा दर्द होगा और वो तो आगे वाली सील भी टुटने से होता है । इसमें भी सेम वैसा ही होगा । और एक बार ले लिया न तो खुद ही कुद कुद कर कहोगी कि मेरे पीछे ढुकाओ ।"

" मैं ऐसा कभी नहीं कहने वाली हूं । और तुम भी कोई जबरदस्ती नहीं करोगे ।"

" जैसी आप की इच्छा स्वीट हार्ट । वैसे पीछे करवाना स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक होता है ।"

" अच्छा ! भला वो कैसे ?"

" जिन्दगी में कभी पाइल्स की बिमारी नहीं होगी ।"

" फिर कोई उल जलूल तर्क देगा । फिर भी बता कैसे पाइल्स नहीं होगी ?"

" पाइल्स में जानती हो न कि क्या होता है ?"

" हां , जानती हूं ।"

" क्या होता है ?"

" वो लैट्रिन के रास्ते में घाव हो जाता है और वहां से खून निकलने लगता है ।"

" ठीक कहा लेकिन लैट्रिन के रास्ते में घाव क्यों हो जाता है ?"

" मुझे क्या पता । तु ही बता ?"

" हम जब लैट्रिन करते हैं तब ना हमारे मलद्वार से कभी मल पतला निकलता है तो कभी मोटा तो कभी सही तरीके से ... जानती हो न..।"

" छी...छी... मुझे नहीं सुनना तेरी ये गन्दी बातें ।"

" अरे भाई सुन तो पहले... फिर बाद में गन्दी अच्छी करते रहना ।"

" बक ।"

" पतला और मोटा मल निकलना पेट की बिमारी के कारण होता है ।"

" वो सभी को पता है । तु पाइल्स के बारे में बता ?"

" जब लैट्रिन होते वक्त मल मोटे मोटे हार्ड रूप में निकलने लगता है तो उससे गुदा छिद्र छील जाता है । और यही यदि अक्सर होने लगे तो वो जगह छिलते छिलते घाव का रूप अख्तियार कर लेता है । और इसी घाव के कारण वहां से खून का रिसाव होने लगता है । और यही पाइल्स कहलाता है । ये बिमारी यदि ज्यादा बदतर पोजीशन में चला जाय तो कैंसर भी बन जाता है ।"

" तो पीछे वाले हिस्से में करने से इस बिमारी का क्या मतलब ?"

" पीछे करने से गांड़ का छोटा छेद बड़ा हो जाता है और छेद बड़ा होने से मल कितना भी मोटा क्यों न हो फ्रिक्वैटंली बड़े आराम से बाहर निकल जाता है । और जब मल बिना विध्न वाधा के बाहर निकल जाए तो थोड़ी न मल छिद्र में कोई खिंचाव आयेगा या कोई जख्म बनेगा । और जब जख्म नहीं होगा तो पाइल्स भी नहीं होगा ।"

" ये सब डाक्टर ने बताया ?"

" नहीं । ये मेरी थियुरी है ।

" कमीने , कुत्ता , बदमाश......."- वो गरम हो कर बोली ।

" शान्त बालिके... शान्त " - मैंने हंसते हुए कहा ।

" कितना गन्दा थियुरी है ।"

" अच्छा यदि तुम्हें विश्वास नहीं है तो किसी डॉक्टर से पुछ लो... वैसे एक डाक्टर है मेरी नजर में... डॉ. चुतिया । बहुत ही काबिल डाक्टर है । उनके सैकड़ों किताबें भी मार्केट में उपलब्ध है ।"

( साॅरी डॉ साहब ये मैंने आपसे बिना इजाजत लिए लिख दिया )

" जरूरत नहीं है मुझे किसी डॉक्टर वाक्टर से पूछने की । और यदि ऐसा ही है तो तु खुद ही क्यों नहीं मरवा लेता ? तुझे कभी बवासीर नहीं होगा ।"

" तुम यदि लड़का होती तो मरवा भी लेता ।"

" कोई बात नहीं , वहां आने के बाद तेरी ये इच्छा मैं फिर भी पुरी कर दुंगी "

" तुम अपनी इच्छा पूरी करना और मैं अपनी इच्छा पुरी करूंगा ।"

" नो वे ।"

" तेरा पीछा ना छोडूंगा सोनिये , भेज दे चाहे जेल में..."

" ये क्या है ?"

" गाना है और क्या है ।"

" सुन , मैं फोन रखती हूं , शायद वो आ गए हैं ।"

" ओके । बाॅय एंड स्वीट ड्रीम्स ।"

" सेम टू यू ।"

उन्होंने फोन काट दिया ।

फिर कुछ खास नहीं हुआ । डिनर के पश्चात सभी अपने अपने कमरे में चले गए । मैं भी अपने कमरे में चला गया । सुबह जल्दी ही निकलना था इसलिए सोने की कोशिश करने लगा ।
Waaah bahut hi shandaar sanju bhai. Ab tak ke sare update bahut hi khubsurat the. Jab kathanak itna khubsurti se likha gaya ho to padhne me behad aanand aata hai. Har cheez ka detail me vishleshan behad saraahneeya hai aur sath hi kuch aisi cheezo ka bhi jinke bare me mujhe pahli baar pata chala aapke hi dwara. Iske liye aapko bahut bahut shukriya(Mera ishara aap samajh gaye honge.) :hug:

Amar case abhi bhi uljha hua hai. Ritu ke sath huyi baatcheet se ye nazar aaya ki agra me jo waardaat huyi thi wo asal me sanjay par nahi balki sagar par goli chalaayi gayi thi. Abhi tak to wo yahi samajhta raha tha ki koi sanjay ka dushman tha jo unki jaan lena chaahta tha magar ritu ke sath jab sagar ne is bare me baat ki to maamla khud par hi aa gaya. Ab sochne wali baat hai ki koi sagar ko kis liye jaan se maar dena chaahta hoga aur aisa kaun karne ki khwaahish rakhta hai.?? :dazed:

Sweta ke sath to chakkar tha hi, kajal ko bhi fasa hi liya hai magar ab janaab ki nazar apni chachi par hai lagta hai. Nighty ka chakkar bhi aisa ho gaya ki sagar miya pareshan se ho gaye hain. Shak maa bahan dono par tha magar zaahir maa par hua aur maa ne puch hi liya sab kuch. Ab sawaal ye hai ki message ke dwara sagar ne kiska naam bataya hai apni maa ko.??? Maujuda halaat ki vajah se abhi is bare me baat nahi huyi maa se kintu der sawer to hogi hi. Khair dekhte hain aage kya hota hai,,,,,:dazed:
 
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Waaah bahut hi shandaar sanju bhai. Ab tak ke sare update bahut hi khubsurat the. Jab kathanak itna khubsurti se likha gaya ho to padhne me behad aanand aata hai. Har cheez ka detail me vishleshan behad saraahneeya hai aur sath hi kuch aisi cheezo ka bhi jinke bare me mujhe pahli baar pata chala aapke hi dwara. Iske liye aapko bahut bahut shukriya(Mera ishara aap samajh gaye honge.) :hug:

Amar case abhi bhi uljha hua hai. Ritu ke sath huyi baatcheet se ye nazar aaya ki agra me jo waardaat huyi thi wo asal me sanjay par nahi balki sagar par goli chalaayi gayi thi. Abhi tak to wo yahi samajhta raha tha ki koi sanjay ka dushman tha jo unki jaan lena chaahta tha magar ritu ke sath jab sagar ne is bare me baat ki to maamla khud par hi aa gaya. Ab sochne wali baat hai ki koi sagar ko kis liye jaan se maar dena chaahta hoga aur aisa kaun karne ki khwaahish rakhta hai.?? :dazed:

Sweta ke sath to chakkar tha hi, kajal ko bhi fasa hi liya hai magar ab janaab ki nazar apni chachi par hai lagta hai. Nighty ka chakkar bhi aisa ho gaya ki sagar miya pareshan se ho gaye hain. Shak maa bahan dono par tha magar zaahir maa par hua aur maa ne puch hi liya sab kuch. Ab sawaal ye hai ki message ke dwara sagar ne kiska naam bataya hai apni maa ko.??? Maujuda halaat ki vajah se abhi is bare me baat nahi huyi maa se kintu der sawer to hogi hi. Khair dekhte hain aage kya hota hai,,,,,:dazed:
शुभम भाई..... आप ने जो इशारा किया है वो मैं समझ गया.... वो कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगा था लेकिन ये जो भी मैंने लिखा था अपने इमेजीनेशन और उसके अंदर काॅमेडी और सेक्स का तड़का देकर लिखा था ।
अब तो आपने भी एक सस्पेंस थ्रिलर कहानी लिखना शुरू किया है..... तो आप भी नहीं चाहेंगे कि कोई भी आसानी से सस्पेंस को समझ ले ।
वही कोशिश मैं भी कर रहा हूं । ?
 
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शुक्रिया भाई ?

शायद शुक्रवार या हार्डली शनिवार तक अपडेट दे दूं..... क्या करूं धंधा पानी भी तो करना जरूरी है न ।
 
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Mr.X796

Well-Known Member
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Update 25. Continue.

" तुम सोच रहे होगे कि मैं अमर को कैसे जानती हूं " - वो बोली ।

मैं सोफे पर बैठा अचरज से उसे देखे जा रहा था ।

वो अपनी चाय की कप टेबल पर रख कर खड़ी हुई और धीरे धीरे चलते हुए थोड़ी दुरी पर खिड़की के पास खड़ी हो गई । वो खिड़की की कपाट खोलकर बाहर आसमान की ओर उपर देखने लगी ।

मैं चुपचाप बैठे उसके बोलने की प्रतीक्षा कर रहा था ।

" हम छः महीने से रिलेशनशिप में थे । वो तुम्हारे और अपने मां की अक्सर चर्चा किया करता था । जब श्रेया ने तुम्हारा नाम लिया तभी मैं समझ गई थी कि तुम अमर के दोस्त सागर हो ।"

" लेकिन अमर ने तुम्हारे बारे में हमसे कभी जिक्र नहीं किया ।"

" मैंने ही मना किया था ।"

" लेकिन क्यों ?"

" अपने किस्मत पे एतबार नहीं था ।"

" मैं समझा नहीं ।"

" श्रेया बोली थी कि तुम मेरी बहन को जानते हो ?" - वो पलट कर मुझे देखते हुए बोली ।

उसने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया ।

" एकाध बार मिला था ।"

" कैसी है ?"

" तुम्हें नहीं पता ?"

" जब से अमेठी छोड़कर गई तब से नहीं ।"

" मतलब इतने सालों से तुम दोनों मिली नहीं ?"

मुझे बहुत आश्चर्य हुआ ।

" मिलना तो दूर बात तक नहीं हुई ।"

" कोई फोन वगैरह भी नहीं ?"

" मुश्किल से तो दो वक्त के अनाज का जुगाड होता था तो भला फोन कहां से आता " - वो फिकी मुस्कान करती हुई बोली ।

" अनुष्का एक करोड़पति की पत्नी बन चुकी है । मजे में है ।"

" चलो अच्छा है , कम से कम उसकी लाइफ तो सेट हुई " - वो वापस खिड़की की तरफ पलटते हुए बोली -" अमर के क़ातिल का पता चला ?"

" अभी तक तो नहीं । उसी सिलसिले में तो तुम से बातें करना चाहता था ।"

" मुझे अखबार के जरिए पता चला था । मुझे तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वो अब इस दुनिया में नहीं है ।"

" तुम्हें किसी पर शक है ?"

" हमने अपने रिलेशन को सभी से छुपा कर रखा था । मैं किस पर शक करूंगी ?"

" जिस वक्त अमर का खून हुआ था उसी समय तुम्हारी बहन अनुष्का मौका-ए-वारदात पर पाई गई थी ।"

" क्या ?" - वो चौंक कर फिर पलटी ।

मैंने उसे अमर के केस से संबंधित सभी चीजें बताई ।

उसके हाव भाव से यही लगता था कि वो इन सारी बातों से अनजान हैं ।

" एंटरटेनमेंट के धंधे में कैसे आ गई ?"

" अनुष्का के जाने के बाद मैं अकेली पड़ गई । मैं ज्यादा पढ़ी लिखी भी तो नहीं थी कि कहीं काम करके दो वक्त की रोटी जुगाड कर सकूं । अनुष्का पढ़ने में तेज थी तो वो छोटे छोटे बच्चों को कोचिंग , ट्यूशन करके दो पैसे कमा लेती थी जिससे किसी भी तरह हो जिंदगी कट ही जा रही थी । लेकिन उसके जाने के बाद मैं क्या करती ? थोड़ी बहुत डांस जानती थी तो शादी ब्याहों में शो करने वाले एक ग्रुप में बतौर डांसर शामिल हो गई । फिर जो सफर वहां से शुरू हुई तो आकर गोल्डन नाईट क्लब में खतम हुई ।"

" क्या अमर से मुलाकात गोल्डन क्लब में हुई थी ?

" नहीं । उससे पहली बार मुलाकात इतफाकन हुईं थी । मेरी एक्सीडेंट हो गई थी । एक कार वाले ने धक्का दे दिया था । उसी ने मुझे हाॅस्पिटल पहुंचाया और इलाज भी करवाया था । फिर वो मुझे देखने हाॅस्पिटल रोज आने लगा । इसी तरह मिलते-जुलते हमारी भावनाएं कब उबलने लगी पता ही नहीं चला ।"

मुझे ताज्जुब हो रहा था कि इतनी बड़ी बात अमर ने मुझसे छुपाई थी ।

" तुमने अमर को अपने रिलेशनशिप के बारे में हमें बताने के लिए इसलिए मना किया था न कि हम तुम्हारे जाॅब को पसन्द नहीं करेंगे । तुम्हें अच्छी लड़की नहीं समझेंगे ?"

" जो काम मैं कर रही हूं उसे सभ्य समाज में अच्छा नहीं माना जाता । है तो ये बदनाम धंधा ही न । हमारी सोसायटी में कैबरे डांसर और काॅल गर्ल मे उन्नीस बीस का ही तो फर्क माना जाता है न ।"

" लेकिन आखिर में तुम दोनों को अपनी शादी के बारे में बताना तो पड़ता ही ?"

" मेरी एक साल की एग्रीमेंट अक्टूबर में खतम हो रही थी । उससे पहले मैं जाॅब नहीं छोड़ सकती थी । जाॅब छोड़ते ही हम बता देते ।"

मैं कुछ देर तक चुपचाप उसे निहारता रहा ।

" मैंने सुना है तुम्हारी एक मौसी भी है ?"

" लगता है अनुष्का ने एकाध मुलाकात में बहुत ही कुछ बता दिया तुम्हें " - वो कटाक्ष करते हुए बोली ।

मैं चुप रहा ।

" हां । एक मौसी है लेकिन हमें तो उसका चेहरा भी याद नहीं है ।"

" मैंने ये भी सुना है वो भी किसी करोड़पति से ब्याही गई थी ।"

" उनके बारे में जो भी हमने सुना था वो मां से ही सुना था । वो मां से बड़ी थी । अनुष्का की तरह उन्होंने भी शादी के बाद फिर कभी अपने मायके में कदम नहीं रखा । मां बोलती थी कि उसने प्रेम विवाह किया था और उसका पति अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था ।"

" तुम्हारे परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी थी ?"

" जब तक मां बाप जिंदा थे किसी तरह की दिक्कत नहीं थी । पिता जी एक मील में काम करते थे लेकिन इतना पैसा कमा ही लेते थे कि चारों का गुजारा अच्छे से हो जाता था । जब दोनों की मृत्यु हुई उस वक्त मैं दस साल की और अनुष्का चौदह साल की थी । अनुष्का ने दसवीं कक्षा पास कर ली थी लेकिन मां बाप के मरने के बाद हमारी पढ़ाई बंद हो गई । कोई कमाने वाला नहीं था । मां बाप सम्पत्ति के नाम पर एक छोटा सा टाली का घर और थोड़ी गहने ही छोड़ गए थे , इससे हम क्या कर सकते थे ?"

" उसी गहने को बेचकर अनुष्का दिल्ली चली गई ?"

" हां । उसे पढ़ने का बहुत शौक था । उसकी महत्त्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी थी । वो मुझसे छुपा कर गहने बेची थी और दिल्ली चली गई । उसने कहा था कि पढ़ाई पुरी करके जाॅब मिलते ही मुझे बुला लेगी । लेकिन एक बार क्या वो निकली कि फिर.....।"

मुझे अनुष्का पर सच में बहुत गुस्सा आ रहा था ।

" तुम्हारे मौसाजी और मौसी की कोई फोटो है क्या ?"

" एक फोटो थी लेकिन वो मिल नहीं रही है ?"

" ओह ।"

" वैसे एक हमारी फेमिली फोटो है लेकिन उसमें मौसाजी नहीं है "- बोलकर वो अपने कमरे में चली गई ।

थोड़ी देर बाद वो एक पुरानी सी फोटो जो गंदी भी हो गई थी ले आई ।

पांच लोगों का एक फेमिली ग्रुप फोटो था । दोनों बहनें बहुत छोटी थी । वे अपने माता-पिता के गोद में बैठी हुई थी और एक उनकी मौसी थी ।

मौसी की पिक्चर देखते ही मुझे लगा कि इसे मैंने कहीं देखा है । थोड़ी देर देखकर मैंने फोटो उसे वापस कर दिया । वो फोटो लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी कि मैंने पूछा -
" यहां अकेली रहती हो ?"

" नहीं । एक लड़की के साथ रहती हूं , वो भी मेरे साथ ही काम करती है " - वो जाते जाते बोली ।

मेरे दिमाग में बार बार उसके मौसी की तसबीर आ रही थी । इसे मैंने कहीं देखा तो जरूर है ।

वो कमरे से बाहर आई तो मैं भी खड़ा हो गया ।

" जाने से पहले एक बात पुछना चाहता हूं ?"

" क्या ?"

" अब क्या करोगी ? जाॅब करती रहोगी या छोड़ दोगी ?"

वो फिर से खिड़की के पास चली गई और बाहर की ओर देखने लगी । बहुत देर तक वो वैसे ही खड़ी रही । मुझे लगा वो जबाव नहीं देना चाहती है इसलिए मैं दरवाजे की तरफ बढ़ा ।

दरवाजे पे खड़े होकर उसकी और निगाह डाली। वहां से उसकी शक्ल दिखाई दे रही थी । उसकी आंखें बंद थी और आंखो से दो बूंद आंसू छलक कर गालों पे पड़े हुए थे ।

मैं दरवाजे पर खड़ा हो गया ।

" मां बाप ने बचपन में ही साथ छोड़ दिया " - वो बहुत ही धीमी आवाज में बोल रही थी -" बड़ी बहन ने अपनी मंदबुद्धि बहन को गांव में अकेली छोड़ दिया । छः महीने में पहली बार अमर के रूप में खुशियां मेरी दामन में आई थी लेकिन उसने भी साथ छोड़ दिया । अब ये डांस वाली नौकरी ही तो आखिरी सहारा है......इसे छोड़ कहां जाउंगी ।"

उसकी बातें सुनकर मेरा मन दुःख और वेदना से भर गया । मेरी आंखें बोझिल हो गई ।

मैं उसके पास गया और उसे पकड़ कर अपनी ओर घुमाया ।

वो सिर झुकाए चुपचाप खड़ी रही । मैंने उसके आंसुओं को अपने हथेली से पोंछा ।

" तुम एक बहादुर लड़की हो वीणा । जिस तरह से विपरीत परिस्थितियों में तुमने अपने को संभाला है उससे मेरे दिल में तुम्हारे प्रति बहुत इज्जत है । मैं तुम्हें दिल से नमन करता हूं । तुम्हारे दिन भी पलटेंगे.... और बहुत जल्द पलटेंगे....मेरा पूरा विश्वास है ।"

मैं वहां से भारी मन और दिल में टिश लिए विदा हुआ ।
Superb ye update dil ko chhu gaya bhai
 
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TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
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आप सभी पाठकों को मेरा नमस्कार.....?

फरवरी २०२० में फोरम का मेम्बर बना........ और शायद लाॅक डॉउन में समय पास करने के लिए मई में एक इनसेस्ट कहानी थोड़ी ट्विस्ट के साथ ( मर्डर मिस्ट्री ) लिखना शुरू किया.... मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी कोई कहानी लिखी नहीं थी.... मैं खुद डरा हुआ था.... क्योंकि यहां पर एक से बढ़कर एक राइटर्स थे.....उन राइटर्स की कल्पना शक्ति के आगे मैं जीरो था..... भले ही मैंने अपनी जिंदगी में अनगिनत उपन्यास पढ़ा हो.... लेकिन पढ़ना अलग होता है और लिखना अलग...... खैर लिखना शुरू किया... कहानी का थीम इनसेस्ट था तो मैं रुल के अनुसार एडल्टरी .. हाॅरर ..रोमांस ..वगैरह नहीं लिख सकता था । मैंने सोचा था हजार पांच सौ लोग इस पर औपचारिक निगाह डालेंगे और फिर भुल जायेंगे..... लेकिन कारवां बनता गया...लोग जुड़ते गए.... रास्ते में कुछेक छुटते गए तो कुछ नये बनते गए ।......इन तीन महीनों के दौरान कई लोगों से दोस्ताना संबंध भी बना.... भले ही अजनबियों के साथ... एक फैंटेसी की तरह.... लेकिन वो सम्बन्ध और उनका प्यार मेरे लिए दुआएं थी जिसे परमपिता परमेश्वर ने उनके द्वारा मुझे नवाजा ।


कभी कभी लोग राइटर्स को कहानियों के द्वारा उसके बारे में गलत अंदाज लगा लेते हैं कि राइटर भी अपने कहानी के नायक की तरह ठरकी और कैरेक्टरलेश होगा..... जबकि ऐसा प्रायः नहीं होता है.... राइटर्स लिखते समय अपने हर एक कैरेक्टर को उसके चरित्र के मुताबिक सोचता है और फिर उसे कलमवद्ध करता है ।

धन्यवाद ?
Sanju bhai main is forum ka sabse masoom writer hu aur itna shareef ki koi soch bhi nahi sakta magar iske baavjud kuch log mujh par ilzaam lagate hain ki main masoom nahi hu. Kamdev bhai aur firefox bhai jaise ghute huye bhaiyo ke bich raha, yaha tak ki dr sahab ki kahani padhne ke baad bhi maine apni masoomiyat aur sharafat ko nahi chhoda. Fir bhi ilzaam lagte hain. Mujhe samajh nahi aata ki ye unka pyaar hai ya wo sach me mujhe aisa hi samajhte hain,,,,,,:innocent:

Khair chhodiye is baat ko, writer to abhineta ki tarah hota hai jo apni kahani ke har kirdaar ki acting karte huye likhta hai. Use har kirdaar ke nature me dhalna padta hai aur usi ke anusaar abhinay karte huye likhna padta hai. Khair aapki ye kahani bahut hi behtareen lagi mujhe. Ab jab writing ki duniya me aa hi gaye hain to pure josh ke sath likhiye taaki ham sab aapki kahaniyo se lutf utha sake,,,,:hug:
 
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