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Bahut hi zabardast update tha sanju bhai,,,,Update 26.
रात के दस बजे थे । मौसम अच्छा था इसलिए छत पर ही बिस्तर लगा लिया था। लेटकर आसमान में चमकते सितारों को देखने लगा ।
आज का दिन काफी थकावट भरा रहा था । माॅम की तबीयत कल शाम से ही खराब थी । उन्हें बुखार था । सुबह उन्हें डाक्टर को दिखाया और फिर चाची को हम सभी का खाना बनाने के लिए कह दिया । फिर वीणा से मिलने चला गया था ।
वीणा से मिलने के बाद वही रोज वाली रूटिन थी । आज क्लब में कुलभूषण खन्ना मौजूद था । उससे थोड़ी बहुत औपचारिक बातें भी हुई थी ।
आसमान में चमकते तारों को निहारते हुए वीणा के बारे में सोच रहा था । उसकी स्टोरी सुनकर मन व्यथित हो गया था । दिल में बेचैनी सी हुई थी ।
इस मर्द प्रधान समाज में एक अकेली और वो भी जवान लड़की को किन किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है , उसका अहसास था मुझे ।
मुझे इस बात का भी अहसास था कि एक जवान खुबसूरत लड़की जब स्टेज पर अनगिनत लोगों के सामने कला के नाम पर डांस प्रस्तुत करती है तो किस तरह से उसको हवश भरी निगाहों से देखा जाता है । उसके बारे में लोग कैसे कैसे विचार करते होंगे ।
कई काम ऐसे होते हैं जिसे लोग खुशी खुशी करते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो मजबूरी में करते हैं । वीणा ने मजबूरी में इस धंधे को अपनाया था । यदि उसके माता-पिता जिंदा होते तो क्या वो ये धंधा अपनाती ! यदि अनुष्का.. उसकी बड़ी बहन ने उसका साथ दिया होता तब भी क्या वो ये काम करती !.... कदापि नहीं ।
अमर को वीणा की सारी कहानी पता होगी । उसकी कहानी सुनकर उसे भी वीणा के प्रति सहानुभूति हुई होगी और शायद यही सहानुभूति धीरे धीरे प्यार में बदल गई होगी । और यदि उसकी खूबसूरती के बारे में कहें तो निसंदेह वो लाखों में एक थी । ऐसे में अमर का उसके प्यार में पड़ना कोई आश्चर्य वाली बात नहीं थी ।
उसने जो अपनी फेमिली फोटो दिखाई थी , उसमें उसकी मौसी मुझे जानी पहचानी लगी थी । फोटो तब की थी जब वो जवान थी मगर अब तो उसकी बहुत उमर हो गई होगी । अब तो वो बुड्ढी दिखती होगी । उसके बारे में सोचते सोचते अचानक मेरे दिमाग की घंटी बजी ।.....जानकी !..... रमाकांत जी की पत्नी ।
उनके चेहरे और शरीर पर भले ही उमर का असर पड़ गया हो लेकिन नाक नक्श , कद काठी वैसा ही था । जानकी आंटी ही वीणा और अनुष्का की मौसी थी ।
लेकिन वीणा ने कहा था कि उसकी मौसी की शादी एक अमीर घराने में हुई थी पर रमाकांत जी और जानकी देवी की हैसियत देखकर लगता तो नहीं है कि वो कोई खास अमीर हैं । वो एक फ्लेट में रह रहे हैं जबकि जैसा वीणा ने बताया था उस हिसाब से तो उन्हें किसी कोठी या महल में रहना चाहिए था । बड़े बड़े कारोबार होना चाहिए था । लेकिन वे तो एक आम इंसान की तरह रिटायर जिंदगी जी रहे हैं ।
मैंने रमणीक लाल से कहा था कि रमाकांत जी के कमाई का जरिया क्या है तो उसने कहा था कि मुझे पता नहीं, शायद मेरे जीजा को पता होगा । आखिर वो बहुत दिनों से पड़ोसी थे ।
मैंने मोबाइल में टाईम देखा । ग्यारह बज रहे थे । मैंने जीजा को फोन लगाने के लिए सोचा । पता नहीं अभी मुम्बई में क्या कर रहे होंगे । फिर भी मैंने फोन लगाया ।
" क्या बात है सागर ? इतनी रात को कैसे फोन किया ?"- जीजू की आवाज आई ।
" साॅरी जीजू इतनी देर रात फोन करने के लिए । किसी के बारे में पुछना था मुझे ।"
" किसके बारे में ?"
" अभी आप कहां हो ?"
" होटल में हूं । सोने जा रहा था ।"
" ओके । आपके गाजियाबाद वाले फ्लेट में आपके पड़ोसी रमाकांत जी और उनकी पत्नी के बारे में पुछना था ।"
" क्या पुछना है ?"
" मैंने कहीं सुना कि वो बहुत ही पैसे वाले और रईस खानदान से थे तो फिर वो एक साधारण से फ्लेट में क्यों रह रहे हैं ।"
" किसने कहा ? कहीं इसका मतलब भी अमर मर्डर केस से तो नहीं है ?"
" एक लड़की ने बोला था । क्या ये सच है ?"
" अब सच है या झूठ , ये तो मैं नहीं जानता लेकिन जितना रमाकांत जी ने अपने बारे में जो बताया था वही जानता हूं ।"
" क्या बताया था उन्होंने अपने बारे में ?"
" उनका कहना था कि उनके पिता एक रईस खानदान से थे । लेकिन उन्हें अपने अपनी औलाद मतलब रमाकांत जी से बड़ी नाउम्मीदी थी । क्योंकि ये उस वक्त बुरे लोगों की सोहबत में थे । शराब सिगरेट का शौक था । फिर ये एक लड़की के सम्पर्क में आए और अपने पिता के मर्जी के खिलाफ उस लड़की से शादी कर लिए ।"
" क्या वो लड़की जानकी आंटी थी ?"
" हां । वो जानकी आंटी थी । शादी के बाद इनके पिता बहुत खपा हुए । वो इतने ज्यादा खपा हुए कि उन्हें अपनी पुरी जायदाद से बेदखल करना चाहते थे लेकिन फिर उन्हें अपने एकलौते औलाद पर कुछ तरस आ गया था । उन्होंने अपनी जिंदगी में ही अपनी तमाम चल और अचल संपत्ति धर्मार्थ कार्यों में लगाने के लिए एक ट्रस्ट के हवाले कर दी थी और ऐसा इंतजाम किया था कि उन्हें यानी रमाकांत को अपनी सारी जिंदगी ट्रस्ट से चालीस हजार रुपए माहवार मिलता रहे । वो रकम बीस बाइस सालों से उन्हें नियमित मिल रही है ।"
" ओह ! तो इसका मतलब उनकी फायनांशियल स्थिति यदि खूब बढ़िया नहीं है तो कोई खराब भी नहीं है ।"
" बढ़िया क्यों नहीं है ? उस वक्त आज जैसे महंगाई नहीं थी । दो लोगों के लिए आज भी ये रकम कोई छोटी नहीं होती ।"
" और जानकी आंटी कैसी है ?"
" आंटी बहुत तन्हाई पसंद है । वो ज्यादा किसी से मिलती जुलती नहीं ।"
जीजू से बातों के दौरान मुझे याद आया कि अमर के मर्डर वाले दिन अनुष्का जीजू के फ्लेट में थी और ठीक उसके बगल में ही उसकी मौसी का फ्लैट था ।
तो क्या अनुष्का को पता है कि बगल में ही उसकी मौसी रहती है । मौसी अनुष्का को नहीं पहचान सकती थी क्योंकि उसने उसे बचपन में देखा था । दोनों बहनें उस वक्त बहुत छोटी थी और अब वो जवान लड़की में बदल गई है । मगर अनुष्का और वीणा तो फोटो के चलते अपनी मौसी को पहचान ही सकती थी ।
" जीजू एक बात और बताईए , क्या अनुष्का आप के फ्लैट पे अक्सर आती थी ? लेकिन प्लीज सच बोलिएगा ।"
" नहीं नहीं। वो पहली बार मेरे फ्लैट पे आई थी और पहली बार ही इतना बड़ा कांड हो गया ।"
" ओके । थैंक्यू जीजू । गुड नाईट ।"
बोलकर मैंने फोन काट दिया ।
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सुबह मोबाइल बजने की आवाज से मेरी नींद खुल गई । टाईम देखा । अभी छः ही बजे थे ।
मैंने देखा रमणीक लाल का फोन था ।
मेरे ' हैलो ' कहने के बाद जो रमणीक लाल ने कहा उसे सुन कर मैं भौंचक्का हो गया ।
मनीष जैन को किसी ने जान से मार दिया था ।
" कब ?- मैंने कहा ।
" पुरी खबर नहीं पता। मैंने अभी अभी खबर सुनी तो सोचा तुम्हें बता दूं ।"
" तुमको कैसे पता चला ?"
" क्या जाहिलो जैसे सवाल करते हो ? कुछ दिन पहले ही तो उसके बारे में जांच पड़ताल की थी । और मैं तुमसे कितना बार कहूं कि मैं भी पुलिस की ही नौकरी करता हूं ।"
" साॅरी । उसकी लाश कहां पाई गई ?"
" उसके फ्लैट पर ही ।"
" ओह ! क्या डेड बॉडी पुलिस ले गई या अभी भी फ्लैट पर ही है ?"
" जिस हवलदार ने मुझे बताया उसके अनुसार अभी भी लाश घर पर ही है और पुलिस को भी अभी ही पता चला है ।"
" इंस्पेक्टर कौन गया है ?"
" वो एरिया विजय कोठारी के थाने के अंतर्गत आता है तो वही जायेगा ।"
" ठीक है । फोन रखो , मैं वहां के लिए निकल रहा हूं ।"
" इंस्पेक्टर तुम्हें उसके फ्लैट में जाने की इजाजत नहीं देगा ।"
" देखते है । वैसे इंस्पेक्टर कोठारी मुझे जानता है " - मैंने कहा -" और सुनो , एक और काम करना है ।"
" क्या ?"
मैंने उसे काम बताने के बाद फोन काट दिया और जल्दी जल्दी तैयार हो कर माॅम डैड को बोलकर बाइक लेकर गाजियाबाद निकल गया ।
जब मैं मनीष जैन के फ्लैट के पास पहुंचा तो देखा कि फ्लैट का मुख्य द्वार खुला हुआ था और अंदर इंस्पेक्टर विजय कोठारी और उसके चंद कांस्टेबल डाइनिंग हॉल में पड़ोसियों से पुछताछ कर रहे थे । शायद अभी तक उनका टेक्निकल टीम नहीं आया था ।
इंस्पेक्टर कोठारी की नजर मुझ पर पड़ी । उसने मुझे अंदर आने का इशारा किया ।
मैं ड्राइंगरुम में प्रवेश किया ।
भीतर ड्राइंगरुम के कारपेट पर औंधे मुंह मनीष जैन पड़ा था । उसकी पीठ में मूठ तक जो खंजर घुपा हुआ था , उसे मैंने फ़ौरन पहचान लिया ।
यह वही नक्काशीदार मूठ वाला जापानी खंजर था जो मैंने श्वेता दी के पास देखा था ।
तभी पुलिस का एक बड़ा दल जिसमें टेक्निकल टीम , फोटोग्राफर , डाक्टर वहां पहुंचा ।
उन्होंने अपनी छानबीन शुरू कर दिया । उनके आने के बाद इंस्पेक्टर ने खंजर को लाश से बाहर खींचने का प्रयास किया तो केवल मूठ हाथ में आ गई , फल लाश मे ही धंसा रह गया ।
खंजर की मूठ नक्काशीदार होने की वजह से उस पर से किसी प्रकार के उंगलियों के निशान बरामद नहीं हुए ।
इंस्पेक्टर ने मूठ का मुआयना किया । खंजर की मूठ खोखली थी । उसने खोखली मूठ के अन्दर झांका ।
" क्या तुम इस खंजर को पहचानने हो ?" - इंस्पेक्टर कोठारी ने मुझे गौर से खंजर को निहारते हुए देख पुछा ।
" हां " - बड़ी मुश्किल से मैंने कहा ।
Update Continue.
Sagar ki taftesh jaari hai magar yaha to ek aur murder ho gaya, wo bhi manish jain ka. Is murder ne jaise case ko aur uljha diya hai. Anushka veena aur janki aunty ka connection aur relation to mil gaya magar sawaal ye hai ki manish ka murder kis liye hua aur uska is maamle se kya sambandh ho sakta hai,,,,
Sagar bhi waha pahuch chuka hai aur uski nazar us khanzar par padi jo manish jain ke jism me dhasa hua tha. Waisa hi khanzar sweta ke paas bhi hai jo ki ek sandeh wali baat hai. Khair kothari ne sagar se puch liya ki kya wo us khanzar ko pahchaanta hai. Dekhte hain is khanzar ke bare me sagar kya batata hai,,,,,