Thank you MR SINGH Bhai for your lovely comments ?Nice update bro
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Update 24. Continue.
कमरे के अंदर नजर पड़ते ही मैं बुरी तरह चौंक गया । मैं दरवाजे के ओट में खड़ा आंखें फाड़े दोनों सहेलियों को देख रहा था । उर्वशी दी एक ऐसी हाॅट नाइटी पहनी थी जो उनके मांशल जांघों तक ही आती थी । उपर आधा वक्ष नंगा था । ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उन्होंने कई ब्रा या पैंटी नहीं पहनी थी । उनका गोरा और अधनंगा बदन उस नाइटी में कहर ढा रहा था । वो इस वक्त ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी होकर अपने बालों पर कंघी कर रही थी ।
श्वेता दी शायद अभी अभी नहाकर आई थी । वो मात्र पेटीकोट पहने हुए थी जिसे उन्होंने अपने बड़े बड़े बूब्स पर आधे से बांध रखा था । पेटिकोट नीचे उनके घुटनों तक ही सीमित थी । और उन्होंने भी कोई ब्रा पैंटी नहीं पहन रखी थी । वो एक तौलिए से अपनी बाल सुखा रही थी । क्या कहूं... शब्द नहीं थे कुछ कहने के लिए ।
इन दोनों औरतें के इस सेक्सी अवतार को देखकर मेरी सांसें ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे हो गई । मेरी आंखें उनके इन वस्त्रों के अन्दर छुपी हुई जन्नत का दिदार करने के लिए चीर हरण करने लग गई । मेरा लिंग मेरे पैंट और जांघिया से फड़फड़ा कर बाहर आने के लिए उछल कूद मचाने लगा ।
शायद दोनों खाना बनाने के बाद नहाई थी और अब कपड़े पहनने के लिए तैयारी कर रही है ।
मुझे इनकी मंशा संदेहास्पद तो लग रही थी लेकिन कहीं न कहीं मैं आश्वस्त भी था । दिन में अचानक से पार्टी करना , वाइन मंगवाना , घुमा फिरा कर बहकी बहकी बातें करना । मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि ये दोनों सहेलियां आज मेरा शिकार करने वाली है । और ऐसा शिकार भला कौन नहीं होना चाहेगा ।
लेकिन उत्तेजना के साथ साथ कहीं ना कहीं मुझे डर भी लग रहा था । क्या मैं इन दो भड़कती शोलों की आग को अकेला बुझा पाऊंगा ? मर्दों का तो एक बार स्खलन हुआ तो फिर दुबारा तैयार होने में बहुत टाइम लगता है लेकिन औरतें एक बार स्खलन होने के बाद दुबारा तुरंत ही तैयार हो जाती है । वो एक बार के ही सेक्स के दौरान कई बार स्खलन का सुख भोग लेती हैं ।
मुझे याद आया जब मैंने पहली बार सेक्स किया था । वो एक पैंतीस साल की खुबसूरत औरत थी । सहवास के दौरान उसने मुझे कुछ बातें कही थी । उसने कहा था हम औरतें सिर्फ संभोग से ही रज स्खलन प्राप्त नहीं कर लेती बल्कि हमारे शरीर में ऐसे कई पार्ट्स है जिसे हमारा सेक्स पार्टनर चुम के , चाट के , रगड़ के , उत्तेजित कर के हमारे योनि से रज स्खलन करवा सकता है । इनमें से कोई एक से भी हम चरम सुख प्राप्त कर सकती हैं । हमारे होंठों को चुसे जाने से..., हमारे जीभ को चुसे जाने से..., हमारी चुचियों को दबाये मसले जाने से..., निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चुसे जाने से..., हमारे कटि प्रदेश को प्यार करने से..., हमारे योनि के अगल बगल हिस्से को अपने होंठों से चुमे , चाटे जाने से... , हमारे चूतड़ों को पकड़ कर दबाये मसले जाने से हमारी योनि स्खलन प्राप्त कर लेती है । कभी कभी तो हम अपने कानों और गले को भी चुमने चाटने से अपनी पानी निकाल देती हैं । मतलब हम औरतों के स्खलन में शरीर के कई पार्ट्स काम करते हैं । हम औरतें सिर्फ एक बार के सम्भोग में ही कई बार चरम सुख प्राप्त कर सकती हैं ।
मगर मर्दों के शरीर में सेंसेटिव पार्ट सिर्फ एक ही है । उनका लिंग । जब तक लिंग को मसला नहीं जाय , रगड़ा नहीं जाय , उस पर प्रेशर नहीं दिया जाय तब तक वो स्खलन सुख प्राप्त नहीं कर सकते । भले ही वो अपने हाथों से करें या बिस्तर और तकिए पर रगड़ कर करें । या सेक्स कर के करें । इसीलिए कहा गया है कि औरतों का सेक्स पावर मर्दों से कई गुना ज्यादा होती है ।
औरतों के लिए लिंग का आकार भी कोई खास मायने नहीं रखता । वो किसी भी आकार के लिंग से चरम सुख प्राप्त कर सकती है । औरतें प्यार की भुखी होती है । उनका पार्टनर यदि उनकी मनोदशा को समझे और सिर्फ अपना ही सेक्स सुख की कामना न रख कर अपने पार्टनर के सुख का ख्याल रखें तो वो अपने प्रेमी पर जानों जान से न्योछावर हो जाती है ।
मैं उसकी बातें सोच रहा था कि उर्वशी दी की नजर मुझ पर पड़ी ।
" अरे ! दरवाजे पर खड़े खड़े होकर क्या कर रहे हो ? अन्दर आओ "- उर्वशी दी ने अपने बालों पर कंघी करते हुए कहा ।
मैं कमरे में चला गया और जाकर पलंग पर बैठ गया ।
" कहां चले गए थे ?"- श्वेता दी ने पूछा । वो अभी भी अपने बालों को तौलिए से पोंछे जा रही थी ।
" कहीं नहीं गया था । तुम दोनों खाना बनाने में बिजी थी तो नीचे आन्टी के घर में चला गया । "
वो दोनों ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी थी । मैं दोनों को बारी बारी से देखे जा रहा था । उनकी बड़ी बड़ी छातियों से नजर हटती तो उनके जांघों पर चली जाती । वहां से हटती तो फिर उनकी गोलाईयों पर चली जाती।
" किसकी अच्छी है ?"- उर्वशी दी की आवाज सुनकर मेरा ध्यान टुटा ।
" क्या ?"- मैं उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयों को देखते हुए कहा ।
" बाल । हम दोनों में किसकी बाल अच्छी है ?" - वो धूर्तता पूर्वक मुस्कराते हुए बोली ।
मेरी आंखें उनकी बालों पर पड़ी । कमर तक लम्बी । जो नहाने के कारण भींगी हुई थी ।
" बाल ! मैं तो कुछ और ही समझा था ।"
" फिलहाल तो बाल के बारे में ही बताओ ?"
" बालों के बारे में तो मुझसे पुछो मत ।"
" क्यों ?"
" इन बालों के चक्कर में एक बार मेरी बड़ी फजीहत हो चुकी है ।"
" क्या हुआ था ?"- श्वेता दी अपने बाल पोछते हुए बोली ।
" छोड़ो , क्या करोगी जानकर । बड़ी दर्द भरी कहानी है ।"
" अच्छा ! ऐसा क्या । तब तो जरूर सुनूंगी "- उर्वशी दी कंघी को ड्रेसिंग टेबल पर रख कर मेरे बगल में बैठते हुए बोली ।
उनके मेरे बगल में बैठने से उनकी जांघें मेरी जांघों से सट गई ।
" जब मैं बी एस सी फर्स्ट इयर का स्टूडेंट था तब ये दुर्घटना मेरे साथ घटी थी ।"
" क्या हुआ था ?"- श्वेता दी भी आकर मेरे दूसरे साईड बैठते हुए बोली ।
अब मैं दोनों ओर से दो खुबसूरत अधनंगी हसीनाओं के बीच था । दोनों की सेक्सी मोटी मोटी जांघें मेरे दोनों जांघों को स्पर्श कर रही थी । एक सेक्सी नाइटी पहनी हुई तो एक सिर्फ पेटीकोट पहने हुई । मैं हवा में उड़ने लगा ।
" अरे ! बोलो भी "- उर्वशी दी मेरे गाल को खिंचती हुईं बोली ।
मैं जमीन पर आते हुए बोला - " एक दिन दोपहर के वक्त मैं अपने दोस्तों के साथ कालेज कैम्पस में बातें कर रहा था । हमसे थोड़ी सी ही दुरी पर कुछ लड़कियां खड़ी थी । वो भी आपस में खुसुर फुसुर कर रही थी । उनमें एक लड़की काफी सुंदर थी । अच्छी कद काठी थी उसकी । मगर उसमें जो खास बात थी वो उसकी बाल थी । काली काली घुंघराले बाल जो उसकी आधी पीठ तक ही आती थी । जैसे माधुरी दीक्षित की साजन मूवी में थी । मेरे दोस्तों ने मुझे डेयर दिया कि मैं उस लड़की से बात करके दिखाऊं । मैं अपने आपको तीसमार खान समझता ही था सो मैं बेफिक्र होकर मस्ती से उन लड़कियों के पास चला गया । वे सभी अचानक से मुझे आया देखकर चौंकी । मैं उस घुंघराले बाल वाली लड़की के सामने गया और उसके बालों की बड़ाई कर दी ।"
" क्या बोला तुमने ?"- श्वेता दी बोली ।
" मैंने कहा मिस , आपकी बाल बहुत ही खूबसूरत है । लम्बे लम्बे
..काले काले... घुंघराले घुंघराले ।"
" फिर क्या बोली लड़की "- इस बार उर्वशी ने पूछा ।
" फिर... फिर उस लड़की ने एक जोरदार का तमाचा मेरे गाल पर जड़ दिया और भुनभुनाती हुई वहां से चली गई ।"
" क्या ! सिर्फ इतनी सी बात पर तुम्हें तमाचा मार दिया । तुमने तो कुछ भी खराब नहीं कहा बल्कि उसकी बड़ाई ही की "- श्वेता दी आश्चर्य करते हुए बोली ।
" वही तो । तब मुझे क्या पता था कि बाल की बड़ाई करने से तमाचे भी खाने पड़ते हैं । लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे मालूम पड़ा कि उसने मुझे तमाचा क्यों मारा ।"
" क्यों मारा ?"- श्वेता दी बोली ।
" दरअसल वो लड़की बंगाली थी । और बंगला भाषा में बाल का मतलब झांट होता है ।"
" क्या ?"- दोनों एक साथ बोली ।
और जोर जोर से हंसने लगी ।
" और बाल को क्या बोलती है ?"- श्वेता दी ने हंसते हुए कहा ।
" चुल या केश । यदि पंकज उधास को मालूम होता तो वो ' बंगाल का जादू बालों में ' वाली गज़ल कभी भी नहीं गाता ।"
वो दोनों हंसे जा रही थी ।
मैं चिढ़ते हुए बोला -" अब तुम दोनों गला फाड़कर हंसना बंद करो । और ये बताओ कि खाने पीने का क्या इंतजाम है ।"
" भुख लगी है ?"- उर्वशी दी ने हंसते हुए कहा ।
" अरे ! पार्टी रखा है तो कुछ फिलहाल के लिए हल्का फुल्का ही खाने पीने का इंतजाम करो ?"
" क्या श्वेता " - उर्वशी दी ने श्वेता दी की तरफ देखते हुए कहा -" कैसी बहन है तु । भाई को भुख लगी है और तु कुछ कर नहीं रही है ।"
" क्यों नहीं करूंगी । मेरा भाई है तो मैं ही न अपने भाई के भुख प्यास का ख्याल करूंगी " - कहते हुए श्वेता दी ने मेरे सिर पर हाथ रखा ओर झुका कर अपने सीने पर मेरा मुंह कर दिया । मेरा मुंह उसकी नंगी चूचियों से जा चिपका ।
उन्होंने न जाने कब अपने पेटीकोट को अपने छाती से नीचे घिसका दिया था । मैं हतप्रभ तरन्नुम में उनकी निप्पल को मुंह में डाला और फिर सब कुछ भुल गया ।
वाह ! वाह ! क्या दिन था आज का । लोग-बाग सपने देखते हैं और मैं हकीकत जी रहा था । वैसे दोनों सहेलियां थोड़ी डोमिनेट जैसे लग रही थी पर मुझे उससे क्या । डोमिनेट हो या सवमिसिव मुझे तो मजा ही आना था ।
मैं श्वेता दी की चुचियों को प्यार से मुंह में लेकर चुसे जा रहा था कि उर्वशी दी की आवाज आई ।
" तेरे भाई को तो पता ही नहीं है श्वेता। इसे तो मेरे हसबैंड से सिखना चाहिए कि बहन की चुचियों को कैसे प्यार किया जाता है ।"
मैं सुनते ही श्वेता दी के चुचियों से अपना मुंह हटाया और हैरत से उर्वशी दी की तरफ देखा ।
" क्या कहा आपने ?"
" बहरे हो ?"
" आप के कहने का मतलब संजय जी और मधुमिता का आपस में सेक्सुअल रिलेशनशिप है ?"
" हां ।"
मैंने आश्चर्य से उनकी तरफ देखा फिर श्वेता दी की ओर देखा । श्वेता दी के चेहरे के हाव-भाव से लगता था कि उन्हें इस के बारे में सब पता है । मैंने फिर उर्वशी दी की तरफ देखा और कहा -" आप को कैसे पता ?"
" बताऊंगी सोना । पहले बाथरूम जाओ और नहा धो कर फ्रेश हो कर आओ । फिर पार्टी करते हैं । और फिर बातें भी करते रहेंगे "- उर्वशी दी ने मुस्कुराते हुए कहा ।
मैंने श्वेता दी की तरफ देखा । वो अपनी पेटीकोट को पहले की ही तरह बांध ली थी । उन्होंने भी मुस्करा कर अपनी सहमति जताई ।
मैं बिना कुछ कहे अटैच बाथरूम में घुस गया और तैयार हो कर बाहर आया । श्वेता दी ने जीजू का शार्ट दिया था । मेरे बदन पर शार्ट के अलावा कुछ नहीं था । जब मैं बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि वे दोनों पहले वाली ही ड्रेस में ही थी । उन्होंने कोई भी वस्त्र चेंज नहीं किया था । दोनों पलंग पर बैठी थी । पलंग से सटकर टेबल लगा हुआ था और उसके उपर बीयर का बोतल , मेरी स्काच की छोटी बोतल , तीन ग्लास , एक प्लेट में ड्राई फ्रूट्स , एक प्लेट में सलाद और एक बड़े से प्लेट में बोनलेस चिकन चीली रखा हुआ था । उन्होंने जाम की तैयारी कर रखी थी ।
मैं पलंग के पास पहुंचा तो उर्वशी दी ने मेरे हाथ को पकड़ कर अपने और श्वेता दी के बीच बैठा दिया । हम तीनों सटकर बैठे थे । मैं उन दोनों के शरीर से आती हुई गर्मी से पिघले हुए भाप बनें जा रहा था । मेरा लिंग जो नहाने के बाद थोड़ा शांत था फिर से अपनी औकात में आने लगा ।
उर्वशी दी ने दो ग्लास में बीयर ढाला और एक ग्लास में मेरा वाइन ।
फिर चीयर्स बोलकर अपना अपना ग्लास हमने अपने होंठों से लगाया ।
मैंने एक घुंट मारा और चटखारे लेते हुए कहा - " अब बताओ तुम्हारे हसबैंड और तुम्हारे ननद की प्रेम कहानी ।"
" बताती हूं , थोड़ी सी और बीयर पेट में जाय फिर बताती हूं "- उर्वशी दी ने बीयर पीते हुए कहा ।
इस बीच मैं उठकर अपना फेवरेट सिगरेट क्लासिक अपने पैंट में से निकाला और वापस उसी जगह पर बैठ गया ।
जब एक एक ग्लास उन्होंने खतम किया तब उर्वशी ने हल्के तरंग में बोलना शुरू किया -" आगरा के होटल में उस रात एक कमरे में जब तुम दोनों भाई बहन अपनी रास लीला रचा रहे थे उसी समय एक दूसरे रूम में एक दूसरे भाई बहन की कामूक गाथा लिखी जा रही थी ।"
मैं सिगरेट सुलगाया और कश लगाते हुए कहा -" शुरू से बताना ?"
उन्होंने बोलना शुरू किया ।
" संजय को तुम जानते ही हो । दिखने में स्मार्ट , हैंडसम , टाॅल , खुबसूरत और वही उनकी बहन मधुमिता जो बिल्कुल हूबहू आयशा टाकिया की जिरक्स काॅपी । मैं जब शादी करके उस घर में गई तब से ही मुझे इन दोनों भाई बहन में कुछ ज्यादा ही प्रेम भाव दिख रहा था । मगर मैंने कभी भी उन दोनों को कोई ग़लत हरकत करते हुए नहीं देखा था । आगरा में रिसेप्शन पार्टी वाली रात के बारे में तुम्हें पता ही है कि हम सभी ने वाइन पी थी । नशा सभी को थोड़ा बहुत था । रात में खाने पीने के बाद तुम भाई बहन अपने कमरे में चले गए । और मैं अपने कमरे में । संजय को उस रात अपने दोस्तों के साथ ताश खेलने का प्रोग्राम था तो वो अपने दोस्तों के पास चले गए । मैं अपने कमरे में अकेले बोर हो रही थी तो मैंने मधुमिता को फोन किया और कहा कि वो मेरे रूम में चली आए । मधुमिता अपनी सहेलियों के साथ एक रूम में थी । वो मेरी बात सुनते ही मेरे रूम में चली आई । शायद उस वक्त रात के बारह बज रहे होंगे । मैं उसे देखते ही समझ गई कि उस ने भी वाइन पी रखी है । मेरे पुछने पर उसने बताया कि वो अपनी सहेलियों के साथ रूम के अंदर बैठ कर वाइन पी थी । मैंने इस पर ज्यादा तवज्जो नहीं दी । मैंने दरवाजा बंद की और हम दोनो ने नाइट ड्रेस पहनी और बिस्तर पर लेट गई । लाईट हमने पहले ही बंद कर दी थी ।
नशा और थोड़ी थकावट के कारण मैं जल्दी ही सो गई । रात के किसी वक्त रूम में बेल बजने की आवाज से मेरी नींद टुट गई । आलस के चलते उठने का मन नहीं करता था । तभी मैंने देखा मधुमिता बिस्तर से उठी और बोली -" कौन है ?"
" मैं हूं ।" संजय की आवाज आई ।
मधुमिता बिस्तर से उठी और दरवाजा खोल दी । संजय कमरे में प्रवेश किए और दरवाजे को बंद कर दिया ।
मधुमिता की आवाज आई -" दरवाजा क्यों बंद कर दिया आपने । मैं अपने कमरे में जाती हूं न ।"
" रात के दो बज रहे हैं , कहां जाओगी ? सभी गहरी नींद में सोए होंगे । यही पे सो जाओ ।" संजय ने कहा ।
फिर किसी की आवाज नहीं आई । कमरे में अंधेरा था लेकिन एक नाइट बल्ब जल रहा था जिससे हल्की हल्की रोशनी थी । मैंने सोने के लिए अपनी आंखें बंद कर दी । मैं बिस्तर के किनारे पर सोई थी । मेरे बगल में मधुमिता लेटी थी । संजय भी कपड़े उतार कर सिर्फ एक शार्ट पहन कर बिस्तर के दुसरे किनारे लेट गए । पलंग बड़ा था इसलिए सोने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं थी । मधुमिता हम दोनों के बीच सोई थी ।
संजय के बेल बजाने , कमरे में आने और उनके बिस्तर पर लेटने तक मैं उठी नहीं तो उन्हें लगा कि मैं गहरी नींद में सोई हुई हूं । और उन्हें ये भी पता था कि मैंने वाइन भी पी थी । संजय जानते थे कि मुझे आधे बोतल बीयर में ही नशा हो जाता है । और बीयर पीने के बाद एक बार सोई तो फिर कोई कितना भी चिल्लाए , नींद नहीं टुटती है । लेकिन उस रात न जाने क्यों एक बार जो नींद टुटी फिर दुबारा आ नहीं रही थी । शायद नई जगह और पार्टी में हुई घटनाओं के चलते । मैंने आंख बंद कर ली और नींद आने का इंतजार करने लगी ।
आंख बंद किए काफी देर हो चुकी थी तभी मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ । शायद पलंग पर उन दोनों के हिलने डुलने से लगा था । मैंने आंखें खोली और लेटे हुए ही उन्हें देखा । दोनों जो पहले करवट के बल लेटे हुए थे , अब पीठ के बल हो गए थे । मैंने फिर से अपनी आंखें बंद कर ली ।
थोड़ी देर बाद संजय के धीरे से एक बार खांसने की आवाज आई । उसके चार पांच मिनट बाद मधुमिता की एक बार खांसने की आवाज आई । शायद वो अभी भी जगे हुए थे । मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और सोने का प्रयास करने लगी ।
तभी मुझे फिर से संजय के एक ही बार वाली खांसने की आवाज आई । मुझे गुस्सा आने लगा । इनके खांसने से मुझे नींद नहीं आ रही थी । मैंने कुछ कहा नहीं और सोने की कोशिश करने लगी । थोड़ी देर बाद मधुमिता की खांसने की आवाज आई । मेरा मन वितृष्णा से भर गया । इन दोनों भाई बहन ने तो खांसने का अन्ताक्षरी शुरू कर दिया है । खैर , मैं क्या कर सकती थी । मैं फिर से सोने की कोशिश करने लगी ।
थोड़ी देर बाद संजय की फिर से खांसने की आवाज आई और उसके तुरंत बाद मधुमिता भी खांसी । अचानक से मेरे दिमाग की बत्ती जली । ये तो कोई और चक्कर लग रहा है । मेरी सांसें तेज हो गई और मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई । मैं सांस रोके पीठ के बल लेटे उनके इस गेम का इंतजार करने लगी । मैं भले ही पीठ के बल लेटी हुई थी मगर मेरा चेहरा उनके तरफ ही था । मैं कनखियों से उन्हें देख रही थी और उनके अगले कदम का इंतजार करने लगी ।
थोड़ी देर बाद मैंने संजय को हाथों की कूहनी के बल अपने शरीर को उठाते देखा । उन्होंने मधुमिता के चेहरे पर निगाह डाला और फिर मेरे चेहरे पर । मैं कनखियों से उनकी हरकतें देख रही थी । तभी वो घसक कर आगे आये और मधुमिता के शरीर से चिपक गए । फिर अपने कूहनियों के बल उठ कर अपना एक हाथ मधुमिता की चुची को नाइटी के ऊपर से धीरे से पकड़ते हुए मेरी तरफ झुके और मेरे चेहरे के पास अपना मुंह लाकर धीरे से बोले " उर्वशी सो गई हो क्या ?"
मैंने अपनी आंखें मजबुती से बंद कर ली और अपनी सांसें रोक ली । थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना चेहरा मेरे चेहरे पर से हटाया और वापस अपने जगह पर लेट गए ।
जिस तरह से उन्होंने मधुमिता की चुची को पकड़ा था वो देखकर मैं न जाने क्यों बहुत उत्तेजित हो गई । एक बड़े भाई का अपनी छोटी बहन की चुची पकड़ना मुझे बहुत उत्तेजित कर रहा था । और सबसे बड़ी बात ये थी कि मधुमिता ने कोई ओब्जेक्सन नहीं किया था । वो जगी हुई है ये तो मैं श्योर जानती थी ।
दसेक मिनट के बाद फिर से संजय की धीमे से आवाज आई -" उर्वशी , उर्वशी ।" मैं चुपचाप सोने का नाटक करती रही ।
थोड़ी देर बाद उन्होंने वैसे ही धीरे से फुसफुसा कर बोला -" मधु , मधु ।"
वो अब अपनी बहन को पुकार रहे थे लेकिन उसने भी कोई जबाव नहीं दिया ।
दो मिनट बाद उन्होंने मधुमिता को फिर से धीरे से पुकारा । इस बार मधुमिता ने धीरे से कहा - हम्म् ।"
संजय मधुमिता की तरफ करवट होते हुए धीरे से बोले -" उर्वशी सो गई है क्या ?"
" पता नहीं "- मधुमिता ने धीरे से कहा ।
" देख ना ! सो गई है क्या ?"
" आप खुद ही देख लो । मुझे निंद आ रही है "- कहकर वो पीठ के बल लेट गई।
मैं कनखियों से सब कुछ देख रही थी । वो फिर से अपने हाथों की कूहनियों के सहारे उठे और अपने दोनों हथेलियों से मधुमिता की दोनों चूचियों को नाइटी के ऊपर से दबोचते हुए मेरी तरफ झुके । फिर मुझे नाम से धीरे से पुकारा । मैं चुपचाप गहरी नींद में सोने का नाटक करती रही । दो चार सेकेंड बाद वो अपना चेहरा मुझ पर से हटा कर मधुमिता के उपर किया ।
फिर वो मधुमिता के शरीर पर झुकते हुए उसकी दोनों चूचियों को दबाते हुए उसके कानों में धीरे से कहा -" उर्वशी गहरी नींद में सोई हुई है , वो सुबह से पहले नहीं उठने वाली ।"
" हम्म्..." मधुमिता की बहुत ही धीरे से आवाज आई ।
मैं ये देखकर बहुत ही उत्तेजित हो गई । मधुमिता ने अपनी चुचियों को पकड़े जाने पर कुछ भी नहीं कहा । मेरी चूत में पानी भर गया । मैंने उनकी नजरें बचाकर अपने हाथ को अपने जांघों के बीच ले गई और अपनी चूत में ऊंगली डाल दी । इनसेस्ट कहानी पढ़ी थी मैंने लेकिन कभी प्रत्यक्ष होते हुए नहीं देखी थी । "
" फिर क्या हुआ ?" - मैंने वाइन का लास्ट घूंट मारते हुए कहा ।
" फिर क्या होना था ? एक मिनट के अंदर दोनों भाई बहन पुरे नंग धड़ंग हो गए और फिर चुमा चाटी , चुसा चुसी , 69 , फोर प्ले और लास्ट में घमासान चुदाई " - उर्वशी दी ने कहा ।
उर्वशी दी की इन बातों और वाइन पीने पिलाने के दौरान हम तीनों भी इस दौरान वस्त्र हिन हो गए थे । और संजय और मधुमिता की सेक्स कहानी सुनकर काफी उत्तेजित हो गए थे ।
फिर हमारा थ्रीसम सेक्स शुरू हुआ जो मेरी जिंदगी का पहला और सबसे बढ़िया एक्सपिरियंस रहा ।
update
AnotherUpdate 24. A
श्वेता दी और उर्वशी दोनों संभ्रांत परिवार की महिलाएं थी । एक मेरी कजिन सिस्टर थी तो दुसरी उनकी खास सहेली जिनहे मैं दीदी कह के पुकारता था। और उन दोनों के साथ मैं सेक्स कर चुका था । लेकिन दोनों के साथ अलग अलग ही किया था । इकठ्ठे कभी नहीं हुआ था । आज जिस तरह से दोनों ने भरी दोपहरिया में ड्रिंक्स पार्टी का आयोजन किया था ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था । वो ड्रिंकर नहीं थी लेकिन आज ड्रिंक्स का इंतजाम किए हुए थी ।
दोनों जानती थी कि मैंने उन दोनों के साथ सेक्स किया हुआ था और वे अपने हाव भाव से इस पर मजाक भी कर दिया करती थी ।
आज जब उर्वशी ने अपने हसबैंड संजय और उनकी बहन मधुमिता के नाजायज संबंधों की दास्तान सुनाई तो रूम का माहौल काफी वासनामई हो गया था । उत्तेजना मेरे सर पर चढ़ कर नाचने लगा था ।
बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओं को दबा कर रखा था कि कब अपनी लोवर निकाल कर खुद को पुरी तरह से नंगा कर लूं और उन दोनों के शरीर से एक मात्र कपड़े उतार कर उन्हें भी पुरी तरह से नंगा कर दूं और दोनों के साथ घमासान खाट कबड्डी शुरू कर दूं । और हुआ भी । क्या गजब का हुआ । ये मेरी लाइफ की पहली और सबसे शानदार थ्रीसम सेक्स थी ।
श्वेता दी के घर से मैं करीब चार बजे के आसपास निकला और सीधे अपने घर चला गया । मेन गेट पर ताला लगा हुआ था । मुझे लगा शायद माॅम चाची के पास हो । मैं चाची के घर गया । माॅम वहीं थी । वो दोनों आपस में बातें कर रही थी । मुझे देखते ही माॅम ने चाबी सौंपी और कहा कि तु घर चल मैं थोड़ी देर में आती हूं ।
मैं घर आया और अपने कमरे में बिस्तर पर लेट गया । आज की सुखद घटनाओं के बारे में सोच कर मेरा लन्ड फिर से खड़ा होने लगा । मुझे उर्वशी दी की वो बातें याद आने लगी जब उन्होंने विस्तार से संजय जी और मधुमिता की पहली चुदाई के बारे में बताया था । मैं फ्लैश बैक में चला गया ।
*****
जब मेरे ये पुछने पर कि " फिर क्या हुआ " के जबाव में उर्वशी ने कहा कि " फिर क्या होना था थोड़ी देर में दोनों भाई बहन नंगे , चुमा चाटी और घमासान चुदाई " तो मैंने कहा - नहीं उर्वशी दी , ऐसे नहीं जरा डिटेल में बताओ ?"
" अभी नहीं । पहले ये सब साफ करते हैं "- श्वेता दी ने जुठे बर्तनों की तरफ इशारा करते हुए कहा -" फिर आराम से बताना ।"
दोनों सहेलियां आधे घंटे के अंदर सब कुछ साफ़ कर दी । मैं बिस्तर पर लेटा हुआ बड़ी बेसब्री से उनके आने का इंतजार कर रहा था । थोड़ी देर बाद दोनों आई और बिस्तर पर चढ़कर मेरे अगल बगल लेट गई । मैं दोनों के बीच में सैंडविच बना गया था ।
तभी उर्वशी ने मुझे अपनी ओर घुमाया और अपनी नाइटी को अपने कंधों से नीचे सरका दिया जिससे उनकी दुध से भी गोरी ३६ डी साईज की बड़ी बड़ी चूचियां नंगी हो गई । उन्होंने अपनी चूचियों को अपने हाथों से पकड़ा और निप्पल मेरे मुंह में डाल दी । मैं आश्चर्यचकित उनकी किसमिस की तरह निप्पल को अपने मुंह डाल कर चूसने लगा। तभी एक हाथ मैंने अपनी लोवर के अन्दर जाता महसूस किया । मैंने अपनी नजरें नीचे की । देखा श्वेता दी का हाथ था । वो लोवर के अन्दर मेरे खड़े लन्ड को अपने हाथों से पकड़ कर सहलाने लगी । मैंने उनकी चेहरे पर नजर डाली वो उर्वशी की तरफ देख रही थी ।
मैं तो जैसे इन्द्र के दरबार में था । एक तरफ एक अप्सरा उर्वशी की चुची चुस रहा था तो दुसरी तरफ एक अप्सरा श्वेता मेरा लन्ड अपने कोमल हाथों से हिला रही थी ।
" बोल ना फिर क्या हुआ ?"- श्वेता दी ने उर्वशी को कहा ।
" बताती हूं ना , इतना हड़बड़ क्यों कर रही है । तुझे तो सब बताया ही था "- कहते हुए उर्वशी ने मेरे उपर से अपनी हाथ बढ़ाकर श्वेता दी की पेटिकोट को खिंच कर उसकी चूचियों को नंगा कर दिया और उनकी चूचियों को दबाने लगी ।
" भाई को पता नहीं है ना , इसे बता "- कहते हुए श्वेता दी ने मेरे सिर को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा जिससे मेरे मुंह से उर्वशी दी की निप्पल ' पक ' की आवाज के साथ निकल गई और वो अपनी चूची को मेरे मुंह में दबाते हुए बोली -" क्यों सागर , भाई बहन की लवस्टोरी सुनना है न ।"
मैं वासना से लथपथ श्वेता दी की बड़ी बड़ी चूचियों के ऊपर अपने मुंह रगड़ते हुए " हम्म् " कहा और निप्पल को अपने मुंह में लेकर बुरी तरह चूसने लगा । दो अलग-अलग चुचियों का स्वाद एक साथ ले रहा था ।
तभी उर्वशी ने श्वेता दी के हाथ को हटा कर मेरा लन्ड अपने हाथों से पकड़ लिया और मुठ मारते हुए बोली -" हां तो मैं कहां थी ?"
" तुने बताया था कि तेरे हसबैंड ने मधुमिता की चुचियों को उसके नाइटी के ऊपर से अपने दोनों हाथों से पकड़ते हुए उसके कानों में धीरे से कहा था कि उर्वशी गहरी नींद में सो गई है वो अब सुबह से पहले नहीं उठने वाली है के जबाव में मधुमिता ने " हम्म् " कहा ।"
" हां । उसके बाद एक दो मिनट तक वे दोनों भाई बहन वैसे ही पड़े रहे । संजय का एक पांव मधुमिता के अधनंगी मांशल जांघों पर था । उसके दोनों हाथ उसकी दोनों चूचियों पर था और उसका मुंह मधुमिता के सर पर कानों के पास था । जब मधुमिता ने कोई प्रतिवाद नहीं किया तो संजय ने उसकी चूचियों को अपने हाथों से धीरे से दबा दिया ।
(दोनों सहेलियों को इतना खुलकर बातें करते हुए देख मैं हैरान होने के साथ-साथ बहुत उत्तेजित भी था ।)
तभी मधुमिता की धीरे से आवाज आई -" हटो ना भाई ? भाभी उठ जायेंगी ।"
" नहीं उठेगी , मैं जानता हूं "- वो उसके शरीर से जोंक की तरह चिपक गये । अपने नंगे जांघ को उसकी मोटी अधनंगी जांघो पर रगड़ने लगे ।
मधुमिता उसके भार से कसमसाते हुए बोली -" ठीक है नहीं उठेगी लेकिन अपना हाथ हटाओ वहां से ?"
" कहां से हटाऊं ? "- संजय उसे छेड़ते हुए बोले ।
" जहां पर है ।"
" कहां पर है ?" - कहते हुए संजय ने उसकी चूचियों को जोर से मसल दिया ।
मधुमिता जोर से सिसकियां भरते हुए बोली -" मेरी छाती पर ।"
" तुम ही हटा दो न "- वो उसकी चूचियों को एक बार फिर से दबाते हुए बोले ।
" मैं क्यों हटाऊं ? जिसने रखा है वो हटाए ।"
( रूम में एसी चालू था इसलिए मैं ब्लैंकेट ओढ़ी हुई थी । लेकिन उनके हरकतों से मुझे गर्मी महसूस होने लगी । उनकी हरकतों को देख कर मेरा विश्वास पक्का हो रहा था कि इन दोनों के बीच में बहुत पहले से कुछ कुछ था । मधुमिता का चेहरा मेरी तरफ था । मैंने साफ देखा वो ये बोलते वक्त धीरे से मुस्कुराई थी । साली को बड़ी मजा आ रहा था अपने बड़े भाई से चुचियां मिसवाने में । और नखरे ऐसे कर रही थी कि पुछो मत । और संजय भी शायद उसकी नखरों को समझ रहे थे ।)
" नहीं हट रहा है यार , लगता है गोंद की तरह चिपक गया है "- उन्होंने उसके कानों की लौ को होंठों से दबा कर चुसते हुए कहा ।
" तुम बहुत बदमाशी कर रहे हो भाई। हटाओ न , दुखता है "- वो नाटक करते हुए बोली ।
" अगर ऐसा है तो खुद ही हटा दो ।"
" नहीं , आपने रखा है तो आप ही हटाओ "
" ठीक है हटाता हूं लेकिन पहले ये बताओ कि किस पर से हाथ हटाऊं ?" वो उसकी गालों को चूमने लगे ।
( मधुमिता के चेहरे की हाव भाव से मुझे समझ में आ रहा था कि वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई है । वो अपने होंठों को बार बार अपने जीभ से गीला कर रही थी । और उसके साथ साथ मैं भी बहुत उत्तेजित हो गई थी । मुझे गुस्सा आना चाहिए था लेकिन मैं इन दोनों के इरोटिक गेम देखकर गरम हो रही थी । मेरी चूत में पानी भर गया था । जब शराब और शबाब का जादू चलता है तो बुद्धि घांस चरने चली जाती है । वो दोनों तो जैसे मेरा रूम में होना ही भुल गए थे ।)
" मैंने कहा तो था मेरी छाती पर से "- मधुमिता अपने चुचियों की तरफ इशारा करते हुए बोली ।
" छाती से क्या मतलब हुआ , ठीक से आम बोलचाल वाली भाषा में बोल ना "- कहते हुए उन्होंने मधुमिता की नाइटी को उसके कंधों पर से नीचे सरका दिया जिससे उसकी ब्रा में कैद चुचियां उनके आंखों के सामने आ गई ।
मधुमिता देख रही थी कि उसका भाई उसकी ब्रा में कैद चुचियों को बड़े कामुक नज़रों से देख रहा है । वो बहुत उत्तेजित हो गई ।
" ब्रेस्ट पर से "- वो धीरे से बोली ।
संजय उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से दोनों हाथों से पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगा । मधुमिता की सिसकारियां निकलने लगी ।
" ब्रेस्ट तो इंग्लिश में बोलते हैं । अपने भाषा में बताओ "- कहकर संजय ने अपनी एक हाथ उसकी ब्रा पर से हटा कर मधुमिता के चेहरे को अपने चेहरे के सामने किया । दोनों एक-दूसरे के आंखों में देख रहे थे । दोनों की आंखें वासना से लाल हो गई थी । दोनों के होंठ एक दूसरे के काफी करीब थे ।
" बोल ना मधु " - संजय ने फुसफुसाते हुए कहा और उसकी आंखों में देखते हुए अपनी चुटकियों से उसकी ब्रा के ऊपर से निप्पल को मसलने लगे ।
मधुमिता की नजरें अपने भाई की उंगलियों पर थी जो उसकी निप्पल को मसलने में लगा हुआ था। जब संजय ने देखा कि वो उसके उंगलियों को देख रही है तो उसने अपनी उंगलियों को वहां से हटा दिया और अपना मुंह नीचे कर के ब्रा के ऊपर से निप्पल को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा ।
मधुमिता हाय हाय कर उठी । वो सिसकी मारते हुए बोली - "ऊंह ! मुझे शरम आती है ।"
" बोल ना यार " - उसके निप्पल को होंठों से निकालते हुए संजय ने कहा और फिर उसके दुसरे निप्पल को ब्रा के ऊपर से ही होंठों से चुसने लगा ।
मधुमिता कुछ देर तक ब्रा के ऊपर से निप्पल चुसाई का मजा भोगी । वो देख रही थी उसका भाई ब्रा के ऊपर से ही एक चुची को मसल रहा है और दूसरी चूची के निप्पल को चूस रहा है । वो काफी उत्तेजित हो गई और अपनी कमर को दायें बायें हिलाने लगी । मगर संजय के पांव उसके जांघों पर होने से वो ठीक से हिला भी नहीं पा रही थी ।
वो अपनी नजरें अपनी छाती से हटा कर संजय के ऊपर डाली तो उसे अपनी ओर ही देखते पाया । वो उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से खेलते हुए उसे ही देख रहा था । उसे अपने भाई का लन्ड भी अपने जांघों पर चुभता हुआ महसूस हुआ । दोनों एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे । संजय उसकी आंखों में देखते हुए उसकी निप्पल को ब्रा के ऊपर से चुस रहा था और उसकी दुसरी चुची को हाथों में भर कर दबा रहा था । मधुमिता अब हवश की आग में जलने लगी ।
वो अपने भाई की आंखों में देखते हुए फुसफुसाई -" चुची ।"
संजय अपनी बहन के मुंह से चुची शब्द सुनकर पागल जैसे हो गए । उनसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था । उन्होंने उसकी दोनों बांहों को उपर उठा कर उसके बगलों ( कांख ) को चाटना शुरू कर दिया । मधुमिता के बगलों में काफी हल्के हल्के बाल थे । शायद कुछेक दिन पहले उसने शेविंग किया था । दोनों बगलों को चाटने के बाद फिर से उसकी एक निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगे । थोड़ी देर बाद निप्पल को मुंह से निकाला और मधुमिता को देखते हुए कहा -" तु भी बाल साफ़ नहीं करती है क्या ?"
मधुमिता सुन कर शर्मा गई और बोली -" धत ! आपने कब देख लिया ?"
" अभी ही तो देखा "- वो उसकी चूची को दबाते हुए बोला ।
" झुठ मत बोलो ।"
" तो फिर ये क्या है ?"- कहते हुए संजय ने मधुमिता को कांखों के बाल की तरफ इशारा किया ।
" ओह ! आप उसकी बात कर रहे थे और मैं वहां की समझ..."
" तुम कहां की समझ रही थी ?" - जबकि संजय को सब समझ में आ गया था ।
" कुछ नहीं । छोड़िए मुझे नींद आ रही है ।"
" ऐसे कैसे छोड़ दूं । पहले बताओ कि तुम कहां की समझ रही थी ?"
" धत ! मैं नहीं बताऊंगी "- वो अपनी मुस्कान छुपाते हुए बोली ।
" ठीक है तब मैं भी तुम्हें आज सोने नहीं दुंगा "- बोलकर उसकी चूचियों को दबाने लगे ।
" हटो नहीं तो मैं भी पकड़ लुंगी ।"
" मेरे पास तेरी तरह इतनी बड़ी बड़ी नहीं है ।"
" मैं ये पकड़ लुंगी "- कहकर मधुमिता ने झटके से अपना हाथ संजय के लोवर के अन्दर डाल दिया और उसके लन्ड को पकड़ लिया ।
( मैं ये देखकर चौंक गई । काफी तेज लड़की निकली ।संजय का लन्ड भी काफी मोटा और आठेक इंच लम्बा था । न जाने वो अपने भाई के लन्ड को पकड़ कर सहला रही होगी या मसल रही होगी या डर रही होगी । मुझे पता नहीं चल रहा था ।)
" अपने लन्ड पर मधुमिता के हाथ का स्पर्श पाकर संजय ने कहा -" ये तो गलत है तुमने मेरा पकड़ लिया है और मैंने ब्रा के ऊपर से ही पकड़ा है ।"
" तो इसमें मैं क्या करूं "- वो लोवर के अन्दर अपने हथेलियो से लन्ड को पकड़ कर मसलते हुए फुसफुसाई -" ये आपकी गलती है ।"
( पक्का वो अपने भाई के लन्ड को अपने हाथों में भर के हिला रही थी । और उसके बातों से साफ पता चलता था कि वो अपनी चूचियों को अपने भाई से नंगी करवाना चाहती थी । )
और संजय ने किया भी वही । वो उसकी नाइटी को पुरी तरह से उसके शरीर से बाहर निकाल दिये और उसकी ब्रा को खोल कर साइड में रख दिया । मधुमिता की बड़ी बड़ी चूचियां संजय की आंखों के सामने नंगी थी । वो आंखें गड़ाए अपनी बहन की कुंवारी , ठोस और कड़ी चुचियों को घुरे जा रहे थे ।
संजय ने कुछ देर तक चुचियों की सुन्दरता को निहारा फिर मधुमिता को देखा । वो कामुक नज़रों से संजय को देख रही थी । संजय ने उसकी चूचियों को अपने दोनों हथेलियों में दबोच लिया और जोर जोर से मसलने लगे । मधुमिता कामुक अंदाज में सिसकारियां छोड़ने लगी ।
(और मैं ब्लैंकेट के भीतर अपनी चूत में अपनी दो उंगलियां डाल कर अन्दर बाहर करने लगी ।)
संजय चुचियों को मसलते हुए अपनी बहन की आंखों में देखे जा रहे थे । मधुमिता भी अपने भाई की नजरों से अपनी नजरें मिलाए उसके लन्ड को मुठियाए जा रही थी ।
संजय उसकी चूचियों को दबाते हुए बोले -" बोल ना मधु तुमने कहां की बाल के बारे में सोचा था ?"
मधुमिता को भी यह सब अच्छा लग रहा था ।
वो भी लन्ड को मुठ मारते हुए बोली -" आपको पता है ।"
संजय ने अपनी लोवर निकाल कर फेंक दिया। वो पूरी तरह से नंगा हो गया । मधुमिता ने उनके लन्ड को देखा और मंत्र मुग्ध होते हुए उसे अपने हथेलियों से पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगी । इधर संजय उसकी नंगी चूचियों को मुंह से चाटने लगा । चाटते चाटते उसकी अंगुर की जैसी निप्पल को मुंह में भरकर चूसने लगा । थोड़ी देर बाद फिर उन्होंने कहा -" मुझे पता है लेकिन मैं तुम्हारे मुख से सुनना चाहता हूं । बता ना ?"
मधुमिता कामान्ध होकर फुसफुसाई -" वहां की बाल ।"
" कहां की बाल ?"
" बहुत बदमाश हो । खाली गन्दी गन्दी बातें मुझसे बोलवाना चाहते हो ।"
" इसमें गन्दी बातें क्या है ? जैसे मेरे लन्ड के अगल बगल हल्का हल्का बाल है । वैसे ही तेरी भी होगी । "
मधुमिता उत्तेजना से थरथराते हुए बोली -" तुम खुद ही देख लो ।"
" वो तो देखूंगा ही लेकिन तु बता ना पहले ? है भी या पुरी तरह साफ है ।"
" हल्की हल्की है "- वो उनके लन्ड को जोर से मसलने लगी ।
संजय मधुमिता के उपर चढ़ गये और अपने लन्ड को उसकी पैंटी के ऊपर ठीक उसकी चुत के बीचों-बीच रख कर अपनी कमर हिलाने लगे । और उसकी चूचियों को मसलने लगे । मधुमिता ने अपनी पांव उठाकर संजय के उपर रख दिया ।
" बोल ना मेरी प्यारी बहन ?"- संजय ने फिर पूछा ।
बहन सुनकर मधुमिता उत्तेजना में संजय के गाल को दांतों से काट ली और फुसफुसा कर बोली -" मेरी चुत की बाल ।"
( मधुमिता के मुंह से यह सब सुनकर मेरी चुत पानी से बहने लगी )
संजय मधुमिता के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ कर अपने चेहरे के सामने किए और उसकी होंठों को चुम कर बोले -" कहां की बाल ?"
" मेरी चुत की "- वो कामान्ध स्वर में बोली ।
संजय उसे पुरी तरह बेशर्म बनाने में अड़े थे ।
" मेरी बहन के चुत की ?"
" हम्म् ।"
" क्या हम्म ?"
" धत ! तुम बड़े हरामी हो । मुझे शरम आती है ।"
" आज तेरी शरमगाह में अपना लन्ड पेलकर तुझे भी अपनी तरह बेशर्म बना दुंगा । बना दूं तुझे बेशर्म ?"- संजय ने अपनी एक हाथ मधुमिता के पैंटी में डालते हुए कहा ।
मधुमिता अपनी चुत पर संजय की उंगलियों का स्पर्श पाते ही वासना से भरी स्वर मे फुसफुसाई -" बना दो बेशर्म ।"
" लेकिन उसके लिए तेरी चुत में अपना लन्ड डालना होगा "- वो उसकी चुत में ऊंगली डालते हुए बोले -" अपने चुत में मेरा मोटा लौड़ा डलवाएगी ?"
" हम्म । डलवाऊंगी "- वो नशे से बोली ।
" चुत में लन्ड जाने का मतलब समझती है ?"
" हम्म ।"
" क्या ?"
मधुमिता संजय की आंखों में देखते हुए फुसफुसाई -" चोदा चोदी ।"
फिर तो मै उनके प्रगाढ़ चुम्बन को लाइव देख रही थी । दोनों एक दूसरे को बुरी तरह चुम रहे थे । दोनों एक-दूसरे के जीभ को आइसक्रीम की तरह चुस रहे थे , चाट रहे थे । दोनों की थुक एक दूसरे के मुंह में निर्विघ्न जा रही थीं ।
चुमा चाटी के दौरान ही संजय ने मधुमिता के शरीर से आखिरी वस्त्र भी बाहर निकाल दिया। दोनों भाई बहन मादरजात नंगें एक दूसरे के उपर चढ़ , उतर रहे थे । कमरे के अंदर उन दोनों की सिसकारियां गूंज रही थी । और इधर मैं अपनी मुंह भींच कर अपनी सिसकारी दबा रही थी । संजय मधुमिता की भारी गांड़ को दोनों हाथों से दबोचते हुए उसकी होंठों को चुसे जा रहे थे ।
थोड़ी देर बाद मधुमिता को मेरे बगल में लेटा दिया मगर उसकी पांव मेरे सिर की तरफ थी । उन्होंने उसकी दोनों टांगों को अलग अलग करके उपर उठा दिया । उसकी टांगें उसके चुचियों तक पहुंच गई जिससे उसकी चूत उभर कर सामने आ गई । उसकी चुत पर हल्के हल्के बाल थी । चुत की दरारें पांव फैलाने से थोड़ी खुल गई थी जो उसके काम रस से भरी हुई थी । उसकी कामरस से उसकी जांघें भी भींगी हुई थी । उसके चुत के होंठ मोटे मोटे थे । संजय ने देरी न करते हुए जल्दी से अपने होंठ उसके चुत से सटा दिए और अन्दर से सारी मलाई चाट चाट कर साफ करने लगे ।
( मैं मधुमिता को नहीं देख पा रही थी लेकिन मुझे विश्वास था कि वो भी अपने भाई के हबसी लन्ड को चुस चाट रही होगी । मैं बस संजय को मधुमिता की चुत को चाटते हुए और उसके अंदर जीभ ढुकाते हुए देख रही थी । कभी कभी तो वो उसकी गान्ड के छेद को चाटने लग जाते थे । )
आधे घंटे तक दोनों भाई बहन ने 69 की मुद्रा में एक दूसरे को चुसा चाटा । फिर संजय मधुमिता के उपर आए और अपने लन्ड को उसकी चुत के छेद से सटा दिया ।
" धीरे से करना "- मधुमिता बोली -" बहुत बड़ा है ।"
" घबडा़ओ मत । शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा उसके बाद सब ठीक हो जाएगा ।"- संजय ने उसे आश्वासन दिया ।
( मैंने थोड़ी देर में मधुमिता के दर्द से चिखने की आवाज सुनी । वो धीरे धीरे कराह रही थी । उसके पांच सात मिनट बाद दोनों की सिसकारियां कमरे में गुंजने लगी । मधुमिता की पांव मेरी तरफ था । उन दोनों का सिर मेरे पांवों की तरफ था इसलिए मैने अपनी चुत में ऊंगली करनी बंद कर दी । लेकिन मैं उनकी चोदाई देखना चाहती थी इसलिए थोड़ा सा उनके पैरों की तरफ खिसक गई । और जो मुझे दिखाई दिया वो कभी भुलने वाली चीज नहीं थी । मैं संजय के लन्ड को मधुमिता के चुत में अन्दर बाहर होते हुए स्पष्ट देख रही थी । ये देखकर मैं वासना की आग से छटपटाने लगी । बीस मिनट तक मधुमिता को चोदने के बाद उसके चुत में ही उन्होंने अपना वीर्य छोड़ दिया । मैं जल्दी से अपने पहले वाली जगह पर खिसक गई क्योंकि दोनों का काम क्रीड़ा खतम हो चुका था । वो कभी भी उठ सकते थे । )
update,
aur suru mein to laga ki chalo gayi bhais pani mein scene kaat diya gaya, lekin flashback dekh ke laga ki koi nahi ab aa gaya threesome lekin fir wo urvashi apni hi story sunane lag gayi


AgainUpdate 24 A.
Flashback continue....
जैसे ही उर्वशी चुप हुई मैं दौड़कर बाथरूम भागा । संजय और उसकी बहन मधुमिता की चुदाई कहानी सुनकर लन्ड आसमान ज़मीन एक किए हुए था । और वाइन पीने के कारण पेशाब भी लग गया था ।
इतना जोर से पेशाब लगा था कि दो तीन मिनट तक लग गए पेशाब करते करते । फिर हाथ मुंह धोकर रूम में प्रवेश किया । और वहां के माहौल को देखा तो मेरा लन्ड जो पेशाब करने के बाद थोड़ा शांत हो गया था फिर से अशांति पर उतर आया ।
दोनों हस्तनी सहेलियां श्वेता दी और उर्वशी पुरी तरह निर्वस्त्र पलंग पर एक दूसरे से गुत्थमगुत्था हो कर एक दूसरे को चुम चाट रही थी ।
मैंने पोर्न मूवी तो बहुतों देखी थी । और कुछ लेस्बियन सेक्स मूवी भी देखा था लेकिन कभी जीवंत नहीं देखा था । दो गोरी-चिट्टी मांशल बदन वाली शादीशुदा युवतियों को पुरी तरह नंगी एक दूसरे से गुत्थमगुत्था देखना शरीर के रोंगटे खड़े कर देने वाला था । दोनों के लेस्बियन सेक्स को और देखने के लालशा में मैंने उन्हें डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा और बगल में रखे सोफे पर बैठ गया । मैंने भी अपना लोवर निकाल दिया । अब मैं भी उन्हीं की तरह सर से पांव तक निर्वस्त्र था ।
श्वेता दी बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी और उनके उपर उर्वशी दी चढ़ी हुई थी । दोनों सहेलियों ने अपने दोनों पांवों को कैंची की तरह फंसा कर रखा था जिससे दोनों की रस से भरी हुई चुत एक दूसरे से रगड़ खा रही थी । साथ में दोनों अपनी मोटी मोटी जांघें फैलाए एक दुसरे से घसे जा रही थी ।
दोनों की बड़ी बड़ी चूचियां एक दूसरे से दबी हुई थी । उर्वशी श्वेता दी की जीभ को बुरी तरह चुस रही थी । दोनों की चुमाचाटी और सिसकारियों की आवाज पुरे कमरे में मधुर संगीत पैदा कर रही थी ।
उपर चढ़े होने के कारण उर्वशी की तरबुज की तरह बड़ी गांड़ आगे पीछे एक लय में हील रही थी । और नीचे से श्वेता दी भी धक्के लगा रही थी । मैं जहां बैठा था वहां से दोनों को एक-दूसरे के चुत को घिसते हुए स्पष्ट देख रहा था । दोनों की चिकनी चुत की रसमलाई रिसते हुए उनके मोटी मोटी जांघों तक आ पहुंची थी ।
उर्वशी दी के उपर होने के कारण उसकी चौड़ी गान्ड की हल्की भुरी छेद भी मैं देख पा रहा था जो कभी खुल रही थी तो कभी बंद हो रही थी । मै बहुत उत्तेजित हो गया था । मैं डर से अपने लन्ड को छु नहीं रहा था कि कहीं मेरे कठोर हाथों के स्पर्श से लन्ड पानी न फेंक दे ।
वो दोनों एक दूसरे में इतना खो गई थी कि उन्हें मेरा ख्याल तक भी नहीं रहा था । कुछ देर तक एक-दूसरे को चुमते चाटते और अपनी चुत रगड़ते कब 69 पोज में आ गई , इसका अंदाजा उन्हें खुद भी नहीं था। फिर तो जो वो दोनों एक-दूसरे के गुप्तांगों को चुमने चाटने लगी कि उनके चपर चपर की आवाज मेरे कानों तक पहुंचने लगी । उर्वशी दी की पांव मेरी तरफ थी जिससे मैं श्वेता दी को उनकी फुली हुई रसभरी दरारों को अपने जीभ से चाटते हुए स्पष्ट देख रहा था ।
तभी श्वेता दी की नजर मुझ पर पड़ी । वो मुस्कराई और मुझे आंखों ही आंखों में वहां आने का इशारा की ।
मैं तो बहुत पहले से इस निमंत्रण का इंतजार कर रहा था । मैं बिना देरी किए वहां झटपट पहुंच गया । श्वेता दी ने उर्वशी की चुत को अपने दोनों हाथों से फैलाया । उनकी चुत उनके कामरस से भीगी हुई थी । बस फिर क्या था... उर्वशी की चुत को हम दोनों भाई बहन एक साथ चुसने लगे । उर्वशी को भी इसका आभास हो गया था कि उसकी चुत में दो दो जीभ ढुके हुए हैं । वो उत्तेजित हो कर बेसब्री से अपनी कमर हिलाने लगी । श्वेता दी उसकी क्लीट को अपने होंठों से दबा कर चूसने लगी और मैं उसके छेद में अन्दर तक जीभ डाल उसकी चुत को जीभ से चोदने लगा ।
ये दो तरफा प्रहार उर्वशी झेल नहीं पाई और बुरी तरह झड़ने लगी । उसकी चुत ने पानी का फव्वारा छोड़ दिया जिसे हम दोनों भाई बहन ने गटक गटक कर पी लिया ।
उर्वशी के सुस्त पड़ते ही मैंने श्वेता दी को पकड़ कर बिस्तर पर पटक दिया और अपने दोनों हाथों से उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को जोर जोर से मसलते हुए उनकी गुलाबी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा । मेरा लन्ड उनकी कचोड़ी जैसे फुली हुई चुत पर झटके पर झटका दिए जा रहा था । श्वेता दी भी काफी उत्तेजित हो गई थी । वो बड़े जोश से अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर ठेलने लगी ।
ये देख उर्वशी की काम वासना फिर से भड़कने लगी । वो सरक कर हमारे करीब आई और अपनी जीभ निकाल कर हम दोनों के जीभ से सटा दी ।
फिर तो हम तीनों आपस में अपना मुंह सटाए चुमा चाटी करने लगे । तीनों बदल बदल कर एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे । तीनों ने अपनी अपनी जीभ निकाल कर एक दूसरे के मुंह में ठुसने शुरू कर दिए । तीनों के थुक एक दूसरे के मुंह में जा रहे थे ।
थोड़ी देर बाद उर्वशी वहां से घसक कर मेरे जांघों के पास आई और मेरे फनफनाते लन्ड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और आइसक्रीम की तरह चूसने लगी । ये देख श्वेता दी ने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरे सर के ऊपर से अपने दोनों पांव दो तरफ करके मेरे मुंह के सामने अपनी चिकनी चुत रखकर आगे की ओर झुक गई । अब वो भी उर्वशी के साथ साथ मेरे लन्ड को चूसने लगी ।
मैंने श्वेता दी की खुबसूरत चुत को बड़ी कामूक भरी निगाहों से देखा जो उसके काम रस से भीगी हुई थी । सच में ये जन्नत का द्वार था । डबल पावरोटी के समान फुली हुई और बीच में दरार ली हुई । उनकी चुत को अपने दोनों हाथ के अंगूठे से फैलाया । अंदर रस ही रस था । और उसकी महक मुझे पागल किए जा रही थी । मैंने अपना जीभ निकाला और उनके दरारों में घुसेड़ दिया और उनकी चुत से निकल रही मलाई को चुस चुस कर पीने लगा । मैं जितना उनकी चुत से मलाई चाटता उतना ही वो और अधिक मलाई छोड़ देती । और मैं बड़े प्रेम से उसे भी चाट चाट कर साफ़ कर देता ।
इधर मेरा मोटा तगड़ा हथियार कभी उर्वशी के मुंह के अंदर होता तो कभी श्वेता दी के मुंह में होता । मेरे दोनो अंडकोष को दोनों सहेलियां बदल बदल कर अपने होंठों से तो कभी जीभ से प्यार करती । कभी अपने मुंह में डाल कर चुसती ।
मैं लन्ड चुसाई का सुख भोग ही रहा था कि उर्वशी दी कामोत्तेजना बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरे जांघों पर चढ़ गई और मेरे लन्ड को पकड़ कर अपने चुत के छिद्र से सटाकर उसे अपने अंदर लेने लगी । जैसे ही मेरा लन्ड उनके चुत के गहराइयों में पहुंचा कि वो अपनी कमर ऊपर नीचे करके मुझे चोदने लगी । उनकी चुत अभी भी कसी हुई थी जिससे कारण लन्ड फंस फंस कर अंदर बाहर हो रहा था ।
श्वेता दी मेरे मुंह पर अपनी चुत रखकर चुसवा रही थी वहीं उर्वशी मेरे लन्ड को अपने चुत में डाल कर खुद ही मुझे चोदे जा रही थी । मैं तो जैसे सातवें आसमान पर था ।
कमरे का तापमान काफी गरम हो गया था । श्वेता दी मेरे मुंह पर अपनी चुत रगड़ते हुए अपनी गाल मेरे नाभि के ऊपर रखकर अपने भाई के लन्ड को उर्वशी की चुत में तेजी से अंदर बाहर होते हुए देख रही थी । इस कामूक दृश्य को देख उत्तेजित होकर वो मेरे मुंह पर अपनी चुत तेजी से पटकने लगी ।
उर्वशी की उत्तेजना चरम पर पहुंच गई थी । वह जोर जोर से मेरे लन्ड पर कूदते हुए और सिसकारियां मारते हुए बुरी तरह झड़ने लगी । उन्होंने अपनी पानी से मेरे लन्ड को नहलवा दिया । मेरा लन्ड उर्वशी की चुत की गर्मी और उनके झड़ते हुए पानी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और वो भलभला कर उनके चुत में झड़ने लगा । श्वेता दी की नजरें हमारे संधि स्थल पर ही थी । हमें झड़ते देखकर वो भी बर्दाश्त नहीं कर पाई और उन्होंने भी अपनी नलकी मेरे मुंह में खोल दी । और मैं बड़े प्रेम से उनकी मलाई पीता गया । उर्वशी झड़ने के बाद श्वेता दी के पीठ पर सुस्त हो कर पसर गई ।
थोड़ी देर बाद तीनों अगल बगल लेट गए । करीब दस पंद्रह मिनट तक हम अपनी सांसें दुरूस्त करते रहे ।
श्वेता दी जब सहज सी महसूस की तो उसने उर्वशी से पुछा -" तेरा और सागर का ये सब चक्कर कैसे चालु हुआ था , ये तो तुने अभी तक बताया नहीं ।"
" इसने नहीं बताया ? " - उर्वशी ने कहा ।
" पुछने का टाइम नहीं मिला "- श्वेता दी बोली ।
मैं चुपचाप बिस्तर पर लेटे थोड़ा आराम करते हुए मोबाइल पर इंग्लैंड और पाकिस्तान क्रिकेट मैच का ड्रीम इलेवन टीम बनाने लगा ।
" ह्वाट्सएप पे बढ़िया बढ़िया मैसेज भेज के पटाया ।"
" ऐसा क्या बढ़िया मैसेज भेजता था कि एक दम से चुद ही गई ?"
" शुरुआत गुड मार्निंग मैसेज से किया था ।"
" गुड मार्निंग मैसेज ?"
" हां... गुड मार्निंग मैसेज.. इतना सुन्दर होता था न कि क्या बताऊं । जो भी पढ़ेगा वो यही समझेगा कि भेजने वाला शख्स कितना अच्छा संस्कारिक और धार्मिक किस्म का आदमी है ।"
" अच्छा तो तु धार्मिक टाइप के मैसेज से पट गई ?"
" अरे नहीं यार । सुन ! ये तेरा मासूम सूरत वाला कमीना भाई रोज सुबह..जो दिन होता था उसी दिन के हिसाब से भगवान का फोटो और साथ में अच्छी अच्छी धार्मिक मैसेज भेजता था । "
" तो इसमें खराबी क्या थी ?"
" खराबी कुछ भी नहीं थी। बल्कि बहुत ही सुन्दर मैसेज होता था । जानती है..इसके भेजे हुए देवी देवताओं के फोटो और मैसेज से मेरा फोन का गैलेरी पुरा भर गया था । मुझे डर लगता था कि भुल से भी कहीं मेरा पांव टच न हो जाए मोबाइल से और मोबाइल के अन्दर के देवी देवता नाराज न हो जाएं.... मैंने तो मोबाइल सोते समय बिस्तर पर रखना तक छोड़ दिया था ।"
" फिर ?" - श्वेता दी ने हंसते हुए कहा ।
" फिर.. फिर दो तीन महीने बाद रात में गुड नाईट मैसेज भेजना शुरू किया ।"
" किस तरह का मैसेज ?"
" शुरू में तो सिम्पल साधारण सा भेजता था लेकिन बीस पच्चीस दिन के बाद थोड़ा रोमांटिक टाइप भेजना शुरू किया ।"
" तो तेरे मन में कैसा रियेक्सन होता था ?"
" पहली बार थोड़ा अजीब सा लगा फिर धीरे धीरे सामान्य सा लगा...और जैसे जैसे दिन गुजरते गया अच्छा लगने लगा ।"
" क्या तु भी मैसेज करती थी ?"
" गुड मार्निंग वाला तो मैं भी करती थी । आखिर इतना सुन्दर मैसेज के जबाव में मुझे भी तो कुछ अच्छे अच्छे मैसेज भेजना बनता था न ।"
" और रात वाली । गुड नाईट के बदले ?"
" कुछेक दिन तो नहीं भेजी फिर एकाध महीने के बाद मैं भी भेजना शुरू कर दी ।"
" यानी कि धीरे धीरे आग लगनी शुरू हो गई "- श्वेता दी मुस्कराते हुए बोली ।
" वो तो लगनी ही थी । आखिर कमीना है भी तो हैंडसम । फिर धीरे धीरे रात वाली मैसेज और ज्यादा रोमांटिक होने लग गई । और एक रात इसने थोड़ी अश्लील टाइप गुड नाईट मैसेज भेजा ।"
" किस तरह का ?"
" गूगल से कोई फोटो डाउनलोड करके भेजा था । जिसमें एक लड़की लिंगरी में पीठ के बल लेटी हुई थी और उसके उपर एक लड़का लड़की के एक बोबे को अपने हाथों में पकड़े हुए उसकी चुम्बन ले रहा था और नीचे गुड नाईट लिखा हुआ था ।"
" फिर ?"
" मैं तो देखकर भौंचक्का हो गई थी । शुरू में गुस्सा आया...फिर बिना कोई जबाव दिए मोबाइल स्विच ऑफ कर दी और सो गई । सुबह उठने के बाद जब फिर से वो मैसेज देखी तो मुझे कुछ कुछ होने लगा । मेरी भी भावनाएं मचलने लगी...फिर तो जैसे एक रूटिन बन गई । ये रोज सुबह-सुबह गुड मार्निंग मैसेज अच्छी अच्छी वाली भेजता था और रात में गुड नाईट वाली मैसेज रोमांटिक और गंदी टाइप वाला भेजने लगा ।"
" तो तु क्या करती थी..इसके मैसेज का जबाव देती थी या नहीं ?"
" कुछ दिन बाद मैं भी देने लगी ।"
"अच्छा ! रोमांटिक और गंदी गुड नाईट वाली की भी ?"
" हां । लेकिन मैं सिर्फ गुड नाईट लिखकर भेज दिया करती थी ।"
" फिर ?"
" फिर तो इसकी हिम्मत बढ़ते गई और रात में न जाने कहां-कहां से खोज खोज कर गंदी गंदी पिक्चर और पोर्न टाइप गिफ्ट भेजने लगा । ये सब देखकर मैं उत्तेजित होने लगी... आखिर मैं भी तो एक जवान लड़की थी.... लड़के लड़कियों की नंगी चूदाई तस्वीर देखकर भला कौन उत्तेजित नहीं होगा ?"
" फिर ?
" फिर एक दिन इसने मुझे फोन किया और डेट के लिए पुछा ।"
" हम्म्.. फिर ?"
मैं तो पहले से ही तैयार थी...थोड़ी आनाकानी की फिर मान गई । फिर हम मूवी देखने गए वहीं थियेटर में ही हमने पहली किस की और फिर कुछ दिन के बाद एक होटल में गए... सुबह ग्यारह बजे के आसपास... वहीं हमारी पहली चुदाई हुई... पहले दिन ही इसने तीन बार मेरी ले ली ।"
" क्या ?"- श्वेता दी मुस्की काटते हुए बोली ।
" ये "- उर्वशी दी भी मुस्कराते हुए अपनी चुत की तरफ इशारा की ।
" रूक... मैं पेशाब करके आती हूं तब बाकी बताना "- श्वेता दी खड़ा होते हुए बोली ।
" चल । मैं भी चलती हूं ।"
फिर दोनों नंगी ही रूम में ही बने अटैच बाथरूम में चली गई । और बिना दरवाजा बंद किए नीचे बैठकर पेशाब करने लगी ।
जैसे ही दोनों अपनी अपनी बड़ी गांड़ फैलाए नीचे बैठ कर पेशाब करना शुरू की.... कि मेरा लन्ड फनफना कर खड़ा हो गया । उनकी पेशाब करने की आवाज मेरे कानों तक पहुंच रही थी ।
जब वे नंग धडंग बाथरूम से आई तो मेरा खड़ा लन्ड देखकर मुस्कुराने लगी । श्वेता दी बिस्तर पर चढ़ते ही झुकी और बिना हाथ लगाए मेरे लन्ड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी । उर्वशी दी बगल में बिस्तर पर लेटकर हमें देखने लगी ।
थोड़ी देर बाद मैंने श्वेता दी के मुंह से अपना लन्ड निकाला और उठकर उनके पीछे बैठ गया । अपनी छाती उनके मुलायम पीठ से सटाते हुए अपने हाथों को आगे बढ़ाया और उनकी दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगा । वो अपनी बड़ी गांड़ मेरे गोद में रखकर पीछे की ओर झुक गई और अपनी चूचियों को मसलवाने का आनंद लेने लगी । मेरा तनतनाया हुआ लन्ड उनकी चौड़ी गांड़ से दब गया था। वो सिसकारियां भरते हुए अपनी गांड़ मेरे लन्ड पर घसने लगी ।
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें आगे की ओर झुकाया और अपने लन्ड को पकड़ कर उनके रस छोड़ती चुत के दरारों में घिसने लगा । उनकी चुत के पानी से मेरा लन्ड गीला हो गया था ।
मैंने उन्हें थोड़ा और आगे की ओर झुकाया । वो अपनी चौड़ी गान्ड पीछे से उपर उठाए आगे की ओर हाथ के सहारे झुक गई । वो कुतिया वाली पोजीशन में हो गई थी । मैंने अपने घुटनों के बल पोजीशन लिया और उनकी चुत के छिद्र में अपना लन्ड रखा और जोर का धक्का लगा दिया। उनकी चुत उनके काम रस से इतनी ज्यादा गीली हो गई थी कि दो ही प्रयास में पुरा लन्ड उनकी चुत की गहराई में प्रवेश कर गया ।
मैं उनकी चूचियों को दबाते हुए धीरे धीरे उन्हें चोदने लगा । शुरू शुरू में हल्के-हल्के धक्के से चोद रहा था । उर्वशी दी ने जब मुझे श्वेता दी को कुतिया पोजीशन में चोदते हुए देखा तो वो पीठ के बल लेट गई और सरकते हुए हम दोनों के कमर के नीचे जहां मेरा लन्ड श्वेता दी की चुत में अन्दर बाहर हो रहा था , पहुंच गई । और अपनी आंखों से करीब दस बारह इंच की दूरी पर मेरे लन्ड को श्वेता दी के चुत से अंदर बाहर होते देखने लगी । वो इतने करीब से लन्ड को चुत में घुसते निकलते देख कर काफी उत्तेजित हो गई और जैसे ही मेरा लन्ड श्वेता दी के चुत के अंदर से बाहर की ओर निकला , अपने हाथों से पकड़ कर पुरी तरह बाहर निकाल ली और अपने मुंह में डाल कर चूसने लगी । मेरे लन्ड को चूसने के बाद श्वेता दी की चुत के अंदर अपनी जीभ डाली और चार पांच बार चारों तरफ जीभ फिराई फिर मेरे लन्ड को पकड़ कर श्वेता दी की चुत के छेद पर सटा दी ।
मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और फिर से मेरा लन्ड उनके चुत में घुस गया । अब मैं जोर जोर से श्वेता दी को चोदने लगा । उर्वशी दी अपनी सिर को उपर की ओर उठाई और अपनी जीभ हम दोनों के संधि स्थल पर फिराने लगी । मैं श्वेता दी को बुरी तरह चोदे जा रहा था । श्वेता दी भी उत्तेजना के मारे अपनी चूतड़ तेजी से पीछे की ओर धकेल रही थी । करीब आधे घंटे की चुदाई के दौरान श्वेता दी तीन बार झड़ चुकी थी और मेरा भी वीर्य निकलने वाला ही था । आखिरी समय में मेरा चोदने का स्पीड इतना बढ़ गया था कि पलंग भी हिलने लग गया था । ज्योंहि मेरा झड़ने का समय नजदीक आया मैंने श्वेता दी के चेहरे को अपनी ओर घुमाया और उनके जीभ को चुसते हुए लन्ड को उसकी चुत की गहराइयों में घुसेड़ कर झड़ने लगा । इसके साथ साथ एक बार फिर से वो भी झडने लगी ।
थोड़ी देर बाद तीनों बिस्तर पर लेट कर सुस्ताने लगे ।
आधे घंटे बाद हम सभी ने एक बार फिर से नहाया । फ्रेश होने के बाद लजीज व्यंजन का लुत्फ उठाया । उसके बाद एक एक राउंड चुदाई का दौर और चालू हुआ ।
उसी दौरान श्वेता दी ने बताया कि रात में सोने के लिए वहां चाची आ रही है । ये सुनकर मैं मायूस हो गया । मेरा इच्छा रातभर उनके साथ रहने का था । खैर.... थोड़ी देर बाद मैं उन दोनों को छोड़कर घर आ गया ।
************
" सागर...चाय पियोगे क्या ?"
माॅम की आवाज सुनकर मेरी तन्द्रा भंग हुई ।
" हां...बनाओ । मैं थोड़ी देर में आ रहा हूं "- मैंने ऊंची आवाज में कहा ।
क्लब भी जाने का टाइम हो गया था । मैं तैयार हो कर रीतु को फोन किया । वो लोग जयपुर पहुंच कर होटल में शिफ्ट हो गए थे । अभी सभी आराम कर रहे थे । थोड़ी देर बात करने के बाद मैं नीचे हाॅल में गया । डैड भी आज जल्दी ही आ गए थे ।
शाम हो गया था । चाय पीने के बाद मैं क्लब चला गया ।
update
Ye update kaafi informative tha sir aur ye jitne bhi log they bade leechar kism ke log they bas is anushka aur veena ka matter samjh nahi aaya ki ek behen roadpati to doosri crorepati, aur inka connection bhi bada mysterious sa hai, confusing updateUpdate 25.
अगले दिन...सुबह नौ बजे पिछले दो दिनों की तरह ही सिर्फ तौलिया लपेटे नीचे आया तो डैड को नाश्ता करते हुए पाया । मैं किचन में गया और उसी जगह पर दिवाल से सट कर लकड़ी के छोटे से तख्ते पर बैठ गया ।
माॅम मुझे देख कर मुस्कराई । वो सिम्पल सी नाइटी पहनी हुई थी । वो नाश्ता निकालने लगी ।
नाश्ता निकाल कर एक थाली मुझे दी और दुसरी थाली लेकर मेरे अपोजिट दरवाजे की ओर मुंह करके बैठ गई ।
हम दोनों नाश्ता करने लगे । मैंने फिर से उसी तरह अपने तौलिए को एडजस्ट कर दिया जिससे मेरा लन्ड उन्हें स्पष्ट दिखाई देता रहे ।
वो चुपचाप नाश्ते के दौरान कनखियों से मेरे तौलिए के फांक से हट्टे कट्टे लन्ड को देखती फिर रह रह कर दरवाजे से डैड को भी देखती जो हाॅल में सोफे पर बैठे नाश्ता कर रहे थे ।
माॅम को मेरे लिंग को कनखियों से देखते पाकर मैं एक्साइटेड हो रहा था । मुझे कल का वाकया भी याद आ रहा था जब मैंने एक गंदी पिक्चर वाली पृष्ठ किताब से फाड़ कर अपने तकिए के नीचे दबा दिया था और माॅम को ये कहते हुए चला गया था कि मेरा बिस्तर चेंज कर देना ।
बिस्तर चेंज तो हुआ ही था और साथ ही वो गंदी पिक्चर वाली पृष्ठ जिसमें एक कम उम्र का लड़का एक बड़ी उम्र की औरत के साथ सेक्स कर रहा था... वो सलीके से मोड़कर मेरे बिस्तर पर गद्दे के नीचे रखा हुआ था ।
इसका जो मतलब निकलता था उसका अंदाजा मुझे हो रहा था । और जिस तरह से माॅम मेरे लन्ड को चुपके चुपके देख रही थी.. वो उस मतलब को और भी पुख्ता कर रहा था ।
" डैड आ रहे हैं ।"
" क्या ?"- मैं सकपकाते हुए कहा ।
" डैड आ रहे हैं "- वो मुझसे बिना नजरें मिलाए दरवाजे की ओर देखते हुए बोली ।
मैं हड़बड़ाया , पीछे देखा डैड किचन की तरफ आ रहे थे । मैंने जल्दी से अपने तौलिए को दुरुस्त किया । मेरा लिंग अब तौलिया के अन्दर था ।
डैड किचन में आए और मुझसे कहा -" तुम्हारा मोबाइल बज रहा है ।"
मैंने जल्दी से नाश्ता खतम किया और भागते हुए अपने कमरे में चला गया । सही टाइम पर माॅम ने चेता दिया था नहीं तो डैड के नजरों में मेरा लिंग आ गया होता । बाल बाल बचा था ।
कालेज से प्रोफेसर का फोन था । कुछ बड़ी कम्पनियां काउन्सिल के लिए आ रही थी इसलिए उन्होंने फोन किया था ।
मैं तैयार हो कर माॅम को यह बोलकर निकल गया कि आज कालेज में लेट होगा इसलिए मैं दोपहर नहीं आ पाऊंगा और हो सकता है मैं अब रात को ही घर आऊं ।
मैं कालेज चला गया । वहां काउन्सलिंग के चलते काफी लेट हो गया ।
मै कालेज में ही था तभी रमणीक लाल का फोन आया । उसने मुझे शाम को छः बजे मिलने को कहा । चूंकि मुझे शाम को ड्यूटी बजाने क्लब भी जाना था इसलिए उसे शाम को सात बजे मिलने को कहा ।
****
शाम सात बजे करोलबाग में एक बार एंड रेस्टोरेंट में मेरी रमणीक लाल से मुलाकात हुई ।
" विस्की पियोगे ?"- मैंने बोला ।
" फोकट में मिलेगा तो क्यों नहीं पियूंगा ?"- वो संजीदगी से बोला -" लेकिन बाद में । पहले काम की बात ।"
" ओके ।"
" तुने जो नाम लिखाये थे... उनमें पहला नाम था कुलभूषण खन्ना । ये शख्स जवानी में एक मवाली और हिस्ट्रीशीटर था और एक बाहुबली नेता का खास सिपहसालार हुआ करता था । उसी दौरान उसकी एकलौती लड़की से इसका नैन मटक्का चलने लगा । नेता को जब इसके बारे में पता चला तो वो दोनों से बहुत ही खफा हुआ । खासतौर पर कुलभूषण खन्ना से । उसने उसे खुलेआम धमकी दी कि वो उसे जान से मार डालेगा लेकिन उसके कुछ दिनों बाद वो खुद एक दिन अपने कमरे में मरा पाया गया ।"
" क्या ? कैसे ?"
" कहा जाता है कि हार्ट अटैक से मरा ।"
" ऐसे कैसे एकाएक हार्ट अटैक आ गया ? क्या उसके बाडी का पोस्टमार्टम हुआ था ?"
" नहीं.. उसे मरने के बाद तुरंत आनन-फानन जला दिया गया था । और उसके कुछ दिनों बाद लड़की ने कुलभूषण से शादी कर ली थी । "
" कोई जांच पड़ताल नहीं हुआ ?"
" कहां से होगा भाई जब बेटी को ही किसी तरह का शक नहीं था तो जांच पड़ताल के लिए कौन कहता ? और फेमिली के नाम पर दुसरा कोई था ही नहीं ।"
" हुम्म् ..क्या ये हो सकता है कि बेटी ने अपने आशिक कुलभूषण के साथ मिलकर अपने बाप का खून कर दिया हो ?
" सरासर हो सकता है लेकिन जब इसका जांच पड़ताल ही नहीं हुआ तो इसके बारे में क्या कह सकते हैं ?"
" फिर क्या हुआ ?"
" शादी के महज पांच साल के बाद ही उसकी बीवी कैंसर से मर गई ।"
" उसके कुकर्मों की सजा भगवान ने जल्दी ही दे दिया।"
" हूं..फिर छः साल पहले उसने दुसरी शादी अनुष्का नामक एक लड़की से की ।"
" अनुष्का की तो खासुलखास तफ्शीश की होगी तुमने ?"
" ऐसी कोई बात नहीं ।"
" क्यों भाई ? इतनी सेक्सी लड़की...लार तो जरूर टपकी होगी ?"
" लार का क्या है , वो तो हर नौजवान लड़की को देखकर टपकती है । एक मिनट...दारू आर्डर करो ।"
वेटर को रेड वाइन का आर्डर दिया । पांच मिनट में ही उसने वाइन के साथ सलाद और ड्राई फ्रूट्स सर्व कर दिया ।
" हां..अब अनुष्का के बारे में बताओ ?"
" बहुत ही हसीन है , बहुत जवान है , खसम से कुछ नाखुश ही लगती है ।"
" ये तो मुझे भी मालूम है । कुछ नया बताओ ?"
" मेरठ की रहने वाली है । इसकी एक बहन है वीणा । इन दोनों के मां बाप की मौत सालों पहले ही हो गई थी । इनकी जिंदगी अभाव और तंगी में बीती हे । मां और बाप दोनों मेरठ के ही हैं । दोनों की फेमिली साधारण वर्ग की है । बाप के परिवार में कोई अपना नहीं है लेकिन मां की एक बहन थी जो अनुष्का की ही तरह किसी अमीरजादे से शादी करके चली गई । लेकिन इन दोनों बहनों की परिस्थितियां मां बाप के मरने के बाद बहुत ही खराब हो गई थी । अनुष्का घर छोड़कर दिल्ली आ गई और कुलभूषण खन्ना से शादी करके अपनी अभाव ग्रस्त जिंदगी से छुटकारा पा ली लेकिन उसकी छोटी बहन वीणा अपनी बड़ी बहन अनुष्का के जाने के बाद बहुत ही कष्टदायक जीवन जी रही थी..साल भर पहले वो भी गांव छोड़कर दिल्ली आ गई । नई दिल्ली में एक नाइट क्लब में कैबरे डांसर का काम करती है ।"
" क्या ?"- मैं आश्चर्यचकित हो कर बोला -" उसकी बडी बहन जो यहां करोड़पति की बीवी है..रोज के हजारों रूपए शौकिया खर्च कर देती है उसकी छोटी बहन एक मामूली सी कैबरे डांसर ?"
" यही तो ऊपरवाले का खेल है बेटा ।"
" और इनकी मौसी ने कोई हेल्प नहीं किया ?"
" मौसी के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है ।"
" क्या अनुष्का को मालूम है कि उसकी बहन एक मामूली सी कैबरे डांसर है ?"
" इसके बारे में भी फिलहाल मुझे नहीं पता । "
" वो कहां काम करती है.. ये तो जानते होंगे ?"
" हां ।"
उसने मुझे एडरेश लिखाया । वो डिफेंस कॉलोनी में गोल्डन नाईट क्लब का पता था ।
" उसकी कोई फोटो है तुम्हारे पास ?"
" नहीं ।"
" वीणा के काम का समय तो रात में ही होगा ?
" नाईट क्लब में असल रौनक तो रात को ही होती है ।"
" मतलब रात में ही काम करती होंगी ।"
" हूं... फिर तुम्हारे नामों के लिस्ट में बिजनेस मैन संजय का नाम था । इसके बारे में जो जानकारी निकल कर आई उसके हिसाब से ये एक महत्वाकांक्षी नौजवान है , जहीन है और काबिल बिजनेस मैन है । होटल का बिजनेस है और अच्छे पैसे कमाता है । इसकी अभी हाल में ही शादी हुई है । फेमिली में बीवी के अलावा मां बाप और एक बहन है जो कि अभी कुंवारी है । इसके मां बाप की शादी लव मैरिज हुई थी और इनका होटल का व्यापार खानदानी है ।
" आदमी कैसा है ?"
" रंगीन मिजाज और बिंदास जीवन जीने वाला ।"
" कभी किसी केस में या किसी लफड़े में इस पर पुलिस केस दर्ज हुआ ?"
" नहीं ।"
" ओके । अब जरा वकील साहब मनीष जैन के बारे में बताओ ?"
" कमीना ! आदतन खुन्दकी ! झगड़ालू ! दगाबाज ! हमेशा पीठ पर छुरी मारने को तैयार । अपने इन्हीं गुणों की वजह से उसके दोस्तों की संख्या न के बराबर है । लेकिन पट्ठे ने बीवी काफी खूबसूरत पाई ।"
" वो इतना खराब कैसे हो सकता है ?"
" मिलना । देखना । भुगतना । फिर आ के बताना ।"
" मिला तो हूं एकाध बार लेकिन सिर्फ दुआ सलाम तक ही बातें सीमित रही । मुझे नहीं पता था कि वो ऐसा आदमी होगा ।"
" ये तो मैंने उसके कुछ खुबियों के बारे में बताया ।"
" अच्छा ! अभी और भी है ?"
" इसके अलावा वो एक बेरहम , बदमिजाज , दिमागी तौर पर शातिर और एक नम्बर का रिश्वतखोर वकील है ।"
" तुम इतने विश्वास से कैसे कहते हो ?"
" तु भुल रहा है कि मैं भी पुलिस ही हूं भले ही अभी सस्पेंसन में चल रहा हूं और पुलिस वकील का साथ हर दुसरे तीसरे दिन होता ही रहता है ।"
" जब वो ऐसा आदमी है तो अब तक सरकारी वकील बना कैसे रहा ? जज को या प्रशासन की नजर इसके ऊपर कैसे न पड़ी ?"
" मैंने बताया न कि दिमागी तौर पर शातीर आदमी है ।"
" हूं । "
" गिलाश खाली करो ।"
" क्या ?... नहीं , नहीं । वन इज एनफ फार मी । तुम अपना जारी रखो ।"
" ओनली वन ?"
" प्रेजेंटली ।"
" ओह , प्रेजेंटली ।"
उसने अपने लिए नया जाम तैयार किया ।
" रमाकांत की क्या कहानी है ?"
" उसके बारे में अभी तक जो जानकारी मिली है वो एक रिटायर्ड बुजुर्ग आदमी है जो अपनी पत्नी जानकी के साथ हिमाचल प्रदेश से करीब पच्चीस साल पहले नोएडा में शिफ्ट हुआ था । उसकी पत्नी को कोई सांस की बिमारी थी इसलिए । वो दिल्ली शिफ्ट होना चाहता था लेकिन महंगा शहर होने के कारण वो नोएडा में शिफ्ट हो गया । गाजियाबाद में पिछले पांच सालों से रह रहा है ।"
" उसके इनकम का सोर्स ? करता क्या है ?"
" नहीं मालूम । शायद तुम्हारा जीजा जानता होगा आखिर पड़ोसी है ।"
" ठीक है । बात करूंगा ।"
" खर्च बढ़ते जा रहा है बेटा । कुछ रोकड़ा तो सरकाओ ?"
" तुम अपना एकाउंट नंबर मुझे दे दो , मैं आन लाइन तुम्हारे एकाउंट में ट्रांसफर कर दुंगा ।"
" एक तो सस्पेंड चल रहा हूं उपर से रोकड़ा डायरेक्ट मेरे एकाउंट में ट्रांसफर करके और दुश्वारियां पैदा करना चाहते हो ?"
" ठीक है..कल शाम को सात बजे कनात पैलेस पैराडाइज क्लब के बाहर मिलना ।"
रात के नौ बज गए थे । मैं आज ही वीणा से मिलना चाहता था । क्योंकि जहां वो काम करती थी वहां उससे रात में मिला जा सकता था । यदि उसके घर का पता होता तो दिन में किसी भी वक्त उससे मिल लेता लेकिन घर का पता मालूम नहीं था ।
मैंने रमणीक लाल से नाईट क्लब चलने को कहा तो उसने साफ इंकार कर दिया । वो नहीं चाहता था कि नौकरी बहाल होने तक पुलिस की नजरों में किसी अवांछनीय जगह पर देखा जाय ।
उसके जाने के बाद मैं गोल्डन नाईट क्लब की ओर अपनी बाइक दौड़ा दिया ।
Continue....
Vakil saale saare aise hi hote hai, mtlb dimag wale to offcourse hote hai, aur rishwat khor bhi lekin berehem naya feature hai aur badtameez bhi hote hi hai kyuki bolte bhi bhut hai.इसके अलावा वो एक बेरहम , बदमिजाज , दिमागी तौर पर शातिर और एक नम्बर का रिश्वतखोर वकील है
शादी के महज पांच साल के बाद ही उसकी बीवी कैंसर से मर गई ।

Brilliant update sir ji ab lagta hai ki sagar sahi jagah pahuch chuka hai yaa aaspaas. Waise is neha urf Veena ko dekh ke aur baat karne ke andaz se lagta hai ki bhut tez film hai aur ye arun ke bare mein kaise jaanti hai bhut saare sawal chod diye is UPDATE ne, jo agle update mein mil jayengeUpdate 25. Continue.
दस बजे के आसपास मैं गोल्डन नाईट क्लब पहुंचा ।
बाहर से दिखने में साधारण सा ही लगा लेकिन अंदर की रौनक और रंगीनी देखने लायक थी । पुरे हाॅल में मध्यम रोशनी थी। डांस फ्लोर से डीजे की धुन आ रही थी । कुछ जोड़े वहां डांस करने के बहाने एक दूसरे से अभिसार रत में मशगूल थे । हाॅल के अन्दर कई टेबल दो चार कुर्सियों सहित थोड़ी थोड़ी दुरी पर लगे हुए थे । कुछ लोग जोड़े में बैठे हुए थे तो कुछ सिंगल । अभी हाॅल पुरा भरा हुआ नहीं था ।
मैं कोने में एक खाली टेबल देखकर बैठ गया । मैंने एक बार फिर पुरे हाॅल में नजरें दौड़ाई । वहां जितने भी Steward थे सभी जवान लड़कियां थी । वो पुरे हाॅल में घुम घुम कर अपने कस्टमर को वाइन और भोजन सर्व कर रही थी । सभी लड़कियों का एक ड्रेस कोड था । वे सभी स्कर्ट और टॉप पहने हुए थी । वे जो स्कर्ट पहनी थी वो उनके घुटनों से काफी ऊपर थी । उनकी जांघें दुधिया रोशनी में भी चमक रही थी और टाॅप उनके छातियों पर कसा हुआ था ।
मैं बैठे हुए उन बार बालाओं को ताड़ ही रहा था कि एक लड़की आई और बोली -" गुड इवनिंग सर ! आप को क्या सर्व करूं ?
मैंने उसे देखा । वो एक बीस बाइस साल की स्लिम फिगर की खुबसूरत लड़की थी ।
" सर्व तो आप बहुत कुछ कर सकती हो लेकिन उसके लिए आपको मुझे कम्पनी देनी होगी । मुझे अकेले अकेले वाइन पीने में मजा नहीं आता "- मैंने मुस्कराते हुए कहा ।
" ह्वाई नाॅट सर ! "- वो भी अपने चेहरे पर गोल्डन जुबली मुस्कान लाते हुए बोली -" लेकिन बील आपको पे करनी होगी ।"
" जरूर । लेकिन आपका एम्पायर कहीं नाराज तो नहीं हो जायेगा आपको यहां बैठे देखकर ?"
" अभी नहीं होगा । अभी तो आधा हाॅल खाली है , हां ग्यारह बजे के बाद जब पुरा हाॅल भर जायेगा तब जरूर नाराज होगा ।"
" जब यहां का हाईलाइट प्रोग्राम शुरू होगा ?"
" हां । जब हाॅट लड़कियों का हाॅट डांस शुरू होगा ।"
" हाॅट तो तुम भी कोई कम नहीं हो ?"
" थैंक्यू लेकिन मेरा फिल्ड अलग है ।"
" ओके । मेरे लिए रेड वाइन विथ सोडा ऐंड वाटर और आपको जो पसंद हो ।"
" राइट सर ! मैं अभी आई ।"
वो चली गई । मैं फिर से पुरे हाॅल को सरसरी निगाह से मुआयना करने लगा ।
पांच मिनट बाद वो आई वाइन और चखने के साथ । सभी चीजें टेबल पर रख कर मेरे बाजू में बैठ गई । वो अपने लिए वोदका लाई थी ।
हमने चियर किया और ग्लास अपने अपने होंठों से लगा लिया ।
" तुमने अपना नाम तो बताया ही नहीं ?"
" आपने जो पुछा नहीं ।"
" अब पुछ लेता हूं । वैसे मेरा नाम सागर है ।"
" मैं श्रेया ।"
" ब्यूटीफुल नेम बिल्कुल तुम्हारी तरह ।"
" थैंक्यू सर । मैंने यहां पहले आपको कभी देखा नहीं ।"
" सही कहा । मैं यहां पहली बार ही आया हूं ।"
मैंने अपने पैंट से सिगरेट का पैकेट निकाला और उसे आफर किया । उसने इनकार कर दिया । मैंने सिगरेट सुलगाई और कहा - "श्रेया , मुझे तुमसे एक फैवर चाहिए !"
लड़की चौंक कर मुझे देखी और बोली -" माफ कीजिएगा सर , मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूं ।"
" अरे तुम गलत सोच रही हो । मुझे किसी के बारे में जानकारी चाहिए और यदि सम्भव हो तो मिलना भी ।"
" किस के बारे में ?"- वो संदिग्ध स्वर में बोली ।
" एक वीणा नाम की लड़की है जो यहीं पर काम करती है । वो यहां के कैबरे डांसर लड़कियों में से ही कोई एक है । पर मेरी बदकिस्मती है कि मैं उसे चेहरे से भी नहीं पहचानता ।"
वो अब थोड़ा आश्वस्त हुई ।
" लेकिन इस नाम की कोई भी लड़की यहां काम नहीं करती ।"
" शायद यहां उसने अपना नाम चेंज कर लिया हो ?"
" हो सकता है । लेकिन आपको उससे काम क्या है ?"
" देखो तुम बुरा मत मानना । मै उसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकता । बस इतना ही कह सकता हूं कि वो एक अच्छे और संभ्रांत परिवार से विलोंग करती है । उसकी बड़ी बहन यहीं दिल्ली में एक करोड़पति की पत्नी है ।"
" ओह ! लेकिन वीणा नाम की लड़की यहां कोई नहीं है , मैं यहां काम करने वाली सारी लड़कियों को जानती हूं ।"
" वो इस ट्रेड में हाल फिलहाल महिने में ही आई है । शायद एकाध साल के भीतर । जब तुम सभी को जानती हो तो ये भी जानती होगी कि कौन कौन सी लड़की हाल के महीनों में यहां ज्वाइन की है ?"
" एक लड़की है तो जिसने आठ महीने पहले ज्वाइन किया है और आज के तारीख में वो यहां की सबसे बेस्ट परफार्मर है । बाकियों से उसकी डिमांड कहीं अधिक है ।"
" कौन ?"- मैंने आशा भरी नजरों से देखा ।
" नेहा ।"
" क्या तुम उससे अभी मिल सकती हो ?"
" अभी उनके परफोर्मेंस में टाईम है । मिल सकती हूं ।"
" तो प्लीज़ एक बार उससे मिलो और ये तस्दीक करो कि वो वीणा है या नहीं ।"
" ओके , मैं मालूम करती हूं वो कहां और किस पोजीशन में है ।"
" थैंक्यू ।"
" लेकिन अगर उसको तुमसे मिलना कबूल नहीं हुआ तो , मैं कुछ नहीं कर सकूंगी ।"
" कर सकोगी । थोड़ा प्यार से समझाना , कहना ये उसी के फायदे के लिए है ।"
" मैं... मैं देखती हूं ।"
उसने अपना ग्लास खत्म किया । फिर वो चली गई ।
मैं ड्रिंक्स और सिगरेट पीते हुए इन्तजार करने लगा ।
लगभग बीस मिनट बाद वो आई । उसके चेहरे के भाव से लग रहा था कि पोजीटिव न्यूज लाई है ।"
वो बैठते हुए एक कागज का परची मुझे पकड़ा दी ।
" क्या है ये ?"
" देखो ?"
मैंने परची खोला । वो किसी जगह का एड्रेस था ।
" ये तो एड्रेस है ।"
" हां । नेहा ही वीणा है । उसने तुम्हें इसी एड्रेस पे कल एक बजे दोपहर में बुलाया है ।"
" थैंक्यू सो मच श्रेया । "
" ओके । अब मुझे जाना होगा । अब भीड़ बढ़ती जा रही है "- वो हाॅल में बढ़ते हुए भीड़ को देखते हुए बोली ।
" अब नहीं लोगी ?"
" नहीं सर । ज्यादा पी लुंगी तो ड्यूटी कैसे करूंगी ।"
" कोई बात नहीं । बील ले आओ । "
" आप क्यों जा रहे हो । अभी तो यहां की असली रौनक बाकी है ।"
" मुझे ये सब पसंद नहीं है ।"
" ओके मैं बील लाती हूं ।"
जब घर पहुंचा तब साढ़े ग्यारह बज गए थे । डैड ने दरवाजा खोला था । माॅम शायद सो गई थी । मैं उपर अपने कमरे में गया और सोने की तैयारी करने लगा ।
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अगले दिन समय से पहले ही वीणा के पत्ते पर पहुंच गया । वो मुझे एक बजे बुलाई थी लेकिन मैं बारह बजे ही पहुंच गया ।
मैंने काॅलबेल बजाई ।
कोई जवाब नहीं मिला ।
मैंने दोबारा काॅलबेल बजाई तो भीतर से झुंझलाए से जनाना स्वर में पुछा गया -" कौन है ?"
" मैं ।"- मैंने बोला -" दरवाजा खोलिए ।"
" मैं क्या होता है ? कौन हो ?"
" मैं सागर । कल रात आपने गोल्डन नाईट क्लब में अपने फ्लैट का पता दिया था श्रेया के थ्रू ।"
कुछ देर तक खामोशी छाई रही ।
" ओह ! ठहरो , खोलती हूं ।"
कुछ क्षण बाद दरवाजा खुला और एक बेहद ही खूबसूरत लड़की मुझे चौखट पर दिखाई दी ।
उसने एक तरफ हटकर मुझे भीतर आने दिया और फिर मेरे पीछे दरवाजा बंद कर दिया ।
मैंने देखा कि वो तभी... शायद काॅलबेल की आवाज सुनकर ही...सो के उठी मालूम होती थी । उस घड़ी उसने एक खुले गले की नाइटी पहनी हुई थी जिसमें देखने लायक जो थी... वो काफी दिलकश थी.... बड़ी बड़ी..गोल गोल ।
एकाएक वो घुमी और " अभी आई " कहकर पिछले कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर दी ।
मैं एक सोफे पर बैठ कर सिगरेट पीते हुए उसका इन्तजार करने लगा ।
वो आधे घंटे बाद वापिस लौटी । उस वक्त वो साधारण सलवार सूट पहनी हुई थी । मगर उस ड्रेस में भी वो बला की खूबसूरत लग रही थी । हाईट पांच फुट सात इंच , उम्र शायद तेईस चौबीस , जाफरानी रंगत जैसी त्वचा , बड़ी बड़ी आंखें , तीखे नैन-नक्श , भरे भरे गुलाबी होंठ , फुले हुए गाल , लंबे बाल , मोतियों जैसी दांत , असाधारण रूप से उन्नत वक्ष , उभरे हुए नितम्ब , मांशल जांघ....सब कुछ नम्बर वन...सब कुछ वाह वाह ।
" चाय पियोगे ?"- वो खड़े खड़े ही बोली ।
" जी नहीं शुक्रिया । मैं नाश्ता करके आया हूं ।"
" लेकिन मैंने नहीं किया है । मैं अभी अभी सो कर उठी हूं । "
" ओके ।"
वो फिर गई । थोड़ी देर बाद चाय और स्नैक्स लेकर आई ।
वो एक दूसरे सिंगल सोफे पर बैठ गई । उसने मुझे चाय दिया । मैंने " थैंक्स " कहकर चाय ले लिया ।
" तुम अमर के दोस्त हो ना ?"
मेरे हाथ से चाय की प्याली छलक गई । मैं चौंक कर उसे देखने लगा ।
मगर उस ड्रेस में भी वो बला की खूबसूरत लग रही थी । हाईट पांच फुट सात इंच , उम्र शायद तेईस चौबीस , जाफरानी रंगत जैसी त्वचा , बड़ी बड़ी आंखें , तीखे नैन-नक्श , भरे भरे गुलाबी होंठ , फुले हुए गाल , लंबे बाल , मोतियों जैसी दांत , असाधारण रूप से उन्नत वक्ष , उभरे हुए नितम्ब , मांशल जांघ....सब कुछ नम्बर वन...सब कुछ वाह वाह
iski pehli nazar hi ladki ke galat jagah jaati hai, tailor hai kya bhai jo ladki ke hieght se leke size tak bata diya Emotional update sir ji, i mean ek dum se twist daal diya aapne aur jaroor ye anushka aur uski mausi ka kuch lafda to hai ya koi connection hai aapas mein, dekhte hai kya hota hai aage,Update 25. Continue.
" तुम सोच रहे होगे कि मैं अमर को कैसे जानती हूं " - वो बोली ।
मैं सोफे पर बैठा अचरज से उसे देखे जा रहा था ।
वो अपनी चाय की कप टेबल पर रख कर खड़ी हुई और धीरे धीरे चलते हुए थोड़ी दुरी पर खिड़की के पास खड़ी हो गई । वो खिड़की की कपाट खोलकर बाहर आसमान की ओर उपर देखने लगी ।
मैं चुपचाप बैठे उसके बोलने की प्रतीक्षा कर रहा था ।
" हम छः महीने से रिलेशनशिप में थे । वो तुम्हारे और अपने मां की अक्सर चर्चा किया करता था । जब श्रेया ने तुम्हारा नाम लिया तभी मैं समझ गई थी कि तुम अमर के दोस्त सागर हो ।"
" लेकिन अमर ने तुम्हारे बारे में हमसे कभी जिक्र नहीं किया ।"
" मैंने ही मना किया था ।"
" लेकिन क्यों ?"
" अपने किस्मत पे एतबार नहीं था ।"
" मैं समझा नहीं ।"
" श्रेया बोली थी कि तुम मेरी बहन को जानते हो ?" - वो पलट कर मुझे देखते हुए बोली ।
उसने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया ।
" एकाध बार मिला था ।"
" कैसी है ?"
" तुम्हें नहीं पता ?"
" जब से अमेठी छोड़कर गई तब से नहीं ।"
" मतलब इतने सालों से तुम दोनों मिली नहीं ?"
मुझे बहुत आश्चर्य हुआ ।
" मिलना तो दूर बात तक नहीं हुई ।"
" कोई फोन वगैरह भी नहीं ?"
" मुश्किल से तो दो वक्त के अनाज का जुगाड होता था तो भला फोन कहां से आता " - वो फिकी मुस्कान करती हुई बोली ।
" अनुष्का एक करोड़पति की पत्नी बन चुकी है । मजे में है ।"
" चलो अच्छा है , कम से कम उसकी लाइफ तो सेट हुई " - वो वापस खिड़की की तरफ पलटते हुए बोली -" अमर के क़ातिल का पता चला ?"
" अभी तक तो नहीं । उसी सिलसिले में तो तुम से बातें करना चाहता था ।"
" मुझे अखबार के जरिए पता चला था । मुझे तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि वो अब इस दुनिया में नहीं है ।"
" तुम्हें किसी पर शक है ?"
" हमने अपने रिलेशन को सभी से छुपा कर रखा था । मैं किस पर शक करूंगी ?"
" जिस वक्त अमर का खून हुआ था उसी समय तुम्हारी बहन अनुष्का मौका-ए-वारदात पर पाई गई थी ।"
" क्या ?" - वो चौंक कर फिर पलटी ।
मैंने उसे अमर के केस से संबंधित सभी चीजें बताई ।
उसके हाव भाव से यही लगता था कि वो इन सारी बातों से अनजान हैं ।
" एंटरटेनमेंट के धंधे में कैसे आ गई ?"
" अनुष्का के जाने के बाद मैं अकेली पड़ गई । मैं ज्यादा पढ़ी लिखी भी तो नहीं थी कि कहीं काम करके दो वक्त की रोटी जुगाड कर सकूं । अनुष्का पढ़ने में तेज थी तो वो छोटे छोटे बच्चों को कोचिंग , ट्यूशन करके दो पैसे कमा लेती थी जिससे किसी भी तरह हो जिंदगी कट ही जा रही थी । लेकिन उसके जाने के बाद मैं क्या करती ? थोड़ी बहुत डांस जानती थी तो शादी ब्याहों में शो करने वाले एक ग्रुप में बतौर डांसर शामिल हो गई । फिर जो सफर वहां से शुरू हुई तो आकर गोल्डन नाईट क्लब में खतम हुई ।"
" क्या अमर से मुलाकात गोल्डन क्लब में हुई थी ?
" नहीं । उससे पहली बार मुलाकात इतफाकन हुईं थी । मेरी एक्सीडेंट हो गई थी । एक कार वाले ने धक्का दे दिया था । उसी ने मुझे हाॅस्पिटल पहुंचाया और इलाज भी करवाया था । फिर वो मुझे देखने हाॅस्पिटल रोज आने लगा । इसी तरह मिलते-जुलते हमारी भावनाएं कब उबलने लगी पता ही नहीं चला ।"
मुझे ताज्जुब हो रहा था कि इतनी बड़ी बात अमर ने मुझसे छुपाई थी ।
" तुमने अमर को अपने रिलेशनशिप के बारे में हमें बताने के लिए इसलिए मना किया था न कि हम तुम्हारे जाॅब को पसन्द नहीं करेंगे । तुम्हें अच्छी लड़की नहीं समझेंगे ?"
" जो काम मैं कर रही हूं उसे सभ्य समाज में अच्छा नहीं माना जाता । है तो ये बदनाम धंधा ही न । हमारी सोसायटी में कैबरे डांसर और काॅल गर्ल मे उन्नीस बीस का ही तो फर्क माना जाता है न ।"
" लेकिन आखिर में तुम दोनों को अपनी शादी के बारे में बताना तो पड़ता ही ?"
" मेरी एक साल की एग्रीमेंट अक्टूबर में खतम हो रही थी । उससे पहले मैं जाॅब नहीं छोड़ सकती थी । जाॅब छोड़ते ही हम बता देते ।"
मैं कुछ देर तक चुपचाप उसे निहारता रहा ।
" मैंने सुना है तुम्हारी एक मौसी भी है ?"
" लगता है अनुष्का ने एकाध मुलाकात में बहुत ही कुछ बता दिया तुम्हें " - वो कटाक्ष करते हुए बोली ।
मैं चुप रहा ।
" हां । एक मौसी है लेकिन हमें तो उसका चेहरा भी याद नहीं है ।"
" मैंने ये भी सुना है वो भी किसी करोड़पति से ब्याही गई थी ।"
" उनके बारे में जो भी हमने सुना था वो मां से ही सुना था । वो मां से बड़ी थी । अनुष्का की तरह उन्होंने भी शादी के बाद फिर कभी अपने मायके में कदम नहीं रखा । मां बोलती थी कि उसने प्रेम विवाह किया था और उसका पति अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र था ।"
" तुम्हारे परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी थी ?"
" जब तक मां बाप जिंदा थे किसी तरह की दिक्कत नहीं थी । पिता जी एक मील में काम करते थे लेकिन इतना पैसा कमा ही लेते थे कि चारों का गुजारा अच्छे से हो जाता था । जब दोनों की मृत्यु हुई उस वक्त मैं दस साल की और अनुष्का चौदह साल की थी । अनुष्का ने दसवीं कक्षा पास कर ली थी लेकिन मां बाप के मरने के बाद हमारी पढ़ाई बंद हो गई । कोई कमाने वाला नहीं था । मां बाप सम्पत्ति के नाम पर एक छोटा सा टाली का घर और थोड़ी गहने ही छोड़ गए थे , इससे हम क्या कर सकते थे ?"
" उसी गहने को बेचकर अनुष्का दिल्ली चली गई ?"
" हां । उसे पढ़ने का बहुत शौक था । उसकी महत्त्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी थी । वो मुझसे छुपा कर गहने बेची थी और दिल्ली चली गई । उसने कहा था कि पढ़ाई पुरी करके जाॅब मिलते ही मुझे बुला लेगी । लेकिन एक बार क्या वो निकली कि फिर.....।"
मुझे अनुष्का पर सच में बहुत गुस्सा आ रहा था ।
" तुम्हारे मौसाजी और मौसी की कोई फोटो है क्या ?"
" एक फोटो थी लेकिन वो मिल नहीं रही है ?"
" ओह ।"
" वैसे एक हमारी फेमिली फोटो है लेकिन उसमें मौसाजी नहीं है "- बोलकर वो अपने कमरे में चली गई ।
थोड़ी देर बाद वो एक पुरानी सी फोटो जो गंदी भी हो गई थी ले आई ।
पांच लोगों का एक फेमिली ग्रुप फोटो था । दोनों बहनें बहुत छोटी थी । वे अपने माता-पिता के गोद में बैठी हुई थी और एक उनकी मौसी थी ।
मौसी की पिक्चर देखते ही मुझे लगा कि इसे मैंने कहीं देखा है । थोड़ी देर देखकर मैंने फोटो उसे वापस कर दिया । वो फोटो लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी कि मैंने पूछा -
" यहां अकेली रहती हो ?"
" नहीं । एक लड़की के साथ रहती हूं , वो भी मेरे साथ ही काम करती है " - वो जाते जाते बोली ।
मेरे दिमाग में बार बार उसके मौसी की तसबीर आ रही थी । इसे मैंने कहीं देखा तो जरूर है ।
वो कमरे से बाहर आई तो मैं भी खड़ा हो गया ।
" जाने से पहले एक बात पुछना चाहता हूं ?"
" क्या ?"
" अब क्या करोगी ? जाॅब करती रहोगी या छोड़ दोगी ?"
वो फिर से खिड़की के पास चली गई और बाहर की ओर देखने लगी । बहुत देर तक वो वैसे ही खड़ी रही । मुझे लगा वो जबाव नहीं देना चाहती है इसलिए मैं दरवाजे की तरफ बढ़ा ।
दरवाजे पे खड़े होकर उसकी और निगाह डाली। वहां से उसकी शक्ल दिखाई दे रही थी । उसकी आंखें बंद थी और आंखो से दो बूंद आंसू छलक कर गालों पे पड़े हुए थे ।
मैं दरवाजे पर खड़ा हो गया ।
" मां बाप ने बचपन में ही साथ छोड़ दिया " - वो बहुत ही धीमी आवाज में बोल रही थी -" बड़ी बहन ने अपनी मंदबुद्धि बहन को गांव में अकेली छोड़ दिया । छः महीने में पहली बार अमर के रूप में खुशियां मेरी दामन में आई थी लेकिन उसने भी साथ छोड़ दिया । अब ये डांस वाली नौकरी ही तो आखिरी सहारा है......इसे छोड़ कहां जाउंगी ।"
उसकी बातें सुनकर मेरा मन दुःख और वेदना से भर गया । मेरी आंखें बोझिल हो गई ।
मैं उसके पास गया और उसे पकड़ कर अपनी ओर घुमाया ।
वो सिर झुकाए चुपचाप खड़ी रही । मैंने उसके आंसुओं को अपने हथेली से पोंछा ।
" तुम एक बहादुर लड़की हो वीणा । जिस तरह से विपरीत परिस्थितियों में तुमने अपने को संभाला है उससे मेरे दिल में तुम्हारे प्रति बहुत इज्जत है । मैं तुम्हें दिल से नमन करता हूं । तुम्हारे दिन भी पलटेंगे.... और बहुत जल्द पलटेंगे....मेरा पूरा विश्वास है ।"
मैं वहां से भारी मन और दिल में टिश लिए विदा हुआ ।
Aisi behen to kisi ko na de, jo apni itni choti behen ko akela chod aayi aise samaj meinउसे पढ़ने का बहुत शौक था । उसकी महत्त्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी थी । वो मुझसे छुपा कर गहने बेची थी और दिल्ली चली गई । उसने कहा था कि पढ़ाई पुरी करके जाॅब मिलते ही मुझे बुला लेगी । लेकिन एक बार क्या वो निकली कि फिर.....।"
Veena is brave girl, khud ko bhut ache se sambhala hai isne khud ko and koi kaam chota bada nahi hota, lekin isko dukh hi dukh mil rahe hai aur jo bure hai wo crorepati bane ghum rahe hai.बड़ी बहन ने अपनी मंदबुद्धि बहन को गांव में अकेली छोड़ दिया । छः महीने में पहली बार अमर के रूप में खुशियां मेरी दामन में आई थी लेकिन उसने भी साथ छोड़ दिया । अब ये डांस वाली नौकरी ही तो आखिरी सहारा है......इसे छोड़ कहां जाउंगी ।"

Hila dena wala update hai matlab pehle to wo khoda pahad aur nikli chuhiya, jisey mausi ko bahar dhundh rahe they wo to gareeb hi nikli aur jaankaar bhi, lekin koi manish ko kyu marega wo to itna ameer bhi nahi hai , aur knife bhi same hai jisse arun ka murder hua tha aur aisa hi knife shweta ke paas bhi tha, i mean ye coincidence to ho hi nahi sakta, aur ye is mausi ka sasur kis cheez ka business karta tha ye bhi clear nahi hua, aur gaur karne wali baat ye bhi hai ki jab anushka pehli baar hi flat pe aayi aur pehli baar mein hi sagar ka jeeja flat pe nahi tha, ye itna bada reason to nahi lekin gaur karni wali baat hai, ab ye killer ki suyi do logo pe hi atak rahi hai ek to anushka aur doosri uski mausi, khair is update ne dimag ke taar hila diye dekhte hai aage kya hota hai.Update 26.
रात के दस बजे थे । मौसम अच्छा था इसलिए छत पर ही बिस्तर लगा लिया था। लेटकर आसमान में चमकते सितारों को देखने लगा ।
आज का दिन काफी थकावट भरा रहा था । माॅम की तबीयत कल शाम से ही खराब थी । उन्हें बुखार था । सुबह उन्हें डाक्टर को दिखाया और फिर चाची को हम सभी का खाना बनाने के लिए कह दिया । फिर वीणा से मिलने चला गया था ।
वीणा से मिलने के बाद वही रोज वाली रूटिन थी । आज क्लब में कुलभूषण खन्ना मौजूद था । उससे थोड़ी बहुत औपचारिक बातें भी हुई थी ।
आसमान में चमकते तारों को निहारते हुए वीणा के बारे में सोच रहा था । उसकी स्टोरी सुनकर मन व्यथित हो गया था । दिल में बेचैनी सी हुई थी ।
इस मर्द प्रधान समाज में एक अकेली और वो भी जवान लड़की को किन किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है , उसका अहसास था मुझे ।
मुझे इस बात का भी अहसास था कि एक जवान खुबसूरत लड़की जब स्टेज पर अनगिनत लोगों के सामने कला के नाम पर डांस प्रस्तुत करती है तो किस तरह से उसको हवश भरी निगाहों से देखा जाता है । उसके बारे में लोग कैसे कैसे विचार करते होंगे ।
कई काम ऐसे होते हैं जिसे लोग खुशी खुशी करते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो मजबूरी में करते हैं । वीणा ने मजबूरी में इस धंधे को अपनाया था । यदि उसके माता-पिता जिंदा होते तो क्या वो ये धंधा अपनाती ! यदि अनुष्का.. उसकी बड़ी बहन ने उसका साथ दिया होता तब भी क्या वो ये काम करती !.... कदापि नहीं ।
अमर को वीणा की सारी कहानी पता होगी । उसकी कहानी सुनकर उसे भी वीणा के प्रति सहानुभूति हुई होगी और शायद यही सहानुभूति धीरे धीरे प्यार में बदल गई होगी । और यदि उसकी खूबसूरती के बारे में कहें तो निसंदेह वो लाखों में एक थी । ऐसे में अमर का उसके प्यार में पड़ना कोई आश्चर्य वाली बात नहीं थी ।
उसने जो अपनी फेमिली फोटो दिखाई थी , उसमें उसकी मौसी मुझे जानी पहचानी लगी थी । फोटो तब की थी जब वो जवान थी मगर अब तो उसकी बहुत उमर हो गई होगी । अब तो वो बुड्ढी दिखती होगी । उसके बारे में सोचते सोचते अचानक मेरे दिमाग की घंटी बजी ।.....जानकी !..... रमाकांत जी की पत्नी ।
उनके चेहरे और शरीर पर भले ही उमर का असर पड़ गया हो लेकिन नाक नक्श , कद काठी वैसा ही था । जानकी आंटी ही वीणा और अनुष्का की मौसी थी ।
लेकिन वीणा ने कहा था कि उसकी मौसी की शादी एक अमीर घराने में हुई थी पर रमाकांत जी और जानकी देवी की हैसियत देखकर लगता तो नहीं है कि वो कोई खास अमीर हैं । वो एक फ्लेट में रह रहे हैं जबकि जैसा वीणा ने बताया था उस हिसाब से तो उन्हें किसी कोठी या महल में रहना चाहिए था । बड़े बड़े कारोबार होना चाहिए था । लेकिन वे तो एक आम इंसान की तरह रिटायर जिंदगी जी रहे हैं ।
मैंने रमणीक लाल से कहा था कि रमाकांत जी के कमाई का जरिया क्या है तो उसने कहा था कि मुझे पता नहीं, शायद मेरे जीजा को पता होगा । आखिर वो बहुत दिनों से पड़ोसी थे ।
मैंने मोबाइल में टाईम देखा । ग्यारह बज रहे थे । मैंने जीजा को फोन लगाने के लिए सोचा । पता नहीं अभी मुम्बई में क्या कर रहे होंगे । फिर भी मैंने फोन लगाया ।
" क्या बात है सागर ? इतनी रात को कैसे फोन किया ?"- जीजू की आवाज आई ।
" साॅरी जीजू इतनी देर रात फोन करने के लिए । किसी के बारे में पुछना था मुझे ।"
" किसके बारे में ?"
" अभी आप कहां हो ?"
" होटल में हूं । सोने जा रहा था ।"
" ओके । आपके गाजियाबाद वाले फ्लेट में आपके पड़ोसी रमाकांत जी और उनकी पत्नी के बारे में पुछना था ।"
" क्या पुछना है ?"
" मैंने कहीं सुना कि वो बहुत ही पैसे वाले और रईस खानदान से थे तो फिर वो एक साधारण से फ्लेट में क्यों रह रहे हैं ।"
" किसने कहा ? कहीं इसका मतलब भी अमर मर्डर केस से तो नहीं है ?"
" एक लड़की ने बोला था । क्या ये सच है ?"
" अब सच है या झूठ , ये तो मैं नहीं जानता लेकिन जितना रमाकांत जी ने अपने बारे में जो बताया था वही जानता हूं ।"
" क्या बताया था उन्होंने अपने बारे में ?"
" उनका कहना था कि उनके पिता एक रईस खानदान से थे । लेकिन उन्हें अपने अपनी औलाद मतलब रमाकांत जी से बड़ी नाउम्मीदी थी । क्योंकि ये उस वक्त बुरे लोगों की सोहबत में थे । शराब सिगरेट का शौक था । फिर ये एक लड़की के सम्पर्क में आए और अपने पिता के मर्जी के खिलाफ उस लड़की से शादी कर लिए ।"
" क्या वो लड़की जानकी आंटी थी ?"
" हां । वो जानकी आंटी थी । शादी के बाद इनके पिता बहुत खपा हुए । वो इतने ज्यादा खपा हुए कि उन्हें अपनी पुरी जायदाद से बेदखल करना चाहते थे लेकिन फिर उन्हें अपने एकलौते औलाद पर कुछ तरस आ गया था । उन्होंने अपनी जिंदगी में ही अपनी तमाम चल और अचल संपत्ति धर्मार्थ कार्यों में लगाने के लिए एक ट्रस्ट के हवाले कर दी थी और ऐसा इंतजाम किया था कि उन्हें यानी रमाकांत को अपनी सारी जिंदगी ट्रस्ट से चालीस हजार रुपए माहवार मिलता रहे । वो रकम बीस बाइस सालों से उन्हें नियमित मिल रही है ।"
" ओह ! तो इसका मतलब उनकी फायनांशियल स्थिति यदि खूब बढ़िया नहीं है तो कोई खराब भी नहीं है ।"
" बढ़िया क्यों नहीं है ? उस वक्त आज जैसे महंगाई नहीं थी । दो लोगों के लिए आज भी ये रकम कोई छोटी नहीं होती ।"
" और जानकी आंटी कैसी है ?"
" आंटी बहुत तन्हाई पसंद है । वो ज्यादा किसी से मिलती जुलती नहीं ।"
जीजू से बातों के दौरान मुझे याद आया कि अमर के मर्डर वाले दिन अनुष्का जीजू के फ्लेट में थी और ठीक उसके बगल में ही उसकी मौसी का फ्लैट था ।
तो क्या अनुष्का को पता है कि बगल में ही उसकी मौसी रहती है । मौसी अनुष्का को नहीं पहचान सकती थी क्योंकि उसने उसे बचपन में देखा था । दोनों बहनें उस वक्त बहुत छोटी थी और अब वो जवान लड़की में बदल गई है । मगर अनुष्का और वीणा तो फोटो के चलते अपनी मौसी को पहचान ही सकती थी ।
" जीजू एक बात और बताईए , क्या अनुष्का आप के फ्लैट पे अक्सर आती थी ? लेकिन प्लीज सच बोलिएगा ।"
" नहीं नहीं। वो पहली बार मेरे फ्लैट पे आई थी और पहली बार ही इतना बड़ा कांड हो गया ।"
" ओके । थैंक्यू जीजू । गुड नाईट ।"
बोलकर मैंने फोन काट दिया ।
__________
सुबह मोबाइल बजने की आवाज से मेरी नींद खुल गई । टाईम देखा । अभी छः ही बजे थे ।
मैंने देखा रमणीक लाल का फोन था ।
मेरे ' हैलो ' कहने के बाद जो रमणीक लाल ने कहा उसे सुन कर मैं भौंचक्का हो गया ।
मनीष जैन को किसी ने जान से मार दिया था ।
" कब ?- मैंने कहा ।
" पुरी खबर नहीं पता। मैंने अभी अभी खबर सुनी तो सोचा तुम्हें बता दूं ।"
" तुमको कैसे पता चला ?"
" क्या जाहिलो जैसे सवाल करते हो ? कुछ दिन पहले ही तो उसके बारे में जांच पड़ताल की थी । और मैं तुमसे कितना बार कहूं कि मैं भी पुलिस की ही नौकरी करता हूं ।"
" साॅरी । उसकी लाश कहां पाई गई ?"
" उसके फ्लैट पर ही ।"
" ओह ! क्या डेड बॉडी पुलिस ले गई या अभी भी फ्लैट पर ही है ?"
" जिस हवलदार ने मुझे बताया उसके अनुसार अभी भी लाश घर पर ही है और पुलिस को भी अभी ही पता चला है ।"
" इंस्पेक्टर कौन गया है ?"
" वो एरिया विजय कोठारी के थाने के अंतर्गत आता है तो वही जायेगा ।"
" ठीक है । फोन रखो , मैं वहां के लिए निकल रहा हूं ।"
" इंस्पेक्टर तुम्हें उसके फ्लैट में जाने की इजाजत नहीं देगा ।"
" देखते है । वैसे इंस्पेक्टर कोठारी मुझे जानता है " - मैंने कहा -" और सुनो , एक और काम करना है ।"
" क्या ?"
मैंने उसे काम बताने के बाद फोन काट दिया और जल्दी जल्दी तैयार हो कर माॅम डैड को बोलकर बाइक लेकर गाजियाबाद निकल गया ।
जब मैं मनीष जैन के फ्लैट के पास पहुंचा तो देखा कि फ्लैट का मुख्य द्वार खुला हुआ था और अंदर इंस्पेक्टर विजय कोठारी और उसके चंद कांस्टेबल डाइनिंग हॉल में पड़ोसियों से पुछताछ कर रहे थे । शायद अभी तक उनका टेक्निकल टीम नहीं आया था ।
इंस्पेक्टर कोठारी की नजर मुझ पर पड़ी । उसने मुझे अंदर आने का इशारा किया ।
मैं ड्राइंगरुम में प्रवेश किया ।
भीतर ड्राइंगरुम के कारपेट पर औंधे मुंह मनीष जैन पड़ा था । उसकी पीठ में मूठ तक जो खंजर घुपा हुआ था , उसे मैंने फ़ौरन पहचान लिया ।
यह वही नक्काशीदार मूठ वाला जापानी खंजर था जो मैंने श्वेता दी के पास देखा था ।
तभी पुलिस का एक बड़ा दल जिसमें टेक्निकल टीम , फोटोग्राफर , डाक्टर वहां पहुंचा ।
उन्होंने अपनी छानबीन शुरू कर दिया । उनके आने के बाद इंस्पेक्टर ने खंजर को लाश से बाहर खींचने का प्रयास किया तो केवल मूठ हाथ में आ गई , फल लाश मे ही धंसा रह गया ।
खंजर की मूठ नक्काशीदार होने की वजह से उस पर से किसी प्रकार के उंगलियों के निशान बरामद नहीं हुए ।
इंस्पेक्टर ने मूठ का मुआयना किया । खंजर की मूठ खोखली थी । उसने खोखली मूठ के अन्दर झांका ।
" क्या तुम इस खंजर को पहचानने हो ?" - इंस्पेक्टर कोठारी ने मुझे गौर से खंजर को निहारते हुए देख पुछा ।
" हां " - बड़ी मुश्किल से मैंने कहा ।
Update Continue.
ju are brilliant writter