मैं - हैलो डार्लिंग ! कहां हो ?
मैसेज करते ही काजल का जवाब आ गया ।
काजल - घर पर हूं । और बहन से सीधे डार्लिंग ?
मैं - घर पर ? कालेज नहीं गयी ?
काजल - नहीं । मम्मी की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी इसलिए नहीं गई ।
मैं - क्या हुआ उन्हें ?
काजल - कमर का दर्द ।
मैं - ओह ! तब तो रीतु भी नहीं गई होगी , वो भी तेरे ही साथ होगी ।
काजल - नहीं । मैंने उसे बताया था कि मैं आज नहीं आऊंगी । वो कालेज
मैं -
bhai ek to ye batao ki aap hafte mein kitni baar update de sakte ho .. to main usi hisaab se aapka khoon peeunga
जैसे कि मैंने पहले सोचा था मैं भी बड़े बड़े राइटरों की तरह ये कर सकता हूं... वो कर सकता हूं... फलां कर सकता हूं...ढिकड़ी कर सकता हूं...... लेकिन सच कहूं तो कुछ भी नहीं कर सकता हूं... यहां एक से बढ़कर एक धुरंधर खिलाड़ी हैं... मुझे तो बहुत पहले ही अपनी औकात समझ में आ गई थी । वो तो मैं उस मनहूस लाॅक डाउन घड़ी को कोसता हूं कि कहां आ के फंस गया... कितना अच्छा साइलेंट रीडर था... लेखनी का भुत सवार हो गया और लिखना शुरू कर दिया । खैर जब लिखना शुरू कर ही दिया है तो इतिश्री भी जरूर ही करूंगा । और आप मेरा खुन बाकी लेखकों की रचनाओं पर मेरे द्वारा किए गए कमेन्टस पर भी कर सकते हैं ?
शुक्रिया दोस्त ?