sunoanuj
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लग गए बेचारों के लगता है घूम फिर कर वापस आ गए हैं ! अब व्योम जी का प्लान कितना अच्छा है यह तो समय ही बताएगा!# 33 .
3 जनवरी 2002, गुरुवार, 18:30; न्यूयॉर्क बंदरगाह, अमेरिका।
ठीक दो घंटे के बाद राबर्ट और स्मिथ, जेरार्ड के रुम में बैठे थे। जेरार्ड इस समय अपने रुम में चहलकदमी कर रहे थे। उस रुम में एक अजनबी और भी बैठा था, जिसे राबर्ट और स्मिथ नहीं जानते थे। उस अजनबी का व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली दिख रहा था-
“लगभग 6.5 फुट की हाइट, कर्ली बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, लोहे जैसे ठोस हाथों में उभरी हुई मसल्स, बलिष्ठ शरीर।“
राबर्ट और स्मिथ एक पल में उस अजनबी के व्यक्तित्व से इंप्रेस हो गये। फिलहाल कमरे में निस्तब्ध सन्नाटा व्याप्त था। अब सभी को इंतजार था तो बस जेरार्ड के बोलने का। कुछ देर रुम में टहलने के बाद जेरार्ड वापस आकर अपनी चेयर पर बैठ गये। उन्होंने पहले वहां पर मौजूद सभी लोगों पर नजरें डाली और फिर बोल उठे-
“सबसे पहले मैं आप लोगों का परिचय करा दूं।“
“इनका नाम व्योम है, ये सी.आई.ए. के एक काबिल एजेंट हैं।“ जेरार्ड ने उस अजनबी की तरफ इशारा करते हुए कहा।
“सी.आई.ए.!“ राबर्ट और स्मिथ के मुंह से आश्चर्य भरे स्वर निकले।
“जी हां !“ जेरार्ड ने हामी भरते हुए कहा- “मुझे नहीं लगता कि अब ‘सुप्रीम’ का केस हम लोग और हैण्डल कर पायेंगे। इसलिए मैंने यह केस सी.आई.ए. के हवाले कर दिया है।“
“ये मिस्टर व्योम हैं।“ जेरार्ड ने कुछ देर रुककर फिर बोलना शुरु कर दिया- “ये भारतीय मूल के जरुर हैं, पर इन्हें अमेरिकन नागरिकता प्राप्त है, मैंने इन्हें सुप्रीम की सारी जानकारी दे दी है। और मिस्टर व्योम इस मिशन पर जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।“
“और ये मिस्टर राबर्ट और मिस्टर स्मिथ हैं।“ जेरार्ड ने राबर्ट और स्मिथ का परिचय व्योम से कराते हुए कहा- “सुप्रीम का सारा अधिकारिक कार्य, यही लोग संभाल रहे हैं।“ व्योम ने आगे बढ़कर राबर्ट और स्मिथ से बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया।
व्योम के हाथ मिलाने के तरीके से ही राबर्ट और स्मिथ को व्योम की ताकत का अंदाजा हो गया। अब सभी की निगाहें व्योम की तरफ थीं। सभी को अपनी तरफ देखता देख, व्योम ने बोलना शुरु कर दिया-
“मैं समय ना बर्बाद करते हुए सीधे प्वांइट पर आता हूं। सबसे पहले मुझे उस जगह के लोकेशन को-आर्डीनेट चाहिए, जहां से ‘सुप्रीम’ से आखिरी बार सिग्नल मिला था।“
“ठीक है, मैं आपको बारामूडा त्रिकोण का मैप और उस लोकेशन के को आर्डीनेट आपको दे देता हूं।“ राबर्ट ने व्योम को देखते हुए कहा- “और क्या चीज आपको चाहिए होगी ?“
“अगर हो सके तो मुझे बारामूडा द्वीप से एक पानी पर उतरने वाला हेलीकॉप्टर दिला दीजिए। मैं उसी से सुप्रीम को ढूंढने की कोशिश करुंगा।“ व्योम ने अपना प्लान शेयर करते हुए कहा।
“शायद आपको पता नहीं है कि उस क्षेत्र में तीव्र विद्युत चुम्बकीय तरंगे विद्यमान हैं, जो आपके हेली कॉप्टर को ज्यादा आगे नहीं बढ़ने देंगी।“ स्मिथ ने कहा।
“मालूम है, सब मालूम है इसलिए तो मैं आपसे पानी पर उतरने वाला हेलीकॉप्टर मांग रहा हूं, जिससे अगर कहीं मेरा हेलीकॉप्टर खराब भी हो जाए, तो मैं आसानी से उसे उतार सकूं। इस तरह का जो नया टू सीटर हेली कॉप्टर आया है, उसमें एक टरबाइन मोटर भी लगी होती है। जिससे मौका पड़ने पर उसे मोटरबोट की तरीके से भी इस्तेमाल किया जा सकता है और यह टरबाइन मोटर चूंकि इलेक्ट्रानिक नहीं होती इसलिए उस पर विद्युत चुम्बकीय तरंगों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।“
व्योम का जुनून देखकर एक बार तो राबर्ट भी कुर्सी से उठ कर खड़ा हो गया।
“आई लाइक योर प्लान मिस्टर व्योम।“ राबर्ट ने व्योम की तारीफ करते हुए कहा- “मैं जल्दी ही आपके लिए ये सब व्यवस्था करवाए देता हूं। क्या आपको इस मिशन के लिए कोई और साथी चाहिए होगा ? आई मीन हेलीकॉप्टर का पायलेट वगैरह।“
“जी नहीं !“ व्योम ने मना करते हुए कहा- “वैसे मैं अपने बारे में आपको बता दूं, मैं मार्शल आर्ट में एक्सपर्ट हूं। मैं 25 मिनट तक अंडर वाटर बिना सांस लिए स्विम कर सकता हूं। मैं सभी तरीके के हथियार चलाना जानता हूं। मैं दुनिया की 10 से भी ज्यादा भाषा बोल लेता हूं। और मैं हेलीकॉप्टर सहित सभी तरीके के वेहैकिल ड्राइव कर लेता हूं। इसलिए मुझे किसी भी तरह की हेल्प की जरुरत नहीं है और वैसे भी मैं नहीं चाहता कि इस खतरनाक मिशन में मेरे अलावा कोई और अपनी जान खतरे में डाले।“ व्योम की बातें सुन अब जेरार्ड भी इंप्रेस दिख रहे थे।
“ओ.के. मिस्टर व्योम, मैं अभी सारी व्यवस्थाएं करवाता हूं।“ यह बोल स्मिथ तुरंत कमरे से बाहर निकल गया।
4 जनवरी 2002, शुक्रवार, 08:00; बारामूडा द्वीप।
व्योम न्यूयार्क से तुरंत एक प्लेन पकड़कर बारामूडा द्वीप के लिए रवाना हो गया। एयरपोर्ट से निकलकर वह सीधे बारामूडा द्वीप के बंदरगाह पर पहुंचा। वहां उसने जैसे ही अपना परिचय दिया, उसे उसकी पसंद का एक हेलीकॉप्टर दे दिया गया। जिसका फ्यूल टैंक फुल का इंडीकेशन दिखा रहा था। व्योम ने हेलीकॉप्टर के अंदर प्रवेश किया। कुछ ही देर में व्योम हेलीकॉप्टर सहित हवा में था।
लगभग 8 घंटे हेलीकॉप्टर ड्राइव करने के बाद व्योम को समुद्र में खड़ा एक विशालकाय क्रूज दिखाई दिया। सिग्नल देकर व्योम ने अपना हेलीकॉप्टर उस क्रूज पर उतार लिया। वहां उसके हेली कॉप्टर का फ्यूल टैंक दोबारा से फुल कर दिया गया।
“मिस्टर व्योम, अब से 20 घंटे के बाद हमारा क्रूज उस जगह पर पहुंच जाएगा, जहां से कि हमें ‘सुप्रीम’ का अंतिम सिग्नल मिला था।“
क्रूज के अधिकारी ने व्योम को देखते हुए कहा- “उससे आगे हम लोगों की जाने की इजाजत भी नहीं है। क्यों कि उसके आगे बारामूडा त्रिकोण का वह खतरनाक क्षेत्र शुरू हो जाता है, जहां जाकर कोई अभी तक वापस नहीं आया। तब तक आप क्रूज पर आराम कर सकते हैं। जब हम उस जगह पर पहुंच जाएंगे तो आपको बता देंगे।“ इतना कहकर क्रूज के उस अधिकारी ने एक गार्ड को व्योम का रूम दिखाने के लिए कह दिया।
कुछ देर तक डेक पर खड़े हो कर व्योम ढलते हुए सूर्य को देखता रहा। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह मौत से दो-दो हाथ करने को बेताब हो। फिर व्योम धीरे से उस गार्ड के साथ चल दिया।
4 जनवरी 2002, शुक्रवार, 15:00; “सुप्रीम”
सुप्रीम मंथर गति से चल रहा था। दोपहर के लगभग 3:00 बज रहे थे। शिप पर असलम देर से सोने की वजह से अभी नहीं उठा था। वह बहुत गहरी नींद में सो रहा था कि तभी अचानक रूम की डोर बेल बजने से उसकी नींद खुल गई। उठते ही पहले असलम ने आंखें मसल कर घड़ी पर नजर डाली। तब तक डोर बेल कई बार बज चुकी थी।
असलम ने तेजी से उठकर रुम का दरवाजा खोला। बाहर सिक्योरिटी इंचार्ज लारा खड़ा था। उसकी भी लाल आंखें इस बात की गवाही दे रहीं थीं कि वह भी ठीक से सो नहीं पाया है।
“सर, जल्दी चलिए दूर कहीं एक और आईलैंड दिखाई दे रहा है।“ लारा ने घबराए स्वर में कहा।
“एक और आईलैंड?“ असलम के स्वर में आश्चर्य झलका।
“जी हां.....।“ लारा ने हामी भरते हुए कहा।
“तुमने कैप्टेन से इसके बारे में बताया कि नहीं ?“ असलम ने जल्दी-जल्दी वाशबेसिन से पानी ले मुंह पर छींटे मारते हुए पूछा।
“अभी नहीं ! मैंने सोचा पहले आपको बता दूं। वैसे अब मैं कैप्टेन को ही बताने जा रहा हूं।“ लारा ने कहा।
“कैप्टन को लेकर तुरंत डेक नंबर 21 पर पहुंचो। मैं वहीं जा रहा हूं।“
इतना कहकर असलम ने झटके से अपने पैरों में स्लीपर डाला और तेजी से पास में रखी दूरबीन उठाकर, बिना दरवाजा लॉक किये, डेक नंबर 21 की ओर भागा।
असलम कुछ ही देर में डेक नंबर 21 पर था। चूंकि इस साइड में यात्रियों का आना मना था। इसलिए यहां भीड़ नहीं थी। सिर्फ शिप के स्टाफ के ही 8-10 आदमी थे। असलम ने दूरबीन अपनी आंखों पर चढ़ाई और उस आईलैंड को देखने लगा।
वैसे अब शिप आईलैंड से ज्यादा दूरी पर नहीं था और वह नंगी आंखों से भी दिखाई दे रहा था। जैसे-जैसे असलम ध्यान से उस आइलैंड को देखता जा रहा था, उसके चेहरे पर आश्चर्य के भाव बढ़ते जा रहे थे।
“ओऽऽ नो.....यह कैसे संभव है?“ असलम के मुंह से आश्चर्य भरा स्वर निकला।
“क्या... कैसे संभव है?“ सुयश ने पीछे से आते हुए कहा।
सुयश की आवाज सुन असलम ने दूरबीन अपनी आंखों के आगे से हटायी और पीछे देखा। उसे पीछे खड़े लारा व सुयश दिखाई दिये। असलम ने बिना कुछ कहे, दूरबीन सुयश के हाथों में पकड़ा दी।
सुयश ने भी दूरबीन को आंखों पर चढ़ा कर उस आईलैंड को देखना शुरू किया। अब सुयश के चेहरे पर भी आश्चर्य के भाव थे। वह लगभग 10 मिनट तक बारीकी से उस आईलैंड को देखता रहा और फिर होठों ही होठों में बुदबुदाया-
“वही है....बिल्कुल वही है।“
जारी रहेगा..........![]()
बहुत ही जबरदस्त लिख रहे हो आप मित्र !!
Kitna pyar kiya hai ju se? Or ju ko ek baar bhi yaad nahi aai?
Ye apna poora kosis rahega
Mujhe pata hai 

Kitna wait kiya ju ka? Itne din baad aai or wo bhi sirf smile ka reaction de rahi ho?
Thank you very much for your wonderful review and support @DEVIL MAXIMUM bhai