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Serious _SHAAYAREE_

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Niks96

A professional writer is amateur who didn't quit
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जिन्दगी कारवां हैं, और मोत साकुन की नीन्द
थक चुका हू मै अब मुझको सोना है
 

Niks96

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मुझे नादिम किया कल रात दरवाज़े ने ये कहकर
शरीफ़ इंसान घर से देर तक, बाहर नहीं रहते

नाज़ ख़्याल्वी
 

komaalrani

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जिन्दगी कारवां हैं, और मोत साकुन की नीन्द
थक चुका हू मै अब मुझको सोना है
बहोत खूब , क्या बात कही है ,

चंद अशआर इस नाचीज़ की ओर से


///
अय जिन्दगी खुदा के लिए अब मुआफ कर,
बैठी हुई है मौत मेरे इन्तिजार में।


....
उम्र फानी है तो मौत से डरना कैसा,
इक न इक रोज यह हंगामा हुआ रखा है।


.....
उसी को हम जहाँ में रहरवे-कामिल समझते हैं,
जो हस्ती को सफर और कब्र को मंजिल समझते हैं।


.....

मौत जब तक नजर नहीं आती,
जिन्दगी राह पर नहीं आती।


.....
मर्ग मांदगी का इक वक्फा है,
यानी आगे बढ़ेंगे दम लेकर।

-मीरतकी मीर


1.मर्ग- मृत्यु, मौत 2 मांदगी - शिथिलता, थकावट
3. वक्फा - दो कामों के बीच में ठहराव का समय, विराम, इन्टरवल, ठहराव




 
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komaalrani

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मुझे हर खाक के जर्रे पर यह लिक्खा नजर आया,
मुसाफिर हूँ अदम का और फना है कारवाँ मेरा।


.........

मौत का तो इलाज हो शायद,
जिन्दगी का कोई इलाज नहीं।

..............
मौत ने भी जानना चाहा मगर,
जिन्दगानी का भरम खुलता नहीं।
-'फिराक' गोरखपुरी



 

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
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मुझे नादिम किया कल रात दरवाज़े ने ये कहकर
शरीफ़ इंसान घर से देर तक, बाहर नहीं रहते

नाज़ ख़्याल्वी
Waaah bahut khoob nik bhai,,,,,
 

komaalrani

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हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली,
कुछ यादें मेरे संग पाँव पाँव चली,
सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ,
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली

बहोत ख़ुब , क्या बात कही है , तारीफ़ के लिए लफ्ज़ नहीं हैं , .... बस पढ़ती जाती हूँ , पढ़ती जाती हूँ ,....
 
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Reactions: Aakash. and Niks96

Niks96

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बहोत खूब , क्या बात कही है ,

चंद अशआर इस नाचीज़ की ओर से


///
अय जिन्दगी खुदा के लिए अब मुआफ कर,
बैठी हुई है मौत मेरे इन्तिजार में।

....
उम्र फानी है तो मौत से डरना कैसा,
इक न इक रोज यह हंगामा हुआ रखा है।

.....
उसी को हम जहाँ में रहरवे-कामिल समझते हैं,
जो हस्ती को सफर और कब्र को मंजिल समझते हैं।

.....

मौत जब तक नजर नहीं आती,
जिन्दगी राह पर नहीं आती।

.....
मर्ग मांदगी का इक वक्फा है,
यानी आगे बढ़ेंगे दम लेकर।

-मीरतकी मीर


1.मर्ग- मृत्यु, मौत 2 मांदगी - शिथिलता, थकावट
3. वक्फा - दो कामों के बीच में ठहराव का समय, विराम, इन्टरवल, ठहराव



Shukriya Komal ji tareef ke liye
 
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