कोमल जी,
आपकी लिखाई पर दिल से प्रशंसा व्यक्त करना चाहता हूँ.. आपने जिस प्रकार से एक एरोटिक कहानी में कॉर्पोरेट वित्तीय जमेले, शेयरों के दरों की उठापटक, अधिग्रहण से जुड़ी संजीदगियाँ, और कॉर्पोरेट सरवेलन्स जैसे जटिल विषयों को मिश्रित किया है, वह अत्यंत प्रभावशाली भी है.. आपने इन कठिन और तकनीकी विषयों को इस सटीकता से प्रस्तुत किया है कि पाठक को न केवल कहानी के रोमांचक मोड़ से जुड़ाव महसूस होता है, बल्कि वे इन कॉर्पोरेट मुद्दों को भी समझ पाते हैं.. एरोटिक तत्वों के बीच भी आपने इन मुद्दों को ऐसे रूप में समाहित किया है कि वे कहानी के मर्म को न केवल बढ़ाते हैं बल्कि उसे और भी अर्थपूर्ण बना देते हैं.. जाहीर होता है की इन सारे विषयों का ज्ञान केवल पढ़कर नहीं आ सकता.. आपने जरूर ऐसे मामलों को प्रवृत्त होकर संभाला भी होगा..
यह कहानी सिर्फ एक सामान्य एरोटिक कथा नहीं है, बल्कि यह आपकी लिखने के कौशल्य का प्रतीतिकरण है, जिसने वित्तीय और कॉर्पोरेट संस्कृति के संसार को बड़े ही सटीकता और सामंजस्य के साथ एक रोमांचक कथा में ढाल दिया है.. आपकी लेखनी ने यह साबित कर दिया है कि लेखन का कोई भी विषय हो, उसे कुशलता से प्रस्तुत किया जा सकता है, अगर उसमें समर्पण और विद्वता हो...