हाँ भी और नहीं भी,
हाँ, यह कहानी २०१० के दशक के आसपास की है और मैं कोशिश करती हूँ की समय और स्थान का आभास मेरे पाठकों को कम से कम लम्बी कहानियों में हो जिससे वो ज्यादा कहानी से जुड़ा महसूस कर सकें
और बाकी बातों के लिए नहीं।
अगर किसी कहानी की पृष्ठभमि, सिंधु घाटी की सभ्यता है तो यह कल्पना करना की लिखने वाला भी उसी समय का होगा, निश्चित रूप से गलत होगा। कई बार पौराणिक गाथाओं को आधार बना के भी कहानी लिखी जाती है, तो क्या हमें मानना चाहिए की लेखक भी सतयुग या द्वापर का होगा ? तो अगर यह कहानी किसी काल क्रम से जुडी है, और वो भी मात्र पृष्ठ्भूमि से तो लेखक के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
दूसरी बात, लेखन की परिपक्वता और लेखक की बायोलॉजिकल एज से आपने जो टांका भिड़ाने की कोशिश की है वो भी गलत है और मैं उदाहरण दे रही हूँ बनारस का ही, क्योंकि ये कहानी अभी बनारस में चल रही है।
आधुनिक हिंदी के जनक भारतेन्दु हरिशचंद्र का जन्म १८५० में बनारस में हुआ और मात्र ३५ वर्ष से कम की आयु में उन्होंने हिंदी गद्य की शुरुआत की और दर्जनों नाटक, निबंध, कविता संग्रह लिखे। उनके मशहूर नाटक २२-२३ वर्ष की आयु में छप चुके थे। कविगुरु रविन्द्रनाथ टैगोर को कौन नहीं जानता, और उनका पहला कविता संग्रह २१ वर्ष की आयु में निकला था।
लेखक की परिपक्वता, उम्र से नहीं पढ़ने से आती है, किताबे भी और जिंदगी की किताब भी और उस पढ़ने से वह क्या देखता है, सीखता है उसका क्या निरूपण कहानी में कर पाता है , और यह बात सिर्फ लेखक के लिए नहीं बल्कि एक अच्छे पाठक के लिए भी जरूरी है।
मैंने पहले भी कई बार कहा है की इस कहानी को लिखने के लिए मैंने कई किताबो को आद्योपांत पढ़ा है और कई बातों की गहराई के लिए नेट का सहारा लिया, और वो सीन कहानी में एक दो लाइनों में निकल गए जैसे अभी कुछ दिन पहले पोस्ट भाग २७ मैं गुड्डी और होटल ( पृष्ठ ३२५ ) को ले
अबकी तान्या और मोंस्योर सिम्नों दोनों की मुश्कुराहट ज्यादा स्पष्ट थी। फिर दो-चार बूंदें जीभ पे रखकर एक मिनट के लिए महसूस किया और मेरी आँखें बंद हो गई। धीमे-धीमे मैंने उसे गले के नीचे उतारा और जब मैंने आँखें खोली तो मेरी आँखें चमक रही थी-
“ग्रेट। ग्रेट विंटेज मोंस्योर। इफ आई आम नाट रांग। आई थिंक। 2005। 2005 एंड सैंट मार्टिन…”
बस मोंस्योर ने ताली नहीं बजाई। प् अब वो बोले- “यस। वी हव स्पेशली सेलेक्टेड फार यू…”
मैंने दो घूँट और मुँह में डाली और बोला- “मेर्लोत…” उनकी आँखें थोड़ी सिकुड़ी लेकिन फिर मैंने बोला ब्लेंड के लिए अक्चुअली- “कब्रेंते सुव्ग्नन…”
उन्होंने हल्के से झुक के बो किया और बोले- यु आर अ रियल गूर्मे, एनी थिंग मोर?”
वाइन के इन डिटेल्स के लिए मुझे बहुत पढ़ना और ढूंढना पड़ा
so you are not write ( right) in these respects but thanks so much for taking time, reading, enjoying and sharing comments