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बस का सफर दुबारा से शुरु हो चुका था ।
मै वापस अपनी सीट पर आ चुका था ।
वो खातुन बीच बीच मे एक दो बार मेरी ओर देख लेती थीं ,,, मगर जब भी वो मुझे देखती तो मै उन अपने पीछे ही बैठे उन दोनो आदमियो की ओर भी देखता और वो बस हीही करते हुए मिलते ।
मुझे थोडा अजीब भी लग रहा था ।
धीरे धीरे सफ़र आगे बढने लगा और सवारिया उतरती रही ,, मै जिस तरफ था वो थ्री सीटर थी और मेरे पास के बैठे जन भी अपने सटाप पर उतर गये थे ।
इसी बीच वो बच्ची मेरे पास मेरी सीट पर आ गयी तो मैने उसकी मा को देख कर उसे इत्मीनान किया कि मेरे पास ठिक रहेगी ।
फिर थोडा समय बीता और एक स्टाप आया ।
हालाकी यहा बस ज्यादा देर नही रुकने वाली थी लेकिन इस बार मुझे जोरो की पेसाब लगी थी और अगले 2 घंटे तक कोई स्टाप नही था । बस हाईवे से होकर जाने वाली थी ।
इसिलिए मै उस बच्ची को उसकी मा के पास छोड कर बस स्टैंड के ही पेसाब घर मे गया और वापस चला आया ।
इस स्टाप पर काफी ज्यादा स्वारिया उतर चुकी थी ।
मै अपने जगह पर वापस आ गया और वो बच्ची मेरे पास फिर से आ गयी क्योकि उसे खिडकी के पास बैठना था और उसके वाले सीट पर खिडकी की तरफ वो बुढऊ बैठे थे ।
चुकी बस अभी शुरु नही हुई
तो खातुन भी चल कर मेरे पास आ गयी तो मैने उन्हे अपने पास ही बैठने का आग्रह किया
उसने एक बार मेरे पीछे की सीट पर देखा तो वो दोनो आदमी नही थे
फिर वो मुस्कुरा कर पहले अपने अब्बू को बताया और मेरे बगल मे बैठ गयी ।
मै - तो आपका घर कहा पर है
खातुन - बस अगला स्टाप पर जहा ये बस रुकेगी , जलालपुर
मै - ओह्ह फिर भी का लम्बा सफर है ,, मुझे भी उससे आगे जाना है हरपुर
हमारी बाते शुरु हो गई थी कि और पहल मेरे तरफ से हुई तो मैने मेरे घर वालो के बारे मे बताना शुरु कर दिया ।
बातो ही बातो मे उसने बताया कि उसके अब्बू की दिमागी हालत अब ठिक नही है और उसकी अम्मी के गुजर जाने के बाद वो उसके साथ ही रहते है ।
इधर बस भी चालू हुई और ड्राईवर ने हार्न बजाया
जल्दी जल्दी सारे लोग उपर चढ़ गये और मैने देखा कि वो दोनो आदमी वापस से बस पर चढ़ गये है ।
वो खातुन ने भी उन्हे देखा और वो थोडा असहज होने लगी ।
मै भी थोडा परेशान होने लगा कि साले ये सब फिर से कमेंट करेंगे ।
खातुन - तुम परेशान ना हो ऐसे लोगो के लिए,,, सफर मे एक दो नमुने मिल जाते है
उसकी बात सुन कर मै थोडा हस दिया और वो भी मुस्कुरा दी ।
बस निकल पडी
हम ऐसे ही इधर उधर की बाते किये जा रहे थे और समय गुजर रहा था कि तभी बस की स्पीड कम हुई और ब्रेकर पर बस उछल पडा
वो खातुन मेरे बगल मे बैठी हुई सीट पर उछ्ल पडी जिससे उसका दुपट्टा सामने से हट गया और पहली मुझे उसके बडे बडे थन जैसे चुचो को उसके सूट के गले से देखने का मौका मिला ।
और रम्बल स्ट्रिप की उछाल से वो थोडा मेरे ओर गयी थी और उसके जांघो से उसका कुरता हट गया था ।
उसकी चिपकी हुई leggings मे उसके सुडौल जान्घे साफ साफ दिखने लगे और मेरे मुह मे पानी आने लगा ।
जैसे ही सब शांत हुआ उसने
सबसे खुद को सहेजा और अपने कपडे ठिक करते हुए मुस्करा कर मुझे देखने लगी
खातुन - ये सड़क के हचके भी ना ,,, सम्भाल के ना रहो तो चोट लग जाये
इधर हमारी बाते चल रही थी कि पीछे से एक आदमी ने कमेंट किया
आदमी - जब किसी को दिल से चाहो तो पूरी कायनात क्या बस ही उनको मिलाने की साजिश मे लग जाती है हाहाहा क्यो भाई
दुसरा आदमी हस्ता हुआ उसकी हा मे हा मिलाता है ।
उनकी आवाज सुन कर मै एक बार उस खातुन को देखता हू तो वो इग्नोर करने का इशारा करती है ।
तभी दुसरा आदमी बोलता है - भाई मै क्या कहता हू ,,, ये लम्बे सफर मे सबको एक साथी जरुर मिलना चाहिए ताकी बोरियत ना हो
पहला आदमी - हा भाई और जान पहचान अच्छे से हो जाये तो रात बेरात घर आने जाने का भी एक ठिकाना मिल जाता है
दुसरा आदमी -हा लेकिन फिर भी एक दिन के पहचान वाले के यहा रात कोई क्यू रुकेगा
पहला आदमी - अरे भाई साहब तभी तो समाज मे प्रेम बढता है ,,,लोग एक दुसरे की मदद करते ,,सफर मे जुड़ जाते है और फिर धीरे धीरे नजदीक भी होने लगते है ।
उनकी बात सुन कर अब मेरे साथ साथ उस खातुन का भी पारा चढ़ने लगा था
इस बार मैने उन्हे शांत होने का इशारा किया
खातुन - ये लोग बहुत दुष्ट है राज ,,, तुमको पता नही है ये मेरा नही तुम्हारा मजाक बना रहे है ।
मै हस कर - अरे जल रहे है साले ,,, आपको मेरे साथ देख कर हिहिहिही
इस पर वो खातुन थोडा लाज से मुस्कुरा दी और मेरे ओर सरकते हुए - चलो उनको थोडा और जलाते है
मै चौक कर - मतलब
वो खातुन एक बार अपने बगल वाले साइड की खाली सीट पर देखा और पीछे देखा तो सिर्फ वो दोनो ही बैठे थे ।
फिर उसने मेरा हाथ पकड कर अपने कन्धे पर रख दिया
मै चौक कर - ये ये क्याआ कर रही है आप ,,,कोई देख लेगा
खातुन - अरे मै ये सब उनको जलाने के लिए कर रही हू हिहिहिही और हमारे पीछे ये दोनो ही है तो कोई नही देखने वाला
मैने भी थोडा ताक झाक किया और फिर इत्मीनान से उसके कन्धे पर हाथ रखे रहा ।
थोडे पल की शान्ति रही और पीछे से कोई आवाज नही आई
तो मौका देख कर मैने भी ताना मारा - भाभी जी ,,, कुछ जलने की बू आ रही है क्या
खातुन मुस्कुरते हुए
हा थोडा मुझे भी लग रहा है
इतने वो खिलखिलाकर हस पड़ी तो मै उनको ताली देने के लिए दुसरा खाली वाला हाथ मारा ,,,मगर वो समझ नही पाई और मेरे हाथ सीधा उनकी नरम नरम चर्बीदार जांघ पर चट्ट से पड़ गयी
खातुन हल्का सा सिसकी - आऊच,, आराम से राज
मै तुरंत सॉरी बोलकर उसकी जगह पर सहलाने लगा ।
जिस पर पहले तो उसने कोई ध्यान नही दिया लेकिन जब काफी समय तक मैने वैसे ही हाथ रखे रहा
तो वो गले को खरास कर - उहू राज तुम अपना हाथ हटा सकते हो ,,,
मै चौक कर - ओह्ह हा सॉरी वो मै
खातुन - कोई बात नही
तभी पीछे बैठे उन आदमियो ने मेरी हरकत देख ली थी इसिलिए
आदमी 1 - भाई कुछ लोग इतने चुतिये होते है कि थोडे से मजे के बात बात मे सामने वाले की चाटते रहते है
आदमी 2 - हा भाई अब इन चमन चुतीयो को कौन समझाए हाहाहा कि जो देने वाली होगी वो नखरे नहीं करती
उन आदमीयो की बाते सुन कर मैने अपना हाथ भी अब उसके कन्धे से हटा लिया और थोडा देर तकचुप रहा
और वो खातुन भी कुछ सोचती रही
फिर अचानक से उसने मेरा हाथ पकड कर मेरी जांघ पर रखते हुए कहा - क्या राज तुम दुर क्यू बैठे हो ,,,थोडा करीब रहो ना
मै मुस्कुरा कर इस बार उसकी जांघो को अच्छे से मसलकर उसके पास आ गया
हम दोनो जान रहे थे हमारी इस हरकत की जाच करने के लिए वो दोनो आदमी कोई ना कोई बहाना करेंगे
आदमी 1 - भाई जरा वो मेरा बैग उतार के देना
उसकी बात सुनकर आदमी 2 फौरन खड़ा हुआ
मै जान रहा था वो मेरे हरकते देखने के लिए ही खड़ा हुआ है इसिलिए मैने उस खातुन की कुर्ती के नीचे हाथ डाल कर जान्घो पर घुमा रहा था और मुस्कुरा रहा था ।
हुआ भी वही जैसे ही वो बैठा वो फुसफुसा कर अपने पहले साथी को ब्ताया तो तुरंत वो देखने के लिए खड़ा हुआ ।
वो खातुन भी मेरा ही साथ दे रही थी और जैसे ही दोनो बैठे हम होठो मे ही के हस दिये
लेकिन उस खातुन को क्या पता था कि मेरे हाथ कुछ अलग ही जादू करने के फिराक मे उसके जांघो के चौडे हिस्से की तरफ बढ रहे थे ।
जैसे ही उसको अह्सास हुआ वो सहम गयी और उसके दिल की धडकनें तेज हो गयी और उसकी चुचिय फूलने लगी ।
मैने हौले से दुसरे हाथ को उसके दुप्प्टे मे घुसा कर उसके चुचो को थाम लिया
खातुन कापती आवाज - अह्ह्ह नही राआअज्ज यहाआ नही उम्म्ंम
मैने फौरन वो हाथ वापस खीच लिया लेकिन जांघों की घिसाई अब भी जारी थी ।
थोडी देर की चुप्पी के बाद वो मेरे करीब आकर मेरे कान मे बोली - आज तुम मेरे घर चल सकते हो क्या ?
मेरा लण्ड पुरा टनं हो गया और दिल की धडकनें भी तेज हो गयी
मैने धीरे से - हा लेकिन मुझे बुआ के यहा जाना है
तो उस खातुन ने मेरे जीन्स मे उभरे लण्ड पर अपना हाथ रख कर - प्लीज राज मना मत करो ,,,मेरे शौहर 4 महीने से घर नही आये है और मै ।
मुझे थोडा डर भी लग रहा था कि क्या मुझे उस पर भरोसा करना चाहिए भी या नही ।
क्योकि अंजान सफर मे किसी के घर जाना !
मै थोडी देर चुप रहा । फिर मै दिमाग से बिल्कुल भी नही सोच रहा था
एक तो परसो रात के बाद से मैने चुदाई नही थी उपर से इतना रसिला माल सामने से हाथ बढा रहा था ।
लण्ड मेरा जीन्स मे अकड कर कस गया था और मुझे काफी सारे बहाने दिमाग आ रहे थे ।
पहली ये कि बुआ के यहा किसी को खबर नही कि मै आज आ रहा हू
दुसरा ये कि पापा कोई बहाना बना के देना पड़ेगा
थोडी देर मे वो खातुन फिर से मेरे जांघ को छुते हुए - क्या हुआ राज
मै थोडा चिढ़ कर - अरे यार कोई बहाना आने तो दो ,,,घर पर क्या बोलूंगा
मेरे जवाब पर वो खातुन हस दी और हा मे सर हिला कर मुस्कुराने लगी ।
थोडी देर बाद मैने तय किया कि बस खराब होने का बहाना ठीक रहेगा ,,,हा थोडा पापा को समझाना पडेगा लेकिन काम बन जायेगा
ये भी कि बोल दूँगा एक होटल मे रुका हू
और फोन मे मै देर रात मे ही करूंगा ताकी गाडी बदल कर जाने का बहाना ना रहे ।
सफ़र के आखिरी कुछ मिंट बचे हुए थे और जलालपुर बस स्टाप आने ही वाला था ।
वो दोनो आदमी जिन्होने मेरी और उस खातुन की पूरी जाच पडताल की थी तो उन्होने फिर से मेरा मजा लेने के लिए अपनी बकैती शुरु कर दी ।
और जब स्टाप आया तो वो खातुन अपना सारा समान उतारने लगी ।
आदमी 2 - ये दर्द की आहे
आदमी 1 - जुदा हुई राहे
आदमी 1 & 2 - भुला देंगे तुमको सनम धीरे धीरे
. मुहब्बत की सारे सितम धीरे धीरे
मै वो खातुन समझ रहे थे कि ये सब हमारे लिये ही गाया जा रहा था
लेकिन वो खातुन शांत रही और निचे उतर गयी फिर मै भी अपना बैग लिया और खड़ा होकर जाने लगा
Conductor- अरे बाबू ये जलालपुर है । हरपुर आयेगा तो बता देंगे ,,जाओ बैठो
मै मुस्कुराया और एक नजर उन आदमियो को देखा और बोला - नही अंकल ,,, मुझे यही काम है
Conductor- बेटा लेकिन टिकट बन गया है उसका पैसा नही वापस होगा
मै मुस्कुरा कर - अरे कोई बात नही अंकल मै जान रहा हू ,,
फिर मै उतर गया और चल कर उस खातुन के पास चला गया ,,,फिर हमाने मुड कर देखा तो वो दोनो आदमीयो खिडकी से बाहर हमे ही झाक रहे थे
तो मैने भी मजे लेने के लिए खातुन की बेटी को बोला - बेटा उन दोनो अंकल को बाय बोल दो तो
और वो उनको बाय करने लगी और हम दोनो खिलखिला कर हस पड़े ।
फिर हम सब उसके घर के लिए निकल पड़े ।
लेखक की जुबानी
JAANIPUR
सुबह की घटना के बाद कमलनाथ दोपहर तक निचे नही आया । लेकिन जब खाने का समय हुआ तो मजबूरन उसे निचे आना पड़ा ।
वो और रज्जो हाल मे बैठे हुए थे और रीना ने दो थाली लगाई । फिर वो खाना लेके हाल मे चली गयी ।
पहले उसने रज्जो के सामने फिर कमलनाथ के सामने खाना रखा । उसने देखा कि उसका ससुर नजरे चुरा रहा है तो वो मुस्कुरा कर अपनी सास को देखने लगी ।
फिर दोनो खाना खाने लगे और रीना वही किचन मे बाकी काम निपटा रही थी ।
इधर दोनो खाना खतम कर चुके थे
रज्जो - सुनिये जी जल्दी जाईये और रमन को भी खाने के लिए भेज दीजिए । उसके बाद फिर हमे सोनल की शादी के लिए शॉपिंग भी करनी है ना
रज्जो - बहू जरा इधर आओ
रीना किचन से बाहर आई - जी मा जी
रज्जो - देखो रमन के पापा अभी दुकान से वापस आये तो इनके साथ मिलकर सोनल बिटिया की शादी के पर्चे बनवा लेना
रज्जो की बात सुन कर रीना और कमलनाथ एक दुसरे को शर्म भरी निगाहो से देखते है जिसपर रज्जो बोल पड़ती है ।
रज्जो कड़े शब्दो मे - ओहो आप अब ये एक दुसरे से नजरे चुराना बन्द करेंगे ।
रज्जो - भई हमे एक ही घर मे रहना है ,,,अब जो हो गया उसको लेके एक दुसरे से बात करना नही ना बन्द कर दोगे आप लोग
रीना दबे आवाज मे - जी नही मा जी ऐसी कोई बात नही है
मै पापा जी के साथ सारी लिस्ट बना दूंगी
रज्जो कमलनाथ को डांट कर - अरे आप भी कुछ बोलोगे
कमलनाथ हड़बड़ा कर - हा हा ठिक है ,,मै जाता हू रमन को भेज देता हू
इतना बोल कर कमलनाथ घर से दुकान पर निकल जाता है ।
रज्जो हस कर - और बहू तु क्यू इत्ना झिझक रही है । अब क्या अच्छा लगता है तुम दोनो ऐसे रहो घर मे ,,,,कही रमन को भनक लगी तो
रीना - नही नही मा जी मै ख्याल रखुन्गी
रज्जो - हमम ठिक है चल मै आराम करने जा रही हू ।
करीब 3 बजे कमलनाथ दुकान से वापस आया और रीना हाल मे बैठी हुई चावल साफ रही थी ।
कमलनाथ सोफे पर बैठकर - बहू जरा पानी देना ,, गल सुख रहा है
रीना अपने ससुर की बात सुन कर फौरन भागकर किचन मे जाती है और पानी लाकर देती है ।
दोनो की नजरे मिलती है और दोनो ही मुस्कुरा देते है ।
पानी पीने तक रीना वही साम्ने खड़ी होती है और फिर गिलास लेके किचन मे जाने को होती है
कमलनाथ - बहू ऐसा करो वो मेरी डायरी और पेन लेके आओ और हम लोग जल्दी से वो लिस्ट बना ले
रीना बिना कुछ बोले किचन मे चली जाती है और फिर एक डायरी पेन लेके आती है और सोफे पर रख कर वही खड़ी हो जाती है ।
कमलनाथ देख कर रीना अभी भी उस्से बात नही कर रही है
कमलनाथ - अरे बहू तुम भी बैठो ना और बताओ क्या क्या लेना है ,
"क्या क्या बताया है रमन की मा ने ", कमलनाथ पेन खोल कर डायरी के पन्ने उलटता है ।
रीना अभी भी चुप होकर ही सोफे पर बैठ जाती है ।
कमलनाथ मुस्कुरा कर - तो क्या सुबह के लिए तुम अभी भी मुझ्से नाराज हो ।
रीना दबी आवाज मे - न नही पापा जी वो बात नही है ।
कमलनाथ - देखो बहू आज जो कुछ भी हुआ है उसमे कही ना कही मेरी ही गलती है और थोडा बहुत संयोग की बात है । तुम खुद को इसमे कसुरवार ना समझो
कमलनाथ झिझक कर - मै तुम्हे समझा भी नही सकता कि उस समय मै कैसे खुद को रोक नही पाया । तुम तो जान ही रही हो कि पिछले दो दिनो से मै और रमन की मा ...
" पापा जी मुझे मा जी सब बताया है " , रीना ने नजरे चुराते हुए कमलनाथ को बीच मे टोका ।
रीना झिझक कर - छोडिए ना ये सब , हम लोग पर्ची बना लेते है ।
कमलनाथ खुश होकर - वही तो मै भी कह रहा हू हाहाहा
कमलनाथ - बताओ क्या क्या लेना है ।
फिर रीना एक एक करके सामान की लिस्ट बना लेती है । फिर सोनल के लिए शगुन के समान की लिस्ट बनने लगती है
कमलनाथ हस कर - हे भगवान इतना सारा मेकअप का समान
रीना हस कर - अरे पापा जी ये सब अभी कम है और भी होता है लेकिन वो सब जरुरी नही है ।
कमलनाथ - सारी चीजे हो गयी एक बार तुम भी देख लो
रीना ने अपनी गरदन आगे बढा कर डायरी मे नजर मारी तो उसे समझ आया कि उसने सोनल के लिए ब्रा पैंटी तो लिख्वाई ही नही ।
रीना अब अपने ससुर से ब्रा पैंटी को बोले भी तो कैसे । उसको हसी भी आ रही थी कि आज का दिन ही उसके लिए खराब जाने वाला है शायद ।
कमलनाथ - क्या हुआ बहू कुछ बाकी नही है ना ,,,
"तो मै ये सारे समान कल लेते आऊंगा ", कमलनाथ वो समान वाली लिस्ट का पेज फाड़ कर अपनी जेब मे रखते हुए बोला
रीना उसे ऐसा करते देख कर मन मे ( हे भगवान )
रिना - पापा जी वो एक समान रह गया है
कमलनाथ जेब से वो पर्ची निकाल कर खोलता हुआ - हा बोलो मै लिख ले रहा हू
रीना हिचक कर - वो एक सेट ब्रा पैंटी ले लिजियेगा सोनल बहिनी के साइज़ का
रीना की बात सुन कर कमलनाथ की उंगलिया रुक गयी , कान और लण्ड दोनो खडे हो गये और आंखे बडी हो गयी साथ ही होठो पे स्माइल आ गयी ।
कमलनाथ बात को सामान्य ही रखने की कोसिस मे - अच्छा ठिक है ,,,साइज़ बताओ क्या लेना
रीना चौकी - साइज़ मुझे नही पता , मैने उनको उतना ध्यान से कभी देखा नही है
कमलनाथ पर्ची को देखता हुआ उसपे अपने कलम की नोक ठोकता हुआ - अरे बहू ,, सोनल बिटिया बिल्कुल तुम्हारे नाप की ही है ,,,अप्ना ही बता दो ना । वैसे भी इनसब पे कोई खास ध्यान नही देता है
रीना अब ही करती वो शर्म से लाल हुई जा रही थी और फिर उस्ने झिझकते हुए - जी वो 34C की ब्रा और 36 की पैंटी
अपनी बहू की नाप सुन कर कमलनाथ का लण्ड और भी ठुमक उठा । उसने कनअखियो से एक नजर रीना के साडी से झाकते ब्लाउज पर मारा और जल्दी से नोट किया
कमलनाथ- और कुछ बाकी है
रीना - नही पापा जी
इतना सुनते ही कमलनाथ वो परची जेब मे रखते हुए तुरंत खड़ा हुआ - ये डायरी पेन रख देना ,, मै इसको रमन की मा को दिखा दू एक बार
इधर कमलनाथ एक झटके मे खड़ा हुआ तो रीना के ठिक सामने उसके पजामे मे तना हुआ लण्ड साफ उभरा हुआ दिखने लगा ।
रीना मुस्कुरा दी और कमलनाथ उपर चला गया ।
रीना हस्ती हुई मन मे - हे भगवान पापा जी का इस उम्र ने भी हमेशा हिहिहिही
फिर वो अपने काम मे लग गयी ।
CHAMANPURA
एक बन्द कमरे मे दो रसिले जिस्म एक दुसरे को चूसे जा रहे थे । उनके चर्बीदार अन्गो पर कपडो के नाम पर धागा नही था ।
उफ्फ़ निशा तेरे कुल्हे तो पहले से ज्यादा नरम हो गये है रे , सोनल ने निशा के चर्बीदार गाड़ को मसलते हुए कहा और फिर उसके रसिले होठो को चूसने लगी ।
सोनल - और ये तेरे चुचे ,,उम्मममं पहले तो ऐसे नही फुले थे ,,,आआह लगता है राज तेरी जम कर ले रहा है
निशा थोडा उतर कर अपने हाथ उसकी चुत पर मलते हुए - क्यू जैसे तुने तो उससे चुदना ही बंद कर दिया क्या उम्म्ंं बोल ना
ये कहकर निशा सोनल ने नरम नरम फुले हुए 34 साइज़ के चुचे को मुह भर लेती है
निशा - उम्म्ंम सोनल तेरे दूध बहुत नरम है उम्म्ंम्ं अह्ह्ह साला अमन भी ब्डा नसीब वाला है ,,ऐसा गदराय माल पा गया
सोनल निशा से अपनी चुत मसल्वा कर बस सिससिस्किया लिये जा रही थी और जिस तरह से निशा उसके चुचियो के निप्प्ल अपनी जीभ से नचा रही थी
निशा - क्यू मेरी रान्ड दिखाया की नही इनहे अमन को उम्म्ंम वीडियो काल पर कभी नंगी हुई या नही बोल ना साली
सोनल हस कर - नही यार ,, वो थोडा नटखट है लेकिन जिद नही करता , मना कर दो तो मान जाता है ।
निशा उसकी चुत मे ऊँगली पेलते हुए - और तुने क्भी देखा है उसका मोटा लण्ड उम्म्ं
सोनल नशे से अकडती हुई - अह्ह्ह नही यार उम्म्म्ं सीईई मै उसे छेड़ती हू तो वो शर्त रखता है कि पहले मै शुरुवात करु
निशा उसके चुत मे उंगलिया पेलते हुए -ओह्हो फिर क्या सुहागरात पर तुम लोग बस मीठी बाते करोगे ,,, शादी के सेज पर मिलने की तडप का मजा तो लो ।
एक्दुसरे के लिए मूठ तो मारो तभी तो मजा आयेगा ना ।
सोनल अपनी गाड़ निशा के मुह पर दरते हुए -आह्ह नही यार मुझ्से ये नही हो पायेगा । मै पहले क्भी भी उससे ऐसे पेश नहो आई हू उम्म्ंं और चाट सीईई अह्ज्ज्ज
निशा - ओहू मेरी जान अगर अभी से खलेगी नही और उसे बतायेगी नही कि तुझे अप्नी चुत और गाड़ चटवाना कितना पसन्द है तो क्या वो शादी के बाद ये सब करेगा
सोनल निशा के उपर झुकी हुई कसमसा कर -उह्ह्ह सीईई तो तु ही बता क्या कर उम्म्ंम्ं
निशा ने पोजीशन बदला और सोनल की चुत से अप्नी चुत रगड़ती हुई - मै जो कहुन्गी वो करेगी तो अभी शादी को 10 दिन है इतने मे काम बन जायेगा
सोनल चरम पर पहुंच रही थी तो वो अप्नी कमर को अक्ड़ा कर तन गयी और निशा लगातार उसके चुत के होठों से अपने चुत मल रही थि और थोडी ही देर मे दोनो झड़ने लगे और थक कर आपस मे लिपट कर बिस्तर पर ढल गये ।
निशा - तो बता ये अमन कॉल कब करेगा
सोनल - वो हम लोग रात मे ज्यादा बाते करते है , लेकीन तु करेगी क्या ?
निशा - बस तू देख ना रात मे मेरा कमाल हिहिहिही
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आज की ये रात बहुत ही कामुक होने वाली थी ।
एक ओर जहा निशा सोनल और अमन के बिच कुछ मस्तियाँ करने का मूड बना चुकी थी ।
वही शालिनी और राहुल की अपनी अगल ही प्लानिंग हो रही थी ।
और राज ने एक गदराई हसिना को पूरी रात भोगने का इतेजांम कर लिया था ।
सपने तो काफी देखे जा चुके थे लेकिन किसका सपना हकीकत होगा ये अगले अपडेट मे पता चलेगा ।
सादीया की इच्छास्वरुप मैने सुबह के 3 बजे तक उसकी चुत और गाड मारी और फिर मै सो गया ।
सुबह 9 बजे के बाद ही मेरी आंखे खुली तो उसने ताजा गर्म नाश्ता करवाया और फिर मै सफ़र पर निकलने की तैयार होने लगा ।
इस दौरान वो मेरे पास ही रही और उसने मुझसे वादा लिया कि जब भी मुझे समय मिले वो यहा जरुर आऊ ।
मै भी मुस्कुरा कर हा बोल दिया ।
फिर वो मुझे बस स्टाप तक छोडने आई और 10 बजे वाले बस से मै बुआ के घर की ओर निकल गया ।
मै जा तो बुआ के यहा जा रहा था लेकिन सादीया की यादे मेरा पीछा नही छोड रही थी ।
उसके बारे मे सोचते हुए कब मै सो गया पता ही नही चला
और मेरा सफर भी खतम हो गया ।
मै फाइनली अपने बुआ के शहर आ गया था ।
मैने अपना बैग लिया और निचे उतरा ।
फिर मै चौराहे से होकर टाउन की ओर जाने लगा ।
चुकी मै काफी समय बाद बुआ के यहा आया था तो यहा बहुत कुछ बदल गया था ।
चौराहे से मैने ई-रिक्सा लिया और बुआ के घर के मुहल्ले का नाम ब्ताया और फिर हम (मै और वो रिकशा वाला ) निकल गये ।
रास्ते मे मैने एक बहुत ही बड़ा कालेज देखा , काफी वीआईपी भी था ।
मैने रिक्सेवाले से उस कालेज के बारे मे पुछा तो उसने मेरे बड़े फुफा का नाम बताया तो मै मुस्कुरा दिया ।
फिर वो रिक्सेवाला इस कालेज के साथ साथ मेरे फुफा की भी बड़ाई बतियाने लगा ।
मै चुपचाप सुनता रहा और जब मेरा मुहल्ला आया तो मै उसके पैसे देकर उतर गया ।
मै अपना बैग उठाकर कन्धे पर किया और कालोनी के एक बड़े मकान की ओर देखा ।
फिर मुस्कुरा कर उसी ओर चल दिया ।
काफी बड़ा गेट लगा था और उसमे एक छोटा गेट भी था । मै उस छोटे गेट से अन्दर घुसा ।
अंदर काफी बड़ा घर था
जित्ने मे मेरा चौराहे वाला घर था उतना तो फुफा जी ने खुला छोड रखा था । जिसमे एक ओर कुछ आदमी औरत अनाज का काम कर रहे थे ।
एक ओर फुलवारी भी थी उसकी भी देखरेख दो औरते कर रही थी ।
मै बेधड़क आगे बढ रहा था और घर के बरामदे से होकर एक ब्डा सा दरवाजा फांदते हुए हाल मे पर्वेश किया तो सामने शिला बुआ खडी थी ।
जो सोफे पर रखे हुए कपडो मे से छटाई कर रही थी ।
मैने इधर उधर जरा भी नही देखा ,,बुआ के कुरती ने उभरी हुई गाड़ देखकर मेरा लण्ड वैसे ही तन चुका था
मै दबे पाव गया और बुआ को पीछे से पकड लिया ,
मै चहक कर - बुआआ हिहिहिही
मैने उनको पेट पर से पकड़ा हुआ था और मेरा लण्ड उनकी गाड़ मे चुभ रहा था ।
शिला बुआ ने जैसे ही मेरी आवाज सुनी वो खुश हुई - अरे मेरा लल्ला तु
और वो फिर वो मेरी बाहो मे ही घूम कर मेरे ओर हो गयी ।
अब मेरे हाथ उनकी कूल्हो पर थे ।
मैने तुरंत हग कर लिया और उन्होने मुझे रोका भी नही ।
मै उन्के सीने से चिपका हुआ था कि मेरी नजरे एक जगह अटक गयी।
एक बडी ही गठिले बदन वाली औरत जिसने डीप गले का ब्लाऊज पहन रखा था वो एक कमरे से झाडू लगाते हुए हाल मे आ रही थी ।
मै बुआ से अलग हो गया था और मेरी नजरे उसके झान्कते हुए चुचो मे अटक गयी थी ।
जब बुआ ने मुझे एकदम से चुप देखा तो मेरी नज़र का पीछा किया और वो मुस्कुरा कर मेरे गाल खिचते हुए ।
शिला - शैतान कही का ,,,अभी आये हुए तुझे कुछ मिंट भी नही हुए और तु शुरु हो गया ।
मै हस कर उनकी कमर पर हाथ घुमाते हुए - ये कौन है बुआ
शिला - ये हमारे घर की खास नौकरानी है , मीना
मै बुआ की आंखो मे देखते हुए - खास नौकरानी मतलब हिहिहिही
शिला हस कर - चल अब ज्यादा दिमाग ना लगा ,,और फ्रेश हो ले । मै खाना लगाती हू ।
फिर बुआ ने मुझे एक कमरे मे ले गयी ।
उस कमरे की हालत बहुत खराब थी ।
यहा वहा कपडे बिखरे बड़े एक टेबल पर कम्पयूटर था लेकिन वहा भी सब कुछ तीतर बितिर था ।
मैने बेड पर अपना बैग रखा और थोडा असहज होकर बैठ गया ।
बुआ समझ गयी कि मुझे ये कमरा कुछ खास पसंद नही आया था ।
शिला मुस्कुरा कर - अरे ये कमरा अरुण का है ,, वो ऐसे ही अपने सामान इधर उधर कर देता है ।
शिला - तु हा बाथरूम मे फ्रेश हो ले और मै मीना को बोल कर ये सब सही करवा दे रही हू ।
फिर मैने अपनी बैग से अंडरवियर लिया और अपने कप्डे उतारे और नहाने के लिए कमरे के ही बाथरूम मे चला गया ।
गुनगुने पानी से नहाकर मै तौलिया लपेट कर बाहर आया तो देखा वो कामवाली मीना राहुल के समान सही कर रही थी और बकबकाये जा रही थी ।
मीना कुछ किताबो को एक डिब्बमे रखते हुए- ये अरुण बाबू का ना आदत एकदम खराब है , अरे ऐसी किताबे कोई घर मे रखता है । वो तो शूकर है कि इनका कमरा मै साफ करती हू नही तो अगर माल्किन लोग देख ले तो शामत आ जाये ।
मीना बड़बड़ा रही थी कि उसकी नजरे मुझ पर गयी ।
और वो बिना पलके झपकाये मेरे खुले सीने को निहारे जा रही थी ।
मै थोडा सा शरमाया और लपक कर अपना टीशर्ट उठा लिया ।
मीना - तो आप ही हो वो बाबू जो माल्किन के मायके से आये हो
मुझे उसकी बोलने के तरीके पर हसी आई
मैं मुस्कुरात हुआ - हा मै राज हू ।
मीना - देखो राज बाबू ये अरुण बाबू के साथ रह रहे हो न तो थोडा इनकी हरकतो को नजरअंदाज करना ।
मै थोदा परेशान होकर- क्यू ! क्या हुआ ?
मीना भड़कती हुई - अरे अब मै क्या बताऊ राज बाबू तुमको , खैर छोडो आप अब आराम कर सकते हो ।
फिर मैने लोवर पहना और वही मीना अरुण के कम्प्यूटर को साफ करने लगी ।
कि अनजाने मे उससे डेस्कटॉप का बटन दब गया और डेस्कटॉप ऑन हो गया ।
डेस्कटॉप स्क्रीन की लाईट मुझे महसूस हुई तो मै उस देखा
तो मीना बड़बड़ा रही थी - हे ददा ये कैसे चालू हो गया । कहा से बंद होगा
मैं उसकी परेशानी भरी बड़बड़ाहट सुन ली और उठकर - क्या हुआ , बंद नही हो रहा है क्या
मेरी आवाज सुनते ही मीना desktop स्क्रीन के सामने खड़ी होकर जैसे उसे छिपाने लगी - न न नही वो मै बंद कर लूंगी
मै उसकी ओर बढकर - अरे रुकिये मै बंद कर देता हू ।
ये बोलकर जैसे ही मै मीना के बगल मे खड़ा हुआ तो सामने देखा डेस्कटॉप मे mute मे एक पोर्न वीडियो चल रहा था और उसने एक औरत एक लडके से चुद रही थी ।
मै समझ गया कि मीना की हडबडी का कारण क्या था
तो मैने लपक कर डेस्कटॉप की स्क्रीन ऑफ कर दी ।
मीना मुझसे नजरे चुरा रही थी और मुझे भी थोडा असहज लग रहा था कि अभी मुझे आये 15 20 मिंट भी नही हुए और क्या क्या हो रहा है ।
मैने मीना के रस भरे जोब्नो पर नजरे गडाये रखा और पल भर मे ही मीना ने मेरी नजरो का लक्ष्य भाप लिया ।
जिससे उसकी सासे तेज हो गयी और वो फौरन कमरे से अरुण के गंदे कपडे लेके बाहर निकल गयी ।
मै अपना लण्ड सेट किया और अपना बैग भी एक जगह रख कर बाहर आ गया ।
फिर बुआ ने मुझे खाना दिया और मै खाना खा रहा था ।इसी दौरान मीना मुझे पानी देने के लिए आई
मै मुस्कुरा कर - तो आप अरुण की यही सब हरकतें नजरअंदाज करने को बोल रही थी ।
मीना ने मेरी ओर देखा और मुस्कुरा कर - हम्म्म
मै मुस्कुरा कर - कोई बात नही ये तो लगभग सभी घरो मे होता है ,, बच्चे ये सब देखते ही रहते है
मीना- ओहो अभी आप समझ नही रहे हो कि बात कितनी बडी है ।
ये बोल कर मीना चली गयी ।
और मुझे एक उलझन मे छोड गयी कि आखिर ऐसा क्या करता है अरुण कि वो मीना को अजीब लगता है ।
फिर मै बुआ के पास चला गया और उनके कमरे मे देखा तो कमरा बड़ा ही आलिशान था ।
काफी बड़ा बेड था जिसमे 4 से 5 लोग आसानी से सो सकते थे और गद्दा भी बहुत मुलायम था ।
फिर मै बुआ से बाकी के लोगो के बारे मे बात करने लगा ।
तो पता चला कि कम्मो बुआ और अरुण अभी 2 बजे तक आयेंगे और दोनो फूफा लोग शाम तक आयेंगे क्योकि वो लोग स्कूल मे देर तक रुकते है ।
इधर मै घड़ी देखी और बुआ के गुजारिश की तब तक क्यू ना हम लोग एक राउंड कर ले तो बुआ ने उसके लिए मना नही किया और हमलोग कमरे का दरवाजा बन्द करके शुरु हो गये ।
लेखक की जुबानी
CHAMANPURA
बीती रात अपने बेटे राहुल की बेचैनी देखने बाद आज शालिनी ने उसे तंग करने का नया तरीका निकाला ।
सुबह की चर्या के बाद वो अपने बेटी के कमरे मे गयी और उसने निशा की आलमारी से उसका एक लाईट ट्रांसपैरंस प्लाजो निकाला । फिर इठलाती हुई अपने कमरे मे चली गयी ।
करीब 9 बजे तक राहुल नहा धोकर नास्ते के लिए किचन की ओर गया और जैसे उसने सामने देखा उसकी धडकनें तेज हो गयी ।
उसका मुरझाया चेहरा खिल उठा और लण्ड पल भर मे ही लोवर को भेदने के फड़फडाने लगा ।
क्योकि सामने किचन ने शालिनी निशा की वही पारदर्शी प्लाजो पहने हुए झुक कर फ्रिज से कुछ निकाल रही थी और उसमे से उसके गुदाज फ़ैले हुए चुतडो पर कसी हुई उसकी पैटी साफ झलक रही थी ।
राहुल ने अपना सुपाडा खुजाया और सीधा अपनी मा के पीछे खड़ा हो गया ।
राहुल- क्या बना रही हो मम्मी
शालिनी - बस नासता हो रहा है , तु बता नहा लिया
राहुल - हा मम्मी , हिहिहिही
शालिनी - तो हस क्यू रहा है ,,बैठ मै नास्ता लगा रही हू
राहुल सीधा मुद्दे पे आता हुआ - वो मुझे कल रात के लिए हसी आ रही थी ।
शालिनी मुस्कुरा कर - क्यू उसमे हसने जैसा क्या था ?
राहुल - आप तो कह रही थी कि पापा बड़े शरारती है हिहिहिही
"ये तो कोई भी कर सकता है इसमे कैसी शरारत " , राहुल ने अपने हाथ आगे बढा कर शालिनी के गुदाज गाड़ को हाथ से छुते हुए कहा ।
शालिनी को जैसे ही अपने बेटे के हाथ अपने चुतडो पर मह्सूस हुए उसने अपने गाड़ सख्त कर लिये और कापने लगी ।
" अच्छा तो तेरे हिसाब से शरारत कैसे करते है ", शालिनी ने खुद की सासो को काबू मे करते हुए आगे बढ कर सिंक मे पड़े बरतन खंगालने लगी ।
राहुल हस - हिहिहिही , नही आप गुस्सा करोगे ।
शालिनी तो चाह ही रही थी कि राहुल आगे बढे इसिलिए वो राहुल को मौका देते हुए ।
शालिनी - मान ले तु तेरे पापा की जगह होता तो क्या करता । उम्म्म बोल ।
राहुल के कानो मे जैसे ही वो शब्द पड़े उसका लण्ड ठुमका और दिमाग मे एक पल को अपनी मा को बहुत ही बेरहमी से चोदने के ख्याल आया और फिर वो अपना लण्ड मसलता हुआ ।
राहुल खिखी करता हुआ अपनी मा के पास निचे बैठ गया ।
"अगर मै पापा की जगह होता तो ऐसा करता हिहिहिही ", राहुल ने अपनी के कूल्हो से उसका प्लाजो खिच कर उसके चुतडो को नंगी करते हुए बोला ।
शालिनी चौकी और चिहुकी - हेईई पागल कही का
फिर अपने भिगे हाथो से ही अपने प्लाजो को खिच के अपनी गाड़ पर चढा लिया ।
राहुल निचे बैठा हसे जा रहा था मगर दिल ही दिल मे अपनी मा की नंगी गोरी चिकनी गाड़ को चूमने का अरमाँ अधूरा रह गया था ।
शालिनी अपने हाथ पोछते हुए -चल उठ और ले नास्ता कर । मुझे लगा तु ... और तुने तो मुझे ही
राहुल अपनी मा के हाथ से नास्ते का प्लेट लेता हुआ - हिहिहिही आपने ही पूछा था ना तो हिहिहिही
शालिनी उसके चहकते चेहरे पर खुश थी और शर्मा के काम करने लगी ।
राहुल ने नाश्ता किया और हाथ पोछ कर किचन से जाने पहले अपनी मा के चुतडो पर चट्ट से मारता हुआ - हिहिहिही अगर मै पापा की जगह होता तो ऐसा हमेशा करता
इतना बोलकर राहुल दुकान मे चला गया और शालिनी अपने चुतडो को सहलाते हुए हसने लगी ।
JAANIPUR
सुबह के 10 बज रहे थे और कमलनाथ नासता करके हाल मे खड़ा रीना के निचे आने का इन्तजार कर रहा था ।
घर के बाहर खड़ा ई-रिक्से वाला हार्न पर हार्न दिये जा रहा था ।
कुछ ही पलो मे रीना तेजी से उतरते हुए सीढ़ीओ से निचे आने लगी ।
उस्के मोटे हिल वाली सैन्ड्ल की कट कट से कमलनाथ का ध्यान अपनी बहू की ओर गया और उसकी निगाहे रिना के ब्लाउज ने उछलते चुचो पर अटक गयी ।
रीना सीढियो से निचे आगयी थी और उसकी तेज सासो से अभी भी उसकी चुचिया फूल रही थी और कमलनाथ की निगाहे अभी भी वही अटकी थी ।
रीना थोडा असहज हुई और हस कर - चलिये पापा जी ,
कमलनाथ - हा चलो
फिर रीना अपने सर पर पल्लू करके आगे आगे चल पड़ी और कमलनाथ पीछे से साडी मे थिरकते उसके जबरदस्त कूल्हो को देख कर अपना लण्ड सेट किया और वो भी घर से बाहर निकल गया ।
दोनो ई-रिक्से से बड़े बाज़ार की ओर निकल पड़े ।
रास्ते मे उन्होने तय किया कि पहले साड़ियो की शॉपिंग हो जाये फिर छोटे मोटे आईटेम खरीदने जायेंगे ।
फिर वो शो रूम पर गये और रीना ने टोटल 4 साड़िया पसंद की । एक सोनल और एक उसकी मा रागिनी के लिए , एक अपनी सास रज्जो और एक खुद के लिए ।
साड़ियो की खरिदारि के दौरान रीना की निगाहे शो मे खड़े एक पुतले पर जमी रही थी । जिसे दुकानदार ने बहुत ही खुबसूरत चन्देरी प्रिंट मे क्राप-टॉप लहन्गा पहना रखा था ।
कमलनाथ जिसकी निगाहे रीना पर ही जमी थी उसने भी ये नोटिस किया और समझ गया कि उसकी बहू उससे कहने मे हिचक मह्सूस कर रही है ।
कमलनाथ दुकानदार से - भाईसाहब वो ड्रेस कितने की है, जरा उस मॉडल मे कुछ दिखाईये
रीना ने फैली हुई आंखो से कमलनाथ को मुस्कुरा कर देखा - पापा जी वो बहुत महगा है ,
कमलनाथ - तुझे पसन्द है ना
रीना शर्म से नजरे झुका कर धीमी आवाज मे - हम्म्म , लेकिन मा जी गुस्सा करेंगी । मत लिजिए खर्चा वैसे ही ज्यादा है
कमलनाथ धीरे से रीना के पास होकर - अरे तु रमन की मा को छोड़ उसको कैसे मनाना है मुझे पता है ।
कमलनाथ की बात पर रीना मुह पर हाथ रख कर शर्माते हुए हस दी ।
इसपर कमलनाथ सफाई देने लगा - ओह मेरा वो मतलब भी नही था । तु बहुत शैतान है हिहिहिही
रीना हस्ती हुई - मै तो उस बारे मे कुछ सोचा ही नही हिहिहीही आप ही याद दिला रहे हो
कमलनाथ खुद को शान्त करता हुआ - अच्छा ठिक है तो ये ही कलर लेना है या कोई और
रीना भी खुद को सजग करती हुई - ह्म्म्ं यही रहेगा ।
फिर कमलनाथ सारी पैकिंग करवा कर बिल देता है और सामान लेके दुसरी दुकान के लिए निकल जाते हैं ।
अगला स्टाप था बरतन वाला
वहा भी एक घन्टे बिताने के बाद फाइनली वो सब सृंगार वाले दुकान पर गये ।
चुकि दुकान पर महिलाए ज्यादा थी तो
कमलनाथ एक ओर कुर्सी लेके बैठ गया और रीना समान निकलवाने लगी ।
करीब आधे घन्टे की बोरियत के बाद कमलनाथ के चेहरे पर चमक लण्ड मे कठोरता आई
क्योकि अब दुकान खाली हो चुका था और रीना ब्रा पैंटी देख रही थी ।
कमलनाथ बडी उत्सुकता से अपने चुतड और गरदन उचकाये हुए काउंटर पर फैले हुए लाल नीले मरून गुलाबी रन्गो वाले मुलायम कपडे देख रहा था ।
तभी दुकान पर खड़ी लेडिज ने रीना से पूछा- आपको भी अपने लिये भी चाहिये ।
जैसे ही कमलनाथ के कानो ने वो शब्द पड़े वो चहका और लण्ड मे गुदगुदी हुई
रीना ने कनअखियो से अपने ससुर को देखा और हा मे सर हिलाने लगी ।
तभी उस दुकान वाली लडकी ने रीना से उस्का साइज़ पूछा । तो रीना ने दबी हुई आवाज मे बोला 34D
आवाज इतनी धीमी थी कि उस लड़की ने सही सुना नही तो उसने कन्फर्म करने के लिए थोडा साफ लहजे मे सामान्य होकर पुछा- 34 B या 34D
जिसे कमलनाथ बड़े ध्यान से सुन रहा था और रीना ने बडी हिचक के साथ बोला - B नही D
फिर वो शर्माते हुए अपनी गरदन घुमा कर अपने ससुर की ओर देखा कि कही उन्होंने सुना तो नही ।
फिर वो अपने लिये ब्रा लेने लगी और तभी उसे रज्जो के बारे मे भी ख्याल आया कि उसके लिए भी तो ब्रा पैंटी लेनी है दो जोडी ।
अब असमन्जस कि स्थिति ये थी कि कल उसने अपनी सास से उसका साइज़ पुछा नही और आज वो अपना फोन लेके आई नही थी ।
बड़ी बेबसी से उसने मजबुर होकर कमलनाथ की ओर देखा और अपनी ओर आने का आंखो से इशारा किया ।
कमलनाथ खड़ा होकर रीना के पास आया - हो गया क्या ?
रीना कमलनाथ की ओर झुककर धीमी आवाज मे - वो मा जी के लिए अन्दर के कपडे लेने है । उनका साइज़ क्या था मै पुछना भुल गयी ।
"अरे मुझे पता है ना ", कमलनाथ थोडी तेज आवाज मे चहक कर बोला और फिर अपनी स्थिति को समझकर धीमा हो गया ।
रीना मुह पर हाथ रख कर हसने लगी।
कमलनाथ धिमी आवाज मे मुस्कुरात हुआ - मतलब मुझे पता है , क्या क्या लेना है
रीना मुस्कुरा कर - दोनो लेना दो जोडी
कमलनाथ थोडा खुद को शान्त रखता हुआ - 42DD की वो लेलो और 44 की निचे वाली ।
इतना बोल कर कमलनाथ सीधा खड़ा हो गया और काउंटर पर रखी रीना की दो जोडी ब्रा पैंटी के कलर और डिज़ाइन देखने लगा ।
रीना को जैसे अह्सास हुआ उसे बडी शर्मिंदगी होने लगी
रीना - ठिक है पापा जी आप बैठीये अब
कमलनाथ की निगाहे उस लड़की के हाथो पर जमी थी जो रज्जो के साइज़ की ब्रा पैंटी के बॉक्स उठा कर ला रही थी ।
कमलनाथ उसी ओर इशारा करके - वो जरा कलर देखना था ।
इत्ना बोलकर कमलनाथ मुस्कुरा दिया और रीना भी होठो मे हस्ती रही ।
फिर उस लड्की ने कुछ ब्रा पैंटी के डिज़ाइन दिखाये तो उसमे से कमलनाथ ने दो जोडी सामान्य रेगुलर यूज़ वाले ब्रा पैंटी लिये और एक सेट रेड कलर मे बढिया लैस वाली सेट मे ब्रा पैंटी ली ।
रीना अपने ससुर की चोईस की दाज देते हुए मन मे सोचती है- ऐसे ऐसे सेक्सी कपडे जब मम्मी पहनेगी तो 4 क्या 8 बार कोई भी ...हिहिहिही
कमलनाथ - बस हो गया , बेटा इसका हिसाब बना दो
तभी रीना टोकते हुए - अरे नही , अभी एक और चीज़ चाहिये
कमलनाथ - अब क्या बाकी है बहू
रीना मुस्कुरा कर शरमाती हुई - एक हैयर रेमोवर लेना है
कमलनाथ उसकी बात पर रीना का चेहरा बड़े गौर से देखता है तो रीना तुरंत सफाई देते हुए - वो मा जी को चाहिये था तो
कमलनाथ - अच्छा ठिक है लेलो और कुछ बाकी नही है ना अब क्योकि बहुत लेट हो गया है
रीना - बस पापाजि हो गया , पैसे देके घर ही चलना है अब
फिर वहा का भी हिसाब किताब करके दोनो घर के लिए निकल गये ।
चुकि ई-रिक्से मे आगे की तरफ समान रखा हुआ था तो इस बार दोनो ससुर बहू एक ही सीट पर सट कर बैठे हुए थे ।
और कमलनाथ के जहन मे अभी भी एक बात घूम रही थी कि जब रीना का साइज़ 34C था तो वो 34D की ब्रा क्यू ली ।
कमलनाथ जान रहा था शायद घर जाने पर ये मौका ना मिले तो
कमलनाथ धीमी आवाज मे - अच्छा बहू तुमने तो कल पर्ची मे अपना साइज़ 34C लिखवाया था ना तो फिर आज D क्यू
रीना की चौकी कि उसका ससुर ऐसे क्यू पुछ रहा था ।
हालाकी ये सवाल उसे जमा नही लेकिन वो जवाब देने के लिए बेबस मह्सूस कर रही थी ।
रिना हिचक कर - पापा जी वो मैने सोनल बहिनी के लिए साइज़ लिखवाये थे ना क्योकि अभी उनकी शादी नही हुई है ना
कमलनाथ थोडा हस कर - अच्छा तो तुमने भी शादी के पहले का साइज़ लिखा था समझ गया समझ गया ।
कमलनाथ के इस जवाब पर रीना शर्म से पानी पानी हो गयी और एकदम से चुप हो गयी ।
थोडे ही पल मे उसे अपनी गलती का अहसास हुआ कि वो अनजाने मे क्या बोल गया ।
कमलनाथ मन मे - हे भगवान ये क्या हो गया मुझसे ,, बहु तो यही सोच रही होगी कि मै उसके चुचो को बहुत ध्यान से देखता हू और रोज वो कितना मिज्वाती है ये सब भी मै सोच रहा होउँगा ।
कमलनाथ - ओह्ह सॉरी बेटा मेरा वो मतलब नही था , मै तो बस थोडा उलझा हुआ था
रीना मुस्कुरा कर - कोई बात नही पापा जी । बस आपको ये सब घर पर जाकर पूछ लेना चाहिए था यहा कोई भी सुन सकता है हमारी बाते
कमलनाथ अटकता हुआ - हा बहू तुम सही कह रही हो ,,माफ करना ।
रीना मुस्कुरा कर - कोई बात नही ,
थोडी ही देर बाद दोनो घर पहुच गये ।
हाल मे रज्जो बैठी कुछ अनाज का काम कर रही थी ।
किचन से हल्के फुल्के खाने की खुस्बु आ रही थी ।
रीना - अरे मा जी आपकी तबियत नही ठिक थी तो आप क्यू खाना बना रही थी
रज्जो - ओहो तु भई अम्मा ना बन मेरी ,,, जा फ्रेश हो ले और खाना लगा
रीना हस कर - क्या मा जी आप भी ना
इधर रीना उपर कमरे मे चली गयी और कमलनाथ वही हाल मे झोला खोलकर रज्जो को समान दिखाने लगा ।
कमलनाथ - जानू ये लो मैने खास तुम्हारे लिए ये पसंद किये है ।
रज्जो अपने हाथो मे वो लैस वाली ब्रा को फैला कर देखने लगी ।
कमलनाथ ने हाथ बढा कर मैकसी के उपर से रज्जो के चुचे मसलता हुआ - जान ये नरम नरम दूध जब इसमे कसेन्गे ना तो बहुत मस्त दिखेंन्गे ।
रज्जो इतरा कर - क्या फायदा इसको भी निकाल दोगे आप हिहिहिही
कमलनाथ सरक कर रज्जो के पास आता है और उस को पीछे से पकड कर उसके चुचे मलने को जाता है कि उसकी नजरे सीढि से नीचे आती रीना से टकरा जाती है और दोनो शरम से नजरे चुरा लेते है ।
रीना मुस्कुराती हुई किचन मे चली जाती है और कमलनाथ रज्जो ने थोडा दुर होकर बाते करने लगता है ।
सुबह की मस्ती के बाद से ही राहुल कई बार दुकान से घर के अन्दर चक्कर लगा चुका था और हर बार मौका देख कर वो अपनी मा चुतडो को मसलने और उसको अपने पंजो मे जरुर कस लेता था ।
इसी दौरान उसने नोटिस किया कि दोपहर के खाने के लिए जब उसके पापा अन्दर गये तो काफी देर से वापस आये और उसके बाद वो भी दो बार और घर गये ।
वो समझ गया कि आज शालिनी ने उसके बाप के भी अरमानो को जगा रखा है और वो बेकाबू होकर घर मे जा रहे है ।
तो ऐसे मे राहुल के दिमाग मे आया कि क्यू ना थोडा मम्मी पापा की मस्ती भी देखी जाए
फिर राहुल अपने पापा के अगली बार घर मे जाने का इन्तजार करने लगता है और करिब 3 बजे के आस पास जब दुकान पर कोई ग्राहक नही होते है तो जंगीलाल उठ कर घर मे चला जाता है ।
अपने पापा को अन्दर जाते देख कर ही राहुल का लंड उछल पडा और वो अपने लोवर मे लण्ड को सेट करते हुए दो चार मिंट इन्तजार किया और वो भी दबे पांव अन्दर गया ।
दुकान के गलियारे से होकर जैसे ही वो हाल के मुहाने पर पहूचा तो सामने का नजारा देखकर उसके सासे थम सी गयी ।
उसने अपने लोवर मे तने लण्ड को निचे की ओर दबाते हुए एक गहरी आह भरी और सुपाड़े को मसलते हुए उसकी कुलबुलाहट कम करने लगा ।
सामने का नजारा बहुत ही कामुक और शानदार था
घुटने के बल बैठी शालिनी के हाथ मे उसके पति जंगीलाल का मोटा मुसल आड़ो सहित था । जिसको बड़े चाव से मुह मे लेके चुबला रही थी ।
राहुल पहली बार अपनी मा के इस रूप को देख रहा था । वो इस बात से भलीभांति परिचित था कि उसकी मा बहुत गरम महिला है लेकिन आज से पहले उसकी मा उसको इस कदर उसको बेताब नही किया था ।
शालिनी पुरा का पुरा लंड गले तक उतार ले रही थी और वो देख कर राहुल अपने बाप की जगह खुद को रखना चाह रहा था ।
एक ओर उसे अपनी मा की कामुक अदाये उसके लण्ड मे कसावट भर रही थी और वही दुसरी ओर वो दुकान पर भी जाने के लिए बेचैन था कि कही कोई ग्राहक आवाज ना देदे ।
डर के साथ कामुक मस्ती भरे अनुभव थे राहुल के इसिलिए वो कभी हाल मे तो कभी दुकान की ओर देख रहा था ।
इसी दौरान शालिनी की नजर गलियारे के मुहाने पर अन्धेरे मे छिपे साये पर पडी और वो सुपाड़े को मुह मे लिये हुए ही अपनी नजरे गलियारे पर जमाए रखी कि राहुल ने वापस से अपनी गरदन फेक कर हाल मे झाका और उसकी नजरे उसकी मा से टकरा गयी ।
एक पल को दोनो मा बेटे ठठक कर रह गये और उसकी सासे अटक सी गयी ।
शालिनी क्रियाहीन होकर थम सी गयी और लण्ड उसके होठो के पास रुक गया।
अगले ही पल उसने नजरे उठा कर जन्गीलाल के बंद चेहरे को देखा और लण्ड को वाप्स मुह मे भरते हुए राहुल को आंखे ब्ड़ी करके इशारे मे डांट लगाई और दुकान मे जाने को कहा
अपनी मा से ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नही थी राहुल को और उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गयी ।
राहुल ने मुस्कुरा कर वापस से दुकान की ओर एक नजर देखा और फिर हाल मे देखा तो उसकी मा अब और भी कामुकता से उसके बाप के लण्ड को मुह मे लेके घोंट रही थी ।
जल्द ही उसने जन्गीलाल के नसो की फड़फड़ाहट मह्सूस की और उसने अपने दोनो हाथो ला प्रयोग करना शुरु कर दिया और अपनी जीभ को बाहर निकालते हुए सुपाड़े को उसपे रख दिया ।
कुछ ही देर मे राहुल को उसके बाप की सिसकिया भरी आह आई और लण्ड से मोटी रबड़ी जैसी पिचकारी उसके मा के मुह मे जाने लगी ।
राहुल समझ गया कि अब य्हा नही रुकना ठिक है और वो अपने लण्ड को सेट करता हुआ बाहर आ गया ।
लेकिन उसका लण्ड शान्त नही हो पा रहा था ।
थोडी ही देर बाद जन्गीलाल दुकान मे आ गया और फिर कुछ ग्राहक आने की वजह से राहुल भी दुकान मे फसा रह गया
शाम को करीब 6 बजे नास्ते के लिए शालिनी ने राहुल को आवाज दी तो जन्गिलाल ने उसे घर में जाने को बोला ।
राहुल का मन प्रफुल्लित हो गया और वो अपने ज्ज्बातो के साथ अपने लोवर मे बने त्म्बू को छिपाते हुए घर के अंदर जाने लगा
उधर किचन मे खड़ी शालिनी भी थोडी बेचैन हो रही थी कि उस घटना के बाद वो राहुल के सामने कैसे बात करेगी और उसे ये भी यकीन था कि राहुल उस बात का फायदा जरुर लेगा
शालिनी गरम गरम कचौरीया पलेट मे लगा रही थी और जैसे ही उसने राहुल की आहट किचन के दरवाजे पर पाई ।
वो खुद को सामान्य रखते बिना कोई खास प्रतिक्रिया के ऐसा जताया कि कुछ हुआ ही नही और नास्ते का प्लेट उसके हाथो मे देते हुए - जा ये अपने पापा को देके आ जल्दी
राहुल जो इस उम्मीद मे मुस्कुराते हुए किचन मे घुसा था कि वो अपनी मा से मस्ती भरे पल का लुप्त लेगा लेकिन यहा तो उसकी मा ने कुछ रियेक्ट ही नहीं किया ।
राहुल का उछलता दिल अपने मा के चेहरे के भाव देख कर पल भर मे ही शान्त हो गया और वो चुप चाप नाश्ते का प्लेट लेके दुकान मे जाने लगा ।
इधर शालिनी ने अपने बेटे के चेहरे की बदले हुए भाव देख कर मन में खुश खिलखिला रही थी और राहुल के लिए भी नाश्ते का प्लेट लगाने लगी ।
अब तक राहुल वापस किचन मे आ गया था और उसकी नजरे अब भी अपनी मा के चुतडो पर कसी उस पारदर्शी प्लाजो मे अटकी हुई थी जिसमे से उसकी पैंटी झाक रही थी ।
शालिनी ने नाश्ते का प्लेट लेके उसकी ओर घूमी तो राहुल की निगाहे सीधा उसकी मा के तने हुए चुचो पर गयी जो टीशर्ट फाड़ कर बाहर आना चाह रहे थे और तभी उसकी नजर अपनी मा के टीशर्ट के पडे एक हल्के सफेद छींटे जैसे दाग पर गयी और वो समझ गया कि ये उसके बाप के वीर्य के छींटे है जो झड़ते समय आ गये होगे ।
वो देखते ही राहुल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी और शालिनी ने जब उसकी नजर का पीछा किया और उस दाग पर उसका ध्यान गया तो वो भी समझ गयी औद उसकी हसी छुट गयी ।
शालिनी हस कर उसे नाश्ते का प्लेट देते हुए - अब क्या देख रहा है सारा पहले ही तू देख चुका है ,,ले नाश्ता कर
राहुल के कानो मे जैसे ही अपनी मा के खिलखिलाती आवाज आई उसके सारे बुझे हुए अरमान फिर से चहक उठे । लण्ड ने एक नयी अन्गडाई लेली और दिल की शान्त धडकनें फिर से अपनी धुन पर फुदकने लगी ।
राहुल ने एक नजर अपनी मा की आंखो मे देखा और कचौरी को अपनी दान्तो से नोचते हुए हसने लगा ।
राहुल ने आंखो ही आंखो मे अपनी मा को वो सिन याद दिलाया दिया जब वो उसके बाप का लण्ड घोट रही थी ।
शालिनी हस कर शर्माते हुए - अभी पिटूंगी तुझे शान्ति से नासता कर ,,,, हा नही तो
राहुल कचौरिया खाता हुआ अप्ने लण्ड को भी भीच रहा था
और उसकी नजरे अभी भी अपनी मा के पैंटी को निहार रही थी ।
शालिनी किचन साफ करते हुए बिना राहुल की ओर देखे बोली - तुझे शर्म नही आ रही थी जो छिप कर देख रहा था हमे उम्म्ं बोल
राहुल हस कर - रात मे आप देखने ही कहा देते हो हिहिहिही
शालिनी मुस्कुरा कर उसकी ओर आंखो बडी करके देखा - तो तु चाहता है कि अब तेरे पापा की शरारते भी कमरा खोल कर दिखाऊ उम्म्ंम
राहुल चहक कर उठा और पीछे से अपनी मा को पकडते हुए - हा प्लीज ना मम्मी ,, प्लीज प्लीज प्लीज मै कुछ नही बोलूंगा बस चुप चाप देखूँगा ।
राहुल जिस तरह से शालिनी को पेट के पास पकड़ा हुआ था पीछे से उस्का लण्ड गाड़ मे चुभ रहा था और उसे गुदगुदी सी लग रही थी - हिहिहिहिही अरे छोड पहले मुझे ... छोड अभी के अभी
राहुल अपनी मा से अलग हो गया
शालिनी हस्ते हुए - बड़ा आया देखने वाला , चुपचाप नासता कर और दुकान मे जा
राहुल अब तक अपना नासता खतम कर चुका था और वो प्लेट को सिंक मे रखते हुए अपने धुल रहा था ।
शालिनी के हसी भरे जवाब पर - तो आप नही दिखाओगी उम्म्ं
शालिनी मुस्कुरा कर इतराते हुए ना मे सर हिलाया ।
राहुल थोडा रुखे स्वर मे - पक्का मम्मी नही दिखाओगे
शालिनी - हा तो
राहुल चहका और लपक कर वापस से उसने अपनी मा के प्लाजो को निचे जांघो तक खीचा और उसके नरम नरम गोरे मखमाली गाड़ पर एक चुम्मा करके खिलखिला हुआ दुकान मे भाग गया ।
शालिनी हस कर अपनी प्लाजो उपर खिचती हुई - बहुत मजा आ रहा है ना इसे ,,आज रात मे इसको मजा दिखाती हू । मै भी इसको परेशान नही किया ना तो देखना हिहिहिही
राज की जुबानी
शिला बुआ की दो राउंड गाड़ और चुत मारने के बाद मै वही उनके कमरे मे ही सो गया था ।
करीब ढाई बजे कमरे के बाहर शोरगुल होने से मेरी आंखे खुली और मै बाहर आया तो देखा कि कम्मो बुआ अरुण को डांट लगा रही है ।
शिला - रहने दे कम्मो लड़का है अभी
कम्मो नाराज होते हुए - नही दीदी अब बस बहुत हो गया अब और मै इसकी शरारते नही झेल सकती हूँ ।
कम्मो - मैने दिल्ली मे बात कर ली है और इसको मै बोर्डिंग कालेज मे भेज रही हूँ ।
अरुण रुआसा वही हाल के एक कुर्सी पर बैठा हुआ था । मै शिला बुआ मे पास खड़ी मीना को इशारे मे पुछा कि बात क्या है । तो वो मुझे चुप रहने का इशारा करने लगी ।
मैने भी शान्त रहना ठिक समझा ।
अभी तक कम्मो बुआ और अरुण को मेरे आने की खबर नही थी ।
लेकिन जैसे ही कम्मो बुआ ने मीना को इशारा करते देखा तो उनका ध्यान मेरी ओर गया ।
मै उनको देख कर मुस्कुराया और उन्के पास आ कर उन्के पैर छूते हुए - नमस्ते बुआ
कम्मो बुआ ने जैसे ही मुझे देखा वो सब भुल कर हस्ते हुए मुझे पकड कर मेरे गाल छुते हुए - खुश रह बेटा, तु कब आया
फिर मै बुआ को सोनल की शादी को लेके सब बताया और इस दौरान वो बहुत खुश होकर बाते कर रही थी ।
तो अरुण ने जैसे मौका ही पा लिया और उठ कर मेरे पास आया और मुझ्से लिपट गया - देखो ना भैया सब मुझे बोर्डिंग मे भेज रहे , आप बोलो ना मम्मी को
मै हस कर उसको अलग करता हुआ - अब तु इतनी शरारती है तो कोई भी क्या करेगा उम्म्ंम बोल
मै कम्मो बुआ को देखता हुआ - वैसे बुआ इसने किया क्या था ?
मेरे सवाल से क्म्मो बुआ के साथ साथ अरुण , शिला बुआ और मीना के भी चेहरे के भाव बदल गये ।
कम्मो हड़बड़ाती हुई - क क कुछ नही बेटा जाने दे ।
कम्मो अरुण से - तु जा कमरे मे कपडे बदल खाना नही खाना तुझे
अरुण चुपचाप निकल गया और कम्मो बुआ मुझसे घर और शादी की बाते करने लगी ।
मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था कि आखिर क्या बात है जो अरुण के बारे सब छिपा रहे हैं ।
मै तय किया कि ये बात अरुण से ही पता चलेगी ।
लम्बी बात चित मे कब शाम हो गयी पता ही नही चला और फिर इसी दौरान दोनो फूफा भी घर आ गये ।
मै उनसे भी मिला और फिर शाम का नासता करने बाद अरुण के साथ छत पर टहलने के उपर चला गया ।
थोडी देर तक मै उपर से टाउन का नजारा देखता रहा और अरुण से थोडी बाते की उसके टाउन और कालेज की ।
मेरे जहन मे अरुण के बारे जानने की जिज्ञासा बढ़ी हुई थी तो मैने ऐसे ही बातो ही बातो मे उससे पुछ लिया
मै - वैसे तुने आज क्या शरारत की थी क्लास मे हम्म्म
अरुण चुप हो गया और जब मैने फिर से पुछा - अगर तु मुझे बतायेगा तो मै बुआ को मना लूंगा और तुझे बोर्डिंग नही जाना पड़ेगा
मेरी बात सुन कर अरुण के चेहरे के भावो मे हलचल सी हुई और वो हिचकता हुआ - वो भैया मै क्लास मे मोबाइल चला रहा था तो टीचर ने पकड लिया था ।
मैने थोडा विचार किया और सोचा कि अगर बात सिर्फ इतनी थी तो कम्मो बुआ को इसके उपर ऐसे नही भड़कना चाहिये था ,,,साफ था कि अरुण झूठ बोल रहा था ।
मै उसको बिना कोई सफाई का मौका देते हुए तुरंत बोला - और मोबाईल मे तु क्या देख रहा था उम्म्ंम
अरुण की नजरे नीची थी और वो वैसे ही दबी आवाज मे - वो मै गेम खेल रहा था भैया
मै अब उसपर दबाव बनाते हुए - झूठ बोल रहा है तु , देख सच सच बता मुझे और मैने देखा है तेरे कम्पुटर पर कैसी गेम खेल रहा है आजकल तु
मेरी बाते सुन कर अरुण की हालत खराब हो गयी और वो गिडगिडाता हुआ - प्लीज प्लीज भैया मम्मी को मत बोलना प्लीज
मै भौहे सिकोड़ते हुए - तो बता क्या देख रहा था तु
अरुण हिचकते हुए - वो मै और मेरा दोस्त वो वाली वीडियो देख रहे थे और मेरे दोस्त ने अचानक मे मस्ती मे मोबाईल की आवाज बढा दी और हम पकड़े गये ।
मै उसे फटकारता हुआ - तो यही सब देखने जाता है स्कूल ,
अरुण - सॉरी ना भैया , प्लीज मम्मी से बात करो ना आप
मै - हमम ठिक है लेकिन पहले तु अपना मोबाइल मुझे दे मै उसमे से वो सब वीडियो डिलीट कर दू फिर
अरुण उदास होकर - भैया वो मोबाइल मम्मी ने ले लिया है ।
मै - हमम ठिक है
वो तो मै ले लूंगा लेकिन तुझे अपनी आदत सुधारनी पड़ेगी ।
अरुण मुस्कुराता हुआ - हमम ठिक है भैया ।
फिर मै और वो निचे चले गये ।
अरुण से बात चीत के बाद मै नीचे चला आया ।
देखा किचन मे शिला बुआ और मीना रात के खाने की तैयारी कर रही थी ।
और कोई हाल मे दिखा ही नही । अरुण अपने कमरे मे जा चुका था ।
मै किचन मे चला गया
मै बुआ के पास खड़ा होकर मीना की चिकनी कमर और उभरी हुई गाड़ की गोलाई पर नजर मारते हुए - बुआ ये छोटी बुआ कहा गयी ।
शिला - अरे बेटा वो उपर अपने कमरे मे होगी ।
" ठीक है तो मै उपर ही जा रहा हू " , ये बोल कर मै जैसे किचन से बाहर निकलने को हुआ कि शिला बुआ ने मुझे टोका
शिला - अह बेटा तु परेशान ना हो , मै मीना को भेज कर बुला देती हू ।
मुझे थोडा अजीब लगा लेकिन मैने कुछ कहा नही वही डायनिंग चेयर पर बैठ गया ।
और मीना अपने चुतड मटकाते हुए उपर चली गयी ।
उसके जाते ही मै बुआ के पास वापस खड़ा होकर धीमी आवाज मे - बुआ आपको अरुण के आज की शरारत के बारे मे पता है ?
फिर मैने अरुण से हुई बात चीत के बारे मे बताया ।
शिला उखड़ कर - हा सब जान रही हू और अभी उसकी ये सब करने की उम्र नही है ।
मै - तो आपको उसे समझाना चाहिए ना बुआ , छोटी बुआ ना सही आप समझाओ ना ।
शिला बुआ - ओह्ह कैसी बाते कर रहा है , मै उसकी मौसी हू और मै कैसे इनसब पर बाते कर सकती हू ।
मै शरारत भरी मुस्कराहट के साथ बुआ के भारी चुतडो को मसलता हुआ - अच्छा और मेरे साथ सब कर सकती हो उम्म्ंम , जितना हक मेरा है उतना ही हक अरुण का भी है बुआ
शिला ने मुस्कुराहट भरी नजरो से बडे ताज्जुब होकर मुझे देखा और बोली - तो तु चाह रहा है कि मै उसके साथ .....।
मै शरारत भरी मुस्कुराहट से - वो आपकी मर्जी है बुआ लेकिन कम से कम उसकी आदते तो सुधारो । उसकी इच्छा को परखो ।
शिला मुस्कुरा कर - इतनी ही फ़िकर है तो तु खुद क्यू नही कर लेता ये सब
मै बुआ के कन्धे पकड़ कर - बुआ मै कल या परसो मे घर चला जाउन्गा लेकिन आप तो रोज उसके साथ हो ना ।
बुआ मेरे हाथ अपने कन्धे से हटाकर - मुझे सारा पता है वो क्या चाहता है ।
मै चौक कर - वो क्या ?
शिला ने शरारत भरी नजरो से मुस्कुरा कर मुझे देखा - हम्म्म्म तुझे सच मे उसकी फिकर है या बस तू यहा मुझसे बाते उगलवा रहा है उम्म्ं बोल
मै हस कर - वो मै हिहिहिही
मै अपनी बात रखता की तब कम्मो बुआ की आवाज आई ।
कम्मो - हा राज बेटा क्या बात है , तु मुझे बुला रहा था ।
मै पलट कर किचन के दरवाजे के पास देखा तो मेरी आंखे फटी रह गयी । क्योकि अभी तक तो मैने कम्मो बुआ को अच्छे से निहारा ही नही था ।
उफ्फ़ क्या कयामत लग रही थी बुआ एक satin silk की नाइटी मे , देखते ही आंखे उनके जबरदस्त ठोस और नुकीले जोबनो पर अटक गयी ।
कम्मो बुआ के चुचे उनकी हल्की ट्रांसपायरेन्ट नाइटी के निचे बिल्कुल नंगे थे और उसमे उनका जिस्म की सारे उतार चढ़ाव साफ साफ झलक रहे थे ।
" क्या हुआ बोल ना बेटा ", कम्मो अपने हाथ में अरुण का मोबाइल चेक करते हुए बोली ।
मै सकपका कर - वो बुआ मै ये कह रहा था कि आप अरुण को मोबाइल देदो ,,, मैने उसे समझाया है और वो बोला कि अब वो ऐसी हरकत नही करेगा ।
कम्मो - ओफो तो तु भी उसके झांसे मे आ गया ना , तुझे पता भी है वो स्कूल मे क्या हरकते करता है और कैसी कैसी चीजे देखता है ।
मै हिचक कर - अब हा उसने बताया मुझे सब
कम्मो बुआ थोडी झिझ्की और मोबाईल मेरे हाथ मे देते हुए - तो तुझे ये सब गलत नही लगता ,
मै हस कर - क्या हुआ बुआ अभी बड़ा हो रहा है और कालेज वाले लड़को की संगत मे ये सब हो जाता है । आप उसे वक़्त दो वो खुद ही समझ जायेगा कि क्या सही है क्या नही ।
ये बोलकर मै बुआ के गालो को छु कर मुस्कुरा दिया और हाल मे आ गया ।
कम्मो बुआ अभी भी चकित थी औए वो मेरे पीछे आते हुए - देख सुन बेटा,,मुझे नही लगता कि उसने सब तुझे बताया होगा । पक्का तेरे हिसाब से ये कोई बडी बात नही है । मुझे तो बडी चिंता है उसकी ।
मै मुस्कुरा कर कम्मो बुआ के कान मे - ओहो बुआ मैने भी दोस्तो के साथ स्कूल मे ऐसी वीडियो देखी है ।
कम्मो बुआ आंखे बडी करके मुझे देखने लगी जैसे उन्हे कितना बड़ा झटका लगा हो और थुक गटकते हुए - तो क्या तु भी अरुण की तरह मेरे साथ मेरा मतलब अपनी मा के साथ वो सब करना चाहता है ।
मै चौक कर - क्याआ न न नही तो मै क्यू ऐसा ,,,,तो क्या अरुण आपके साथ !!
कम्मो बुआ निराश होकर वही सोफे पर बैठ गयी और मै वही खडे खडे अरुण के मोबाईल मे उसके फ़ोल्डर चेक करने लगा ।
जिसमे मॉम सन के काफी सारी पोर्न वीडियो भरी हुई थी और लास्ट वीडियो जो प्ले हुई थी वो थी MY MOM IS A PORNSTAR .
मैने गैलरी चेक की तो वहा अरुण ने कम्मो बुआ के काफी सारे चोरी छिपे तस्वीरे निकाले हुए थे । एक दो ब्रा भी थी ।
मेरी आंखे फटी की फटी रह गयी और मैने मोबाइल बन्द करके जेब मे रखा और बुआ के पास बैठ कर उन्के जांघो पर हाथ रखते हुए - सॉरी बुआ इतना सब मुझे नही पता था और अरुण ये सब कबसे ।
कम्मो बुआ - यही कोई साल भर से बेटा
इतने मे शिला बुआ भी आकर कम्मो बुआ के बगल मे बैठ गयी ।
शिला बुआ - अब समझा तु कि बात कितनी बडी है ।
मै हुन्कारि भरके उनकी बातो से सहमती जताई ।
मै - अच्छा ठिक है आप लोग परेशान ना हो , मै बात करुंगा उससे
मेरी दोनो बुआ उम्मीद भरी नजरो से मुझे देखती है और कम्मो बुआ मेरे गालो को छू कर मुस्कराते हुए - सच कह रही थी दीदी ,, तु सच मे बहुत होनहार है ।
शिला - होनहार ही नही बहुत शैतान भी है और एक नम्बर का बदमाश भी है ।
मै खिलखिला कर - हिहिहिही वो क्यू
शिला - अच्छा वो क्यू ? जो बाते आज तक तेरे फुफा लोगो को पता नही चली तुने एक ही दिन मे हमसे सब उगलवा लिया ,,,
कम्मो बुआ मुझे अपने सीने से लगाते हुए - आखिर मेरा लाडला भतीजा है ,,क्यू बेटा
मै कम्मो बुआ के मखमली जिस्म की नरम नरम अह्सास से सिहरकर उनको पेट से पकडता हुआ - हा बुआ हिहिहीही
लेखक की जुबानी
CHAMANPURA
पुरा दिन शादी की तैयारियो मे व्यस्त होने बाद शाम को कही दोनो बहने फुर्सत मे हुई थी ।
चुकि आज मेहनत ज्यादा हुई थी तो रागिनी ने निशा को आराम करने को कहा और सोनल और वो खाना बनाने मे लग गये ।
खाली चुलबुली निशा आखिर कब तक इधर-उधर भटकती तो उसने सोचा क्यू ना अमन को ही परेशान किया जाये ।
तो उसने सोनल के मोबाइल मे उसका व्हाट्सअप खोला और अमन को मैसेज भेजना शुरु किया ।
मानो अमन भी सोनल के मैसेज की राह देख रहा था
सोनल ( निशा ) : hyy mere saiyan . Kaise ho
अमन : Bas apni suhaagraat ki taiyari kar raha hu
सोनल ( निशा) : hmmm etne betaab ho gaye the kya kal
अमन : aahh jaan pucho mat ... aaj bhi dikha do na
सोनल ( निशा ) : huh bilkul bhi nahi
अमन : kyu
सोनल ( निशा ) : mera dekh lete ho apna nahi dikhaate
अमन : kya dekhna hai meri jaaan ko
अमन : ye
अमन अपने लोवर मे तने हुए लंड की वीडियो बना के भेजता है जिसे देखकर निशा की चुत कुलबुलाने लगती है ।
अमन : kya hua
सोनल (निशा) : dhtt badmaash sidha wahi thodi na dekhna tha
अमन : ops sorry
सोनल (निशा) : koi baat nahi mujhe bura nahi lga
अमन : toh open karke bheju du
अमन की बात सुन कर निशा की धड़कने तेज हो गयी और वो मैसेज टाइप कर कर के cancel कर दे रही थी । उसको तलब सी हो रही थी कि वो अमन का लण्ड देखे ।
अमन : kya hua baby bolo na . Kaho to video call karu
सोनल(निशा) : nahi nahi nisha hai yahi par
अमन : Lo aise hi dekh lo chupke se
अमन फिर से अपने लंड का फुल तस्वीर भेजता है जिसमे उसके काले तने हुए लंड की नसे तक साफ साफ दिख रही थी और उसका आलू जैसा लाल सुपाडे की मोटाई को निशा ने अपने चुत के मुहाने पर मह्सूस कर लिया था ।
उसकी चुत बहने लगी थी ।
काफी टाईम तक कोई जवाब ना आने पर अमन : kya hua baby, tum bhi dikha do n ab thoda sa plzz
निशा क्या करे उसे समझ नही आ रहा था, उसे अमन से ऐसे बाते करने मे बहुत मजा आ रहा था और अमन मैसेज से बार बार उसे चुचे दिखाने के लिए मनाये जा रहा था ।
अमन की बेताबी और उसके मोटे लंड को देखकर निशा की चुचिया भी तन गयी थी । उसके निप्प्ल भी उसकी टीशर्ट को फाड कर बाहर आने को बेताब थे ।
निशा ने एक गहरी आह भरी और अपने जोबनो को मसलते हुए उसने अपने कड़े निप्प्ल वाले चुचे जो उसके टीशर्ट को भेद रहे थे उनकी तस्वीर निकाली और अमन को भेज दी । जिसमे उसका चेहरा नही दिख रहा था ।
चुकि सोनल और निशा की कदकाठी एकदम से एक जैसी ही थी तो अमन को जरा भी शक नही हुआ कि इस तस्वीर मे सोनल की जगह निशा है ।
तस्बीर देखते ही अमन : ummm baby t-shirt bhi uthaao na
अमन की डिमांड सुन कर निशा के चुचे और कड़े होने लगे और चुत रसने लगी ।
निशा अपने चुत की फलकों की उंगलियों से दबाकर एक गहरी सास ली और अपनी टीशर्ट उठा कर अपनी नंगी चुचियो की सेल्फी अमन को भेज दी ।
उधर अमन आंखे फाडे निशा के रसीले चुचो के काले घेरे देख कर सोनल के नाम की मूठ लगा रहा था ।
कुछ मिंट बाद ---
सोनल (निशा) : kya hua achcha nahi hai kya
अमन : ohh baby you are so sexy ummm kya boobs hai tumhaare . Mai to inhe roj chusunga ummm
सोनल (निशा) : chalo bye mujhe niche jana hai . Nisha bula rahi hai
अमन : Are nisha to tumhare sath thi na
अमन : Toh kya tumne uske samne hi
निशा को एक पल को लगा कि वो पकड़ी ना जाये लेकिन जल्द ही उसने अपनी स्थिति पर काबू पाया
सोनल (निशा) : dhtt nahi wo baahar gayi thi us time . Aap bhi na
सोनल (निशा ): chalo bye
अमन : ok baby
उसके बाद निशा लण्ड की तालाश मे अनुज को खोजती है और मौके से अनुज दुकान से वाप्स आ चुका था ।
फिर निशा उसे इशारे से छत पर जाने को कहती है ।
अनुज जो काफी दिनो से जिस्म का भूखा लण्ड की कसावट से परेशान था वो निशा के प्रपोजल को नजरअंदाज नहीं कर सकता था और दोनो के बीच एक गरमागर्म चुदाई का राउंड शुरु होता है ।
JAANIPUR
रात के खाने के बाद रज्जो और कमलनाथ अपने कमरे मे सोने की तैयारी कर रहे थे ।
कमलनाथ अपने कपडे निकाल कर जांघिया और बनियान मे बिस्तर पर आ चुका था कि दरवाजे पर खटखट होती है ।
कमलनाथ उठ कर तौलिये को अपनी कमर मे लपेटते हुए दरवाजा खोलता है तो सामने रीना हाथ मे सेकाई और मालिश के समान लेके खड़ी थी ।
कमलनाथ समझ जाता है और दरवाजे से हट कर कमरे मे आ जाता है । उसके पीछे रीना भी आ जाती है ।
रीना - वो मा जी आज शाम की मालिश नही ही पाई थी आपकी तो सोचा इस टाईम कर दू !
रज्जो - ओहो ये लड़की भी ना ,,अरे मै ठीक हू अब क्यू तु परेशान हो रही है ।
रीना - आप जिद ना करो मा जी ,, पापा जी समझाओ ना इनको
कमलनाथ - अब मै क्या बोलू ,,, करवा लो ना रमन की मा बहु कह रही है तो , जल्दी अच्छी हो जाओगी तो ठीक ही है ना
रज्जो तुनक कर - हा आपके लिए ठीक ही रहेगा ना हुह
अपनी सास की बात सुन कर रीना मुह फेर कर हस दी और कमलनाथ भी रीना को देख कर खुद को हसने से रोक नही पाया ।
कमलनाथ - अच्छा ठिक है मै थोडा बाहर हू
रीना कमलनाथ को टोकते हुर - पापा जी वो तौलिया !! वो सेकाई के बाद साफ करना होता है ना
कमलनाथ - ओह्ह फिर ऐसे मै बाहर कैसे जा पाऊन्गा
रज्जो खीझ कर - क्या जी आप भी यही बैठ जाओ ना चुप चाप वैसे भी ज्यादा टाईम नही लगेगा ।
"हा ठिक है पर ", कमलनाथ रीना की ओर देख कर बोला ।
रज्जो - बहु तुझे कोई दिक्कत तो नही है ना
रीना अब क्या ही बोल सकती थी तो उसने भी शर्म भरे लहजे मे मुस्कुराते हुए - नही मा जी ,
फिर कमलनाथ सोफे पर बैठ गया और रीना ने रज्जो की गाड़ से मैकसी उपर करते हुए इसके मखमली चुतडो की बर्फ से सेकाई शुरु कर दी ।
रीना शर्म से बिना कमलनाथ की ओर देखे बस अपने काम मे लगी थी और अच्छे से अपनी सास के चुतडो को सेका ।
इस दौरान कमलनाथ का लण्ड इस अजीबोगरीब स्थिति मे भी तन चुका था और अपनी बीवी की गदराई बीवी के चुतड देख कर उसके लण्ड की नसे फुल रही थी ।
ऐसे मे अचानक से रीना ने उसकी ओर देखा और बोली - पापा जी वो तौलिया ।
कमलनाथ थोडा झिझक के साथ खड़ा हुआ और जैसे ही उसने तौलिया खोल कर रीना को पकड़ाया उसे अपने जान्घिये मे तने हुए लण्ड का ख्याल आया और वो फौरन उसे ढकते हुए सोफे पे आ गया ।
रीना ने ये सब देखा और मुस्कुराती रही ।
कमलनाथ के साथ साथ अब रज्जो भी मुस्कुरा रही थी ।
रज्जो हस कर - बहु अब और कितने टाईम की मालिश बाकी है उम्म्ं
रीना मुस्कुरा कर - बस मा जी अब ठिक हो गया है अब आप ....।
इत्ना बोलकर रीना चुप हो गयी और मुस्कुराते लोशन को अपनी सास के चुतडो मे मलने लगी ।
कमलनाथ जो कि छिप छिपकर अपने खड़े लण्ड के सुपाड़े खुजाये जा रहा था और रज्जो को देख कर इशारा करता है कि आज रात वो चुदाई करवा ले ।
रज्जो तुनकते हुए - मुझसे नही बहु से पूछिये
रीना चौकी और आंखे बडी करके - क्या हुआ मा जी
रज्जो शरारत भरी मुस्कुराह्ट के साथ अपने पति को छेड़ते हुए - अब क्या बताऊ बहु , सांड जैसा पति मिला है मुझे जो एक भी पल चैन से बैठने नही देता ,,,आज थोडी ठिक हो रही हू तो फिर से इनकी डिमांड शुरु हो गयी ।
रज्जो की बात सुन कर कमलनाथ रीना से नजरे और लण्ड दोनो छिपाने लगा ।
वही रीना ने एक नजर अपने ससुर को देखा तो उसकी हसी छुट गयी ।
कमलनाथ समझ रहा था कि ऐसे मस्ती करने की रज्जो की पुरानी आदत है लेकिन अपनी बहु के सामने वो थोडा शर्मिंदा मह्सूस कर रहा था और उसका चेहरा उतर चुका था ।
रीना ने भी अपने ससुर का उतरा हुआ चेहरा देख कर थोडा चुप हो गयी ।
रीना उखड़े हुए स्वर मे - सॉरी पापा जी , मै समझ रही हू आपकी परेशानी । लेकिन आपको भी मा जी के बारे थोडा सोचना चाहिए
कमलनाथ चुप रहा और वैसे ही नजरे नीची करके बैठा रहा ।
रीना - देखिये आप प्लीज नाराज ना होयिये । आप लोग ही अब मेरे मम्मी पापा है और मै नही चाहती कि मेरे वजह से मेरे पापा को कुछ तकलिफ हो ।
रीना की भावुक बाते सुन के रज्जो को लगा कि शायद उसने बहु के सामने अपने पति को कुछ ज्यादा ही छेड़ दिया ।
इसिलिए वो भी उठके कमलनाथ के पास आ गयी ।
रज्जो - क्या जी नाराज हो गये मुझ्से उम्म्ंम
कमलनाथ - बात वो नही है रमन की मा । तुम्हारी बात सुनकर बहु मेरे बारे मे यही सोचेगी ना कि मै ...।
रीना अपने ससुर की बात सुनकर उसके पास गयी और उसके पैरो के पास बैठ के उसके नंगे घुटने को छुते हुए - नही नही पापा जी । मैने ऐसा कुछ कभी नही सोचा ।
रीना शर्म से नजरे नीची करके मुस्कुराते हुए - मै तो खुश हू की इस उम्र मे भी आप दोनो मे कितना प्यार है
रिना के स्पर्श और उसकी मीठी बाते सुनके कमलनाथ का लण्ड जान्घिये मे फिर से फुकार मारने लगा । जिसे रीना ने बड़े ही करीब से देखा ।
कमलनाथ प्यार से अपनी बहु के सर पर हाथ फेरते हुए - तु सच मे बहुत प्यारी है मेरी बेटी
रीना चहक के - तो आप मानते है कि मै आपकी ही बेटी हू और मुझे आपकी खुशी का ख्याल रखना चाहिए
कमलनाथ रज्जो को मुस्कुरा कर देखता है फिर रीना से - हा उसमे मानने जैसा क्या है !
रीना शर्म से नजरे निचे करके - तो आपने मुझे मौका क्यू नही दिया कि मै आपको खुश रख सकू ।
रीना की बाते सुन के कमलनाथ और रज्जो दोनो के कान खड़े हो गये और वो भौचके होकर एक दुसरे को देखने लगे ।
कमलनाथ थुक गटक कर अपना लण्ड फुलाते हुए - क्या मतलब मै समझा नही बहु ।
रीना मुस्कुरा कर कमलनाथ की आंखो मे देखते हुए - यही कि जब आपका इतना मन है तो एक बार मुझसे क्यू नही कहा । क्या इतना भी हक नही मेरा कि मै आपको खुश रख सकू ।
कमलनाथ हिचक कर - ये ये तु क्या कह रही है बहु ,, मै तुझसे ये कैसे ?
रज्जो भी चौक कर - हा बहु तू ये क्या बोल रही है ।
रीना - सही तो कह रही हू मा जी । आप मेरी मा जैसी हो और पापा जी मेरे पापा जैसे ।
अगर मा की तबीयत नही ठिक है तो क्या पापा ख्याल रखना उसकी बेटी का फर्ज नही है ।
कमलनाथ झिझकते हुए - वो ठीक है बेटी लेकिन तु जो कह रही है वो मै कैसे ! तु रमन की पत्नी है ।
रीना आंखे नचाकर - और आपकी बहु भी हू । तो क्या बहु का ये फर्ज नही कि वो अपने सास ससुर के तकलीफ़ को समझे उनकी मदद करे ।
रज्जो - तेरी बात ठीक है बेटा लेकिन तु मेरे लिए क्यू ?
रीना मुस्कुरा कर - आप ही के लिए तो कर सकती हू ना
इधर रीना और रज्जो की संस्कारो को लेके अपने अपने मतभेद चल रहे थे और वही कमलनाथ इस कल्पना मे उत्तेजीत हुआ जा रहा था कि रीना उससे खुद से चुदाई करने वाली है ।
इधर इन्की बाते चल रही थी दरवाजे खटखट हुई और सब एक साथ चुप हो गये ।
रज्जो थोडा शान्त होकर - ऐसा है बहु तू अपने कमरे मे जा , रमन इन्तेजार कर रहा होगा ।
रज्जो की बात सुन कर कमलनाथ का सारा नशा ही उतर गया और वो बहुत ही उम्मिद भरी नजरो से रज्जो को देखता है तो रज्जो हस कर - और आप परेशान ना होवो , हिहीहिही
रज्जो रीना से - और बहु तु जा हम फिर कभी इसपे बात करेंगे ।
रीना अपनी सास की बात सुनकर थोडा उदास थी क्योकि दिल ही दिल मे उसने भी कुछ अरमान रखे हुए थे तो आज टुटने जैसे हो रहे थे । तो बेबस होकर कभी अपने ससुर को तो कभी उसके खड़े लण्ड को निहार रही थी इस उम्मिद मे कि शायाद आगे उसे मौका दे ।
मैने मोबाईल के hide files खोल्कर कर कम्मो बुआ की तस्वीरे उसे दिखाते हुए - ये सब क्या है हम्म्म ? तो यही सब करना है तुझे
अरुण शर्म से नजरे झुका कर बैठ गया
मै - कहा से सीख रहा है ये सब तु बोल ।
अरुण चुप रहा ।
मै जान रहा था कि अरुण की इन हरकतो के बारे मे घर के मर्दो को कोई जानकारी नही थी इसिलिए मै उसे धमकाते हुए - तु सच बता रहा है कि मै फूफा जी ये सब दिखाऊ
मै भौहे सिकोड़ते हुए - तो तु अपनी गलती भी अब बुआ के उपर थोप रहा है ।
अरुण सिस्कते हुए - मै सच कह रहा हू भैया ।
मै - अच्छा ठिक है , बता क्या बात है और इसमे बुआ कैसे शामिल है ।
अरुण हिचक कर - पहले मै ये सब कुछ नहीं जानता था । बस आम लोगो की तरह ही सेक्स के बारे मे मुझे जानकारी थी । लेकिन एक रात मेरी पेसाब के कारन नीद खुल गयी तो मैने पेसाब करने और थोडी हवा खाने के लिए कमरे के बजाय बाहर चला गया क्योकि गर्मी का मौसम था ।
मै पीछे आँगन की ओर चला गया था और वहा मैने पेसाब की । उसी दौरान मुझे कुछ मा के खिलखिलाने की आवाज आई ।
वो आवाज सबसे उपर की टेरिस से आ रही थी ।
चुकि मेरी नीद खुल गयी थी और बाहर हवा भी अच्छी चल रही थी तो मैने सोचा कि क्यू ना मै भी उपर जाकर टहल लू ।
फिर मै अन्धेरे मे ही जीने से होकर उपर जाने लगा ।
जैसे ही मै जीने के आखिरी कुछ सीढियो पर पहुचा मुझे सामने का नजारा देख के यकीन ही नही हुआ कि मेरी मा भी ऐसा कुछ कर सकती है
मै - क्या क्या हो रहा था वहा
अरुण कापते हुए स्वर मे - वहा उपर मेरे पापा और बड़े पापा अपना पैंट खोले खडे थे और मेरी मा वही निचे बैठी हुई उनके पेनिस को पकड़ी हुई हिला रही थी और मेरे बड़े पापा मोबाइल मे फ्लैश जला कर मेरी नंगी मा की लण्ड चूसने की वीडियो बना रहे थे ।
मै चौक कर - क्या तुने ये सब सच मे देखा था
अरुन निराश होकर - हा भैया और उसी के बाद से मै मा को एक पोर्नस्टार समझने लगा । क्योकि इसके बाद मै दो तीन बाद मा को बडे पापा के केबिन मे देखा था , जहा वो लोग रोलप्ले करके सेक्स करते थे । कभी मा उनको जीजा बुलाती तो कभी उनको जेठजी बुलाती और कभी उनको पति बुलाती थी ।
मै - हम्म्म फिर
अरुण - फिर मै धीरे धीरे कब मा के लिए परेशान होने लगा पता ही नही चला और एक रात जब मै चुपके से छत पर मा और बड़े पापा की चुदाई देख रहा था तो मीना ने मुझे पकड लिया और
मै आंखे बडी करके - और क्या ?
अरुण नजरे नीची करके - उसने मेरी चोरी पकड़ी थी तो मुझे धमकी दी और जबरदस्ती मुझसे वो सब करवाया । फिर तबसे जब भी उसका मन होता है वो और मै सेक्स करते है ।
मै उसकी बाते सुन कर एक गहरी आह भरता हूआ - आह्ह ठिक है और कुछ बाकी है तो बता दे
अरुण - नही भैया ,,मम्मी की कसम बस यही बात है । अब देदो ना मोबाईल मेरा
मै - हा ठिक है लेकिन पहले इसमे से सारे वीडियो और बुआ की सारी गंदी तस्वीरे डिलीट कर और वादा कर अब से तू इन्हे नही देखेगा
अरुण उखड़ कर - हा ठिक है भैया
फिर मैने उसे मोबाइल दे दिया और वही लेट कर आगे सोचने लगा । कि अब बुआ से कैसे बात की जाये और इस मीना का कुछ कर पडेगा ।
इसी उधेड़बुन मे मुझे कब नीद आ गयी मुझे पता ही नही चला ।
लेखक की जुबानी
CHAMANPURA
रात के खाने के बाद जंगीलाल अपने कमरे मे जा चुका था और शालिनी किचन मे काम निपटा रही थी । लेकिन राहुल की बेचैनी कम नही हो पा रही थी ।
उसका लंड बैठने का नाम नही ले रहा था ।
ऐसे मे वो अपनी मा को फिर मनाने के लिए किचन मे घुस गया और अपना लण्ड उसकी गाड़ मे चुभोता हुआ उसकी कमर को पकड कर काँधे पर सर रखते हुए बडी ही उदासी से - मम्मीईई सुनो ना
शालिनी राहुल के स्पर्श से सिहर गयी और अगले ही जब उसने राहुल का नाटक देखा तो उसको हसी आई लेकिन वो खुद को सामान्य रखते हुए - हम्म्म्म बोल
राहुल अपनी मा के टीशर्ट मे हाथ बढा कर उसकी नरम नरम पेट पर अपने पंजे कसता हुआ - मम्मी प्लीज मान जाओ ना
शालिनी इतरा कर मुस्कुराते हुए - लेकिन तु आखिर क्यू देखना चाहता है वो सब उम्म्ं
अपनी मा की बात सुन्कर राहुल का लंड थोडा सा फडका जिसे शालिनी ने भी अपनी चुतडो पर मह्सूस किया ।
राहुल अटक कर - वो मुझे अच्छा लगता है
शालिनी उससे अलग होकर उसकी ओर घूम जाती है और इस बार सीधा राहुल के तने हुए लंड को हाथो मे भरते हुए बडी शरारती मुस्कान से - तुझे अच्छा लगता है या इसे
राहुल अपनी मा की हरकत से सिहर जाता है और शर्म से हस देता है ।
वही शालिनी इस आये हुए मौके को बिल्कुल भी नही गवाती और हाथो से मसल कर लोवर के उपर से ही राहुल के लण्ड का जायजा लेती है ।
राहुल सिस्क कर - उम्म्ंम मम्मीईई अह्ह्ह्ह
शालिनी उसके लण्ड को भीचते हुए - आज तुने दो बार मुझे नंगा किया उम्म्ं बोल मै भी कर दू तुझे हा
राहुल अपनी मा की आंखो ने मुस्कुरा कर - हम्म्म कर लो ना मम्मीई
शालिनी मुस्कुराते हुए - खुब समझ रही हू तेरी बदमाशिया ,,, तुझे क्या लगता है मुझे कुछ पता नही चलेगा
राहुल - प्लीज ना मम्मी अह्ह्ह
शालिनी राहुल को परेशान करते हुए उसका लण्ड लोवर के उपर से ही पकड के - अगर इसको शान्त किया तो कमरे मे नही देखने दूँगी ,,,
राहुल के लण्ड उसकी मा के शरारती हरकतो और शब्दों से फड़क रहा था और वो बस आन्खे बंद करके सिसिकिया लिये जा रहा था ।
शालिनी ने एक नजर किचन से बाहर अपने कमरे की देखा और वही बैठ गयी ।
फिर उसने राहुल का लोवर पकड कर निचे खीचा तो उसका मोटा 7 इंच का लण्ड हवा मे झूलने लगा
एक पल को शालिनी भी चौक गयी और फिर मुस्कुरा कर अपने बेटे के लण्ड को हाथो से छुने लगी ।
राहुल को यकीन नहीं हो पा रहा था कि ये सब सच मे हो रहा था
राहुल के लण्ड की नसे पल पल कसती जा रही थी और सुपाडा पुरा फुल चुका था ।
उसके दिल की धडकनें और तेज सासे शालिनी मह्सूस कर पा रही थी ।
राहुल के पुरे बदन का खुन उसके लण्ड मे भरने लगा था और उसका सुपाडा लाल होकर तपने लगा था ।
सुपाड़े की जलन से सिसकता हुआ राहुल ने अपनी मा के सर को पकड कर हल्का सा दबाव बनाते हुए अपने लण्ड को तानता हुआ आगे बढा ।
शालिनी ने शरारत भरी नजरो से मुस्कुराते हुए र जीभ निकाल लण्ड से थोडी ही दुर से उसको चाटने का इशारा किया तो राहुल की तडप पहले से ज्यादा बढ गयी । उसने अपने लण्ड को आगे ले जाकर खुद अपनी मा के होठो को लगा दिया ।
शालिनी उसके लण्ड को थामा और अपने पास करके उसके सुपाड़े पर अपनी ठंडी जीभ फिराई
राहुल उछल पड़ा- ओह्ह्ह मम्मीई चुसो ना उम्म्ंम आह्ह्ह
शालिनी मुस्कुराई और हौले से मुह खोलते हुए आधे से ज्यादा लण्ड गटक गयी ।
इसी के साथ राहुल ने भी एक ठंडी आअहह भरी और अपने मा के बालो मे हाथ फेरने लगा ।
शालिनी अब अपने बेटे के लण्ड को चूसना शुरू कर दिया था और वो उसके आडो को छेड़ते हुए मुह मे लण्ड को घोट रही थी ।
अपनी मा से अपनी मन की करा कर राहुल को गजब का सुख मिल रहा था और वो एडिया उचका कर, अपने गाड़ पिचका कर , अपने नथुने फुला कर आखिर तक जोर लगा कर अपने लण्ड की नसो पर दबाब बनाये हुए था ।
जल्द ही उसकी नसे उसके गरमा गरम वीर्य से भर गयी , सुपाड़े का छेद अब और दबाब झेल पाने के लिए तैयार नही था ।
ऐसे मे राहुल ने अपनी मा के सर को पकड कर दबाव ब्नाया और पुरा का पुरा लण्ड उसके गले मे उतार दिया ।
शालिनी अपनी आंखे फैलाये गुउउऊ गुउऊ करती रही लेकिन राहुल अपने लण्ड आखिरी झटके तक उसके मुह मे रोके रहा
और जब हाथ हटाया तो शालिनी ने जरा भी परेशान हुए वापस से अपने बटे के तने लण्ड को तेजी से मुठियाते हुए चुसने लगी ।
फिर उसने अच्छे से राहुल के लण्ड को साफ किया और खडे होकर सिंक मे अपना मुह धुलने लगी
राहुल जो बहुत खुश था वो अपना लोवर चढा कर अपनी मा को पीछे से अपनी बाहो मे भर लिया और उसके गाल चूमते हुए - थैंक यू मम्मी उम्म्ंम्माआह
शालिनी हस कर अपने गाल पोछते हुए - हो गया ना तेरा अब जा सो जा
राहुल ने थोडा रोना सा मुह बनाया तो शालिनी हस कर - मैने पहले ही बोला था एक ही चीज़ हो पायेगी हिहिही चल जा अब
इतना बोलकर शालिनी अपने कुल्हे मटकाती हुई अपने कमरे मे चली गयी
जाने को तो राहुल भी उसके पिछे पीछे कमरे तक गया लेकिन शालिनी ने फिर वही शरारती हसी के साथ दरवाजा बंद कर दिया और राहुल मुस्कुराता हुआ अपने कमरे मे आ गया ।
भले ही आज भी उसे अपने मम्मी पापा का शो नही देखने को मिला लेकिन आज उसकी मा ने उसे बहुत बडी खुसी दी थी और राहुल अब आगे बढने की कलपनाओ मे खो जाना चाहता था ।
इसिलिए वो अपने बिस्तर पर आकर सोचते सोचते नीद मे खो गया ।
सुबह की अंगड़ाई के साथ राहुल के लण्ड ने भी अपनी करवट बदली और दोनो एक साथ जाग गये ।
रात मे किचन की मस्ती याद करके राहुल ने अपने लण्ड का तना पकड़ा कर गाड़ पिचकाते हुए उसकी नसो भरपुर फैलाते हुए अपनी कमर को मरोडा ,, जिससे उसके लण्ड की सभी नसे अच्छे से खुल गयी ।
राहुल मन मे - अब बस बहुत हो गया ,, आज तो मै मम्मी को चोद कर रहूंगा
वो जल्दी से नहाने गया और नहा कर रोज की तरह अपनी मा को खोजते किचन मे घुस गया ।
बिना कोई आहट के दबे पाव राहुल ने हौले से पीछे से ही अपनी मा के कमर मे हाथ डाला और उससे चिपकते हुए उसके खुली गरदन को चुम लिया
शालिनी ने जैसे ही ये कामुक स्पर्श अपने जिस्म पर मह्सूस हुए वो पूरी तरह से कपकपा गयी और उसकी सासे तेज हो गयी ।
वही राहुल बिना कुछ बोले अपने मुसल को मा की गाड़ मे चुभोता हुआ उसके खुले कन्घे और गरदन के साथ कान के हिस्से मे भी चुम रहा था
शालिनी ने बडी मादकता भरे स्वर मे कहा- उम्म्ंम राहुल बेटा उफ्फ्फ छोड ना काम करना है बहुत सारा
राहुल ने कुनमुनाकर - उहू ना
शालिनी मुस्कुरा के अपने हाथ से अपने बेटे के गाल छुते हुए - बेटा मुझे सच मे बहुत काम है ,, आज मै भी देर से उठी हू ना
राहुल शरारत भरी मुस्कुराहत के साथ - क्यू
राहुल की खिसकी भरी मुस्कुराहट शालिनी के कानो में पडी तो वो हस दी ।
शालिनी - तेरे पापा की वजह से और क्यू ?
राहुल अपने हाथ अपनी मा के नरम पेट पर घुमात हुआ - क्यू उन्होने सोने नही दिया क्या रात भर
शालिनी शर्म से मुस्कुरा कर - हम्म्म
अपनी मा की बात सुनके राहुल का लण्ड और तन गया । जिसको शालिनी ने अच्छे से अपने जांघो के बीच मह्सूस किया ।
अपनी मा से ऐसे गर्म गर्म बाते करके राहुल का लण्ड बहुत तन गया था तो उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और
उसको अपनी मा की जांघो के बीच घुसेड़ दिया
जो उसकी चुत के फलको को रगड़ते हुए सामने की ओर बाहर निकल गया ।
शालिनी ने जैसे ही अपनी चुत की फलको को फैल्ते हुए मह्सूस किया तो चौककर निचे देखा तो उसके लोवर के सामने से उसकी चुत के मुहाने पर राहुल के सुपाडा की टिप दिख रही थी और उसका गर्म मोटा तना उसकी चुत के होठो पर लोवर के उपर से चिपकी हुई थी ।
शालिनी - आह्ह बेटा ये क्याआ कर रहा है उमम्म सीईई तेरे पाआ अह्ह्ह तेरे पापा आ जायेन्गे उन्मममं हटा ना इसे
राहुल पीछे से अपनी मा के जांघो मे अपना लण्ड घिसते हुए - वो दुकान छोड कर नही आयेन्गे मम्मी प्लीज करने दो ना उम्म्ंम
राहुल की इस हरकत से शालिनी चुत की खुजली बढ रही थी ये सोच कर कि जिस लण्ड को शालिनी अपने चुत मे लेने का ख्याल कर रही थी वही लण्ड उसके चुत के उपर घिस रहा था
जिससे उसकी चुत अपना पानी छोडने लगी थी ।
बिना पैंटी के उसका लोवर निचे से गीला होने लगा था और जब राहुल ने अपनी लंड के सतह पर चिपचिपाहट महसूस की तो वो समझ गया कि उसकी मा झड़ रही है इसिलिए उसने अपनी मा कूल्हो को थामते हुए कस कस लंड को उसकी जांघों मे पेलने लगा
शालिनी की चुत अब बुरी तरह से घिसी जा रही थी और वो राहुल के लंड को जांघो मे कस्ते हुए अकड़ने लगी थी इधर लण्ड पर जोर पडने से राहुल का सुपाडा भी फूल चुका था और अब वो कभी भी झड़ सकता था इसिलिए उसने फौरन लण्ड बाहर निकाला और उसे मुथियाते हुए अपनी मा चुतडो पर गिराने लगा
अपने बेटे के वीर्य की गरमी पाकर शालिनी भी अकड़ते हुए अपनी चुत निचोड रही थी ।
राहुल ने अच्छे से लंड को अपनी मा के चुतडो पर पटक पटक कर झाडा
शालिनी कामुकता भरी मुस्कुराहट से - गन्दा कही का , मुझे कपडे बदलने पड़ेगे अब ना
राहुल अपनी मा के कमर मे हाथ डाल कर उसके गाल चुमता हुआ - चलो मै बदल देता हू ना मम्मी
शालिनी तुन्ककर मुस्कुराते हुए - हुह रहने दे मै कर लूंगी ।
ये बोलकर शालिनी अपने कमरे मे चली गयी और राहुल मुस्कुरा कर अपना लण्ड अन्दर करके हाथ धोने लगा ।
JAANIPUR
देर रात तक रज्जो कमलनाथ की आपस मे रीना को लेके बाते चली और सोने से पहले रज्जो ने कमलनाथ से चुदाई कर ली ।
अगली सुबह रीना रोज की दिन चर्या के बाद किचन मे भिड़ी हुई थी और रज्जो निचे आई
रीना ने जैसे ही अपनी सास को देखा - बैठीये मा जी चाय हो गया है ।
रज्जो ने देखा कि रिना के व्यव्हार मे जर भी बदलाव नही है कल रात की बात को लेके , जबकि वो खुद रीना से झिझक मह्सूस कर रही थी ।
रीना की ओर सब सामान्य देख कर रज्जो ने भी अपने व्यव्हार मे कोई नयापन नही दिखाया और वो पहले के जैसे ही रही ।
फिर कुछ समय मे घर के दोनो मर्द भी निचे उतरने लगे ।
फिर रीना ने उन्हे भी चाय नास्ता दिया ।
रीना जैसे ही कमलनाथ के आगे झुकी तो एक बार फिर उसको अपनी बहु के 34D के मोटे चुचो की घाटिया देखने को मिली और उसका लण्ड अकड़ गया ।
वही रीना ने जब अपने ससुर को अपनी चुचिय झांकते देखा वो मुस्कुरा दी और इतराते हुए किचन मे चली गयी ।
नास्ते के बाद रमन दुकान के लिए निकल गया
नास्ते के बाद कमलनाथ वही हाल मे बैठा रज्जो से बाते करने लगा । रज्जो जो रात की चुदाई के बाद से काफी खिली खिली लग रही थी ।
रज्जो - तो ठिक है कल सुबह ही मै चमनपुरा के लिए निकल जाती हू ,
रीना भी वही पास खड़ी सब सुन रही थी ।
कमलनाथ - ठिक है फिर दो दिन बाद मै और बहू सारा समान एक गाड़ी बुक करके चले आयेंगे
रज्जो रीना से - तुझे कोई दिक्कत नही है ना बहु , वैसे रागिनी ने तो हम दोनो को साथ आने को कहा था । लेकिन अगर हम दोनो गये तो इन दोनो के खाने पीने का ख्याल कौन करेगा
रिना मुस्कुरा के - आप बेफिकर होकर जाईए मा जी , मै पापा जी का ख्याल रखुन्गी
रज्जो रीना की बात सुन कर उसे रात की घटना याद आई और वो हस कर - और हा बस खाने पीने का ही ध्यान रखना है ये नही कि ...तु समझ रही है ना
रज्जो की बात पर रीना शर्मा कर नजरे चराते हुए - जी मा जी समझ गयी और प्लीज आप वो बात को भुला दीजिये ना
रीना कमलनाथ को देखकर - वो तो मै पापा जी की तकलिफ के वजह से कहा था ।
रज्जो कमलनाथ का मजा लेते हुए - अरे तु इनकी बातो मे ना आना ये एक नम्बर के चालू आदमी है ।
कमलनाथ हस कर - क्या रमन की मा तुम भी ,,,बस भी करो
और फिर कमलनाथ अपने पजामे मे सर उठाते लण्ड का टोपा खुजाने लगता है जिसको रीना देख लेती है ।
फिर रज्जो उठती है और कमलनाथ को अपने साथ पैकिंग मे मदद के बहाने मे चुदाई करवाने ले कर घुस जाती है ।
राज को जुबानी
अरुण की बाते सुनने के बाद मै समझ गया था कि बात सच मे बहुत बडी थी । इसको सुलझाने के लिए मुझे समय के साथ साथ कुछ जरुरी बाते भी जाननी जरुरी थी जो अभी तक एक परछाई के रूप मे मेरे जहन मे घूम रही थी ।
इसी उधेड़बुन मे मै काफी रात तक जगा रहा और जब सुबह मेरी आंखे खुली थी 9 बज रहे थे ।
मै टीशर्ट और अंडरवियर मे लेटा हुआ था और लण्ड पुरे उफान पर तन कर तम्बू बनाये हुए था । तभी मेरे कानो मे गानो की गुनगुनाहट आई और मैने गरदन उठा कर देखा तो सामने मीना थी जो कमरे मे झाडू पोछा करने आई थी ।
मै लपक कर उठा और बिस्तर पर खड़ा होकर अपना पैंट खोजने लगा ।
तभी मीना मुस्कुराती हुई - क्या खोज रहे है बाबू
मै सकपका कर उसकी ओर देखा जो मेरी नंगी जान्घे निहार रही थी ।
मै - वो वो मेरा ... मिल गया
मैने लपक कर अपना पैन्ट सोफे से उठाया और जल्दी जल्दी पहनने लगा , हड़बड़ी मे मैने ध्यान ही नही दिया कि मैने गलत गलत हिस्से मे पैर डाल दिये और पूरी जीन्स उल्टी हो गयी ।
जिसे देख कर मीना जोर की ठहाक लेके हस दी
मै भी शर्म से लाल होता हुआ वापस से पैंट उतारने लगा ।
वही मीना झाडू लगाते हुए तिरछी नजरो से मुझे देखती रही और जब मै पैंट पहना तो फ्रेश होने के लिए बाथरूम मे चला गया ।
मै जब बाथरूम से बाहर आया तो देखा कि मीना अभी भी कमरे मे ही अरुण के कपडो मे तह लगाते हुए बेड पर झुकी थी और मै अब मीना के इरादो से भरपुर वाकिफ हो चुका था ।
इसिलिए मै भी मस्ती उसके पास से गुजरते हुए अपनी कलाई को उसके झुके हुए कूल्हो पर घिसते हुए कमरे से बाहर निकल गया और वो चौक कर मुझे देखती रही ।
कुछ देर बाद मै नास्ते के बाद बुआ के पास बैठा रहा और उनसे थोडी बाते की ।
मै - बुआ आप भी मेरे साथ ही चलो ना
बुआ - अरे बेटा ऐसे खाली हाथ नही जा सकती , अभी तो सारी खरीदारी करनी है और कम्मो को तो स्कूल से फुर्सत नहीं है ।
मै उखड़ के - तो क्या आप भी शादी के दिन ही आओगे क्या ?
शिला बुआ मुस्कुरा कर - अरे नही रे , बस एक दो बाद मै आ जाऊंगी
मै - पक्का
शिला - हा पक्का
फिर मै बुआ को कस के हग कर लिया ।
और हौले से बुआ के कुल्हे को सहला दिया जिसको कीचन मे खड़ी मीना ने बड़े ही गौर से देखा और मुस्कुराते अपने काम मे लग गयी ।
मै भी मुस्कुराने के सिवा कुछ कर नही सका और फिर बुआ के साथ उनके कमरे मे चला गया ।
लेखक की जुबानी
रात की बेचैनी से सब ही परेशान थे तो अमन कैसे पीछे रह जाता ।
निशा की शरारत के बाद से उसकी तलब और इच्छाये बढ रही थी ।
नास्ते के दौरान रागिनी के सामने ही अमन ने सोनल को 3 4 बार फोन किया तो सोनल ने झिझक कर इशारे से निशा को कहा कि वो बात कर ले ।
निशा खिलखिलाती हुई फोन उठा ली और किचन से बाहर निकल कर फोन उठा कर बाते करते हुए उपर चली गयी
फोन पर
अमन - क्या यार फोन क्यू नही उठा रही हो
निशा खिलखिला कर - उफ्फ्फ मुझे नही पता था जीजू कि आप मुझसे बाते करने के लिए इतने बेताब हो ।
निशा की आवाज सुन कर अमन का प्यार का पैमाना 100 से 10 पर आ गिरा ।
अमन उखड़े हुए स्वर मे - ओह्ह निशा तुम हो ,, सोनल कहा है
निशा - हा हा आपको तो आपकी सोनल जी ही प्यारि लगेगि ना , इतने हसिन हसिन तस्वीरे जो शेयर कर रही है आजकल हिहिहिही
अमन ने जैसे ही निशा की बाते सुनी उसके कान खड़े हो गये कि कही निशा ने कल रात के उसके और सोनल के चैट्स तो नही ना पढ लिये ।
अमन हड़बड़ा कर - क क्या बात कर रही हो तुम निशा उम्म्ं
निशा तुनक कर अमन को छेड़ती हुई - वही जो आपने सुना । हुउह
निशा - अगर वही सब दिखाकर आपसे बात करने को मिल सकता है तो एक बार मुझसे कह कर देखते
अमन हस्ता हुआ - क्या निशा तुम भी ना , तुमको शर्म नही आती हमारी प्राइवेट बाते पढते हुए । गंदी कही की
निशा तुनक कर - हुह गंदी गंदी बाते खुद करो और मुझे गन्दी बना रहे हो , मै तो चल रही हू बडी मम्मी को बताउंगी
अमन की तो अब फट गयी थी कि कहा फस गया - अरे नही नही ये क्या बोल रही हो तुम
निशा - देखिये जीजू अगर आप चाहते है ये सब बाते बडी मम्मी को ना पता चले तो मेरी एक शर्त है ।
अमन जल्दीबाजी भरे लहजे मे - हा हा बोलो बाबा सब मन्जुर है बोलो तुम
निशा - ऐसे नही पहले अपनी होने वाली बीवी की कसम खाओ हिहिहिही
अमन - हे भगवान !!!
निशा खिलखिला कर - भगवान नही भाग्यवान की हाहाहहाहा
अमन हस्ता हुआ - अच्छा बाबा मै अपनी जान सोनल की कसम खा के कह रहा हू तुम्हारी सारी शर्ते मानूँगा । खुश , अब बोलो
निशा मुस्कुरा कर - हम्म्म्म तो पहली शर्त ये है कि आप अपनी सुहागरात का लाइव वीडियो मुझे दिखाओगे हिहिहिही और दुसरी
अमन की आंखे फैल गयी और मन ही मन सोचने लगा कि ये कितनी शैतान है - क्या निशा तुम ये .... अच्छा और दुसरी शर्त क्या है ।
निशा - हिहिहिही और दुसरी शर्त ये है कि कल आप मुझे मूवी दिखाने लिवा चलो सरोजा कॉमप्लेक्स मे
अमन खुश होके - ठिक है सोनल को भी लिवा लेना
निशा तुनककर - नही सिर्फ मै और आप । ये जीजा साली वाला ही शो रहेगा हिहिहिही
अमन हस कर -ठीक है बाबा और कुछ
निशा सोचते हुए और अचानक से - अरे हा मेन बात तो भुल ही गयी
अमन - क्या !
निशा - आप रोज मुझसे सोनल से छिप कर बाते करेंगे हिहिहिही और उसे बिल्कुल भी नही बतायेंगे आपको सोनल की कसम
अमन - क्या यार इसमे भी कसम
निशा - बस बस हो गया ।मै जा रही हू बाय जीजू हिहिहिही
फिर चहकते हुए निशा ने फोन काट दिया और अमन बेचारा बुरी तरह से फस चुका था ।
इस हवस के जंगल मे वो खुद को उस कबुतर के जैसा मह्सुस के रहा था जो दाने की लालच मे अनजाने मे शिकारी के जाल मे फस गया हो ।
अमन पहले से ही समझ रहा था कि निशा एक चंचल लडकी है लेकिन वो उसकी शरारत के इस चेहरे से वाकिफ नही था ।
उसके जहन मे वो पल आ रहा थे कि जब वो अपनी सुहागरात को वीडियो काल के जरिये निशा को दिखायेगा तो निशा उसके लण्ड को निहारेगी और उसके चुदाई करने के तरीके को भी देखेगी । लेकिन अगले ही उसे याद आता है कि निशा तो पहले ही उसका लण्ड सोनल के मोबाइल मे देख चुकी है ।
ये सब बाते सोच कर अमन का लण्ड बैथने का नाम नही ले रहा था । मस्ती मे ही सही लेकिन निशा की शरारत ने अमन को बेईमान बना दिया था और वो निशा से कल की मुलाकात के लिए बेताब हुआ जा रहा था ।
राहुल अब काफी हद तक अपनी मा से खुल चुका था लेकिन शब्दो की मर्यादा दोनो मा बेटे ने अभी तक नही लान्घी थी ।
वासना मे घिरे हुए ही सही लेकिन दोनो मे किसी ने भी खुले शब्दो ये इच्छा जाहिर नही होने दीया कि वो दोनो एक दूसरे से क्या चाहते है ।
मौके का फायदा उठाते हुए राहुल ने दो बार अपनी मा से अपना मुसल चुसवा चुका था लेकिन उसकी बेचैनी घटने का नाम नही ले रही थी ।
वही शालिनी के उपर बेटे के साथ साथ बाप की हवस का बोझ बढ़ रहा था ।
जन्गीलाल ने भी दो तीन बार मौका देखकर शालिनी के अंगो के साथ खेला और लण्ड शान्त किया ।
हालत ये थी कि शालिनी की चुत बहुत ही पानी बहा रही थी लेकिन उसकी गर्मी नही मिट पाई थी वही आज राहुल भी पूरी जिद थी कि उसे मम्मी पापा वाला खेल देखना है ।
वही शालिनी भी चाह रही थी कि राहुल के साथ ये खेल जल्द ही खतम हो जाये क्योकि सोनल की शादी को ज्यादा दिन बाकी भी नही थे और कब उसकी जेठानी के यहा से उसका बुलावा आ जाये कोई पता नही था ।
अभी रात के 9 बज रहे थे ।
घर मे सभी लोग खाना पीना कर चुके थे ।
शालिनी किचन मे बर्तन खंगाल रही थी कि पीछे से राहुल ने एक बार फिर अपने तने हुए लण्ड से शालिनी के गाड़ की दरारो मे दस्तक थी और शालिनी गनगना गयी ।
राहुल अपना लण्ड अपनी मा के गाड़ पर घुमाता हुआ घिस रहा था - मम्मी प्लीज ना सिर्फ आज के लिए
शालिनी कसमसाहत भरी आवाज मे - तुझे क्यू देखना है वो सब
राहुल - बस ऐसे ही मन कर रहा है
शालिनी चिंतित भाव मे - कही तेरे पापा ने देख लिया तो
राहुल - पक्का मै छिप कर रहूंगा , वो नही देख पायेंगे
शालिनी अपने हाथ साफ करके राहुल के लण्ड को पकड कर उससे अलग होते हुए - अच्छा ठिक है लेकिन बस कुछ मिण्ट के लिए ही देखना और फिर वापस कमरे मे ठिक है
राहुल चहक कर - ठिक है मम्मी उम्म्म्माह
शालिनी मुस्कुरा कर - धत्त शैतान कही का अब कमरे मे जा मै बाहर की सारी लाईट बुझाकर ही कमरे मे जाऊंगी
राहुल चहकता हुआ कमरे मे चला गया और शालिनी ने बाहर की सारी लाईट बुझा कर कमरे को हल्का भिड़काते हुए कमरे मे चली गयी ।
अन्दर कमरे मे जंगीलाल ने जैसे ही शालिनी की आहट पाई उसे इस बात की फ़िकर ही नही थी कि कमरे का दरवाजा किस हालत मे है ।
शालिनी जिस तरह से अपने जिस्म को कामुक अदाओ से बल्खाते हुए अपने पति की ओर बढ रही थी वैसे वैसे ही जन्गीलाल के जान्घिये मे लण्ड ने बडी तेजी से तम्बू बनाना शुरु कर दिया था ।
जंगीलाल - ओह्ह्ह जान तुम हर बार मुझे पागल कर देती हो , इतनी नशीली क्यू हो तुम
ये बोलकर जंगीलाल ने लपक कर शालिनी को का हाथ खीच कर उसे अपनी गोद मे बिठा लिया ।
अपने पति के नंगे जिस्मो का स्पर्श पाकर शालिनी सिहर गयी और उसकी धडकनें तो बस राहुल के बारे मे सोच कर ही तेजी से धडक रही थी जिससे उसके चूचे जंगीलाल के सीने पर दबाव बना रहे थे और जन्गीलल भी इसको महसूस कर पा रहा था ।
शालिनी तोड़ा इतराते हुए खुद को छुड़ाने की कोसिस करती हुई - अह्ह्ह छोडिए ना जी ,, आपको तो बस वही सब करना है
जंगीलाल अपनी बिबी के गालो को चूमता हुआ - उम्म्ंम जान तुझे देखने के बाद कुछ सूझता ही नही
शालिनी ने नजरे उठा कर अपने पति को देखा और आंखे दिखाते हुए पुछा- समझ क्या रखा है आपने मुझे उम्म्ं
जंगीलाल शरारत भरी मुस्कुराह्ट के साथ उसके कूल्हो को मसलते हुए बोला - अपनी रंडी
अपने पति के मुह से ऐसे शब्द सुन कर शलिनी का दिल ध्क्क करके रह गया और वो ये सोच रही थी कि कही राहुल ने सुन तो नही लिया ना ,,,
वही कमरे के बाहर खड़ा राहुल ने जब अपने बाप के मुह से ऐसे शब्द सुने तो उसका लण्ड फड़फडा गया ।
राहुल मन मे - अह्ह्ह पापा सही कह रहे हो मम्मी किसी रन्डी से कम नही है उह्ह्ह कुछ करो ना खोलो ना मम्मी की चुचिया उम्म्ं
शालिनी अपने पति की ओर पीठ करती हुई एक नजर दरवाजे पर देखती हुई - धत्त क्या जी आप ऐसे उलटा सीधा बोल रहे हो
जन्गीलाल ने मौका पाया और पीछे से शालिनी के चुचे टीशर्ट के उपर से मसलते हुए - सही तो कह रहा हू मेरी रन्डी है तू
शालिनी अपने चुचो पर पति के हथेली का स्पर्श पाते ही मचल उठी और सिस्कने लगी उसकी आंखे बंद हो गयी थी और वही राहुल के चेहरे के भाव बदलने लगे थे ।
उसे लगने लगा था कि खेल शुरु हो गया है और वो अपना लण्ड भी बाहर निकाल चुका था ।
कमरे मे जंगीलाल ने शालिनी की चुचिया मिजते हुए अपने हाथ उसके टीशर्ट मे घुसा दिये और नंगी नंगी चुचियो को टीशर्ट के अन्दर से मसलने लगा ।
शालिनी अपने पति के सीने पर लोटने लगी थी और उसकी एडिया ऐठने लगी थी ।
शालिनी का जोश आज राहुल की उपस्थिति मे बढ गया था वो पूरी तरह अकड़ रही थी इस कलपना मे कि राहुल के मन मे उसके लिये क्या चल रहा होगा ।
क्या वो अपना लण्ड मसल रहा होगा ये सब देख कर ।
वही जंगीलाल अपनी बिवी की गर्मी से और भी जोश मे आ गया और उसने शलिनि की सरकती जान्घो को पकडते हुए अपनी ओर खिच लिया और सीधा चुत के उपर हाथ रख कर उसकी बुर टटोलने लगा ।
राहुल की हालत भी खराब हो रही थी , वो चाह रहा था कि जल्द से जल्द उसकी मा नंगी हो जाये
लेकिन जंगीलाल के विचार तो कुछ और ही थे क्योकि वो भी सुबह से तडप रहा था और उसका लण्ड भी चुदाई के लिए बेचैन हुआ जा रहा था ।
वही शालिनी की बेताबी देख कर उसे लगा की पहले उसे शालिनी की चुदाई करनी चहिये
बस फिर क्या था
अगले ही पल मे वो और शालिनी खड़े थे ।
फिर जंगीलाल ने उसे बिस्तर पर झुका दिया और उसका लोवर पीछे खिच कर निचे कर दिया ।
इतना सब होने के बाद भी राहुल को शालीनी के गोरे जिस्म की एक भी झलक नही मिल पाई थी ।
शालिनी उसकी ओर मुह करके ही बिस्तर पर झुकी हुई थी और जन्गीलाल पीछे खड़ा अपना जांघिया निकाले लण्ड को उसको गाड की दिवारो मे ठोकरे लगा रहा था ।
राहुल को बस सामने झुकी अपनी मा के टीशर्ट से झाकती चुचियो की झलक मिल पा रही थी वही उसका बाप निचे बैठ कर अपना मुह उसकी मा के गाड मे दे चुका था ।
जंगीलाल के मोटी गीली जीभ को अपनी बुर और गाड़ के छेदो पर नाचता पाकर शालिनी के चेहरे के भाव बदल गये थे ।
जंगीलाल बडी हवस से उसके चुत के फाको को चाट कर खड़ा हुआ और अपना मुसल उसके मुहाने पर सेट करते हुए
अगले ही पल शालिनी की आंखे फैल गयी और उसके चेहरे पे आये भावो को पढ कर राहुल समझ गया कि उसके बाप ने लण्ड घुसा दिया है ।
शालिनी दर्द भरी सिसकिया लेते हुए दरवाजे पर देखती है तो हल्की परछाई मे उसे राहुल के सलेटी लोवर की झलक मिलाती है और उसे फिर से नशा होने लगता है ।
उसकी चुत भलभला कर झड़ना शुरु कर देती है ।
जंगीलाल पीछे से उसको चोद रहा था और उसने भी अपने लण्ड पर गरम गर्म पानी मह्सूस करते ही बोला - ओह्ह जान तुम तो बहुत गरम हो आज ,,,इतना मन था क्या पेलवाने का उम्म्ं बोलो
शालिनी को राहुल के सामने अपने पति से ऐसे बाते करने मे झिझक कर हो रही थी इसिलिए वो चुप रही और आंखे भिचे हुए सिसकिया लेती रही ।
जंगीलाल अपनी बीवी से जवाब ना पाकर अपने चोदने की गति बढा दिया और कमरे मे थप थप थप थप थप की आवाजे होने लगी ।
शालिनी की भी चिखे तेज हो गयी और राहुल भी तेजी से अपना लण्ड हिला रहा था ।
जन्गीलाल उसके कूल्हो को पकडे हुए कस कस के चोदते हुए - बोलो ना जानू चुप क्यू हो
शालिनी - अह्ह्ह क्या बोलू उम्मममं सीईई उफ्फ्फ
जन्गीलाल - यही की मेरी जान को चुदवाने का आज बहुत मन था क्य्स अह्ह्ह
शालिनी फिर से चुप हो गयी तो जंगीलाल थोडा खीझा और कस कस कर शालिनी की चुत मे 8 10 बार लण्ड गहराई मे घुसेडा जिस्से शालिनी की हालात खराब हो गयी और जन्गीलाल गुस्से मे - बोल ना मादरचोद ,ये मेरी रन्डी बोल ना उम्म्ं आज चुदने का बहुत मन था क्या उम्म्ं
शालिनी दर्द से अक्दी हुई दरवाजे पर नजरे गडाये थी कि दरारो से एक तेज पिचकरी आधे कमरे म आ कर गिरी और शालिनी समझ गयी कि अब राहुल चला जायेगा ।
कुछ पल तक जंगीलाल कस कस के शालिनी के चुत मे बक बक करते हुए पेलता रहा और गालिया देता रहा लेकिन शालिनी ने चू तक नही बोला
फिर आखिर मे जब उसे मह्सूस हुआ कि उसका पति अब झड़ जायेगा तो - मुझे मुह मे चाहिये
जंगीलाल - पहले बोल जो मैने पुछा है
शालिनी झटके से उठकर दरवाजे की ओर पीठ करके खड़ी हो जाती है और उसके नंगी फैली हुई गाड़ को राहुल देख कर पागल हो जाता है और उसका लण्ड फिर से सिर उठाने लगता है
शालिनी जो कि इस शक मे थी कि राहुल चला गया होगा वो बडी अदा से अपने पति के लण्ड को मसल्ते हुए धीमी आवाज मे - बेटीचोद !! शान्ति से चोद नही सकता
ये बोलकर शालिनी वही बैठ गयी और अपने पति का लण्ड मुह मे भर लिया
शलिनि की बाते सुन कर जंगीलाल की हालत खराब हो गयी और थोडी ही चुसाई मे वो अपना सारा माल अपने बीवी के मुह मे गिराने लगता है ।
शालिनी मुह मे लण्ड को भरे हुए उसे निचोड रही थी कि दरवाजे पर हल्की सी चूँ की आवाज हुई और शालिनी फौरन अलर्ट हुई । वो समझ गयी कि राहुल अभी गया नही है ।
राहुल वही कमरे मे झाकता हुआ अपना लण्ड मसल रहा था ।
शालिनी ने अपने गालो को पिचकाते हुए लण्ड को सुरक रही थी और उसकी निगाहे अभी भी दरवाजे पर टिकी रही ।
फिर अच्छी तरह से लण्ड को निचोड़ कर वो खड़ी हूई और वापस से दरवाजे की पीठ कर लिया जिससे राहुल को फिर उसकी मा की नंगी गाड़ दिखने लगी ।
शालिनी अपनी उंगलिया चाटती हुई खड़ी हुई और मुस्कुराते- मै जरा साफ करके आती हू
ये बोलते हुए वो उसी हालत मे अपने नंगे चुतडो को हिलाती हुई दरवाजे की ओर बढ़ी कि जन्गिलाल अचरज से - अरे लोवर तो चढा लो , ऐसे ही बाहर जाओगी क्या ?
शालिनी आंख मारते हुए - हा , आपकी रंडी हू ना हिहिही
बस इतना कहने की देरी थी कि जन्गिलाल खुश हो गया और अपना अंडरवियर चढाते बिस्तर की ओर चला गया
और वही राहुल सतर्क होकर दरवाजे से हटकर दिवाल से लग गया
अगले ही पल दरवाजा खुला और शालिनी अपनी लोवर को उपर चढाते हुए बाहर निकली
राहुल उसके बगल मे खड़ा गहरी सासे ले रहा था ।
शालिनी ने फुसफुसाकर से उसको किचन की ओर चलने को कहा
राहुल खुश हुआ और लेकिन जब वो किचन मे पहुचा और बत्ती चालू हुई तो उसका चेहरा उतर गया क्योकि उसकी निगाहे अपनी मा के चुतडो पर ही टिकी हुई थी ।
शालिनी उसका उतरा हुआ चेहरा देख कर मुस्कुराई और उसको छेड़ती हुई बोली - सब ले लिया ना अब क्यू मुह लटका है तेरा
राहुल ने आंखे उठा कर अपनी मा का हस्ता हुआ चेहरा देखा तो उसकी भुनभुनाहट भरि हसी छुट गयी और वो जिद दिखाते हुए - आप इसको उपर क्यू कर ली हो ,, हा नही तो
शालिनी - क्या उपर कर ली हू
राहुल - ये लोवर
शालिनी आंखे नचा कर मुस्कुराती हुई - हा तो क्या वैसे ही खोल कर घुमू क्या
राहुल उखड़े हुए स्वर मे - लेकिन आप तो ऐसे ही खोल कर बाहर आ रही थी ना
शालिनी इतरा कर सिंक की ओर घूम गयी और अपने मुह हाथ धुलने लगी - मेरी मर्जी मै जैसे चाहू रहू , तुने ही कहा था कि मै जो चाहू कर सकती हू
राहुल - हा लेकिन
शालिनी - हा तो अगर मै जो चाहू कर सकती हू तो तु भी जो चाहे नही कर सकता क्या ?
राहुल अपनी मा की बाते सुन कर समझ गया कि ये एक खुला ऑफ़र था उसके लिए और एक ही पल मे उसका लण्ड फौलादी हो गया ।
अगले ही पल वो झट से घुटने के बल हुआ और अपनी मा के कूल्हो से लोवर खीच कर नंगी करता हुआ सीधा अपना मुह अपनी मे गाड़ के दरारो मे घुसा दिया
सब कुछ इतना तेजी से हुआ कि हड़बड़ाहट मे सिंक की टोटी तेज हो गयी और पानी के छीटे शालिनी के हाथो से टकरा कर उसके टीशर्ट पर पड़ने लगे और
राहुल की लपलपाती जीभ अपने गाड़ के सुराख पर रेंगता हुआ पाकर शालिनी अपने चुतडो को सख्त करते हुए आगे की ओर झुकने लगी ।
जिससे पानी उसके चुचो पर को भिगोने लगा
जल्दीबाजी मे किसी तरह शालिनी ने टोटी बन्द की लेकिन तब तक देर हो गयी थी ।
उसकी चुचिया भीग चुकी थी और निप्प्ल उसके जिस्म से चिपकी हुई टीशर्ट से बाहर झाक रही थी ।
शालिनी कसमसाई और अगले ही पल उसने राहुल के सर को झटक कर अलग किया
दोनो की सासे तेजी से बढ रही थी ।
राहुल उठकर खड़ा हुआ और हस रहा था उसके नथुने लाल हो चुके थे जैसे वो पुरा जोर देके अपनी मा के सख्त दरारो मे बिना आक्सीजन के फसा हुआ हो ।
शालिनी तेजी से उसकी ओर घूमी और अपना लोवर उपर खिचती हुई और मुस्कुराते हुए- शैतान नही का , तो यही सब तु चाह रहा था
शालिनी के घुमने पर राहुल की निगाहे उसके तने चुचो पर गयी जो भिगे हुए टीशर्ट मे चिपके हुए थे
राहुल की ललचाती निगाहे शालिनी अच्छे से देख रही थी और उसके चेहरे के कामुक भावो को भी वो पढ सकती थी ।
शालिनी - हो गया ना तेरा अब जा सो जा
राहुल थुक गटक कर मुस्कुरा रहा था और कभी अपनी मा तो कभी उसके नुकीले चुचे देख रहा था । बहुत सारी भावनाये एक साथ उसके जहन मे आ रही थी लेकिन वो क्या बोले उसे समझ नही आ रहा था और शालिनी को टेनसन था कि कही उसका पति आवाज ने दे दे उसको ।
क्योकि राहुल के साथ उसको कल क्या करना था उसने उसकी तैयारी कर ली थी इसिलिए आज की रात भर वो उसे और तड़पने के लिए छोड रही थी
शालिनी मुस्कुराती हुई घूमी और किचन से बाहर जाती हुई - चल अब बत्ती बुझा और सोने जा
राहुल ने कुछ नही किया बस मुस्कुरा वही खड़ा देखता रहा तो परेशान होकर शालिनी ने बत्ती बुझाइ और बोली - तुझे यही रहना है यही रह मै दरवाजा बन्द करके सोने जा रही हू
शालिनी अपने दरवाजे तक गयी लेकिन जब उसे राहुल के आने की आहट नही मिली तो वो किचन की ओर घूमी थी कि राहुल से टकरा गयी ।
राहुल दबे पाव उसके पीछे आकर खड़ा हो गया था
शालिनी ने कुछ बोलना चाहा उससे पहले राहुल ने अपने होठ उसके होठो से चिपका दिया और उसको अपनी बाहो मे भर लिया ।
शालिनी चौकी की राहुल दरवाजे पर ही ये क्या हरकत कर रहा है कही उस्का पति ना आ जाये
शालिनी कसमसाती हुई अपने होठ छुड़ा कर धीमी आवाज मे - क्या कर रहा है छोड मुझे ,तेरे पापा कमरे मे जाग रहे है अभी
राहुल ने बिना कुछ बोले अपनी मा के गरदन को चुमते हुए अपने हाथ पीछे ले जाकर लोवर की लास्टीक को फैलाते हुए नंगी गाड़ को मसलने ल्गा
शालिनी अपने बेटे का दोहरा प्रहार झेल ना सकी और उसकी सासे भारी होने लगी और उसके आवाज मे खुमारि सी बढने लगी । मदहोस लहजे मे धीरे से वो राहुल के पीठ पर अपने हाथ घुमाते हुए बोली - उम्म्ंम बेटा रुक जा ना , यहा नही तेरा पापा अह्ह्ह उम्म्ंम
राहुल ने बिना कुछ बोले अपनी ऊँगली को अपनी मा के गाड़ की दरारो मे रगड़ता हुआ उसकी गाड़ के सुराख को भेदने लगा जिससे शालिनी चिहुक कर अपने गाड़ सख्त करते हुए उंगलियो को छेद से दुर करने लगी तो राहुल ने अपनी उंगली को जोर देते हुए आगे बढाया और अपनी मा के कान के पास एक चुंबन किया
चुंबन का अह्सास पाते ही शालिनी ने अपना पुरा शारिर ढीला छोड दिया वही राहुल की ऊँगली कच्च से उसके गाड़ मे चली गयी
सीईई अह्ह्ह बेटा धीरे , सुखा है वो उम्म्ंं , शालिनी ने अपने बेटे की हरकत पर प्रतिक्रिया दी और फिर उसके कलाई को पकड कर अपने गाड़ से उसके हाथो की दुरी बनाते हुए - बस कर बेटा,, यहा नही
राहुल ने एक भी नही सुना और इस बार सीधा हाथ अपनी मा के भिगे हुए चुचो पर रखा और उन्हे मस्लते हुए अपने होठ वापस से अपनी मा से जोड लिये
शालिनी अब तक बहुत गर्म हो चुकी थी और राहुल के तपते होठो की गर्मी ने उसे भी परेशान कर दीया और वप उसके होठो को खिचते हुए चुबलाने लगी
राहुल भिगे हुए टीशर्ट के उपर से एक हाथ अपनी मा की चुचिया मसल रहा था और दुसरे हाथ से अब भी उसने अपनी मा के कूल्हो को जकड़ रखा था ।
फिर अगले ही पल बिना कोई हैरानी ने राहुल ने अपनी मम्मी से दुरी बनाई और कुल्हे को नचाते हुए उसको पीछे से जकड़ लिया ।
शालिनी को समझ नही आ रहा थ कि राहुल क्या करने की सोच रहा था उसके मन मे अपने पति को लेके डर बना हुआ था लेकिन वो राहुल की कामुक हरकतो से गर्म हुई जा रही थी ।
अभी शालिनी अपनी अवस्था जान्च रही थी कि इतने मे
राहुल ने फिर से उसकी चुचिया पीछे से दबोच ली और उन्हे मसलने लगा । उस्का तना हुआ लण्ड गाड़ पर सास ले रहा था ।
शालिनी की कसमसाहट बढ रही थी और वो अपने जिस्म को राहुल के उपर ही ढीला छोड चुकी थी । कि तभी राहुल ने उसका टीशर्ट खिच कर उपर कर दिया और उसकी नंगी चुचिया उसके हाथो मे आ गयी ।
अपनी मा के रसिले पपीते जैसी भारी चुचिया राहुल के हाथो मे नही समा रही थी
उसने अपनी दोनो हथेली एक साथ अपने मा के तने हुए निप्प्लो पर घुमाई की शालिनी उपर से निचे तक मचल उठी और राहुल वापस से उसकी दोनो चुचिया पकड के मस्लते हुए वापस से शालिनी को अपनी ओर घुमाया और झुक कर उसके निप्प्ल को चुबलाता हुआ दुसरे हाथ से अपना लण्ड भी बाहर निकाल दिया
शालिनी ने जैसे ही अपनी जान्घो पर राहुल के सख्त लण्ड के स्पर्श को मह्सूस किया तो वो टटोलते हुए उसके तने को जकड़ ली औए भीचने लगी ।
अपनी मा के हाथो का स्पर्श पाते ही राहुल तन कर खड़ा हो गया और उसकी आंखे बंद हो गयी , भले ही उसके हाथो मे 36DD की दोनो भारि भारी खर्बुजे जैसी चुचिया लटक रही थी लेकिन उसकी मा के एक स्पर्श ने राहुल को मूरत कर दिया था ।
शालिनी ने जैसे ही ये मह्सुस किया वो खिल उठी और जैसे उसे इस खेल मे अब अपनी चाल चलाने का मौका मिल गया हो
उसने अपनी कामुकता पर जोर देते हुए अपने नुकीले नाखुनो से राहुल के लण्ड की निचली नसो को खरोचा तो राहुल पूरी तरह कापने लगा
उसके पैर जवाब देने लगे थे वो हिल रहा था जैसे किसी अपाहिज की बैशाखी छिन ली गयी हो
राहुल ने हाथ आगे बढा कर अपने मा के कन्धे थाम लिये और शालिनी उसके लण्ड को आगे की ओर भीचने लगी
अब सारा खेल शालिनी के काबू मे आ चुका था
राहुल तेज सासे लेता हुआ अपने एड़ियो के बल खड़ा हुआ जा रहा था और लण्ड की नसे और फुल रही थी
अपनी कपकपाती आवाज मे राहुल बस इतना ही बोल पाया - आह्ह मम्मी चुसो ना उम्म्ंम
शालिनी समझ गयी कि आज के लिए इसको इतना ही चाहिये और अगले ही पल शालिनी वही बैठ गयी और अपना मुह खोलते ही राहुल का आधा लण्ड मुह मे भर लिया ।
राहुल के जैसे ही अपने मा के ठंडे नाजुक होठो का स्पर्श मिला वो निचे से उपर तक सिहर उठा और लड़खड़ा कर उसने अपनी मा के सर को थाम लिया
राहुल की बेताबी ज्यादा देर तक रुक ना पाई और कुछ ही देर मे वो अपनी मा के मुह झड़ने लगा
उसने अपना पुरा लण्ड मा के गले मे उतारते हुए एड़ियो के बल खड़ा हो गया और आखिरी झटके तक लण्ड को घुसाये रखा
शालिनी ने भी अच्छे से अपने बेटे के लण्ड को निचोड़ा और फिर वो खडी हुई ।
राहुल वही दिवाल से लग कर सासे भरने लगा और शालिनी ने मुस्कुरा कर उसके गालो को चूमते हुए - अब सो जायेगा ना
राहुल हाफते हुए स्वर मे - हा थैंक यू मम्मी
शालिनी - जा अब सो जा
ये बोलकर शालिनी ने अपना टीशर्ट निचे किया और कमरे मे चली गयी ।
दरवाजे बंद होने की आहट से झप्किया लेता जन्गीलाल चौक गया और उसकी निगाहे शालिनी के भिगे हुए टीशर्ट पर गयी और उसने मुस्कुरा कर इशारे से कारण पूछा तो शालिनी ने बिना कोई जवाब दिये अपनी भीगी हुई टीशर्ट निकाल दी
अपनी बीवी के नंगी चुचिया देख कर जंगीलाल सारे सवाल भुल गया और दोनो एक बार भी चुदाई के खेल मे शामिल हो गये ।
रात ढल चुकी थी और सोनल के घर सारे लोग अपने अपने कमरे मे जा चुके थे ।
लेकिन सोनल के कमरे मे काफी समय से हीही ठिठी भरी फुसफुसाहट जारी थी ।
निशा की शैतानी अब अमन के लिए भारी पड़ गयी थी ।
जिस तरीके से निशा ने अमन को लपेटा था वो बेबस था । उस बेचारे को ये भी नही पता था कि उसको परेशान करने के इस खेल उसकी प्रेमिका सोनल भी शामिल थी ।
दोनो बहने आपस की मिली भगत से अमन को परेशान किये जा रही थी ।
और आज सुबह की सारी बातें जब निशा ने सोनल को बताई तो भी मजे ले ले खुब ठहाके लगा रही थी ।
निशा खिलखिलाती हुई - देखा मैने कहा था ये सारे लड़के एक नम्बर के ठरकी होते है और तेरा अमन हिहिहिही
सोनल - हा यार उसको जबसे तुने अपने दूध दिखाये है वो तो वीडियो काल पर वही देखने की जिद करता रहता है और कितना मोटा है उसका लण्ड यार
निशा हसती हुई - तु कहे तो कल नाप लू क्या हिहिहिही
सोनल निशा को आंखे दिखाती और अगले ही पल हस कर - तु दुर रहियो उससे , कोरा माल है उसकी सील तो मै भी तोडून्गी हिहिहीही
निशा - क्या यार थोडा तो मजे ले लेने दे
सोनल - करना लेकिन उपर उपर से , बस तु उसकी आग भड़का ताकी सुहागरात पर वो मुझे ऐसा पेले ऐसा पेले कीहह
सोनल अपनी चुत खुज्लाती हुई - उह्ह्ह्ह माअह्ह्ह्ह देख ना सोच के ही गीली हो गयी
निशा मुस्कुरा कर उसकी आंखो मे देख कर - रुक ना मै पोछ दे रही हू
ये बोलकर निशा सरककर सोनल के जान्घो के बीच गयी और उसके जांघो से चिपकी शार्टस को फैलाया तो उसे सोनल की चुत का एक हिस्सा दिख्ने लगा
फिर क्या अगले ही भर निशा की चटोरी जीभ सोनल की बुर पर चलने लगी और सोनल की जान्घे अकड़नी शुरु हो गयी ।
राज की जुबानी
बुआ की ठुकाई के बाद मै शाम को अपने कमरे मे चला और अगले दिन की सुबह ही मुझे निकलना था ।
बुआ के घर मे अरुण को लेके जो सम्स्या थी वो सबर और संयम के साथ साथ वक़्त लेके फुरसत से ही ठिक हो सकती थी ।
लेकिन इस बीच के वक़्त मे मेरी जिम्मेदारी बन गयी थी कि अरुण को थोडा सतर्क करु और उसको पढाई पर फोकस करवा कर सेक्स से थोडी दुरी बनाऊ ।
लेकिन इनसब मे बीच की कड़ी थी तो मीना ।
उसको मुझे घर जाने से पहले कुछ सबक सिखाने थे ताकि वो अपनी हवस के लिए अरुण को परेशान ना करे ।
इसिलिए 2 वजे के बाद जब अरुण घर आया तो खाना पीना करने के बाद मैने उससे बंद कमरे मे कुछ बात की ।
तो मुझे पता चला कि बड़े फूफा लगभग रोज रात मे उपर छोटी बुआ के कमरे मे जाते है और इस मीना ने अरुण को अपने हवस मे फासने के लिए अरुण की कमजोरी का फायदा उठाती है
वो उससे मा बेटे का रोल प्ले करके अपनी प्यास बुझाती है और कभी अगर अरुण का मन ना तो उसको डराती धमकाती है जिससे अरुण को मजबूरि मे उसके साथ सेक्स करना पड़ता है ।
अरुण ने मुझे बताया कि डर की वजह से वो रात मे जल्दी खा कर भी कमरा बंद करके सो जाता है और वो हर रोज इसी ताख मे रहती है कि जब भी अरुण अपनी मा की चुदाई देखने के लिए छत पर जाये तो वो उसके साथ अपनी मनमानी ले ।
अरुण की सारी बाते समझने के बाद मै समझ गया था कि मुझे आगे क्या करना है !
रात ढलने का मुझे बेसबरी से इन्तजार था और खाना खाने के बाद मै और अरुण अपने कमरे मे चले गये ।
योजना के अनुसार करीब 10:30 बजे तक मैने अरुण का एक ड्रेस पहन लिया ।
जो कि एक लाल टीशर्ट और सफेद शार्ट था ।
रंग जानबुझ कर मैने चटक चुना ताकि अन्धेरे मे मीना मुझे देखे तो उसको यही भरम हो कि मै अरुण हू ।
फिर समय देख के मै दबे पाव दरवाजा खोला और कमरे से बाहर आकर देखा कि मीना हाल मे ही एक चौकी पर करवट लेके सोयी हुई है ।
मैने जानबुझ कर हल्की फुल्की आहट करते हुए जीने की ओर बढा और मेरा शक सही निकला , जैसे ही मैने दो चार सीढिया चढ़ी थी कि मिना के चूडियो की खनक मुझे मिली ।
मै समझ गया कि उसे भनक लग गयी है ।
मै बिना कोई आहट के आहिस्ता आहिस्ता उपर चला गया और बुआ के कमरे मे खिड़की के पर्दो के बीच से नजर मारी तो मेरी हालत खराब हो गयी थी ।
कमरे मे कम्मो बुआ पूरी नंगी होकर घुटनो के बल बैठी हुई थी और मेरे दोनो फूफा अपना मोटा मोटा मुसल निकाल कर कम्मो बुआ के चेहरे पर रगड़ रहे थे
बुआ के चेहरा बुरी तरह से लाल हो रहा था और उनकी भुखी आंखे उनके रन्डीपने को
साफ साफ दिखा रही थी ।
वो दो मोटे मोटे लण्ड के तने को थामे हुए उन्के सुपाड़े को अपने होठो पर रगड़ रही थी और उनकी बजबजाती थुक से दोनो सुपाडे चमक रहे कि तभी बुआ ने बड़े फुफा का लण्ड मुह मे भर लिया औए गुउऊ गुउऊ करते हुए गले तक ले गयी।
मै पूरी तरह हिल गया । शार्ट मे मेरा लण्ड पुरा तन चुका था और मै उसको पकड कर भीच रहा था ।
मेरी सासे गहरा रही थी ।
कि तभी मेरे हाथ पर एक नरम हाथ का स्पर्श मिला और एक मादक सी सिसकी भरी आवाज ने मेरे कानो को छूआ- क्यू अरुन बाबू आज बहुत दिन बाद आये बाहर उम्म्ंम्ं मम्मी की याद आ रही थी क्या अह्ह्ह क्या मस्त तना हुआ लग रहा है लण्ड
मीना की मादक आवाज और जिस तरह से शार्ट के उपर से वो मेरे लण्ड पर नरम हाथो की हथेली को सख्ती से घीस रही थी मै पूरी तरह गनगना गया ।
मीना ने अब तक मेरा चेहरा नही देखा था वो अभी भी मेरे पीछे ही खड़ी थी और मेरा मुसल पकडते हुए बडबड़ा रही थी - आह्ह अरुण बाबू कभी इस मा की याद नही आती क्या अह्ह्ह उम्म्ंम मुझे क्यू नही मान लेते हो अपनी मा ,,, आपकी छिनाल मा कभी अपना बुर नही खोलेगी आपके सामने ।
मीना अपने चुचे मेरे पीठ पर घिसती हुई - आह्ह देखो कैसे भुखी रंडी के जैसे गले मे लण्ड घोट रही है उम्म्ंम्ं
मीना की आवाज सुन के मैने अंदर नजर डाली तो नजारा बदल चुका था अब क्म्मो बुआ के मुह मे छोटे फुफा का लण्ड था और बडे फूफा क्म्मो बुआ के कन्धे -गले के पास अपना लण्ड घिस रहे थे ।
इधर मेरा ध्यान बाट कर मीना ने लपक कर मेरे शॉर्ट्स मे हाथ घुसा दिया और मेरे तने हुए फौलादी लण्ड को हथेली मे भर लिया
मेरे लण्ड की तपिस और उसकी मोटाई से मीना के बदन मे आग लग गयी और मुझे पीछे से पकड़ कर दोनो हाथ आगे करके मेरे लण्ड बाहर निकालकर उसको मसलने लगी ।
मै भी उसके अनोखे अन्दाज से मदहोश होने लगा
मीना- उफ्फ्फ आज क्या हुआ है आपको अरुण बाबू ,, आपका लण्ड तो अह्ह्ह माआअह्ह
मै समझ गया कि अब समय आ गया है कि मीना को चौकाया जाये और उसी समय मै मीना की ओर घुमगया
कमरे से आती हल्की रोशनी मे मीना ने मेरे चेहरे को देखा और चौक के अलग हो गयी ।
अपने हाथो मे लिभड़े हुए मेरे प्री-कम को जल्दी जल्दी अपने कूल्हो पर पोछते हुए - र राज बाबू आप ,
मैने लपक के उसकी कलाई पकड़ी और जीने की ओर ले जाता हुआ - हा मै
मीना मेरे ह्थेली मे अपनी कलाई छूडाती हुई - अह्ह्ह राज बाबू छोडिए मुझे प्लीज
मै उसको अपनी ओर खिच के उसके कुल्हे मसलता हुआ - ओह्ह हो कहा जाना है ,, जिसके लिए आई हो वो लेलो ना ,
"लो इसको पकड़ो ना आज बहुत फुला हुआ है" , मैने जबरदस्ती करते हुए मीना के हाथ को अपने तने हुए लण्ड पर रखा
मीना अपने पंजे को मुठी बना कर लण्ड से अपने हाथ को दुर कर रही थी- आह्ह प्लीज राज बाबू मुझे जाने दो ना
मै - नही नही , मुझे भी आज अपनी मा चोदनी है आह्ह मम्मी क्या मस्त चुचे है तेरे उम्म्ंम
ये बोलके ब्लाउज के उपर से मैने उसके चुचे मसल दिये
मेरे कड़े हाथो का स्पर्श पाते ही मीना मचल उठी
मैने उसका पल्लू गिराया और पीछे से उसके पपीते जैसे चुचे को ब्लाउज के उपर से ही दबोच लिया
मेरे दोनो सख्त हथेलीयो की रगड़ से उसके निप्प्ल मे तन गये और मीना बुरी तरह से मेरे बाहो मे हाफने लगी ।
मगर अब भी वो मेरी बाहो से आजाद होना चाह रही थी तो - मै देख मीना , अरुण ने मुझे सब बता दिया है और अगर मै चाहू तो तेरि करतुत बडी बुआ को बता कर तुझे इस घर से निकलवा सकता हू
मीना मेरी बाते सुन के शान्त हो गयी और रुआस होती हुई - नही बाबू जी प्लीज ऐसा कुछ मत करना , बडी मुश्किल से मुझे यहा काम मिला है मै आपके हाथ जोड़ती हू ।
मिना गिडगिडाती हुई - मै अब आगे से कभी से अरुण बाबू को तन्ग नही करूंगी
मै - और इस घर मे जो चल रहा है वो किसी और को तो नही ना कहती है तु
मीना सकपका कर - न न नही किसी को नही ,, यहा मुझे बहुत प्यार और इज्जत मिली है बस पति बाहर होने के कारण मैने अरुण बाबू को , प्लीज माफ कर दो
मीना की बाते सुन कर मैने उसपर से पकड ढीली कर दी फिर उसको सामने लाके - तुम्हारी सारी बाते मै मान ले रहा हू लेकिन
मीना अपने आसू पोछते हुए - लेकिन क्या राज बाबू
मै मुस्कुरा कर - क्या तुम मेरे साथ नही कर सकती हो एक बार ,, प्लीज
मेरी गुजारिश भरी बाते सुन के मीना खिल उठी और शर्मा कर मुस्कुराते हुए- धत्त नही , मै आपसे कैसे ?
उसकी शर्माहट ने मुझे मेरा जवाब दे दिया था और मैने उसको वापस से खीच कर अपनी बाहो मे भरा और उसके गाड़ दबोचते हुए - प्लीज ना मीना मान जाओ ना ,
मीना नजरे निचे किये हुए मेरे बाहो मे सिम्टी हुई थी और मुस्कुरा रही थी
मैने उसकी ठूढी उठाई और हौले से अपने होठ उसके होठो से जोड दिये
एक ठंडी सी सिहरन हमारे जिस्म मे फैल गयी और उसने मुझे अपनी बाहो मे कस लिया
उसके नरम रसिले होठो की मिठास मेरे मुह मे घुलने लगी थी और धीरे धीरे उसकी सासे भारी हो रही थी ।
उसने मेरे पीठ पर अपने पंजे चलाने शुरु कर दिये थे और उनकी खसोट से वो मुझे अपनी ओर खीची जा रही थी ।
मैने भी उसकी नंगी कमर मे हाथ फिराया और उसके नरम नरम कूल्हो को मसलना शुरु कर दिया । जिस्से वो आगे की ओर चढ़ते हुए अपनी चुत को मेरे लण्ड के उपर घिसने की कोसीस करने लगी ।
बुर पर लण्ड की चुभन और गाड की दरारो को चौड़ा करती मेरी ऊन्ग्लियो मे उसकी बेचैनी बढा दी और उसने हाथ बढा कर मेरे लण्ड को एक बार फिर अपनी नाजुक हथेली मे भर लिया
जैसे जैसे मीना के हाथ मेरे लण्ड पर कस रहे थे वैसे वैसे मेरी भी सासे भारी हुई जा रही थी और इस दौरान करीब 4 5 मिंट तक चली एक लम्बी चुंबन से हमारे होठ अलग हुए और हम दोनो ने एक साथ अपने सीनो के सासे भरी और वापस से एक गहरा समूच करने लगा
मैने अपने हाथ को उपर ले आया और उसके ब्लाऊज के बटन खोलने लगा और वो लगातार मेरे लण्ड भिचे जा रही थी । मैने ब्लाउज खोलते हुए उसकी ओर बढने लगा और वो मेरे लण्ड मसलते हुए पीछे दिवाल की ओर हटने लगी ।
फिर आखिरी बटन खुलते हुए उसके 34DD के मदमस्त चुचे उछ्ल कर बाहर आ गये और मैने बिल्कुल भी देर ना करते हुए झुक कर दोनो हाथो से उसके चुचे पकडते हुए निप्प्ल को मुह मे भर लिया
अपने चुचियो की नसो को निचुडता पाकर मीना अकड़ गयी और दिवाल से टेक लेते हुए आहे भरने लगी ।
मै झुक कर उसकी चुचीयो को मसल मसल कर चुस रहा था और वो मेरे सर को अपने छाती पर दबाए जा रही थी साथ ही उस्का एक हाथ अभी भी मेरे लण्ड को सहला रहा था ।
गर्मी हम दोनो के जिस्म मे बढ रही थी और उससे कही ज्यादा मेरे लण्ड मे जलन होने लगी थी ऐसे मुझे मीना से अलग होते हुए उसे निचे बिठाना पड़ा ।
मुस्कुरा कर उसने भी मेरा प्रस्ताव स्वीकार किया और घुटनो के बल होते हुए लण्ड को पकड कर मुह मे भर लिया ।
एक लम्बी आह भरते हुए मैने भी मीना के सर को पकड कर उसके मुह मे पेलना शुरु कर दिया ।
उसकी चुचिया लटकती हुई हिली जा रही थी ।
अभी भी मेरे जहन मे बुआ को वो हवस से भूखा चेहरा नाच रहा था और उनकी मादक सिस्किया भी मेरे कानो मे आ रही थी ।
मै समझ गया कि अगर उनकी सिसकिया मेरे तक आ सकती है तो मीना की सिसकिया भी वहा तक जा सकती है
इसिलिए मैने मीना के मुह से लण्ड निकाला और उसको खड़ा करता हुआ - यहा नही कर सकते यहा आवाज जा सकती है
मीना ने सवालिया नजरो से मुझे देखा
मै - चलो तुम्हारे कमरे मे
मीना मुस्करा उठी और जल्दी जल्दी अपना ब्लाऊज बन्द करने लगी तो मैने उसको रोकते हुए- अरे रहने दो ये सब जल्दी चलो
वो थोडा इतराई और फिर हम दोनो निचे उसके कमरे मे चले गये ।
हाल मे जिस चौकी पर मीना सोयी हुई थी उसी जस्ट बगल मे एक कमरे मे हम दोनो आ गये थे ।
बंद कमरे मे हल्की रोशनी वाली बल्ब चालू थी और सब कुछ नीला नीला ही दिख रहा था ।
मैने देर ना करते हुए मीना को पकड़ा और उसके ब्लाऊज को उसके जिस्स्ं से अलग कर दिया और उसकी साड़ी भी कमर से अलग करते हुए वापस से उसको बाहो मे भर लिया ।
थोडा उसकी नाजुक चुचियो को मरोडा और लण्ड को पेतिकोट के उपर से ही उसकी चर्बीदार गाड़ की दरारो मे भेदने लगा
मीना कसमसाइ और मैने उसके पेतिकोट कि डोरी खोल दी । वो तुरन्त सरक के उसके पैरो मे चली गयी और मीना ने जैसे ही मेरे सुपाड़े की तपिश अपने ठन्डे चुतडो पर महसूस की वो मेरी बाहो मे सिमट गयी ।
उसके गाड़ के गाल सख्त हो गये और मैने अपने हाथ से आगे की ओर उसकी बुर को टटोला तो झाटो से भरी पिचपिचाती बुर के होठ मेरे उंगलियो को स्पर्श हुए ।
सही अंदाज पाते ही मैने अपनी हथेली को उसकी बुर पर मसला और उंगलियो का दबाव बनाया तो उसकी चुत मेरे उंगलियो पर बजाबजा उठी
वही मीना अकड़ कर मेरे लण्ड को मजबूती से थामते हुए मसलने लगी ।
अभी भी मेरा हाथ उसकी नरम नरम चुची को मिज रहा था और
मीना मेरा लण्ड मसल्ती हुई तेज आहे भरते हुए मेरी बाहो मे सिसकिया ले रही थी - अह्ह्ह राज बाबू अब और नही उम्म्ंम मुझे चाहिये उम्म्ंम्ं अह्ह्ह सीईई डाल दो ना
मै मुस्कुराया - क्या चाहिये उम्म्ं
मीना मेरे आड़ो को टटोलकर मेरे लण्ड की चमडी आगे पीछे करती हुई - येईह्ह चाहिये उम्म्ंम ये बोल कर वो तेजी से मेरे घूम गयी और लण्ड को पकड कर अपनी चुत के मुहाने पर दरने लगी ।
मैने भी उसकी गाड़ को पकड कर उसको अपनी ओर खीचा और उसके चुत के फाको को रगड़ते हुए उसके जांघो मे पेलने लगा
हर घिसाई के साथ मेरा सुपाडा और फुल रहा था जो अब चुत के साथ साथ उस्के गाड़ सुराख को छेड़ रहा था
वही मीना मेरे लण्ड की सतहो पर अपनी देह का पुरा भार डालती मानो बुर को लण्ड पर नही किसी फौलादी पाइप पर घिस रही थी और मै उसके नुकीले चुचे मुह मे लेके चुबला रहा था
मीना - अह्ह्ह घुसा दो ना बाबू उह्ह्ह प्लीज उह्ह्ह ना डालो ना
मै उसकी बेताबी समझी और उसको पकड कर बिसतर पर लिटाते हुए उसकी जांघो के बीच गया।
फिर अपना लण्ड सेट कर एक करारा धक्का दिया । मेरा लण्ड उसके चुत को फैलाते हुए पुरा का पुरा जड़ मे घुस गया
मीना- अह्ह्ह्ह माआह्ह्ह उम्म्ंम्ं बहुत बड़ा अह्ह्ह
मैने देर ना की और घुटनो के बल होते हुए अपने कमर पटकने शुरु कर दिये
हर करारे झटके के साथ मीना की आंखे और बुर दोनो फैल जा रही थी
उसकी झड़ी हुई चुत से पच्च पच्च की आवाजे आने लगी थी ।
लंड इतनी चिकनाई से अन्दर बाहर हो रहा था जैसे इंजन का पिस्टन
फचर फचर और चौकी की चु चू मीना के तेज सिस्कियो मे दब सी गयी थी ।
मीना- आह्ह हा ऐसे ही उह्ह्ह माअह्ह उम्म्ं बहुत दिन बाद ऐसा लंड अह्ह्ह मीईइलाआह हैई अह्ह्ह उह्ह्ह और पेलो बाबू और हुमच के चोदो अह्ह्ह
मै उसके चुत मे सटासट चोदते हुए - क्यू अरुण का लण्ड इतना मजेदार नही है क्या अह्ह्ह उम्म्ं
मीना - आह्ह वो तो अभी बच्चा है
मै - अच्छा फिर किसके लण्ड की याद आ गयी उम्म्ंम
मीना मुस्कुराई और सिसकिया लेने लगी
मै - बोल ना साली चुप क्यू है बोल बहिनचोद उम्म्ंम तेरा पति तो भड्वा होगा हि ये मुझे पता है क्योकि अगर वो चोद पाता तो तुझसे दुर थोडी ना रहता क्यू सही है ना
मीना मुस्कुरा कर आहे भरते हुए - लण्ड ही नही दिमाग भी ब्डा है आपका बाबू ओह्ह्ह सही कह रहे हो उम्म्ंम सीईई हा ऐसे ही और घुमाओ अंडर अह्ह्ह आह्ह ऐसे ही उम्म्ं
मै - बोल ना तु
मीना- हा सही कह रहे हो आप ,,मेरा पति किसी काम का नही है , ना पैसे कमाने मे ना ही चोदने मे । इसिलिए तो मुझे काम के लिए यहा आना पड़ा
मै उसके बुर मे लण्ड को गहराइ मे ले जाता हुआ - तो वो तगडा लण्ड किसका था बोल ना साली
मीना मुस्कुरा कर - मेरे जीजा का उह्ह्ह्ह सीई
उसकी बाते सुन्कर कर मुझे और भी जोश आ गया
मैने और कस कस के पेलने लगा
मै - सिर्फ जीजा का या और भी कोई है उम्म्ं
मीना- हा जीजा और उनका एक दोस्त है उम्म्ंम्ं दोनो बहुत ही उह्ह्ह्ह
मै - फिर तो तेरी दीदी भी उसके पति के दोस्त से उम्म्ंम
मीना - आह्ह नही नही वो बहुत सीधी है उम्म्ं अह्ह्ह
मै कसकर उसके बुर मे झटके देता हुआ - और तु , तु मादरचोद एक नम्बर की रन्डी है क्यू
मिना - आह्ह हा बाबू मुझसे नही रहा जाता है इसिलिए तो अरुण बाबू से उह्ह्ह और मैने कितनी कोसिस की बड़े मालिक से कुछ हो जाये लेकिन
मै - लेकिन क्या
मीना- वो खुद को परिवार और समाज मे बहुत सीधा दिखाते है लेकिन अपनी ही भाई की उह्ह्ह आप तो देखे ही हो ना
मीना ने वापस से जैसे उस कमरे की याद दिलाई मेरा रोम रोम सिहर उठा और मैने कस कस के उसके बुर की गहराई मे लण्ड उतारने ल्गा
मीना को जैसे मेरी कोई कमजोर नस मिल गयी हो
मीना- आह्ह आपको भी अपनी बुआ पसंद है ना उम्म्ं
मै उसकी बातो से और भी उत्तेजित होने लगा था
मीना- अह्ह्ह काश इस समय मेरी जगह आपकी कम्मो बुआ होती तो क्या करते बाबू आप
मै - साली चुप कर बहुत बोल रही है ,वो होती तो उसकी भी ऐसे ही ऐसे ही अह्ह्ह अह्ह्ह
मीना- अन्दर नही बाबू अंदर नही
मैने भी अपना होश सम्भाला और जल्द से लण्ड बाहर निकालते हुए उसके पेट पर झडने लगा और वो मेरा लण्ड पकड कर मस्लती हुई उसे नीचोड़ने लगी
मै - तु साली बहुत बोलती है बहिनचोद
मीना खिलखिलाती हुई - तो मतलब आप भी अपनी बुआ के हिहिहिही
मीना का हस्ता चेहरा देख कर मै भी हस पड़ा और उठ कर अपने कपडे पहनने लगा
मीना- क्या बस एक ही बार
मै हस कर - और चाहिये
मीना ने हा मे सर हिलाया
मै - इस बार पीछे से भी लूंगा चलेगा फिर
मीना ने शर्माहट भरी मुस्कुराह्ट से अपनी सहमती दे दी और हम दोनो अगले राउंड की तैयारि मे लग गये ।