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Incest घर की मोहब्बत

ayush01111

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Update 11




अंकुश नीतू और गोमती के साथ दोपहर 1 बजे गाँव पहुंच गया और उसके बाद नानाजी के अंतिम कार्य में हिस्सा लेकर शाम को मामा के घर की छत पर टहल रहा था तभी नीतू वहा आ गई और अंकुश से बोली - क्या हुआ अक्कू.. अकेला छत पर क्यों घूम रहा है?

अंकुश - बस ऐसे ही यार.. सालों बाद यहां आया हूँ.. छत से गाँव देख रहा था.. बहुत बदल गया है..

नीतू - ये सब छोड़ नीचे चल.. दोनों मामाओ के बीच संग्राम छिड़ा हुआ है.. बस हाथपाई होने ही देर है..

अंकुश - लालची है दोनों.. बाप को मारे एक दिन नहीं हुआ और जमीन जायदाद के लिए लड़ने लगे.. माँ कहा है?

नीतू - कहा होंगी? नीचे सब देख रही है.. चल खेतो की तरफ चल के आते है..

अंकुश - यार बस में आने से पहले ही थक गया.. ऊपर से 3 घंटे वहा क्रियाकर्म में लग गए.. बहुत थक गया हूँ..

नीतू अंकुश का हठ पकड़ कर ले जाते हुए - मैं उतारती हूँ ना तेरी थकान.. चल..

अंकुश - यार नीतू छोड़.. गाँव है..

नीतू आँख दिखाते हुए - पता है.. ज्यादा नाटक मत कर चल..

नीतू अंकुश को खेतो की तरफ ले जाती है जहाँ बड़ी बड़ी फसल उगी हुई होती है और हरियाली ही हरयाली चारो तरफ दिखाई देती है.. नीतू नहर की तरफ अंकुश को ले आती है और उसी के पास मामा के खेत में जहाँ बड़ी बड़ी फसल उगी हुई थी उनके बीच से अंदर आकर एक छोटी सी जगह में अंकुश को बैठाते हुए उसकी गोद में बैठ जाती है..

नीतू अपनी कुर्ती उतारकार एक तरफ रख देती है और ब्रा ऊपर सरकाते हुए अंकुश के मुंह में अपना चुचा देकर कहती है.. - पिले अक्कू.. बहन का बोबा चूसने से थकान कम हो जायेगी..

अंकुश चुचे के चुचक को मुंह में लेकर चूसते हुए - नीतू तू मरवायेगी किसी दिन..

नीतू हसते हुए - मरवाने ही तो आई हूँ अक्कू.. पहले जी भरके मेरे दूध चूस ले फिर चुत भी दूंगी मैं अपने भाई को.. मारेगा ना अपनी बहन की चुत?

अंकुश - चुत तो रोज़ ही देती है बहन.. कभी गांड भी दे..

नीतू मुस्कुराते हुए - गांड की सील सुहागरात को तोडना.. जब शादी के बाद दुल्हन बनकर तेरे लिए दूध का गिलास लेकर आउंगी मैं..

अंकुश नीतू के बोबे मुंह में भर भर के चूसते हुए - इतने साल से सुहागरात सुहागदीन सुहागशाम सुहागसुबह सब मना रहे है.. अब भी शादी की जरुरत है?

नीतू - पहली बार जब तूने मेरे साथ ये सब किया था ना.. तभी से तेरे साथ शादी के सपने देख रही हूँ मैं.. कमीने अगर अपनी बात से पलटा ना तू तो देख लेना.. तेरा सामान ही काट दूंगी मैं..

अंकुश - मैंने किया था या तू खुद करवाने आई थी मेरे पास? क्या कहा था?अक्कू.. अक्कू.. मूझे गर्मी लग रही है.. चुत्तड़ और चुचे ऐसे हिला रही थी मेरे आगे जैसे धंधे वाली हो..

नीतू - तू कोनसा कम था? मैंने इशारा क्या किया तूने तो उस रात रगड़ के रख दिया था.. कच्ची चुत थी.. 4 दिन तक सुज्जी रही थी बेचारी..

अंकुश मुस्कुराते हुए - मैंने कहा था मुझसे अपनी सील तुड़वाने के लिए? अब तेरे जैसी हसीन लड़की मिलेगी तो दिल कैसे काबू मे रहेगा?

नीतू अंकुश की पेंट खोलकर लंड पकड़ते हुए - कुत्ते इतना प्यार करती हूँ तुझसे.. फिर भी सारा दोष मूझे ही देता है जैसे खुद दूध का धुला हुआ हो..

अंकुश प्यार से - अच्छा सॉरी बहना.. जब तू रूठती है तो बहुत प्यारी लगती है..

नीतू लंड मुंह में लेकर चुसती हुई - भोस्डिके ज्यादा मस्का मत लगा.. छोटा भाई है इसलिए तुझे प्यार से रखती हु.. बड़ा होता तो बहुत सताती तुझे..

अंकुश नीतू के बाल पकड़कर लंड चुसवाते हुए - नीतू एक भाई को दुनिया में सबसे बेस्ट फिलिंग पता है कब आती है? जब उसकी सगी बहन उसे blowjob देती है.. तू जब मेरा ऐसे चुस्ती है ना.. मन करता है तुझे दुनिया की सारी ख़ुशीया लाकर दे दू..

नीतू मुंह से लंड निकालकर अपनी पज़ामी नीचे करती है और अंकुश के लंड को चुत में लेती हुई अंकुश को चूमकर लंड पर उछलती हुई कहती है - बहन को पता है कब आती है सबसे अच्छी फिलिंग? जब वो अपने सगे भाई के लंड को चुत में लेकर उस पर उछलती है...

नीतू लंड पर गांड हिलाते हुए अंकुश को चूमती है और कुछ देर बाद अंकुश नीतू की चुत में डिस्चार्ज हो जाता है.. तभी नीतू के फ़ोन पर गोमती का फ़ोन आता है जिसे नीतू उठती हुई बोलती है..
नीतू - हेलो माँ..

गोमती - अरे तुम दोनों भाई बहन की रासलीला ख़त्म हो गई हो तो आ जाओ.. वापस भी चलना है.. आज की आखिरी बस थोड़ी देर में आने वाली है..

नीतू मुस्कुराते हुए अंकुश को देखकर फोन काटते हुए - आ रहे है..

अंकुश - क्या हुआ? मम्मी क्या कह रही थी?

नीतू अपने कपड़े पहनते हुए - पूछ रही थी अक्कू की थकान उतरी या नहीं..

अंकुश कपड़े पहनते हुए - सच बता?

नीतू - और क्या मैं झूठ बोलूंगी? उनको पता है हम दोनों क्या गुल खिला रहे है..

अंकुश - मना किया था ना यार नीतू.. पता नहीं क्या सोच रही होंगी माँ हमारे बारे में.. चल..

नीतू हसते हुए - यही सोच रही होगी कि दोनों भाई बहन में कितना प्यार है..

अंकुश नीतू के साथ वापस मामा के घर आ जाता है और अपनी माँ गोमती और नीतू को लेकर शाम 7 बजे की बस में वापस उदयपुर आने के लिए चढ़ जाते है.. बस में अंकुश कंडक्टर से - भाई तीन उदयपुर बस स्टैंड..

कंडक्टर - लो.. भाईसाब...

अंकुश - सीट कोनसी है?

कंडक्टर - भाईसाब अभी एक सीट खाली थोड़ी देर ऊपर स्लीपिंग कोच में बैठ जाओ.. आगे सीट खाली तब नीचे आ जाना..

गोमती अंकुश से - मेरी कमर में दर्द है मैं बैठ रही हूँ.. तुम दोनों ऊपर बैठ जाओ..

नीतू गोमती की बात सुनकर दंग रह गई उसे पता था कि गोमती जानती है कि स्लीपिंग कोच में पूरी प्राइवेसी होती है और वहा अंकुश और नीतू कुछ भी कर सकते है फिर भी गोमती बिना झिझके उन्हें ऊपर स्लीपिंग कोच में भेज रही थी..

नीतू ने अंकुश का हाथ पकड़ा और इशारे से ऊपर स्लीपिंग कोच में आने को कहा.. अंकुश ने भी गोमती के सीट पर बैठने के बाद नीतू के पास स्लीपिंग कोच में आ गया और नीतू ने स्लीपिंग कोच का शीशा और पर्दा लगाकर सीधे अंकुश को अपनी बाहों में ले लिए और चूमना शुरु कर दिया.. अंकुश भी नीतू के होंठों का पूरा रस पी जाने कि नियत से उसे चुम रहा था और इसके साथ नीतू के बूब्स और गांड को भी अपने हाथों से मसलकर दबाते हुए नीतू के बदन का मज़ा लूट रहा था..

गोमती नीचे सीट बैठी हुई सोच रही थी कि अगर नीतू और अंकुश दोनों पति पत्नी कि तरह रहना चाहते है तो वो उन दोनों को नहीं रोकेगी और उनके बीच का रोड़ा नहीं बनेगी..


*****************


कुछ दिन बाद बरखा के मैसेज पर सूरज सपना के घर पहुचा तो शाम के पांच बज रहे थे..

सपना ने दरवाजा खोला और सूरज की शकल देखते ही मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़कर अंदर खींचते हुए दरवाजा बंद कर दिया और सूरज को अपने बैडरूम में लेजाकर बैठाते हुए कहा - मैग्गी बनाई है खानी है?

सूरज हल्का सा शरमाते हुए - एक्स्ट्रा है तो..

सपना - एक्स्ट्रा तो नहीं है.. पर बरखा ने अभी कॉल करके कहा था तुम आ रहे हो तो अपने लिए बना रही थी फिर सोचा तुम्हारे लिए भी बना दू..

सूरज - आप अकेले रहती हो यहाँ?

सपना रसोई से दो प्लेट में मैग्गी लाते हुए - नहीं..

हस्बैंड भी रहते है मेरे साथ.. बच्चे बोडिंग स्कूल में है..

सूरज - घर अच्छा है आपका..

सपना प्लेट देते हुए - थैंक्स हनी.. लो..

सूरज प्लेट लेते हुए - आपको मेरा नाम पता है?

सपना सूरज के बदल में बैठकर मैग्गी खाते हुए - अब अपने नये नये जवा हुए आशिक का नाम तो मालुम करना ही पड़ेगा..

सूरज भी मेग्गी खाते हुए - बरखा दी ने बताया होगा..

सपना - बरखा से नहीं.. अभी जब तुम बरखा को लेकर जा रहे थे.. तब मैंने बरखा के पीता जी से पूछा था..

सूरज - फिर तो उन्होंने नाम के साथ कुंडली भी बता दी होगी.. वैसे काका लट्टू है आपके ऊपर..

सपना मुस्कुराते हुए - और तुम हनी? तुम्हे में कितनी पसंद हूँ?

सूरज मैग्गी खाते हुए - जितनी काका को हो उससे थोड़ा कम.. आपके नाम की माला जपते है दिन रात काका.. बहुत पसंद करते है आपको..

सपना - पसंद नहीं करते.. हासिल करना चाहते है.. हवस भरी है उनके अंदर.. औरत को कौन किस नज़र से देखता है उसे सब पता होता है..


सूरज मैग्गी खाकर प्लेट देते हुए - थोड़ा पानी मिलेगा?


सपना मुस्कुराते हुए - अभी लाई..


सपना पानी की बोतल लाकर सूरज को डरती है सूरज पानी पीकर बोतल वापस सपना को दे देता है जिसे सपना साइड टेबल पर रख देती है और अलमीरा से कुछ निकाल कर अपने ब्लाउज में रख लेती है और सूरज के पास आकर बैठते हुए कहती है - काका बता रहे थे कोई चिंकी तुम्हारी गर्लफ्रेंड रह चुकी है जिसके साथ तुम छत पर पकडे गए थे.. सच है क्या?


सूरज बिना शरमाए - काका भी ना.. क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं.. कुछ नहीं पता उनको..


सपना मुस्कुराते हुए सूरज की टीशर्ट उतारती हुई - मतलब सच है.. चिंकी के साथ तो बहुत बार किया होगा तुमने?


सूरज मुस्कुराते हुए - आप किसीको बताओगी तो नहीं..


सपना - मैं क्यों किसी को कुछ बताने लगी..


सूरज - शादी के बाद भी चिंकी मिलती है मुझसे..


सपना अपनी साड़ी उतारकर रखती हुई - इसका मतलब बिस्तर में अच्छे हो..


सूरज - समझा नहीं..


सपना सूरज की लोवर चड्डी सहित नीचे सरकाकर सूरज का लंड पकड़ते हुए - मतलब मेरे जवान आशिक.. की तेरे इस हथियार में बहुत दम है..


सूरज - अह्ह्ह.. आराम से..


सपना - क्या बात है.. तुम तो सारा मैदान साफ रखते हो.. बालों का नामोनिशान तक नहीं.. तुम्हारी तरह तुम्हारा ये भी बहुत हैंडसम है.. ये कहकर सपना सुरज के लंड को मुंह में लेकर चूसने लगती है..


सूरज - अह्ह्ह.. मुंह से आह निकल जाती है और वो अपना फोन उठाकर उसमे सपना के blowjob का एक वीडियो बनाने लगता है..


सपना गले तक लंड ले ले कर किसी प्रोफेशनल की तरह सूरज को blowjob दे रही थी.. और सूरज मज़े से सपना को लंड चुसवाता हुआ बेड पर मस्त लेटा हुआ मज़े लूट रहा था.. उसने blowjob का वीडियो बनाकर फ़ोन बंद कर दिया और पास में रख दिया..


सपना ने कुछ देर सूरज का लंड मुंह में लेकर पूरा खड़ा कर दिया फिर ब्लाउज में से कंडोम निकालकर सूरज को पहना दिया और अपने पेटीकोट का नाड़ा खोलकर सूरज के लंड के ऊपर आते हुए उसपर बैठ कर लंड को चुत में ले लिया.. सपना ने चड्डी नहीं पहनी थी और सूरज का लंड उसकी चुत ने पच्च करके घुस गया.. सूरज को फील हुआ की सपना की चूत पूरी खुली हुई है और उसे लंड लेने में कोई भी दिक्कत नहीं हो रही बल्कि सपना ने मुस्कुराते हुए सूरज का लंड अपनी चुत में ले लिया है और बड़े मज़े से उसके लंड को चुत में लेकर सपना अपने दोनों हाथ सूरज के सीने पर रखकर अपनी गांड आगे पीछे करते हुए हिल रही है और सूरज को बहुत कामुक नज़रो से देख रही है..


सपना सूरज के दोनों हाथों को अपनी छाती पर रख दिया और प्यार से बोला - चाहो तो मेरा ब्लाउज खोलकर अंदर का सामान देख सकते हो.. मैं नहीं रोकूंगी..


सूरज ने सपना की बात सुनकर उसके ब्लाउज के हुक खोलने की कोशिश की लेकर असफल रहा फिर सपना ने खुद ही हसते हुए अपना ब्लाउज और ब्रा उतार फेंका और अपनी गांड हिलाते हुए झुक कर सूरज के होंठों को बड़ी प्यार से अपने होंठो में लेकर चूमने और चूसने लगी जैसे सूरज कोई बच्चा हो..


सपना ने सूरज को अपने सामने ज्यादा देर टिकने नहीं दिया और थोड़ी देर में सूरज सपना की चुत में झड़ गया और सपना हसते हुए सूरज के होंठों को अपने दांतो से खींचते हुए बोली - हो गए खुश?


सूरज लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए मुस्कुराते हुए सपना से शर्माने लगा और सपना ने सूरज के लंड पर से उतरकर उसके लंड से कंडोम उतारकार गाँठ लगा कर डस्टबिन में डाल दिया..


सूरज ने बेड से खड़े होते हुए पूछा - बाथरूम?


सपना ने कमरे में ही पीछे दरवाजे की तरफ इशरत किया और सूरज चड्डी पहन कर बाथरूम में चला गया और मूतते हुए आज सपना की चुदाई कला के आगे जल्दी झड़ जाने के बारे में सोचता हुआ अपने आप पर शर्मिंदा होने लगा.. उसे लगने लगा कि सपना उसे कमजोर मर्द समझ रही होगी और उसके बारे में ना जाने क्या सोच रही होगी.. वही सूरज अभी अभी सपना के बूब्स और उसके बदन की बनावट और कसावट से वाकिफ हुआ था और फिर से सपना को सोचकर कामुक हुआ जा रहा था..


सूरज बाथरूम करके आया तो सपना ने अपने ब्रा पहन ली थी अपने कपड़े हाथ में लिए थे तभी सूरज बोला - आंटी..


सपना बिना सूरज को देखे बोली - हम्म?


सूरज सपना के पास जाकर अपनी चड्डी उतारकर पूरी अकड़ में खड़े लंड को दिखाते हुए बोला - आंटी एक बार और कर सकते है? प्लीज...


सपना जोर से हसते हुए एक नज़र सूरज को देखती है फिर अपनी ब्रा उतारकर बाकी कपड़ो के साथ वही रख देती है और अलमीरा से कंडोम निकालकर फाड़ते हुए सूरज के लंड को मुंह में लेकर 8-10 बार मुंह में आगे पीछे करते हुए गिला करके कंडोम पहना देती है और खुद पीठ के बल बिस्तर में लेटकर सूरज का हाथ पकड़ कर उसे अपने ऊपर खींचते हुए कहती है मुस्कुराकर बोलती है - अब सारी मेहनत तुम करो.. मैं कुछ नहीं करने वाली..


सूरज मुस्कुराते हुए - डोन्ट वॉरी आंटी.. आपने मुझे खुश किया.. अब मेरी बारी..


ये कहते हुए सूरज सपना की चुत में लंड पेल देता है फिर पूरा जोर लगाकर झेटके पर झेटके मारते हुए सपना की रेल बनाता है उससे सपना पूरी तरह प्रभावित होकर कामुक सिसकारियों के साथ सूरज को उसकी मर्दानगी का सर्टिफिकेट उसे दे देती है..


सपना आँख बंद करके और टाँगे चौड़ी करके लेटी हुई थी.. वही सुरज मिशनरी पोज़ में सपना की फटी हुई चुत से उसका कामरस निकलवाने में सफल रहता है सपना झड़ चुकी थी और उसे विश्वास नहीं हो रहा था सूरज ने उसे झड़ने पर मजबूर कर दिया है.. सपना को बहुत सालों बाद किसी से ऐसा सुख मिला था और वो सूरज को अब और प्यार से देखने और खुश करने की कोशिश करने लगी थी..



सूरज सपना के झड़ने के बाद भी लगातार उसकी चुत में झटके पर झटके मारे जा रहा था.. सपना सूरज को खींचकर बाहों में भर लिया और चूमते हुए कहा - घुड़सावारी का शौख है मेरे जवाँ आशिक को?



सूरज ने मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिला दिया और सपना सुरज के आगे घोड़ी बन गई.. सपना की मोटी गांड देखकर सूरज से रहा ना गया और वो बिना सपना के बोले उसकी गांड पकड़कर उसकी चुत में लंड पेलकर सपना को चोदने लगा और इसी बीच उसने वापस एक वीडियो बनाया दोनों की चुदाई का..


सपना - अह्ह्ह.. हनी..


सूरज चोदते हुए - हाँ आंटी?


सपना - बेटा लगता है कंडोम फट गया.. रुको मैं दूसरा पहनती हूँ..


सूरज चोदते हुए - ऐसे ही रहने दो ना आंटी..



सपना - ठीक है हनी.. बस अंदर नहीं निकालना..


सूरज - ओके आंटी..


सूरज पूरी जोश ओ खरोश के साथ सपना की चुत मारने लगा और कुछ देर बाद सपना वापस कामुकता की सीढ़िया चढ़ते हुए शिखर पर पहुंच गई और झड़ने को हो गई.. वही सूरज अब भी हथियार पकडे डटा हुआ था.. सपना झड़ी तो सूरज को लगा कि उसने जीत हासिल कर ली है और अब वो अपनी नज़रो में वापस उठ चूका है..


सपना ने झड़ने के बाद कहा - हनी.. बेबी अंदर मत निकालना..


सूरज - आंटी निकलने वाला है.


सपना ने सूरज का लंड चुत से निकाल दिया और फटा हुआ कंडोम हटाकर लंड सीधे मुंह में लेकर blowjob देने लगी और सूरज सपना को blowjob करते हुए देखकर और उसका सुख अनुभव करके काम की आखिरी हद तक पहुंच गया और थोड़ी सी देर में ही सपना के मुंह में झड़ गया..


सपना ने सूरज को प्यार से देखते हुए उसका वीर्य गले से नीचे उतार लिया और फिर वापस सूरज के लंड को मुंह में लेकर चाटते चूसते हुए साफ कर दिया..


सूरज ने सपना को अपनी बाहों में भर लिया और सपना की बड़ी बड़ी आँखों में देखते हुए बोला - थैंक्स आंटी..


सपना मुस्कुराते हुए बोली - योर मोस्ट वेलकम बेटा.. अब जल्दी से कपड़े पहनो.. मेरे हस्बैंड के आने का टाइम होने वाला है..


सूरज कपड़े उठाते हुए - ओके आंटी..


सूरज कपड़े पहनकर जब जाने को होता है सपना उसका हाथ पकड़कर दरवाजे पर रोक लेती है और सूरज को डीपली kiss करके कहती है - ये मेरा नम्बर है.. मेरे आशिक को वापस मिलने का मन हो तो कॉल करना..


सूरज मुस्कुराते हुए - ठीक है आंटी..


सपना भी मुस्कुराते हुए - बाय बेबी...


सपना के घर से निकलते निकलते सूरज को रात आठ बज गए थे और वो अब सीधे अपने घर आ गया..


हनी..


हाँ भईया..


हनी मैंने मेरे ऑफिस में बात की है तेरे लिए.. कल तू मेरे साथ चलना इंटरव्यू देने..


ठीक है भईया..


सुमित्रा जयप्रकाश को खाना परोस रही थी और जयप्रकाश परेशान लग रहा था..


क्या हुआ जी? परेशान लगते हो?


हां.. ऑफिस में एक फ़ाइल नहीं मिल रही.. मुझसे शायद कहीं खो गई.. बड़ी जरुरी फ़ाइल थी.. मीटिंग पोसपोन हो गई वरना मेरी तो नोकरी पर बन आती.. मैडम ने कहा है फाइल नहीं मिली तो जिम्मेदारी मेरी होगी और हो सकता है कोई कड़ी करवाई भी हो जाए..


अरे क्यों चिंता करती हो.. आपने कहीं रख दी होगी.. मिल जायेगी.. आप तो वैसे भी भुलक्कड़ हो.. याद करोगे तो मिल जायेगी.. आप पहले खाना खाओ.. देखो आपके पसंद की सब्जी बनाई है.. मैं हनी को भी खाना दे आती हूँ..


सुमित्रा जयप्रकाश के पास से उठकर खाना लेकर हनी के रूम में आ जाती है जहाँ वो देखती है की हनी बाथरूम में नहा रहा था..


हनी... हनी..


बोलो माँ...


बेटू.. इस वक़्त क्यों नहा रहा है?


कुछ नहीं माँ बस ऐसे ही..


मैं खाना लाई थी रखकर जा रही हूँ.. खा लेना बेटू..


ठीक है माँ..


सुमित्रा वापस नीचे आ जाती है और सूरज खाना खाकर बिस्तर में लेट जाता है और उसे आज जल्दी नींद आ जाती है..


सुमित्रा वापस आती है तो देखती है रात के नो ही बजे थे मगर सूरज सो चूका था.. सुमित्रा सूरज के गाल और माथे पर प्यार और ममता से भरा चुम्बन दे देती है फिर खाने की प्लेट अपने साथ नीचे ले जाती है..



सूरज का फोन उसके गद्दे के पास ही पड़ा हुआ था और गरिमा का फ़ोन उसके हाथ में.. सूरज ने गरिमा का कोई मैसेज किया था ना कॉल.. और गरिमा सूरज के massage और कॉल के इंतजार में बैठी थी वो सोच रही थी कि इस बार अगर सूरज ने मैसेज या कॉल किया तो वो झट से उसका रिप्लाई दे देगी और सूरज के माफ़ी मांगते ही उसे माफ़ करके फिर से उससे बात करना शुरु कर देगी.. मगर सूरज को तो जैसे गरिमा का ख्याल ही नहीं था.. एक तरफ सूरज सो रहा था दूसरी तरफ गरिमा जाग रही थी..



************



कहो.. घर चलना है या अब भी मूवी देखना है तुम्हे?


रमन से तितली ने मुस्कुराते हुए पूछा तो रमन ने जवाब दिया - आज नहीं.. रात के 9 बज चुके है..


सुबह से तुमने पुरे शहर में इतना घुमाया है कि अब थकान के मारे नींद आने लगी है..


तितली हसते हुए - अभी तो आधा ही शहर घुमा है.. अभी तो बहुत सी दूकान बाकी है.. अगली बार जब तुम फ्री रहो तो बताना वो भी घुमा दूंगी..


रमन - तुम थकती नहीं हो? घूमने फिरने से..


तितली हसते हुए - मैं तो अभी जवाँ हूँ.. मूझे क्यों थकान होने लगी? मूझे लगता है तुम्हारी उम्र हो गई है.. कितने आलसी हो तुम.. शादी के बाद पता नहीं क्या होगा तुम्हारा?


रमन - क्या उम्र हो गई है? तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे मैं कोई 40-50 साल का हूँ.. डेट ऑफ़ बर्थ मिला लो तुमसे एक दो महीने छोटा ही हूंगा..


तितली गाडी कि रेक से सिगरेट निकाल कर सुलगाते हुए कश लेकर - फिर इतनी जल्दी क्यों थक जाते हो? कितना lazy फील करते हो.. शादी के बाद बीवी को कैसे खुश रखोगे?


रमन - तुम अब पर्सनल हो रही हो..


तितली सिगरेट के कश लेकर - इतनी सी बात में क्या पर्सनल हो गई? शादी नहीं करोगे? साधु महात्मा बनने का इरादा है? चलो अच्छा है.. फिर बन जाओ तो पूरी प्रॉपर्टी मेरी.


रमन मुस्कुराते हुए - कितनी लालची हो ना तुम..


तितली सिगरेट पीती हुई - लालची होना बुरी बात तो नहीं है.. और मैं सुबह से देख रही हूँ तुम बार बार शीशे मे मेरी कमर क्यों देख रहे हो?


रमन हकलाते हुए - मैं.. मैं..मैंने.. कब देखी? मैं तो मिरर में पीछे देख रहा हूँ..


तितली हसते हुए - झूठ बोलना भी नहीं आता तुम्हे.. अपनी मम्मी पर गए हो तुम शायद.. पापा पर जाते तो इतने शरीफ ना होते..


रमन - तुम्हे केसे पता मैं शरीफ हूँ? अभी तुम मूझे जानती भी नहीं ठीक से.. कुछ दिन ही तो हुए है तुम्हे मेरे साथ घूमते..


तितली सिगरेट पीते हुए - मूझे हिमाचल घुमाके ला सकते हो?


रमन - क्यों नहीं? बस तुम प्रॉपर्टी लेने से मना कर दो.. हिमाचल क्या पूरा इंडिया घुमा लाऊंगा..


तितली एक लम्बा सिगरेट का कश लेकर - 45-55 कर सकते है.. बोलो मंज़ूर है?


रमन - 40-60 केसा रहेगा?


तितली सिगरेट का आखिरी कश लेकर सिगरेट को कार का शीशा नीचे करके बाहर फेंकते हुए - ठीक है पर उसके लिए हिमाचल के साथ कश्मीर भी घूमाना पड़ेगा..


रमन मुस्कुराते हुए - कब चलना है?


तितली - जब तुम चाहो..


रमन - कल सुबह निकलते है..


तितली मन में - सच में मूझे पसंद करता होगा क्या? कहा यार? सब नाटक होगा इसका.. कमीना कुछ दिनों में इतना अच्छा लगने लगा है.. आगे पता नहीं क्या होगा?


रमन मन में - कम से कम 60:40 पर तो आई.. और वैसे जितना सोचता था उतनी बुरी भी नहीं है.. घूमने में मज़ा आएगा इसके साथ.. आजतक कमीने दोस्तों के साथ घुमा हूँ.. अब देखता हूँ एक खूबसूरत लड़की के साथ घूमके केसा लगता है..


रमन - ध्यान कहा है? कुछ सोच रही हो?


तितली - नहीं तो..


रमन मुस्कुराते हुए - चलो.. घर आ चूका है..


तितली और रमन घर के अंदर आते है..


शान्ति - भईया खाना बना दू?


रमन - नहीं शान्ति.. आज इतना खिला दिया तुम्हारी दीदी ने कि कल तक भूक नहीं लगेगी..


तितली - शान्ति तुम जाकर सो जाओ..


शान्ति - ठीक है दीदी..


रमन और तितली अपने अपने कमरे में चले जाते है और फिर से पहले वाला ही सीन दोनों कमरे में चलता है रमन सो जाता है और तितली आईने के सामने खड़ी होकर अपनी सूरत देखती हुई रमन के बारे में सोचने लगती है और उसके प्लान के बारे में अंदाजे लगाने लगती है.. इसीतरह वो सोचती हुई देर तक जाग कर सो जाती है..


सुबह होने पर तितली की आँखे देर से खुलती है और

वो जब कमरे बाहर आकर देखती है तो देखती है रमन तैयार होकर कॉफी पीते हुए उसे देख रहा था..


गुडमॉर्निंग..


गुडमॉर्निंग..


शान्ति कहा है?


मैंने छूटी दे दी उसे.. कॉफी पियोगी.. मैंने बनाई है..


तितली कॉफ़ी लेती हुई - कुछ मिलाया तो नहीं ना इसमें.. कहीं मूझे ऑफ़ करके पूरी प्रॉपर्टी हड़प कर लो..


मुझ पर इतना शक करती हो तो मेरे साथ घूमने को क्यों जा रही हो?


पता नहीं.. शायद मैं पागल हूँ जो ऐसे आदमी के साथ घूमने जा रही हूँ जो मूझे बिलकुल भी पसंद नहीं करता..


तुमसे किसने कहा.. मैं तुम्हे नापसंद करता हूँ..


तो क्या पसंद करने लगे हो मूझे?


तुम इतनी भी खूबसूरत नहीं हो कि मैं कुछ दिनों में तुम्हे पसंद करने लगू.. पसंद नापसंद से अलग है कुछ..


अच्छा.. इतनी खूबसूरत नहीं हूँ तो कल छुप छुप के मेरी कमर क्यों देख रहे थे तुम? बोलो?


मैंने जानबूझ कर तो नहीं देखी.. और मेरे देखने से इतनी परेशानी तो ढक कर क्यों नहीं रखी तुमने अपनी कमर?


मेरी कमर.. मूझे ढकनी है या नहीं मेरी मर्ज़ी..


मेरी नज़र.. मुझे क्या देखबात है क्या नहीं मेरी मर्ज़ी.. अच्छा है.. अब जल्दी से तैयार हो जाओ सामान पैक कर लो.. निकलते है..


मूझे तेयार होने में समय लगेगा.. पैकिंग में भी टाइम लगेगा..


एक दिन नहीं नहाने से खूबसूरती फीकी नहीं पड़ जायेगी.. ऐसे ही ठीक लग रही हो तुम.. फ़ोन और कुछ जरुरी सामान ले लो बाकी रास्ते में खरीद लेना..



कहा से खरीद लेना? पैसे कहा है मेरे पास? सब कुछ तो तुम लेके बैठे हो.. मेरा जीना जो हराम करना चाहते थे.. थोड़े बहुत पैसे जमा किये थे वो भी पापा के बाद खर्च हो गए..


अच्छा ये कार्ड रख लो.. जो मर्ज़ी हो खरीद लेना..कोई लिमिट नहीं है.. खुश? अब चलो..


दस मिनट दो मैं आती हूँ...


तितली अंदर रूम में जाकर एक काला सूट पहन लेटी है और बेग में कुछ कपड़े और छोटी मोटी जरुरत का सामान लेकर बाहर आ जाती है रमन उसे लेकर निकल घिमने पड़ता है..


कार चालान आता है ना तुम्हे?


हाँ.. आता है खाली बैठे बैठे यही सब सिख रही थी घर पर..


तब ठीक है.. वैसे एक बात पुछु.. पर्सनल है..


पूछो..


कोई बॉयफ्रेंड नहीं है तुम्हरा?


तुम्हे क्या लगता है? होगा या नहीं?


मुझे कुछ लगता तो तुमसे क्यों पूछता?



और पूछ क्यों रहे हो? लगता है बॉयफ्रेंड बनना चाहते हो.. तभी इतनी इन्क्वायरी कर रहे हो.. वरना तो तुम मेरी तरफ देखते भी नहीं..


नहीं बॉयफ्रेंड नहीं.. हस्बैंड.. बोलो बनाओगी मूझे अपना हस्बैंड?


पैसो के लिए शादी करना चाहते हो?


शादी ही तो कर रहा हूँ किसी का मर्डर तो नहीं कर रहा..


पैसो के लिए कुछ भी कर सकते हो ना?


तुम्हे क्या लगता है?


पता नहीं.. कभी लगता है तुम शरीफ हो कभी लगता है पैसो के लिए पागल.. कुछ समझ नहीं आ रहा तुम्हारा..


तो फिर रहने दो.. समझने की कोशिश मत करो..


सिगरेट ख़त्म हो गई? ला दोगे?


जो कहेगी लाना ही पड़ेगा.. पैसो का सवाल है.. सिगरेट के अलावा कुछ चाहिए तो वो भी बता दो..

फिलहाल बस सिगरेट.. बाकी जो चाहिए होगा बता लुंगी...


ठीक है डॉक्टर साहिबा.. लेके आता हूँ..


रमन कार रोककर एक दूकान से सिगरेट का पैकेट और लाइटर ले आता है..

लो डॉक्टरनी जी.. फुको..


तुम क्यों नहीं पीते? मेरे सामने शर्म आती है?


शर्म और तुमसे? मैं सिर्फ तभी स्मोक करता हूँ जब शराब पीता हूँ..


अच्छा जी? और शराब कब पीते हो?


जब कोई कारण हो पिने का.. पहले अक्सर तुम ही शराब पिने का कारण होती थी..


इतनी नफरत करते हो मुझसे?


पहले करता था.. अब नफरत तो नहीं करता..


वैसे अगर मैंने तुम्हारी बात मान ली और तुमसे शादी कर ली.. तब तुम क्या करोगे?


करना क्या है? जो कर रहा था वही करूंगा.. अपने तरह से जीता रहूंगा..


अगर हाँ करू तो शादी के बाद मूझे शराब सिगरेट पिने से रोकोगे? तुमने कहा था तुम पुरानी सोच के हो.. अपनी बीवी को बेल्ट से मारोगे.. मतलब शादी के बाद मूझ पर हाथ उठाओगे?


हम्म्म्म..... तुम्हे जो करना हो कर लेना.. मैं नहीं रोकूंगा.. बस सारी प्रॉपर्टी मेरे नाम करनी पड़ेगी शादी के लिए.. और कुछ नहीं चाहिए तुमसे?


मतलब तुम मुझसे शादी करके सारी प्रॉपर्टी अपने नाम करवाना चाहते हो और मुझसे ये चाहते हो कि मैं तुम्हारी रखैल बनकर घर में पड़ी थी रहु.. तुम सिर्फ नाम कि शादी करोगे मुझसे.. अच्छा.. अब समझ में आया मूझे तुम्हारा प्लान..


चलो अच्छा है तुम्हे कुछ तो समझ आया.. वैसे मेरा ऑफर बुरा नहीं है सोच लो.. सब तुम्हे मेरे बाप कि रखैल ही मानते है.. सब तुम्हारे साथ टाइमपास करेंगे.. कोई भी लड़का तुम्हारे साथ पूरी लाइफ नहीं बिताने वाला.. कोई शादी करेगा भी तो पैसो के लिए.. अकेला रहना पड़ेगा पूरी जिंदगी.. मुझसे शादी कर लो.. तुम जो करना चाहो तुम्हे पूरी आज़ादी होगी.. मैं कभी किसी चीज से नहीं रोकूंगा.. महंगा सस्ता तुम जो खरीदना चाहो खरीद सकोगी.. जैसे जीना चाहो जी सकती हो.. एक बार सोचना..


तुम मेरी चिंता मत करो.. मैं रह लुंगी अकेली.. ऐसी शादी का क्या फ़ायदा जहाँ प्यार ही ना हो.. और दोनों एक ही कमरे में अलग अलग रहे..

खाना खाना है? आगे एक अच्छा रेस्टोरेंट आने वाला है.. क्या सिखाया था तुमने कल.. वो वाह्ह.. वाली बात.. यहाँ वही है..

ठीक है..



रमन और तितली खाना खाने के बाद आगे के लिए निकाल जाते है दोनों को एकदूसरे इश्क़ होने लगा था मगर दोनों इससे अनजान थे.. तितली को तो इसका आभास होने लगा था मागर रमन पूरी तरह अनजान था..

अबकी बार 100 ❤️ पार पे आएगा
Target done waiting for update
 

moms_bachha

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Writer kuch jayada Hi demanding hone lage hai...ab 100 like chaiye ..lagta hai kuch dino baad is trah se update hi band ho jayenge....

Khair story acchi ja rahi hai

Neetu sayad ab jabardasti akku par bhari pad rahi hai..kahin yeh unke riste ke liye bura karan na ban jaye..kuch jayada hawas bhari hui hai usme...use thoda samjna chaiye akku ke baare main bhi..

Spana ke sath acchanak sex karne ka karan samaj nahi aaya aur phir vidoe be bana rahe hai suraj kuch plan toh nahi hai mann main

Raman aur titli ke beech ka bhanwar sayad is trip se kuch kam ho jaye aur woh pass aa jayen. Yeh dono ke liye accha hai

Sayad gungun ab Jaiprakash ke through suraj ko pana chahati hai isliye sayad file usne chipa di..

Akhir main Garima ka aham sayad ab aage aa raha hai..isliye woh suraj ko call nahi kar oa rahi hai jo sayad uske liye accha na rahe..

Dekte Hain aage kya hota hai parrr4rrrrr

Phale 100 like toh aayen
Kahani thik se padhna
Abhi Gungun ko pta nhi hai suraj jaypraksh ka beta hai.
Baad me ye kya hua? wo kyu hua? Wale comments mat daalna
 

Napster

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Update 11




अंकुश नीतू और गोमती के साथ दोपहर 1 बजे गाँव पहुंच गया और उसके बाद नानाजी के अंतिम कार्य में हिस्सा लेकर शाम को मामा के घर की छत पर टहल रहा था तभी नीतू वहा आ गई और अंकुश से बोली - क्या हुआ अक्कू.. अकेला छत पर क्यों घूम रहा है?

अंकुश - बस ऐसे ही यार.. सालों बाद यहां आया हूँ.. छत से गाँव देख रहा था.. बहुत बदल गया है..

नीतू - ये सब छोड़ नीचे चल.. दोनों मामाओ के बीच संग्राम छिड़ा हुआ है.. बस हाथपाई होने ही देर है..

अंकुश - लालची है दोनों.. बाप को मारे एक दिन नहीं हुआ और जमीन जायदाद के लिए लड़ने लगे.. माँ कहा है?

नीतू - कहा होंगी? नीचे सब देख रही है.. चल खेतो की तरफ चल के आते है..

अंकुश - यार बस में आने से पहले ही थक गया.. ऊपर से 3 घंटे वहा क्रियाकर्म में लग गए.. बहुत थक गया हूँ..

नीतू अंकुश का हठ पकड़ कर ले जाते हुए - मैं उतारती हूँ ना तेरी थकान.. चल..

अंकुश - यार नीतू छोड़.. गाँव है..

नीतू आँख दिखाते हुए - पता है.. ज्यादा नाटक मत कर चल..

नीतू अंकुश को खेतो की तरफ ले जाती है जहाँ बड़ी बड़ी फसल उगी हुई होती है और हरियाली ही हरयाली चारो तरफ दिखाई देती है.. नीतू नहर की तरफ अंकुश को ले आती है और उसी के पास मामा के खेत में जहाँ बड़ी बड़ी फसल उगी हुई थी उनके बीच से अंदर आकर एक छोटी सी जगह में अंकुश को बैठाते हुए उसकी गोद में बैठ जाती है..

नीतू अपनी कुर्ती उतारकार एक तरफ रख देती है और ब्रा ऊपर सरकाते हुए अंकुश के मुंह में अपना चुचा देकर कहती है.. - पिले अक्कू.. बहन का बोबा चूसने से थकान कम हो जायेगी..

अंकुश चुचे के चुचक को मुंह में लेकर चूसते हुए - नीतू तू मरवायेगी किसी दिन..

नीतू हसते हुए - मरवाने ही तो आई हूँ अक्कू.. पहले जी भरके मेरे दूध चूस ले फिर चुत भी दूंगी मैं अपने भाई को.. मारेगा ना अपनी बहन की चुत?

अंकुश - चुत तो रोज़ ही देती है बहन.. कभी गांड भी दे..

नीतू मुस्कुराते हुए - गांड की सील सुहागरात को तोडना.. जब शादी के बाद दुल्हन बनकर तेरे लिए दूध का गिलास लेकर आउंगी मैं..

अंकुश नीतू के बोबे मुंह में भर भर के चूसते हुए - इतने साल से सुहागरात सुहागदीन सुहागशाम सुहागसुबह सब मना रहे है.. अब भी शादी की जरुरत है?

नीतू - पहली बार जब तूने मेरे साथ ये सब किया था ना.. तभी से तेरे साथ शादी के सपने देख रही हूँ मैं.. कमीने अगर अपनी बात से पलटा ना तू तो देख लेना.. तेरा सामान ही काट दूंगी मैं..

अंकुश - मैंने किया था या तू खुद करवाने आई थी मेरे पास? क्या कहा था?अक्कू.. अक्कू.. मूझे गर्मी लग रही है.. चुत्तड़ और चुचे ऐसे हिला रही थी मेरे आगे जैसे धंधे वाली हो..

नीतू - तू कोनसा कम था? मैंने इशारा क्या किया तूने तो उस रात रगड़ के रख दिया था.. कच्ची चुत थी.. 4 दिन तक सुज्जी रही थी बेचारी..

अंकुश मुस्कुराते हुए - मैंने कहा था मुझसे अपनी सील तुड़वाने के लिए? अब तेरे जैसी हसीन लड़की मिलेगी तो दिल कैसे काबू मे रहेगा?

नीतू अंकुश की पेंट खोलकर लंड पकड़ते हुए - कुत्ते इतना प्यार करती हूँ तुझसे.. फिर भी सारा दोष मूझे ही देता है जैसे खुद दूध का धुला हुआ हो..

अंकुश प्यार से - अच्छा सॉरी बहना.. जब तू रूठती है तो बहुत प्यारी लगती है..

नीतू लंड मुंह में लेकर चुसती हुई - भोस्डिके ज्यादा मस्का मत लगा.. छोटा भाई है इसलिए तुझे प्यार से रखती हु.. बड़ा होता तो बहुत सताती तुझे..

अंकुश नीतू के बाल पकड़कर लंड चुसवाते हुए - नीतू एक भाई को दुनिया में सबसे बेस्ट फिलिंग पता है कब आती है? जब उसकी सगी बहन उसे blowjob देती है.. तू जब मेरा ऐसे चुस्ती है ना.. मन करता है तुझे दुनिया की सारी ख़ुशीया लाकर दे दू..

नीतू मुंह से लंड निकालकर अपनी पज़ामी नीचे करती है और अंकुश के लंड को चुत में लेती हुई अंकुश को चूमकर लंड पर उछलती हुई कहती है - बहन को पता है कब आती है सबसे अच्छी फिलिंग? जब वो अपने सगे भाई के लंड को चुत में लेकर उस पर उछलती है...

नीतू लंड पर गांड हिलाते हुए अंकुश को चूमती है और कुछ देर बाद अंकुश नीतू की चुत में डिस्चार्ज हो जाता है.. तभी नीतू के फ़ोन पर गोमती का फ़ोन आता है जिसे नीतू उठती हुई बोलती है..
नीतू - हेलो माँ..

गोमती - अरे तुम दोनों भाई बहन की रासलीला ख़त्म हो गई हो तो आ जाओ.. वापस भी चलना है.. आज की आखिरी बस थोड़ी देर में आने वाली है..

नीतू मुस्कुराते हुए अंकुश को देखकर फोन काटते हुए - आ रहे है..

अंकुश - क्या हुआ? मम्मी क्या कह रही थी?

नीतू अपने कपड़े पहनते हुए - पूछ रही थी अक्कू की थकान उतरी या नहीं..

अंकुश कपड़े पहनते हुए - सच बता?

नीतू - और क्या मैं झूठ बोलूंगी? उनको पता है हम दोनों क्या गुल खिला रहे है..

अंकुश - मना किया था ना यार नीतू.. पता नहीं क्या सोच रही होंगी माँ हमारे बारे में.. चल..

नीतू हसते हुए - यही सोच रही होगी कि दोनों भाई बहन में कितना प्यार है..

अंकुश नीतू के साथ वापस मामा के घर आ जाता है और अपनी माँ गोमती और नीतू को लेकर शाम 7 बजे की बस में वापस उदयपुर आने के लिए चढ़ जाते है.. बस में अंकुश कंडक्टर से - भाई तीन उदयपुर बस स्टैंड..

कंडक्टर - लो.. भाईसाब...

अंकुश - सीट कोनसी है?

कंडक्टर - भाईसाब अभी एक सीट खाली थोड़ी देर ऊपर स्लीपिंग कोच में बैठ जाओ.. आगे सीट खाली तब नीचे आ जाना..

गोमती अंकुश से - मेरी कमर में दर्द है मैं बैठ रही हूँ.. तुम दोनों ऊपर बैठ जाओ..

नीतू गोमती की बात सुनकर दंग रह गई उसे पता था कि गोमती जानती है कि स्लीपिंग कोच में पूरी प्राइवेसी होती है और वहा अंकुश और नीतू कुछ भी कर सकते है फिर भी गोमती बिना झिझके उन्हें ऊपर स्लीपिंग कोच में भेज रही थी..

नीतू ने अंकुश का हाथ पकड़ा और इशारे से ऊपर स्लीपिंग कोच में आने को कहा.. अंकुश ने भी गोमती के सीट पर बैठने के बाद नीतू के पास स्लीपिंग कोच में आ गया और नीतू ने स्लीपिंग कोच का शीशा और पर्दा लगाकर सीधे अंकुश को अपनी बाहों में ले लिए और चूमना शुरु कर दिया.. अंकुश भी नीतू के होंठों का पूरा रस पी जाने कि नियत से उसे चुम रहा था और इसके साथ नीतू के बूब्स और गांड को भी अपने हाथों से मसलकर दबाते हुए नीतू के बदन का मज़ा लूट रहा था..

गोमती नीचे सीट बैठी हुई सोच रही थी कि अगर नीतू और अंकुश दोनों पति पत्नी कि तरह रहना चाहते है तो वो उन दोनों को नहीं रोकेगी और उनके बीच का रोड़ा नहीं बनेगी..


*****************


कुछ दिन बाद बरखा के मैसेज पर सूरज सपना के घर पहुचा तो शाम के पांच बज रहे थे..

सपना ने दरवाजा खोला और सूरज की शकल देखते ही मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़कर अंदर खींचते हुए दरवाजा बंद कर दिया और सूरज को अपने बैडरूम में लेजाकर बैठाते हुए कहा - मैग्गी बनाई है खानी है?

सूरज हल्का सा शरमाते हुए - एक्स्ट्रा है तो..

सपना - एक्स्ट्रा तो नहीं है.. पर बरखा ने अभी कॉल करके कहा था तुम आ रहे हो तो अपने लिए बना रही थी फिर सोचा तुम्हारे लिए भी बना दू..

सूरज - आप अकेले रहती हो यहाँ?

सपना रसोई से दो प्लेट में मैग्गी लाते हुए - नहीं..

हस्बैंड भी रहते है मेरे साथ.. बच्चे बोडिंग स्कूल में है..

सूरज - घर अच्छा है आपका..

सपना प्लेट देते हुए - थैंक्स हनी.. लो..

सूरज प्लेट लेते हुए - आपको मेरा नाम पता है?

सपना सूरज के बदल में बैठकर मैग्गी खाते हुए - अब अपने नये नये जवा हुए आशिक का नाम तो मालुम करना ही पड़ेगा..

सूरज भी मेग्गी खाते हुए - बरखा दी ने बताया होगा..

सपना - बरखा से नहीं.. अभी जब तुम बरखा को लेकर जा रहे थे.. तब मैंने बरखा के पीता जी से पूछा था..

सूरज - फिर तो उन्होंने नाम के साथ कुंडली भी बता दी होगी.. वैसे काका लट्टू है आपके ऊपर..

सपना मुस्कुराते हुए - और तुम हनी? तुम्हे में कितनी पसंद हूँ?

सूरज मैग्गी खाते हुए - जितनी काका को हो उससे थोड़ा कम.. आपके नाम की माला जपते है दिन रात काका.. बहुत पसंद करते है आपको..

सपना - पसंद नहीं करते.. हासिल करना चाहते है.. हवस भरी है उनके अंदर.. औरत को कौन किस नज़र से देखता है उसे सब पता होता है..


सूरज मैग्गी खाकर प्लेट देते हुए - थोड़ा पानी मिलेगा?


सपना मुस्कुराते हुए - अभी लाई..


सपना पानी की बोतल लाकर सूरज को डरती है सूरज पानी पीकर बोतल वापस सपना को दे देता है जिसे सपना साइड टेबल पर रख देती है और अलमीरा से कुछ निकाल कर अपने ब्लाउज में रख लेती है और सूरज के पास आकर बैठते हुए कहती है - काका बता रहे थे कोई चिंकी तुम्हारी गर्लफ्रेंड रह चुकी है जिसके साथ तुम छत पर पकडे गए थे.. सच है क्या?


सूरज बिना शरमाए - काका भी ना.. क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं.. कुछ नहीं पता उनको..


सपना मुस्कुराते हुए सूरज की टीशर्ट उतारती हुई - मतलब सच है.. चिंकी के साथ तो बहुत बार किया होगा तुमने?


सूरज मुस्कुराते हुए - आप किसीको बताओगी तो नहीं..


सपना - मैं क्यों किसी को कुछ बताने लगी..


सूरज - शादी के बाद भी चिंकी मिलती है मुझसे..


सपना अपनी साड़ी उतारकर रखती हुई - इसका मतलब बिस्तर में अच्छे हो..


सूरज - समझा नहीं..


सपना सूरज की लोवर चड्डी सहित नीचे सरकाकर सूरज का लंड पकड़ते हुए - मतलब मेरे जवान आशिक.. की तेरे इस हथियार में बहुत दम है..


सूरज - अह्ह्ह.. आराम से..


सपना - क्या बात है.. तुम तो सारा मैदान साफ रखते हो.. बालों का नामोनिशान तक नहीं.. तुम्हारी तरह तुम्हारा ये भी बहुत हैंडसम है.. ये कहकर सपना सुरज के लंड को मुंह में लेकर चूसने लगती है..


सूरज - अह्ह्ह.. मुंह से आह निकल जाती है और वो अपना फोन उठाकर उसमे सपना के blowjob का एक वीडियो बनाने लगता है..


सपना गले तक लंड ले ले कर किसी प्रोफेशनल की तरह सूरज को blowjob दे रही थी.. और सूरज मज़े से सपना को लंड चुसवाता हुआ बेड पर मस्त लेटा हुआ मज़े लूट रहा था.. उसने blowjob का वीडियो बनाकर फ़ोन बंद कर दिया और पास में रख दिया..


सपना ने कुछ देर सूरज का लंड मुंह में लेकर पूरा खड़ा कर दिया फिर ब्लाउज में से कंडोम निकालकर सूरज को पहना दिया और अपने पेटीकोट का नाड़ा खोलकर सूरज के लंड के ऊपर आते हुए उसपर बैठ कर लंड को चुत में ले लिया.. सपना ने चड्डी नहीं पहनी थी और सूरज का लंड उसकी चुत ने पच्च करके घुस गया.. सूरज को फील हुआ की सपना की चूत पूरी खुली हुई है और उसे लंड लेने में कोई भी दिक्कत नहीं हो रही बल्कि सपना ने मुस्कुराते हुए सूरज का लंड अपनी चुत में ले लिया है और बड़े मज़े से उसके लंड को चुत में लेकर सपना अपने दोनों हाथ सूरज के सीने पर रखकर अपनी गांड आगे पीछे करते हुए हिल रही है और सूरज को बहुत कामुक नज़रो से देख रही है..


सपना सूरज के दोनों हाथों को अपनी छाती पर रख दिया और प्यार से बोला - चाहो तो मेरा ब्लाउज खोलकर अंदर का सामान देख सकते हो.. मैं नहीं रोकूंगी..


सूरज ने सपना की बात सुनकर उसके ब्लाउज के हुक खोलने की कोशिश की लेकर असफल रहा फिर सपना ने खुद ही हसते हुए अपना ब्लाउज और ब्रा उतार फेंका और अपनी गांड हिलाते हुए झुक कर सूरज के होंठों को बड़ी प्यार से अपने होंठो में लेकर चूमने और चूसने लगी जैसे सूरज कोई बच्चा हो..


सपना ने सूरज को अपने सामने ज्यादा देर टिकने नहीं दिया और थोड़ी देर में सूरज सपना की चुत में झड़ गया और सपना हसते हुए सूरज के होंठों को अपने दांतो से खींचते हुए बोली - हो गए खुश?


सूरज लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए मुस्कुराते हुए सपना से शर्माने लगा और सपना ने सूरज के लंड पर से उतरकर उसके लंड से कंडोम उतारकार गाँठ लगा कर डस्टबिन में डाल दिया..


सूरज ने बेड से खड़े होते हुए पूछा - बाथरूम?


सपना ने कमरे में ही पीछे दरवाजे की तरफ इशरत किया और सूरज चड्डी पहन कर बाथरूम में चला गया और मूतते हुए आज सपना की चुदाई कला के आगे जल्दी झड़ जाने के बारे में सोचता हुआ अपने आप पर शर्मिंदा होने लगा.. उसे लगने लगा कि सपना उसे कमजोर मर्द समझ रही होगी और उसके बारे में ना जाने क्या सोच रही होगी.. वही सूरज अभी अभी सपना के बूब्स और उसके बदन की बनावट और कसावट से वाकिफ हुआ था और फिर से सपना को सोचकर कामुक हुआ जा रहा था..


सूरज बाथरूम करके आया तो सपना ने अपने ब्रा पहन ली थी अपने कपड़े हाथ में लिए थे तभी सूरज बोला - आंटी..


सपना बिना सूरज को देखे बोली - हम्म?


सूरज सपना के पास जाकर अपनी चड्डी उतारकर पूरी अकड़ में खड़े लंड को दिखाते हुए बोला - आंटी एक बार और कर सकते है? प्लीज...


सपना जोर से हसते हुए एक नज़र सूरज को देखती है फिर अपनी ब्रा उतारकर बाकी कपड़ो के साथ वही रख देती है और अलमीरा से कंडोम निकालकर फाड़ते हुए सूरज के लंड को मुंह में लेकर 8-10 बार मुंह में आगे पीछे करते हुए गिला करके कंडोम पहना देती है और खुद पीठ के बल बिस्तर में लेटकर सूरज का हाथ पकड़ कर उसे अपने ऊपर खींचते हुए कहती है मुस्कुराकर बोलती है - अब सारी मेहनत तुम करो.. मैं कुछ नहीं करने वाली..


सूरज मुस्कुराते हुए - डोन्ट वॉरी आंटी.. आपने मुझे खुश किया.. अब मेरी बारी..


ये कहते हुए सूरज सपना की चुत में लंड पेल देता है फिर पूरा जोर लगाकर झेटके पर झेटके मारते हुए सपना की रेल बनाता है उससे सपना पूरी तरह प्रभावित होकर कामुक सिसकारियों के साथ सूरज को उसकी मर्दानगी का सर्टिफिकेट उसे दे देती है..


सपना आँख बंद करके और टाँगे चौड़ी करके लेटी हुई थी.. वही सुरज मिशनरी पोज़ में सपना की फटी हुई चुत से उसका कामरस निकलवाने में सफल रहता है सपना झड़ चुकी थी और उसे विश्वास नहीं हो रहा था सूरज ने उसे झड़ने पर मजबूर कर दिया है.. सपना को बहुत सालों बाद किसी से ऐसा सुख मिला था और वो सूरज को अब और प्यार से देखने और खुश करने की कोशिश करने लगी थी..



सूरज सपना के झड़ने के बाद भी लगातार उसकी चुत में झटके पर झटके मारे जा रहा था.. सपना सूरज को खींचकर बाहों में भर लिया और चूमते हुए कहा - घुड़सावारी का शौख है मेरे जवाँ आशिक को?



सूरज ने मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिला दिया और सपना सुरज के आगे घोड़ी बन गई.. सपना की मोटी गांड देखकर सूरज से रहा ना गया और वो बिना सपना के बोले उसकी गांड पकड़कर उसकी चुत में लंड पेलकर सपना को चोदने लगा और इसी बीच उसने वापस एक वीडियो बनाया दोनों की चुदाई का..


सपना - अह्ह्ह.. हनी..


सूरज चोदते हुए - हाँ आंटी?


सपना - बेटा लगता है कंडोम फट गया.. रुको मैं दूसरा पहनती हूँ..


सूरज चोदते हुए - ऐसे ही रहने दो ना आंटी..



सपना - ठीक है हनी.. बस अंदर नहीं निकालना..


सूरज - ओके आंटी..


सूरज पूरी जोश ओ खरोश के साथ सपना की चुत मारने लगा और कुछ देर बाद सपना वापस कामुकता की सीढ़िया चढ़ते हुए शिखर पर पहुंच गई और झड़ने को हो गई.. वही सूरज अब भी हथियार पकडे डटा हुआ था.. सपना झड़ी तो सूरज को लगा कि उसने जीत हासिल कर ली है और अब वो अपनी नज़रो में वापस उठ चूका है..


सपना ने झड़ने के बाद कहा - हनी.. बेबी अंदर मत निकालना..


सूरज - आंटी निकलने वाला है.


सपना ने सूरज का लंड चुत से निकाल दिया और फटा हुआ कंडोम हटाकर लंड सीधे मुंह में लेकर blowjob देने लगी और सूरज सपना को blowjob करते हुए देखकर और उसका सुख अनुभव करके काम की आखिरी हद तक पहुंच गया और थोड़ी सी देर में ही सपना के मुंह में झड़ गया..


सपना ने सूरज को प्यार से देखते हुए उसका वीर्य गले से नीचे उतार लिया और फिर वापस सूरज के लंड को मुंह में लेकर चाटते चूसते हुए साफ कर दिया..


सूरज ने सपना को अपनी बाहों में भर लिया और सपना की बड़ी बड़ी आँखों में देखते हुए बोला - थैंक्स आंटी..


सपना मुस्कुराते हुए बोली - योर मोस्ट वेलकम बेटा.. अब जल्दी से कपड़े पहनो.. मेरे हस्बैंड के आने का टाइम होने वाला है..


सूरज कपड़े उठाते हुए - ओके आंटी..


सूरज कपड़े पहनकर जब जाने को होता है सपना उसका हाथ पकड़कर दरवाजे पर रोक लेती है और सूरज को डीपली kiss करके कहती है - ये मेरा नम्बर है.. मेरे आशिक को वापस मिलने का मन हो तो कॉल करना..


सूरज मुस्कुराते हुए - ठीक है आंटी..


सपना भी मुस्कुराते हुए - बाय बेबी...


सपना के घर से निकलते निकलते सूरज को रात आठ बज गए थे और वो अब सीधे अपने घर आ गया..


हनी..


हाँ भईया..


हनी मैंने मेरे ऑफिस में बात की है तेरे लिए.. कल तू मेरे साथ चलना इंटरव्यू देने..


ठीक है भईया..


सुमित्रा जयप्रकाश को खाना परोस रही थी और जयप्रकाश परेशान लग रहा था..


क्या हुआ जी? परेशान लगते हो?


हां.. ऑफिस में एक फ़ाइल नहीं मिल रही.. मुझसे शायद कहीं खो गई.. बड़ी जरुरी फ़ाइल थी.. मीटिंग पोसपोन हो गई वरना मेरी तो नोकरी पर बन आती.. मैडम ने कहा है फाइल नहीं मिली तो जिम्मेदारी मेरी होगी और हो सकता है कोई कड़ी करवाई भी हो जाए..


अरे क्यों चिंता करती हो.. आपने कहीं रख दी होगी.. मिल जायेगी.. आप तो वैसे भी भुलक्कड़ हो.. याद करोगे तो मिल जायेगी.. आप पहले खाना खाओ.. देखो आपके पसंद की सब्जी बनाई है.. मैं हनी को भी खाना दे आती हूँ..


सुमित्रा जयप्रकाश के पास से उठकर खाना लेकर हनी के रूम में आ जाती है जहाँ वो देखती है की हनी बाथरूम में नहा रहा था..


हनी... हनी..


बोलो माँ...


बेटू.. इस वक़्त क्यों नहा रहा है?


कुछ नहीं माँ बस ऐसे ही..


मैं खाना लाई थी रखकर जा रही हूँ.. खा लेना बेटू..


ठीक है माँ..


सुमित्रा वापस नीचे आ जाती है और सूरज खाना खाकर बिस्तर में लेट जाता है और उसे आज जल्दी नींद आ जाती है..


सुमित्रा वापस आती है तो देखती है रात के नो ही बजे थे मगर सूरज सो चूका था.. सुमित्रा सूरज के गाल और माथे पर प्यार और ममता से भरा चुम्बन दे देती है फिर खाने की प्लेट अपने साथ नीचे ले जाती है..



सूरज का फोन उसके गद्दे के पास ही पड़ा हुआ था और गरिमा का फ़ोन उसके हाथ में.. सूरज ने गरिमा का कोई मैसेज किया था ना कॉल.. और गरिमा सूरज के massage और कॉल के इंतजार में बैठी थी वो सोच रही थी कि इस बार अगर सूरज ने मैसेज या कॉल किया तो वो झट से उसका रिप्लाई दे देगी और सूरज के माफ़ी मांगते ही उसे माफ़ करके फिर से उससे बात करना शुरु कर देगी.. मगर सूरज को तो जैसे गरिमा का ख्याल ही नहीं था.. एक तरफ सूरज सो रहा था दूसरी तरफ गरिमा जाग रही थी..



************



कहो.. घर चलना है या अब भी मूवी देखना है तुम्हे?


रमन से तितली ने मुस्कुराते हुए पूछा तो रमन ने जवाब दिया - आज नहीं.. रात के 9 बज चुके है..


सुबह से तुमने पुरे शहर में इतना घुमाया है कि अब थकान के मारे नींद आने लगी है..


तितली हसते हुए - अभी तो आधा ही शहर घुमा है.. अभी तो बहुत सी दूकान बाकी है.. अगली बार जब तुम फ्री रहो तो बताना वो भी घुमा दूंगी..


रमन - तुम थकती नहीं हो? घूमने फिरने से..


तितली हसते हुए - मैं तो अभी जवाँ हूँ.. मूझे क्यों थकान होने लगी? मूझे लगता है तुम्हारी उम्र हो गई है.. कितने आलसी हो तुम.. शादी के बाद पता नहीं क्या होगा तुम्हारा?


रमन - क्या उम्र हो गई है? तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे मैं कोई 40-50 साल का हूँ.. डेट ऑफ़ बर्थ मिला लो तुमसे एक दो महीने छोटा ही हूंगा..


तितली गाडी कि रेक से सिगरेट निकाल कर सुलगाते हुए कश लेकर - फिर इतनी जल्दी क्यों थक जाते हो? कितना lazy फील करते हो.. शादी के बाद बीवी को कैसे खुश रखोगे?


रमन - तुम अब पर्सनल हो रही हो..


तितली सिगरेट के कश लेकर - इतनी सी बात में क्या पर्सनल हो गई? शादी नहीं करोगे? साधु महात्मा बनने का इरादा है? चलो अच्छा है.. फिर बन जाओ तो पूरी प्रॉपर्टी मेरी.


रमन मुस्कुराते हुए - कितनी लालची हो ना तुम..


तितली सिगरेट पीती हुई - लालची होना बुरी बात तो नहीं है.. और मैं सुबह से देख रही हूँ तुम बार बार शीशे मे मेरी कमर क्यों देख रहे हो?


रमन हकलाते हुए - मैं.. मैं..मैंने.. कब देखी? मैं तो मिरर में पीछे देख रहा हूँ..


तितली हसते हुए - झूठ बोलना भी नहीं आता तुम्हे.. अपनी मम्मी पर गए हो तुम शायद.. पापा पर जाते तो इतने शरीफ ना होते..


रमन - तुम्हे केसे पता मैं शरीफ हूँ? अभी तुम मूझे जानती भी नहीं ठीक से.. कुछ दिन ही तो हुए है तुम्हे मेरे साथ घूमते..


तितली सिगरेट पीते हुए - मूझे हिमाचल घुमाके ला सकते हो?


रमन - क्यों नहीं? बस तुम प्रॉपर्टी लेने से मना कर दो.. हिमाचल क्या पूरा इंडिया घुमा लाऊंगा..


तितली एक लम्बा सिगरेट का कश लेकर - 45-55 कर सकते है.. बोलो मंज़ूर है?


रमन - 40-60 केसा रहेगा?


तितली सिगरेट का आखिरी कश लेकर सिगरेट को कार का शीशा नीचे करके बाहर फेंकते हुए - ठीक है पर उसके लिए हिमाचल के साथ कश्मीर भी घूमाना पड़ेगा..


रमन मुस्कुराते हुए - कब चलना है?


तितली - जब तुम चाहो..


रमन - कल सुबह निकलते है..


तितली मन में - सच में मूझे पसंद करता होगा क्या? कहा यार? सब नाटक होगा इसका.. कमीना कुछ दिनों में इतना अच्छा लगने लगा है.. आगे पता नहीं क्या होगा?


रमन मन में - कम से कम 60:40 पर तो आई.. और वैसे जितना सोचता था उतनी बुरी भी नहीं है.. घूमने में मज़ा आएगा इसके साथ.. आजतक कमीने दोस्तों के साथ घुमा हूँ.. अब देखता हूँ एक खूबसूरत लड़की के साथ घूमके केसा लगता है..


रमन - ध्यान कहा है? कुछ सोच रही हो?


तितली - नहीं तो..


रमन मुस्कुराते हुए - चलो.. घर आ चूका है..


तितली और रमन घर के अंदर आते है..


शान्ति - भईया खाना बना दू?


रमन - नहीं शान्ति.. आज इतना खिला दिया तुम्हारी दीदी ने कि कल तक भूक नहीं लगेगी..


तितली - शान्ति तुम जाकर सो जाओ..


शान्ति - ठीक है दीदी..


रमन और तितली अपने अपने कमरे में चले जाते है और फिर से पहले वाला ही सीन दोनों कमरे में चलता है रमन सो जाता है और तितली आईने के सामने खड़ी होकर अपनी सूरत देखती हुई रमन के बारे में सोचने लगती है और उसके प्लान के बारे में अंदाजे लगाने लगती है.. इसीतरह वो सोचती हुई देर तक जाग कर सो जाती है..


सुबह होने पर तितली की आँखे देर से खुलती है और

वो जब कमरे बाहर आकर देखती है तो देखती है रमन तैयार होकर कॉफी पीते हुए उसे देख रहा था..


गुडमॉर्निंग..


गुडमॉर्निंग..


शान्ति कहा है?


मैंने छूटी दे दी उसे.. कॉफी पियोगी.. मैंने बनाई है..


तितली कॉफ़ी लेती हुई - कुछ मिलाया तो नहीं ना इसमें.. कहीं मूझे ऑफ़ करके पूरी प्रॉपर्टी हड़प कर लो..


मुझ पर इतना शक करती हो तो मेरे साथ घूमने को क्यों जा रही हो?


पता नहीं.. शायद मैं पागल हूँ जो ऐसे आदमी के साथ घूमने जा रही हूँ जो मूझे बिलकुल भी पसंद नहीं करता..


तुमसे किसने कहा.. मैं तुम्हे नापसंद करता हूँ..


तो क्या पसंद करने लगे हो मूझे?


तुम इतनी भी खूबसूरत नहीं हो कि मैं कुछ दिनों में तुम्हे पसंद करने लगू.. पसंद नापसंद से अलग है कुछ..


अच्छा.. इतनी खूबसूरत नहीं हूँ तो कल छुप छुप के मेरी कमर क्यों देख रहे थे तुम? बोलो?


मैंने जानबूझ कर तो नहीं देखी.. और मेरे देखने से इतनी परेशानी तो ढक कर क्यों नहीं रखी तुमने अपनी कमर?


मेरी कमर.. मूझे ढकनी है या नहीं मेरी मर्ज़ी..


मेरी नज़र.. मुझे क्या देखबात है क्या नहीं मेरी मर्ज़ी.. अच्छा है.. अब जल्दी से तैयार हो जाओ सामान पैक कर लो.. निकलते है..


मूझे तेयार होने में समय लगेगा.. पैकिंग में भी टाइम लगेगा..


एक दिन नहीं नहाने से खूबसूरती फीकी नहीं पड़ जायेगी.. ऐसे ही ठीक लग रही हो तुम.. फ़ोन और कुछ जरुरी सामान ले लो बाकी रास्ते में खरीद लेना..



कहा से खरीद लेना? पैसे कहा है मेरे पास? सब कुछ तो तुम लेके बैठे हो.. मेरा जीना जो हराम करना चाहते थे.. थोड़े बहुत पैसे जमा किये थे वो भी पापा के बाद खर्च हो गए..


अच्छा ये कार्ड रख लो.. जो मर्ज़ी हो खरीद लेना..कोई लिमिट नहीं है.. खुश? अब चलो..


दस मिनट दो मैं आती हूँ...


तितली अंदर रूम में जाकर एक काला सूट पहन लेटी है और बेग में कुछ कपड़े और छोटी मोटी जरुरत का सामान लेकर बाहर आ जाती है रमन उसे लेकर निकल घिमने पड़ता है..


कार चालान आता है ना तुम्हे?


हाँ.. आता है खाली बैठे बैठे यही सब सिख रही थी घर पर..


तब ठीक है.. वैसे एक बात पुछु.. पर्सनल है..


पूछो..


कोई बॉयफ्रेंड नहीं है तुम्हरा?


तुम्हे क्या लगता है? होगा या नहीं?


मुझे कुछ लगता तो तुमसे क्यों पूछता?



और पूछ क्यों रहे हो? लगता है बॉयफ्रेंड बनना चाहते हो.. तभी इतनी इन्क्वायरी कर रहे हो.. वरना तो तुम मेरी तरफ देखते भी नहीं..


नहीं बॉयफ्रेंड नहीं.. हस्बैंड.. बोलो बनाओगी मूझे अपना हस्बैंड?


पैसो के लिए शादी करना चाहते हो?


शादी ही तो कर रहा हूँ किसी का मर्डर तो नहीं कर रहा..


पैसो के लिए कुछ भी कर सकते हो ना?


तुम्हे क्या लगता है?


पता नहीं.. कभी लगता है तुम शरीफ हो कभी लगता है पैसो के लिए पागल.. कुछ समझ नहीं आ रहा तुम्हारा..


तो फिर रहने दो.. समझने की कोशिश मत करो..


सिगरेट ख़त्म हो गई? ला दोगे?


जो कहेगी लाना ही पड़ेगा.. पैसो का सवाल है.. सिगरेट के अलावा कुछ चाहिए तो वो भी बता दो..

फिलहाल बस सिगरेट.. बाकी जो चाहिए होगा बता लुंगी...


ठीक है डॉक्टर साहिबा.. लेके आता हूँ..


रमन कार रोककर एक दूकान से सिगरेट का पैकेट और लाइटर ले आता है..

लो डॉक्टरनी जी.. फुको..


तुम क्यों नहीं पीते? मेरे सामने शर्म आती है?


शर्म और तुमसे? मैं सिर्फ तभी स्मोक करता हूँ जब शराब पीता हूँ..


अच्छा जी? और शराब कब पीते हो?


जब कोई कारण हो पिने का.. पहले अक्सर तुम ही शराब पिने का कारण होती थी..


इतनी नफरत करते हो मुझसे?


पहले करता था.. अब नफरत तो नहीं करता..


वैसे अगर मैंने तुम्हारी बात मान ली और तुमसे शादी कर ली.. तब तुम क्या करोगे?


करना क्या है? जो कर रहा था वही करूंगा.. अपने तरह से जीता रहूंगा..


अगर हाँ करू तो शादी के बाद मूझे शराब सिगरेट पिने से रोकोगे? तुमने कहा था तुम पुरानी सोच के हो.. अपनी बीवी को बेल्ट से मारोगे.. मतलब शादी के बाद मूझ पर हाथ उठाओगे?


हम्म्म्म..... तुम्हे जो करना हो कर लेना.. मैं नहीं रोकूंगा.. बस सारी प्रॉपर्टी मेरे नाम करनी पड़ेगी शादी के लिए.. और कुछ नहीं चाहिए तुमसे?


मतलब तुम मुझसे शादी करके सारी प्रॉपर्टी अपने नाम करवाना चाहते हो और मुझसे ये चाहते हो कि मैं तुम्हारी रखैल बनकर घर में पड़ी थी रहु.. तुम सिर्फ नाम कि शादी करोगे मुझसे.. अच्छा.. अब समझ में आया मूझे तुम्हारा प्लान..


चलो अच्छा है तुम्हे कुछ तो समझ आया.. वैसे मेरा ऑफर बुरा नहीं है सोच लो.. सब तुम्हे मेरे बाप कि रखैल ही मानते है.. सब तुम्हारे साथ टाइमपास करेंगे.. कोई भी लड़का तुम्हारे साथ पूरी लाइफ नहीं बिताने वाला.. कोई शादी करेगा भी तो पैसो के लिए.. अकेला रहना पड़ेगा पूरी जिंदगी.. मुझसे शादी कर लो.. तुम जो करना चाहो तुम्हे पूरी आज़ादी होगी.. मैं कभी किसी चीज से नहीं रोकूंगा.. महंगा सस्ता तुम जो खरीदना चाहो खरीद सकोगी.. जैसे जीना चाहो जी सकती हो.. एक बार सोचना..


तुम मेरी चिंता मत करो.. मैं रह लुंगी अकेली.. ऐसी शादी का क्या फ़ायदा जहाँ प्यार ही ना हो.. और दोनों एक ही कमरे में अलग अलग रहे..

खाना खाना है? आगे एक अच्छा रेस्टोरेंट आने वाला है.. क्या सिखाया था तुमने कल.. वो वाह्ह.. वाली बात.. यहाँ वही है..

ठीक है..


रमन और तितली खाना खाने के बाद आगे के लिए निकाल जाते है दोनों को एकदूसरे इश्क़ होने लगा था मगर दोनों इससे अनजान थे.. तितली को तो इसका आभास होने लगा था मागर रमन पूरी तरह अनजान था..

अबकी बार 100 ❤️ पार पे आएगा
बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
गोमती लगबग नितू और अंकुश के बीच चल रहे रिस्ते को मान ही गयी है
वही सपना भी हनी से धुवांधार तरीके से चुद कर उसकी मर्दानगी का लोहा मान गयी
सुमित्रा की भी अपनी अलग ही कहानी है
तो वही जयप्रकाश फाईल गुम जाने से परेशान हैं
ये रमन और तितली के बीच हल्की फुलकी नोंकझोंक के साथ नजदीकीयाॅं बढ रही हैं अब इनका हिमाचल का टूर क्या रंग लाता हैं
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 

moms_bachha

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Update 12



जयप्रकाश जी आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी पहले तो मीटिंग टल गई तो बच गए.. अब कल मीटिंग में अब क्या करूंगी मैं? आपने इतनी इम्पोर्टेन्ट फ़ाइल खो दी..

मैडम मैंने टेबल पर ही रखी थी.. अक्सर वहा से कुछ नहीं खोता मगर ये फ़ाइल ना जाने कैसे गुम हो गई..
मैं कुछ नहीं जानती जयप्रकाश जी.. आपके ऊपर पर मूझे अब करवाई करनी होगी वरना इसे मेरा फैलियर समझा जाएगा.

मैडम आप ऐसा मत कहिये.. मैंने आज तक कोई लापरवाही नहीं की है.. ये पहली बार है.

मैं कुछ नहीं जानती मे लिखित मे जवाब दो

चपरासी - मैडम आप येल्लो फ़ाइल के बारे में पूछ रही है क्या?

गुनगुन - हाँ क्यों तुम्हे पता है वो फ़ाइल कहा है?

चपरासी - जी मैडम.. उस दिन जयप्रकाश जी ने वो फ़ाइल टेबल पर रखी थी और मैं छूटी पर जा रहा था इसलिए मैंने सब चीज जगह पर रख दी थी.. मगर वो फ़ाइल गलती से मैं अपने सामान के साथ घर ले गया था.. आज वापस आया तो पता चला आप कोई फ़ाइल ढूंढ रही है.. वो फ़ाइल मेरे पास है.. मैं अभी घर से ले आता हूँ.

गुनगुन - आप फ़ोन पर ये बात नहीं बता सकते थे.. खाम्मखा जयप्रकाश जी को मैंने कितना कुछ भला बुरा कह दिया.. जाइये जल्दी लेकर आइये वो फ़ाइल.

जयप्रकाश चपरासी से - जा जल्दी..

गुनगुन - जयप्रकाश जी.. मैंने जो भी आपसे कहा उसे आप मेरी गलती समझके माफ़ कर दीजियेगा.. आप मुझसे उम्र में इतने बड़े है मूझे आपसे इतनी बदतमीजी से बात नहीं करनी चाहिए थी.

जयप्रकाश - कोई बात नहीं मैडम..


**************

सूरज आज विनोद के साथ उसके ऑफिस चला गया था और उसने वही पर जॉब के लिए हामी भी भर दी थी.. अगले दिन से उसने काम करना भी शुरु कर दिया.. आज पूरा दिन सूरज ऑफिस में बैठा काम कर रहा था.. शाम के 6 बजे उसने अपना काम समेटा और ऑफिस से बाहर आ गया..

हनी..

हाँ भईया?

हनी मूझे अचानक से ऑफिसटूर पर जाना पड़ेगा दो दिन के लिए.. तू मेरी बाइक लेके घर चला जा और पापा को बता देना.

ठीक है भईया.

हनी घर आ जाता है..

आ गया? विनोद कहा है?

भईया को ऑफिस टूर पर चले गए दो दिन तक बाहर ही रहेंगे..

लो बताओ.. तेरे पापा को भी उनकी मैडम अपने साथ मीटिंग के लिए जयपुर ले गई.. दोनों एक साथ ही गए है..

छोडो ना माँ.. आ जाएंगे.. आज सुबह से चेयर पर बैठे बैठे बदन अकड़ गया है.. एक कप अदरक वाली चाय पीला दो...

सुमित्रा प्यार से - तू कपड़े बदल कर हाथ मुंह धोले मैं अभी बनाके लाती हूँ..

सूरज ऊपर जाते हुए - हाथ मुंह धोने से काम नहीं चलेगा माँ.. नहाना पड़ेगा..

सूरज नहाने के बाद लोवर टीशर्ट डाल लेता है और तभी सुमित्रा चाय का कप हाथ में लेकर उसके कमरे में आ जाती है..

सुमित्रा - ले बेटू.. चाय पिले..

सूरज का कप लेकर - थैंक्स माँ..

सुमित्रा - केसा रहा काम का पहला दिन..

सूरज चाय पीता हुआ - बताया तो.. बहुत बोरिंग.. मूझे तो समझ नहीं आता भईया कैसे पूरा दिन कुर्सी पर बैठे रहते है..

सुमित्रा - थोड़े दिनों में तेरी भी आदत हो जायेगी बेटू.. अच्छा खाने में क्या बनाऊ?

सूरज चाय का कप रखकर सुमित्रा को बाहो में भरते हुए - कुछ बनाने की जरुरत नहीं है.. आज आप और मैं बाहर खाना खाके आएंगे..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए सूरज के बालों में हाथ फेरकर - चलो अच्छा है कम से कम एक दिन तो घर के काम से छूटी मिलेगी मूझे.. मगर तू कुछ अच्छा तो पहन.. इतना हैंडसम बेटा पैदा किया है मैंने.. हमेशा बस ये टीशर्ट और लोवर पहन के रखता है..

सूरज सुमित्रा को बाहों से आजाद करते हुए - आप नीचे चलो मैं कपड़े बदल के आता हूँ..

सूरज टीशर्ट और लोवर उतारकर एक जीन्स और चेक शर्ट पहन लेता है जिसमे काफी आकर्षक लगता है..

माँ चलो...

सुमित्रा - अब देख कितना प्यारा लग रहा है.. जैसे कोई हीरो हो..

सूरज - इतनी तारीफ़ मत करो.. कभी खुदको आईने में देखा है आपने? अभी भी कितनी अच्छी दिखती हो.. मगर आप तो पापा की तरह खुदको भी बुड्ढा समझ बैठी हो..

सुमित्रा हसते हुए - अच्छा बस बस.. रुक मैं पर्स लेके आती हूँ..

सूरज सुमित्रा को एक रेस्टोरेंट में लेके आ जाता है.. जहाँ की चकाचोध सुमित्रा देखते ही हैरान हो जाती है..

हनी.. ये रेस्टोरेंट है या महल?

पहले हवेली थी माँ.. अब रेस्टोरेंट बना दिया इसे.. खाना अच्छा मिलता है यहां.. बैठो..

सुमित्रा और सूरज रेस्टोरेंट के फर्स्ट फ्लोर पर एक टेबल पर बैठ जाते है और सुमित्रा आस पास के लोगों को और नजारो को देखने लगती है फिर पास में एक लड़की को शार्ट स्कर्ट मे सिगरेट पीते देख सूरज से कहती है..

हाय रे.. आजकल की लड़कियों को तो कोई शर्म ही नहीं है खुले आम सिगरेट पिने लगी है.. वो ऐसे छोटे छोटे कपडे पहन कर.. पाता नहीं इनके माँ बाप कैसे झेलते होंगे ऐसी लड़कियों को? देखने में किसी भले घर की लगती है पर हरकतें देखो.. ना कोई शर्म ना लिहाज़..

सूरज हसते हुए - आप भी ना माँ.. ये सब तो बहुत आम है.. और आपने कभी मूझे तो इतना कुछ नहीं बोला जब पकड़ा था सिगरेट पीते हुए छत पर..

अरे तेरी बात और है.. तू लड़का है.. मगर लड़कियों को तो कायदे से रखना चाहिए.. किस काम की ऐसी खुली आज़ादी.. जो बिगाड़ कर रख दे..

मतलब आप कह रही हो कि सिगरेट पिने वाली लड़किया बिगड़ी हुई होती है.. यही ना?

और क्या... कौन भला समझेगा ऐसी लड़कियों को? ना परिवार का डर, ना समाज का.. घर कैसे बसाएगी ये?

रहने दो माँ.. अब टाइम बदल चूका है.. सबको अपने मन की करने की आजादी है.. आप नहीं पीती इसका मतलब ये तो नहीं कि आप किसी और को भी ना पिने दो.. उसकी मर्ज़ी वो जो करें.. आपकी मर्ज़ी जो आप करो..

वेटर - सर आर्डर?

हाँ.. ये सब ले आओ.. माँ कुछ और मांगना है?

नहीं ठीक है...

वेटर चला जाता है..

सुमित्रा - मेरी मर्ज़ी जो मैं करू.. अच्छा? कल को मेरी मर्ज़ी बोलके मैं घर छोड़ जाऊ तो तेरे पापा जाने देंगे मूझे?

यार माँ कहा की बात कहा ले जा रही हो.. मैं बस इतना कह रहा हूँ.. आपको सिगरेट पीनी है तो आप भी पी लो.. उसमे क्या प्रॉब्लम है? उसको पीनी है वो पी रही है.. बस..

हम्म.. मैं सिगरेट पी लू.. ताकि तेरे पापा और बुआ मिलकर मेरा जीना हराम कर दे.. यही कहना चाहता है ना तू?

तो किसने कहा उनके सामने पियो.. छिपकर पी सकती हो अगर आपको पीनी है.. आपको पापा और बुआ का डर है उस लड़की को किसी का नहीं है.. अपनी अपनी लाइफ है माँ.. क्यों इतनी फ़िक्र करनी..

वेटर - सर योर आर्डर..
वेटर खाना रखकर चला जाता है..

लो माँ.. शुरु करो..
सूरज और सुमित्रा खाना खा लेते है और वापस घर आने को चल पड़ते है तभी सुमित्रा सूरज से कहती है - हनी.. अगर मैं सिगरेट पिऊ तो तू कुछ नहीं कहेगा?

मैं क्या कहूंगा? आपकी चॉइस है वो.. इसमें मेरा क्या लेना देना.. हाँ.. अगर आप जरुरत से ज्यादा कुछ करती हो तो मूझे समझाना पड़ेगा आपको..

ठीक है तो तू मूझे सिगरेट पीना सिखाएगा आज.. मैं भी तो देखूँ ऐसा क्या मज़ा मिलता है सिगरेट पिने में लोगों को?

मज़ा नहीं मिलता माँ.. लोग शौक के लिए पीते है.. कुछ लोग डिप्रेशन में पीते है.. कुछ ऐसे ही..

तेरे पास घर पर सिगरेट है?

नहीं.. मैं कहा रखता हूँ. मैंने तो छोड़ दिया है.. घर पर नहीं है.. पर आपको सच में पीनी है?

तो क्या मैं मज़ाक़ कर रही हूँ तुझसे?

ठीक है मैं रास्ते से ले लेता हूँ..
सूरज बाइक रोक कर एक पनवाड़ी से एक अल्ट्रा माइल्ड का पैकेट और लाइटर ले आता है और सुमित्रा के साथ घर पहुंच जाता है..

घर के अंदर आने के बाद सूरज सुमित्रा से - माँ लो.. मैं ऊपर जा रहा हूँ सोने..

सुमित्रा सूरज का हाथ पकड़ के अपने बैडरूम में लाती हुई - ऊपर क्यों जा रहा है हनी.. आज मेरे साथ यही सोजा.. चल..

ठीक है माँ.. कपड़े तो बदल के आने दो.. मूझे कन्फर्ट होना है..

ठीक जा.. जल्दी आना..

सुमित्रा सिगरेट लाइटर रख देती है और अपनी साड़ी निकाल देती है.. फिर कुछ सोचती है और बाथरूम में जाकर सुमित्रा अपने ब्लाउज को खोलकर अपनी ब्रा उतार देती है और ब्लाउज वापस पहन लेती है जिसमे से उसके बूब्स और निप्पल्स आकर्षक लग रहे थे.. सुमित्रा सूरज को अपना बदन दिखाना चाहती थी उसी के लिए उसने इतना सब किया था..

सूरज वापस टीशर्ट और लोवर पहन कर सुमित्रा के बेडरूम में आता है और अपनी माँ को ऐसे देखकर मुस्कुराते हुए कहता है - क्या बात है माँ.. पापा अगर आपको ऐसे देख लेते तो पक्का उनकी तोप आपको सलामी दे देती है..

सुमित्रा सिगरेट लाइटर उठाकर सूरज के पास आती हुई - उनकी तोप तो जंग खा चुकी थी है.. तू ये बता इसे पीते कैसे है?

सूरज सुमित्रा से सिगरेट और लाइटर ले लेता है और फिर सुमित्रा के पीछे जाकर उसे बाहों में भरते हुए कहता है - माँ.. सबसे पहले तो आपको पैकेट से सिगरेट निकालकर अपने इन गुलाबी होंठों पर लगानी पड़ेगी ऐसे.. फिर इस लाइटर से जलानी पड़ेगी.. ऐसे.. अब कश अंदर खींचकर धुआँ बाहर छोड़ना पड़ेगा...

सुमित्रा पहले कश में खाँसने लगती है..

सूरज - आराम से माँ.. हल्का हल्का कश खींचो.. हाँ ऐसे.. लो सिख गई आप तो.. कोई बड़ी बात तो थी ही नहीं इसमें..

सुमित्रा सिगरेट का कश लेकर धुआँ छोड़ते हुए - अब तू मूझे ऐसे ही पीछे से पकड़ के मत खड़ा रह... कहीं तेरी तोप ना सलामी देने लग जाए मूझे..

सूरज सुमित्रा को पलटकर आगे से बाहों में भरता हुआ - अब ऐसे बिना ब्रा के ब्लाउज पहनोगी तो कुछ भी हो सकता है माँ..

सुमित्रा हसते हुए सिगरेट का कश लेकर - माँ के हाथ का एक थप्पड़ पड़ेगा ना तो सारा भुत उतर जाएगा.. समझा? अब क्या रातभर मूझे ऐसे बाहों में लेकर खड़ा रहेगा तू?

सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था.. उसे आज पहली बार सुमित्रा के खिलखिलाकर हसते चेहरे में आपनी माँ नहीं बल्कि एक खूबसूरत जवाँ औरत दिखाई देरही थी जो अपनी पति के बुड्ढे हो जाने के कारण सालों से प्यासी थी.. सुमित्रा का हुस्न सूरज को बहकने पर मजबूर कर रहा था.. जिसे सूरज समझ रहा था और उसने अपने पर काबू रखते हुए
सुमित्रा को बाहों से आजाद कर दिया और बेड पर लेटते हुए बोला - लाइट बंद कर देना माँ..


सुमित्रा ने सिगरेट के कश लेगाते हुए लाइट ऑफ करके अपने फ़ोन की टॉर्च ऑन करके फ़ोन को उल्टा रख दिया ताकि कमरे में कुछ रौशनी रहे.. फिर सूरज के करीब आकर लेटते हुए कहा - नींद आ रही है बेटू?

सूरज सुमित्रा के करीब खिसक कर सुमित्रा का हाथ पकड़ कर चूमते हुए - नहीं.. मूझे देर से सोने की आदत है माँ.. आप सोजाओ..

सुमित्रा सिगरेट बुजाकर अपना हाथ सूरज की गर्दन के नीचे से लेजाकर उसे अपनी तरफ झुकाते हुए - किसका फ़ोन आ रहा है?

कोई नहीं है माँ सो जाओ..

बात तो कर ले.. बेटू.. इम्पोर्टेन्ट होगा..

नहीं माँ.. इम्पोर्टेन्ट नहीं है..

ला मूझे दे फिर मैं बात करती हूँ..

नहीं माँ.. रहने दो अपने आप कट जायेगा..

सुमित्रा सूरज का फ़ोन लेकर फ़ोन उठा लेटी है..

सामने से एक लड़की - हेलो हनी..

सुमित्रा - कौन?

लड़की फ़ोन काट देती है..

सुमित्रा - कौन थी ये?

सूरज - चिंकी थी.. सुबह से फ़ोन कर रही है.. मैंने कह दिया बिजी हूँ.. फिर भी नहीं सुन रही थी..

सुमित्रा - अब परेशान करें तो बता देना इसे अच्छे से समझा दूंगी..

सूरज हसते हुए - परेशान नहीं कर रही माँ.. बेचारी बहुत ख्याल रखती है मेरा.. वापस जाने से पहले मिलना चाहती है एक बार..

सुमित्रा गुस्से से - मिलना चाहती है या सोना चाहती है तेरे साथ?

सूरज हसते हुए - आपको जलन हो रही है ना? सच बताना?

सुमित्रा - मैं क्यों जलने लगी किसी से? वो भी उस चिंकी से..

सूरज सुमित्रा को बाहों में भरके अपने ऊपर खींचते हुए - झूठ बोलते वक़त ना आपके होंठो कापने लगते है..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए - तुझे शर्म वर्म है या नहीं.. अपनी माँ को अपने ऊपर लेटा रखा है तूने.. छोड़ मूझे..

सूरज मुस्कुराते हुए - लेटा ही तो रखा है माँ.. कोनसा आपके खेत में हल चला दिया मैंने..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए - तेरा क्या भरोसा? हल भी चला दे और फसल ऊगा के मेरा पेट भी फुला दे..

सूरज सुमित्रा को अपने नीचे लेकर उसके ऊपर आता हुआ - आप इज़ाज़त दोगी तो वो भी हो जाएगा माँ.. आपकी ख़ुशी के लिए कुछ भी..

सुमित्रा - तेरे पापा और भैया को क्या कहूँगी? कि ये फसल कौन ऊगा गया फिर?

सूरज - वो आप जानो.. मूझे उससे क्या मतलब..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए - वाह जी वाह कितना फरेबी है तू.. सो जा अब चुपचाप से.. वरना तेरी तोप पर ताला लगा दूंगी..

सूरज सुमित्रा के गाल चूमते हुए - माँ नियत खराब हो रही है मेरी..

सुमित्रा हसते हुए - मुझे सब महसूस हो रहा है.. जाकर पहले बाथरूम में इसे शांत करके आ.. वरना रात को तेरा क्या भरोसा.. आधी रात को अपनी माँ पर है चढ़ाई शुरु कर दे..

सूरज - पर शांत करू किसके नाम पर?

सुमित्रा - तुझे जिसके नाम पर करना है कर ले.. अपना फ़ोन लेजा.. नेट पर देख लाना किसी को..

सूरज उदासी का नाटक करते हुए - ऐसे नहीं होगा..

सुमित्रा - तो क्या मैं पकड़कर शांत करू तुझे?

सूरज - आईडिया बुरा नहीं है.. चलो आप है कर देना..

सुमित्रा के तन बदन में सूरज कि मुट्ठी मारने का ख्याल करेंट कि तरह दौड़ गया और वो झट से खड़ी होकर सूरज का हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम ले गयी और बोली - किसी सेइस बारे मे कहा ना तो देख लेना..

सूरज सुमित्रा के बूब्स देखते हुए लोवर सरका देता है जिससे सूरज का लंड थप्पड़ की तरह घुटनो पर बैठी सुमित्रा के गाल पर पड़ता है जो पूरा खड़हुआ था जिसे देखकर सुमित्रा की आँखे चमक जाती है..

सुमित्रा लंड पकड़ कर हिलाते हुए कहती है - अपनी माँ से ये सब करवा रहा है.. तुझे नर्क मिलेगा..

सूरज सुमित्रा के कंधे पर हाथ रखकर - अह्ह्ह माँ.. साथ में जाएंगे.. वहा भी शांत कर देना.. कितने मुलायम हाथ है आपके..

सुमित्रा लंड हिलाते हुए उसी लंड से चुदने के ख्याल लेती है और कामुक होकर जोर जोर से सूरज का लंड हिलाने लगती है जिससे सुमित्रा की चुडिया खन खन करके बजने लगती है..

सूरज हसकर फ़ोन से सुमित्रा का वीडियो बनाते हुए - माँ बिलकुल पोर्नस्टार लग रही हो..

सुमित्रा सूरज को फ़ोन के साथ देखकर गुस्से मे लंड हिलाना छोड़कर बाथरूम से बाहर जाते हुए - फोटो क्यों ले रहा है तू? अपने हाथ से कर ले मैं नहीं करने वाली अब...

सुमित्रा जैसे ही खड़ी होती है सूरज फ़ोन रखकर सुमित्रा को बाहो मे भर लेता है और कहता है - अच्छा सॉरी.. आप नाराज़ मत हो.. डिलीट कर दूंगा ना अभी.. प्लीज..

सुमित्रा वापस घुटनो पर आते हुए - अब फ़ोन के हाथ लगाया तो देख लेना तू..

सुमित्रा वापस लंड हिलाने लगती है वही सूरज अपनी मा को देखते हुए कामुकता से कुछ सोचने लगता है की तभी सूरज के फ़ोन पर जयप्रकाश का फ़ोन आ जाता है..

सूरज पहिने उठाकर - हेलो..

हाँ हनी.. तेरी मम्मी कहाँ है? फ़ोन नहीं उठा रही..

सूरज सुमित्रा को लंड हिलाता देखकर - मम्मी साथ ही है पापा.. रुको बात करता हूं..

सूरज सुमित्रा को फ़ोन देते हुए - लो पापा का फ़ोन है बात करो..

सुमित्रा लंड हिलाना छोड़कर हैरानी से - हेलो..

सुमित्रा?

जी बोलिये?

सुमित्रा.. दीदी का फ़ोन आया था.. परसो मुन्ने के जन्मदिन का कार्यक्रम है.. कल कुछ अच्छा सा तोहफा ले लेना..

ठीक है जी.. आपने खाना खाया ना?

हां खा लिया.. सुमित्रा..

सुमित्रा और जयप्रकाश आपस मे बात कर रहे थे वही सूरज ने अब लंड अपने हाथ से पकड़ लिया था और सुमित्रा के मुँह पर टारगेट करके अपने लंड को हिलाते हुए मुठ मार रहा था सूरज ने सुमित्रा और जयप्रकाश की बात ख़त्म होने से पहले ही सुमित्रा के चेहरे को अपने वीर्य की गाडी गाडी धार से अलंस्कृत कर दिया.. सुमित्रा शर्म और गुस्से के मिश्रित भाव से भरकर रह गई और फ़ोन चालू होने के कारण सूरज को कुछ बोल ना पाई..

सूरज झड़ने के बाद अपने आपको ठीक करके बाहर आ जाता है..

सुमित्रा फ़ोन कट होने पर बाथरूम बंद कर देती है और सूरज ने जो वीर्य गिराया था उसे कुतिया बनकर जीभ से चाटने लगती है उसे हवस का नशा चढ़ गया था और बाथरूम के अंदर वो अपनी चुत में ऊँगली करते हुए सूरज का वीर्य चाट रही थी.. कुछ देर बाद वो भी शांत होकर बाहर आ गई और सूरज के पास आ कर लेट गई..

सूरज ने सुमित्रा के अपनी बाहो मे कस लिया और सुमित्रा की गर्दन पर चूमकर वैसे ही सो गया सुमित्रा भी बिना कुछ बोले कामसुःख के पहले पायदान पर मुस्कुराते हुए सूरज की बाहो मे चैन की नींद सो गई..


***************


गरिमा को इंतज़ार करते हुए अब कुछ दिन हो गए थे उसका दिल अब दुखने लगा था वो मन ही मन सूरज को चाहने लगी थी और उससे बात ना हो पाने के कारण उसका मन उसे दुखी कर रहा था.. गरिमा भी अपनी ज़िद छोड़कर आगे से सूरज से बात नहीं करना चाहती थी.. उसकी ज़िद उसीको परेशान कर रही थी एक हफ्ते से ज्यादा का समय हो चूका था और सूरज और गरिमा के बीच कोई बात नहीं हुई थी.. सूरज को तो गरिमा की इतनी याद नहीं आती मगर गरिमा सिर्फ उसीको याद कर रही थी.. मगर उसने भी अब अपने मन को समझाना शुरु कर दिया था और सूरज का ख्याल छोड़ने का मन बना लिया था.. मगर इश्क़ के हाथों मजबूर गरिमा की जवानी अब सूरज के नाम पर मचलने लगी थी..

सूरज अपने भाई विनोद के साथ ही उसके ऑफिस में काम करने लगा था.. और काम की वजह से वो बिजी भी रहने लगा था सुबह से शाम ऑफिस में होने के कारण उसका समय बंध गया और उसका लोगों से मिलना जुलना बंद हो गया था..

नज़मा उस रात के बाद से सूरज को अपना मान बैठी थी.. हालांकि उसे पता था सूरज उसे कभी हासिल नहीं हो पायेगा.. मगर आज की रात वो सूरज से मिलकर उसे अपने दिल का हाल बयान करना चाहती थी.. बिलाल ने उसकी अम्मी को वापस मामू को भेज दिया था और सूरज को कॉल करके आज आने के लिए कहा था.. नज़मा का मन मचल रहा था उसे बेसब्री से सूरज का इंतजार था.. रात के 10 बजे थे और बिलाल ने दूकान का शटर बंद कर दिया था.. सूरज अभी अभी सुमित्रा से रातभर बाहर रहने का कोई बहाना बनाकर बिलाल की दूकान के अंदर आकर बैठा था...

बिलाल - हनी.. मैं ऊपर जा रहा हूँ तेरी भाभी अंदर है..

सूरज सर हिला कर ठीक है कहता है और नज़मा के पास आ जाता है..

नज़मा सूरज के अंदर आते ही दरवाजा बंद करके सूरज को अपनी बाहों में भरके बिस्तर पर धकेल देती है और उसके ऊपर आते हुए कहती है..
नज़मा - कब से इंतजार कर रही थी सूरज.. कोई इतना समय लगाता है वापस आने में? एक ही बार में मन भर गया है तुम्हारा मुझसे?

सूरज - काम में बिजी था नज़मा.. और बिना बुलाये कैसे आता?

नज़मा सूरज के होंठो को चूमकर - दिल लग गया है आपसे.. बताओ आज कहा से शुरु करें? आज मैं नहीं शर्माने वाली..

सूरज नज़मा के होंठो को उंगलियों से मसलकर - नज़मा.. होंठों से ही शुरू करते है..

सूरज और नज़मा दोनों एक दूसरे को चूमने लगे जैसे पंछी चोंच लड़ाते है..

चूमते चूमते दोनों एक दूसरे को नंगा करने लगते है.. सूरज नज़मा की कुर्ती और सलवार उतार देता है तो नज़मा सूरज की शर्ट और जीन्स को खोल देती है..
नज़मा चुम्बन तोड़कर सूरज के लंड को पकड़कर बाहर निकाल लेती है और मुंह में भरके चूसने लगती है.. सूरज blowjob मिलने से सुख के सागर में डूब जाता है और नज़मा सूरज का लंड चूसते हुए उसे देखकर सूरज को खुश करने के पुरे प्रयास करने लगती है..

नज़मा सूरज के लंड को पूरी सिद्दत के साथ चूस रही थी और जितना लंड वो मुंह में ले सकती थी लेकर चूस रही थी.. कुछ देर लंड चुसवाने के बाद सूरज ने नज़मा का हाथ पकड़ के अपने ऊपर खींच लिए और फिर से उसके होंठो को चूमकर नज़मा की चड्डी उतारते हुए उसकी गीली चुत में लंड घुसा कर नज़मा को चोदने लगा.. नज़मा ऐसे चुद रही थी जैसे उसे कब से इस तरह सूरज से चुदने का ही इंतजार हो.. सूरज और नज़मा की आँखे एक दूसरे को ही देख रही थी और दोनों की आँखों में काम की इच्छा बैठी थी नज़मा तो दिल से भी सूरज को अपना सब कुछ देना चाहती थी..

नज़मा चुदवाते हुए - अह्ह्ह.. सूरज आराम से.. आज किस बात की जल्दी है आपको? मैं कहीं भाग तो नहीं जाउंगी.. आहिस्ता करो ना.. दर्द होने लगा है..

सूरज प्यार से चोदते हुए - सॉरी नज़मा.. बहक गया था..

नज़मा सूरज का चेहरा चूमकर - पूरी रात आपकी बाहों में ही तो रहूंगी ना सूरज.. मिठाई को स्वाद लेकर चखा जाता है.. निगला नहीं जाता.. समझें?

सूरज - अच्छा जी? मगर मूझे तो अब घोड़ी चाहिए..

नज़मा हस्ती हुई घोड़ी बनकर - लो कर लो सवारी अपनी घोड़ी की..

सूरज नज़मा को घोड़ी बनाकर चोदने लगता है..
रातभर दोनों का मधुर मिलन पुरे चरम पर चलता रहता है..

सुबह के पांच बज चुके थे और सूरज के सीने पर नज़मा छाती के बल लेटी हुई थी उसकी आँखों में आंसू आ गए थे..

सूरज - रो क्यों रही हो?

नज़मा - आप चले जो जाओगे कुछ देर में..

सूरज - तो इसमें रोने की क्या बात है?

नज़मा - मैं तो नहीं रोना चाहती.. अपने आप आंसू आ रहे है आँखों से..

सूरज मुस्कुराते हुए - आप भी ना नज़मा भाभी.. कमाल हो..

नज़मा सूरज के होंठो को दांतो से काटते हुए - भाभी बोलोगे तो आपके होंठों को ऐसे ही काटूंगी सूरज..

सूरज हसते हुए - अब नहीं बोलूंगा.. नज़मा.. अब जाने दे..

नज़मा उदासी से - जल्दी वापस आना सूरज.. आपकी नज़मा आपका इंतजार करेगी..


***************


कितनी खूबसूरत वादिया है ना.. तुम्हे पता है बचपन से मेरा कश्मीर आने का सपना था.. आज पूरा हो गया

अब कोनसी बड़ी हो गई हो तुम? पुरे रास्ते बचकानी बात करती आई हो.. ऐसा लगता है अब भी तुम बच्ची हो.. अब यही खड़े रहकर रात बितानी है या वापस होटल भी चलना है? होटल पहुंचते पहुंचते अंधेरा हो जाएगा..

एक हेल्प करोगो मेरी?

क्या?

मुझसे वापस नीचे नहीं उतरा जाएगा.. पैरों में बहुत थकान है.. मूझे उठाकर नीचे ले जाओ ना प्लीज..

हम्म.. ठीक है पर उसके अलग से 5 परसेंट लगेंगे.. बोलो मंज़ूर है तो..

ऐसे तुम मूझे कुछ भी नहीं दोगे.. 50:50 करना था कुछ ही दिनों में 60:40 हो गया.. अब भी तुमको और प्रॉपर्टी चाहिए..

मैंने फ़ोर्स थोड़ी किया है.. तुम्हरी मर्ज़ी है..

अच्छा ठीक है.. लो उठाओ मूझे..

रमन तितली को अपने बाहों में उठाकर पहाड़ से नीचे उतरने लगता है और तितली रमन की गोद में उसका चेहरा देखती हुई सोचती है कि वापस लौटने पर वो रमन की शादी की शर्त मान लेगी और धीरे धीरे रमन को अपना बना लेगी.. उसे इन कुछ दिनों में रमन से इश्क़ हो गया था जिसका उसे अहसास था और अब वो रमन के आस पास ही रहना चाहती थी.. उसे देखकर तितली को सुकून मिलने लगा था.. तितली ने इन कुछ दिनों में रमन को और उसकी आदतो को पूरी तरह नोटिस किया था और उसके अच्छे बुरे हर पहलु से वाक़िफ़ हो रही थी..

तितली के मन की दशा से अनजान रमन का दिल भी तितली के लिए धड़कने लगा था उसे इस बात का अहसास तो अब तक नहीं हुआ था मगर वो इतना जान गया था की तितली जितनी खूबसूरत है उतनी ही प्यारी और मासूम भी.. उसकी बातों से रमन को लगाव होने लगा था ये रास्ता अगर इतने आराम से कट सका था तो वो तितली के बातूनी होने के कारण कट सका था..

लो आ गए नीचे.. अब उतरो..

ऐसे कैसे उतर जाऊ.. 5 परसेंट ले रहे हो.. गाडी तक लेके चलो मूझे ऐसे ही..

रमन तितली को बाहों में लिए गाडी तक आता हुआ - हाथों में दर्द होने लगा है..

इतनी भरी हूँ मैं?

हलकी भी तो नहीं हो..

ओ.. 50 किलो की एक लड़की को कुछ देर उठाकर नहीं सकते.. क्या फ़ायदा तुम्हारा मर्द होने का..

रमन गाडी के पास आकर तितली को उतारते हुए - आधा घंटा हो गया.. समझी.. खुद तो महारानी की तरह गोद में आराम कर रही हो.. मूझे तो ऊपर से नीचे आना पड़ा ना तुम्हे गोद में लेके.. और गाडी तक भी नहीं चल सकती.. बात करती हो..

ज्यादा दर्द कर रहे है तुम्हारे हाथ? कहो तो दबा देती हूँ.. आराम आ जाएगा..

तुम्हे डॉक्टर किसने बना दिया? नर्स भी बनने के काबिल नहीं हो..

अच्छा जी.. ऐसा बोलोगे ना तो ऐसा इंजेक्शन लगाउंगी तुम्हारे बम पर कि याद रखोगे..

रमन गाडी चलाते हुए - तुमसे इलाज कौन करवायेगा.. बीमार को और बीमार ना कर दो कहीं.. मैं दूर ही रहना पसंद करूंगा..

तितली सिगरेट जलाते हुए - तुम दूर जाओगे तो मैं तुम्हारे पास चली आउंगी.. अब तो दोस्ती भी हो गई है हमारी..

कितनी सिगरेट पीती हो यार.. कहीं तुम्हे ही अपना इलाज़ ना करवाना पड़ जाए.. डॉक्टर होकर भी अपना ख्याल नहीं रख सकती..

तितली कश लेकर धुआँ छोड़ते हुए - तुम हो ना ख्याल रखने के लिए.. जब से घूमने निकले है तुम्ही मेरा ख्याल रख रहे हो.. ऐसा लगता है सच मुच के पति हो..

बना लो.. मैं तो तैयार हूँ तुम्हारा पति बनने के लिए..

और पूरी प्रॉपर्टी लेने के लिए भी.. मेरे हाथ में पकड़ा दोगे कटोरा और बोलोगे.. कुछ चाहिए तो चलो मुझसे भीख मांगो..

तो क्या हुआ.. तुम्हारी नाक छोटी हो जायेगी उसमे? पत्नी तो पति से मांगती ही है जो उनको चाहिए होता है..

तितली सिगरेट पीते हुए - एक बात बताओ.. अगर मैं शादी करू तुमसे.. तो सोओगे मेरे साथ?

रमन हसते हुए - सोना होगा तो किसी रुस्सियन के पास चला जाऊंगा.. तुम्हारे साथ क्यों सोऊंगा.. तुम तो बिस्तर में भी पक्का दोगी बोल बोल के..

तितली सिगरेट फेंकते हुए - ऐयाशी करनी ही आती है तुम्हे.. बस..

रमन - होटल आ गया.. पैरों से चलना पसंद करोगी या यहां भी गोद में उठा के ले जाना पड़ेगा डॉक्टर साहिबा को?

तितली मुस्कुराते हुए - रहने दो.. तुम और 5 परसेंट माँगने लग जाओगे..

तितली और रमन होटल के एक रूम में आ जाते है..

रमन आग के पास बैठकर हाथ सकता हुआ तितली से कहता है - एक बात बताओ.. घर पर तो अकेली सोती हो.. फिर बाहर अकेले सोने में डर क्यों लगता है तुम्हे?

तितली नाईट ड्रेस लेकर बाथरूम जाते हुए - वो सब तुम्हे क्यों बताऊ? क्या लगते हो तुम मेरे?

तुमने ही तो कहा था दोस्त है..

दोस्त हो तो दोस्त की तरह चुपचाप सोफे पर सो जाओ.. मैं तुम्हारी हर बात का जवाब नहीं देने वाली..
तितली बाथरूम जाकर नाईट ड्रेस पहनकर वापस आ जाती है और बेड पर लेट जाती है और चश्मा लगा कर फ़ोन में घुस जाती है...

रमन भी अपने कपडे बदल कर सोफे पर लेटते हुए - चश्मे में बहुत क्यूट लगती हो.. मैं बस बता रहा हूँ..

तितली - रिसेप्शन से एक्स्ट्रा ब्लेंकेट मंगवा लो... ऐसे तो बीमार हो जाओगे..

रमन - कॉल किया था.. नोट अवेलेबल कहा उन्होंने.. वैसे इतनी परवाह है तो अपना दे दो..

तितली कुछ सोचकर - फिर मैं क्या ओढ़ँगी? तुम चाहते हो मैं बीमार हो जाऊ? कितने मतलबी इंसान हो ना..

रमन - मतलबी होता तो तुम्हे सोफे पर सोना पड़ता.. हर रात.. पिछले डेढ़ हफ्ते से मूझे कभी सोफे पर तो कभी नीचे फर्श पर सोना पड़ रहा है.. और मूझे मतलबी कह रही हो..

तितली हस्ती हुई - अच्छा ठीक है.. तुम भी यहां बेड पर आ जाओ.. आज रात मज़बूरी है तो एक ब्लैंकेट से काम चला लेते है..

रमन मुस्कुराते हुए - सोच ले.. एक जवाँ मर्द को अपने बिस्तर में बुला रही हो.. कहीं कोई काण्ड ना हो जाए..

तितली हसते हुए - मूझे अगर तुम्हारा हाथ छुआ भी ना.. तो जो प्रॉपर्टी का 65:35 तय हुआ है वो वापस 100:00 हो जाएगा.. याद रखना..

रमन तितली के पास कम्बल में आकर - बहुत होट हो तुम तो.. पूरा गर्म किया हुआ है अंदर से..

तितली हस्ती हुई - सो जाओ चुपचाप.. समझे

रमन - वैसे कर क्या रही हो?

तितली फ़ोन दिखाते हुए - आज की फोटोज है.. कुछ इंस्टा पर पोस्ट की है.. देखो कितनी अच्छी तस्वीरे आई है आज..

रमन - मेरी तस्वीर क्यों पोस्ट की?

तितली - 2-3 पिक ही तो पोस्ट की है तुम्हारी.. उसमे क्या हो गया.. रियेक्ट तो ऐसे कर रहे हो जैसे कोई नंगी तस्वीर पोस्ट कर दी हो तुम्हारी.. देखो कितने प्यारे लग रहे हो.. शकल देखकर कौन कहेगा तुम पैसो के पीछे पागल हो..

रमन - कुछ भी बोलने लगी हो.. बाप की जायेदाद बेटे की ही तो होती है.. तुम कुछ ज्यादा नहीं खुल गई मेरे साथ?

तितली फ़ोन रखकर - तो? क्या करोगे तुम? रिपोर्ट लिखाओगे मेरे खिलाफ?

रमन का मन तितली को इस वक़्त चुम लेने का हो रहा था मगर वो अपने आप पर काबू रखने को मजबूर था और नहीं चाहता था कुछ ऐसा वैसा करें.. मगर तितली तो दुआ करने लगी थी की रमन कोई पहल करें और दोनों मोहब्बत के सागर में कश्ती हाँकने लगे.. मगर ऐसा हुआ नहीं.. दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे और चुप थे.. फिर रमन ने करवट बदल ली और बोला - गुडनाईट..

रमन से गुडनाइट सुनकर तितली का मुंह उतर गया उसे लगा था की रमन शायद उसे चुम लेगा और अपनी बाहों में भरके उसके साथ आज रात प्यार मोहब्बत की हद तक आ जाएगा.. मगर ऐसा हुआ नहीं..

दिल पर पत्थर रखकर तितली ने भी कहा - गुडनाइट...
तितली की आँखों में नींद नहीं थी.. वो रमन को देखकर कभी प्यार से भर जाती तो कभी उसकी तरफ देखकर रमन को मन ही मन गालिया देते हुए उसकी ऐसी हालात करने का दोष देकर कोसने लगती..

तितली की मोहब्बत रमन के लिए बढ़ती जा रही थी और तितली अच्छे से इस बात को जानती थी उसे रमन से इन कुछ दिनों में इश्क़ हो गया था.. ये जानते हुए भी कि रमन उसका सौतेला भाई है.. तितली रमन के साथ जीने के ख़्वाब देखने लगी थी और अब उसने रमन के मुताबिक खुदको ढालने का निर्णय ले लिया था.. पूरी रात रमन उसी तरह सोता और नींद में भी उसका हाथ तितली को नहीं छुआ.. तितली चाहती थी की कम से कम नींद में ही रमन उसके साथ कोई छेड़खानी करें मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं..

सुबह रमन की आँख खुली तो उसने देखा तितली नहाकर बाथरूम से बाहर आइ है और उसके बाल उसकी कमर तक ऐसे लहरा रहे थे जैसे नागिन हो.. तितली ने एक आसमानी रंग का लाहौरी सूट पहना था जिसमे वो गज़ब की खूबसूरत लग रही थी..

तितली ने रमन को जागते देखा तो रूम में रखे सामान से एक कप चाय बनाकर रमन को देते हुए बोली - नहा लो.. आज वापस घर के लिए निकलना था ना..

रमन चाय लेकर पीते हुए - थैंक्स..
रमन चाय पीकर नहाने चला जाता है ब्रश वगैरा करके नहाकर बाहर आ जाता है आज उसने जान बूझकर सिर्फ तौलिया अपने बदन पर लपेटा था और कमर से ऊपर वो नंगा था.. तितली ने पहली बार तिरछी नज़रो से रमन को घुरा था और वो उसके गठिले सुन्दर शरीर को आँखों से भोग रही थी.. रमन ने जल्दी से कपड़े पहने फिर तितली के साथ होटल में ही खाना खाकर अपना सामान उठाकर तितली के साथ बाहर गाडी में आकर बैठ गया...
रमन गाडी चलाने लगा और अब काफी देर तक दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई....

तितली ने काफी देर बाद रमन को देखकर कहा - मोन वर्त है तुम्हारा आज?

नहीं तो.. क्यों?

तो कुछ बात करो ना.. इतना चुप क्यों हो? बोर हो रही हूँ..

ऐसा है.. मैं तुम्हे इंटरटेन करने के लिए यहां नहीं लाया हूँ समझी? अभी मेरा मन नहीं है कुछ बोलने का.. जब होगा तब बोलूंगा..

तितली सिगरेट होंठों पर लगाती है तो रमन सिगरेट छीनकर बाहर फेंकता हुआ कहता है - और बार बार ये सिगरेट पीना बंद करो.. बीमार हो जाउंगी तो मूझे ही संभालना पड़ेगा..

तितली मुस्कुराते हुए - लगता है दिल आ गया जनाब का मुझ पर.. क्या बोलते थे? छिनाल.. गोल्डडीग्गर.. अब इतना ख्याल रखने लगे हो मेरा..

तुम्हारी गलतफहमी है.. मैं कोई ख्याल नहीं रख रहा बस बिना किसी परेशानी के घर पहुंचना चाहता हूँ.. फिर शान्ति संभाल लेगी तुम्हे..

तितली हसते हुए - मैं अपना ख्याल रख सकती हूँ.. कम से कम गाने तो चला दो इसमें..

तुम ही चला लो..

तितली एक पुराना गाना चलाते हुए - तुम्हारे लिए चलाती हूँ.. लो सुनो.. मैं तो बेघर हूँ.. अपने घर ले चलो.. घर में मुश्किल.. तो दफ़्तर ले चलो..

रमन मुस्कुराते हुए - पागल हो तुम..

तितली हसते हुए - और तुम पैसो के लिए एक पागल से शादी करना चाहते हो..

रमन - बार बार वही बात क्यों लाती हो?

तितली - सच ही तो कहती हूँ.. कुछ गलत तो नहीं कहा मैंने..

रमन - तो तुम ही छोड़ ना प्रॉपर्टी.. तुम क्यों पीछे पड़ी हो प्रॉपर्टी के?

तितली - और बिना पैसो के क्या करु? साध्वी बन जाऊ?

रमन - वो सब तुमसे नहीं हो पायेगा.. तुम मेरी PA बन जाना.. सारा काम संभाल लेना.. जो सेलेरी लेना चाहो ले लेना..

तितली - और मैं कोर्ट में केस करके पूरी प्रॉपर्टी लेकर तुम्हे अपना PA बना लू तो? आईडिया तो वो भी अच्छा है.. बोलो बनोगे मेरे PA?

रमन - उससे अच्छा तो मैं यहां किसी नदी में कूद जाऊ और जान दे दू...

तितली गुस्से में - रमन... क्या कुछ भी बोलते हो.. तुमसे बात ही नहीं करनी मूझे..

रमन - तुम्हे क्या हो गया एक दम से?

तितली सिगरेट जलाकर कश लेते हुए - कुछ नहीं.. तुम्हे बात नहीं करनी ना.. कुछ नहीं बोलूंगी मैं अब..

रमन - हुआ क्या है?

तितली बाहर देखते हुए - कुछ नहीं..

तितली रमन के खुदखुशी करने की बात पर उससे नाराज़ हो गई थी भले ही रमन ने ये बात यूँही कही थी मगर तितली को वो मज़ाक़ भी पसंद नहीं आया था उसे रमन से प्यार हो गया था और वो उसके लिए अब कुछ भी बुरा सुनने को तैयार नहीं थी.. रमन के खुदके मुंह से भी नहीं.. रमन गाडी चला रहा था और तितली सिगरेट के कश लगाते हुए रमन के साथ जिंदगी बिताने के ख़्वाब देखने लगी थी.. कुछ ही दिनों में रमन और तितली वापस घर लौट आये..

 

ayush01111

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Update 12



जयप्रकाश जी आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी पहले तो मीटिंग टल गई तो बच गए.. अब कल मीटिंग में अब क्या करूंगी मैं? आपने इतनी इम्पोर्टेन्ट फ़ाइल खो दी..

मैडम मैंने टेबल पर ही रखी थी.. अक्सर वहा से कुछ नहीं खोता मगर ये फ़ाइल ना जाने कैसे गुम हो गई..
मैं कुछ नहीं जानती जयप्रकाश जी.. आपके ऊपर पर मूझे अब करवाई करनी होगी वरना इसे मेरा फैलियर समझा जाएगा.

मैडम आप ऐसा मत कहिये.. मैंने आज तक कोई लापरवाही नहीं की है.. ये पहली बार है.

मैं कुछ नहीं जानती मे लिखित मे जवाब दो

चपरासी - मैडम आप येल्लो फ़ाइल के बारे में पूछ रही है क्या?

गुनगुन - हाँ क्यों तुम्हे पता है वो फ़ाइल कहा है?

चपरासी - जी मैडम.. उस दिन जयप्रकाश जी ने वो फ़ाइल टेबल पर रखी थी और मैं छूटी पर जा रहा था इसलिए मैंने सब चीज जगह पर रख दी थी.. मगर वो फ़ाइल गलती से मैं अपने सामान के साथ घर ले गया था.. आज वापस आया तो पता चला आप कोई फ़ाइल ढूंढ रही है.. वो फ़ाइल मेरे पास है.. मैं अभी घर से ले आता हूँ.

गुनगुन - आप फ़ोन पर ये बात नहीं बता सकते थे.. खाम्मखा जयप्रकाश जी को मैंने कितना कुछ भला बुरा कह दिया.. जाइये जल्दी लेकर आइये वो फ़ाइल.

जयप्रकाश चपरासी से - जा जल्दी..

गुनगुन - जयप्रकाश जी.. मैंने जो भी आपसे कहा उसे आप मेरी गलती समझके माफ़ कर दीजियेगा.. आप मुझसे उम्र में इतने बड़े है मूझे आपसे इतनी बदतमीजी से बात नहीं करनी चाहिए थी.

जयप्रकाश - कोई बात नहीं मैडम..


**************

सूरज आज विनोद के साथ उसके ऑफिस चला गया था और उसने वही पर जॉब के लिए हामी भी भर दी थी.. अगले दिन से उसने काम करना भी शुरु कर दिया.. आज पूरा दिन सूरज ऑफिस में बैठा काम कर रहा था.. शाम के 6 बजे उसने अपना काम समेटा और ऑफिस से बाहर आ गया..

हनी..

हाँ भईया?

हनी मूझे अचानक से ऑफिसटूर पर जाना पड़ेगा दो दिन के लिए.. तू मेरी बाइक लेके घर चला जा और पापा को बता देना.

ठीक है भईया.

हनी घर आ जाता है..

आ गया? विनोद कहा है?

भईया को ऑफिस टूर पर चले गए दो दिन तक बाहर ही रहेंगे..

लो बताओ.. तेरे पापा को भी उनकी मैडम अपने साथ मीटिंग के लिए जयपुर ले गई.. दोनों एक साथ ही गए है..

छोडो ना माँ.. आ जाएंगे.. आज सुबह से चेयर पर बैठे बैठे बदन अकड़ गया है.. एक कप अदरक वाली चाय पीला दो...

सुमित्रा प्यार से - तू कपड़े बदल कर हाथ मुंह धोले मैं अभी बनाके लाती हूँ..

सूरज ऊपर जाते हुए - हाथ मुंह धोने से काम नहीं चलेगा माँ.. नहाना पड़ेगा..

सूरज नहाने के बाद लोवर टीशर्ट डाल लेता है और तभी सुमित्रा चाय का कप हाथ में लेकर उसके कमरे में आ जाती है..

सुमित्रा - ले बेटू.. चाय पिले..

सूरज का कप लेकर - थैंक्स माँ..

सुमित्रा - केसा रहा काम का पहला दिन..

सूरज चाय पीता हुआ - बताया तो.. बहुत बोरिंग.. मूझे तो समझ नहीं आता भईया कैसे पूरा दिन कुर्सी पर बैठे रहते है..

सुमित्रा - थोड़े दिनों में तेरी भी आदत हो जायेगी बेटू.. अच्छा खाने में क्या बनाऊ?

सूरज चाय का कप रखकर सुमित्रा को बाहो में भरते हुए - कुछ बनाने की जरुरत नहीं है.. आज आप और मैं बाहर खाना खाके आएंगे..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए सूरज के बालों में हाथ फेरकर - चलो अच्छा है कम से कम एक दिन तो घर के काम से छूटी मिलेगी मूझे.. मगर तू कुछ अच्छा तो पहन.. इतना हैंडसम बेटा पैदा किया है मैंने.. हमेशा बस ये टीशर्ट और लोवर पहन के रखता है..

सूरज सुमित्रा को बाहों से आजाद करते हुए - आप नीचे चलो मैं कपड़े बदल के आता हूँ..

सूरज टीशर्ट और लोवर उतारकर एक जीन्स और चेक शर्ट पहन लेता है जिसमे काफी आकर्षक लगता है..

माँ चलो...

सुमित्रा - अब देख कितना प्यारा लग रहा है.. जैसे कोई हीरो हो..

सूरज - इतनी तारीफ़ मत करो.. कभी खुदको आईने में देखा है आपने? अभी भी कितनी अच्छी दिखती हो.. मगर आप तो पापा की तरह खुदको भी बुड्ढा समझ बैठी हो..

सुमित्रा हसते हुए - अच्छा बस बस.. रुक मैं पर्स लेके आती हूँ..

सूरज सुमित्रा को एक रेस्टोरेंट में लेके आ जाता है.. जहाँ की चकाचोध सुमित्रा देखते ही हैरान हो जाती है..

हनी.. ये रेस्टोरेंट है या महल?

पहले हवेली थी माँ.. अब रेस्टोरेंट बना दिया इसे.. खाना अच्छा मिलता है यहां.. बैठो..

सुमित्रा और सूरज रेस्टोरेंट के फर्स्ट फ्लोर पर एक टेबल पर बैठ जाते है और सुमित्रा आस पास के लोगों को और नजारो को देखने लगती है फिर पास में एक लड़की को शार्ट स्कर्ट मे सिगरेट पीते देख सूरज से कहती है..

हाय रे.. आजकल की लड़कियों को तो कोई शर्म ही नहीं है खुले आम सिगरेट पिने लगी है.. वो ऐसे छोटे छोटे कपडे पहन कर.. पाता नहीं इनके माँ बाप कैसे झेलते होंगे ऐसी लड़कियों को? देखने में किसी भले घर की लगती है पर हरकतें देखो.. ना कोई शर्म ना लिहाज़..

सूरज हसते हुए - आप भी ना माँ.. ये सब तो बहुत आम है.. और आपने कभी मूझे तो इतना कुछ नहीं बोला जब पकड़ा था सिगरेट पीते हुए छत पर..

अरे तेरी बात और है.. तू लड़का है.. मगर लड़कियों को तो कायदे से रखना चाहिए.. किस काम की ऐसी खुली आज़ादी.. जो बिगाड़ कर रख दे..

मतलब आप कह रही हो कि सिगरेट पिने वाली लड़किया बिगड़ी हुई होती है.. यही ना?

और क्या... कौन भला समझेगा ऐसी लड़कियों को? ना परिवार का डर, ना समाज का.. घर कैसे बसाएगी ये?

रहने दो माँ.. अब टाइम बदल चूका है.. सबको अपने मन की करने की आजादी है.. आप नहीं पीती इसका मतलब ये तो नहीं कि आप किसी और को भी ना पिने दो.. उसकी मर्ज़ी वो जो करें.. आपकी मर्ज़ी जो आप करो..

वेटर - सर आर्डर?

हाँ.. ये सब ले आओ.. माँ कुछ और मांगना है?

नहीं ठीक है...

वेटर चला जाता है..

सुमित्रा - मेरी मर्ज़ी जो मैं करू.. अच्छा? कल को मेरी मर्ज़ी बोलके मैं घर छोड़ जाऊ तो तेरे पापा जाने देंगे मूझे?

यार माँ कहा की बात कहा ले जा रही हो.. मैं बस इतना कह रहा हूँ.. आपको सिगरेट पीनी है तो आप भी पी लो.. उसमे क्या प्रॉब्लम है? उसको पीनी है वो पी रही है.. बस..

हम्म.. मैं सिगरेट पी लू.. ताकि तेरे पापा और बुआ मिलकर मेरा जीना हराम कर दे.. यही कहना चाहता है ना तू?

तो किसने कहा उनके सामने पियो.. छिपकर पी सकती हो अगर आपको पीनी है.. आपको पापा और बुआ का डर है उस लड़की को किसी का नहीं है.. अपनी अपनी लाइफ है माँ.. क्यों इतनी फ़िक्र करनी..

वेटर - सर योर आर्डर..
वेटर खाना रखकर चला जाता है..

लो माँ.. शुरु करो..
सूरज और सुमित्रा खाना खा लेते है और वापस घर आने को चल पड़ते है तभी सुमित्रा सूरज से कहती है - हनी.. अगर मैं सिगरेट पिऊ तो तू कुछ नहीं कहेगा?

मैं क्या कहूंगा? आपकी चॉइस है वो.. इसमें मेरा क्या लेना देना.. हाँ.. अगर आप जरुरत से ज्यादा कुछ करती हो तो मूझे समझाना पड़ेगा आपको..

ठीक है तो तू मूझे सिगरेट पीना सिखाएगा आज.. मैं भी तो देखूँ ऐसा क्या मज़ा मिलता है सिगरेट पिने में लोगों को?

मज़ा नहीं मिलता माँ.. लोग शौक के लिए पीते है.. कुछ लोग डिप्रेशन में पीते है.. कुछ ऐसे ही..

तेरे पास घर पर सिगरेट है?

नहीं.. मैं कहा रखता हूँ. मैंने तो छोड़ दिया है.. घर पर नहीं है.. पर आपको सच में पीनी है?

तो क्या मैं मज़ाक़ कर रही हूँ तुझसे?

ठीक है मैं रास्ते से ले लेता हूँ..
सूरज बाइक रोक कर एक पनवाड़ी से एक अल्ट्रा माइल्ड का पैकेट और लाइटर ले आता है और सुमित्रा के साथ घर पहुंच जाता है..

घर के अंदर आने के बाद सूरज सुमित्रा से - माँ लो.. मैं ऊपर जा रहा हूँ सोने..

सुमित्रा सूरज का हाथ पकड़ के अपने बैडरूम में लाती हुई - ऊपर क्यों जा रहा है हनी.. आज मेरे साथ यही सोजा.. चल..

ठीक है माँ.. कपड़े तो बदल के आने दो.. मूझे कन्फर्ट होना है..

ठीक जा.. जल्दी आना..

सुमित्रा सिगरेट लाइटर रख देती है और अपनी साड़ी निकाल देती है.. फिर कुछ सोचती है और बाथरूम में जाकर सुमित्रा अपने ब्लाउज को खोलकर अपनी ब्रा उतार देती है और ब्लाउज वापस पहन लेती है जिसमे से उसके बूब्स और निप्पल्स आकर्षक लग रहे थे.. सुमित्रा सूरज को अपना बदन दिखाना चाहती थी उसी के लिए उसने इतना सब किया था..

सूरज वापस टीशर्ट और लोवर पहन कर सुमित्रा के बेडरूम में आता है और अपनी माँ को ऐसे देखकर मुस्कुराते हुए कहता है - क्या बात है माँ.. पापा अगर आपको ऐसे देख लेते तो पक्का उनकी तोप आपको सलामी दे देती है..

सुमित्रा सिगरेट लाइटर उठाकर सूरज के पास आती हुई - उनकी तोप तो जंग खा चुकी थी है.. तू ये बता इसे पीते कैसे है?

सूरज सुमित्रा से सिगरेट और लाइटर ले लेता है और फिर सुमित्रा के पीछे जाकर उसे बाहों में भरते हुए कहता है - माँ.. सबसे पहले तो आपको पैकेट से सिगरेट निकालकर अपने इन गुलाबी होंठों पर लगानी पड़ेगी ऐसे.. फिर इस लाइटर से जलानी पड़ेगी.. ऐसे.. अब कश अंदर खींचकर धुआँ बाहर छोड़ना पड़ेगा...

सुमित्रा पहले कश में खाँसने लगती है..

सूरज - आराम से माँ.. हल्का हल्का कश खींचो.. हाँ ऐसे.. लो सिख गई आप तो.. कोई बड़ी बात तो थी ही नहीं इसमें..

सुमित्रा सिगरेट का कश लेकर धुआँ छोड़ते हुए - अब तू मूझे ऐसे ही पीछे से पकड़ के मत खड़ा रह... कहीं तेरी तोप ना सलामी देने लग जाए मूझे..

सूरज सुमित्रा को पलटकर आगे से बाहों में भरता हुआ - अब ऐसे बिना ब्रा के ब्लाउज पहनोगी तो कुछ भी हो सकता है माँ..

सुमित्रा हसते हुए सिगरेट का कश लेकर - माँ के हाथ का एक थप्पड़ पड़ेगा ना तो सारा भुत उतर जाएगा.. समझा? अब क्या रातभर मूझे ऐसे बाहों में लेकर खड़ा रहेगा तू?

सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था.. उसे आज पहली बार सुमित्रा के खिलखिलाकर हसते चेहरे में आपनी माँ नहीं बल्कि एक खूबसूरत जवाँ औरत दिखाई देरही थी जो अपनी पति के बुड्ढे हो जाने के कारण सालों से प्यासी थी.. सुमित्रा का हुस्न सूरज को बहकने पर मजबूर कर रहा था.. जिसे सूरज समझ रहा था और उसने अपने पर काबू रखते हुए
सुमित्रा को बाहों से आजाद कर दिया और बेड पर लेटते हुए बोला - लाइट बंद कर देना माँ..


सुमित्रा ने सिगरेट के कश लेगाते हुए लाइट ऑफ करके अपने फ़ोन की टॉर्च ऑन करके फ़ोन को उल्टा रख दिया ताकि कमरे में कुछ रौशनी रहे.. फिर सूरज के करीब आकर लेटते हुए कहा - नींद आ रही है बेटू?

सूरज सुमित्रा के करीब खिसक कर सुमित्रा का हाथ पकड़ कर चूमते हुए - नहीं.. मूझे देर से सोने की आदत है माँ.. आप सोजाओ..

सुमित्रा सिगरेट बुजाकर अपना हाथ सूरज की गर्दन के नीचे से लेजाकर उसे अपनी तरफ झुकाते हुए - किसका फ़ोन आ रहा है?

कोई नहीं है माँ सो जाओ..

बात तो कर ले.. बेटू.. इम्पोर्टेन्ट होगा..

नहीं माँ.. इम्पोर्टेन्ट नहीं है..

ला मूझे दे फिर मैं बात करती हूँ..

नहीं माँ.. रहने दो अपने आप कट जायेगा..

सुमित्रा सूरज का फ़ोन लेकर फ़ोन उठा लेटी है..

सामने से एक लड़की - हेलो हनी..

सुमित्रा - कौन?

लड़की फ़ोन काट देती है..

सुमित्रा - कौन थी ये?

सूरज - चिंकी थी.. सुबह से फ़ोन कर रही है.. मैंने कह दिया बिजी हूँ.. फिर भी नहीं सुन रही थी..

सुमित्रा - अब परेशान करें तो बता देना इसे अच्छे से समझा दूंगी..

सूरज हसते हुए - परेशान नहीं कर रही माँ.. बेचारी बहुत ख्याल रखती है मेरा.. वापस जाने से पहले मिलना चाहती है एक बार..

सुमित्रा गुस्से से - मिलना चाहती है या सोना चाहती है तेरे साथ?

सूरज हसते हुए - आपको जलन हो रही है ना? सच बताना?

सुमित्रा - मैं क्यों जलने लगी किसी से? वो भी उस चिंकी से..

सूरज सुमित्रा को बाहों में भरके अपने ऊपर खींचते हुए - झूठ बोलते वक़त ना आपके होंठो कापने लगते है..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए - तुझे शर्म वर्म है या नहीं.. अपनी माँ को अपने ऊपर लेटा रखा है तूने.. छोड़ मूझे..

सूरज मुस्कुराते हुए - लेटा ही तो रखा है माँ.. कोनसा आपके खेत में हल चला दिया मैंने..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए - तेरा क्या भरोसा? हल भी चला दे और फसल ऊगा के मेरा पेट भी फुला दे..

सूरज सुमित्रा को अपने नीचे लेकर उसके ऊपर आता हुआ - आप इज़ाज़त दोगी तो वो भी हो जाएगा माँ.. आपकी ख़ुशी के लिए कुछ भी..

सुमित्रा - तेरे पापा और भैया को क्या कहूँगी? कि ये फसल कौन ऊगा गया फिर?

सूरज - वो आप जानो.. मूझे उससे क्या मतलब..

सुमित्रा मुस्कुराते हुए - वाह जी वाह कितना फरेबी है तू.. सो जा अब चुपचाप से.. वरना तेरी तोप पर ताला लगा दूंगी..

सूरज सुमित्रा के गाल चूमते हुए - माँ नियत खराब हो रही है मेरी..

सुमित्रा हसते हुए - मुझे सब महसूस हो रहा है.. जाकर पहले बाथरूम में इसे शांत करके आ.. वरना रात को तेरा क्या भरोसा.. आधी रात को अपनी माँ पर है चढ़ाई शुरु कर दे..

सूरज - पर शांत करू किसके नाम पर?

सुमित्रा - तुझे जिसके नाम पर करना है कर ले.. अपना फ़ोन लेजा.. नेट पर देख लाना किसी को..

सूरज उदासी का नाटक करते हुए - ऐसे नहीं होगा..

सुमित्रा - तो क्या मैं पकड़कर शांत करू तुझे?

सूरज - आईडिया बुरा नहीं है.. चलो आप है कर देना..

सुमित्रा के तन बदन में सूरज कि मुट्ठी मारने का ख्याल करेंट कि तरह दौड़ गया और वो झट से खड़ी होकर सूरज का हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम ले गयी और बोली - किसी सेइस बारे मे कहा ना तो देख लेना..

सूरज सुमित्रा के बूब्स देखते हुए लोवर सरका देता है जिससे सूरज का लंड थप्पड़ की तरह घुटनो पर बैठी सुमित्रा के गाल पर पड़ता है जो पूरा खड़हुआ था जिसे देखकर सुमित्रा की आँखे चमक जाती है..

सुमित्रा लंड पकड़ कर हिलाते हुए कहती है - अपनी माँ से ये सब करवा रहा है.. तुझे नर्क मिलेगा..

सूरज सुमित्रा के कंधे पर हाथ रखकर - अह्ह्ह माँ.. साथ में जाएंगे.. वहा भी शांत कर देना.. कितने मुलायम हाथ है आपके..

सुमित्रा लंड हिलाते हुए उसी लंड से चुदने के ख्याल लेती है और कामुक होकर जोर जोर से सूरज का लंड हिलाने लगती है जिससे सुमित्रा की चुडिया खन खन करके बजने लगती है..

सूरज हसकर फ़ोन से सुमित्रा का वीडियो बनाते हुए - माँ बिलकुल पोर्नस्टार लग रही हो..

सुमित्रा सूरज को फ़ोन के साथ देखकर गुस्से मे लंड हिलाना छोड़कर बाथरूम से बाहर जाते हुए - फोटो क्यों ले रहा है तू? अपने हाथ से कर ले मैं नहीं करने वाली अब...

सुमित्रा जैसे ही खड़ी होती है सूरज फ़ोन रखकर सुमित्रा को बाहो मे भर लेता है और कहता है - अच्छा सॉरी.. आप नाराज़ मत हो.. डिलीट कर दूंगा ना अभी.. प्लीज..

सुमित्रा वापस घुटनो पर आते हुए - अब फ़ोन के हाथ लगाया तो देख लेना तू..

सुमित्रा वापस लंड हिलाने लगती है वही सूरज अपनी मा को देखते हुए कामुकता से कुछ सोचने लगता है की तभी सूरज के फ़ोन पर जयप्रकाश का फ़ोन आ जाता है..

सूरज पहिने उठाकर - हेलो..

हाँ हनी.. तेरी मम्मी कहाँ है? फ़ोन नहीं उठा रही..

सूरज सुमित्रा को लंड हिलाता देखकर - मम्मी साथ ही है पापा.. रुको बात करता हूं..

सूरज सुमित्रा को फ़ोन देते हुए - लो पापा का फ़ोन है बात करो..

सुमित्रा लंड हिलाना छोड़कर हैरानी से - हेलो..

सुमित्रा?

जी बोलिये?

सुमित्रा.. दीदी का फ़ोन आया था.. परसो मुन्ने के जन्मदिन का कार्यक्रम है.. कल कुछ अच्छा सा तोहफा ले लेना..

ठीक है जी.. आपने खाना खाया ना?

हां खा लिया.. सुमित्रा..

सुमित्रा और जयप्रकाश आपस मे बात कर रहे थे वही सूरज ने अब लंड अपने हाथ से पकड़ लिया था और सुमित्रा के मुँह पर टारगेट करके अपने लंड को हिलाते हुए मुठ मार रहा था सूरज ने सुमित्रा और जयप्रकाश की बात ख़त्म होने से पहले ही सुमित्रा के चेहरे को अपने वीर्य की गाडी गाडी धार से अलंस्कृत कर दिया.. सुमित्रा शर्म और गुस्से के मिश्रित भाव से भरकर रह गई और फ़ोन चालू होने के कारण सूरज को कुछ बोल ना पाई..

सूरज झड़ने के बाद अपने आपको ठीक करके बाहर आ जाता है..

सुमित्रा फ़ोन कट होने पर बाथरूम बंद कर देती है और सूरज ने जो वीर्य गिराया था उसे कुतिया बनकर जीभ से चाटने लगती है उसे हवस का नशा चढ़ गया था और बाथरूम के अंदर वो अपनी चुत में ऊँगली करते हुए सूरज का वीर्य चाट रही थी.. कुछ देर बाद वो भी शांत होकर बाहर आ गई और सूरज के पास आ कर लेट गई..

सूरज ने सुमित्रा के अपनी बाहो मे कस लिया और सुमित्रा की गर्दन पर चूमकर वैसे ही सो गया सुमित्रा भी बिना कुछ बोले कामसुःख के पहले पायदान पर मुस्कुराते हुए सूरज की बाहो मे चैन की नींद सो गई..


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गरिमा को इंतज़ार करते हुए अब कुछ दिन हो गए थे उसका दिल अब दुखने लगा था वो मन ही मन सूरज को चाहने लगी थी और उससे बात ना हो पाने के कारण उसका मन उसे दुखी कर रहा था.. गरिमा भी अपनी ज़िद छोड़कर आगे से सूरज से बात नहीं करना चाहती थी.. उसकी ज़िद उसीको परेशान कर रही थी एक हफ्ते से ज्यादा का समय हो चूका था और सूरज और गरिमा के बीच कोई बात नहीं हुई थी.. सूरज को तो गरिमा की इतनी याद नहीं आती मगर गरिमा सिर्फ उसीको याद कर रही थी.. मगर उसने भी अब अपने मन को समझाना शुरु कर दिया था और सूरज का ख्याल छोड़ने का मन बना लिया था.. मगर इश्क़ के हाथों मजबूर गरिमा की जवानी अब सूरज के नाम पर मचलने लगी थी..

सूरज अपने भाई विनोद के साथ ही उसके ऑफिस में काम करने लगा था.. और काम की वजह से वो बिजी भी रहने लगा था सुबह से शाम ऑफिस में होने के कारण उसका समय बंध गया और उसका लोगों से मिलना जुलना बंद हो गया था..

नज़मा उस रात के बाद से सूरज को अपना मान बैठी थी.. हालांकि उसे पता था सूरज उसे कभी हासिल नहीं हो पायेगा.. मगर आज की रात वो सूरज से मिलकर उसे अपने दिल का हाल बयान करना चाहती थी.. बिलाल ने उसकी अम्मी को वापस मामू को भेज दिया था और सूरज को कॉल करके आज आने के लिए कहा था.. नज़मा का मन मचल रहा था उसे बेसब्री से सूरज का इंतजार था.. रात के 10 बजे थे और बिलाल ने दूकान का शटर बंद कर दिया था.. सूरज अभी अभी सुमित्रा से रातभर बाहर रहने का कोई बहाना बनाकर बिलाल की दूकान के अंदर आकर बैठा था...

बिलाल - हनी.. मैं ऊपर जा रहा हूँ तेरी भाभी अंदर है..

सूरज सर हिला कर ठीक है कहता है और नज़मा के पास आ जाता है..

नज़मा सूरज के अंदर आते ही दरवाजा बंद करके सूरज को अपनी बाहों में भरके बिस्तर पर धकेल देती है और उसके ऊपर आते हुए कहती है..
नज़मा - कब से इंतजार कर रही थी सूरज.. कोई इतना समय लगाता है वापस आने में? एक ही बार में मन भर गया है तुम्हारा मुझसे?

सूरज - काम में बिजी था नज़मा.. और बिना बुलाये कैसे आता?

नज़मा सूरज के होंठो को चूमकर - दिल लग गया है आपसे.. बताओ आज कहा से शुरु करें? आज मैं नहीं शर्माने वाली..

सूरज नज़मा के होंठो को उंगलियों से मसलकर - नज़मा.. होंठों से ही शुरू करते है..

सूरज और नज़मा दोनों एक दूसरे को चूमने लगे जैसे पंछी चोंच लड़ाते है..

चूमते चूमते दोनों एक दूसरे को नंगा करने लगते है.. सूरज नज़मा की कुर्ती और सलवार उतार देता है तो नज़मा सूरज की शर्ट और जीन्स को खोल देती है..
नज़मा चुम्बन तोड़कर सूरज के लंड को पकड़कर बाहर निकाल लेती है और मुंह में भरके चूसने लगती है.. सूरज blowjob मिलने से सुख के सागर में डूब जाता है और नज़मा सूरज का लंड चूसते हुए उसे देखकर सूरज को खुश करने के पुरे प्रयास करने लगती है..

नज़मा सूरज के लंड को पूरी सिद्दत के साथ चूस रही थी और जितना लंड वो मुंह में ले सकती थी लेकर चूस रही थी.. कुछ देर लंड चुसवाने के बाद सूरज ने नज़मा का हाथ पकड़ के अपने ऊपर खींच लिए और फिर से उसके होंठो को चूमकर नज़मा की चड्डी उतारते हुए उसकी गीली चुत में लंड घुसा कर नज़मा को चोदने लगा.. नज़मा ऐसे चुद रही थी जैसे उसे कब से इस तरह सूरज से चुदने का ही इंतजार हो.. सूरज और नज़मा की आँखे एक दूसरे को ही देख रही थी और दोनों की आँखों में काम की इच्छा बैठी थी नज़मा तो दिल से भी सूरज को अपना सब कुछ देना चाहती थी..

नज़मा चुदवाते हुए - अह्ह्ह.. सूरज आराम से.. आज किस बात की जल्दी है आपको? मैं कहीं भाग तो नहीं जाउंगी.. आहिस्ता करो ना.. दर्द होने लगा है..

सूरज प्यार से चोदते हुए - सॉरी नज़मा.. बहक गया था..

नज़मा सूरज का चेहरा चूमकर - पूरी रात आपकी बाहों में ही तो रहूंगी ना सूरज.. मिठाई को स्वाद लेकर चखा जाता है.. निगला नहीं जाता.. समझें?

सूरज - अच्छा जी? मगर मूझे तो अब घोड़ी चाहिए..

नज़मा हस्ती हुई घोड़ी बनकर - लो कर लो सवारी अपनी घोड़ी की..

सूरज नज़मा को घोड़ी बनाकर चोदने लगता है..
रातभर दोनों का मधुर मिलन पुरे चरम पर चलता रहता है..

सुबह के पांच बज चुके थे और सूरज के सीने पर नज़मा छाती के बल लेटी हुई थी उसकी आँखों में आंसू आ गए थे..

सूरज - रो क्यों रही हो?

नज़मा - आप चले जो जाओगे कुछ देर में..

सूरज - तो इसमें रोने की क्या बात है?

नज़मा - मैं तो नहीं रोना चाहती.. अपने आप आंसू आ रहे है आँखों से..

सूरज मुस्कुराते हुए - आप भी ना नज़मा भाभी.. कमाल हो..

नज़मा सूरज के होंठो को दांतो से काटते हुए - भाभी बोलोगे तो आपके होंठों को ऐसे ही काटूंगी सूरज..

सूरज हसते हुए - अब नहीं बोलूंगा.. नज़मा.. अब जाने दे..

नज़मा उदासी से - जल्दी वापस आना सूरज.. आपकी नज़मा आपका इंतजार करेगी..


***************


कितनी खूबसूरत वादिया है ना.. तुम्हे पता है बचपन से मेरा कश्मीर आने का सपना था.. आज पूरा हो गया

अब कोनसी बड़ी हो गई हो तुम? पुरे रास्ते बचकानी बात करती आई हो.. ऐसा लगता है अब भी तुम बच्ची हो.. अब यही खड़े रहकर रात बितानी है या वापस होटल भी चलना है? होटल पहुंचते पहुंचते अंधेरा हो जाएगा..

एक हेल्प करोगो मेरी?

क्या?

मुझसे वापस नीचे नहीं उतरा जाएगा.. पैरों में बहुत थकान है.. मूझे उठाकर नीचे ले जाओ ना प्लीज..

हम्म.. ठीक है पर उसके अलग से 5 परसेंट लगेंगे.. बोलो मंज़ूर है तो..

ऐसे तुम मूझे कुछ भी नहीं दोगे.. 50:50 करना था कुछ ही दिनों में 60:40 हो गया.. अब भी तुमको और प्रॉपर्टी चाहिए..

मैंने फ़ोर्स थोड़ी किया है.. तुम्हरी मर्ज़ी है..

अच्छा ठीक है.. लो उठाओ मूझे..

रमन तितली को अपने बाहों में उठाकर पहाड़ से नीचे उतरने लगता है और तितली रमन की गोद में उसका चेहरा देखती हुई सोचती है कि वापस लौटने पर वो रमन की शादी की शर्त मान लेगी और धीरे धीरे रमन को अपना बना लेगी.. उसे इन कुछ दिनों में रमन से इश्क़ हो गया था जिसका उसे अहसास था और अब वो रमन के आस पास ही रहना चाहती थी.. उसे देखकर तितली को सुकून मिलने लगा था.. तितली ने इन कुछ दिनों में रमन को और उसकी आदतो को पूरी तरह नोटिस किया था और उसके अच्छे बुरे हर पहलु से वाक़िफ़ हो रही थी..

तितली के मन की दशा से अनजान रमन का दिल भी तितली के लिए धड़कने लगा था उसे इस बात का अहसास तो अब तक नहीं हुआ था मगर वो इतना जान गया था की तितली जितनी खूबसूरत है उतनी ही प्यारी और मासूम भी.. उसकी बातों से रमन को लगाव होने लगा था ये रास्ता अगर इतने आराम से कट सका था तो वो तितली के बातूनी होने के कारण कट सका था..

लो आ गए नीचे.. अब उतरो..

ऐसे कैसे उतर जाऊ.. 5 परसेंट ले रहे हो.. गाडी तक लेके चलो मूझे ऐसे ही..

रमन तितली को बाहों में लिए गाडी तक आता हुआ - हाथों में दर्द होने लगा है..

इतनी भरी हूँ मैं?

हलकी भी तो नहीं हो..

ओ.. 50 किलो की एक लड़की को कुछ देर उठाकर नहीं सकते.. क्या फ़ायदा तुम्हारा मर्द होने का..

रमन गाडी के पास आकर तितली को उतारते हुए - आधा घंटा हो गया.. समझी.. खुद तो महारानी की तरह गोद में आराम कर रही हो.. मूझे तो ऊपर से नीचे आना पड़ा ना तुम्हे गोद में लेके.. और गाडी तक भी नहीं चल सकती.. बात करती हो..

ज्यादा दर्द कर रहे है तुम्हारे हाथ? कहो तो दबा देती हूँ.. आराम आ जाएगा..

तुम्हे डॉक्टर किसने बना दिया? नर्स भी बनने के काबिल नहीं हो..

अच्छा जी.. ऐसा बोलोगे ना तो ऐसा इंजेक्शन लगाउंगी तुम्हारे बम पर कि याद रखोगे..

रमन गाडी चलाते हुए - तुमसे इलाज कौन करवायेगा.. बीमार को और बीमार ना कर दो कहीं.. मैं दूर ही रहना पसंद करूंगा..

तितली सिगरेट जलाते हुए - तुम दूर जाओगे तो मैं तुम्हारे पास चली आउंगी.. अब तो दोस्ती भी हो गई है हमारी..

कितनी सिगरेट पीती हो यार.. कहीं तुम्हे ही अपना इलाज़ ना करवाना पड़ जाए.. डॉक्टर होकर भी अपना ख्याल नहीं रख सकती..

तितली कश लेकर धुआँ छोड़ते हुए - तुम हो ना ख्याल रखने के लिए.. जब से घूमने निकले है तुम्ही मेरा ख्याल रख रहे हो.. ऐसा लगता है सच मुच के पति हो..

बना लो.. मैं तो तैयार हूँ तुम्हारा पति बनने के लिए..

और पूरी प्रॉपर्टी लेने के लिए भी.. मेरे हाथ में पकड़ा दोगे कटोरा और बोलोगे.. कुछ चाहिए तो चलो मुझसे भीख मांगो..

तो क्या हुआ.. तुम्हारी नाक छोटी हो जायेगी उसमे? पत्नी तो पति से मांगती ही है जो उनको चाहिए होता है..

तितली सिगरेट पीते हुए - एक बात बताओ.. अगर मैं शादी करू तुमसे.. तो सोओगे मेरे साथ?

रमन हसते हुए - सोना होगा तो किसी रुस्सियन के पास चला जाऊंगा.. तुम्हारे साथ क्यों सोऊंगा.. तुम तो बिस्तर में भी पक्का दोगी बोल बोल के..

तितली सिगरेट फेंकते हुए - ऐयाशी करनी ही आती है तुम्हे.. बस..

रमन - होटल आ गया.. पैरों से चलना पसंद करोगी या यहां भी गोद में उठा के ले जाना पड़ेगा डॉक्टर साहिबा को?

तितली मुस्कुराते हुए - रहने दो.. तुम और 5 परसेंट माँगने लग जाओगे..

तितली और रमन होटल के एक रूम में आ जाते है..

रमन आग के पास बैठकर हाथ सकता हुआ तितली से कहता है - एक बात बताओ.. घर पर तो अकेली सोती हो.. फिर बाहर अकेले सोने में डर क्यों लगता है तुम्हे?

तितली नाईट ड्रेस लेकर बाथरूम जाते हुए - वो सब तुम्हे क्यों बताऊ? क्या लगते हो तुम मेरे?

तुमने ही तो कहा था दोस्त है..

दोस्त हो तो दोस्त की तरह चुपचाप सोफे पर सो जाओ.. मैं तुम्हारी हर बात का जवाब नहीं देने वाली..
तितली बाथरूम जाकर नाईट ड्रेस पहनकर वापस आ जाती है और बेड पर लेट जाती है और चश्मा लगा कर फ़ोन में घुस जाती है...

रमन भी अपने कपडे बदल कर सोफे पर लेटते हुए - चश्मे में बहुत क्यूट लगती हो.. मैं बस बता रहा हूँ..

तितली - रिसेप्शन से एक्स्ट्रा ब्लेंकेट मंगवा लो... ऐसे तो बीमार हो जाओगे..

रमन - कॉल किया था.. नोट अवेलेबल कहा उन्होंने.. वैसे इतनी परवाह है तो अपना दे दो..

तितली कुछ सोचकर - फिर मैं क्या ओढ़ँगी? तुम चाहते हो मैं बीमार हो जाऊ? कितने मतलबी इंसान हो ना..

रमन - मतलबी होता तो तुम्हे सोफे पर सोना पड़ता.. हर रात.. पिछले डेढ़ हफ्ते से मूझे कभी सोफे पर तो कभी नीचे फर्श पर सोना पड़ रहा है.. और मूझे मतलबी कह रही हो..

तितली हस्ती हुई - अच्छा ठीक है.. तुम भी यहां बेड पर आ जाओ.. आज रात मज़बूरी है तो एक ब्लैंकेट से काम चला लेते है..

रमन मुस्कुराते हुए - सोच ले.. एक जवाँ मर्द को अपने बिस्तर में बुला रही हो.. कहीं कोई काण्ड ना हो जाए..

तितली हसते हुए - मूझे अगर तुम्हारा हाथ छुआ भी ना.. तो जो प्रॉपर्टी का 65:35 तय हुआ है वो वापस 100:00 हो जाएगा.. याद रखना..

रमन तितली के पास कम्बल में आकर - बहुत होट हो तुम तो.. पूरा गर्म किया हुआ है अंदर से..

तितली हस्ती हुई - सो जाओ चुपचाप.. समझे

रमन - वैसे कर क्या रही हो?

तितली फ़ोन दिखाते हुए - आज की फोटोज है.. कुछ इंस्टा पर पोस्ट की है.. देखो कितनी अच्छी तस्वीरे आई है आज..

रमन - मेरी तस्वीर क्यों पोस्ट की?

तितली - 2-3 पिक ही तो पोस्ट की है तुम्हारी.. उसमे क्या हो गया.. रियेक्ट तो ऐसे कर रहे हो जैसे कोई नंगी तस्वीर पोस्ट कर दी हो तुम्हारी.. देखो कितने प्यारे लग रहे हो.. शकल देखकर कौन कहेगा तुम पैसो के पीछे पागल हो..

रमन - कुछ भी बोलने लगी हो.. बाप की जायेदाद बेटे की ही तो होती है.. तुम कुछ ज्यादा नहीं खुल गई मेरे साथ?

तितली फ़ोन रखकर - तो? क्या करोगे तुम? रिपोर्ट लिखाओगे मेरे खिलाफ?

रमन का मन तितली को इस वक़्त चुम लेने का हो रहा था मगर वो अपने आप पर काबू रखने को मजबूर था और नहीं चाहता था कुछ ऐसा वैसा करें.. मगर तितली तो दुआ करने लगी थी की रमन कोई पहल करें और दोनों मोहब्बत के सागर में कश्ती हाँकने लगे.. मगर ऐसा हुआ नहीं.. दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे और चुप थे.. फिर रमन ने करवट बदल ली और बोला - गुडनाईट..

रमन से गुडनाइट सुनकर तितली का मुंह उतर गया उसे लगा था की रमन शायद उसे चुम लेगा और अपनी बाहों में भरके उसके साथ आज रात प्यार मोहब्बत की हद तक आ जाएगा.. मगर ऐसा हुआ नहीं..

दिल पर पत्थर रखकर तितली ने भी कहा - गुडनाइट...
तितली की आँखों में नींद नहीं थी.. वो रमन को देखकर कभी प्यार से भर जाती तो कभी उसकी तरफ देखकर रमन को मन ही मन गालिया देते हुए उसकी ऐसी हालात करने का दोष देकर कोसने लगती..

तितली की मोहब्बत रमन के लिए बढ़ती जा रही थी और तितली अच्छे से इस बात को जानती थी उसे रमन से इन कुछ दिनों में इश्क़ हो गया था.. ये जानते हुए भी कि रमन उसका सौतेला भाई है.. तितली रमन के साथ जीने के ख़्वाब देखने लगी थी और अब उसने रमन के मुताबिक खुदको ढालने का निर्णय ले लिया था.. पूरी रात रमन उसी तरह सोता और नींद में भी उसका हाथ तितली को नहीं छुआ.. तितली चाहती थी की कम से कम नींद में ही रमन उसके साथ कोई छेड़खानी करें मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं..

सुबह रमन की आँख खुली तो उसने देखा तितली नहाकर बाथरूम से बाहर आइ है और उसके बाल उसकी कमर तक ऐसे लहरा रहे थे जैसे नागिन हो.. तितली ने एक आसमानी रंग का लाहौरी सूट पहना था जिसमे वो गज़ब की खूबसूरत लग रही थी..

तितली ने रमन को जागते देखा तो रूम में रखे सामान से एक कप चाय बनाकर रमन को देते हुए बोली - नहा लो.. आज वापस घर के लिए निकलना था ना..

रमन चाय लेकर पीते हुए - थैंक्स..
रमन चाय पीकर नहाने चला जाता है ब्रश वगैरा करके नहाकर बाहर आ जाता है आज उसने जान बूझकर सिर्फ तौलिया अपने बदन पर लपेटा था और कमर से ऊपर वो नंगा था.. तितली ने पहली बार तिरछी नज़रो से रमन को घुरा था और वो उसके गठिले सुन्दर शरीर को आँखों से भोग रही थी.. रमन ने जल्दी से कपड़े पहने फिर तितली के साथ होटल में ही खाना खाकर अपना सामान उठाकर तितली के साथ बाहर गाडी में आकर बैठ गया...
रमन गाडी चलाने लगा और अब काफी देर तक दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई....

तितली ने काफी देर बाद रमन को देखकर कहा - मोन वर्त है तुम्हारा आज?

नहीं तो.. क्यों?

तो कुछ बात करो ना.. इतना चुप क्यों हो? बोर हो रही हूँ..

ऐसा है.. मैं तुम्हे इंटरटेन करने के लिए यहां नहीं लाया हूँ समझी? अभी मेरा मन नहीं है कुछ बोलने का.. जब होगा तब बोलूंगा..

तितली सिगरेट होंठों पर लगाती है तो रमन सिगरेट छीनकर बाहर फेंकता हुआ कहता है - और बार बार ये सिगरेट पीना बंद करो.. बीमार हो जाउंगी तो मूझे ही संभालना पड़ेगा..

तितली मुस्कुराते हुए - लगता है दिल आ गया जनाब का मुझ पर.. क्या बोलते थे? छिनाल.. गोल्डडीग्गर.. अब इतना ख्याल रखने लगे हो मेरा..

तुम्हारी गलतफहमी है.. मैं कोई ख्याल नहीं रख रहा बस बिना किसी परेशानी के घर पहुंचना चाहता हूँ.. फिर शान्ति संभाल लेगी तुम्हे..

तितली हसते हुए - मैं अपना ख्याल रख सकती हूँ.. कम से कम गाने तो चला दो इसमें..

तुम ही चला लो..

तितली एक पुराना गाना चलाते हुए - तुम्हारे लिए चलाती हूँ.. लो सुनो.. मैं तो बेघर हूँ.. अपने घर ले चलो.. घर में मुश्किल.. तो दफ़्तर ले चलो..

रमन मुस्कुराते हुए - पागल हो तुम..

तितली हसते हुए - और तुम पैसो के लिए एक पागल से शादी करना चाहते हो..

रमन - बार बार वही बात क्यों लाती हो?

तितली - सच ही तो कहती हूँ.. कुछ गलत तो नहीं कहा मैंने..

रमन - तो तुम ही छोड़ ना प्रॉपर्टी.. तुम क्यों पीछे पड़ी हो प्रॉपर्टी के?

तितली - और बिना पैसो के क्या करु? साध्वी बन जाऊ?

रमन - वो सब तुमसे नहीं हो पायेगा.. तुम मेरी PA बन जाना.. सारा काम संभाल लेना.. जो सेलेरी लेना चाहो ले लेना..

तितली - और मैं कोर्ट में केस करके पूरी प्रॉपर्टी लेकर तुम्हे अपना PA बना लू तो? आईडिया तो वो भी अच्छा है.. बोलो बनोगे मेरे PA?

रमन - उससे अच्छा तो मैं यहां किसी नदी में कूद जाऊ और जान दे दू...

तितली गुस्से में - रमन... क्या कुछ भी बोलते हो.. तुमसे बात ही नहीं करनी मूझे..

रमन - तुम्हे क्या हो गया एक दम से?

तितली सिगरेट जलाकर कश लेते हुए - कुछ नहीं.. तुम्हे बात नहीं करनी ना.. कुछ नहीं बोलूंगी मैं अब..

रमन - हुआ क्या है?

तितली बाहर देखते हुए - कुछ नहीं..

तितली रमन के खुदखुशी करने की बात पर उससे नाराज़ हो गई थी भले ही रमन ने ये बात यूँही कही थी मगर तितली को वो मज़ाक़ भी पसंद नहीं आया था उसे रमन से प्यार हो गया था और वो उसके लिए अब कुछ भी बुरा सुनने को तैयार नहीं थी.. रमन के खुदके मुंह से भी नहीं.. रमन गाडी चला रहा था और तितली सिगरेट के कश लगाते हुए रमन के साथ जिंदगी बिताने के ख़्वाब देखने लगी थी.. कुछ ही दिनों में रमन और तितली वापस घर लौट आये..


Sahi hai guru match chood update padh raha hu maza agaya yaar
 
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