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Incest दीवाना चुत का

Desi Man

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बढ़िया अपडेट हैं दोस्त
 

Killerpanditji(pandit)

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अब मैं इन लोगो से बात क्या करूँ यह तो मेरी भी समझ मे नही आ रही थी लेकिन फिर भी मुझे बात तो करनी ही थी इसलिए मैंने हिम्मत करके बोली
मैं : देखिए मैं यंहा पर जो बात करने के लिए आई हूं उसपर मेरी और आपकी पूरी जिंदगी की बात है इसलिए मेरी आप लोगो से विनय पूर्ण निवेदन है कि पहले मेरी पूरी बात को सुने और समझे इसके बाद आप लोग जो भी निर्णय लेंगे मुझे मंजूर होगा।
सुमन : बोलो बेटी तुम्हे जो भी बोलना है खुल कर बोलो बिना किसी संकोच के ।
मैं : जैसा कि आप लोग जान ही चुके है कि मैं कौन हूं और कंहा से हु तो मुझे नही लगता हैंकि इस बारे में बात करके कोई फायदा नही है और रही बात मेरे यंहा पर आने की तो उसके दो मकसद थे ।पहला ये की कल जय ने जिस तरह एक अनजान लड़की की मदद की उसके लिए मैं कितनी बार भी धन्यवाद करू कम है अगर मैं आज जीवित हु तो वह सिर्फ और सिर्फ जय की वजह से इसलिए मैं उनका सुक्रिया अदा करना चाहती हु।
कमलेश :मैम आपको सुक्रिया करने की कोई जरूरत नही है ।मुसीबत में फसे किसी की मदद करना कोई उपकार नही है लेकिन फिर भी आप सुक्रिया अदा करना चाहती है तो आप उसे अपनी कम्पनी में कोई काम दे दीजिए क्यूंकि कल इसने ठाकुर के लड़के को इतनी बुरी तरह से मारा है कि वह अपने बेटे की ऐसी हालत करने वाले को खोज रहा है हमे डर है कि कही उसे अगर कुछ पता चल गया तो वह इसे कुछ नुकसान ना पहुचा दे इसलिए हम लोग इसे यंहा से लेने के लिए आये हुए थे।
उसकी बात को सुनकर मुझे रूबी की कही गयी बात याद आ गयी हो ना हो इस घटना में अमृता का हाथ हो सकता है और अगर ऐसा है तो वह उसके लिए अच्छा नही होगा।। मैं यह सब सोच कर पूछ लेनें में ही भलाई समझी क्यूंकि मैं नही चाहती थी कि उसे उस गलती की सजा मिले जो उसने की ही ना हो।
मैं :तो तुम्हारे कहने का मतलब भानु के बेटे से है ।
कविता :हा उसी कमीने की वजह से आज गांव की कोई भी लड़की खुद को सुरक्षित महसूस नही करती है आये दिन वो और उसके कुछ लफंगे साथी मिल कर किसी न किसी लड़की को उठा ले जाते है।
मैं :तो तुम लोग पुलिस में शिकायत क्यूं नही करते ।
सुमन : बेटी पुलिस में शिकायत करके क्या फायदा पुलिस भी उनके खिलाफ कुछ नही करती उल्टे जो शिकायत करने जाते है उन्हें उलटा फशा देते है इसलिये कोई नही जाता है और वैसे भी हम गरीब लोगों की सुनता ही कौन है।
मैं :" आंटी जी अब आप चिंता न करे अब वह कुछ भी नही करेगा।
सुमन :बेटी तुम इन सब चक्करों में ना पड़ो तो ही अच्छा है ।कंहा तुम उस कमीने से झगड़ा मोल ले रही हो।
मैं :आंटी जी सायद आप भूल रही है कि कल उसी कमीने ने मुझे भी उठा लिया था अगर जय वक्त पर नही आता तो उस कमीने ने मुझे भी खराब कर ही दिया था।
कविता :वैसे सोनिया जी आप कुछ बात बोल रही थी यंहा पर आने के विषय मे एक बात तो आपकी पूरी हो गयी पर दूसरी अभी भी अधूरी है।
मैं :हा बात तो है पर समझ मे नही आ रहा है कि मैं उस बारे में कैसे बात करूं।
सरिता :अगर आप घर के बड़े लोगो से यह बात बोलने में दिक्कत हो रही है तो आप हमसे इस बारे में बात कर सकती है।।
मैं : नही यह उचित नही होगा हमे जो भी बात करनी है इन सभी लोगो के सामने ही करनी होगी क्यूंकि इसमे सभी की खास तौर पर जय और बाकी के सभी बड़े लोगो की मंजूरी जरूरी है ।
सुमन : बेटी जो भी कहना है खुल कर बोलो ।
मैं थोड़ी देर रुक कर फिर बोली कि
मैं :" देखिए आंटी जी जाने अनजाने में कल रात कुछ ऐसा हो गया जिसकी सायद मैने कल्पना करना भी छोड़ दिया था या यूं कह ले कि मैं कभी भी करना ही नही चाहती थी लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा हुआ था जो ना चाहते हुए भी हो गया।
मेरी बात सुनकर सुमन आंटी और बाकी के घर वाले जय की तरफ सवालिया नजरो से देखने लगे और जय को भी कुछ समझ मे नही आ रहा था कि उसने ऐसा क्या कर दिया जो सभी इस तरह से उसे घूर कर देख रहे है।तब सुमन आंटी बोली कि
सुमन :बेटी अगर मेरे बेटे ने गलती से कुछ ऐसा कर दिया है जो उसे नही करना चाहिए था तो उसके लिये मैं तुमसे हाथ जोड़ कर माफी मांगती हु।
इतना बोल कर सुमन आंटी ने मेरे सामने हाथ जोड़ लिया तो मैं आगे जा कर उनके हाथों को नीचे करके बोली
मैं :नही आंटी जी आप गलत समझ रही है जय ने ऐसा कुछ नही किया बल्कि उसने तो मेरी इज्जत बचाई और मैं उसके सामने उस हालत में थी कि कोई भी अपना आपा खो सकता है लेकिन तब भी इसने अपनी बहन के हाथों कपडा मंगवा कर मेरी तन को ढका ।वह तो जिस बारे में मैं बात कर रही हु उसमे हम दोनों में से किसी की कोई गलती नही है ।
राजेस्वर :बेटा तुम जो कहना चाहती हो खुल कर बोलो हमे जो भी उचित लगेगा वह जरूर करेंगे।
मैं :अंकल जी बात यह है कि कल जय को जब चोट लगी तो उसके खून का कुछ कतरा मेरी मांग को भी भर दिया और इस तरह से ना चाहते हुए मैं जय की सुहागन हो गयी
Bhai Zabardast update
 

jonny khan

Nawab hai hum .... Mumbaikar
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Nyc updates dear ..!!!!
 
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prkin

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अब मैं इन लोगो से बात क्या करूँ यह तो मेरी भी समझ मे नही आ रही थी लेकिन फिर भी मुझे बात तो करनी ही थी इसलिए मैंने हिम्मत करके बोली
मैं : देखिए मैं यंहा पर जो बात करने के लिए आई हूं उसपर मेरी और आपकी पूरी जिंदगी की बात है इसलिए मेरी आप लोगो से विनय पूर्ण निवेदन है कि पहले मेरी पूरी बात को सुने और समझे इसके बाद आप लोग जो भी निर्णय लेंगे मुझे मंजूर होगा।
सुमन : बोलो बेटी तुम्हे जो भी बोलना है खुल कर बोलो बिना किसी संकोच के ।
मैं : जैसा कि आप लोग जान ही चुके है कि मैं कौन हूं और कंहा से हु तो मुझे नही लगता हैंकि इस बारे में बात करके कोई फायदा नही है और रही बात मेरे यंहा पर आने की तो उसके दो मकसद थे ।पहला ये की कल जय ने जिस तरह एक अनजान लड़की की मदद की उसके लिए मैं कितनी बार भी धन्यवाद करू कम है अगर मैं आज जीवित हु तो वह सिर्फ और सिर्फ जय की वजह से इसलिए मैं उनका सुक्रिया अदा करना चाहती हु।
कमलेश :मैम आपको सुक्रिया करने की कोई जरूरत नही है ।मुसीबत में फसे किसी की मदद करना कोई उपकार नही है लेकिन फिर भी आप सुक्रिया अदा करना चाहती है तो आप उसे अपनी कम्पनी में कोई काम दे दीजिए क्यूंकि कल इसने ठाकुर के लड़के को इतनी बुरी तरह से मारा है कि वह अपने बेटे की ऐसी हालत करने वाले को खोज रहा है हमे डर है कि कही उसे अगर कुछ पता चल गया तो वह इसे कुछ नुकसान ना पहुचा दे इसलिए हम लोग इसे यंहा से लेने के लिए आये हुए थे।
उसकी बात को सुनकर मुझे रूबी की कही गयी बात याद आ गयी हो ना हो इस घटना में अमृता का हाथ हो सकता है और अगर ऐसा है तो वह उसके लिए अच्छा नही होगा।। मैं यह सब सोच कर पूछ लेनें में ही भलाई समझी क्यूंकि मैं नही चाहती थी कि उसे उस गलती की सजा मिले जो उसने की ही ना हो।
मैं :तो तुम्हारे कहने का मतलब भानु के बेटे से है ।
कविता :हा उसी कमीने की वजह से आज गांव की कोई भी लड़की खुद को सुरक्षित महसूस नही करती है आये दिन वो और उसके कुछ लफंगे साथी मिल कर किसी न किसी लड़की को उठा ले जाते है।
मैं :तो तुम लोग पुलिस में शिकायत क्यूं नही करते ।
सुमन : बेटी पुलिस में शिकायत करके क्या फायदा पुलिस भी उनके खिलाफ कुछ नही करती उल्टे जो शिकायत करने जाते है उन्हें उलटा फशा देते है इसलिये कोई नही जाता है और वैसे भी हम गरीब लोगों की सुनता ही कौन है।
मैं :" आंटी जी अब आप चिंता न करे अब वह कुछ भी नही करेगा।
सुमन :बेटी तुम इन सब चक्करों में ना पड़ो तो ही अच्छा है ।कंहा तुम उस कमीने से झगड़ा मोल ले रही हो।
मैं :आंटी जी सायद आप भूल रही है कि कल उसी कमीने ने मुझे भी उठा लिया था अगर जय वक्त पर नही आता तो उस कमीने ने मुझे भी खराब कर ही दिया था।
कविता :वैसे सोनिया जी आप कुछ बात बोल रही थी यंहा पर आने के विषय मे एक बात तो आपकी पूरी हो गयी पर दूसरी अभी भी अधूरी है।
मैं :हा बात तो है पर समझ मे नही आ रहा है कि मैं उस बारे में कैसे बात करूं।
सरिता :अगर आप घर के बड़े लोगो से यह बात बोलने में दिक्कत हो रही है तो आप हमसे इस बारे में बात कर सकती है।।
मैं : नही यह उचित नही होगा हमे जो भी बात करनी है इन सभी लोगो के सामने ही करनी होगी क्यूंकि इसमे सभी की खास तौर पर जय और बाकी के सभी बड़े लोगो की मंजूरी जरूरी है ।
सुमन : बेटी जो भी कहना है खुल कर बोलो ।
मैं थोड़ी देर रुक कर फिर बोली कि
मैं :" देखिए आंटी जी जाने अनजाने में कल रात कुछ ऐसा हो गया जिसकी सायद मैने कल्पना करना भी छोड़ दिया था या यूं कह ले कि मैं कभी भी करना ही नही चाहती थी लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा हुआ था जो ना चाहते हुए भी हो गया।
मेरी बात सुनकर सुमन आंटी और बाकी के घर वाले जय की तरफ सवालिया नजरो से देखने लगे और जय को भी कुछ समझ मे नही आ रहा था कि उसने ऐसा क्या कर दिया जो सभी इस तरह से उसे घूर कर देख रहे है।तब सुमन आंटी बोली कि
सुमन :बेटी अगर मेरे बेटे ने गलती से कुछ ऐसा कर दिया है जो उसे नही करना चाहिए था तो उसके लिये मैं तुमसे हाथ जोड़ कर माफी मांगती हु।
इतना बोल कर सुमन आंटी ने मेरे सामने हाथ जोड़ लिया तो मैं आगे जा कर उनके हाथों को नीचे करके बोली
मैं :नही आंटी जी आप गलत समझ रही है जय ने ऐसा कुछ नही किया बल्कि उसने तो मेरी इज्जत बचाई और मैं उसके सामने उस हालत में थी कि कोई भी अपना आपा खो सकता है लेकिन तब भी इसने अपनी बहन के हाथों कपडा मंगवा कर मेरी तन को ढका ।वह तो जिस बारे में मैं बात कर रही हु उसमे हम दोनों में से किसी की कोई गलती नही है ।
राजेस्वर :बेटा तुम जो कहना चाहती हो खुल कर बोलो हमे जो भी उचित लगेगा वह जरूर करेंगे।
मैं :अंकल जी बात यह है कि कल जय को जब चोट लगी तो उसके खून का कुछ कतरा मेरी मांग को भी भर दिया और इस तरह से ना चाहते हुए मैं जय की सुहागन हो गयी


दोस्त,
जितनी उत्सुकता से हम अगले अपडेट की प्रतीक्षा करते हैं, उसका ध्यान रखकर थोड़ा तो अपडेट के आकार पर ध्यान दो. इतने छोटे से अपडेट दे क्या होगा, मेरे भाई.
 

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बढिया है लेकिन छोटा है
अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी भाई
 
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जय100

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मेरी बात को सुनकर वँहा पर जैसे सांप सूंघ लिया हो किसी के मुह से कोई आवाज निकल ही नही रही थी ।काफी देर तक वँहा पर सन्नाटा पसरा रहा फिर कुछ देर बाद सुमन आंटी बोली कि
सुमन :बेटी अगर यह मजाक है तो सच मे इससे बुरा मजाक और कुछ नही हो सकता है ।
मैं :नही आंटी जी आपको लगता है एक लड़की ऐसी बाते मजाक में बोल सकती है । आप मानो या ना मानो लेकिन सच्चाई तो यही है और आप लोग के मानने या न मानने से सच्चाई बदल तो सकती नही है।
राजेस्वर :बेटा अगर यह सच भी है तो सोचो आपके और हमारे बीच बहुत अन्तर है जिसे हम बदल नही सकते है और लोग क्या कहेंगे।उससे भी बड़ी बात यह है कि आपके घर वाले इस रिश्ते के लिए कभी भी तैयार नही होंगे।
मैं : आप लोग मेरे घर वालो की चिंता ना करे कमलेश मेरी ही कम्पनी में काम करता है तो वह मेरे बारे में सब कुछ जानता ही होगा अगर आप लोग चाहे तो उससे सब कुछ पता करने के बाद जो आप लोगो का फैशला हो मुझे बता दीजिए ।अब तो जय के साथ या उसके बिना मैं उसकी सुहागन तो हो ही गयी हु अब जीवन तो उसके नाम के साथ ही काटना है ।अब मेरी जिंदगी में खुसी देंगे आप लोग या गम इसका फैशला आप लोगो को ही करना है।
इतना बोल कर मैं वँहा से बाहर चली आयी उन लोगो को आपस मे बात करने के लिए। इधर मेरे बाहर जाते है सभी लोग कमलेश की तरफ सवालिया निगाहों से देखने लगे तो कमलेश मेरे बारे में जो भी जानता था सब कुछ बता दिया और अंत मे कमलेश ने बोला कि
कमलेश :पापा जी मैं तो यही बोलूंगा की आप लोग बिना किसी संकोच के यह रिश्ता मंजूर कर लीजिए ।बस यह समझ लीजिए अगर वो चाहे तो बिना आप लोग के मर्जी के भी शादी कर सकती है और कोई उनका कुछ भी नही बिगाड़ सकता है ठाकुर जैसे तो ना जाने कितने लोग मिलने के लिए आते है और इनके पास समय ना होने के कारण नही मिल पाती है ।
सुमन: लेकिन बेटा फिर भी उसकी एक बार शादी हो चुकी है और वह विधवा भी है अगर हम लोग ऐसे लड़की से अपने बेटे की शादी करवाते है तो समाज मे कही मुह दिखाने के काबिल नही रह जाएंगे।
पूनम : माँ मैं जानती हूं इन्हें अच्छी तरह से केवल चेहरा नही देखी थी शहर में सभी इनको देवी की तरह पूजते है इनको मान देते है एक से बढ़कर एक लड़के इनसे शादी करने को तैयार खड़े थे लेकिन इन्होंने किसी को हा नही बोला अब जब वह खुद चल कर यंहा तक आयी है तो उन्हें मना करना अच्छी बात नही होगी।
राजेस्वर : ठीक है अगर तुम लोग बोलते हो तो हमें यह रिश्ता मंजूर करने में कोई समस्या नही है ।जय बेटा अगर तुम कुछ कहना चाहते हो तो अभी बोल सकते हो अगर तुम यह शादी नही करना चाहो तो हम कभी भी नही करेंगे।
अंकल जी ऐसा बोलने से सभी लोग जय की तरफ देखने लगे तो जय बोला कि
जय :पापा मैं उनसे अकेले में कुछ बाते करना चाहता हु अगर आप लोगो की इजाजत हो तो मैं बात करने के बाद ही कुछ भी बोल पाऊंगा।
सुमन :ठीक है बेटा जैसी तेरी मर्जी जा सरिता बुला ला उसको
सरिता आंटी की बात सुनकर मेरे पास चली आयी बाहर बुलाने के लिए इसके बाद हम दोनों लोग अंदर चले आये।अंदर आने केसमय मेरे दिल मे हजारो सवाल चल रहे थे कि इन लोगो का क्या फैशला होगा ।आज पहली बार मैं खुद को इतना नर्वस महसूस कर रही थी नही तो जो मुझे चाहिए होता था उसे मैं किसी भी कीमत पर पा ही लेती थी कुछ इसी तरह के खयालो में डूबी हम दोनों अंदर पहुची । अंदर गयी तो राजेस्वर जी बोले कि
राजेस्वर : बेटा हम लोगो को इस रिश्ते से कोई आपत्ति नही है बस जय तुमसे कुछ बाते करना चाहता है और उसके बाद ही अपना फैशला सुनाएगा ।
मैं :"ठीक है अंकल जी कोई बात नही है ।
इसके बाद मैं और जय बाहर चले आये तो मैं बोली कि
मैं :तो बोलिये आपको क्या बात करनी है मुझसे।
जय :हम लोग थोड़ा और आगे चलकर बाते करे अगर आपको बुरा ना लगे तो।
मैं :" हा क्यों नही इसमे बुरा मानने वाली कौन सी बात है ।
इसके बाद हम लोग घर से थोड़ी दूर पर एक बगीचे में चले आये और आज पहली बार गांव के माहौल है में इस तरह खुले में बैठने का मजा ही कुछ और था जय अपने साथ लाये एक गमछे को जमीन पर बिछाया और बोला कि
जय :अब आपके लायक तो यह नही है लेकिन फिर भी यंहा पर तो और कोई सुविधा उपलब्ध नही है अगर निचे बैठने में दिक्कत है तो मैं घर से कुर्शी ले कर आ जाऊ।
मैं :नही जय इतनी तकलीफ करने की कोई जरूरत नही है ।मैं यही पर ठीक हु मैं आराम से बैठ सकती हूं।
इतना बोल कर मैं भी नीचे बैठ गयी और बोली
मैं :अब बोलो जय क्या पूछना चाहते हो तुम मेरे बारे में
जय :नही आप गलत समझ रही है मैं आपसे कुछ पुछने के लिए नही बल्कि कुछ बताने के लिए बुलाया है ।आप जैसा मुझे समझ रही है मैं वैसा बिल्कुल भी नही हु।
मैं :"जय अगर तुम यह बताने के लिए बुलाये हो कि तुम्हारी कई लड़कियों और औरतों के साथ सम्बन्ध है तो जाने दो इस बारे में मैं सब कुछ पता कर चुकी हूं तुम्हारी कविता दी ने मुझे सब कुछ बता दिया है इसके बाद भी मैं यही कहूंगी की मुझे कोई समस्या नही है ।जो तुम्हारे साथ हुआ वह किसी के भी साथ होता तो वह भी यही करता और यकीन मानो मेरा इसमे मैं तुम्हे कभी भी नही रोकूंगी।
जय :नही इतना ही नही है मेरे बारे में कुछ और भी है जो आपको जान लेना बहुत जरूरी है ।मैं पहले एक लड़की से प्यार करता था।
मैं :"सायद तुमने मेरी बातों पर। ध्यान नही दिया मैने बोला न कि मुझे पता है और जिस लड़की से तुम प्यार करते थे उसका नाम काव्या है।
जय : अच्छी बात आप जब इतना सब कुछ जान ही चुकी है तो मुझे ज्यादा कुछ बताने की जरूरत नही है लेकिन मुझे इस बात का यकीन है कि कबिता दी ने कुछ बाते और भी है जो मुझे लगता है तुमको पता होनी चाहिए क्यूंकि मैं नही चाहता कि आगे चल कर किसी भी बात को लेकर किसी तरह की परेशानी हो।
मैं :"बोलो क्या बोलना चाहते हो।
जय :यही की जिसने आपको मेरी सारी सच्चाई बताई वह भी मुझसे प्यार करती है और यंहा तक कि मेरी खुद की सगी बहन सरिता दी भी प्यार करती है और इतना ही नही मेरी भाभी भी मुझसे वह सब काम करना चाहती है जो एक पति के साथ करते है ।इसका कारण यह है कि मेरे भैया नामर्द है और अगर मैने ऐसा नही किया तो भाभी घर छोड़ कर चली जायेगी।
मैं कुछ देर तक उसकी बातों पर यकीन करने की कोशिश करती रही और इसके बाद कुछ सोच कर मैं बोली
मैं :देखो जय मुझे यह सब मंजूर है लेकिन तुम्हे एक वादा करना होगा कि तूम जो कुछ भी करोगे मेरी जानकारी में ही करोगे बिना मेरी जानकारी के अगर तुमने कुछ किया तो मुझसे बुरा और कोई नही होगा।
जय :ठीक है अगर सब कुछ जानने के बाद भी अगर तुम तैयार हो तो मुझे भी मंजूर है लेकिन एक बात मैं अभी साफ कर दु की मैं अपने परिवार को छोड़ नही सकता हु।
मैं :तो तुम्हे अपना परिवार छोड़ने को बोल भी कौन रहा है मैं इतनी भी मतलबी नही हु की अपने स्वार्थ के लिए तुम्हे तुम्हारे परिवार से दूर कर दु अगर तुम चाहो तो मैं सभी लोगो को सहर में शिफ्ट कर सकती हूं जंहा मेरा दूसरा परिवार रहता है क्यूंकि तुम जानते ही हो कि मैं रोज यंहा से नही आ जा सकती हूं और तुमको मैं यंहा पर छोड़ने का रिस्क नही ले सकती पता नही कब क्या गुल खिला दो।
जय :ठीक है तो इस बारे में हम घर चल कर बात करे और वैसे मुझे यकीन नही हो रहा है कि इतनी खूबसूरत और हसीन लड़की मेरी बीवी बन चुकी है।
मैं :तुम अभी से मत सुरु हो जाओ पहले घर पर चल कर सबसे बाते करो और उसके बाद जो फैसला होगा उसके बाद ही तुम कुछ बोल सकते हो।
जय :जैसा हुक्म महारानी का
इतना बोल कर जय उठ गया और उसके पीछे मैं भी मुस्कुराती हुई उठ कर उसके पीछे चल दी।घर पर सभी लोग हम दोनों का इन्तजार कर रहे थे। जैसे ही हम लोग घर पहचे इसके बाद सभी लोग हमारी तरफ सवालिया निगाहों से देखने लगे। तो जय बोला कि
जय :"पापा मैं शादी करने के लिए तैयार हूं पर एक समस्या है ।
 
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