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Fantasy क्या यही प्यार है

Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
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16 rasgulle kha gaya Mahesh wow yaar ...lekin bechare ka pet kharab ho gaya hai😝😃😂....kisi ne kya khoob kaha hai ki free ka mile to khub khao lekin dhyan se kyoki pet to apana hai (note:- ye kisi Mai hi hu)...aage aapne kafi real bato ko dikhaya hai jaise tanu ka vyavahar nain aur Mahesh ke parti badalana ... it's a little harse reality...girls akasar chahane lagati hai ki wo jisse pyar kare wo larka usse sabase jyada mahtav de even fraind se bhi jyada ....aur issi baat ko kai baar show Karne ke chakkar me wo over possessive ho jati hai...aur larka ek aisi sthiti me pahuch jata hai jisme wo bant ke rah jata hai .... Abhishek ne kah Diya ki wo tanu se breakup Kar lega lekin kya ye baat itna aasan hai ...yaha par nain ne samajhdari dikha ke iss baat se Mana Kar Diya...but agar ye breakup ho jata aur tanu reason puchhati to Abhishek kya answer karta..... Abhishek ke jindgi me tanu ke entry se bahut se dramatic changes aaye hai ..ab Abhishek ki apne utne hi time me padai , dost , school, family, most important tanu ko bhi time dena hai..pahale Abhishek Ki life sidha aur simple thi but ab wo ghumavo se bhar rha hai...kuchh dino me shayad Abhishek sab kuchh sambhal ke menten Kar le...
धन्यवाद आपका मान्यवर इतनी लंबी समीक्षा के लिए।

तनु अभी इस कहानी को एक नया मोड़ देने वाली है और वो नया मोड़ क्या है ये देखना दिलचस्प होगा।

साथ बने रहिए।
 
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Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
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Lovely update
Amazing update
Lagta h Tanu Abhishek w nayan ko aaps me alg kar sakti h
धन्यवाद आपका मान्यवर।

ये तो आने वाला समय ही बताएगा कि तनु क्या करने वाली है।

साथ बने रहिए।
 
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Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
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सोलहवाँ भाग
अभिषेक से बात करके मुझे बहुत सुकून मिला। उससे बात करके मुझे अनुमान हुआ कि मेरा शक अभिषेक के ऊपर निराधार है। फिर हम दोनों हँसते हुए वहाँ से चले गए। शायद मेरी खुशी के आगे अभिषेक को यह ध्यान भी नही रहा कि तनु उसके इंतजार कर रही है। हम दोनो अपनी कक्षा में आ गए। जब वहाँ पर तनु दिखाई नहीं दी तो अभिषेक ने अपने सिर पर हाथ मारते हुए कहा।
अभिषेक- अरे यार। ये क्या हो गया। तेरे चक्कर में मैं तनु को वहीं छोड़कर चला आया। तू रुक मैं आता हूँ कुछ देर में।
मैं-जा बेटा जा। आज तो तेरी बैंड बजने वाली है (मैंने ये बात हँसते हुए कही थी)
अभिषेक मुझे कक्षा में छोड़कर चला गया। और बाहर जहाँ तनु को छोड़कर आया था वहाँ देखने लगा, लेकिन तनु वहाँ नहीं थी। अभिषेक यहाँ वहाँ ढूंढने के बाद वापस कक्षा मे चला आया। मैने उसे देखते हुए कहा।
मैं- क्या हुआ। तनु नहीं मिली क्या।
अभिषेक- नहीं यार पता नहीं वो कहाँ चली गई।वो वहाँ थी ही नहीं जहाँ में उसे छोड़कर आया था।
मै- अरे यार गई कहाँ होगी। यहीं स्कूल में ही होगी। अभी थोड़ी देर में आ जाएगी। वैसे लगता है कि वो तुझसे नाराज हो गई है तेरे ऐसे चले आने से। अपना पिछवाड़ा मजबूत कर ले, क्योंकि आज तेरे पिछवाड़े पर बहुत मार पड़ने वाली है।
अभिषेक- ये सब तेरी वजह से ही हुआ है और तू मेरे ही मजे ले रहा है। ले भाई तेरा समय है ले ले मजे मेरे। एक दिन ऐसे ही मैं भी तेरे मजे लूँगा देख लेना।
मैं- मैं तेरी तरह पागल नहीं हूँ जो इन प्यार व्यार के चक्करों में पडू। और वैसे भी मेरे पास इस सब फालतू चीजों के लिए समय नहीं है।
अभिषेक- इसका मतलब तू ये कहना चाहता है कि मैं पागल हूँ। रुक साले अभी तुझे बताता हूँ।
इतना कहकर अभिषेक मुझे मारने को हुआ तो मैं वहाँ से भाग लिया। अभी मैं दरवाजे के पास पहुँचा ही था कि बाहर से आती तनु से टकरा गया। जिसके कारण उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो जमीन पर गिरने को हुई तो मैंने उसे थाम लिया। उसे थामने के लिए मुझे उसकी कमर को पकड़ना पड़ा। मैंने तनु को जमीन पर गिरने नहीं दिया। बस फिर क्या था। तनु को एक बहाना मिल गया और वो मेरे ऊपर भड़क गई।
तनु- ये क्या बदतमीजी है नयन। तुम्हें शर्म नहीं आती मेरे साथ ऐसी हरकत करते हुए।
मैं- अरे मैंने क्या किया है। मैंने तो तुम्हें नीचे गिरने से बचाया है ताकि तुम्हें चोट न लगे।
तनु- एक तो खुद मुझसे जानबूझकर टकराते हो और ऊपर से बोलते हो कि मुझे गिरने से बचाया तुमने। मैं अच्छे से जानती हूँ कि तुम्हारे मन में मेरे लिए क्या है।
मै- देखो तनु बहुत हुआ अब। मैं तुमसे जानबूझ कर नहीं टकराया था वो तो बस अचानक से तुम आ गई इसलिए मैं टकरा गया तुमसे, लेकिन इसको इतना बड़ा इश्यू बनाने की क्या जरूरत है। तुम तो मुझे बहुत दिनों से जान रही हो। मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई गलत ख्याल नहीं है तनु। विश्वास करो मेरा।
तनु- तुम्हारा विश्वास करू। मुझे अब पता चल गया है कि तुम किस टाइप के लड़के है।
अभिषेक जो दूर खड़ा इस बात को सुन रहा था। तनु ने शायद अभिषेक के ऊपर ध्यान ही नहीं दिया कि अभिषेक भी कक्षा में है, क्योकि जब मुझसे टकराने के बाद तनु को मैंने पकड़कर खड़ा किया तो अभिषेक की तरफ उसकी पीठ हो गई थी, इसलिए अभिषेक को उसने नहीं देखा था। तनु की बात सुनकर अभिषेक ने तनु से तेज स्वर में कहा।
अभिषेक- तनु। ये क्या अनाप सनाप बके जा रही हो नयन के बारे में।
तनु- अभिषेक। तुम। तुमने देखा नहीं नयन ने मेरे साथ क्या किया है।
अभिषेक- हाँ मैंने देखा की नयन ने तुम्हारे साथ क्या किया है। और ये भी देख रहा हूँ कि तुम नयन के साथ क्या कर रही हो। तुम्हारे दिमाग फिर गया है क्या। तुम नयन को ऐसे कैसे उलटा सीधा बोल सकती हो। तुम कितना जानती हो नयन के बारे में। और मैं उसे जानता हूँ बचपन से। कक्षा की कोई भी लड़की नयन के बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकती और तुम नयन के ऊपर इलजाम लगा रही हो। अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसका मुँह तोड़ देता।
मैं- ये क्या बोल रहा है तू अभिषेक। तुझे तनु से ऐसे बात नहीं करना चाहिए। उसको कोई गलतफहमी हो गई होगी मेरे लिए। तो उसके लिए तू उसे इतनी खरी-खोटी सुना रहा है। दोस्तों के बीच तो ये सब होता ही रहता है। तनु अभिषेक की बात का बुरा मत मानना। ये तो बस ऐसे ही बोल गया तुम्हें।
मुझे कुछ कुछ समझ में आ रहा था कि अभिषेक का तनु को वहाँ अकेला छोड़कर आना तनु के गुस्से का मुख्य कारण हो सकता है। और इसी गुस्से में वो मुझे इतना कुछ कह गई। लेकिन अभिषेक को ऐसे रिएक्ट नहीं करना चाहिए था। अगर अभिषेक कुछ देर और यहाँ रहा तो दोनों में शीतयुद्ध शुरू होने की संभावना है इसलिए मैं अभिषेक को कक्षा से बाहर निकाल कर ले आया और उसे समझाते हुए कहा।
मै- ये सब क्या था यार। तुझे तनु से साथ ऐसे पेश नहीं आना था। वो अभी गुस्से में थी, क्योंकि तुम उसे वहाँ अकेला छोड़कर आ गए। और तुझसे पहले मैं उसके सामने आ गया इसलिए उसको पूरा गुस्सा मेरे ऊपर निकल गया। अब अपना गुस्सा थूक दे यार और चिल मार। तू गुस्से में बिलकुल भी चिंम्पैंजी लगता है। कहीं ऐसा न हो कि तुझे सर्कस वाले न देख लें और अपने साथ सर्कस में ले जाएँ। तब तो मुझे अपने दोस्त से मिलने के लिए रोज सर्कस जाना पड़ेगा।
मैंने अभिषेक का गुस्सा शान्त करने के लिए ही ऐसी कमेडी तरह की बात की थी और इसका असर भी हुआ। अभिषेक का गुस्सा शान्त हो गया। अब उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। थोड़ी देर बाहर बैठने के बाद भोजनावकाश के समाप्त होने की घंटी बजी तो हम दोनो कक्षा की तरफ चल दिए। कक्षा में पहुँचने के बाद अभिषेक ने एक नजर तनु को देखा और फिर अपनी नजर उससे हटा ली। मैंने भी तनु की तरफ देख कर आँखों से इशारा किया कि अब सब ठीक है अभिषेक गुस्से में नही है अब। तो तनु की तरफ से मुझे कुछ दिनों से मिल रही प्रतिक्रिया ही मिली। उसने अपना मुँह सिकोड़ लिया। मुझे उसकी इस प्रतिक्रिया को खास तवज्जो नहीं दी। क्योंकि अभी जो कुछ भी हुआ था। उसके बाद ऐसी प्रतिक्रिया का आना स्वाभाविक था।
बहरहाल मैं और अभिषेक आकर अपनी जगह पर बैठ गए। इधर हम दोनों के कक्षा से जाने के बाद अभिषेक के कहे हुए अंतिम शब्द कि अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसके मुँह तोड़ देता। तनु के कानों मे गूँज रहा था। उसे लग रहा था कि अभिषेक ने सब के सामने उसकी बेइज्जती कर दी है। जबकि उस समय कक्षा में हम तीनों के अलावा और कोई नहीं था। लेकिन तनु ने इस बात को अपने अहम पर ले लिया। उसके दिमाग में कुछ खुराफात चलने लगा। लेकिन अभी के लिए उसने अपने आप सो संभाल लिया था। अभिषेक ने अभी तक तनु से कोई बात नहीं की थी और न ही तनु ने कोई बात करने की कोशिक की थी। मैंने ही अभिषेक को कोहनी मारते हुए कहा।
मैं- अबे क्या कर रहा है तू। कम से कम एक बार बात तो कर तनु से।
अभिषेक- तू चुप कर साले। मैं कोई बात-चीत नहीं करने वाले तनु से।
मै- अगर बातचीत नहीं करेगा तो तुम दोनों की नाराजगी कैसे दूर होगी। नाराजगी दूर करने के लिए बात-चीत तो करनी पड़ेगी न।
अभिषेक- अब मैं तनु से तभी बात करूँगा जब वो स्वयं आकर मुझसे बात करेगी। अब इस बारे में ज्यादा बहस मत कर मुझसे।
तभी शिक्षक ने कमरे में प्रवेश किया तो मैं और अभिषेक शान्त हो गए। इसी तरह कक्षा चलती रही और मैं अभिषेक मन लगाकर पढ़ाई करते रहे, लेकिन भोजनावकाश के समय हुई घटना के बाद मेरा और अभिषेक का मन पढ़ाई में और दिनों की अपेक्षा नहीं लग रहा था। किसी तरह छुट्टी हुई और हम अपने घर जाने लगे। रास्ते में एक बार भी तनु ने अभिषेक और न ही तनु ने अभिषेक से बात करने की कोशिश की। हम सब अपने घर चले गए। मैं इस घटना के बारे में ज्यादा सोचना नहीं चाहता था, क्योंकि जितना ज्यादा मैं सोचता उतना ज्यादा उलटा सीधा खयाल मेरे दिमाग में आता।
अगले दिन हम सब फिर स्कूल पहुँचे। महेश भी आज स्कूल आया था। आज भी तनु और अभिषेक ने बात करने की कोशिश नहीं की एक दूसरे से। महेश ये देखकर हैरान था कि एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया जो अभिषेक और तनु ईलू ईलू करने की बजाय एकदम शांत बैठे हैं। भोजनावकाश के समय महेश से जब न रहा गया तो उसने मुझसे पूछ ही लिया।
महेश- अरे नूनू भाई एक बात तो बताना। मैं सुबह से देख रहा हूँ कि अभिषेक और तनु आपस में कोई बातचीत ही नहीं कर रहे हैं। अभी परसों तो दोनों ऐसे व्यस्त थे एस दूसरे में कि उन्होंने हमारी तरफ भी ध्यान नहीं दिया था। और कल मैं आया नहीं था। तो इस एक दिन में आखिर ऐसा क्या हो गया कि दोनो लैला मजनू एकदम शांत बैठे हुए हैं।
महेश के पूछने के बाद मैंने उसे कल हुई सारी घटना के बारे में अवगत करा दिया जिसे सुनने के बाद महेश ने कहा।
महेश- एक बात सच कहूँ यार। तनु पर मुझे कुछ शक हो रहा है। उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो चल रहा है। क्या हमें अभिषेक को उससे अलग होने के लिए बोल देना चाहिए।
मैं- कैसी बात कर रहा है यार तू। बिना किसी ठोस सबूत के हम केवल शक कर सकते हैं। और शक के बिना पर उठाया गया कोई भी कदम सही नहीं होता। कल तक मुझे भी ऐसा ही लगता था, लेकिन ठंडे दिमाग से सोचने के बाद मुझे भी एहसास हुआ कि शायद मैं सही नहीं सोच रहा था। कल तनु ने जो किया वो उसका गुस्सा था जो अभिषेक के बजाय मेरे ऊपर निकाल दिया उसने।
महेश- भगवान करे तू जो सोच रहा है वैसा ही हो, लेकिन मेरा सिक्स सेंस कह रहा है कि तनु कुछ न कुछ बड़ा सोच रही है।
मैं- तेरा सिक्स सेंस। साले तेरे पास एक भी सेंस नहीं है और तू सिक्स सेंस से सोच रहा है। सोचना तेरे बस की बात नहीं है। और जो जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दे। समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।
मेरी बात सुनकर महेश मुस्कुराने लगा। इसी तरह दो दिन बीत गए, लेकिन अभिषेक और तनु में कोई बात नहीं हुई। अगले दिन मैं अभिषेक और महेश भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए। तभी वहां तनु आ गई। और आते ही मुझसे और महेश से बोली।
तनु- नयन और महेश कैसे हो तुम दोनों।
तनु से हम दोनों को इतने प्रेम से बात करने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि पिछले लगभग दो महीने में आज पहली बार हुआ था जो तनु ने तने प्रेम से हम दोनो से बात की थी। उसकी बात सुनकर हमें लगा कि शायद हम दोनों उसके बारे में गलत ही सोचते थे। क्योंकि अभिषेक और तनु का नया नया प्यार था और उनको थोड़ा अलग स्पेस चाहिए था इसलिए तनु हम दोनों से बात नहीं करती थी ठीक से। इसलिए तनु के इतने प्रेम से बोलने के बाद हम दोनों को बहुत खुशी हुई। हम दोनों ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैं और अभिषेक- हम दोनों बहुत बढ़िया हैं।
मैं- तुम कैसी हो तनु।
तनु- मैं बिलकुल भी अच्छी नहीं हूँ।
मैं- क्यों क्या हुआ तुम्हें।
तनु- अरे यार तुम्हारा दोस्त पिछले तीन दिन से साडू मुँह बनाकर घूम रहा है। मुझसे बात ही नहीं करता तो मैं कैसे अच्छी हो सकती हूँ।
इतना बोलकर तनु अभिषेक की तरफ मुखातिब होकर अभिषेक से बोली।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
 

KEKIUS MAXIMUS

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nice update ...abhishek aur nayan tanu ko wahi chhodkar class me aa gaye iska gussa tanu ne nayan par nikala ..
aur apne dost ki itni beijjati hote dekh abhishek ne nayan ka saath diya aur tanu ko khari khoti sunayi 🤩..

nayan ne undono ka jhagda badhne nahi diya ye achcha kiya ..
par ab dono ek dusre se baat nahi karte aur agle din mahesh ne ye baat notice ki aur uske dil me jo tha tanu ko lekar wo keh diya nayan se ..

aur 3 din baad achanak tanu ka nayan aur mahesh se pyar se baat karna 🤔.. kuch naa kuch karke hi maanegi tanu aisa lagta hai ..

nayan ko abhi se saawdhan rehna chahiye par wo tanu ko samajh hi nahi paaya abhi tak .

dekhte hai tanu kaise apna badlaa leti hai nayan se ..
 

Luffy

Well-Known Member
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सोलहवाँ भाग
अभिषेक से बात करके मुझे बहुत सुकून मिला। उससे बात करके मुझे अनुमान हुआ कि मेरा शक अभिषेक के ऊपर निराधार है। फिर हम दोनों हँसते हुए वहाँ से चले गए। शायद मेरी खुशी के आगे अभिषेक को यह ध्यान भी नही रहा कि तनु उसके इंतजार कर रही है। हम दोनो अपनी कक्षा में आ गए। जब वहाँ पर तनु दिखाई नहीं दी तो अभिषेक ने अपने सिर पर हाथ मारते हुए कहा।
अभिषेक- अरे यार। ये क्या हो गया। तेरे चक्कर में मैं तनु को वहीं छोड़कर चला आया। तू रुक मैं आता हूँ कुछ देर में।
मैं-जा बेटा जा। आज तो तेरी बैंड बजने वाली है (मैंने ये बात हँसते हुए कही थी)
अभिषेक मुझे कक्षा में छोड़कर चला गया। और बाहर जहाँ तनु को छोड़कर आया था वहाँ देखने लगा, लेकिन तनु वहाँ नहीं थी। अभिषेक यहाँ वहाँ ढूंढने के बाद वापस कक्षा मे चला आया। मैने उसे देखते हुए कहा।
मैं- क्या हुआ। तनु नहीं मिली क्या।
अभिषेक- नहीं यार पता नहीं वो कहाँ चली गई।वो वहाँ थी ही नहीं जहाँ में उसे छोड़कर आया था।
मै- अरे यार गई कहाँ होगी। यहीं स्कूल में ही होगी। अभी थोड़ी देर में आ जाएगी। वैसे लगता है कि वो तुझसे नाराज हो गई है तेरे ऐसे चले आने से। अपना पिछवाड़ा मजबूत कर ले, क्योंकि आज तेरे पिछवाड़े पर बहुत मार पड़ने वाली है।
अभिषेक- ये सब तेरी वजह से ही हुआ है और तू मेरे ही मजे ले रहा है। ले भाई तेरा समय है ले ले मजे मेरे। एक दिन ऐसे ही मैं भी तेरे मजे लूँगा देख लेना।
मैं- मैं तेरी तरह पागल नहीं हूँ जो इन प्यार व्यार के चक्करों में पडू। और वैसे भी मेरे पास इस सब फालतू चीजों के लिए समय नहीं है।
अभिषेक- इसका मतलब तू ये कहना चाहता है कि मैं पागल हूँ। रुक साले अभी तुझे बताता हूँ।
इतना कहकर अभिषेक मुझे मारने को हुआ तो मैं वहाँ से भाग लिया। अभी मैं दरवाजे के पास पहुँचा ही था कि बाहर से आती तनु से टकरा गया। जिसके कारण उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो जमीन पर गिरने को हुई तो मैंने उसे थाम लिया। उसे थामने के लिए मुझे उसकी कमर को पकड़ना पड़ा। मैंने तनु को जमीन पर गिरने नहीं दिया। बस फिर क्या था। तनु को एक बहाना मिल गया और वो मेरे ऊपर भड़क गई।
तनु- ये क्या बदतमीजी है नयन। तुम्हें शर्म नहीं आती मेरे साथ ऐसी हरकत करते हुए।
मैं- अरे मैंने क्या किया है। मैंने तो तुम्हें नीचे गिरने से बचाया है ताकि तुम्हें चोट न लगे।
तनु- एक तो खुद मुझसे जानबूझकर टकराते हो और ऊपर से बोलते हो कि मुझे गिरने से बचाया तुमने। मैं अच्छे से जानती हूँ कि तुम्हारे मन में मेरे लिए क्या है।
मै- देखो तनु बहुत हुआ अब। मैं तुमसे जानबूझ कर नहीं टकराया था वो तो बस अचानक से तुम आ गई इसलिए मैं टकरा गया तुमसे, लेकिन इसको इतना बड़ा इश्यू बनाने की क्या जरूरत है। तुम तो मुझे बहुत दिनों से जान रही हो। मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई गलत ख्याल नहीं है तनु। विश्वास करो मेरा।
तनु- तुम्हारा विश्वास करू। मुझे अब पता चल गया है कि तुम किस टाइप के लड़के है।
अभिषेक जो दूर खड़ा इस बात को सुन रहा था। तनु ने शायद अभिषेक के ऊपर ध्यान ही नहीं दिया कि अभिषेक भी कक्षा में है, क्योकि जब मुझसे टकराने के बाद तनु को मैंने पकड़कर खड़ा किया तो अभिषेक की तरफ उसकी पीठ हो गई थी, इसलिए अभिषेक को उसने नहीं देखा था। तनु की बात सुनकर अभिषेक ने तनु से तेज स्वर में कहा।
अभिषेक- तनु। ये क्या अनाप सनाप बके जा रही हो नयन के बारे में।
तनु- अभिषेक। तुम। तुमने देखा नहीं नयन ने मेरे साथ क्या किया है।
अभिषेक- हाँ मैंने देखा की नयन ने तुम्हारे साथ क्या किया है। और ये भी देख रहा हूँ कि तुम नयन के साथ क्या कर रही हो। तुम्हारे दिमाग फिर गया है क्या। तुम नयन को ऐसे कैसे उलटा सीधा बोल सकती हो। तुम कितना जानती हो नयन के बारे में। और मैं उसे जानता हूँ बचपन से। कक्षा की कोई भी लड़की नयन के बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकती और तुम नयन के ऊपर इलजाम लगा रही हो। अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसका मुँह तोड़ देता।
मैं- ये क्या बोल रहा है तू अभिषेक। तुझे तनु से ऐसे बात नहीं करना चाहिए। उसको कोई गलतफहमी हो गई होगी मेरे लिए। तो उसके लिए तू उसे इतनी खरी-खोटी सुना रहा है। दोस्तों के बीच तो ये सब होता ही रहता है। तनु अभिषेक की बात का बुरा मत मानना। ये तो बस ऐसे ही बोल गया तुम्हें।
मुझे कुछ कुछ समझ में आ रहा था कि अभिषेक का तनु को वहाँ अकेला छोड़कर आना तनु के गुस्से का मुख्य कारण हो सकता है। और इसी गुस्से में वो मुझे इतना कुछ कह गई। लेकिन अभिषेक को ऐसे रिएक्ट नहीं करना चाहिए था। अगर अभिषेक कुछ देर और यहाँ रहा तो दोनों में शीतयुद्ध शुरू होने की संभावना है इसलिए मैं अभिषेक को कक्षा से बाहर निकाल कर ले आया और उसे समझाते हुए कहा।
मै- ये सब क्या था यार। तुझे तनु से साथ ऐसे पेश नहीं आना था। वो अभी गुस्से में थी, क्योंकि तुम उसे वहाँ अकेला छोड़कर आ गए। और तुझसे पहले मैं उसके सामने आ गया इसलिए उसको पूरा गुस्सा मेरे ऊपर निकल गया। अब अपना गुस्सा थूक दे यार और चिल मार। तू गुस्से में बिलकुल भी चिंम्पैंजी लगता है। कहीं ऐसा न हो कि तुझे सर्कस वाले न देख लें और अपने साथ सर्कस में ले जाएँ। तब तो मुझे अपने दोस्त से मिलने के लिए रोज सर्कस जाना पड़ेगा।
मैंने अभिषेक का गुस्सा शान्त करने के लिए ही ऐसी कमेडी तरह की बात की थी और इसका असर भी हुआ। अभिषेक का गुस्सा शान्त हो गया। अब उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। थोड़ी देर बाहर बैठने के बाद भोजनावकाश के समाप्त होने की घंटी बजी तो हम दोनो कक्षा की तरफ चल दिए। कक्षा में पहुँचने के बाद अभिषेक ने एक नजर तनु को देखा और फिर अपनी नजर उससे हटा ली। मैंने भी तनु की तरफ देख कर आँखों से इशारा किया कि अब सब ठीक है अभिषेक गुस्से में नही है अब। तो तनु की तरफ से मुझे कुछ दिनों से मिल रही प्रतिक्रिया ही मिली। उसने अपना मुँह सिकोड़ लिया। मुझे उसकी इस प्रतिक्रिया को खास तवज्जो नहीं दी। क्योंकि अभी जो कुछ भी हुआ था। उसके बाद ऐसी प्रतिक्रिया का आना स्वाभाविक था।
बहरहाल मैं और अभिषेक आकर अपनी जगह पर बैठ गए। इधर हम दोनों के कक्षा से जाने के बाद अभिषेक के कहे हुए अंतिम शब्द कि अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसके मुँह तोड़ देता। तनु के कानों मे गूँज रहा था। उसे लग रहा था कि अभिषेक ने सब के सामने उसकी बेइज्जती कर दी है। जबकि उस समय कक्षा में हम तीनों के अलावा और कोई नहीं था। लेकिन तनु ने इस बात को अपने अहम पर ले लिया। उसके दिमाग में कुछ खुराफात चलने लगा। लेकिन अभी के लिए उसने अपने आप सो संभाल लिया था। अभिषेक ने अभी तक तनु से कोई बात नहीं की थी और न ही तनु ने कोई बात करने की कोशिक की थी। मैंने ही अभिषेक को कोहनी मारते हुए कहा।
मैं- अबे क्या कर रहा है तू। कम से कम एक बार बात तो कर तनु से।
अभिषेक- तू चुप कर साले। मैं कोई बात-चीत नहीं करने वाले तनु से।
मै- अगर बातचीत नहीं करेगा तो तुम दोनों की नाराजगी कैसे दूर होगी। नाराजगी दूर करने के लिए बात-चीत तो करनी पड़ेगी न।
अभिषेक- अब मैं तनु से तभी बात करूँगा जब वो स्वयं आकर मुझसे बात करेगी। अब इस बारे में ज्यादा बहस मत कर मुझसे।
तभी शिक्षक ने कमरे में प्रवेश किया तो मैं और अभिषेक शान्त हो गए। इसी तरह कक्षा चलती रही और मैं अभिषेक मन लगाकर पढ़ाई करते रहे, लेकिन भोजनावकाश के समय हुई घटना के बाद मेरा और अभिषेक का मन पढ़ाई में और दिनों की अपेक्षा नहीं लग रहा था। किसी तरह छुट्टी हुई और हम अपने घर जाने लगे। रास्ते में एक बार भी तनु ने अभिषेक और न ही तनु ने अभिषेक से बात करने की कोशिश की। हम सब अपने घर चले गए। मैं इस घटना के बारे में ज्यादा सोचना नहीं चाहता था, क्योंकि जितना ज्यादा मैं सोचता उतना ज्यादा उलटा सीधा खयाल मेरे दिमाग में आता।
अगले दिन हम सब फिर स्कूल पहुँचे। महेश भी आज स्कूल आया था। आज भी तनु और अभिषेक ने बात करने की कोशिश नहीं की एक दूसरे से। महेश ये देखकर हैरान था कि एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया जो अभिषेक और तनु ईलू ईलू करने की बजाय एकदम शांत बैठे हैं। भोजनावकाश के समय महेश से जब न रहा गया तो उसने मुझसे पूछ ही लिया।
महेश- अरे नूनू भाई एक बात तो बताना। मैं सुबह से देख रहा हूँ कि अभिषेक और तनु आपस में कोई बातचीत ही नहीं कर रहे हैं। अभी परसों तो दोनों ऐसे व्यस्त थे एस दूसरे में कि उन्होंने हमारी तरफ भी ध्यान नहीं दिया था। और कल मैं आया नहीं था। तो इस एक दिन में आखिर ऐसा क्या हो गया कि दोनो लैला मजनू एकदम शांत बैठे हुए हैं।
महेश के पूछने के बाद मैंने उसे कल हुई सारी घटना के बारे में अवगत करा दिया जिसे सुनने के बाद महेश ने कहा।
महेश- एक बात सच कहूँ यार। तनु पर मुझे कुछ शक हो रहा है। उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो चल रहा है। क्या हमें अभिषेक को उससे अलग होने के लिए बोल देना चाहिए।
मैं- कैसी बात कर रहा है यार तू। बिना किसी ठोस सबूत के हम केवल शक कर सकते हैं। और शक के बिना पर उठाया गया कोई भी कदम सही नहीं होता। कल तक मुझे भी ऐसा ही लगता था, लेकिन ठंडे दिमाग से सोचने के बाद मुझे भी एहसास हुआ कि शायद मैं सही नहीं सोच रहा था। कल तनु ने जो किया वो उसका गुस्सा था जो अभिषेक के बजाय मेरे ऊपर निकाल दिया उसने।
महेश- भगवान करे तू जो सोच रहा है वैसा ही हो, लेकिन मेरा सिक्स सेंस कह रहा है कि तनु कुछ न कुछ बड़ा सोच रही है।
मैं- तेरा सिक्स सेंस। साले तेरे पास एक भी सेंस नहीं है और तू सिक्स सेंस से सोच रहा है। सोचना तेरे बस की बात नहीं है। और जो जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दे। समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।
मेरी बात सुनकर महेश मुस्कुराने लगा। इसी तरह दो दिन बीत गए, लेकिन अभिषेक और तनु में कोई बात नहीं हुई। अगले दिन मैं अभिषेक और महेश भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए। तभी वहां तनु आ गई। और आते ही मुझसे और महेश से बोली।
तनु- नयन और महेश कैसे हो तुम दोनों।
तनु से हम दोनों को इतने प्रेम से बात करने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि पिछले लगभग दो महीने में आज पहली बार हुआ था जो तनु ने तने प्रेम से हम दोनो से बात की थी। उसकी बात सुनकर हमें लगा कि शायद हम दोनों उसके बारे में गलत ही सोचते थे। क्योंकि अभिषेक और तनु का नया नया प्यार था और उनको थोड़ा अलग स्पेस चाहिए था इसलिए तनु हम दोनों से बात नहीं करती थी ठीक से। इसलिए तनु के इतने प्रेम से बोलने के बाद हम दोनों को बहुत खुशी हुई। हम दोनों ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैं और अभिषेक- हम दोनों बहुत बढ़िया हैं।
मैं- तुम कैसी हो तनु।
तनु- मैं बिलकुल भी अच्छी नहीं हूँ।
मैं- क्यों क्या हुआ तुम्हें।
तनु- अरे यार तुम्हारा दोस्त पिछले तीन दिन से साडू मुँह बनाकर घूम रहा है। मुझसे बात ही नहीं करता तो मैं कैसे अच्छी हो सकती हूँ।
इतना बोलकर तनु अभिषेक की तरफ मुखातिब होकर अभिषेक से बोली।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
Fantastic update
 

parkas

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सोलहवाँ भाग
अभिषेक से बात करके मुझे बहुत सुकून मिला। उससे बात करके मुझे अनुमान हुआ कि मेरा शक अभिषेक के ऊपर निराधार है। फिर हम दोनों हँसते हुए वहाँ से चले गए। शायद मेरी खुशी के आगे अभिषेक को यह ध्यान भी नही रहा कि तनु उसके इंतजार कर रही है। हम दोनो अपनी कक्षा में आ गए। जब वहाँ पर तनु दिखाई नहीं दी तो अभिषेक ने अपने सिर पर हाथ मारते हुए कहा।
अभिषेक- अरे यार। ये क्या हो गया। तेरे चक्कर में मैं तनु को वहीं छोड़कर चला आया। तू रुक मैं आता हूँ कुछ देर में।
मैं-जा बेटा जा। आज तो तेरी बैंड बजने वाली है (मैंने ये बात हँसते हुए कही थी)
अभिषेक मुझे कक्षा में छोड़कर चला गया। और बाहर जहाँ तनु को छोड़कर आया था वहाँ देखने लगा, लेकिन तनु वहाँ नहीं थी। अभिषेक यहाँ वहाँ ढूंढने के बाद वापस कक्षा मे चला आया। मैने उसे देखते हुए कहा।
मैं- क्या हुआ। तनु नहीं मिली क्या।
अभिषेक- नहीं यार पता नहीं वो कहाँ चली गई।वो वहाँ थी ही नहीं जहाँ में उसे छोड़कर आया था।
मै- अरे यार गई कहाँ होगी। यहीं स्कूल में ही होगी। अभी थोड़ी देर में आ जाएगी। वैसे लगता है कि वो तुझसे नाराज हो गई है तेरे ऐसे चले आने से। अपना पिछवाड़ा मजबूत कर ले, क्योंकि आज तेरे पिछवाड़े पर बहुत मार पड़ने वाली है।
अभिषेक- ये सब तेरी वजह से ही हुआ है और तू मेरे ही मजे ले रहा है। ले भाई तेरा समय है ले ले मजे मेरे। एक दिन ऐसे ही मैं भी तेरे मजे लूँगा देख लेना।
मैं- मैं तेरी तरह पागल नहीं हूँ जो इन प्यार व्यार के चक्करों में पडू। और वैसे भी मेरे पास इस सब फालतू चीजों के लिए समय नहीं है।
अभिषेक- इसका मतलब तू ये कहना चाहता है कि मैं पागल हूँ। रुक साले अभी तुझे बताता हूँ।
इतना कहकर अभिषेक मुझे मारने को हुआ तो मैं वहाँ से भाग लिया। अभी मैं दरवाजे के पास पहुँचा ही था कि बाहर से आती तनु से टकरा गया। जिसके कारण उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो जमीन पर गिरने को हुई तो मैंने उसे थाम लिया। उसे थामने के लिए मुझे उसकी कमर को पकड़ना पड़ा। मैंने तनु को जमीन पर गिरने नहीं दिया। बस फिर क्या था। तनु को एक बहाना मिल गया और वो मेरे ऊपर भड़क गई।
तनु- ये क्या बदतमीजी है नयन। तुम्हें शर्म नहीं आती मेरे साथ ऐसी हरकत करते हुए।
मैं- अरे मैंने क्या किया है। मैंने तो तुम्हें नीचे गिरने से बचाया है ताकि तुम्हें चोट न लगे।
तनु- एक तो खुद मुझसे जानबूझकर टकराते हो और ऊपर से बोलते हो कि मुझे गिरने से बचाया तुमने। मैं अच्छे से जानती हूँ कि तुम्हारे मन में मेरे लिए क्या है।
मै- देखो तनु बहुत हुआ अब। मैं तुमसे जानबूझ कर नहीं टकराया था वो तो बस अचानक से तुम आ गई इसलिए मैं टकरा गया तुमसे, लेकिन इसको इतना बड़ा इश्यू बनाने की क्या जरूरत है। तुम तो मुझे बहुत दिनों से जान रही हो। मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई गलत ख्याल नहीं है तनु। विश्वास करो मेरा।
तनु- तुम्हारा विश्वास करू। मुझे अब पता चल गया है कि तुम किस टाइप के लड़के है।
अभिषेक जो दूर खड़ा इस बात को सुन रहा था। तनु ने शायद अभिषेक के ऊपर ध्यान ही नहीं दिया कि अभिषेक भी कक्षा में है, क्योकि जब मुझसे टकराने के बाद तनु को मैंने पकड़कर खड़ा किया तो अभिषेक की तरफ उसकी पीठ हो गई थी, इसलिए अभिषेक को उसने नहीं देखा था। तनु की बात सुनकर अभिषेक ने तनु से तेज स्वर में कहा।
अभिषेक- तनु। ये क्या अनाप सनाप बके जा रही हो नयन के बारे में।
तनु- अभिषेक। तुम। तुमने देखा नहीं नयन ने मेरे साथ क्या किया है।
अभिषेक- हाँ मैंने देखा की नयन ने तुम्हारे साथ क्या किया है। और ये भी देख रहा हूँ कि तुम नयन के साथ क्या कर रही हो। तुम्हारे दिमाग फिर गया है क्या। तुम नयन को ऐसे कैसे उलटा सीधा बोल सकती हो। तुम कितना जानती हो नयन के बारे में। और मैं उसे जानता हूँ बचपन से। कक्षा की कोई भी लड़की नयन के बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकती और तुम नयन के ऊपर इलजाम लगा रही हो। अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसका मुँह तोड़ देता।
मैं- ये क्या बोल रहा है तू अभिषेक। तुझे तनु से ऐसे बात नहीं करना चाहिए। उसको कोई गलतफहमी हो गई होगी मेरे लिए। तो उसके लिए तू उसे इतनी खरी-खोटी सुना रहा है। दोस्तों के बीच तो ये सब होता ही रहता है। तनु अभिषेक की बात का बुरा मत मानना। ये तो बस ऐसे ही बोल गया तुम्हें।
मुझे कुछ कुछ समझ में आ रहा था कि अभिषेक का तनु को वहाँ अकेला छोड़कर आना तनु के गुस्से का मुख्य कारण हो सकता है। और इसी गुस्से में वो मुझे इतना कुछ कह गई। लेकिन अभिषेक को ऐसे रिएक्ट नहीं करना चाहिए था। अगर अभिषेक कुछ देर और यहाँ रहा तो दोनों में शीतयुद्ध शुरू होने की संभावना है इसलिए मैं अभिषेक को कक्षा से बाहर निकाल कर ले आया और उसे समझाते हुए कहा।
मै- ये सब क्या था यार। तुझे तनु से साथ ऐसे पेश नहीं आना था। वो अभी गुस्से में थी, क्योंकि तुम उसे वहाँ अकेला छोड़कर आ गए। और तुझसे पहले मैं उसके सामने आ गया इसलिए उसको पूरा गुस्सा मेरे ऊपर निकल गया। अब अपना गुस्सा थूक दे यार और चिल मार। तू गुस्से में बिलकुल भी चिंम्पैंजी लगता है। कहीं ऐसा न हो कि तुझे सर्कस वाले न देख लें और अपने साथ सर्कस में ले जाएँ। तब तो मुझे अपने दोस्त से मिलने के लिए रोज सर्कस जाना पड़ेगा।
मैंने अभिषेक का गुस्सा शान्त करने के लिए ही ऐसी कमेडी तरह की बात की थी और इसका असर भी हुआ। अभिषेक का गुस्सा शान्त हो गया। अब उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। थोड़ी देर बाहर बैठने के बाद भोजनावकाश के समाप्त होने की घंटी बजी तो हम दोनो कक्षा की तरफ चल दिए। कक्षा में पहुँचने के बाद अभिषेक ने एक नजर तनु को देखा और फिर अपनी नजर उससे हटा ली। मैंने भी तनु की तरफ देख कर आँखों से इशारा किया कि अब सब ठीक है अभिषेक गुस्से में नही है अब। तो तनु की तरफ से मुझे कुछ दिनों से मिल रही प्रतिक्रिया ही मिली। उसने अपना मुँह सिकोड़ लिया। मुझे उसकी इस प्रतिक्रिया को खास तवज्जो नहीं दी। क्योंकि अभी जो कुछ भी हुआ था। उसके बाद ऐसी प्रतिक्रिया का आना स्वाभाविक था।
बहरहाल मैं और अभिषेक आकर अपनी जगह पर बैठ गए। इधर हम दोनों के कक्षा से जाने के बाद अभिषेक के कहे हुए अंतिम शब्द कि अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसके मुँह तोड़ देता। तनु के कानों मे गूँज रहा था। उसे लग रहा था कि अभिषेक ने सब के सामने उसकी बेइज्जती कर दी है। जबकि उस समय कक्षा में हम तीनों के अलावा और कोई नहीं था। लेकिन तनु ने इस बात को अपने अहम पर ले लिया। उसके दिमाग में कुछ खुराफात चलने लगा। लेकिन अभी के लिए उसने अपने आप सो संभाल लिया था। अभिषेक ने अभी तक तनु से कोई बात नहीं की थी और न ही तनु ने कोई बात करने की कोशिक की थी। मैंने ही अभिषेक को कोहनी मारते हुए कहा।
मैं- अबे क्या कर रहा है तू। कम से कम एक बार बात तो कर तनु से।
अभिषेक- तू चुप कर साले। मैं कोई बात-चीत नहीं करने वाले तनु से।
मै- अगर बातचीत नहीं करेगा तो तुम दोनों की नाराजगी कैसे दूर होगी। नाराजगी दूर करने के लिए बात-चीत तो करनी पड़ेगी न।
अभिषेक- अब मैं तनु से तभी बात करूँगा जब वो स्वयं आकर मुझसे बात करेगी। अब इस बारे में ज्यादा बहस मत कर मुझसे।
तभी शिक्षक ने कमरे में प्रवेश किया तो मैं और अभिषेक शान्त हो गए। इसी तरह कक्षा चलती रही और मैं अभिषेक मन लगाकर पढ़ाई करते रहे, लेकिन भोजनावकाश के समय हुई घटना के बाद मेरा और अभिषेक का मन पढ़ाई में और दिनों की अपेक्षा नहीं लग रहा था। किसी तरह छुट्टी हुई और हम अपने घर जाने लगे। रास्ते में एक बार भी तनु ने अभिषेक और न ही तनु ने अभिषेक से बात करने की कोशिश की। हम सब अपने घर चले गए। मैं इस घटना के बारे में ज्यादा सोचना नहीं चाहता था, क्योंकि जितना ज्यादा मैं सोचता उतना ज्यादा उलटा सीधा खयाल मेरे दिमाग में आता।
अगले दिन हम सब फिर स्कूल पहुँचे। महेश भी आज स्कूल आया था। आज भी तनु और अभिषेक ने बात करने की कोशिश नहीं की एक दूसरे से। महेश ये देखकर हैरान था कि एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया जो अभिषेक और तनु ईलू ईलू करने की बजाय एकदम शांत बैठे हैं। भोजनावकाश के समय महेश से जब न रहा गया तो उसने मुझसे पूछ ही लिया।
महेश- अरे नूनू भाई एक बात तो बताना। मैं सुबह से देख रहा हूँ कि अभिषेक और तनु आपस में कोई बातचीत ही नहीं कर रहे हैं। अभी परसों तो दोनों ऐसे व्यस्त थे एस दूसरे में कि उन्होंने हमारी तरफ भी ध्यान नहीं दिया था। और कल मैं आया नहीं था। तो इस एक दिन में आखिर ऐसा क्या हो गया कि दोनो लैला मजनू एकदम शांत बैठे हुए हैं।
महेश के पूछने के बाद मैंने उसे कल हुई सारी घटना के बारे में अवगत करा दिया जिसे सुनने के बाद महेश ने कहा।
महेश- एक बात सच कहूँ यार। तनु पर मुझे कुछ शक हो रहा है। उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो चल रहा है। क्या हमें अभिषेक को उससे अलग होने के लिए बोल देना चाहिए।
मैं- कैसी बात कर रहा है यार तू। बिना किसी ठोस सबूत के हम केवल शक कर सकते हैं। और शक के बिना पर उठाया गया कोई भी कदम सही नहीं होता। कल तक मुझे भी ऐसा ही लगता था, लेकिन ठंडे दिमाग से सोचने के बाद मुझे भी एहसास हुआ कि शायद मैं सही नहीं सोच रहा था। कल तनु ने जो किया वो उसका गुस्सा था जो अभिषेक के बजाय मेरे ऊपर निकाल दिया उसने।
महेश- भगवान करे तू जो सोच रहा है वैसा ही हो, लेकिन मेरा सिक्स सेंस कह रहा है कि तनु कुछ न कुछ बड़ा सोच रही है।
मैं- तेरा सिक्स सेंस। साले तेरे पास एक भी सेंस नहीं है और तू सिक्स सेंस से सोच रहा है। सोचना तेरे बस की बात नहीं है। और जो जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दे। समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।
मेरी बात सुनकर महेश मुस्कुराने लगा। इसी तरह दो दिन बीत गए, लेकिन अभिषेक और तनु में कोई बात नहीं हुई। अगले दिन मैं अभिषेक और महेश भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए। तभी वहां तनु आ गई। और आते ही मुझसे और महेश से बोली।
तनु- नयन और महेश कैसे हो तुम दोनों।
तनु से हम दोनों को इतने प्रेम से बात करने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि पिछले लगभग दो महीने में आज पहली बार हुआ था जो तनु ने तने प्रेम से हम दोनो से बात की थी। उसकी बात सुनकर हमें लगा कि शायद हम दोनों उसके बारे में गलत ही सोचते थे। क्योंकि अभिषेक और तनु का नया नया प्यार था और उनको थोड़ा अलग स्पेस चाहिए था इसलिए तनु हम दोनों से बात नहीं करती थी ठीक से। इसलिए तनु के इतने प्रेम से बोलने के बाद हम दोनों को बहुत खुशी हुई। हम दोनों ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैं और अभिषेक- हम दोनों बहुत बढ़िया हैं।
मैं- तुम कैसी हो तनु।
तनु- मैं बिलकुल भी अच्छी नहीं हूँ।
मैं- क्यों क्या हुआ तुम्हें।
तनु- अरे यार तुम्हारा दोस्त पिछले तीन दिन से साडू मुँह बनाकर घूम रहा है। मुझसे बात ही नहीं करता तो मैं कैसे अच्छी हो सकती हूँ।
इतना बोलकर तनु अभिषेक की तरफ मुखातिब होकर अभिषेक से बोली।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
Nice and superb update....
 
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