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Use complete kijiye, taaki thodi asaani ho jaye,,,,समय नहीं मिल पाया था सर जी।
आज पूरा कर देंगे।

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आपकी मांग पूरी हुई सर।Use complete kijiye, taaki thodi asaani ho jaye,,,,![]()
बाईसवाँ भाग
मुझसे बात करने के बाद अभिषेक तनु और पायल के पास चला गया और उनसे बोला।
अभिषेक- तनु और पायल। तुमने तो आज मेरी आँखें खोल दी। आज तु दोनों ने मुझे ये एहसास करवा दिया है कि कौन अपना है और कौन पराया। कौन सच्चा है और कौन झूठा। कौन विश्वास करने के काबिल है और कौन अविश्वास के लायक है।
अभिषेक बात तो तनु और पायल से कर रहा था, परंतु देख मेरी तरफ रहा था और मैं चुपचाप नजरें झुकाए गुनहगार की तरह बिना कोई गुनाह किए आँसू बहा रहा था। अभिषेक के इस बर्ताव के कारण मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि मैं आपना सिर उठाकर किसी का सामना कर सकूँ। तभी वो हो गया जो अभिषेक के बर्ताव को देखते हुए मेरे जेहन में दूर दूर तक नहीं था।
मैंने अपनी नजरें नीचे की हुई थी तो मैंने कुछ देखा ही नहीं, लेकिन तभी दो जोरदार चटाक चटाक की आवाज मेरे कानों में पड़ी। जो थप्पड़ की आवाज थी। मैंने अपनी नजरें उठाकर अभिषेक की तरफ देखा तो उसके चेहरा गुस्से से लाल दिख रहा था तथा तनु और पायल अपने गालों पर हाथ रखे अभिषेक को आँखें फाड़े देख रही थी। सभी विद्यार्थी और शिक्षक भी यह देख और थप्पड़ की आवाज सुनकर आश्चर्यचकित थे कि अभिषेक ने तनु और पायल को थप्पड़ क्यों मारा।
और मैं तो जैसे सदमें में पहुँच गया था। मुझे तो कुछ समझ में भी नहीं आया। ये तब इतनी तेजी से हुआ कि मुझे तो क्या किसी के भी समझ में नहीं आया। अभिषेक ने फिर से गुस्से में अपना आपा खो दिया और दोनों के दूसरे गाल पर भी एक एक थप्पड़ रसीद कर दिए। प्रधानाचार्य महोदय तुरंत अभिषेक के पास पहुँचे और उसे पकड़कर अपनी तरफ घुमाते हुए झंझोड़ते हुए पूछा।
प्रधानाचार्य महोदय- ये क्या कर रहे हो तुम। तुम्हारा दिमाग तो ठीक है न। क्यों मारा इन दोंनो को कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो।
अभिषेक- हाँ सर मैं पागल हो गया हूँ। इन दोनों के फरेब ने मुझे पागल बना दिया है। रिश्तों पर से मेरा विश्वास उठ गया है इन दोनों की वजह से। मेरे सामने से इन दोनों धोखेबाजों को ले जाइये सर। नहीं तो मुझे नहीं पता कि मैं गुस्से में क्या कर दूँ इन दोनों के साथ।
अभिषेक की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी शिवाय 4 लोगों के। मुझे, सुरेश, तनु और पायल। पायल और तनु तो सोच भी नहीं सकती थी कि अभिषेक को ये सब पता चल गया है। लेकिन उन्हें ये समझ में नहीं आ रहा था कि जिस साजिश को उन्होंने बहुत गुपचुप तरीके से अंजाम दिया था उसका पता अभिषेक को कैसे चल गया। प्रधानाचार्य को अभिषेक की बातें बिलकुल समझ में नहीं आई। इसलिए वो अभिषेक से गुस्से में बोले।
प्रधानाचार्य महोदय- ये क्या बकवास कर रहे हो अभिषेक। लगता है कि नयन के धोखे ने तुम्हारे दिमाग को हिला कर रख दिया है इसलिए तुम अनाप सनाप और अनरगल बातें कर रहे हो। अरे यहाँ खड़े सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देखा कि नयन ने क्या किया तनु के साथ। जिसकी गवाह तुम्हारी बहन पायल भी है। ऊपर से नयन ने तनु के चरित्र पर भी उँगली उठाई। उसके बाद भी तुम ऐसी बातें कर रहे हो। मुझे लगता है कि मुझे पुलिस को बुला लेना चाहिए।
अभिषेक- (एकदम लाचार होकर) मैं कोई बकवास नहीं कर रहा हूँ सर। ये सच है कि इस इस वाकये ने मेरा दिमाग हिलाकर रख दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहाँ खड़े सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देखा है वो आधा सच है। आपने वो देखा जो आपको दिखाया गया है। पूरा सच तो कुछ और है। और ये पायल की बात कर रहे हैं ने आप। ये मेरी बहन नहीं है। मेरी दुश्मन है ये बहन इसकी तरह नहीं होती। बहन वो होती है जो अपने भाई के सुख-दुःख में साथ दे, न कि किसी के साथ मिलकर अपने भाई के विरुद्ध साजिश करे। आप पुलिस बुलाना चाहते हैं न। आप पुलिस बुला ही लीजिए सर। आखिर सच्चाई सबको पता चलनी ही चाहिए।
प्रधानाचार्य महोदय- तुम कहना क्या चाहते हो अभिषेक। तुम किस साजिस की बात कर रहे हो। तुम ये कहना चाहते हो कि हम लोगों को जो दिखाया गया है वो सच नहीं हो। तो सच क्या है। और तुम किस पूरे सच की बात कर रहे हो।
अभिषेक- मैं ये कहना चाहता हूँ कि नयन जो कह रहा है वो सत्य है। ये साजिश है नयन को फँसाने की और इस साजिश को अंजाम दिया है तनु और इस पायल ने। पूरा सच इन्हीं से पूछ लीजिए, यही बताएँगी तो ज्यादा अच्छा है।
अभिषेक की बात सुनकर एक बार फिर सबके चेहरे देखने लायक थे। फिर से सभी विद्यार्थियों में खुसर-फुसर शुरू हो गई। तनु और पायल का चेहरा देखने लायक था। अभिषेक की बात सुनकर इस समय मुझे वो खुशी महसूस हो रही थी जिसका मैं वर्णन नहीं कर सकता। अभिषेक को भी पता है सब ये जानकर मेरे चेहरे पर संतुष्टि के भाव आ गए। अपने आपको फँसता देख तनु ने अभिषेक को कंधे को पकड़ते हुए रोनी सूरत बनाकर कहा।
तनु- अभिषेक ये तुम क्या कह रहे हो। सभी ने देखा कि नयन मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा था। तुमने भी देखा। फिर भी तुम नयन के बजाय मुझपर शक कर रहे हो। मैं तुमसे प्यार करती हूँ अभिषेक। मैं तुमसे झूठ क्यों बोलूँगी। मैंने कोई साजिश नहीं की है। तुम्हें जरूर कोई गलतफहमी हुई है।
तनु के इतना बोलते ही अभिषेक तनु पर बरस पड़ा और उसे अपने से दूर धकेलते हुए कहा।
अभिषेक- दूर हट मुझसे। छूना भी मत अपने गंदे हाथों से मुझे। तू झूठ बोल रही है। तू अपनी हवस को प्यार का नाम देकर प्यार जैसे पवित्र रिश्ते को बदनाम न कर। प्यार क्या होता है तुझे क्या पता। मुझे तुमझे घिन आती है कि मैंने तुझसे प्यार किया था। अरे प्यार का न सही तो कम से कम दोस्ती का तो ख्याल किया होता। लेकिन तू इतनी गिर जाएगी ये मैंने सोचा नहीं था और तू नयन की बात मत कर। हमारी दोस्ती इतनी कमजोर नहीं है कि तू अपनी वाहियात मंसूबों और साजिशों से हमारी दोस्ती को तोड़ देगी। हमारी दोस्ती बचपन की है। मैं उसकी नस नस से वाकिफ हूँ। अगर एक बार ईश्वर भी आकर कह दे कि नयन गलत है तब भी मैं उसके विश्वास न करूँ। हमारी दोस्ती विश्वास जैसे मामूली शब्दों से बहुत ऊपर है। समझी। हम दो जिस्म भलें हैं, लेकिन हमारी जान एक दूसरे में बसती है। लेकिन मैं तुम्हें ये सब क्यों बता रहा हूँ जिसे किसी रिश्ते का मतलब ही नहीं पता है।
मुझे अभिषेक की बात सुनकर एक असीम आनंद की प्राप्ति हुई। मेरा सीना गर्व से फूल गया अपनी दोस्ती को लेकर। लेकिन अगले ही पल मुझे निराशा ने घेर लिया। जब मैंने सोचा की मैंने अभिषेक को कितना गलत सोचा। अपनी दोस्ती पर शक किया मैंने। नहीं अभिषेक की बात सुनकर तनु की सारी हवा टाइट हो चुकी थी। उसे एहसास हो गया था कि उसकी साजिश का भंडाभोड़ हो चुका है। फिर भी उसने एक आखिरी कोशिश करते हुए कहा।
तनु- नहीं अभिषेक तुम मेरे ऊपर गलत इलजाम लगा रहे हो। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जैसा तुम समझ रहे हो। सब कुछ इस नयन ने किया है।
ये सुनकर अभिषेक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया उसने गुस्से में तनु की गिरेबान पकड़ते हुए कहा।
अभिषेक- चुप। बिलकुल चुप। अपनी गंदी जुबान से नाम भी मत लेना मेरे दोस्त का। तू इस काबिल नहीं रह गई है कि तू हम दोनों का नाम भी अपनी गंदी जुबान से ले सके। और कितना झूठ बोलोगी तुम हाँ। कितना। तुम्हें सुबूत चाहिए न कि नयन सच कह रहा है या झूठ। तो रुको मैं तुम्हें इसका सुबूत भी दे देता हूँ। सुरेश जरा इधर तो आओ और सभी विद्यार्थियों और सभी शिक्षकों को बताओ जो तुमने सुना। एक एक शब्द बताओ इन्हें। बताओ इन्हें इनकी करतूत।
अभिषेक की बात सुनकर सभी विद्यार्थी और शिक्षक सुरेश की तरफ देखने लगे। सुरेश चलते हुए प्रधानाचार्य महोदय जी के पास गया और उनसे बोला।
सुरेश- हाँ सर जी। अभिषेक भइया बिलकुल सही कह रहें हैं। नयन भइया को फँसाया गया है। मैंने इन दोनों को बात करते हुए सुना था
प्रधानाचार्य महोदय- क्या बात करते हुए सुना था तुमने। पूरी बात बताओ।
सुरेश- वहाँ उस पीपल के पेड़ के पास मैं पेड़ से टेक लगाकर खड़ा प्राकृतिक सौंन्दर्य का आनंद उठा रहा था तो मैंने इन दोनों को बात करते हुए सुना था।
कुछ देर पहले।
तनु- (फोन पर) पायल तुरंत पीपल के पेड़ के पास आओ।
पायल- हाँ बोलो तनु क्या बात है।
तनु- देखो पायल वो उस तरफ गया है। तो यही सबसे अच्छा मौका है कि हमने जो प्लान बनाया है उसको अमल में लाएँ।
पायल- मुझे तो डर लग रहा है तनु। इतने लोंगों के होते हुए कहीं कुछ गड़बड़ हो गई तो भैया तो मेरी जान ही ले लेंगे।
तनु- कुछ नहीं होगा यार तुम्हें। मैंने बहुत सोच समझ कर ये टूर का प्लान किया था। और अभी तक सब मेरे प्लान के मुताबिक हो रहा है। बस ये आखिरी प्रयास भी सफल हो जाए तो हम दोनों का मकसद पूरा हो जाएगा। और तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है। जो कुछ करूँगी मैं करूँगी, बस तुम्हें मेरा साथ देना है। और सबको से ये कहना है कि उसने मेरे साथ जबरदस्ती की है। मैं जा रही हूँ उसके पास।
अभी का समय।
बस यही बात मैंने सुनी। क्योंकि इन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था, इसलिए मुझे समझ में नहीं आया कि ये किसके बारे में बात कर रही हैं। क्योंकि पायल भी इनके साथ थी इसलिए मुझे ये उचित लगा कि अभिषेक भैया को इस बारे में बता दूँ। जब मैं अभिषेक भैया को ये बात बताई तो इनके पीछे आने लगे तभी पायल ने बचाओ बचाओ का शोर मचा दिया। उसके बाद क्या हुआ ये आप सभी के सामने है।
सुरेश की बात सुनकर सभी अवाक रह गए। किसी को विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि तनु जैसी सीधी दिखने वाली लड़की इतनी शातिर हो सकती है और इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकती है। सुरेश की बात सुनकर प्रधानाचार्य महोदय को भी उसकी बातों पर विश्वास करना पड़ा, क्योंकि सुरेश भी अच्छे चाल-चलन का लड़का था। बेवजह उसने आज तक किसी से कोई वाद-विवाद या लड़ाई झगड़ा नहीं किया था। बस अपने काम से काम रखने वाला लड़का था। और सबसे बड़ी बात पढ़ाई के मामले में अव्वल होने के कारण वो शिक्षकों का प्रिय भी था, इसलिए उसकी बात को नजरअदाज भी नहीं किया जा सकता था। इसलिए प्रधानाचार्य महोदय तनु और पायल के पास गए और गरजती आवाज में उनसे कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- ये मैं क्या सुन रहा हूँ। तुम दोनों ने नयन को फँसाने के लिए इतनी बड़ी साजिश की। बताओ। क्या जो सुरेश कह रहा है वो सत्य है।
प्रधानाचार्य महोदय की बातों का दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया। तो प्रधानाचार्य महोदय ने दोबारा पहले की अपेक्षा और भी तेज आवाज में कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- मैंने तुम दोनों से कुछ पूछा है। मैं आखिरी बार पूछ रहा हूँ तुम दोनों से। क्या सुरेश ने जो कुछ भी कहा वो सत्य है। नहीं तो मैं अभी पुलिस को बुलाता हूँ। जब डंडे की मार पड़ेगी तो खुद ही बोलना शुरू कर दोगी।
इतना कहकर प्रधानाचार्य जी ने अपना मोबाइल निकाल लिया और न. मिलाने लगे। उनकी ये धमकी का तनु पर तो नहीं लेकिन पायल पर असर कर गई और वो रोते हुए बोली।
पायल- मुझे माफ कर दीजिए सर मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मै तनु की बातों में आ गई और इस साजिश में उसका साथ दिया। मुझे माफ कर दीजिए सर।
प्रधानाचार्य महोदय- तुमने बहुत गलत किया पायल। तुम्हारे इस कदम से नयन की पूरी जिंदगी बरबाद हो सकती थी। मुझे समझ में नहीं आता कि तुम्हें अपने भाई और अपने मम्मी पापा का ख्याल भी नहीं आया कि उनपर क्या गुजरेगी जब उसे सच्चाई का पता चलेगा। तुम्हारी गलती माफी के काबिल नहीं है पायल। फिर भी अगर माफी माँगना ही है तो जाकर अभिषेक और नयन से माँफी माँगो। हो सकता है वो तुम्हें माँफ कर दें।
प्रधानाचार्य महोदय की बात सुनकर अभिषेक के पास गई और उसके पैर पकड़कर रोते हुए वोली।
पायल- मुझे माफ कर दो भैया मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। मैं तनु के बहकावे में आकर नयन भैया से अपनी नफरत निकालने के लिए इसका साथ दिया। मुझे माफ कर दो भैया।
अभिषेक- नहीं पायल तुमने कोई भूल नहीं की है बल्कि गुनाह किया है। जिसकी कोई माफी नहीं है। तुमसे मुझे ये उम्मीद नहीं थी। तुमने मुझे बहुत ज्यादा दुःख पहुँचाया है। इसके लिए मैं तुम्हें कभी माँफ नहीं करूँगा।
अभिषेक की बात सुनकर पायल रोती हुई मेरे पास आई और मेरे पैरों में गिर कर सिसक सिसक कर रोने लगी। मैंने तुरंत उसे अपने पैरों से उठाया और उसके आँसू पोछते हुए कहा।
मैं- देखो पायल। जो होना था हो गया। अब रोने से क्या मतलब। शांत हो जाओ।
पायल- (जोर जोर से रोते हुए) नहीं भैया मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई गुनाह हो गया मुझसे। मैं आप और भैया के प्यार को समझ ही नहीं पाई कभी। और आप को गलत समझ लिया। उस दिन जो कुछ भी हुआ था। उसने मेरे दिल में आपके लिए नफरत बढ़ा दी थी। उसी नफरत के लचते मैंने तनु का साथ दिया। मुझे माफ कर दो भैया। आज के बाद मैं आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगी। अभिषेक भैया की तरह ही आपको मानूँगी। मुझे माफ कर दो भैया।
मैं- देख पायल मुझे अभी इस विषय में कोई बात नहीं करनी है तुझसे। इसके बारे में बाद में बात करेंगे। अब तू शान्त हो जा और जो कुछ भी हुआ अभी उसे भूल जा।
मेरे इतना करने के बाद पायल का रोना कुछ कम हो गया। फिर प्रधानाचार्य महोदय ने तनु की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- तनु। तुमने तो अपनी शर्म वेंच खाई है। आज तुम्हारी वजह से मैंने नयन की कोई गलती न होते हुए भी उसके ऊपर हाथ उठाया। मुझे तो अपने ऊपर शर्म आ रही है कि तू मेरे दोस्त ही बेटी है। अरे मैंने कितने गर्व से तुझे पूरी कक्षा के सामने तेरा परिचय करवाया था सब से। अभिषेक और नयन को तेरी मदद करने के लिए भी कहा। जिसे उन्होंने इनकार नही किया और तेरी हर संभव मदद की। मैंने तुम सब की दोस्ती के बहुत चर्चे सुने थे, लेकिन तुम दोस्ती के नाम पर कलंक निकली। अगर तुममें थोड़ी सी भी शर्म और इंसानियत बाकी है तो अपनी गलती स्वीकार करो। और माफी माँगो दोनो से। परंतु तुमने जो किया है वो माफी के काबिल भी नहीं है। फिर भी जाकर माफी माँग लो दोनो से।प्रधानाचार्य की बात सुनकर तनु अपनी जगह से चलकर अभिषेक के पास आई और हाथ जोड़कर जैसे बोलने की हुई। अभिषेक गुस्से से बोला।
अभिषेक- कोशिश भी मत करना और उम्मीद भी मत करना मुझसे माफी की। तुमने जो किया है उसके बाद मैं तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहता। चली जाओ मेरे सामने से तुम।
अभिषेक की बात सुनकर तनु मेरे पास आई। और हाथ जोड़कर मुझसे बोली।
तनु- मुझे माफ कर दो नयन।
उसकी बात सुनकर मैंने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
छठवाँ भाग
उसके बाद 15 दिन ऐसे ही बीत गए अभिषेक तनु की पढ़ाई में पूरी मदद करता, जो भी उसे समझ में नहीं आता था उसे बताता। उसके अलावा भी कुछ न कुछ बताता रहता, लेकिन मैं तनु से तभी कोई बात करता जब उसे गणित में कोई समस्या होती, तो वो मुझसे पूछती थी और मैं उनकी समस्या का समाधान करता था। या फिर जब तनु पढ़ाई के अलावा मुझसे कोई बात करती। तो मैं उससे बात करता। हमारी कक्षा के सभी विद्यार्थियों की नज़र हर समय हम पर ही रहती। वो सोचते थे कि ऐसा क्या जादू कर दिया है हम दोनों ने तनु पर कि तनु हमेशा हम दोनों के ही साथ रहती थी स्कूल समय में।
ऐसे ही एक दिन तनु स्कूल नहीं आई थी तो मैं और अभिषेक भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए थे तभी महेश वहां पर आ गया और बैठते हुए बोला।
महेश- क्या हाल हैं तेरे नूनू भाई। आजकल बहुत व्यस्त हो गए हो तनु के आने से।
मैं- साले तू नहीं सुधरेगा न। मैंने तुझे कितनी बार कहा है कि मुझे नूनू मत बोला कर, लेकिन तू सुनता ही नहीं। किसी दिन बहुत मार खाएगा मुझसे तू।
महेश- जब तू जानता है तो भड़कता क्यों है। तू तो मेरे लिए नूनू ही रहेगा। चल बता अब क्या चक्कर है जो तुम दोनों तनु के साथ इतने व्यस्त हो गए हो।
अभिषेक- कुछ नहीं है भाई। बस प्रधानाचार्य सर ने जो कहा था वही कर रहे हैं हम दोनों। और तू किस चक्कर की बात कर रहा है।
महेश- सब दिख रहा है। अंधा नहीं हूँ मैं। जब से वो आई है तुम दोनों के ही साथ रहती है। और उसके आने से तुम दोनों तो जैसे सबकुछ भूल गए हो कि हम भी तुम्हारे दोस्त हैं।
मैं- ऐसा कुछ नहीं है। तू भी न पता नहीं क्या क्या सोचता रहता है। हम बस उसे उसके पिछड़े हुए और कमजोर विषयों पर मदद कर रहे हैं क्योंकि प्रधानाचार्य महोदय ने हमें उसकी पढ़ाई में मदद करने के लिए कहा है।
महेश- क्यों झूठ बोल रहे हो नूनू। पूरी कक्षा में बस तुम तीनों के ही चर्चे हैं। और जिस तरह से तुम तीनों रहते हो साथ साथ। सभी को लगता है कि तुम दोनों का तनु के साथ कुछ न कुछ चक्कर चल रहा है।
अभिषेक- कौन है वो माध........द जिसने ये अफवाह फैलाई है। किसे लगता है कि हमारा चक्कर चल रहा है।
महेश- औरों की छोड़ो मुझे भी ऐसा ही लगता है कि तुम दोनों का उसके साथ कुछ न कुछ तो लफड़ा है।
मैं- तू ये क्या कह रहा है। ऐसा कुछ नहीं है मेरे भाई। तुझे पता है न मेरी कभी लड़कियों से बात भी नही हुई। वो तो प्रधानाचार्य सर के कहने पर पढ़ाई में उसकी मदद करनी पड़ रही है, क्योंकि उन्होंने बहुत उम्मीद के साथ हम दोनों को ये जिम्मेदारी सौंपी है, इसलिए हमें उसकी मदद पढ़ाई में करनी पड़ रही है। नहीं तो तुझे पता है न मेरे पास समय की कितनी कमी है। घर के काम के बाद थोड़ा बहुत ही समय बचता है पढ़ाई के लिए। और तू तो मुझे बचपन से जानता है। फिर भी तू ऐसी बातें कर रहा है। मेरा विश्वास कर यार।
महेश- तू सच बोल रहा है न या मुझे बेवकूफ बना रहा है।
अभिषेक-(गुस्से से) साले अब क्या तुझे स्टाम्प पेपर पर लिख कर दें क्या। तुझे मानना है तो मान नहीं तो भाग यहां से। खामखाह दिमाग खराब कर रहा है हमारा।
महेश- अरे भाई अभिषेक तू तो नाराज़ हो गया।
अभिषेक- नाराज़ न होऊं तो और क्या करूँ। कब से देख रहा हूँ बिना सिर पैर की बात किए जा रहा है। जब तुझे हमारी बात से ज्याद लोगों की बातों पर भरोशा है तो हम लोगों के पास क्या कर रहा है जा उन्हीं के पास तू भी।
महेश- माफ कर दे भाई। मैं तो बस वही कह रहा था जो कक्षा में चर्चा हो रही है। अगर तुम दोनों का तनु के साथ कुछ नही है तो ये तो बहुत खुशी की बात है।
मैं- अब इसमें खुसी की क्या बात है। महेश- देख नूनू। तुम तो लड़कियों को भाव देते नही हो और इस गधे का उसके साथ कोई लफड़ा भी नही है। तो मेरा रास्ता साफ है। इसलिए मेरे लिए ये खुशी की बात है।
अभिषेक( परेशान होकर) अबे ऐ गांडू। साले जो कहना है साफ साफ बोल। यूं बात को गोल गोल घुमा मत। तेरी बिन सिर पैर की बातों से मुझे गुस्सा आ रहा है।
महेश- मैं ये कहना चाहता हूँ कि अगर तुम दोनों का उसके साथ कोई चक्कर नहीं है तो मेरी ही सेटिंग उससे करवा दो। मतलब कुछ ऐसा करो तुम दोनों की मेरा चक्कर उसके साथ चल जाए।
अभिषेक- साला अब आया न अपनी औकात पर। तो इसीलिए तू अभी तक बकचोदी पेल रहा था, जबकि असली मुद्दे की बात तो ये थी। तू साले अपनी सेटिंग करवाना चाहता है हमसे। तूने हम लोगों को दलाल समझ रखा है क्या जो हम तेरी सेटिंग करवाएंगे।
महेश- अरे नहीं यार। तुम मुझे गलत समझ रहे हो। मैं तो ये बोल रहा था कि उससे तुम लोग मेरी दोस्ती करवा दो। बाकी आगे कैसे करना है मैं देख लूंगा सब।
अभिषेक- साले इतनी सी बात कहने के लिए इतना बड़ा आक्षेप लगाया तूने हम पर। बात को इतनी घूमा फिराकर कहने की क्या जरूरत थी। सीधे सीधे ही बोल देता। इतना ड्रामा क्यों किया।
मैं- देख महेश हम तेरी उससे बात करवा देंगे और तेरा परिचय भी करवा देंगे। बाकी दोस्ती तुझे उससे खुद ही करनी पड़ेगी। अगर वो तैयार हो गई तुझसे दोस्ती करने के लिए तो हमें कोई दिक्कत नहीं है।
महेश- ठीक है नूनू। जैसा तुम कहो।
मैं- लेकिन तू उसके सामने मुझे नूनू नहीं कहेगा। समझा।
महेश- मैं तनु के सामने तो क्या तेरे पापा के सामने भी तुझे नूनू ही कहूंगा।
इतना बोलकर वो हंसता हुआ चला गया। उसकी बात सुनकर हम दोनों भी मुस्कुरा दिए। भोजनावकाश खत्म होने के बाद हमने अपनी क्लास अटेंड की और छुट्टी होने पर अपने अपने घर चले गए।
इसी तरह कुछ दिन और बीत गए। एक दिन भोजनावकाश के समय मैं अभिषेक और तनु स्कूल परिसर में बैठे हुए थे। तभी वहां महेश आ गया और आते ही मुझसे बोला।
महेश- क्या हाल है अभिषेक भाई। सब खैरियत।
अभिषेक- हां सब ठीक है।
महेश- और नूनू भाई क्या हाल चाल हैं आपके।
मेरा नाम नूनू सुनकर तनु कभी मुझे तो कभी महेश को देखती। मैंने महेश से कहा।
मैं- मैं भी ठीक हूँ भाई। और तू सुधरने वाला तो है नहीं, इसलिए तुझसे कुछ कहने का अब कोई फायदा भी नहीं है।
तनु हम दोनों की बात सुन रही थी तो उसने कहा।
तनु- ये कौन है और ये नूनू क्यों बोलता है तुम्हें।
अभिषेक- अरे तनु ये हम दोनों का बचपन का मित्र है। और प्यार से नयन को नूनू बोलता है। नयन ने इसे बहुत बार मना किया है कि ये नयन को नूनू न बुलाया करे, लेकिन ये कहता है कि जब मैं तुम्हें नूनू बुलाता हूँ तो मुझे अपनापन झलकता है। ऐसा लगता है जैसे मैं किसी अपने को प्यार से पुकार रहा हूँ। और ये अपना बचपन का मित्र है तो इसको ज्यादा कुछ बोल भी नहीं सकते।
तनु- (हंसकर) वैसे नाम तो बहुत बढ़िया है नूनू।
उसकी बात सुनकर सब मुस्कुराने लगे। तभी अभिषेक ने मुझे कोहनी मारकर कुछ इशारा किया। तो मैं समझ गया कि वो अपना परिचय करवाने कब लिए बोल रहा है तनु से। मैं उसका इशारा समझकर तनु से कहा।
मैं- तनु ये महेश है। मेरा और अभिषेक का बचपन का मित्र। हम तीनों ने कक्षा नर्सरी से अभी तक साथ में ही पढ़ाई की है। ये मेरे गांव के बगल वाले गांव से है। पढ़ाई में भी बढ़िया है और इसका स्वभाव भी बहुत बढ़िया है। ऊपर से ये इतना मजाकिया है कि पूछो ही मत। तुमने कभी बंदर देखा है। जैसे वो इस डाल से उस डाल उछलता रहता है कभी शांत होकर नहीं बैठता। उसी तरह महेश भी है। हमेशा उछलता कूदता रहता है। जब तक सोता नहीं है तब तक उछलता कूदता रहता है बंदर की तरह।
मेरी बात सुनकर अभिषेक मुस्कुराने लगा और महेश मुंह फाड़े आश्चर्यचकित होकर मुझे घूर रहा था जैसे पूछ रहा हो कि ये सब क्या है। परिचय करवा रहा है या मेरी बेइज्जती कर रहा है। वहीं मेरी बात सुनकर तनु जोर जोर से हंसने लगी। कुछ देर बाद महेश ने कहा।
महेश- ये सब क्या था। कोई ऐसे परिचय करवाता है किसी से। मेरी सारी इज्जत की तनु के सामने तूने वाट लगा दी। मैं जा रहा हूँ। तू बैठ यहां।
मैं- अरे क्यों नाराज़ होता है यार। तू भी तो मुझे नूनू कहकर छेड़ता रहता है, तो मौका मिलने पर मैंने भी थोड़ी मस्ती कर ली तेरे साथ। वैसे तनु मैंने अभी जो कुछ भी महेश के बारे में बताया। वो बस एक मजाक था। मैं इसकी टाँग खींच रहा था। महेश बहुत अच्छा लड़का है। इसीलिए तो ये हमारा दोस्त है।
मेरी बात सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। ऐसे ही कुछ देर बैठे रहने के बाद मैंने उसे कोहनी मार कर कुछ इशारा किया, जिसे वो समझते हुए तनु से बोला।
महेश- देखो तनु। हम सब एक ही कक्षा में हैं। नयन और अभिषेक तुम्हारे दोस्त हैं और मैं इन दोनों का। तो क्या हम दोस्त बन सकते हैं। मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ तनु। क्या तुम मेरी भी दोस्त बनोगी।
महेश ने ये बात एक ही सांस में बोल दी और अपना हाथ तनु की तरफ बढ़ा दिया। तनु ने भी मुस्कुराते हुए उससे हाथ मिलाकर कहा।
तनु- इसमें इतनी भूमिका बनाने की क्या जरूरत थी। आज से हम दोनों भी दोस्त हैं।
इतना सुनकर महेश के चेहरे पर मुस्कान आ गई। फिर हम लोग अपनी कक्षा में चले गए।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

Bahut hi badhiya update,,,,सातवां भाग
तनु ने महेश की दोस्ती स्वीकार कर ली। जिससे महेश बहुत खुश हो गया। कुछ देर इधर उधर की बात करने में बाद हम सब अपनी कक्षा में चले गए। कक्षा में आने के बाद महेश ने अपनी बैठने की जगह बदल ली और वो हम दोनों के पास आकर बैठ गया। फिर क्लास शुरू हुई और हमने मन लगाकर पढ़ाई की। छुट्टी होने के बाद हम अपने घर को चले गए।
रात में खाना खाते समय काजल ने मुझसे कहा।
काजल- वो लड़की कौन है भैया जिसके साथ आजकल आप रहते हैं। आपको पता है स्कूल में मुझको तरह तरह की बाते बोलते हैं मेरे दोस्त लोग आपके बारे में।
काजल की बात सुनकर पापा और अम्मा मुझे देखन लगे अम्मा ने पूछा।
अम्मा- कौन लड़की।
मैं- अम्मा वो प्रधानाचार्य सर के दोस्त की बेटी है। तनु नाम है उसका । वो पढ़ाई में थोड़ा कमजोर है तो प्रधानाचार्य सर ने मुझे और अभिषेक को उसकी पढ़ाई में मदद करने के लिए कहा है और उसे हमारे साथ रहने के लिए कहा है, इसलिए वो हम दोनों के साथ रहती है स्कूल समय में।
अम्मा- तू उसे क्यों पढ़ाएगा। उसके लिए मास्टर हैं न। तो बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। एक तो तुझे वैसे भी पढ़ने के लिए कम समय मिलता है ऊपर से तू दूसरे को पढ़ाने का ठेका ले रखा है। इससे तुम्हारी पढ़ाई का नुकसान भी तो होगा।
पापा- अरे कैसी बात करती हो भाग्यवान। किसी की पढ़ाई में मदद करना तो बहुत अच्छी बात है। इससे नयन का ज्ञान तो और बढ़ेगा। जब ये उस लड़की को कोई चीज बताएगा कोई सवाल हल करवाएगा तो इसे वो सवाल हमेशा याद रहेगा। और वैसे भी किसी की मदद करना तो पुण्य का काम होता है।
अम्मा- पुण्य का काम तो होता है। लेकिन अपना नुकसान करके अगर किसी की भलाई की जाए तो वो पुण्य का काम नहीं बेवकूफी का काम होता है। और तू नयन। बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। किसी की भलाई बाद में करे। पहले अपनी भलाई तो कर ले।
अम्मा की बात सुनकर सभी खामोश हो गए। मैं काजल को देख रहा था जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी। मैं सोच रहा था, इसे यही वक्त मिला था क्या ये बात छेड़ने के लिए। खाना खाकर जब हम दोनों सोने के लिए गए तो मैंने काजल का कान पकड़ कर ऐंठ दिया जिससे वो चीख पड़ी और बोली।
काजल- क्या कर रहे हो भैया। मुझे दर्द हो रहा है।
मैं- तुम बहुत शरारती हो गई हो काजल। ये सब बातें अम्मा के सामने बोलने की क्या जरूरत थी। पहले मुझसे पूछती तुम तो मैं तुझे सब कुछ बता ही देता। खामखाह अम्मा की डांट सुननी पड़ी।
काजल- मैंने तो वही कहा जो मुझे मेरे दोस्तों ने बताया। मुझे थोड़े ही पता था कि आपको अम्मा डाटेंगी।
मैं- अब आगे से कुछ भी बोलने से पहले एक बार मुझसे बात कर लेना।
काजल- ठीक है भैया अब कान छोड़ो मेरा दर्द कर रहा है।
मैंने काजल को छोड़ दिया और अपने बिस्तर पर सोने चला गया। सुबह उठकर मैंने फ्रेश होकर कलेवा खाया और काजल के साथ स्कूल चला गया। स्कूल में पहुंच कर मैं अभिषेक से मिला और अपनी कक्षा में चल पड़ा। कक्षा में जाकर देखा तो महेश और तनु पहले ही आ गए थे और अपनी जगह पर बैठकर एक दूसरे से बात कर रहे थे।
मैं और अभिषेक जाकर दोनों से मिले और अपनी सीट पर बैठ गए। कुछ देर बाद शिक्षक भी आ गए और क्लास शुरू हो गई। ऐसे ही दिन पर दिन गुजरते रहे। मैं अपनी दिनचर्या से रोज स्कूल आता अपने दोस्तों से मिलता। अपनी क्लास अटेंड करता और अपने घर चला जाता। इस दौरान तनु जो भी पढ़ाई के संबंध में अपनी समस्या बताती उसे मैं सुलझाने की कोशिश करता।
इसी तरह 2 से ढाई महीने का समय बीत गया और इस दौरान बदलाव ये आया कि महेश और तनु और ज्यादा नज़दीक आ गए। दोनों में पहले से ज्यादा बहुत ज्यादा बातें होने लगी।
अभिषेक और मेरी बात चीत पहले की ही तरह तनु से होती थी। तनु ने मेरे बारे में अभिषेक से पूछा भी कि मैं लड़कियों से इतना दूर क्यों भागता हूँ, लेकिन अभिषेक उसे यही बताता था कि उसे लड़कियों में रुचि नहीं है। जिससे तनु को विश्वास नहीं होता था।
यही बात उसने महेश से भी पूछी थी, लेकिन महेश तो अपनी गोटी फिट करने की फिराक में था तो उसने तनु को कुछ नहीं बताया। एक दिन मैं, अभिषेक, महेश और तनु भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे थे। अभिषेक और महेश तनु से बात कर रहे थे और मैं वहां उगी घांस के साथ खेल रहा था। तनु काफी देर से मुझे समझने की कोशिश कर रही थी, जब मैं उनकी तरफ देखता तो वो मुस्कुरा देती, जवाब में मैं भी मुस्कुरा देता। थोड़ी देर बाद जब तनु से न रह गया तो उसने मुझसे पूछा।
तनु- नयन। अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात पूछना चाहती हूं तुमसे।
मैं- हाँ पूछो न क्या पूछना है।
तनु- कुछ व्यक्तिगत सवाल था इसलिए पूछा तुमसे।
मैं- इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है। आखिर हम इतने दिन से साथ हैं और हम दोस्त भी हैं तो पूछ सकती हो तुम।
तनु- हम लगभग 3-4 महीने से साथ हैं। लेकिन कभी तुमने मुझसे बात करने की कोशिश नहीं की। जब मैं तुमसे बात करती हूँ। तभी बात करते हो, जितना पूछती हूँ उतना जवाब देते हो।
मैं- नहीं तनु ऐसा कुछ नहीं है। जैसा तुम समझ रही हो। वो तो बस ऐसे ही तुम लोग बात करते हो। तो सुनने में अच्छा लगता है।
तनु- मैं कुछ नहीं समझ रही हूँ। जो सच है वही बोल रही हूँ। क्या तुम्हें मेरा साथ रहना पसंद नहीं है तुमको या मैं ज्यादा ही परेशान करती हूँ तुमको। अगर ऐसा है तो बता दो। मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगी।
मैं- नहीं तनु ऐसी बात नहीं है। मैं लड़कियों से बहुत कम बात करता हूँ, इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है।
तनु- तुम लड़कियों से बात नहीं करते, लेकिन मुझसे तो कर ही सकते हो। आखिर मैं तुम्हारी दोस्त हूँ। और क्या मैं जान सकती हूँ कि तुम लड़कियों से बात क्यों नहीं करते। क्या उनमें कांटे लगे होते हैं। या तुम्हें उन्होंने कभी कुछ कहा है।
मैं- ये तो तुम्हें अभिषेक बता ही चुका होगा तो मुझसे क्यों पूछ रही हो फिर।
तनु- यार तुम अब लड़कियों की तरह भाव मत खाओ। बताना है तो बताओ नहीं तो कोई बात नहीं।
इतना कहकर तनु मुंह घुमाकर बैठ गई। यह देखकर मैंने मन ही मन सोचा कि लड़कियों के नखरे भी कितने अजीब होते हैं। बिना किसी बात के नाराज़ होना और नखरे दिखाना इन्हें बहुत अच्छी तरह से आता है। मैंने मुस्कुराते हुए तनु से कहा।
मैं- मैं नखरे नहीं दिखा रहा हूँ। बस ऐसे ही तुम्हें छेड़ रहा था।
गलती से मेरे मुंह से यह निकल गया। मेरी बात सुनकर अभिषेक और महेश मुझे देखने लगे। अभिषेक तुरन्त मेरी खिंचाई करते हुए मुझसे बोला।
अभिषेक- साले तू कब से लड़की छेड़ने लगा। मतलब पापा का लाडला बिगड़ रहा है।
मैं- अबे पापा का लाडला नहीं होता मां का लाडला होता है।
अभिषेक- हाँ हाँ मालूम है, लेकिन तू माँ का लाडला नहीं पापा का लाडला है। और तू कब बिगड़ रहा है।
तनु- तुम दोनों अब चुप हो जाओ। नयन तुम बताओगे कुछ या नहीं।
फिर मैंने तनु को पापा की लड़कियों के संबंध में सिखाई हुई सारी बात बता दी। जिसे सुनने के बाद तनु ने कहा।
तनु- क्या यार नयन तुम भी अब तक उस बात को लेकर बैठे हुए हो। माँ बाप का काम ही है बोलना। वो उनके जमाने की बाते हैं। लवकिं अब जमाना बदल गया है। अब तो मौज मस्ती के दिन शुरू हुए हैं और तुम अपने पापा की बात लेकर अब तक बैठे हुए हो। माना कि उन्होंने जो भी कहा तुमसे वो गलत नहीं है, लेकिन अपने आपको समय के साथ बदलना चाहिए।
मैं- मतलब क्या है तुम्हारा। कहना क्या चाहती हो तुम। माँ बाप की बात मानना गलत है। मैं गलत हूँ।
तनु- मैंने ऐसा तो नहीं कहा। तुम्हारे मां बाप ने जो कहा वो सही था, लेकिन उनके कहने का मतलब कुछ और था और तुमने कुछ और समझ लिया। तुम्हें लड़कियों की इज़्ज़त करनी चाहिए, लेकिन लेकिन इसके लिए उनसे दूर भागने की क्या जरूरत है। तुम उनसे बात चीत तो कर ही सकते हो। हो सकता है इसी बातचीत से तुम्हारे मन में उनके लिए कुछ अलग सा महसूस हो। मेरी बातों पर गौर करना तुम नयन।
मैंने तनु से इसके आगे कुछ भी नहीं कहा। तनु इतना कहकर वहां से चली गई। तनु की कुछ बातें मुझे सही लगी। तो कुछ बातें मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आई। मैंने सोचा कि पापा ने लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाया है, लेकिन उनसे बातचीत, साथ उठना बैठना, उनके साथ रखने से मना तो नहीं किया है। अब मुझे क्या करना चाहिए। तनु की बात माननी चाहिए या मैं जैसा हूँ वैसे ही रहना चाहिए।
मैं अपनी ही सोच में डूबा हुआ था तभी अभिषेक ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
अभिषेक- क्या सोच रहा है भाई।
मैं- यार ये तनु क्या बोलकर चली गई। उसकी बातें सुनकर मैं तो उहापोह में पड़ गया हूँ। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए। पापा की बात भी गलत नहीं है और तनु की कुछ बातें भी सही हैं।
अभिषेक- मैं भी तो तुझे हमेशा यही कहता था और आज तनु भी यही कह रही है। अब समय आ गया है कि तू अपने आपको थोड़ा सा बदल लें लड़कियों के मामले में। तेरे पापा ने भी यहीं कहा होगा तुझे, लेकिन तूने कुछ और मतलब निकाल लिया।
मैं- ठीक है मेरे भाई। गौर करूँगा इस बात पर। अब चल क्लास का समय हो गया है।
इतना बोलकर मैं अभिषेक और महेश अपनी कक्षा की तरफ चल दिए।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

बाईसवाँ भाग
मुझसे बात करने के बाद अभिषेक तनु और पायल के पास चला गया और उनसे बोला।
अभिषेक- तनु और पायल। तुमने तो आज मेरी आँखें खोल दी। आज तु दोनों ने मुझे ये एहसास करवा दिया है कि कौन अपना है और कौन पराया। कौन सच्चा है और कौन झूठा। कौन विश्वास करने के काबिल है और कौन अविश्वास के लायक है।
अभिषेक बात तो तनु और पायल से कर रहा था, परंतु देख मेरी तरफ रहा था और मैं चुपचाप नजरें झुकाए गुनहगार की तरह बिना कोई गुनाह किए आँसू बहा रहा था। अभिषेक के इस बर्ताव के कारण मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि मैं आपना सिर उठाकर किसी का सामना कर सकूँ। तभी वो हो गया जो अभिषेक के बर्ताव को देखते हुए मेरे जेहन में दूर दूर तक नहीं था।
मैंने अपनी नजरें नीचे की हुई थी तो मैंने कुछ देखा ही नहीं, लेकिन तभी दो जोरदार चटाक चटाक की आवाज मेरे कानों में पड़ी। जो थप्पड़ की आवाज थी। मैंने अपनी नजरें उठाकर अभिषेक की तरफ देखा तो उसके चेहरा गुस्से से लाल दिख रहा था तथा तनु और पायल अपने गालों पर हाथ रखे अभिषेक को आँखें फाड़े देख रही थी। सभी विद्यार्थी और शिक्षक भी यह देख और थप्पड़ की आवाज सुनकर आश्चर्यचकित थे कि अभिषेक ने तनु और पायल को थप्पड़ क्यों मारा।
और मैं तो जैसे सदमें में पहुँच गया था। मुझे तो कुछ समझ में भी नहीं आया। ये तब इतनी तेजी से हुआ कि मुझे तो क्या किसी के भी समझ में नहीं आया। अभिषेक ने फिर से गुस्से में अपना आपा खो दिया और दोनों के दूसरे गाल पर भी एक एक थप्पड़ रसीद कर दिए। प्रधानाचार्य महोदय तुरंत अभिषेक के पास पहुँचे और उसे पकड़कर अपनी तरफ घुमाते हुए झंझोड़ते हुए पूछा।
प्रधानाचार्य महोदय- ये क्या कर रहे हो तुम। तुम्हारा दिमाग तो ठीक है न। क्यों मारा इन दोंनो को कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो।
अभिषेक- हाँ सर मैं पागल हो गया हूँ। इन दोनों के फरेब ने मुझे पागल बना दिया है। रिश्तों पर से मेरा विश्वास उठ गया है इन दोनों की वजह से। मेरे सामने से इन दोनों धोखेबाजों को ले जाइये सर। नहीं तो मुझे नहीं पता कि मैं गुस्से में क्या कर दूँ इन दोनों के साथ।
अभिषेक की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी शिवाय 4 लोगों के। मुझे, सुरेश, तनु और पायल। पायल और तनु तो सोच भी नहीं सकती थी कि अभिषेक को ये सब पता चल गया है। लेकिन उन्हें ये समझ में नहीं आ रहा था कि जिस साजिश को उन्होंने बहुत गुपचुप तरीके से अंजाम दिया था उसका पता अभिषेक को कैसे चल गया। प्रधानाचार्य को अभिषेक की बातें बिलकुल समझ में नहीं आई। इसलिए वो अभिषेक से गुस्से में बोले।
प्रधानाचार्य महोदय- ये क्या बकवास कर रहे हो अभिषेक। लगता है कि नयन के धोखे ने तुम्हारे दिमाग को हिला कर रख दिया है इसलिए तुम अनाप सनाप और अनरगल बातें कर रहे हो। अरे यहाँ खड़े सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देखा कि नयन ने क्या किया तनु के साथ। जिसकी गवाह तुम्हारी बहन पायल भी है। ऊपर से नयन ने तनु के चरित्र पर भी उँगली उठाई। उसके बाद भी तुम ऐसी बातें कर रहे हो। मुझे लगता है कि मुझे पुलिस को बुला लेना चाहिए।
अभिषेक- (एकदम लाचार होकर) मैं कोई बकवास नहीं कर रहा हूँ सर। ये सच है कि इस इस वाकये ने मेरा दिमाग हिलाकर रख दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहाँ खड़े सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देखा है वो आधा सच है। आपने वो देखा जो आपको दिखाया गया है। पूरा सच तो कुछ और है। और ये पायल की बात कर रहे हैं ने आप। ये मेरी बहन नहीं है। मेरी दुश्मन है ये बहन इसकी तरह नहीं होती। बहन वो होती है जो अपने भाई के सुख-दुःख में साथ दे, न कि किसी के साथ मिलकर अपने भाई के विरुद्ध साजिश करे। आप पुलिस बुलाना चाहते हैं न। आप पुलिस बुला ही लीजिए सर। आखिर सच्चाई सबको पता चलनी ही चाहिए।
प्रधानाचार्य महोदय- तुम कहना क्या चाहते हो अभिषेक। तुम किस साजिस की बात कर रहे हो। तुम ये कहना चाहते हो कि हम लोगों को जो दिखाया गया है वो सच नहीं हो। तो सच क्या है। और तुम किस पूरे सच की बात कर रहे हो।
अभिषेक- मैं ये कहना चाहता हूँ कि नयन जो कह रहा है वो सत्य है। ये साजिश है नयन को फँसाने की और इस साजिश को अंजाम दिया है तनु और इस पायल ने। पूरा सच इन्हीं से पूछ लीजिए, यही बताएँगी तो ज्यादा अच्छा है।
अभिषेक की बात सुनकर एक बार फिर सबके चेहरे देखने लायक थे। फिर से सभी विद्यार्थियों में खुसर-फुसर शुरू हो गई। तनु और पायल का चेहरा देखने लायक था। अभिषेक की बात सुनकर इस समय मुझे वो खुशी महसूस हो रही थी जिसका मैं वर्णन नहीं कर सकता। अभिषेक को भी पता है सब ये जानकर मेरे चेहरे पर संतुष्टि के भाव आ गए। अपने आपको फँसता देख तनु ने अभिषेक को कंधे को पकड़ते हुए रोनी सूरत बनाकर कहा।
तनु- अभिषेक ये तुम क्या कह रहे हो। सभी ने देखा कि नयन मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा था। तुमने भी देखा। फिर भी तुम नयन के बजाय मुझपर शक कर रहे हो। मैं तुमसे प्यार करती हूँ अभिषेक। मैं तुमसे झूठ क्यों बोलूँगी। मैंने कोई साजिश नहीं की है। तुम्हें जरूर कोई गलतफहमी हुई है।
तनु के इतना बोलते ही अभिषेक तनु पर बरस पड़ा और उसे अपने से दूर धकेलते हुए कहा।
अभिषेक- दूर हट मुझसे। छूना भी मत अपने गंदे हाथों से मुझे। तू झूठ बोल रही है। तू अपनी हवस को प्यार का नाम देकर प्यार जैसे पवित्र रिश्ते को बदनाम न कर। प्यार क्या होता है तुझे क्या पता। मुझे तुमझे घिन आती है कि मैंने तुझसे प्यार किया था। अरे प्यार का न सही तो कम से कम दोस्ती का तो ख्याल किया होता। लेकिन तू इतनी गिर जाएगी ये मैंने सोचा नहीं था और तू नयन की बात मत कर। हमारी दोस्ती इतनी कमजोर नहीं है कि तू अपनी वाहियात मंसूबों और साजिशों से हमारी दोस्ती को तोड़ देगी। हमारी दोस्ती बचपन की है। मैं उसकी नस नस से वाकिफ हूँ। अगर एक बार ईश्वर भी आकर कह दे कि नयन गलत है तब भी मैं उसके विश्वास न करूँ। हमारी दोस्ती विश्वास जैसे मामूली शब्दों से बहुत ऊपर है। समझी। हम दो जिस्म भलें हैं, लेकिन हमारी जान एक दूसरे में बसती है। लेकिन मैं तुम्हें ये सब क्यों बता रहा हूँ जिसे किसी रिश्ते का मतलब ही नहीं पता है।
मुझे अभिषेक की बात सुनकर एक असीम आनंद की प्राप्ति हुई। मेरा सीना गर्व से फूल गया अपनी दोस्ती को लेकर। लेकिन अगले ही पल मुझे निराशा ने घेर लिया। जब मैंने सोचा की मैंने अभिषेक को कितना गलत सोचा। अपनी दोस्ती पर शक किया मैंने। नहीं अभिषेक की बात सुनकर तनु की सारी हवा टाइट हो चुकी थी। उसे एहसास हो गया था कि उसकी साजिश का भंडाभोड़ हो चुका है। फिर भी उसने एक आखिरी कोशिश करते हुए कहा।
तनु- नहीं अभिषेक तुम मेरे ऊपर गलत इलजाम लगा रहे हो। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जैसा तुम समझ रहे हो। सब कुछ इस नयन ने किया है।
ये सुनकर अभिषेक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया उसने गुस्से में तनु की गिरेबान पकड़ते हुए कहा।
अभिषेक- चुप। बिलकुल चुप। अपनी गंदी जुबान से नाम भी मत लेना मेरे दोस्त का। तू इस काबिल नहीं रह गई है कि तू हम दोनों का नाम भी अपनी गंदी जुबान से ले सके। और कितना झूठ बोलोगी तुम हाँ। कितना। तुम्हें सुबूत चाहिए न कि नयन सच कह रहा है या झूठ। तो रुको मैं तुम्हें इसका सुबूत भी दे देता हूँ। सुरेश जरा इधर तो आओ और सभी विद्यार्थियों और सभी शिक्षकों को बताओ जो तुमने सुना। एक एक शब्द बताओ इन्हें। बताओ इन्हें इनकी करतूत।
अभिषेक की बात सुनकर सभी विद्यार्थी और शिक्षक सुरेश की तरफ देखने लगे। सुरेश चलते हुए प्रधानाचार्य महोदय जी के पास गया और उनसे बोला।
सुरेश- हाँ सर जी। अभिषेक भइया बिलकुल सही कह रहें हैं। नयन भइया को फँसाया गया है। मैंने इन दोनों को बात करते हुए सुना था
प्रधानाचार्य महोदय- क्या बात करते हुए सुना था तुमने। पूरी बात बताओ।
सुरेश- वहाँ उस पीपल के पेड़ के पास मैं पेड़ से टेक लगाकर खड़ा प्राकृतिक सौंन्दर्य का आनंद उठा रहा था तो मैंने इन दोनों को बात करते हुए सुना था।
कुछ देर पहले।
तनु- (फोन पर) पायल तुरंत पीपल के पेड़ के पास आओ।
पायल- हाँ बोलो तनु क्या बात है।
तनु- देखो पायल वो उस तरफ गया है। तो यही सबसे अच्छा मौका है कि हमने जो प्लान बनाया है उसको अमल में लाएँ।
पायल- मुझे तो डर लग रहा है तनु। इतने लोंगों के होते हुए कहीं कुछ गड़बड़ हो गई तो भैया तो मेरी जान ही ले लेंगे।
तनु- कुछ नहीं होगा यार तुम्हें। मैंने बहुत सोच समझ कर ये टूर का प्लान किया था। और अभी तक सब मेरे प्लान के मुताबिक हो रहा है। बस ये आखिरी प्रयास भी सफल हो जाए तो हम दोनों का मकसद पूरा हो जाएगा। और तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है। जो कुछ करूँगी मैं करूँगी, बस तुम्हें मेरा साथ देना है। और सबको से ये कहना है कि उसने मेरे साथ जबरदस्ती की है। मैं जा रही हूँ उसके पास।
अभी का समय।
बस यही बात मैंने सुनी। क्योंकि इन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था, इसलिए मुझे समझ में नहीं आया कि ये किसके बारे में बात कर रही हैं। क्योंकि पायल भी इनके साथ थी इसलिए मुझे ये उचित लगा कि अभिषेक भैया को इस बारे में बता दूँ। जब मैं अभिषेक भैया को ये बात बताई तो इनके पीछे आने लगे तभी पायल ने बचाओ बचाओ का शोर मचा दिया। उसके बाद क्या हुआ ये आप सभी के सामने है।
सुरेश की बात सुनकर सभी अवाक रह गए। किसी को विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि तनु जैसी सीधी दिखने वाली लड़की इतनी शातिर हो सकती है और इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकती है। सुरेश की बात सुनकर प्रधानाचार्य महोदय को भी उसकी बातों पर विश्वास करना पड़ा, क्योंकि सुरेश भी अच्छे चाल-चलन का लड़का था। बेवजह उसने आज तक किसी से कोई वाद-विवाद या लड़ाई झगड़ा नहीं किया था। बस अपने काम से काम रखने वाला लड़का था। और सबसे बड़ी बात पढ़ाई के मामले में अव्वल होने के कारण वो शिक्षकों का प्रिय भी था, इसलिए उसकी बात को नजरअदाज भी नहीं किया जा सकता था। इसलिए प्रधानाचार्य महोदय तनु और पायल के पास गए और गरजती आवाज में उनसे कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- ये मैं क्या सुन रहा हूँ। तुम दोनों ने नयन को फँसाने के लिए इतनी बड़ी साजिश की। बताओ। क्या जो सुरेश कह रहा है वो सत्य है।
प्रधानाचार्य महोदय की बातों का दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया। तो प्रधानाचार्य महोदय ने दोबारा पहले की अपेक्षा और भी तेज आवाज में कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- मैंने तुम दोनों से कुछ पूछा है। मैं आखिरी बार पूछ रहा हूँ तुम दोनों से। क्या सुरेश ने जो कुछ भी कहा वो सत्य है। नहीं तो मैं अभी पुलिस को बुलाता हूँ। जब डंडे की मार पड़ेगी तो खुद ही बोलना शुरू कर दोगी।
इतना कहकर प्रधानाचार्य जी ने अपना मोबाइल निकाल लिया और न. मिलाने लगे। उनकी ये धमकी का तनु पर तो नहीं लेकिन पायल पर असर कर गई और वो रोते हुए बोली।
पायल- मुझे माफ कर दीजिए सर मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मै तनु की बातों में आ गई और इस साजिश में उसका साथ दिया। मुझे माफ कर दीजिए सर।
प्रधानाचार्य महोदय- तुमने बहुत गलत किया पायल। तुम्हारे इस कदम से नयन की पूरी जिंदगी बरबाद हो सकती थी। मुझे समझ में नहीं आता कि तुम्हें अपने भाई और अपने मम्मी पापा का ख्याल भी नहीं आया कि उनपर क्या गुजरेगी जब उसे सच्चाई का पता चलेगा। तुम्हारी गलती माफी के काबिल नहीं है पायल। फिर भी अगर माफी माँगना ही है तो जाकर अभिषेक और नयन से माँफी माँगो। हो सकता है वो तुम्हें माँफ कर दें।
प्रधानाचार्य महोदय की बात सुनकर अभिषेक के पास गई और उसके पैर पकड़कर रोते हुए वोली।
पायल- मुझे माफ कर दो भैया मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। मैं तनु के बहकावे में आकर नयन भैया से अपनी नफरत निकालने के लिए इसका साथ दिया। मुझे माफ कर दो भैया।
अभिषेक- नहीं पायल तुमने कोई भूल नहीं की है बल्कि गुनाह किया है। जिसकी कोई माफी नहीं है। तुमसे मुझे ये उम्मीद नहीं थी। तुमने मुझे बहुत ज्यादा दुःख पहुँचाया है। इसके लिए मैं तुम्हें कभी माँफ नहीं करूँगा।
अभिषेक की बात सुनकर पायल रोती हुई मेरे पास आई और मेरे पैरों में गिर कर सिसक सिसक कर रोने लगी। मैंने तुरंत उसे अपने पैरों से उठाया और उसके आँसू पोछते हुए कहा।
मैं- देखो पायल। जो होना था हो गया। अब रोने से क्या मतलब। शांत हो जाओ।
पायल- (जोर जोर से रोते हुए) नहीं भैया मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई गुनाह हो गया मुझसे। मैं आप और भैया के प्यार को समझ ही नहीं पाई कभी। और आप को गलत समझ लिया। उस दिन जो कुछ भी हुआ था। उसने मेरे दिल में आपके लिए नफरत बढ़ा दी थी। उसी नफरत के लचते मैंने तनु का साथ दिया। मुझे माफ कर दो भैया। आज के बाद मैं आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगी। अभिषेक भैया की तरह ही आपको मानूँगी। मुझे माफ कर दो भैया।
मैं- देख पायल मुझे अभी इस विषय में कोई बात नहीं करनी है तुझसे। इसके बारे में बाद में बात करेंगे। अब तू शान्त हो जा और जो कुछ भी हुआ अभी उसे भूल जा।
मेरे इतना करने के बाद पायल का रोना कुछ कम हो गया। फिर प्रधानाचार्य महोदय ने तनु की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- तनु। तुमने तो अपनी शर्म वेंच खाई है। आज तुम्हारी वजह से मैंने नयन की कोई गलती न होते हुए भी उसके ऊपर हाथ उठाया। मुझे तो अपने ऊपर शर्म आ रही है कि तू मेरे दोस्त ही बेटी है। अरे मैंने कितने गर्व से तुझे पूरी कक्षा के सामने तेरा परिचय करवाया था सब से। अभिषेक और नयन को तेरी मदद करने के लिए भी कहा। जिसे उन्होंने इनकार नही किया और तेरी हर संभव मदद की। मैंने तुम सब की दोस्ती के बहुत चर्चे सुने थे, लेकिन तुम दोस्ती के नाम पर कलंक निकली। अगर तुममें थोड़ी सी भी शर्म और इंसानियत बाकी है तो अपनी गलती स्वीकार करो। और माफी माँगो दोनो से। परंतु तुमने जो किया है वो माफी के काबिल भी नहीं है। फिर भी जाकर माफी माँग लो दोनो से।प्रधानाचार्य की बात सुनकर तनु अपनी जगह से चलकर अभिषेक के पास आई और हाथ जोड़कर जैसे बोलने की हुई। अभिषेक गुस्से से बोला।
अभिषेक- कोशिश भी मत करना और उम्मीद भी मत करना मुझसे माफी की। तुमने जो किया है उसके बाद मैं तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहता। चली जाओ मेरे सामने से तुम।
अभिषेक की बात सुनकर तनु मेरे पास आई। और हाथ जोड़कर मुझसे बोली।
तनु- मुझे माफ कर दो नयन।
उसकी बात सुनकर मैंने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
Bahut hi badhiya update,,,,,आठवाँ भाग
महेश- अबे तुम दोनों ने मेरी मुलाकात तनु से करवाई। जिसके कारण मेरी दोस्ती तनु से हुई। और एक बात बताऊँ तुम दोनों को। मुझे लगता है मुझे तनु से प्यार हो गया है।
महेश की बात सुनकर हम दोनों चौक गए। मुझे ज्यादा अभिषेक चौका, किसलिए। पता नहीं। महेश की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।
अभिषेक- कैसे बात कर रहा है बे। तुझे प्यार करने के लिए वही लड़की मिली थी क्या। तू पहले खुद को देख और उसको देख। तुम दोनों का कोई जोड़ नहीं है।
अभिषेक की बात सुनकर मैं उसे देखने लगा। ऐसा नहीं था कि महेश देखने में किसी से कम था। महेश एकदम उसी तरह था जिसे सजीला नौजवान बोलते हैं। महेश और अभिषेक लगभग एक ही तरह थे। हम तीनों में महेश सबसे सुंदर था। अभिषेक की ये बात मेरे गले नहीं उतर रही थी कि वो महेश का जोड़ तनु के साथ कमतर बता रहा था। उसकी बात सुनकर महेश बोला।
महेश- क्यों क्या कमी है मुझमें और क्या कमी है तनु में। तू मुझसे जल रहा है न कि मेरी दोस्ती तनु से बाद में हुई और मैं तनु को तुझसे पहले पटा रहा हूँ।
Ab Abhishek ko bhi ishq ka rog lag gaya hai shayad. Mahesh ki baate sun kar uska chehra latak gaya hai. Bhai mere chehra na latka padhaayi par dhyaan de. Aisi hazaaro ladkiya mil jaayengi,,,,मैं- क्या बात है अभिषेक, महेश की बात सुनकर तुझे क्या हो गया है। तेरा चेहरा क्यों उतर गया है।
अभिषेक- कुछ नहीं यार, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे उसकी बात सुनकर अच्छा नहीं लग रहा। मन में एक कसक सी उठ रही है। पता नहीं कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
मैं- अच्छा तो ये बात है। लगता है तुझे प्यार हो गया है।
अभिषेक- तू पागल हो गया है क्या। किसी बहकी बहकी बात कर रहा है। मुझे किससे प्यार होगा।
मैं- मैं बहकी बहकी बात नहीं कर रहा हूँ। तेरे चेहरे के भाव को देखकर तो यही लग रहा है कि तुझे तनु से प्यार हो गया है।
अभिषेक-क्या बात कर रहा है यार। ऐसी कोई भावना नहीं है उसके लिए मेरे मन में। वो तो तेरी तरह मेरी अच्छी दोस्त है। और तू इसे प्यार का नाम दे रहा है। इस तरह तो मैं भी कह सकता हूँ कि तुझे भी तनु से प्यार हो गया है।
मैं- अगर तुझे तनु से प्यार नहीं होता तो तू महेश की बात सुनकर ऐसे बर्ताव नहीं करता, उसकी बात सुनकर तू उछल पड़ा, तेरे चेहरे का रंग बदल गया। तेरा चेहरा उतर गया। इसे प्यार ही कहते हैं मेरे भाई। तेरा प्यार मुझे पहले दिन से ही दिखने लगा था उसके प्रति। महेश की बात सुनकर मैंने तो तेरी तरह कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। और वैसे भी मुझे इन सब फालतू के लफड़ों में नहीं पड़ना। मैं ऐसे ही बहुत खुश हूं।

Ye Nayan kab se itna guru ghantaal ho gaya mahi madam,,,,मैं- अरे भाई अपने यहां एक कहावत है कि अगर मेरी शादी नहीं हुई है तो क्या मैंने बारात भी नहीं अटेंड की है। इसका मतलब ये है शादी करने के बाद ही शादी के बारे में ज्ञान हो ये जरूरी नहीं है। बिना शादी के ही शादी के बारे में ज्ञान होता है लोगों को। उसी तरह मैंने किसी से प्यार नहीं किया तो इसका मतलब ये नहीं कि मैंने प्यार करने वालों को देखा नहीं है। बेटा तुझे प्यार का रोग लग चुका है। हाँ ये अभी प्रारंभिक अवस्था में है। अगर इसका स्थाई समाधान नहीं किया तो ये बीमारी गंभीर रूप ले लेगी। और फिर धीरे धीरे लाइलाज़ हो जाएगी। इसीलिए अभी से ही इसकी दवा लेनी शुरू कर दे।
Mujhe to lagta hai ki ye tanu in teeno ladko ka buri tarah dil todne wali hai. Ek taraf mahesh usse pyar karne ki deenge maar raha hai, dusri taraf Abhishek ne bhi mahesh ki pyar wali baat sun kar apna chehra latka liya tha aur aisa is liye kyoki uske andar bhi tanu ke liye soft feelings zarur hai. Teesri Nayan hai jo abhi to filhaal bujurgo ki tarah updesh hi de raha hai lekin wo din door nahi jab pyaar mohabbat ki kaali chhaaya iske upar bhi padegi. Ruk ja beta tera bhi kalyaan hoga ek din,,,,इतना कहकर अभिषेक ने अपने सिर को झटका दिया और हम दोनों कक्षा में वापस आ गए। तब तक महेश और तनु भी आ चुके थे। हम दोनों जा कर महेश के बगल में बैठ गए। तब तक शिक्षक भी कक्षा में आ गए। शिक्षक महोदय पढ़ाने लगे।
इस दौरान अभिषेक ने एक बार भी तनु की तरफ नहीं देखा बल्कि अपना पूरा ध्यान किताब पर और शिक्षक की बातों पर लगाये रखा।
अचानक से मेरा ध्यान तनु पर चल गया तो मैंने पाया कि तनु लगातार अभिषेक को देखे जा रही है। मैंने अपना भरम समझकर अपना ध्यान पढ़ाई पर लगाया। कुछ देर में मैन जब फिर तनु की तरफ देखा तो तनु अभी भी अभिषेक को ही देख रही थी।
मैंने अपने मन में सोचा कि बेटा नयन। लगता है मेरे अलावा इन तीनों का बहुत बुरा होने वाला है। भगवान ही बचाए इन्हें।

बाईसवाँ भाग
मुझसे बात करने के बाद अभिषेक तनु और पायल के पास चला गया और उनसे बोला।
अभिषेक- तनु और पायल। तुमने तो आज मेरी आँखें खोल दी। आज तु दोनों ने मुझे ये एहसास करवा दिया है कि कौन अपना है और कौन पराया। कौन सच्चा है और कौन झूठा। कौन विश्वास करने के काबिल है और कौन अविश्वास के लायक है।
अभिषेक बात तो तनु और पायल से कर रहा था, परंतु देख मेरी तरफ रहा था और मैं चुपचाप नजरें झुकाए गुनहगार की तरह बिना कोई गुनाह किए आँसू बहा रहा था। अभिषेक के इस बर्ताव के कारण मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि मैं आपना सिर उठाकर किसी का सामना कर सकूँ। तभी वो हो गया जो अभिषेक के बर्ताव को देखते हुए मेरे जेहन में दूर दूर तक नहीं था।
मैंने अपनी नजरें नीचे की हुई थी तो मैंने कुछ देखा ही नहीं, लेकिन तभी दो जोरदार चटाक चटाक की आवाज मेरे कानों में पड़ी। जो थप्पड़ की आवाज थी। मैंने अपनी नजरें उठाकर अभिषेक की तरफ देखा तो उसके चेहरा गुस्से से लाल दिख रहा था तथा तनु और पायल अपने गालों पर हाथ रखे अभिषेक को आँखें फाड़े देख रही थी। सभी विद्यार्थी और शिक्षक भी यह देख और थप्पड़ की आवाज सुनकर आश्चर्यचकित थे कि अभिषेक ने तनु और पायल को थप्पड़ क्यों मारा।
और मैं तो जैसे सदमें में पहुँच गया था। मुझे तो कुछ समझ में भी नहीं आया। ये तब इतनी तेजी से हुआ कि मुझे तो क्या किसी के भी समझ में नहीं आया। अभिषेक ने फिर से गुस्से में अपना आपा खो दिया और दोनों के दूसरे गाल पर भी एक एक थप्पड़ रसीद कर दिए। प्रधानाचार्य महोदय तुरंत अभिषेक के पास पहुँचे और उसे पकड़कर अपनी तरफ घुमाते हुए झंझोड़ते हुए पूछा।
प्रधानाचार्य महोदय- ये क्या कर रहे हो तुम। तुम्हारा दिमाग तो ठीक है न। क्यों मारा इन दोंनो को कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो।
अभिषेक- हाँ सर मैं पागल हो गया हूँ। इन दोनों के फरेब ने मुझे पागल बना दिया है। रिश्तों पर से मेरा विश्वास उठ गया है इन दोनों की वजह से। मेरे सामने से इन दोनों धोखेबाजों को ले जाइये सर। नहीं तो मुझे नहीं पता कि मैं गुस्से में क्या कर दूँ इन दोनों के साथ।
अभिषेक की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी शिवाय 4 लोगों के। मुझे, सुरेश, तनु और पायल। पायल और तनु तो सोच भी नहीं सकती थी कि अभिषेक को ये सब पता चल गया है। लेकिन उन्हें ये समझ में नहीं आ रहा था कि जिस साजिश को उन्होंने बहुत गुपचुप तरीके से अंजाम दिया था उसका पता अभिषेक को कैसे चल गया। प्रधानाचार्य को अभिषेक की बातें बिलकुल समझ में नहीं आई। इसलिए वो अभिषेक से गुस्से में बोले।
प्रधानाचार्य महोदय- ये क्या बकवास कर रहे हो अभिषेक। लगता है कि नयन के धोखे ने तुम्हारे दिमाग को हिला कर रख दिया है इसलिए तुम अनाप सनाप और अनरगल बातें कर रहे हो। अरे यहाँ खड़े सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देखा कि नयन ने क्या किया तनु के साथ। जिसकी गवाह तुम्हारी बहन पायल भी है। ऊपर से नयन ने तनु के चरित्र पर भी उँगली उठाई। उसके बाद भी तुम ऐसी बातें कर रहे हो। मुझे लगता है कि मुझे पुलिस को बुला लेना चाहिए।
अभिषेक- (एकदम लाचार होकर) मैं कोई बकवास नहीं कर रहा हूँ सर। ये सच है कि इस इस वाकये ने मेरा दिमाग हिलाकर रख दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहाँ खड़े सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देखा है वो आधा सच है। आपने वो देखा जो आपको दिखाया गया है। पूरा सच तो कुछ और है। और ये पायल की बात कर रहे हैं ने आप। ये मेरी बहन नहीं है। मेरी दुश्मन है ये बहन इसकी तरह नहीं होती। बहन वो होती है जो अपने भाई के सुख-दुःख में साथ दे, न कि किसी के साथ मिलकर अपने भाई के विरुद्ध साजिश करे। आप पुलिस बुलाना चाहते हैं न। आप पुलिस बुला ही लीजिए सर। आखिर सच्चाई सबको पता चलनी ही चाहिए।
प्रधानाचार्य महोदय- तुम कहना क्या चाहते हो अभिषेक। तुम किस साजिस की बात कर रहे हो। तुम ये कहना चाहते हो कि हम लोगों को जो दिखाया गया है वो सच नहीं हो। तो सच क्या है। और तुम किस पूरे सच की बात कर रहे हो।
अभिषेक- मैं ये कहना चाहता हूँ कि नयन जो कह रहा है वो सत्य है। ये साजिश है नयन को फँसाने की और इस साजिश को अंजाम दिया है तनु और इस पायल ने। पूरा सच इन्हीं से पूछ लीजिए, यही बताएँगी तो ज्यादा अच्छा है।
अभिषेक की बात सुनकर एक बार फिर सबके चेहरे देखने लायक थे। फिर से सभी विद्यार्थियों में खुसर-फुसर शुरू हो गई। तनु और पायल का चेहरा देखने लायक था। अभिषेक की बात सुनकर इस समय मुझे वो खुशी महसूस हो रही थी जिसका मैं वर्णन नहीं कर सकता। अभिषेक को भी पता है सब ये जानकर मेरे चेहरे पर संतुष्टि के भाव आ गए। अपने आपको फँसता देख तनु ने अभिषेक को कंधे को पकड़ते हुए रोनी सूरत बनाकर कहा।
तनु- अभिषेक ये तुम क्या कह रहे हो। सभी ने देखा कि नयन मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा था। तुमने भी देखा। फिर भी तुम नयन के बजाय मुझपर शक कर रहे हो। मैं तुमसे प्यार करती हूँ अभिषेक। मैं तुमसे झूठ क्यों बोलूँगी। मैंने कोई साजिश नहीं की है। तुम्हें जरूर कोई गलतफहमी हुई है।
तनु के इतना बोलते ही अभिषेक तनु पर बरस पड़ा और उसे अपने से दूर धकेलते हुए कहा।
अभिषेक- दूर हट मुझसे। छूना भी मत अपने गंदे हाथों से मुझे। तू झूठ बोल रही है। तू अपनी हवस को प्यार का नाम देकर प्यार जैसे पवित्र रिश्ते को बदनाम न कर। प्यार क्या होता है तुझे क्या पता। मुझे तुमझे घिन आती है कि मैंने तुझसे प्यार किया था। अरे प्यार का न सही तो कम से कम दोस्ती का तो ख्याल किया होता। लेकिन तू इतनी गिर जाएगी ये मैंने सोचा नहीं था और तू नयन की बात मत कर। हमारी दोस्ती इतनी कमजोर नहीं है कि तू अपनी वाहियात मंसूबों और साजिशों से हमारी दोस्ती को तोड़ देगी। हमारी दोस्ती बचपन की है। मैं उसकी नस नस से वाकिफ हूँ। अगर एक बार ईश्वर भी आकर कह दे कि नयन गलत है तब भी मैं उसके विश्वास न करूँ। हमारी दोस्ती विश्वास जैसे मामूली शब्दों से बहुत ऊपर है। समझी। हम दो जिस्म भलें हैं, लेकिन हमारी जान एक दूसरे में बसती है। लेकिन मैं तुम्हें ये सब क्यों बता रहा हूँ जिसे किसी रिश्ते का मतलब ही नहीं पता है।
मुझे अभिषेक की बात सुनकर एक असीम आनंद की प्राप्ति हुई। मेरा सीना गर्व से फूल गया अपनी दोस्ती को लेकर। लेकिन अगले ही पल मुझे निराशा ने घेर लिया। जब मैंने सोचा की मैंने अभिषेक को कितना गलत सोचा। अपनी दोस्ती पर शक किया मैंने। नहीं अभिषेक की बात सुनकर तनु की सारी हवा टाइट हो चुकी थी। उसे एहसास हो गया था कि उसकी साजिश का भंडाभोड़ हो चुका है। फिर भी उसने एक आखिरी कोशिश करते हुए कहा।
तनु- नहीं अभिषेक तुम मेरे ऊपर गलत इलजाम लगा रहे हो। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जैसा तुम समझ रहे हो। सब कुछ इस नयन ने किया है।
ये सुनकर अभिषेक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया उसने गुस्से में तनु की गिरेबान पकड़ते हुए कहा।
अभिषेक- चुप। बिलकुल चुप। अपनी गंदी जुबान से नाम भी मत लेना मेरे दोस्त का। तू इस काबिल नहीं रह गई है कि तू हम दोनों का नाम भी अपनी गंदी जुबान से ले सके। और कितना झूठ बोलोगी तुम हाँ। कितना। तुम्हें सुबूत चाहिए न कि नयन सच कह रहा है या झूठ। तो रुको मैं तुम्हें इसका सुबूत भी दे देता हूँ। सुरेश जरा इधर तो आओ और सभी विद्यार्थियों और सभी शिक्षकों को बताओ जो तुमने सुना। एक एक शब्द बताओ इन्हें। बताओ इन्हें इनकी करतूत।
अभिषेक की बात सुनकर सभी विद्यार्थी और शिक्षक सुरेश की तरफ देखने लगे। सुरेश चलते हुए प्रधानाचार्य महोदय जी के पास गया और उनसे बोला।
सुरेश- हाँ सर जी। अभिषेक भइया बिलकुल सही कह रहें हैं। नयन भइया को फँसाया गया है। मैंने इन दोनों को बात करते हुए सुना था
प्रधानाचार्य महोदय- क्या बात करते हुए सुना था तुमने। पूरी बात बताओ।
सुरेश- वहाँ उस पीपल के पेड़ के पास मैं पेड़ से टेक लगाकर खड़ा प्राकृतिक सौंन्दर्य का आनंद उठा रहा था तो मैंने इन दोनों को बात करते हुए सुना था।
कुछ देर पहले।
तनु- (फोन पर) पायल तुरंत पीपल के पेड़ के पास आओ।
पायल- हाँ बोलो तनु क्या बात है।
तनु- देखो पायल वो उस तरफ गया है। तो यही सबसे अच्छा मौका है कि हमने जो प्लान बनाया है उसको अमल में लाएँ।
पायल- मुझे तो डर लग रहा है तनु। इतने लोंगों के होते हुए कहीं कुछ गड़बड़ हो गई तो भैया तो मेरी जान ही ले लेंगे।
तनु- कुछ नहीं होगा यार तुम्हें। मैंने बहुत सोच समझ कर ये टूर का प्लान किया था। और अभी तक सब मेरे प्लान के मुताबिक हो रहा है। बस ये आखिरी प्रयास भी सफल हो जाए तो हम दोनों का मकसद पूरा हो जाएगा। और तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है। जो कुछ करूँगी मैं करूँगी, बस तुम्हें मेरा साथ देना है। और सबको से ये कहना है कि उसने मेरे साथ जबरदस्ती की है। मैं जा रही हूँ उसके पास।
अभी का समय।
बस यही बात मैंने सुनी। क्योंकि इन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था, इसलिए मुझे समझ में नहीं आया कि ये किसके बारे में बात कर रही हैं। क्योंकि पायल भी इनके साथ थी इसलिए मुझे ये उचित लगा कि अभिषेक भैया को इस बारे में बता दूँ। जब मैं अभिषेक भैया को ये बात बताई तो इनके पीछे आने लगे तभी पायल ने बचाओ बचाओ का शोर मचा दिया। उसके बाद क्या हुआ ये आप सभी के सामने है।
सुरेश की बात सुनकर सभी अवाक रह गए। किसी को विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि तनु जैसी सीधी दिखने वाली लड़की इतनी शातिर हो सकती है और इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकती है। सुरेश की बात सुनकर प्रधानाचार्य महोदय को भी उसकी बातों पर विश्वास करना पड़ा, क्योंकि सुरेश भी अच्छे चाल-चलन का लड़का था। बेवजह उसने आज तक किसी से कोई वाद-विवाद या लड़ाई झगड़ा नहीं किया था। बस अपने काम से काम रखने वाला लड़का था। और सबसे बड़ी बात पढ़ाई के मामले में अव्वल होने के कारण वो शिक्षकों का प्रिय भी था, इसलिए उसकी बात को नजरअदाज भी नहीं किया जा सकता था। इसलिए प्रधानाचार्य महोदय तनु और पायल के पास गए और गरजती आवाज में उनसे कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- ये मैं क्या सुन रहा हूँ। तुम दोनों ने नयन को फँसाने के लिए इतनी बड़ी साजिश की। बताओ। क्या जो सुरेश कह रहा है वो सत्य है।
प्रधानाचार्य महोदय की बातों का दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया। तो प्रधानाचार्य महोदय ने दोबारा पहले की अपेक्षा और भी तेज आवाज में कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- मैंने तुम दोनों से कुछ पूछा है। मैं आखिरी बार पूछ रहा हूँ तुम दोनों से। क्या सुरेश ने जो कुछ भी कहा वो सत्य है। नहीं तो मैं अभी पुलिस को बुलाता हूँ। जब डंडे की मार पड़ेगी तो खुद ही बोलना शुरू कर दोगी।
इतना कहकर प्रधानाचार्य जी ने अपना मोबाइल निकाल लिया और न. मिलाने लगे। उनकी ये धमकी का तनु पर तो नहीं लेकिन पायल पर असर कर गई और वो रोते हुए बोली।
पायल- मुझे माफ कर दीजिए सर मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मै तनु की बातों में आ गई और इस साजिश में उसका साथ दिया। मुझे माफ कर दीजिए सर।
प्रधानाचार्य महोदय- तुमने बहुत गलत किया पायल। तुम्हारे इस कदम से नयन की पूरी जिंदगी बरबाद हो सकती थी। मुझे समझ में नहीं आता कि तुम्हें अपने भाई और अपने मम्मी पापा का ख्याल भी नहीं आया कि उनपर क्या गुजरेगी जब उसे सच्चाई का पता चलेगा। तुम्हारी गलती माफी के काबिल नहीं है पायल। फिर भी अगर माफी माँगना ही है तो जाकर अभिषेक और नयन से माँफी माँगो। हो सकता है वो तुम्हें माँफ कर दें।
प्रधानाचार्य महोदय की बात सुनकर अभिषेक के पास गई और उसके पैर पकड़कर रोते हुए वोली।
पायल- मुझे माफ कर दो भैया मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। मैं तनु के बहकावे में आकर नयन भैया से अपनी नफरत निकालने के लिए इसका साथ दिया। मुझे माफ कर दो भैया।
अभिषेक- नहीं पायल तुमने कोई भूल नहीं की है बल्कि गुनाह किया है। जिसकी कोई माफी नहीं है। तुमसे मुझे ये उम्मीद नहीं थी। तुमने मुझे बहुत ज्यादा दुःख पहुँचाया है। इसके लिए मैं तुम्हें कभी माँफ नहीं करूँगा।
अभिषेक की बात सुनकर पायल रोती हुई मेरे पास आई और मेरे पैरों में गिर कर सिसक सिसक कर रोने लगी। मैंने तुरंत उसे अपने पैरों से उठाया और उसके आँसू पोछते हुए कहा।
मैं- देखो पायल। जो होना था हो गया। अब रोने से क्या मतलब। शांत हो जाओ।
पायल- (जोर जोर से रोते हुए) नहीं भैया मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई गुनाह हो गया मुझसे। मैं आप और भैया के प्यार को समझ ही नहीं पाई कभी। और आप को गलत समझ लिया। उस दिन जो कुछ भी हुआ था। उसने मेरे दिल में आपके लिए नफरत बढ़ा दी थी। उसी नफरत के लचते मैंने तनु का साथ दिया। मुझे माफ कर दो भैया। आज के बाद मैं आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगी। अभिषेक भैया की तरह ही आपको मानूँगी। मुझे माफ कर दो भैया।
मैं- देख पायल मुझे अभी इस विषय में कोई बात नहीं करनी है तुझसे। इसके बारे में बाद में बात करेंगे। अब तू शान्त हो जा और जो कुछ भी हुआ अभी उसे भूल जा।
मेरे इतना करने के बाद पायल का रोना कुछ कम हो गया। फिर प्रधानाचार्य महोदय ने तनु की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- तनु। तुमने तो अपनी शर्म वेंच खाई है। आज तुम्हारी वजह से मैंने नयन की कोई गलती न होते हुए भी उसके ऊपर हाथ उठाया। मुझे तो अपने ऊपर शर्म आ रही है कि तू मेरे दोस्त ही बेटी है। अरे मैंने कितने गर्व से तुझे पूरी कक्षा के सामने तेरा परिचय करवाया था सब से। अभिषेक और नयन को तेरी मदद करने के लिए भी कहा। जिसे उन्होंने इनकार नही किया और तेरी हर संभव मदद की। मैंने तुम सब की दोस्ती के बहुत चर्चे सुने थे, लेकिन तुम दोस्ती के नाम पर कलंक निकली। अगर तुममें थोड़ी सी भी शर्म और इंसानियत बाकी है तो अपनी गलती स्वीकार करो। और माफी माँगो दोनो से। परंतु तुमने जो किया है वो माफी के काबिल भी नहीं है। फिर भी जाकर माफी माँग लो दोनो से।प्रधानाचार्य की बात सुनकर तनु अपनी जगह से चलकर अभिषेक के पास आई और हाथ जोड़कर जैसे बोलने की हुई। अभिषेक गुस्से से बोला।
अभिषेक- कोशिश भी मत करना और उम्मीद भी मत करना मुझसे माफी की। तुमने जो किया है उसके बाद मैं तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहता। चली जाओ मेरे सामने से तुम।
अभिषेक की बात सुनकर तनु मेरे पास आई। और हाथ जोड़कर मुझसे बोली।
तनु- मुझे माफ कर दो नयन।
उसकी बात सुनकर मैंने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
बाईसवाँ भाग
मुझसे बात करने के बाद अभिषेक तनु और पायल के पास चला गया और उनसे बोला।
अभिषेक- तनु और पायल। तुमने तो आज मेरी आँखें खोल दी। आज तु दोनों ने मुझे ये एहसास करवा दिया है कि कौन अपना है और कौन पराया। कौन सच्चा है और कौन झूठा। कौन विश्वास करने के काबिल है और कौन अविश्वास के लायक है।
अभिषेक बात तो तनु और पायल से कर रहा था, परंतु देख मेरी तरफ रहा था और मैं चुपचाप नजरें झुकाए गुनहगार की तरह बिना कोई गुनाह किए आँसू बहा रहा था। अभिषेक के इस बर्ताव के कारण मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि मैं आपना सिर उठाकर किसी का सामना कर सकूँ। तभी वो हो गया जो अभिषेक के बर्ताव को देखते हुए मेरे जेहन में दूर दूर तक नहीं था।
मैंने अपनी नजरें नीचे की हुई थी तो मैंने कुछ देखा ही नहीं, लेकिन तभी दो जोरदार चटाक चटाक की आवाज मेरे कानों में पड़ी। जो थप्पड़ की आवाज थी। मैंने अपनी नजरें उठाकर अभिषेक की तरफ देखा तो उसके चेहरा गुस्से से लाल दिख रहा था तथा तनु और पायल अपने गालों पर हाथ रखे अभिषेक को आँखें फाड़े देख रही थी। सभी विद्यार्थी और शिक्षक भी यह देख और थप्पड़ की आवाज सुनकर आश्चर्यचकित थे कि अभिषेक ने तनु और पायल को थप्पड़ क्यों मारा।
और मैं तो जैसे सदमें में पहुँच गया था। मुझे तो कुछ समझ में भी नहीं आया। ये तब इतनी तेजी से हुआ कि मुझे तो क्या किसी के भी समझ में नहीं आया। अभिषेक ने फिर से गुस्से में अपना आपा खो दिया और दोनों के दूसरे गाल पर भी एक एक थप्पड़ रसीद कर दिए। प्रधानाचार्य महोदय तुरंत अभिषेक के पास पहुँचे और उसे पकड़कर अपनी तरफ घुमाते हुए झंझोड़ते हुए पूछा।
प्रधानाचार्य महोदय- ये क्या कर रहे हो तुम। तुम्हारा दिमाग तो ठीक है न। क्यों मारा इन दोंनो को कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो।
अभिषेक- हाँ सर मैं पागल हो गया हूँ। इन दोनों के फरेब ने मुझे पागल बना दिया है। रिश्तों पर से मेरा विश्वास उठ गया है इन दोनों की वजह से। मेरे सामने से इन दोनों धोखेबाजों को ले जाइये सर। नहीं तो मुझे नहीं पता कि मैं गुस्से में क्या कर दूँ इन दोनों के साथ।
अभिषेक की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी शिवाय 4 लोगों के। मुझे, सुरेश, तनु और पायल। पायल और तनु तो सोच भी नहीं सकती थी कि अभिषेक को ये सब पता चल गया है। लेकिन उन्हें ये समझ में नहीं आ रहा था कि जिस साजिश को उन्होंने बहुत गुपचुप तरीके से अंजाम दिया था उसका पता अभिषेक को कैसे चल गया। प्रधानाचार्य को अभिषेक की बातें बिलकुल समझ में नहीं आई। इसलिए वो अभिषेक से गुस्से में बोले।
प्रधानाचार्य महोदय- ये क्या बकवास कर रहे हो अभिषेक। लगता है कि नयन के धोखे ने तुम्हारे दिमाग को हिला कर रख दिया है इसलिए तुम अनाप सनाप और अनरगल बातें कर रहे हो। अरे यहाँ खड़े सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देखा कि नयन ने क्या किया तनु के साथ। जिसकी गवाह तुम्हारी बहन पायल भी है। ऊपर से नयन ने तनु के चरित्र पर भी उँगली उठाई। उसके बाद भी तुम ऐसी बातें कर रहे हो। मुझे लगता है कि मुझे पुलिस को बुला लेना चाहिए।
अभिषेक- (एकदम लाचार होकर) मैं कोई बकवास नहीं कर रहा हूँ सर। ये सच है कि इस इस वाकये ने मेरा दिमाग हिलाकर रख दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहाँ खड़े सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देखा है वो आधा सच है। आपने वो देखा जो आपको दिखाया गया है। पूरा सच तो कुछ और है। और ये पायल की बात कर रहे हैं ने आप। ये मेरी बहन नहीं है। मेरी दुश्मन है ये बहन इसकी तरह नहीं होती। बहन वो होती है जो अपने भाई के सुख-दुःख में साथ दे, न कि किसी के साथ मिलकर अपने भाई के विरुद्ध साजिश करे। आप पुलिस बुलाना चाहते हैं न। आप पुलिस बुला ही लीजिए सर। आखिर सच्चाई सबको पता चलनी ही चाहिए।
प्रधानाचार्य महोदय- तुम कहना क्या चाहते हो अभिषेक। तुम किस साजिस की बात कर रहे हो। तुम ये कहना चाहते हो कि हम लोगों को जो दिखाया गया है वो सच नहीं हो। तो सच क्या है। और तुम किस पूरे सच की बात कर रहे हो।
अभिषेक- मैं ये कहना चाहता हूँ कि नयन जो कह रहा है वो सत्य है। ये साजिश है नयन को फँसाने की और इस साजिश को अंजाम दिया है तनु और इस पायल ने। पूरा सच इन्हीं से पूछ लीजिए, यही बताएँगी तो ज्यादा अच्छा है।
अभिषेक की बात सुनकर एक बार फिर सबके चेहरे देखने लायक थे। फिर से सभी विद्यार्थियों में खुसर-फुसर शुरू हो गई। तनु और पायल का चेहरा देखने लायक था। अभिषेक की बात सुनकर इस समय मुझे वो खुशी महसूस हो रही थी जिसका मैं वर्णन नहीं कर सकता। अभिषेक को भी पता है सब ये जानकर मेरे चेहरे पर संतुष्टि के भाव आ गए। अपने आपको फँसता देख तनु ने अभिषेक को कंधे को पकड़ते हुए रोनी सूरत बनाकर कहा।
तनु- अभिषेक ये तुम क्या कह रहे हो। सभी ने देखा कि नयन मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा था। तुमने भी देखा। फिर भी तुम नयन के बजाय मुझपर शक कर रहे हो। मैं तुमसे प्यार करती हूँ अभिषेक। मैं तुमसे झूठ क्यों बोलूँगी। मैंने कोई साजिश नहीं की है। तुम्हें जरूर कोई गलतफहमी हुई है।
तनु के इतना बोलते ही अभिषेक तनु पर बरस पड़ा और उसे अपने से दूर धकेलते हुए कहा।
अभिषेक- दूर हट मुझसे। छूना भी मत अपने गंदे हाथों से मुझे। तू झूठ बोल रही है। तू अपनी हवस को प्यार का नाम देकर प्यार जैसे पवित्र रिश्ते को बदनाम न कर। प्यार क्या होता है तुझे क्या पता। मुझे तुमझे घिन आती है कि मैंने तुझसे प्यार किया था। अरे प्यार का न सही तो कम से कम दोस्ती का तो ख्याल किया होता। लेकिन तू इतनी गिर जाएगी ये मैंने सोचा नहीं था और तू नयन की बात मत कर। हमारी दोस्ती इतनी कमजोर नहीं है कि तू अपनी वाहियात मंसूबों और साजिशों से हमारी दोस्ती को तोड़ देगी। हमारी दोस्ती बचपन की है। मैं उसकी नस नस से वाकिफ हूँ। अगर एक बार ईश्वर भी आकर कह दे कि नयन गलत है तब भी मैं उसके विश्वास न करूँ। हमारी दोस्ती विश्वास जैसे मामूली शब्दों से बहुत ऊपर है। समझी। हम दो जिस्म भलें हैं, लेकिन हमारी जान एक दूसरे में बसती है। लेकिन मैं तुम्हें ये सब क्यों बता रहा हूँ जिसे किसी रिश्ते का मतलब ही नहीं पता है।
मुझे अभिषेक की बात सुनकर एक असीम आनंद की प्राप्ति हुई। मेरा सीना गर्व से फूल गया अपनी दोस्ती को लेकर। लेकिन अगले ही पल मुझे निराशा ने घेर लिया। जब मैंने सोचा की मैंने अभिषेक को कितना गलत सोचा। अपनी दोस्ती पर शक किया मैंने। नहीं अभिषेक की बात सुनकर तनु की सारी हवा टाइट हो चुकी थी। उसे एहसास हो गया था कि उसकी साजिश का भंडाभोड़ हो चुका है। फिर भी उसने एक आखिरी कोशिश करते हुए कहा।
तनु- नहीं अभिषेक तुम मेरे ऊपर गलत इलजाम लगा रहे हो। मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जैसा तुम समझ रहे हो। सब कुछ इस नयन ने किया है।
ये सुनकर अभिषेक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया उसने गुस्से में तनु की गिरेबान पकड़ते हुए कहा।
अभिषेक- चुप। बिलकुल चुप। अपनी गंदी जुबान से नाम भी मत लेना मेरे दोस्त का। तू इस काबिल नहीं रह गई है कि तू हम दोनों का नाम भी अपनी गंदी जुबान से ले सके। और कितना झूठ बोलोगी तुम हाँ। कितना। तुम्हें सुबूत चाहिए न कि नयन सच कह रहा है या झूठ। तो रुको मैं तुम्हें इसका सुबूत भी दे देता हूँ। सुरेश जरा इधर तो आओ और सभी विद्यार्थियों और सभी शिक्षकों को बताओ जो तुमने सुना। एक एक शब्द बताओ इन्हें। बताओ इन्हें इनकी करतूत।
अभिषेक की बात सुनकर सभी विद्यार्थी और शिक्षक सुरेश की तरफ देखने लगे। सुरेश चलते हुए प्रधानाचार्य महोदय जी के पास गया और उनसे बोला।
सुरेश- हाँ सर जी। अभिषेक भइया बिलकुल सही कह रहें हैं। नयन भइया को फँसाया गया है। मैंने इन दोनों को बात करते हुए सुना था
प्रधानाचार्य महोदय- क्या बात करते हुए सुना था तुमने। पूरी बात बताओ।
सुरेश- वहाँ उस पीपल के पेड़ के पास मैं पेड़ से टेक लगाकर खड़ा प्राकृतिक सौंन्दर्य का आनंद उठा रहा था तो मैंने इन दोनों को बात करते हुए सुना था।
कुछ देर पहले।
तनु- (फोन पर) पायल तुरंत पीपल के पेड़ के पास आओ।
पायल- हाँ बोलो तनु क्या बात है।
तनु- देखो पायल वो उस तरफ गया है। तो यही सबसे अच्छा मौका है कि हमने जो प्लान बनाया है उसको अमल में लाएँ।
पायल- मुझे तो डर लग रहा है तनु। इतने लोंगों के होते हुए कहीं कुछ गड़बड़ हो गई तो भैया तो मेरी जान ही ले लेंगे।
तनु- कुछ नहीं होगा यार तुम्हें। मैंने बहुत सोच समझ कर ये टूर का प्लान किया था। और अभी तक सब मेरे प्लान के मुताबिक हो रहा है। बस ये आखिरी प्रयास भी सफल हो जाए तो हम दोनों का मकसद पूरा हो जाएगा। और तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है। जो कुछ करूँगी मैं करूँगी, बस तुम्हें मेरा साथ देना है। और सबको से ये कहना है कि उसने मेरे साथ जबरदस्ती की है। मैं जा रही हूँ उसके पास।
अभी का समय।
बस यही बात मैंने सुनी। क्योंकि इन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था, इसलिए मुझे समझ में नहीं आया कि ये किसके बारे में बात कर रही हैं। क्योंकि पायल भी इनके साथ थी इसलिए मुझे ये उचित लगा कि अभिषेक भैया को इस बारे में बता दूँ। जब मैं अभिषेक भैया को ये बात बताई तो इनके पीछे आने लगे तभी पायल ने बचाओ बचाओ का शोर मचा दिया। उसके बाद क्या हुआ ये आप सभी के सामने है।
सुरेश की बात सुनकर सभी अवाक रह गए। किसी को विश्वास करना मुश्किल हो रहा था कि तनु जैसी सीधी दिखने वाली लड़की इतनी शातिर हो सकती है और इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकती है। सुरेश की बात सुनकर प्रधानाचार्य महोदय को भी उसकी बातों पर विश्वास करना पड़ा, क्योंकि सुरेश भी अच्छे चाल-चलन का लड़का था। बेवजह उसने आज तक किसी से कोई वाद-विवाद या लड़ाई झगड़ा नहीं किया था। बस अपने काम से काम रखने वाला लड़का था। और सबसे बड़ी बात पढ़ाई के मामले में अव्वल होने के कारण वो शिक्षकों का प्रिय भी था, इसलिए उसकी बात को नजरअदाज भी नहीं किया जा सकता था। इसलिए प्रधानाचार्य महोदय तनु और पायल के पास गए और गरजती आवाज में उनसे कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- ये मैं क्या सुन रहा हूँ। तुम दोनों ने नयन को फँसाने के लिए इतनी बड़ी साजिश की। बताओ। क्या जो सुरेश कह रहा है वो सत्य है।
प्रधानाचार्य महोदय की बातों का दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया। तो प्रधानाचार्य महोदय ने दोबारा पहले की अपेक्षा और भी तेज आवाज में कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- मैंने तुम दोनों से कुछ पूछा है। मैं आखिरी बार पूछ रहा हूँ तुम दोनों से। क्या सुरेश ने जो कुछ भी कहा वो सत्य है। नहीं तो मैं अभी पुलिस को बुलाता हूँ। जब डंडे की मार पड़ेगी तो खुद ही बोलना शुरू कर दोगी।
इतना कहकर प्रधानाचार्य जी ने अपना मोबाइल निकाल लिया और न. मिलाने लगे। उनकी ये धमकी का तनु पर तो नहीं लेकिन पायल पर असर कर गई और वो रोते हुए बोली।
पायल- मुझे माफ कर दीजिए सर मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मै तनु की बातों में आ गई और इस साजिश में उसका साथ दिया। मुझे माफ कर दीजिए सर।
प्रधानाचार्य महोदय- तुमने बहुत गलत किया पायल। तुम्हारे इस कदम से नयन की पूरी जिंदगी बरबाद हो सकती थी। मुझे समझ में नहीं आता कि तुम्हें अपने भाई और अपने मम्मी पापा का ख्याल भी नहीं आया कि उनपर क्या गुजरेगी जब उसे सच्चाई का पता चलेगा। तुम्हारी गलती माफी के काबिल नहीं है पायल। फिर भी अगर माफी माँगना ही है तो जाकर अभिषेक और नयन से माँफी माँगो। हो सकता है वो तुम्हें माँफ कर दें।
प्रधानाचार्य महोदय की बात सुनकर अभिषेक के पास गई और उसके पैर पकड़कर रोते हुए वोली।
पायल- मुझे माफ कर दो भैया मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई। मैं तनु के बहकावे में आकर नयन भैया से अपनी नफरत निकालने के लिए इसका साथ दिया। मुझे माफ कर दो भैया।
अभिषेक- नहीं पायल तुमने कोई भूल नहीं की है बल्कि गुनाह किया है। जिसकी कोई माफी नहीं है। तुमसे मुझे ये उम्मीद नहीं थी। तुमने मुझे बहुत ज्यादा दुःख पहुँचाया है। इसके लिए मैं तुम्हें कभी माँफ नहीं करूँगा।
अभिषेक की बात सुनकर पायल रोती हुई मेरे पास आई और मेरे पैरों में गिर कर सिसक सिसक कर रोने लगी। मैंने तुरंत उसे अपने पैरों से उठाया और उसके आँसू पोछते हुए कहा।
मैं- देखो पायल। जो होना था हो गया। अब रोने से क्या मतलब। शांत हो जाओ।
पायल- (जोर जोर से रोते हुए) नहीं भैया मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई गुनाह हो गया मुझसे। मैं आप और भैया के प्यार को समझ ही नहीं पाई कभी। और आप को गलत समझ लिया। उस दिन जो कुछ भी हुआ था। उसने मेरे दिल में आपके लिए नफरत बढ़ा दी थी। उसी नफरत के लचते मैंने तनु का साथ दिया। मुझे माफ कर दो भैया। आज के बाद मैं आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगी। अभिषेक भैया की तरह ही आपको मानूँगी। मुझे माफ कर दो भैया।
मैं- देख पायल मुझे अभी इस विषय में कोई बात नहीं करनी है तुझसे। इसके बारे में बाद में बात करेंगे। अब तू शान्त हो जा और जो कुछ भी हुआ अभी उसे भूल जा।
मेरे इतना करने के बाद पायल का रोना कुछ कम हो गया। फिर प्रधानाचार्य महोदय ने तनु की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- तनु। तुमने तो अपनी शर्म वेंच खाई है। आज तुम्हारी वजह से मैंने नयन की कोई गलती न होते हुए भी उसके ऊपर हाथ उठाया। मुझे तो अपने ऊपर शर्म आ रही है कि तू मेरे दोस्त ही बेटी है। अरे मैंने कितने गर्व से तुझे पूरी कक्षा के सामने तेरा परिचय करवाया था सब से। अभिषेक और नयन को तेरी मदद करने के लिए भी कहा। जिसे उन्होंने इनकार नही किया और तेरी हर संभव मदद की। मैंने तुम सब की दोस्ती के बहुत चर्चे सुने थे, लेकिन तुम दोस्ती के नाम पर कलंक निकली। अगर तुममें थोड़ी सी भी शर्म और इंसानियत बाकी है तो अपनी गलती स्वीकार करो। और माफी माँगो दोनो से। परंतु तुमने जो किया है वो माफी के काबिल भी नहीं है। फिर भी जाकर माफी माँग लो दोनो से।प्रधानाचार्य की बात सुनकर तनु अपनी जगह से चलकर अभिषेक के पास आई और हाथ जोड़कर जैसे बोलने की हुई। अभिषेक गुस्से से बोला।
अभिषेक- कोशिश भी मत करना और उम्मीद भी मत करना मुझसे माफी की। तुमने जो किया है उसके बाद मैं तुम्हारी शक्ल भी नहीं देखना चाहता। चली जाओ मेरे सामने से तुम।
अभिषेक की बात सुनकर तनु मेरे पास आई। और हाथ जोड़कर मुझसे बोली।
तनु- मुझे माफ कर दो नयन।
उसकी बात सुनकर मैंने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।