मेरे ख्याल से दोनों सही है, मैंने दोनों को सुना है लेकिन अलग अलग प्रसंग में,...
हबड़ दबड़ जा के बुला के ले आओ या हबड़ दबड़ का काम अच्छी नहीं होता.
और,
क्या हबड़ हबड़ खा रहे हो,...
जैसा मैंने पहले ही कहा था, गाँव गाँव पे पानी बदले और चार गाँव में बानी,...
और इनका, लोकोक्तियों का, लोकगीतों का रीत रिवाजों का प्रयोग मैं ग्रामीण आंचलिक परीवेश की पृष्ठभूमि को, और अधिक रेखांकित करने के लिए करती हूँ. और भाषा भी पात्रानुकूल ही करने का प्रयास करती हूँ,... और समय चरित्र की स्थिति के अनुसार,
जैसे मोहे रंग में सुहागरात, मिलन यामिनी की पहली रात के अलग अलग पोस्टों में एक मधुर गीत की कड़ियाँ शीर्षक के तौर पे प्रयुक्त की हैं,
रात पिया के संग जागी रे सखी ( पृष्ठ ३ -४ )
चैन पड़ा जो अंग लागी रे सखी ( पृष्ठ ४ )
गजरा सुहाना टूटा , ( पृष्ठ ४ )
आज सुहाग की रात , सुरज जिन उगिहौं ( एक प्रसिद्ध लोकगीत-सुहाग का - पृष्ठ ७ )
बीती विभावरी जाग रे ( जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध कविता - पृष्ठ ७ )
तो बस,... ऐसे लिखने में मुझे लिखने का भी मजा आता है और रससिद्ध पढ़नेवालों को पढ़ने का भी,... इरोटिका या श्रृंगार के साहित्य का प्रयोजन ही उद्दीपन करना है,...
न तो मुझे लिखना आता है न मैं भाषाविद हूँ, बस आप सब का स्नेह आर्शीवाद है