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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

komaalrani

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ११३ हल्दी-चुमावन की रस्म पृष्ठ ११७०

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भाग ३१


इन्सेस्ट कथा उर्फ़ किस्सा भैया और बहिनी का ( अरविन्द -गीता )



रात बाकी बात बाकी




और जब वो तीसरी बार झड़ी तो साथ में उसका भाई भी, ... लेकिन उसे लगा कहीं उसका भाई कुछ डर के सोच के बाहर न निकाल ले झड़ने के पहले,... उसने खुद कस के पानी बाहों में पकड़ के उसे अपनी ओर खींचा, अपनी टांगो को कस के भाई के कमर पर बाँध लिया , उसके अंदर भैया का सिकुड़ , फ़ैल रहा था ,... और फिर जब फव्वारा छूटना शुरू हुआ तो बड़ी देर तक,... कटोरी भर से ज्यादा रबड़ी मलाई, और उसकी प्रेम गली से निकल के ,... बाहर उसकी जाँघों पे ,... लेकिन उसका उठने का मन नहीं कर रहा था और उसने कस के अपने भाई को अपनी बाँहों में बाँध रखा था

बाहर बारिश रुक गयी थी, लेकिन अभी भी घर की छत की ओरी से, पेड़ों की पत्तियों से पानी की बड़ी बड़ी बूंदे चू रहीं थीं

टप टप टप



आधे घंटे के बाद बांहपाश से दोनों अलग हुए और एक दूसरे को देख के कस कर मुस्कराये फिर छोटी बहिनिया लजा गयी और अपना सर भाई के सीने में छुपा लिया।

आधे पौन घंटे के बाद मन तो भैया का भी कर और छुटकी बहिनिया का भी लेकिन पहल कौन करे?

पहल बहन ने ही की,



उसे लगने लगा की कहीं भैया को ये न लग रहा हो की उनसे कुछ गलत हो गया या उन्होंने छुटकी को चोट लगा दी ये सोच के उन्हें बुरा लग रहा हो , दर्द तो उसे अभी भी बहुत हो रहा था, जाँघे फटी पड़ रही थीं, ' वहां' भी रुक रुक के चिलख उठ रही थी,... पैर उठाने या फ़ैलाने का वो सोच भी नहीं सकती थी , और भैया का था भी कितना लम्बा मोटा,... काला नाग,... जो भैया के मोबाइल में वो देखती थी, उससे भी जबरदस्त,...
लेकिन, उससे रहा नहीं गया, उसने डरते डरते उसे छू लिया,... सो रहा था,...भैया का ' वो ' अभी डरने की कोई बात नहीं थी,...
और पहले वही बोली, ' उसे' हलके से छूते हुए उसने भैया को चिढ़ाया,...

" भैया, सो रहा है , थक गया लगता है ,... "

अब भैया के भी बोल खुले , वो कैसे चुप रहता,... छेड़ते हुए उसके गाल पे एक खूब मीठी वाली चुम्मी ली और बहन से बोला,... "

" तो जगा दे न, ... काहें डर रही है छूने से ,.. "

और बहना क्यों भैया से पीछे रहती, बस पहले छुआ, और अभी तो सो रहा था, तो मुट्ठी में ले भी लिया और पकड़ के हलके से दबा भी दिया।
कित्ता अच्छा लग रहा था छूने में,... पर थोड़ी देर में ही वो चौंक गयी, ' वो ' तो जगने लगा था, फूलने लगा था,... उसके मुंह से निकल गया,...



" भैय्या,... "

" अरे पगली घबड़ा क्यों रही है , वो ख़ुशी से फूल रहा है की इत्ती प्यारी से गुड़िया ने उसे हाथ में ले लिया है , ... अभी इत्ता बोल रही थी , अब डर रही है न , डरपोक " भैया ने उसे चिढ़ाया ,...


और अब उसने और कस के न सिर्फ दबोच लिया , बल्कि भैया जैसे उसकी ब्रा पकड़ के इसे सहलाते थे , .... उस समय भी उस का मन करता था , एक बार बस पकड़ ले , मुट्ठी में ले ले ,... तो बस , अब उसी तरह से वो सहला रही थी , मुठिया रही थी,...


थोड़ी ही देर में वो खूब कड़ा हो हो गया,...वो जान रही थी जाग गया तो वो उसकी फिर ऐसी की तैसी करेगा , करेगा तो कर दे , ... और साथ साथ अपन छोटे छोटे जुबना भी अपने भैया के सीने पे रगड़ रही थी , और आग को हवा दे रही थी,...



भैया अब कैसे चुप रहता , उसके भी हाथ चालू हो गए , और जो छोटे छोटे उभार उसकी नींद उड़ाते थे, थोड़ी देर पहले ही सपने में आ के तंग कर रहे थे , बस सके दोनों हाथों में लड्डू और कस के मसलने रगड़ने लगा , उसके होंठ बहना के होंठ चूमने लगे,...



बाहर बीच बीच में से चांदनी बादलों का घूंघट उठा उठा के भैया बहिन की मस्ती देख रही थी, खिड़की पूरी खुली थी , तूफ़ान के बाद ठंडी ठंडी हवा आ रही थी,... और गीता भी चांदनी में नहाये अपने भाई अरविन्द के बदन को निहार रही थी, एकटक।

और अबकी बहना के होंठ भी चुम्मी का जवाब दे रहे थे, जब भैया की जीभ उसके मुंह में घुसती तो उसकी जीभ भी कबड्डी खेलती, ..

और सबसे मज़ा आ रहा था, उसे भैया के,... नहीं नहीं अब तो ये खिलौना उसका था,.... कित्ते दिन से उसकी सहेलियां ललचाती थीं,
मेरे जीजू का इत्ता लम्बा है, मेरे कज़िन का इत्ता मोटा है, जब घुसता है तो जान निकाल लेता है, गितवा स्साली एक बार ले के देख अंदर,...

और अब तो उसके पास, वो सब साली कमीनी देख लेंगी तो चूत और गाँड़ दोनों फट जाएंगी, ... लम्बा मोटा तो है कितना कड़ा भी है

और प्यारा भी, हाथ में पड्कने में कित्ता अच्छा लग रहा है,

मन तो उसका तभी ललचा गया था जब उसके जुबना को निहारते भैया के शार्ट में खूंटे की तरह तना था,



लेकिन जो छेद भैया ने बाथरूम में उसे देखने के लिए किया था, ... उससे असली फायदा तो उसी का होगया,... और छेद बड़ा तो गितवा ने ही किया था की बाथरूम का हर कोना साफ़ साफ़ दिख जाए, आवाज भी सुनाई दे,... और जो पहली बार उसने भैया का हथियार देखा,
कलेजा मुंह को आ गया,



इत्ता,... इत्ता बड़ा,... कैसे फनफनाया हुआ था ,... और उसे अपने जुबना पे अभिमान भी हुआ की भैया की तो उसके कच्चे टिकोरों ने ही की,...

पर दोनों जाँघों के बीच कितनी लिस लिस हुयी थी, सहेली उसकी फुदक रही थी, बजाय डरने के,



और आज छू के पकड़ के इत्ता मजा आ रहा था ,... हाँ अब वो खूब मोटा हो गया था, उसकी मुट्ठी में ठीक से पकड़ में नहीं आ रहा था, पर,... कभी ऊँगली सी फूले फूले लीची से सुपाड़े को बस हलके से छू लेती, तो कभी मूसल के बेस पे नाख़ून से शरारत से खरोंच लेती और भैया गिनगीना जाता,...

लेकिन उसका सारा बदला भैया उन कच्ची अमियो पे उतार रहा था कभी प्यार से चूसते चूसते कस के कुतर देता तो कभी हलके हलके सहलाते सहलाते, पूरी ताकत से रगड़ देता और मसल देता,



गरमा दोनों गए थे,...

और भैया ने पूछ लिया,
Mast
 

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भैया का धंस गया,..पूरा अंदर








जो मज़ा सगी छोटी बहन के जोबन लूटने में आ रहा था , उसका कोई जवाब नहीं था,...



अरविन्द मन ही मन मुस्करा रहा था,

जिस मोटे, उसके बित्ते से बड़े तूफानी लंड को घोंटने में चार बच्चों की माँ, पक्की भोसड़े वालियां भी पनाह मांग जाती थीं, चीखती चिल्लाती थीं, रोती कराहती थीं,





आज उसकी सगी छोटी बहन ने उसे कसम धरायी थी की उसे पूरा घोंटना है, ... मन तो उसका भी यही कर रहा था [पहली बार चोदते समय भी , बल्कि जब उसकी कच्ची चूत को सोच सोच के वो उसकी छोटी छोटी २८ नंबर की ब्रा में मुट्ठ मारता था तो भी अरविन्द यही सोचता था की उसका पूरा लंड उसकी बहन की कच्ची कोरी चूत में जड़ तक धंसा है,... वो जानता था,... बहुत परपरायेगा, .... फट के हाथ में आ जायेगी उसकी,पर


आज उसने खुद कसम धरा दी और और किसकी, खुद उसकी , ... उसकी छोटी बहन की,... कितना भी कडुवा तेल वो पिलाये, उसकी कच्ची बुर को,... पर जब वो खुद चाहती है ,... और दो चार बार बच्चेदानी पर सुपाड़े का धक्का लगा, जड़ तक,... लंड के बेस से उसने बहिन की क्लिट को रगड़ दिया तो वो खुद ,

बस दोनों २८ नंबर के छोटे छोटे जोबन को पकड़ के उसने करारा धक्का मार दिया, उसके कमर के जोर के आगे तो,.. और आज उसके धक्के रुक नहीं रहे थे , न बहिनिया की चीख,...




उईईई , ओह्ह्ह्हह्ह नहीं , लगता है, आह उफ्फ्फ्फ़ जान गयी,...

और थोड़ी देर में मस्ती में मजे में बहन ने चूतड़ पटकने शुरू कर दिए , कुछ देर के बाद धक्के फिर से चालू हो गए और अबकी जबरदस्त , पूरी ताकत से लंड अब एकदम अंदर तक,... और थोड़ी देर में जड़ तक बहन झड़ने के कगार पर थी पर वो रुका नहीं, एक बार उसने फिर से धीरे धीरे पूरा लंड बाहर निकाला और पूरे ताकत से वो धक्का मारा जैसे उसने झिल्ली फाड़ने के लिए मारा है , और सुपाड़ा सीधे बच्चेदानी पर,... वो जबरदस्त ठोकर, बहना का कोर कोर हिल गया,....




और वो झड़ने लगी ,... वो काँप रही थी, हवा में उड़ रही थी, नदी में जैसे गोते खा रही , लहरे उसे किनारे पर लाती , लेकिन फिर लहरे वापस बीच मझधार में ले जाती ,...कुछ सोचने समझने की हालत में है थी बस मज़ा,... और मज़ा



भाई थोड़ी देर रुका लेकिन अबकी उसने उसके झड़ने से रुकने का इंतज़ार नहीं किया , लेकिन धक्के हलके हलके थे, वो आलमोस्ट उसके ऊपर लेटा , धक्के मारता , साथ में चुम्मी लेता , हाथ बहन को दोनों फैली रेशमी जाँघों को सहलाता , और जब जड़ तक वो अदंर घुस जाता तो बस उसके बेस से बहना की क्लिट को हलके हलके ,...


अब वो भी साथ साथ मजे ले रही थी हर धक्के के साथ अपने छोटे छोटे चूतड़ भी उठाती, भैया को अपनी बांहो में भींच लेती ,..धक्के कभी तेज हो रहे थे तो कभी रुक रुक के ,... पर अब हर धक्के के साथ उसे एक नए मज़े का अहसास हो रहा था और थोड़ी देर में वो फिर हवा में उड़ रही थी , गुलाबो कभी फैलती तो कभी सिकुड़ती, भैया के मोटू को वो कस कस के भींच रही थी , जैसे अब जिंदगी भर नहीं छोड़ेगी ,...




पर अब भैया रुक गया था,... बस उसके मस्ती से भरे चेहरे को देख रहा था , कभी झुक के चूम लेता तो कभी टकटकी लगा के बस देखता जैसे पहली बार देख रहा हो , जैसे गौने की रात दूल्हा दुल्हन के चेहरे को देखता था ,...



पर कुछ देर बाद फिर धक्के चालू हो गए और अबकी शुरू से ही पूरी रफ़्तार से ,

खटिया के पाए जोर जोर से चुरुर चुरुर बोल रहे थे ,... अब वो भी कगार पर था,... और थोड़ी देर बाद भाई बहन साथ साथ ,...


वो देर तक झड़ता रहा , वो भी साथ साथ झड़ती रही,... उसने अपने को भैया के हवाले कर दिया था , गाढ़ी रबड़ी मलाई उसकी दोनों जाँघों पर छलक के बह रही थी ,... पर उसे परवाह नहीं थी ,... वो दोनों उसी तरह , वो उसके अंदर धंसा , उसकी बाहें भैया को कस के दबोचे , ..





बारिश रुक गयी थी, पर बादलों ने एक बार फिर से चांदनी की मुश्कें कस ली थीं, ... हवा खूब ठंड चल रही थी

अबकी तो पहली बार से भी ज्यादा दर्द हुआ था, देह एकदम दर्द से चूर, जाँघे फटी पड़ रही थीं,.... और चूत के अंदर तो जैसे किसी ने लोहे का मोटा रॉड ठेल दिया हो, भभा रहा था, जैसे मोटे मोटे छाले पड़ गए हों अंदर, अंदर की चमड़ी छिल गयी हो,.... जोर से छरछरा रहा था, लेकिन भैया ने जो कटोरी भर सफ़ेद मलहम अपने इंजेक्शन से छोड़ा था अब धीरे धीरे उसका असर हो रहा था, अंदर का दर्द कुछ कम हो रहा था, पर जरा सा हिलते हुए भी जाँघों के बीच जोर की चिलख उठती थी.



कुछ देर में ही भैया ने खींच के उसे साइड में,

अब वो दोनों साइड में लेटे थे, एक दूसरे की बाँहों में कस के भींचे,...

अरविन्द का मोटा खूंटा दो बार की चुदाई बहन की चूत से सरक के बाहर हो गया था और थोड़ा थका, सुस्ताया आधा सोया,आधा जगा, उसकी छुटकी बहन की जाँघों के बीच दबा, पड़ा था. गीता के छोटे छोटे जोबन अब अरविन्द भैया की चौड़ी छाती में दबे थे. गीता ने कस के अपनी बाँहों में भैया को दबोच रखा था और भाई ने भी उसे अपनी बाँहों में, ... उसकी एक टांग गीता की टांगो के ऊपर,.... अब सिर्फ चुपचाप दोनों लेटे थे, ... हाँ गीता कभी कभी हलके भाई के गाल को चूम लेती थी और उसके भाई अरविंद की उँगलियाँ उसकी गोरी चिकनी नंगी पीठ पे टहल रहीं थी और कभी कभी नितम्बो पे भी,... और छोटे छोटे वस्त्रहीन नितम्बों पे भाई की उँगलियों का स्पर्श,....

गीता बस सिहर उठती, अपना मुंह उसकी चौड़ी छाती में छिपा लेती,

जमीन पर बिखरे दोनों के कपड़ों की तरह शरम भी अब कहीं फर्श पर बिखरी थी, खुली खिड़की से ठंडी ठंडी हवा आ रही थी, थोड़े बहुत बादल कभी चाँद को घेर कर अँधेरा कर देते तो कभी चांदनी उन्हें बिखरा के गीता और उसके भाई अरविन्द की काम क्रीड़ा देखने कमरे में घुस के पसर जाती।
Bahut mast 💦💦💦💦💦💦🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥
 

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भैया बहिनी




जमीन पर बिखरे दोनों के कपड़ों की तरह शरम भी अब कहीं फर्श पर बिखरी थी, खुली खिड़की से ठंडी ठंडी हवा आ रही थी, थोड़े बहुत बादल कभी चाँद को घेर कर अँधेरा कर देते तो कभी चांदनी उन्हें बिखरा के गीता और उसके भाई अरविन्द की काम क्रीड़ा देखने कमरे में घुस के पसर जाती।


बात गीता ने ही शुरू की, ... बिन बोले, कभी छोटे छोटे चुम्मी से तो कभी अपनी उँगलियों से भाई अरविन्द के चौड़े सीने पे कुछ लिख के,... और फिर फुसफुसाहटों में, ...

" भैया तेरा मन बहुत दिन से कर रहा था न "



हाँ "

बहुत हलके से बोला अरविन्द लेकिन कस के अपने चौड़े सीने से बहन के छोटे छोटे जोबन को दबा देकर और जोर से बहन की बात में हामी भरी। बहन ज्यादा बोल्ड थी, वो खुल के बोली,...

" भैया, मेरा मन भी बहुत दिन से कर रहा था,... तेरे साथ करवाने को,... तेरा मन कर रहा था तो किया कयों नहीं ?"

" अब करूँगा अपनी बहना से प्यार रोज करूंगा, बिना नागा, दिन रात,... " और अरविन्द ने कस के अपनी बहन को चूम लिया





और जैसे उसके इरादे की हामी भरते, उसका खूंटा भी अब खड़ा होने लगा था।

गीता ने भी अपने सगे भाई को कस के चूम लिया,... और उसका एक हाथ खींच के अपने उत्तेजना से पथराये जोबन पे रख दिया , मन तो उसका यही कर रहा था, भैया कस के दबाएं मसलें कुचले,... मीज मीज के इसे, ... और जैसे बिन उसके बोले भैया ने इरादा समझ लिया और अब वो कस कस के अपनी छोटी बहन की चूँचियाँ मसल रगड़ रहे थे,

गीता और कस के भैया से चिपक गयी, बस मन कर रहा था ये रात कभी ख़तम न हो। अपनी देह वो भैया की देह से रगड़ने लगी, मन तो उसका बस यही मन कर रहा था की भैया कस के पेल दें, लेकिन उनकी बाहों से वो अलग भी नहीं होना चाहती थी, और अब चांदनी पूरी तरह दोनों की देह को नहला रही थी , गीता खुल के सब देख रही थी,


बात गीता के मन की ही हुयी , वो भले ही अनाड़ी थी पर भैया उसका पूरा खिलाडी था,

हाँ भाई बहन के रिश्ते के नाते कुछ बहन की कच्ची कोरी उमर के नाते लेकिन अब दो बार कस कस के चोद लेने के बाद, ...


खूंटा अब पूरा खड़ा हो चुका था,, उसने साइड में लेटे लेटे ही,...



साइड में बहन की जाँघों को पूरा फैलाया, एक हाथ से पकड़ के अपनी टांग के ऊपर, अब खूंटा सीधे बिल के पास, ... एक हाथ में तेल लेके एक बार फिर से कस के अपने लंड को मुठियाते हुए उसे तेल से चुपड़ दिया,... दो बार की हचक की चुदाई के बाद चूत का मुंह थोड़ा खुल गया था पर फिर भी एक हाथ की ऊँगली से दोनों फांको को फैला के , सुपाड़ा सटा दिया,...




और बस एक करारा धक्का और आधे से ज्यादा मोटा सुपाड़ा बहन की बुर के अंदर,... और बहन की बुर ने उसे भींच लिया कस के .

दो बार की मलाई और कडुआ तेल से गीता की बुर चप चप कर रही थी।




इसलिए सुपाड़े को घुसने में उत्ती दिक्क्त नहीं हुयी, दो तीन धक्के और पूरा सुपाड़ा अंदर पैबस्त हो गया, गीता की बिल में लेकिन एक बार फिर से तेजी से दर्द की लहर उठी और वो उसे पी गयी लेकिन उसे इसका इलाज मालूम था और उसने अपने होंठ भैया के होंठों पे रख दिए , अरविन्द को और इशारा करने की जरूरत नहीं थी , जीभ की नोक से उसने बहिना के रसीले गुलाबी होंठों को खोल दिया और अपनी जीभ बहन के मुंह में पूरी अंदर तक घुसेड़ दिया।




यही स्वाद तो हर बहन चाहती ,है नीचे वाले मुंह में भैया का खूंटा धंसा हो और ऊपर वाले मुंह में भैया की जीभ। अरविन्द ने अपने होंठों से उसके होंठों को एकदम सील करदिया था , कभी बहन के होंठों को चूस चूस के उसका रस लूटता तो कभी हलके से दांत गड़ा देता,

बेचारी गीता सिसक भी नहीं पाती पर इसी बेबसी के लिए तो हर बहन तरसती है, और वो चाहती भी यही थी की भैया के जीभ का रस उसे मुंह के अंदर मिले।


उसे कस के दबोच के उसके भाई अरविंद ने चार खूब करारे धक्के लगाए , अब तो बहन चाह के भी चीख नहीं सकती थी , लंड आधे से ज्यादा घुस गया, और उसने धक्का लगाना रोक दिया , एक हाथ कस के बहन के जोबन का रस ले रहा था तो दूसरा क्लिट की हाल चाल,

गीता गरमा रही थी, और वो समझ गयी थी उसे क्या करना है , भैया क्या चाहता है उससे,



वो भी भाई को कस के पकडे थी, और गाँव की लड़की ताकत में किसी से कम नहीं , बस कस के उसने भी भाई पर अपनी बाँहों की पकड़ बढ़ाई और कस के धक्का मारा, पहली बार तो कुछ नहीं हुआ लेकिन दो चार धक्के के बाद लंड इंच इंच कर के उसकी बुर में सरक सरक के अंदर जाने लगा,... बुर उसकी दर्द से फटी जा रही थी लेकिन पहली बार वो खुद धक्के मार मार के इस बदमाश मोटू को घोंट रही थी।

लेकिन आठ दस धक्के के बाद उसकी कमर थकने लगी,...

कुछ देर दोनों रुके रहे पर अब भाई ने नंबर लगाया लेकिन बजाय अंदर पेलने के वो धीरे धीरे सरका के बाहर निकाल रहा था , गीता से नहीं रहा गया,... और अब एक बार उसने धक्को की जिम्मेदारी सम्हाल लिया और जितना बाहर निकला था वो एक बार फिर से अंदर,...


बारिश तेज हो गयी थी , और हवा का रुख बदल गया था।




खुली खिड़की से तेज बौछार अब पलंग पे आ रही थी और दोनों भाई बहन भीग रहे थे, लेकिन जोश में कोई कमी नहीं थी। जैसे बारिश में भी सहेलियां , ननद भौजाई , सावन में भीगते हुए भी झूले का मजा लेती रहती हैं, ... उसी तरह दोनों बारी बारी से झूले की पेंग की तरह धक्के लगा रहे थे, जल्दी किसी को नहीं थी , भाई दो बार बहन की बुर में झड़ चुका था वैसे भी वो लम्बी रेस का घोडा था , बीस पच्चीस मिनट के पहले और अबकी तो तीसरा राउंड था,...

और बहन भी अब दर्द की दरिया पार कर सिर्फ खुल के मजे ले रही थी और समझ रही थी की नयी नयी आयी भौजाइयों को क्यों रात होते ही नींद आने लगती है , जम्हाई भरने लगती हैं पिया के पास जाने को।

आठ दस मिनट के बाद ही अबकी पूरा मोटू गीता के अंदर घुसा , लेकिन एक बार जैसे ही बच्चेदानी पे धक्का लगा , गीता कापने लगी, झड़ने लगी , पर भाई अबकी रुका नहीं , दोनों हाथों से उसने कस के बहन की चूँची पकड़ के , पहले तो कुछ देर तक मसला और जैसे ही बहन का कांपना रुका , एकदम तूफानी धक्के ,...



हर धक्का सीधे बच्चेदानी पे , आलमोस्ट पूरा लंड बाहर और फिर रगड़ते दरेरते चूत फाड़ते पूरी ताकत से बहन की बच्चेदानी पे जबरदस्त चोट मारता और बहन काँप जाती, कुछ दर्द से लेकिन ज्यादा मजे से,... दस पंद्रह मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद जब गीता झड़ी तो साथ साथ उसका भाई अरविन्द भी उसकी चूत में


दोनों थोड़ी देर में ही नींद में गोते लगा रहा थे, देस दुनिया से बेखबर। भाई बहन तीन बार के मिलन के बाद खूब गहरी नींद,..


भैया तेरा मन बहुत दिन से कर रहा था न "

हाँ "

" भैया, मेरा मन भी बहुत दिन से कर रहा था,... तेरे साथ करवाने को,... तेरा मन कर रहा था तो किया कयों नहीं ?"

" अब करूँगा अपनी बहना से प्यार रोज करूंगा, बिना नागा, दिन रात,... " और अरविन्द ने कस के अपनी बहन को चूम लिया

Tooo hot 🔥🔥🔥🔥🔥🔥
 

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Please read page 444 of JKG and share your views, ....it's taken from the JKG, when i posted it in English. but has its own flavor and focus.

 

komaalrani

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भैया तेरा मन बहुत दिन से कर रहा था न "

हाँ "

" भैया, मेरा मन भी बहुत दिन से कर रहा था,... तेरे साथ करवाने को,... तेरा मन कर रहा था तो किया कयों नहीं ?"

" अब करूँगा अपनी बहना से प्यार रोज करूंगा, बिना नागा, दिन रात,... " और अरविन्द ने कस के अपनी बहन को चूम लिया

Tooo hot 🔥🔥🔥🔥🔥🔥
Thanks so much
 

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Aap sharahna ke kabil bhi ho komal story vakei bahot habardast he
bahoot bahoot thanks, ek writer ke munh se aisi shabd sunana, i am really thankful ki aap time nikal ke ye story padh rahi hain aur aapko acchi lag rahi hai
 

komaalrani

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अति कामुक अपडेट

“”और वो करेगा तो घर के कोल्हू में पेरा कडुवा तेल लगा के””

घर के कोल्हू में पेरा हुआ तेल इस्तेमाल कर के , घर का बेटा घर की बेटी और अपनी सगी बहन को रात के अंधेरे में कली से खिला हुआ फूल बनाएगा

समझदार बहन चोदते हैं……… waaah
mujhe laga ki ek popular mineal water ke add ko istemaal karke heading banaayi jaaye aur istemaal kiya jaaye , thanks apako pasand aaya
 
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