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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

komaalrani

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फागुन के दिन चार भाग ५१ - पृष्ठ ४९१

२६ नवम्बर २००८ - जुबेदा - सी एसटी

अपडेट पोस्ट हो गया है, और यह अपडेट कुछ अलग है, और इससे ज्यादा कहना शायद बहुत सी स्मृतियों के साथ अन्याय होगा।
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komaalrani

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चुन्नू को चुना..
भौजाइयों ने ताना-बाना बुना...
बेला की कच्ची जवानी..
तरसे चुन्नू का गाढ़ा पानी..
क्या बात है जबरदस्त लाइने

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komaalrani

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लगता है कि इतने दिन का कोर-कसर कमल दिन-रात लग कर निकालेगा....
एकदम सही कहा आपने

और सिर्फ कमल ही क्यों रेनू को भी अहसास होगा क्या मिस किया उसने इसलिए वो भी पूरा साथ देगी, घर में भी बाहर।
 

komaalrani

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सही कहा .. खाका तो पूरा खींच दिया..
बस अब रंग भरना बाकी है...
देवर तैयार है अपनी कूंची और सफ़ेद रंग का डिब्बा लिए
 

komaalrani

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इस ललिया ने रेनुआ के प्राइम टाइम का कबाड़ा कर दिया...
लेकिन अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं....
जब जागो तभी सबेरा और रेनू अभी तो इंटर में गयी ही है इसलिए इतना देर नहीं हुयी हाँ प्राइम टाइम की बात आपकी एकदम सही है, उसी के साथ की नीलू और लीला सेंचुरी लगा रही हैं और वो अभी डेब्यू कर रही है।
 

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उफ्फ .. दोनों एक दूसरे से अंजान...
आँखों पे पट्टी...
और एक निहुरी हुई....
लेकिन ये तो बस पल दो पल की बात है...
और जब पट्टी हटेगी...
तो भाई-बहन एक दूसरे की आँखों में झांकते हुए खुशी का इजहार...
और उसके बाद तो...
एकदम, ननदें तो गर्मायी हुईं है, और जानती हैं की सीधे से नहीं तो जबरदस्ती भौजाइयां उन्हें उनके सगे भाइयों के खूंटे पर बैठा के रहेंगी।

दूसरी बात, कब्बडी में हारने के बाद तो अब उन्हें साल भार भौजाइयों की सब बातें माननी ही होंगी चाहे भौजाइयां उन्हें उनके भाइयों के खूंटे पर बैठाएं या अपने भाइयों के खूंटे पर,

और आखिरी बात कल होलिका माई ने आशीर्वाद दिया था और चुनौती भी और ये बात भी की पूरे बाइस पुरवा के ननद भौजाइयों के लिए ये बात है, ...सारी ननदें वहां थीं और जो नहीं थी उन तक भी बात पहुँच ही गयी थी,... ननदों को भौजाइयों की बात मानने का हुकुम था,... और जो ननद जरा भी खूंटे से घबड़ायेगी, चाहे वो किसी का भी हो,... भौजाई के कहने पर भी, ... तो उसे जिंदगी भर केंचुआ छाप भी नहीं मिलेगा,... और सब लड़कियां औरतें जानती थीं, होलिका माई के बात का असर,... एक बार किसी ने ऐसे ही होलिका माई की बात को टाल दिया, ऐसा दुर्भिक्ष पड़ा,... जानवर, चिरिया, चुंगुर,... सब की हालत खराब एक बूँद पानी नहीं आसमान ने दिया, धरती नाराज, ऐसी जाँघे सिकोड़ ली, कितना ताकत लगा लो, हल की फाल इंच भर न घुसे, उपजाऊ जमीन एकदम पत्थर,... घर का गहना गुरिया सब बिक गया,

तो अब नंदों की छोड़िये, उनके घर की माँ दादी भी उनके पीछे पड़ के

और फिर होलिका माई के भभूत का असर भी अभी जबरदस्त था सबके नीचे होलिका की आग लगी थी,...

लेकिन परेशानी तो भाइयों की थी, बहनों की कच्ची अमिया देख के सब गरमाये, मौका देख के कभी कपडा बदलते तांक झांक करते, लेकिन दूसरे के सामने हिचक झिझक, इसलिए देवरों के ही आँखों पर पट्टी बाँधी गयी थी और एक बार जब मज़ा मिल जाएगा, जब उन्हें पता चल जाएगा की सबको पता चल ही गया और उससे भी बड़ी बात हमाम में सिर्फ वो ही नंगे नहीं,... सारे भाई अपनी अपनी बहनों पर चढ़े हैं तो वो भी खुल के मजा लेंगे

और जो लड्डू उन्होएँ खाया था उसमे पड़ी जड़ी बूटी का भी असर,...
 

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कमल की तो खुशी का ठिकाना न होगा...
अभी तो कच्ची कली का अरमान...
बहन के भोगने से पूरा होगा...
जो इतने दिन तक बची रही... वो गली अब उसकी हो गई...
एकदम सही कहा आपने

ललिया ने जो भाई बहन के बीच में अम्बुजा सीमेंट की बनी फेविकॉल के जोड़ से जुडी दीवार खड़ी कर दी थी, जिसे खली भी नहीं तोड़ सकते थे

वो आज भौजाई के जुगाड़ से और होलिका माई के आसीर्बाद से टूट गयी,...

इसीलिए इस पार्ट में रेनू और कमल के बीच में ज्यादा बातचीत नहीं है, ... लेकिन एक बार जब रेनू ने दर्द बरदास्त कर लिया, पहली बारिश की बूँद का रस ले लिया, ... तो आगे से

रेनू और कमल की कहानी आगे भी आएगी अगले कई पार्ट में

लेकिन इतनी ननदें इतने देवर, और सब कुछ साथ साथ पैरेलेल में चल रहा था तो साथ बेला और चुन्नू का भी प्रसंग,...
 

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ओह्ह्ह... एक हीं दिन में दोनों छेद...
आगे कोई चिकनाई लगी या नहीं... ये तो पता नहीं...
लेकिन पीछे वाला तो बिना चिकनाई के...
बहुत मुश्किल होगा और रेनुआ तो लगता है कि एक बार फिर कहीं हदस न जाए....
अगले पार्ट का इन्तजार कीजिये पिछले छेद के लिए।
 

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भौजाई और निलुआ से ट्रेंड देवर...
अब तो बेला के बेल का मामला बिना तेल के फिट हो गया..
और यहाँ भी बेला ही ज्यादा जोश में थी, बिना हिचक
इसलिए कहते हैं लड़कियां ज्यादा तेजी से जवान होती हैं और अगर पानी का एक छींटा भी पड़ गया तो सावन की तरह हरियाली छा जाती है
 

komaalrani

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कबड्डी की तरह यहाँ भी भाभियाँ....
देवरों को जोश दिला रही हैं....
लेकिन वहाँ मैदान से बाहर वाली भाभियाँ थीं...
यहाँ मैदान के अंदर...
बेला की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी..
आखिर चुन्नू को उकसा कर और दर्द सहकर भी...
सिसकते हुए घोंट हीं लिया दुबारा...
सारी ननदें हिम्मती हैं बस थोड़ी बहुत झिझक लाज तो वो कब्बडी और कबड्डी के बाद हुयी मस्ती में एकदम खुल गयी थी ननद और भौजाइयों के बीच
 

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कोई दया.. माया नहीं...
केवल चुदाई...
एकदम सही कहा आपने

सिर्फ चिड़िया की आँख
 
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