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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

komaalrani

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ११३ हल्दी-चुमावन की रस्म पृष्ठ ११७०

अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट अवश्य करें
 
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motaalund

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Are hina rani jese ful ka bhi kuchh kar dete. Bechari ko dikha dikha aur puchh puchh ke gad gadate rahe. Par pichhvade ka varanan jabardast laga. Kya erotic shararat thi. Amezing. Ese hi log thode komalji ke deewane he.

Screenshot-20240206-004051 IMG-20240206-004038
चंदा जैसी सदाव्रत वाली का इससे कम होना भी नहीं चाहिए था...
 

motaalund

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पृष्ठ ११८० ( जोरू का गुलाम ) पर आरुषि जी उकृष्ट चित्रमयी काव्य कथा पति -पत्नी और मिंत्र

इसके बारे में कुछ भी कहना सूर्य को दीपक दिखाना होगा , पहली चार लाइनों से ही आने वाली स्थिति का अंदाज लग जाता है


मेरा एक परम मित्र है जो ऑफिस में है मेरा सहकर्मी
आजकल अपनी बीवी की नहीं बुझा पता है वो गर्मी
पिछले कुछ महीनों से उनमें हो रही थी खूब लड़ायी
ज्योति की योनि छूते ही मुरली बहा देता था मलाई


बस पृष्ठ ११८० पर जाएँ पढ़ें और पढ़ कर कैसा लगा जरूर बताएं।


https://exforum.live/threads/जोरू-का-गुलाम-उर्फ़-जे-के-जी.12614/page-1180
द्वंद और कामना का समावेश...
 

motaalund

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फागुन के दिन चार
Holi-2-cc8e18274398c90d7cae9fd6ccd9707e.jpg


फागुन अभी लगा नहीं , लेकिन दस्तक दे रहा है , और मुझे लगा यही सही समय है फागुन के दिन चार को पोस्ट करने का।

लिंक भी दे रही हूँ और थोड़ा इस कहानी के बारे में
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" फागुन के दिन चार " मेरी लम्बी कहानी बल्कि यूँ कहें की उपन्यास है। इसका काल क्रम २१ वी शताब्दी के शुरू के दशक हैं, दूसरे दशक की शुरुआत लेकिन फ्लैश बैक में यह कहानी २१ वीं सदी के पहले के दशक में भी जाती है.

कहानी की लोकेशन, बनारस और पूर्वी उत्तरप्रदेश से जुडी है, बड़ोदा ( वड़ोदरा ) और बॉम्बे ( मुंबई ) तक फैली है और कुछ हिस्सों में देश के बाहर भी आस पास चली आती है। मेरा मानना है की कहानी और उसके पात्र किसी शून्य में नहीं होने चाहिए, वह जहां रहते हैं, जिस काल क्रम में रहते हैं, उनकी जो अपनी आयु होती है वो उनके नजरिये को , बोलने को प्रभावित करती है और वो बात एक भले ही हम सेक्सुअल फैंटेसी ही लिख रहे हों उसका ध्यान रखने की कम से कम कोशिश करनी चाहिए।

लेकिन इसके साथ ही कहानी को कुछ सार्वभौम सत्य, समस्याओं से भी दो चार होना पड़ता है और होना चाहिए।

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कहानी फागुन में शुरू होती है और फागुन हो, बनारस हो फगुनाहट भी होगी, होली बिफोर होली भी होगी।

लेकिन होली के साथ एक रक्तरंजित होली की आशंका भी क्षितिज पर है और यह कहानी उन दोनों के बीच चलती है इसलिए इसमें इरोटिका भी है और थ्रिलर भी जीवन की जीवंतता भी और जीवन के साथ जुडी मृत्यु की आशंका भी। इरोटिका का मतलब मेरे लिए सिर्फ देह का संबंध ही नहीं है , वह तो परिणति है। नैनों की भाषा, छेड़छाड़, मनुहार, सजनी का साजन पर अधिकार, सब कुछ उसी ' इरोटिका ' या श्रृंगार रस का अंग है। इसलिए मैं यह कहानी इरोटिका श्रेणी में मैं रख रही हूँ .

और इस कहानी में लोकगीत भी हैं, फ़िल्मी गाने भी हैं, कवितायें भी है

पर जीवन के उस राग रंग रस को बचाये रखने के लिए लड़ाई भी लड़नी होती है जो अक्सर हमें पता नहीं होती और उस लड़ाई का थ्रिलर के रूप में अंश भी है इस कहानी में।


तो यह थ्रेड इन्तजार कर रहा है आपके साथ का, प्यार का दुलार का आशीष का दुआओं का

कुछ नजारा मिल जाए इसलिए इस थ्रेड के शुरू करने के साथ मैंने आने वालो भागों की कुछ झलकियां भी शेयर की है

और इस भाग में तीन प्रंसग है, बनारस की शाम, सुबहे बनारस और बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी कसम,

तो पधारे इस थ्रेड पर आशीष दें, और इन झलकियों पर भी अपना मंतव्य रखे

प्रतीक्षारत

https://exforum.live/threads/फागुन-के-दिन-चार.126857/
Going down to the memory lane.
 

komaalrani

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१५, लाख व्यूज के लिए

सभी पाठक मित्रों का आभार धन्यवाद

Thanks Thank You GIF by Lumi
Peter Pan Thank You GIF
 

komaalrani

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मिशन पठानटोले वालियां...
और शमा तो निश्चित हीं रोमांचक और मनपसंद होगा (पठानटोले वालियों के लिए) साथ में रीडर्स भी अपनी कल्पना के घोड़े दौड़ाएंगे...
मिशन पठानटोले वालियां...
और शमा तो निश्चित हीं रोमांचक और मनपसंद होगा (पठानटोले वालियों के लिए) साथ में रीडर्स भी अपनी कल्पना के घोड़े दौड़ाएंगे...
घोड़ों की बात आपने एकदम सही कही

जब पठान टोली वालियों पर घोड़े दौड़ेंगे,...

कम से कम पांच छ पोस्ट्स तो लगेंगी ही और चीख पुकार भी खूब मचेगी। आखिर सब की तो कुँवारी कोरी कलिया हैं और हैं भी दो दर्जन से ऊपर

शबनम, तमन्ना, शमा, आयशा, मुमताज, जीनत
 

komaalrani

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अब तंबू-कनात एक तरफ और हवा पानी की शुरुआत...
खास करके गाढ़े पानी की....
अब तम्बू कनात का सवाल ही नहीं सब कुछ एकदम खुले में

खोल कर, गन्ने का खेत, अरहर का खेत, नदी का किनारा, बगिया में

अहा ग्राम्य जीवन भी क्या है, ऐसी सुविधा और कहाँ है।
 
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komaalrani

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पर्दा उठते हीं सबको सलाम करते हैं...
लेकिन सारी मदद केवल भौजाइयों से हीं.

खुद के वश में कुछ नहीं...
कुछ तो चंट छोकरे होंगे... जो लाग लपेट के...
भौजाइयां तो देवर को गौने की रात में देवरानी तक पहुंचाती भर हैं, आगे का कार्यक्रम तो देवर ही करता है।

बस इसी तरह आज भौजाइयों ने मिल के हिना का पर्दा खोला ( पर्दा फाड़ा तो कमल ने ही ) उसे नए मजे का अहसास कराया, फिर सुगना भौजी और गुलबिया मिल के एक दो को और,

उसके बाद तो बाईसपुरवा के लौंडो को भी अंदाजा लग जाएगा की फसल पक कर कट कर तैयार हो रही है, पेड़ में फल पकने लगे हैं बस

कुछ समझा बुझा के, कुछ मना पटा के,... और जो नहीं समझेंगी, मानेंगी उन्हें

मुमताज, जीनत, तमन्ना, शमा सब का नंबर लगेगा।

और हिना तो अब बाईसपुरवा वालों की ही हो गयी , कैसे ये अगले पार्ट में पता चलेगा।

Hijab-Girl-16c2b3347f4d03a1c90d074276cf55e6.jpg
 

komaalrani

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कुछ नजारे तो देवर-भौजाई के होली में भी होंगे...
एकदम होंगे और हाल खुलासा बयान होगा
 
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