भाई साहब के कैरेक्टर का भी थोड़ा वर्णन...
और भाभी तो भाभी कम दोस्त ज्यादा थी...
छेड़-छाड़ और मस्ती में हीं देवर को ट्रेंड करने की शुरुआत करते रहती हैं...
पुरुष पात्रों में मुझे ज्यादा महारत हासिल नहीं है
दूसरे ढेर सारे कैरेक्टर्स आने से जो मुख्य कैरेक्टर्स है उनकी आभा धूमिल पड़ने लगती है जैसे फिल्मों में समूह गान में हीरोइन के कपडे का रंग बाकी डांसर से अलग होता है वो सबसे आगे रहती है।
भाई साहब के बारे में इतना तो लिखा ही ही की वो गुरु गंभीर थे, काम से काम रखते थे, ज्यादा बात नहीं करते थे और उमर का अंदर ज्यादा था, ... इसलिए और,... हाँ भाभी के बारे में वो दोस्त कहिये सहेली कहिये, जो बिना कहे बात समझ जाए, जिससे जो बात घर में किसी से न कही जा सकती हो वो कही जा सके,... और मजाक छेड़छाड़ तो है लेकिन एक लाइन भी है, भाभी छेड़ भी लेगी, चिढ़ा भी लेगी लेकिन देवर जवाब नहीं दे सकता।